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  • महाराष्ट्र निकाय चुनाव में 4 बच्चों की मां का आवेदन स्वीकार, नियमों पर उठे सवाल, अब शरद पवार की पार्टी का क्या होगा?

    महाराष्ट्र निकाय चुनाव में 4 बच्चों की मां का आवेदन स्वीकार, नियमों पर उठे सवाल, अब शरद पवार की पार्टी का क्या होगा?


    महाराष्ट्र । महाराष्ट्र के नागपुर नगर निगम चुनाव में एक महिला उम्मीदवार का आवेदन स्वीकार कर लिया गया है जो चार बच्चों की मां हैं। यह मामला इसलिए विवादित हो गया है क्योंकि राज्य के नियमों के अनुसार दो से अधिक बच्चों वाले उम्मीदवार नगर निगम चुनाव में नहीं भाग ले सकते। इस बार दक्षिण-पश्चिम नागपुर के वार्ड 36 से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की उम्मीदवार पुष्पा मुकेश वाघमारे का नामांकन स्वीकार कर लिया गया, जबकि उनके चार बच्चे हैं।

    नियमों की अनदेखी या प्रशासन की गलती

    महाराष्ट्र में एक कानून के तहत 1995 में लागू किए गए महाराष्ट्र नगर निगम और नगर परिषद नगर पंचायत और औद्योगिक टाउनशिप द्वितीय संशोधन अधिनियम के अनुसार दो से अधिक बच्चों वाले उम्मीदवार नगर निगम चुनावों में भाग नहीं ले सकते। बावजूद इसके पुष्पा वाघमारे का नामांकन स्वीकार किया गया। महिला उम्मीदवार ने खुद अपने एफिडेविट में अपने चार बच्चों का विवरण दिया था और यह जानकारी स्पष्ट रूप से चुनाव अधिकारियों के पास थी, फिर भी उनका आवेदन मंजूर कर लिया गया।पुष्पा वाघमारे ने इस विवाद पर कहा मुझे नियमों के बारे में जानकारी नहीं थी क्योंकि मैं पहली बार चुनाव लड़ रही हूं। मेरा नामांकन स्वीकार कर लिया गया है और मैं अपनी जिम्मेदारी नहीं उठाऊंगी अगर इसमें कोई गलती हुई है। मैं चुनाव में बनी रहूंगी और मुझे बेवजह परेशान नहीं किया जाना चाहिए।

    क्या शरद पवार के लिए यह परेशानी का कारण बनेगा

    यह मामला राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है और सवाल उठने लगे हैं कि क्या यह विवाद NCP के लिए राजनीतिक परेशानी का कारण बनेगा। शरद पवार की पार्टी के तहत इस तरह के नियमों की अनदेखी ने विरोधियों को मौक़ा दिया है। वैसे भी महाराष्ट्र में भाजपा ने 2017 तक लगातार तीन कार्यकालों तक नागपुर नगर निगम पर अपना नियंत्रण बनाए रखा था और अब देखना यह है कि शरद पवार के नेतृत्व में NCP इस विवाद को कैसे संभालती है।

    पुष्पा वाघमारे का समाज में अच्छा प्रभाव

    पुष्पा वाघमारे को उनके क्षेत्र में एक छोटे से कैटरिंग व्यवसायी के रूप में जाना जाता है और वे एक समाजसेवी भी हैं। स्थानीय महिलाओं के बीच उनकी लोकप्रियता है, और उनका दावा है कि उनके क्षेत्र में जल निकासी की समस्या है, जो भारी बारिश के दौरान बाढ़ का कारण बनती है। वे इन समस्याओं को हल करने के लिए चुनाव में उतर रही हैं।

    नागपुर की चुनावी स्थिति और विवाद

    नागपुर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का गृह नगर है। 2017 में हुए नगर निगम चुनाव तक भाजपा ने इस नगर निगम पर लगातार तीन कार्यकालों तक अपना नियंत्रण बनाए रखा था। अब जब NCP ने इस सीट पर अपनी उम्मीदवार उतारी है तो यह मामला और भी संवेदनशील हो गया है। हालांकि यह साफ नहीं है कि प्रशासन की लापरवाही से पुष्पा का नामांकन स्वीकार किया गया या इसे जानबूझकर नज़रअंदाज़ किया गया लेकिन इस घटना ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठा दिए हैं। राजनीतिक हलकों में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या NCP इस विवाद से बचने के लिए जल्दी से कदम उठाएगी या पार्टी इसे अपने चुनावी अभियान का हिस्सा बनाएगी।

  • बीजेपी मुख्यालय में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी CPC के नेताओं से मुलाकात, पार्टी-टू-पार्टी संवाद को मजबूत करने पर चर्चा

    बीजेपी मुख्यालय में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी CPC के नेताओं से मुलाकात, पार्टी-टू-पार्टी संवाद को मजबूत करने पर चर्चा

    नई दिल्ली । सोमवार को दिल्ली स्थित भारतीय जनता पार्टी मुख्यालय में एक अहम बैठक का आयोजन किया गया जिसमें चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के अंतरराष्ट्रीय विभाग की उप-मंत्री सुन हैयान के नेतृत्व में चीनी डेलिगेशन ने भाग लिया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य दोनों राजनीतिक दलों के बीच द्विपक्षीय संवाद को और अधिक प्रभावी और सक्रिय बनाना था।बीजेपी महासचिव अरुण सिंह के नेतृत्व में बीजेपी प्रतिनिधिमंडल ने CPC के साथ पार्टी-टू-पार्टी संवाद को मजबूती देने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की। बीजेपी के विदेश संपर्क विभाग के प्रभारी विजय चौथाईवाले ने इस मुलाकात को महत्वपूर्ण बताया और सोशल मीडिया के माध्यम से इसकी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि दोनों दलों ने राजनीतिक स्तर पर संचार को प्रभावी बनाने के उपायों पर चर्चा की, जिससे दोनों देशों के बीच सहयोग और संवाद को प्रगति मिल सके।

    बैठक में चीन के राजदूत की अहम उपस्थिति

    बीजेपी मुख्यालय में हुई इस बैठक में भारत में चीन के राजदूत जू फेइहोंग की उपस्थिति महत्वपूर्ण रही। उनके साथ चीनी डेलिगेशन ने बैठक में हिस्सा लिया। जू फेइहोंग की उपस्थिति ने इस दौरे को चीन की तरफ से विशेष महत्व देने का संकेत दिया। इस दौरान दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के लिए भविष्य में ऐसे संवादों के निरंतर और नियमित रूप से आयोजन की आवश्यकता पर जोर दिया।

    बैठक का उद्देश्य और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का दृष्टिकोण
    चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की उप-मंत्री सुन हैयान ने बैठक के दौरान कहा कि राजनीतिक दलों के बीच संवाद, आपसी समझ और सहयोग महत्वपूर्ण है। CPC और BJP दोनों ने इस बात पर सहमति जताई कि राजनीतिक दलों के बीच मजबूत संवाद द्विपक्षीय संबंधों को नया दिशा दे सकता है और इससे न केवल दोनों देशों के बीच राजनीतिक बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। यह बैठक उस समय आयोजित की गई है जब भारत और चीन के बीच कई कूटनीतिक चर्चाएं चल रही हैं। इस तरह के दौरों और संवादों के जरिए दोनों देशों के बीच आपसी समझ और विश्वास को बढ़ाया जा सकता है जिससे भविष्य में द्विपक्षीय सहयोग के नए अवसर उत्पन्न हो सकते हैं।

    भारत और चीन के संबंधों में नई दिशा

    यह मुलाकात भारत और चीन के रिश्तों के लिए अहम मानी जा रही है, खासकर जब दोनों देशों के बीच सीमा विवाद और अन्य कूटनीतिक मुद्दों पर तनाव रहा है। इस संवाद के माध्यम से चीन और भारत दोनों ने दिखाया कि वे द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए तैयार हैं और इस दिशा में सहयोग के नए रास्ते तलाशने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
  • बीएमसी चुनाव प्रचार में नितेश राणे का फिर विवादित बयान, मुस्लिम समाज पर की अपमानजनक टिप्पणी

    बीएमसी चुनाव प्रचार में नितेश राणे का फिर विवादित बयान, मुस्लिम समाज पर की अपमानजनक टिप्पणी


    मुंबई । बीएमसी चुनावों के प्रचार के दौरान महाराष्ट्र के बीजेपी नेता और मंत्री नितेश राणे ने एक बार फिर विवादित बयान देकर राजनीति में हलचल मचा दी है। राणे ने मुस्लिम समाज को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की, जिससे चुनावी माहौल और भी गरमा गया है। राणे ने वसई में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा कोई भी हरा सांप हिंदू समाज की तरफ गंदी नजर से देख नहीं सकता। हिंदुओं के त्योहार में कोई मस्ती करने की कोशिश करेगा तो वह वापस शुक्रवार को सरेंडर नहीं कर पाएगा । राणे ने आगे कहा हमें यह गारंटी है कि हम आपके साथ पूरी ताकत से खड़े रहेंगे। इस दौरान उन्होंने आई लव मोहम्मद कहने वालों को पाकिस्तान भेजने की धमकी भी दी और कहा कि शहर का मेयर जय श्रीराम बोलने वाला ही होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि हिंदू समाज को एकजुट होकर पाकिस्तान में बैठे आई लव मोहम्मद’ वालों को वहां भेजना होगा।

    विवादों में घिरे नितेश राणे

    यह पहली बार नहीं है जब नितेश राणे ने इस तरह का विवादित बयान दिया हो। इससे पहले भी उन्होंने ठाकरे परिवार को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं। नितेश राणे ने यह कहा था, ठाकरे भाइयों को वोट देने का मतलब पाकिस्तान में बैठे उनके अब्बा को वोट देना है। उन्होंने हिंदू समाज को सुरक्षित रखने की बात की और कहा कि मुंबई का मेयर हिंदू और मराठी” ही होना चाहिए। राणे के इस बयान के बाद से राजनीति में खलबली मच गई है। उनके बयान को विपक्ष ने आक्रामक ढंग से नकारा और इसे सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की कोशिश करार दिया है। वहीं बीजेपी और हिंदूवादी संगठनों ने इसे हिंदू समाज की सुरक्षा और हित की बात बताया है।

    राजनीतिक गर्मी बढ़ी

    नितेश राणे के बयान के बाद से बीएमसी चुनावों में राजनीति और भी तीव्र हो गई है। जहां एक ओर बीजेपी और हिंदूवादी दल इसे अपनी चुनावी रणनीति के हिस्से के रूप में देख रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे समाज में नफरत फैलाने की कोशिश के रूप में उजागर कर रहा है। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के बयान केवल वोटों के ध्रुवीकरण के लिए दिए जाते हैं, जो चुनावी लाभ के लिए खतरे की घंटी हो सकती है। राणे के इस बयान पर कई नेताओं ने आलोचना की है, लेकिन बीजेपी के भीतर इसे लेकर कोई प्रतिक्रिया देखने को नहीं मिली है। हालांकि, राणे पहले भी ऐसे विवादित बयान दे चुके हैं, जिन्हें बीजेपी की ओर से अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।

  • कर्नाटक में झारखंड के मजदूर को बांग्लादेशी होने के शक में पीटा, महिला ने बचाया; 4 आरोपियों पर मामला दर्ज

    कर्नाटक में झारखंड के मजदूर को बांग्लादेशी होने के शक में पीटा, महिला ने बचाया; 4 आरोपियों पर मामला दर्ज


    झारखंड । कर्नाटक के मंगलुरु में एक झारखंड के प्रवासी मजदूर को कथित तौर पर बांग्लादेशी नागरिक होने के शक में चार लोगों ने बेरहमी से पीटा। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। घटना रविवार को मंगलुरु के बाहरी इलाके कुलूर में हुई, जहां आरोपियों ने मजदूर से उसकी नागरिकता को लेकर सवाल किए और पहचान पत्र दिखाने की मांग की। झारखंड के दिलजान अंसारी पिछले 10 से 15 वर्षों से काम की तलाश में मंगलुरु में रह रहे थे। वह हर साल चार से छह महीने शहर में काम करते हैं।
    अंसारी ने आरोपियों को बार-बार बताया कि वह भारतीय नागरिक हैं, लेकिन आरोपियों ने उनकी बातों को नजरअंदाज किया और उन्हें बांग्लादेशी समझते हुए लगातार परेशान किया। आरोपी अपने शक के आधार पर अंसारी के साथ अपमानजनक व्यवहार करते रहे। इस दौरान एक स्थानीय महिला ने उनकी मदद की और उन्हें आरोपियों के चंगुल से बचाया हालांकि, डर के कारण अंसारी ने शुरू में पुलिस से संपर्क नहीं किया और बिना शिकायत के घर लौट गए। लेकिन बाद में स्थानीय नेताओं ने इस मामले को गंभीरता से लिया और कार्रवाई की मांग की, जिसके बाद पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया।
    मंगलुरु सिटी पुलिस कमिश्नर सुधीर कुमार रेड्डी ने बताया कि सत्यापन के बाद यह पुष्टि हुई कि दिलजान अंसारी भारतीय नागरिक हैं और काम के सिलसिले में मंगलुरु आए थे। पुलिस ने कुलूर के निवासी सागर, धनुष, लालू उर्फ रतीश और मोहन के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। आरोपियों को जल्द गिरफ्तार करने के निर्देश दिए गए हैं और जांच जारी है। यह मामला एक बार फिर यह सवाल उठाता है कि देश में प्रवासी श्रमिकों के प्रति भेदभाव और असहिष्णुता का क्या स्तर है, खासकर उन पर जो बाहरी राज्य से आकर काम करते हैं। पुलिस और स्थानीय प्रशासन की कार्रवाई से यह उम्मीद जताई जा रही है कि आगे से ऐसी घटनाएं नहीं होंगी।

  • सब्जियां, मांस-मछली, अंडा-दाल और मसाले फिर हुए महंगे … खुदरा महंगाई दर में इजाफा

    सब्जियां, मांस-मछली, अंडा-दाल और मसाले फिर हुए महंगे … खुदरा महंगाई दर में इजाफा


    नई दिल्ली।
    बीते महीने के दौरान खुदरा महंगाई दर (Retail inflation rate) में बढ़ोतरी दर्ज की गई है जो बढ़कर 1.33 फीसदी रही है। इससे पहले नवंबर में सीपीआई 0.71 फीसदी थी। वहीं, खाद्य वस्तुओं (Food Items) की महंगाई दर -2.71 फीसदी दर्ज की गई है, जो नवंबर में -3.91 प्रतित रही थी। आंकड़ों से पता चलता है कि सब्जियों, मांस-मछली, अंडा, दाल, मसाले और व्यक्तिगत देखभाल के सामान की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण कुल स्तर पर महंगाई दर में इजाफा हुआ है।

    सोमवार को राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय की तरफ से जारी आंकड़ों से पता चलता है कि नवंबर के मुकाबले दिसंबर में महंगाई दर 0.62 अंकों को बढ़ोतरी हुई है लेकिन उसके बाद भी महंगाई दर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के अनुमान से कम रही है। चालू वित्तीय वर्ष की तीसरी तिमाही में आरबीआई ने महंगाई दर 3.9 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया था।


    इन राज्यों में महंगाई सबसे ज्यादा

    राज्यों के लिहाज से देखा जाए तो केरल में सबसे अधिक महंगाई है। जहां पर बीते महीने औसत महंगाई दर 9.49 फीदी रही है। इसके बाद कर्नाटक का नंबर आता है। जहां पर महंगाई दर 2.99 फीसदी दर्ज की हई है। इसके बाद आंध्र प्रदेश (2.71%), तमिलनाडु (2.67%) और जम्मू-कश्मीर (2.26%) रही है।

    बीते महीने ग्रामीण इलाकों में महंगाई दर बढ़कर 0.76 फीसदी रही, जो नवंबर में 0.10 फीसदी थी। वहीं, शहरी क्षेत्रों में महंगाई बढ़कर 2.03 फीसदी पहुंच गई, जो उससे पहले महीने 1.40 फीसदी थी। इस अवधि में कई क्षेत्रों से जुड़ी महंगाई दर में नरमी भी देखने को मिली है। जैसे मकान (हाउसिंग) की महंगाई 2.86 फीसदी रही है जो एक महीने पहले 2.96 प्रतिशत थी। शिक्षा महंगाई 3.38 से घटकर 3.32 फीसदी रही है। वहीं, स्वास्थ्य महंगाई 3.60 से घटकर 3.43 फीसदी रही है।

    ईंधन और बिजली की महंगाई दर 1.97 फीसदी रही है जो नवंबर में 2.32 प्रतिशत रही थी। जबकि परिवहन और संचार क्षेत्र की महंगाई 0.88 प्रतिशत से घटकर 0.76 फीसदी रही।


    महीने के आधार पर बढ़ी और सालाना आधार पर घटी कीमतें

    अगर महीने के आधार पर देखा जाए तो नवंबर के मुकाबले दिसंबर में सब्जियों, अनाज और मसालों की कीमतें बढ़ी है, लेकिन सालाना आधार पर दिसंबर 2024 के मुकाबले दिसंबर 2025 में कीमतों में गिरावट आई है। सब्जियों के दाम 18.47 प्रतिशत और दालें 15.09 प्रतिशत घट गई। मसालों के दामों में भी 2.15 प्रतिशत और अनाजों में 0.35 प्रतिशत की नरमी रही। हालांकि तेल के दाम 6.75 प्रतिशत, फलों के 6.66 फीसदी और मांस एवं मछलियों के दामों में 5.12 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

  • AC खरीदने का प्लान हैं तो चुकाने पड़ सकते हैं ज्यादा दाम… SBI की ये सेवा भी हो रही महंगी

    AC खरीदने का प्लान हैं तो चुकाने पड़ सकते हैं ज्यादा दाम… SBI की ये सेवा भी हो रही महंगी


    नई दिल्ली।
    दो ऐसी खबरें हैं, जो आपको थोड़ा परेशान कर सकती हैं। अगर आप रूम एयर कंडीशनर (Room Air Conditioner) खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो आने वाले समय में आपको ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है। वहीं, स्टेट बैंक (State Bank) के करोड़ों ग्राहकों के लिए मोबाइल ऐप या इंटरनेट बैंकिंग (Mobile app or internet banking) के जरिए तत्काल भुगतान सेवा (IMPS) महंगे होने जा रही है।

    ब्रोकरेज फर्म इक्विरस की रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2026 से लागू होने वाले नए स्टार-रेटिंग नियमों और लगातार बनी हुई कमोडिटी महंगाई के चलते एसी की कीमतों में 7–8 फीसदी तक बढ़ोतरी होने की संभावना है।

    नए मॉडल्स की कीमतों में इजाफा होने के आसार
    रिपोर्ट में कहा गया है कि नए नियम लागू होने के बाद कंपनियां अपने नए मॉडल्स की कीमतों में इजाफा करेंगी। इसके अलावा अप्रैल–मई 2026 के दौरान कीमतों में एक और बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे पूरे उद्योग में दामों का नया स्तर तय होगा और कंपनियों के मुनाफे पर बना दबाव कुछ हद तक कम होगा।

    उपभोक्ताओं के लिहाज से इसका मतलब यह है कि नए स्टार-रेटेड मॉडल्स पहले से महंगे होंगे। इसी आशंका के चलते बाजार में पहले ही खरीदारी का रुझान दिखने लगा है। रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर में डीलर्स और ग्राहक बड़ी संख्या में पुराने स्टार-रेटिंग वाले मॉडल्स का स्टॉक कर रहे हैं, ताकि नए नियम लागू होने से पहले खरीदारी की जा सके।

    रिपोर्ट में भारतीय रूम एयर कंडीशनर उद्योग के पिछले दो वर्षों के उतार-चढ़ाव का भी जिक्र किया गया है। कैलेंडर वर्ष 2024 में जहां उद्योग ने करीब 40 फीसदी की मजबूत वृद्धि दर्ज की थी, वहीं 2025 उद्योग के लिए चुनौतीपूर्ण रहा। खराब मौसम, जीएसटी बदलाव से जुड़ी बाधाएं, चैनल पर अधिक स्टॉक और आक्रामक ग्राहक सहायता योजनाओं के कारण मांग में अस्थिरता बनी रही और मुनाफे पर दबाव पड़ा।

    आईएमपीएस के जरिए राशि भेजना होगा महंगा
    देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक के करोड़ों ग्राहकों के लिए मोबाइल ऐप या इंटरनेट बैंकिंग के जरिए तत्काल भुगतान सेवा (आईएमपीएस) महंगे होने जा रही है। 15 फरवरी से आईएमपीएस के जरिए ज्यादा रकम भेजने पर चार्ज देना होगा।

    अभी तक यह सेवा ज्यादातर मामलों में मुफ्त थी। बैंक ने साफ किया है कि 25 हजार रुपये तक आईएमपीएस के जरिए ऑनलाइन से पैसे भेजना पहले की तरह बिल्कुल मुफ्त रहेगा, जिससे आम ग्राहकों पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा, लेकिन उससे ज्यादा की धनराशि भेजने पर शुल्क लगेगा।

    बैंक के नए नियमों के हिसाब से ऑनलाइन चैनल के जरिए 25,000 से ज्यादा रकम भेजने पर शुल्क देना होगा। जैसे-जैसे रकम बढ़ेगी, शुल्क भी बढ़ता जाएगा। आईएमपीएस के जरिए 25 हजार से एक लाख रुपये तक भेजने पर दो रुपये शुल्क और उसके ऊपर जीएसटी देनी होगा।

    इसी तरह से एक से दो लाख पर छह फीसदी सेवा शुल्क और ऊपर से जीएसटी अतिरिक्त लगेगी। वहीं, दो से पांच लाख रुपये की धनराशि आईएमपीएस के माध्यम से ट्रांसफर करने पर 10 शुल्क और जीएसटी देना होगा। अगर ग्राहक शाखा से आईएमपीएस करता है तो वहां पहले से ही चार्ज लगता आ रहा है जो आगे भी जारी रहेगा।

    बैंक की तरफ से कहा गया कि वेतन खातों और पेंशन खाताधारकों को आईएमपीएस शुल्क से छूट मिलती रहेगी, जिनमें शौर्य फैमिली पेंशन खाते समेत कई खास खाते शामिल हैं।

  • कॉमनवेल्थ कॉन्फ्रेंस में 42 देशों के प्रतिनिधि लेंगे हिस्सा, बांग्लादेश-पाकिस्तान ने बनाई दूरी

    कॉमनवेल्थ कॉन्फ्रेंस में 42 देशों के प्रतिनिधि लेंगे हिस्सा, बांग्लादेश-पाकिस्तान ने बनाई दूरी


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) गुरुवार को 28वीं कॉमनवेल्थ कॉन्फ्रेंस (Commonwealth Conference) का उद्घाटन करने जा रहा हैं। इस बार इस कॉन्फ्रेंस में 56 में से 42 देशों के प्रतिनिधि शामिल हो सकते हैं। वहीं भारत (India) से चिढ़े बांग्लादेश और पाकिस्तान (Bangladesh and Pakistan) ने इससे दूरी बना ली है। लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला (Lok Sabha Speaker Om Birla) ने कहा कि इस बार सबसे ज्यादा देश इस कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेने वाले हैं। इस बार ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और यूके भी इसमें शामिल होंगे।

    बिड़ला ने कहा कि बांग्लादेश से हो सकता है कि कोई भी इस कॉन्फ्रेंस में शामिल ना हो। वहीं पाकिस्तान भी इसमें हिस्सा नहीं लेगा। यह कॉन्फ्रेंस 14 से 16 जनवरी तक संविधान सदन में होगी। इसमें कम से कम 61 अधिकारी और प्रिसाइडिंग ऑफिसर शामिल होंगे। उन्होंने कहा, यह बहुत ही गर्व का विषय है कि इस बार भारत इस कॉन्फ्रेंस की मेजबानी कर रहा है और इसमें सबसे ज्यादा देश शामिल हो रहे हैं।

    इस कॉन्फ्रेंस में सदस्य देशों को बुलाने के लिए सारे प्रोटोकॉल को अपनाया गया है। सभी सदस्य देशों को समय रहते ही इसकी औपचारिक सूचना दे दी गई थी। उन्हें बाकायदा निमंत्रण भेजा गया। इसके अलावा वेबसाइट पर भी सभी देशों का नमंत्रण पत्र अपलोड किया गया है। इतने सारे देशों ने कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेने की पुष्टि कर दी लेकिन पाकिस्तान और बांगलादेश की ओर से कोई प्रतिक्रिया ही नहीं दी गई।

    अब इस कॉन्फ्रेंस में केवल दो दिन शेष बचे हैं। ऐसे में अब उनके भाग लेने की कोई संभावना नहीं बची है। बता दें कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान की भारत के प्रति चिढ़ और ज्यादा बढ़ गई है। वहीं बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद मोहम्मद यूसुफ की अंतरिम सरकार और इस्लामाबाद में खूब गंठ रही है। बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जा रहा है और भारत के खिलाफ जहर उगला जा रहा है। बांग्लादेश में भी हालात स्थिर नहीं हैं। कुल मिलाकर बांग्लादेश का हाल भी पाकिस्तान के जैसा हो रहा है। ऐसे में दोनों एक दूसरे को खूब भा रहे हैं लेकिन भारत उन्हें फूटी आंख भी नहीं सुहाता है।

  • महाराणा प्रताप सेना का दावा… अजमेर शरीफ दरगाह पहले था शिव मंदिर, कोर्ट से ASI सर्वे की मांग

    महाराणा प्रताप सेना का दावा… अजमेर शरीफ दरगाह पहले था शिव मंदिर, कोर्ट से ASI सर्वे की मांग


    अजमेर।
    अजमेर जिला अदालत (Ajmer District Court) में एक याचिका दायर कर दावा किया गया है कि अजमेर शरीफ दरगाह (Ajmer Sharif Dargah) मूल रूप से एक शिव मंदिर (Shiva Temple) है। महाराणा प्रताप सेना (Maharana Pratap Army) के अध्यक्ष राजवर्धन सिंह परमार द्वारा दाखिल इस याचिका में एएसआई सर्वेक्षण (ASI survey) की मांग की गई है। उनका कहना है कि मंदिर को बदलकर दरगाह बनाया गया था जिसे लेकर वे लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। इससे पहले भी हिंदू सेना ऐसी मांग कर चुकी है।


    महाराणा प्रताप सेना के अध्यक्ष ने डाली अर्जी

    अजमेर की अदालत में महाराणा प्रताप सेना के अध्यक्ष राजवर्धन सिंह परमार ने एक अर्जी दी है। अपनी याचिका में राजवर्धन सिंह ने दावा किया कि अजमेर दरगाह पहले एक शिव मंदिर था जिसे बाद में दरगाह बना दिया गया। उन्होंने कहा कि वह इस बात को लेकर काफी समय से कोशिश कर रहे हैं। इससे पहले राष्ट्रपति को भी एक प्रार्थना पत्र दिया गया था जिसे आगे की कार्रवाई के लिए राजस्थान के मुख्य सचिव को भेज दिया गया है।


    विष्णु गुप्ता भी कर चुके हैं ऐसा ही दावा

    वकील एपी सिंह ने कहा कि यह जगह भगवान शिव को समर्पित एक मंदिर था। यह प्राचीन कालीन स्थल है। याचिका अजमेर की जिला अदालत में पेश की गई है। साल 2024 में हिंदू सेना के अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने भी ऐसी ही एक याचिका दायर की थी जिसमें कहा गया था कि सूफी संत मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह एक मंदिर के ऊपर बनी है। उन्होंने ने भी अदालत से दरगाह को हिंदू मंदिर घोषित करने की मांग की थी।


    पवित्र मुस्लिम स्थलों में शुमार

    बता दें कि अजमेर शरीफ दरगाह को भारत के पवित्र मुस्लिम धर्म स्थलों में गिना जाता है। यह अजमेर का एक मशहूर ऐतिहासिक स्थान है। सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती फारस से 1192 ईस्वी में अजमेर आए थे और 1236 ईस्वी में अपनी मृत्यु तक यहीं रहे। मुगल बादशाह हुमायूं ने उनकी याद में इस दरगाह का निर्माण करवाया था। यहां उनकी मजार मौजूद है। अपने शासन के दौरान मुगल सम्राट अकबर भी हर साल अजमेर की यात्रा पर आता था।

  • मुम्बई में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेश-म्यांमार से आए हजारों मुसलमान…

    मुम्बई में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेश-म्यांमार से आए हजारों मुसलमान…


    मुंबई।
    हाल के दिनों में भारत (India) में घुसपैठियों (Intruders) का मुद्दा काफी गर्म है। असम (Assam ) से लेकर पश्चिम बंगाल (West Bengal) और अन्य सीमावर्ती राज्यों में यही चर्चा में है। एसआईआर (ASI) के जरिए वोटर लिस्ट (Voter list) में सुधार करके घुसपैठियों को बाहर निकालने की कवायद चल रही है। इस बीच मुंबई से एक चौंकाने वाली रिपोर्ट आई है। इसके मुताबिक मुंबई में बड़ी संख्या में मुसलमान (Muslim) बांग्लादेश और म्यांमार (Bangladesh and Myanmar) से अवैध रूप से लोग आकर बसे हुए हैं। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि इन लोगों ने यहां आने के बाद वोटर कार्ड और आधार कार्ड जैसे वैध भारतीय पहचान पत्र बनवा लिए हैं। जिस प्रक्रिया के जरिए इन अवैध प्रवासियों को मुंबई में बसाया जा रहा है, उसे ‘मलवानी पैटर्न’ कहा जाता है।


    कुल 61 इलाके

    रिपोर्ट में बताया गया है कि मुंबई में कुल ऐसे 61 इलाके चिह्नित किए गए हैं, जहां पर अवैध प्रवासी मिले हैं। इस रिपोर्ट के कुल कुल सात हजार से अधिक लोगों से इंटरव्यू किए गए। रिपोर्ट में बताया गया है कि इंटरव्यू में यह सामने आया कि इसमें से 3014 लोगों ने बिना वीजा-पासपोर्ट के ही भारत में एंट्री की। इसमें भी 96 फीसदी लोग मुसलमान हैं जो बांग्लादेश और म्यांमार से भारत में आए हुए हैं। इस रिसर्च को अंजाम देने वाले एक प्रोफेसर ने बताया कि गरीब लोग बांग्लादेश छोड़ देते हैं। वह भारत में आते हैं और यहां आकर जाली दस्तावेज बनवा लेते हैं। यहां पर वो वोटर बन जाते हैं और नगर निकाय, विधानसभा और लोकसभा चुनावों में वोट डालने लगते हैं। ‘ग्रे रेलिजियस नेटवर्क’ के चलते इनकी संख्या में लगातार इजाफा होता जा रहा है।


    एजेंटों की कारगुजारी

    रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अवैध प्रवासियों के पास नकली दस्तावेज आता कहां से है। इसमें बताया गया है कि शहर के अलग-अलग हिस्सों में एजेंट्स हैं। यह लोग सात हजार से लेकर 30 हजार रुपए तक में सभी पहचान पत्र मुहैया करा देते हैं। रिसर्च में शामिल प्रोफेसर ने बताया कि अवैध रूप से भारत आने वाला स्थानीय एजेंट से मिलता है। इसके बाद एजेंट एक तय कीमत पर उन्हें वोटर कार्ड से लेकर आधार और पैन कार्ड तक मुहैया कराता है। उन्होंने कहा कि यह सिस्टम पिछले 12-13 साल से काम कर रहा है। इससे अवैध प्रवासियों के लिए भारत में बसना आसान हो जाता है। एक बार वोटर कार्ड मिल जाने के बाद इनके लिए चीजें काफी आसान हो जाता है।


    स्थानीय नेताओं की कारगुजारी

    रिपोर्ट में यह भी बताया कि मुंबई में छह विधानसभा क्षेत्रों, एक लोकसभा सीट और 56 म्यूनिसिपल वार्डों में इन अवैध वोटरों का असर है। इसके मुताबिक जितने लोगों का सर्वे किया गया, उनमें से 73 फीसदी लोगों के पास वोटर कार्ड मौजूद था। अवैध प्रवासियों को बसाने के लिए किसी दलदली इलाके में एक अवैध बस्ती बसाई जाती है। इसके बाद बिना डोम के मस्जिद बनाई जाती है। स्थानीय प्रभावशाली नेता इनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी उठाते हैं। इसके बाद नकली दस्तावेज तैयार किए जाते हैं। फिर स्थानीय वोटर लिस्ट में बदलाव कर दिया जाता है। फिर उनके फंडिंग का इंतजाम किया जाता है।

  • 10 मिनट में मुंबई बंद बनाम खोखली धमकी: बीएमसी चुनाव से पहले राउत और फडणवीस में जुबानी जंग तेज

    10 मिनट में मुंबई बंद बनाम खोखली धमकी: बीएमसी चुनाव से पहले राउत और फडणवीस में जुबानी जंग तेज


    नई दिल्ली । बृहन्मुंबई महानगरपालिका बीएमसी चुनाव 2026 की आहट के साथ ही महाराष्ट्र की राजनीति का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। शिवसेना यूबीटी के फायरब्रांड नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत के एक ताजा बयान ने राज्य में सियासी घमासान छेड़ दिया है। राउत ने दावा किया कि ठाकरे परिवार की ताकत आज भी इतनी है कि वे मात्र 10 मिनट के भीतर पूरी मुंबई को ठप कर सकते हैं। इस पर पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसे गीदड़ भभकी करार दिया है।

    संजय राउत ने रविवार को एक मीडिया इंटरव्यू के दौरान शिवसेना यूबीटी की सांगठनिक शक्ति का प्रदर्शन करते हुए कहा चुनाव में हार-जीत तो चलती रहती है लेकिन ठाकरे परिवार को कभी खत्म नहीं किया जा सकता। हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि हम आज भी 10 मिनट में मुंबई बंद करा सकते हैं। जब तक ठाकरे परिवार सलामत है तब तक मराठी अस्मिता और मुंबई भी सुरक्षित है। राउत का यह बयान उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के बीच बढ़ती नजदीकियों और आगामी निकाय चुनावों में उनके संभावित गठबंधन की खबरों के बीच आया है।

    मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राउत के इस दावे पर तीखा तंज कसते हुए कहा कि भाजपा ऐसी खोखली धमकियों से डरने वाली नहीं है। 11 जनवरी को एक कार्यक्रम के दौरान फडणवीस ने कहा संजय राउत अपने घर के आसपास का इलाका भी बंद नहीं करा सकते। वह दिन भर सिर्फ सुर्खियों में रहने के लिए ऐसे बयान देते हैं। मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि एक दौर था जब स्वर्गीय बालासाहेब ठाकरे के एक इशारे पर मुंबई दो घंटे में बंद हो जाती थी, लेकिन अब शिवसेना यूबीटी के पास वैसी ताकत और जनाधार नहीं बचा है।

    फडणवीस ने साल 2022 के राजनीतिक घटनाक्रम को याद दिलाते हुए कहा कि जब एकनाथ शिंदे ने बगावत की थी तब भी यूबीटी नेताओं ने दावा किया था कि शिंदे मुंबई में कदम नहीं रख पाएंगे। उन्होंने कहा इसके बावजूद शिंदे 50 विधायकों के साथ मुंबई आए खुलेआम सड़कों से होते हुए राजभवन गए और सरकार बनाई। राउत के दावे जमीन से कोसों दूर हैं। 2026 के बीएमसी चुनाव को लेकर छिड़ी इस जंग ने साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में मुंबई की सत्ता पर काबिज होने के लिए राजनीतिक दल पूरी ताकत झोंकने वाले हैं। जहाँ एक ओर राउत कार्ड और ठाकरे परिवार की विरासत का हवाला दे रहे हैं वहीं फडणवीस और महायुति सरकार इसे बदलते वक्त की राजनीति बताकर चुनौती दे रही है।