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  • बीकानेर में छात्रा के साथ शर्मनाक वारदात, एक आरोपी फरार, पुलिस ने शुरू की तलाश

    बीकानेर में छात्रा के साथ शर्मनाक वारदात, एक आरोपी फरार, पुलिस ने शुरू की तलाश

    नई दिल्ली। राजस्थान के बीकानेर जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। नापासर थाना क्षेत्र में 12वीं कक्षा की छात्रा को दो युवकों ने जबरन कार में बैठा लिया और चलती कार में कई घंटे तक उसके साथ गैंगरेप किया। पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि दूसरा आरोपी अभी फरार है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह वारदात 6 जनवरी को हुई थी, लेकिन पीड़िता के परिवार ने 11 जनवरी को शिकायत दर्ज कराई।

    स्कूल जाते समय रास्ते से अगवा

    जानकारी के अनुसार छात्रा सुबह घर से स्कूल जाने के लिए निकली थी। इसी दौरान दो युवक कार में आए और उसे जबरन कार में बैठा लिया। आरोपी उसे धमकाते रहे और कई घंटों तक कार में घुमाते हुए बारी-बारी से उसके साथ दुष्कर्म करते रहे। डरी हुई छात्रा लगातार मदद की गुहार लगाती रही, लेकिन आरोपी उसे चुप कराने की कोशिश करते रहे।

    आरोपियों में एक वकील?

    मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि आरोपियों में से एक वकील है, हालांकि पुलिस ने अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। जब आरोपी कार को पड़ोसी गांव में ले गए, तो ग्रामीणों ने कार से चीख-पुकार सुनी और वाहन रोक लिया। ग्रामीणों के आने से आरोपी घबरा गए और छात्रा को जबरन कार से उतारकर भाग गए।

    ग्रामीणों की सतर्कता से टली बड़ी अनहोनी

    घटना के बाद ग्रामीणों ने तुरंत छात्रा के परिजनों को सूचना दी। परिवार मौके पर पहुंचा और छात्रा को अपने साथ घर ले गया। इसके बाद परिजन पुलिस से संपर्क कर FIR दर्ज कराई। नापासर पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई शुरू कर दी। पुलिस अधिकारी हिमांशु शर्मा ने बताया कि पीड़िता की उम्र 18 वर्ष से अधिक है, जबकि आरोपियों की उम्र अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है। पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया गया है और रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

    इलाके में फैला गुस्सा और सुरक्षा पर सवाल

    इस घटना के बाद इलाके में भारी गुस्सा है। स्थानीय लोग बेटियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि अगर समय रहते ग्रामीणों ने हस्तक्षेप नहीं किया होता, तो हालात और भी गंभीर हो सकते थे। पुलिस अब फरार आरोपी की तलाश में जुटी हुई है और पूरे इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

    यह घटना एक बार फिर बेटियों की सुरक्षा और समाज की जागरूकता की जरूरत को सामने लाती है।

  • उत्तर भारत की लड़कियों को पढ़ाई से रोका जाता है, बस घर के काम करवाए जाते हैं, दयानिधि मारन का विवादित बयान

    उत्तर भारत की लड़कियों को पढ़ाई से रोका जाता है, बस घर के काम करवाए जाते हैं, दयानिधि मारन का विवादित बयान


    नई दिल्ली। डीएमके सांसद दयानिधि मारन ने हाल ही में एक विवादास्पद बयान देकर उत्तर और दक्षिण भारत में महिला शिक्षा और सशक्तिकरण पर बहस छेड़ दी है। चेन्नई के कैद-ए-मिल्लत महिला विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में मारन ने कहा कि उत्तर भारत में अक्सर लड़कियों को घर में रोका जाता है और उन्हें केवल घरेलू काम करने के लिए कहा जाता है, जबकि उन्हें पढ़ाई या नौकरी के अवसर नहीं मिलते।

    मारन ने दक्षिण भारत के मॉडल की भी जमकर तारीफ की।

    उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में लड़कियों को पढ़ाई और करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। उन्होंने मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन और उनकी द्रविड़ियन सरकार की सराहना करते हुए बताया कि उनके नेतृत्व में लड़कियों की शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष कदम उठाए जा रहे हैं। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने भी हिस्सा लिया और छात्राओं को लैपटॉप वितरित किए।

    मारन ने कहा, हम चाहते हैं कि हमारी लड़कियां पढ़ें, शिक्षित बनें और अपने भविष्य में सशक्त हों। वहीं, उत्तर भारत में लड़कियों को केवल घर के कामकाज तक सीमित रखा जाता है।

    उन्होंने तमिलनाडु को भारत का सबसे उन्नत प्रदेश बताते हुए द्रविड़ियन मॉडल की विशेष प्रशंसा की।

    आंकड़े बताते हैं अंतर
    2011 की जनगणना के अनुसार, तमिलनाडु में 7 साल से ऊपर की उम्र की महिला साक्षरता दर 73.44% है। वहीं उत्तर भारत के राज्यों में यह दर कम है:

    उत्तर प्रदेश – 57.18%

    हरियाणा – 65.94%

    राजस्थान – 52.12%

    हिमाचल प्रदेश – 75.93%

    विशेषज्ञों का कहना है कि यह अंतर सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक कारणों से उत्पन्न होता है।

    राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं
    मारन के बयान पर उत्तर और दक्षिण भारत में तीखी प्रतिक्रियाएं आई हैं।

    कुछ लोगों ने इसे विभाजनकारी टिप्पणी कहा, जबकि अन्य ने महिला शिक्षा और समान अवसरों पर बहस को बढ़ावा देने की बात कही। सोशल मीडिया और मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस बयान पर बहस तेज हो गई है।

    विश्लेषकों का मानना है कि दयानिधि मारन का बयान केवल विवाद नहीं, बल्कि भारत में महिला सशक्तिकरण, शिक्षा और सामाजिक समानता के मुद्दों पर नई बहस को जन्म देने वाला कदम है। राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर इसकी प्रतिक्रियाएं अभी भी सामने आ रही हैं और यह मामला राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन चुका है।

  • अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव 2026: वडोदरा के आसमान में दिखा ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का भव्य नज़ारा

    अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव 2026: वडोदरा के आसमान में दिखा ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का भव्य नज़ारा

    नई दिल्ली। वडोदरा का वातावरण मंगलवार को उत्सवमय हो गया, जब गुजरात टूरिज्म, जिला प्रशासन और वडोदरा महानगरपालिका के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव-2026 का आयोजन किया गया। इस महोत्सव में देश-विदेश से आए 160 से अधिक पतंगबाजों ने अद्भुत और रंग-बिरंगी पतंगों के साथ अपने कौशल का प्रदर्शन किया, जिससे पूरा आसमान उत्सव की छटा से भर गया। इस अवसर पर वसुधैव कुटुंबकम का दृश्य भी देखने को मिला।

    अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों का जादू

    महज भारत तक सीमित नहीं, बल्कि ऑस्ट्रेलिया, यूके, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, थाईलैंड समेत कई देशों के पतंगबाजों ने अनोखे डिजाइन और विविध आकृतियों वाली पतंगों के साथ अपने करतब दिखाए। इसके साथ ही बिहार, राजस्थान, तमिलनाडु सहित भारत के आठ राज्यों से आए पतंगबाजों ने भी दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

    उत्सव में बड़ी संख्या में दर्शक और मेहमान

    महोत्सव में जनता की भारी भीड़ उमड़ी, जिसमें जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ स्थानीय नागरिकों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कार्यक्रम के अंत में मेहमानों के लिए वडोदरा की विशेष ऊंझा जलेबी की व्यवस्था की गई, जिसने इस उत्सव को और भी यादगार बना दिया।

    सांसद डॉ. हेमांग जोशी की प्रतिक्रिया

    वडोदरा के सांसद डॉ. हेमांग जोशी ने कहा कि वडोदरा में अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव बहुत ही जोरशोर से आयोजित हो रहा है। इस कार्यक्रम में 20 से अधिक देशों के विदेशी मेहमान शामिल हुए। उन्होंने बताया कि यह आयोजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए दृष्टि का परिणाम है। उन्होंने कहा कि महोत्सव में वसुधैव कुटुंबकम का दृश्य विशेष रूप से देखने को मिला।

    म्युनिसिपल कमिश्नर अरुण महेश बाबू का संदेश

    वडोदरा महानगरपालिका के म्युनिसिपल कमिश्नर अरुण महेश बाबू ने बताया कि यह कार्यक्रम गुजरात टूरिज्म, जिला प्रशासन और महानगरपालिका के संयुक्त प्रयास से सफल हुआ है। उन्होंने कहा कि विदेशों और भारत के विभिन्न राज्यों से आए लोग वडोदरा की जनता के साथ मिलकर महोत्सव को सफल बनाने में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने राज्य सरकार का आभार व्यक्त करते हुए वडोदरा की जनता को इस कार्यक्रम की सफलता के लिए बधाई दी।

    उत्सव की खासियत

    इस महोत्सव की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि देश-विदेश के पतंगबाजों और स्थानीय प्रतिभागियों ने मिलकर रंगीन और विविध पतंगों से वडोदरा के आसमान को सजाया। दर्शकों ने न केवल मनोरंजन किया, बल्कि यह महोत्सव सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सामुदायिक भावना को भी मजबूत करने वाला अवसर साबित हुआ।

  • UP Politics: शिवसेना की एंट्री से सुभासपा, निषाद पार्टी और अपना दल की मुश्किलें बढ़ीं, 2027 विधानसभा चुनाव में NDA में नया समीकरण

    UP Politics: शिवसेना की एंट्री से सुभासपा, निषाद पार्टी और अपना दल की मुश्किलें बढ़ीं, 2027 विधानसभा चुनाव में NDA में नया समीकरण


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ अब गर्म होती दिख रही हैं। एनडीए के घटक दलों में से शिवसेना (शिंदे गुट) ने राज्य में सक्रिय भूमिका निभाने का ऐलान कर दिया है, जिससे सुभासपा, निषाद पार्टी और अपना दल (एस) की रणनीति पर असर पड़ने की संभावना बढ़ गई है। शिवसेना ने साफ किया कि वह बीजेपी के साथ गठबंधन में विधानसभा चुनाव में हिस्सा लेगी और कुछ सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी।

    शिवसेना के मुख्य राष्ट्रीय समन्वयक अभिषेक वर्मा ने कहा कि पार्टी अब यूपी में मजबूत स्थिति में है और इसे और बेहतर किया जाएगा। वर्मा ने स्पष्ट किया कि शिवसेना केवल विधानसभा चुनाव में ही नहीं, बल्कि जिला पंचायत, नगर पंचायत और निकाय चुनावों में भी सक्रिय होगी।

    उन्होंने कहा, “हम बीजेपी को बड़ा मानकर चुनाव लड़ेंगे, और कुछ सीटों पर हमारे उम्मीदवार उतारने की अनुमति भी मिल चुकी है।”

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शिवसेना की एंट्री यूपी के राजनीतिक परिदृश्य में नई हलचल पैदा करेगी। सुभासपा, निषाद पार्टी और अपना दल पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि वे पंचायत चुनाव अकेले लड़ेंगे और विधानसभा चुनाव के लिए रणनीति तैयार कर रहे हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि किस दल की रणनीति प्रभावित होती है और किस सीट पर खेल बदल सकता है।

    उत्तर भारतीयों के साथ महाराष्ट्र में कथित भेदभाव और मारपीट के सवाल पर वर्मा ने स्पष्ट किया कि शिवसेना गुंडागर्दी नहीं करती।

    उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना और उद्धव ठाकरे के शिवसेना गुट से जुड़ी हैं। वर्मा ने आगे कहा, “अगर उत्तर भारतीयों से इतनी ही दिक्कत है, तो इसे बॉलीवुड या अन्य सार्वजनिक मंचों पर भी उजागर किया जा सकता है।”

    शिवसेना की सक्रियता से उत्तर प्रदेश में हिंदू वोट बैंक में हलचल और एनडीए के गठबंधन में सीटों के बंटवारे को लेकर नई रणनीति बन सकती है। बीजेपी के लिए यह चुनौती और अवसर दोनों है, क्योंकि गठबंधन में सीटों का बंटवारा और उम्मीदवार चयन अब और अधिक संवेदनशील मुद्दा बन गया है।

    पार्टी पदाधिकारी ने कहा कि यूपी में संगठन को मजबूत किया जाएगा, स्थानीय नेताओं और युवा कार्यकर्ताओं को जोड़कर पार्टी का नेटवर्क हर जिले में फैलाया जाएगा। यह कदम शिवसेना को सुभासपा, निषाद पार्टी और अपना दल के मुकाबले चुनावी मैदान में मजबूती देने के साथ ही बीजेपी के लिए भी नए समीकरण तैयार करेगा।

    विशेषज्ञों का कहना है कि 2027 विधानसभा चुनाव में शिवसेना की भागीदारी राज्य में राजनीतिक समीकरण बदल सकती है। अब यह देखना रोचक होगा कि कौन सा दल इस नए मोड़ का फायदा उठाता है और किसकी रणनीति प्रभावित होती है। राजनीतिक हलचल और गठबंधन की राजनीति यूपी के मतदाताओं के लिए भी बेहद दिलचस्प और निर्णायक साबित हो सकती है।

  • नौसेना की पहल: लक्षद्वीप में विशाल मेडिकल और सर्जिकल कैंप, कई विशेषज्ञ शामिल

    नौसेना की पहल: लक्षद्वीप में विशाल मेडिकल और सर्जिकल कैंप, कई विशेषज्ञ शामिल

    नई दिल्ली। भारतीय सशस्त्र बल न केवल देश की रक्षा करते हैं, बल्कि अब नागरिकों के स्वास्थ्य की सुरक्षा में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। इसी कड़ी में नौसेना ने लक्षद्वीप में बहु-विशेषज्ञ मेगा मेडिकल एवं सर्जिकल शिविर आयोजित किया है। इस पहल के अंतर्गत कार्डियोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, न्यूरोलॉजी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, एंडोक्राइनोलॉजी समेत अनेक सुपर-स्पेशियलिटी सेवाओं में परामर्श, जांच और उपचार प्रदान किया जा रहा है।

    उद्घाटन और आयोजन स्थल

    13 जनवरी को कवरत्ती स्थित इंदिरा गांधी अस्पताल में नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने इस शिविर का औपचारिक उद्घाटन किया। शिविर 17 जनवरी तक चलेगा और लक्षद्वीप के पांच द्वीप-अमीनी, एंड्रॉथ, अगत्ती, कवरत्ती और मिनिकॉय-में विस्तारित किया गया है।

    स्वास्थ्य सेवाओं का उद्देश्य

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के अनुसार यह विशाल पैमाने का चिकित्सा शिविर दूरदराज के नागरिकों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की भारतीय नौसेना की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। शिविर में व्यापक स्वास्थ्य जांच, शीघ्र निदान, समय पर चिकित्सकीय परामर्श, जरूरी उपचार और निशुल्क दवाओं का वितरण द्वीपवासियों के दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभ सुनिश्चित करेगा।

    बहु-विशेषज्ञ सेवाएं और मोतियाबिंद ऑपरेशन

    शिविर में कार्डियोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, न्यूरोलॉजी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, एंडोक्राइनोलॉजी समेत बुनियादी और सुपर-स्पेशियलिटी सेवाओं की व्यवस्था है। कवरत्ती में नेत्र विज्ञान टीम मोतियाबिंद रोगियों के ऑपरेशन कर रही है, जबकि मरीजों को चश्मे, आई ड्रॉप्स और दवाएं भी प्रदान की जा रही हैं।

    सरकारी और राष्ट्रीय स्वास्थ्य पहलों के अनुरूप

    यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण और आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएम-जेएवाई) के उद्देश्यों के अनुरूप है। शिविर ‘वन अर्थ, वन हेल्थ’ के वैश्विक स्वास्थ्य दर्शन के अनुसार उपचारात्मक, निवारक और प्रोत्साहक स्वास्थ्य सेवाओं का समन्वय प्रस्तुत करता है।

    नौसेना प्रमुख के विचार

    एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि यह पहल तीन दृष्टियों से अनूठी है-समन्वय, जिसमें तीनों सशस्त्र सेवाएं और स्थानीय प्रशासन मिलकर कार्य कर रहे हैं; विस्तार, जिसमें कई विशेषज्ञ शामिल हैं; और पैमाना, जिसमें बड़ी संख्या में चिकित्सा स्टाफ तैनात है। इससे नागरिक सैन्य सहयोग और अंतर-सेवा समन्वय मजबूत होता है।

    आधुनिक सुविधाओं और सहयोगी स्टाफ

    शिविर में देशभर के विभिन्न रक्षा चिकित्सा प्रतिष्ठानों से 29 मेडिकल अधिकारी, 2 नर्सिंग अधिकारी और 42 पैरामेडिकल कर्मी तैनात हैं। साथ ही जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं को आधुनिक उपकरण, स्टोर और दवाओं से सपोर्ट किया गया है।

    यह बहु-विशेषज्ञ मेडिकल शिविर भारतीय नौसेना और सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं की सेवा-भावना, जिम्मेदारी और लक्षद्वीप के लोगों के स्वास्थ्य और कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता का सशक्त प्रमाण है।

  • दिल्ली एयरपोर्ट पर 6 दिन तक उड़ानें प्रभावित, गणतंत्र दिवस सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत एयरस्पेस बंद

    दिल्ली एयरपोर्ट पर 6 दिन तक उड़ानें प्रभावित, गणतंत्र दिवस सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत एयरस्पेस बंद


    नई दिल्ली । दिल्ली एयरपोर्ट पर अगले कुछ दिनों में हवाई यात्रियों के लिए एक और मुश्किलें आ सकती हैं क्योंकि गणतंत्र दिवस की सुरक्षा तैयारियों के चलते दिल्ली के ऊपर एयरस्पेस अस्थायी रूप से बंद किया जाएगा। इस एयरस्पेस बंद के कारण 21 जनवरी से शुरू होकर 6 दिन तक उड़ानों में देरी और रद्द होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। सरकार ने मंगलवार को एक नोटिस टू एयरमेन जारी किया है जिसके तहत दिल्ली एयरस्पेस रोज़ाना सुबह 10:20 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक बंद रहेगा। लगभग 2 घंटे 25 मिनट के इस बंद के दौरान हजारों उड़ानें प्रभावित हो सकती हैं खासकर कनेक्टिंग फ्लाइट्स में रुकावटें आ सकती हैं। यह अस्थायी एयरस्पेस बंद गणतंत्र दिवस के सुरक्षा प्रोटोकॉल और ड्रेस रिहर्सल के तहत होता है, जिसमें परेड, वायुसेना का फ्लाईपास्ट, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, और सैन्य साजो-सामान का प्रदर्शन होता है। इस दौरान होने वाली हवाई गतिविधियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एयरस्पेस बंद किया जाता है।

    उड़ानों पर प्रभाव और बदलाव

    एविएशन एनालिटिक्स कंपनी सिरियम के आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि में 600 से अधिक उड़ानों पर असर पड़ने की संभावना है। यह समय दिल्ली एयरपोर्ट के सबसे व्यस्त स्लॉट्स में से एक होता है, जब यात्री विभिन्न घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचते हैं। इसलिए, उड़ानों के रद्द होने, री-शेड्यूलिंग और ऑपरेशनल रुकावटों से हजारों यात्रियों की यात्रा प्रभावित हो सकती है। कम समय में सूचना मिलने की वजह से एयरलाइंस को अपने शेड्यूल में बदलाव करने में परेशानी हो सकती है, और यात्रियों को वैकल्पिक रूट्स, टिकट रिफंड और री-शेड्यूलिंग जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इससे एयरलाइंस पर अतिरिक्त खर्च का बोझ भी पड़ेगा।

    क्यों किया जा रहा है एयरस्पेस बंद

    गणतंत्र दिवस के दौरान दिल्ली में होने वाले फ्लाईपास्ट और सुरक्षा प्रोटोकॉल को देखते हुए, दिल्ली के ऊपर एयरस्पेस को अस्थायी रूप से बंद किया जाता है। यह पूरी प्रक्रिया कर्तव्य पथ पर होने वाली सैन्य परेड, वायुसेना के फ्लाईपास्ट और अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को सुरक्षित बनाने के लिए की जाती है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि उड़ानें पूरी तरह से रद्द हो जाएंगी। ज्यादातर उड़ानों के समय में बदलाव किया जाएगा, और यात्रियों को अन्य उड़ानों में समायोजित किया जाएगा।

    यात्रियों के लिए सुझाव

    अगर आपकी फ्लाइट दिल्ली एयरपोर्ट से तय तारीख और समय पर आ रही या जा रही है, तो यह जरूरी है कि आप अपनी कॉन्टैक्ट डिटेल्स जैसे मोबाइल नंबर और ईमेल एयरलाइंस के रिकॉर्ड में अपडेट रखें ताकि किसी भी बदलाव या कैंसलेशन की स्थिति में एयरलाइंस आपसे तुरंत संपर्क कर सके। अगर उड़ान रद्द होती है तो एयरलाइंस आमतौर पर यात्रियों को वैकल्पिक फ्लाइट या रिफंड का विकल्प देती है। हालांकि अंतिम समय में टिकट के बदलाव या नई बुकिंग में हवाई किराया पहले की तुलना में अधिक हो सकता है। ऐसे में यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे उपलब्ध वैकल्पिक फ्लाइट्स को प्राथमिकता दें और यात्रा से पहले एयरलाइंस की अद्यतन जानकारी जरूर जांच लें।

  • 10 मिनट में डिलीवरी का दावा खत्म, गिग वर्कर्स की सुरक्षा को प्राथमिकता: Blinkit और अन्य कंपनियों को सरकार का आदेश

    10 मिनट में डिलीवरी का दावा खत्म, गिग वर्कर्स की सुरक्षा को प्राथमिकता: Blinkit और अन्य कंपनियों को सरकार का आदेश


    नई दिल्ली। देशभर के गिग वर्कर्स की सुरक्षा और उनके काम के दबाव को देखते हुए अब 10 मिनट में डिलीवरी का दावा समाप्त कर दिया गया है। केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया के हस्तक्षेप के बाद क्विक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म Blinkit ने अपने सभी ब्रांडों से यह दावा हटा लिया है। इसके साथ ही मंत्री ने अन्य बड़ी कंपनियों जैसे Zepto, Swiggy और Zomato के प्रतिनिधियों से भी स्पष्ट कहा कि वे अपने ब्रांड प्रचार में तय समय सीमा वाली डिलीवरी का उल्लेख न करें और कर्मचारियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।

    देशभर में गिग वर्कर्स की हड़ताल और लगातार उठ रही सुरक्षा चिंताओं के बाद यह कदम उठाया गया है।

    अब आम ग्राहक 10 मिनट के भीतर डिलीवरी की सुविधा की उम्मीद नहीं कर सकते। हालांकि इससे डिलीवरी की गति में बदलाव हो सकता है, लेकिन सरकार का मानना है कि यह कर्मचारियों के हित में सबसे जरूरी निर्णय है।

    स्रोतों के अनुसार Blinkit जल्द ही अपने सभी विज्ञापन और प्रचार सामग्री से ‘10 मिनट में डिलीवरी’ का दावा हटा देगी। इसके बाद अन्य कंपनियों द्वारा भी इसी तरह का ऐलान आने की संभावना है। यह कदम डिलीवरी कर्मचारियों पर अनावश्यक दबाव कम करने और उनके काम करने के सुरक्षित माहौल को सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है।
     मंत्री ने कहा कि कम समय में डिलीवरी का दबाव कर्मचारियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा करता है।

    गिग वर्कर्स के संगठन लंबे समय से इस क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों की स्थितियों, डिलीवरी के दबाव और सोशल सिक्योरिटी की कमी जैसे मुद्दे उठाते आ रहे हैं। उनका कहना है कि तय समय सीमा के कारण कई बार कर्मचारी स्वास्थ्य और सुरक्षा की अनदेखी करने को मजबूर होते हैं। इस निर्णय से यह सुनिश्चित किया गया है कि गिग वर्कर्स की सुरक्षा प्राथमिकता में रहे।

    क्विक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म Blinkit ने बयान जारी कर कहा कि यह कदम सरकार की सलाह और कर्मचारियों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है।

    कंपनी जल्द ही अपने सभी प्रचार और विज्ञापन से ‘10 मिनट में डिलीवरी’ का दावा हटा रही है। इससे पूरे देश में गिग वर्कर्स की सुरक्षा और कार्यस्थल की स्थिति बेहतर होगी।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम गिग वर्कर्स के अधिकारों की दिशा में बड़ा सुधार है। अब कंपनियों को ग्राहकों की सुविधा के साथ-साथ कर्मचारियों की सुरक्षा का संतुलन बनाना होगा। यह संदेश भी जाता है कि व्यवसायिक सफलता केवल तेज डिलीवरी तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि कर्मचारियों की भलाई और सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

    कुल मिलाकर, सरकार का यह कदम गिग वर्कर्स के हित में एक महत्वपूर्ण सुधार है। अब 10 मिनट में डिलीवरी का दावा खत्म हो गया है और कंपनियों को कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश मिल गए हैं। इससे यह स्पष्ट संदेश भी जाता है कि तेजी से सेवा देना महत्वपूर्ण है, लेकिन कर्मचारियों की सुरक्षा और उनका भला प्राथमिकता में होना चाहिए।

  • SIR प्रक्रिया से डर या प्रशासनिक दबाव? ममता बनर्जी का दावा, 77 मौतें हो चुकीं

    SIR प्रक्रिया से डर या प्रशासनिक दबाव? ममता बनर्जी का दावा, 77 मौतें हो चुकीं


    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन SIR प्रक्रिया के कारण हुई मौतों के आरोप अब बढ़ते जा रहे हैं। राज्य के विभिन्न इलाकों से यह खबरें सामने आ रही हैं कि इस प्रक्रिया से जुड़े मानसिक दबाव और तनाव के कारण कुछ लोगों की मौत हो गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस मामले पर बड़ा बयान देते हुए कहा कि SIR से जुड़ी चिंता के कारण राज्य में अब तक 77 मौतें हो चुकी हैं। उनके मुताबिक, यह स्थिति गंभीर होती जा रही है, और इससे लोगों के जीवन पर गहरा असर पड़ रहा है।

    कोलकाता के विभिन्न हिस्सों और अन्य जिलों से सामने आई रिपोर्टों में दावा किया गया है कि SIR के नोटिस मिलने के बाद मानसिक तनाव और चिंता की वजह से दो लोगों की मौत हो गई। इनमें से एक मामला उत्तर दिनाजपुर जिले के कालियागंज क्षेत्र का है जहां 50 वर्षीय लक्ष्मीकांत राय की सोमवार को अचानक मौत हो गई। उनके परिजनों का कहना है कि उन्हें हाल ही में SIR के तहत सुनवाई के लिए नोटिस मिला था जिसके बाद वे गहरे मानसिक दबाव में थे। राय के बेटे हीरू राय ने कहा नोटिस मिलने के बाद से पापा खाना-पीना छोड़ चुके थे और काम पर भी नहीं जा रहे थे। उन्हें डर था कि उनका नाम मतदाता सूची से हट सकता है और इस कारण उनका वोटिंग अधिकार छिन सकता है।

    दूसरी घटना उत्तर 24 परगना जिले के बसीरहाट इलाके की है जहां अनीता बिस्वास नामक बुजुर्ग महिला की स्ट्रोक के कारण मौत हो गई। उनके परिवार का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के तहत सुनवाई में शामिल होने के बाद वह मानसिक रूप से परेशान हो गई थीं। अनीता की मौत के बाद उनके बेटे काशीनाथ बिस्वास ने बताया कि उनकी मां का नाम 1995 की मतदाता सूची में था लेकिन 2002 की सूची में उनका नाम गायब था। 5 जनवरी को दस्तावेज जमा करने के बावजूद कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिलने से वह तनाव में रहने लगीं और अंतत स्ट्रोक के कारण उनकी मौत हो गई।

    इस पूरे मामले पर राजनीति भी गर्मा गई है। तृणमूल कांग्रेस के नेता निताई वैश्य ने चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराया और इस प्रक्रिया को निरर्थक और दमनकारी बताया। वहीं बीजेपी युवा नेता गौरांग दास ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित करार दिया और कहा कि यह सिर्फ राजनीतिक विरोध का हिस्सा है। पुलिस ने बताया कि इन मौतों का वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा, लेकिन फिलहाल प्रशासन इस मुद्दे को लेकर कोई ठोस कदम उठाने में विफल नजर आ रहा है।

    कोलकाता में बूथ लेवल ऑफिसर कर्मचारियों ने भी प्रदर्शन किया है और आरोप लगाया है कि अत्यधिक काम के दबाव के कारण कई कर्मचारियों की भी मौत हो चुकी है। प्रदर्शन के दौरान पुलिस से झड़पों की भी खबरें आईं। इसने इस मुद्दे को और भी गंभीर बना दिया है और सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह प्रशासनिक प्रक्रिया आम नागरिकों पर अत्यधिक दबाव डाल रही है।

  • सुशील कुमार ने सागर धनखड़ हत्याकांड में नियमित जमानत की याचिका दायर की, बदल चुकी परिस्थितियों का हवाला

    सुशील कुमार ने सागर धनखड़ हत्याकांड में नियमित जमानत की याचिका दायर की, बदल चुकी परिस्थितियों का हवाला


    नई दिल्ली । पहलवान सुशील कुमार ने सागर धनखड़ हत्याकांड मामले में नियमित जमानत के लिए एक नई याचिका दायर की है। याचिका में उन्होंने बदल चुकी परिस्थितियों का हवाला देते हुए अदालत से जमानत की अपील की है। उनका कहना है कि रोहिणी कोर्ट में मामले के सभी अहम गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं, जिससे अब गवाहों पर दबाव डालने या सबूतों से छेड़छाड़ करने की कोई आशंका नहीं रही है। सुशील कुमार ने अदालत में अपनी याचिका में दावा किया है कि अभियोजन पक्ष के सभी महत्वपूर्ण गवाहों से पूछताछ पूरी हो चुकी है। अब चूंकि मामले में कोई भी नया तथ्य सामने आने की संभावना नहीं है इसलिए नियमित जमानत दी जाए।
    उनके वकील आर.एस. मलिक ने यह भी बताया कि सुशील कुमार का स्वास्थ्य लंबे समय से जेल में रहने के कारण बिगड़ने लगा है और अब न्यायिक हिरासत में रखने का कोई औचित्य नहीं रह गया है। कभी सुशील कुमार को 2021 में सागर धनखड़ हत्याकांड में गिरफ्तार किया गया था। दिल्ली के मॉडल टाउन पुलिस स्टेशन में दर्ज इस मामले में उनका नाम आरोपियों में था। इस मामले में पहलवान सुशील कुमार और उनके साथियों पर आरोप है कि 4-5 मई 2021 की रात सागर धनखड़ को अगवा कर दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम के पार्किंग क्षेत्र में ले जाकर उन पर हमला किया था जिससे उनकी मौत हो गई थी।

    इसके बाद, मार्च 2025 में दिल्ली हाई कोर्ट से सुशील कुमार को नियमित जमानत मिल गई थी, लेकिन 13 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने यह जमानत रद्द कर दी थी। कोर्ट ने कहा था कि इस मामले के सभी अहम गवाहों से पूछताछ पूरी नहीं हुई थी इसलिए जमानत नहीं दी जा सकती थी। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि जब तक गवाहों के बयान दर्ज नहीं होते, तब तक आरोपी को जमानत नहीं मिल सकती। हालांकि कोर्ट ने यह संभावना भी जताई थी कि यदि परिस्थितियां बदलती हैं तो आरोपी फिर से जमानत की याचिका दायर कर सकता है।

    अब, सुशील कुमार की ओर से दाखिल की गई नई याचिका में यह तर्क दिया गया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक परिस्थितियां अब बदल चुकी हैं। अब तक 222 गवाहों में से 42 अहम गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं जिसमें घायल पक्ष के सदस्य भी शामिल हैं। याचिका में यह भी कहा गया है कि मामले में अब अभियोजन पक्ष के साक्ष्य दर्ज किए जा रहे हैं और इस दौरान सबूतों से छेड़छाड़ या गवाहों को प्रभावित करने का कोई कारण नहीं रह गया है। रोहिणी कोर्ट में मंगलवार को इस याचिका पर सुनवाई हो सकती है और अदालत से उम्मीद की जा रही है कि सुशील कुमार को जमानत मिलने की संभावना है खासकर जब उनका स्वास्थ्य भी प्रभावित हो रहा है। अदालत इस याचिका पर अगली सुनवाई के दौरान फैसला ले सकती है।

  • Delhi Airport Closure: 21–26 जनवरी तक उड़ानें प्रभावित, जानिए क्या है पूरा प्लान

    Delhi Airport Closure: 21–26 जनवरी तक उड़ानें प्रभावित, जानिए क्या है पूरा प्लान

    नई दिल्ली। अगर आप 21 जनवरी से 26 जनवरी के बीच दिल्ली एयरपोर्ट से यात्रा करने की योजना बना रहे हैं तो यह जानकारी आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है. गणतंत्र दिवस परेड, उसकी रिहर्सल और उससे जुड़ी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के चलते दिल्ली का हवाई क्षेत्र (Airspace) इन 6 दिनों तक रोज कुछ घंटों के लिए पूरी तरह बंद रहेगा. इसका सीधा असर दिल्ली आने-जाने वाली सैकड़ों उड़ानों पर पड़ सकता है.

    सरकार की ओर से NOTAM (Notice to Airmen) जारी कर दिया गया है, जिसमें साफ तौर पर बताया गया है कि तय समय के दौरान न तो कोई विमान दिल्ली में लैंड कर सकेगा और न ही यहां से टेक-ऑफ कर पाएगा. चूंकि दिल्ली एयरपोर्ट देश का सबसे व्यस्त एयरपोर्ट है, इसलिए इस बंदी का असर सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश-विदेश की कनेक्टिंग फ्लाइट्स भी प्रभावित होंगी.

    कब और कितनी देर के लिए बंद रहेगा दिल्ली एयरस्पेस?

    NOTAM के मुताबिक 21 जनवरी से 26 जनवरी 2026 तक हर दिन सुबह 10:20 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक दिल्ली के ऊपर से सभी तरह की उड़ानों की आवाजाही पूरी तरह रोक दी जाएगी. इस दौरान कोई भी फ्लाइट दिल्ली एयरपोर्ट पर लैंड नहीं करेगी. कोई भी विमान दिल्ली से टेक-ऑफ नहीं कर पाएगा. यह व्यवस्था गणतंत्र दिवस परेड की फुल ड्रेस रिहर्सल, अभ्यास और 26 जनवरी के मुख्य समारोह में होने वाले वायुसेना के फ्लाईपास्ट और VVIP मूवमेंट को ध्यान में रखकर की गई है.

    गणतंत्र दिवस पर एयरस्पेस क्यों किया जाता है बंद?

    हर साल गणतंत्र दिवस से पहले और 26 जनवरी को दिल्ली में बेहद कड़ी सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाती है. इस दौरान भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान और हेलिकॉप्टर फ्लाईपास्ट का अभ्यास करते हैं. राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और विदेशी मेहमानों की मौजूदगी रहती है. किसी भी तरह की हवाई चूक से बचने के लिए एयरस्पेस को अस्थायी रूप से बंद किया जाता है. इसी वजह से NOTAM जारी कर एयरलाइंस और पायलट्स को पहले से सूचित किया जाता है, ताकि वे अपने उड़ान संचालन की योजना बदल सकें.

    यात्रियों पर क्या पड़ेगा असर?

    दिल्ली एयरपोर्ट से सफर करने वाले यात्रियों को इन दिनों कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. उड़ानों पर संभावित असर देखने को मिल सकता है. कई फ्लाइट्स के डिपार्चर और अराइवल टाइम बदले जा सकते हैं. कुछ उड़ानें रद्द (Cancel) या री-शेड्यूल हो सकती हैं. कनेक्टिंग फ्लाइट पकड़ने वाले यात्रियों को अतिरिक्त दिक्कत हो सकती है. पहले से चल रहे कोहरे (Fog) के कारण देरी और ज्यादा बढ़ सकती है. एविएशन एनालिटिक्स कंपनी सिरियम (Cirium) के मुताबिक, इस अवधि में 600 से ज्यादा उड़ानें प्रभावित हो सकती हैं. दिल्ली एयरपोर्ट से रोज़ लाखों यात्री सफर करते हैं और बड़ी संख्या में इंटरनेशनल कनेक्टिंग फ्लाइट्स भी यहीं से जुड़ती हैं.