Category: National

  • राजनाथ सिंह के खिलाफ विशेषाधिकार नोटिस की मांग, कांग्रेस-सरकार आमने-सामने..

    राजनाथ सिंह के खिलाफ विशेषाधिकार नोटिस की मांग, कांग्रेस-सरकार आमने-सामने..

    नई दिल्ली । ऑपरेशन सिंदूर को लेकर संसद में दिए गए बयान पर सियासी विवाद और तेज हो गया है। कांग्रेस ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के खिलाफ विशेषाधिकार हनन की कार्यवाही शुरू करने की मांग करते हुए लोकसभा अध्यक्ष को नोटिस सौंपा है। विपक्ष का आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान हुए सैन्य नुकसान को लेकर सदन में दी गई जानकारी वास्तविक तथ्यों से मेल नहीं खाती, जबकि सरकार ने इन आरोपों को पूरी तरह भ्रामक और संदर्भ से हटाकर पेश किया गया बताया है।

    कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने लोकसभा अध्यक्ष को भेजे पत्र में आरोप लगाया है कि रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान ऐसा बयान दिया, जिससे यह संदेश गया कि अभियान में कोई भारतीय सैनिक शहीद नहीं हुआ। उनका कहना है कि बाद में आधिकारिक जानकारी में छह सैन्यकर्मियों के शहीद होने की पुष्टि हुई, जिससे संसद में दिए गए बयान पर सवाल खड़े होते हैं।

    कांग्रेस का कहना है कि यदि सदन के समक्ष तथ्यों से अलग जानकारी प्रस्तुत की गई है तो यह संसदीय परंपराओं और विशेषाधिकारों का गंभीर मामला है। पार्टी ने इसे संसद को गुमराह करने का मामला बताते हुए नियमों के तहत विशेषाधिकार हनन की कार्यवाही शुरू करने की मांग की है। विपक्ष का तर्क है कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषयों पर संसद को सटीक और पूर्ण जानकारी दी जानी चाहिए।

    इस पूरे विवाद के केंद्र में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हुए सैन्य नुकसान को लेकर अलग-अलग व्याख्याएं हैं। कांग्रेस का दावा है कि बाद में सार्वजनिक हुई आधिकारिक जानकारी में पांच सेना के जवानों और एक वायुसेना कर्मी के शहीद होने की पुष्टि हुई। विपक्ष का कहना है कि यदि यह तथ्य पहले से उपलब्ध थे, तो संसद में उनका उल्लेख न होना गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

    दूसरी ओर, रक्षा मंत्रालय ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। मंत्रालय का कहना है कि रक्षा मंत्री के भाषण के एक हिस्से को संदर्भ से अलग करके प्रस्तुत किया जा रहा है। सरकार के अनुसार, मंत्री का बयान उन दावों के जवाब में था जिनमें अभियान के दौरान भारतीय वायुसेना के पायलटों के मारे जाने की बात कही जा रही थी। मंत्रालय का कहना है कि पूरे भाषण को देखने पर स्पष्ट हो जाता है कि उनके वक्तव्य का आशय अलग था और उसे गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया।

    यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब हाल ही में राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शहीद हुए छह सैन्यकर्मियों के नाम शामिल किए गए। इसके बाद अभियान के दौरान हुए सैन्य बलिदान को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। विपक्ष इसे अपने आरोपों के समर्थन में प्रस्तुत कर रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि शहीदों के सम्मान और अभियान से जुड़े तथ्यों को राजनीतिक विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए।

    संसदीय मामलों के जानकारों के अनुसार, विशेषाधिकार हनन का नोटिस स्वीकार करना या नहीं करना पूरी तरह लोकसभा अध्यक्ष के अधिकार क्षेत्र में आता है। यदि प्रथम दृष्टया मामला बनता है तो आगे की संसदीय प्रक्रिया शुरू हो सकती है। फिलहाल इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी जारी है।

    ऑपरेशन सिंदूर को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब केवल सैन्य अभियान तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि संसद में दिए गए बयानों की विश्वसनीयता, संसदीय जवाबदेही और राजनीतिक पारदर्शिता पर भी चर्चा का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में लोकसभा अध्यक्ष के निर्णय और सरकार की आगे की प्रतिक्रिया पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

  • सनसनीखेज हत्याकांड के बाद लोहगढ़ फोर्ट में उमड़ी पर्यटकों की अनियंत्रित भीड़, ऐतिहासिक स्थलों के बदलते स्वरूप पर उठे गंभीर सवाल

    सनसनीखेज हत्याकांड के बाद लोहगढ़ फोर्ट में उमड़ी पर्यटकों की अनियंत्रित भीड़, ऐतिहासिक स्थलों के बदलते स्वरूप पर उठे गंभीर सवाल

    नई दिल्ली । महाराष्ट्र के पुणे के निकट स्थित ऐतिहासिक लोहगढ़ किला इन दिनों अपनी गौरवशाली सैन्य विरासत और छत्रपति शिवाजी महाराज व पेशवाओं के शौर्य इतिहास के बजाय एक बेहद विचलित करने वाली वजह से देश भर में चर्चा का विषय बन गया है। हाल ही में इस किले में घटित हुए केतन अग्रवाल हत्याकांड के बाद से यहाँ आने वाले पर्यटकों की संख्या में अप्रत्याशित बढ़ोतरी दर्ज की गई है। चौंकाने वाली बात यह है कि किले में पहुँचने वाले इन नए पर्यटकों की रुचि इस ऐतिहासिक स्थल की वास्तुकला या इसके समृद्ध सांस्कृतिक अतीत को जानने में नहीं है, बल्कि वे उस विशिष्ट स्थान और गहरी खाई को देखने के लिए उत्सुक हैं जहाँ कथित तौर पर सिया गोयल ने अपने मंगेतर को धक्का देकर मौत के घाट उतार दिया था। स्थानीय स्तर पर और सोशल मीडिया पर इस त्रासदीपूर्ण स्थान को ‘सिया पॉइंट’ के रूप में प्रचारित किया जा रहा है, जिसने समाज के एक बड़े वर्ग को चिंता में डाल दिया है।

    इस घटना के बाद से लोहगढ़ किले में सप्ताहांत पर पर्यटकों की इतनी भारी भीड़ जमा हो रही है कि किले के संकरे रास्तों पर कई बार घंटों तक जाम की स्थिति बन जाती है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और तस्वीरों से स्पष्ट है कि लोग उस खौफनाक मर्डर स्पॉट पर जाकर तस्वीरें खिंचवाने, सेल्फी लेने और रील बनाने की होड़ में लगे हैं। किसी अपराध स्थल या त्रासदी की जगह को एक पर्यटन स्थल के रूप में देखने की इस बढ़ती प्रवृत्ति को समाजशास्त्री और विशेषज्ञ ‘डार्क टूरिज्म’ (Dark Tourism) का नाम दे रहे हैं। जब लोग किसी ऐसी जगह की यात्रा करते हैं जिसका इतिहास या वर्तमान मृत्यु, विनाश, मानवीय त्रासदी या किसी जघन्य अपराध से जुड़ा हो, तो उसे इस श्रेणी में रखा जाता है। भारत में इस तरह का यह कोई पहला मामला नहीं है; इससे पहले मेघालय के चेरापूंजी में भी एक ऐसी ही पारिवारिक हत्या के बाद उस पहाड़ी को ‘सोनम पॉइंट’ कहा जाने लगा था और दिल्ली का कुख्यात बुराड़ी घर भी इसी तरह की उत्सुकता का केंद्र बना था।

    विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर डार्क टूरिज्म का एक ऐतिहासिक और गंभीर स्वरूप रहा है, जैसे पोलैंड का ऑशविट्ज़ प्रताड़ना शिविर या जलियांवाला बाग, जहाँ लोग इतिहास की त्रासदियों से सीख लेने, शोक संवेदना प्रकट करने और शहीदों को श्रद्धांजलि देने जाते हैं। इसके विपरीत, वर्तमान समय में सोशल मीडिया के प्रभाव के कारण जो नया डार्क टूरिज्म उभर रहा है, वह बेहद सतही और केवल सनसनीखेज मामलों से प्रेरित है। लोग केवल अपनी जिज्ञासा शांत करने और इंटरनेट पर डिजिटल सामग्री (रील्स और मीम्स) के माध्यम से व्यूज और लाइक्स बटोरने के लिए इन संवेदनशील और दर्दनाक स्थानों का रुख कर रहे हैं। किसी की असामयिक और क्रूर मौत को मनोरंजन या सोशल मीडिया कंटेंट का जरिया बना लेना एक बेहद खतरनाक सामाजिक बदलाव की ओर इशारा करता है।

    इस पूरे प्रकरण ने पुरातत्व विभाग, स्थानीय प्रशासन और इतिहासकारों के सामने भी एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। सदियों पुराना लोहगढ़ किला, जो कभी मराठा साम्राज्य की सामरिक शक्ति का प्रतीक था और जहाँ लोग इतिहास की वीर गाथाओं को महसूस करने आते थे, उसकी पहचान को एक आपराधिक घटना के नाम पर री-ब्रांड करने की कोशिश की जा रही है। बुद्धिजीवियों का कहना है कि किसी ऐतिहासिक धरोहर के महत्व को इस तरह कमतर करना और उसे एक नकारात्मक छवि के साथ जोड़ना हमारी आने वाली पीढ़ियों के दृष्टिकोण को प्रभावित कर सकता है। प्रशासन के लिए भी इस प्रकार की अनियंत्रित और संवेदनहीन भीड़ को संभालना एक बड़ी कानून-व्यवस्था और सुरक्षा की समस्या बनता जा रहा है।

    लोहगढ़ किले की इस बदलती तस्वीर ने अंततः सामूहिक सामाजिक चेतना पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। चंद लाइक्स और कमेंट्स की चाहत में इंसानी संवेदनाओं और किसी परिवार के गहरे दुख का मजाक उड़ाने का यह चलन यह सोचने पर मजबूर करता है कि एक समाज के रूप में हम कितने असंवेदनशील होते जा रहे हैं। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए यह आवश्यक हो गया है कि न केवल प्रशासन ऐसे संवेदनशील स्थलों पर रील बनाने और अनुचित फोटोग्राफी पर कड़े प्रतिबंध लगाए, बल्कि नागरिक समाज भी यह आत्मनिरीक्षण करे कि मनोरंजन और उत्सुकता की सीमा कहाँ समाप्त होनी चाहिए। किसी भी ऐतिहासिक स्थल की गरिमा को अक्षुण्ण रखना और मानवीय त्रासदियों के प्रति सम्मानजनक मौन बनाए रखना ही एक परिपक्व समाज की पहचान है।

  • जुलाई में भी धीमी रहेगी मानसून की रफ्तार…. सामान्य से कम बारिश का अनुमान

    जुलाई में भी धीमी रहेगी मानसून की रफ्तार…. सामान्य से कम बारिश का अनुमान


    नई दिल्ली।
    देश में इस बार जुलाई (July 2026) के महीने में मानसून (Monsoon) की रफ्तार धीमी रहने के आसार हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी-IMD) ने मंगलवार को अपना मासिक पूर्वानुमान (Monthly Forecast) जारी करते हुए बताया कि जुलाई में देश भर में मासिक औसत वर्षा सामान्य से कम रहने की आशंका है। आईएमडी के अनुसार, जुलाई में दीर्घकालिक औसत (एलपीए – 1971-2020) की तुलना में केवल 94 फीसदी बारिश होने की संभावना है। देश में जुलाई महीने का एलपीए लगभग 280.4 मिमी होता है। एलपीए से तात्पर्य किसी निश्चित अवधि (जैसे एक महीने या एक सीजन) के दौरान किसी विशेष क्षेत्र में दर्ज की गई वर्षा से है, जिसे एक लंबी अवधि (आमतौर पर 30 से 50 वर्ष) में औसत निकाला जाता है।

    पूरे देश में एक जैसे हालात रहने की उम्मीद नहीं है। आईएमडी के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्र ने बताया कि देश के अधिकांश हिस्सों में भले ही सूखा या कम बारिश देखने को मिले, लेकिन कुछ क्षेत्रों में राहत की उम्मीद है। उत्तर-पश्चिम और पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्से, पूर्व-मध्य भारत और पूर्वी प्रायद्वीपीय क्षेत्र में बारिश सामान्य या सामान्य से अधिक होने की उम्मीद है।


    जून में 1901 के बाद पांचवीं सबसे कम बारिश

    आईएमडी के अनुसार, जून का महीना देश के लिए काफी सूखा रहा। पूरे भारत में जून के दौरान करीब 40 फीसदी बारिश की कमी दर्ज की गई। मध्य भारत सबसे ज्यादा प्रभावित रहा और यहा सबसे अधिक 50.4 फीसदी कम बारिश हुई। इस साल जून में केवल 99.5 मिमी बारिश हुई, जो 1901 के बाद से अब तक की पांचवीं सबसे कम जून की बारिश है।


    कम बारिश के पीछे कई मुख्य कारण

    मानसून सीजन के दौरान सामान्य से कम वर्षा के पीछे कई मुख्य कारक रहे। मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन का प्रतिकूल चरण…यह हवा, बादल और दबाव की एक गतिशील प्रणाली है और भूमध्य रेखा के चक्कर लगाते समय बारिश लाती है। कम दबाव वाले क्षेत्रों का न बनना…जून में कम दबाव का क्षेत्र नहीं बना। चूंकि हवाएं उच्च दबाव से कम दबाव वाले क्षेत्रों की ओर चलती हैं, इसलिए ये प्रणालियां चुंबक की तरह काम करती हैं, जो नमी से भरी हवाओं को खींचती हैं, जिससे बारिश होती है।

  • देश में आज से VB-G RAM G योजना लागू…. ग्रामीण मजदूरों को अब 125 दिन का रोजगार

    देश में आज से VB-G RAM G योजना लागू…. ग्रामीण मजदूरों को अब 125 दिन का रोजगार


    नई दिल्ली।
    केंद्र सरकार ने ग्रामीण रोजगार व्यवस्था (Rural Employment System) में बड़ा बदलाव करते हुए ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025’ (वीबी-जी राम जी एक्ट -VB-G RAM G Act ) को 1 जुलाई से लागू कर दिया है। इसके साथ ही सरकार ने नई ग्रामीण रोजगार योजना (New Rural Employment Scheme) के तहत मजदूरी दरों में भी बढ़ोतरी की है। अब देश में औसत दैनिक मजदूरी 298.8 रुपये से बढ़कर 327.4 रुपये हो गई है। यानी औसतन 28.6 रुपये प्रतिदिन की बढ़ोतरी हुई है। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने मंगलवार को नई मजदूरी दरों की अधिसूचना जारी की। नई दरें 1 जुलाई से देश के सभी 34 राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और मजदूरी क्षेत्रों में लागू हो गई हैं।


    अब 100 नहीं, 125 दिन के रोजगार की गारंटी

    सरकार के अनुसार, नए कानून के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को अब 125 दिनों के मजदूरी वाले रोजगार की कानूनी गारंटी मिलेगी। पहले मनरेगा (MGNREGA) के तहत 100 दिनों के रोजगार की गारंटी थी।


    न्यूनतम मजदूरी 300 रुपये तय

    सरकार ने नई योजना में 300 रुपये प्रतिदिन की अंतरिम न्यूनतम मजदूरी तय की है। इसका मतलब है कि इस योजना के तहत किसी भी राज्य में मजदूरी 300 रुपये से कम नहीं होगी। सरकार का कहना है कि पूरे देश में मजदूरी दरों में औसतन 10 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी की गई है।


    इन राज्यों में सबसे ज्यादा बढ़ी मजदूरी

    मंत्रालय के अनुसार, 21 राज्यों और प्रशासनिक इकाइयों में मजदूरी को बढ़ाकर सीधे 300 रुपये प्रतिदिन कर दिया गया है। वहीं उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों में मजदूरी दरों में 15 से 25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई है। सबसे अधिक बढ़ोतरी अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में हुई है, जहां मजदूरी करीब 24.5 प्रतिशत बढ़ाई गई है।

    जिन राज्यों में पहले से मजदूरी अधिक थी, वहां भी बढ़ोतरी की गई है। नई अधिसूचना के अनुसार-
    हरियाणा- 409 रुपये प्रतिदिन
    गोवा- 406 रुपये प्रतिदिन
    केरल- 401 रुपये प्रतिदिन
    सिक्किम (ऊंचाई वाले ग्राम पंचायत क्षेत्र) – 450 रुपये प्रतिदिन


    95 हजार करोड़ रुपये से अधिक का बजट

    सरकार ने नई व्यवस्था को सुचारु रूप से लागू करने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 95,692.31 करोड़ रुपये की अंतरिम राशि आवंटित की है। इसका उद्देश्य समय पर मजदूरी भुगतान और विकास कार्यों को बिना रुकावट जारी रखना है।


    शिवराज सिंह चौहान ने बताया ऐतिहासिक कदम

    केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि कोई भी पात्र ग्रामीण मजदूर एक भी दिन काम से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि यह कानून विकसित भारत के लक्ष्य को मजबूत करेगा और गांवों की समृद्धि तथा आजीविका सुरक्षा को नई मजबूती देगा।


    पुराने जॉब कार्ड फिलहाल रहेंगे मान्य

    सरकार ने स्पष्ट किया है कि ई-केवाईसी सत्यापित पुराने जॉब कार्ड तब तक मान्य रहेंगे, जब तक नए ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी नहीं हो जाते। नई योजना में भी ग्राम पंचायतों की अहम भूमिका बनी रहेगी। योजना के तहत जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, कृषि, ग्रामीण आधारभूत ढांचा और महिला सशक्तिकरण से जुड़े कार्यों पर विशेष जोर दिया जाएगा।


    विपक्ष ने उठाए सवाल

    नई व्यवस्था को लेकर विपक्षी दलों और कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि इससे रोजगार की मांग आधारित व्यवस्था, राज्यों और पंचायतों की भूमिका तथा योजना के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध कराने जैसे मुद्दों पर असर पड़ सकता है। हालांकि केंद्र सरकार का कहना है कि नया कानून ग्रामीण आजीविका को और मजबूत करेगा, बेहतर परिसंपत्तियों का निर्माण करेगा और रोजगार सृजन को अधिक प्रभावी बनाएगा। सरकार 2 जुलाई को मुक्कावरिपल्ली गांव में इस कानून का राष्ट्रीय स्तर पर औपचारिक शुभारंभ करेगी। इस कार्यक्रम में ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड वितरित किए जाएंगे और योजना से संबंधित जागरूकता सामग्री भी जारी की जाएगी।

  • PM मोदी ने ईरान से राष्ट्रपति को किया टेलीफोन…. बोले- होर्मुज स्ट्रेट में हो आवाजाही की स्वतंत्रता

    PM मोदी ने ईरान से राष्ट्रपति को किया टेलीफोन…. बोले- होर्मुज स्ट्रेट में हो आवाजाही की स्वतंत्रता


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने ईरान (Iran) के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेश्कियन (President Dr. Masoud Pezeshkian) से मंगलवार को टेलीफोन पर बातचीत की, जिसमें राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने पश्चिम एशिया (West Asia) की हालिया घटनाओं और आगे की दिशा की जानकारी प्रधानमंत्री को दी। पीएम मोदी ने समझौते का स्वागत करते हुए भारत की स्थिर नीति को दोहराया कि क्षेत्र के सभी मुद्दों का समाधान संवाद और कूटनीति के माध्यम से ही होना चाहिए। साथ ही उन्होंने क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के निरंतर प्रयासों की जरूरत पर जोर दिया। इस दौरान समुद्री नौवहन की स्वतंत्रता और वाणिज्य की सुरक्षा को बनाए रखने के महत्व को भी सामने रखा गया।

    पीएम मोदी ने एक्स पर पोस्ट किया, ‘पश्चिम एशिया में हाल की घटनाओं के बारे में ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेश्कियन से बात हुई। बातचीत में हुई प्रगति का स्वागत किया और उम्मीद जताई कि लगातार कोशिशों से इस इलाके में स्थायी शांति आएगी। भारत और दुनिया के लिए होर्मुज स्ट्रेट में आवाजाही की आजादी के महत्व को फिर से दोहराया।’ इससे पहले, पेजेश्कियन ने प्रधानमंत्री मोदी को ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था। खामेनेई का अंतिम संस्कार समारोह अगले सप्ताह आयोजित होने वाला है। खबरों के मुताबिक, सरकार भारत के प्रतिनिधि के तौर पर बिहार के राज्यपाल अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा को इन समारोह में भेजने की योजना बना रही है। अंतिम संस्कार की रस्में 5 से 9 जुलाई तक होंगी।


    भारत-ईरान के रिश्ते में उतार-चढ़ाव

    भारत और ईरान के मौजूदा संबंध काफी जटिल और रणनीतिक महत्व वाले रहे हैं। दोनों देशों के बीच सभ्यतागत और ऐतिहासिक गहराई है, लेकिन हाल के वर्षों में अमेरिकी प्रतिबंधों, क्षेत्रीय तनाव और ईरान-इजरायल संघर्ष के कारण संबंधों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। 2024 में भारत ने चाबहार पोर्ट के शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल को 10 वर्षों के लिए ऑपरेट करने का समझौता किया, जिसमें 120 मिलियन डॉलर का निवेश शामिल था। 2026 में अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण भारत ने पोर्ट पर अपनी गतिविधियां कम कीं और वादा किया राशि का भुगतान पूरा कर लिया।

    होर्मुज स्ट्रेट संकट के दौरान भारत ने ईरान के साथ कूटनीतिक संपर्क बढ़ाया, जहाजों की सुरक्षित निकासी सुनिश्चित करने के लिए विदेश मंत्री और प्रधानमंत्री स्तर पर बातचीत हुई। ईरान के सुप्रीम लीडर की मृत्यु पर भारत ने शोक व्यक्त किया और BRICS जैसे मंचों पर सहयोग जारी रखा। ऊर्जा आयात लगभग बंद हो गया है, लेकिन कनेक्टिविटी, अफगानिस्तान और मध्य एशिया पहुंच के लिए चाबहार अभी भी अहम बना हुआ है। दोनों देशों के बीच संबंध रणनीतिक स्वायत्तता और व्यावहारिक जरूरतों पर आधारित हैं। भारत ईरान को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए जरूरी मानता है, जबकि ईरान भारत को बड़े बाजार और निवेशक के रूप में देखता है।

  • भारत दौरे पर आएंगी जापान की PM सनाए ताकाइली…. निवेश को लेकर हो सकते हैं नए ऐलान

    भारत दौरे पर आएंगी जापान की PM सनाए ताकाइली…. निवेश को लेकर हो सकते हैं नए ऐलान


    नई दिल्ली।
    जापान (Japan) की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची (Prime Minister Sanae Takaichi) की भारत यात्रा (India Tour) को कई मायनों में महत्वूर्ण माना जा रहा है। इस दौरान व्यापार, बुनियादी ढांचे में दीर्घकालिक निवेश, पूर्वोत्तर विकास, कृत्रिम बुद्धिमता के क्षेत्र में नए ऐलान किए जा सकते हैं। साथ ही हिंद प्रशांत क्षेत्र में चीन की आक्रामकता से निपटने के लिए क्वाड को फिर से सक्रिय करने पर भी बात हो सकती है।


    भारत में भारी निवेश

    कूटनीतिक जानकारों के अनुसार भारत के विकास में जापान की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है, क्योंकि उसने बुनियादी ढांचे, ऑटोमाइबल तथा भारी उद्योग क्षेत्र में दीर्घकालिक निवेश किया है और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में भी वह निर्णायक भूमिका निभा सकता है। उभरते क्षेत्रों में अनुसंधान, संयुक्त उपक्रम और निवेश की जापान से अपार संभावनाएं हैं।

    जापान का मौजूदा निवेश 44 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है तथा वह सिंगापुर, मॉरीशस, अमेरिका और नीदरलैंड के बाद पांचवा बड़ा निवेशक है। इस यात्रा के दौरान भी जापान की प्रधानमंत्री बड़े निवेश का ऐलान कर सकती हैं। भारत और जापान उभरती प्रौद्यौगिकी में 100 से अधिक परियोजनाओं पर कार्य कर रहे हैं। इस यात्रा के दौरान एआई में सहयोग को लेकर घोषणा हो सकती है।

    भारत की एक्ट ईस्ट नीति के लिए भी जापान बेहद महत्वपूर्ण है। भारत और जापान ने 2017 में भारत-जापान एक्ट ईस्ट फोरम बनाया है, जिसके जरिये पूर्वोत्तर के विकास पर विशेष फोकस किया जा रहा है। पिछले एक साल के दौरान जापान के उच्चस्तरीय दलों ने मेघालय, असम, मणिपुर के दौरे किए हैं, जबकि मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, असम और नगालैंड के मुख्यमंत्रियों ने जापान के दौरे किए।


    बैठक में व्यापार को मजबूत करने पर भी होगी बातचीत

    विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार इस बैठक में वैसे तो क्षेत्रीय और वैश्विक सभी मुद्दों पर दोनों राष्ट्राध्यक्ष बात करेंगे, लेकिन व्यापार को मजबूत करने पर भी बात होगी। दरअसल, भारत-जापान के बीच में 2011 से व्यापार समझौता है, लेकिन यह जापान के लिए ही फायदेमंद साबित हुआ है। दोनों देशों के बीच करीब 27 अरब डॉलर का सालाना कारोबार है, जिसमें भारत का निर्यात छह अरब डॉलर और आयात 21 अरब डॉलर का है। यानी 15 अरब डॉलर का व्यापार घाटा है। भारत इस समझौते के नवीनीकरण के पक्ष में है।


    भारत में कहां सबसे ज्यादा निवेश

    पूर्वोत्तर में जापान ने भारी निवेश भी किए हैं तथा वहां के युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण भी प्रदान करता है। जापान का मानना है कि पूर्वोत्तर एक ऐसा क्षेत्र है जहां भारत की एक्ट ईस्ट नीति और जापान की स्वतंत्र एवं खुले हिंद प्रशांत क्षेत्र के दृष्टिकोण को व्यवहार में लाया जाता है।

    एक तरफ जहां आर्थिक नजरिये से जापान महत्वपूर्ण है। वहीं, क्वाड के सदस्य के रूप में भी जापान भारत का महत्वपूर्ण रणनीतिक भागीदार है। लेकिन क्वाड निष्क्रिय होता जा रहा है। इसलिए संभावना है कि मोदी के संग बैठक में जापान की प्रधानमंत्री क्वाड को सक्रिय करने पर भी बात करेंगी। दरअसल, क्वाड की शुरुआती पहल जापान की तरफ से ही की गई थी, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप क्वाड को ज्यादा तवज्जो नहीं दे रहे हैं।

  • राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: जेल में आरोपियों से दो घंटे पूछताछ, सामने आए कई अहम दावे

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: जेल में आरोपियों से दो घंटे पूछताछ, सामने आए कई अहम दावे


    अयोध्या। राम मंदिर के चढ़ावे में करोड़ों रुपये की चोरी के मामले की जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद पुलिस ने जिला जेल में बंद आरोपियों से करीब दो घंटे तक पूछताछ की। सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान आरोपियों ने चोरी के तरीके, रकम के इस्तेमाल और दान राशि की गणना प्रक्रिया से जुड़े कई अहम दावे किए। इस दौरान ट्रस्ट से जुड़े अनिल मिश्रा का नाम भी एक बार फिर सामने आया। हालांकि, पुलिस ने इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। दूसरी ओर, जांच का दायरा अब आरोपियों की संपत्तियों और बैंक खातों तक भी बढ़ा दिया गया है।

    अविनाश मिश्रा से सबसे लंबी पूछताछ
    सूत्रों के मुताबिक, पुलिस ने सभी आरोपियों से अलग-अलग पूछताछ की, लेकिन सबसे अधिक समय आरोपी अविनाश मिश्रा से सवाल-जवाब में लगाया गया। बताया जा रहा है कि उसके पास से सबसे ज्यादा बरामदगी हुई थी। पुलिस पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने और चोरी के नेटवर्क को समझने की कोशिश कर रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इतनी बड़ी रकम लंबे समय तक बिना किसी संदेह के कैसे गायब होती रही और इसमें किन-किन लोगों की क्या भूमिका रही।

    पूछताछ में चोरी की कार्यप्रणाली का खुलासा
    सूत्रों के अनुसार, आरोपियों ने पूछताछ के दौरान दान राशि की चोरी की पूरी कार्यप्रणाली पुलिस के सामने रखी। दावा किया गया कि दान राशि की गणना के दौरान सुरक्षा व्यवस्था की कुछ कमजोरियों का फायदा उठाया जाता था। पुलिस ने यह जानने का प्रयास किया कि रकम किस समय निकाली जाती थी, उसे कैसे छिपाया जाता था और बाद में किस तरीके से मंदिर परिसर से बाहर पहुंचाया जाता था।

    सूत्रों का यह भी दावा है कि पूछताछ में ट्रस्ट से जुड़े अनिल मिश्रा का नाम फिर सामने आया। आरोपियों ने तौर पर कहा कि दान राशि की गणना प्रक्रिया में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती थी। हालांकि, पुलिस ने इस संबंध में कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है और जांच एजेंसियां आरोपियों के दावों का उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सत्यापन कर रही हैं।

    एक व्यक्ति रकम निकालता, बाकी बनाते थे घेरा
    पूछताछ में सामने आए दावों के अनुसार, चोरी के दौरान एक व्यक्ति दान राशि निकालता था, जबकि बाकी आरोपी उसके चारों ओर इस तरह खड़े रहते थे कि बाहर से किसी को कोई संदेह न हो। इससे सीसीटीवी कैमरों और अन्य कर्मचारियों की नजर सीधे उस व्यक्ति तक नहीं पहुंचती थी।

    सूत्रों के मुताबिक, निकाली गई रकम को तुरंत बाहर नहीं ले जाया जाता था, बल्कि पहले मंदिर परिसर के बाथरूम में छिपा दिया जाता था। बाद में अनुकूल अवसर मिलने पर उसे परिसर से बाहर पहुंचाया जाता था। पुलिस अब इस दावे की पुष्टि सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर कर रही है।

    कैमरों की निगरानी से बचने की थी पूरी जानकारी
    जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि आरोपियों को मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की लोकेशन और उनकी निगरानी के दायरे की पूरी जानकारी थी। इसी वजह से योजना ऐसे तैयार की जाती थी कि कैमरों की सीधी नजर से बचा जा सके। पुलिस अब कंट्रोल रूम की ड्यूटी, सीसीटीवी रिकॉर्ड और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका का भी मिलान कर रही है।

    गणना कक्ष की चाबी को लेकर भी दावा
    पूछताछ में आरोपियों ने तौर पर बताया कि गणना कक्ष की एक चाबी टिन्नू यादव के पास रहती थी, जबकि दूसरी बैंक कर्मियों के पास होती थी। उनका दावा है कि इसी व्यवस्था का फायदा उठाकर चोरी को अंजाम दिया जाता था। हालांकि, बैंक कर्मियों की किसी भूमिका की अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस दस्तावेजों, ड्यूटी रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है।

    पिछले सप्ताह हुई थीं गिरफ्तारियां
    इस मामले में पुलिस ने पिछले सप्ताह मुकदमा दर्ज करने के बाद तेजी से कार्रवाई करते हुए चंपत राय के करीबी बताए जाने वाले टिन्नू यादव, गिनती इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव तथा रकम गिनने वाले अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष यादव, रमाशंकर मिश्रा, करुणेश और अवनीश शुक्ला को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। जेल में हुई ताजा पूछताछ को जांच का अहम चरण माना जा रहा है, क्योंकि पहली बार आरोपियों से पूरे घटनाक्रम पर विस्तार से पूछताछ की गई।

    बैंक ऑफ बड़ौदा ने नोटिस का दिया जवाब
    जांच के दौरान पुलिस ने बैंक ऑफ बड़ौदा की अयोध्या शाखा से कुछ खातों की जानकारी मांगी थी, जिस पर बैंक ने जवाब सौंप दिया है। बैंक ने स्पष्ट किया कि उसकी भूमिका केवल ऑनलाइन माध्यम से मिलने वाले दान तक सीमित है। बैंक के अनुसार, क्यूआर कोड के जरिए प्राप्त राशि सीधे बैंकिंग प्रणाली में दर्ज होती है, जबकि नकद चढ़ावे की गणना, पैकिंग और बैंक तक पहुंचाने की प्रक्रिया में बैंक की कोई भूमिका नहीं होती।

    सूत्रों के अनुसार, राम जन्मभूमि ट्रस्ट को मिलने वाले कुल दान का लगभग 10 से 15 प्रतिशत हिस्सा बैंक ऑफ बड़ौदा और पंजाब नेशनल बैंक के माध्यम से ऑनलाइन प्राप्त होता है, जबकि सबसे अधिक ऑनलाइन लेनदेन भारतीय स्टेट बैंक के जरिए होता है।

    चंपत राय और अनिल मिश्रा के खातों की भी जांच
    सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान ट्रस्ट से जुड़े कुछ प्रमुख लोगों के बैंक खातों की भी पड़ताल की जा रही है। बताया जा रहा है कि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का बैंक ऑफ बड़ौदा की अयोध्या शाखा में एक खाता है, जिसे कई वर्ष पहले दिल्ली से अयोध्या स्थानांतरित किया गया था। फिलहाल इस खाते में बहुत कम राशि है और लंबे समय से कोई उल्लेखनीय लेनदेन नहीं हुआ है।

    इसी शाखा में ट्रस्ट से जुड़े अनिल मिश्रा का भी बैंक खाता है। सूत्रों का दावा है कि उन्होंने हाल ही में एक इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने के लिए करीब 20 लाख रुपये का बैंक ऋण लिया था। हालांकि, पुलिस इस जानकारी का सत्यापन कर रही है और अब तक जांच एजेंसियों ने इन खातों का चोरी से कोई सीधा संबंध होने की पुष्टि नहीं की है।

    इन खातों की भी मांगी गई जानकारी
    पुलिस ने बैंक ऑफ बड़ौदा से आरोपी अविनाश शुक्ला, मनीष यादव और सुप्रिया मिश्रा के खातों का विवरण भी मांगा था। बैंक ने अपने जवाब में बताया कि अविनाश शुक्ला और मनीष यादव के नाम से खाते मौजूद हैं, जबकि सुप्रिया मिश्रा के नाम से इस शाखा में कोई खाता नहीं मिला।

    सूत्रों के अनुसार, मनीष यादव के खाते में फिलहाल करीब 1,400 रुपये जमा हैं और पिछले कुछ महीनों से उसमें कोई विशेष लेनदेन नहीं हुआ है। पुलिस अब अन्य बैंकों और वित्तीय रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि चोरी की रकम किसी अन्य माध्यम से तो नहीं पहुंचाई गई।

  • जुलाई की शुरुआत के साथ बदले कई नियम, आधार अपडेट, रेलवे जुर्माना, पासपोर्ट फीस और बैंकिंग सेवाओं पर दिखेगा असर

    जुलाई की शुरुआत के साथ बदले कई नियम, आधार अपडेट, रेलवे जुर्माना, पासपोर्ट फीस और बैंकिंग सेवाओं पर दिखेगा असर

    नई दिल्ली । जुलाई महीने की शुरुआत के साथ देशभर में कई महत्वपूर्ण नियमों में बदलाव लागू हो रहे हैं, जिनका सीधा असर आम नागरिकों की दैनिक जरूरतों और सेवाओं पर पड़ेगा। आधार से जुड़े अपडेट, रेलवे यात्रा के नियम, पासपोर्ट शुल्क, बैंकिंग सेवाओं तथा एलपीजी और अन्य ईंधनों की कीमतों में होने वाले बदलाव लोगों के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। ऐसे में इन नए प्रावधानों की जानकारी होना आवश्यक है ताकि किसी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके।

    आधार से जुड़े बदलाव के तहत भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण ने आधार में ईमेल आईडी अपडेट कराने की सुविधा सीमित अवधि के लिए नि:शुल्क उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। अब निर्धारित अवधि तक नागरिक बिना किसी शुल्क के अपने आधार रिकॉर्ड में ईमेल आईडी अपडेट करा सकेंगे। इससे पहले इस सेवा के लिए निर्धारित शुल्क देना पड़ता था। इस कदम का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को अपने आधार विवरण अद्यतन कराने के लिए प्रोत्साहित करना है।

    रेलवे ने भी यात्रा संबंधी नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। बिना टिकट यात्रा करते हुए पकड़े जाने पर लगाए जाने वाले जुर्माने में वृद्धि की गई है। इसके अलावा किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर जारी टिकट का उपयोग करने पर भी कड़ी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। महिला कोच में अनधिकृत रूप से यात्रा करने वाले पुरुष यात्रियों पर भी अधिक जुर्माना लगाया जाएगा। रेलवे का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य नियमों का पालन सुनिश्चित करना और यात्रियों की सुविधा एवं सुरक्षा को मजबूत करना है।

    एलपीजी सिलेंडर की कीमतों की मासिक समीक्षा भी पहली जुलाई से प्रभावी होगी। तेल विपणन कंपनियां हर महीने की पहली तारीख को घरेलू और वाणिज्यिक गैस सिलेंडरों की कीमतों की समीक्षा करती हैं। नई दरों के अनुसार कीमतों में बदलाव या उन्हें यथावत रखने का निर्णय लिया जाएगा। इसी तरह विमान ईंधन और सीएनजी की कीमतों में भी संशोधन की संभावना बनी रहती है, जिसका असर परिवहन और अन्य क्षेत्रों की लागत पर पड़ सकता है।

    पासपोर्ट सेवाओं का लाभ लेने वाले नागरिकों के लिए भी नई व्यवस्था लागू हो रही है। सामान्य और तत्काल दोनों श्रेणियों में पासपोर्ट जारी कराने के लिए निर्धारित शुल्क में संशोधन किया गया है। इसके बाद नए आवेदन करने वाले लोगों को पहले की तुलना में अधिक शुल्क का भुगतान करना होगा। विदेश यात्रा की योजना बना रहे लोगों के लिए यह बदलाव विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    बैंकिंग क्षेत्र में भी कुछ नए प्रावधान लागू हुए हैं। विशेष रूप से कुछ क्रेडिट कार्ड उपयोगकर्ताओं के लिए एयरपोर्ट लाउंज सुविधा का लाभ लेने संबंधी पात्रता शर्तों में बदलाव किया गया है। अब निर्धारित श्रेणी के कार्डधारकों को निःशुल्क लाउंज सुविधा प्राप्त करने के लिए एक निश्चित अवधि में न्यूनतम खर्च की शर्त पूरी करनी होगी। इसका उद्देश्य कार्ड उपयोग से जुड़े लाभों को नई नीति के अनुरूप व्यवस्थित करना है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि समय-समय पर किए जाने वाले ऐसे नियामकीय बदलाव प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाने और सेवाओं को बेहतर ढंग से संचालित करने के उद्देश्य से लागू किए जाते हैं। हालांकि इन परिवर्तनों का प्रभाव अलग-अलग वर्गों पर अलग हो सकता है। इसलिए आधार, पासपोर्ट, रेलवे, बैंकिंग और अन्य आवश्यक सेवाओं का उपयोग करने वाले नागरिकों के लिए नए नियमों की जानकारी रखना और उसी के अनुरूप अपनी योजनाएं बनाना महत्वपूर्ण रहेगा।

  • राम भक्तों पर गोली चलाने वाले आज आस्था की बात कर रहे, जनता ने बदली राजनीति की दिशा: रामपुर में बोले योगी आदित्यनाथ

    राम भक्तों पर गोली चलाने वाले आज आस्था की बात कर रहे, जनता ने बदली राजनीति की दिशा: रामपुर में बोले योगी आदित्यनाथ

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रामपुर में 690 करोड़ रुपये की लागत वाली 102 विकास परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने कहा कि जो लोग पहले भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाते थे और राम भक्तों के खिलाफ कार्रवाई करते थे, वही आज आस्था की बात करते दिखाई दे रहे हैं। मुख्यमंत्री ने इसे जनता की लोकतांत्रिक शक्ति का परिणाम बताते हुए कहा कि जनसमर्थन ने राजनीतिक दलों को अपना रुख बदलने के लिए मजबूर किया है।

    अपने संबोधन में योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अयोध्या आज अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान के नए स्वरूप में दिखाई दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले ऐसे हालात थे जब “जय श्रीराम” के उद्घोष पर कार्रवाई होती थी और राम मंदिर आंदोलन से जुड़े लोगों को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता था। उनका कहना था कि समय के साथ राजनीतिक परिस्थितियां बदली हैं और अब वही दल भगवान राम और आस्था की बात करते नजर आते हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता के मतदान और विश्वास ने प्रदेश की राजनीति की दिशा बदली है। उन्होंने दावा किया कि पहले जिन राजनीतिक दलों ने भगवान राम और भगवान श्रीकृष्ण के अस्तित्व को स्वीकार नहीं किया, आज वे भी सार्वजनिक रूप से धार्मिक आस्था की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता का निर्णय ही सबसे बड़ी शक्ति होता है और उसी के कारण राजनीतिक दलों को अपनी सोच बदलनी पड़ी है।

    योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में वर्ष 2017 के बाद हुए बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि रामपुर सहित पूरे उत्तर प्रदेश में विकास की नई पहचान बनी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले गरीबों और कमजोर वर्गों की जमीनों पर अवैध कब्जे होते थे तथा प्रशासनिक व्यवस्था निष्पक्ष नहीं थी। उनका कहना था कि वर्तमान सरकार ने कानून का शासन स्थापित करने और विकास को प्राथमिकता देने का प्रयास किया है।

    उन्होंने राज्य सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि डबल इंजन सरकार के सहयोग से कई ऐसी परियोजनाएं पूरी हुई हैं जिन्हें पहले असंभव माना जाता था। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने विकास की नई गति हासिल की है और राज्य आर्थिक प्रगति के नए आयाम स्थापित कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश अब तेज़ी से विकसित होने वाली अर्थव्यवस्थाओं में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है।

    सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता का अभाव था और न्यायालयों को हस्तक्षेप करना पड़ता था। उनके अनुसार वर्तमान सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने की दिशा में काम किया है, जिससे युवाओं का भरोसा बढ़ा है।

    मुख्यमंत्री ने प्रदेश की सांस्कृतिक और धार्मिक गतिविधियों का उल्लेख करते हुए कहा कि अब कांवड़ यात्रा, दुर्गा पूजा, दीपावली और श्रीकृष्ण जन्माष्टमी जैसे आयोजन बिना किसी बाधा के पूरे उत्साह और भव्यता के साथ आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण और धार्मिक आयोजनों को सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराने का प्रयास किया है।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने रामपुर के लिए स्वीकृत विभिन्न विकास परियोजनाओं को क्षेत्र की प्रगति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचे, जनसुविधाओं और विकास कार्यों के विस्तार से क्षेत्र के लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा तथा प्रदेश के समग्र विकास को नई गति प्राप्त होगी।

  • राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर VHP ने बनाई दूरी, आलोक कुमार बोले- जो हुआ वह बेहद शर्मनाक, ट्रस्ट ही जवाबदेह

    राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर VHP ने बनाई दूरी, आलोक कुमार बोले- जो हुआ वह बेहद शर्मनाक, ट्रस्ट ही जवाबदेह

    नई दिल्ली । अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े विवाद के बाद विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कामकाज से स्पष्ट दूरी बना ली है। संगठन ने कहा है कि मंदिर के संचालन और ट्रस्ट से जुड़े सभी प्रशासनिक निर्णयों की जिम्मेदारी केवल ट्रस्ट की है। वीएचपी ने पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग करते हुए इसे अत्यंत गंभीर और दुर्भाग्यपूर्ण घटनाक्रम बताया है।

    वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि राम जन्मभूमि आंदोलन में संगठन की भूमिका मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त होने तक सीमित थी। उनके अनुसार सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद गठित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट स्वतंत्र संस्था के रूप में कार्य कर रहा है और उसके प्रशासनिक तथा वित्तीय निर्णयों से वीएचपी का कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंदिर के निर्माण और संचालन की जिम्मेदारी ट्रस्ट पर ही है।

    आलोक कुमार ने कहा कि देश के किसी भी हिस्से में मंदिरों का संचालन करना वीएचपी का दायित्व नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रस्ट के निर्णयों के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ या सरकार को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा। उनके अनुसार जिस संस्था को मंदिर के संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई है, वही उसके सभी निर्णयों और परिणामों के लिए उत्तरदायी है।

    उन्होंने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव के रूप में चंपत राय के कार्यों से भी स्वयं को अलग बताया। उनका कहना था कि ट्रस्ट के प्रशासनिक निर्णयों और वित्तीय मामलों की जिम्मेदारी ट्रस्ट की है और किसी अन्य संगठन को इसके लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। इस बयान को मौजूदा विवाद के बीच वीएचपी के स्पष्ट रुख के रूप में देखा जा रहा है।

    चढ़ावा विवाद के बाद ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और दान राशि के प्रबंधन को लेकर सवाल लगातार उठ रहे हैं। प्रारंभिक जांच के बाद मामले की गंभीरता बढ़ने से ट्रस्ट के भीतर भी बदलाव देखने को मिले हैं। इसी क्रम में नैतिक आधार पर चंपत राय ने अपने पद से इस्तीफा दिया, जबकि ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने भी पद छोड़ दिया। इन घटनाक्रमों के बाद पूरे मामले की जांच और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

    आलोक कुमार ने कहा कि अयोध्या में जो कुछ भी हुआ, उससे देश और दुनिया के करोड़ों श्रद्धालु आहत हुए हैं। उनके अनुसार जिन लोगों ने वर्षों तक राम मंदिर आंदोलन का समर्थन किया, आर्थिक सहयोग दिया और अपनी आस्था इस अभियान से जोड़ी, उनके लिए यह घटनाक्रम बेहद पीड़ादायक है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं धार्मिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर भी असर डालती हैं, इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

    उन्होंने यह भी दोहराया कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद वीएचपी ने सार्वजनिक रूप से स्पष्ट कर दिया था कि संगठन न तो मंदिर का निर्माण करेगा और न ही उसका संचालन करेगा। इसके बाद ट्रस्ट स्वतंत्र रूप से अपने सभी निर्णय लेता रहा है। इसलिए ट्रस्ट से जुड़े किसी भी प्रशासनिक या वित्तीय विवाद की जवाबदेही उसी संस्था की है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि देश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में शामिल राम मंदिर से जुड़े इस विवाद की निष्पक्ष जांच न केवल तथ्यों को स्पष्ट करेगी, बल्कि श्रद्धालुओं के विश्वास को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। आने वाले समय में जांच की दिशा और उसके निष्कर्ष इस पूरे मामले में आगे की कार्रवाई तय करने में अहम साबित होंगे।