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  • नेपाल से इस्तांबुल जा रही तुर्किश एयरलाइंस की फ्लाइट की कोलकाता में इमरजेंसी लैंडिंग, सभी यात्री सुरक्षित

    नेपाल से इस्तांबुल जा रही तुर्किश एयरलाइंस की फ्लाइट की कोलकाता में इमरजेंसी लैंडिंग, सभी यात्री सुरक्षित


    कोलकाता/काठमांडू। नेपाल की राजधानी काठमांडू से तुर्की के इस्तांबुल जा रही तुर्किश एयरलाइंस की एक अंतरराष्ट्रीय उड़ान को बुधवार दोपहर उस समय आपात स्थिति का सामना करना पड़ा जब विमान के एक इंजन में गंभीर तकनीकी खराबी और आग की आशंका सामने आई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पायलटों ने सूझबूझ और त्वरित निर्णय लेते हुए विमान को भारत के कोलकाता की ओर मोड़ दिया जहां नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सुरक्षित इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई। इस घटना में विमान में सवार सभी 236 यात्री और 11 चालक दल के सदस्य पूरी तरह सुरक्षित हैं।

    एयरपोर्ट सूत्रों के अनुसार तुर्किश एयरलाइंस की फ्लाइट संख्या टीएचवाई-727 जो एक वाइडबॉडी एयरक्राफ्ट थी ने बुधवार दोपहर 1 बजकर 29 मिनट पर काठमांडू के त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से इस्तांबुल के लिए उड़ान भरी थी। उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद जब विमान ऊंचाई पकड़ रहा था तभी कॉकपिट में पायलटों को चेतावनी संकेत मिला कि विमान के दो इंजनों में से एक इंजन में खराबी आ गई है। कुछ रिपोर्टों में दाहिने इंजन में आग लगने की आशंका भी जताई गई।

    तकनीकी संकेत मिलते ही पायलटों ने तुरंत काठमांडू एयर ट्रैफिक कंट्रोल को इसकी जानकारी दी। स्थिति का सही आकलन करने और आगे की रणनीति तय करने के लिए विमान को नेपाल के धाडिंग जिले के धरके क्षेत्र के ऊपर कुछ समय तक होल्ड पर रखा गया। इस दौरान पायलट और तकनीकी टीम ने विमान के सिस्टम की बारीकी से जांच की और संभावित जोखिमों का मूल्यांकन किया।

    प्रारंभिक जांच के बाद चालक दल इस नतीजे पर पहुंचा कि एक ही इंजन के सहारे लंबी दूरी की अंतरराष्ट्रीय उड़ान जारी रखना यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से उचित नहीं होगा। हालांकि पायलटों के पास काठमांडू लौटने या नेपाल के ही भैरहवा हवाई अड्डे पर विमान उतारने जैसे विकल्प मौजूद थे लेकिन अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों और रनवे सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए कोलकाता को सबसे सुरक्षित विकल्प माना गया।

    कोलकाता एयर ट्रैफिक कंट्रोल को जैसे ही संभावित आपात स्थिति की सूचना मिली हवाई अड्डे पर फुल इमरजेंसी घोषित कर दी गई। फायर ब्रिगेड मेडिकल टीम एंबुलेंस और तकनीकी स्टाफ को रनवे के पास तैनात कर दिया गया। सभी सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर रहीं ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

    करीब डेढ़ घंटे की उड़ान के बाद विमान ने दोपहर 3 बजकर 3 मिनट पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सुरक्षित लैंडिंग की। जैसे ही विमान रनवे पर उतरा फायर और रेस्क्यू टीमों ने उसे घेर लिया और इंजन की तत्काल जांच शुरू की गई। राहत की बात यह रही कि लैंडिंग के दौरान किसी प्रकार की अनहोनी नहीं हुई और सभी यात्री सुरक्षित विमान से बाहर निकल आए।

    हवाई अड्डा अधिकारियों ने बताया कि लैंडिंग के बाद विमान को एक अलग बे में खड़ा कर विस्तृत तकनीकी निरीक्षण किया जा रहा है। प्रारंभिक जांच में इंजन में तकनीकी खराबी की पुष्टि हुई है हालांकि आग लगने की वास्तविक स्थिति को लेकर विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। तुर्किश एयरलाइंस की तकनीकी टीम और भारतीय विमानन सुरक्षा एजेंसियां संयुक्त रूप से मामले की जांच कर रही हैं।

    यात्रियों को टर्मिनल भवन में ले जाया गया जहां उनके लिए भोजन पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई। एयरलाइन की ओर से यात्रियों के लिए वैकल्पिक उड़ानों या ठहरने की व्यवस्था पर भी विचार किया जा रहा है। कई यात्रियों ने पायलट और क्रू की प्रशंसा करते हुए कहा कि पूरे घटनाक्रम के दौरान चालक दल ने शांत रहकर यात्रियों को भरोसा दिलाया जिससे घबराहट नहीं फैली।

    नागरिक उड्डयन विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की घटनाओं में पायलट का समय पर निर्णय लेना सबसे अहम होता है। वाइडबॉडी विमानों में भले ही एक इंजन पर उड़ान भरने की क्षमता होती है लेकिन लंबी अंतरराष्ट्रीय दूरी के लिए यह जोखिम भरा हो सकता है। ऐसे में कोलकाता में इमरजेंसी लैंडिंग का फैसला पूरी तरह से सुरक्षा मानकों के अनुरूप और सराहनीय माना जा रहा है।

    फिलहाल विमान की तकनीकी जांच जारी है और अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही खराबी के सही कारणों का पता चल सकेगा। यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि आधुनिक विमानन प्रणाली में सुरक्षा सर्वोपरि है और समय पर लिए गए फैसले सैकड़ों जिंदगियों को बचा सकते हैं।

  • SIR विवाद: ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में उठाए न्याय और मतदाता सूची पर सवाल

    SIR विवाद: ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में उठाए न्याय और मतदाता सूची पर सवाल


    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण SIR प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। उन्होंने भारत निर्वाचन आयोग के खिलाफ रिट याचिका दायर कर कहा कि इस प्रक्रिया में न्याय के मूल सिद्धांतों की अनदेखी हो रही है। ममता ने सुप्रीम कोर्ट में अपने बयान में कहा कि जब न्याय नहीं मिलता, तब लगता है कि न्याय बंद दरवाजों के पीछे रो रहा है।

    सुनवाई मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष हो रही है। इस दौरान राज्य की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने प्रक्रियात्मक कठिनाइयों, वास्तविक निवासियों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने और SIR के दौरान उत्पन्न होने वाली संभावित विसंगतियों पर जोर दिया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि यह प्रक्रिया संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन का जोखिम पैदा कर सकती है और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ जा सकती है।

    मुख्य न्यायाधीश ने सुनवाई के दौरान कहा कि राज्य ने अपने संवैधानिक अधिकारों के तहत याचिका दायर की है और यह मामला गंभीरता से लिया जाएगा। कोर्ट ने निर्देश दिया कि सभी पक्ष अपने दस्तावेज और प्रमाणों के साथ प्रस्तुत हों। ममता बनर्जी की दलीलों में यह भी कहा गया कि SIR प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है और यह सीधे नागरिकों के मतदान अधिकार को प्रभावित कर सकती है।

    सुनवाई के दौरान ममता ने यह भी स्पष्ट किया कि वह कोई बहुत महत्वपूर्ण व्यक्ति नहीं हैं, लेकिन राज्य की जनता के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा उनके लिए प्राथमिकता है। उन्होंने कोर्ट से आग्रह किया कि SIR प्रक्रिया में सुधार के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं ताकि मतदाता सूची में किसी भी प्रकार की अनुचित छंटनी या असुविधा को रोका जा सकराज्य सरकार की ओर से उठाए गए मुख्य बिंदुओं में यह भी शामिल है कि SIR प्रक्रिया से वास्तविक निवासियों का मताधिकार प्रभावित हो सकता है और यह चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठा सकता है। कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी पक्षों से तर्क और दस्तावेज मांगे हैं।

    इस याचिका की सुनवाई जारी है और सुप्रीम कोर्ट जल्द ही SIR प्रक्रिया की संवैधानिक वैधता और मतदाता अधिकारों की रक्षा पर फैसला सुनाएगा। इस सुनवाई को राजनीतिक और संवैधानिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह प्रक्रिया पूरे राज्य के मतदाता अधिकार और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर असर डाल सकती है।

  • आज से श्रीलंका में भगवान बुद्ध के पवित्र देवनीमोरी अवशेषों की ऐतिहासिक प्रदर्शनी

    आज से श्रीलंका में भगवान बुद्ध के पवित्र देवनीमोरी अवशेषों की ऐतिहासिक प्रदर्शनी


    नई दिल्ली । भगवान बुद्ध के पवित्र देवनीमोरी अवशेष आज से श्रीलंका में श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए प्रदर्शित किए जाएंगे। यह ऐतिहासिक अवशेष इंडियन एयरफोर्स के विशेष विमान सी 130जे के माध्यम से नई दिल्ली से कोलंबो पहुंचाए गए हैं। पवित्र अवशेषों को कोलंबो के प्रसिद्ध गंगारामया मंदिर में रखा गया है, जहां हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।

    कोलंबो स्थित भारतीय हाई कमीशन ने जानकारी दी है कि ये पवित्र अवशेष 4 से 11 फरवरी तक गंगारामया मंदिर में सुरक्षित रखे जाएंगे। सार्वजनिक पूजा और दर्शन की शुरुआत 5 फरवरी से होगी। 11 फरवरी 2026 को यह पवित्र धरोहर वापस भारत लाई जाएगी। यह देवनीमोरी अवशेषों का पहला अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक प्रदर्शन माना जा रहा है।यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस घोषणा का हिस्सा है, जिसके तहत भारत अपनी बौद्ध विरासत को विश्व के साथ साझा कर रहा है। इसका उद्देश्य सीमाओं के पार सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों को मजबूत करना है। भारत सरकार की इस पहल को बौद्ध समुदायों के बीच ऐतिहासिक और भावनात्मक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    श्रीलंका में इस प्रदर्शनी के दौरान बड़ी संख्या में बौद्ध भिक्षु, स्थानीय श्रद्धालु और अंतरराष्ट्रीय तीर्थयात्री पहुंचने की उम्मीद है। सभी को भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों के दर्शन और श्रद्धांजलि देने का दुर्लभ अवसर मिलेगा।भारतीय हाई कमीशन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक हालिया भाषण का वीडियो साझा करते हुए कहा कि भारत वियतनाम से मंगोलिया और थाईलैंड से रूस तक अपनी बौद्ध विरासत को साझा करता रहा है। जैसे ही देवनीमोरी अवशेष श्रीलंका पहुंचेंगे, यह स्पष्ट होगा कि भारत भगवान बुद्ध के शांति और करुणा के संदेश के जरिए दुनिया को कैसे जोड़ रहा है।

    इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि हाल के महीनों में भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष जहां भी प्रदर्शित किए गए, वहां आस्था और भक्ति की लहर देखने को मिली।भारत में श्रीलंका की हाई कमिश्नर महिशिनी कोलोन ने इस पहल को श्रीलंका के लिए एक अनोखा आशीर्वाद बताया। उन्होंने कहा कि यह अवशेषों का पहला अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन है और इसके लिए भारत सरकार तथा सभी सहयोगी संस्थाओं का आभार व्यक्त किया।

    गौरतलब है कि जनवरी की शुरुआत में नई दिल्ली के राय पिथौरा कल्चरल कॉम्प्लेक्स में भगवान बुद्ध से जुड़े पवित्र पिपराहवा अवशेषों की अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी का उद्घाटन भी प्रधानमंत्री मोदी ने किया था। उस अवसर पर उन्होंने बौद्ध विरासत स्थलों के विकास और युवा पीढ़ी को बौद्ध मूल्यों से जोड़ने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई थी।

  • संसद में गद्दार बयान से सियासी भूचाल और राहुल गांधी पर सिख समाज के अपमान का आरोप

    संसद में गद्दार बयान से सियासी भूचाल और राहुल गांधी पर सिख समाज के अपमान का आरोप


    नई दिल्ली । संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जारी तीखे टकराव के बीच एक नया और संवेदनशील विवाद खड़ा हो गया है। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर आरोप है कि उन्होंने संसद परिसर में केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को गद्दार कहा। इस कथित टिप्पणी के बाद राजनीतिक हलकों में ही नहीं, बल्कि सिख समाज में भी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। मामला इतना बढ़ गया कि भारतीय जनता पार्टी के कई सिख नेताओं ने एकजुट होकर राहुल गांधी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और कड़ी कार्रवाई की मांग की।

    इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत संसद परिसर में हुई कथित नोकझोंक से मानी जा रही है। आरोप है कि राहुल गांधी ने केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को ट्रेटर यानी गद्दार कहा। इस पर तुरंत पलटवार करते हुए बिट्टू ने राहुल गांधी को देश का दुश्मन बताया। दोनों नेताओं के बीच हुई इस जुबानी जंग ने राजनीतिक विवाद को सामाजिक और भावनात्मक मुद्दे में बदल दिया, क्योंकि यह टिप्पणी एक सिख नेता को लेकर की गई थी।

    राहुल गांधी की कथित टिप्पणी के बाद सिख समाज में गहरा आक्रोश देखा जा रहा है। बीजेपी के सिख नेताओं का कहना है कि किसी सिख नेता को गद्दार कहना पूरे सिख समाज का अपमान है। इसी सिलसिले में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, बीजेपी नेता आरपी सिंह और अरविंदर सिंह लवली ने संयुक्त रूप से प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस में हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि राहुल गांधी द्वारा एक सिख नेता को गद्दार कहना बेहद गंभीर और दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि हम सभी सिख समाज से आते हैं और सिखों का इतिहास देशभक्ति, बलिदान और त्याग से भरा हुआ है। पुरी ने कांग्रेस पर संसद की कार्यवाही को लगातार बाधित करने का आरोप भी लगाया और कहा कि विपक्ष जानबूझकर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है।

    आरपी सिंह ने राहुल गांधी के पुराने बयानों और रुख का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने नागरिकता संशोधन कानून  का भी विरोध किया था। उन्होंने सवाल उठाया कि राजीव गांधी फाउंडेशन में विदेशी फंडिंग कहां से आई, इस पर भी कांग्रेस को जवाब देना चाहिए। आरपी सिंह ने कहा कि संसद के भीतर और बाहर मर्यादा और भाषा की गरिमा बनाए रखना बेहद जरूरी है।

    बीजेपी नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने इस मुद्दे पर सबसे तीखा बयान दिया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और उनका परिवार शुरू से ही सिखों के खिलाफ मानसिकता रखते आए हैं। सिरसा ने आरोप लगाया कि सिखों को हमेशा आतंकवाद से जोड़ने की कोशिश की गई, जबकि सच्चाई यह है कि सिखों ने देश की सीमाओं पर अपनी जान कुर्बान की है। उन्होंने कहा कि जिन्होंने देश के लिए बलिदान दिया, उन्हें गद्दार कहना न केवल अपमानजनक है बल्कि अक्षम्य अपराध भी है।

    मनजिंदर सिंह सिरसा ने 1980 के दशक की घटनाओं का जिक्र करते हुए गांधी परिवार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि अगर कोई गद्दार है तो वह गांधी परिवार है, जिसने दरबार साहिब पर टैंक और तोपें चलवाईं, अकाल तख्त साहिब को गिराया और निर्दोष सिखों को जिंदा जलाया। उन्होंने इसे सिख समाज की तौहीन बताते हुए कहा कि यह बयान किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही उन्होंने लोकसभा स्पीकर से राहुल गांधी के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की।

    आरपी सिंह ने आगे कहा कि रवनीत सिंह बिट्टू केवल एक सांसद नहीं हैं, बल्कि वे पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते हैं, जिन्होंने आतंकवाद के दौर में शांति बहाल करने के लिए अपनी जान गंवाई। ऐसे परिवार से आने वाले व्यक्ति को गद्दार कहना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि सिख समाज की पहचान एकता, भाईचारे और “पंगत” की परंपरा से है, जहां सभी बराबरी से बैठते हैं।

    अरविंदर सिंह लवली ने कहा कि राहुल गांधी की टिप्पणी से सिख समाज में गहरा गुस्सा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी पहले भी सिखों के खिलाफ रुख अपनाते रहे हैं और पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह से जुड़े विधेयकों के साथ भी उनका व्यवहार सम्मानजनक नहीं रहा।

    इस पूरे विवाद के बीच दिल्ली में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी किया। प्रदर्शनकारियों ने उनके बयान की निंदा करते हुए माफी और कार्रवाई की मांग की। कुल मिलाकर, संसद के भीतर शुरू हुआ यह विवाद अब राजनीतिक सीमा से निकलकर सामाजिक और ऐतिहासिक भावनाओं से जुड़ गया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि इस मुद्दे पर कांग्रेस की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है और क्या संसद या अन्य संवैधानिक संस्थाएं इस मामले में कोई कदम उठाती हैं।

  • इकरा हसन को तीन तलाक-हलाला से बचना है तो…, एक और हिंदूवादी नेता की टिप्पणी, वीडियो वायरल

    इकरा हसन को तीन तलाक-हलाला से बचना है तो…, एक और हिंदूवादी नेता की टिप्पणी, वीडियो वायरल


    नई दिल्ली । समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन को लेकर एक और हिंदूवादी नेता ने अभद्र टिप्पणी की है। शामली के गांव कंडेला में आयोजित हिंदू सम्मेलन के दौरान 31 जनवरी को की गई टिप्पणी का वीडियो अब वायरल हो रहा है। वीडियो में स्वामी राम विशाल दास महाराज मंच से इकरा हसन को तीन तलाक और हलाल से बचने के तरीके बता रहे हैं। वीडियो वायरल होने के बाद से इकरा के समर्थकों में भारी नाराजगी है। इसे नारी शक्ति का अपमान और चुनावी सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश करार दिया गया है। इससे पहले करणी सेना के उपाध्यक्ष योगेंद्र राणा ने इसी तरह से अमर्यादित टिप्पणी इकरा हसन पर की थी।
    सोशल मीडिया पर जो 51 सेकंड का वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें स्वामी राम विशाल दास महाराज सांसद इकरा हसन के चुनाव प्रचार के तरीकों पर कटाक्ष करते नजर आ रहे हैं। वीडियो में वह कह रहे हैं कि इकरा हसन ने चुनाव के दौरान गुर्जर बाहुल्य क्षेत्रों में खुद को ‘गुर्जर की बेटी’ बताया था और इसी आधार पर वोट मांगे थे। इसके तुरंत बाद उन्होंने कुछ ऐसे शब्दों का प्रयोग किया जिन्हें सांसद के समर्थकों ने ‘अत्यंत अमर्यादित’ और ‘महिला विरोधी’ बताया है।
    समर्थकों में उबाल, कार्रवाई की मांग
    वीडियो वायरल होने के बाद कैराना और शामली के विभिन्न हिस्सों में इकरा हसन के समर्थकों ने कड़ी नाराजगी जताई है। समर्थकों का कहना है कि इकरा हसन एक सम्मानित जनप्रतिनिधि हैं और उनके खिलाफ इस तरह की भाषा का प्रयोग न केवल अशोभनीय है, बल्कि यह क्षेत्र की गंगा-जमुनी तहजीब पर भी प्रहार है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि चुनाव के दौरान इकरा हसन को जिस तरह सर्वसमाज विशेषकर मुस्लिम और गुर्जर गठबंधन का समर्थन मिला था, यह टिप्पणी उसी भाईचारे को निशाना बनाने के लिए की गई है। सोशल मीडिया पर लोग पुलिस प्रशासन से इस मामले का संज्ञान लेने और धार्मिक भावनाओं के साथ-साथ किसी व्यक्ति की गरिमा को ठेस पहुंचाने के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

    हालांकि इस मामले को लेकर अब तक पुलिस में किसी औपचारिक लिखित शिकायत की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन खुफिया विभाग और स्थानीय पुलिस सोशल मीडिया की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है। पुलिस का कहना है कि क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की गई है। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब पश्चिमी यूपी में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हैं। अब देखना यह होगा कि सांसद इकरा हसन या उनका दल इस पर क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया देता है और पुलिस इस वायरल वीडियो की सत्यता की जांच के बाद क्या कदम उठाती है।

  • यूपी पंचायत चुनाव टल सकते हैं? पंचायती राज मंत्री ओपी राजभर ने दिया अपडेट, क्या बोले

    यूपी पंचायत चुनाव टल सकते हैं? पंचायती राज मंत्री ओपी राजभर ने दिया अपडेट, क्या बोले


    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों को लेकर पिछले कुछ दिनों से जारी संशय के बाद अब कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने चुनाव टलने की सभी चर्चाओं को केवल एक भ्रम करार दिया है। राजभर ने स्पष्ट किया कि निर्वाचन प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए जमीनी स्तर पर काम चल रहा है। चुनावों के लिए सबसे महत्वपूर्ण कड़ी यानी मतपत्रों की छपाई का काम पूरा हो चुका है। यही नहीं, ये मतपत्र अब विभिन्न जिलों में पहुंचाए भी जा रहे हैं।

    भारत समाचार चैनल से बातचीत में ओपी राजभर ने कहा कि मतदाता सूची का काम अपने अंतिम चरण में है और 28 फरवरी को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन भी कर दिया जाएगा। निर्वाचन आयोग और राज्य सरकार दोनों ही चुनाव को समय पर संपन्न कराने के लिए कटिबद्ध हैं। चुनाव टलने जैसी कोई संभावना अभी नहीं दिखती है।

    भ्रम के पीछे का कारण

    चुनाव टलने की खबरों पर सफाई देते हुए राजभर ने कहा कि लोग अपनी-अपनी सुविधा के अनुसार राग अलाप रहे हैं। भ्रम का मुख्य कारण यह है कि वर्तमान में कर्मचारी एसआईआर  के काम में व्यस्त हैं। इसके अलावा, आगामी जनगणना और बोर्ड परीक्षाओं को लेकर भी लोग कयास लगा रहे हैं कि चुनाव टल सकते हैं। राजभर ने जोर देकर कहा कि सरकार और निर्वाचन आयोग अपना काम कर रहे हैं।

    पिछड़ा वर्ग आरक्षण और पिछड़ा आयोग का गठन
    ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर मंत्री ने जानकारी दी कि हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में पिछड़ा आयोग के गठन की प्रक्रिया चल रही है। जैसे ही इसका गठन होगा, वह पिछड़ों के आरक्षण को लेकर अपना काम शुरू कर देगा। भाजपा से गठबंधन और पिछड़ों-वंचितों को टिकट पर उन्होंने अपनी चिरपरिचित शैली में कहा, जिसकी जितनी हिस्सेदारी है, उसको उतना हिस्सा दिया जाएगा।

    कब होगी तारीखों की घोषणा?

    चुनाव की सटीक तारीख के सवाल पर पंचायती राज मंत्री ने कहा कि यह निर्णय निर्वाचन आयोग और सरकार के बीच संयुक्त बैठक के बाद लिया जाएगा। उन्होंने आश्वस्त किया कि सही समय आने पर तारीखों का ऐलान हो जाएगा। लेकिन फिलहाल सभी का ध्यान तैयारियों को अंतिम रूप देने पर है। मंत्री के इस बयान के बाद उन भावी प्रत्याशियों ने राहत की सांस ली है जो पिछले काफी समय से गांवों में चुनाव प्रचार और जनसंपर्क में जुटे हुए हैं।

  • 3 फरवरी से खुला राष्ट्रपति भवन का गार्डन, ‘अमृत उद्यान’ घूमने के लिए जान लें कहीं टिकट फ्री तो नहीं?

    3 फरवरी से खुला राष्ट्रपति भवन का गार्डन, ‘अमृत उद्यान’ घूमने के लिए जान लें कहीं टिकट फ्री तो नहीं?


    नई दिल्ली । दिल्ली घूमने आने वाले पर्यटकों के लिए अमृत उद्यान एक खास आकर्षण है। पहले मुगल गार्डन कहलाने वाला यह उद्यान राष्ट्रपति भवन में स्थित है और हर साल सर्दियों में आम जनता के लिए खोला जाता है। यहां प्रवेश बिल्कुल मुफ्त है, बस ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन जरूरी है। रंग-बिरंगे फूल, हरियाली और शांत माहौल इसे घूमने लायक बनाते हैं।
    देश की राजधानी दिल्ली में घूमने के लिए सिर्फ भारत के अलग-अलग राज्यों से ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं। कुतुब मीनार, लाल किला जैसी ऐतिहासिक जगहों के साथ-साथ हर साल सर्दियों में खुलने वाला मुगल गार्डन भी लोगों को काफी पसंद आता है। अब मुगल गार्डन का नाम बदलकर अमृत उद्यान कर दिया गया है, जो राष्ट्रपति भवन के अंदर स्थित है।

    इस साल भी अमृत उद्यान को आम जनता के लिए खोल दिया गया है। यहां आप तय तारीखों के बीच सुबह से शाम तक घूम सकते हैं। अच्छी बात यह है कि अमृत उद्यान में प्रवेश बिल्कुल मुफ्त है। टिकट लेने के लिए आपको पहले ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करना होता है, इसके बाद तय समय पर एंट्री मिलती है। खूबसूरत फूल, हरियाली और शांत माहौल के लिए अमृत उद्यान एक बेहतरीन जगह है। अगली स्लाइड्स में आप इसके बारे में और जानकारी जान सकते हैं।

    कब से कब तक खुलने वाला है अमृत उद्यान?
    आम जनता के लिए अमृत उद्यान 3 फरवरी 2026 से 31 मार्च 2026 तक खुला रहेगा।यह बगीचा हफ्ते में 6 दिन खुलेगा, जबकि सोमवार को बंद रहेगा।घूमने का समय सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक रहेगा।आखिरी एंट्री शाम 5:15 बजे तक ही मिलेगी, उसके बाद प्रवेश नहीं होगा।

    अमृत उद्यान में क्या-क्या देख सकेंगे?
    यहां आपको अलग-अलग प्रजाति के खूबसूरत फूल देखने को मिलते हैं। बगीचे में 145 से ज्यादा किस्मों के गुलाब लगे हुए हैं।इसके अलावा 85 तरह के अन्य फूलों के पौधे भी हैं। रंग-बिरंगे ट्यूलिप लोगों को खासा आकर्षित करते हैं।साथ ही झरनों जैसी बहती पानी की धाराएं, छोटी नहरें और शांत माहौल वाला बरगद का बगीचा भी देखने लायक है।

    कितने का है टिकट और कहां से बुक करें?
    यहां एंट्री बिल्कुल मुफ्त है। लेकिन पहले से ऑनलाइन बुकिंग जरूरी है। आप आधिकारिक वेबसाइट visit.rashtrapatibhavan.gov.in से टिकट बुक कर सकते हैं। अमृत उद्यान पहुंचकर टिकट नहीं मिलता, इसलिए घर से ही बुकिंग करें।

    इन जरूरी बातों को भी जान लें
    यहां प्रवेश राष्ट्रपति भवन के गेट नंबर 35 से होगा।होली के दिन अमृत उद्यान बंद रहेगा।एंट्री बिल्कुल मुफ्त है, लेकिन ऑनलाइन बुकिंग जरूरी है।अमृत उद्यान में लगे क्यूआर कोड स्कैन करके फूलों और पौधों की जानकारी ले सकते हैं।

    कैसे पहुंच सकते हैं यहां?
    अमृत उद्यान पहुंचने के लिए सबसे आसान तरीका मेट्रो है। आप सेंट्रल सेक्रेटेरिएट या उद्योग भवन मेट्रो स्टेशन पर उतर सकते हैं। यहां से ऑटो, ई-रिक्शा या टैक्सी लेकर राष्ट्रपति भवन गेट नंबर 35 तक पहुंचा जा सकता है। बस से आने वालों के लिए भी आसपास कई रूट उपलब्ध हैं। अगर आप अपनी गाड़ी से आ रहे हैं तो पार्किंग की जानकारी पहले ऑनलाइन जांच लें। सुरक्षा जांच के बाद ही प्रवेश दिया जाता है, इसलिए समय से पहुंचना बेहतर रहता है।

  • सदन में बोलने से रोका गया, यह लोकतांत्रिक मूल्यों पर आघात, राहुल गांधी का स्पीकर को पत्र

    सदन में बोलने से रोका गया, यह लोकतांत्रिक मूल्यों पर आघात, राहुल गांधी का स्पीकर को पत्र


    नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार 3 फरवरी को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक पत्र लिखकर गंभीर आरोप लगाए। राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें सरकार के इशारे पर सदन में बोलने से रोका गया, जो लोकतंत्र के लिए बेहद चिंताजनक है। उन्होंने लिखा कि नेता प्रतिपक्ष सहित हर सांसद को अपनी बात रखने का अधिकार लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद है, लेकिन इन अधिकारों की अनदेखी से संसद में एक असाधारण स्थिति पैदा हो गई है।

    संसद में जारी गतिरोध के बीच राहुल गांधी ने सोमवार की तरह मंगलवार को भी पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण पर आधारित एक लेख का हवाला देते हुए चीन से जुड़े मुद्दे को उठाने की कोशिश की। हालांकि, उन्हें आसन की ओर से इसकी अनुमति नहीं दी गई। राहुल गांधी ने बताया कि उन्होंने उस लेख को सत्यापित कर सदन के पटल पर रखा था।

    पत्र में क्या लिखा राहुल गांधी ने

    राहुल गांधी ने पत्र में लिखा कि सोमवार को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान उनसे जिस लेख का उल्लेख करना था, उसे सत्यापित करने को कहा गया था। मंगलवार को जब उन्होंने अपना भाषण आगे बढ़ाया, तो उन्होंने निर्देश के अनुसार संबंधित दस्तावेज को सत्यापित कर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि संसदीय परंपरा और पूर्व अध्यक्षों के फैसलों के अनुसार, किसी भी सदस्य को दस्तावेज का उल्लेख करने से पहले उसे सत्यापित करना होता है और उसकी जिम्मेदारी लेनी होती है।

    संसदीय परंपरा का उल्लंघन
    राहुल गांधी ने कहा कि एक बार दस्तावेज सत्यापित हो जाने के बाद अध्यक्ष की भूमिका समाप्त हो जाती है और सरकार को उसका जवाब देना होता है। इसके बावजूद उन्हें बोलने से रोकना न केवल संसदीय परंपराओं का उल्लंघन है, बल्कि इससे यह आशंका भी पैदा होती है कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे अहम विषयों पर नेता प्रतिपक्ष को जानबूझकर चुप कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा राष्ट्रपति के अभिभाषण का अहम हिस्सा है और उस पर संसद में चर्चा जरूरी है।

    लोकतंत्र पर काला धब्बा
    राहुल गांधी ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष की जिम्मेदारी है कि वे सदन के निष्पक्ष संरक्षक के रूप में हर सदस्य, खासकर विपक्ष के अधिकारों की रक्षा करें। उन्होंने लिखा कि नेता प्रतिपक्ष और प्रत्येक सांसद का बोलने का अधिकार लोकतांत्रिक व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि संसदीय इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब सरकार के दबाव में अध्यक्ष को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर नेता प्रतिपक्ष को बोलने से रोकना पड़ा। उन्होंने इसे लोकतंत्र पर काला धब्बा बताते हुए अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया।

  • कोटद्वार में विवाद: मुस्लिम दुकानदार के पक्ष में खड़े दीपक पर दर्ज हुई FIR

    कोटद्वार में विवाद: मुस्लिम दुकानदार के पक्ष में खड़े दीपक पर दर्ज हुई FIR


    कोटद्वार । उत्तराखंड के कोटद्वार में मुस्लिम दुकानदार वकील अहमद के समर्थन में सामने आए जिम संचालक दीपक कुमार के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज किया है। दीपक के साथ उनके सहयोगी विजय रावत को भी इस FIR में शामिल किया गया है। यह कार्रवाई बजरंग दल के कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन के बाद की गई। दीपक कुमार का कहना है कि वे किसी भी हाल में नफरत के दबाव में नहीं आएंगे।

    पूरा मामला 26 जनवरी का है, जब बजरंग दल से जुड़े कुछ युवकों ने वकील अहमद की बाबा स्कूल ड्रेस नाम की दुकान पर आपत्ति जताई थी और नाम बदलने को लेकर दबाव बनाया गया। इस दौरान दीपक कुमार और कुछ स्थानीय लोगों ने दुकानदार का समर्थन किया। बाद में 31 जनवरी को देहरादून से आए कुछ लोगों ने इस मुद्दे को लेकर प्रदर्शन किया, जिसके बाद पुलिस ने FIR दर्ज की।

    सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में दीपक कुमार यह कहते दिखाई दिए कि दुकान पिछले 30 वर्षों से इसी नाम से चल रही है और इसे बदला नहीं जाएगा। इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी प्रतिक्रिया दी और दीपक को संविधान व इंसानियत के लिए खड़ा होने वाला व्यक्ति बताया।

    दीपक कुमार ने प्रशासन पर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि विरोध के चलते उनका जिम बंद पड़ा है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा है और अब भी उन्हें धमकियां मिल रही हैं। वहीं, कई स्थानीय लोग दीपक के समर्थन में सामने आए हैं। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने इलाके में शांति बनाए रखने के लिए फ्लैग मार्च भी किया है। हाल के महीनों में उत्तराखंड में इस तरह की सांप्रदायिक घटनाओं में बढ़ोतरी देखी गई है।

  • ड्रीमलाइनर फ्यूल स्विच पर DGCA की जांच से राहत, तकनीकी रूप से पूरी तरह सुरक्षित पाया गया विमान

    ड्रीमलाइनर फ्यूल स्विच पर DGCA की जांच से राहत, तकनीकी रूप से पूरी तरह सुरक्षित पाया गया विमान


    नई दिल्ली। एयर इंडिया के ग्राउंड किए गए बोइंग 787 ड्रीमलाइनर को लेकर नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने मंगलवार को राहत देने वाली जानकारी साझा की। मंत्रालय के मुताबिक विमान के दोनों फ्यूल कंट्रोल स्विच पूरी तरह सही स्थिति में पाए गए हैं। इससे पहले पायलट ने इंजन स्टार्ट के दौरान एक स्विच के ‘RUN’ पोजिशन में ठीक से लॉक न होने की शिकायत की थी। यह तकनीकी जांच विमान निर्माता बोइंग की सिफारिश पर की गई, जिसे एयर इंडिया की इंजीनियरिंग टीम ने DGCA अधिकारियों की मौजूदगी में पूरा किया।

    जांच में क्या सामने आया

    मंत्रालय ने बताया कि बाएं और दाएं दोनों फ्यूल कंट्रोल स्विच की विस्तार से जांच की गई। जांच के दौरान किसी भी तरह की तकनीकी खराबी नहीं पाई गई और दोनों स्विच सुरक्षित व संचालन योग्य पाए गए। DGCA ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि फ्यूल स्विच को सही तरीके से हैंडल न किया जाए, तो वह ‘RUN’ और ‘CUTOFF’ के बीच खिसक सकता है। उल्लेखनीय है कि एक फरवरी को लंदन में एयर इंडिया के बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर (VT-ANX) में इंजन स्टार्ट के समय इसी तरह की समस्या सामने आई थी।

    क्यों गंभीर माना गया मामला

    यह मामला इसलिए संवेदनशील हो गया क्योंकि जून 2025 में अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया ड्रीमलाइनर हादसे में 260 लोगों की जान गई थी। उस दुर्घटना की शुरुआती जांच में पता चला था कि टेकऑफ के तुरंत बाद इंजन के फ्यूल स्विच ‘RUN’ से ‘CUTOFF’ पोजिशन में चले गए थे, जिससे इंजन को ईंधन मिलना बंद हो गया। इसी पृष्ठभूमि में हालिया घटना को बेहद गंभीरता से लिया गया और विमान को तुरंत ग्राउंड कर दिया गया।

    मंत्रालय का रुख

    नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने दोहराया कि यात्रियों और क्रू की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। पायलट की शिकायत मिलते ही विमान की उड़ान रोक दी गई और गहन तकनीकी जांच कराई गई। हालांकि फ्यूल स्विच सही पाए गए हैं, लेकिन विमान को सेवा में वापस लाने से पहले सभी निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किया जाएगा। DGCA और एयर इंडिया दोनों पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।राहत भरी जांच रिपोर्ट के बावजूद, पिछली दुर्घटना की वजह से ड्रीमलाइनर विमानों की तकनीकी निगरानी और सख्त कर दी गई है। यह घटना दिखाती है कि विमानन क्षेत्र में किसी भी छोटी तकनीकी आशंका को भी नजरअंदाज नहीं किया जाता।