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  • राजनीति अपडेट: BJP अध्यक्ष चुनाव की घोषणा, नितिन नवीन संभालेंगे कमान इस दिन

    राजनीति अपडेट: BJP अध्यक्ष चुनाव की घोषणा, नितिन नवीन संभालेंगे कमान इस दिन

    नई दिल्ली  बीजेपी अध्यक्ष चुनाव की आ गई तारीख, नितिन नवीन की इस दिन होगी ताजपोशी
    भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की तारीखों का आधिकारिक ऐलान कर दिया है. मौजूदा कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन का निर्विरोध चुना जाना करीब तय माना जा रहा है.

    भारतीय जनता पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया 19 जनवरी से शुरू होगी. बीजेपी के केंद्रीय चुनाव अधिकारियों के मुताबिक, 19 जनवरी को नामांकन पत्र दाखिल किए जाएंगे, जबकि 20 जनवरी को नए अध्यक्ष के नाम की औपचारिक ऐलान कर दिया जाएगा.

    मौजूदा वक्त में पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन इस पद के लिए मुख्य दावेदार हैं और उनके निर्विरोध चुने जाने की पूरी उम्मीद है. नामांकन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री अमित शाह, राजनाथ सिंह और निवर्तमान अध्यक्ष जेपी नड्डा प्रस्तावक के रूप में मौजूद रह सकते हैं.

    बीजेपी चीफ चुनाव प्रक्रिया के लिए बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों, प्रदेश अध्यक्षों और राष्ट्रीय परिषद के सदस्यों को दिल्ली बुलाया गया है. 46 वर्षीय नितिन नबीन अगर अध्यक्ष चुने जाते हैं, तो वह बीजेपी के इतिहास के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे. यह चुनाव जेपी नड्डा के लंबे कार्यकाल के बाद संगठन में बड़े बदलाव का संकेत है.

    तीन साल का कार्यकाल…

    दिसंबर 2025 में कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद से ही नबीन ने संगठन को मजबूत करने पर जोर देना शुरू कर दिया था. खास तौर से बूथ स्तर उन्होंने काफी मेहनत की. अब राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद उनके सामने कई बड़ी चुनौतियां होंगी, जो पार्टी की रणनीति, चुनावी प्रदर्शन और भविष्य को प्रभावित करेंगी. नितिन नबीन का कार्यकाल तीन साल का होगा. राज्य चुनावों के बाद उनका असली परीक्षण 2029 लोकसभा चुनावों की तैयारी के वक्त होगा.

  • मौसम विज्ञान के 151 साल: दिल्ली-मुंबई समेत बड़े शहरों को मिलेंगे 200 नए ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन,

    मौसम विज्ञान के 151 साल: दिल्ली-मुंबई समेत बड़े शहरों को मिलेंगे 200 नए ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन,


    नई दिल्ली । भारत मौसम विज्ञान विभाग ने अपने स्थापना के 151वें वर्ष में प्रवेश करते ही देश की मौसम सेवाओं को ‘हाई-टेक’ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने गुरुवार को घोषणा की कि सरकार देश के चार प्रमुख महानगरों दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और पुणे में कुल 200 नए ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन स्थापित करेगी। प्रत्येक शहर में 50-50 स्टेशन लगाए जाएंगे, जिससे अब हर गली-मोहल्ले के स्तर पर यानी ‘हाइपर-लोकल’ मौसम पूर्वानुमान संभव हो सकेगा।लोधी रोड स्थित मौसम भवन में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि पिछले एक दशक में मौसम पूर्वानुमान की सटीकता में 40 से 50 प्रतिशत तक का सुधार हुआ है।
    उन्होंने कहा कि मिशन मौसम के तहत सरकार अब डेटा-आधारित भविष्यवाणियों पर जोर दे रही है। इन नए स्टेशनों के नेटवर्क से अचानक होने वाली भारी बारिश, भीषण गर्मी और चक्रवातों जैसी प्राकृतिक आपदाओं की जानकारी अधिक सटीकता से मिल सकेगी। विशेष रूप से मासिक और मौसमी पूर्वानुमानों में त्रुटि की दर जो पहले 7.5% थी, वह अब घटकर मात्र 2.5% रह गई है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को आगे बढ़ाते हुए, डॉ. सिंह ने बताया कि भारत की तकनीक का लाभ अब पड़ोसी देशों जैसे बांग्लादेश, नेपाल, भूटान और श्रीलंका को भी मिल रहा है। भारत इन देशों को आपदा संबंधी मौसम जानकारी और उपग्रह डेटा प्रदान कर रहा है।
    इसके साथ ही, देश में डॉप्लर रडार नेटवर्क का विस्तार पिछले 10 वर्षों में तीन गुना बढ़ा है, जो अब देश के 87 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र को कवर करता है।इस ऐतिहासिक अवसर पर आधुनिक ‘3D-प्रिंटेड ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन’ और ‘एग्रो-ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन’ का भी उद्घाटन किया गया। ये तकनीकें न केवल शहरी नागरिकों को तीन घंटे पहले सटीक जानकारी अल्ट्रा-शॉर्ट-रेंज पूर्वानुमान प्रदान करेंगी, बल्कि कृषि, विमानन और शहरी नियोजन जैसे क्षेत्रों में भी क्रांतिकारी बदलाव लाएंगी। कार्यक्रम में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. एम. रविचंद्रन और IMD के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्रा सहित कई वरिष्ठ वैज्ञानिक उपस्थित रहे।

  • सीमा पर मंडराता खतरा: LoC और अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर फिर दिखे पाकिस्तानी ड्रोन, सेना का 'सर्च ऑपरेशन' शुरू

    सीमा पर मंडराता खतरा: LoC और अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर फिर दिखे पाकिस्तानी ड्रोन, सेना का 'सर्च ऑपरेशन' शुरू


    नई दिल्ली । श्रीनगर/जम्मू: गणतंत्र दिवस से पूर्व जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पाकिस्तानी ड्रोनों की बढ़ती सक्रियता ने सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर ला दिया है। पिछले पांच दिनों के भीतर संदिग्ध ड्रोन देखे जाने की यह तीसरी बड़ी घटना है, जिसके बाद सांबा और पुंछ जिलों में सेना ने बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। सीमा पार से होने वाली इन संदिग्ध गतिविधियों को देखते हुए भारतीय सुरक्षा बल पूरी तरह मुस्तैद हैं।

    ताजा घटनाक्रम के अनुसार, गुरुवार शाम सांबा जिले के रामगढ़ सेक्टर और पुंछ के देगवार व मनकोट इलाकों में पाकिस्तानी ड्रोन मंडराते देखे गए। रामगढ़ के चक बबरल गांव के ऊपर शाम करीब 7:15 बजे एक संदिग्ध वस्तु कुछ मिनटों तक उड़ती दिखी, जबकि पुंछ में शाम 6:25 बजे तैन से टोपा की ओर ड्रोन जैसी वस्तु जाती नजर आई। इन गतिविधियों के तुरंत बाद सेना ने अपने एंटी-अनमैन्ड एरियल सिस्टम को सक्रिय कर दिया और संबंधित इलाकों की घेराबंदी कर दी।

    इससे पहले 13 जनवरी को राजौरी जिले में दो बार पाकिस्तानी ड्रोन देखे गए थे, जिन पर जवानों ने फायरिंग की, जिसके बाद वे पाक अधिकृत कश्मीर की ओर लौट गए। वहीं, 11 जनवरी को नौशेरा सेक्टर में जवानों ने मशीन गन से फायरिंग कर ड्रोन की घुसपैठ को नाकाम किया था। सुरक्षा एजेंसियों को अंदेशा है कि पाकिस्तान इन ड्रोनों का उपयोग भारतीय सेना की चौकियों की टोह लेने या फिर आतंकियों के लिए हथियारों और नशीले पदार्थों की खेप गिराने के लिए कर रहा है। उल्लेखनीय है कि 9 जनवरी को सांबा के पालूरा गांव में ड्रोन द्वारा गिराई गई एक खेप बरामद हुई थी, जिसमें पिस्तौल, मैगजीन और ग्रेनेड शामिल थे।

    इस तनावपूर्ण स्थिति के बीच, आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि भारतीय सेना किसी भी आतंकी या सैन्य दुस्साहस का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने बताया कि सीमा पार अब भी 8 आतंकी कैंप सक्रिय हैं और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत सेना हर हरकत पर नजर रख रही है। इसके अतिरिक्त, राजौरी के काकोरा गांव में सेना ने समय रहते 3 किलो वजन का एक संदिग्ध  बरामद कर उसे नष्ट कर दिया, जिससे एक बड़ी आतंकी साजिश विफल हो गई। गणतंत्र दिवस को देखते हुए पूरी घाटी और सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।

  • रिश्तों का कत्ल: नाबालिग बेटी से दरिंदगी करने वाले पिता को आखिरी सांस तक उम्रकैद

    रिश्तों का कत्ल: नाबालिग बेटी से दरिंदगी करने वाले पिता को आखिरी सांस तक उम्रकैद


    नई दिल्ली । दिल्ली की एक अदालत ने मानवीय रिश्तों को शर्मसार करने वाले एक जघन्य मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। रोहिणी स्थित पॉक्सो कोर्ट ने अपनी ही नाबालिग बेटी के साथ बार-बार दुष्कर्म करने वाले एक कलयुगी पिता को ‘प्राकृतिक जीवन के अंत’ यानी आखिरी सांस तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमित सहरावत ने इस अपराध को समाज की अंतरात्मा पर आघात बताते हुए दोषी पिता पर 10,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि पिता-पुत्री का रिश्ता सबसे पवित्र होता है, लेकिन दोषी ने अपनी क्रूरता से इस भरोसे को पूरी तरह खत्म कर दिया।

    यह मामला तब शुरू हुआ जब पीड़िता की मां ने घर छोड़ दिया और दूसरा विवाह कर लिया। इसके बाद सुरक्षा देने के बजाय पिता ही भक्षक बन गया। अभियोजन पक्ष के अनुसार 15 फरवरी 2021 की रात पिता ने पहली बार अपनी नाबालिग बेटी के साथ दुष्कर्म किया और इसके बाद यह सिलसिला लगातार चलता रहा। डरी-सहमी पीड़िता ने जब अपनी सगी बुआ को इस आपबीती के बारे में बताया, तो वहां से भी उसे कोई मदद नहीं मिली। बुआ ने अपनी जिम्मेदारी निभाने के बजाय मामले को दबाने और छिपाने का प्रयास किया। अंततः मई 2021 में जब पीड़िता ने अपनी ताई को पूरी घटना बताई, तब जाकर पुलिस में मामला दर्ज हुआ और इस भयावह सच्चाई का खुलासा हुआ।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने पीड़िता की बुआ के व्यवहार पर भी सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने माना कि बुआ ने अपराध की जानकारी होने के बावजूद उसे छिपाया, जो पॉक्सो एक्ट की धारा 21 ,1 के तहत गंभीर अपराध है। हालांकि, बुआ के दो छोटे बच्चों और उसकी पारिवारिक स्थिति को देखते हुए अदालत ने उसे जेल भेजने के बजाय 20,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। इसके साथ ही, अदालत ने पीड़िता के भविष्य और पुनर्वास को ध्यान में रखते हुए उसे 10.5 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया है।

    अदालत में विशेष लोक अभियोजक आदित्य कुमार ने दलील दी कि ऐसे अपराधी किसी भी सहानुभूति के पात्र नहीं हैं। उन्होंने तर्क दिया कि सजा ऐसी होनी चाहिए जो समाज में नजीर पेश करे। बचाव पक्ष ने आरोपी के पूर्व में कोई आपराधिक रिकॉर्ड न होने और जेल में अच्छे आचरण का हवाला देकर रियायत की मांग की थी, जिसे न्यायाधीश ने सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने पॉक्सो एक्ट की धारा 42 का संदर्भ देते हुए दोषी को धारा 6 के तहत अधिकतम दंड यानी ताउम्र कैद की सजा से दंडित किया। यह फैसला संदेश देता है कि मासूमों के खिलाफ होने वाले ऐसे जघन्य अपराधों पर न्याय प्रणाली का रुख बेहद कड़ा और समझौताविहीन रहेगा।

  • ताजमहल में तीन दिन फ्री एंट्री, शाहजहां–मुमताज की असली कब्र देखने का दुर्लभ मौका

    ताजमहल में तीन दिन फ्री एंट्री, शाहजहां–मुमताज की असली कब्र देखने का दुर्लभ मौका

    नई दिल्ली  आगरा स्थित विश्व धरोहर ताजमहल में बादशाह शाहजहां का तीन दिवसीय सालाना उर्स गुरुवार से शुरू हो गया। उर्स के पहले ही दिन ताजमहल में पर्यटकों की भारी भीड़ देखने को मिली। नि:शुल्क प्रवेश की सुविधा मिलने के कारण करीब 60 हजार देशी-विदेशी सैलानी ताजमहल पहुंचे और शाहजहां व मुमताज की असली कब्रों के दीदार किए। भीड़ को संभालने के लिए ताज सुरक्षा पुलिस, सीआईएसएफ और एएसआई अधिकारियों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।

    गुस्ल की रस्म से हुई शुरुआत

    शाहजहां के 371वें उर्स के पहले दिन परंपरा के अनुसार गुस्ल की रस्म अदा की गई। इसके बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और उर्स कमेटी के सदस्यों ने फलों की चादर चढ़ाई। उर्स का आयोजन 17 जनवरी तक चलेगा।

    16 जनवरी को संदल की रस्म और कव्वाली का आयोजन होगा।

    17 जनवरी को चारदपोशी की रस्म अदा की जाएगी, जिसमें लगभग 1,720 मीटर लंबी चादर चढ़ाई जाएगी। इस दिन लंगर का भी वितरण होगा।

    सुरक्षा के कड़े इंतजाम, फिर भी दिखीं अव्यवस्थाएं

    नि:शुल्क प्रवेश के चलते दिनभर लंबी कतारें लगी रहीं। सुरक्षा बलों ने भीड़ प्रबंधन के लिए व्यापक इंतजाम किए, लेकिन पर्यटकों की संख्या अधिक होने से कई जगह अव्यवस्थाएं भी नजर आईं।
    मुख्य गुंबद के बाहर बड़ी संख्या में पर्यटकों ने जूते-चप्पल उतार दिए, जबकि नियमों के अनुसार जूते ऊपर ले जाने की अनुमति नहीं है। कुछ लोग उद्यान में घूमते भी दिखाई दिए, जिन्हें सुरक्षाकर्मियों ने समझाकर रोका।

    भीड़ में बिछड़े लोग, पुलिस ने मिलवाया

    भारी भीड़ के बीच करीब तीन दर्जन बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग अपने परिजनों से बिछड़ गए। ताज सुरक्षा पुलिस और सीआईएसएफ के जवानों ने तत्परता दिखाते हुए सभी को खोजकर सुरक्षित उनके परिजनों से मिलवाया।

    उर्स का विरोध, पुतला दहन

    उर्स के आयोजन को लेकर अखिल भारतीय हिंदू महासभा ने विरोध जताया। महासभा के पदाधिकारियों ने एएसआई कार्यालय के बाहर पुतला दहन कर नारेबाजी की। इस दौरान प्रांतीय अध्यक्ष मीना दिवाकर सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।

    आज दोपहर दो बजे के बाद फ्री एंट्री

    शुक्रवार होने के कारण ताजमहल सुबह से दोपहर दो बजे तक आम पर्यटकों के लिए बंद रहेगा। इसके बाद पर्यटकों को नि:शुल्क प्रवेश मिलेगा और असली कब्रों के दर्शन भी कराए जाएंगे। हालांकि, स्थानीय नमाजियों के लिए प्रवेश की व्यवस्था पहले की तरह ही रहेगी।

    उर्स के दौरान ताजमहल में उमड़ रही भीड़ यह साबित कर रही है कि इतिहास, आस्था और विरासत का यह संगम आज भी लोगों को उतनी ही शिद्दत से अपनी ओर खींचता है।

  • BMC Election 2026: सिर्फ नगर निगम नहीं, मुंबई की असली मिनी सरकार

    BMC Election 2026: सिर्फ नगर निगम नहीं, मुंबई की असली मिनी सरकार


    नई दिल्ली। मुंबई की राजनीतिक और प्रशासनिक धड़कनें इन दिनों बीएमसी चुनावों के साथ जोर पकड़ रही हैं। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) को अक्सर सिर्फ एक नगर निगम समझा जाता है, लेकिन यह शहर की असली मिनी सरकार की तरह काम करती है। जहां इस पर सत्ता होती है, वहां शहर की रफ्तार, विकास और जीवन स्तर तय होते हैं। 227 वार्डों के लिए 52.94% मतदान के साथ बीएमसी चुनाव इस बार भी देश की सबसे अमीर और ताकतवर नगर निगम को लेकर सियासी दिलचस्पी का केंद्र बन गया है।

    बीएमसी का इतिहास और सियासी महत्व
    बीएमसी की स्थापना 1865 में हुई थी और यह मुंबई की स्थानीय सरकार की तरह काम करती है। पिछले दो दशकों में शिवसेना का इस पर दबदबा रहा, लेकिन अब पार्टी दो धड़ों में बंटी हुई है

    एक का नेतृत्व उद्धव ठाकरे कर रहे हैं, जबकि दूसरा धड़ा एकनाथ शिंदे के हाथ में है। इस वजह से बीएमसी चुनाव राजनीतिक तौर पर बेहद अहम माना जाता है।

    सड़क और यातायात: मुंबई का कनेक्शन बीएमसी से
    मुंबई का सड़क नेटवर्क लगभग 2,050 किलोमीटर लंबा है। इन सड़कों का निर्माण, रखरखाव और मरम्मत बीएमसी की जिम्मेदारी है। खासतौर पर मानसून में सड़कें गड्ढों से भर जाती हैं, जिससे शहर में यातायात प्रभावित होता है। बीएमसी 700 किलोमीटर सड़कों को सीमेंट कंक्रीट में बदलने का काम कर रही है, जिस पर करीब 17,000 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसके साथ ही फ्लाईओवर, पुल, लिंक रोड और कोस्टल रोड जैसे बड़े प्रोजेक्ट भी बीएमसी की देखरेख में हैं, जिनसे शहर में यातायात की गति बढ़ी है।

    पानी की आपूर्ति और झीलों का प्रबंधन
    मुंबई की पेयजल आपूर्ति सात झीलों पर निर्भर हैतुलसी, विहार, भात्सा, तानसा, अपर वैतरणा, मिडिल वैतरणा और मोडक सागर। इनमें से सिर्फ दो झीलें शहर की सीमा में हैं। बीएमसी इन सभी झीलों का प्रबंधन करती है, पानी को शुद्ध करती है और पाइपलाइन नेटवर्क के जरिए घर-घर तक पहुंचाती है। लीकेज ठीक करना और बढ़ती आबादी के अनुसार व्यवस्था अपडेट करना भी उसकी जिम्मेदारी है।

    कचरा प्रबंधन और सफाई
    मुंबई में प्रतिदिन 8,000 से 10,000 मीट्रिक टन कचरा निकलता है। इसे इकट्ठा करना, प्रोसेसिंग प्लांट और लैंडफिल तक पहुंचाना बीएमसी का काम है। इसके अलावा सड़कों की सफाई, सार्वजनिक शौचालयों का रखरखाव और सीवेज ट्रीटमेंट भी नगर निगम की जिम्मेदारी में आता है।

    स्वास्थ्य और शिक्षा
    बीएमसी देश की सबसे बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों में से एक संचालित करती है। इसके तहत चार मेडिकल कॉलेज अस्पताल, 16 सामान्य अस्पताल, चार विशेष अस्पताल, डिस्पेंसरी और मातृत्व गृह आते हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान बीएमसी की भूमिका पूरे देश में सराही गई थी। शिक्षा के क्षेत्र में बीएमसी 1,100 से ज्यादा नगरपालिका स्कूल चलाती है, जिनमें गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चों को कम खर्च में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलती है।

    बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट
    मुंबई कोस्टल रोड, गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड और वर्सोवा-भायंदर कोस्टल रोड जैसे प्रोजेक्ट बीएमसी के तहत विकसित किए गए हैं।

    इसके अलावा शहर में 340 से ज्यादा पुल और स्काईवॉक का रखरखाव भी बीएमसी करती है। ये सभी प्रोजेक्ट न सिर्फ यातायात को बेहतर बनाते हैं बल्कि शहर के विकास और आर्थिक गतिविधियों को भी गति देते हैं।

    बीएमसी चुनाव केवल नगर निगम की कुर्सी के लिए नहीं, बल्कि मुंबई की असली मिनी सरकार के नेतृत्व के लिए अहम हैं। सड़क, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा और बड़े प्रोजेक्ट्सबीएमसी का दायरा शहर के हर पहलू में फैला है। इसलिए इस चुनाव के नतीजे न केवल राजनीतिक बल्कि शहरी जीवन और विकास की दिशा तय करने वाले होंगे।

  • ट्रंप टैरिफ का हल… पूरी को सामान बेचने वाला देश अब भारत से कर रहा खरीदारी

    ट्रंप टैरिफ का हल… पूरी को सामान बेचने वाला देश अब भारत से कर रहा खरीदारी


    नई दिल्‍ली।
    अमेरिका (America) ने भारत (India) पर 50 फीसदी टैरिफ (50 Percent Tariff) लगाकर निर्यात (Exports) को नुकसान पहुंचाने की कोशिश तो की, लेकिन मोदी सरकार ने जल्‍द ही इसका हल भी निकाल लिया और अपना सामान ऐसे देश को बेचना शुरू कर दिया जो खुद पूरी दुनिया को सामान बेच रहा है. वाणिज्‍य मंत्रालय की ओर से जारी ट्रेड आंकड़ों को देखकर साफ पता चलता है कि भारत ने अमेरिका को हुए निर्यात के नुकसान की भरपाई चीन से कर ली है. आईये इस पूरे गणित को आसान शब्‍दों में समझते हैं।

    सबसे पहले बात करते हैं चीन के साथ कारोबार की. वाणिज्‍य मंत्रालय ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक्स और समुद्री उत्पादों जैसी विभिन्न वस्तुओं के निर्यात में उछाल से पिछले साल दिसंबर में चीन को होने वाला भारतीय निर्यात 67.35 फीसदी बढ़कर 2.04 अरब डॉलर पर पहुंच गया है. निर्यात में यह तेजी मुख्य रूप से तेल खली, समुद्री उत्पाद, दूरसंचार उपकरण और मसालों जैसे उत्पादों के कारण रही।

    कितना रहा कुल कारोबार
    आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर में चीन से आयात भी 20 फीसदी बढ़कर 11.7 अरब डॉलर पहुंच गया है. इस तरह देखा जाए तो चालू वित्तवर्ष में अप्रैल-दिसंबर अवधि के दौरान चीन को होने वाला निर्यात 36.7 फीसदी बढ़कर 14.24 अरब डॉलर रहा, जबकि पहले नौ महीनों के दौरान आयात 13.46 फीसदी बढ़कर 95.95 अरब डॉलर हो गया. यानी पहले 9 महीने में ही देश का व्‍यापार घाटा 81.71 अरब डॉलर रहा. वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने इन आंकड़ों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘यह एक स्वागत योग्य वृद्धि है।

    किन चीजों को हमसे खरीद रहा चीन
    इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में वृद्धि दर्ज करने वाली मुख्य वस्तुओं में ‘पॉपुलेटेड प्रिंटेड सर्किट बोर्ड’ (पीसीबी), ‘फ्लैट पैनल डिस्प्ले मॉड्यूल’ और टेलीफोनी के लिए अन्य विद्युत उपकरण शामिल रहे.. भारत से निर्यात किए जाने वाले प्रमुख कृषि और समुद्री उत्पादों में सूखी मिर्च, ब्लैक टाइगर झींगा, मूंग, वनमेई झींगा और तेल खल अवशेष शामिल हैं. इसी तरह, एल्युमीनियम और परिष्कृत तांबा सिल्लियों ने भी निर्यात वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दिया. उल्लेखनीय है कि अमेरिका के बाद चीन भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है. यह अलग बात है कि अभी तक हम चीन से सिर्फ खरीद रहे थे, अब उसे बेचना शुरू किया है।

    अमेरिका को कितना रहा निर्यात
    टैरिफ बढ़ने की वजह से भारत से अमेरिका को होने वाले निर्यात में दिसंबर के दौरान 1.83 फीसदी घटकर 6.88 अरब डॉलर रह गया. अमेरिका में भारतीय उत्पादों पर 50 फीसदी तक शुल्क लगाए जाने के बाद पिछले वर्ष सितंबर और अक्टूबर में भी निर्यात घटा था. हालांकि, नवंबर महीने में इसमें 22.61 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई थी. दिसंबर में अमेरिका से आयात 7.57 फीसदी बढ़कर 4.03 अरब डॉलर हो गया. चालू वित्तवर्ष में अप्रैल-दिसंबर अवधि के दौरान देश का अमेरिका को निर्यात 9.75 फीसदी बढ़कर 65.87 अरब डॉलर जबकि आयात 12.85 फीसदी बढ़कर 39.43 अरब डॉलर रहा. जाहिर है कि अमेरिका के निर्यात में आई गिरावट की चीन से पूरी तरह भरपाई हो चुकी है।

  • प. बंगाल में चुनावी हलचल… जहां ममता बनर्जी का सियासी उदय हुआ… वहां अब PM मोदी की रैली

    प. बंगाल में चुनावी हलचल… जहां ममता बनर्जी का सियासी उदय हुआ… वहां अब PM मोदी की रैली


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal) में इस साल विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) है. चुनाव को लेकर सियासी हलचल बढ़ गई है. बंगाल की सियासत एक बार फिर उसी जगह पर आ गई है, जहां से कभी ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) का सियासी उदय हुआ था. जी हां, सिंगूर (Singur) में पीएम मोदी (PM Modi) की रैली होने वाली है. यहीं से भाजपा को उम्मीद की किरण दिख रही है. सिंगूर वही जगह है, जहां कभी टाटा नैनो की फैक्ट्री हुआ करती थी. अब भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 18 जनवरी को होने वाली रैली के लिए इसी जगह को चुना है. पीएम मोदी की रैली से यहां के लोगों को बड़ी उम्मीदें हैं।

    बात अक्टूबर 2008 की है. पश्चिम बंगाल के सिंगूर में करीब 1000 एकड़ उपजाऊ जमीन पर एक अजीब सी खामोशी छा गई. यह खामोशी टाटा ग्रुप के तत्कालीन चेयरमैन रतन टाटा की एक नाटकीय घोषणा के बाद आई थी. वह घोषणा थी टाटा के नैनो कार प्रोजेक्ट से जुड़ी. जी हां, खराब कारोबारी माहौल का हवाला देते हुए टाटा ने नैनो कार प्रोजेक्ट को सिंगूर से गुजरात के सानंद में शिफ्ट करने की घोषणा की. तब टाटा ने एक अच्छा एम (गुड एम) और एक बुरा एम (बैड एम) का जिक्र किया था. टाटा की नजर में शायद इसका अर्थ था बुरा एम मतलब ममता बनर्जी और अच्छा एम मतलब गुजरात के तब के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी. उन्होंने कहा था कि उनके सिर पर बंदूक तान दी गई थी और ट्रिगर दबा दिया गया था.

    अठारह साल बाद भी सिंगूर की वह जमीन ज्यादातर बंजर पड़ी है. खेती वापस शुरू नहीं हुई है. और सिंगूर एक प्रतीक बना हुआ है- खोए हुए मौके, राजनीतिक टकराव और अधूरे वादों का. दरअसल, सिंगूर विवाद के दौरान रतन टाटा ने ममता बनर्जी के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शनों के कारण पश्चिम बंगाल से टाटा मोटर्स का नैनो प्लांट हटाने का फैसला किया था. यह पूरा मामला पश्चिम बंगाल में भूमि अधिग्रहण और ममता बनर्जी के नेतृत्व में हुए किसान आंदोलन से जुड़ा था. इसी के बाद टाटा समूह को प्लांट गुजरात ले जाना पड़ा.


    सिंगूर के किसानों का दुख

    आज इस जमीन के ज़्यादातर हिस्से पर खेती के कोई निशान नहीं दिखते। जिन्होंने अपनी मर्जी से और बिना मर्ज़ी के ज़मीन दी थी, जिनकी जिंदगी सिंगूर आंदोलन से बदल गई थी. सिंगूर के रहने वाले कौशिक बाग अब 60 के दशक में हैं. उन्होंने बताया कि वह अपनी मर्ज़ी से जमीन देने वाले किसान थे. उन्होंने टाटा फैक्ट्री के लिए सरकार को छह बीघा जमीन दी थी. उन्होंने उस समय तीन महीने की ट्रेनिंग भी ली थी, इस उम्मीद में कि उन्हें रोजगार मिलेगा. लेकिन कुछ नहीं हुआ.


    जमीन मिली मगर अब खेती लायक नहीं

    हालांकि जमीन आखिरकार वापस मिल गई. कौशिक कहते हैं कि अब वह खेती के लायक नहीं रही. 18 साल की रुकावट के बाद अब उन्हें उम्मीद है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा से बदलाव आ सकता है. हालांकि, कौशिक बाग अकेले नहीं हैं. श्यामापदो दास कहते हैं कि वह बिना मर्जी के जमीन देने वाले किसान थे, जिन्होंने तीन बीघा जमीन दी थी. उन्होंने आंदोलन के दौरान मीटिंग और रैलियों में हिस्सा लिया था, यह मानते हुए कि जमीन वापस मिल जाएगी और खेती फिर से शुरू हो जाएगी.


    सिंगूर की बंजर जमीन

    श्यामापदो दास आज कहते हैं कि खेतों में जंगली जानवर घूमते हैं और खेती असंभव है. पीछे मुड़कर देखें तो श्यामापदो का मानना​है कि सिंगूर एक राजनीतिक अखाड़ा बन गया था और आखिरकार किसानों के साथ धोखा हुआ. वहीं, स्वपन मित्रा कहते हैं कि उस समय उनके परिवार ने राजनीतिक आश्वासनों पर भरोसा किया था. स्वपन मित्रा के पिता ने एक बीघा जमीन दी थी.


    पीएम मोदी आने वाले हैं सिंगूर

    बहरहाल, इस इलाके को अब भी उम्मीद है, वह भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से. इस इलाके को आज भी स्थानीय लोग ‘टाटा की जमीन’ कहते हैं. आज उम्मीद एक अलग रूप में वापस आई है. कारण कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सिंगूर आने वाले हैं. कई निवासियों के लिए, इस दौरे से पुनरुद्धार, पहचान और एक संभावित नई शुरुआत की उम्मीदें जुड़ी हैं।


    क्या है सिंगूर विवाद?

    कोलकाता से करीब 40 किलोमीटर दूर सिंगूर में नैनो परियोजना के लिए सरकार ने कुल 997.11 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया था. मगर तृणमूल कांग्रेस और किसानों के संगठन कृषि जमीं जिबिका रक्षा कमेटी (केजेजेआरसी) का कहना था कि इसमें से 400 एकड़ जमीन किसानों से उनकी मर्जी के खिलाफ ली गई है, लिहाजा यह जमीन उन्हें लौटा दी जानी चाहिए. तब तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी इस मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गई थीं. इस दौरान हिंसा भी हुई थी. प्रदर्शनकारियों द्वारा कथित रूप से संयंत्र के कर्मचारियों को डराए-धमकाए जाने की वजह से टाटा मोटर्स ने संयंत्र में कामकाज बंद कर दिया. बाद में टाटा ने नैनो प्रोजेक्ट को गुजरात शिफ्ट कर दिया. तब ममता बनर्जी विपक्ष में थीं।

  • केन्द्रीय कर्मचारियों को खुलेगा नया बैंक अकाउंट, मिलेंगी तीन तरह की नई सुविधाएं

    केन्द्रीय कर्मचारियों को खुलेगा नया बैंक अकाउंट, मिलेंगी तीन तरह की नई सुविधाएं


    नई दिल्ली।
    केंद्रीय कर्मचारियों (Central Government Employees) के लिए जो नया सैलरी बैंक खाता (New Salary Bank Account) होगा, उसके तीन मुख्य खंड हैं – बैंकिंग, बीमा और कार्ड। बैंकिंग सुविधा में उन्नत सुविधाओं के साथ जीरो बैलेंस सैलरी अकाउंट, मुफ्त आरटीजीएस/एनईएफटी/यूपीआई के साथ चेक सुविधा; आवास, शिक्षा, वाहन और व्यक्तिगत आवश्यकता के लिए रियायती ऋण; ऋण के प्रसंस्करण शुल्क में छूट; और लॉकर किराये पर छूट शामिल हैं।

    सैलरी अकाउंट में ही 20 लाख रुपये तक की अंतर्निहित सावधि जीवन बीमा सुरक्षा और किफायती प्रीमियम पर बीमा कवरेज को बढ़ाने के लिए अतिरक्ति टॉप-अप सुविधा दी जाएगी। कर्मचारी और परिवार के लिए व्यापक स्वास्थ्य बीमा कवरेज के तहत एक बेस प्लान और अतिरक्ति टॉप-अप सुविधा शामिल है। साथ ही डेबिट और क्रेडिट कार्ड पर एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस, रिवॉर्ड प्रोग्राम और कैशबैक ऑफर जैसे बेहतर लाभ दिए जाएंगे।


    सीजीएचएस लाभार्थियों के लिए मेडिक्लेम आयुष-बीमा पालिसी

    सरकार ने केंद्रीय कर्मियों एवं पेंशनधारकों की स्वाथ्य सेवा योजना (सीजीएचएस) के लाभार्थियों के लिए एक परिपूर्ण मेडिक्लेम आयुष बीमा शुरू करने की घोषणा की है जिसे न्यू इंडिया एश्योरेंस तथा डिजिटल प्लेटफार्मों के माध्यम से जल्द उपलब्ध कराया जाएगा। यह योजना कैशलेस सुविधा, आधुनिक उपचार और अस्पतालों के एक बड़े नेटवर्क के साथ दी जा रही है। यह पॉलिसी विशेष रूप से सीजीएचएस लाभार्थियों के लिए उपलब्ध है, जिसमें प्रति पॉलिसी अधिकतम छह सदस्य हो सकते हैं।


    10 लाख या 20 लाख रुपये के विकल्प

    यह देश के अंदर इंडेम्निटी-आधारित इन-पेशेंट हॉस्पिटलाइजेशन कवरेज प्रदान करती है, जिसमें 10 लाख रुपये या 20 लाख रुपये तक के बीमा राशि के विकल्प हैं। इस योजना में को-पेमेंट कंपोनेंट होगा जिसमें लाभार्थी और बीमा कंपनी के बीच 70:30 या 50:50 के आधार पर भुगतान की व्यवस्था भी शामिल होगी। यह पालिसी जल्द ही न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के कार्यालयों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगी। इसमें अस्पताल के सामान्य कमरे और आईसीयू के लिए कमरे का किराया क्रमशः बीमा राशि का एक और दो प्रतिशत प्रति दिन तक सीमित रखा गया है तथा इसमें 30 दिनों का प्री-हॉस्पिटलाइजेशन कवरेज और 60 दिनों का पोस्ट-हॉस्पिटलाइजेशन कवरेज उपलब्ध है।

    आयुष उपचार इन-पेशेंट हॉस्पिटलाइजेशन के लिए बीमा राशि के 100 प्रतिशत तक कवर किए जाएंगे। आधुनिक उपचार बीमा राशि के 25 प्रतिशत तक सीमित किया गया है। 100 प्रतिशत आधुनिक उपचार कवरेज के लिए एक वैकल्पिक राइडर रखा गया है। इसमें हर दावारहित वर्ष के लिए 10 प्रतिशत संचयी बोनस रखा गया है।

  • 77वें गणतंत्र दिवस पर यूरोप के दो शीर्ष पदाधिकारी होंगे चीफ गेस्ट… PM मोदी के निमंत्रण पर आ रहे भारत

    77वें गणतंत्र दिवस पर यूरोप के दो शीर्ष पदाधिकारी होंगे चीफ गेस्ट… PM मोदी के निमंत्रण पर आ रहे भारत


    नई दिल्ली।
    देश के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह (77th Republic Day celebrations) में इस बार यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा (European Council President Antonio Luis Santos da Costa) और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन (European Commission President Ursula von der Leyen) मुख्य अतिथि होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के निमंत्रण पर ये शीर्ष पदाधिकारी 25 से 27 जनवरी 2026 तक भारत की राजकीय यात्रा पर रहेंगे। यह यात्रा भारत और यूरोपीय संघ के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंधों की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को घोषणा की कि यूरोपियन काउंसिल के प्रेसिडेंट एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा और यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन 25 से 27 जनवरी तक 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर भारत के राजकीय दौरे पर रहेंगे। इस दौरे के दौरान, ये नेता 27 जनवरी को 16वें भारत-ईयू शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता भी करेंगे, जहाँ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की घोषणा की जाएगी।


    भारत और EU के बीच आर्थिक संबंध होंगे मजबूत

    उम्मीद है कि FTA भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच आर्थिक संबंधों को मज़बूत करेगा, जिसमें व्यापार, निवेश और बाज़ार पहुँच जैसे क्षेत्र शामिल होंगे, और अमेरिकी टैरिफ से प्रभावित भारतीय निर्यातकों को कुछ राहत मिलेगी। इस समझौते के लिए पिछले कई महीनों से गहन बातचीत चल रही है और बताया जा रहा है कि दोनों पक्षों ने व्यापार से जुड़े अधिकांश जटिल मुद्दों को सुलझा लिया है।


    प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता का कार्यक्रम

    इन दोनों शीर्ष अधिकारियों का राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात और प्रधानमंत्री मोदी के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता का कार्यक्रम है। इसके अतिरिक्त, शिखर सम्मेलन के इतर एक ‘भारत-यूरोपीय संघ बिजनेस फोरम’ के आयोजन की भी संभावना है। वर्ष 2004 से रणनीतिक साझेदार रहे भारत और यूरोपीय संघ के बीच फरवरी 2025 में यूरोपीय संघ के आयुक्तों की ऐतिहासिक भारत यात्रा के बाद से द्विपक्षीय संबंधों में काफी विस्तार हुआ है। गणतंत्र दिवस समारोह में इनकी भागीदारी से दोनों पक्षों के बीच सहयोग और आपसी हितों के प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को और मजबूती मिलेगी।


    द्विपक्षीय संबंध कई क्षेत्रों में फैले हैं

    मंत्रालय ने कहा है कि पिछले साल फरवरी में EU कॉलेज ऑफ़ कमिश्नर्स की भारत की ऐतिहासिक यात्रा के बाद, द्विपक्षीय संबंध कई क्षेत्रों में फैले हैं। EU अभी भारत का सामान के लिए सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, 2024-25 में द्विपक्षीय व्यापार 136 अरब डॉलर से ज़्यादा हो गया है। 27 देशों के राजनीतिक और आर्थिक समूह के साथ FTA भारत का 19वां व्यापार समझौता होगा और इसकी व्यापार रणनीति में एक मुख्य स्तंभ होगा।