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  • कस्तूरबा गांधी ने जीवनभर महात्मा गांधी के संघर्षों में निभाई महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक भूमिका..

    कस्तूरबा गांधी ने जीवनभर महात्मा गांधी के संघर्षों में निभाई महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक भूमिका..

    नई दिल्ली:महात्मा गांधी के जीवन और उनके विचारों की चर्चा जब भी होती है, तो अक्सर एक ऐसा नाम पृष्ठभूमि में रह जाता है, जिसने न केवल उनके व्यक्तिगत जीवन को गहराई दी बल्कि उनके वैचारिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह कहानी कस्तूरबा गांधी की है, जिन्हें पूरे देश में प्यार से बा कहा जाता था। वह केवल एक पत्नी नहीं थीं, बल्कि एक ऐसी साथी थीं जिन्होंने गांधीजी के जीवन को संतुलन, साहस और दिशा देने का कार्य किया। उनके और बापू के बीच का संबंध केवल वैवाहिक बंधन नहीं था, बल्कि विचारों, संघर्षों और गहरे भावनात्मक जुड़ाव की एक ऐसी यात्रा थी जिसने इतिहास को प्रभावित किया।

    बचपन की सगाई से शुरू हुई जीवन की लंबी यात्रा

    कस्तूरबा गांधी का जन्म 11 अप्रैल 1869 को पोरबंदर में एक संपन्न व्यापारी परिवार में हुआ था। उनके पिता का व्यापारिक प्रभाव दूर दूर तक फैला हुआ था और परिवार समाज में सम्मानित स्थान रखता था। कस्तूरबा और मोहनदास करमचंद गांधी की सगाई बचपन में ही हो गई थी और बाद में मात्र किशोरावस्था में उनका विवाह संपन्न हुआ। यह विवाह दो परिवारों की मित्रता को और मजबूत करने के साथ साथ एक ऐसे रिश्ते की शुरुआत बना, जिसने आने वाले वर्षों में इतिहास की दिशा बदल दी।

    मतभेदों से भरा लेकिन गहरे प्रेम से जुड़ा रिश्ता
    कस्तूरबा गांधी केवल पारंपरिक भूमिका निभाने वाली पत्नी नहीं थीं। वह अपने विचारों में स्पष्ट और कई बार गांधीजी से असहमत होने का साहस रखने वाली महिला थीं। शुरुआती वर्षों में दोनों के बीच विचारों का टकराव भी हुआ, लेकिन यही टकराव धीरे धीरे एक ऐसे संबंध में बदल गया जहां सम्मान और समझदारी ने गहरी जगह बना ली। गांधीजी के नियंत्रणवादी स्वभाव के बावजूद कस्तूरबा ने अपनी स्वतंत्र सोच को बनाए रखा और समय के साथ उन्होंने सार्वजनिक जीवन में भी सक्रिय भूमिका निभानी शुरू कर दी।

    संघर्षों की साथी और सत्याग्रह की पहली सहयात्री
    दक्षिण अफ्रीका और भारत में गांधीजी के आंदोलनों के दौरान कस्तूरबा ने हर कदम पर उनका साथ दिया। कठिन परिस्थितियों में जेल की यातनाएं सहना हो या सामाजिक संघर्षों का सामना करना हो, उन्होंने हर मोर्चे पर दृढ़ता दिखाई। इतिहासकारों के अनुसार, वह शुरुआती सत्याग्रहियों में से एक थीं जिन्होंने अहिंसक प्रतिरोध के विचार को व्यवहार में उतारने का साहस दिखाया। उनका जीवन केवल समर्थन तक सीमित नहीं था, बल्कि वह स्वयं संघर्ष का हिस्सा बन गई थीं।

    अहिंसा का पहला पाठ और बा का प्रभाव
    गांधीजी के जीवन पर कस्तूरबा का प्रभाव केवल भावनात्मक नहीं बल्कि वैचारिक भी था। कई मौकों पर उन्होंने अपने धैर्य, सहनशीलता और दृढ़ता से गांधीजी को जीवन के महत्वपूर्ण पाठ सिखाए। यही कारण था कि गांधीजी स्वयं उन्हें अपने अहिंसा के विचारों की पहली प्रेरणा मानते थे। कस्तूरबा का शांत लेकिन मजबूत व्यक्तित्व गांधीजी के सार्वजनिक जीवन को संतुलन प्रदान करता रहा।

    अंतिम क्षणों तक साथ निभाने की कहानी
    भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जब राजनीतिक परिस्थितियां चरम पर थीं, तब कस्तूरबा गांधी को भी गिरफ्तार कर लिया गया। स्वास्थ्य लगातार बिगड़ता गया और उन्हें आगा खान पैलेस में रखा गया, जहां गांधीजी भी नजरबंद थे। जीवन के अंतिम क्षणों में भी उनका साथ बना रहा और उन्होंने वहीं गांधीजी की उपस्थिति में अंतिम सांस ली। यह क्षण केवल एक व्यक्ति की मृत्यु नहीं था, बल्कि एक ऐसे जीवनसाथी के साथ की कहानी का अंत था जिसने दशकों तक संघर्ष, प्रेम और विचारों की साझेदारी निभाई थी।

  • उत्तर प्रदेश का बौद्ध सर्किट आस्था से अर्थव्यवस्था तक की मजबूत उड़ान भरते हुए वैश्विक आध्यात्मिक राजधानी बनने की दिशा में तेजी से अग्रसर

    उत्तर प्रदेश का बौद्ध सर्किट आस्था से अर्थव्यवस्था तक की मजबूत उड़ान भरते हुए वैश्विक आध्यात्मिक राजधानी बनने की दिशा में तेजी से अग्रसर


    नई दिल्ली। आस्था और अर्थव्यवस्था के संगम के रूप में उत्तर प्रदेश का बौद्ध सर्किट अब तेजी से वैश्विक पहचान की ओर अग्रसर है। सारनाथ से कुशीनगर, श्रावस्ती से कपिलवस्तु तक फैले इस पवित्र धार्मिक मार्ग ने न केवल देश बल्कि दुनिया भर के बौद्ध अनुयायियों और पर्यटकों का ध्यान आकर्षित किया है। भगवान बुद्ध से जुड़े ये स्थल अब केवल आध्यात्मिक केंद्र नहीं रहे, बल्कि आर्थिक विकास और सांस्कृतिक विस्तार के मजबूत आधार के रूप में भी उभर रहे हैं। राज्य में बढ़ता धार्मिक पर्यटन स्थानीय विकास को नई दिशा दे रहा है और इसे एक बड़े परिवर्तन के रूप में देखा जा रहा है।

    अंतरराष्ट्रीय आयोजनों से बढ़ी वैश्विक पहचान
    कुशीनगर में आयोजित एक बड़े बौद्ध सम्मेलन ने इस पूरे क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है। इस आयोजन में विभिन्न देशों से आए प्रतिनिधियों और श्रद्धालुओं की भागीदारी ने यह साबित किया कि बौद्ध सर्किट अब वैश्विक धार्मिक पर्यटन का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। इस दौरान बड़े पैमाने पर निवेश और सहयोग के प्रस्ताव सामने आए, जिससे इस क्षेत्र की आर्थिक संभावनाओं को और मजबूती मिली है। इस तरह के आयोजनों ने उत्तर प्रदेश को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाने में भूमिका निभाई है।

    तेजी से बढ़ता पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था

    उत्तर प्रदेश के प्रमुख बौद्ध स्थलों पर पर्यटकों की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। लाखों की संख्या में आने वाले श्रद्धालु न केवल धार्मिक आस्था के लिए यहां पहुंचते हैं बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करते हैं। होटल, परिवहन, हस्तशिल्प और स्थानीय सेवाओं से जुड़े क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों में तेजी आई है, जिससे स्थानीय समुदायों को प्रत्यक्ष लाभ मिल रहा है।

    आधुनिक सुविधाओं से विकसित हो रहा बौद्ध सर्किट

    राज्य सरकार द्वारा बौद्ध सर्किट को विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। बेहतर सड़क संपर्क, हवाई सुविधा, डिजिटल गाइड सिस्टम और आधुनिक पर्यटन अवसंरचना पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इन प्रयासों का उद्देश्य देश और विदेश से आने वाले पर्यटकों को एक सहज और समृद्ध अनुभव प्रदान करना है। इससे न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिल रहा है बल्कि क्षेत्रीय विकास की गति भी तेज हो रही है।

    निवेश और विकास का नया केंद्र बनता क्षेत्र
    बौद्ध सर्किट में बढ़ते निवेश प्रस्ताव इस बात का संकेत हैं कि यह क्षेत्र अब केवल धार्मिक महत्व तक सीमित नहीं रहा। पर्यटन और बुनियादी ढांचे से जुड़े निवेश इस क्षेत्र को आर्थिक गतिविधियों का नया केंद्र बना रहे हैं। इससे स्थानीय विकास को गति मिल रही है और रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि हो रही है। यह क्षेत्र अब परंपरा और आधुनिक विकास के संगम के रूप में उभर रहा है।

    आध्यात्मिक राजधानी की ओर बढ़ता उत्तर प्रदेश
    दीर्घकालिक विकास योजनाओं के तहत उत्तर प्रदेश को एक वैश्विक आध्यात्मिक और पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। बौद्ध सर्किट इस लक्ष्य को साकार करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। धार्मिक विरासत, सांस्कृतिक महत्व और आर्थिक अवसरों का यह संगम राज्य को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान की ओर ले जा रहा है।

  • कश्मीर के वैज्ञानिकों की बड़ी सफलता, अब किसान 40 हजार रुपये किलो वाले दुर्लभ मशरूम की कर सकेंगे खेती

    कश्मीर के वैज्ञानिकों की बड़ी सफलता, अब किसान 40 हजार रुपये किलो वाले दुर्लभ मशरूम की कर सकेंगे खेती

    नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के वैज्ञानिकों ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है, जिसके बाद अब किसान 15 हजार से 40 हजार रुपये प्रति किलो तक बिकने वाला दुर्लभ मशरूम अपने खेतों में भी उगा सकेंगे। श्रीनगर स्थित शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (SKUAST) के वैज्ञानिकों ने पहली बार नियंत्रित वातावरण में इस मशरूम की सफल खेती कर दिखाई है।

    जंगलों पर निर्भरता से मिली मुक्ति

    यह मशरूम मोरल्स या मोरचेला (स्थानीय नाम कंगाच) है, जो अब तक सिर्फ ऊंचे पहाड़ी जंगलों में बारिश के मौसम में प्राकृतिक रूप से उगता था। इसकी उपलब्धता बेहद सीमित और मुश्किल होने के कारण बाजार में इसकी कीमत बेहद अधिक रहती है।

    वैज्ञानिकों की बड़ी उपलब्धि

    SKUAST के कुलपति प्रोफेसर नजीर अहमद गनई ने इस उपलब्धि को “गेम चेंजर” बताया है। उनके अनुसार, यह तकनीक जंगलों पर निर्भरता खत्म कर नियंत्रित उत्पादन का रास्ता खोलती है, जिससे किसानों, युवाओं और स्टार्टअप्स के लिए नए अवसर पैदा होंगे।

    पांच साल की मेहनत से मिला परिणाम

    इस शोध में प्रोफेसर तारिक अहमद सोफी, उनके छात्र कमरान मुनीर और प्रोफेसर विकास गुप्ता शामिल रहे। टीम ने पिछले पांच वर्षों में 1000 से अधिक प्राकृतिक स्थलों से मोरचेला के नमूने एकत्र किए और उनके वातावरण, मिट्टी, नमी और पौधों का गहन अध्ययन किया।

    शोध के दौरान 10 किस्मों को चुना गया, जिनमें से 3 किस्मों में सफलतापूर्वक खेती संभव हो सकी।

    पॉलीहाउस से लेकर खुले खेत तक सफलता

    शुरुआत में इस मशरूम की खेती पॉलीहाउस में की गई, जबकि बाद में इसे खुले वातावरण में भी उगाने में सफलता मिली। वैज्ञानिकों के अनुसार इसके लिए पेटेंट प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। यह प्रयोग बारामूला, अनंतनाग और श्रीनगर सहित कई क्षेत्रों में किया गया है।

    खास पर्यावरण की जरूरत वाला मशरूम

    मोरचेला की खेती हमेशा से चुनौतीपूर्ण रही है क्योंकि इसे विशेष तापमान, नमी और मिट्टी की स्थिति की आवश्यकता होती है। साथ ही अलग-अलग किस्मों के लिए अलग पौधों और प्राकृतिक वातावरण का संतुलन भी जरूरी होता है।

    किसानों के लिए नई आर्थिक संभावना

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस तकनीक से जम्मू-कश्मीर की कृषि अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव आ सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी मांग के चलते यह फसल किसानों की आय बढ़ाने का एक मजबूत विकल्प बन सकती है और जैव-अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा दे सकती है।

  • बिहार के बक्सर में PM मोदी पर हमले की साजिश….1 गिरफ्तार, दुश्मन देशों के संपर्क में था आरोपी

    बिहार के बक्सर में PM मोदी पर हमले की साजिश….1 गिरफ्तार, दुश्मन देशों के संपर्क में था आरोपी


    पटना।
    बिहार (Bihar) के बक्सर (Buxar) से पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की सुरक्षा में सेंध पहुंचाने और हमले की साजिश में शामिल युवक अमन तिवारी (Aman Tiwari) को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उसके लैपटॉप से विदेशी(दुश्मन देशों की) एजेंसियों को मैसेज भेजने का सबूत मिले हैं। उसकी गिरफ्तारी सिमरी थाना क्षेत्र के आशा पड़री गांव से हुई है। इस मामले में पुलिस ने तीन युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ की थी। जिसमें सिमरी के युवक के लैपटॉप से मैसेज मिला।

    पुलिस के अनुसार रुपये की चाहत में सिमरी थाना क्षेत्र के आशा पड़री गांव निवासी अमन तिवारी ने अंतरराष्ट्रीय एजेंसी को मैसेज भेजा था। गुप्त सूचना मिलते ही पुलिस एक्टिव हुई। पुलिस के अनुसार बुधवार की दोपहर अमन किसी के घर पूजा कराने के लिए अपने पिता को छोड़ घर लौटा था। जिस वक्त वह घर में खाना खा रहा था‌ ठीक उसी वक्त पुलिस पहुंची और उसे गिरफ्तार कर लिया। एसपी शुभम आर्य ने बताया कि अमन के साथ तीन युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई थी। पूछताछ के बाद दो को छोड़ दिया गया जबकि सबूत मिलने के बाद अमन को गिरफ्तार कर लिया गया।

    एसपी ने कहा कि पीएम से संबंधित कोई मैसेज हैक नहीं हुआ है। अमन काफी समय से विदेशी एजेंसियों के संपर्क में था। रुपये के डिमांड के साथ अंतराष्ट्रीय एजेंसी को मैसेज भेजा था कि वह पीएम की सुरक्षा को हानि पहुंचा सकता है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसी से संपर्क कर गोपनीय जानकारी के बदले रुपये की मांग कर रहा था। उसके मोबाइल और लैपटॉप को पुलिस ने जब्त कर खंगाला, तो रुपये के डिमांड से संबंधित मैसेज मिला।

    एसपी ने बताया कि अमन तिवारी ने वर्ष 2021 में कोलकाता एयरपोर्ट को उड़ाने की धमकी दी थी। इस मामले में कोलकाता और बक्सर पुलिस की संयुक्त टीम ने उसे गिरफ्तार किया था। इसके बाद गुरुवार को पुलिस की इस कार्रवाई के बाद इलाके में सनसनी फैल गई है। पुलिस के अनुसार आरोपित के घर से लैपटॉप समेत कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी जब्त किए गए हैं, जिन्हें जांच के लिए भेजा गया है।

    अमन की गिरफ्तारी के बाद उसके गांव में गुरुवार को सन्नाटा पसरा रहा। युवक की करतूत से सभी ग्रामीण हैरान नजर आ रहे हैं। एसपी ने बताया कि मामले की गहराई से जांच की जा रही है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि अमन के संपर्क में और कौन कौन लोग हैं और उसका संपर्क किन एजेंसियों से हैं। अमन का आपराधिक इतिहास भी खंगाला जा रहा है। उसकी नजह में और कौन-कौन वीआईपी हैं, इसका भी पता लगाया जा रहा है।

  • होर्मुज से जहाजों पर 20 लाख डॉलर टोल की खबर पर मचा हड़कंप, भारत पर टैक्स को लेकर सरकार ने दिया जवाब

    होर्मुज से जहाजों पर 20 लाख डॉलर टोल की खबर पर मचा हड़कंप, भारत पर टैक्स को लेकर सरकार ने दिया जवाब


    नई दिल्ली।
    अमेरिका के साथ सीजफायर के बाद ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर भारी शुल्क वसूलने की संभावित योजना को लेकर वैश्विक हलचल तेज हो गई है। खबरों के अनुसार ईरान की संसद में मंगलवार को एक प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है, जिसके तहत इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर 20 लाख डॉलर तक का टोल लगाया जा सकता है।

    भारत-ईरान टोल चर्चा पर सरकार का स्पष्ट बयान
    इस मुद्दे पर भारत सरकार ने स्थिति साफ करते हुए कहा है कि ईरान के साथ इस तरह के किसी टोल टैक्स को लेकर कोई बातचीत नहीं हुई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि भारत और ईरान के बीच इस विषय पर कोई चर्चा नहीं हुई है।

    होर्मुज में आंशिक संचालन की तैयारी

    रिपोर्ट्स के मुताबिक बुधवार को ईरानी अधिकारी ने संकेत दिए कि शुक्रवार से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सीमित स्तर पर जहाजों की आवाजाही शुरू हो सकती है। यह मार्ग युद्ध के दौरान लगभग छह सप्ताह तक बाधित रहा था, हालांकि कुछ मित्र देशों के जहाजों को गुजरने की अनुमति दी गई थी, जिनमें भारत भी शामिल था।

    20 लाख डॉलर तक हो सकता है शुल्क

    सूत्रों के अनुसार ईरान स्थायी शांति व्यवस्था के तहत इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर भारी शुल्क लगाने पर विचार कर रहा है। अनुमान है कि यह शुल्क लगभग 20 लाख डॉलर प्रति ट्रांजिट तक हो सकता है, जो मौजूदा शिपिंग लागत के बराबर माना जा रहा है।

    ईरान और ओमान दोनों की भूमिका
    रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि इस प्रस्तावित व्यवस्था के तहत ईरान और ओमान दोनों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क वसूलने का अधिकार मिल सकता है। इस आय का उपयोग क्षेत्रीय पुनर्निर्माण और आर्थिक जरूरतों के लिए किए जाने की बात कही जा रही है।

    भारत को पहले मिली थी राहत
    युद्ध के दौरान ईरान ने कुछ मित्र देशों को सुरक्षित मार्ग से गुजरने की अनुमति दी थी, जिनमें भारत का नाम भी शामिल रहा। उस समय कई भारतीय जहाज जैसे एलपीजी टैंकर ‘ग्रीन आशा’ और अन्य वेसल्स सुरक्षित रूप से भारत पहुंचे थे।

    वैश्विक ऊर्जा व्यापार पर नजर
    होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के तेल और गैस व्यापार के लिए बेहद अहम माना जाता है। ऐसे में किसी भी तरह का नया शुल्क या नियंत्रण वैश्विक ऊर्जा कीमतों और आपूर्ति श्रृंखला पर बड़ा असर डाल सकता है।

  • बैसाखी: आज पाकिस्तान जाएंगे 2840 सिख श्रद्धालु… कड़े नियमों के बीच अटारी-वाघा बॉर्डर से होगी एंट्री

    बैसाखी: आज पाकिस्तान जाएंगे 2840 सिख श्रद्धालु… कड़े नियमों के बीच अटारी-वाघा बॉर्डर से होगी एंट्री


    अमृतसर।
    बैसाखी और खालसा साजना दिवस (Baisakhi and Khalsa Sajna Day) के अवसर पर पाकिस्तान (Pakistan) जाने वाले सिख श्रद्धालुओं (Sikh devotees) के जत्थे के लिए इस बार सख्त नियम लागू किए गए हैं। अब कोई भी श्रद्धालु अकेले यात्रा नहीं कर सकेगा बल्कि केवल परिवार या समूह के साथ ही दर्शन के लिए जा पाएगा। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (Shiromani Gurdwara Parbandhak Committee) ने यह फैसला सुरक्षा कारणों के चलते लिया है।

    एसजीपीसी के अनुसार शुक्रवार सुबह आठ बजे जत्था एसजीपीसी कार्यालय से रवाना होकर अटारी-वाघा सीमा के रास्ते पाकिस्तान में प्रवेश करेगा। इस बार देशभर से करीब 2840 श्रद्धालु यात्रा में शामिल होंगे। एसजीपीसी ने 1795 पासपोर्ट वीजा के लिए भेजे थे जिनमें से 1763 को वीजा मिला जबकि 32 आवेदन खारिज कर दिए गए। इसके अलावा दिल्ली से 409 और हरियाणा से 255 श्रद्धालुओं को भी वीजा जारी हुआ है।


    सर्बजीत कौर मामले के बाद सख्ती

    एसजीपीसी ने बताया कि पिछले वर्ष एक महिला श्रद्धालु के पाकिस्तान में ही रुक जाने के मामले के बाद यह निर्णय लिया गया। अब किसी भी सिंगल पुरुष या महिला का वीजा आवेदन नहीं भेजा गया है जिससे कई श्रद्धालु इस बार यात्रा से वंचित रह गए।


    पंजा साहिब में होगा मुख्य समागम

    एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने बताया कि श्रद्धालु सबसे पहले गुरुद्वारा श्री पंजा साहिब में माथा टेकेंगे जहां मुख्य समागम होगा। यात्रा 10 अप्रैल से 19 अप्रैल तक चलेगी। उन्होंने करतारपुर साहिब कॉरिडोर खोलने और पासपोर्ट व 20 डॉलर शुल्क खत्म करने की मांग दोहराई। सचिव बलविंदर सिंह काहलवां ने श्रद्धालुओं से समय पर पहुंचने और दस्तावेज साथ रखने की अपील की है।

  • LPG: कालाबाजारी पर प्रहार… देश में 1.16 लाख से अधिक स्थानों पर छापा, 53 डिस्ट्रीब्युटर सस्पेंड

    LPG: कालाबाजारी पर प्रहार… देश में 1.16 लाख से अधिक स्थानों पर छापा, 53 डिस्ट्रीब्युटर सस्पेंड


    नई दिल्ली।
    सरकार ने LPG सप्लाई को लेकर बड़ा फैसला लिया है। अब कमर्शियल (Commercial) LPG की सप्लाई कई नए सेक्टरों तक बढ़ा दी गई है। दूसरी ओर आज शुक्रवार, 10 अप्रैल को एलपीजी के दाम (LPG Rate) में कोई बदलाव नहीं हुआ है। वहीं, केंद्र ने गुरुवार को कहा कि उसने देश भर में एलपीजी सप्लाई (LPG Supply) की निगरानी तेज कर दी है। गैस की कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए अब तक 1.16 लाख से अधिक छापे मारे हैं और लगभग 53 एलपीजी डिस्ट्रीब्युटर को सस्पेंड कर दिया है।

    पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार अब कमर्शियल LPG कृषि, यूरेनियम, हेवी वॉटर, फार्मास्यूटिकल्स, पेंट, सिरेमिक, फाउंड्री और ग्लास जैसे उद्योग को भी मिलेगी। सरकार का लक्ष्य है कि इन सेक्टरों की गैस जरूरत का लगभग 70% हिस्सा पूरा किया जाए, जिसमें कुल सप्लाई लिमिट 200 टन प्रतिदिन तय की गई है।

    घरेलू उपभोक्ताओं के लिए क्या कर रही सरकार
    पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार सप्लाई संकट जब शुरू हुई तो सबसे पहले सरकार ने कमर्शियल LPG सप्लाई को सीमित कर दिया था ताकि देश के लगभग 33.2 करोड़ घरेलू उपभोक्ताओं की जरूरतें पूरी की जा सकें। घरेलू जरूरतों को सुनिश्चित करने के बाद ही अब धीरे-धीरे अन्य सेक्टरों के लिए सप्लाई बढ़ाई जा रही है।


    अस्पतालों और होटलों से शुरू होकर अब 70% तक पहुंची सप्लाई

    12 मार्च से सरकार ने कमर्शियल LPG की सीमित सप्लाई अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को देना शुरू किया था। इसके बाद इसे धीरे-धीरे बढ़ाया गया और अब यह 70% तक पहुंच गई है। इसमें अब रेस्टोरेंट, ढाबे, होटल, कैंटीन, कम्युनिटी किचन के साथ-साथ स्टील, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल, केमिकल और प्लास्टिक सेक्टर भी शामिल हैं।

    मजदूरों के लिए 5 किलो LPG सिलेंडर की सप्लाई दोगुनी: सरकार ने छोटे 5 किलो LPG सिलेंडर (FTL) की सप्लाई भी दोगुनी कर दी है, जो मुख्य रूप से प्रवासी मजदूरों द्वारा उपयोग किए जाते हैं। यह कदम इसलिए उठाया गया क्योंकि ताकि औद्योगिक क्षेत्रों में इन सिलेंडरों की कमी के चलते मजदूरों का पलायन न हो।

    अमेरिका-ईरान युद्ध से प्रभावित सप्लाई: ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध से पहले भारत अपनी LPG जरूरत का लगभग 60% आयात करता था, जिसमें से करीब 90% हिस्सा पश्चिम एशिया से आता था, खासकर कतर से। ऐसे में इस संकट का सीधा असर भारत की गैस सप्लाई पर पड़ा।


    कोलकाता, दिल्ली, पटना में क्या हैं LPG के भाव

    आज कोलकाता में घरेलू सिलेंडर ₹939 और कमर्शियल ₹2208 में मिल रहा है। मुंबई में घरेलू एलपीजी सिलेंडर ₹912.50 और कमर्शियल ₹2031का है। चेन्नई में एलपीजी का आज का भाव बताएं तो घरेलू ₹928.50 और कमर्शियल ₹2,246.50 का है।

    पटना में आज घरेलू सिलेंडर ₹1011 और कमर्शियल ₹2365 में मिल रहा है। जयपुर में घरेलू सिलेंडर के दाम आज 9 ₹916.5 और कमर्शियल के ₹2031 हैं। लखनऊ जहां घरेलू सिलेंडर ₹950.50 का मिल रहा है तो वहीं, कमर्शियल ₹2201 का।

  • लगातार बढ़ती दुर्घटनाओं से नोएडा अथॉरिटी और निर्माण कंपनियों पर उठ रहे सवाल..

    लगातार बढ़ती दुर्घटनाओं से नोएडा अथॉरिटी और निर्माण कंपनियों पर उठ रहे सवाल..


    नई दिल्ली:नोएडा में एक और दर्दनाक हादसा सामने आया है, जिसमें 23 वर्षीय हर्षित भट्ट नामक युवक की मौत हो गई। हर्षित अपने दोस्तों के साथ पिकनिक मनाने के लिए सेक्टर 94 के एक खाली प्लॉट में गया था। वहां भरे पानी में तैरने के दौरान वह गहरे पानी में डूब गया और बाहर नहीं आ सका। हादसे के समय हर्षित अच्छा तैराक था, लेकिन उसे इस गहरे पानी का अंदाजा नहीं था। दोस्तों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन उनकी सारी कोशिशें नाकाम रहीं। सूचना मिलने पर पुलिस और बचाव दल की टीमें मौके पर पहुंचीं, साथ ही NDRF और SDRF की टीमें भी सहायता के लिए तैनात की गईं, लेकिन तब तक हर्षित की जान नहीं बचाई जा सकी। तीन अन्य छात्र सुरक्षित बाहर निकाले गए, जबकि हर्षित का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।

    यह हादसा नोएडा में लगातार बढ़ते सुरक्षा जोखिमों की ओर इशारा करता है। सेक्टर 94 में जिस खाली प्लॉट में यह दुर्घटना हुई, वहां कोई बैरिकेडिंग या चेतावनी बोर्ड नहीं लगाया गया था। पहले भी नोएडा अथॉरिटी की लापरवाही के कारण कई मौतें हुई हैं। कुछ समय पहले आईटी इंजीनियर युवराज मेहता और अन्य लोग इसी तरह के खुले गड्ढों में दुर्घटनाग्रस्त हुए थे। सेक्टर 115 में एक निर्माणाधीन नाले के गड्ढे में गिरकर 25 वर्षीय युवक की मौत भी इसी श्रेणी में आती है।

    स्थानीय लोगों और परिवारों की चिंता लगातार बढ़ रही है। हर्षित का परिवार गाजियाबाद के इंदिरापुरम में रहता है और सदमे में है। उन्होंने घर के बाहर स्पष्ट संदेश देकर किसी को अंदर आने से रोका हुआ है। हर्षित एमिटी यूनिवर्सिटी में बैचलर ऑफ फिजिकल एजुकेशन का छात्र था और युवा जीवन में ही इस तरह के हादसे में खो गया। हादसे ने न केवल परिवार को झकझोर दिया है, बल्कि नोएडा अथॉरिटी और निर्माण कंपनियों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

    इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि खुले गड्ढों और निर्माण स्थलों की निगरानी, चेतावनी बोर्ड और बैरिकेडिंग की कमी जानलेवा साबित हो सकती है। अधिकारियों ने पहले भी जोखिम वाले स्थानों पर सुरक्षा उपाय करने की बात कही थी, लेकिन कार्रवाई में देरी और नियमानुसार उपायों का अभाव लगातार बड़ी दुर्घटनाओं का कारण बन रहा है।

  • दिल्ली में IAS और दानिक्स अफसरों के ताबड़तोड़ ट्रांसफर, प्रशासनिक हलचल..

    दिल्ली में IAS और दानिक्स अफसरों के ताबड़तोड़ ट्रांसफर, प्रशासनिक हलचल..

    नई दिल्ली:दिल्ली में बुधवार देर रात बड़े पैमाने पर प्रशासनिक फेरबदल हुआ, जिसमें आईएएस और दानिक्स अफसरों के ताबड़तोड़ ट्रांसफर किए गए। राजधानी के विभिन्न विभागों में 20 से अधिक अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गईं, जिससे सरकारी गलियारों में हलचल मच गई। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की सरकार ने इसे प्रशासनिक कामकाज में सुधार के उद्देश्य से उठाया गया कदम बताया है।

    इस फेरबदल में सीनियर अफसरों को प्रमुख जिम्मेदारी दी गई। डॉ. नरेंद्र कुमार को फाइनेंस कमिश्नर नियुक्त किया गया, जबकि प्रशांत गोयल को फूड एंड सिविल सप्लाई विभाग में अतिरिक्त मुख्य सचिव बनाया गया। उनके पास डीएफसी और डीएससीएससी के सीएमडी की जिम्मेदारी भी होगी। उत्तर पश्चिम जिले के डीएम सौम्या सौरभ को उद्योग विभाग में तैनात किया गया है। नवलेंद्र कुमार सिंह को जीएसटी एडिशनल कमिश्नर और सोनिका सिंह को डीडीए में कमिश्नर बनाया गया है।

    संसदीय कार्यों में हर्षित जैन को संयुक्त सचिव की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि मंगल सैनी केंद्रीय कारागार के सुपरिटेंडेंट बनाए गए। ओम प्रकाश सैनी को डीएसएसएसबी में उप सचिव के पद पर तैनात किया गया। इसके अलावा मुकेश कुमार, आशीष शौकीन, मनोज कुमार, भूप सिंह और अश्विनी कुमार को नई तैनाती मिली। कुछ नियुक्तियों में बदलाव किया गया, जैसे कि अमित कुमार की नियुक्ति का आदेश बाद में रद्द कर दिया गया।

    इस व्यापक ट्रांसफर ने प्रशासनिक स्तर पर नई दिशा और जिम्मेदारियों का वितरण स्पष्ट किया। अधिकारियों का कहना है कि इससे विभागों की कार्यक्षमता और जवाबदेही में सुधार की संभावना है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे बड़े पैमाने पर ट्रांसफर यह दर्शाते हैं कि सरकार अधिकारियों की क्षमता और प्रदर्शन के आधार पर नई तैनाती कर रही है।

    इस कदम का असर न केवल विभागीय कामकाज पर पड़ेगा, बल्कि जनता तक सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार आने की उम्मीद है। प्रशासनिक बदलाव के साथ, अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां मिलने से विभागों में नीतियों और योजनाओं के क्रियान्वयन में गति आने की संभावना है। इस तरह के फेरबदल से सरकारी कामकाज और उत्तरदायित्व के बीच संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया जाता है।

  • पुणे में ऑनलाइन ट्रेडिंग घोटाले में वरिष्ठ डॉक्टर ने गंवाई 12 करोड़ रुपये से अधिक की पूंजी

    पुणे में ऑनलाइन ट्रेडिंग घोटाले में वरिष्ठ डॉक्टर ने गंवाई 12 करोड़ रुपये से अधिक की पूंजी

    नई दिल्ली: पुणे में एक सनसनीखेज ऑनलाइन ट्रेडिंग घोटाले का मामला सामने आया है, जिसमें 75 वर्षीय एक वरिष्ठ डॉक्टर ने 12 करोड़ रुपये से अधिक की अपनी जमा पूंजी गंवा दी। मामला जनवरी के आखिरी सप्ताह से शुरू हुआ, जब डॉक्टर को एक अननोन नंबर से मैसेज आया, जिसमें कई शेयरों की सूची और निवेश पर भारी मुनाफे का दावा किया गया। लिंक पर क्लिक करते ही डॉक्टर को एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा गया, जहां धोखेबाजों ने खुद को एक ग्लोबल फाइनेंसियल मैनेजमेंट फर्म के सीनियर अधिकारी के रूप में प्रस्तुत किया।

    ग्रुप में आरोपी सदस्य निवेश के दौरान होने वाले मुनाफे की झूठी जानकारी साझा करते थे, जिससे डॉक्टर का भरोसा जीतना आसान हो गया। डॉक्टर को एक फर्जी ट्रेडिंग एप्लिकेशन पर भेजा गया, जिसका नाम एक अंतरराष्ट्रीय कंपनी के नाम से मिलता जुलता था। इसके माध्यम से जालसाजों ने डॉक्टर से बैंक अकाउंट और अन्य संवेदनशील जानकारी हासिल की। इसके बाद उन्हें कई बैंक खातों में निवेश के नाम पर धन ट्रांसफर करने के लिए कहा गया।

    पीड़ित डॉक्टर ने 7 मार्च से 18 मार्च के बीच लगभग 12.3 करोड़ रुपये फर्जी प्लेटफॉर्म पर निवेश किए। इस दौरान निवेश पर मनगढ़ंत मुनाफे का प्रदर्शन कर डॉक्टर को और धन निवेश करने के लिए मजबूर किया गया। जब डॉक्टर ने और पैसा लगाने से इनकार किया, तो आरोपियों ने उनके खिलाफ संपत्ति जब्त करने की धमकी दी। इस प्रक्रिया के दौरान डॉक्टर की सभी जमा पूंजी को जालसाजों ने अपने नियंत्रण में ले लिया।

    घोटाले का यह तरीका अत्यंत सुनियोजित था, जिसमें व्हाट्सएप ग्रुप और फर्जी एप्लिकेशन का प्रयोग कर पीड़ित को लगातार प्रभावित किया गया। आरोपियों ने निवेश पर झूठे लाभ दिखाकर डॉक्टर को विश्वास में लिया और अपनी संपत्ति गंवाने के लिए मजबूर किया। यह मामला ऑनलाइन निवेश में बढ़ती धोखाधड़ी और साइबर अपराध की गंभीरता को उजागर करता है।

    पुलिस और साइबर क्राइम विभाग ने अब इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में सावधानी और विश्वसनीय प्लेटफॉर्म पर ही निवेश करना आवश्यक है। डॉक्टर की उम्र और अनुभव को देखते हुए यह घटना निवेशकों के लिए चेतावनी का विषय है।