Category: National

  • रांची: 10 दिन से लापता दो मासूमों का सुराग नहीं, धुर्वा में फूटा जनाक्रोश; SIT के हाथ अब भी खाली

    रांची: 10 दिन से लापता दो मासूमों का सुराग नहीं, धुर्वा में फूटा जनाक्रोश; SIT के हाथ अब भी खाली


    रांची । झारखंड की राजधानी रांची का धुर्वा इलाका इन दिनों एक गहरे गम और गुस्से की लहर में डूबा हुआ है। महज चार और पांच साल की उम्र के दो मासूम भाई-बहन, अंश और अंशिका, पिछले 10 दिनों से लापता हैं, लेकिन पुलिस की तमाम कोशिशों के बावजूद अब तक उनका कोई सुराग नहीं मिल पाया है। प्रशासन की इस विफलता से स्थानीय लोगों का सब्र जवाब दे गया, जिसके परिणामस्वरूप रविवार को पूरा धुर्वा क्षेत्र बंद रहा और सड़कों पर जबरदस्त विरोध प्रदर्शन देखने को मिला।

    घटना की शुरुआत 2 जनवरी 2026 को हुई थी, जब ये दोनों मासूम अपने घर के पास ही एक किराने की दुकान से सामान लेने निकले थे। खेलकूद की उम्र में दुकान तक गए ये बच्चे वापस घर नहीं लौटे। परिजनों ने काफी खोजबीन की, लेकिन जब बच्चों का पता नहीं चला तो 3 जनवरी को धुर्वा थाने में औपचारिक रूप से गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई। देखते ही देखते 10 दिन बीत गए लेकिन पुलिस के हाथ अब तक खाली हैं। बच्चों की सुरक्षित बरामदगी न होने से आक्रोशित ग्रामीणों ने रविवार को 12 घंटे के बंद का आह्वान किया, जिससे इलाके का आम जनजीवन पूरी तरह ठप हो गया।

    इस बंद का नेतृत्व राष्ट्रीय जनता दल आरजेडी के प्रदेश महासचिव कैलाश यादव द्वारा गठित एक विशेष समिति ने किया। प्रदर्शनकारियों ने मौसीबाड़ी और धुर्वा गोल चक्कर जैसे प्रमुख स्थानों पर टायर जलाकर सड़कों को जाम कर दिया। सुबह से ही प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के कारण घंटों तक यातायात बाधित रहा जिससे राहगीरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कैलाश यादव ने कहा कि यह उन माता-पिता के लिए असहनीय पीड़ा का समय है जिनका हर पल अपने बच्चों की वापसी के इंतज़ार में बीत रहा है।

    प्रशासनिक स्तर पर, रांची पुलिस ने बच्चों की तलाश के लिए 40 पुलिसकर्मियों की एक विशेष जांच टीम SIT का गठन किया है। हालांकि, इतने बड़े कार्यबल के बावजूद अब तक कोई ठोस जानकारी हाथ न लगना पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है। शनिवार की शाम को भी स्थानीय निवासियों ने मौसीबाड़ी से बिरसा चौक तक एक विशाल मशाल जुलूस निकालकर सो रहे प्रशासन को जगाने की कोशिश की थी। वर्तमान में स्थिति की गंभीरता को देखते हुए इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और पुलिस ने विरोध प्रदर्शन के दौरान एक व्यक्ति को हिरासत में भी लिया है। पूरा इलाका अब बस एक ही दुआ और मांग कर रहा है अंश और अंशिका की सुरक्षित वापसी।

  • पश्चिम बंगाल: हुगली में नाबालिग से दरिंदगी, TMC नेता समेत दो गिरफ्तार; सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

    पश्चिम बंगाल: हुगली में नाबालिग से दरिंदगी, TMC नेता समेत दो गिरफ्तार; सुरक्षा पर फिर उठे सवाल


    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल के हुगली जिले से एक बार फिर मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है जहाँ एक बंद पड़ी फैक्ट्री के भीतर 16 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया गया। इस घटना ने न केवल कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं बल्कि राज्य की सियासत में भी उबाल ला दिया है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें से एक सत्ताधारी दल तृणमूल कांग्रेस TMC का स्थानीय युवा नेता बताया जा रहा है।

    पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार यह वीभत्स घटना गुरुवार शाम की है जब उत्तरपाड़ा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली बंद पड़ी हिंद मोटर फैक्ट्री के परिसर में पीड़िता अपनी एक सहेली के साथ गई थी। आरोप है कि वहाँ आरोपियों ने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर नाबालिग को बंधक बनाया और उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में जांच शुरू की गई। शनिवार को पुलिस ने बताया कि इस मामले में पॉक्सो अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया गया है।गिरफ्तार आरोपियों की पहचान दीपांकर अधिकारी उर्फ सोनाई और एक अन्य नाबालिग के रूप में हुई है।

    दीपांकर अधिकारी इलाके में टीएमसी का सक्रिय युवा चेहरा माना जाता है। वहीं दूसरा आरोपी कथित तौर पर पीड़िता का पूर्व परिचित बताया जा रहा है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही है और गिरफ्तार आरोपियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। इस घटना के बाद राजनीतिक गलियारों में भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। भाजपा की वरिष्ठ नेता और विधायक अग्निमित्रा पॉल ने ममता बनर्जी सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि बंगाल में महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। पॉल ने दुख जताते हुए कहा कि यह बेहद शर्मनाक है कि एक महिला मुख्यमंत्री के शासन में इस तरह की आपराधिक गतिविधियां आम हो गई हैं।
    उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त सजा की मांग की है।दूसरी तरफ तृणमूल कांग्रेस ने इस मामले में खुद को कानून के साथ खड़ा बताया है। स्थानीय टीएमसी नेता निताई दासगुप्ता ने स्वीकार किया कि गिरफ्तार आरोपी उनकी पार्टी का सदस्य है लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी किसी भी तरह के अपराध का समर्थन नहीं करती। उन्होंने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से आरोपी को तुरंत निष्कासित करने की मांग की है। टीएमसी नेता अजय शंकर ने भी दोहराया कि कानून अपना काम करेगा और जो भी दोषी होगा उसे कड़ी सजा भुगतनी होगी। फिलहाल पुलिस अन्य फरार संदिग्धों की तलाश में जुटी है और इलाके में तनाव को देखते हुए सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

  • BMC चुनाव से ठीक पहले बीजेपी की बढ़ी टेंशन, अपनों के बयानों से बिगड़ सकते हैं सियासी समीकरण

    BMC चुनाव से ठीक पहले बीजेपी की बढ़ी टेंशन, अपनों के बयानों से बिगड़ सकते हैं सियासी समीकरण


    नई दिल्ली । एशिया के सबसे अमीर नगर निगम बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) के चुनाव से ठीक 48 घंटे पहले सियासी माहौल अचानक गरमा गया है। 15 जनवरी 2026 को होने वाले मतदान से पहले भारतीय जनता पार्टी के लिए हालात आसान नहीं दिख रहे। वजह विपक्ष नहीं, बल्कि पार्टी के अपने नेताओं के बयान हैं, जिन्होंने मुंबई की पहचान और मराठी अस्मिता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

    चुनावी प्रचार के दौरान बीजेपी की तमिलनाडु इकाई के अध्यक्ष और पूर्व आईपीएस अधिकारी के. अन्नामलाई के बयान ने महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मचा दी। अन्नामलाई ने कहा कि मुंबई सिर्फ महाराष्ट्र का नहीं, बल्कि एक इंटरनेशनल शहर है। उन्होंने मुंबई के 75 हजार करोड़ रुपये के बजट की तुलना चेन्नई और बेंगलुरु से करते हुए इसे वैश्विक शहर बताया। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब बीएमसी चुनाव में मराठी अस्मिता एक संवेदनशील और निर्णायक मुद्दा बना हुआ है।अन्नामलाई के बयान को महाराष्ट्र में कई राजनीतिक दलों ने मराठी पहचान पर हमला करार दिया। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना मनसे के अध्यक्ष राज ठाकरे ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे मुंबई को महाराष्ट्र से अलग दिखाने की कोशिश बताया। राज ठाकरे के अलावा शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट ने भी इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया और बीजेपी पर मराठी भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया।

    इसी बीच उत्तर प्रदेश के जौनपुर से बीजेपी के पूर्व सांसद कृपाशंकर सिंह के एक बयान ने आग में घी डालने का काम किया। चुनाव प्रचार के दौरान सिंह ने कहा कि मीरा-भाईंदर का मेयर उत्तर भारतीय होना चाहिए और इतने हिंदी भाषी पार्षद चुने जाने चाहिए कि महानगर पालिका में उत्तर भारतीय मेयर बने। इस बयान ने भी स्थानीय राजनीति में भूचाल ला दिया।शिवसेना उद्धव गुट और मनसे ने इन बयानों को मुद्दा बनाते हुए बीजेपी की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं। मनसे नेता अविनाश जाधव ने कहा कि बीजेपी मराठी लोगों का वोट सिर्फ सत्ता हासिल करने के लिए चाहती है, जबकि असल में पार्टी की नीति उत्तर भारतीय राजनीति को बढ़ावा देने की है। शिवसेना नेताओं ने भी प्रचार में इसे मराठी मानुष के अपमान के तौर पर पेश करना शुरू कर दिया है।

    बढ़ते विवाद के बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को खुद सामने आकर सफाई देनी पड़ी। उन्होंने कई चुनावी सभाओं में दोहराया कि बीजेपी ने कभी मराठी अस्मिता से समझौता नहीं किया है और न ही भविष्य में करेगी। सीएम फडणवीस ने कहा कि बीजेपी ही मराठी मानुष, मराठी माटी और महाराष्ट्र की संस्कृति की सच्ची आवाज है।हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मतदान से ठीक पहले इस तरह के बयान बीजेपी के लिए नुकसानदेह साबित हो सकते हैं। बीएमसी जैसे बड़े नगर निगम में स्थानीय पहचान और भावनाएं हमेशा निर्णायक भूमिका निभाती रही हैं। ऐसे में अपनों के बयान चुनावी समीकरणों को अंतिम समय में बदल सकते हैं और इसका सीधा असर मतदान पर पड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

  • Lohri 2026 Items: लोहरी की आग में अर्पित करें ये 4 खास चीजें, सुख-समृद्धि में होगी वृद्धि

    Lohri 2026 Items: लोहरी की आग में अर्पित करें ये 4 खास चीजें, सुख-समृद्धि में होगी वृद्धि

    नई दिल्ली। भारत के प्रमुख लोक पर्वों में शामिल लोहड़ी इस वर्ष 13 जनवरी 2026 को पूरे उत्साह और उल्लास के साथ मनाई जाएगी। खासतौर पर उत्तर भारत, पंजाब, हरियाणा और आसपास के क्षेत्रों में इस पर्व का विशेष महत्व है। लोहड़ी रबी फसलों की कटाई की शुरुआत, ठंड के मौसम के समापन और बसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक मानी जाती है। इस दिन किसान अच्छी फसल के लिए ईश्वर का आभार प्रकट करते हैं और आने वाले साल में समृद्धि की कामना करते हैं।

    लोहड़ी की रात और अग्नि पूजा का महत्व
    लोहड़ी की रात को पवित्र अग्नि प्रज्वलित कर उसकी परिक्रमा करने की परंपरा है। मान्यता है कि अग्नि में अर्पित की गई सामग्री के माध्यम से अग्निदेव और सूर्यदेव प्रसन्न होते हैं। श्रद्धालु अग्नि के चारों ओर घूमते हुए सुख-शांति, स्वास्थ्य और खुशहाली की प्रार्थना करते हैं। यह पर्व सामाजिक एकता और पारिवारिक मेल-मिलाप का भी प्रतीक है।

    लोहड़ी की पवित्र अग्नि में क्या अर्पित करना होता है शुभ
    लोहड़ी के अवसर पर अग्नि में कुछ विशेष चीजें अर्पित करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। माना जाता है कि इन वस्तुओं का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व होता है।

    तिल: नकारात्मकता से मुक्ति का प्रतीक
    लोहड़ी की अग्नि में तिल अर्पित करना बेहद शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तिल पापों का नाश करता है और जीवन से नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है। साथ ही तिल वातावरण को भी शुद्ध करता है, जिससे घर और परिवार पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

    गुड़: रिश्तों में मिठास और सौहार्द
    गुड़ को मिठास और प्रेम का प्रतीक माना जाता है। लोहड़ी की अग्नि में गुड़ डालने से पारिवारिक और सामाजिक रिश्तों में मधुरता आती है। मान्यता है कि इससे आपसी मतभेद दूर होते हैं और घर में सुख-शांति बनी रहती है।

    मूंगफली: अच्छी फसल और समृद्धि की कामना
    मूंगफली को अन्न का प्रतीक माना जाता है। विशेष रूप से किसानों के लिए लोहड़ी के दिन अग्नि में मूंगफली अर्पित करना बेहद शुभ माना गया है। ऐसा करने से आने वाले वर्ष में अच्छी फसल और आर्थिक समृद्धि की संभावना बढ़ती है।

    रेवड़ी: खुशहाली और सकारात्मक ऊर्जा
    लोहड़ी के पर्व पर रेवड़ी का विशेष महत्व है। मान्यता है कि अग्नि में रेवड़ी अर्पित करने से बुरी शक्तियों का नाश होता है, नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।

    आस्था और परंपरा का संगम
    लोहड़ी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। अग्नि में अर्पित की जाने वाली ये चार चीजें जीवन में खुशहाली, समृद्धि और सकारात्मकता लाने का प्रतीक मानी जाती हैं।

  • छठ पूजा के बाद फिर जहरीली हुई यमुना, प्रदूषण बढ़ा लेकिन 2024 के मुकाबले 2025 में दिखी हल्की राहत

    छठ पूजा के बाद फिर जहरीली हुई यमुना, प्रदूषण बढ़ा लेकिन 2024 के मुकाबले 2025 में दिखी हल्की राहत


    नई दिल्ली। दिल्ली में यमुना नदी की हालत एक बार फिर चिंता का विषय बन गई है। ताज़ा जारी जल गुणवत्ता रिपोर्ट के अनुसार छठ पूजा के बाद यमुना का पानी लगातार और अधिक प्रदूषित होता चला गया है। अक्टूबर के बाद से नदी में गिरने वाले बिना शोधित सीवेज के संकेतक माने जाने वाले फीकल कोलीफॉर्म के स्तर में तेज़ बढ़ोतरी दर्ज की गई है जिससे जनस्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए खतरा बढ़ गया है। हालांकि रिपोर्ट में एक राहत वाली बात भी सामने आई है कि मौजूदा आंकड़े पिछले वर्ष 2024 की तुलना में बेहतर हैं।
    रिपोर्ट के अनुसार अक्टूबर 2025 में फीकल कोलीफॉर्म का स्तर करीब 8000 यूनिट प्रति 100 मिलीलीटर दर्ज किया गया था। नवंबर में यह आंकड़ा तीन गुना बढ़कर 24000 यूनिट तक पहुंच गया जबकि दिसंबर में स्थिति और बिगड़ते हुए यह 92000 यूनिट प्रति 100 मिलीलीटर हो गया। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक फीकल कोलीफॉर्म की सुरक्षित सीमा 2500 यूनिट मानी जाती है और आदर्श स्तर सिर्फ 500 यूनिट होना चाहिए। ऐसे में मौजूदा आंकड़े यमुना के पानी की बेहद खराब गुणवत्ता को दर्शाते हैं।

    अक्टूबर में प्रदूषण अपेक्षाकृत कम रहने की बड़ी वजह छठ पूजा से पहले ऊपरी इलाकों के बैराजों से छोड़ा गया भारी मात्रा में ताज़ा पानी बताया गया है। 21 से 25 अक्टूबर के बीच यमुना में 6.68 लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा गया जिससे नदी का प्रवाह बढ़ा और प्रदूषण कुछ हद तक बह गया। इसी कारण उस दौरान सफेद झाग लगभग गायब हो गया था और नदी अपेक्षाकृत साफ नजर आई।हालांकि नवंबर की शुरुआत में जैसे ही पानी का बहाव कम हुआ यमुना में बदबू और झाग दोबारा लौट आए। इसके साथ ही प्रदूषण के अन्य संकेतक भी चिंताजनक बने रहे। बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड BOD अक्टूबर में 25 mg/l था जो नवंबर में बढ़कर 33 mg/l पहुंच गया। दिसंबर में यह फिर 25 mg/l पर आ गया लेकिन यह अब भी सुरक्षित सीमा 3 mg/l से करीब आठ गुना अधिक है।जलीय जीवों के लिए जरूरी डिजॉल्व्ड ऑक्सीजन DO का स्तर भी कई स्थानों पर बेहद कम पाया गया। नवंबर में DO का स्तर 0.5 से 8.5 mg/l के बीच रहा जिसमें दो स्थानों पर यह शून्य तक गिर गया। दिसंबर में भी कई जगहों पर ऑक्सीजन का स्तर जलीय जीवन के लिए आवश्यक 5 mg/l से काफी नीचे दर्ज किया गया।

    हालांकि रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि दिसंबर 2024 में फीकल कोलीफॉर्म का स्तर 84 लाख यूनिट और नवंबर 2024 में 79 लाख यूनिट तक पहुंच गया था। इस तुलना में मौजूदा आंकड़े काफी कम हैं लेकिन विशेषज्ञ इस सुधार को लेकर संदेह जता रहे हैं। उनका कहना है कि साल के इस समय यमुना में पानी का प्रवाह बेहद कम होता है ऐसे में प्रदूषण में इतनी बड़ी और अचानक गिरावट व्यावहारिक नहीं लगती।यमुना कार्यकर्ताओं का आरोप है कि जमीनी हकीकत और रिपोर्ट में दर्शाए गए आंकड़ों के बीच बड़ा अंतर है। नदी से अब भी तेज़ बदबू आती है और कई जगह झाग साफ दिखाई देता है। ऐसे में विशेषज्ञों ने प्रदूषण नियंत्रण समिति से डेटा संग्रह की पद्धति पर सवाल उठाए हैं और पारदर्शिता की मांग की है।

  • फर्जी दस्तावेज़ों से बांग्लादेशी महिला को ‘भारतीय’ बनाने की साजिश बेनकाब, ‘कोली’ को ‘मायना सेन’ बनाने की थी तैयारी

    फर्जी दस्तावेज़ों से बांग्लादेशी महिला को ‘भारतीय’ बनाने की साजिश बेनकाब, ‘कोली’ को ‘मायना सेन’ बनाने की थी तैयारी


    नई दिल्ली। /पश्चिम बर्दवान। जिले के सालानपुर थाना क्षेत्र से एक सनसनीखेज मामला सामने आया हैजहां फर्जी दस्तावेज़ों के जरिए एक बांग्लादेशी महिला को भारतीय नागरिक बनाने की सुनियोजित साजिश का खुलासा हुआ है। यह पूरा मामला उस समय उजागर हुआजब एक पासपोर्ट आवेदन के सत्यापन के दौरान दस्तावेज़ों में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। पुलिस जांच में सामने आया कि कोली नाम की बांग्लादेशी महिला को मायना सेन के नाम से भारतीय नागरिक साबित करने की कोशिश की जा रही थी।पुलिस के मुताबिकसाजिश के तहत सबसे पहले महिला के लिए फर्जी जन्म प्रमाण पत्र तैयार कराया गया। इसके बाद उसी आधार पर आधार कार्डवोटर कार्ड और पैन कार्ड जैसे अहम सरकारी दस्तावेज बनवाए गए। इन्हीं दस्तावेज़ों के सहारे पासपोर्ट के लिए आवेदन किया गया था। जब पासपोर्ट सत्यापन के लिए पुलिस आवेदन में दर्ज पते पर पहुंचीतो वहां मायना सेन मौजूद नहीं मिली।

    स्थानीय लोगों से पूछताछ करने पर पुलिस को और भी चौंकाने वाली जानकारी मिली। जिन लोगों को दस्तावेज़ों में महिला के माता-पिता बताया गया थाउनका उससे कोई वास्तविक पारिवारिक रिश्ता नहीं था। इस पर पुलिस ने पूरे मामले की गहन जांच शुरू कीजिसमें साजिश की परतें धीरे-धीरे खुलती चली गईं।जांच के दौरान पुलिस ने देंदुआ निवासी छोटन सेन को गिरफ्तार किया। पूछताछ में सामने आया कि छोटन सेन ने अपने चाचा उत्पल सेन और चाची शुभंकारी सेन को महिला का माता-पिता दिखाकर फर्जी दस्तावेज़ तैयार करवाए थे। जब पुलिस ने उत्पल सेन से पूछताछ कीतो उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उनकी कोई बेटी नहीं है और न ही मायना सेन नाम की किसी लड़की से उनका कोई संबंध है।

    पुलिस पूछताछ में छोटन सेन ने यह भी स्वीकार किया कि मायना सेन उसकी पत्नी नहीं है। उसने बताया कि वर्ष 2019 में उसकी मुलाकात कोली से हुई थीजो बांग्लादेश की नागरिक है और अवैध रूप से भारत में दाखिल हुई थी। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि महिला लंबे समय तक कुल्टी के रेड लाइट एरिया में फर्जी पहचान के साथ रह रही थी।पुलिस का मानना है कि अपनी असली पहचान उजागर होने के डर से महिला बांग्लादेश लौटने की तैयारी में थी और इसी वजह से जल्दबाजी में पासपोर्ट बनवाने की कोशिश की गई। यह पूरा मामला भारतीय नागरिकता हासिल करने के इरादे से रची गई साजिश का हिस्सा बताया जा रहा है।

    आरोपी छोटन सेन के खिलाफ अवैध घुसपैठ में मददजालसाज़ीफर्जी दस्तावेज़ तैयार करने और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अहम दस्तावेज़ों के दुरुपयोग की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। उसे आसनसोल जिला अदालत में पेश किया गयाजहां से दो दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।पश्चिम बर्दवान। जिले के सालानपुर थाना क्षेत्र से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहांफर्जीदस्तावेज़ों के जरिए एक बांग्लादेशी महिला को भारतीय नागरिक बनाने की सुनियोजित साजिश का खुलासा हुआ है। यह पूरा मामला उस समय उजागर हुआ, जब एक पासपोर्ट आवेदन के सत्यापन के दौरान दस्तावेज़ों में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। पुलिस जांच में सामने आया कि ‘कोली’ नाम की बांग्लादेशी महिला को ‘मायना सेन’ के नाम से भारतीय नागरिक साबित करने की कोशिश की जा रही थी।

    पुलिस के मुताबिक, साजिश के तहत सबसे पहले महिला के लिए फर्जी जन्म प्रमाण पत्र तैयार कराया गया। इसके बाद उसी आधार पर आधार कार्ड, वोटर कार्ड और पैन कार्ड जैसे अहम सरकारी दस्तावेज बनवाए गए। इन्हीं दस्तावेज़ों के सहारे पासपोर्ट के लिए आवेदन किया गया था। जब पासपोर्ट सत्यापन के लिए पुलिस आवेदन में दर्ज पते पर पहुंची, तो वहां ‘मायना सेन’ मौजूद नहीं मिली।

    स्थानीय लोगों से पूछताछ करने पर पुलिस को और भी चौंकाने वाली जानकारी मिली। जिन लोगों को दस्तावेज़ों में महिला के माता-पिता बताया गया था, उनका उससे कोई वास्तविक पारिवारिक रिश्ता नहीं था। इस पर पुलिस ने पूरे मामले की गहन जांच शुरू की, जिसमें साजिश की परतें धीरे-धीरे खुलती चली गईं।जांच के दौरान पुलिस ने देंदुआ निवासी छोटन सेन को गिरफ्तार किया। पूछताछ में सामने आया कि छोटन सेन ने अपने चाचा उत्पल सेन और चाची शुभंकारी सेन को महिला का माता-पिता दिखाकर फर्जी दस्तावेज़ तैयार करवाए थे। जब पुलिस ने उत्पल सेन से पूछताछ की, तो उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उनकी कोई बेटी नहीं है और न ही ‘मायना सेन’ नाम की किसी लड़की से उनका कोई संबंध है।पुलिस पूछताछ में छोटन सेन ने यह भी स्वीकार किया कि मायना सेन उसकी पत्नी नहीं है। उसने बताया कि वर्ष 2019 में उसकी मुलाकात ‘कोली’ से हुई थी, जो बांग्लादेश की नागरिक है और अवैध रूप से भारत में दाखिल हुई थी। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि महिला लंबे समय तक कुल्टी के रेड लाइट एरिया में फर्जी पहचान के साथ रह रही थी।

    पुलिस का मानना है कि अपनी असली पहचान उजागर होने के डर से महिला बांग्लादेश लौटने की तैयारी में थी और इसी वजह से जल्दबाजी में पासपोर्ट बनवाने की कोशिश की गई। यह पूरा मामला भारतीय नागरिकता हासिल करने के इरादे से रची गई साजिश का हिस्सा बताया जा रहा है।आरोपी छोटन सेन के खिलाफ अवैध घुसपैठ में मदद, जालसाज़ी, फर्जी दस्तावेज़ तैयार करने और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अहम दस्तावेज़ों के दुरुपयोग की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। उसे आसनसोल जिला अदालत में पेश किया गया, जहां से दो दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

  • भारत-जर्मनी 8 अरब डॉलर की मेगा डील: 6 साइलेंट किलर AIP पनडुब्बियों का निर्माण होगा भारत में

    भारत-जर्मनी 8 अरब डॉलर की मेगा डील: 6 साइलेंट किलर AIP पनडुब्बियों का निर्माण होगा भारत में


    नई दिल्ली। भारत और जर्मनी ने भारतीय नौसेना की ताकत और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए 8 अरब डॉलर की मेगा डील पर सहमति जताई है। इस डील के तहत भारत में 6 अत्याधुनिक स्टील्थ पारंपरिक पनडुब्बियों का निर्माण किया जाएगा। यह परियोजना प्रोजेक्ट 75I के अंतर्गत मझगांव डॉकयार्ड लिमिटेड MDL और जर्मनी की थिसेन क्रुप मरीन सिस्टम्स TKMS के बीच सहयोग से पूरी होगी।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस डील को भारत-जर्मनी के करीबी सहयोग का प्रतीक बताया और कहा कि देश में 2000 से अधिक जर्मन कंपनियां सक्रिय हैं जो दोनों देशों के मजबूत आर्थिक और तकनीकी रिश्तों को दर्शाती हैं। उन्होंने बताया कि इस समझौते से मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत पहल को भी बड़ा बल मिलेगा।

    इन 6 पनडुब्बियों की सबसे बड़ी खासियत उनकी एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन AIP तकनीक होगी। यह तकनीक पारंपरिक डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों की सबसे बड़ी कमी को दूर करती है। सामान्य पनडुब्बियों को बैटरी चार्ज करने के लिए सतह पर आना पड़ता है या स्नॉर्कल का उपयोग करना पड़ता है जिससे उनका लोकेशन दुश्मनों के लिए पता चल सकता है। AIP तकनीक से लैस पनडुब्बियां हफ्तों तक पानी के भीतर रह सकती हैं कम शोर करती हैं और दुश्मन की नजर से लंबी अवधि तक छिपी रह सकती हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार इन पनडुब्बियों के शामिल होने से हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री निगरानी सुरक्षा और रणनीतिक संतुलन और मजबूत होगा। AIP पनडुब्बियां टॉरपीडो एंटी-शिप मिसाइल क्रूज़ मिसाइल और समुद्री माइन जैसे पारंपरिक हथियारों से लैस होंगी जो उन्हें बेहद खतरनाक और प्रभावी बनाती हैं।प्रधानमंत्री मोदी और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की हालिया बैठक में दोनों नेताओं ने कहा कि भारत-जर्मनी हर क्षेत्र में मिलकर काम कर रहे हैं और यह परियोजना इसके नए अध्याय की शुरुआत है। यह समझौता भारतीय नौसेना की क्षमता को नए स्तर पर ले जाएगा और भारतीय रक्षा उद्योग को तकनीकी रूप से मजबूत बनाएगा।

    मझगांव डॉकयार्ड में इन पनडुब्बियों का निर्माण न केवल भारत की नौसेना की ताकत बढ़ाएगा बल्कि देश के रक्षा क्षेत्र में स्थानीय उत्पादन रोजगार और तकनीकी विशेषज्ञता को भी बढ़ावा देगा। यह परियोजना देश के आत्मनिर्भर भारत मिशन के तहत महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।इस डील को भारतीय नौसेना के इतिहास की सबसे बड़ी पनडुब्बी परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है। रणनीतिक दृष्टि से देखें तो AIP तकनीक वाली पनडुब्बियों की मौजूदा वैश्विक नौसैनिक युद्ध में अहम भूमिका है। इससे भारत की समुद्री ताकत और क्षेत्रीय प्रभुत्व दोनों मजबूत होंगे।

  • सीएम रेखा गुप्ता ने देर रात पीतमपुरा अटल कैंटीन का लिया जायजा, ₹5 में सम्मानजनक भोजन का अनुभव किया

    सीएम रेखा गुप्ता ने देर रात पीतमपुरा अटल कैंटीन का लिया जायजा, ₹5 में सम्मानजनक भोजन का अनुभव किया


    नई दिल्ली। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के 100वें जन्मदिन के अवसर पर दिल्ली में अटल कैंटीन की शुरुआत की गई है। इस कैंटीन में लोगों को मात्र ₹5 में भरपेट और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। दिल्ली सरकार की यह पहल सिर्फ पेट भरने तक सीमित नहीं बल्कि जरूरतमंदों को सम्मान और स्वाभिमान के साथ भोजन देने का संदेश भी देती है।

    बीती रात मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पीतमपुरा स्थित अटल कैंटीन पहुंचीं। उन्होंने वहां काम कर रहे कर्मचारियों से हाल-चाल पूछा और सुनिश्चित किया कि व्यवस्थाएं सुचारु रूप से चल रही हैं। सीएम ने उपस्थित लोगों से पूछा आपको कोई दिक्कत तो नहीं है? सब ठीक है न?। इसके साथ ही उन्होंने कैंटीन में मौजूद बच्चों से भी बातचीत की जिन्होंने बताया कि उन्हें यहां अच्छा और पौष्टिक खाना मिलता है।इस दौरान कैंटीन में खड़े लोगों ने मुख्यमंत्री को देखकर रेखा गुप्ता जिंदाबाद के नारे लगाए जिससे माहौल और उत्साहपूर्ण बन गया। सीएम ने वहां भोजन कर रहे लोगों से उनके अनुभव साझा किए और यह सुनिश्चित किया कि सभी सुविधाएं सही ढंग से उपलब्ध हों।

    मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस दौरे का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी साझा किया। वीडियो में वह लोगों से संवाद करती बच्चों के साथ समय बिताती और उनके अनुभव जानती नजर आ रही हैं। उन्होंने लिखा कि अटल कैंटीन में केवल भोजन ही नहीं मिलता बल्कि लोगों को सुकून सम्मान और स्वाभिमान का भी भरोसा मिलता है।पीतमपुरा अटल कैंटीन का निरीक्षण करते हुए सीएम ने व्यवस्थाओं की समीक्षा की और वहां आए लोगों से उनके अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार की यह योजना मेहनतकश और जरूरतमंद लोगों के लिए प्रभावी और भरोसेमंद सहारा बन रही है। दिन और रात दोनों समय भोजन उपलब्ध कराने से किसी भी व्यक्ति को खाली पेट नहीं रहना पड़ता।

    मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि केवल ₹5 में सम्मान के साथ भोजन मिलने से यह सुनिश्चित होता है कि सहायता केवल सुविधा तक सीमित न रहे बल्कि गरिमा के साथ मिले। लोगों की संतुष्टि और विश्वास देखकर यह स्पष्ट हो गया है कि अटल कैंटीन योजना जमीनी स्तर पर वास्तविक बदलाव ला रही है।अटल कैंटीन की यह पहल गरीब और जरूरतमंदों के लिए भरोसेमंद विकल्प बन चुकी है। यह योजना न केवल पेट भरने की सुविधा देती है बल्कि सम्मान और स्वाभिमान के साथ भोजन उपलब्ध कराने में भी सक्षम है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का यह दौरा योजना की प्रभावशीलता और जनता में विश्वास को और मजबूत करता है।

  • गौरव गोगोई का हिमंता बिस्वा सरमा पर हमला: भ्रष्टाचार और मतदान अधिकारों

    गौरव गोगोई का हिमंता बिस्वा सरमा पर हमला: भ्रष्टाचार और मतदान अधिकारों

    नई दिल्ली| गौरव गोगोई का आरोपअसम कांग्रेस के अध्यक्ष गौरव गोगोई ने मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा पर गंभीर आरोप लगाते हुए उनके शासन में भ्रष्टाचार और कुशासन की बातें की हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासी, अन्य पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति और अल्पसंख्यक समुदायों के मतदान अधिकारों का हनन किया जा रहा है।
    पत्रकारों से बातचीत करते हुए गोगोई ने कहा कि भाजपा के खिलाफ वोट देने वाले लोगों को दोबारा मतदान करने से रोका जा रहा है, जो उनकी डर का संकेत है।

    जुबीन गर्ग हत्याकांड पर सवाल

    गोगोई ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री सरमा जुबीन गर्ग हत्या मामले में न्याय दिलाने में असफल रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरमा अक्सर झूठे और भ्रामक बयान देते हैं, और उनके शब्दों में कोई विश्वसनीयता नहीं है। गोगोई ने कहा कि जुबीन गर्ग मामले में कमजोर चार्जशीट पेश की गई है, और इसमें शामिल लोगों के नाम इसलिए नहीं हैं क्योंकि वे मुख्यमंत्री के करीबी हैं।

    जाति बचाओ, मति बचाओ अभियान

    गौरव गोगोई ने ‘जाति बचाओ, मति बचाओ’ अभियान के तहत गुवाहाटी में एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम में कई सामुदायिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने कांग्रेस में शामिल होने की घोषणा की। शामिल होने वालों में प्रमुख आदिवासी नेता रुकमा कुमार मेडोक और पूर्व अल्पसंख्यक छात्र संघ के अध्यक्ष रेजाउल करीम सरकार शामिल थे।

    तरुण गोगोई की याद

    गोगोई ने अपने दिवंगत पिता और पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई को याद करते हुए कहा कि उन्होंने एक बार असम के राजनीतिक माहौल को बदल दिया था। उन्होंने कहा कि आज असम के लोग फिर से सत्ता पर सवाल उठा रहे हैं। गोगोई ने चेतावनी दी कि वर्तमान सरकार ने भय का माहौल बनाया है और इसे समाप्त करना आवश्यक है।

  • वंदे भारत स्लीपर में बड़ा बदलाव: अब सिर्फ कन्फर्म बर्थ पर होगी यात्रा, RAC और वेटिंग टिकट बंद

    वंदे भारत स्लीपर में बड़ा बदलाव: अब सिर्फ कन्फर्म बर्थ पर होगी यात्रा, RAC और वेटिंग टिकट बंद


    नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने लंबी दूरी की रात की यात्रा को पूरी तरह नया रूप देने की तैयारी कर ली है। अगले सप्ताह देश की पहली वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस पटरी पर उतरने वाली है। रेलवे ने स्पष्ट किया है कि इस ट्रेन में केवल कन्फर्म टिकट पर ही सफर की अनुमति होगी। यानी RAC की सुविधा खत्म हो जाएगी और वेटिंग लिस्ट पर कोई टिकट जारी नहीं किया जाएगा।रेलवे अधिकारियों के अनुसार नई व्यवस्था के तहत जितनी बर्थ सिस्टम में उपलब्ध होंगी उतने ही टिकट बिकेंगे। इसका मतलब है कि अगर बर्थ नहीं मिली तो टिकट बुक ही नहीं होगा। इससे यात्रियों को आधी सीट साझा बर्थ और अनिश्चित यात्रा जैसी परेशानियों से पूरी तरह राहत मिलेगी। अब तक लंबी दूरी की ट्रेनों में RAC का मतलब था कि एक बर्थ पर दो यात्री सफर करें। लेकिन वंदे भारत स्लीपर को प्रीमियम कैटेगरी में रखा गया है जहां रेलवे ने साफ कर दिया है-नो बर्थ नो टिकट।

    किराये की बात करें तो यह ट्रेन सामान्य एक्सप्रेस ट्रेनों की तुलना में थोड़ी महंगी है। रेलवे ने न्यूनतम 400 किलोमीटर की दूरी के लिए बेस चार्ज तय किया है। 3AC की दर लगभग ₹2.40 प्रति किलोमीटर 2AC ₹3.10 प्रति किलोमीटर और 1AC ₹3.80 प्रति किलोमीटर होगी। एसी श्रेणियों में GST अलग से लागू होगा।वंदे भारत स्लीपर की शुरुआत हावड़ा–गुवाहाटी रूट से होगी। रेलवे का दावा है कि यह ट्रेन मौजूदा ट्रेनों की तुलना में लगभग तीन घंटे कम समय में सफर पूरा करेगी। यह पूरी तरह ओवरनाइट ट्रेन होगी रात में रवाना होकर सुबह यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचाएगी।

    आराम और सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया है। ट्रेन में आधुनिक गद्देदार बर्थ कम शोर वाला सस्पेंशन सिस्टम ऑटोमैटिक दरवाजे और एयरोडायनामिक कोच होंगे। सुरक्षा के लिहाज से इसमें कवच एंटी-कोलिजन सिस्टम इमरजेंसी कम्यूनिकेशन सुविधा और उन्नत सैनिटेशन तकनीक दी गई है। रेलवे का कहना है कि यह ट्रेन उन यात्रियों के लिए आदर्श विकल्प है जो रात की यात्रा में प्राइवेसी आराम और समय की बचत चाहते हैं।रेलवे अधिकारियों का मानना है कि वंदे भारत स्लीपर से यात्रियों को लंबी दूरी की यात्रा का नया अनुभव मिलेगा। समय की बचत के साथ-साथ पूरी बर्थ की सुविधा और प्रीमियम सुरक्षा इसे विशेष बनाती है। इसके अलावा यह ट्रेन लंबी दूरी की रात की यात्रा में यात्रियों की सुविधा और संतोष का नया मानक स्थापित करेगी।