Category: National

  • राष्ट्रपति मुर्मू का सिलीगुड़ी कार्यक्रम विवाद: बंगाल सरकार पर गृह मंत्रालय ने रिपोर्ट तलब की, आदिवासी समुदाय की उपेक्षा का आरोप

    राष्ट्रपति मुर्मू का सिलीगुड़ी कार्यक्रम विवाद: बंगाल सरकार पर गृह मंत्रालय ने रिपोर्ट तलब की, आदिवासी समुदाय की उपेक्षा का आरोप


    नई दिल्ली । राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कार्यक्रम स्थल परिवर्तन को लेकर पश्चिम बंगाल में विवाद तेज हो गया है। केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने बंगाल के मुख्य सचिव से इस घटना की रिपोर्ट तलब की है और निर्देश दिए हैं कि इसे आज शाम 5 बजे तक गृह मंत्रालय को भेजा जाए। 7 मार्च को होने वाले 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल कॉन्फ्रेंस में राष्ट्रपति को आमंत्रित किया गया था।
    मूल रूप से यह कार्यक्रम सिलीगुड़ी के बिधाननगर में होना तय था, लेकिन सुरक्षा और लॉजिस्टिक कारणों का हवाला देते हुए इसे बागडोगरा एयरपोर्ट के पास गोपालपुर में शिफ्ट कर दिया गया। राष्ट्रपति मुर्मू ने इस बदलाव पर नाराजगी जताई और कहा कि उन्हें लगता है कि बंगाल सरकार आदिवासियों का भला नहीं चाहती। नॉर्थ बंगाल दौरे के दौरान न तो मुख्यमंत्री और न ही कोई मंत्री उनका स्वागत करने आए।

    राष्ट्रपति ने कहा, ममता बनर्जी मेरी छोटी बहन जैसी हैं।

    मैं भी बंगाल की बेटी हूं। अगर कार्यक्रम बिधाननगर में होता तो बेहतर होता। वहां अधिक जगह थी और ज्यादा लोग कार्यक्रम में शामिल हो सकते थे।” उन्होंने बताया कि गोशाईपुर में जगह छोटी होने के कारण कई लोग कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके। कार्यक्रम स्थल पर पहुँचने पर केवल सिलीगुड़ी के मेयर गौतम देब ही उनका स्वागत करने मौजूद थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस विवाद पर कहा कि राष्ट्रपति का पद पॉलिटिक्स से ऊपर है और इसकी गरिमा हमेशा बनी रहनी चाहिए। वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि पश्चिम बंगाल पर टिप्पणी करने से पहले राष्ट्रपति को BJP शासित राज्यों की स्थिति भी देखनी चाहिए।
    राष्ट्रपति ने अपने भाषण में संथाल युवाओं से भाषा, परंपरा और शिक्षा को बचाने की अपील की और स्वतंत्रता संग्राम में संथाल समुदाय के योगदान को याद दिलाया। उन्होंने पंडित रघुनाथ मुर्मू द्वारा 1925 में बनाई गई ओल चिकी लिपि का स्मरण किया और आदिवासी युवाओं को शिक्षा, कौशल विकास और सांस्कृतिक संरक्षण पर ध्यान देने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि संथाल समुदाय ने सदियों से लोक संगीत, नृत्य और परंपराओं को सुरक्षित रखा है और आने वाली पीढ़ियों को शिक्षा और संस्कृति के संतुलन पर ध्यान देना चाहिए।

    राष्ट्रपति कार्यक्रम स्थल विवाद ने प्रशासन और राजनीतिक स्तर पर हलचल मचा दी है। गृह मंत्रालय ने बंगाल सरकार से रिपोर्ट तलब कर जांच शुरू कर दी है, वहीं आदिवासी समुदाय और देशभर में लोग इस मुद्दे पर संवेदनशील प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

  • महिला दिवस पर चर्चा: किरण चोपड़ा ने कहा, फिल्मों और मीडिया से महिलाओं पर पड़ रहा गलत प्रभाव

    महिला दिवस पर चर्चा: किरण चोपड़ा ने कहा, फिल्मों और मीडिया से महिलाओं पर पड़ रहा गलत प्रभाव

    नई दिल्ली। महिला दिवस के मौके पर दिल्ली के Vigyan Bhawan में दो दिवसीय राष्ट्रीय महिला विचारक सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में महिलाओं के उत्थान, समाज में उनकी भूमिका और उनके सशक्तिकरण पर गहन चर्चा की गई।

    कार्यक्रम के दूसरे दिन मंच पर सात वक्ताओं ने भाग लिया और अपने अनुभवों को साझा करते हुए महिलाओं की स्थिति पर अपने विचार रखे। इस दिन की थीम थी ‘प्रकृति और संस्कृति’, जिसमें सिनेमा और मीडिया द्वारा महिलाओं की छवि पर पड़ने वाले सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव पर चर्चा हुई। पैनल में दंगल, एनिमल, कबीर सिंह और मिर्जापुर जैसी फिल्मों का जिक्र किया गया, जिनमें महिलाओं को वस्तु की तरह दिखाया गया और खुले तौर पर नशे को बढ़ावा देने वाले दृश्य शामिल थे।

    इस विषय पर अपनी बात रखते हुए पत्रकार और विचारक Kiran Chopra ने कहा कि सिनेमा और ओटीटी प्लेटफॉर्म दर्शकों पर बहुत बड़ा प्रभाव डालते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि दंगल फिल्म में पहलवानी सीखती लड़की को दिखाया गया, जिससे लोगों को प्रेरणा मिली और बेटियों को आगे बढ़ाने की सोच उत्पन्न हुई। वहीं दूसरी ओर ऐसी फिल्में भी आईं, जिनमें शराब का गिलास सिर पर रखकर डांस किया गया और इसके बाद यह ट्रेंड सोशल मीडिया और घरों तक फैल गया।

    किरण चोपड़ा ने स्पष्ट किया कि महिलाओं को मीडिया और सिनेमा में वस्तु की तरह दिखाया जाना गलत है। उन्होंने कहा कि महिलाएं भावनात्मक रूप से संवेदनशील होती हैं और कभी-कभी अपने कदम उठाने में हिचकिचाती हैं, लेकिन उन्हें अपनी शक्तियों का एहसास होना चाहिए। महिला जब अपने भीतर की क्षमता को पहचान लेगी तब समाज में सकारात्मक बदलाव संभव है।

    सम्मेलन में संगीत नाटक अकादमी की अध्यक्ष Sandhya Purecha ने भी महिलाओं के सशक्तिकरण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय सौंदर्यशास्त्र और वेद-पुराणों में स्त्री को शक्ति का रूप माना गया है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में घरेलू हिंसा के मामले बढ़ रहे हैं, जबकि हमारे पुराणों में यह अपराध माना गया है। उन्होंने अतीत की शिक्षाओं से सीख लेकर महिलाओं के प्रति सम्मान और सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

    सम्मेलन में यह भी स्पष्ट किया गया कि महिला सशक्तिकरण केवल शिक्षा और रोजगार तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें समाज में सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भर बनने के अवसर देना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इस आयोजन ने सिनेमा और मीडिया में महिलाओं की छवि सुधारने की दिशा में एक चेतावनी और सुझाव के रूप में काम किया।

  • केंद्र सरकार के मंत्रालयों में नौकरी का मौका SSC CGL 2025 में 15130 पदों पर भर्ती प्रिफरेंस विंडो मार्च में खुलेगी

    नई दिल्ली:सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं के लिए बड़ी खबर सामने आई है। कर्मचारी चयन आयोग ने संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा SSC CGL 2025 के लिए फाइनल वैकेंसी चार्ट जारी कर दिया है। इस भर्ती प्रक्रिया के तहत कुल 15130 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। यह संख्या पिछले कुछ वर्षों की तुलना में काफी अच्छी मानी जा रही है और इससे बड़ी संख्या में युवाओं को केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में काम करने का अवसर मिलेगा।

    कर्मचारी चयन आयोग की ओर से जारी जानकारी के अनुसार इन पदों पर चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति केंद्र सरकार के कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों विभागों और संगठनों में की जाएगी। SSC CGL परीक्षा के माध्यम से ग्रुप B और ग्रुप C के पदों पर भर्ती की जाती है। इस भर्ती के जरिए आयकर विभाग केंद्रीय उत्पाद शुल्क विभाग प्रवर्तन निदेशालय विदेश मंत्रालय और सीबीआई जैसे प्रतिष्ठित विभागों में काम करने का मौका मिलता है।

    आयोग द्वारा जारी वैकेंसी चार्ट के अनुसार कुल 15130 पदों को अलग अलग श्रेणियों में बांटा गया है। इसमें सबसे ज्यादा 6464 पद अनारक्षित यानी जनरल श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए रखे गए हैं। इसके अलावा अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 3834 पद निर्धारित किए गए हैं। अनुसूचित जाति के लिए 2223 पद और अनुसूचित जनजाति के लिए 1134 पद तय किए गए हैं। वहीं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए 1475 सीटें आरक्षित की गई हैं।

    इस वैकेंसी चार्ट के जारी होने के बाद अब उम्मीदवारों को अपनी पसंद के पद और विभाग चुनने का अवसर मिलेगा। कर्मचारी चयन आयोग ने स्पष्ट किया है कि उम्मीदवारों के लिए ऑप्शन कम प्रिफरेंस विंडो मार्च 2026 में खोली जाएगी। इसी विंडो के माध्यम से उम्मीदवार अपनी पसंद के पदों और विभागों को प्राथमिकता के आधार पर चुन सकेंगे।

    उम्मीदवारों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आयोग ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर SSC CGL भर्ती से संबंधित सैंपल फॉर्म भी जारी किया है। इस सैंपल फॉर्म की मदद से अभ्यर्थी यह समझ सकते हैं कि ऑनलाइन फॉर्म किस प्रकार भरना है और किस तरह अपनी प्राथमिकताओं को दर्ज करना है। इससे फॉर्म भरते समय होने वाली सामान्य गलतियों से बचा जा सकता है।

    कर्मचारी चयन आयोग ने उम्मीदवारों को विशेष सावधानी बरतने की भी सलाह दी है। आयोग के अनुसार एक बार ऑप्शन कम प्रिफरेंस फॉर्म को अंतिम रूप से सबमिट करने के बाद उसमें किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं किया जा सकेगा। इसलिए उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे अपनी शैक्षणिक योग्यता और पदों के लिए निर्धारित शारीरिक मानकों की पहले से जांच कर लें और उसी के आधार पर अपनी प्राथमिकताएं तय करें।

    आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि दस्तावेज सत्यापन के दौरान कोई उम्मीदवार किसी पद के लिए निर्धारित योग्यता पूरी नहीं करता पाया जाता है तो उसकी उम्मीदवारी तुरंत रद्द कर दी जाएगी। इसलिए उम्मीदवारों को पूरी सावधानी के साथ फॉर्म भरना चाहिए और आयोग के सभी दिशा निर्देशों का पालन करना चाहिए।

    SSC CGL 2025 की यह भर्ती लाखों स्नातक युवाओं के लिए बड़ा अवसर लेकर आई है। केंद्र सरकार के प्रतिष्ठित मंत्रालयों और विभागों में नौकरी पाने का सपना देखने वाले उम्मीदवारों के लिए यह एक महत्वपूर्ण मौका साबित हो सकता है। भर्ती से जुड़ी सभी ताजा जानकारी कर्मचारी चयन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट ssc.gov.in पर उपलब्ध रहेगी जहां उम्मीदवार समय समय पर अपडेट देख सकते हैं।

  • ईरान युद्ध से भारतीय मार्केट भी प्रभावित…., मंगलोर रिफाइनरी को करना पड़ रहा बंद

    ईरान युद्ध से भारतीय मार्केट भी प्रभावित…., मंगलोर रिफाइनरी को करना पड़ रहा बंद


    तेहरान।
    ईरान और अमेरिका-इजराइल (Iran and the US-Israel War) के बीच छिड़ी जंग ने भारतीय मार्केट (Indian Market) को भी प्रभावित किया है। शेयर बाजार से लेकर तेल कारोबार तक में हलचल है। मीडिया में तो ये खबरें भी चल रही थीं कि मंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (एमआरपीएल) (Mangalore Refinery and Petrochemicals Limited (MRPL) की रिफाइनरी को बंद किया जा रहा है। अब सोशल मीडिया पर चल रही उन खबरों का कंपनी ने आधिकारिक तौर पर खंडन किया है।


    क्या कहा कंपनी ने?

    कंपनी ने स्पष्ट किया है कि कच्चे तेल की कमी की अटकलों के बावजूद उसका संचालन पूरी तरह से सुचारू रूप से जारी है। सरकारी नियंत्रण वाली इस रिफाइनरी ने शनिवार को ऑयलप्राइस डॉट कॉम द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट किए जाने के बाद औपचारिक स्पष्टीकरण जारी किया। वायरल पोस्ट में कहा गया था कि 300,000 बैरल प्रतिदिन (बीपीडी) की क्षमता वाली रिफाइनरी अपनी इकाइयों को बंद कर रही है क्योंकि क्षेत्रीय तनाव के कारण मध्य पूर्वी कच्चे तेल की आपूर्ति खाड़ी देशों में फंसी हुई है।

    एमआरपीएल ने इन दावों को तथ्यात्मक रूप से गलत बताया है और कहा है कि रिफाइनरी निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार चल रही है और उसने निकट भविष्य के लिए अपनी आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षित कर ली है। एक आधिकारिक बयान में कंपनी ने कहा- हम स्पष्ट करते हैं कि यह तथ्यात्मक रूप से गलत है। एमआरपीएल सामान्य रूप से काम कर रहा है और उसने संचालन जारी रखने के लिए पर्याप्त मात्रा में कच्चे तेल का इंतजाम कर लिया है। रिफाइनरी बिना किसी यूनिट के बंद हुए अपनी सामान्य क्षमता पर काम कर रही है। कच्चे तेल की कमी की अफवाहों के विपरीत, कंपनी ने पर्याप्त मात्रा में कच्चे तेल का स्टॉक कर लिया है।


    पेट्रोल-डीजल को लेकर अफवाह

    इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन और बीपीसीएल जैसी कंपनियों को भी इसी तरह की अफवाहों का सामना करना पड़ा। अफवाह है कि पेट्रोल और डीजल की किल्लत आने वाली है। इसी को लेकर इंडियन ऑयल ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया- भारत में पर्याप्त ईंधन भंडार है और आपूर्ति एवं वितरण नेटवर्क सामान्य रूप से काम कर रहे हैं। इंडियन ऑयल पूरे देश में निर्बाध ईंधन आपूर्ति बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। नागरिकों से अनुरोध है कि वे घबराएं नहीं और पेट्रोल पंपों पर भीड़ न लगाएं तथा सटीक जानकारी के लिए केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें। इससे पहले, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने कहा कि भारत में ऊर्जा की कोई कमी नहीं है और ऊर्जा उपभोक्ताओं को चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है।

  • Women's Day 2026: महिलाओं की सुरक्षा के लिए मोबाइल में जरूर रखें ये 3 सेफ्टी ऐप, एक क्लिक में मिलेगी मदद

    Women's Day 2026: महिलाओं की सुरक्षा के लिए मोबाइल में जरूर रखें ये 3 सेफ्टी ऐप, एक क्लिक में मिलेगी मदद


    नई दिल्ली। हर साल 8 मार्च को दुनिया भर में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस जाता है। यह दिन महिलाओं के सम्मान और उनके अधिकारों को समर्पित होता है। इस अवसर पर कई लोग महिलाओं को उपहार देते हैं या उन्हें खास तरीके से सम्मानित करते हैं। लेकिन महिला दिवस सिर्फ उत्सव का दिन ही नहीं, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाने का भी मौका है। आज के डिजिटल दौर में कुछ मोबाइल एप ऐसी हैं जो मुसीबत की स्थिति में महिलाओं के लिए सुरक्षा कवच की तरह काम कर सकती हैं। इनमें आपातकालीन अलर्ट और लोकेशन शेयरिंग जैसे फीचर दिए गए हैं। आइए जानते हैं ऐसी तीन महत्वपूर्ण सेफ्टी ऐप्स के बारे में, जिन्हें हर महिला को अपने मोबाइल में रखना चाहिए।

    1. 112 India App
    यह एप भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा तैयार की गई है। इसमें SOS बटन दिया गया है, जिसे दबाते ही आपकी लोकेशन तुरंत आपातकालीन सेवाओं तक पहुंच जाती है। इस एप की खास बात यह है कि यह हिंदी और अंग्रेजी सहित करीब 10 भाषाओं में उपलब्ध है। इसके अलावा मोबाइल के पावर बटन को तीन बार दबाने पर भी इमरजेंसी अलर्ट भेजा जा सकता है।

    2. e‑Raksha App
    यह एप Madhya Pradesh Police और राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई है। इसमें जीपीएस आधारित ट्रैकिंग सिस्टम और SOS अलर्ट की सुविधा दी गई है। इस एप के जरिए उपयोगकर्ता अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन से तुरंत संपर्क कर सकता है। साथ ही इसमें आत्मरक्षा से जुड़े ट्यूटोरियल और सुरक्षा से संबंधित सलाह भी उपलब्ध है।

    3. Himmat App
    यह एप Delhi Police द्वारा महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है। इसमें SOS बटन दबाते ही यूजर की लोकेशन और अन्य जरूरी जानकारी सीधे पुलिस कंट्रोल रूम तक पहुंच जाती है। इस एप की खासियत यह है कि यह जरूरत पड़ने पर ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग भी पुलिस तक भेज सकता है, जिससे आपात स्थिति में तुरंत मदद मिल सके।

    इन ऐप्स को मोबाइल में रखकर महिलाएं किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता प्राप्त कर सकती हैं और अपनी सुरक्षा को और मजबूत बना सकती हैं।

  • Women's Day: महिलाओं के सम्मान का दिन…. हाउसमेकर हो कामकाजी, जानें अपने ये 5 अधिकार

    Women's Day: महिलाओं के सम्मान का दिन…. हाउसमेकर हो कामकाजी, जानें अपने ये 5 अधिकार


    नई दिल्ली।
    हर साल की तरह आज भी 8 मार्च को पूरे विश्व में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (International Women’s Day) मनाया जा रहा है। ये दिन हर महिला को सम्मान (Women Respect) देने के लिए होता है, भले ही वो हाउसमेकर (Housemaker) हो, या फिर कामकाजी महिला (Working Woman) हों।

    महिला दिवस केवल उत्सव और सम्मान का दिन नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के अधिकारों, सुरक्षा और सशक्तिकरण के महत्व को समझने का अवसर भी है। सही जानकारी और जागरूकता ही महिलाओं को अपने जीवन में स्वतंत्र निर्णय लेने, समान अवसर पाने और समाज में सम्मान सुनिश्चित करने में मदद करती है।

    आज हम आपको पांच ऐसे अहम अधिकारों के बारे में बताएंगे, जिनका हर महिला को पता होना चाहिए। ये अधिकार न केवल उन्हें सशक्त बनाते हैं, बल्कि घर और समाज में उनकी सुरक्षा और सम्मान भी सुनिश्चित करते हैं। महिला दिवस पर इन अधिकारों को जानना और अपनाना हर महिला के लिए एक जरूरी कदम है।


    1. शिक्षा का अधिकार

    भारतीय संविधान की अनुच्छेद 15(1) और 15(3) महिलाओं के खिलाफ भेदभाव को रोकते हैं और शिक्षा के समान अवसर सुनिश्चित करते हैं। ऐसे में कोई भी परिवार ये नहीं कह सकता कि वो सिर्फ अपने घर के लड़कों को पढ़ने भेजेगा, और लड़कियों को नहींं।


    2. स्वास्थ्य का अधिकार

    भारतीय कानून के तहत महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं मिलना अनिवार्य है। मातृत्व लाभ अधिनियम 1961 सुरक्षित प्रसव और मातृत्व अवकाश सुनिश्चित करता है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति और प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षा योजना जैसी योजनाओं के माध्यम से महिलाओं की स्वास्थ्य सुरक्षा को कानूनी मान्यता दी गई है।


    3. समान वेतन और रोजगार का अधिकार

    भारतीय संविधान का अनुच्छेद 39(a) और 39(d) समान वेतन और काम के समान अवसर सुनिश्चित करता है। इसके अलावा भेदभाव उन्मूलन अधिनियम 1976 के तहत पुरुष और महिला कर्मचारियों को समान काम के लिए समान वेतन देना अनिवार्य है।


    4. सुरक्षा का अधिकार

    भारतीय संविधान की अनुच्छेद 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार देती है। इसके अलावा महिला सुरक्षा कानून जैसे घरेलू हिंसा अधिनियम 2005, शोषण रोकथाम अधिनियम और धारा 498A महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।


    5. संपत्ति और आर्थिक स्वतंत्रता का अधिकार

    भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम 2005 के तहत बेटियों को पिता की संपत्ति में बराबर हिस्सा मिलता है। इसके अलावा अनुच्छेद 15 और 19 महिलाओं को आर्थिक निर्णय और व्यापार करने का अधिकार भी सुनिश्चित करते हैं। महिलाएं अपने बैंक खाता और निवेश पर स्वतंत्र निर्णय ले सकती हैं।

  • आज महिला दिवस पर काशी विश्वनाथ मंदिर में महिलाओं के लिए खास पहल, वीआईपी दर्शन और फ्री एंट्री

    आज महिला दिवस पर काशी विश्वनाथ मंदिर में महिलाओं के लिए खास पहल, वीआईपी दर्शन और फ्री एंट्री


    नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर काशी विश्वनाथ मंदिर ने महिलाओं के लिए एक खास पहल की है। इस दिन मंदिर प्रशासन ने महिलाओं को विशेष वीआईपी दर्शन और मुफ्त प्रवेश की सुविधा देने की घोषणा की है, ताकि श्रद्धालु महिलाएं बाबा विश्वनाथ के दर्शन आसानी से कर सकें और महिला दिवस को एक आध्यात्मिक अनुभव के रूप में मना सकें।

    गेट नंबर 4-बी से मिलेगा निशुल्क प्रवेश

    मंदिर प्रशासन के अनुसार आज रविवार को सभी महिला श्रद्धालुओं के लिए गेट नंबर 4-बी से विशेष प्रवेश की व्यवस्था की गई है। चाहे महिलाएं काशी की निवासी हों या बाहर से आई हों, सभी को इस दिन निशुल्क दर्शन का अवसर मिलेगा। इस व्यवस्था के तहत महिलाएं सीधे बाबा विश्वनाथ की झांकी तक पहुँच सकेंगी और किसी भी प्रकार का टिकट लेने की आवश्यकता नहीं होगी।

    बच्चों के साथ आई महिलाओं को मिलेगी प्राथमिकता

    काशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन ने यह भी कहा कि जो महिलाएं अपने छोटे बच्चों के साथ आएंगी, उन्हें विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। बालक या बालिका के साथ आई महिलाओं को पहले प्रवेश मिलेगा। मंदिर में आने वाली महिलाओं को भीड़ से बचाने और सहज दर्शन कराने के लिए अलग व्यवस्था की गई है, ताकि लंबी कतारों में खड़े होने की परेशानी न हो।

    सीईओ ने दी जानकारी

    काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विश्वभूषण मिश्रा ने बताया कि महिला दिवस पर सुबह चार बजे से पांच बजे तक और शाम चार बजे से पांच बजे तक का समय काशीवासियों के लिए आरक्षित रहेगा। इस दौरान पहले से चल रही विशेष दर्शन व्यवस्था जारी रहेगी। दिन के बाकी समय में महिलाओं के लिए वीआईपी प्रवेश और दर्शन की विशेष सुविधा लागू रहेगी।

    आसान और सम्मानजनक दर्शन का उद्देश्य

    मंदिर प्रशासन का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को सम्मान देना और उन्हें सहज तरीके से दर्शन कराने का अवसर प्रदान करना है। हर साल बड़ी संख्या में महिलाएं काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन करने आती हैं और महिला दिवस पर यह सुविधा उनके लिए एक विशेष उपहार की तरह है।

    महिलाओं के लिए अनूठा अनुभव

    वीआईपी दर्शन और मुफ्त प्रवेश की यह व्यवस्था महिला श्रद्धालुओं के लिए एक यादगार अनुभव साबित होगी। कई महिलाएं दूर-दूर से बाबा विश्वनाथ के दर्शन करने आती हैं, और इस सुविधा के कारण उनकी यात्रा और भी सुखद और आरामदायक बन जाएगी।

    काशी विश्वनाथ मंदिर की धार्मिक महत्ता

    काशी विश्वनाथ मंदिर भारत के सबसे प्रसिद्ध और पवित्र मंदिरों में से एक है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और हर साल लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन करने आते हैं। काशी को भगवान शिव की नगरी माना जाता है और मंदिर के पुनर्विकास के बाद यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या और भी बढ़ गई है।

    मंदिर प्रशासन की सकारात्मक पहल

    महिला दिवस पर वीआईपी दर्शन की यह सुविधा मंदिर प्रशासन की एक सकारात्मक पहल मानी जा रही है। इससे न केवल महिलाओं को विशेष सम्मान मिलेगा, बल्कि यह दिखाता है कि धार्मिक स्थलों पर भी महिलाओं की सुविधा और सम्मान का ध्यान रखा जा रहा है।

  • प्रयागराज-हडपसर के बीच 1 अप्रैल से साप्ताहिक विशेष ट्रेन: 16-16 फेरों में सुविधा, भोपाल मंडल से होकर गुजरेगी

    प्रयागराज-हडपसर के बीच 1 अप्रैल से साप्ताहिक विशेष ट्रेन: 16-16 फेरों में सुविधा, भोपाल मंडल से होकर गुजरेगी



    नई दिल्ली। यात्रियों की बढ़ती मांग को देखते हुए भारतीय रेलवे ने प्रयागराज और हडपसर के बीच साप्ताहिक विशेष ट्रेन चलाने का ऐलान किया है। यह ट्रेन भोपाल मंडल मार्ग से होकर गुजरेगी और 1 अप्रैल 2026 से 15 जुलाई 2026 तक कुल 16-16 फेरों में चलेगी। ट्रेन का संचालन यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है, ताकि भीड़ के समय में सफर आरामदायक और सुरक्षित रहे।

    गाड़ी संख्या 04107 प्रयागराज-हडपसर विशेष ट्रेन प्रत्येक बुधवार को प्रयागराज से सुबह 10:20 बजे रवाना होगी और अगले दिन शाम 7:30 बजे हडपसर पहुंचेगी। वहीं, गाड़ी संख्या 04108 हडपसर-प्रयागराज विशेष ट्रेन प्रत्येक गुरुवार को रात 10:40 बजे हडपसर से प्रस्थान कर शनिवार सुबह 6:30 बजे प्रयागराज पहुंचेगी। इस ट्रेन में यात्रियों की सुविधा के लिए कुल 20 कोच लगाए जाएंगे, जिनमें विभिन्न श्रेणियों की सुविधाएं उपलब्ध हैं।

    ट्रेन मार्ग में शंकरगढ़, डभौरा, मानिकपुर, चित्रकूट धाम, बांदा, महोबा, खजुराहो, छतरपुर, टीकमगढ़, ललितपुर, बीना, रानी कमलापति, इटारसी, खंडवा, भुसावल, मनमाड, कोपरगांव, बेलापुर, अहिल्यानगर और दौंड कॉर्ड लाइन जैसे प्रमुख स्टेशनों पर ठहराव रहेगा।

    रेल प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि यात्रा से पहले ट्रेन की समय-सारणी और आरक्षण संबंधी जानकारी रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट, एनटीईएस पोर्टल या रेलवे हेल्पलाइन से अवश्य प्राप्त करें। इससे यात्रा सुरक्षित और सुविधाजनक बनेगी।

  • इंडिगो की बड़ी उपलब्धि, बनी एक हजार से अधिक महिला पायलट वाली देश की पहली एयरलाइंस

    इंडिगो की बड़ी उपलब्धि, बनी एक हजार से अधिक महिला पायलट वाली देश की पहली एयरलाइंस


    नई दिल्ली। भारत के विमानन क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है। इसी कड़ी में देश की प्रमुख एयरलाइंस में से एक इंडिगो ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कंपनी के बेड़े में अब 1000 से अधिक महिला पायलट कार्यरत हैं। यह उपलब्धि न केवल इंडिगो के लिए बल्कि पूरे भारतीय विमानन क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इंडिगो में कुल पायलटों में 17.5 प्रतिशत महिलाएं हैं जो वैश्विक औसत से लगभग तीन गुना अधिक है।

    महिलाओं को अवसर देने पर फोकस

    2015 के बाद से इंडिगो ने पायलट भर्ती और प्रशिक्षण में महिलाओं को विशेष अवसर देने की दिशा में कदम उठाए। कंपनी ने कई प्रशिक्षण कार्यक्रम और छात्रवृत्ति योजनाएं शुरू कीं जिससे महिला उम्मीदवारों को पायलट बनने का मौका मिला। इसी रणनीति के चलते इंडिगो अब उन एयरलाइंस में शामिल हो गई है जहां महिला पायलटों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।

    भारत में इस समय लगभग 15 हजार कमर्शियल पायलट हैं जिनमें लगभग 12–15 प्रतिशत महिलाएं हैं। यह अनुपात कई विकसित देशों से बेहतर माना जाता है। इंडिगो और एयर इंडिया जैसी एयरलाइंस ने महिला पायलटों को अवसर देकर इस आंकड़े को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है।

    वैश्विक स्तर पर विमानन क्षेत्र में लैंगिक अंतर

    वैश्विक स्तर पर अभी भी विमानन क्षेत्र में लैंगिक अंतर बड़ा है। दुनिया भर में पायलटों में महिलाओं की हिस्सेदारी औसतन केवल 5–6 प्रतिशत है। ऐसे में भारत उन देशों में शामिल हो गया है जहां महिला पायलटों की भागीदारी अपेक्षाकृत अधिक है।

    पायलट बनने के लिए सबसे पहले 12वीं में भौतिकी और गणित होना आवश्यक है। इसके बाद उम्मीदवार को डीजीसीए से मान्यता प्राप्त उड़ान स्कूल से प्रशिक्षण लेना होता है। कमर्शियल पायलट लाइसेंस पाने के लिए लगभग 200 घंटे की उड़ान प्रशिक्षण पूरी करनी पड़ती है। उसके बाद एयरलाइंस में नौकरी के लिए आवेदन किया जा सकता है।

    महिला पायलटों की संख्या में हो रही वृद्धि

    पिछले एक दशक में भारत में महिला पायलटों की संख्या में तेज वृद्धि हुई है। कई एयरलाइंस अब महिला उम्मीदवारों के लिए विशेष प्रशिक्षण और छात्रवृत्ति कार्यक्रम चला रही हैं। इंडिगो और एयर इंडिया जैसी कंपनियों में अब बड़ी संख्या में महिलाएं कॉकपिट की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।

    भारत की पहली महिला पायलट सरला ठकराल थीं। उन्होंने 1936 में केवल 21 वर्ष की आयु में पायलट लाइसेंस हासिल किया था और उस दौर में महिलाओं के लिए विमानन क्षेत्र में कदम रखना बेहद चुनौतीपूर्ण था। आज भारतीय विमानन क्षेत्र में महिलाओं के लिए नए अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं। इंडिगो में 1000 महिला पायलटों का आंकड़ा इसी बदलाव का प्रतीक है। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले वर्षों में एयरलाइंस में महिला पायलटों की संख्या और बढ़ेगी और यह क्षेत्र लैंगिक समानता की दिशा में एक प्रेरक उदाहरण बन सकता है।

  • मिडिल ईस्ट संकट के बीच अन्ना हजारे ने भारत से वैश्विक शांति की भूमिका निभाने का आग्रह किया

    मिडिल ईस्ट संकट के बीच अन्ना हजारे ने भारत से वैश्विक शांति की भूमिका निभाने का आग्रह किया

    नई दिल्ली। समाजसेवी अन्ना हजारे ने वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर भारत से शांति और संवाद की पहल करने का आग्रह किया। उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि वर्तमान समय में दुनिया अत्यंत चिंताजनक परिस्थितियों से गुजर रही है। विभिन्न देशों के बीच बढ़ते तनाव और संघर्ष से सामान्य नागरिकों का जीवन असुरक्षित हो रहा है। विशेषकर महिलाओं, बच्चों और परिवारों पर इसका असर पीड़ादायक है।

    अन्ना हजारे ने कहा कि भारत की संस्कृति हमेशा अहिंसा और शांति की रही है। हमारे देश ने विश्व को संवाद और शांति का मार्ग दिखाने का प्रयास किया है। ऐसे समय में भारत जैसे बड़े लोकतांत्रिक राष्ट्र की ओर से मानवता और शांति का संदेश देना अत्यंत आवश्यक है।

    उन्होंने पत्र में लिखा, “आज दुनिया को हथियारों की नहीं, बल्कि विश्वास और संवाद की जरूरत है। युद्ध से केवल विनाश होता है, जबकि संवाद से समाधान और स्थिरता की राह निकलती है। इसलिए मेरी आपसे विनम्र प्रार्थना है कि भारत तटस्थ और जिम्मेदार भूमिका निभाते हुए वैश्विक स्तर पर शांति और संवाद को बढ़ावा दे।”

    अन्ना हजारे ने पीएम मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि भारत ने कई वैश्विक मुद्दों पर सकारात्मक भूमिका निभाई है। इसलिए इस संवेदनशील समय में यदि भारत मानवता और शांति के पक्ष में आगे आता है, तो यह पूरे विश्व के लिए प्रेरणादायक होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि मानवता के हित और निरपराध नागरिकों की सुरक्षा के लिए भारत को शांति का मार्ग आगे बढ़ाना चाहिए।

    पिछले एक हफ्ते में मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ गया है। इजरायल और अमेरिका ने संयुक्त रूप से ईरान पर हमले किए, जिनमें ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई समेत कई उच्च सैन्य अधिकारी मारे गए। बदले में ईरान ने मिडिल ईस्ट के कई देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागीं। यह संघर्ष अब भी जारी है और वैश्विक स्तर पर चिंता पैदा कर रहा है।

    अन्ना हजारे का पत्र इस बात पर जोर देता है कि इस जटिल वैश्विक परिदृश्य में भारत की भूमिका न केवल तटस्थ बल्कि सक्रिय रूप से शांति और संवाद को बढ़ावा देने वाली होनी चाहिए। उनका मानना है कि भारत यदि इस समय जिम्मेदार पहल करता है, तो यह न केवल वैश्विक स्थिरता के लिए बल्कि मानवता के हित में भी एक प्रेरक उदाहरण बन सकता है।