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  • 'गोल्ड किंग' से विवादों के केंद्र तक, राजेश मेहता पर लगे 15 लाख करोड़ के आरोप क्या हैं?

    'गोल्ड किंग' से विवादों के केंद्र तक, राजेश मेहता पर लगे 15 लाख करोड़ के आरोप क्या हैं?


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में सबसे बड़े कथित अकाउंटिंग विवादों में से एक माने जा रहे मामले में बाजार नियामक सेबी ने Rajesh Mehta और उनकी कंपनी Rajesh Exports Limited के खिलाफ अंतरिम कार्रवाई की है। आरोप है कि वित्त वर्ष 2021 से 2025 के बीच कंपनी ने अपनी आय और कारोबार के आंकड़ों को भारी स्तर पर बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया।

    फर्श से अर्श तक का सफर
    राजेश मेहता को लंबे समय तक भारतीय स्वर्ण उद्योग की सबसे बड़ी सफलता की कहानियों में गिना जाता रहा है। बेंगलुरु के एक जैन कारोबारी परिवार से आने वाले मेहता ने अपने भाई के साथ मिलकर पारिवारिक ज्वेलरी कारोबार को एक वैश्विक कंपनी में बदल दिया।

    1995 में शेयर बाजार में सूचीबद्ध हुई राजेश एक्सपोर्ट्स ने तेजी से विस्तार किया और देश की प्रमुख सोना निर्यातक कंपनियों में शामिल हो गई। वर्ष 2015 में स्विट्जरलैंड की मशहूर रिफाइनरी Valcambi के अधिग्रहण के बाद कंपनी का वैश्विक प्रभाव और बढ़ गया। इसी उपलब्धि के बाद राजेश मेहता को ‘गोल्ड किंग’ के नाम से भी पहचान मिली।

    सेबी के आरोप क्या हैं?
    सेबी के अनुसार, कंपनी ने पिछले पांच वर्षों के दौरान करीब 15.15 लाख करोड़ रुपये के राजस्व को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया हो सकता है। जांच में यह भी कहा गया कि विदेशी सहायक कंपनियों द्वारा दिखाए गए राजस्व का बड़ा हिस्सा स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किया जा सका।

    नियामक का दावा है कि कंपनी की रिपोर्ट की गई विदेशी आय का लगभग 99 प्रतिशत से अधिक हिस्सा संदिग्ध पाया गया। इसी आधार पर सेबी ने जांच पूरी होने तक राजेश मेहता को कंपनी के शेयरों में खरीद-बिक्री या अन्य प्रकार के लेनदेन से रोक दिया है। साथ ही कंपनी के खातों का फोरेंसिक ऑडिट कराने का आदेश भी दिया गया है।

    फर्जी एंट्री और निजी ट्रेडिंग का आरोप
    जांच के दौरान Affluence Shares and Stocks Private Limited नामक एक ब्रोकिंग फर्म का नाम भी सामने आया। सेबी का आरोप है कि कंपनी ने हजारों करोड़ रुपये के खरीद-बिक्री लेनदेन का रिकॉर्ड दिखाया, जबकि संबंधित जीएसटी रिकॉर्ड में ऐसे लेनदेन का कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं मिला।

    इसके अलावा यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ वित्तीय एंट्रीज का उपयोग कंपनी के कारोबार को बड़ा दिखाने और निजी डेरिवेटिव ट्रेडिंग से जुड़े नुकसान को छिपाने के लिए किया गया। जांच में कंपनी के फंड के कथित दुरुपयोग और संबंधित खातों में धन हस्तांतरण की बात भी कही गई है।

    कंपनी ने आरोपों को बताया गलतफहमी
    सेबी की कार्रवाई के बाद कंपनी ने सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। राजेश एक्सपोर्ट्स का कहना है कि उसके द्वारा घोषित राजस्व आंकड़े सही हैं और नियामक को कंपनी की रिपोर्टिंग प्रणाली को लेकर गलतफहमी हुई है। कंपनी का दावा है कि उसकी सहायक इकाई वालकाम्बी के वित्तीय आंकड़ों की व्याख्या में अंतर के कारण यह विवाद पैदा हुआ है। कंपनी ने भरोसा दिलाया है कि वह जांच एजेंसियों को सभी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराएगी और पूरा सहयोग करेगी।

    निवेशकों की बढ़ी चिंता
    मामले के सार्वजनिक होने के बाद कंपनी के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई। इस घटनाक्रम ने कॉर्पोरेट गवर्नेंस, ऑडिट प्रक्रिया और बड़े संस्थागत निवेशकों की निगरानी क्षमता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा, लेकिन फिलहाल यह मामला भारतीय कॉर्पोरेट जगत में पारदर्शिता और वित्तीय जवाबदेही पर बड़ी बहस का कारण बन गया है।

  • यू-टर्न के बाद फंसी रणनीति? अभिजीत दीपके के अगले कदम पर सस्पेंस

    यू-टर्न के बाद फंसी रणनीति? अभिजीत दीपके के अगले कदम पर सस्पेंस


    नई दिल्ली। अमेरिका से 6 जून को दिल्ली पहुंचने वाले Abhijeet Deepke ने पिछले कुछ दिनों में सोशल मीडिया के जरिए अपने समर्थकों को राजधानी में जुटने का आह्वान किया था। शुरुआत में उन्होंने लोगों से कहा था कि वे इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI) पर उनका स्वागत करने पहुंचें। उनका दावा था कि दिल्ली पहुंचते ही उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है, इसलिए समर्थकों की मौजूदगी जरूरी होगी।

    हालांकि, प्रदर्शन से ठीक दो दिन पहले दीपके ने अपने रुख में बड़ा बदलाव करते हुए समर्थकों से एयरपोर्ट न आने की अपील कर दी। उन्होंने तर्क दिया कि बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने से आम यात्रियों और नागरिकों को परेशानी हो सकती है। लेकिन इस फैसले ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

    एयरपोर्ट से हटे, लेकिन आगे का रास्ता अस्पष्ट
    दीपके ने अब कहा है कि वे एयरपोर्ट से सीधे पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने जाएंगे और समर्थक वहीं एकत्रित हों। यहीं से प्रदर्शन की अनुमति लेने की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही गई है।

    लेकिन आलोचकों और पर्यवेक्षकों का सवाल है कि यदि वास्तव में हजारों या लाखों लोग पहुंचते हैं, जैसा कि CJP दावा कर रही है, तो नई दिल्ली के अत्यंत संवेदनशील इलाके में व्यवस्था कैसे बनाए रखी जाएगी? पार्लियामेंट स्ट्रीट और आसपास के क्षेत्रों में कई सरकारी कार्यालय, महत्वपूर्ण संस्थान और व्यस्त मार्ग मौजूद हैं। ऐसे में बड़ी भीड़ के जुटने से यातायात और सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। इसके अलावा यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि अनुमति मिलने तक समर्थक कहां रहेंगे और भीड़ को नियंत्रित करने की क्या व्यवस्था होगी।

    अनुमति को लेकर सबसे बड़ा सवाल
    पूरा विवाद प्रदर्शन की अनुमति को लेकर भी केंद्रित है। अब तक CJP की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया कि पूर्व निर्धारित प्रक्रिया के तहत पुलिस या प्रशासन से पहले ही अनुमति क्यों नहीं मांगी गई। पार्टी के प्रवक्ताओं का कहना है कि दीपके स्वयं दिल्ली पहुंचकर आवेदन देंगे, लेकिन प्रशासनिक प्रक्रियाओं को देखते हुए यह सवाल उठ रहा है कि क्या कुछ घंटों के भीतर किसी बड़े धरना-प्रदर्शन की अनुमति मिल पाना संभव होगा।

    अगर अनुमति नहीं मिली तो क्या होगा?
    सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि यदि पुलिस ने प्रस्तावित प्रदर्शन या जंतर-मंतर पर सभा की अनुमति देने से इनकार कर दिया, तो पार्टी की अगली रणनीति क्या होगी?

    इस मुद्दे पर न तो दीपके ने और न ही पार्टी के अन्य नेताओं ने कोई स्पष्ट जवाब दिया है। समर्थकों को भी यह नहीं बताया गया है कि ऐसी स्थिति में उन्हें क्या करना होगा। यही वजह है कि प्रदर्शन से पहले ही पूरे कार्यक्रम को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

    फिलहाल, 6 जून के कार्यक्रम पर सबकी नजरें टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि अभिजीत दीपके का ‘दिल्ली प्लान’ जमीन पर कितना सफल होता है और प्रशासन तथा प्रदर्शनकारियों के बीच स्थिति किस दिशा में आगे बढ़ती है।

  • बंगाल में BJP ऑफिस पर बुलडोजर कार्रवाई, सामने आई जमीन विवाद की कहानी

    बंगाल में BJP ऑफिस पर बुलडोजर कार्रवाई, सामने आई जमीन विवाद की कहानी


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में नई राजनीतिक परिस्थितियों के बीच प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान उत्तर दिनाजपुर जिले के हेमताबाद में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के स्थानीय कार्यालय से जुड़ा एक दिलचस्प मामला सामने आया है। सरकारी जमीन की मापी के दौरान पता चला कि पार्टी कार्यालय का एक हिस्सा निर्धारित सरकारी भूमि के दायरे में आ रहा है। इसके बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने खुद आगे बढ़कर उस हिस्से को हटाने का फैसला किया।
    मामले की शुरुआत तब हुई जब हेमताबाद के ब्लॉक विकास अधिकारी (BDO) Biswajit Dutta ने सरकारी जमीनों पर बने अवैध निर्माणों को हटाने का निर्देश जारी किया। प्रशासन की ओर से इलाके में मापी कराई गई, जिसमें शालबागान के पास राज्य राजमार्ग किनारे स्थित भाजपा ब्लॉक कार्यालय का बरामदा सरकारी जमीन पर पाया गया।

    प्रशासन के आने से पहले खुद शुरू कर दी कार्रवाई
    जांच रिपोर्ट सामने आते ही स्थानीय भाजपा नेताओं ने प्रशासन की ओर से बुलडोजर चलाए जाने का इंतजार नहीं किया। भाजपा के प्रखंड अध्यक्ष Biplab Sarkar की मौजूदगी में कार्यकर्ता हथौड़े और अन्य उपकरण लेकर कार्यालय पहुंचे और अवैध हिस्से को स्वयं तोड़ना शुरू कर दिया। कुछ ही समय में कार्यालय के उस हिस्से को पूरी तरह हटा दिया गया, जो सरकारी भूमि की सीमा के भीतर पाया गया था। यह कदम स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया, क्योंकि आमतौर पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान विरोध, धरना या राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिलते हैं।

    सड़क चौड़ीकरण अभियान से जुड़ा मामला
    प्रशासन के अनुसार, कालियागंज से दक्षिण दिनाजपुर को जोड़ने वाले राज्य राजमार्ग के दोनों ओर 15 फीट के दायरे में आने वाले सभी अवैध निर्माणों को हटाने का अभियान चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य सड़क चौड़ीकरण और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाना है।
    भाजपा नेता बिप्लव सरकार ने कहा कि जब पार्टी कार्यालय का बरामदा भी चिन्हित क्षेत्र में पाया गया तो कानून का सम्मान करते हुए उसे हटाने का निर्णय लिया गया। उन्होंने यह भी मांग की कि अभियान से प्रभावित छोटे व्यापारियों और दुकानदारों के पुनर्वास की व्यवस्था की जानी चाहिए।

    दुकानदारों ने भी दिखाई पहल
    भाजपा कार्यालय पर हुई कार्रवाई का असर आसपास के व्यापारियों पर भी देखने को मिला। रायगंज-बालुरघाट राज्य राजमार्ग के किनारे स्थित कई दुकानदारों ने प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार किए बिना अपने अतिक्रमण वाले हिस्सों को स्वयं हटाना शुरू कर दिया। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि अभियान शुरू होने से पहले लगातार मुनादी, लाउडस्पीकर घोषणाओं और नोटिसों के माध्यम से लोगों को सरकारी भूमि खाली करने के लिए आगाह किया गया था।

    BDO बिस्वजीत दत्ता ने स्पष्ट किया कि अब आधिकारिक बेदखली अभियान शुरू हो चुका है और भविष्य में सरकारी जमीन पर किसी भी तरह का अवैध निर्माण मिलने पर प्रशासन सख्त कार्रवाई करेगा।

  • चुनाव चिह्न विवाद के बीच TMC का सख्त संदेश, ममता बनर्जी पर सांसद का बड़ा बयान

    चुनाव चिह्न विवाद के बीच TMC का सख्त संदेश, ममता बनर्जी पर सांसद का बड़ा बयान



    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहा सत्ता संघर्ष चर्चा का विषय बना हुआ है। पार्टी से निष्कासित नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी खेमे को विधानसभा अध्यक्ष द्वारा मुख्य विपक्षी दल की मान्यता दिए जाने के बाद TMC नेतृत्व और बागी गुट के बीच टकराव और तेज हो गया है। इसी बीच TMC सांसद Mahua Moitra ने बागी विधायकों पर जमकर हमला बोला है।

    एक इंटरव्यू में महुआ मोइत्रा ने कहा कि जिन नेताओं ने वर्षों तक Mamata Banerjee की लोकप्रियता और पार्टी के संगठनात्मक बल का लाभ उठाया, वही आज पार्टी को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने बागी नेताओं को निशाने पर लेते हुए कहा कि सत्ता में रहने की आदत पड़ चुकी है, इसलिए वे विपक्ष में संघर्ष करने के बजाय आसान रास्ता चुन रहे हैं। महुआ ने दो टूक कहा कि यदि किसी नेता को पार्टी छोड़नी है तो वह खुलकर जाए, लेकिन खुद को तृणमूल कांग्रेस बताने का अधिकार नहीं है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि बागी नेता चाहें तो अपनी अलग पार्टी बना लें, लेकिन TMC के नाम और पहचान का इस्तेमाल न करें।

    भाजपा पर गंभीर आरो
    महुआ मोइत्रा ने इस पूरे घटनाक्रम के पीछे भारतीय जनता पार्टी की भूमिका होने का आरोप भी लगाया। उनका कहना है कि भाजपा योजनाबद्ध तरीके से TMC को तोड़ने की कोशिश कर रही है। उन्होंने पश्चिम बंगाल के नेता Suvendu Adhikari का नाम लेते हुए कहा कि वे कभी तृणमूल का हिस्सा रहे हैं और पार्टी के नेताओं की राजनीतिक कमजोरियों से भली-भांति परिचित हैं। इसी जानकारी का इस्तेमाल कर भाजपा नेताओं पर दबाव बनाया जा रहा है।

    महुआ ने दावा किया कि कुछ नेताओं को केंद्रीय एजेंसियों और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर पक्ष बदलने के लिए मजबूर किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ विधायकों और नेताओं को गिरफ्तारी की धमकियां दी गईं, जिसके चलते वे बागी खेमे के साथ चले गए।

    “असली TMC ममता के साथ”
    बागी गुट के बढ़ते प्रभाव और चुनाव चिह्न पर संभावित विवाद के सवाल पर महुआ मोइत्रा ने स्पष्ट कहा कि असली तृणमूल कांग्रेस आज भी ममता बनर्जी और उनके साथ खड़े नेताओं के पास ही है। उन्होंने कहा कि पार्टी का मूल संगठन, विचारधारा और जनाधार ममता बनर्जी के नेतृत्व में कायम है।

    महुआ ने यह भी कहा कि यदि कभी ऐसी स्थिति आती है कि पार्टी को अपना मौजूदा चुनाव चिह्न छोड़ना पड़े, तब भी उन्हें कोई चिंता नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि जब ममता बनर्जी ने कांग्रेस से अलग होकर नई राजनीतिक राह चुनी थी, तब उन्होंने अपनी पहचान और चुनावी प्रतीक खुद तैयार किया था।

    नया सिंबल बनाकर भी जीत सकती हैं ममता
    महुआ मोइत्रा ने विश्वास जताया कि ममता बनर्जी का राजनीतिक कद किसी चुनाव चिह्न का मोहताज नहीं है। उन्होंने कहा कि जिस नेता ने नया दल बनाकर और नया प्रतीक लेकर पश्चिम बंगाल में तीन बार सरकार बनाई, वह भविष्य में भी नया चुनावी चिह्न बनाकर जनता का समर्थन हासिल कर सकती हैं।

    उनके अनुसार, चुनाव चिह्न या पार्टी का नाम बदल सकता है, लेकिन जनता के बीच ममता बनर्जी की पहचान और राजनीतिक प्रभाव को कोई नहीं छीन सकता।

  • 10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों के लिए 18 जून को मतदान…

    10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों के लिए 18 जून को मतदान…


    नई दिल्ली।
    भारत (India) के 10 राज्यों की 24 सीटों पर राज्यसभा चुनाव (Rajya Sabha elections) होने जा रहे हैं। 18 जून को मतदान (Voting June 18) होगा और संभावनाएं हैं कि एक ही दिन में नतीजे भी घोषित कर दिए जाएं। खास बात है कि यह चुनाव केंद्र में सत्तारूढ़ गठबंधन NDA के लिए बेहद अहम होने जा रहा है। आंकड़े बता रहे हैं कि उच्च सदन में एनडीए दो तिहाई के आंकड़े से महज 15 सांसद दूर है। अब सवाल है कि गठबंधन का सबसा बड़ा सदस्य भारतीय जनता पार्टी कितनी सीटें जीत सकती है।


    समझें राज्यसभा का गणित

    245 सदस्यों वाले राज्यसभा में एनडीए के पास कुल 148 सांसद हैं। इनमें से सबसे बड़ी पार्टी भाजपा के पास 113 सांसद हैं। अब इस गठबंधन को दो तिहाई का जादुई आंकड़ा छूने के लिए 15 और सांसदों की जरूरत है। खास बात है कि कोई भी संविधान संशोधन बिल पार कराने के लिए सरकार को दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। हालांकि, कहा जा रहा है कि इस चुनाव में एनडीए का इस आंकड़े तक पहुंचना तय नहीं है, लेकिन भाजपा कई राज्यों में बढ़त बना सकती है।


    कहां कितनी सीटें हो रही हैं खाली

    आंध्र प्रदेश और गुजरात में 4-4 सीटों पर चुनाव होने हैं। जबकि, मध्य प्रदेश और राजस्थान में प्रत्येक में 3 सीटों पर चुनाव हैं। इसके अलावा मणिपुर, मेघालाय में 1-1, झारखंड में 2, अरुणाचल प्रदेश में 1, कर्नाटक में 4 और मिजोरम की 1 सीट पर चुनाव होगा। साथ ही 2 राज्यसभा सीट पर उपचुनाव के लिए भी वोट डाले जाएंगे।


    कर्नाटक

    कर्नाटक में एनडीए के खाते में 1 सीट आना तय है। जबकि, कांग्रेस 2 सीटें अपने नाम कर सकती है। कहा जा रहा है कि चौथी सीट इस बात पर निर्भर करेगा कि विधायक किस ओर अपना वोट डाल रहे हैं।


    आंध्र प्रदेश

    175 विधायकों वाले आंध्र प्रदेश में टीडीपी के पास 135 और जन सेना पार्टी के पास 21 विधायक हैं। जबकि, भाजपा के पास 8 और YSRCP के 11 विधायक हैं। इस लिहाज से 164 सीटों वाली एनडीए यहां चारों राज्यसभा सीट जीत सकती है।


    गुजरात

    गुजरात की 182 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा के पास 161 विधायकों का भारी बहुमत है। इस मजबूत आंकड़े के दम पर पार्टी को 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव में सभी चारों सीटों पर अपनी आसान और पक्की जीत का पूरा भरोसा है।


    राजस्थान

    राजस्थान विधानसभा में सदस्यों की संख्या 200 है। यहां भाजपा के पास 115 और कांग्रेस के 69 विधायक हैं। इस लिहाज से माना जा रहा है कि भाजपा 2 और कांग्रेस 1 सीट जीत सकती है।


    मध्य प्रदेश

    मध्य प्रदेश के नतीजे चौंकाने वाले साबित हो सकते हैं। 163 विधायकों वाली भाजपा यहां 2 सीटें अपने नाम कर सकती है। वहीं, एक सीट कांग्रेस के खाते में जा सकती है।


    झारखंड

    INDIA गठबंधन के शासन वाले राज्य में दोनों ही सीटें सत्तारूढ़ गठबंधन को मिल सकती हैं। हालांकि, कहा जा रहा है कि रणनीति के तहत एनडीए एक सीट हासिल कर सकता है। यहां कुल 81 विधायक हैं, जिनमें 56 INDIA गठबंधन और 24 एनडीए के हैं।

  • इंडिगो की 6 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें ऑपरेटिंग कॉस्ट बढ़ने के कारण जुलाई से अस्थाई रूप से होगी बंद

    इंडिगो की 6 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें ऑपरेटिंग कॉस्ट बढ़ने के कारण जुलाई से अस्थाई रूप से होगी बंद


    नई दिल्ली।
    विमान कंपनी इंडिगो (Airline company Indigo) ने जुलाई महीने से छह डेस्टिनेशंस (Six Destinations) के लिए अपनी उड़ानों को अस्थायी रूप से रोकने का ऐलान किया है. विमानन कंपनी ने ये कदम कमजोर मांग और लगातार बढ़ रही ऑपरेटिंग कॉस्ट (Increasing Operating Costs) को देखते हुए उठाया है।

    इंडिगो का ये फैसला गर्मियों की छुट्टियों मौजूदा सीजन में आया है. इंडिगो के मुताबिक, मलेशिया के लांगकावी, थाईलैंड के क्राबी और वियतनाम के हो ची मिन्ह सिटी के लिए उड़ानें 1 जुलाई से सस्पेंड यानी बंद कर दी जाएंगी। इसके अलावा, हांगकांग और चीन के शंघाई, कंबोडिया के सिएम रीप के लिए उड़ानों को 3 जुलाई से रोक दिया जाएगा।

    इन सभी छह रूटों पर उड़ानों का सस्पेंशन 30 सितंबर तक लागू रहेगा. ये सभी रूट भारतीय यात्रियों के बीच काफी पॉपुलर हैं. ये रूट दक्षिण-पूर्व एशिया और चीन के प्रमुख पर्यटन और व्यावसायिक शहरों के लिए सीधी कनेक्टिविटी मुहैया कराते हैं।


    अक्टूबर से दोबारा शुरू होगी बुकिंग

    इंडिगो ने बताया है कि इन सभी छह रूटों के लिए टिकटों की बुकिंग 1 अक्टूबर से दोबारा शुरू कर दी जाएगी. हालांकि, अगर मार्किट में मांग में सुधार होता है, तो इन सेवाओं को तय समय से पहले भी बहाल किया जा सकता है. एयरलाइंस ने इस कदम को इंटरनेशनल नेटवर्क में एक सीमित और छोटा सा बदलाव बताया है।

    कंपनी के मुताबिक, साल की ये तिमाही आमतौर पर यात्रा के लिहाज से कमजोर होती है. इसके साथ ही मौजूदा समय में लागत का माहौल भी काफी चुनौतियों से भरा है. अस्थायी कटौती के बावजूद एयरलाइंस ने कहा है कि वो हर हफ्ते 1,800 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय उड़ानें जारी रखेगी. कंपनी अपने विदेशी नेटवर्क के बड़े हिस्से को पहले की तरह ही बरकरार रख रही है।

    इंडिगो ने कहा कि वो अंतरराष्ट्रीय परिचालन पर कोई भी अगला फैसला लेने से पहले मार्किट की कंडीशन, बढ़ती परिचालन लागत और एयरस्पेस के प्रतिबंधों पर नजर रखेगी। इस फैसले से प्रभावित होने वाले यात्रियों को पहले से सूचित किया जाएगा. यात्रियों को रिफंड या दूसरे उपलब्ध विकल्प भी दिए जाएंगे.


    ईरान युद्ध के चलते मैनचेस्टर उड़ान पर भी लगा ब्रेक

    दो दिन पहले ही इंडिगो ने 31 अगस्त से मैनचेस्टर के लिए अपनी उड़ानें बंद करने की बात कही थी. एयरलाइंस ने इसके पीछे ईरान युद्ध के चलते इंटरनेशनल एयरस्पेस में लंबे समय से जारी प्रतिबंधों और बढ़ती परिचालन लागत का हवाला दिया था.

    कंपनी का कहना है कि इन वजहों से ये रूट कमर्शियल रूप से काफी नुकसानदेह साबित हो रहा था. इंडिगो के मुताबिक, कुछ एयर कॉरिडोर्स के लगातार बंद रहने की वजह से उड़ानों के समय और खर्चों में भारी बढ़ोतरी हुई है. इससे लंबी दूरी की हवाई सेवाओं को जारी रखना मुश्किल हो गया है.

    इंडिगो फिलहाल दिल्ली और मुंबई से ब्रिटेन के मैनचेस्टर के लिए उड़ानों का संचालन करती है. इस रूट की शुरुआत पिछले साल जुलाई में एयरलाइंस की लंबी दूरी के अंतरराष्ट्रीय विस्तार योजना के तहत की गई थी।

  • BJD से BJP तक का सफर, कौन हैं देबाशीष सामंतराय जिन्हें मिला राज्यसभा टिकट

    BJD से BJP तक का सफर, कौन हैं देबाशीष सामंतराय जिन्हें मिला राज्यसभा टिकट


    नई दिल्ली। ओडिशा की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी उलटफेर सामने आया है। बीजू जनता दल (BJD) से इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हुए वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद देबाशीष सामंतराय को पार्टी ने राज्यसभा उपचुनाव के लिए अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। खास बात यह है कि उन्होंने BJP की सदस्यता महज 10 दिन पहले ही ली थी और अब उन्हें सीधे उच्च सदन की जिम्मेदारी मिलने जा रही है। सामंतराय पहले भी तीन बार विधायक रह चुके हैं और फरवरी 2024 में उन्हें BJD की ओर से राज्यसभा भेजा गया था। उनका कार्यकाल वर्ष 2030 तक तय था, लेकिन उन्होंने कार्यकाल पूरा होने से पहले ही 25 मई को पार्टी से इस्तीफा दे दिया।

    इस्तीफे के पीछे क्या रही वजह?
    देबाशीष सामंतराय ने BJD छोड़ने की वजह पार्टी के भीतर बढ़ती उपेक्षा को बताया है। उनका कहना है कि उन्हें लंबे समय से पार्टी नेतृत्व से दूर रखा जा रहा था और वे अपने राजनीतिक गुरु तथा BJD प्रमुख नवीन पटनायक से भी मुलाकात नहीं कर पा रहे थे। उन्होंने पार्टी के भीतर नौकरशाह से नेता बने वी. के. पांडियन की भूमिका पर भी सवाल उठाए और कहा कि संगठन में उनके प्रभाव के कारण कई पुराने नेताओं को किनारे किया जा रहा है। BJD छोड़ने के तुरंत बाद उन्होंने BJP का दामन थाम लिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व तथा “विकसित भारत” के विजन से प्रेरित होकर नई राजनीतिक यात्रा शुरू करने की बात कही।

    BJP की रणनीति या सियासी संदेश? 
    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि BJP का यह कदम केवल चुनावी रणनीति नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संदेश भी है। इससे पहले भी पार्टी ने BJD के कई नेताओं को अपने साथ जोड़कर उन्हें अहम जिम्मेदारियां दी हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, सामंतराय को उम्मीदवार बनाना इस बात का संकेत है कि BJP ओडिशा में अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहती है, खासकर राज्यसभा जैसी महत्वपूर्ण सीटों पर।

    उपचुनाव में जीत लगभग तय?
    चुनाव आयोग ने ओडिशा राज्यसभा उपचुनाव का पूरा कार्यक्रम जारी कर दिया है। 147 सदस्यों वाली विधानसभा में BJP के पास स्पष्ट बहुमत है, ऐसे में देबाशीष सामंतराय की जीत लगभग तय मानी जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, मुख्य विपक्षी दल BJD और कांग्रेस इस उपचुनाव में उम्मीदवार उतारने से भी बच सकती हैं, जिससे मुकाबला और आसान हो जाएगा।

    ओडिशा की राजनीति में नया मोड़
    इस घटनाक्रम ने ओडिशा की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। जहां एक तरफ इसे BJP की मजबूत रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष इसे राजनीतिक अवसरवाद करार दे रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह फैसला राज्य की राजनीति को किस दिशा में ले जाता है।

  • 'जय भीम' के उद्घोष के साथ अमेरिका से भारत के लिए हुए रवाना, दिल्ली में बड़े प्रदर्शन की तैयारी

    'जय भीम' के उद्घोष के साथ अमेरिका से भारत के लिए हुए रवाना, दिल्ली में बड़े प्रदर्शन की तैयारी

    नई दिल्ली । सोशल मीडिया पर कौतूहल का विषय बनी कॉकरोच जनता पार्टी अब वास्तविक धरातल पर राजनीतिक विरोध प्रदर्शन की तैयारी में है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके अमेरिका से भारत के लिए रवाना हो चुके हैं और शनिवार सुबह देश की राजधानी दिल्ली में कदम रखेंगे। उनका उद्देश्य राष्ट्रीय राजधानी के जंतर-मंतर पर एक विशाल जनसभा और विरोध प्रदर्शन आयोजित करना है, जिसके केंद्र में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है।

    अभिजीत दीपके ने भारत यात्रा पर निकलने से पहले सोशल मीडिया पर एक भावुक और वैचारिक संदेश साझा किया। उन्होंने अपने पोस्ट में ‘जय भीम’ के नारे का उल्लेख करते हुए लिखा कि वह भारत के लिए प्रस्थान कर चुके हैं और अब अपना भाग्य पूरी तरह से देश के संविधान के हाथों में सौंपते हैं। इस डिजिटल घोषणा के बाद उनके समर्थकों में भारी उत्साह देखा जा रहा है, हालांकि सुरक्षा कारणों से उनकी फ्लाइट और लैंडिंग के समय को पूरी तरह गुप्त रखा गया है।

    इस पूरे विरोध प्रदर्शन की सबसे बड़ी प्रशासनिक अड़चन यह है कि संगठन ने दिल्ली पुलिस से इस प्रदर्शन के लिए अब तक कोई आधिकारिक अनुमति नहीं ली है। रणनीतिक रूप से अभिजीत दीपके ने स्पष्ट किया है कि इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरने के बाद वह सीधे जंतर-मंतर जाने के बजाय पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस थाने का रुख करेंगे। वहां पहुंचकर वह प्रशासनिक अधिकारियों से मिलकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की लिखित अनुमति मांगेंगे।

    अभिजीत दीपके और उनके संगठन का दावा है कि इस प्रदर्शन में देश भर से भारी संख्या में युवा और छात्र शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंच रहे हैं। एक साक्षात्कार के दौरान उन्होंने किसी सटीक आंकड़े की पुष्टि तो नहीं की, लेकिन यह जरूर कहा कि प्रदर्शन में हजारों लोग शामिल होंगे। उन्होंने अपनी बात को मजबूती देने के लिए संगठन की वेबसाइट का हवाला देते हुए कहा कि उनकी इस वर्चुअल पार्टी से 11 लाख से अधिक पंजीकृत सदस्य जुड़ चुके हैं, जिन्होंने दिल्ली पहुंचने की प्रतिबद्धता जताई है।

    इस अचानक उपजे विरोध प्रदर्शन का मुख्य एजेंडा देश की वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में उपजी विसंगतियां हैं। कॉकरोच जनता पार्टी के पदाधिकारियों का कहना है कि वे नीट परीक्षा में हुए कथित पेपर लीक मामले और सीबीएसई के परीक्षा परिणामों में सामने आईं गड़बड़ियों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रहे हैं। संगठन की मांग है कि इन गंभीर प्रशासनिक विफलताओं की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तत्काल प्रभाव से अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।

    दिलचस्प बात यह है कि इस आंदोलन की पृष्ठभूमि पूरी तरह से डिजिटल और तात्कालिक है। देश के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की एक कथित टिप्पणी के बाद, जिसमें उन्होंने कुछ बेरोजगार युवाओं के संदर्भ में एक तुलनात्मक टिप्पणी की थी, इंटरनेट पर विरोध स्वरूप ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नामक एक व्यंग्यात्मक सोशल मीडिया हैंडल बनाया गया था। महज चार दिनों के भीतर इस डिजिटल हैंडल के फॉलोअर्स की संख्या देश की स्थापित बड़ी राजनीतिक पार्टियों से भी आगे निकल गई, जिसने अब एक वास्तविक आंदोलन का रूप ले लिया है।

  • सीएमएचओ मुंगेली ने जारी किया भर्ती नोटिफिकेशन, 20 जून तक करें आवेदन, 8वीं पास से स्नातकोत्तर तक के लिए अवसर

    सीएमएचओ मुंगेली ने जारी किया भर्ती नोटिफिकेशन, 20 जून तक करें आवेदन, 8वीं पास से स्नातकोत्तर तक के लिए अवसर

    नई दिल्ली :स्वास्थ्य क्षेत्र में रोजगार की तलाश कर रहे युवाओं और अनुभवी अभ्यर्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर सामने आया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य कार्यालय (सीएमएचओ), मुंगेली द्वारा विभिन्न संविदा पदों पर भर्ती के लिए अधिसूचना जारी की गई है। इस भर्ती अभियान के तहत कुल 106 रिक्त पदों पर योग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति की जाएगी। आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इच्छुक अभ्यर्थी निर्धारित तिथि तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

    जारी भर्ती अधिसूचना के अनुसार स्वास्थ्य सेवाओं और प्रशासनिक कार्यों से जुड़े कई पदों को शामिल किया गया है। इनमें प्रयोगशाला तकनीशियन, फिजियोथेरेपिस्ट, फार्मासिस्ट, पोषण परामर्शदाता, स्टाफ नर्स, नर्सिंग अधिकारी, ऑडियोलॉजिस्ट, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी, रेडियोग्राफर, परामर्शदाता, परिचारक, जूनियर सेक्रेटेरियल असिस्टेंट, ब्लॉक डेटा मैनेजर और अन्य पद शामिल हैं। भर्ती प्रक्रिया का उद्देश्य जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाना तथा विभिन्न संस्थानों में आवश्यक मानव संसाधन उपलब्ध कराना है।

    ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 2 जून से प्रारंभ हो चुकी है। अभ्यर्थियों को निर्धारित पोर्टल के माध्यम से आवेदन करना होगा। आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 20 जून तय की गई है। उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे अंतिम समय की तकनीकी समस्याओं से बचने के लिए समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें।

    शैक्षणिक योग्यता पदानुसार अलग-अलग निर्धारित की गई है। कुछ पदों के लिए 8वीं, 10वीं और 12वीं उत्तीर्ण अभ्यर्थी आवेदन कर सकते हैं, जबकि अन्य पदों के लिए डिप्लोमा, स्नातक, स्नातकोत्तर तथा विशेष तकनीकी और व्यावसायिक योग्यता अनिवार्य रखी गई है। नर्सिंग, ऑडियोलॉजी, स्वास्थ्य शिक्षा, सामाजिक कार्य, गृह विज्ञान और चिकित्सा क्षेत्र से संबंधित योग्यताधारी अभ्यर्थियों के लिए भी विभिन्न अवसर उपलब्ध हैं।

    आयु सीमा की बात करें तो आवेदन करने वाले उम्मीदवारों की न्यूनतम आयु 18 वर्ष निर्धारित की गई है। अधिकतम आयु सीमा संबंधित पदों के अनुसार तय की गई है और कुछ श्रेणियों के लिए यह 70 वर्ष तक रखी गई है। आरक्षित वर्गों के उम्मीदवारों को शासन के नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट का लाभ भी मिलेगा।

    भर्ती प्रक्रिया में अभ्यर्थियों का चयन शैक्षणिक योग्यता, कार्य अनुभव, कौशल परीक्षण, लिखित परीक्षा, दस्तावेज सत्यापन और साक्षात्कार जैसे विभिन्न चरणों के आधार पर किया जाएगा। अंतिम चयन मेरिट और निर्धारित मानकों के अनुसार किया जाएगा।

    चयनित उम्मीदवारों को पद के अनुसार मासिक मानदेय प्रदान किया जाएगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वेतनमान 8,800 रुपये से लेकर 25,000 रुपये प्रतिमाह तक निर्धारित किया गया है। इससे स्वास्थ्य क्षेत्र में कार्य करने के इच्छुक उम्मीदवारों को रोजगार का अच्छा अवसर मिल सकता है।

    आवेदन शुल्क भी वर्गवार निर्धारित किया गया है। सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को 300 रुपये, अन्य पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों को 200 रुपये तथा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, दिव्यांग और महिला उम्मीदवारों को 100 रुपये शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से करना होगा।

    स्वास्थ्य विभाग में निकली यह भर्ती विभिन्न शैक्षणिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों के लिए रोजगार के नए अवसर लेकर आई है। इच्छुक अभ्यर्थियों को आवेदन करने से पहले पात्रता, आवश्यक दस्तावेज और भर्ती संबंधी सभी दिशा-निर्देशों का सावधानीपूर्वक अध्ययन करने की सलाह दी गई है।

  • दिल्ली दंगों के सबसे चर्चित मामलों में शामिल अंकित शर्मा हत्याकांड, अदालत ने फैसला 11 जून तक टाला

    दिल्ली दंगों के सबसे चर्चित मामलों में शामिल अंकित शर्मा हत्याकांड, अदालत ने फैसला 11 जून तक टाला

    नई दिल्ली । वर्ष 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या से जुड़े बहुचर्चित मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने अपना फैसला फिलहाल सुरक्षित रखते हुए सुनवाई की अगली तारीख 11 जून निर्धारित की है। अदालत को गुरुवार को इस मामले में निर्णय सुनाना था, लेकिन अब फैसला अगले सप्ताह सुनाया जाएगा। इस घटनाक्रम के बाद सभी पक्षों की निगाहें आगामी सुनवाई पर टिक गई हैं।

    अंकित शर्मा हत्याकांड दिल्ली दंगों से जुड़े सबसे चर्चित और संवेदनशील मामलों में शामिल रहा है। यह मामला न केवल अपनी गंभीरता बल्कि इससे जुड़े आरोपों और लंबे न्यायिक प्रक्रिया के कारण भी लगातार चर्चा में बना रहा। मामले में पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत कुल 11 आरोपी न्यायालय के समक्ष पेश हैं, जिन पर हत्या, दंगा, आपराधिक साजिश और अन्य गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

    घटना फरवरी 2020 की है, जब उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कई इलाकों में हिंसा भड़क उठी थी। इसी दौरान 26 फरवरी को अंकित शर्मा का शव खजूरी खास क्षेत्र के एक नाले से बरामद किया गया था। उनकी मौत ने पूरे देश का ध्यान इस मामले की ओर खींचा था। इसके बाद पुलिस ने हत्या और दंगों से संबंधित विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।

    अभियोजन पक्ष का दावा है कि आरोपी एक संगठित भीड़ और कथित साजिश का हिस्सा थे, जिसने दंगों के दौरान हिंसक घटनाओं को अंजाम दिया। जांच एजेंसियों ने अदालत के समक्ष विभिन्न दस्तावेजी साक्ष्य, गवाहों के बयान और अन्य सामग्री प्रस्तुत की है। वहीं बचाव पक्ष ने आरोपों का विरोध करते हुए अपने तर्क अदालत के समक्ष रखे हैं।

    मार्च 2023 में अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान सभी आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय किए थे। इनमें हत्या, दंगा, घातक हथियारों के साथ दंगा करने, समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं। इसके बाद लंबे समय तक चली सुनवाई में दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क विस्तार से प्रस्तुत किए।

    मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान यह केस कई बार राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना। अदालतों में हुई सुनवाई, जमानत याचिकाओं और कानूनी बहसों ने इसे लगातार सुर्खियों में बनाए रखा। इसी वजह से फैसले का इंतजार केवल संबंधित पक्षों को ही नहीं बल्कि कानूनी और राजनीतिक हलकों को भी है।

    कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले में आने वाला फैसला दिल्ली दंगों से जुड़े अन्य मामलों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जाएगा। अदालत का निर्णय उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहियों और कानूनी तथ्यों के आधार पर होगा, जिसका सभी पक्षों को इंतजार है।

    फिलहाल अदालत द्वारा फैसला टाले जाने के बाद एक सप्ताह और प्रतीक्षा बढ़ गई है। अब 11 जून को कड़कड़डूमा कोर्ट इस बहुचर्चित मामले में अपना अंतिम निर्णय सुनाएगी। ऐसे में आगामी तारीख को लेकर सुरक्षा एजेंसियों, कानूनी विशेषज्ञों और आम लोगों की नजरें अदालत की कार्यवाही पर बनी हुई हैं।