Category: National

  • राघव चड्ढा बने Blinkit डिलीवरी बॉय, गिग वर्कर्स की मेहनत और हक़ के लिए किया असरदार प्रदर्शन

    राघव चड्ढा बने Blinkit डिलीवरी बॉय, गिग वर्कर्स की मेहनत और हक़ के लिए किया असरदार प्रदर्शन


    नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद राघव चड्ढा इन दिनों सोशल मीडिया पर जबरदस्त चर्चा में हैं। वजह है उनका एक वीडियो, जिसमें वह Blinkit के डिलीवरी बॉय की यूनिफॉर्म पहनकर स्कूटी से सामान डिलीवर करते नजर आ रहे हैं। एक सांसद का इस तरह सड़कों पर उतरकर डिलीवरी करना लोगों को चौंका रहा है और यही वीडियो तेजी से वायरल हो गया।

    दरअसल, राघव चड्ढा ने यह कदम किसी ब्रांड प्रमोशन के लिए नहीं, बल्कि एक खास सामाजिक संदेश देने के लिए उठाया। उन्होंने खुद Blinkit डिलीवरी पार्टनर की तरह तैयार होकर स्कूटी चलाई और ग्राहकों तक सामान पहुंचाया, ताकि गिग इकॉनमी में काम करने वाले लाखों डिलीवरी वर्कर्स की मेहनत, संघर्ष और चुनौतियों को लोग करीब से समझ सकें।

    https://x.com/raghav_chadha/status/2010585064737001647?ref_src=twsrc%5Etfw%7Ctwcamp%5Etweetembed%7Ctwterm%5E2010585064737001647%7Ctwgr%5Ee049355dcf70984a5d0e15354faecd71da5e61cc%7Ctwcon%5Es1_&ref_url=https%3A%2F%2Fwww.aajtak.in%2Ftrending%2Fstory%2Fraghav-chadha-wears-blinkit-delivery-boy-tshirt-gig-workers-viral-rttw-dskc-2436928-2026-01-12

    राघव चड्ढा का कहना है कि आज क्विक डिलीवरी ऐप्स के दौर में डिलीवरी पार्टनर्स पर समय का भारी दबाव होता है। तेज धूप, बारिश, ठंड और ट्रैफिक के बीच ये लोग समय पर डिलीवरी करने की कोशिश करते हैं, लेकिन इसके बदले उन्हें कम कमाई, ज्यादा तनाव और सुरक्षा की कमी जैसी समस्याओं से जूझना पड़ता है। 10 मिनट की डिलीवरी के पीछे किसी इंसान की थकान और जोखिम छिपा होता है, जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।

    Blinkit डिलीवरी बॉय की तरह सड़कों पर उतरना राघव चड्ढा का एक प्रतीकात्मक कदम था।

    इसके जरिए उन्होंने यह दिखाने की कोशिश की कि डिलीवरी पार्टनर सिर्फ किसी ऐप का हिस्सा नहीं, बल्कि मेहनतकश लोग हैं, जिनके लिए बेहतर नियम, बीमा, सुरक्षा और सम्मान बेहद जरूरी है। उनका यह अंदाज आम नेताओं से अलग नजर आया और इसी वजह से लोगों का ध्यान खींच पाया।

    सोशल मीडिया पर इस वीडियो को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई यूजर्स ने राघव चड्ढा की तारीफ करते हुए कहा कि नेताओं को जमीनी हकीकत समझने के लिए ऐसे कदम उठाने चाहिए।

    कुछ लोगों ने इसे गिग इकॉनमी में काम करने वाले लोगों की आवाज बताने वाला मजबूत सोशल मैसेज कहा। वहीं, कुछ यूजर्स ने सवाल भी उठाए कि क्या यह पूरी तरह नियमों के तहत किया गया था या सिर्फ प्रतीकात्मक वीडियो था।

    कुल मिलाकर, Blinkit डिलीवरी बॉय बनकर सामान पहुंचाना राघव चड्ढा का एक अलग लेकिन असरदार तरीका रहा, जिसने गिग वर्कर्स की मेहनत और उनकी समस्याओं को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

  • साबरमती आश्रम से मजबूत हुई भारत-जर्मनी मित्रता, चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने पीएम मोदी संग किया बापू को नमन

    साबरमती आश्रम से मजबूत हुई भारत-जर्मनी मित्रता, चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने पीएम मोदी संग किया बापू को नमन


    नई दिल्ली । जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज भारत की दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर सोमवार सुबह अहमदाबाद पहुंचे, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ ऐतिहासिक साबरमती आश्रम का दौरा किया। यह दौरा न केवल औपचारिक था, बल्कि भारत और जर्मनी के बीच साझा मूल्यों, शांति और लोकतांत्रिक आदर्शों का प्रतीक भी बना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साबरमती आश्रम परिसर में चांसलर मर्ज का आत्मीय स्वागत किया। इसके बाद दोनों नेताओं ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। चांसलर मर्ज ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ बापू की तस्वीर पर भी माल्यार्पण किया और गांधी जी के जीवन व विचारों के प्रति गहरी श्रद्धा व्यक्त की।

    प्रधानमंत्री मोदी ने चांसलर मर्ज को साबरमती आश्रम के विभिन्न स्थलों का भ्रमण कराया और स्वतंत्रता संग्राम में इस आश्रम की भूमिका तथा महात्मा गांधी के सत्य और अहिंसा के दर्शन के बारे में विस्तार से जानकारी दी। चांसलर मर्ज ने आश्रम की सादगी, ऐतिहासिक महत्व और गांधी जी के विचारों से गहरा प्रभाव महसूस किया।दौरे के दौरान जर्मन चांसलर ने आगंतुक पुस्तिका में अपने विचार भी दर्ज किए। उन्होंने महात्मा गांधी को वैश्विक शांति और मानवता के लिए प्रेरणास्रोत बताते हुए भारत-जर्मनी संबंधों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई।

    साबरमती आश्रम के इस प्रतीकात्मक दौरे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता प्रस्तावित है। इन बैठकों में द्विपक्षीय सहयोग, व्यापार, निवेश, हरित ऊर्जा, तकनीक, रक्षा और वैश्विक मुद्दों पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है। उल्लेखनीय है कि चांसलर फ्रेडरिक मर्ज इससे पहले देर रात आधिकारिक यात्रा पर गुजरात पहुंचे थे। अहमदाबाद हवाई अड्डे पर गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। यह जर्मनी के किसी चांसलर की भारत की पहली आधिकारिक यात्रा है, जिसे दोनों देशों के संबंधों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। साबरमती आश्रम से शुरू हुई यह यात्रा भारत और जर्मनी के रिश्तों में विश्वास, सहयोग और साझा मूल्यों की मजबूत नींव रखने का संकेत देती है।

  • Weather Forecast 12 Jan 2026: अपने शहर का अपडेट देखें और रहें तैयार

    Weather Forecast 12 Jan 2026: अपने शहर का अपडेट देखें और रहें तैयार

    नई दिल्ली: उत्तर भारत के अधिकांश राज्यों में इस समय सर्दियों का सितम चरम पर है। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, शीतलहर (Cold Wave) और घना कोहरा (Dense Fog) पूरे क्षेत्र में सामान्य जनजीवन और यातायात पर गहरा असर डाल रहे हैं। दिल्ली और NCR में आज सुबह मध्यम से घना कोहरा छाया रहा, जिससे दृश्यता (Visibility) काफी कम रही। राजधानी का न्यूनतम तापमान 6°C से 8°C और अधिकतम तापमान 18°C से 20°C के बीच रहने का अनुमान है।

    पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में गंभीर स्थिति:
    पंजाब और हरियाणा में ‘कोल्ड डे’ से लेकर ‘सीवियर कोल्ड डे’ की स्थिति बनी हुई है और अगले 2-3 दिनों तक शीतलहर के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। राजस्थान के उत्तरी हिस्सों, विशेषकर चूरू और बीकानेर में तापमान काफी नीचे गिर गया है। पश्चिमी राजस्थान में शीतलहर के साथ-साथ घने कोहरे की चेतावनी भी दी गई है।

    उत्तर प्रदेश और बिहार में कोहरा और ठंड:
    उत्तर प्रदेश में पश्चिमी से पूर्वी हिस्सों तक घना कोहरा छाया हुआ है। लखनऊ और कानपुर में न्यूनतम तापमान लगभग 9°C दर्ज किया गया है। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों के लिए “बहुत घने कोहरे” का अलर्ट जारी किया है। बिहार में भी ठंड जारी है और पटना सहित कई जिलों में दिन का तापमान सामान्य से काफी कम है।

    पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी और ठिठुरन:
    जम्मू-कश्मीर में बर्फबारी के बाद ठंड और बढ़ गई है। श्रीनगर में तापमान -4°C तक गिर गया है, जबकि गुलमर्ग और पहलगाम में पारा -8°C से -6°C के बीच है। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हल्की बर्फबारी और निचले इलाकों में बारिश की संभावना है। उत्तराखंड के कुछ मैदानी इलाकों में पाले (Ground Frost) की चेतावनी दी गई है, जिससे फसलों को नुकसान हो सकता है।

    यातायात प्रभावित:
    घने कोहरे के कारण कई ट्रेनें देरी से चल रही हैं और उड़ानें प्रभावित हो सकती हैं। सड़क मार्ग से यात्रा करने वाले लोगों को सावधानी बरतने और फॉग लाइट्स का उपयोग करने की सलाह दी गई है। ऐसे हालात में मौसम विभाग की चेतावनियों पर ध्यान देना और अनावश्यक यात्रा टालना सुरक्षित रहेगा।

  • UN से रोहिंग्याओं को मिलेगी राहत? 'सबसे बड़ी अदालत' में शुरू हो रहा नरसंहार का ऐतिहासिक मामला

    नई दिल्‍ली। हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) में म्यांमार के खिलाफ रोहिंग्या मुस्लिम अल्पसंख्यकों के कथित नरसंहार से जुड़ी ऐतिहासिक सुनवाई शुरू हो रही है। इस कोर्ट को संयुक्त राष्ट्र की सबसे बड़ी अदालत या विश्व न्यायालय भी कहा जाता है। यह सुनवाई द गैंबिया बनाम म्यांमार के तहत हो रही है, जिसमें 11 देशों ने हस्तक्षेप किया है।

    यह एक दशक से अधिक समय में पहला ऐसा मामला होगा, जिसकी अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में पूरी सुनवाई होगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले के नतीजे न सिर्फ म्यांमार बल्कि अन्य अंतरराष्ट्रीय मामलों- खासतौर पर दक्षिण अफ्रीका द्वारा इजरायल के खिलाफ दायर गाजा युद्ध से जुड़े नरसंहार केस पर भी असर डाल सकते हैं।

    म्यांमार सरकार ने नरसंहार के सभी आरोपों से इनकार किया है। संयुक्त राष्ट्र की म्यांमार के लिए स्वतंत्र जांच तंत्र के प्रमुख निकोलस कूंजियन ने रॉयटर्स से कहा- यह मामला तय करेगा कि नरसंहार की परिभाषा क्या है, उसे साबित करने के मानक क्या होंगे और उल्लंघनों के निवारण कैसे किए जाएंगे। ये सब भविष्य के मामलों के लिए अहम मिसाल बनेंगे।

    2019 में दर्ज हुआ मामला

    यह केस 2019 में द गैंबिया ने दायर किया था, जिसमें आरोप लगाया गया है कि म्यांमार ने 1948 के जेनोसाइड कन्वेंशन (नरसंहार रोकथाम और दंड संधि) का उल्लंघन करते हुए रोहिंग्या मुस्लिमों के खिलाफ नरसंहार किया है। यह पिछले एक दशक से अधिक समय में ICJ में नरसंहार के किसी मामले की पहली पूरी मेरिट्स सुनवाई है।
    2017 की सैन्य कार्रवाई और पलायन
    2017 में म्यांमार की सेना द्वारा चलाए गए अभियान के बाद कम से कम 7.30 लाख रोहिंग्या अपने घर छोड़कर पड़ोसी बांग्लादेश चले गए थे। शरणार्थियों ने हत्या, सामूहिक बलात्कार और गांवों को जलाने जैसे आरोप लगाए। संयुक्त राष्ट्र की एक तथ्य-जांच मिशन ने निष्कर्ष निकाला था कि उस सैन्य अभियान में नरसंहारात्मक कृत्य शामिल थे। हालांकि, म्यांमार के अधिकारियों ने इस रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा कि सेना का अभियान मुस्लिम उग्रवादियों के हमलों के जवाब में एक वैध आतंकवाद-रोधी कार्रवाई था।
    सू की का बचाव, अब बंद कमरे में सुनवाई
    2019 की प्रारंभिक सुनवाई के दौरान म्यांमार की तत्कालीन नेता आंग सान सू की ने गाम्बिया के आरोपों को अधूरे और भ्रामक करार दिया था। मौजूदा सुनवाई का एक अहम पहलू यह है कि पहली बार कथित अत्याचारों को लेकर रोहिंग्या पीड़ितों की बातें किसी अंतरराष्ट्रीय अदालत में सुनी जाएंगी। संवेदनशीलता और निजता के कारण ये सत्र बंद कमरे में होंगे और मीडिया के लिए खुले नहीं होंगे। आईसीजे में सुनवाई सोमवार सुबह 10 बजे (0900 GMT) से शुरू होकर तीन सप्ताह तक चलेगी।

    पहले सप्ताह गैंबिया और उसके समर्थक अपनी दलीलें पेश करेंगे।

    फिर म्यांमार अपनी सफाई पेश करेगा। गवाहों और विशेषज्ञों की गवाही भी होगी (कुछ बंद कमरों में, जहां रोहिंग्या पीड़ित अपनी कहानियां सुनाएंगे)। 11 देशों ने हस्तक्षेप किया है जिनमें- कनाडा, डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड, यूनाइटेड किंगडम, मालदीव, स्लोवेनिया, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, बेल्जियम और आयरलैंड। ये देश द गैंबिया के पक्ष में हैं।
    हालांकि, ICJ के फैसले बाध्यकारी होते हैं, लेकिन लागू करने की कोई सीधी ताकत नहीं। म्यांमार की मौजूदा जंटा सरकार पहले ही अंतरिम आदेशों की अनदेखी कर चुकी है।
    इसलिए असल राहत के लिए अंतरराष्ट्रीय दबाव जरूरी होगा।
    म्यांमार का मौजूदा संकट

    गौरतलब है कि 2021 में म्यांमार की सेना ने निर्वाचित असैन्य सरकार को सत्ता से हटा दिया था। इसके बाद लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनों को बलपूर्वक दबाया गया, जिससे देशव्यापी सशस्त्र विद्रोह भड़क उठा। इस बीच, म्यांमार में चरणबद्ध चुनाव कराए जा रहे हैं, जिन्हें संयुक्त राष्ट्र, कई पश्चिमी देशों और मानवाधिकार संगठनों ने न निःशुल्क और न निष्पक्ष बताया है।

  • आज भी फोन और इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं करते हैं NSA अजीत डोभाल

    आज भी फोन और इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं करते हैं NSA अजीत डोभाल

    नई दिल्‍ली। आज के दौर में जहां मोबाइल फोन और इंटरनेट जीवन की अनिवार्य जरूरत बन चुके हैं, वहीं भारत के सबसे ताकतवर सुरक्षा विशेषज्ञों में से एक राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एनएसए (NSA) अजीत डोभाल ने अपनी एक अनूठी आदत से सबको चौंका दिया है। शनिवार को दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026’ के उद्घाटन सत्र में उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए बताया कि वे आज भी मोबाइल फोन और इंटरनेट का उपयोग नहीं करते हैं।

    डोभाल ने कहा, “फोन और इंटरनेट ही संवाद के एकमात्र माध्यम नहीं हैं। संपर्क करने के ऐसे कई अन्य तरीके हैं जिनके बारे में ज्यादातर लोगों को पता तक नहीं है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि वे केवल विशेष परिस्थितियों में ही फोन का उपयोग करते हैं, जैसे कि विदेश में रहने वाले लोगों या अपने परिवार से बात करने के लिए।

    उन्होंने युवाओं को धैर्य का पाठ पढ़ाते हुए कहा कि संदेश हमेशा ईमानदारी से संप्रेषित होने चाहिए, न कि प्रोपेगेंडा के माध्यम से।
    कौन हैं अजीत डोभाल?
    अजीत डोभाल भारत के 5वें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं। 1945 में उत्तराखंड में जन्मे डोभाल केरल कैडर के रिटायर्ड IPS अधिकारी हैं। उनके नाम कई ऐसी उपलब्धियां दर्ज हैं जो किसी फिल्म की पटकथा जैसी लगती हैं। वे भारत के इतिहास में ‘कीर्ति चक्र’ पाने वाले सबसे युवा पुलिस अधिकारी हैं। सितंबर 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 के बालाकोट एयरस्ट्राइक की योजना बनाने और उन्हें सफलतापूर्वक अंजाम देने में उनकी मुख्य भूमिका रही है। डोकलाम विवाद को सुलझाने और पूर्वोत्तर भारत में उग्रवाद को खत्म करने में उन्होंने कड़ा रुख अपनाया।
    पाकिस्तान में 7 साल ‘अंडरकवर’

    अजीत डोभाल का करियर हैरतअंगेज कारनामों से भरा रहा है। कहा जाता है कि उन्होंने पाकिस्तान में एक ‘अंडरकवर’ एजेंट के रूप में 7 साल बिताए, जहां उन्होंने चरमपंथी समूहों की खुफिया जानकारी इकट्ठा की। इसके बाद उन्होंने इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग में 6 साल तक काम किया। 1971 से 1999 के बीच उन्होंने इंडियन एयरलाइंस के कम से कम 15 अपहरण मामलों को सुलझाया। 1999 के कुख्यात कंधार कांड (IC-814) में वे मुख्य वार्ताकारों में से एक थे। मिजोरम और पंजाब में आतंकवाद और उग्रवाद के खिलाफ उन्होंने जमीनी स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाई।

    युवा नेताओं को संबोधित करते हुए डोभाल ने भावुक होकर कहा कि भारत ने अपनी आजादी के लिए बहुत भारी कीमत चुकाई है। कई पीढ़ियों ने इसके लिए नुकसान और कठिनाइयां झेली हैं। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे भारत के समृद्ध इतिहास और उसकी उन्नत सभ्यता से प्रेरणा लें और देश के मूल्यों, अधिकारों और विश्वासों के आधार पर एक शक्तिशाली भारत का निर्माण करें।

  • भारत में 100 करोड़ की 'डिजिटल डकैती' का भंडाफोड़

    भारत में 100 करोड़ की 'डिजिटल डकैती' का भंडाफोड़

    नई दिल्‍ली। दिल्ली पुलिस ने शनिवार को एक अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी रैकेट का भंडाफोड़ किया है। इसमें हजारों लोगों को कथित तौर पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर डरा-धमकाकर लगभग 100 करोड़ रुपये की ठगी की गई। आरोप है कि यह ठगी करने वाला गिरोह खुद को एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) का अधिकारी बताकर लोगों को कॉल करता था और कहता था कि उनके मोबाइल नंबर आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े मामलों में इस्तेमाल हुए हैं। इस सिंडिकेट के तार पाकिस्तान समेत कई देशों तक फैले हुए हैं।
    पुलिस ने अब तक 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

    कैसे दिया जाता था ठगी को अंजाम
    दिल्ली पुलिस के डिप्टी कमिश्नर (IFSO) विनीत कुमार ने बताया कि सितंबर 2025 से शुरू हुई इस ठगी में फ्रॉडस्टर्स पीड़ितों को फोन कर पहलगाम हमला और दिल्ली के रेड फोर्ट ब्लास्ट जैसे आतंकी मामलों से उनके फोन नंबरों के जुड़े होने का आरोप लगाते थे। उन्हें तत्काल गिरफ्तारी की धमकी दी जाती थी और ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखकर पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया जाता था। इस पूरे नेटवर्क का संचालन चीन, नेपाल, कंबोडिया, ताइवान और पाकिस्तान से जुड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराधियों द्वारा किया जा रहा था। अब तक इस मामले में सात आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें एक ताइवान का नागरिक भी शामिल है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, इस सिंडिकेट ने अवैध SIMBOX डिवाइसों का इस्तेमाल किया, जो कई SIM कार्ड रखकर अंतरराष्ट्रीय कॉल्स को भारतीय नंबरों के रूप में दिखाते हैं। ये कॉल्स विदेशों (खासकर कंबोडिया) से आती थीं, लेकिन SIMBOX के जरिए स्थानीय दिखाई देती थीं।

    यानी विदेशी कॉल भी भारत की लोकल कॉल जैसी दिखाई देती है। फ्रॉडस्टर्स ने जानबूझकर 2G नेटवर्क का उपयोग किया ताकि रीयल-टाइम ट्रैकिंग मुश्किल हो जाए। SIMBOX में IMEI नंबरों को ओवरराइट और रोटेट किया जाता था, जिससे एक ही नंबर एक दिन में कई शहरों से आता दिखता था, जिससे जांच एजेंसियां भ्रमित हो जाती थीं।
    फॉरेंसिक जांच में 5,000 से ज्यादा कम्प्रोमाइज्ड IMEI नंबर और करीब 20,000 SIM कार्ड इस नेटवर्क से जुड़े पाए गए। पुलिस ने दिल्ली, मुंबई और मोहाली से 22 SIMBOX डिवाइस, मोबाइल फोन, लैपटॉप, राउटर, CCTV कैमरे, पासपोर्ट और विदेशी SIM कार्ड बरामद किए।
    जांच और गिरफ्तारी
    दिल्ली पुलिस की IFSO यूनिट के डिप्टी कमिश्नर विनीत कुमार ने बताया कि सितंबर में कई शिकायतें मिलने के बाद मामला दर्ज किया गया और करीब 25 पुलिसकर्मियों की एक विशेष टीम बनाई गई। इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) और डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस (DoT) की मदद से तकनीकी जांच शुरू की गई।

    सबसे पहला SIM बॉक्स इंस्टॉलेशन गॉयला डेयरी, दक्षिण-पश्चिम दिल्ली में ट्रेस किया गया। इसके बाद एक महीने की गोपनीय निगरानी में दिल्ली के चार अलग-अलग इलाकों में सक्रिय ठिकानों का पता चला। छापेमारी में शशि प्रसाद (53) और परविंदर सिंह (38) को गिरफ्तार किया गया, जो कथित तौर पर दिल्ली में पांच जगहों पर इस अवैध इंफ्रास्ट्रक्चर को संभाल रहे थे।

  • नाबालिग को जेल में रखने के मामले में HC ने सरकार को लगाई फटकार, 5 लाख मुआवज़ा देने का आदेश

    नाबालिग को जेल में रखने के मामले में HC ने सरकार को लगाई फटकार, 5 लाख मुआवज़ा देने का आदेश

    पटना। पटना हाईकोर्ट ने पिछले हफ़्ते एक नाबालिग को ₹5 लाख का मुआवज़ा देने का आदेश दिया, जिसे बिहार पुलिस ने गैर-कानूनी तरीके से गिरफ्तार किया था। कोर्ट ने इस काम को भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत उसके मौलिक अधिकार का घोर उल्लंघन बताया।

    जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद और जस्टिस रितेश कुमार की डिवीजन बेंच ने कहा कि गिरफ्तारी कानून की तय प्रक्रिया की पूरी तरह से अनदेखी करके सिर्फ़ डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस (DIG) के कहने पर की गई, जबकि नाबालिग को पहले ही चार्जशीट में बरी कर दिया गया।
    हाईकोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि मुआवज़े की रकम और ₹15,000 का मुक़दमे का खर्च राज्य सरकार देगी। हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि यह खर्च उन दोषी पुलिस अधिकारियों की सैलरी से वसूला जाना चाहिए, जो प्रशासनिक जांच के बाद ज़िम्मेदार पाए जाएंगे।

    संक्षेप में मामला
    याचिकाकर्ता (एक नाबालिग) ने गैर-कानूनी हिरासत से रिहाई के लिए बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) की रिट याचिका दायर की। याचिकाकर्ता का नाम शुरू में ज़मीन विवाद और मारपीट के मामले में FIR में है।
    हालांकि, शुरुआती जांच के दौरान, IO को याचिकाकर्ता सहित दस आरोपियों के खिलाफ़ अपर्याप्त सबूत मिले। नतीजतन, 1 सितंबर, 2025 को चार्जशीट दायर की गई, जिसमें याचिकाकर्ता का नाम आरोपी के तौर पर था, लेकिन उस पर आरोप नहीं लगाए गए। इसलिए उसे ट्रायल के लिए नहीं भेजा गया।

    हालांकि, इसके बाद शिकायतकर्ता ने DIG, कोसी रेंज, सहरसा से संपर्क किया और याचिकाकर्ता-नाबालिग सहित दस आरोपियों को बरी किए जाने की शिकायत की।

    DIG ने एक सुपरविज़न नोट में IO को जांच आगे बढ़ाने का यह मानते हुए निर्देश दिया कि आरोप सच हैं और निर्देश दिया कि बाकी आरोपियों को गिरफ्तार किया जाए।
    DIG के सुपरविज़न नोट को केस डायरी में शामिल किया गया और फिर IO सीधे आरोपी के घर पर छापा मारने गया। उसने मौजूदा याचिकाकर्ता को गिरफ्तार कर लिया, उसकी उम्र 19 साल बताई और उसे कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।

    दरअसल, मजिस्ट्रेट के सामने पेशी के समय भी इस बात पर ध्यान नहीं दिलाया गया कि याचिकाकर्ता का नाम केस में चार्जशीट न किए गए लोगों की लिस्ट में था। यहां तक ​​कि संबंधित मजिस्ट्रेट ने भी मामले के इन पहलुओं पर ध्यान नहीं दिया।

    सीधे-सीधे, बिना सोचे-समझे, याचिकाकर्ता को जेल भेज दिया।
    हाईकोर्ट की टिप्पणियां
    बेंच ने पुलिस के काम करने के तरीके पर कड़ी आपत्ति जताई। उसने कहा कि एक बार जब चार्जशीट दायर हो गई, जिसमें याचिकाकर्ता को ट्रायल के लिए नहीं भेजा गया दिखाया गया, तो IO मजिस्ट्रेट के सामने आगे की जांच के लिए आवेदन किए बिना उसे गिरफ्तार नहीं कर सकता।

    कोर्ट ने कहा:
    “इस मामले में याचिकाकर्ता की आज़ादी छीन ली गई और पुलिस अधिकारियों की कार्रवाई से उसके जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन हुआ। DIG, कोशी रेंज का आरोपों को सच मानकर मामले की जांच करने का निर्देश निर्दोषता की धारणा के सिद्धांतों के खिलाफ है, जो आपराधिक कानून न्यायशास्त्र का मुख्य सिद्धांत है। I.O. ने बिना किसी ठोस सबूत के 16 साल से कम उम्र के छात्र याचिकाकर्ता को गिरफ्तार कर लिया।

    वह इस मामले में ऐसा नहीं कर सकता था।”
    हाईकोर्ट ने इस मामले में क्षेत्राधिकार मजिस्ट्रेट की भूमिका पर भी असंतोष व्यक्त किया। उसने कहा कि जब याचिकाकर्ता को पेश किया गया तो मजिस्ट्रेट यह देखने में विफल रहा कि पिछली रिपोर्ट में उसे ‘चार्जशीटेड नहीं’ के रूप में सूचीबद्ध किया गया।
    इसके अलावा, उसने कहा कि याचिकाकर्ता के नाबालिग होने के बावजूद (बाद में जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने पुष्टि की कि घटना के समय उसकी उम्र 15 साल, 06 महीने और 08 दिन थी), मजिस्ट्रेट ने उसे ऑब्जर्वेशन होम के बजाय जेल भेज दिया क्योंकि उसने बिना सोचे-समझे काम किया।

    कोर्ट ने दुख जताते हुए कहा,
    “जांच एजेंसी द्वारा पावर के गलत इस्तेमाल और याचिकाकर्ता के अधिकार और आज़ादी की रक्षा करने में कोर्ट की नाकामी के कारण उसे अब तक ढाई महीने से ज़्यादा समय तक जेल में रहना पड़ा है”।
    इस पृष्ठभूमि में हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड द्वारा ऑब्जर्वेशन होम/चिल्ड्रन होम से तुरंत रिहा किया जाए। इस संबंध में, जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड, मधेपुरा द्वारा तुरंत एक उचित रिहाई आदेश जारी किया जाएगा।

    कोर्ट ने राज्य को आदेश दिया कि वह उस युवा लड़के को एक महीने के अंदर शारीरिक और मानसिक पीड़ा के लिए मुआवजे के तौर पर ₹5 लाख का भुगतान करे। इसके अलावा, उसे मुकदमेबाजी के खर्च के तौर पर ₹15,000 दिए गए।
    कोर्ट ने सक्षम अथॉरिटी/पुलिस महानिदेशक, बिहार को भी निर्देश दिया कि वे इस मामले में प्रशासनिक स्तर पर जांच करें, जांच के दौरान सामने आने वाले सबूतों के आधार पर उचित कार्रवाई करें, और दोषी अधिकारियों से लागत और मुआवजे की रकम वसूल करें।

    कोर्ट ने आदेश दिया,
    “याचिकाकर्ता को दिए जाने वाला जुर्माना और मुआवजे की रकम जांच पूरी होने के बाद इस आदेश की कॉपी मिलने/सूचित होने की तारीख से छह महीने के अंदर दोषी अधिकारियों से वसूल की जाएगी”। याचिकाकर्ता की ओर से वकील शाश्वत कुमार, अमन आलम और अमरनाथ कुमार पेश हुए।

  • माघ मेला 2026: ‘मेला सेवा एप’ से श्रद्धालुओं को डिजिटल मार्गदर्शन, QR कोड से सीधे प्रशासन से जुड़ाव

    माघ मेला 2026: ‘मेला सेवा एप’ से श्रद्धालुओं को डिजिटल मार्गदर्शन, QR कोड से सीधे प्रशासन से जुड़ाव


    नई दिल्ली। प्रयागराज में आयोजित हो रहे माघ मेला 2026 में श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और सहज अनुभव को बढ़ाने के लिए मेला प्रशासन ने तकनीकी नवाचारों को लागू किया है। इसी कड़ी में इस वर्ष ‘माघ मेला सेवा एप’ को लॉन्च किया गया, जो मेले में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक डिजिटल सहायक का काम करेगा।

    शनिवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने माघ मेला क्षेत्र का निरीक्षण किया और इस एप का औपचारिक शुभारंभ किया।

    मुख्यमंत्री ने मेला के आगामी प्रमुख स्नान पर्वों की तैयारियों की समीक्षा की और अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक में श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विस्तार से चर्चा की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने तीर्थयात्रियों को डिजिटल मार्गदर्शन प्रदान करने के उद्देश्य से ‘मेला सेवा एप’ का लोकार्पण किया।

    यह एप श्रद्धालुओं को मेला क्षेत्र से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण सेवाएं एक ही मंच पर उपलब्ध कराएगा। मेला अधिकारी ऋषिराज ने बताया कि एप का डिज़ाइन इस प्रकार किया गया है कि मेला क्षेत्र के किसी भी हिस्से में मौजूद श्रद्धालु या पर्यटक सीधे अपनी समस्या या सुझाव मेला प्रशासन तक पहुंचा सकेंगे। इसके लिए मेला क्षेत्र में स्थापित सभी बिजली के खंभों पर QR कोड लगाए गए हैं। श्रद्धालु अपने मोबाइल फोन से इन QR कोड को स्कैन करके ऑनलाइन फॉर्म भरकर अपनी समस्या दर्ज कर सकते हैं।

    इस एप की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह डिजिटल शिकायत एवं मार्गदर्शन प्रणाली के जरिए प्रशासन और श्रद्धालुओं के बीच सीधे संवाद की सुविधा प्रदान करता है।

    समस्या दर्ज होते ही संबंधित विभागों की टीम सक्रिय होकर उसका त्वरित समाधान सुनिश्चित करेगी। इस प्रकार श्रद्धालुओं को अब पारंपरिक पद्धति की तुलना में अधिक तेज, सहज और प्रभावी सेवा प्राप्त होगी।

    माघ मेले में यह पहल पहली बार लागू की गई है और इसे सुरक्षित, सुव्यवस्थित और श्रद्धालु-अनुकूल मेला बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। एप के माध्यम से श्रद्धालु न केवल शिकायत दर्ज कर सकेंगे, बल्कि मेले में होने वाली विभिन्न सुविधाओं, मार्गदर्शन, स्वास्थ्य और सुरक्षा संबंधी जानकारी भी सीधे प्राप्त कर सकेंगे।

    इस डिजिटल नवाचार से माघ मेले में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के अनुभव को और सहज बनाने के साथ ही प्रशासन की कार्यकुशलता भी बढ़ेगी। QR कोड और मोबाइल एप के माध्यम से श्रद्धालुओं को स्थानिक मार्गदर्शन, हेल्पलाइन संपर्क और शिकायत निवारण जैसी सेवाएं तुरंत उपलब्ध होंगी।

    इस पहल से यह सुनिश्चित होगा कि माघ मेले में पहली बार तकनीक का प्रयोग करते हुए श्रद्धालुओं की समस्याओं का त्वरित समाधान हो और उन्हें एक सुरक्षित और सुव्यवस्थित मेला अनुभव प्राप्त हो। यह कदम मेला प्रशासन को अधिक पारदर्शी, त्वरित और श्रद्धालु-केंद्रित बनाएगा। माघ मेला सेवा एप श्रद्धालुओं के लिए डिजिटल मार्गदर्शन, शिकायत समाधान, और त्वरित प्रशासनिक संपर्क का एक नया आयाम खोल रहा है। QR कोड आधारित इस नवाचार से माघ मेला 2026 और अधिक सुरक्षित, सुव्यवस्थित और तकनीकी रूप से आधुनिक बन रहा है।
  • हर-हर महादेव की गूंज, ॐ का उच्चारण और भव्य ड्रोन शो: पीएम मोदी ने सोमनाथ की दिव्यता को किया प्रदर्शित, शौर्य यात्रा में शामिल हुए

    हर-हर महादेव की गूंज, ॐ का उच्चारण और भव्य ड्रोन शो: पीएम मोदी ने सोमनाथ की दिव्यता को किया प्रदर्शित, शौर्य यात्रा में शामिल हुए


    गुजरात सोमनाथ । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी गुजरात यात्रा के दूसरे दिन सोमनाथ मंदिर में दिव्य अनुभव का अनोखा प्रदर्शन किया। शनिवार शाम को पीएम मोदी ने सोमनाथ मंदिर के परिसर में हर-हर महादेव की गूंज के साथ प्रवेश किया और उसके बाद पवित्र महाआरती में हिस्सा लिया। इस अवसर पर ॐ का उच्चारण और भव्य ड्रोन शो ने समां बांध दिया, जिसे पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर भी साझा किया।

    सोमनाथ स्वाभिमान पर्व और 1000 साल की यात्रा

    सोमनाथ मंदिर इस समय दो महत्वपूर्ण कारणों से चर्चा में है। एक तरफ, यह वर्ष 1026 में महमूद गजनवी द्वारा मंदिर पर हमले और इसके ध्वस्त होने के 1000 साल पूरे होने का समय है। दूसरी तरफ यह 11 मई 1951 को स्वतंत्र भारत में सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की 75वीं वर्षगांठ भी है। पीएम मोदी ने इस खास मौके पर इस समारोह को सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का नाम दिया।

    सोमनाथ की दिव्यता का उद्घाटन

    पीएम मोदी ने कहा सोमनाथ शाश्वत दिव्यता की एक ज्योति के रूप में खड़ा है। सोमनाथ की पावन धरा से निकला यह प्रकाशपुंज पूरे विश्व को भारत की सांस्कृतिक शक्ति का संदेश दे रहा है। उनके मुताबिक सोमनाथ सिर्फ एक मंदिर नहीं बल्कि यह हमारे समाज और संस्कृति की हिम्मत और गौरव का प्रतीक है।

    ड्रोन शो और आधुनिक तकनीक का संगम

    पीएम मोदी ने सोमनाथ मंदिर परिसर में भव्य ड्रोन शो देखने का अनुभव साझा किया। इस अद्भुत शो में प्राचीन आस्थाओं के साथ आधुनिक तकनीक का तालमेल हर किसी को मंत्रमुग्ध कर गया। उन्होंने कहा कि सोमनाथ का यह प्रकाशपुंज पूरी दुनिया में भारत की सांस्कृतिक शक्ति का संदेश दे रहा है।

    ॐ का महत्व

    सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के दौरान पीएम मोदी ने ॐ का विशेष महत्व बताया। उन्होंने कहा, ॐ हमारे वेदों, शास्त्रों पुराणों उपनिषदों और वेदांत का सार है। ॐ ही ध्यान का मूल है, और योग का आधार है। ॐ ही साधना में साध्य है और ॐ ही शब्द ब्रह्म का स्वरूप है। पीएम मोदी ने इस दौरान 1000 सेकंड्स तक सामूहिक रूप से ओंकार नाद का उच्चारण किया जिससे माहौल में अद्भुत ऊर्जा का संचार हुआ।

    शौर्य यात्रा का आयोजन

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी यात्रा की शुरुआत शौर्य यात्रा से की, जो सोमनाथ के शंख सर्किल से शुरू हुई। इस यात्रा में पीएम मोदी ने डमरू बजाया और यात्रा एक किलोमीटर लंबी रही। इसके बाद उन्होंने सोमनाथ मंदिर में दर्शन और पूजा अर्चना की।

    अगला कदम सार्वजनिक सभा

    इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सुबह 11 बजे सद्भावना ग्राउंड में सार्वजनिक सभा को संबोधित किया जहां उन्होंने अपने संदेशों और विचारों से उपस्थित जनसमूह को प्रेरित किया।

  • मैं नितेश राणे की जुबान काट दूंगा,’ अखिलेश यादव के नेता अबू आजमी के बिगड़े बोल, कहा- बौना सा मंत्री है, नेपाली दिखता है

    मैं नितेश राणे की जुबान काट दूंगा,’ अखिलेश यादव के नेता अबू आजमी के बिगड़े बोल, कहा- बौना सा मंत्री है, नेपाली दिखता है


    नई दिल्ली । समाजवादी पार्टी के महाराष्ट्र राज्य अध्यक्ष अबू आजमी ने महाराष्ट्र सरकार के मंत्री नितेश राणे पर विवादित टिप्पणी की है। अबू आजमी ने राणे को बौना मंत्री और नेपाली बताते हुए धमकी दी कि अगर उन्हें ताकत मिले तो वह नितेश राणे की जुबान काट देंगे। अबू आजमी का यह बयान नितेश राणे के हालिया हिंदुत्व से जुड़ी टिप्पणियों और मुस्लिम समुदाय के खिलाफ बयानबाजी पर आया है। आजमी ने राणे के बयान को लेकर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा यह बौना मंत्री बोलता है कि मस्जिद में घुसकर मुसलमानों को मारूंगा। क्या हम हिंजड़े हैं क्या हमें मारेगा तू उन्होंने आगे कहा कि अगर उनके पास शक्ति हो तो वह इस बौने मंत्री की जुबान काट डालेंगे और उसे सबक सिखाएंगे।

    नितेश राणे के बयान पर प्रतिक्रिया

    नितेश राणे के हिंदुत्व और राष्ट्रवाद पर दिए गए बयान के बाद यह विवाद उठ खड़ा है। राणे ने कहा था कि वह हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के लिए काम कर रहे हैं और किसी भी प्रकार के धर्मनिरपेक्षता या ध्रुवीकरण के लिए नहीं। उन्होंने विशेष रूप से रामनवमी या हनुमान जयंती जैसे धार्मिक जुलूसों में पत्थरबाजी की घटनाओं पर सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि जब ईद और मुहर्रम शांतिपूर्वक मनाए जा सकते हैं, तो रामनवमी या हनुमान जयंती पर ऐसा क्यों होता है। राणे ने कहा था कि उनका किसी खास समुदाय से विरोध नहीं है, लेकिन जो लोग जिहाद करना चाहते हैं, उनके खिलाफ उनकी आपत्ति स्वाभाविक है। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग वंदे मातरम नहीं बोलते उन्हें पाकिस्तान भेजा जाना चाहिए।

    अबू आजमी की कड़ी प्रतिक्रिया

    अबू आजमी ने नितेश राणे के इस बयान का विरोध करते हुए कहा कि राणे का यह बयान मुस्लिम समुदाय के खिलाफ भड़काऊ है। उन्होंने सवाल किया कि अगर राणे इतना बहादुर हैं तो क्यों नहीं मस्जिद में जाकर दिखाते हैं कि वह क्या कर सकते हैं। आजमी ने यह भी कहा कि राणे जैसे लोग यह कहते हैं कि अगर देश में रहना है तो वंदे मातरम बोलना होगा, लेकिन वह यह नहीं समझते कि हमें राम नवमी के दिन पानी लेकर खड़ा रहने का गर्व है।

    सपा नेता की भाषा पर सवाल


    आजमी का बयान, जो कि भारतीय राजनीति में एक नई कड़ी विवाद को जन्म दे सकता है, कई लोगों को आपत्ति दे रहा है। उनकी भाषा और बयानों में हिंसा की ओर इशारा करने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कई नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे असहिष्णुता की ओर बढ़ने वाला कदम बताया है।