Category: National

  • BMC चुनाव में BJP गठबंधन की बंपर बढ़त, निशिकांत दुबे का बड़ा सियासी हमला,‘अब मुंबई आकर मिलूंगा’, ठाकरे बंधुओं को सीधी चुनौती

    BMC चुनाव में BJP गठबंधन की बंपर बढ़त, निशिकांत दुबे का बड़ा सियासी हमला,‘अब मुंबई आकर मिलूंगा’, ठाकरे बंधुओं को सीधी चुनौती


    मुंबई। बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) चुनाव के रुझानों में भाजपा गठबंधन (महायुति) को स्पष्ट बहुमत की ओर बढ़ता देख महाराष्ट्र की राजनीति में जबरदस्त हलचल मच गई है। इसी बीच भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक तीखा पोस्ट कर उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे को खुली राजनीतिक चुनौती दे दी है। दुबे ने साफ तौर पर कहा है कि वे जल्द ही मुंबई आकर दोनों नेताओं से मुलाकात करेंगे।

    निशिकांत दुबे के इस बयान को केवल जीत की खुशी नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संदेश और शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने अपने पोस्ट के जरिए संकेत दिया कि मुंबई की राजनीति में लंबे समय से चला आ रहा ‘ठाकरे वर्चस्व’ अब अंतिम दौर में है और बीएमसी में बदलाव तय है।

    भाषावाद और परिवारवाद पर सीधा प्रहार
    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दुबे का यह बयान सीधे तौर पर भाषावादी राजनीति और परिवार-केंद्रित सत्ता पर हमला है। उनका संदेश साफ है

    मुंबई अब किसी एक परिवार या भाषा की राजनीति तक सीमित नहीं रही। मतदाताओं ने भाजपा की ‘सबका साथ, सबका विकास’ की नीति पर भरोसा जताया है।

    राज–उद्धव की जोड़ी को बड़ा झटका
    चुनावी रुझानों के मुताबिक, भाजपा गठबंधन 115 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जो बहुमत के आंकड़े 114 से अधिक है। इसके मुकाबले उद्धव ठाकरे गुट और MNS की संयुक्त ताकत करीब 68 सीटों तक सिमटी नजर आ रही है, जबकि कांग्रेस लगभग 10 सीटों पर सिमटती दिख रही है।
    इसके अलावा नागपुर, ठाणे और पुणे जैसे बड़े शहरी निकायों में भी भाजपा गठबंधन मजबूत स्थिति में पहुंचता नजर आ रहा है।

    पुराने विवाद से जुड़ा नया सियासी मोड़
    यह सियासी टकराव उस पुराने विवाद से भी जुड़ा है, जब जुलाई में निशिकांत दुबे ने गैर-मराठी दुकानदारों के साथ हुई मारपीट पर कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। उस वक्त दिए गए उनके बयान“यूपी-बिहार आओगे तो पटक-पटक कर मारेंगे”ने महाराष्ट्र से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक विवाद खड़ा कर दिया था।

    अब बीएमसी चुनाव में भाजपा गठबंधन की बढ़त के बीच दुबे का मुंबई आने का ऐलान ठाकरे खेमे के लिए एक नई और बड़ी राजनीतिक चुनौती माना जा रहा है। यह साफ हो गया है कि बीएमसी चुनाव सिर्फ स्थानीय सत्ता की लड़ाई नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा तय करने वाला मुकाबला बन चुका है।

  • Nipah Virus Alert: बंगाल में हाई अलर्ट, 21 दिन का क्वारंटाइन अनिवार्य, सख्त गाइडलाइन जारी

    Nipah Virus Alert: बंगाल में हाई अलर्ट, 21 दिन का क्वारंटाइन अनिवार्य, सख्त गाइडलाइन जारी



    कोलकाता।
      निपाह वायरस के खतरे को देखते हुए पश्चिम बंगाल सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गई है। राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए कड़े और स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए हैं। यह गाइडलाइन विशेषज्ञ डॉक्टरों की पांच सदस्यीय टीम द्वारा तैयार की गई है, जिसमें मरीजों, संदिग्धों, उनके संपर्क में आए लोगों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए अलग-अलग प्रोटोकॉल तय किए गए हैं।

    दिशानिर्देशों के अनुसार, निपाह संक्रमित या संदिग्ध मरीज के रक्त, लार, शरीर के तरल पदार्थ या छींक-खांसी की बूंदों के संपर्क में आने वाले हर व्यक्ति को कम से कम 21 दिनों तक होम क्वारंटाइन में रहना अनिवार्य होगा।

    बंद या सीमित स्थान में संक्रमित व्यक्ति के साथ समय बिताने वालों को हाई-रिस्क कैटेगरी में रखा जाएगा और उनकी कड़ी निगरानी की जाएगी।

    होम क्वारंटाइन में सख्त निगरानी
    क्वारंटाइन में रह रहे लोगों को दिन में दो बार स्वास्थ्य जांच करानी होगी। यदि बुखार, सिरदर्द, उलझन, खांसी या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, तो तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया जाएगा। ऐसे मरीजों को सीधे आइसोलेशन वार्ड में रखा जाएगा ताकि संक्रमण आगे न फैले।

    कपड़े और वस्तुएं भी बन सकती हैं खतरा
    स्वास्थ्य विभाग ने साफ किया है कि संक्रमित मरीज के कपड़ों या उपयोग में लाई गई वस्तुओं के संपर्क में आने पर भी व्यक्ति को 21 दिनों तक निगरानी में रखा जाएगा।

    मरीजों की देखभाल करने वाले लोगों और स्वास्थ्यकर्मियों को मास्क और पीपीई किट पहनकर ही काम करने के निर्देश दिए गए हैं।

    दवा और जांच को लेकर अहम निर्देश
    निपाह वायरस की कोई पक्की दवा अभी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में बिना लक्षण वाले लोगों को एहतियातन एंटीवायरल दवा दी जाएगी, जबकि लक्षण दिखने पर मरीजों को अस्पताल में भर्ती कर दो वैकल्पिक एंटीवायरल दवाओं से इलाज किया जाएगा।

    निपाह संक्रमण की पुष्टि के लिए आरटीपीसीआर टेस्ट अनिवार्य किया गया है और रिपोर्ट लगातार निगरानी में रखी जाएगी।

    स्वास्थ्यकर्मियों के लिए अलग नियम
    यदि कोई स्वास्थ्यकर्मी संक्रमित मरीज के संपर्क में आता है लेकिन उसमें लक्षण नहीं हैं, तो वह पीपीई किट और मास्क पहनकर काम जारी रख सकता है। ऐसे स्वास्थ्यकर्मियों को क्वारंटाइन की जरूरत नहीं होगी, लेकिन उन्हें लगातार दो सप्ताह तक एंटीवायरल दवा लेने के निर्देश दिए गए हैं।

    राज्य सरकार ने आम लोगों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं, लेकिन सावधानी और सतर्कता जरूर बरतें। निपाह वायरस को फैलने से रोकने के लिए जारी किए गए ये कदम समय रहते संक्रमण की चेन तोड़ने में अहम साबित हो सकते हैं।

  • बीएमसी चुनाव परिणाम 2026: बीएमसी में कांटे की टक्कर, शुरुआती रुझानों में बीजेपी आगे, उद्धव गुट से सीधी लड़ाई

    बीएमसी चुनाव परिणाम 2026: बीएमसी में कांटे की टक्कर, शुरुआती रुझानों में बीजेपी आगे, उद्धव गुट से सीधी लड़ाई


    नई दिल्ली । महाराष्ट्र की राजनीति के लिहाज से बेहद अहम माने जा रहे बीएमसी समेत 29 महानगर पालिकाओं के चुनाव नतीजे सामने आने लगे हैं। सुबह 10 बजे से मतगणना शुरू होते ही शुरुआती रुझानों ने सियासी हलकों में हलचल तेज कर दी है। एशिया के सबसे अमीर नगर निगम बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन में इस बार मुकाबला बेहद दिलचस्प नजर आ रहा है। शुरुआती रुझानों में भारतीय जनता पार्टी  और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गठबंधन के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है।227 सीटों वाली बीएमसी में बहुमत का आंकड़ा 114 है। ताजा रुझानों के मुताबिक बीजेपी 90 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जबकि उद्धव ठाकरे वाली शिवसेना गठबंधन 71 सीटों पर आगे चल रही है। कांग्रेस फिलहाल 11 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जबकि एनसीपी अजित पवार गुट का खाता अभी नहीं खुल पाया है। इन आंकड़ों से साफ है कि बीएमसी में सत्ता की राह अभी आसान नहीं है और अंतिम नतीजों तक समीकरण बदल सकते हैं।

    दक्षिण मुंबई के दो अहम वार्डों में बीजेपी की मजबूत स्थिति सामने आई है। वार्ड 214 से बीजेपी उम्मीदवार अजय पाटिल बढ़त बनाए हुए हैं, जहां उन्हें 2519 वोट मिले हैं, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वियों को काफी कम मत हासिल हुए हैं। वहीं वार्ड 215 से बीजेपी के संतोष ढाले आगे चल रहे हैं और उन्हें 2246 वोट मिले हैं। इन दोनों वार्डों में बीजेपी की बढ़त ने पार्टी के हौसले और मजबूत कर दिए हैं।बीएमसी जनरल इलेक्शन 2025-26 के तहत कुल 227 चुनावी वार्डों के लिए 23 इलेक्शन डिसीजन ऑफिसर नियुक्त किए गए हैं। मतगणना के लिए सभी स्ट्रॉन्ग रूम और काउंटिंग सेंटर्स को PWD और पुलिस विभाग से जरूरी मंजूरी मिल चुकी है, जिससे पूरी प्रक्रिया कड़ी निगरानी में चल रही है।

    मुंबई के अलावा राज्य की अन्य प्रमुख नगर निगमों में भी बीजेपी गठबंधन बढ़त बनाए हुए है। नागपुर में बीजेपी 20 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि कांग्रेस 6 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। पुणे नगर निगम में 165 सीटों में से बीजेपी 52 सीटों पर आगे है। पिंपरी-चिंचवाड़ नगर निगम में भी मुकाबला बेहद रोचक बना हुआ है, जहां पवार परिवार के गढ़ में बीजेपी और पवार गुट दोनों 12-12 सीटों पर आगे चल रहे हैं।कुल मिलाकर शुरुआती रुझान संकेत दे रहे हैं कि इस बार महाराष्ट्र की नगर निगम राजनीति में बीजेपी की स्थिति मजबूत है, लेकिन बीएमसी में अंतिम नतीजे आने से पहले सियासी समीकरण पूरी तरह स्पष्ट होना बाकी है।

  • दिल्ली की सेहत पर खतरा: 2024 में सांस की बीमारियों से 9,211 मौतें

    दिल्ली की सेहत पर खतरा: 2024 में सांस की बीमारियों से 9,211 मौतें


    नई दिल्ली । दिल्ली सरकार द्वारा जारी 2024 की ताजा हेल्थ रिपोर्ट राजधानी की सेहत को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है। आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में जहरीली हवा और बिगड़ते पर्यावरण का सीधा असर नागरिकों के फेफड़ों पर पड़ रहा है। साल 2024 में सांस संबंधी बीमारियों से होने वाली मौतों का आंकड़ा बढ़कर 9,211 तक पहुंच गया है, जो कि 2023 में 8,801 था। विशेषज्ञों ने इस वृद्धि को सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक ‘रेड सिग्नल’ माना है और वायु गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ चिकित्सा सुविधाओं को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

    रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में मौतों का सबसे बड़ा कारण दिल और रक्त संचार से जुड़ी बीमारियां बनकर उभरी हैं। साल 2024 में हार्ट अटैक, स्ट्रोक और धमनियों में रुकावट जैसी समस्याओं के कारण 21,262 लोगों ने अपनी जान गंवाई, जबकि पिछले साल यह संख्या 15,714 थी। एक ही साल में हृदय रोगों से होने वाली मौतों में आई यह भारी उछाल बदलती जीवनशैली और पर्यावरणीय तनाव की ओर इशारा करती है। हालांकि, राहत की बात यह रही कि संक्रामक और परजीवी रोगों से होने वाली मौतों में कमी आई है। 2023 में जहां इन बीमारियों से 20,781 मौतें हुई थीं, वहीं 2024 में यह घटकर 16,060 रह गईं, जो सार्वजनिक स्वच्छता के क्षेत्र में किए गए सुधारों का परिणाम माना जा रहा है।

    शिशु स्वास्थ्य के मोर्चे पर दिल्ली ने मामूली लेकिन सकारात्मक प्रगति की है। राजधानी में शिशु मृत्यु दर 2023 के 23.61 से घटकर 2024 में 22.4 प्रति हजार रह गई है। यह गिरावट प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल और टीकाकरण की सफलता को दर्शाती है। इसके साथ ही, एक और उत्साहजनक आंकड़ा यह सामने आया कि दिल्ली में 5 वर्ष से कम उम्र के 99.1 प्रतिशत बच्चों के पास जन्म प्रमाण पत्र मौजूद है, जो नागरिक पंजीकरण प्रणाली की मजबूती का प्रतीक है।

    आबादी के मोर्चे पर रिपोर्ट बताती है कि दिल्ली का विस्तार तेजी से हो रहा है और अनुमान है कि 2036 तक राजधानी की जनसंख्या 2.65 करोड़ तक पहुंच जाएगी। साल 2024 में कुल 3,06,459 जन्म दर्ज किए गए, जबकि कुल मौतों की संख्या 1,39,480 रही। मृत्यु दर में 6.16 से 6.37 की मामूली वृद्धि दर्ज की गई है। स्वास्थ्य अधिकारियों का मानना है कि बढ़ती आबादी और प्रदूषण के दोहरे दबाव के बीच दिल्ली को अपने हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना होगा।

  • राजनीति अपडेट: BJP अध्यक्ष चुनाव की घोषणा, नितिन नवीन संभालेंगे कमान इस दिन

    राजनीति अपडेट: BJP अध्यक्ष चुनाव की घोषणा, नितिन नवीन संभालेंगे कमान इस दिन

    नई दिल्ली  बीजेपी अध्यक्ष चुनाव की आ गई तारीख, नितिन नवीन की इस दिन होगी ताजपोशी
    भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की तारीखों का आधिकारिक ऐलान कर दिया है. मौजूदा कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन का निर्विरोध चुना जाना करीब तय माना जा रहा है.

    भारतीय जनता पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया 19 जनवरी से शुरू होगी. बीजेपी के केंद्रीय चुनाव अधिकारियों के मुताबिक, 19 जनवरी को नामांकन पत्र दाखिल किए जाएंगे, जबकि 20 जनवरी को नए अध्यक्ष के नाम की औपचारिक ऐलान कर दिया जाएगा.

    मौजूदा वक्त में पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन इस पद के लिए मुख्य दावेदार हैं और उनके निर्विरोध चुने जाने की पूरी उम्मीद है. नामांकन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री अमित शाह, राजनाथ सिंह और निवर्तमान अध्यक्ष जेपी नड्डा प्रस्तावक के रूप में मौजूद रह सकते हैं.

    बीजेपी चीफ चुनाव प्रक्रिया के लिए बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों, प्रदेश अध्यक्षों और राष्ट्रीय परिषद के सदस्यों को दिल्ली बुलाया गया है. 46 वर्षीय नितिन नबीन अगर अध्यक्ष चुने जाते हैं, तो वह बीजेपी के इतिहास के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे. यह चुनाव जेपी नड्डा के लंबे कार्यकाल के बाद संगठन में बड़े बदलाव का संकेत है.

    तीन साल का कार्यकाल…

    दिसंबर 2025 में कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद से ही नबीन ने संगठन को मजबूत करने पर जोर देना शुरू कर दिया था. खास तौर से बूथ स्तर उन्होंने काफी मेहनत की. अब राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद उनके सामने कई बड़ी चुनौतियां होंगी, जो पार्टी की रणनीति, चुनावी प्रदर्शन और भविष्य को प्रभावित करेंगी. नितिन नबीन का कार्यकाल तीन साल का होगा. राज्य चुनावों के बाद उनका असली परीक्षण 2029 लोकसभा चुनावों की तैयारी के वक्त होगा.

  • मौसम विज्ञान के 151 साल: दिल्ली-मुंबई समेत बड़े शहरों को मिलेंगे 200 नए ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन,

    मौसम विज्ञान के 151 साल: दिल्ली-मुंबई समेत बड़े शहरों को मिलेंगे 200 नए ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन,


    नई दिल्ली । भारत मौसम विज्ञान विभाग ने अपने स्थापना के 151वें वर्ष में प्रवेश करते ही देश की मौसम सेवाओं को ‘हाई-टेक’ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने गुरुवार को घोषणा की कि सरकार देश के चार प्रमुख महानगरों दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और पुणे में कुल 200 नए ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन स्थापित करेगी। प्रत्येक शहर में 50-50 स्टेशन लगाए जाएंगे, जिससे अब हर गली-मोहल्ले के स्तर पर यानी ‘हाइपर-लोकल’ मौसम पूर्वानुमान संभव हो सकेगा।लोधी रोड स्थित मौसम भवन में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि पिछले एक दशक में मौसम पूर्वानुमान की सटीकता में 40 से 50 प्रतिशत तक का सुधार हुआ है।
    उन्होंने कहा कि मिशन मौसम के तहत सरकार अब डेटा-आधारित भविष्यवाणियों पर जोर दे रही है। इन नए स्टेशनों के नेटवर्क से अचानक होने वाली भारी बारिश, भीषण गर्मी और चक्रवातों जैसी प्राकृतिक आपदाओं की जानकारी अधिक सटीकता से मिल सकेगी। विशेष रूप से मासिक और मौसमी पूर्वानुमानों में त्रुटि की दर जो पहले 7.5% थी, वह अब घटकर मात्र 2.5% रह गई है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को आगे बढ़ाते हुए, डॉ. सिंह ने बताया कि भारत की तकनीक का लाभ अब पड़ोसी देशों जैसे बांग्लादेश, नेपाल, भूटान और श्रीलंका को भी मिल रहा है। भारत इन देशों को आपदा संबंधी मौसम जानकारी और उपग्रह डेटा प्रदान कर रहा है।
    इसके साथ ही, देश में डॉप्लर रडार नेटवर्क का विस्तार पिछले 10 वर्षों में तीन गुना बढ़ा है, जो अब देश के 87 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र को कवर करता है।इस ऐतिहासिक अवसर पर आधुनिक ‘3D-प्रिंटेड ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन’ और ‘एग्रो-ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन’ का भी उद्घाटन किया गया। ये तकनीकें न केवल शहरी नागरिकों को तीन घंटे पहले सटीक जानकारी अल्ट्रा-शॉर्ट-रेंज पूर्वानुमान प्रदान करेंगी, बल्कि कृषि, विमानन और शहरी नियोजन जैसे क्षेत्रों में भी क्रांतिकारी बदलाव लाएंगी। कार्यक्रम में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. एम. रविचंद्रन और IMD के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्रा सहित कई वरिष्ठ वैज्ञानिक उपस्थित रहे।

  • सीमा पर मंडराता खतरा: LoC और अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर फिर दिखे पाकिस्तानी ड्रोन, सेना का 'सर्च ऑपरेशन' शुरू

    सीमा पर मंडराता खतरा: LoC और अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर फिर दिखे पाकिस्तानी ड्रोन, सेना का 'सर्च ऑपरेशन' शुरू


    नई दिल्ली । श्रीनगर/जम्मू: गणतंत्र दिवस से पूर्व जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पाकिस्तानी ड्रोनों की बढ़ती सक्रियता ने सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर ला दिया है। पिछले पांच दिनों के भीतर संदिग्ध ड्रोन देखे जाने की यह तीसरी बड़ी घटना है, जिसके बाद सांबा और पुंछ जिलों में सेना ने बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। सीमा पार से होने वाली इन संदिग्ध गतिविधियों को देखते हुए भारतीय सुरक्षा बल पूरी तरह मुस्तैद हैं।

    ताजा घटनाक्रम के अनुसार, गुरुवार शाम सांबा जिले के रामगढ़ सेक्टर और पुंछ के देगवार व मनकोट इलाकों में पाकिस्तानी ड्रोन मंडराते देखे गए। रामगढ़ के चक बबरल गांव के ऊपर शाम करीब 7:15 बजे एक संदिग्ध वस्तु कुछ मिनटों तक उड़ती दिखी, जबकि पुंछ में शाम 6:25 बजे तैन से टोपा की ओर ड्रोन जैसी वस्तु जाती नजर आई। इन गतिविधियों के तुरंत बाद सेना ने अपने एंटी-अनमैन्ड एरियल सिस्टम को सक्रिय कर दिया और संबंधित इलाकों की घेराबंदी कर दी।

    इससे पहले 13 जनवरी को राजौरी जिले में दो बार पाकिस्तानी ड्रोन देखे गए थे, जिन पर जवानों ने फायरिंग की, जिसके बाद वे पाक अधिकृत कश्मीर की ओर लौट गए। वहीं, 11 जनवरी को नौशेरा सेक्टर में जवानों ने मशीन गन से फायरिंग कर ड्रोन की घुसपैठ को नाकाम किया था। सुरक्षा एजेंसियों को अंदेशा है कि पाकिस्तान इन ड्रोनों का उपयोग भारतीय सेना की चौकियों की टोह लेने या फिर आतंकियों के लिए हथियारों और नशीले पदार्थों की खेप गिराने के लिए कर रहा है। उल्लेखनीय है कि 9 जनवरी को सांबा के पालूरा गांव में ड्रोन द्वारा गिराई गई एक खेप बरामद हुई थी, जिसमें पिस्तौल, मैगजीन और ग्रेनेड शामिल थे।

    इस तनावपूर्ण स्थिति के बीच, आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि भारतीय सेना किसी भी आतंकी या सैन्य दुस्साहस का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने बताया कि सीमा पार अब भी 8 आतंकी कैंप सक्रिय हैं और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत सेना हर हरकत पर नजर रख रही है। इसके अतिरिक्त, राजौरी के काकोरा गांव में सेना ने समय रहते 3 किलो वजन का एक संदिग्ध  बरामद कर उसे नष्ट कर दिया, जिससे एक बड़ी आतंकी साजिश विफल हो गई। गणतंत्र दिवस को देखते हुए पूरी घाटी और सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।

  • रिश्तों का कत्ल: नाबालिग बेटी से दरिंदगी करने वाले पिता को आखिरी सांस तक उम्रकैद

    रिश्तों का कत्ल: नाबालिग बेटी से दरिंदगी करने वाले पिता को आखिरी सांस तक उम्रकैद


    नई दिल्ली । दिल्ली की एक अदालत ने मानवीय रिश्तों को शर्मसार करने वाले एक जघन्य मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। रोहिणी स्थित पॉक्सो कोर्ट ने अपनी ही नाबालिग बेटी के साथ बार-बार दुष्कर्म करने वाले एक कलयुगी पिता को ‘प्राकृतिक जीवन के अंत’ यानी आखिरी सांस तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमित सहरावत ने इस अपराध को समाज की अंतरात्मा पर आघात बताते हुए दोषी पिता पर 10,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि पिता-पुत्री का रिश्ता सबसे पवित्र होता है, लेकिन दोषी ने अपनी क्रूरता से इस भरोसे को पूरी तरह खत्म कर दिया।

    यह मामला तब शुरू हुआ जब पीड़िता की मां ने घर छोड़ दिया और दूसरा विवाह कर लिया। इसके बाद सुरक्षा देने के बजाय पिता ही भक्षक बन गया। अभियोजन पक्ष के अनुसार 15 फरवरी 2021 की रात पिता ने पहली बार अपनी नाबालिग बेटी के साथ दुष्कर्म किया और इसके बाद यह सिलसिला लगातार चलता रहा। डरी-सहमी पीड़िता ने जब अपनी सगी बुआ को इस आपबीती के बारे में बताया, तो वहां से भी उसे कोई मदद नहीं मिली। बुआ ने अपनी जिम्मेदारी निभाने के बजाय मामले को दबाने और छिपाने का प्रयास किया। अंततः मई 2021 में जब पीड़िता ने अपनी ताई को पूरी घटना बताई, तब जाकर पुलिस में मामला दर्ज हुआ और इस भयावह सच्चाई का खुलासा हुआ।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने पीड़िता की बुआ के व्यवहार पर भी सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने माना कि बुआ ने अपराध की जानकारी होने के बावजूद उसे छिपाया, जो पॉक्सो एक्ट की धारा 21 ,1 के तहत गंभीर अपराध है। हालांकि, बुआ के दो छोटे बच्चों और उसकी पारिवारिक स्थिति को देखते हुए अदालत ने उसे जेल भेजने के बजाय 20,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। इसके साथ ही, अदालत ने पीड़िता के भविष्य और पुनर्वास को ध्यान में रखते हुए उसे 10.5 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया है।

    अदालत में विशेष लोक अभियोजक आदित्य कुमार ने दलील दी कि ऐसे अपराधी किसी भी सहानुभूति के पात्र नहीं हैं। उन्होंने तर्क दिया कि सजा ऐसी होनी चाहिए जो समाज में नजीर पेश करे। बचाव पक्ष ने आरोपी के पूर्व में कोई आपराधिक रिकॉर्ड न होने और जेल में अच्छे आचरण का हवाला देकर रियायत की मांग की थी, जिसे न्यायाधीश ने सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने पॉक्सो एक्ट की धारा 42 का संदर्भ देते हुए दोषी को धारा 6 के तहत अधिकतम दंड यानी ताउम्र कैद की सजा से दंडित किया। यह फैसला संदेश देता है कि मासूमों के खिलाफ होने वाले ऐसे जघन्य अपराधों पर न्याय प्रणाली का रुख बेहद कड़ा और समझौताविहीन रहेगा।

  • ताजमहल में तीन दिन फ्री एंट्री, शाहजहां–मुमताज की असली कब्र देखने का दुर्लभ मौका

    ताजमहल में तीन दिन फ्री एंट्री, शाहजहां–मुमताज की असली कब्र देखने का दुर्लभ मौका

    नई दिल्ली  आगरा स्थित विश्व धरोहर ताजमहल में बादशाह शाहजहां का तीन दिवसीय सालाना उर्स गुरुवार से शुरू हो गया। उर्स के पहले ही दिन ताजमहल में पर्यटकों की भारी भीड़ देखने को मिली। नि:शुल्क प्रवेश की सुविधा मिलने के कारण करीब 60 हजार देशी-विदेशी सैलानी ताजमहल पहुंचे और शाहजहां व मुमताज की असली कब्रों के दीदार किए। भीड़ को संभालने के लिए ताज सुरक्षा पुलिस, सीआईएसएफ और एएसआई अधिकारियों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।

    गुस्ल की रस्म से हुई शुरुआत

    शाहजहां के 371वें उर्स के पहले दिन परंपरा के अनुसार गुस्ल की रस्म अदा की गई। इसके बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और उर्स कमेटी के सदस्यों ने फलों की चादर चढ़ाई। उर्स का आयोजन 17 जनवरी तक चलेगा।

    16 जनवरी को संदल की रस्म और कव्वाली का आयोजन होगा।

    17 जनवरी को चारदपोशी की रस्म अदा की जाएगी, जिसमें लगभग 1,720 मीटर लंबी चादर चढ़ाई जाएगी। इस दिन लंगर का भी वितरण होगा।

    सुरक्षा के कड़े इंतजाम, फिर भी दिखीं अव्यवस्थाएं

    नि:शुल्क प्रवेश के चलते दिनभर लंबी कतारें लगी रहीं। सुरक्षा बलों ने भीड़ प्रबंधन के लिए व्यापक इंतजाम किए, लेकिन पर्यटकों की संख्या अधिक होने से कई जगह अव्यवस्थाएं भी नजर आईं।
    मुख्य गुंबद के बाहर बड़ी संख्या में पर्यटकों ने जूते-चप्पल उतार दिए, जबकि नियमों के अनुसार जूते ऊपर ले जाने की अनुमति नहीं है। कुछ लोग उद्यान में घूमते भी दिखाई दिए, जिन्हें सुरक्षाकर्मियों ने समझाकर रोका।

    भीड़ में बिछड़े लोग, पुलिस ने मिलवाया

    भारी भीड़ के बीच करीब तीन दर्जन बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग अपने परिजनों से बिछड़ गए। ताज सुरक्षा पुलिस और सीआईएसएफ के जवानों ने तत्परता दिखाते हुए सभी को खोजकर सुरक्षित उनके परिजनों से मिलवाया।

    उर्स का विरोध, पुतला दहन

    उर्स के आयोजन को लेकर अखिल भारतीय हिंदू महासभा ने विरोध जताया। महासभा के पदाधिकारियों ने एएसआई कार्यालय के बाहर पुतला दहन कर नारेबाजी की। इस दौरान प्रांतीय अध्यक्ष मीना दिवाकर सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।

    आज दोपहर दो बजे के बाद फ्री एंट्री

    शुक्रवार होने के कारण ताजमहल सुबह से दोपहर दो बजे तक आम पर्यटकों के लिए बंद रहेगा। इसके बाद पर्यटकों को नि:शुल्क प्रवेश मिलेगा और असली कब्रों के दर्शन भी कराए जाएंगे। हालांकि, स्थानीय नमाजियों के लिए प्रवेश की व्यवस्था पहले की तरह ही रहेगी।

    उर्स के दौरान ताजमहल में उमड़ रही भीड़ यह साबित कर रही है कि इतिहास, आस्था और विरासत का यह संगम आज भी लोगों को उतनी ही शिद्दत से अपनी ओर खींचता है।

  • BMC Election 2026: सिर्फ नगर निगम नहीं, मुंबई की असली मिनी सरकार

    BMC Election 2026: सिर्फ नगर निगम नहीं, मुंबई की असली मिनी सरकार


    नई दिल्ली। मुंबई की राजनीतिक और प्रशासनिक धड़कनें इन दिनों बीएमसी चुनावों के साथ जोर पकड़ रही हैं। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) को अक्सर सिर्फ एक नगर निगम समझा जाता है, लेकिन यह शहर की असली मिनी सरकार की तरह काम करती है। जहां इस पर सत्ता होती है, वहां शहर की रफ्तार, विकास और जीवन स्तर तय होते हैं। 227 वार्डों के लिए 52.94% मतदान के साथ बीएमसी चुनाव इस बार भी देश की सबसे अमीर और ताकतवर नगर निगम को लेकर सियासी दिलचस्पी का केंद्र बन गया है।

    बीएमसी का इतिहास और सियासी महत्व
    बीएमसी की स्थापना 1865 में हुई थी और यह मुंबई की स्थानीय सरकार की तरह काम करती है। पिछले दो दशकों में शिवसेना का इस पर दबदबा रहा, लेकिन अब पार्टी दो धड़ों में बंटी हुई है

    एक का नेतृत्व उद्धव ठाकरे कर रहे हैं, जबकि दूसरा धड़ा एकनाथ शिंदे के हाथ में है। इस वजह से बीएमसी चुनाव राजनीतिक तौर पर बेहद अहम माना जाता है।

    सड़क और यातायात: मुंबई का कनेक्शन बीएमसी से
    मुंबई का सड़क नेटवर्क लगभग 2,050 किलोमीटर लंबा है। इन सड़कों का निर्माण, रखरखाव और मरम्मत बीएमसी की जिम्मेदारी है। खासतौर पर मानसून में सड़कें गड्ढों से भर जाती हैं, जिससे शहर में यातायात प्रभावित होता है। बीएमसी 700 किलोमीटर सड़कों को सीमेंट कंक्रीट में बदलने का काम कर रही है, जिस पर करीब 17,000 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसके साथ ही फ्लाईओवर, पुल, लिंक रोड और कोस्टल रोड जैसे बड़े प्रोजेक्ट भी बीएमसी की देखरेख में हैं, जिनसे शहर में यातायात की गति बढ़ी है।

    पानी की आपूर्ति और झीलों का प्रबंधन
    मुंबई की पेयजल आपूर्ति सात झीलों पर निर्भर हैतुलसी, विहार, भात्सा, तानसा, अपर वैतरणा, मिडिल वैतरणा और मोडक सागर। इनमें से सिर्फ दो झीलें शहर की सीमा में हैं। बीएमसी इन सभी झीलों का प्रबंधन करती है, पानी को शुद्ध करती है और पाइपलाइन नेटवर्क के जरिए घर-घर तक पहुंचाती है। लीकेज ठीक करना और बढ़ती आबादी के अनुसार व्यवस्था अपडेट करना भी उसकी जिम्मेदारी है।

    कचरा प्रबंधन और सफाई
    मुंबई में प्रतिदिन 8,000 से 10,000 मीट्रिक टन कचरा निकलता है। इसे इकट्ठा करना, प्रोसेसिंग प्लांट और लैंडफिल तक पहुंचाना बीएमसी का काम है। इसके अलावा सड़कों की सफाई, सार्वजनिक शौचालयों का रखरखाव और सीवेज ट्रीटमेंट भी नगर निगम की जिम्मेदारी में आता है।

    स्वास्थ्य और शिक्षा
    बीएमसी देश की सबसे बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों में से एक संचालित करती है। इसके तहत चार मेडिकल कॉलेज अस्पताल, 16 सामान्य अस्पताल, चार विशेष अस्पताल, डिस्पेंसरी और मातृत्व गृह आते हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान बीएमसी की भूमिका पूरे देश में सराही गई थी। शिक्षा के क्षेत्र में बीएमसी 1,100 से ज्यादा नगरपालिका स्कूल चलाती है, जिनमें गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चों को कम खर्च में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलती है।

    बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट
    मुंबई कोस्टल रोड, गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड और वर्सोवा-भायंदर कोस्टल रोड जैसे प्रोजेक्ट बीएमसी के तहत विकसित किए गए हैं।

    इसके अलावा शहर में 340 से ज्यादा पुल और स्काईवॉक का रखरखाव भी बीएमसी करती है। ये सभी प्रोजेक्ट न सिर्फ यातायात को बेहतर बनाते हैं बल्कि शहर के विकास और आर्थिक गतिविधियों को भी गति देते हैं।

    बीएमसी चुनाव केवल नगर निगम की कुर्सी के लिए नहीं, बल्कि मुंबई की असली मिनी सरकार के नेतृत्व के लिए अहम हैं। सड़क, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा और बड़े प्रोजेक्ट्सबीएमसी का दायरा शहर के हर पहलू में फैला है। इसलिए इस चुनाव के नतीजे न केवल राजनीतिक बल्कि शहरी जीवन और विकास की दिशा तय करने वाले होंगे।