Category: National

  • होलिका दहन पर वामपंथी कलुष

    होलिका दहन पर वामपंथी कलुष


    – कैलाश चन्द्र
    भारत की सांस्कृतिक स्मृति पर जितने हमले बाहरी आक्रांताओं ने नहीं किए, उससे कहीं अधिक गहरे और कहीं अधिक धूर्त हमले आज के वैचारिक उपनिवेशवादियों ने किए हैं। यह हमला तलवारों का नहीं, शब्दों का है। यह आक्रमण सीमाओं का नहीं, स्मृति का है।

    वस्‍तुत: आज जो लोग होली, होलिका दहन और प्रह्लाद की कथा को “ब्राह्मणवाद द्वारा एक दलित नारी को जलाए जाने” की घटना बताकर प्रस्तुत करते हैं, वे न परंपरा जानते हैं और न कथा समझते हैं। वे सिर्फ भारत की सांस्कृतिक संचेतना को उसकी अपनी कहानी से काट देना चाहते हैं।

    होलिका की वास्तविक कथा

    होलिका की कथा जितनी सरल है, उतनी ही गहन भी। कश्यप ऋषि और दिति की पुत्री तथा दिति की संतानों को स्वभाव वैचित्र्य के कारण दैत्य कहा गया है। सम्पूर्ण कथा श्रीमद्भागवत पुराण में बहुत विस्तार से कही गई है। भारतवर्ष में होने वाली अधिकांश भागवत कथाओं में भागवताचार्य अपनी कथा का प्रारम्भ यहीं से करते हैं। इस आधार पर होलिका दैत्यकुल की राजकुमारी व प्रिचिति की पत्नी और स्वरभानु की माता थी। वह एक संपूर्ण दैत्यवंशी, राक्षसी चरित्र है। उसका भाई हिरण्यकश्यप न केवल राजा था बल्कि अत्याचारी, अहंकारी और असुर प्रवृत्ति वाला शासक भी था।

    उसके सामने किसी “शोषित समुदाय” की कथा गढ़ना या उसे “दलित नारी उत्पीड़न” में बदल देना केवल अज्ञान नहीं एक सुनियोजित बौद्धिक छल है, जो भारतीय मिथकीय चेतना को वर्गीय, जातीय और जेंडरवादी चश्मे से दूषित करना चाहता है।

    धर्म और अधर्म का स्पष्ट संदेश

    यहां सत्य सरल है। होलिका किसी “अबला स्त्री” की कथा नहीं है। वह वरदान से सशक्त, छल से प्रेरित और अधर्म की सहायक थी। ब्रह्मा ने उसे अग्नि प्रतिरोध का वरदान दिया था, किन्तु वह वरदान धर्म विरोधी कर्मों के लिए नहीं था। जब वह प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठती है तो उसका जलना कर्मफल है। यह अन्याय के अंत, अधर्म की पराजय और सत्य की विजय का प्रतीक है।

    यही पुराणों का स्वर है और यही भारतीय संस्कृति की जीवंतता का मूलाधार भी है। पर आज इस कथा को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत करने वाले “कल्चरल मार्क्सिज्म” के प्रशिक्षित कार्यकर्ता इसे “ब्राह्मणों द्वारा स्त्री दहन” का उदाहरण बताते हैं। ये उनकी चाल पुरानी है। हर परंपरा को उत्पीडन का प्रमाण बनाओ। हर कथा को वर्ग संघर्ष के ढांचे में फिट करो। हर मूल्य को अपराधबोध में बदलो।

    वे राक्षसी को पीड़‍िता बना देते हैं, दैत्यकुल को जाति समूह कह देते हैं और धर्म-अधर्म की अनंत कथा को सत्ता विरोध के रंग में विकृत कर देते हैं। यही मानसिकता श्रीराम को साम्राज्यवादी, श्रीकृष्ण को चालबाज, माता दुर्गा को पीड़ित स्त्री और श्रीगणेश को उपहास का पात्र बना देती है।

    होलिका दहन का सांस्कृतिक अर्थ

    होलिका दहन का अर्थ किसी व्यक्ति, कुल या जाति का दमन नहीं है। यह जीवन की नकारात्मकता के दहन का संदेश है। यह नव वसंत, नवहर्ष, नई शुरुआत और सत्य के धारण एवं संरक्षण का पर्व है। इसमें प्रह्लाद की विजय, भक्ति की शक्ति और अधर्म के अंत का संदेश निहित है। इसे महिला विरोध, समाज विरोध या सत्ता विरोध की कहानी में बदलना हमारी परंपरा का नहीं बल्कि हमारी स्मृति का अपमान है।

    इतिहास के नाम पर फैलाया गया भ्रम

    भारतीय समाज को बांटने के लिए आज एक विचित्र वैचारिक नाटक रचा जा रहा है। यह कहा जा रहा है कि ‘हिरण्यकश्यप’ शूद्र था, शूद्र तप नहीं कर सकते और गुरुकुल नहीं जा सकते। यह इतिहास नहीं बल्कि वैचारिक क्षुद्रता का प्रमाण है। जिन लोगों ने न शास्त्र पढ़े और न पुराण समझे, वे आज सोशल मीडिया की अधूरी जानकारी के आधार पर एक संपूर्ण सभ्यता को अपराधी सिद्ध करने में लगे हैं।

    भारतीय चेतना का मूल सत्य

    वास्तविकता यह है कि होलिका और हिरण्यकश्यप भारतीय चेतना में सदियों से अहंकार और अधर्म के प्रतीक रहे हैं। गुरुकुलों की शिक्षा में शस्त्र और शास्त्र का अध्ययन करने के बाद अहंकार के कारण वे अधर्म के मार्ग पर चले और भक्त प्रह्लाद सत्य के प्रतीक बने। जो लोग इस सरल सत्य को भी “सामाजिक न्याय” के चश्मे से विकृत करते हैं, वे न्याय के पक्षधर नहीं बल्कि भारतीय समाज को भीतर से तोड़ने वाले मानसिक उपनिवेशवाद के वाहक हैं।

    स्मृति और परंपरा की पुनर्स्थापना

    आज आवश्यकता किसी प्रतिक्रिया या प्रतिशोध की नहीं है। आवश्यकता है तथ्यों की पुनर्स्थापना की। हमें अपनी चेतना में सांस्कृतिक स्मृति को पुनः प्रखर करना होगा। परंपरा को आधुनिक राजनीतिक सिद्धांतों के ढांचे में कैद करने के स्थान पर उसके कालातीत संदेश को समझना होगा। यह संघर्ष एक कथा का न होकर भारतीय तत्वज्ञान, वांग्मय, दर्शन और वैचारिक संप्रभुता का है। इसलिए यह समझना सभी के लिए समान रूप से आवश्‍यक है कि ‘होलिका’ का जलना किसी स्त्री का दहन नहीं है। यह अत्याचार, असहिष्णुता, अधर्म, अनीति और असत्य के दहन का प्रतीक है। उसका अंत किसी समाज पर अत्याचार का नहीं बल्कि अधर्म की पराजय का उत्सव है।

    आज भारत की सभ्यता इस वैचारिक आक्रमण को पहचान चुकी है। वह जानती है कि हमारी परंपराएं हिंसा की नहीं बल्कि समरसता की उपज हैं। होलिका दहन उसी समरसता का उत्सव है, अहंकार के अंत और सत्य के आरंभ का पर्व। अत: हमेशा ही अपने समय में वर्तमान काल की हमारी जिम्मेदारी है कि हम इस वैचारिक धुंध में भी स्पष्ट देख सकें और यह कह सकें कि भारतीय संस्कृति को समझने के लिए भारतीयता चाहिए, न कि वह वैचारिक चश्मा जो हर कथा को संघर्ष, हर पात्र को पीड़‍ित और हर पर्व को अपराध में बदल देता है।

    अंत में यही कि होलिका दहन पर कलुष केवल परंपरा का नहीं बल्कि विवेक का अपमान है। इसे समझना और इस भ्रम को तोड़ना आज केवल सांस्कृतिक कर्तव्य नहीं यह हम सभी की राष्ट्रीय आवश्यकता है।

    (लेखक, सामाजिक कार्यकर्ता एवं वरिष्‍ठ स्‍तम्‍भकार हैं)

  • हैदराबाद हाउस में हाई-लेवल डिप्लोमैसी: पीएम मोदी और मार्क कार्नी की अहम बैठक

    हैदराबाद हाउस में हाई-लेवल डिप्लोमैसी: पीएम मोदी और मार्क कार्नी की अहम बैठक

    नई दिल्ली के प्रतिष्ठित Hyderabad House में सोमवार को भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi और कनाडा के प्रधानमंत्री Mark Carney के बीच महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता हुई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य भारत-कनाडा रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देना और हाल के वर्षों में आए उतार-चढ़ाव के बाद रिश्तों को मजबूती प्रदान करना रहा।

    एमओयू एक्सचेंज और सीईओ फोरम पर नजर
    बैठक के बाद दोनों देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में समझौता ज्ञापनों (एमओयू) का आदान-प्रदान प्रस्तावित है, जिसके बाद संयुक्त प्रेस बयान जारी किए जाएंगे। दोपहर 1:50 बजे Bharat Mandapam में भारत-कनाडा सीईओ फोरम की शुरुआत होगी, जिसमें दोनों प्रधानमंत्री उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को संबोधित करेंगे। शाम छह बजे पीएम कार्नी अपने देश के लिए रवाना होंगे।

    व्यापार से एआई तक-साझेदारी के प्रमुख स्तंभ

    वार्ता में व्यापार और निवेश, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, कृषि, शिक्षा, शोध एवं नवाचार, और लोगों के बीच संबंध जैसे क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की गई। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार साझा किए। कार्नी ने नई दिल्ली पहुंचने के बाद सोशल मीडिया पर भारत को “आत्मविश्वासी और महत्वाकांक्षी” देश बताते हुए ऊर्जा, टैलेंट, इनोवेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में साझेदारी बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई।

    जयशंकर से भी हुई मुलाकात

    इससे पहले पीएम कार्नी ने विदेश मंत्री S. Jaishankar से मुलाकात की। जयशंकर ने बातचीत को सकारात्मक बताते हुए आगे की साझेदारी को लेकर कनाडा की प्रतिबद्धता की सराहना की।

    रिश्तों के सामान्यीकरण की दिशा में अहम कदम
    विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब भारत-कनाडा संबंध सामान्य होने के अहम मोड़ पर हैं। दोनों देशों ने पहले ही आपसी सम्मान, संवेदनशील मुद्दों की समझ और आर्थिक सहयोग को आधार बनाकर संतुलित व रचनात्मक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई है।

    हैदराबाद हाउस की यह बैठक केवल औपचारिक कूटनीति नहीं, बल्कि साझा दृष्टिकोण को ठोस परिणामों में बदलने की कोशिश मानी जा रही है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह सकारात्मक माहौल किस तरह द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई तक पहुंचाता है।

  • मिडिल ईस्ट में बढ़ती आग, वैश्विक बाजार पर वार-क्रूड ऑयल की कीमतों में जोरदार तेजी

    मिडिल ईस्ट में बढ़ती आग, वैश्विक बाजार पर वार-क्रूड ऑयल की कीमतों में जोरदार तेजी

    नई दिल्ली। इजरायल-ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को झकझोर दिया है। सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में 7 प्रतिशत से अधिक की तेज उछाल दर्ज की गई। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद निवेशकों ने संभावित आपूर्ति संकट का अंदेशा जताया, जिससे तेल के दाम रिकॉर्ड ऊंचाई की ओर बढ़ने लगे।

    ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई में जोरदार तेजी
    अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent Crude के वायदा भाव बढ़कर 82.37 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए, जो जनवरी 2025 के बाद का उच्चतम स्तर है। ब्रेंट 7.60 प्रतिशत चढ़कर 78.41 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा। वहीं अमेरिकी West Texas Intermediate (डब्ल्यूटीआई) क्रूड के वायदा भाव 7.19 प्रतिशत उछलकर 71.86 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गए।

    होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट की आशंका
    रिपोर्ट्स के मुताबिक, Iran ने रणनीतिक Strait of Hormuz से गुजरने वाले नौवहन को सीमित करने के संकेत दिए हैं। यह वही मार्ग है, जिससे दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल का परिवहन होता है। भारत के 40 प्रतिशत से अधिक कच्चे तेल का आयात भी इसी रास्ते से होता है। ऐसे में आपूर्ति बाधित होने की आशंका ने बाजार में जोखिम प्रीमियम बढ़ा दिया है।

    ओपेक का दांव, क्या थमेगी रफ्तार?
    इसी बीच OPEC ने अगले महीने से उत्पादन बढ़ाने पर सहमति जताई है। सऊदी अरब और रूस के नेतृत्व में सदस्य देश प्रतिदिन 2.06 लाख बैरल अतिरिक्त उत्पादन करेंगे। हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि यदि भू-राजनीतिक तनाव गहराता है तो यह बढ़ोतरी कीमतों को स्थिर रखने के लिए पर्याप्त नहीं होगी।

    भारत पर सीधा असर
    विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत अपनी जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। कीमतों में हर 1 डॉलर की वृद्धि से भारत का वार्षिक आयात बिल करीब 2 अरब डॉलर बढ़ जाता है। इससे महंगाई, चालू खाते का घाटा और रुपये पर दबाव बढ़ सकता है। अधिक तेल कीमतें परिवहन लागत, समुद्री बीमा और ऊर्जा आधारित उद्योगों पर अतिरिक्त बोझ डाल सकती हैं।

    90 से 100 डॉलर का खतरा
    बाजार जानकारों का कहना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान जारी रहता है तो ब्रेंट 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जा सकता है। व्यापक क्षेत्रीय युद्ध की स्थिति में यह 100 डॉलर के स्तर को भी पार कर सकता है। फिलहाल बाजार का रुख कंपनियों की तिमाही आय से ज्यादा तेल की चाल पर निर्भर नजर आ रहा है। तनाव कम होने, नेतृत्व पर स्पष्टता आने और समुद्री मार्ग सुरक्षित रहने की ठोस गारंटी मिलने तक तेल बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।

  • भारत-कनाडा रिश्तों में नई गर्माहट! जयशंकर ने मार्क कार्नी से मुलाकात कर दिए बड़े संकेत

    भारत-कनाडा रिश्तों में नई गर्माहट! जयशंकर ने मार्क कार्नी से मुलाकात कर दिए बड़े संकेत

    नई दिल्ली। भारत और कनाडा के संबंधों में नई रफ्तार देखने को मिली जब विदेश मंत्री S. Jaishankar ने नई दिल्ली में कनाडा के प्रधानमंत्री Mark Carney से मुलाकात की। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब दोनों देश रिश्तों को सामान्य और मजबूत बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। मुलाकात के बाद जयशंकर ने कहा कि प्रधानमंत्री कार्नी से मिलकर खुशी हुई और आगे की साझेदारी को लेकर उनकी प्रतिबद्धता सराहनीय है।

    मुंबई से दिल्ली तक-पहला आधिकारिक दौरा
    प्रधानमंत्री कार्नी अपनी पत्नी डायना फॉक्स कार्नी के साथ 27 फरवरी से 2 मार्च तक भारत के पहले आधिकारिक दौरे पर आए हैं। शुक्रवार को मुंबई पहुंचने के बाद उन्होंने कारोबारी जगत से जुड़े कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। भारतीय और कनाडाई सीईओ, उद्योगपतियों, वित्तीय विशेषज्ञों, इनोवेटर्स और एजुकेटर्स से बातचीत कर उन्होंने आर्थिक सहयोग के नए रास्ते तलाशने की बात कही। मुंबई पहुंचते ही उन्होंने भारत को “दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था” बताया और साझेदारी को नए स्तर पर ले जाने की इच्छा जताई।

    मोदी से मुलाकात, रणनीतिक साझेदारी पर फोकस
    नई दिल्ली पहुंचने के बाद कार्नी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि वह प्रधानमंत्री Narendra Modi से मिलने आए हैं। दोनों देशों को “आत्मविश्वासी और महत्वाकांक्षी” बताते हुए उन्होंने ऊर्जा, टैलेंट, इनोवेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की बात कही। हैदराबाद हाउस में दोनों नेताओं के बीच डेलीगेशन-स्तरीय वार्ता प्रस्तावित है, जिसमें व्यापार, निवेश, जरूरी खनिज, कृषि, शिक्षा, रिसर्च और लोगों के बीच संबंध जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।

    पिछली बैठकों की समीक्षा, आगे की राह तय
    विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेता कनानास्किस (जून 2025) और जोहान्सबर्ग (नवंबर 2025) में हुई पिछली मुलाकातों के बाद हुई प्रगति की समीक्षा करेंगे। भारत-कनाडा सीईओ फोरम में भी दोनों की मौजूदगी संभावित है, जहां क्षेत्रीय और वैश्विक विकास पर विचार साझा किए जाएंगे।

    यह दौरा ऐसे दौर में हो रहा है जब दोनों देश रिश्तों को संतुलित और रचनात्मक दिशा में आगे बढ़ाने पर सहमत हुए हैं। आपसी संवेदनशीलताओं का सम्मान, मजबूत आर्थिक गतिविधियां और लोगों के बीच गहरे संबंध-इन्हीं आधारों पर नई साझेदारी की नींव रखी जा रही है।

    सकारात्मक संदेश के साथ आगे बढ़ते कदम
    कार्नी ने मुंबई से साझा वीडियो में कहा कि भारत के साथ सहयोग कनाडाई श्रमिकों और व्यवसायों के लिए नए अवसर खोलेगा। वहीं जयशंकर की प्रतिक्रिया ने साफ कर दिया कि भारत भी इस रिश्ते को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

    दोनों देशों के बीच यह मुलाकात सिर्फ औपचारिक कूटनीति नहीं, बल्कि भविष्य की रणनीतिक साझेदारी का संकेत मानी जा रही है-जहां ऊर्जा से लेकर एआई तक, कई क्षेत्रों में सहयोग की नई इबारत लिखी जा सकती है।

  • मध्य पूर्व में जंग का असर भारत पर? गृह मंत्रालय का राज्यों को अलर्ट, विरोध प्रदर्शनों पर खास नजर

    मध्य पूर्व में जंग का असर भारत पर? गृह मंत्रालय का राज्यों को अलर्ट, विरोध प्रदर्शनों पर खास नजर


    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध जैसे हालात के बीच केंद्र सरकार ने देश की आंतरिक सुरक्षा को लेकर एहतियाती कदम तेज कर दिए हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पत्र जारी कर ईरान के समर्थन या विरोध में संभावित प्रदर्शनों को लेकर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। मंत्रालय ने साफ किया है कि अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम का असर देश के अलग-अलग हिस्सों में दिखाई दे सकता है, इसलिए कानून-व्यवस्था को हर हाल में प्राथमिकता दी जाए।

    विरोध प्रदर्शनों पर कड़ी नजर रखने के निर्देश
    गृह मंत्रालय ने अपने पत्र में कहा है कि यदि किसी राज्य में ईरान के पक्ष या विपक्ष में प्रदर्शन आयोजित होते हैं, तो स्थानीय प्रशासन स्थिति पर पैनी नजर रखे। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती, खुफिया तंत्र की सक्रियता और भीड़ प्रबंधन की ठोस तैयारी सुनिश्चित करने को कहा गया है। मंत्रालय ने यह भी चेतावनी दी है कि कुछ असामाजिक तत्व प्रदर्शनों की आड़ में माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर सकते हैं, जिन्हें समय रहते चिन्हित कर निष्प्रभावी किया जाए।

    सोशल मीडिया पर निगरानी बढ़ाने के आदेश
    मंत्रालय ने राज्यों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित हो रहे भड़काऊ या भ्रामक संदेशों पर सख्त नजर रखने के निर्देश दिए हैं। अफवाहों और उकसावे वाली सामग्री के जरिए तनाव फैलाने की कोशिशों को रोकने के लिए साइबर मॉनिटरिंग बढ़ाने को कहा गया है। जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों को स्थिति के अनुरूप धारा 144 जैसे एहतियाती कदम उठाने की छूट भी दी गई है।

    हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पर सख्ती
    केंद्र ने दोहराया है कि किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि, हिंसा या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। राज्यों से समन्वय बनाए रखते हुए शांति और सांप्रदायिक सौहार्द कायम रखने पर जोर दिया गया है।

    हालांकि, कुछ सोशल मीडिया दावों में कहा जा रहा है कि अमेरिका और इजरायल के हमले में Ali Khamenei की मौत हो गई है। इस तरह के दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। Iran के सर्वोच्च नेता के संबंध में ऐसी किसी बड़ी घटना की पुष्टि विश्वसनीय अंतरराष्ट्रीय स्रोतों से नहीं हुई है, इसलिए प्रशासन ने अफवाहों से बचने की अपील की है।

    जम्मू-कश्मीर में एहतियाती कदम
    इधर Jammu and Kashmir के कई इलाकों से विरोध प्रदर्शनों की खबरें सामने आई हैं। Srinagar में एहतियातन मोबाइल इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से बंद की गईं और कुछ स्कूलों को भी सुरक्षा कारणों से बंद रखा गया। प्रशासन का कहना है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और हालात सामान्य बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

    मध्य पूर्व में जारी तनाव का सीधा असर भारत की कानून-व्यवस्था पर न पड़े, इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारें चौकन्नी हैं। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां सतर्क मोड में हैं और किसी भी अफवाह या उकसावे से बचने की अपील की जा रही है।

  • मदुरै की जनसभा में प्रधानमंत्री मोदी का विपक्ष पर हमला, विकसित तमिलनाडु का रखा लक्ष्य

    मदुरै की जनसभा में प्रधानमंत्री मोदी का विपक्ष पर हमला, विकसित तमिलनाडु का रखा लक्ष्य


    मदुरै।
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तमिलनाडु के मदुरै में राज्य के विकास, कानून-व्यवस्था, महिलाओं की सुरक्षा और केंद्र की योजनाओं के क्रियान्वयन जैसे मुद्दों पर जनसभा को संबोधित किया। उन्होंने तिरुप्परनकुंद्रम स्थित अरुलमिगु सुब्रमण्य स्वामी मंदिर में दर्शन के अनुभव से की।

    प्रधानमंत्री ने विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि जनसभा से पहले वे तिरुप्परनकुंद्रम जाकर भगवान मुरुगन के दर्शन कर चुके हैं और यह उनके लिए अत्यंत आध्यात्मिक क्षण था। उन्होंने कहा कि उन्होंने तमिलनाडु और देश की समृद्धि के लिए प्रार्थना की। इस दौरान उन्हें एक युवा भक्त थिरु पूर्णा चंद्रन की याद आई, जिनका हाल ही में निधन हो गया था। वे उनकी पत्नी थिरुमति इंदुमति पूर्णा चंद्रन और उनके दो छोटे बच्चों से मिले तथा परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में कोई किसी से भयभीत नहीं होता और मतभेद होना स्वाभाविक है। वर्तमान राज्य सरकार के कार्यकाल में महिलाओं की सुरक्षा चिंता का विषय बनी हुई है। उनके अनुसार, अपराध की घटनाएं बढ़ी हैं और नशे तथा अवैध गतिविधियों के कारण अनेक परिवार प्रभावित हो रहे हैं।

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ‘विकसित भारत’ का लक्ष्य ‘विकसित तमिलनाडु’ के बिना अधूरा है। उन्होंने राज्य को देश की प्रगति में निर्णायक भूमिका निभाने वाला प्रदेश बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि बंदरगाह, कॉरिडोर और लॉजिस्टिक्स से जुड़े कई प्रोजेक्ट पूर्व में लंबित रहे, लेकिन केंद्र सरकार ने उन्हें गति देने का प्रयास किया है। उन्होंने चेन्नई और कामराजा बंदरगाह के एकीकरण तथा मदुरवॉयल एलिवेटेड कॉरिडोर जैसे कार्यों का जिक्र करते हुए कहा कि इससे राज्य की आर्थिक गतिविधियों को बल मिला है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र की ग्रामीण आवास योजना के तहत लाखों परिवारों को पक्का घर मिला है। हालांकि कुछ परियोजनाएं राज्य स्तर पर समन्वय के अभाव में अपेक्षित गति नहीं पकड़ सकीं। प्रधानमंत्री ने कहा कि शहर को बेहतर शहरी सुविधाओं, स्वच्छता और जल निकासी व्यवस्था की आवश्यकता है। केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से शहरी ढांचे को सुदृढ़ करने का प्रयास किया जा रहा है।

    उन्होंने कहा कि दुनिया भर में तमिल संस्कृति के प्रति सम्मान है। मलाया विश्वविद्यालय में तिरुवल्लुवर चेयर की स्थापना को उन्होंने तमिल भाषा और संस्कृति के वैश्विक प्रसार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प पूरे देश का है और इसमें तमिलनाडु की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।

  • दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला: प्राइवेट स्कूल 2026-27 में वसूलेंगे पिछले साल वाली फीस

    दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला: प्राइवेट स्कूल 2026-27 में वसूलेंगे पिछले साल वाली फीस


    नई दिल्ली । दिल्ली हाईकोर्ट ने प्राइवेट स्कूलों में स्कूल स्तरीय फीस विनियमन समिति गठन के दिल्ली सरकार के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए प्राइवेट स्कूल वही फीस वसूलेंगे जो उन्होंने पिछले वर्ष 2025-26 में वसूली थी। हाईकोर्ट के इस आदेश से फिलहाल स्कूलों को SLFRC गठित करने की जरूरत नहीं है। कोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई 12 मार्च को निर्धारित की है।

    28 फरवरी को हुई सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की बेंच ने कहा कि सरकार द्वारा SLFRC गठन संबंधी अधिसूचना को चुनौती देने वाली याचिकाओं के लंबित रहने के दौरान कमेटी का गठन स्थगित रहेगा। बेंच ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की अत्यधिक फीस कानून के अनुसार विनियमित की जाएगी।

    यह आदेश कई स्कूल संघों की याचिकाओं पर पारित किया गया जिन्होंने दिल्ली सरकार की 1 फरवरी 2026 की अधिसूचना पर रोक लगाने की मांग की थी। उस अधिसूचना में स्कूलों को 10 दिन के भीतर SLFRC गठित करने का निर्देश दिया गया था।

    इस मामले पर आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने बीजेपी पर निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि प्राइवेट स्कूल मालिकों और बीजेपी की दिल्ली सरकार के बीच सांठगांठ हाईकोर्ट में फिर उजागर हुई। उन्होंने बताया कि इससे पहले बीजेपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में आश्वासन दिया था कि प्राइवेट फीस एक्ट 2025-26 के लिए बढ़ाई गई फीस पर लागू नहीं होगा जबकि अब हाईकोर्ट ने इसे 2026-27 के सत्र के लिए भी लागू कर दिया।

    कोर्ट के इस फैसले से स्पष्ट हो गया है कि शैक्षणिक वर्ष 2026-27 में दिल्ली के प्राइवेट स्कूल वही फीस वसूलेंगे जो उन्होंने पिछले साल वसूली थी और SLFRC गठन पर फिलहाल रोक रहेगी। इससे स्कूलों के लिए शुल्क निर्धारण में अस्थिरता टली है और कानूनी प्रक्रिया के तहत अत्यधिक फीस पर निगरानी बनी रहेगी।

  • पुडुचेरी में डबल इंजन सरकार का जश्न, पीएम मोदी ने किया 2,700 करोड़ परियोजनाओं का उद्घाटन

    पुडुचेरी में डबल इंजन सरकार का जश्न, पीएम मोदी ने किया 2,700 करोड़ परियोजनाओं का उद्घाटन


    पुडुचेरी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को पुडुचेरी में आयोजित जनसभा में कांग्रेस और तमिलनाडु में सत्तारूढ़ डीएमके पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि पुडुचेरी की विकास यात्रा में कांग्रेस और डीएमके दोनों ही बड़े स्पीड ब्रेकर साबित हुए हैं। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कहा कि अब डबल इंजन सरकार के कामों का जश्न मनाने का समय है और विकास को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का अवसर है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने मौके पर 2,700 करोड़ रुपए से अधिक की विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने समावेशी प्रगति सुनिश्चित करने के लिए शहरी और ग्रामीण दोनों अवसंरचना विकास पर विशेष ध्यान दिया है।

    डीएमके और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए पीएम मोदी ने कहा कि पहले के दौर में पुडुचेरी के लोग भारी कष्ट झेलते रहे। उन्होंने याद दिलाया कि उस समय राजनीतिक अस्थिरता, भ्रष्टाचार और अपराध आम बात थी। राशन की दुकानों में चावल नहीं मिलता था, सैलरी देर से मिलती थी, और सड़कों पर गुंडों और ड्रग माफिया का राज था। प्रधानमंत्री ने कहा, “कांग्रेस ने पुडुचेरी को दिल्ली में बैठे एक परिवार का एटीएम बना दिया था। डीएमके की बात करें तो तमिलनाडु में हो रहे घोटालों की लंबी सूची देखी जा सकती है।”

    पीएम मोदी ने यह भी कहा कि कांग्रेस और डीएमके अब भी सत्ता की भूखी हैं, लेकिन पुडुचेरी के लोग इसे दोबारा नहीं चाहेंगे। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार ने पुडुचेरी में विकास और कल्याण के कामों को तेज गति से आगे बढ़ाया है।

    प्रधानमंत्री ने पुडुचेरी के पर्यटन क्षेत्र को इसकी ताकत बताते हुए कहा कि यह वीकेंड डेस्टिनेशन के रूप में पहले से ही हजारों पर्यटकों को आकर्षित करता है। ट्रेनें और उड़ानें हमेशा भरी रहती हैं। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक पर्यटन, इको-टूरिज्म और स्वास्थ्य पर्यटन में निवेश से पुडुचेरी नई ऊंचाइयों पर पहुंचेगा।

    स्वास्थ्य सेवा को लेकर पीएम मोदी ने जोर देते हुए कहा कि जब तक मानव संसाधन स्वस्थ रहेगा, तब तक राष्ट्र की प्रगति संभव है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाएं सभी के लिए सुलभ, उपलब्ध और किफायती होनी चाहिए। उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि पुडुचेरी के किसी भी नागरिक को इलाज के लिए लंबी दूरी की यात्रा करने की जरूरत न पड़े।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि पुडुचेरी मेडिकल टूरिज्म हब बन सकता है। वर्तमान में यहां नौ मेडिकल कॉलेज हैं, और केंद्र सरकार की नीतियां इसे वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य पर्यटन केंद्र बनाने में सहायक होंगी।

    पीएम मोदी के संबोधन में डबल इंजन सरकार की उपलब्धियों को उजागर किया गया और कांग्रेस-डीएमके शासनकाल की कमियों का उदाहरण देते हुए विकास और कल्याण पर जोर दिया गया। प्रधानमंत्री ने पुडुचेरीवासियों से कहा कि अब भ्रष्टाचार और अस्थिरता के दौर में लौटने का समय नहीं है, बल्कि विकास और नई परियोजनाओं का लाभ उठाने का समय है।

  • यूथ कांग्रेस अध्यक्ष उदय भानु चिब की जमानत पर स्टे, तिहाड़ जेल भेजे गए

    यूथ कांग्रेस अध्यक्ष उदय भानु चिब की जमानत पर स्टे, तिहाड़ जेल भेजे गए


    नई दिल्ली । एआई समिट में शर्टलेस प्रोटेस्ट के मामले में यूथ कांग्रेस अध्यक्ष उदय भानु चिब की जमानत पर सेशंस कोर्ट ने रोक लगा दी है। दिल्ली पुलिस ने सेशंस कोर्ट में अपील की और जमानत पर स्टे लगवाने के बाद चिब को तिहाड़ जेल भेज दिया।

    इस कार्रवाई पर कांग्रेस ने नाराजगी व्यक्त की है। इंडियन यूथ कांग्रेस ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट शेयर करते हुए पुलिस पर सत्ता पक्ष में काम करने का आरोप लगाया। पोस्ट में बताया गया कि आधी रात को दिल्ली पुलिस ने ड्यूटी मजिस्ट्रेट के सामने रिमांड बढ़ाने की अर्जी दी, जिसे न्यायालय ने अवैध बताते हुए खारिज कर दिया और जमानत आदेश दिया।

    हालांकि, जब चिब के वकील जमानत मुचलके आदि की कानूनी प्रक्रिया पूरी कर रहे थे, दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच चुपके से ड्यूटी मजिस्ट्रेट के आदेश के खिलाफ सेशंस कोर्ट पहुंच गई। बिना पक्ष सुने ही जमानत आदेश पर स्टे लगा दिया गया और अगली सुनवाई की तारीख 6 मार्च तय की गई।

    यूथ कांग्रेस ने अपनी पोस्ट में कहा कि संगठन न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करता है और इस आदेश के खिलाफ हर कानूनी कदम उठाने पर विचार कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली पुलिस और सरकार के प्रयास असफल होंगे। यूथ कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस नेताओं और कार्यकर्ताओं को सलाखों के पीछे रखकर अपनी मंशा के अनुरूप भारत विरोधी ट्रेड डील पर सवालों से बचना चाहती है।

    बताया गया कि हाल ही में दिल्ली में हुए AI समिट के दौरान उदय भानु चिब और कई यूथ कांग्रेस नेताओं ने शर्टलेस प्रोटेस्ट किया था। मामले में दिल्ली पुलिस ने चिब समेत देश के अलग-अलग राज्यों से कांग्रेस कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया था। पिछले दिनों कोर्ट ने चिब को जमानत दे दी थी, लेकिन रिहाई से पहले पुलिस ने सेशंस कोर्ट में अपील की, और कोर्ट ने जमानत पर स्टे लगा दिया। इसके बाद चिब को तिहाड़ जेल भेज दिया गया। यूथ कांग्रेस ने यह स्पष्ट किया कि युवा-किसान विरोधी ट्रेड डील और अन्य गिरफ्तारियों के खिलाफ उनका संघर्ष और तेज होगा और अंततः सच्चाई और न्याय की जीत होगी।

  • प्रधानमंत्री ने नागपुर फैक्टरी विस्फोट पीड़ितों के लिए पीएमएनआरएफ से अनुग्रह राशि की घोषणा की

    प्रधानमंत्री ने नागपुर फैक्टरी विस्फोट पीड़ितों के लिए पीएमएनआरएफ से अनुग्रह राशि की घोषणा की

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री ने महाराष्ट्र के नागपुर में एक फैक्टरी में हुए दुखद विस्फोट पर गहरा शोक व्यक्त किया है। इस हादसे में कई लोगों की जान चली गई और कई घायल हुए। प्रधानमंत्री ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना की। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि स्थानीय प्रशासन प्रभावित लोगों की सहायता में पूरी तत्परता से लगा हुआ है।

    प्रधानमंत्री ने प्रत्येक मृतक के परिजन के लिए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष पीएमएनआरएफ से 2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है। इसके अलावा विस्फोट में घायल हुए लोगों को 50, 000 रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाएगी।

    प्रधानमंत्री ने अपने एक्‍स संदेश में कहा महाराष्ट्र के नागपुर में फैक्टरी में हुआ विस्फोट अत्यंत दुखद है। मृतकों के परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। मैं घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं। स्थानीय प्रशासन प्रभावित लोगों की सहायता कर रहा है। प्रत्येक मृतक के परिजन को पीएमएनआरएफ से 2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी। घायलों को 50 000 रुपये दिए जाएंगे।

    यह राहत राशि पीड़ित परिवारों को तत्काल वित्तीय सहायता प्रदान करने और उन्हें इस मुश्किल समय में सहारा देने का उद्देश्य रखती है। स्थानीय प्रशासन भी प्रभावित परिवारों की मदद के लिए लगातार काम कर रहा है और राहत एवं बचाव कार्यों को गति दी गई है।

    प्रधानमंत्री की यह पहल न केवल पीड़ितों के लिए सहारा है बल्कि यह संकट में सरकार की तत्परता और संवेदनशीलता का प्रतीक भी है। राहत राशि के अलावा प्रशासन और विभिन्न एजेंसियों द्वारा प्रभावित लोगों को आवश्यक चिकित्सा सुरक्षा और पुनर्वास सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

    इस प्रकार नागपुर फैक्टरी विस्फोट पर केंद्र और राज्य सरकार की त्वरित प्रतिक्रिया और पीएमएनआरएफ से अनुग्रह राशि की घोषणा प्रभावित परिवारों के लिए राहत और समर्थन का महत्वपूर्ण कदम है।