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  • बिहार की राजनीति में बड़ा सत्ता परिवर्तन तय, नए मुख्यमंत्री के चयन को लेकर तेज हुई हलचल और भाजपा की रणनीतिक भूमिका पर टिकी सबकी नजर

    बिहार की राजनीति में बड़ा सत्ता परिवर्तन तय, नए मुख्यमंत्री के चयन को लेकर तेज हुई हलचल और भाजपा की रणनीतिक भूमिका पर टिकी सबकी नजर


    नई दिल्ली:बिहार की राजनीति इस समय एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ी है, जहां मुख्यमंत्री पद को लेकर तेज होती हलचल ने सियासी माहौल को पूरी तरह बदल दिया है। राज्य में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया जल्द शुरू होने के संकेत मिल रहे हैं और इसके साथ ही नए मुख्यमंत्री के नाम को लेकर चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए यह माना जा रहा है कि इस बार राज्य की सत्ता भारतीय जनता पार्टी के हाथ में जा सकती है।
    मुख्यमंत्री पद से Nitish Kumar के इस्तीफे के बाद राजनीतिक समीकरण तेजी से बदले हैं और अब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के भीतर नए नेतृत्व के चयन की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। इस पूरी प्रक्रिया में भारतीय जनता पार्टी की भूमिका सबसे अहम मानी जा रही है, क्योंकि मुख्यमंत्री पद के लिए नाम तय करने की जिम्मेदारी उसी के पास है।

    इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए भाजपा ने केंद्रीय मंत्री Shivraj Singh Chouhan को बिहार में विधायक दल की बैठक के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। उनकी भूमिका पार्टी के विधायकों के बीच समन्वय स्थापित करना और नए नेता के चयन की प्रक्रिया को सुचारु रूप से पूरा करना होगी। इस कदम को पार्टी की रणनीतिक तैयारी के रूप में देखा जा रहा है, जिससे नेतृत्व परिवर्तन को व्यवस्थित तरीके से अंजाम दिया जा सके।

    राज्य के वरिष्ठ नेता Vijay Kumar Choudhary ने भी संकेत दिए हैं कि नई सरकार के गठन की प्रक्रिया जल्द ही शुरू हो सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री के नाम को लेकर अंतिम निर्णय भाजपा को लेना है, जिसके बाद गठबंधन के विधायकों की बैठक में नेता का चयन किया जाएगा। इस बयान के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि पूरी प्रक्रिया का केंद्र भाजपा का निर्णय ही रहेगा।


    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार मुख्यमंत्री का चयन केवल तत्काल राजनीतिक समीकरणों के आधार पर नहीं होगा, बल्कि आगामी चुनावों और व्यापक रणनीति को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा। बिहार जैसे राज्य में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, ऐसे में पार्टी नेतृत्व हर पहलू को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेने की तैयारी में है।

    इस बीच संभावित दावेदारों की सक्रियता और अंदरूनी बैठकों ने यह संकेत दिया है कि नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चर्चा तेज हो चुकी है। हालांकि अंतिम निर्णय विधायक दल की बैठक में ही लिया जाएगा, जहां चुने गए नेता को मुख्यमंत्री पद के लिए आगे बढ़ाया जाएगा।

    बदलते राजनीतिक घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बिहार जल्द ही एक नए नेतृत्व के साथ आगे बढ़ सकता है। अब सभी की नजर उस फैसले पर टिकी हुई है, जो राज्य की राजनीति की दिशा और भविष्य दोनों को प्रभावित करेगा।

  • डीजल और एटीएफ पर भारी एक्सपोर्ट ड्यूटी बढ़ोतरी से ऊर्जा बाजार में हलचल…

    डीजल और एटीएफ पर भारी एक्सपोर्ट ड्यूटी बढ़ोतरी से ऊर्जा बाजार में हलचल…


    नई दिल्ली:देश में ऊर्जा नीति से जुड़े एक अहम फैसले के तहत सरकार ने डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल पर निर्यात शुल्क में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी की है। इस कदम को वैश्विक ऊर्जा बाजार की अस्थिरता और घरेलू आपूर्ति को सुरक्षित रखने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। नए बदलाव के बाद ईंधन निर्यात की लागत में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है, जिससे रिफाइनिंग और एक्सपोर्ट सेक्टर पर सीधा प्रभाव पड़ेगा।

    नए प्रावधान के अनुसार डीजल पर निर्यात शुल्क 21.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 55.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। वहीं एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी एटीएफ पर भी एक्सपोर्ट ड्यूटी में बढ़ोतरी की गई है, जिसके बाद यह 29.5 रुपये से बढ़कर 42 रुपये प्रति लीटर हो गया है। पेट्रोल पर किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया गया है और उस पर निर्यात शुल्क शून्य ही रखा गया है, जिससे इस श्रेणी को फिलहाल राहत बनी हुई है।

    सरकारी सूत्रों के अनुसार इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता को सुनिश्चित करना और अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच स्थिरता बनाए रखना है। माना जा रहा है कि कई बार वैश्विक बाजार में बढ़ती कीमतों का लाभ निर्यातक कंपनियों को अधिक मिलता है, जबकि घरेलू जरूरतें प्रभावित होती हैं, ऐसे में यह कदम संतुलन बनाने के लिए उठाया गया है।

    यह फैसला विंडफॉल टैक्स ढांचे का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत सरकार समय-समय पर ऊर्जा उत्पादों पर कर व्यवस्था में बदलाव करती रहती है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि रिफाइनरियों के लाभ और घरेलू आपूर्ति के बीच उचित संतुलन बना रहे, ताकि देश के भीतर ईंधन की कमी की स्थिति न उत्पन्न हो।

    इसके साथ ही सरकार विमानन क्षेत्र में लागत को नियंत्रित करने के लिए भी विकल्पों पर विचार कर रही है। एटीएफ पर राज्य स्तर पर लगने वाले करों में कमी को लेकर भी चर्चा चल रही है, ताकि एयरलाइंस और यात्रियों पर पड़ने वाले खर्च को कम किया जा सके। इस दिशा में विभिन्न विभागों और राज्य सरकारों के बीच संवाद जारी है।

    देश के कई प्रमुख हवाई अड्डों पर पहले से ही ईंधन की कीमतें अधिक बनी हुई हैं, जिसका कारण टैक्स संरचना और स्थानीय शुल्क माने जाते हैं। ऐसे में केंद्र सरकार एयरपोर्ट से जुड़े कुछ शुल्कों में भी राहत देने की संभावनाओं का आकलन कर रही है, ताकि विमानन क्षेत्र को कुछ राहत मिल सके और संचालन लागत में संतुलन आए।

    वैश्विक स्तर पर ऊर्जा बाजार में जारी अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव ने कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित किया है, जिससे कई देशों में ईंधन नीतियों में लगातार बदलाव देखने को मिल रहे हैं। भारत का यह कदम भी इसी व्यापक वैश्विक परिदृश्य का हिस्सा माना जा रहा है, जहां घरेलू हितों को प्राथमिकता देना मुख्य उद्देश्य है।

    आने वाले समय में इस फैसले के प्रभाव को ऊर्जा बाजार, रिफाइनरी सेक्टर और विमानन उद्योग पर बारीकी से देखा जाएगा। फिलहाल सरकार का फोकस घरेलू आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने और बाजार में अनावश्यक उतार-चढ़ाव को रोकने पर केंद्रित है।

  • मुर्शिदाबाद रैली में अभिषेक बनर्जी के बयान से सियासी माहौल हुआ और गर्म

    मुर्शिदाबाद रैली में अभिषेक बनर्जी के बयान से सियासी माहौल हुआ और गर्म


    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजनीति में चुनावी माहौल के बीच बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है, जहां विभिन्न दलों के नेता एक दूसरे पर तीखे आरोप लगा रहे हैं। इसी क्रम में तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद Abhishek Banerjee ने मुर्शिदाबाद में आयोजित एक चुनावी सभा के दौरान विपक्षी दलों और कुछ राजनीतिक चेहरों पर कड़े आरोप लगाए, जिससे राज्य की सियासत में नई हलचल पैदा हो गई है।

    अपने संबोधन में उन्होंने दावा किया कि कुछ राजनीतिक ताकतें और व्यक्ति मिलकर राज्य में ऐसा माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे सामाजिक एकता और आपसी सौहार्द प्रभावित हो सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी लाभ के लिए समाज में विभाजन की स्थिति उत्पन्न करने का प्रयास किया जा रहा है, जिसे जनता को समझने और रोकने की जरूरत है।

    उन्होंने अपने भाषण में यह भी कहा कि मुर्शिदाबाद हमेशा से सांस्कृतिक विविधता और गंगा-जमुनी तहजीब का प्रतीक रहा है, लेकिन उनके अनुसार कुछ राजनीतिक गतिविधियां इस परंपरा को कमजोर करने की दिशा में काम कर रही हैं। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि कुछ नेता और संगठन राजनीतिक लाभ के लिए भावनात्मक मुद्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे समाज में तनाव बढ़ सकता है।

    इसी दौरान उन्होंने कुछ राजनीतिक व्यक्तियों और संस्थाओं पर भी सवाल उठाए और उन्हें एक विशेष राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखा। उन्होंने कहा कि जनता को इस तरह की गतिविधियों से सावधान रहने की आवश्यकता है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।

    राज्य की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee के नेतृत्व वाली सरकार और विपक्षी दलों के बीच पहले से ही राजनीतिक तनाव बना हुआ है। ऐसे में इस तरह के बयानों ने चुनावी माहौल को और अधिक संवेदनशील और आक्रामक बना दिया है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जैसे जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे वैसे पश्चिम बंगाल में बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज होगा। सभी प्रमुख दल अपने अपने जनाधार को मजबूत करने के लिए लगातार जनसभाएं और रैलियां कर रहे हैं, जिससे राज्य का राजनीतिक वातावरण और अधिक गर्म होता जा रहा है

  • मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बैठकों को चुनावी रणनीति से जोड़ा जा रहा है

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बैठकों को चुनावी रणनीति से जोड़ा जा रहा है


    नई दिल्ली:
    उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर तेजी से चुनावी मोड़ की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है, जहां आगामी विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी के भीतर संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर बड़े बदलावों की चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी चुनावी रणनीति को और मजबूत करने के लिए अपने ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव कर सकती है, जिससे जमीनी स्तर पर संगठन की पकड़ और अधिक प्रभावी बनाई जा सके।

    राज्य के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की संगठन के वरिष्ठ नेताओं के साथ हालिया बैठकों को इस संभावित बदलाव की दिशा में अहम संकेत माना जा रहा है। इन बैठकों को केवल औपचारिक संवाद नहीं बल्कि आगामी चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। चर्चा है कि इन मुलाकातों में संगठन की मजबूती, कार्यकर्ताओं की भूमिका और सरकार की कार्यशैली को और प्रभावी बनाने पर मंथन किया गया है।

    सूत्रों के अनुसार पार्टी संगठन में जल्द ही नई नियुक्तियों और जिम्मेदारियों के पुनर्वितरण की संभावना है, जिसका उद्देश्य चुनावी तैयारियों को बूथ स्तर तक मजबूत करना बताया जा रहा है। माना जा रहा है कि संगठन में नए और सक्रिय चेहरों को आगे लाकर चुनावी अभियान को और तेज किया जाएगा, ताकि हर क्षेत्र में पार्टी की पकड़ मजबूत हो सके।

    इसके साथ ही मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल की चर्चाएं भी राजनीतिक गलियारों में लगातार बढ़ रही हैं। माना जा रहा है कि चुनाव से पहले प्रशासनिक टीम को और अधिक प्रभावी और संतुलित बनाने के लिए कुछ नए चेहरों को शामिल किया जा सकता है, जबकि कुछ मौजूदा जिम्मेदारियों में बदलाव की संभावना भी बनी हुई है। हालांकि अंतिम निर्णय राजनीतिक परिस्थितियों और शीर्ष नेतृत्व की रणनीति पर निर्भर करेगा।

    राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इस तरह के बदलाव केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं होते, बल्कि इनका सीधा संबंध चुनावी समीकरणों और सामाजिक संतुलन से भी होता है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए ही संगठन और सरकार में संतुलन साधने की कोशिश की जाती है, ताकि चुनावी मैदान में मजबूत स्थिति बनाई जा सके।

    पार्टी का पूरा ध्यान इस समय अपने विकास कार्यों, नेतृत्व की छवि और संगठन की मजबूती को एक साथ जोड़कर जनता के बीच प्रस्तुत करने पर है। इसके साथ ही यह रणनीति भी देखी जा रही है कि सरकार की उपलब्धियों को प्रभावी ढंग से जनता तक पहुंचाने के लिए संगठन को अधिक सक्रिय भूमिका दी जाए।

    आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि ये संभावित बदलाव किस रूप में सामने आते हैं और उनका प्रभाव राज्य की राजनीति और चुनावी माहौल पर कितना पड़ता है। फिलहाल राजनीतिक गतिविधियों और बैठकों के बढ़ते दौर ने यह संकेत दे दिया है कि उत्तर प्रदेश में चुनावी तैयारियां अब निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुकी हैं।

  • 10वीं के बाद High Salary Courses: डिजिटल मार्केटिंग से AI तक ये कोर्स कराएंगे मोटी कमाई

    10वीं के बाद High Salary Courses: डिजिटल मार्केटिंग से AI तक ये कोर्स कराएंगे मोटी कमाई


    नई दिल्ली। 10वीं पास करने के बाद ज्यादातर छात्र 11वीं की पढ़ाई पर फोकस करते हैं, लेकिन आज के समय में सिर्फ पढ़ाई ही नहीं बल्कि स्किल्स (High Salary Courses) सीखना भी उतना ही जरूरी हो गया है। बढ़ते कॉम्पिटिशन के दौर में अगर आप जल्दी करियर बनाना चाहते हैं तो पढ़ाई के साथ-साथ कुछ प्रोफेशनल कोर्स करना काफी फायदेमंद साबित हो सकता है।

    आज के समय में ऐसे कई कोर्स उपलब्ध हैं जिन्हें आप स्कूल के साथ-साथ कर सकते हैं और उनसे कमाई भी शुरू कर सकते हैं। ये कोर्स न सिर्फ आपको स्किल्ड बनाते हैं बल्कि भविष्य में हाई सैलरी जॉब (High Salary Courses) के रास्ते भी खोलते हैं।

    डिजिटल मार्केटिंग और AI सबसे ज्यादा डिमांड में
    डिजिटल मार्केटिंग आज के दौर की सबसे लोकप्रिय स्किल्स में से एक बन चुकी है। इसमें SEO, सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्रमोशन जैसे काम सिखाए जाते हैं। इस स्किल को सीखकर आप फ्रीलांसिंग, पार्ट टाइम जॉब या खुद का बिजनेस भी शुरू कर सकते हैं।

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    वहीं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) भी तेजी से बढ़ता हुआ क्षेत्र है। AI की मदद से कंटेंट क्रिएशन, इमेज और वीडियो जनरेशन जैसे कई काम किए जा सकते हैं। इसके साथ ही “प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग” जैसी नई स्किल्स की भी काफी डिमांड है, जिसमें एक्सपर्ट्स अच्छी सैलरी कमा रहे हैं।

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  • पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच अभिनेत्री रुपाली गांगुली के बयान से राज्य में नई राजनीतिक बहस शुरू हो गई है।

    पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच अभिनेत्री रुपाली गांगुली के बयान से राज्य में नई राजनीतिक बहस शुरू हो गई है।


    नई दिल्ली:पश्चिम बंगाल की राजनीति इन दिनों चुनावी गतिविधियों के बीच लगातार चर्चा में बनी हुई है। जैसे जैसे राज्य में मतदान की प्रक्रिया नजदीक आ रही है, वैसे वैसे राजनीतिक बयान और प्रतिक्रियाएं भी तेज होती जा रही हैं। इसी क्रम में अभिनेत्री Rupali Ganguly के हालिया राजनीतिक बयान ने राज्य के चुनावी माहौल में नई बहस को जन्म दे दिया है। उनके विचारों ने न केवल राजनीतिक गलियारों में चर्चा बढ़ाई है बल्कि आम जनता के बीच भी इस विषय पर अलग अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

    अपने विचार व्यक्त करते हुए उन्होंने राज्य की वर्तमान राजनीतिक स्थिति पर चिंता जाहिर की और अपने व्यक्तिगत अनुभवों का उल्लेख करते हुए कहा कि समय के साथ परिस्थितियों में बदलाव आया है। उनके अनुसार, यह बदलाव उनके दृष्टिकोण से पूरी तरह सकारात्मक नहीं रहा और इसी कारण वे राज्य में एक अलग राजनीतिक दिशा की उम्मीद रखती हैं। उनके इस बयान को लेकर समर्थक और विरोधी दोनों पक्षों में अलग अलग राय सामने आ रही है।

    इसी बातचीत के दौरान उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे आगामी चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के प्रति समर्थन रखती हैं। उनके अनुसार, यह समर्थन राज्य में परिवर्तन की आवश्यकता को देखते हुए है। उन्होंने यह भी कहा कि वे चाहती हैं कि राज्य में स्थिरता और विकास के नए अवसर सामने आएं, जिससे जनता को बेहतर भविष्य मिल सके।

    उनके इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में चर्चा और तेज हो गई है। कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी समय में सार्वजनिक हस्तियों के ऐसे बयान मतदाताओं की सोच पर प्रभाव डाल सकते हैं। वहीं कुछ लोग इसे व्यक्तिगत राय मानते हुए लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा बता रहे हैं, जिसमें हर व्यक्ति को अपने विचार रखने का अधिकार है।

    राज्य की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee को लेकर दिए गए अप्रत्यक्ष संदर्भों ने भी राजनीतिक बहस को और अधिक तीव्र कर दिया है। उनके नेतृत्व और नीतियों पर पहले भी विभिन्न स्तरों पर चर्चा होती रही है और चुनावी समय में यह मुद्दा और अधिक केंद्र में आ जाता है। इस बार भी राजनीतिक दल अपने अपने दृष्टिकोण से स्थिति को जनता के सामने रख रहे हैं।

    चुनावी माहौल को देखते हुए सभी प्रमुख राजनीतिक दल अपने अभियान को मजबूत करने में जुटे हैं। रैलियों, जनसभाओं और प्रचार अभियानों के बीच बयानबाजी का स्तर भी बढ़ गया है। ऐसे में सार्वजनिक हस्तियों के विचार इस माहौल को और अधिक प्रभावित कर रहे हैं और चर्चा को नई दिशा दे रहे हैं।

    राज्य में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया पहले से निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ रही है और राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज हो रही हैं। विभिन्न वर्गों के मतदाता अपने निर्णय को लेकर विचार कर रहे हैं और राजनीतिक दल उन्हें अपने पक्ष में लाने की कोशिश में लगे हुए हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति केवल दलों की प्रतिस्पर्धा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सामाजिक, सांस्कृतिक और सार्वजनिक प्रभाव भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जैसे जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे वैसे राज्य का राजनीतिक वातावरण और अधिक सक्रिय और संवेदनशील होता जा रहा है।

  • राहुल गांधी ने अंबेडकर मैराथन से BJP-RSS पर साधा निशाना, बताया संविधान पर खतरा

    राहुल गांधी ने अंबेडकर मैराथन से BJP-RSS पर साधा निशाना, बताया संविधान पर खतरा


    नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने दिल्ली में आयोजित रन फॉर अंबेडकर और रन फॉर कॉन्स्टिट्यूशन मैराथन 2026 को हरी झंडी दिखाकर शुरुआत की। इस मौके पर उन्होंने भाजपा और आरएसएस पर तीखा हमला बोला।

    राहुल गांधी ने कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर का सबसे बड़ा संदेश देश का संविधान है। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा से जुड़े लोग अंबेडकर के सिद्धांतों और संविधान को खत्‍म करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ये ताकतें देश में सभी को समान अधिकार देने के पक्ष में नहीं हैं। राहुल गांधी के मुताबिक भाजपा के नेता अंबेडकर की प्रतिमा के सामने सम्मान जताते जरूर हैं लेकिन असल में उनका उद्देश्य संविधान को नुकसान पहुंचाना है।

    इस कार्यक्रम में कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा लगातार संविधान पर प्रहार कर रही है और उसके नेता आक्रामक रवैया अपना रहे हैं। उनके अनुसार सरकार परोक्ष रूप से संवैधानिक प्रावधानों की अनदेखी कर रही है। पुनिया ने कहा कि यह मैराथन लोगों को जागरूक करने के लिए आयोजित की गई है ताकि सभी मिलकर अंबेडकर की विचारधारा और संविधान की रक्षा के लिए एकजुट हो सकें।

    महिला आरक्षण बिल पर अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा इसके समर्थन में रही है लेकिन भाजपा के लागू करने के तरीके पर सवाल उठते हैं। उनका कहना था कि बिना नई जनगणना और परिसीमन के इस बिल को लागू करना उचित नहीं है। कांग्रेस की मांग है कि इसे नई जनगणना के आधार पर ही लागू किया जाना चाहिए न कि 2011 के पुराने आंकड़ों के आधार पर।

  • J&K के डोडा क्षेत्र में सुबह-सुबह कांपी धरती, आया 4.6 तीव्रता का भूकंप

    J&K के डोडा क्षेत्र में सुबह-सुबह कांपी धरती, आया 4.6 तीव्रता का भूकंप


    जम्मू।
    जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) के डोडा (Doda) क्षेत्र में रविवार की सुबह भूकंप (Earthquake) के झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 4.6 मापी गई। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (National Centre for Seismolog) के अनुसार, यह भूकंप सुबह 4 बजकर 32 मिनट पर आया। फिलहाल किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं है।


    महाराष्ट्र के हिंगोली में भूकंप के झटके

    इससे पहले शनिवार सुबह महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र के हिंगोली जिले में 4.7 तीव्रता का भूकंप आया था। इसके झटके नांदेड और परभणी जिलों के कुछ हिस्सों में भी महसूस किए गए। अधिकारियों के अनुसार अभी तक किसी तरह के जान-माल के नुकसान की तत्काल सूचना नहीं है। हालांकि, पांगरा शिंदे गांव में कुछ घरों और सामुदायिक भवनों में दरारें आने की खबर है। हिंगोली के कलेक्टर राहुल गुप्ता ने बताया कि भूकंप सुबह 8 बजकर 45 मिनट पर दर्ज किया गया। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, इसका केंद्र जमीन से करीब 10 किलोमीटर की गहराई पर हिंगोली जिले के वसमत तालुका के शिरली गांव के पास था।


    क्यों आता है भूकंप?

    पृथ्वी के अंदर 7 प्लेट्स हैं, जो लगातार घूमती रहती हैं। जहां ये प्लेट्स ज्यादा टकराती हैं, वह जोन फॉल्ट लाइन कहलाता है। बार-बार टकराने से प्लेट्स के कोने मुड़ते हैं। जब ज्यादा दबाव बनता है तो प्लेट्स टूटने लगती हैं। नीचे की ऊर्जा बाहर आने का रास्ता खोजती हैं और डिस्टर्बेंस के बाद भूकंप आता है।


    जानें क्या है भूंकप के केंद्र और तीव्रता का मतलब?

    भूकंप का केंद्र उस स्थान को कहते हैं जिसके ठीक नीचे प्लेटों में हलचल से भूगर्भीय ऊर्जा निकलती है। इस स्थान पर भूकंप का कंपन ज्यादा होता है। कंपन की आवृत्ति ज्यों-ज्यों दूर होती जाती हैं, इसका प्रभाव कम होता जाता है। फिर भी यदि रिक्टर स्केल पर 7 या इससे अधिक की तीव्रता वाला भूकंप है तो आसपास के 40 किमी के दायरे में झटका तेज होता है। लेकिन यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि भूकंपीय आवृत्ति ऊपर की तरफ है या दायरे में। यदि कंपन की आवृत्ति ऊपर को है तो कम क्षेत्र प्रभावित होगा।


    कैसे मापा जाता है भूकंप की तिव्रता और क्या है मापने का पैमाना?

    भूंकप की जांच रिक्टर स्केल से होती है। इसे रिक्टर मैग्नीट्यूड टेस्ट स्केल कहा जाता है। रिक्टर स्केल पर भूकंप को 1 से 9 तक के आधार पर मापा जाता है। भूकंप को इसके केंद्र यानी एपीसेंटर से मापा जाता है। भूकंप के दौरान धरती के भीतर से जो ऊर्जा निकलती है, उसकी तीव्रता को इससे मापा जाता है। इसी तीव्रता से भूकंप के झटके की भयावहता का अंदाजा होता है।

  • नए गठबंधन के मोह से अखिलेश ने मोड़ा मुख, 'पीडीए' के दम पर भाजपा के शुद्धिकरण का किया शंखनाद

    नए गठबंधन के मोह से अखिलेश ने मोड़ा मुख, 'पीडीए' के दम पर भाजपा के शुद्धिकरण का किया शंखनाद

    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की राजनीति के फलक पर आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) ने अपनी रणनीतिक बिसात बिछा दी है। राजस्थान की राजधानी जयपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने स्पष्ट कर दिया है कि आगामी यूपी विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी किसी भी नए राजनीतिक दल के साथ गठबंधन का प्रयोग नहीं करेगी। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि वर्तमान में जो गठबंधन (इंडिया अलायंस) अस्तित्व में है, वही 2027 की चुनावी जंग में भी पार्टी का आधार बनेगा। अखिलेश के इस बयान ने उन तमाम अटकलों पर विराम लगा दिया है, जिनमें छोटे दलों के साथ नए तालमेल की संभावना जताई जा रही थी।

    अनुभवों से ली सीख, पुराने साथियों पर भरोसा
    अखिलेश यादव ने गठबंधन के अपने पुराने और खट्टे-मीठे अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी ने अलग-अलग समय में कई प्रयोग किए हैं। हमारे पास गठबंधन का लंबा अनुभव है और इसी आधार पर हमने तय किया है कि जो साथी वर्तमान में हमारे साथ खड़े हैं, हम उन्हीं के साथ मजबूती से आगे बढ़ेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस बार भाजपा का मुकाबला केवल किसी राजनीतिक गठबंधन से नहीं, बल्कि एक ‘समुदाय’ से होगा। यह समुदाय ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) है, जो भाजपा की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ एकजुट होकर मतदान करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सपा की नजर फिलहाल केवल उत्तर प्रदेश पर है और राजस्थान में चुनाव लड़ने का उनका कोई इरादा नहीं है।

    वोटर लिस्ट में ‘शुद्धिकरण’ पर छिड़ा वाकयुद्ध
    मतदाता सूची में धांधली के मुद्दे पर अखिलेश यादव ने सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने ग्रामीण क्षेत्रों के बजाय शहरी इलाकों में बड़े पैमाने पर वोट काटने की साजिश रची थी, क्योंकि वहां उसे हार का डर सता रहा था। सपा प्रमुख ने दावा किया कि उनके ‘पीडीए प्रहरियों’ ने हर बूथ पर पैनी नजर रखी, जिससे सत्ता पक्ष की गणित फेल हो गई। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “भाजपा मतदाता सूची के शुद्धिकरण का दावा कर रही है, लेकिन उन्हें यह नहीं पता कि प्रदेश की जनता आने वाले चुनाव में उनकी सरकार का ही पूर्ण शुद्धिकरण कर देगी।” उन्होंने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया है कि वे जिला स्तर पर मतदाता सूची का सूक्ष्म विश्लेषण जारी रखें।

    ‘नकली संतों’ की राजनीति पर प्रहार
    स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में उतरते हुए अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश की सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि अविमुक्तेश्वरानंद उन ‘नकली संतों’ से संघर्ष कर रहे हैं जिन्होंने धर्म का चोला पहनकर राजनीति को दूषित किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का नाम लिए बिना उन्होंने कहा कि जो लोग दूसरों से प्रमाण मांग रहे हैं, उनके पास खुद कोई प्रामाणिक आधार नहीं है। समाजवादी पार्टी वास्तविक संतों का सम्मान करती है और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का आशीर्वाद पार्टी के साथ हमेशा रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि जल्द ही इन ‘नकली संतों’ की वास्तविकता पर भी कोई वेब सीरीज सामने आ सकती है।

    सिनेमाई एजेंडे और पड़ोसी राज्यों पर कटाक्ष
    हालिया रिलीज फिल्म ‘धुरंधर’ का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए काल्पनिक बातों को फिल्मों के जरिए वास्तविकता बनाकर पेश कर रही है। हालांकि, जनता ने ‘धुरंधर’ का जवाब ‘धुआंधार’ तरीके से देकर यह बता दिया है कि वह अब बहकावे में आने वाली नहीं है। पड़ोसी राज्य बिहार की राजनीति पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का ‘डिमोशन’ करते हुए उन्हें धीरे-धीरे रिटायरमेंट की राह दिखा दी है। अखिलेश के इन तेवरों से साफ है कि वे आने वाले समय में केवल चुनावी मैदान में ही नहीं, बल्कि वैचारिक और सामाजिक मोर्चे पर भी भाजपा की घेराबंदी करने के लिए तैयार हैं।

  • एनसीपी मंत्री वीडियो कांड: आरोपी पहुँचा हाईकोर्ट, ट्रांसजेंडर के खिलाफ वसूली और साजिश का लगाया आरोप

    एनसीपी मंत्री वीडियो कांड: आरोपी पहुँचा हाईकोर्ट, ट्रांसजेंडर के खिलाफ वसूली और साजिश का लगाया आरोप


    नई दिल्ली। राजनैतिक गलियारों में हलचल मचाने वाले एनसीपी मंत्री नरहरी जिरवाल से जुड़े कथित आपत्तिजनक वीडियो मामले ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। इस मामले में मुख्य आरोपी ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर (FIR) को रद्द करने की गुहार लगाई है। यह याचिका मुंबई के कफ परेड पुलिस स्टेशन में दर्ज उस मामले के विरोध में दायर की गई है, जिसमें आरोपी पर वीडियो लीक करने और छेड़छाड़ करने के गंभीर आरोप लगे हैं।

    आरोपी और ट्रांसजेंडर के बीच ‘वसूली’ की जंग
    इस पूरे विवाद की जड़ में एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति की शिकायत है, जिसने आरोपी को अपना भाई बताते हुए आरोप लगाया था कि उसने वीडियो के साथ छेड़छाड़ कर उसे धमकाने की कोशिश की। दूसरी ओर, आरोपी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए ट्रांसजेंडर पर ही पलटवार किया है। आरोपी ने अपनी याचिका में दावा किया है कि उसे झूठे मामले में फंसाया जा रहा है और वास्तव में उसे ब्लैकमेल कर वसूली की कोशिश की जा रही थी। उसने अदालत से मांग की है कि ट्रांसजेंडर के खिलाफ आपराधिक साजिश और धमकी देने के आरोप में मामला दर्ज किया जाना चाहिए।

    वीडियो लीक कांड और मंत्री की भूमिका
    मामले की गंभीरता तब बढ़ी जब एक ऐसा वीडियो सार्वजनिक हुआ जिसमें कथित तौर पर एनसीपी मंत्री एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति के साथ आपत्तिजनक स्थिति में दिखाई दे रहे हैं। इस वीडियो के सामने आने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल आ गया था। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या यह वीडियो वास्तविक है या इसके साथ तकनीकी रूप से छेड़छाड़ की गई है। आरोपी का कहना है कि उसे निशाना बनाया जा रहा है, जबकि शिकायतकर्ता का तर्क है कि उसकी निजता और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ हुआ है।

    अदालती सुनवाई पर टिकी निगाहें
    फिलहाल बॉम्बे हाईकोर्ट में इस याचिका पर सुनवाई का इंतजार है, जिसके बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी कि एफआईआर रद्द होगी या जांच का दायरा और बढ़ेगा। पुलिस ने दोनों पक्षों के बयानों और साक्ष्यों के आधार पर अपनी प्रक्रिया जारी रखी है। यह मामला न केवल एक मंत्री की छवि से जुड़ा है, बल्कि इसमें साइबर अपराध, ब्लैकमेलिंग और आपसी रंजिश के कई पेचीदा पहलू शामिल हो गए हैं। आने वाले दिनों में अदालत का फैसला इस विवाद की दिशा तय करेगा।