Category: National

  • दुबई में फंसे भारतीयों को लेकर दिल्‍ली पहुंची पहली फ्लाइट, 149 लौटे स्‍वदेश

    दुबई में फंसे भारतीयों को लेकर दिल्‍ली पहुंची पहली फ्लाइट, 149 लौटे स्‍वदेश

    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच दुबई में फंसे भारतीयों को लेकर एयर इंडिया की पहली फ्लाइट मंगलवार सुबह नई दिल्ली पहुंची तो यात्रियों के चेहरों पर राहत साफ झलक रही थी। फ्लाइट एआई916डी सुबह करीब 11 बजे दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरी। वीटी-ईडीसी एयरक्राफ्ट में कुल 149 यात्री सवार थे। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले तथा ईरान की जवाबी कार्रवाई के बाद पूरे क्षेत्र में हालात तनावपूर्ण हो गए थे। ऐसे माहौल में यह पहली उड़ान थी, जिसके जरिए यात्रियों को सुरक्षित भारत लाया गया। इससे पहले एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस के 143 कॉकपिट और केबिन क्रू सदस्यों को भी सुरक्षित दिल्ली लाया गया था, जो दुबई में फंसे हुए थे। भारत लौटे यात्रियों ने राहत की सांस लेते हुए सरकार और एयरलाइन का आभार जताया।

    एयर इंडिया ने जताया आभार
    एयर इंडिया ने बयान जारी कर कहा कि मौजूदा हालात में उनकी टीम लगातार समन्वय के साथ काम कर रही है और स्थिति को बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। एयरलाइन ने सहयोग के लिए भारत सरकार, नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) और दुबई के स्थानीय अधिकारियों का धन्यवाद किया। साथ ही यात्रियों और क्रू मेंबर्स की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए कहा कि हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और जैसे ही अनुमति मिलेगी, और उड़ानें संचालित की जाएंगी।

    अबू धाबी-बेंगलुरु फ्लाइट से भी लौटी राहत
    सैन्य अभियानों के बाद पश्चिम एशिया के बड़े हिस्से में अस्थायी रूप से हवाई क्षेत्र बंद कर दिया गया था, जिससे खाड़ी देशों और भारत के बीच कई उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। हालांकि हवाई क्षेत्र के चरणबद्ध तरीके से खुलने के बाद कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल के साथ सीमित निकासी और वापसी उड़ानें शुरू की गईं। अबू धाबी से बेंगलुरु पहुंची फ्लाइट के यात्रियों ने बताया कि संघर्ष के दौरान हालात बेहद भयावह थे। एक यात्री ने कहा कि एयरलाइन ने होटल में ठहरने की व्यवस्था की थी, जहां आसपास विस्फोटों की आवाजें सुनाई देती थीं और मिसाइलों को रोके जाने की घटनाएं दिख रही थीं। भारत लौटने पर उन्हें बड़ी राहत महसूस हुई।

    एक अन्य यात्री ने बताया कि एतिहाद एयरवेज ने रद्द उड़ानों से प्रभावित यात्रियों के लिए होटल और अन्य सहायता उपलब्ध कराई और अबू धाबी एयरपोर्ट पर फंसे लोगों की देखभाल की। इस बीच भारत की प्रमुख विमानन कंपनियों एयर इंडिया, इंडिगो, अकासा एयर और स्पाइसजेट ने मध्य पूर्व के लिए अपनी उड़ानें अस्थायी रूप से स्थगित कर दी थीं। खाड़ी मार्गों पर निर्भर कुछ यूरोप जाने वाली उड़ानें भी प्रभावित हुईं।

    डीजीसीए की एहतियाती सलाह
    नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने एहतियात के तौर पर कई पश्चिम एशियाई देशों के ऊपर के हवाई क्षेत्र से बचने की सलाह दी थी और यात्रियों की शिकायतों के समाधान के लिए नियंत्रण कक्ष सक्रिय किए थे। इन व्यवधानों के कारण हजारों यात्री पश्चिम एशिया और भारत में फंसे रहे। अब सीमित उड़ानों की बहाली के साथ स्थिति धीरे-धीरे सामान्य होने लगी है, हालांकि सुरक्षा हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।

  • PM मोदी का विनिर्माताओं से आव्‍हान, कहा- भारत के लिए खुले हैं अवसरों के द्वार, क्वालिटी को बनाएं महामंत्र

    PM मोदी का विनिर्माताओं से आव्‍हान, कहा- भारत के लिए खुले हैं अवसरों के द्वार, क्वालिटी को बनाएं महामंत्र

    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने भारतीय उद्योग जगत से ‘गुणवत्ता’ को अपना महामंत्र बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में दुनिया विनिर्माण के क्षेत्र में विश्वसनीय और मजबूत भागीदारों की तलाश कर रही है, और यह भारत के लिए एक बड़ा अवसर है। उन्होंने कहा कि हाल में विभिन्न देशों के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) से भारतीय उद्यमियों और निर्यातकों के लिए अवसरों के नए द्वार खुले हैं, लेकिन इनका लाभ तभी उठाया जा सकता है जब भारतीय उत्पाद गुणवत्ता के उच्चतम मानकों पर खरे उतरें।

    प्रधानमंत्री मंगलवार को बजट 2026-27 पर आयोजित दूसरे वेबिनार का उद्घाटन कर रहे थे। इस दिनभर चलने वाले वेबिनार का विषय “आर्थिक वृद्धि को निरंतर संभालना और सशक्त करना” रखा गया है, जिसमें चार अलग-अलग सत्र आयोजित किए जा रहे हैं।

    एफटीए से खुले नए अवसर, आत्मविश्वास से बढ़ें उद्योग
    प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने कई देशों के साथ एफटीए किए हैं और इससे देश के लिए बड़े अवसर पैदा हुए हैं। ऐसे में उद्योग जगत की जिम्मेदारी है कि वह गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता न करे। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “आपका एक ही महामंत्र होना चाहिए—क्वालिटी, क्वालिटी और अधिक क्वालिटी।”

    उन्होंने उद्योगों से अपील की कि वे इन अवसरों का लाभ उठाने के लिए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें, नई प्रौद्योगिकियों को अपनाएं और अनुसंधान एवं विकास पर खर्च बढ़ाएं। उनका कहना था कि अनुसंधान पर कंजूसी करने के बजाय निवेश बढ़ाना समय की मांग है।

    विश्वस्तरीय से भी बेहतर उत्पाद देने की जरूरत
    प्रधानमंत्री ने भारतीय विनिर्माताओं से विश्वस्तर से भी बेहतर गुणवत्ता के उत्पाद प्रस्तुत करने का आह्वान करते हुए कहा कि गुणवत्ता पर सबसे अधिक समय, साधन और बुद्धि खर्च की जानी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि उद्योग जगत विश्व बाजार की जरूरतों का गहन अध्ययन और विश्लेषण करे तथा उसी अनुरूप अपनी विनिर्माण क्षमता विकसित करे।

    उन्होंने कहा कि आज वैश्विक अर्थव्यवस्था में बड़ा परिवर्तन हो रहा है और बाजार अब केवल लागत को नहीं देखते, बल्कि टिकाऊ और स्वस्थ उपायों को भी महत्व देते हैं। भारत इस बदलते परिदृश्य में एक विश्वसनीय विनिर्माण केंद्र के रूप में उभर सकता है।

    वेबिनार में चार अहम सत्र
    इस वेबिनार में चार प्रमुख सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। पहला सत्र विनिर्माण और उद्योगों के स्तर को उन्नत करने तथा रणनीतिक क्षेत्रों पर केंद्रित है। दूसरा सत्र सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों के लिए ऋण और बाजार सुविधाओं पर आधारित है। तीसरा सत्र नगरों के आर्थिक इलाकों की योजना से जुड़ा है, जबकि चौथा सत्र अवसंरचना विकास, लॉजिस्टिक्स और किराया जैसे विषयों पर केंद्रित है। उद्घाटन सत्र में प्रधानमंत्री ने बजट में सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यमों, अवसंरचना, बायोफार्म, मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स तथा कार्बन कैप्चर एवं स्टोरेज के विकास के लिए की गई पहलों का विशेष उल्लेख किया।

    विकसित भारत के लिए साझेदारी जरूरी
    प्रधानमंत्री ने विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों, उद्योग जगत और संस्थानों के बीच पूर्ण तालमेल पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य केवल साझेदारी के माध्यम से ही हासिल किया जा सकता है और सभी हितधारकों को मिलकर काम करना होगा।

  • 18 दिन का क्रूड, 21 दिन का पेट्रोल-डीजल, 12 दिन की गैस भारत पर पड़ सकता है गंभीर संकट..

    18 दिन का क्रूड, 21 दिन का पेट्रोल-डीजल, 12 दिन की गैस भारत पर पड़ सकता है गंभीर संकट..


    नई दिल्ली :पश्चिम एशिया में बढ़ता युद्ध ईरान और इजरायल/अमेरिका टकराव भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन गया है। ईरान ने आधिकारिक रूप से होर्मुज की खाड़ी बंद करने की चेतावनी दी है। अगर यह संघर्ष लंबे समय तक चलता है तो भारत को तेल, गैस और पेट्रोल-डीजल की कमी का सामना करना पड़ सकता है।

    इंडस्ट्री और सरकारी सूत्रों के अनुसार भारत के पास केवल 17-18 दिन की डिमांड के बराबर क्रूड स्टॉक है। वहीं पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति 20-21 दिन के लिए पर्याप्त है जबकि एलएनजी केवल 10-12 दिन का भंडार बचा है। भारत अपनी एलएनजी की करीब 90 फीसदी आपूर्ति खाड़ी देशों से करता है।

    आपात स्थिति से निपटने के लिए भारत सरकार ने कई उपायों पर काम शुरू कर दिया है। इनमें पेट्रोल और डीजल का एक्सपोर्ट रोकना, रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़ाना और एलपीजी की राशनिंग शामिल है। इंडियन ऑयल, एचपीसीएल और बीपीसीएल ने कुछ चुनिंदा रिफाइनरीज में एलपीजी उत्पादन बढ़ाने की योजना बनाई है।

    पश्चिम एशिया संकट के चलते वैश्विक तेल और गैस कीमतों में उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड करीब 10 फीसदी बढ़कर 80 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया जबकि यूरोप में गैस वायदा की कीमत 40 फीसदी से अधिक उछली। सऊदी अरब की रास तानुरा रिफाइनरी और कतर के एनएनजी प्लांट पर हमलों के कारण उत्पादन अस्थायी रूप से बंद हो गया। होर्मुज की खाड़ी में टैंकरों की आवाजाही भी प्रभावित हुई।

    विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ईरान ज्यादा समय तक खाड़ी बंद रखता है तो भारत को तत्काल कदम उठाने होंगे। सबसे पहले पेट्रोल और डीजल का एक्सपोर्ट रोका जा सकता है। इसके अलावा एलपीजी की खपत सीमित करने और घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर भी जोर दिया जाएगा। भारत ने हाल के महीनों में रूस से तेल की खरीद कम की है, लेकिन अगर वैश्विक सप्लाई संकट बढ़ता है तो रूस से आयात बढ़ाया जा सकता है।

    सरकारी सूत्रों के मुताबिक, भारत की आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने के लिए इंडस्ट्री और पेट्रोलियम मंत्रालय लगातार आपूर्ति और डिमांड की समीक्षा कर रहे हैं। हालाँकि कुछ एनालिस्ट मानते हैं कि ईरान ज्यादा समय तक खाड़ी को बंद नहीं रख पाएगा और स्थिति जल्दी सामान्य हो सकती है।

    अगर संकट लंबा खिंचता है, तो भारत की रणनीति में बड़ा बदलाव होगा। पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए एक्सपोर्ट रोके जाएंगे, घरेलू उत्पादन बढ़ाया जाएगा और रूस से तेल की सप्लाई तेज़ी से बढ़ाई जाएगी। यह संकट यह भी दर्शाता है कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा वैश्विक राजनीतिक घटनाओं से कितनी प्रभावित होती है और देश को आपात योजना हमेशा तैयार रखनी होगी।

  • RTO ई-चालान बनकर आया साइबर ठगों का जाल: युवक के खाते से उड़ाए 2.12 लाख, मोबाइल हुआ हैंग

    RTO ई-चालान बनकर आया साइबर ठगों का जाल: युवक के खाते से उड़ाए 2.12 लाख, मोबाइल हुआ हैंग


    नई दिल्ली। ग्वालियर के थाटीपुर क्षेत्र में 27 फरवरी को हुई साइबर ठगी ने लोगों की सुरक्षा पर सवाल खड़ा कर दिया। निजी कंपनी में कर्मचारी शशांक गुप्ता को वॉट्सऐप पर एक अनजान नंबर से ‘RTO ई-चालान कॉपी’ नाम की APK फाइल भेजी गई। शशांक ने फाइल खोलते ही मोबाइल हैंग हो गया, और कुछ ही समय बाद उनके बैंक खाते से कुल 2.12 लाख रुपए गायब हो गए।

    घटना का क्रम
    शशांक ने फाइल खोलते ही मोबाइल लगभग 7-8 मिनट तक हैंग हो गया।

    एक घंटे बाद मोबाइल पर संदेश आया कि कैश निकासी हुई-89 हजार, 60 हजार और 63 हजार रुपए ट्रांसफर।

    शशांक तुरंत बैंक पहुंचे, जहां उन्हें पता चला कि उनके खाते से रकम साइबर ठगी के माध्यम से निकाली गई।

    पहले थाने में शिकायत का समाधान नहीं हुआ, लेकिन साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद थाटीपुर थाना ने ई-जीरो FIR दर्ज की।

    पुलिस की जांच और चेतावनी
    थाटीपुर थाना पुलिस और साइबर विशेषज्ञों ने बताया कि ठगों ने APK फाइल में मैलवेयर इंस्टॉल किया। इसके जरिए बैंक खातों से रकम चुराई गई।
    पुलिस ने आम जनता से चेतावनी दी कि:

    वॉट्सऐप या SMS में आने वाली APK फाइल न खोलें।

    RTO चालान की जानकारी केवल सरकारी वेबसाइट या अधिकृत ऐप से ही जांचें।

    सीख और सुरक्षा
    यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि साइबर ठगी के लिए झूठे ई-चालान और फाइलें कितनी खतरनाक हो सकती हैं। सावधानी और अधिकारिक चैनल का इस्तेमाल ही सुरक्षा की कुंजी है।

  • मिडिल ईस्ट वॉर का खौफनाक असर: ओमान में दो जहाजों पर हमला, 3 भारतीय क्रू मेंबर्स की जान गई; तेल की कीमतों में लगी आग

    मिडिल ईस्ट वॉर का खौफनाक असर: ओमान में दो जहाजों पर हमला, 3 भारतीय क्रू मेंबर्स की जान गई; तेल की कीमतों में लगी आग


    नई दिल्ली :पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष अब समुद्री व्यापारिक मार्गों के लिए काल बनता जा रहा है। इजरायल-अमेरिका के हमलों और ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मृत्यु के बाद प्रतिशोध की आग में जल रहे ईरान ने ओमान की समुद्री सीमा में व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया है। इस दुखद घटना में कम से कम तीन भारतीय नागरिकों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 20 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। ओमान स्थित भारतीय दूतावास ने इस त्रासदी की पुष्टि करते हुए बताया कि ‘एमकेडी व्योम’ MKD VYOM नामक जहाज पर सवार तीन भारतीयों ने अपनी जान गंवा दी है। दूतावास अब ओमान प्रशासन के साथ मिलकर फंसे हुए अन्य भारतीयों को सुरक्षित निकालने के अभियान में जुटा है।

    जानकारी के मुताबिक, ‘एमकेडी व्योम’ पर मार्शल आइलैंड्स का झंडा लगा था और यह मस्कट तट से लगभग 52 नॉटिकल माइल्स की दूरी पर था, जब इस पर हमला हुआ। टक्कर के बाद जहाज के मुख्य इंजन कक्ष में जोरदार विस्फोट हुआ, जिससे भीषण आग लग गई। ओमान न्यूज एजेंसी के अनुसार, समुद्री सुरक्षा केंद्र के समन्वय से चलाए गए बचाव अभियान में पनामा के टैंकर ‘एमवी सैंड’ की मदद से चालक दल के 21 सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया गया है। इन बचाए गए सदस्यों में 16 भारतीय, चार बांग्लादेशी और एक यूक्रेनी नागरिक शामिल हैं। वर्तमान में ओमान की ‘रॉयल नेवी’ का पोत क्षतिग्रस्त टैंकर की निगरानी कर रहा है ताकि उस क्षेत्र से गुजरने वाले अन्य जहाजों को किसी भी संभावित खतरे से बचाया जा सके।

    यह हमला पिछले दो दिनों में हुई दूसरी बड़ी घटना है। इससे पहले होर्मुज जलडमरूमध्य में ‘एमवी स्काईलाइट’ नामक तेल टैंकर को भी निशाना बनाया गया था, जिसमें भारत और ईरान के चार चालक सदस्य घायल हुए थे। भारतीय मिशन वर्तमान में उन दो सदस्यों की तलाश के लिए स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में है जो इस हमले के बाद से लापता हैं, जिनमें से एक भारतीय बताया जा रहा है। समंदर में बढ़ते इस खतरे का सीधा असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है। होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण मार्ग के प्रभावित होने से कच्चे तेल की कीमतों में 7.6% से 8.6% तक का उछाल आया है, वहीं कतर द्वारा उत्पादन रोके जाने से यूरोप में प्राकृतिक गैस की कीमतें 40% तक बढ़ गई हैं।

  • वैश्विक चुनौती बने दुर्लभ रोग…. 10 हजार से अधिक रोगों की पहचान, दुनिया भर में 30 करोड़ पीड़ित

    वैश्विक चुनौती बने दुर्लभ रोग…. 10 हजार से अधिक रोगों की पहचान, दुनिया भर में 30 करोड़ पीड़ित


    नई दिल्ली।
    दुनिया भर (All Over World) में लगभग 30 करोड़ लोग किसी न किसी दुर्लभ रोग (Rare Diseases) से पीड़ित हैं। अब तक 6,000 से 10,000 दुर्लभ रोगों की पहचान हो चुकी है, जिनमें से करीब 72 प्रतिशत रोग आनुवांशिक कारणों से होते हैं। यह दुर्लभ रोग अब एक बड़ी वैश्विक स्वास्थ्य चुनौती (Global Health Challenge) बन चुके हैं। विश्व स्वास्थ्य सभा (डब्ल्यूएचए) ने मई 2025 में एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित करते हुए दुर्लभ रोगों को वैश्विक स्वास्थ्य प्राथमिकता घोषित किया। इस प्रस्ताव का उद्देश्य समय पर और सटीक जांच सुनिश्चित करना, उपचार सुविधाओं की उपलब्धता बढ़ाना, अनुसंधान को प्रोत्साहित करना और विशेष स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना है।

    नीति स्तर पर यह स्वीकार किया गया है कि दुर्लभ रोग केवल चिकित्सा नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक चुनौती भी हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा जारी अंतरराष्ट्रीय रोग वर्गीकरण प्रणाली आईसीडी-11 में लगभग 5,500 दुर्लभ रोगों को शामिल किया गया है।


    मरीजों तक उचित इलाज कब पहुंचेगा?

    इस मानकीकृत वर्गीकरण से डॉक्टरों और शोधकर्ताओं को रोग की पहचान, दस्तावेजीकरण और उपचार योजना बनाने में सुविधा मिलती है। आईसीडी-11 में शामिल किए जाने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डाटा संग्रह, शोध सहयोग और स्वास्थ्य नीतियों के निर्माण में भी सुधार हुआ है। सही और समय पर वर्गीकरण से निदान की प्रक्रिया तेज हो सकती है, जिससे मरीजों को उचित इलाज तक जल्दी पहुंच मिलती है।


    पहचान और निदान में देरी से बढ़ रहा मर्ज

    दुर्लभ रोगों के मामलों में सबसे बड़ी चुनौती समय पर बीमारी की पहचान हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी, जांच सुविधाओं का अभाव और आनुवंशिक परीक्षण की सीमित उपलब्धता समस्या को और जटिल बना देती है। इन रोगों का उपचार अक्सर महंगा होता है। इससे प्रभावित परिवारों पर आर्थिक और मानसिक दबाव बढ़ जाता है। 30 करोड़ से अधिक लोगों के सामने शारीरिक, मानसिक और आर्थिक चुनौतियां खड़ी होती हैं, जो स्वास्थ्य प्रणाली के लिए एक गंभीर संकेत हैं।


    भारत में बढ़ी दुर्लभ रोगों के प्रति जागरूकता

    भारत में दुर्लभ रोग उन बीमारियों को माना जाता है जो आबादी के बहुत छोटे हिस्से को प्रभावित करती हैं। इन रोगों के लिए विशेष जांच, उन्नत प्रयोगशाला सुविधाओं और विशेषज्ञ चिकित्सकों की आवश्यकता होती है। कई मामलों में मरीजों को सही निदान मिलने में लंबा समय लग जाता है। हालांकि, सरकार और स्वास्थ्य संस्थान अब दुर्लभ रोगों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और नीतिगत सुधारों पर काम कर रहे हैं, ताकि जांच और उपचार की सुविधा बेहतर बनाई जा सके।

  • आज साल का पहला चंद्रग्रहण… जानें टाइमिंग और सूतक काल का समय

    आज साल का पहला चंद्रग्रहण… जानें टाइमिंग और सूतक काल का समय


    नई दिल्ली।
    आज साल का पहला चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan 2026) लगने जा रहा है. खास बात यह है कि यह ग्रहण भारत (India) के कई हिस्सों में दिखाई देगा, इसलिए इसका सूतक काल (Sutak Period) भी मान्य होगा. ज्योतिष के अनुसार, यह चंद्र ग्रहण सिंह राशि (Leo Zodiac sign) और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में लगेगा. चंद्रमा को मन का कारक ग्रह माना जाता है, इसलिए ग्रहण का सीधा असर व्यक्ति की मानसिक स्थिति पर पड़ सकता है. ऐसे में इस ग्रहण से जुड़ी जरूरी जानकारी जैसे समय, सूतक काल के बारे में जानना बेहद जरूरी हो जाता है. तो आइए पंडित प्रवीण मिश्र द्वारा जानते हैं कि साल का पहला चंद्र ग्रहण कितने बजे से शुरू होगा, कहां कहां दिखाई देगा और सूतक काल कब से शुरू होगा।


    चंद्र ग्रहण का समय (Chandra Grahan 2026 Timing)

    साल का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च यानी आज दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर शुरू होगा और शाम 6 बजकर 46 मिनट पर समाप्त होगा. इस तरह ग्रहण की कुल अवधि लगभग 3 घंटे 27 मिनट रहेगी।


    भारत में इतने बजे से दिखाई देगा चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan 2026 kitne baje lgega in India)

    गणनाओं के मुताबिक, 3 मार्च 2026 यानी आज फाल्गुन शुक्ल पक्ष पूर्णिमा पर चंद्रमा का उदय शाम 5 बजकर 59 मिनट पर होगा, जबकि ग्रहण की शुरुआत दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर होगी. ग्रहण का (मध्यकाल) मध्यान्ह समय शाम 5 बजकर 4 मिनट पर होगा और ग्रहण का मोक्ष काल शाम 6 बजकर 47 मिनट रहेगा. पूरे भारत में आज शाम 05 बजकर 59 के बाद ही सभी स्थानों में चंद्रग्रहण देखा जा सकेगा. केवल ग्रहण का मोक्ष काल ही दिखाई देगा, जबकि ग्रहण का प्रारंभ और मध्य काल भारत में कहीं भी दिखाई नहीं देगा, क्योंकि चंद्रोदय से पहले ही ग्रहण का आरंभ हो जाएगा.


    चंद्र ग्रहण के सूतक काल की टाइमिंग (Chandra Grahan 2026 Sutak kaal Timing)

    यह चंद्र ग्रहण भारत में भी दृश्यमान होगा इसलिए इसका सूतक काल भी मान्य होगा. ऐसे में आज इस पूर्ण चंद्र ग्रहण का सूतक काल 9 घंटे पहले सुबह 6 बजकर 20 मिनट से शुरू हो चुका है.

    कहां कहां दिखाई देगा ये चंद्र ग्रहण? (Chandra Grahan 2026 When and Where to Watch)
    यह चंद्र ग्रहण भारत के पूर्वी हिस्सों में ज्यादा स्पष्ट रूप से दिखाई देगा, जबकि अन्य क्षेत्रों में आंशिक रूप से नजर आ सकता है. भारत के अलावा यह ग्रहण ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण-पूर्व एशिया, प्रशांत महासागर और अमेरिका के कुछ हिस्सों में भी दिखाई देगा.


    चंद्र ग्रहण 2026 का किन राशियों पर पड़ेगा प्रभाव (Chandra Grahan 2026 Effect)

    साल 2026 के पहले चंद्र ग्रहण से सिंह राशि, कर्क राशि और कुंभ राशि के जातकों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है. जिनकी कुंडली में चंद्रमा कमजोर है, उन्हें मानसिक तनाव या चिंता का सामना करना पड़ सकता है.


    चंद्र ग्रहण 2026 देश-दुनिया पर प्रभाव

    यह चंद्र ग्रहण सिंह राशि में लग रहा है. इस ग्रहण से सिंह और कुंभ राशि प्रभावित होंगी. इस ग्रहण से दुनिया में सत्ता में उथल-पुथल होने की संभावना है. इस ग्रहण के बाद से युद्ध की स्थितियां ज्यादा नकारात्मक हो सकती हैं. इस ग्रहण की वजह से बड़े राजनेतों की सत्ता पर असर पड़ सकता है।


    सिंह राशि वालों के लिए सलाह

    चूंकि यह ग्रहण सिंह राशि में लग रहा है, इसलिए इस राशि के लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है. आने वाले कुछ दिनों तक जल्दबाजी में कोई बड़ा फैसला न लें, विवादों से दूर रहें और सोच-समझकर ही कदम उठाएं.


    सूतक के दौरान क्या न करें (Chandra Grahan 2026 Sutak kaal Precautions)

    ग्रहण के दौरान धर्मशास्त्रों में सूतक की व्यवस्था बताई गई है. सूर्य ग्रहण में चार पहर पहले यानी 12 घंटें पहले तथा चंद्र ग्रहण में 3 पहर यानी 9 घंटे पहले सूतक लग जाता है. सूतक के दौरान अन्न का त्याग कर देना चाहिए. किसी प्रकार के नकारात्मक कार्य को करना निषेध रहता है. इस दौरान आध्यात्मिक चिंतन और सात्विक आहार विहार रखना चाहिए।

    कच्चे पके हुए अन्न को ग्रहण के दौरान नहीं रखना चाहिए और तेल में तले पदार्थ और दूध-दही इत्यादि में तुलसी का पत्ता डाल देना चाहिए. इस चंद्रग्रहण का सूतक भारतीय समयानुसार 3 मार्च को सुबह 6 बजकर 20 से शुरू हो जाएगा. ग्रहण के दौरान पूरी तरह से अन्न-जल का त्याग कर देना चाहिए. अपने इष्टदेव का ध्यान और ओम नम: शिवाय का जप करना चाहिए।


    चंद्र ग्रहण के दौरान क्या करें (Chandra Grahan 2026 Dos)

    1. चंद्र ग्रहण के दौरान सिर्फ भगवान के मंत्रों का जप करना चाहिए, जो कि दस गुना फलदायी माना जाता है.
    2. चंद्र ग्रहण के बाद शुद्ध जल से स्नान करके, गरीबों का दान देना चाहिए.
    3. चंद्र ग्रहण के बाद पूरे घर को शुद्ध करना चाहिए. ऐसा करने से घर की सभी नकारात्मक शक्तियां दूर हो जाती है.
    4. ग्रहण के समय गायों को घास, पक्षियों को अन्न, जरूरत मंदों को वस्त्र दान देने से अनेक गुना पुण्य प्राप्त होता है।


    चंद्र ग्रहण का क्या हो सकता है प्रभाव

    ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, चंद्र ग्रहण का असर सबसे ज्यादा मन और भावनाओं पर पड़ता है. इस दौरान तनाव, भ्रम और नकारात्मक सोच बढ़ सकती है. इसलिए इस समय शांत रहना और बड़े फैसलों से बचना बेहतर माना जाता है।


    क्या होता है चंद्र ग्रहण? (What is Lunar Eclipse?)

    चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse) एक खगोलीय घटना है. जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और अपनी छाया चंद्रमा पर डालती है तो ऐसी स्थिति चंद्र ग्रहण कहलाता है.


    क्या होता है पूर्ण चंद्र ग्रहण?

    जब चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की छाया में आ जाता है, तो इसे पूर्ण चंद्र ग्रहण कहते हैं. इस स्थिति में चंद्रमा का रंग तांबे या लाल रंग का दिखाई देता है, जिसे “ब्लड मून” भी कहा जाता है।

  • डिजिटल दुनिया में मोदी का जलवा! यूट्यूब चैनल ने पार किए 30 मिलियन सब्सक्राइबर्स

    डिजिटल दुनिया में मोदी का जलवा! यूट्यूब चैनल ने पार किए 30 मिलियन सब्सक्राइबर्स


    नई दिल्ली। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एक और ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। उनके आधिकारिक यूट्यूब चैनल ने 30 मिलियन यानी 3 करोड़ सब्सक्राइबर्स का आंकड़ा पार कर लिया है। इस उपलब्धि के साथ ही वे यूट्यूब पर दुनिया के सबसे अधिक सब्सक्राइब किए जाने वाले राजनेता बन गए हैं। यह उपलब्धि न केवल उनकी लोकप्रियता को दर्शाती है, बल्कि डिजिटल माध्यमों पर उनकी सशक्त उपस्थिति का भी प्रमाण है।

    वैश्विक नेताओं में सबसे आगे
    सब्सक्राइबर संख्या के मामले में प्रधानमंत्री मोदी अपने वैश्विक समकक्षों से काफी आगे निकल गए हैं। इस सूची में दूसरे स्थान पर ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति Jair Bolsonaro हैं, जिनके यूट्यूब चैनल पर लगभग 66 लाख (6.6 मिलियन) सब्सक्राइबर्स हैं। यह संख्या पीएम मोदी के मुकाबले करीब एक-चौथाई है।

    यूट्यूब पर मोदी की लोकप्रियता अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump से भी कहीं अधिक बताई जा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी के सब्सक्राइबर ट्रंप से कई गुना ज्यादा हैं। इससे स्पष्ट है कि भारतीय प्रधानमंत्री की डिजिटल पहुंच अब वैश्विक स्तर पर एक अलग पहचान बना चुकी है।

    देश के भीतर भी बड़ी बढ़त
    भारत में भी पीएम मोदी का डिजिटल प्रभाव स्पष्ट रूप से नजर आता है। सब्सक्राइबर संख्या के मामले में उनका चैनल कांग्रेस नेता Rahul Gandhi के यूट्यूब चैनल से लगभग तीन गुना आगे है।

    इतना ही नहीं, उनके सब्सक्राइबरों की संख्या Aam Aadmi Party और Indian National Congress के आधिकारिक चैनलों की तुलना में चार गुना से भी अधिक बताई जा रही है। यह अंतर बताता है कि डिजिटल कम्युनिकेशन के क्षेत्र में पीएम मोदी ने एक मजबूत और व्यापक दर्शक वर्ग तैयार किया है।

    सोशल मीडिया पर भी शतक
    यूट्यूब के साथ-साथ इंस्टाग्राम पर भी प्रधानमंत्री मोदी ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। उनके इंस्टाग्राम अकाउंट पर 100 मिलियन (10 करोड़) से अधिक फॉलोअर्स हो चुके हैं। इसके साथ ही वे इस आंकड़े को पार करने वाले दुनिया के पहले प्रमुख नेता बन गए हैं।

    2014 में इंस्टाग्राम से जुड़ने के बाद पीएम मोदी ने लगातार सक्रिय रहकर अपने अकाउंट को दुनिया के सबसे ज्यादा फॉलो किए जाने वाले राजनीतिक प्रोफाइल्स में शामिल कर दिया। वर्तमान में विश्व के बड़े नेताओं में उनके सबसे अधिक फॉलोअर्स बताए जाते हैं। खास बात यह है कि इंस्टाग्राम पर भी उनके फॉलोअर्स की संख्या डोनाल्ड ट्रंप से दोगुने से अधिक बताई जाती है।

    डिजिटल रणनीति का असर
    विशेषज्ञ मानते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी ने शुरुआत से ही सोशल मीडिया को सीधे संवाद के माध्यम के रूप में अपनाया। उनके भाषण, कार्यक्रम, ‘मन की बात’, विदेश यात्राओं और सरकारी अभियानों से जुड़े वीडियो नियमित रूप से साझा किए जाते हैं, जिससे आम नागरिकों तक सीधा संदेश पहुंचता है।

    यूट्यूब और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर उनकी सक्रियता ने उन्हें युवा वर्ग के बीच भी खासा लोकप्रिय बनाया है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उनकी पहुंच पारंपरिक मीडिया से आगे निकलती दिखाई दे रही है, जहां वे सीधे करोड़ों लोगों से संवाद स्थापित कर रहे हैं।

    वैश्विक प्रभाव की झलक
    30 मिलियन से अधिक सब्सक्राइबर्स के साथ पीएम मोदी का यूट्यूब चैनल अब विश्व स्तर पर नेताओं के बीच सबसे अधिक सब्सक्राइब किया जाने वाला चैनल बन चुका है। यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है जब वैश्विक राजनीति में डिजिटल कम्युनिकेशन की भूमिका लगातार बढ़ रही है।

  • धरती की समृद्धि का उत्सव! पीएम मोदी ने विश्व वन्यजीव दिवस पर रखा पर्यावरण संरक्षण पर जोर

    धरती की समृद्धि का उत्सव! पीएम मोदी ने विश्व वन्यजीव दिवस पर रखा पर्यावरण संरक्षण पर जोर


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा किए संदेश में कहा कि विश्व वन्यजीव दिवस हमारे ग्रह को समृद्ध करने वाली अद्भुत जैव विविधता का उत्सव मनाने का अवसर है। उन्होंने वन्यजीव संरक्षण के प्रति समर्पित व्यक्तियों के योगदान की सराहना की और कहा कि हमें वन्यजीवों और उनके प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि हमारा वन्य जीवन फलता-फूलता रहे।

    लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला: संरक्षण हमारा संवैधानिक दायित्व
    लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि प्रकृति और मानव जीवन एक-दूसरे के पूरक हैं। जैव विविधता का संरक्षण केवल पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं, बल्कि हमारे अस्तित्व की सुरक्षा का आधार है। उन्होंने भारत में वन और वन्यजीव संरक्षण की प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में रामसर आर्द्रभूमियों की संख्या लगभग 100 तक पहुंच गई है। बिरला ने वन्यजीवों की रक्षा को कानूनी और नैतिक दायित्व बताते हुए आने वाली पीढ़ियों के लिए समृद्ध पर्यावरण सुनिश्चित करने का संकल्प साझा किया।

    जम्मू-कश्मीर उपराज्यपाल मनोज सिन्हा: सतत विकास और तालमेल
    जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि विश्व वन्यजीव दिवस पर हमें वन्य जीवन बचाने, इकोसिस्टम की रक्षा करने और इंसानी तरक्की तथा प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।

    केंद्रीय मंत्रियों के संदेश
    केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि विश्व वन्यजीव दिवस मनाते हुए हमें अपनी जैव विविधता को खतरों से बचाने और पारिस्थितिकी तंत्र को संरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध रहना चाहिए।

    केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि जंगलों से लेकर समुद्रों तक, हर प्रजाति प्रकृति का संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण है। वन्यजीवों की रक्षा करना केवल जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारा फर्ज है।

    विश्व वन्यजीव दिवस केवल जश्न का दिन नहीं, बल्कि जैव विविधता और वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने का अवसर है। भारत में नेतृत्वकर्ता और नागरिक मिलकर वन्य जीवन, पारिस्थितिकी तंत्र और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करने का संकल्प ले रहे हैं। यह दिन हर व्यक्ति को याद दिलाता है कि पृथ्वी की समृद्धि और संतुलन बनाए रखना हमारा साझा दायित्व है।

  • अजित पवार के बेटे ने वीडियो शेयर कर VSR वेंचर्स की उड़ानों पर रोक की मांग की

    अजित पवार के बेटे ने वीडियो शेयर कर VSR वेंचर्स की उड़ानों पर रोक की मांग की


    नई दिल्ली । महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री और एनसीपी नेता Ajit Pawar के बेटे जय पवार ने 28 जनवरी 2026 को हुए विमान हादसे के बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर VSR वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड की उड़ानों को तुरंत रोकने की मांग की है। इस हादसे में उनके पिता का निधन हुआ था, जिसे लेकर जय पवार ने गंभीर सुरक्षा और लापरवाही के आरोप लगाए हैं।

    वीडियो में कंपनी के मालिक रोहित सिंह मुख्य पायलट सीट पर उड़ान के दौरान सोते हुए दिखाई दे रहे हैं। जय पवार ने लिखा कि “मैंने अपने पिता को खो दिया है… यह पीड़ा जिंदगी भर मेरे साथ रहेगी। ऐसे लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती।” उन्होंने DGCA (डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन) से अपील की है कि VSR की सभी उड़ानों को ग्राउंड किया जाए और रोहित सिंह के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।

    DGCA की जांच के मुताबिक, 28 जनवरी को बारामती में VSR वेंचर्स के Learjet 45 (VT-SSK) विमान के क्रैश के बाद स्पेशल सेफ्टी ऑडिट कराया गया। ऑडिट में एयरवर्दीनेस, एयर सेफ्टी और फ्लाइट ऑपरेशन के नियमों के कई उल्लंघन सामने आए। इसके बाद DGCA ने चार एयरक्राफ्ट  को तुरंत ग्राउंड कर दिया।

    जय पवार ने इंस्टाग्राम पोस्ट में कहा कि महाराष्ट्र में हुए इस हादसे की पूरी और पारदर्शी जांच होनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके। उन्होंने VSR वेंचर्स की उड़ानों पर तत्काल रोक लगाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जोरदार मांग की।

    यह मामला न केवल पवार परिवार के लिए बल्कि देश की नागरिक हवाई सुरक्षा के लिए भी गंभीर चिंता का विषय बन गया है। DGCA ने नियमों का उल्लंघन सामने आने के बाद सख्त कदम उठाए हैं और जांच जारी है।