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  • MP: राहुल गांधी कल आएंगे इंदौर… दूषित पानी से मौतों पर राजनीति का अखाड़ा बना शहर

    MP: राहुल गांधी कल आएंगे इंदौर… दूषित पानी से मौतों पर राजनीति का अखाड़ा बना शहर


    इंदौर।
    लोकसभा (Lok Sabha) में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Opposition Leader Rahul Gandhi) के 17 जनवरी को मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के इंदौर (Indore) दौरे के पहले ये शहर पूरी तरह राजनीति का अखाड़ा बन गया है। गांधी दूषित पानी से हुई लगभग 20 से भी ज्यादा लोगों की मौत के मामले को लेकर 17 को इंदौर आने वाले हैं। वे यहां प्रभावितों के परिजन से मुलाकात करेंगे। उनके इस दौरे के पहले राज्य में इस मुद्दे को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव (Chief Minister Dr. Mohan Yadav) ने कल अपने इंदौर प्रवास के दौरान बिना किसी का नाम लिए इस मामले को लेकर कांग्रेस और नेता प्रतिपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, ”हमने इस कठिनाई के दौर को महसूस किया है, संवेदना के साथ महसूस किया है, लेकिन आप अगर लाशों पर राजनीति करने आओगे, इंदौर बर्दाश्त नहीं करेगा। कोई बर्दाश्त करने वाला नहीं है।

    उन्होंने कहा कि अगर आपने आपदा में से अवसर तलाश कर राजनीति का रास्ता तलाशा, तो ये उचित नहीं कहा जा सकता। आप सकारात्मक विरोध करो, विपक्ष की आवाज विपक्ष की तरह से रखो, तो हम सब उस बात से सहमत हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा,’लेकिन अगर आपने बात निकाली, तो बात दूर तलक तक जाएगी।

    वहीं कांग्रेस ने भी सरकार पर हमला बोला है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा, भाजपाइयों की जुबान अभी भी “भागीरथपुरा” का भय बढ़ा रही है! पीड़ित परिवारों के गहरे जख्मों पर नमक लगा रही है! अहंकार में डूबे हुए “23 सरकारी हत्याओं” के अपराधी इसीलिए निरंकुश हैं, क्योंकि जनमत का अपमान इनकी आदत में आ चुका है! तभी तो ये आंसूओं में डूबे इंदौर का दर्द भूलकर, “जुबानी-जहर” उगल रहे हैं! गलती सुधारने की बजाय अभी भी मुंहजोरी कर रहे हैं!”

    इसी बीच श्री पटवारी ने राहुल गांधी के दौरे के संबंध में कहा कि नेता प्रतिपक्ष इस घटना को लेकर बहुत चिंतित थे। पूरी घटना उनके संज्ञान में है। उन्होंने प्रभावितों के परिजनों से मिलने की इच्छा जाहिर की है। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का 17 जनवरी को इंदौर आगमन पीड़ित परिवारों और शहरवासियों को संबल, संवेदना और न्याय की उम्मीद देगा।

    इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से अब तक 20 से भी ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। सरकार जहां लगातार व्यवस्थाएं सुधारने का दावा कर रही है, वहीं कांग्रेस इसे एक मुद्दा बना रही है।

  • काशी के मणिकर्णिका घाट पर सुंदरीकरण के नाम पर बुलडोजर, इंदौर राज परिवार ने दोहराया संकल्प

    काशी के मणिकर्णिका घाट पर सुंदरीकरण के नाम पर बुलडोजर, इंदौर राज परिवार ने दोहराया संकल्प

    काशी। वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर सुंदरीकरण के नाम पर बुलडोजर चलाने, अहिल्याबाई समेत कई ऐतिहासिक मूर्तियों को तोड़कर खंडित करने और गंगा में डाल देने का मामला देश भर में चर्चा का विषय बन गया है। इंदौर से खासगी देवी अहिल्याबाई होल्कर ट्रस्ट के अध्यक्ष और राजपरिवार के प्रतिनिधि यशवंत होल्कर भी दो दिन पहले काशी पहुंचे। अपनी नाराजगी जताई। वापस जाने से पहले उन्होंने मणिकर्णिका घाट की पवित्र माटी माथे लगाई। घाट पर तोड़ी गई मढ़ी के निकट उन्होंने पुन: क्षमायाचना की और काशी में महारानी की विरासत संरक्षित और सुरक्षित रखने का संकल्प भी दोहराया।

    जिला प्रशासन के आला अधिकारियों द्वारा आश्वस्त किए जाने के बाद वह यहां से रवानगी के लिए तैयार हुए। उन्हें विश्वास दिलाया गया है कि खंडित मूर्तियों के अवशेष जल्द खोज लिए जाएंगे। उनके मणिकर्णिका घाट पहुंचने से पहले ही काफी संख्या में पीएसी के जवानों को तैनात कर दिया गया था। इस बात पर कड़ी नजर रखी गई कि कोई दूर से भी मोबाइल से फोटो या वीडियो न बना सके।

    मणिकर्णिका घाट की मौजूदा स्थिति देखने के बाद वह निकट स्थित ताड़केश्वर मंदिर भी गए। प्रशासनिक अधिकारियों से कहा कि रानी मां की चारों मूर्तियां यही रखी जाएंगी। जो दो साबूत मूर्तियां हैं उन्हें यथाशीघ्र इस मंदिर में भेजवाया जाए। अधिकारियों ने जल्द से जल्द मूर्तियां ताड़केश्वर मंदिर भेजने पर सहमति जता दी है। वहीं ट्रस्ट के स्थानीय प्रबंधक रमेश उपाध्याय ने बताया कि गुरुवार को अवकाश का दिन होने से मूर्तियां नहीं लाई जा सकी हैं। उम्मीद है कि 16 जनवरी को शाम तक मूर्तियां गुरुधाम मंदिर से मणिकर्णिका स्थित ताड़केश्वर मंदिर पहुंचा दी जाएं।

    उपाध्याय ने बताया कि हम लोग अपने स्तर से भी मूर्तियों के अवशेष खोजने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन सफलता नहीं मिल रही है। वहां से उठाया गया मलबा कहां फेंका गया है, इसकी जानकारी भी नहीं दी जा रही है। यदि यही बता दिए जाए कि मलबा कहां फेंका गया है तो मूर्तियों के अवशेष खोजने की राह आसान हो सकती है।
    सिविल में मुकदमा दर्ज फिर भी सूचना नहीं दी

    ट्रस्ट के स्थानीय प्रबंधक रमेश उपाध्याय ने बताया कि मणिकर्णिका घाट से सटा हिस्सा जो जनाना घाट के नाम से जाना जाता है, यहां लगी मूर्तियों को संरक्षित करने को लेकर ट्रस्ट की ओर से सिविल कोर्ट में मुकदमा दर्ज किया गया है। उसमें नगर निगम को पार्टी बनाया गया है। मुकदमे से संबंधित नोटिस तक दिया जा चुका है। वह मुकदमा ही इस बात के लिए किया गया है कि जनाना घाट की मूर्तियों को न तोड़ा जाए। घाट पर बने धार्मिक प्रतीक सुरक्षित रहें। बावजूद इसके ट्रस्ट को बिना सूचित किए तोड़फोड़ की गई। हमारी अब भी इतनी ही मांग है कि मूर्तियां हमें लौटाई जाएं। घाट पर कोई भी निर्माण ट्रस्ट की सहमति के बिना न कराया जाए। मणिकर्णिका घाट ट्रस्ट के अधीन आने वाली धर्मार्थ संपत्ति है।
    प्रधानमंत्री-मुख्यमंत्री से अनुरोध

    इससे पहले मणिकर्णिका घाट पर रानी अहिल्याबाई की मूर्तियां तोड़े जाने की जांच तथा उन्हें खासगी देवी अहिल्याबाई होल्कर ट्रस्ट ने अपनी सुपुर्दगी में देने का अनुरोध प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से किया है। ट्रस्ट के अध्यक्ष यशवंत होल्कर ने मंडलायुक्त की मौजूदगी में नगर आयुक्त को दोनों पत्र गुरुधाम मंदिर में सौंपे।

    यशवंत होल्कर महारानी की तोड़ी गई मूर्तियों के समक्ष क्षमायाचना और शुद्धि पूजन के लिए गुरुधाम मंदिर पहुंचे थे। दो खंडित और दो साबुत मूर्तियां यहीं रखी हैं। उन्होंने कहा कि काशी में रानी अहिल्याबाई की मूर्ति का अपमान अक्षम्य है। काशी में उनकी स्मृतियों के साथ ऐसे आचरण की कल्पना भी इंदौर राजपरिवार को नहीं थी। ट्रस्ट और इंदौर राजपरिवार इसकी कटु शब्दों में भर्त्सना करता है। मणिकर्णिका घाट की मढ़ी के चार किनारों पर बनीं रानी मां की चार मूर्तियां तोड़ी गईं। इनमें से दो खंडित नहीं हैं लेकिन अन्य दो का निचला हिस्सा ही मिला है। उनका शेष हिस्सा सात दिन में हमें उपलब्ध कराया जाए।

    उन्होंने कहा कि हम पुरातात्विक पद्धति से उसका पुनर्निर्माण कराने में सक्षम हैं। जब तक मणिकर्णिका घाट का नवनिर्माण पूरा नहीं हो जाता तब तक मूर्तियों को छोटे विश्वनाथ मंदिर (अहिल्याबाई घाट) के गर्भगृह में रखेंगे और पूजा के लिए पुजारी नियुक्त करेंगे। देशभर की तमाम संपत्तियों की भांति ही मणिकर्णिका घाट के संरक्षण-संवर्द्धन का दायित्व ट्रस्ट का ही है और यह अधिकार सुप्रीम कोर्ट से मिला है।
    लगा मर्डर मिस्ट्री सुलझा रहे अधिकारी

    मणिकर्णिका घाट पर तोड़ी गईं रानी अहिल्याबाई होल्कर की मूर्तियों का गुरुधाम मंदिर में दोपहर नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ऐसे अवलोकन कर रहे थे मानो वह कोई मर्डर मिस्ट्री सुलझाने में लगे हों। खंडित और साबूत मूर्तियों को नीचे से ऊपर तक निहारते हुए फोन पर किसी को यथास्थिति से अवगत कराते जा रहे थे।

    यह काम करते हुए उन्हें अहसास हुआ कि मातहतों और सुरक्षाकर्मियों के अतिरिक्त कुछ अन्य लोग भी परिसर में हैं तो उन्होंने सभी को अनुरोध पूर्वक परिसर से बाहर कर दिया। गेट पर तैनात सिपाही को आदेश दिया कि कोई भी आए गेट नहीं खुलना चाहिए। इसके बाद फिर मूर्तियों की गहन जांच पड़ताल में जुट गए। कुछ सफाई कर्मचारियों से वह साबूत और खंडित मूर्तियां कपड़े में लपेटकर अंदर रखने की तैयारी कर रहे थे।

    इसी बीच होल्कर ट्रस्ट के अध्यक्ष यशवंत होल्कर पहुंच गए। उनके लिए भी द्वार नहीं खोला गया। करीब दस मिनट बाद मंडलायुक्त एस.राजलिंगम को आता देख सिपाही ने दरवाजा खोला। तब ट्रस्ट के अध्यक्ष और कुछ कर्मचारी परिसर में दाखिल हुए। पूजन सामग्री लेकर पहुंचे कर्मचारियों, पूजा कराने पहुंचे ट्रस्ट के पुजारियों को भी बाहर ही रोक दिया गया।

  • अंतिम संस्कार की रस्में शुरू, इंधर जिंदा हो गईं 103 साल की गंगाबाई

    अंतिम संस्कार की रस्में शुरू, इंधर जिंदा हो गईं 103 साल की गंगाबाई


    नागपुर। आपने मौत को चकमा देकर वापस लौटने वाली कहावत कई बार सुनी होगी। हम अक्सर किसी मुश्किल परिस्थिति से लौटने पर इस मुहावरे का प्रयोग कर लेते हैं। लेकिन क्या हो अगर यह मुहावरा सचमुच आंखों के सामने घटित हो जाए? हाल ही में महाराष्ट्र से एक ऐसा ही हैरतअंगेज मामला सामने आया है जहां 103 साल की गंगाबाई को मृत समझ लिया गया। अंतिम संस्कार की पूरी तैयारी भी कर ली गई। लेकिन मातम मनाने आए लोग तब हैरान रह गए जब गंगाबाई का शरीर अचानक हिलने लगा और वे वापस उठ बैठीं। इतना ही नहीं, हैरत की बात यह है कि उसी दिन गंगाबाई का जन्मदिन भी था।

    घटना नागपुर जिले के रामटेक की है। 103 साल की गंगाबाई सखारे को परिवार के लोगों में मृत मान लिया। सोमवार शाम को गंगाबाई के शरीर की हरकतें बंद होने के बाद परिवार को लगा कि गंगाबाई की मौत हो गई है। परिवार ने अंतिम संस्कार की रस्में शुरू कर दीं और सभी रिश्तेदारों को संदेश भी भेज दिए। मौत की खबर फैलते ही दूर-दराज के इलाकों से रिश्तेदार अंतिम संस्कार के लिए पहुंचने लगे।
    शव वाहन भी हो गया था बुक

    इसके बाद मंगलवार सुबह तक परम्परा के मुताबिक गंगाबाई को नई साड़ी पहना दी गई, उनके हाथ-पैर बांध दिए गए थे, और उनकी नाक में रुई के फाहे भी लगा दिए गए। घर के बाहर शामियाना लगाया गया, कुर्सियां लगाई गईं, अंतिम संस्कार की सामग्री जुटाई गई और शव वाहन भी बुक किया गया।
    हिलने लगे पैर

    तभी कुछ ऐसा हुआ जिससे अब हैरान रह गए। गंगाबाई के पोते राकेश सखारे को अचानक उनके पैरों में हरकत सी दिखाई दी। इसके बाद उन्होंने जैसे ही गंगाबाई की नाक से रुई हटाई, गंगाबाई ने गहरी सांस ली। राकेश सखारे ने पीटीआई से कहा, ‘‘मैंने उनके पैर हिलते देखे और मदद के लिए चिल्लाया। जब हमने उनकी नाक से रुई हटाई, तो उन्होंने जोर-जोर से सांस लेना शुरू कर दिया।’’

    इसके बाद घर में पसरा मातम जश्न के माहौल में बदल गया। गंगाबाई के जिंदा हो जाने को लोग चमत्कार से कम नहीं बता रहें। वहीं इसके बाद परिवारवालों ने गंगाबाई का 103वां जन्मदिन धूमधाम से मनाया।

  • दिल्ली मेट्रो की नई पहल, स्टेशनों से मिलेगी बाइक टैक्सी और कैब सेवा, 'सारथी' ऐप से होगी बुकिंग

    दिल्ली मेट्रो की नई पहल, स्टेशनों से मिलेगी बाइक टैक्सी और कैब सेवा, 'सारथी' ऐप से होगी बुकिंग

    नई दिल्ली दिल्ली मेट्रो अब सिर्फ सफर का साधन नहीं, बल्कि घर से गंतव्य तक की पूरी यात्रा का समाधान बनने जा रही है. यात्रियों की सुविधा और प्रदूषण कम करने के लक्ष्य के साथ दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने इंटीग्रेटेड लास्ट माइल कनेक्टिविटी सेवा शुरू करने का बड़ा फैसला लिया है. इसके तहत मेट्रो स्टेशनों से आगे की यात्रा अब और आसान, किफायती और डिजिटल होगी.

    दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन एनसीआर में पब्लिक ट्रांसपोर्ट की रीढ़ बन चुकी है. रोजाना लाखों यात्री तेज, सुरक्षित और भरोसेमंद सेवा का लाभ उठा रहे हैं. लेकिन मेट्रो स्टेशन से अंतिम गंतव्य तक पहुंचना अब तक एक बड़ी चुनौती रहा है. इसी कमी को दूर करने के लिए DMRC ने संगठित लास्ट माइल सेवाओं को मेट्रो नेटवर्क से जोड़ने की पहल की है.

    सहकार टैक्सी के साथ DMRC की साझेदारी
    DMRC ने सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं. सहकार टैक्सी एक मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव संस्था है जो भारत टैक्सी नामक मोबिलिटी प्लेटफॉर्म संचालित करती है. यह प्लेटफॉर्म भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय की पहल है और पारदर्शी एवं न्यायसंगत सेवाओं को बढ़ावा देता है.

    बाइक टैक्सी, ऑटो और कैब की मिलेगी सुविधा
    इस साझेदारी के तहत मेट्रो यात्रियों को बाइक टैक्सी, ऑटो रिक्शा और कैब सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी. यात्री दूरी, समय और किराये के अनुसार विकल्प चुन सकेंगे. इससे अनऑर्गेनाइज्ड और असुरक्षित साधनों पर निर्भरता कम होगी.

    10 मेट्रो स्टेशनों से होगी शुरुआत
    DMRC के प्रधान कार्यकारी निदेशक अनुज दयाल ने बताया कि, पहले चरण में यह लास्ट माइल कनेक्टिविटी सेवा 10 चिन्हित मेट्रो स्टेशनों से शुरू की जाएगी. पायलट प्रोजेक्ट के तहत मिलेनियम सिटी सेंटर और बॉटेनिकल गार्डन मेट्रो स्टेशन पर 31 जनवरी 2026 तक विशेष बाइक टैक्सी सेवाएं शुरू होंगी. इस दौरान यात्रियों की प्रतिक्रिया और संचालन की व्यवहारिकता का आकलन किया जाएगा.

    भारत टैक्सी ऐप और सारथी ऐप होंगे इंटीग्रेट
    इस पहल की सबसे बड़ी खासियत डिजिटल इंटीग्रेशन है. भारत टैक्सी मोबाइल ऐप को DMRC के सारथी ऐप से जोड़ा जाएगा. इसके बाद यात्री एक ही प्लेटफॉर्म से मेट्रो और लास्ट माइल दोनों सेवाओं की प्लानिंग और बुकिंग कर सकेंगे. ऐप इंटीग्रेशन से यात्री उपलब्ध वाहनों की जानकारी, अनुमानित किराया और रियल टाइम ट्रैकिंग देख सकेंगे. इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और इंतजार का समय घटेगा. यात्रा का अनुभव ज्यादा सहज और भरोसेमंद होगा.

    किराया रहेगा किफायती और नियंत्रित
    इस योजना के तहत किराये बाजार दरों के मुकाबले प्रतिस्पर्धी रहेंगे. पीक ऑवर में मांग के अनुसार किराया बढ़ सकता है, लेकिन इसकी एक सीमा तय होगी. इसका उद्देश्य यात्रियों की जेब पर अतिरिक्त बोझ न डालना है.
    यात्रियों को जागरूक करने के लिए मेट्रो स्टेशनों पर साइनएज लगाए जाएंगे. इनमें बुकिंग प्रक्रिया, सेवा उपलब्धता और पिकअप पॉइंट की जानकारी होगी. इससे यात्रियों को फैसले लेने में आसानी होगी.

    यह पहल DMRC की पर्यावरण के प्रति प्रतिबद्धता को भी मजबूत करती है. बेहतर लास्ट माइल कनेक्टिविटी से निजी वाहनों का इस्तेमाल घटेगा. इससे ट्रैफिक और वायु प्रदूषण दोनों में कमी आने की उम्मीद है.

    पैसेंजर सेंट्रिक और सस्टेनेबल ट्रांसपोर्ट की ओर कदम
    DMRC का यह प्रयास पब्लिक ट्रांसपोर्ट को और आकर्षक बनाएगा. निजी वाहनों से मेट्रो की ओर यात्रियों का रुझान बढ़ेगा. यह योजना सस्टेनेबिलिटी, डिजिटल इंडिया और सहकारी विकास जैसे राष्ट्रीय लक्ष्यों को भी मजबूती देगी.

  • अकाल तख्त में पेशी के बाद बोले सीएम भगवंत मान, कहा- मेरा मकसद टकराव नहीं है

    अकाल तख्त में पेशी के बाद बोले सीएम भगवंत मान, कहा- मेरा मकसद टकराव नहीं है

    नई दिल्ली अकाल तख्त के सामने पेश होने के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि उन पर लगाए गए सभी आरोपों को लेकर उन्होंने अपना स्पष्टीकरण दे दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उनका अकाल तख्त से किसी भी तरह का टकराव नहीं है और वे सिख संस्थाओं का पूरा सम्मान करते हैं। सीएम मान ने बताया कि अब जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज की अगुवाई में पांच सिंह साहिबानों की बैठक होगी, जिसमें उनके जवाब पर विचार कर आगे का फैसला लिया जाएगा।

    फॉरेंसिक जांच के लिए तैयार: सीएम मान

    पेशी के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कथित आपत्तिजनक वीडियो को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि जिन वीडियो को लेकर विवाद खड़ा किया जा रहा है, वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से बनाए गए हैं। सीएम मान ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में अकाल तख्त के जत्थेदार को पूरी जानकारी दे दी है और कहा है कि वे हर तरह की फॉरेंसिक जांच के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

    इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उन्हें शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के कामकाज को लेकर कई शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिन्हें उन्होंने जत्थेदार साहिब के समक्ष रखा है।

    “जो भी फैसला होगा, मंजूर होगा”

    मुख्यमंत्री भगवंत मान ने उन दावों को भी खारिज किया, जिनमें कहा जा रहा था कि वे अकाल तख्त के साथ टकराव की स्थिति में हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की बातें पूरी तरह भ्रामक हैं और उनकी अकाल तख्त में पूर्ण आस्था है। सीएम मान ने दो टूक कहा कि तख्त की ओर से लिया गया हर फैसला उन्हें स्वीकार होगा।

    उन्होंने यह भी जानकारी दी कि पंजाब सरकार धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कानून तैयार करने की दिशा में काम कर रही है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

  • मणिकर्णिका घाट विवाद: मल्लिकार्जुन खरगे ने PM मोदी पर लगाया विरासत नष्ट करने का आरोप, तस्वीरें कीं साझा

    मणिकर्णिका घाट विवाद: मल्लिकार्जुन खरगे ने PM मोदी पर लगाया विरासत नष्ट करने का आरोप, तस्वीरें कीं साझा

    नई दिल्ली वाराणसी के ऐतिहासिक मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास को लेकर अब राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सौंदर्यीकरण और व्यवसायीकरण के नाम पर सदियों पुरानी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को बुलडोजर से ध्वस्त किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि इस तरह के कदम काशी की आत्मा और उसकी परंपराओं को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

    PM मोदी पर खरगे का तीखा हमला

    गुरुवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट साझा कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला बोला। उन्होंने लिखा कि पहले काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण के दौरान छोटे-बड़े मंदिरों और देवालयों को तोड़ा गया और अब प्राचीन घाटों की बारी आ गई है। खरगे का आरोप है कि सरकार इतिहास की धरोहरों को मिटाकर केवल अपनी नेम-प्लेट चिपकाने में जुटी है।

    तस्वीरें और वीडियो किए साझा

    खरगे ने अपने पोस्ट में कुछ तस्वीरें और वीडियो भी साझा किए हैं, जिनमें बुलडोजर, टूटती मूर्तियां और निर्माण कार्य दिखाई दे रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि सदियों पुरानी मूर्तियों और मंदिरों को सुरक्षित कर संग्रहालयों में क्यों नहीं रखा गया। कांग्रेस अध्यक्ष ने लिखा, “लाखों लोग मोक्ष की कामना लेकर काशी आते हैं। क्या सरकार का इरादा भक्तों के साथ धोखा करने का है?”

    मणिकर्णिका घाट का धार्मिक महत्व

    मणिकर्णिका घाट हिंदू धर्म के सबसे पवित्र अंतिम संस्कार स्थलों में से एक माना जाता है। मान्यता है कि यहां अंतिम संस्कार करने से आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह घाट वाराणसी के सबसे पुराने घाटों में शामिल है और इसका ऐतिहासिक संबंध माता सती के कर्णफूल से जुड़ा हुआ बताया जाता है।

    पुनर्विकास परियोजना के उद्देश्य

    मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास की नींव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 जुलाई 2023 को रखी थी। यह परियोजना काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का हिस्सा है। इसके तहत घाट को चौड़ा करना, यात्रियों के लिए रैंप और बैठने की व्यवस्था, VIP सुविधाएं, लकड़ी बिक्री के लिए वुड प्लाजा, बेहतर साफ-सफाई और बाढ़ सुरक्षा जैसे प्रावधान शामिल हैं। इसके अलावा स्किंदिया घाट से कनेक्टिविटी को भी मजबूत किया जाएगा।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक इस परियोजना की अनुमानित लागत 17.56 करोड़ रुपये है और इसे वर्ष 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना में इको-फ्रेंडली तकनीक का उपयोग कर लकड़ी की खपत और प्रदूषण को कम करने का दावा किया गया है।

    क्यों हो रहा है विवाद?

    इस परियोजना को लेकर स्थानीय लोगों और विपक्ष की ओर से आरोप लगाए जा रहे हैं कि निर्माण कार्य के दौरान कई प्राचीन मूर्तियां और छोटे-बड़े मंदिर क्षतिग्रस्त हुए हैं। हालांकि जिला प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज किया है। प्रशासन का कहना है कि किसी भी मंदिर या सांस्कृतिक संरचना को नुकसान नहीं पहुंचाया जा रहा है और सभी धार्मिक प्रतीकों को सुरक्षित रखते हुए बाद में पुनः स्थापित किया जाएगा।

    वाराणसी जिला प्रशासन ने सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।

  • अयोध्या के संतों ने हनी सिंह के विवादित बयान पर जताई कड़ी आपत्ति, कहा-समाज के लिए कलंक

    अयोध्या के संतों ने हनी सिंह के विवादित बयान पर जताई कड़ी आपत्ति, कहा-समाज के लिए कलंक

    नई दिल्ली मशहूर सिंगर यो यो हनी सिंह एक बार फिर विवादों में फंस गए हैं। हाल ही में दिल्ली में आयोजित एक शो के दौरान दिए गए उनके कुछ बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए, जिनमें उन्होंने राजधानी की ठंड को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर हनी सिंह को जमकर ट्रोल किया जा रहा है। वहीं, इस मामले में अब अयोध्या के साधु-संतों की भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है।

    अयोध्या के संतों ने हनी सिंह के बयान को अशोभनीय और समाज की मर्यादा के खिलाफ बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई है। संतों का कहना है कि इस तरह की भाषा न केवल दिल्ली के लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाती है, बल्कि समाज में गलत संदेश भी देती है।

    साधु-संतों ने की सार्वजनिक माफी की मांग

    मीडिया से बातचीत में अयोध्या के संत सीताराम दास महंत ने कहा कि दिल्ली की ठंड को लेकर दिया गया हनी सिंह का बयान पूरी तरह निंदनीय है। उन्होंने आरोप लगाया कि सिंगर ने मंच से अभद्र भाषा का इस्तेमाल कर दिल्लीवासियों की भावनाओं का अपमान किया है। महंत ने कहा कि एक कलाकार का काम समाज को सकारात्मक संदेश देना होता है, लेकिन हनी सिंह ने मर्यादा की सभी सीमाएं लांघ दी हैं।

    उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि हनी सिंह को तुरंत सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। संतों का मानना है कि सस्ती लोकप्रियता और पैसे के लिए इस तरह की अश्लीलता फैलाना समाज के लिए घातक है।

    “हनी सिंह समाज के लिए कलंक”

    साधु-संतों ने अपने बयान में कहा, “हनी सिंह समाज के लिए कलंक हैं। वे मशहूर जरूर हैं, लेकिन ज्ञान और संस्कार के मामले में नहीं। मंच से दिए गए उनके शब्द माताओं और बहनों का अपमान हैं, जो किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं हैं।” संतों का कहना है कि ऐसे बयानों पर सख्त प्रतिक्रिया और कार्रवाई जरूरी है, ताकि भविष्य में कोई भी कलाकार इस तरह की भाषा का इस्तेमाल न करे।

    अश्लीलता समाज के लिए खतरा: महामंडलेश्वर

    महामंडलेश्वर विष्णु दास ने भी हनी सिंह के बयानों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि हनी सिंह एक गायक हैं, लेकिन जिस तरह की भाषा का प्रयोग वे कर रहे हैं, वह समाज में गंदगी फैलाने का काम कर रही है। महामंडलेश्वर ने कहा कि मौसम कुदरत की देन है और उसे लेकर इस तरह की अभद्र टिप्पणियां करना बिल्कुल अनुचित है।

    उन्होंने कहा कि जब कोई कलाकार मंच पर आता है, तो उसकी जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। लेकिन हनी सिंह ने अपनी जिम्मेदारी को नजरअंदाज करते हुए अश्लीलता फैलाई है। महामंडलेश्वर ने दो टूक कहा कि हनी सिंह को दिल्ली की जनता से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई भी होनी चाहिए।

  • आई-पैक मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त ममता सरकार को नोटिस;सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश

    आई-पैक मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त ममता सरकार को नोटिस;सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश


    नई दिल्ली: पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म आई-पैक I-PAC से जुड़े छापेमारी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को कड़ा संदेश दिया है। शीर्ष अदालत ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य के पुलिस महानिदेशक डीजीपी राजीव कुमार को नोटिस जारी करते हुए उनसे दो हफ्तों के भीतर जवाब मांगा है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि छापेमारी से संबंधित सभी सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल स्टोरेज को अगली सुनवाई तक सुरक्षित रखा जाए।

    यह मामला प्रवर्तन निदेशालय ईडी द्वारा आई-पैक के कार्यालय और सह-संस्थापक प्रतीक जैन के आवास पर की गई छापेमारी से जुड़ा है। ईडी का आरोप है कि इस दौरान राज्य प्रशासन और पुलिस ने केंद्रीय एजेंसी के काम में बाधा डाली। ईडी की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने अदालत में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इस प्रकरण में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं आरोपी हैं। उन्होंने दावा किया कि डीजीपी राजीव कुमार की मौजूदगी में मुख्यमंत्री ने व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप किया और पुलिस की भूमिका सहयोगी की रही।मामले की सुनवाई जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने की। दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर फिलहाल रोक लगा दी। कोर्ट ने कहा कि ईडी की याचिकाओं में गंभीर संवैधानिक और कानूनी सवाल उठाए गए हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    पीठ ने टिप्पणी की कि यदि ऐसे मामलों को अनसुलझा छोड़ दिया गया तो इससे एक या एक से अधिक राज्यों में अराजकता की स्थिति पैदा हो सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए अदालत ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी डीजीपी राजीव कुमार कोलकाता पुलिस कमिश्नर और अन्य संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया। सभी प्रतिवादियों को दो सप्ताह के भीतर अपना जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 3 फरवरी को तय की गई है।अपने अंतरिम आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि तलाशी वाले परिसरों के अंदर और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग डीवीआर और अन्य स्टोरेज डिवाइस को किसी भी हाल में नष्ट या छेड़छाड़ नहीं की जानी चाहिए। यह निर्देश अगली सुनवाई तक प्रभावी रहेगा।

    वहीं पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने ईडी की याचिकाओं की वैधता पर सवाल उठाए। उन्होंने तर्क दिया कि इस तरह की कार्रवाइयां अक्सर चुनावों से पहले देखने को मिलती हैं और जब मामला पहले से हाईकोर्ट में लंबित है तब सुप्रीम कोर्ट को इस पर विचार नहीं करना चाहिए।इसी बीच ईडी ने एक नई अर्जी दाखिल कर डीजीपी राजीव कुमार समेत पश्चिम बंगाल पुलिस के शीर्ष अधिकारियों को निलंबित किए जाने की मांग भी की है। इस पर भी सुप्रीम कोर्ट ने ममता सरकार से जवाब तलब किया है। यह मामला अब राजनीतिक और संवैधानिक दोनों दृष्टियों से बेहद अहम बन गया है।

  • पीएम मोदी के नेतृत्व में तेजी से बढ़ा भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर से कारोबार हुआ आसान

    पीएम मोदी के नेतृत्व में तेजी से बढ़ा भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर से कारोबार हुआ आसान


    नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम पिछले आठ वर्षों में अभूतपूर्व गति से बढ़ा है। केवल नीति समर्थन ही नहींबल्कि मजबूत डिजिटल और पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण स्टार्टअप्स को अब व्यापार करना आसान हो गया है। यह बात स्टार्टअप फाउंडर्स ने गुरुवार को साझा की।हेल्थकेयर स्टार्टअप 1एमजी के सीईओ प्रशांत टंडन ने कहा कि आज भारत में एक उद्यमी को वही सुविधाएँ मिलती हैंजिनकी उसे ज़रूरत होती है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के आने के बाद स्टार्टअप्स को स्टॉपलाइट में रखा गयाजिससे भारत को ग्लोबल स्टार्टअप मैप पर मान्यता मिली। टंडन के अनुसार सरकार कॉरपोरेट्स और आम जनता भी अब स्टार्टअप्स की अहमियत समझ रही है।

    उन्होंने आगे बताया कि इस बदलाव के पीछे जेएएम ट्रिनिटी (जनधन आधार मोबाइल) और यूपीआई जैसे मजबूत पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इससे उद्यमियों को ऐसी प्रणालियाँ विकसित करने का अवसर मिला जिनसे देश की जरूरतों को पूरा किया जा सकता है।अर्बन कंपनी के सह-संस्थापक और सीईओ अभिराज सिंह बहल ने कहा कि जब उन्होंने अर्बन कंपनी शुरू की थी तब भारत में केवल एक-दो यूनिकॉर्न मौजूद थे। लेकिन पिछले आठ वर्षों में स्टार्टअप इकोसिस्टम तेजी से विकसित हुआ है। आज देश में 110 यूनिकॉर्न और हजारों स्टार्टअप्स विभिन्न सेक्टर्स में अपनी पहचान बना चुके हैं। उनके मुताबिक इस विकास और विस्तार का श्रेय प्रधानमंत्री मोदी को जाता है।

    प्रिस्टिन केयर के सह-संस्थापक हरसिमरबीर सिंह ने प्रधानमंत्री मोदी के 2015 के न्यूयॉर्क भाषण को उनके जीवन में परिवर्तनकारी बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री में स्टार्टअप्स के लिए CEO जैसी विशेषताएं हैं-समस्याओं को तुरंत पहचानना और उनका समाधान करना। उन्होंने सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री के हालिया उदाहरण का जिक्र किया जहां सरकार ने समय रहते निवेश और सुधार के लिए पहल की।

    रेज कॉफी के संस्थापक भरत सेठी ने 2016 में स्टार्टअप इंडिया मिशन के उद्घाटन का अनुभव साझा किया। उनके मुताबिकउस समय भारत परिवर्तन के दौर से गुजर रहा था और इस मिशन ने स्टार्टअप्स के लिए एक नई दिशा तय की। उन्होंने बताया कि स्टार्टअप इंडिया मिशन ने न केवल व्यवसायियों को प्रोत्साहित किया बल्कि पूरे देश में उद्यमिता के लिए जागरूकता भी बढ़ाई।स्टार्टअप फाउंडर्स का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में नीति  डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रेरणा का अनोखा मिश्रण भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में सक्षम रहा है।

  • BMC मतदान 2026: सुरक्षा व्यवस्था कड़ी, मतदाताओं के लिए पिंक बूथ और वरिष्ठ नागरिक टीमें..

    BMC मतदान 2026: सुरक्षा व्यवस्था कड़ी, मतदाताओं के लिए पिंक बूथ और वरिष्ठ नागरिक टीमें..


    नई दिल्ली। महाराष्ट्र में बीएमसी चुनाव 2026 के लिए मतदान सुबह से जारी है और यह शाम 5:30 बजे तक चलेगा। मुंबई समेत राज्य की 29 महानगरपालिकाओं में मतदान होना है, जिसमें बृहन्मुंबई नगर निगमBMC विशेष रूप से राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है। मुंबई के 227 वार्डों में कुल 1,700 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं जबकि शहर के 1.03 करोड़ से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकते हैं।मतदान के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई है। मुंबई पुलिस ने जगह-जगह बैरिकेडिंग लगाई है, वाहनों की जांच की जा रही है और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए विशेष टीमें तैनात की गई हैं। मतदाताओं की सुविधा के लिए महिलाओं द्वारा संचालित पिंक पोलिंग बूथ बनाए गए हैं और वरिष्ठ नागरिकों के लिए मदद के विशेष प्रबंध किए गए हैं।

    मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उनके परिवार ने मतदान कर अपनी स्याही लगी उंगलियां दिखाई। फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस ने जनता से मतदान करने की अपील की। इसी तरह, वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद उज्ज्वल निकम ने मतदान के बाद अपने अनुभव साझा किए और मुंबई में पहली बार वोट डालने का महत्व बताया।बॉलीवुड सेलेब्स और राजनीतिक दिग्गज भी मतदान में सक्रिय रहे। सलमान खान के पिता और प्रसिद्ध लेखक सलीम खान ने माउंट मेरी चर्च में पोलिंग बूथ पर वोट डाला। शिवसेनायूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे, उनकी पत्नी रश्मि और बेटे आदित्य ठाकरे भी मतदान केंद्र पहुंचे। मुंबई में एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे अपने परिवार के साथ वोट डालने पहुंचे और उन्होंने मार्कर पेन से मतदान के तरीके पर सवाल उठाए, साथ ही मतदान प्रक्रिया में हेराफेरी की चेतावनी दी।

    मतदाता अनुभव और शिकायतें

    कुछ मतदाताओं ने मतदान के दौरान समस्याओं की शिकायत की। शिवसेनायूबीटी सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने बताया कि उनका नाम मतदाता सूची में नहीं था और उन्हें दूसरे पोलिंग सेंटर पर भेजा गया। इसके अलावा, कल्याण से एमएनएस उम्मीदवार उर्मिला तांबे ने आरोप लगाया कि उंगलियों पर लगी स्याही मिटाने की शिकायतें सत्ताधारी पार्टी की मदद के लिए हो रही हैं।हालांकि निर्वाचन आयोग के पीआरओ ने बताया कि मार्कर पेन का इस्तेमाल नई बात नहीं है। आयोग ने कहा कि 2012 से यह तरीका अपनाया जा रहा है और स्थानीय निकाय चुनावों में मतदान के बाद उंगलियों पर निशान लगाने के लिए पारंपरिक रूप से मार्कर पेन का उपयोग किया जाता है।मतगणना 16 जनवरी 2026 को होगी। सुरक्षा, पारदर्शिता और मतदाता सुविधा को लेकर किए गए कदमों के बावजूद चुनाव में बढ़ते राजनीतिक दाव-पेंच और मतदान प्रक्रिया पर उठ रहे सवाल चर्चा का केंद्र बने हुए हैं।