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  • सीएम रेखा गुप्ता का संदेश: बेटियों को अवसर और आजादी दें, समाज और परिवार भी उठाएं जिम्मेदारी

    सीएम रेखा गुप्ता का संदेश: बेटियों को अवसर और आजादी दें, समाज और परिवार भी उठाएं जिम्मेदारी

    नई दिल्ली। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने महिला बुद्धिजीवियों के राष्ट्रीय सम्मेलन ‘भारती-नारी से नारायणी’ को संबोधित करते हुए कहा कि महिला सशक्तीकरण सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हर परिवार और समाज की जिम्मेदारी भी है। उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं के लिए लगातार योजनाएं चला रही है, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और अपने पैरों पर खड़ी हो सकें, लेकिन समाज को भी बेटियों को अवसर और आजादी देने की जिम्मेदारी उठानी होगी।

    सीएम रेखा गुप्ता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल का उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने लाल किले से खुले में शौच बंद करने और शौचालय बनाने की बात की। इससे पहले समाज और राजनीति में इसे गंभीरता से नहीं लिया गया था। प्रधानमंत्री की पहल से लाखों शौचालय बनाए गए और महिलाओं का जीवन आसान हुआ। पहले महिलाओं को घर में अंगीठी पर लकड़ी जलानी पड़ती थी, लेकिन अब गैस सिलेंडर उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे उनका जीवन सुरक्षित और आरामदायक हुआ।

    उन्होंने महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक अधिकार भी दिए जाने का जिक्र किया। चाहे बैंक अकाउंट खोलना हो, मुद्रा लोन लेना हो, महिलाओं के नाम घर देना हो या राजनीति में 33 प्रतिशत आरक्षण देना हो, सरकार और प्रधानमंत्री मोदी ने महिलाओं के लिए नए रास्ते खोले हैं।

    रेखा गुप्ता ने दिल्ली सरकार की नई योजना ‘लखपति बिटिया योजना’ का भी उल्लेख किया। इस योजना के तहत बेटी की शिक्षा को ग्रेजुएशन तक पूरा करने पर उसके खाते में जन्म से लेकर हर पड़ाव पर पैसा जमा किया जाएगा, जिससे लगभग सवा लाख रुपये तक की राशि बेटी को मिल सकेगी और वह आत्मनिर्भर बन सके। पहले यह योजना केवल दसवीं तक ही सीमित थी।

    सीएम ने समाजसेवा और महिलाओं की मदद के लिए काम करने वाले संगठनों, जैसे सेविका समिति का समर्थन करने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने माता-पिता से कहा कि अपनी बेटियों को हर अवसर और निर्णय लेने की आजादी दें। जो मौके आपको नहीं मिले, वह अपनी बेटी को जरूर दें। जब हर मां अपनी बेटी के लिए रास्ता बनाएगी, तो समाज भी अपने आप ऊंचाइयों तक पहुंचेगा।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि महिला सशक्तीकरण केवल सरकारी योजनाओं पर निर्भर नहीं है। परिवार, समाज और संगठन मिलकर ही महिलाओं को वास्तविक अवसर और आजादी दे सकते हैं। तभी कोई महिला अपनी क्षमता और सोच के अनुसार किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ सकती है।

    सीएम रेखा गुप्ता का यह संदेश महिलाओं के अधिकारों और समाज की भूमिका को उजागर करता है और हर स्तर पर महिला सशक्तीकरण की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

  • पश्चिम एशिया संकट के बीच सरकार का भरोसा, भारत के पास पेट्रोलियम का पर्याप्त भंडार

    पश्चिम एशिया संकट के बीच सरकार का भरोसा, भारत के पास पेट्रोलियम का पर्याप्त भंडार


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल व पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति श्रृंखला में आई बाधाओं के बीच केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में पेट्रोलियम का पर्याप्त भंडार मौजूद है और फिलहाल किसी तरह की कमी की आशंका नहीं है।

    पेट्रोलियम मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, देश में इस समय कच्चे तेल का लगभग 25 दिनों का अतिरिक्त भंडार उपलब्ध है। इसके साथ ही पेट्रोलियम के शोधित उत्पादों का भी करीब 25 दिनों का अतिरिक्त स्टॉक मौजूद है। इस तरह कुल मिलाकर देश के पास सात सप्ताह से अधिक की आवश्यकता पूरी करने लायक भंडार है।

    अधिकारियों ने बताया कि कुल अतिरिक्त भंडार करीब 25 करोड़ बैरल, यानी लगभग 4,000 करोड़ लीटर है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि रूस, अमेरिका, पश्चिम अफ्रीका और मध्य एशिया जैसे क्षेत्रों से कच्चे तेल का आयात लगातार जारी है। इसलिए मीडिया में चल रही यह खबर कि देश के पास केवल 25 दिन का कच्चा तेल ही बचा है, तथ्यात्मक रूप से गलत है।

    गौरतलब है कि भारत वर्तमान में छह महाद्वीपों के लगभग 40 देशों से कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का आयात करता है। ऐसे में देश की निर्भरता पूरी तरह से होर्मुज जलडमरूमध्य पर नहीं है। देश की रिफायनिंग कंपनियों की कुल शोधन क्षमता 25.8 करोड़ टन प्रतिवर्ष है, जो घरेलू मांग से काफी अधिक है। भारत में पेट्रोलियम उत्पादों की वार्षिक मांग लगभग 21 से 23 करोड़ टन के बीच रहती है।

    इसके अलावा पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण अनिवार्य किए जाने से हर साल लगभग 4.4 करोड़ बैरल, यानी करीब 60 लाख टन कच्चे तेल के आयात में कमी आती है। अधिकारियों ने यह भी कहा कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य से आयात पूरी तरह बंद भी हो जाए, तब भी देश में पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा।

    उल्लेखनीय है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई के तहत ईरान पर हुए हमले और उसके बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई के कारण पश्चिम एशिया में तनाव काफी बढ़ गया है। इसके चलते कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमतों में करीब 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

  • घरेलू गैस सिलेंडर महंगे, ईरान-इजराइल जंग के चलते सप्लाई संकट का खतरा; सरकार ने LPG उत्पादन बढ़ाने का इमरजेंसी आदेश दिया

    घरेलू गैस सिलेंडर महंगे, ईरान-इजराइल जंग के चलते सप्लाई संकट का खतरा; सरकार ने LPG उत्पादन बढ़ाने का इमरजेंसी आदेश दिया



    नई दिल्ली। देश में घरेलू गैस सिलेंडर के दामों में अचानक बढ़ोतरी हुई है। 14.2 किग्रा वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत अब 913 रुपए हो गई है, जो पहले 853 रुपए में मिलती थी। वहीं, 19 किग्रा वाले कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम 1883 रुपए हो गए हैं, यानी 115 रुपए की बढ़ोतरी हुई है। यह बढ़ोतरी 7 मार्च से लागू हो गई है।

    अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग का असर
    सरकार ने गैस के दामों में इजाफा ऐसे वक्त में किया है जब मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ रहा है और देश में रसोई गैस की किल्लत की आशंका जताई जा रही है।

    एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का आदेश
    इस खतरे को देखते हुए 5 मार्च को सरकार ने सभी ऑयल रिफाइनरी कंपनियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का आदेश दिया। अब रिफाइनरियां प्रोपेन और ब्यूटेन का इस्तेमाल सिर्फ रसोई गैस बनाने के लिए करेंगी। सभी कंपनियों को सप्लाई सरकारी तेल कंपनियोंIOC, HPCL और BPCLको करनी होगी। इसका मकसद आम जनता को बिना रुकावट सिलेंडर उपलब्ध कराना है।

    सप्लाई संकट की दो बड़ी वजहें
    स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का लगभग बंद होना
    भारत अपनी जरूरत का लगभग 50% कच्चा तेल और 54% LNG स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए आयात करता है। यह 167 किमी लंबा जलमार्ग फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। ईरान जंग के चलते यह रूट अब सुरक्षित नहीं है, जिससे तेल टैंकर नहीं गुजर रहे।

    कतर के LNG प्लांट पर ड्रोन हमले के बाद प्रोडक्शन रुका
    अमेरिका-इजराइल के स्ट्राइक के जवाब में ईरान ने UAE, कतर, कुवैत और सऊदी में अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन हमले किए। इसके बाद कतर ने अपने LNG प्लांट का प्रोडक्शन रोक दिया। भारत अपनी सालाना LNG जरूरत का लगभग 40% हिस्सा कतर से ही मंगाता है।सरकार अब इस संकट को देखते हुए एलपीजी उत्पादन बढ़ाकर घरेलू आपूर्ति को सुरक्षित बनाने में जुट गई है।

  • यूपी डिप्टी CM केशव मौर्य के हेलिकॉप्टर में हड़कंप: 2000 फीट की ऊंचाई पर डिस्प्ले बंद, अंदर धुआं भरते ही की इमरजेंसी लैंडिंग

    यूपी डिप्टी CM केशव मौर्य के हेलिकॉप्टर में हड़कंप: 2000 फीट की ऊंचाई पर डिस्प्ले बंद, अंदर धुआं भरते ही की इमरजेंसी लैंडिंग


    नई दिल्ली। लखनऊ से कौशांबी के लिए उड़ान भर रहे यूपी के डिप्टी CM केशव मौर्य का हेलिकॉप्टर शनिवार सुबह संकट में फंस गया। उड़ान शुरू होने के 15 मिनट बाद ही हेलिकॉप्टर का डिस्प्ले अचानक बंद हो गया और अंदर धुआं भरने लगा।

    पायलट ने तुरंत लखनऊ एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) को सूचित किया और इमरजेंसी लैंडिंग की अनुमति मांगी। हेलिकॉप्टर उस समय 50 किलोमीटर दूर बछरावां तक पहुंच चुका था। अनुमति मिलते ही पायलट ने विमान को वापस लखनऊ की ओर मोड़ा।

    सुरक्षित लैंडिंग के लिए फायर ब्रिगेड और एम्बुलेंस तैनात
    सुबह 11.15 बजे लखनऊ एयरपोर्ट पर हेलिकॉप्टर को सुरक्षित उतारा गया। हेलिकॉप्टर में केशव मौर्य समेत कुल 6 लोग सवार थे—दो पायलट, एक एडवाइजर, एक क्लास फोर स्टाफ और सुरक्षा गार्ड।

    2000 फीट की ऊंचाई पर तकनीकी खराबी
    लखनऊ के ला मार्टिनियर स्कूल ग्राउंड से उड़ान भरते ही हेलिकॉप्टर ने 2000 फीट की ऊंचाई तक पहुंचा। तभी पायलट को तकनीकी खराबी का पता चला। एयरपोर्ट से अनुमति लेकर हेलिकॉप्टर को लौटाया गया।

    केशव मौर्य अब दूसरे हेलिकॉप्टर से कौशांबी रवाना हुए, जहां वे दो दिवसीय सरस महोत्सव का उद्घाटन करेंगे।

    यूपी सरकार का हेलिकॉप्टर, नागरिक उड्डयन विभाग जिम्मेदार
    हेलिकॉप्टर यूपी सरकार का है और इसकी जिम्मेदारी नागरिक उड्डयन विभाग के पास है। इस विभाग के निदेशक ईशान प्रताप सिंह हैं, जो सीएम के विशेष सचिव भी हैं।

    पहले भी हो चुकी हैं इमरजेंसी लैंडिंग
    केशव मौर्य के हेलिकॉप्टर में पहले भी तीन बार तकनीकी खराबी आ चुकी है:

    28 फरवरी 2022: कुशीनगर में ईंधन की कमी के कारण इमरजेंसी लैंडिंग।
    14 फरवरी 2019: आजमगढ़ दौरे पर उड़ान भरते ही खराबी, सुरक्षित लखनऊ लैंडिंग।
    30 मार्च 2018: आजमगढ़ से लखनऊ लौटते समय फुरसतगंज में इमरजेंसी लैंडिंग।
    इस घटना ने एक बार फिर सरकारी उड़ानों और तकनीकी जांच की गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • ‘केरल स्टोरी-2’ पर राहुल गांधी की टिप्पणी, बोले- ज्यादा लोग नहीं देख रहे, यह अच्छी बात

    ‘केरल स्टोरी-2’ पर राहुल गांधी की टिप्पणी, बोले- ज्यादा लोग नहीं देख रहे, यह अच्छी बात


    नई दिल्ली। राहुल गांधी ने फिल्म The Kerala Story 2 को लेकर बड़ा बयान दिया है। कांग्रेस नेता ने कहा कि यह फिल्म ज्यादा लोग नहीं देख रहे हैं और उनके मुताबिक यह “अच्छी खबर” है।

    लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने यह बात Marian College Kuttikkanam में छात्रों से बातचीत के दौरान कही।

    चर्चा के दौरान एक छात्र ने फिल्मों को प्रचार के माध्यम के रूप में इस्तेमाल किए जाने को लेकर सवाल पूछा था, जिसके जवाब में राहुल गांधी ने अपनी राय रखी।

    ‘फिल्म खाली-खाली लग रही है’

    राहुल गांधी ने कहा कि अच्छी बात यह है कि केरल स्टोरी-2 को लेकर दर्शकों में खास रुचि दिखाई नहीं दे रही है। उनके मुताबिक यह दिखाता है कि कुछ लोग केरल की परंपराओं और संस्कृति को ठीक से समझ नहीं पाए हैं।

    उन्होंने कहा कि आज के समय में फिल्म, टेलीविजन और मीडिया को एक तरह से “हथियार” की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। राहुल के अनुसार इन माध्यमों का उपयोग लोगों को बदनाम करने, समाज में विभाजन पैदा करने और कुछ खास लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए किया जा रहा है।

    शौक और निजी जीवन पर भी की बात

    छात्रों के सवालों के जवाब में राहुल गांधी ने अपने निजी शौकों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उन्हें पढ़ना पसंद है और वे जिन विषयों में रुचि रखते हैं, उन पर काफी अध्ययन करते हैं।

    राहुल गांधी ने कहा कि वे बहुत ज्यादा फिल्में नहीं देखते, लेकिन शतरंज खेलना, मार्शल आर्ट्स करना, तैराकी और दौड़ना उन्हें पसंद है और फिट रहने के लिए नियमित व्यायाम भी करते हैं।

    केरल से बहुत कुछ सीखा

    राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने करीब पांच साल तक संसद में वायनाड का प्रतिनिधित्व किया, लेकिन फिर भी केरल को पूरी तरह समझ पाना आसान नहीं है। हालांकि वहां के लोगों से उन्होंने बहुत कुछ सीखा।

    उन्होंने एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि जब वे पहली बार वहां पहुंचे थे, तब एक बड़ी भूस्खलन त्रासदी हुई थी। उस समय लोगों ने जिस तरह एक-दूसरे की मदद की, उससे वे काफी प्रभावित हुए।

    राहुल के अनुसार केरल की परंपराएं और सामाजिक मूल्य बेहद मजबूत हैं।

    शिक्षा व्यवस्था पर भी उठाए सवाल

    राहुल गांधी ने देश की शिक्षा व्यवस्था पर भी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि कई विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति किसी खास विचारधारा के आधार पर की जा रही है। उनके मुताबिक शिक्षा को किसी एक विचारधारा तक सीमित नहीं होना चाहिए।

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर बोलते हुए राहुल गांधी ने कहा कि भारत अभी संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन के स्तर तक नहीं पहुंचा है। उन्होंने कहा कि अगर भारत को एआई क्षेत्र में आगे बढ़ना है तो देश को अपने डेटा पर मजबूत नियंत्रण रखना होगा।
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  • डिजिटल फ्रॉड के शिकार हुए तो मिलेगी राहत, RBI देगा 25 हजार रुपये तक का मुआवजा

    डिजिटल फ्रॉड के शिकार हुए तो मिलेगी राहत, RBI देगा 25 हजार रुपये तक का मुआवजा

    नई दिल्ली। देश में बढ़ते डिजिटल फ्रॉड के मामलों के बीच आम बैंक ग्राहकों को राहत देने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बड़ा कदम उठाया है। अब यदि कोई व्यक्ति ऑनलाइन ठगी का शिकार हो जाता है तो उसे अधिकतम 25,000 रुपये तक का मुआवजा मिल सकता है।

    दरअसल, इसी साल फरवरी में RBI के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने डिजिटल धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों को देखते हुए ग्राहकों को सुरक्षा देने के लिए इस योजना की घोषणा की थी। इसके तहत धोखाधड़ी वाले ट्रांजैक्शन की स्थिति में पीड़ित ग्राहक को शर्तों के साथ मुआवजा दिया जाएगा।

    एक बार ही मिलेगा मुआवजा

    RBI के प्रस्ताव के मुताबिक किसी ग्राहक को जीवन में केवल एक बार ही यह क्षतिपूर्ति दी जाएगी। यह भी तभी संभव होगा जब जांच में यह पाया जाए कि धोखाधड़ी जानबूझकर नहीं हुई और ग्राहक ने अनजाने में अपना पैसा गंवाया है।

    गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा था कि अगर किसी ग्राहक के साथ धोखाधड़ी हो जाती है, चाहे उसमें उसकी गलती हो या किसी और की, तब भी बिना ज्यादा सवाल पूछे 25,000 रुपये तक का भुगतान किया जा सकता है, बशर्ते ट्रांजैक्शन अनजाने में हुआ हो।

    ग्राहक को भी उठाना होगा कुछ नुकसान

    प्रस्ताव के अनुसार धोखाधड़ी की कुल राशि का 15 प्रतिशत हिस्सा खाताधारक को खुद वहन करना होगा। वहीं, अगर ठगी की रकम इससे ज्यादा है, तब भी मुआवजे की अधिकतम सीमा 25,000 रुपये ही रहेगी।

    कब से लागू होगा नियम

    यह प्रस्तावित नियम 1 जुलाई 2026 या उसके बाद किए गए इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग ट्रांजैक्शन पर लागू होंगे। केंद्रीय बैंक ने इस मसौदे पर 6 अप्रैल 2026 तक सभी हितधारकों से सुझाव और टिप्पणियां मांगी हैं।

    मुआवजा पाने के लिए जरूरी शर्त

    इस योजना का लाभ लेने के लिए पीड़ित ग्राहक को

    धोखाधड़ी वाले ट्रांजैक्शन की जानकारी अपने बैंक को देनी होगी

    साथ ही राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल या हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करनी होगी

    यह शिकायत 5 कैलेंडर दिनों के भीतर करना अनिवार्य होगा

    ग्राहक सुरक्षा नियमों में भी बदलाव

    RBI ने डिजिटल बैंकिंग में ग्राहकों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए नियमों में व्यापक बदलाव का प्रस्ताव भी दिया है। ड्राफ्ट के अनुसार OTP, PIN, CVV, पासवर्ड या अन्य इलेक्ट्रॉनिक ऑथेंटिकेशन के जरिए मंजूर किए गए ट्रांजैक्शन को अधिकृत इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन माना जाएगा।

    इसमें ऐसे मामलों को भी शामिल किया जाएगा, जहां ठग खुद को वैध प्राप्तकर्ता बताकर या दबाव बनाकर ग्राहकों से पैसे ट्रांसफर करा लेते हैं।
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  • आंध्र प्रदेश के शराब घोटाले में ED की बड़ी कार्रवाई, 441 करोड़ से अधिक की संपत्तियां अटैच की

    आंध्र प्रदेश के शराब घोटाले में ED की बड़ी कार्रवाई, 441 करोड़ से अधिक की संपत्तियां अटैच की


    हैदराबाद। आंध्र प्रदेश के शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कुल 441 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्तियां अटैच कर दी हैं। जांच में आरोप है कि पिछली सरकार के दौरान शराब खरीद और सप्लाई सिस्टम में हेरफेर कर हजारों करोड़ रुपए की रिश्वत ली गई थी।ईडी के अनुसार अटैच की गई संपत्तियों में बैंक बैलेंस फिक्स्ड डिपॉजिट जमीन और अन्य अचल संपत्तियां शामिल हैं।
    ये संपत्तियां मुख्य आरोपी केसिरेड्डी राजशेखर रेड्डी उनके परिवार और संबंधित कंपनियों से जुड़ी हैं। इसके अलावा अन्य आरोपियों की संपत्तियां जैसे बूनेटी चाणक्य डोनथिरेड्डी वासुदेव रेड्डी और उनके रिश्तेदारों की संपत्तियां भी जब्त की गई हैं।घोटाला उस समय का है जब राज्य में वाई एस जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली सरकार सत्ता में थी। जांच में आरोप है कि शराब दुकानों पर नियंत्रण कर लाखों करोड़ों रुपए की हेराफेरी की गई थी।

    जांच एजेंसी का आरोप

    ईडी का कहना है कि साल 2019 के विधानसभा चुनावों के बाद सरकार ने आंध्र प्रदेश स्टेट बेवरेजेज़ कॉर्पोरेशन लिमिटेड के जरिए रिटेल शराब दुकानों पर नियंत्रण स्थापित किया। इसके बाद एक आपराधिक साजिश के तहत ऑटोमेटेड सिस्टम को जानबूझकर बंद कर मैन्युअल सिस्टम लागू किया गया। इस बदलाव से अधिकारियों को सप्लाई ऑर्डर जारी करने की पूरी छूट मिल गई और शराब के कुछ ब्रांड्स को प्राथमिकता दी गई जबकि अन्य को जानबूझकर हटा दिया गया।

    जांच में आरोप है कि इस घोटाले के जरिए के. राजशेखर रेड्डी बूनेटी चाणक्य मुप्पीडी अविनाश रेड्डी तुकेकुला ईश्वर किरण कुमार रेड्डी पेला दिलीप और सैफ अहमद ने मिलकर करीब 3500 करोड़ रुपए की रिश्वत ली।

    मनी लॉन्ड्रिंग और डिस्टिलरी का दुरुपयोग

    ईडी ने बताया कि आरोपियों ने कई डिस्टिलरी पर नियंत्रण स्थापित कर उन्हें स्पेशल पर्पस व्हीकल के रूप में इस्तेमाल किया। इस दौरान राजनीतिक और प्रशासनिक प्रभाव का दुरुपयोग करते हुए अवैध धन को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया गया।

    डिस्टिलरी को असामान्य रूप से अधिक बिजनेस वॉल्यूम दिया गया और कुछ ब्रांड को विशेष रूप से बाजार में जगह दी गई। इसके अलावा शराब के ट्रांसपोर्टेशन कॉन्ट्रैक्ट में भी हेरफेर कर हर महीने लगभग 100 करोड़ रुपए का अवैध राजस्व कमाया गया। जांच में अब तक करीब 1048.45 करोड़ रुपए के मनी ट्रेल का पता लगाया गया है। ईडी ने कहा कि कई डिस्टिलरी को यह रकम नकद या सोना के रूप में देने के लिए मजबूर किया गया।

  • UN: भारत की नई शिक्षा नीति के समावेशी शिक्षा मॉडल की वैश्विक स्तर पर सराहना

    UN: भारत की नई शिक्षा नीति के समावेशी शिक्षा मॉडल की वैश्विक स्तर पर सराहना


    जिनेवा।
    संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) (United Nations Human Rights Council (UNHRC) के 61वें सत्र में भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 (National Education Policy (NEP) 2020 के समावेशी शिक्षा मॉडल की वैश्विक स्तर पर सराहना की गई है। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय (Oxford University) के शोधार्थी जैन ह्यूबल ने जेनेवा में परिषद को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की यह नीति दिव्यांग बच्चों के अधिकारों को सुरक्षित करने की दिशा में एक सशक्त कदम है।

    ह्यूबल ने रेखांकित किया कि पारंपरिक परीक्षा-केंद्रित प्रणाली के बजाय भारत अब कौशल और योग्यता आधारित शिक्षा पर जोर दे रहा है। उन्होंने विशेष रूप से अक्षर फाउंडेशन जैसे संगठनों के कार्यों का उल्लेख किया, जो सरकारी स्कूलों के साथ मिलकर दिव्यांग छात्रों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ रहे हैं।

    21 लाख विशेष आवश्यकता वाले छात्रों को बनाया जा रहा सशक्त
    ह्यूबल के अनुसार सहायक तकनीकों और लचीले शिक्षण रास्तों के माध्यम से भारत के लगभग 21 लाख विशेष आवश्यकता वाले छात्रों को सशक्त बनाया जा रहा है। उन्होंने वैश्विक समुदाय से भारत के इस होलिस्टिक (समग्र) शिक्षा मॉडल को समर्थन देने की अपील की, जो न केवल साक्षरता बल्कि रोजगार और सामाजिक भागीदारी पर भी केंद्रित है।

    अब समझिए क्या है राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020?
    बता दें कि भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 शिक्षा प्रणाली में बड़ा बदलाव लेकर आई है। यह नीति पारंपरिक परीक्षा-केंद्रित मॉडल से हटकर कौशल और योग्यता आधारित शिक्षा पर जोर देती है। एनईपी 2020 का लक्ष्य बच्चों के समान अवसर, समावेशी शिक्षा और नवाचार को बढ़ावा देना है। दिव्यांग छात्रों और पिछड़े क्षेत्रों के लिए विशेष प्रावधान इसके मुख्य हिस्से हैं।

  • भेदभाव-स्वार्थ त्यागकर देश के लिए समर्पित हों, तभी भारत संपूर्ण मानवता को शांति-समृद्धि का मार्ग दिखाएगाः मोहन भागवत

    भेदभाव-स्वार्थ त्यागकर देश के लिए समर्पित हों, तभी भारत संपूर्ण मानवता को शांति-समृद्धि का मार्ग दिखाएगाः मोहन भागवत


    जैसलमेर ।
    राजस्थान के जैसलमेर में दादा गुरुदेव आचार्य श्री जिनदत्त सूरी के 871वें चादर महोत्सव के अवसर पर सामाजिक समरसता का अनुपम दृश्य देखने को मिला। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में जैन और सनातन परंपरा के संतों सहित समाज के सभी वर्गों के लोगों का संगम हुआ। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत भी उपस्थित रहे। यह कार्यक्रम पूर्णतः समरसता और सामाजिक एकता के भाव पर आधारित था, जिसमें गच्छाधिपति जिनमणिप्रभ सागर के नेतृत्व में धर्म, तीर्थ एवं संस्कृति की रक्षा का संकल्प दोहराया गया।

    इस अवसर पर डॉ. भागवत ने समाज से केवल उपदेशों तक सीमित न रहकर आचरण में परिवर्तन लाने का आग्रह किया। उन्होंने लोगों से कहा कि अपने मित्रों और परिचितों के दायरे में विभिन्न जातियों, पंथों, भाषाओं और प्रदेशों के लोगों को शामिल करें। जब हम सुख-दुख, खान-पान और सामाजिक जीवन साझा करेंगे, तभी वास्तविक सामाजिक शक्ति प्रकट होगी।

    डॉ. भागवत ने भारतीय संस्कृति की चिरंतनता, विविधता में एकता और सामाजिक समरसता पर प्रकाश डाला। उन्होंने दादा गुरुदेव आचार्य जिन दत्त सूरी की 871 वर्ष पुरानी चादर को भारत की सनातन संस्कृति की जीवटता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह चादर उस सत्य का प्रतीक है जिसे न अग्नि जला सकती है, न शस्त्र काट सकते हैं और न ही जल भिगो सकता है। यह हमारे पूर्वजों द्वारा पहचाने गए उस शाश्वत सत्य का प्रमाण है जो सर्वत्र विद्यमान है। उन्होंने सभी को यह संकल्प दिलाया कि यदि हम आपसी भेदभाव और स्वार्थ को त्यागकर देश के लिए समर्पित हो जाएं, तो भारत न केवल परम वैभव संपन्न राष्ट्र बनेगा बल्कि एक विश्वगुरु के रूप में संपूर्ण मानवता को शांति और समृद्धि का मार्ग दिखाएगा।

    डॉ. भागवत ने जैन दर्शन के अनेकांतवाद सिद्धांत की सराहना करते हुए कहा कि सत्य इतना व्यापक है कि उस तक पहुंचने के मार्ग अलग-अलग होना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि विविधता वास्तव में एकता का शृंगार और उत्सव है, न कि विभाजन का कारण।

    अपने भाषण में उन्होंने एक रेल यात्रा की मार्मिक घटना का उल्लेख करते हुए बताया कि समाज में झगड़े और संघर्ष इसलिए होते हैं क्योंकि लोग एक-दूसरे को पहचान नहीं पाते और अपने एकत्व के भाव को भूल जाते हैं। जब मनुष्य यह समझ जाता है कि हम सब एक ही चेतना के अंश हैं, तब स्वार्थ और भेदभाव स्वतः समाप्त हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि लीग ऑफ नेशंस और संयुक्त राष्ट्र संघ जैसी वैश्विक संस्थाएं युद्धों को नहीं रोक सकतीं। इसके लिए मानव के भीतर करुणा और एकात्मता का भाव होना आवश्यक है।

    इस अवसर पर गच्छाधिपति जिन मणिप्रभसागर महाराज ने कहा कि समरसता ही राष्ट्र की वास्तविक शक्ति है। भारत का ध्वज पूरे विश्व में सम्मानपूर्वक लहराने के लिए सभी संप्रदायों के संतों को एकता और अहिंसा का मार्ग अपनाना होगा। उन्होंने भगवान महावीर और भगवान राम के जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में जातिवाद और छुआछूत का कोई स्थान नहीं है। उन्होंने युवाओं को सही दिशा देने और समाज के प्रत्येक वर्ग को साथ लेकर चलने का आह्वान किया।

    इस अवसर पर संघ और समाज के अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान चादर महोत्सव की स्मृति में डाक टिकट, विशेष सिक्के और दादा गुरुदेव पर आधारित पुस्तक का भी विमोचन किया गया। महोत्सव समिति के अध्यक्ष एवं महाराष्ट्र सरकार के मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा, संयोजक तेजराज गुलेचा तथा पद्म भूषण डॉ. डीआर मेहता सहित अनेक समाजसेवियों ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

  • जेवर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट को मिला एरोड्रम लाइसेंस

    जेवर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट को मिला एरोड्रम लाइसेंस


    नई दिल्ली/नोएडा ।
    उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर जिले के जेवर में स्थित नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (एनआईए) के लिए यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड (वाईआईएपीएल) को एयरोड्रोम लाइसेंस मिल गया है। जेवर एयरपोर्ट को इसका लंबे समय से इंतजार था।

    नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने शुक्रवार को एक बयान में बताया कि विमानन नियामक नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर के जेवर में स्थित नोएडा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के लिए यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड को एयरोड्रोम लाइसेंस दे दिया है। इससे पहले जेवर एयरपोर्ट को सिक्योरिटी क्लीयरेंस भी मिल चुका है।

    मंत्रालय के मुताबिक इस एयरपोर्ट को ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी की पूरी तरह से मालिकाना हक वाली सब्सिडियरी कंपनी वाईआईएपीएल ने उत्तर प्रदेश सरकार और भारत सरकार के साथ सरकारी निजी कंपनी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत विकसित किया है। इसका कंसेशन पीरियड 1 अक्टूबर, 2021 को 40 साल के लिए शुरू हुआ।

    मंत्रालय के मुताबिक इस एयरपोर्ट को हर मौसम में ऑपरेशन के लिए पब्लिक यूज़ कैटेगरी के तहत लाइसेंस मिला है। इसमें 10/28 ओरिएंटेशन वाला रनवे है। इसका डाइमेंशन 3,900 m×45 m है, जिसे इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (आईएलएस) और एरोनॉटिकल ग्राउंड लाइटिंग (एजीएल) सिस्टम से सपोर्ट मिलता है, जिससे इसका 24×7 ऑपरेशन हो सकता हैं। एयरोड्रम में 24 कोड C और 02 कोड D/F एयरक्राफ्ट के लिए पार्किंग स्टैंड हैं। यह एआरएफएफ कैटेगरी 9 सुविधाओं से पूरी तरह लैस है, जो बोइंग 777-300ER जैसे वाइड-बॉडी एयरक्राफ्ट को हैंडल कर सकती हैं।

    उल्लेखनीय है कि नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (एनआईए) को जेवर एयरपोर्ट के नाम से भी जाना जाता है। सरकार का लक्ष्य इसको देश के सबसे आधुनिक और बड़े एयरपोर्ट्स में शामिल करना है। इस एयरपोर्ट को मल्टी-मॉडल कार्गो हब के साथ 4 फेज में डेवलप किया जा रहा है। इसमें पहले फेज में एक रनवे और एक टर्मिनल डेवलप होगा। इससे एयरपोर्ट की कैपेसिटी हर साल लगभग 1.2 करोड़ यात्रियों को हैंडल करने की होगी। इसके सभी फेज पूरे होने के बाद इस एयरपोर्ट पर हर साल 7 करोड़ यात्री आ सकेंगे, जो दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी यूपी के लिए एक बड़ा एविएशन हब बन जाएगा।

    नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के नोडल अधिकारी शैलेंद्र भाटिया ने बताया कि जल्द ही एयरपोर्ट का उद्घाटन होगा। उनके अनुसार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से इसके उद्घाटन करने का अनुरोध कर उद्घाटन कार्यक्रम की तिथि निश्चित की जाएगी।

    उन्होंने बताया कि यहां से एयर इंडिया, आकाशा और इंडिगो ने अपने विमानों को उड़ान भरने के लिए समझौता किया है। एयरोड्रम लाइसेंस मिलने के बाद इन एयरलाइंस कंपनियां यहां पर अपना स्टाफ की नियुक्तियां और अन्य तकनीकी सुविधाओं को लगाना शुरू कर देंगे। एयरपोर्ट की सुरक्षा के लिए पहले से ही सीआईएसएफ और यूपी पुलिस तैनात है। एयरपोर्ट से अच्छी कनेक्टिविटी देने के लिए विभिन्न मार्गों और साधनों पर कार्य हो रहा है। इसके शुरू होने से उत्तर प्रदेश में निवेश, पर्यटन, लॉजिस्टिक्स और व्यापार को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। साथ ही हजारों युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

    उन्होंने बताया कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को कई चरणों में विकसित किया जा रहा है। पूर्ण रूप से विकसित होने के बाद यह देश ही नहीं एशिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट्स में शामिल हो जाएगा। इसकी क्षमता प्रतिवर्ष करोड़ों यात्रियों को संभालने की होगी और यह उत्तर प्रदेश को वैश्विक एविएशन नेटवर्क से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।