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  • रंग नहीं, राख की होली! कर्नाटक के इस मंदिर में अनोखी परंपरा, शिव-कामदेव से जुड़ा इतिहास

    रंग नहीं, राख की होली! कर्नाटक के इस मंदिर में अनोखी परंपरा, शिव-कामदेव से जुड़ा इतिहास


    नई दिल्ली। देशभर में 4 मार्च को होली का उल्लास छाएगा। जहां उत्तर भारत में यह पर्व प्रह्लाद और होलिका की कथा से जुड़ा है, वहीं दक्षिण भारत में इसका संबंध भगवान शिव और कामदेव की कहानी से माना जाता है। यहां होली को अहंकार के नाश और आत्मशुद्धि के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।

    गर्भगृह में साथ विराजते हैं शिव और कामदेव


    कर्नाटक का Rama Lingeshwara Kamanna Temple अपनी अनोखी परंपरा के कारण प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि यह दक्षिण भारत का पहला मंदिर है, जहां गर्भगृह में भगवान शिव के साथ कामदेव की प्रतिमा स्थापित है। शिवलिंग के समीप ध्यान मुद्रा में विराजमान कामदेव की मूर्ति इस मंदिर को विशेष बनाती है। मान्यता है कि होली के दिन यहां दोनों के एक साथ दर्शन करने से पापों का नाश होता है और जीवन से अहंकार दूर होता है।

    कामदेव और शिव की कथा

    पौराणिक मान्यता के अनुसार, देवी सती के देह त्याग के बाद भगवान शिव गहन तपस्या में लीन हो गए थे। सृष्टि के संतुलन को बनाए रखने के लिए देवताओं ने कामदेव से मदद मांगी। कामदेव ने शिव की तपस्या भंग करने के लिए कामबाण चलाया। तप भंग होने पर भगवान शिव ने क्रोधित होकर अपना तीसरा नेत्र खोला, जिसकी ज्वाला से कामदेव भस्म हो गए। यह घटना अहंकार के अंत का प्रतीक मानी जाती है।

    राख से खेली जाती है होली


    इसी कथा की स्मृति में इस मंदिर में होली के दिन रंगों की जगह राख का प्रयोग किया जाता है। श्रद्धालु माथे पर राख लगाते हैं, जिसे कामदेव के दहन और अहंकार के नाश का प्रतीक माना जाता है। यह परंपरा हमें याद दिलाती है कि शक्ति या सौंदर्य का घमंड क्षणभर में मिट सकता है।

    पांच दिन चलता है उत्सव


    रामलिंगेश्वर कामन्ना मंदिर में होली का उत्सव पांच दिनों तक मनाया जाता है। इस दौरान विशेष पूजा-अर्चना और अनुष्ठान होते हैं। भक्त चांदी की वस्तुएं, खासकर चांदी का पालना अर्पित करते हैं। मान्यता है कि संतान की इच्छा रखने वाले दंपत्ति अगर श्रद्धा से चांदी का झूला चढ़ाते हैं तो उनकी मनोकामना पूर्ण होती है।
  • इजराइली राजदूत का दावा पीएम मोदी को हमले की जानकारी नहीं थी, 28 फरवरी को दी गई मंजूरी

    इजराइली राजदूत का दावा पीएम मोदी को हमले की जानकारी नहीं थी, 28 फरवरी को दी गई मंजूरी


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्रीनरेंद्र मोदी के हालिया इजराइल दौरे के बाद ईरान पर हुए हमलों को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। पीएम मोदी 25 और 26 फरवरी को इजराइल के दौरे पर थे और ठीक दो दिन बाद 28 फरवरी को इजराइल ने अमेरिका के साथ मिलकर ईरान पर स्ट्राइक की। ऐसे में यह चर्चा तेज हो गई कि क्या भारत को पहले से इस ऑपरेशन की जानकारी थी।

    भारत में इजराइल के राजदूतरूवेन अजार ने इन सवालों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पीएम मोदी को इस हमले की पूर्व जानकारी नहीं थी। उनके मुताबिक ऑपरेशन की मंजूरी 28 फरवरी की सुबह दी गई तब तक प्रधानमंत्री मोदी अपना दौरा पूरा कर भारत लौट चुके थे।

    न्यूक्लियर खतरे को खत्म करना लक्ष्य
    राजदूत अजार ने कहा कि इजराइल का मुख्य उद्देश्य ईरान के सैन्य परमाणु कार्यक्रम को खत्म करना है। उनका आरोप है कि ईरान दशकों से मिलिट्री न्यूक्लियर प्रोग्राम विकसित करने की कोशिश कर रहा है और बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं को बढ़ा रहा है।

    उन्होंने यह भी कहा कि ईरान क्षेत्र में अपने प्रॉक्सी समूहों को फंडिंग हथियार और तकनीक मुहैया कराता है। इजराइल के अनुसार ईरान ने 2027 तक इजराइल को खत्म करने की धमकी दी थी। जून में भी इजराइल ने ईरान पर हमले किए थे और अब सहयोग से इनकार के बाद फिर ऑपरेशन शुरू किया गया।

    भारत से हुई बातचीत

    राजदूत ने बताया कि इजराइल के विदेश मंत्री ने भारत के विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर से फोन पर बात की थी। भारत ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए संवाद और स्थिरता का समर्थन किया।

    भारत लगातार कूटनीतिक समाधान की वकालत करता रहा है। प्रधानमंत्री मोदी पहले ही कह चुके हैं कि मौजूदा संकट का हल केवल बातचीत और डिप्लोमेसी से ही संभव है।

    नेतन्याहू की भूमिका
    इस पूरे घटनाक्रम के बीच इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की भूमिका भी चर्चा में है। इजराइल ने इन हमलों को प्रिएंपटिव स्ट्राइक बताया है। बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति ने भी इन हमलों में अमेरिका की भागीदारी की पुष्टि की।

    इजराइल में माहौल
    राजदूत अजार के मुताबिक इजराइल में सुरक्षा को लेकर गंभीर माहौल है। उनका कहना है कि देश लगातार मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना कर रहा है। ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई को लेकर भी इजराइल में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

    इस घटनाक्रम ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है। भारत ने साफ किया है कि वह शांति और स्थिरता का पक्षधर है तथा भारतीय नागरिकों की सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि पश्चिम एशिया में हालात किस दिशा में आगे बढ़ते हैं।

  • इजराइल अमेरिका और ईरान तनाव पर पीएम Narendra Modi का बड़ा बयान, बोले हालात बेहद चिंताजनक

    इजराइल अमेरिका और ईरान तनाव पर पीएम Narendra Modi का बड़ा बयान, बोले हालात बेहद चिंताजनक


    नई दिल्ली । मिडिल ईस्ट में इजराइल अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गंभीर चिंता है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के साथ द्विपक्षीय वार्ता के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया के हालात बेहद चिंताजनक हैं और मौजूदा संकट का समाधान केवल बातचीत और कूटनीति से ही संभव है।

    प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कहा कि भारत शांति और स्थिरता का पक्षधर है और विश्व में बढ़ते तनाव को लेकर गंभीर रूप से चिंतित है। उन्होंने कहा जब दो लोकतंत्र एक साथ खड़े होते हैं तो शांति की आवाज और भी मजबूत हो जाती है। वर्तमान संकट का हल संवाद और कूटनीतिक प्रयासों से ही निकलेगा इसके अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है।

    पीएम मोदी ने दोहराया कि भारत सभी देशों के साथ मिलकर शांति बहाली के प्रयासों में सहयोग करेगा। उन्होंने कहा कि भारत का प्राथमिक उद्देश्य क्षेत्र में स्थिरता कायम रखना और वहां रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

    नेतन्याहू से फोन पर बातचीत

    इससे पहले सोमवार देर रात प्रधानमंत्री मोदी ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बात की। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं के बीच मौजूदा क्षेत्रीय हालात पर चर्चा हुई और उन्होंने दुश्मनी को जल्द समाप्त करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

    भारतीयों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

    केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने भी कहा कि केंद्र सरकार खाड़ी देशों में फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित वापस लाने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने बताया कि विदेश मंत्रालय और भारतीय मिशन लगातार संपर्क में हैं और हालात पर नजर बनाए हुए हैं।

    जोशी ने चिंतित परिवारों को आश्वस्त करते हुए कहा कि सरकार पहले भी संकटग्रस्त देशों से भारतीयों को सुरक्षित निकाल चुकी है जैसे यूक्रेन संकट के दौरान किया गया था। उन्होंने कहा जहां भी भारतीय नागरिक हैं उनकी सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। घबराने की जरूरत नहीं है सरकार हर संभव कदम उठा रही है।

    मिडिल ईस्ट में जारी इस तनावपूर्ण स्थिति के बीच भारत का रुख स्पष्ट है संवाद कूटनीति और शांति का मार्ग। अब वैश्विक समुदाय की नजर इस बात पर टिकी है कि क्षेत्र में हालात कब सामान्य होते हैं और तनाव किस दिशा में आगे बढ़ता है।

  • भारत कनाडा साझेदारी का नया अध्याय: यूरेनियम सप्लाई पर समझौता, रक्षा और एनर्जी सेक्टर में सहयोग बढ़ेगा

    भारत कनाडा साझेदारी का नया अध्याय: यूरेनियम सप्लाई पर समझौता, रक्षा और एनर्जी सेक्टर में सहयोग बढ़ेगा


    नई दिल्ली । भारत और कनाडा के बीच ऐतिहासिक द्विपक्षीय समझौते का दौर शुरू हो गया है। सोमवार को हैदराबाद हाउस दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की मुलाकात हुई । इस बैठक में भारत को यूरेनियम की दीर्घकालिक आपूर्ति रक्षा ऊर्जा और कृषि क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर मुहर लगी।

    यूरेनियम सप्लाई समझौता

    पीएम कार्नी के दौरे का मुख्य उद्देश्य 10 साल का यूरेनियम सप्लाई समझौता है जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 3 अरब डॉलर है। कनाडा दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा यूरेनियम उत्पादक देश है और भारत अपनी तेजी से बढ़ती परमाणु ऊर्जा जरूरतों के लिए अधिक यूरेनियम खरीदना चाहता है। 2013 में लागू भारत-कनाडा न्यूक्लियर कोऑपरेशन एग्रीमेंट के बाद यह कदम दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करेगा।

    व्यापार और निवेश में बढ़ावा

    बैठक के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि भारत-कनाडा के बीच 50 बिलियन डॉलर के व्यापार का लक्ष्य है। कृषि कृषि प्रौद्योगिकी और खाद्य सुरक्षा में सहयोग को बढ़ावा देने के साथ ही भारत में पल्स प्रोटीन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की जाएगी।

    रक्षा और सुरक्षा सहयोग

    दोनो देशों ने रक्षा और सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा देने पर भी सहमति व्यक्त की। रक्षा उद्योगों समुद्री डोमेन जागरूकता और सैन्य आदान-प्रदान को बढ़ाने के लिए भारत-कनाडा रक्षा संवाद स्थापित करने का निर्णय लिया गया।

    नवाचार और तकनीकी सहयोग

    पीएम मोदी ने बताया कि दोनों देशों की नवाचार साझेदारी वैश्विक समाधानों को जन्म देगी। AI क्वांटम सुपरकंप्यूटिंग और सेमीकंडक्टर्स में सहयोग बढ़ाया जाएगा। इसके अलावा क्रिटिकल मिनरल्स पर हस्ताक्षरित समझौता आपूर्ति श्रृंखला की लचीलापन मजबूत करेगा। अंतरिक्ष क्षेत्र में स्टार्टअप्स और उद्योगों को जोड़ने के प्रयास भी तेज होंगे।

    ऊर्जा और पर्यावरण

    ऊर्जा क्षेत्र में अगली पीढ़ी की साझेदारी स्थापित की जाएगी जिसमें हाइड्रोकार्बन के साथ-साथ नवीकरणीय ऊर्जा ग्रीन हाइड्रोजन और ऊर्जा भंडारण पर विशेष जोर रहेगा। पीएम मोदी ने कहा “भारत-कनाडा की साझेदारी दुनिया को नए वैश्विक समाधान देने में सक्षम होगी। यह सहयोग केवल ऊर्जा या रक्षा तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि नवाचार तकनीकी और वैश्विक विकास के कई क्षेत्रों को छूएगा।

  • होली से पहले दिल्ली की महिलाओं और बेटियों को बड़ा तोहफा, राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने लॉन्च की चार नई योजनाएं

    होली से पहले दिल्ली की महिलाओं और बेटियों को बड़ा तोहफा, राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने लॉन्च की चार नई योजनाएं


    नई दिल्ली । होली से पहले दिल्ली की महिलाओं और बेटियों के लिए एक बड़ी सौगात दी गई है। राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने दिल्ली सरकार की ओर से महिलाओं और बालिकाओं के कल्याण के लिए चार महत्वपूर्ण योजनाओं का शुभारंभ किया। इसे नारी शक्ति को समर्पित एक बड़ा उपहार माना जा रहा है। इस अवसर पर 40,642 बालिकाओं को लगभग 100 करोड़ रुपये की डीबीटी  सहायता प्रदान की गई। सरकार का कहना है कि इन योजनाओं से बालिकाओं की पढ़ाई जारी रखने, उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहन और सामाजिक सुरक्षा को नई मजबूती मिलेगी। साथ ही महिलाओं के समग्र विकास और सशक्तिकरण में भी यह कदम अहम माना जा रहा है।

    नई योजनाओं का विवरण

    सहेली पिंक स्मार्ट कार्ड: महिलाओं को सुरक्षित और सुलभ सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराने के लिए मुफ्त बस यात्रा की शुरुआत। यह कार्ड डीटीसी बस, मेट्रो, आरआरटीएस और अन्य सार्वजनिक परिवहन में उपयोगी होगा।मुफ्त एलपीजी सिलेंडर योजना: होली पर महिलाओं और जरूरतमंद परिवारों को राहत देने के लिए लगभग 15.50 लाख राशन कार्ड धारक परिवारों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से 129 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए जाएंगे।

    दिल्ली लखपति बिटिया योजना: पुरानी लाडली योजना की तुलना में व्यापक और प्रभावी। इसमें बेटियों के लिए कुल 56,000 रुपये विभिन्न चरणों में जमा किए जाएंगे, जो 21 वर्ष की आयु तक ब्याज समेत 1 लाख रुपये से अधिक बन जाएंगे। इसका उद्देश्य बेटियों की शिक्षा और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है।महिला सशक्तिकरण और कल्याण कार्यक्रम: बेटियों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना, उनकी शिक्षा और भविष्य को मजबूत करना, और समाज में उनके सशक्तिकरण को बढ़ावा देना।

    पुरानी लाडली योजना से क्या अंतर

    नई दिल्ली लखपति बिटिया योजना में शिक्षा और आर्थिक सुरक्षा पर अधिक जोर दिया गया है। पहले जन्म और पढ़ाई के अलग-अलग चरणों पर सीमित राशि जमा होती थी, जबकि अब यह अधिक मजबूत वित्तीय आधार प्रदान करती है।

    मुफ्त LPG सिलेंडर और पिंक मोबिलिटी कार्ड
    मुफ्त एलपीजी सिलेंडर योजना से लाखों परिवारों को महंगाई में राहत मिलेगी। पिंक मोबिलिटी कार्ड महिलाओं की यात्रा को और सुरक्षित, सुविधाजनक और सुलभ बनाएगा। इससे अलग-अलग टिकट या पास की जरूरत कम होगी और सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं की सुविधा बढ़ेगी।यह पहल न केवल महिलाओं और बेटियों के कल्याण को मजबूत करेगी, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाने और समाज में समान अवसर देने की दिशा में भी अहम साबित होगी।

  • ईरान-इजराइल संघर्ष में बंकरों में कैद यूपी-बिहार के लोग, होली पर घर लौटने से हुए वंचित

    ईरान-इजराइल संघर्ष में बंकरों में कैद यूपी-बिहार के लोग, होली पर घर लौटने से हुए वंचित


    गोरखपुर। ईरान और इजराइल के बीच चल रहे संघर्ष ने होली पर घर लौटने की भारतीयों की उम्मीदों को रोक दिया है। उत्तर प्रदेश और बिहार के नागरिक जो काम या कारोबार के सिलसिले में खाड़ी देशों में गए थे मिसाइल हमलों के डर से बंकरों में शरण लिए हुए हैं और उड़ानों के रद्द होने से फंसे हुए हैं।

    मिसाइल हमलों की दहशत


    गोरखपुर के रसूलपुर निवासी अब्दुल रहमान ने दुबई से बताया कि एयरपोर्ट के पास छह मिसाइलें देखी गईं जिन्हें एयर डिफेंस ने हवा में मार गिराया। एक मिसाइल पास में गिरी लेकिन कोई क्षति नहीं हुई। धमाकों की खौफनाक आवाजें कमरे तक पहुंच रही थीं और लोग सुरक्षित स्थानों की ओर भागते रहे। शनिवार देर रात से यह स्थिति जारी है। संदीप कुमार जो मई 2024 में इजराइल गए थे ने बताया कि 2 मार्च को भारत वापसी की फ्लाइट रद्द कर दी गई। यरुशलम और पेटा टिकवा के बीच कार्यरत जनार्दन ने कहा कि रविवार सुबह छह से सात बजे तक लगातार मिसाइलों के धमाके सुनाई दिए।

    छात्र और युवा भी फंसे

    सिद्धार्थनगर के आधा दर्जन छात्र ईरान में धार्मिक शिक्षा ले रहे हैं जिनसे परिजन संपर्क नहीं कर पा रहे। सीवान के इटहरी गांव निवासी 24 वर्षीय जितेंद्र प्रसाद तीन साल बाद होली मनाने घर लौटने वाले थे लेकिन दोहा एयरपोर्ट पर उड़ानें रद्द होने की जानकारी मिली। फिलहाल 25 युवकों को एयरपोर्ट के पास अमेरिकी आर्मी बेस कैंप में ठहराया गया है।

    यरुशलम में रिहायशी इलाकों की स्थिति गंभीर

    कुशीनगर के पडरौना निवासी नंदलाल विश्वकर्मा जो वेस्ट बैंक क्षेत्र में हैं ने बताया कि रिहायशी इलाकों में स्थिति गंभीर है। बीच-बीच में सायरन बजता रहता है और लोग नजदीकी बंकरों की ओर भागते हैं। हमलावर अक्सर शब्बात के समय को निशाना बनाते हैं जो यहूदी धर्म का साप्ताहिक विश्राम दिवस है। बंकर छोटे या हल्के हमलों से बचाव कर सकते हैं लेकिन सीधे और बड़े हमलों में पर्याप्त नहीं होंगे।

    दुबई से फंसे नागरिकों का अनुभव
    गोरखपुर के वसीम जो दुबई में कंस्ट्रक्शन कंपनी में काम करते हैं ने बताया कि ठहरने के स्थान के पास मिसाइलों के धमाके और उड़ानें दिखाई दे रही हैं। हालांकि ईरान का लक्ष्य मुख्य रूप से मिलिट्री बेस कैंप हैं रिहायशी इलाके सुरक्षित रह रहे हैं।

    खामेनेई की मौत के बाद यूपी में अलर्ट

    ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत के बाद उत्तर प्रदेश में अलर्ट जारी किया गया है। पुलिस और खुफिया एजेंसियों को शिया बहुल इलाकों और प्रदर्शन संवेदनशील जिलों में पूरी सतर्कता बरतने और अतिरिक्त निगरानी रखने को कहा गया है।

  • खामेनेई की मौत पर PM मोदी की चुप्पी को लेकर विपक्ष ने साधा निशाना, कहा- भारत इतना कमजोर कभी नहीं दिखा

    खामेनेई की मौत पर PM मोदी की चुप्पी को लेकर विपक्ष ने साधा निशाना, कहा- भारत इतना कमजोर कभी नहीं दिखा


    नई दिल्ली। इजरायल और अमेरिका के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद दुनिया भर में हलचल मची हुई है। अमेरिकी सहयोगी इसे जायज ठहरा रहे हैं जबकि विरोधी इसे क्रूर हत्या बता रहे हैं। इस अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर भारत की तरफ से अब तक कोई स्पष्ट बयान नहीं आया है। विपक्षी दलों ने इस चुप्पी को लेकर मोदी सरकार पर तीखे आरोप लगाए हैं।

    कांग्रेस का हमला: नैतिक नेतृत्व पर प्रश्न

    कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि मोदी सरकार की चुप्पी भारत की नैतिक नेतृत्व क्षमता पर प्रश्न उठाती है। उनका कहना था आयतुल्ला खामेनेई और अन्य ईरानी नेताओं की हत्या पर सरकार की चुप्पी अमेरिका और इजरायल के खिलाफ कुछ भी कहने की उसकी अनिच्छा को दर्शाती है। यह भारत के मूल सिद्धांतों और विदेश नीति से समझौता है। इतिहास में भारत इतना कमजोर कभी नहीं दिखा। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने भी मोदी सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद भारत की मौन नीति उसके मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।

    समाजवादी पार्टी की प्रतिक्रिया

    समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि इस समय जब घातक हमले और युद्ध आम नागरिकों से लेकर शीर्ष नेताओं तक को प्रभावित कर रहे हैं सरकार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। साथ ही यह बताना चाहिए कि भारत एक तटस्थ देश के रूप में शांति बहाली के लिए क्या कूटनीतिक प्रयास कर रहा है।

    मोदी सरकार की मौन नीति और विदेश मंत्रालय का बयान
    ईरान की तरफ से रविवार को खामेनेई की मृत्यु की पुष्टि हो चुकी थी। इसके बावजूद भारत सरकार की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया। हालांकि विदेश मंत्रालय ने शनिवार देर रात अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों को लेकर एक सामान्य बयान जारी किया। इसमें कहा गया भारत ईरान और खाड़ी क्षेत्र में हालिया घटनाक्रम से गहरी चिंता में है। सभी पक्ष संयम बरतें तनाव बढ़ाने से बचें और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दें। तनाव कम करने के लिए संवाद और कूटनीति का मार्ग अपनाया जाना चाहिए। सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान होना चाहिए।

  • रंगों के त्योहार पर मेट्रो यात्रियों के लिए अहम सूचना, एनसीआरटीसी ने जारी की एडवाइजरी

    रंगों के त्योहार पर मेट्रो यात्रियों के लिए अहम सूचना, एनसीआरटीसी ने जारी की एडवाइजरी

    नई दिल्ली: होली के रंगोत्सव के मौके पर एनसीआरटीसी ने यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण सूचना जारी की है। एनसीआरटीसी के अनुसार 4 मार्च को नमो भारत और मेरठ मेट्रो सेवाएं सुबह 6 बजे से शाम 5 बजे तक बंद रहेंगी। यह कदम यात्रियों की सुरक्षा और ट्रेनों के संचालन की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।

    होली पर शहर में लोग रंग और पानी के साथ उत्सव मनाते हैं और इस दौरान बड़ी संख्या में लोग सार्वजनिक स्थानों पर इकट्ठा होते हैं। ऐसे में मेट्रो सेवाओं के सामान्य संचालन में बाधा आने की संभावना रहती है। एनसीआरटीसी ने बताया कि यही कारण है कि नमो भारत और मेरठ मेट्रो को पूरे दिन अस्थायी रूप से बंद करने का निर्णय लिया गया है।

    मेट्रो अधिकारियों का कहना है कि दिनभर चलने वाले रंग खेलने के कार्यक्रम और भीड़भाड़ को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है। इस दौरान यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ ट्रेनों और स्टेशनों की सुरक्षा को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।

    एनसीआरटीसी ने यात्रियों से अपील की है कि वे अपने यात्रा की योजना बनाते समय इस समय परिवर्तन को ध्यान में रखें। यात्रा में होने वाली असुविधा से बचने के लिए वैकल्पिक परिवहन का उपयोग करना बेहतर होगा। अधिकारीयों ने यह भी बताया कि शाम 5 बजे के बाद सेवाएं फिर से सामान्य रूप से शुरू कर दी जाएंगी और रात 10 बजे तक चलेंगी।

    नमो भारत और मेरठ मेट्रो दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ कॉरिडोर पर संचालित होती हैं और रोजाना हजारों यात्रियों को सुविधा प्रदान करती हैं। त्योहार के मद्देनज़र यह अस्थायी बदलाव किया गया है ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना या संचालन में बाधा को रोका जा सके।

    एनसीआरटीसी की ओर से स्पष्ट किया गया है कि यह निर्णय पूरी तरह से सुरक्षा दृष्टिकोण से लिया गया है। रंग और पानी के उपयोग से मेट्रो ट्रेनों के संचालन में तकनीकी और सुरक्षा संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए यात्रियों की सुरक्षा और सुविधाओं को बनाए रखने के लिए अस्थायी बंद आवश्यक था।

    यात्रियों के लिए सलाह दी गई है कि वे मेट्रो स्टेशन पर जाने से पहले समय का ध्यान रखें और यदि संभव हो तो सार्वजनिक या निजी वाहनों के विकल्प पर विचार करें। इसके अलावा, परिवार और दोस्तों के साथ होली के उत्सव में शामिल होने के लिए योजना बनाते समय मेट्रो की अस्थायी बंदी को ध्यान में रखें।

    एनसीआरटीसी का यह कदम यह सुनिश्चित करता है कि होली के रंगोत्सव का आनंद लेने वाले लोग सुरक्षित रहें और किसी अप्रत्याशित दुर्घटना का सामना न करें। इसके साथ ही ट्रेनों की देखभाल और संचालन में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आएगी।

  • खामेनेई के निधन पर भारत के इस गांव में तीन दिन का शोक, पूरे गांव में बंद रहा व्यापार

    खामेनेई के निधन पर भारत के इस गांव में तीन दिन का शोक, पूरे गांव में बंद रहा व्यापार


    नई दिल्ली। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह खामेनेई की मौत के बाद कर्नाटक के चिक्कबल्लापुर जिले के अलीपुर गांव में तीन दिन का अनौपचारिक शोक मनाया गया। अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमले में खामेनेई के परिवार के कई सदस्य और उनके 40 से अधिक अधिकारी मारे गए। इस घटना के बाद ईरान ने मध्य-पूर्व में अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी हमले शुरू कर दिए।

    मिनी ईरान में शोक की लहर

    अलीपुर जिसे लंबे समय से मिनी ईरान कहा जाता है शिया मुस्लिम समुदाय के लिए धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र रहा है। रविवार को खामेनेई की मृत्यु की खबर की पुष्टि होते ही पूरा गांव थम गया। स्थानीय निवासियों ने स्वेच्छा से तीन दिन के लिए दुकानें और व्यवसाय बंद रखे। सुबह से ही सड़क किनारे ठेले और बाजार बंद रहे लोग समूहों में इकट्ठा हुए और खामेनेई के चित्र के साथ धार्मिक नारे लगाए।

    विरोध जुलूस और शोक प्रदर्शन

    दो दिन के शोक के बाद अंजुमन-ए-जाफरिया कमेटी के नेतृत्व में विरोध जुलूस निकाला गया। लगभग पूरे गांव ने इसमें भाग लिया। कई लोग काले वस्त्र पहनकर खामेनेई के प्रति सम्मान और शोक व्यक्त कर रहे थे।

    ईरान से ऐतिहासिक और व्यक्तिगत संबंध

    अलीपुर गांव का ईरान से जुड़ाव केवल धार्मिक नहीं बल्कि शैक्षिक और व्यापारिक भी रहा है। गांव का मूल नाम बेल्लिकुंटे था। बीजापुर आदिलशाहियों के समय शिया मुस्लिमों का एक समूह यहां बस गया और इसे अलीपुर नाम दिया गया। अधिकांश निवासी आज भी व्यापार और शिक्षा के लिए ईरान और अरब देशों से जुड़े हैं।

    खामेनेई का इस गांव से व्यक्तिगत संबंध 1986 से जुड़ा है जब वह ईरान के राष्ट्रपति के रूप में अलीपुर आए और एक स्थानीय अस्पताल का उद्घाटन किया। स्थानीय निवासी शफीक ने बताया उनका दौरा हमारे आध्यात्मिक संबंध को मजबूत करने वाला था। हमारा जुड़ाव केवल व्यापार तक सीमित नहीं बल्कि आस्था और धार्मिक मार्गदर्शन से भी जुड़ा है।

    स्थानीय धर्मगुरुओं का बयान

    गांव के धर्मगुरु मौलाना सैयद इब्राहिम ने ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि यह हमला बिना उकसावे के और अत्यंत निंदनीय था। उनका कहना था कि दुर्भाग्य है कि कई इस्लामी देश इस हमले पर मूक दर्शक बने हुए हैं।

  • भक्ति का ढोंग और नियत में खोट: पुणे के जैन मंदिर में 'पुजारी' बनकर आए शातिर चोर ने उड़ाया चांदी का मुकुट, CCTV ने खोली पोल

    भक्ति का ढोंग और नियत में खोट: पुणे के जैन मंदिर में 'पुजारी' बनकर आए शातिर चोर ने उड़ाया चांदी का मुकुट, CCTV ने खोली पोल


    नई दिल्ली/पुणे: महाराष्ट्र के पुणे में अपराध और आस्था का एक ऐसा संगम देखने को मिला है, जिसने न केवल जैन समुदाय बल्कि आम जनता को भी झकझोर कर रख दिया है। अक्सर लोग मंदिर में शांति और सुकून की तलाश में जाते हैं, लेकिन चिंचवड़ स्थित प्रसिद्ध भगवान श्री आदेश्वर शंकेश्वर पार्श्वनाथ जैन मंदिर में एक अपराधी “भक्ति का चोला” ओढ़कर पहुँचा। उसकी मंशा भगवान के दर्शन करना नहीं, बल्कि मंदिर की बहुमूल्य संपत्ति पर हाथ साफ करना था। इस शातिर चोर ने पुजारी की वेशभूषा धारण की ताकि किसी को उस पर संदेह न हो, और फिर बड़ी ही चालाकी से करीब ढाई लाख रुपये कीमत का चांदी का मुकुट लेकर फरार हो गया।

    पूरी घटना किसी फिल्मी सीन की तरह मंदिर के CCTV कैमरों में कैद हो गई, जिसे देखकर पुलिस भी हैरान रह गई। फुटेज में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि आरोपी सबसे पहले एक सामान्य पुजारी की तरह मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश करता है। वह अपनी हरकतों से खुद को एक सच्चा श्रद्धालु दिखाने की कोशिश करता है। उसने बड़ी ही सफाई से मुकुट को एक कपड़े से ढका, फिर भगवान के सामने हाथ जोड़े और कुछ देर के लिए बाहर निकल गया। यह उसकी रेकी का हिस्सा था ताकि वह देख सके कि आसपास कोई उसे देख तो नहीं रहा है। कुछ ही मिनटों के बाद वह दोबारा वापस लौटा और मौका पाते ही एक किलो वजनी चांदी का मुकुट समेटकर चंपत हो गया।

    जब मंदिर प्रबंधन को मुकुट के गायब होने का पता चला, तो इलाके में हड़कंप मच गया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पिंपरी-चिंचवड़ क्राइम ब्रांच यूनिट-1 ने तुरंत मोर्चा संभाला। पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती आरोपी की पहचान करना था क्योंकि वह पुजारी के भेष में था। हालांकि, आधुनिक तकनीकी जांच और सीसीटीवी फुटेज के गहन विश्लेषण के आधार पर पुलिस ने आरोपी के भागने के रूट को ट्रैक किया। पुलिस की मुस्तैदी का नतीजा यह रहा कि इस शातिर अपराधी को महज 48 घंटों के भीतर दबोच लिया गया।

    गिरफ्तार आरोपी की पहचान नरेश अगरचंद जैन के रूप में हुई है। पुलिस जांच में जो खुलासा हुआ वह और भी चौंकाने वाला था; नरेश कोई नौसिखिया चोर नहीं बल्कि एक आदतन अपराधी है, जिसके खिलाफ पहले से ही चोरी और सेंधमारी के करीब 12 आपराधिक मामले दर्ज हैं। फिलहाल पुलिस इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि क्या उसने पहले भी धार्मिक स्थलों को अपना निशाना बनाया है और चोरी का माल वह किसे ठिकाने लगाता था। पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई ने भक्तों के बीच खोई हुई सुरक्षा की भावना को फिर से जगाया है, लेकिन इस घटना ने मंदिरों की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए है