Category: National

  • विश्व स्वास्थ्य दिवस 2026: स्वस्थ जीवन के लिए जागरूकता और इस बार की खास थीम

    विश्व स्वास्थ्य दिवस 2026: स्वस्थ जीवन के लिए जागरूकता और इस बार की खास थीम

    नई दिल्ली। हर साल 7 अप्रैल को दुनिया भर में विश्व स्वास्थ्य दिवस 2026 मनाया जाता है। यह दिन न सिर्फ स्वास्थ्य के महत्व को समझाने का अवसर है, बल्कि लोगों को एकजुट होकर बेहतर भविष्य बनाने के लिए प्रेरित भी करता है। साल 2026 में इस दिवस की थीम है -“स्वास्थ्य के लिए एकजुट, विज्ञान के साथ खड़े रहें”, जो आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत को दर्शाती है।

    1948 से शुरू हुई जागरूकता की परंपरा

    विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की स्थापना 7 अप्रैल 1948 को हुई थी, और इसी के उपलक्ष्य में हर साल यह दिन मनाया जाता है। इस दिन दुनिया भर में स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होती है और लोगों को जागरूक किया जाता है कि वे अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहें।

    इस साल की थीम: विज्ञान और सहयोग पर जोर

    साल 2026 की थीम “स्वास्थ्य के लिए एकजुट, विज्ञान के साथ खड़े रहें” के जरिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि बेहतर स्वास्थ्य के लिए विज्ञान और सहयोग दोनों जरूरी हैं। यह थीम “वन हेल्थ” सिद्धांत पर आधारित है, जिसमें इंसान, जानवर और पर्यावरण के स्वास्थ्य को एक-दूसरे से जुड़ा माना गया है।

    सालभर चलेगा वैश्विक अभियान

    इस बार यह अभियान सिर्फ एक दिन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे साल चलेगा। इसका उद्देश्य वैज्ञानिक खोजों को वास्तविक जीवन में लागू करना और उन्हें आम लोगों तक पहुंचाना है। अभियान के तहत लोगों, सरकारों, वैज्ञानिकों और स्वास्थ्यकर्मियों को साथ मिलकर काम करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

    दो बड़े अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों से शुरुआत

    इस वैश्विक पहल की शुरुआत 7 अप्रैल को दो प्रमुख आयोजनों के साथ होगी। पहला कार्यक्रम फ्रांस की जी7 अध्यक्षता में आयोजित “वन हेल्थ शिखर सम्मेलन” है। दूसरा एक बड़ा वैश्विक मंच है, जिसमें विश्व स्वास्थ्य संगठन के सहयोगी केंद्रों से जुड़े 80 से अधिक देशों के लगभग 800 वैज्ञानिक संस्थान भाग ले रहे हैं। ये दोनों आयोजन मिलकर दुनिया का एक विशाल वैज्ञानिक नेटवर्क तैयार करेंगे।

    नई चुनौतियों से निपटने में विज्ञान की भूमिका

    आज के दौर में महामारी, जलवायु परिवर्तन और एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस जैसी चुनौतियां तेजी से बढ़ रही हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन का मानना है कि इन समस्याओं का समाधान केवल विज्ञान और शोध के जरिए ही संभव है। इसलिए लोगों से अपील की गई है कि वे विज्ञान पर भरोसा रखें और उसका समर्थन करें।

    सोशल मीडिया पर भी जुड़ने का आह्वान

    इस अभियान के तहत लोगों को अपनी कहानियां साझा करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है कि कैसे विज्ञान ने उनके जीवन को बेहतर बनाया। सोशल मीडिया पर #StandWithScience और #WorldHealthDay जैसे हैशटैग के जरिए वैश्विक स्तर पर चर्चा को बढ़ावा दिया जा रहा है।

    एकजुटता से ही बनेगा स्वस्थ भविष्य

    इस साल का संदेश साफ है-स्वास्थ्य की रक्षा के लिए हमें एकजुट होना होगा और विज्ञान के साथ खड़ा रहना होगा। अगर दुनिया मिलकर प्रयास करे, तो एक स्वस्थ, सुरक्षित और समृद्ध भविष्य का निर्माण संभव है।

  • शिमला के राम मंदिर में ‘निकाह’ को लेकर विवाद, हिंदू संगठनों का विरोध

    शिमला के राम मंदिर में ‘निकाह’ को लेकर विवाद, हिंदू संगठनों का विरोध


    शिमला। शिमला में राम मंदिर परिसर में प्रस्तावित एक निकाह समारोह को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। हिंदू संगठनों ने मंदिर के हॉल में मुस्लिम परिवार के विवाह समारोह की बुकिंग पर आपत्ति जताते हुए विरोध की चेतावनी दी है। यह मामला पहले से चर्चा में रहे संजौली मस्जिद विवाद के बाद सामने आया है, जिससे शहर में धार्मिक बहस तेज हो गई है।

    हॉल बुकिंग से शुरू हुआ विवाद

    राम बाजार स्थित मंदिर के हॉल में 11 अप्रैल को प्रस्तावित निकाह की जानकारी सामने आने के बाद हिंदू संघर्ष समिति ने विरोध दर्ज कराया।

    समिति का कहना है कि मंदिर परिसर में इस तरह का आयोजन धार्मिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है। संगठन ने मंदिर प्रबंधन से कार्यक्रम रद्द करने की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है।

    सूद सभा की बैठक आज

    मंदिर परिसर का संचालन करने वाली सूद सभा के अध्यक्ष राजीव सूद ने बताया कि इस मुद्दे पर मंगलवार को आपात बैठक बुलाई गई है।

    उन्होंने कहा कि सभी समुदायों की भावनाओं का सम्मान करते हुए निर्णय लिया जाएगा। उनके अनुसार पिछले पांच वर्षों में 15 से अधिक मुस्लिम परिवारों के निकाह इसी हॉल में हो चुके हैं और परिसर में मांस, मछली व मदिरा पर पहले से प्रतिबंध है।

    पहले भी हो चुका है विवाद

    अक्टूबर 2024 में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मंदिर परिसर में साईं बाबा की मूर्ति पर आपत्ति जताते हुए कार्यक्रम का बहिष्कार किया था। इसके बाद यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहा।

    शहर का प्रमुख धार्मिक केंद्र

    राम बाजार में स्थित यह मंदिर शिमला का प्रमुख धार्मिक और सामाजिक स्थल माना जाता है। मंदिर की बहुमंजिला इमारत के ऊपरी तल पर भगवान राम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान की मूर्तियां स्थापित हैं, जबकि नीचे बने बड़े हॉल में वर्षों से सामाजिक कार्यक्रम आयोजित होते रहे हैं।
    अब सबकी नजर सूद सभा की बैठक पर है, जिसमें तय होगा कि प्रस्तावित निकाह समारोह को अनुमति दी जाएगी या नहीं।

  • अंबानी को बड़ा झटका, अडानी को फायदा; अमीरों की रैंकिंग में बदली तस्वीर

    अंबानी को बड़ा झटका, अडानी को फायदा; अमीरों की रैंकिंग में बदली तस्वीर

    नई दिल्‍ली। रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी को एक ही दिन में करीब 2.59 अरब डॉलर का नुकसान हुआ, जबकि गौतम अडानी की संपत्ति में 2.50 अरब डॉलर की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस उतार-चढ़ाव का असर ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स की रैंकिंग पर भी पड़ा—अडानी 23वें से 22वें स्थान पर पहुंच गए, जबकि अंबानी 18वें से 19वें पायदान पर खिसक गए।

    रिलायंस शेयर गिरने से अंबानी को नुकसान
    सोमवार को रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर सेंसेक्स में टॉप लूजर रहा। कंपनी का स्टॉक 3.41% गिरकर 1304.75 रुपये पर बंद हुआ। चूंकि अंबानी की कुल संपत्ति का बड़ा हिस्सा रिलायंस के शेयरों से जुड़ा है, इसलिए उनकी नेटवर्थ घटकर 88.4 अरब डॉलर रह गई।

    उसी दिन सबसे ज्यादा नुकसान झेलने वालों में एलन मस्क पहले स्थान पर रहे, जिनकी संपत्ति 5.52 अरब डॉलर कम हुई।

    अडानी समूह के शेयरों में तेजी

    दूसरी ओर अडानी समूह की अधिकतर कंपनियों के शेयरों में तेजी आई, जिससे गौतम अडानी की कुल संपत्ति बढ़कर 78.2 अरब डॉलर हो गई।

    टॉप गेनर में कौन-कौन

    सोमवार को जिन अरबपतियों की संपत्ति बढ़ी, उनमें लैरी पेज पहले स्थान पर रहे। उनकी दौलत 2.87 अरब डॉलर बढ़कर 257 अरब डॉलर हो गई।
    इसके बाद जेफ बेजोस (2.62 अरब डॉलर की बढ़ोतरी, कुल 235 अरब डॉलर) और सर्गेई ब्रिन (2.61 अरब डॉलर की बढ़त, कुल 239 अरब डॉलर) रहे।

    टॉप लूजर की सूची

    टॉप लूजर में एलन मस्क के बाद मुकेश अंबानी दूसरे स्थान पर रहे। इसके अलावा जेंग युकुन को 2.17 अरब डॉलर का नुकसान हुआ, जबकि लैरी एलिसन की संपत्ति 1.21 अरब डॉलर घटकर 194 अरब डॉलर रह गई।
    शेयर बाजार की हलचल ने एक ही दिन में अमीरों की रैंकिंग बदल दी—अंबानी का रुतबा थोड़ा घटा तो अडानी की स्थिति मजबूत हो गई।

  • क्या बीजेपी में जाएंगे राघव चड्ढा? राज्यसभा सीट पर भी उठे सवाल, जानें क्या कहते हैं नियम

    क्या बीजेपी में जाएंगे राघव चड्ढा? राज्यसभा सीट पर भी उठे सवाल, जानें क्या कहते हैं नियम

    नई दिल्ली। राघव चड्ढा और आम आदमी पार्टी के बीच बढ़ती खींचतान के बीच उनकी राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। पार्टी ने उन्हें राज्यसभा में उपनेता पद से हटा दिया है और आरोप लगाया है कि वह संसद में नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ मुखर नहीं हो रहे। साथ ही पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय से यह भी कहा है कि उन्हें पार्टी कोटे से बोलने का समय न दिया जाए।

    इसी बीच उनके भारतीय जनता पार्टी में जाने की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

    मोदी विरोधी पोस्ट हटाने का दावा

    दिल्ली AAP प्रमुख सौरभ भारद्वाज ने दावा किया कि राघव चड्ढा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी की आलोचना वाले पुराने पोस्ट हटा दिए हैं। इसके बाद उनके राजनीतिक रुख को लेकर सवाल और गहरे हो गए।

    क्या बीजेपी में शामिल होंगे?

    इस पूरे विवाद के बाद दो बड़े सवाल उठ रहे हैं—क्या राघव चड्ढा बीजेपी में जाएंगे और यदि ऐसा होता है तो उनकी राज्यसभा सदस्यता पर क्या असर पड़ेगा? फिलहाल दोनों सवालों पर कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है।

    दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अपना राजनीतिक भविष्य तय करना राघव चड्ढा के हाथ में है। इसे बीजेपी की ओर से “दरवाजे खुले” रखने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि पार्टी ने औपचारिक तौर पर कोई प्रस्ताव नहीं दिया है।

    क्या सुरक्षित है राज्यसभा सीट?

    राघव चड्ढा का राज्यसभा कार्यकाल 2028 तक है। ऐसे में पार्टी उन्हें सीधे तौर पर सांसद पद से नहीं हटा सकती। पार्टी केवल संगठनात्मक पदों से हटाने का अधिकार रखती है, जो किया जा चुका है।

    कब जा सकती है सदस्यता?

    संविधान की दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के तहत किसी सांसद की सदस्यता दो स्थितियों में जा सकती है—

    यदि वह स्वेच्छा से पार्टी छोड़ दे।
    यदि वह सदन में पार्टी के व्हिप का उल्लंघन करे।

    अदालतों ने यह भी माना है कि केवल औपचारिक इस्तीफा जरूरी नहीं होता, बल्कि किसी दूसरी पार्टी के समर्थन में सार्वजनिक गतिविधियां भी “स्वेच्छा से पार्टी छोड़ने” का संकेत मानी जा सकती हैं।

    पहले भी हो चुका है ऐसा मामला

    2017 में शरद यादव और अली अनवर को राज्यसभा से अयोग्य घोषित किया गया था। जनता दल (यूनाइटेड) ने उनके विपक्षी कार्यक्रमों में शामिल होने को दल-बदल का आधार बनाया था।

    अंतिम फैसला किसके पास?

    किसी सांसद की सदस्यता खत्म करने का अधिकार राज्यसभा के सभापति के पास होता है, जो देश के उपराष्ट्रपति होते हैं। वर्तमान में यह पद सी.पी. राधाकृष्णन के पास है।

    सुप्रीम कोर्ट की समयसीमा

    सुप्रीम कोर्ट ने 2023 में कहा था कि दल-बदल से जुड़े मामलों का निपटारा आदर्श रूप से तीन महीने में होना चाहिए, हालांकि इसके लिए कोई कानूनी समयसीमा तय नहीं है।
    कुल मिलाकर, राघव चड्ढा की राज्यसभा सदस्यता फिलहाल सुरक्षित मानी जा रही है। लेकिन यदि वह पार्टी छोड़ते हैं या विरोधी दल के साथ सक्रिय भूमिका निभाते हैं, तो दल-बदल कानून के तहत उनकी सीट पर खतरा बन सकता है।

  • होर्मुज से भारत को राहत, ईरान ने दी सुरक्षित आवाजाही की गारंटी; भारत की भूमिका की भी सराहना

    होर्मुज से भारत को राहत, ईरान ने दी सुरक्षित आवाजाही की गारंटी; भारत की भूमिका की भी सराहना

    तेहरान। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। मोहम्मद फतहली ने कहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भारत समेत मित्र देशों के जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए ईरान ने विशेष इंतजाम किए हैं।
    हाल के दिनों में कई भारतीय पोत सुरक्षित रूप से इस मार्ग से गुजर चुके हैं।

    राजदूत ने स्पष्ट किया कि यह जलडमरूमध्य केवल उन देशों के लिए बंद है, जो ईरान के साथ युद्ध में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, ईरान और ओमान के क्षेत्रीय जल क्षेत्र में आता है और इसके प्रबंधन से जुड़े फैसले तेहरान और मस्कट के अधिकार क्षेत्र में हैं। ईरान ने हमेशा अंतरराष्ट्रीय शिपिंग की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है।

    भारत निभा सकता है अहम भूमिका

    राजदूत फतहली ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष को समाप्त करने में भारत प्रभावी भूमिका निभा सकता है।

    उन्होंने बातचीत और संयम बरतने की भारत की अपील को जिम्मेदाराना बताते हुए उसकी सराहना की। उनके मुताबिक, मौजूदा हालात में भारत जैसे देशों का संतुलित रुख बेहद अहम है।

    उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि स्वतंत्र देश अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों की निंदा करेंगे। ईरान ने दोहराया कि वह युद्ध नहीं चाहता और संघर्ष शुरू करने का उसका कोई इरादा नहीं है।

    चाबहार परियोजना पर जोर

    राजदूत ने कहा कि चाबहार पोर्ट जैसे क्षेत्रीय प्रोजेक्ट एकतरफा प्रतिबंधों से प्रभावित नहीं होने चाहिए। यह परियोजना क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बढ़ाने के साथ-साथ मध्य एशिया तक भारत की पहुंच मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इस संबंध में ईरान लगातार भारतीय पक्ष के संपर्क में है।

    युद्ध से ईरान में बढ़ी एकजुटता

    फतहली के अनुसार, मौजूदा संघर्ष के दौरान ईरानी जनता पहले से अधिक एकजुट हुई है और बाहरी दबाव के खिलाफ सरकार का समर्थन कर रही है। उन्होंने कहा कि अमेरिका की नीति में बदलाव उसके गलत आकलन को दर्शाता है।

    अमेरिका पर साधा निशाना

    राजदूत ने दावा किया कि अमेरिका तीन स्तरों—ईरान की नेतृत्व क्षमता, जनता और सैन्य शक्ति—के आकलन में असफल रहा है। उन्होंने उभरते मंच ब्रिक्स के महत्व पर भी जोर दिया और सदस्य देशों से जिम्मेदार रवैया अपनाने का आग्रह किया।

    ट्रंप और नेतन्याहू की बयानबाजी पर प्रतिक्रिया

    राजदूत ने डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू के बयानों की आलोचना करते हुए कहा कि ईरान की सभ्यता हजारों साल पुरानी है और वह किसी भी स्थिति में “पत्थर युग” में नहीं जाएगा। उन्होंने नागरिक ठिकानों पर हमलों को अमानवीय बताते हुए इसे हताशा का संकेत बताया।

    कुल मिलाकर, ईरान ने साफ किया है कि होर्मुज से भारतीय जहाजों की आवाजाही सुरक्षित रहेगी और क्षेत्रीय तनाव कम करने में भारत की भूमिका अहम मानी जा रही है।

  • NCERT के विवादित चैप्टर पर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे विशेषज्ञ, CJI सूर्यकांत के सामने रखा पक्ष

    NCERT के विवादित चैप्टर पर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे विशेषज्ञ, CJI सूर्यकांत के सामने रखा पक्ष

    नई दिल्ली। एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तक में न्यायपालिका से जुड़े विवादित अध्याय पर घिरे तीन शिक्षाविदों ने अब सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। मामले की सुनवाई सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष हुई, जहां विशेषज्ञों ने कहा कि अध्याय का मसौदा किसी एक व्यक्ति ने नहीं, बल्कि सामूहिक प्रक्रिया से तैयार किया गया था।

    विशेषज्ञों ने क्या कहा

    याचिका में मिशेल डैनिनो, सुपर्णा दिवाकर और आलोक प्रसन्न कुमार की ओर से दलील दी गई कि उन्हें “अविश्वसनीय” बताना उचित नहीं है और उनकी पेशेवर विश्वसनीयता प्रभावित हुई है। उन्होंने अदालत से पूरी प्रक्रिया सामने रखने का मौका मांगा।

    आलोक प्रसन्न कुमार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि पिछली टिप्पणियों से शिक्षाविदों को नुकसान हुआ है और वे संदर्भ स्पष्ट करना चाहते हैं। वहीं सुपर्णा दिवाकर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जे साई दीपक ने कहा कि पाठ्य सामग्री तैयार करना सामूहिक निर्णय की प्रक्रिया थी।

    कोर्ट ने क्या कहा

    पीठ ने आवेदन रिकॉर्ड में लेने का निर्देश दिया और दो सप्ताह बाद सुनवाई तय की। अदालत ने यह भी दर्ज किया कि संशोधित अध्याय की समीक्षा के लिए एक समिति बनाई गई है, जिसमें इंदु मल्होत्रा, के.के. वेणुगोपाल और प्रकाश सिंह शामिल हैं।

    समिति राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी के सहयोग से काम करेगी, जिसकी अध्यक्षता अनिरुद्ध बोस कर रहे हैं।

    पहले दिया था संबंध तोड़ने का निर्देश

    इससे पहले 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों को तीनों विशेषज्ञों से संबंध खत्म करने का निर्देश दिया था। अदालत ने कहा था कि विवादित सामग्री से न्यायपालिका की नकारात्मक छवि प्रस्तुत होती है।

    माफी भी दायर

    मामले में दिनेश प्रसाद सकलानी ने बिना शर्त माफी का हलफनामा दाखिल किया। इससे पहले अदालत ने विवादित अध्याय वाले प्रकाशन, पुनर्मुद्रण और डिजिटल प्रसार पर भी रोक लगा दी थी।
    अब इस मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी, जिसमें विशेषज्ञों की दलीलों पर विस्तार से विचार किया जाएगा।

  • बारामती में चुनावी संग्राम! सुनेत्रा पवार का जोरदार हमला, पार्थ के बयान पर बवाल

    बारामती में चुनावी संग्राम! सुनेत्रा पवार का जोरदार हमला, पार्थ के बयान पर बवाल

    पुणे। महाराष्ट्र के पुणे जिले की बारामती विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। नामांकन दाखिल करते हुए राज्य की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने स्पष्ट किया कि वह अपने दिवंगत पति अजित पवार के विकास कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।

    नामांकन के दौरान एनसीपी के कई वरिष्ठ नेता जैसे सुनील तटकरे, प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबल, धनंजय मुंडे और हसन मुश्रीफ मौजूद रहे। वहीं, महायुति गठबंधन के सहयोगी दलों से एकनाथ शिंदे और भाजपा नेता चंद्रशेखर बावनकुले भी उनके साथ नजर आए।

    बारामती की जनता को संबोधित करते हुए सुनेत्रा पवार ने भावुक अपील की। उन्होंने कहा कि जिस तरह लोगों ने वर्षों तक अजित पवार को समर्थन दिया, उसी तरह अब उन्हें भी सहयोग दें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि बारामती का विकास रुकेगा नहीं, किसानों को पानी मिलता रहेगा और महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही उन्होंने कहा कि अजित पवार का निधन उनके परिवार के साथ-साथ पूरे राज्य के लिए बड़ी क्षति है।

    इस दौरान उन्होंने अपने ससुर शरद पवार का जिक्र करते हुए कहा कि वह एक मजबूत राजनीतिक विरासत से आती हैं और अब जिम्मेदारी संभालने के लिए तैयार हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस ने इस सीट से आकाश मोरे को मैदान में उतारा है। हालांकि, सत्ताधारी गठबंधन इस चुनाव को निर्विरोध कराना चाहता था, लेकिन कांग्रेस ने मुकाबले का फैसला लिया है।

    चुनाव को लेकर बयानबाजी भी तेज हो गई है। एनसीपी नेता पार्थ पवार ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी को इसके परिणाम भुगतने होंगे। इस पर शरद पवार ने नाराजगी जताते हुए कहा कि राजनीति में ऐसे बयानों के लिए परिपक्वता जरूरी होती है और कांग्रेस को चुनाव लड़ने का पूरा अधिकार है। जवाब में कांग्रेस ने पार्थ पवार को ‘अकृतज्ञ बेटा’ बताते हुए तीखा पलटवार किया और कहा कि सत्ता के सामने झुकने वालों को दूसरों पर टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है।

    यह उपचुनाव 28 जनवरी को हुए एक विमान हादसे में अजित पवार के निधन के बाद हो रहा है। इसके बाद 31 जनवरी को सुनेत्रा पवार को महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री बनाया गया। अब वह बारामती से चुनाव लड़कर इस राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं।

  • J&K में झीलों पर संकट: 45% गायब, 29% सिकुड़ीं, CAG रिपोर्ट ने खोली संरक्षण तंत्र की पोल

    J&K में झीलों पर संकट: 45% गायब, 29% सिकुड़ीं, CAG रिपोर्ट ने खोली संरक्षण तंत्र की पोल

    श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में झीलों के तेजी से घटते अस्तित्व को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताजा ऑडिट रिपोर्ट ने चिंताजनक स्थिति उजागर की है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 1967 में मौजूद 697 झीलों में से 45 प्रतिशत यानी 315 झीलें पूरी तरह समाप्त हो चुकी हैं, जबकि 29 प्रतिशत यानी 203 झीलों का जल क्षेत्र काफी सिकुड़ गया है।

    2017-18 से 2021-22 के बीच किए गए ऑडिट में सामने आया कि कुल 518 झीलों के क्षेत्रफल में 2,851.26 हेक्टेयर की कमी आई है। यह गिरावट पारिस्थितिकी तंत्र, जैव विविधता और जल संसाधनों के लिए गंभीर खतरे का संकेत देती है। आंकड़ों के मुताबिक 1,537.07 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली 315 झीलें पूरी तरह खत्म हो चुकी हैं, जबकि 203 झीलों का क्षेत्रफल 1,314.19 हेक्टेयर घटा है।

    हालांकि 150 झीलों के क्षेत्र में 538.22 हेक्टेयर की वृद्धि और 29 झीलों में कोई बदलाव नहीं पाया गया, फिर भी कुल मिलाकर झीलों के घटते दायरे ने पर्यावरणीय संतुलन को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। खास बात यह है कि जिन 203 झीलों का जल क्षेत्र कम हुआ है, उनमें से 63 झीलों का क्षेत्रफल 50 प्रतिशत या उससे अधिक घट चुका है, जिससे उनके पूरी तरह खत्म होने का खतरा बढ़ गया है।
    हालांकि 150 झीलों के क्षेत्र में 538.22 हेक्टेयर की वृद्धि और 29 झीलों में कोई बदलाव नहीं पाया गया, फिर भी कुल मिलाकर झीलों के घटते दायरे ने पर्यावरणीय संतुलन को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। खास बात यह है कि जिन 203 झीलों का जल क्षेत्र कम हुआ है, उनमें से 63 झीलों का क्षेत्रफल 50 प्रतिशत या उससे अधिक घट चुका है, जिससे उनके पूरी तरह खत्म होने का खतरा बढ़ गया है।

    रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि जम्मू-कश्मीर सरकार का संरक्षण प्रयास सीमित दायरे में ही सिमटा रहा। केवल छह प्रमुख झीलों डल झील, वुलर झील, होकरसर, मानसबाल झील, सुरिनसर झील और मानसर झील के लिए ही संरक्षण और प्रबंधन योजनाएं बनाई गईं। बाकी 691 झीलों के लिए न तो कोई ठोस योजना तैयार की गई और न ही पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की योजनाओं का लाभ उठाने की पहल की गई।

    2017 से 2022 के बीच कुल कैपेक्स बजट का लगभग एक प्रतिशत, यानी 560.65 करोड़ रुपये, केवल इन छह झीलों पर ही खर्च किया गया। रिपोर्ट ने साफ संकेत दिया है कि व्यापक और समग्र संरक्षण नीति के अभाव में प्रदेश की झीलें तेजी से संकट की ओर बढ़ रही हैं।

  • ISI की बड़ी साजिश का खुलासा, भारत में दहशत फैलाने की थी योजना, जानिए जांच में क्‍या हुए खुलासे

    ISI की बड़ी साजिश का खुलासा, भारत में दहशत फैलाने की थी योजना, जानिए जांच में क्‍या हुए खुलासे


    नई दिल्ली।
    पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की एक बड़ी साजिश का खुलासा हुआ है, जिसमें भारत में बड़े पैमाने पर दहशत फैलाने की योजना बनाई गई थी। पुलिस सूत्रों के अनुसार, आतंकी मॉड्यूल को दिल्ली सहित देश के किसी एक स्थान पर 100 से अधिक राउंड गोलियां चलाने का निर्देश दिया गया था, ताकि भय का माहौल पैदा किया जा सके।

    जांच में हुए ये खुलासे
    जांच में सामने आया है कि अवैध हथियारों की सप्लाई करने वाला मुख्य आरोपी शाहबाज अंसारी बांग्लादेश में बैठकर पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा था। उसका पारिवारिक बैकग्राउंड भी हथियार तस्करी से जुड़ा रहा है। इस मॉड्यूल के जरिए आईएसआई का उद्देश्य भारत में अशांति और डर फैलाना था।

    वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इस नेटवर्क को धार्मिक आयोजनों, त्योहारों और बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों को निशाना बनाने का टारगेट दिया गया था। अपराध शाखा के एक अधिकारी ने बताया कि शाहबाज का भाई दुबई में आईएसआई अधिकारियों के संपर्क में आया, जिसके बाद इस नेटवर्क की कड़ियां मजबूत हुईं। पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स के निर्देश पर भारत में हथियार भेजे जा रहे थे।

    डीसीपी संजीव कुमार यादव के अनुसार, आरोपी इमरान और कामरान इस अवैध हथियार सप्लाई मॉड्यूल के सक्रिय सदस्य थे और शाहबाज अंसारी के निर्देश पर काम कर रहे थे। दोनों नेपाल जाकर हथियारों की खेप लाते थे, जिन्हें सीमा पार गुप्त रास्तों से भारत में पहुंचाया जाता था। पुलिस से बचने के लिए हथियारों को अलग-अलग हिस्सों में तोड़कर लाया जाता था और फिर सुरक्षित ट्रांजिट पॉइंट्स के जरिए सप्लाई किया जाता था।

    दूध डेयरी की आड़ में अवैध हथियारों का कारोबार
    जांच में यह भी सामने आया कि इमरान, जो उत्तर प्रदेश के सिकंदराबाद का रहने वाला है, अपने भाई के साथ दूध डेयरी की आड़ में अवैध हथियारों के कारोबार को अंजाम दे रहा था। वहीं कामरान, जो बुलंदशहर में चूड़ी की दुकान पर काम करता था, इस नेटवर्क में सक्रिय भूमिका निभा रहा था। दोनों ही आरोपी शाहबाज अंसारी के करीबी रिश्तेदार हैं और उसके निर्देशों का पालन करते थे।

    नेटवर्क की अहम कड़ी था शाहबाज अंसारी
    पुलिस के अनुसार, फरार शाहबाज अंसारी इस पूरे नेटवर्क की अहम कड़ी था, जो विदेश में बैठे आकाओं और भारत-नेपाल-पाकिस्तान में काम कर रहे गुर्गों के बीच समन्वय स्थापित करता था। हथियारों की तस्करी का रूट भी बेहद सुनियोजित था—पहले पाकिस्तान से खरीद, फिर थाईलैंड के रास्ते नेपाल भेजना और अंत में भारत में अवैध रूप से पहुंचाना।

  • भारत के टेक्सटाइल सेक्टर तेजी से कर रहा विस्तार… 14 साल में 3 गुना बढ़ा कपड़ा मार्केट

    भारत के टेक्सटाइल सेक्टर तेजी से कर रहा विस्तार… 14 साल में 3 गुना बढ़ा कपड़ा मार्केट


    नई दिल्ली।
    भारत (India) का कपड़ा और अपैरल बाजार (Textile and Apparel Market) तेजी से विस्तार कर रहा है और इसकी झलक हाल ही में जारी रिपोर्ट में साफ दिखाई देती है। वस्त्र मंत्रालय के सर्वे के अनुसार, देश का टेक्सटाइल मार्केट (Textile market) 2024 में बढ़कर 14.95 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो 2010 में सिर्फ 4.89 लाख करोड़ रुपये था, यानी पिछले करीब 14 साल में इस सेक्टर ने शानदार ग्रोथ दिखाई है और यह हर साल औसतन 8.3% की दर से बढ़ा है। इस तेजी के पीछे सबसे बड़ी वजह घरेलू मांग में लगातार इजाफा है। जैसे-जैसे लोगों की आय बढ़ रही है और लाइफस्टाइल बदल रहा है, वैसे-वैसे कपड़ों पर खर्च भी बढ़ता जा रहा है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, आज के समय में सिंथेटिक और मिक्स फाइबर वाले कपड़ों की मांग सबसे ज्यादा तेजी से बढ़ी है। इनका कुल बाजार में हिस्सा 52.2% तक पहुंच गया है, जबकि कॉटन यानी सूती कपड़ों की हिस्सेदारी 41.2% है। वहीं, सिल्क और ऊन जैसे रेगुलर फाइबर की हिस्सेदारी काफी कम है। खास बात यह है कि सिंथेटिक और मिक्स फाइबर का बाजार 2010 के 1.47 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2024 में 4.47 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जो उपभोक्ताओं की बदलती पसंद को दर्शाता है। लोग अब ऐसे कपड़े पसंद कर रहे हैं, जो सस्ते, टिकाऊ और मेंटेन करने में आसान हों।

    इस ग्रोथ में घरेलू उपभोक्ताओं का बहुत बड़ा योगदान है। रिपोर्ट के अनुसार, परिवारों द्वारा कपड़ों पर खर्च 2010 के 4.18 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2024 में 8.77 लाख करोड़ रुपये हो गया है, यानी कुल बाजार का बड़ा हिस्सा घरेलू खपत से ही आ रहा है। इसके अलावा प्रति व्यक्ति खर्च भी तेजी से बढ़ा है। 2010 में जहां एक व्यक्ति औसतन 2,119 रुपये कपड़ों पर खर्च करता था, वहीं 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर 6,066 रुपये हो गया है। यह दिखाता है कि लोग अब फैशन और ब्रांड्स पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।

    एक और दिलचस्प बात यह है कि कपड़ा बाजार में महिलाओं की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है। रिपोर्ट के मुताबिक, कुल खरीद में महिलाओं का योगदान 55.5% है, जबकि मेल की हिस्सेदारी 44.5% है, यानी इस सेक्टर की ग्रोथ में महिला उपभोक्ता सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी हैं।

    भारत का टेक्सटाइल सेक्टर न सिर्फ तेजी से बढ़ रहा है, बल्कि इसमें बड़े बदलाव भी देखने को मिल रहे हैं। बदलती लाइफस्टाइल, बढ़ती आय और फैशन के प्रति बढ़ती जागरूकता इस ग्रोथ को आगे भी गति दे सकती है। आने वाले समय में यह सेक्टर देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत इंजन साबित हो सकता है।