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  • Assam Elections: कांग्रेस ने जारी की पहली लिस्ट, गौरव गोगोई समेत 42 उम्मीदवारों के नाम शामिल

    Assam Elections: कांग्रेस ने जारी की पहली लिस्ट, गौरव गोगोई समेत 42 उम्मीदवारों के नाम शामिल


    नई दिल्ली।
    कांग्रेस (Congress) ने आगामी असम विधानसभा चुनाव (Assam Assembly Elections) के लिए पहली लिस्ट जारी कर दी है, जिसमें कुल 42 उम्मीदवारों के नाम शामिल हैं। इस सूची के अनुसार, असम कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और सांसद गौरव गोगोई (Gaurav Gogoi) जोरहाट विधानसभा क्षेत्र (Jorhat Assembly Constituency) से चुनाव लड़ेंगे। यह कदम चुनाव की आधिकारिक घोषणा से पहले उम्मीदवारों के नाम सामने लाकर कांग्रेस की रणनीतिक तैयारी को दर्शाता है। असम में 2016 से सत्ता से बाहर रही कांग्रेस राज्य में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए सक्रिय प्रयास कर रही है। पार्टी ने विभिन्न क्षेत्रों से प्रभावशाली और स्थानीय स्तर पर मजबूत नेता चुने हैं, ताकि मतदाताओं के बीच अच्छी पैठ बनाई जा सके।

    सूची में कांग्रेस विधायक दल के नेता देबब्रत सैकिया को नजीरा विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया गया है। पूर्व प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष रिपुन बोरा को बरचल्ला सीट से टिकट मिला है। इसके अलावा अब्दुस सोबहान अली सरकार गौरीपुर, मार्कलाइन मराक गोलपारा वेस्ट (अनुसूचित जनजाति आरक्षित), गिरीश बरुआ बोंगाईगांव और महानंद सरकार बरपेटा (अनुसूचित जाति आरक्षित) से चुनाव लड़ेंगे। रामेन सिंह राभा बोको-चायगांव (ST), नंदिता दास हाजो-सुआलकुची (SC) और सत्यब्रत कलिता कमलपुर सीट से मैदान में होंगे। इन नामों के चयन में पार्टी ने जातीय और क्षेत्रीय संतुलन पर खास ध्यान दिया है।


    किसे कहां से मिला टिकट

    प्रमुख उम्मीदवारों में मीरा बोरठाकुर गोस्वामी को डिस्पुर, दिगंत बर्मन को बरखेत्री और अशोक कुमार शर्मा को नलबाड़ी से टिकट दिया गया है। कांग्रेस ने आरक्षित सीटों पर भी मजबूत प्रत्याशी उतारे हैं, जो अनुसूचित जाति और जनजाति समुदायों के बीच पार्टी की पकड़ बढ़ाने में सहायक साबित हो सकते हैं। यह सूची पार्टी की संगठनात्मक ताकत और चुनावी तैयारियों को दिखाती है। कांग्रेस ने उम्मीदवारों की घोषणा में तेजी दिखाकर सत्ताधारी दल को संकेत दिया है कि वह इस बार असम में कड़ी चुनौती पेश करेगी।


    रणनीतिक बढ़त बनाने की कोशिश

    असम विधानसभा की 126 सीटों के लिए चुनाव अप्रैल महीने में होने की संभावना है। पिछले कई वर्षों से भारतीय जनता पार्टी के शासन वाले इस राज्य में कांग्रेस वापसी के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। पहले उम्मीदवारों की सूची जारी करके पार्टी ने रणनीतिक बढ़त बनाने की कोशिश की है। विश्लेषकों का मानना है कि आगे आने वाली सूचियां और संगठनात्मक प्रयास मिलकर कांग्रेस की स्थिति को मजबूत कर सकते हैं। यह चुनाव असम की राजनीति में अहम मोड़ साबित हो सकता है, जहां कांग्रेस पुरानी ताकत वापस हासिल करने की कोशिश में जुटी है।

  • BJP के मिशन 2027 की हरिद्वार से होगी शुरुआत, अमित शाह 7 मार्च को करेंगे शंखनाद

    BJP के मिशन 2027 की हरिद्वार से होगी शुरुआत, अमित शाह 7 मार्च को करेंगे शंखनाद


    देहरादून।
    भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) मिशन 2027 का बिगुल हरिद्वार (Haridwar) से फूंकने जा रही है। इसीलिए पार्टी ने विशेष रणनीति के तहत सरकार के चार साल पर आयोजित किए जा रहे जश्न के कार्यक्रमों की शुरूआत हरिद्वार से करने का निर्णय लिया है। सात मार्च को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) मिशन 2027 के लिए रोडमैप तय करेंगे।


    हरिद्वार ही क्यों चुना

    दरअसल, 2022 के विधानसभा चुनावों में हरिद्वार से भाजपा बुरी तरह पिछड़ गई थी। राज्य की सत्ता में लौटने के बावजूद हरिद्वार में भाजपा का प्रदर्शन निराशाजनक रहा और 11 विधानसभा सीटों में से पार्टी महज तीन सीटों पर सिमट कर रह गई। लोकसभा चुनावों में पार्टी ने हरिद्वार में अपने प्रदर्शन को सुधारा। लेकिन पार्टी की असल परीक्षा अभी विधानसभा चुनावों में होनी है। इसीलिए भाजपा ने हरिद्वार पर विशेष फोकस शुरू कर दिया है। पिछले दिनों हुई पार्टी कोर ग्रुप की बैठक में हारी हुई सीटों पर फोकस करने का निर्णय लिया गया था।


    अमित शाह की शीर्ष नेताओं संग बैठक

    जिसके लिए सबसे पहले हरिद्वार को चुना गया है। सरकार के चार साल पर आयोजित होने वाले जश्न के कार्यक्रमों की शुरूआत भी इसी रणनीति के तहत हरिद्वार से की जा रही है। पार्टी सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सात मार्च को हरिद्वार में विशाल जनसभा को संबोधित करने के साथ ही संगठन के शीर्ष नेताओं के साथ भी बैठक करेंगे। जिसमें आगामी रणनीति पर मुहर लगाई जाएगी।


    हार के बावजूद कांग्रेस का अच्छा रहा प्रदर्शन

    हरिद्वार में 2022 के विधानसभा चुनावों में भाजपा जहां सिर्फ तीन सीटों पर सिमट गई वहीं कांग्रेस ने पांच सीटें जीत ली थी। बाद में हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने मंगलौर सीट भी अपने कब्जे में कर ली। इस समय कांग्रेस के पास हरिद्वार जिले की ज्वालापुर, भगवानपुर, झबरेड़ा, पिरान कलियर, मंगलौर और हरिद्वार ग्रामीण सीटों को मिलाकर कुल छह विधायक हैं। इसके अलावा हरिद्वार में एक सीट बसपा और एक निर्दलीय ने जीती थी।


    हरिद्वार में सिर्फ तीन सीटें जीती थी

    2022 के विधानसभा चुनावों में हरिद्वार में भाजपा सिर्फ तीन सीटों को जीत पाई थी। उनमें हरिद्वार, बीएचईएल रानीपुर और रुड़की हैं। जबकि अन्य सीटों पर कांग्रेस, बसपा और निर्दलीय उम्मीदवार जीतकर आए हैं।

  • Iran War: 3 दिन में एक हजार से अधिक फ्लाइट्स हुई रद्द, जानें दिल्ली Airport के हाल?

    Iran War: 3 दिन में एक हजार से अधिक फ्लाइट्स हुई रद्द, जानें दिल्ली Airport के हाल?


    नई दिल्ली।
    ईरान युद्ध (Iran War) के कारण दिल्ली एयरपोर्ट (Delhi Airport) से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें प्रभावित हुई हैं। मंगलवार को परिचालन संबंधी बाधाओं की वजह से 80 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें (International Flights) रद्द करनी पड़ीं जिनमें 36 प्रस्थान और 44 आगमन उड़ानें शामिल थीं। पिछले तीन दिनों में कुल 1,117 उड़ानें प्रभावित हुई हैं। दिल्ली एयरपोर्ट प्रशासन डायल ने फंसे हुए यात्रियों की सुविधा के लिए बैठने की अतिरिक्त व्यवस्थाएं अधिक चिकित्सा दल और सफाई टीमें तैनात की हैं ताकि यात्रियों को कम परेशानी हो।

    एक अधिकारी ने बताया कि पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण मंगलवार सुबह दिल्ली एयरपोर्ट पर कुल 80 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। इनमें 36 प्रस्थान और 44 आगमन उड़ानें शामिल हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि एमिरेट्स जैसी कुछ एयरलाइन्स ने पश्चिम एशिया के लिए अपनी सेवाएं आंशिक रूप से फिर से शुरू कर दी हैं।

    उड़ानों पर नजर रखने वाली वेबसाइट ‘फ्लाइटरडार24 डॉट कॉम’ पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दुबई जा रही एमिरेट्स की उड़ान ईके-513 हवाई क्षेत्र के प्रतिबंधों की वजह से दिल्ली वापस आ गई। दिल्ली एयरपोर्ट प्रशासन डायल ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया कि पश्चिम एशिया की मौजूदा राजनीतिक स्थिति के कारण पश्चिम की ओर जाने वाली कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में देरी हो रही है या समय-सारिणी में बदलाव किया जा रहा है।

    पिछले 3 दिन में पश्चिम एशिया संकट की वजह से भारतीय एयरलाइनों ने 1,117 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द कर दी हैं। इसी दौरान एयर इंडिया ने मंगलवार को दुबई से दिल्ली के लिए एक उड़ान भरी जिसमें 149 यात्री शामिल थे। एयरलाइन ने एक्स पर जानकारी दी कि वे उड़ान एआई 916डी से दुबई से आए यात्रियों और चालक दल का स्वागत करते हैं। पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात के बीच यह किसी भारतीय एयरलाइन की पहली उड़ान है जो आज 149 यात्रियों और चालक दल के आठ सदस्यों के साथ नई दिल्ली पहुंची।

    दुबई में फंसे एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस के 143 क्रू सदस्य मंगलवार को एअर इंडिया की विशेष उड़ान एआई918डी से दिल्ली लौट आए। इसके साथ ही दुबई से एमिरेट्स की एक अन्य उड़ान ईके512 भी मंगलवार तड़के दिल्ली हवाई अड्डे पर उतरी जबकि संकट के कारण रद्द हुई उड़ानों के यात्रियों की मदद के लिए डायल ने कई जरूरी कदम उठाए हैं। अधिकारी ने बताया कि फंसे हुए यात्रियों के लिए बैठने की 400 से अधिक अतिरिक्त व्यवस्थाएं की गई हैं। यही नहीं दो अतिरिक्त मेडिकल टीम भी तैनात की गई हैं।

  • ईरान-इजरायल युद्ध लंबा चला तो भारत में खाद और उर्वरक की हो सकती है किल्लत

    ईरान-इजरायल युद्ध लंबा चला तो भारत में खाद और उर्वरक की हो सकती है किल्लत


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर अब सिर्फ तेल और गैस पर ही नहीं, बल्कि भारत के कृषि और व्यापार क्षेत्र पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच जंग लंबी खिंचती है और खाड़ी देशों में तनाव बढ़ता है, तो भारत को पेट्रोलियम उत्पादों के साथ-साथ उर्वरक, खाद्य सामग्री और अन्य महत्वपूर्ण वस्तुओं की सप्लाई में भी समस्या हो सकती है।
    उर्वरक की आपूर्ति हो सकती है प्रभावित
    भारत यूरिया और फॉस्फेट जैसे उर्वरकों के बड़े हिस्से के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर है। विशेष रूप से डीएपी और यूरिया का करीब 46 प्रतिशत आयात अकेले ओमान से होता है। अगर होर्मुज स्ट्रेट बंद होता है, तो उर्वरक की कमी के कारण कृषि क्षेत्र पर सीधे असर पड़ेगा और कीमतों में तेजी आएगी।

    सोना और अन्य आयातित उत्पाद महंगे हो सकते हैं
    संयुक्त अरब अमीरात और अन्य खाड़ी देशों से भारत में सोने का आयात होता है। शिपिंग लागत बढ़ने से सोने की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। इसके अलावा खजूर और कुछ प्रोसेस्ड फूड जैसे उत्पादों की सप्लाई भी प्रभावित हो सकती है। भारत अपनी कुल खजूर का लगभग 80-90 प्रतिशत खाड़ी देशों से आयात करता है, खासकर यूएई और ओमान से। तनाव बढ़ने और समुद्री मार्ग बंद होने की स्थिति में इन उत्पादों की कीमतों में उछाल आ सकता है।

    निर्यात क्षेत्र भी होगा प्रभावित
    भारत के निर्यात पर भी खाड़ी देशों में तनाव का असर पड़ेगा। प्रमुख क्षेत्रों में शामिल हैं:-

    खाद्यान्न और चावल: सऊदी अरब, ईराक, यूएई और ओमान भारत के बड़े खरीदार हैं। समुद्री मार्ग बंद होने पर शिपमेंट में देरी होगी, नई आपूर्ति रूट लंबा होगा और ढुलाई लागत बढ़ेगी। भारत का लगभग 50 प्रतिशत बासमती निर्यात खाड़ी देशों और ईरान को जाता है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने करीब 60 लाख टन बासमती निर्यात किया, जिसकी कीमत लगभग 50,312 करोड़ रुपये थी।

    मांस और समुद्री उत्पाद: जमी हुई मछली और झींगा जैसी वस्तुएं खाड़ी देशों में बड़ी मांग में हैं। लॉजिस्टिक बाधाओं से निर्यात घट सकता है।

    फार्मास्यूटिकल्स: भारत जेनेरिक दवाओं का बड़ा सप्लायर है। आपूर्ति बाधित होने पर निर्यात राजस्व प्रभावित होगा और कंपनियों को सामान पहुंचाने में मुश्किलें आएंगी।

    इंजीनियरिंग और ऑटो पार्ट्स: मशीनरी, ऑटो पार्ट्स और निर्माण सामग्री की खेप में देरी से विशेषकर एमएसएमई प्रभावित होंगे। जनवरी में खाड़ी देशों को मशीनरी निर्यात में 16 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई थी।

    कपड़ा और परिधान: खाड़ी देशों का बाजार रेडीमेड गारमेंट और टेक्सटाइल निर्यात के लिए अहम है। भारत का खाड़ी देशों को कुल परिधान निर्यात लगभग 1.79 बिलियन डॉलर का है। शिपिंग लागत बढ़ने से प्रतिस्पर्धा घट सकती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर युद्ध लंबा चलता है और हॉर्मुज स्ट्रेट पर तनाव जारी रहता है, तो किसानों और निर्यातक दोनों के लिए चुनौतियां गंभीर रूप से बढ़ सकती हैं।

  • आलीराजपुर भगोरिया हाट में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार आमने-सामने, मंच पर आदिवासी मुद्दों पर बहस

    आलीराजपुर भगोरिया हाट में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार आमने-सामने, मंच पर आदिवासी मुद्दों पर बहस



    आलीराजपुर। प्रदेश के पारंपरिक भगोरिया पर्व के समापन अवसर पर आयोजित भगोरिया हाट में सोमवार को राजनीति की हलचल देखने को मिली। मंच पर नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार आमने-सामने नजर आए। आयोजन के दौरान आदिवासी समाज की परंपराओं और संस्कृति की चर्चा के बीच दोनों नेताओं की बयानबाजी ने इसे राजनीतिक रंग दे दिया।
    मंत्री ने दी शुभकामनाएं, योजनाओं का प्रचार:
    मंत्री विजयवर्गीय ने मंच से आदिवासी समाज को भगोरिया और होली की शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि प्रदेश की भाजपा सरकार आदिवासियों के कल्याण के लिए कई योजनाएं चला रही है। मंत्री ने यह भी दावा किया कि इन योजनाओं के माध्यम से एक परिवार को 30 से 50 हजार रुपए तक का लाभ मिल रहा है।

    सिंघार ने उठाए सवाल:
    वहीं, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मंच से सरकार और मंत्री पर तीखे सवाल उठाए और कई मुद्दों पर आलोचना की। उनके सवालों ने आयोजन को सिर्फ सांस्कृतिक उत्सव नहीं बल्कि राजनीतिक बहस का मंच बना दिया।

    राजनीतिक टिप्पणी से परहेज:
    मंत्री विजयवर्गीय ने मीडिया से चर्चा में कहा कि वे केवल भगोरिया उत्सव में शामिल होने आए हैं और किसी प्रकार की राजनीतिक बयानबाजी नहीं करेंगे। उन्होंने आदिवासी समाज की परंपरा और संस्कृति की सराहना करते हुए राजनीतिक सवालों से दूरी बनाई।

    सांस्कृतिक और राजनीतिक संतुलन:
    भगोरिया पर्व आदिवासी समाज की प्रमुख सांस्कृतिक धरोहर है। इस बार का हाट आयोजन न केवल सांस्कृतिक कार्यक्रमों से भरपूर था, बल्कि इसमें राजनीतिक नेताओं की आमने-सामने की बहस ने भी उत्सव को अलग पहचान दी।

    आदिवासी कल्याण योजनाओं का जिक्र:
    मंत्री ने विभिन्न सरकारी योजनाओं का जिक्र करते हुए बताया कि आदिवासी परिवारों को प्रतिवर्ष आर्थिक लाभ पहुँचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम आदिवासी संस्कृति को बढ़ावा देने के साथ-साथ सरकार की योजनाओं को आम जनता तक पहुँचाने का अवसर भी प्रदान करते हैं।

     समारोह की खास बातें:
    भगोरिया हाट में पारंपरिक नृत्य, गीत, और आदिवासी शिल्प का प्रदर्शन हुआ। मंच पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच नेताओं की बयानबाजी ने आयोजन को सांस्कृतिक और राजनीतिक दोनों रंगों में रंग दिया।

  • बीजेपी ने राज्यसभा चुनाव के लिए 9 नामों पर लगाई मुहर, नितिन नवीन और राहुल सिन्हा को मौका

    बीजेपी ने राज्यसभा चुनाव के लिए 9 नामों पर लगाई मुहर, नितिन नवीन और राहुल सिन्हा को मौका


    नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी ने आगामी राज्यसभा चुनाव के मद्देनज़र अपने 9 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। पार्टी ने बिहार, असम, छत्तीसगढ़, हरियाणा, ओडिशा और पश्चिम बंगाल से प्रत्याशियों के नामों की घोषणा की है। टिकट वितरण में संगठनात्मक पकड़ और राजनीतिक सक्रियता को प्राथमिकता दी गई है।

    देश के 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों पर 16 मार्च को मतदान होना है। चुनाव की अधिसूचना जारी हो चुकी है और नामांकन की अंतिम तिथि 5 मार्च निर्धारित की गई है।

    बिहार से पार्टी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया है। वे पटना के बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र से पांच बार विधायक रह चुके हैं और राज्य की राजनीति में उनकी मजबूत पहचान है। इसी राज्य से युवा नेता शिवेश कुमार को भी उम्मीदवार घोषित किया गया है। बिहार में कुल 5 सीटों पर चुनाव होना है।

    पश्चिम बंगाल से पार्टी ने राहुल सिन्हा को मैदान में उतारा है, जो राज्य में बीजेपी के प्रमुख चेहरों में गिने जाते हैं।

    असम में तीन सीटों के लिए होने वाले चुनाव में पार्टी ने तेराश गोवाला और जोगेन मोहन को प्रत्याशी बनाया है। दोनों नेता राज्य की राजनीति में सक्रिय और प्रभावशाली भूमिका निभाते रहे हैं।

    ओडिशा से मनमोहन समल और सुजीत कुमार को टिकट दिया गया है। राज्य में बीजेपी की सरकार होने के कारण पार्टी की स्थिति को मजबूत माना जा रहा है।

    छत्तीसगढ़ में दो सीटें खाली हो रही हैं, जहां से लक्ष्मी वर्मा को उम्मीदवार घोषित किया गया है। वे भाजपा महिला मोर्चा में सक्रिय रही हैं और सामाजिक कार्यों के लिए जानी जाती हैं।

    हरियाणा में भी दो सीटों पर चुनाव होना है। यहां से पार्टी ने संजय भाटिया को उम्मीदवार बनाया है। वे प्रशासनिक पृष्ठभूमि से जुड़े रहे हैं और संगठन में अहम जिम्मेदारियां निभाते आए हैं।

  • यूपी में गो माता पूरी तरह सुरक्षित: केशव प्रसाद मौर्य ने विपक्ष को चेताया

    यूपी में गो माता पूरी तरह सुरक्षित: केशव प्रसाद मौर्य ने विपक्ष को चेताया



    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री Keshav Prasad Maurya ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में कहीं भी गोहत्या नहीं हो रही है और किसी में इतनी हिम्मत नहीं कि गो माता को खरोंच तक पहुंचा सके। उन्होंने यह बात सोमवार को वाराणसी के सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत के दौरान कही। मौर्य ने कहा कि सरकार गो संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इस दिशा में पहले भी व्यापक आंदोलन किए गए हैं।

    यह बयान Keshav Prasad Maurya ने उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक गोहत्या होने के आरोप पर प्रतिक्रिया देते हुए दिया, जो स्वामी Avimukteshwaranand द्वारा लगाए गए थे। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि स्वामी Avimukteshwaranand को कहीं भी आने-जाने और अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है, और सरकार उनके सम्मान की पूरी सुरक्षा करती है।

    केशव प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष Akhilesh Yadav पर निशाना साधते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता सब समझती है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिनके शासनकाल में शिव भक्तों, राम भक्तों और गो भक्तों पर अत्याचार हुए, वे आज गो रक्षा की बात कर रहे हैं।

    राज्य सरकार ने लगातार गो संरक्षण को प्राथमिकता दी है। गौशालाओं और गो रक्षा समितियों के माध्यम से गो माता की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है, और कानूनी प्रावधानों के तहत गोहत्या और हिंसा के मामलों पर सख्त कार्रवाई होती है। इस दिशा में सरकार ने पुलिस और वन विभाग के साथ मिलकर नियमित निगरानी प्रणाली लागू की है।

    Keshav Prasad Maurya का यह बयान प्रदेश में धार्मिक और सामाजिक स्थिरता बनाए रखने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी व्यक्ति या संगठन कानून का उल्लंघन करते हुए गो माता को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेगा, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

    इस प्रकार के राजनीतिक और धार्मिक बयान समाज में चर्चा का विषय बनते हैं, लेकिन उपमुख्यमंत्री ने इसे संतुलित और शांतिपूर्ण तरीके से पेश किया है, साथ ही यह भी सुनिश्चित किया कि गो माता की सुरक्षा और कानून की पालना दोनों सुनिश्चित हों।

  • रोज हेलमेट पहनते हैं? जानिए क्या सच में इससे झड़ते हैं बाल, एक्सपर्ट ने बताया ट्रैक्शन एलोपेसिया का कारण और इलाज

    रोज हेलमेट पहनते हैं? जानिए क्या सच में इससे झड़ते हैं बाल, एक्सपर्ट ने बताया ट्रैक्शन एलोपेसिया का कारण और इलाज


    नई दिल्ली। रोजाना बाइक या स्कूटर चलाने वाले लोगों के मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या लगातार हेलमेट पहनने से बाल झड़ने लगते हैं। सड़क सुरक्षा के लिहाज से हेलमेट अनिवार्य है, लेकिन हेयर फॉल की बढ़ती शिकायतों ने कई लोगों को चिंतित कर दिया है। विशेषज्ञों का साफ कहना है कि हेलमेट खुद समस्या नहीं है, बल्कि उसका गलत उपयोग और साफ-सफाई की कमी बाल झड़ने की वजह बन सकती है।

    Marengo Asia Hospitals की सीनियर डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. प्रियंका हेमराजानी के अनुसार, लंबे समय तक बहुत टाइट हेलमेट पहनने से ‘ट्रैक्शन एलोपेसिया’ नामक स्थिति विकसित हो सकती है। यह हेयर लॉस का एक प्रकार है, जो बालों की जड़ों पर लगातार खिंचाव और दबाव पड़ने से होता है। जब हेलमेट जरूरत से ज्यादा कसकर पहना जाता है, तो स्कैल्प के कुछ हिस्सों पर लगातार रगड़ और दबाव बनता है, जिससे हेयर फॉलिकल्स कमजोर पड़ सकते हैं।

    इसके अलावा, हेलमेट के अंदर जमा पसीना, गर्मी और प्राकृतिक तेल भी स्कैल्प की सेहत को प्रभावित करते हैं। यदि हेलमेट के अंदरूनी पैड नियमित रूप से साफ नहीं किए जाएं, तो उनमें बैक्टीरिया और फंगस पनप सकते हैं, जो डैंड्रफ, खुजली और बाल झड़ने की समस्या को बढ़ा सकते हैं। कई लोग लंबे बालों को कसकर बांधकर हेलमेट पहनते हैं, जिससे जड़ों पर अतिरिक्त खिंचाव पड़ता है और नुकसान की संभावना बढ़ जाती है।

    हालांकि, इस समस्या से बचाव संभव है। सबसे पहले, सही फिट वाला हेलमेट चुनना जरूरी है, जो सिर पर सुरक्षित बैठे लेकिन अत्यधिक दबाव न डाले। वेंटिलेशन की सुविधा वाला हेलमेट स्कैल्प को सांस लेने का मौका देता है। हेलमेट पहनने से पहले सूती या पसीना सोखने वाली इनर कैप का इस्तेमाल करने से रगड़ और नमी कम होती है। हेलमेट के अंदरूनी पैड को समय-समय पर धोना और पूरी तरह सुखाकर ही इस्तेमाल करना चाहिए।

    यदि हेयरलाइन पीछे जाने लगे, बाल पतले दिखें या असामान्य रूप से झड़ने लगें, तो तुरंत त्वचा रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है। शुरुआती चरण में ट्रैक्शन एलोपेसिया को नियंत्रित किया जा सकता है। टॉपिकल मिनोक्सिडिल, पीआरपी थेरेपी, हेयर पेप्टाइड्स और लो-लेवल लाइट थेरेपी जैसे आधुनिक उपचार उपलब्ध हैं, जो स्कैल्प में रक्त संचार बढ़ाकर नए बालों की ग्रोथ में मदद करते हैं।

    विशेषज्ञों का स्पष्ट संदेश है कि हेलमेट छोड़ना समाधान नहीं है। सही तरीके से फिट और साफ-सुथरा हेलमेट पहनकर आप अपनी सुरक्षा भी सुनिश्चित कर सकते हैं और बालों की सेहत भी बनाए रख सकते हैं।

  • खामेनेई की मौत पर प्रधानमंत्री मोदी को स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए: राहुल गांधी

    खामेनेई की मौत पर प्रधानमंत्री मोदी को स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए: राहुल गांधी


    नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने ईरान के हालात पर चिंता जताते हुए कहा है कि वहां के सुप्रीम लीडर आयतुल्ला खामेनेई की मौत लक्ष्य कर की गई हत्या है और इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को स्पष्ट रूप से अपनी राय रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में भारत को अपनी विदेश नीति के अनुरूप स्पष्ट और सुसंगत रुख अपनाना चाहिए।

    खाड़ी में बढ़ते तनाव पर जताई चिंता
    राहुल गांधी ने कहा कि ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ता संघर्ष एक संवेदनशील क्षेत्र को व्यापक युद्ध की ओर धकेल रहा है। उनके मुताबिक इस तनाव का असर खाड़ी देशों में रह रहे करीब एक करोड़ भारतीयों पर भी पड़ सकता है, जो अनिश्चितता और असुरक्षा की स्थिति का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि युद्ध जैसे हालात केवल क्षेत्रीय स्थिरता ही नहीं, बल्कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर चुनौती हैं।

    संप्रभुता के उल्लंघन की निंदा की मांग
    कांग्रेस नेता ने सुरक्षा चिंताओं को स्वाभाविक बताते हुए कहा कि किसी भी देश की संप्रभुता का उल्लंघन कर किए गए हमले संकट को और गहरा करेंगे। उन्होंने कहा कि ईरान पर एकतरफा हमलों के साथ-साथ ईरान द्वारा पश्चिम एशिया के अन्य देशों पर की जा रही कार्रवाई, दोनों की निंदा की जानी चाहिए। उनका मानना है कि हिंसा से केवल हिंसा जन्म लेती है और संवाद व संयम ही शांति का एकमात्र रास्ता है।

    भारत को नैतिक रूप से स्पष्ट होना चाहिए
    सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में राहुल गांधी ने कहा कि भारत को अंतरराष्ट्रीय कानून और मानव जीवन की रक्षा के पक्ष में खुलकर बोलना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या किसी राष्ट्राध्यक्ष की हत्या को विश्व व्यवस्था तय करने का तरीका माना जा सकता है। उनका कहना था कि भारत की विदेश नीति संप्रभुता और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान पर आधारित रही है और उसे उसी दिशा में सुसंगत बने रहना चाहिए।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को इस मुद्दे पर चुप नहीं रहना चाहिए, क्योंकि मौजूदा हालात में भारत की आवाज वैश्विक मंच पर महत्वपूर्ण है और चुप्पी देश की प्रतिष्ठा को प्रभावित कर सकती है।नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने ईरान के हालात पर चिंता जताते हुए कहा है कि वहां के सुप्रीम लीडर आयतुल्ला खामेनेई की मौत लक्ष्य कर की गई हत्या है और इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को स्पष्ट रूप से अपनी राय रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में भारत को अपनी विदेश नीति के अनुरूप स्पष्ट और सुसंगत रुख अपनाना चाहिए।

    खाड़ी में बढ़ते तनाव पर जताई चिंता
    राहुल गांधी ने कहा कि ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ता संघर्ष एक संवेदनशील क्षेत्र को व्यापक युद्ध की ओर धकेल रहा है। उनके मुताबिक इस तनाव का असर खाड़ी देशों में रह रहे करीब एक करोड़ भारतीयों पर भी पड़ सकता है, जो अनिश्चितता और असुरक्षा की स्थिति का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि युद्ध जैसे हालात केवल क्षेत्रीय स्थिरता ही नहीं, बल्कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर चुनौती हैं।

    संप्रभुता के उल्लंघन की निंदा की मांग
    कांग्रेस नेता ने सुरक्षा चिंताओं को स्वाभाविक बताते हुए कहा कि किसी भी देश की संप्रभुता का उल्लंघन कर किए गए हमले संकट को और गहरा करेंगे। उन्होंने कहा कि ईरान पर एकतरफा हमलों के साथ-साथ ईरान द्वारा पश्चिम एशिया के अन्य देशों पर की जा रही कार्रवाई, दोनों की निंदा की जानी चाहिए। उनका मानना है कि हिंसा से केवल हिंसा जन्म लेती है और संवाद व संयम ही शांति का एकमात्र रास्ता है।

    भारत को नैतिक रूप से स्पष्ट होना चाहिए
    सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में राहुल गांधी ने कहा कि भारत को अंतरराष्ट्रीय कानून और मानव जीवन की रक्षा के पक्ष में खुलकर बोलना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या किसी राष्ट्राध्यक्ष की हत्या को विश्व व्यवस्था तय करने का तरीका माना जा सकता है। उनका कहना था कि भारत की विदेश नीति संप्रभुता और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान पर आधारित रही है और उसे उसी दिशा में सुसंगत बने रहना चाहिए।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को इस मुद्दे पर चुप नहीं रहना चाहिए, क्योंकि मौजूदा हालात में भारत की आवाज वैश्विक मंच पर महत्वपूर्ण है और चुप्पी देश की प्रतिष्ठा को प्रभावित कर सकती है।

  • हरित प्रदेश’ की ओर यूपी! 9 साल में 242 करोड़ से अधिक पौधे रोपे गए

    हरित प्रदेश’ की ओर यूपी! 9 साल में 242 करोड़ से अधिक पौधे रोपे गए


    नई दिल्ली उत्तर प्रदेश को विकास के साथ-साथ हरियाली की नई पहचान देने की दिशा में Yogi Adityanath के नेतृत्व में प्रदेश सरकार लगातार अभियान चला रही है। पिछले नौ वर्षों में प्रदेश भर में 242 करोड़ से अधिक पौधे रोपे गए हैं। इसके परिणामस्वरूप राज्य का वनाच्छादन भी बढ़ा है और यूपी अब ‘हरित प्रदेश’ की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाता दिख रहा है।

    वन क्षेत्र में 559.19 वर्ग किमी की बढ़ोतरी
    Forest Survey of India की ‘भारतीय वन स्थिति रिपोर्ट-2023’ के अनुसार उत्तर प्रदेश के वनाच्छादन में 559.19 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है। यह बढ़ोतरी व्यापक स्तर पर चलाए गए पौधरोपण अभियानों का परिणाम मानी जा रही है।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2017 में सत्ता संभालने के बाद से पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता में रखा। हर वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस और वर्षाकाल के दौरान राज्यव्यापी पौधरोपण अभियान चलाया जाता है, जिसकी मॉनिटरिंग खुद मुख्यमंत्री करते हैं।

    एक दिन में 37.21 करोड़ पौधे
    प्रदेश में पिछले वर्ष 9 जुलाई को एक ही दिन में 37.21 करोड़ पौधे लगाने का रिकॉर्ड बनाया गया। यह अभियान जनभागीदारी के साथ संचालित हुआ, जिसमें विभिन्न विभागों, स्वयंसेवी संगठनों और आम नागरिकों ने हिस्सा लिया।

    इतना ही नहीं, वाराणसी के सुजाबाद डोमरी क्षेत्र में आयोजित ‘वृहद पौधरोपण कार्यक्रम’ में मात्र एक घंटे में 2,51,446 पौधों का रोपण कर नया इतिहास रचा गया। इस उपलब्धि पर Guinness World Records के जज ऋषिनाथ ने महापौर अशोक कुमार तिवारी और नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल को प्रमाणपत्र सौंपा।

    चीन का पुराना रिकॉर्ड टूटा
    सुजाबाद डोमरी के 350 बीघा क्षेत्र में विकसित ‘शहरी वन’ ने विश्व स्तर पर पहचान बनाई। इससे पहले 10 मार्च 2018 को चीन की हेनान प्रांतीय समिति ने 1,53,981 पौधों का रोपण कर रिकॉर्ड बनाया था, जिसे काशीवासियों ने पीछे छोड़ दिया।

    इस उपलब्धि को प्रधानमंत्री Narendra Modi की प्रेरणा और मुख्यमंत्री योगी के मार्गदर्शन का परिणाम बताया जा रहा है।

    ‘ग्रीन गोल्ड सर्टिफिकेट’ और जनजागरण
    प्रदेश सरकार ने 1 से 7 जुलाई 2025 के बीच जन्मे 18,348 नवजातों को ‘ग्रीन गोल्ड सर्टिफिकेट’ प्रदान किए। उनके अभिभावकों को फलदार, लकड़ी और सहजन जैसी प्रजातियों के पौधे दिए गए। ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान को भी व्यापक सराहना मिली।

    साथ ही, गांवों में ‘ग्रीन चौपाल’ की शुरुआत कर पर्यावरण संरक्षण को जनांदोलन का रूप देने की कोशिश की गई है। अब तक 15,000 से अधिक ग्रामसभाओं में ग्रीन चौपाल आयोजित की जा चुकी हैं, जहां महीने में कम से कम एक बैठक अनिवार्य है।

    2026 में 35 करोड़ पौधरोपण का लक्ष्य
    वर्षाकाल 2026 के लिए सरकार ने 35 करोड़ से अधिक पौधे लगाने का लक्ष्य तय किया है। बजट में सामाजिक वानिकी योजना के लिए 800 करोड़ रुपये, पौधशाला प्रबंधन के लिए 220 करोड़ रुपये और राज्य प्रतिकारात्मक वनरोपण योजना के लिए 189 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

    मुख्यमंत्री ने 2030 तक प्रदेश के हरित आवरण को 15 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जनभागीदारी इसी तरह बनी रही, तो यूपी न केवल विकास बल्कि पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होगा।