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  • देवेंद्र फडणवीस ने प्रधानमंत्री मोदी से की मुलाकात, विकास कार्यों पर लिया मार्गदर्शन

    देवेंद्र फडणवीस ने प्रधानमंत्री मोदी से की मुलाकात, विकास कार्यों पर लिया मार्गदर्शन


    नई दिल्ली। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस मुलाकात की जानकारी प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के जरिए दी गई, जिसमें दोनों नेताओं की तस्वीर भी साझा की गई।

    PMO ने अपने पोस्ट में बताया कि मुख्यमंत्री फडणवीस ने प्रधानमंत्री मोदी से शिष्टाचार भेंट की। वहीं, मुख्यमंत्री ने भी इस मुलाकात को महाराष्ट्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया और इसे प्रेरणादायक अनुभव कहा।

    मुलाकात के बाद सीएम फडणवीस ने ‘एक्स’ पर लिखा कि उन्होंने प्रधानमंत्री को महाराष्ट्र में चल रहे विकास कार्यों और विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी दी। साथ ही राज्य के विकास से जुड़े कई अहम मुद्दों पर प्रधानमंत्री का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।

    फडणवीस ने कहा कि प्रधानमंत्री से हर मुलाकात उन्हें नई ऊर्जा और सकारात्मक दिशा देती है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के प्रति आभार भी व्यक्त किया।

    हालांकि, राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में इस मुलाकात को केवल औपचारिक नहीं माना जा रहा है। चर्चा है कि बैठक में महाराष्ट्र के विकास कार्यों के अलावा किसानों से जुड़े मुद्दों, विशेषकर प्याज उत्पादक किसानों की स्थिति और सहकारी चीनी उद्योग से जुड़े विषयों पर भी बातचीत हुई।

    इससे पहले मुख्यमंत्री फडणवीस ने नई दिल्ली में स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर की जयंती के अवसर पर उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि भी दी थी।

    यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब महाराष्ट्र में कई विकास परियोजनाओं और कृषि क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर केंद्र और राज्य के बीच समन्वय की आवश्यकता मानी जा रही है।

  • IIM Mumbai Recruitment 2026: मैनेजमेंट ट्रेनी के लिए वैकेंसी, जानें योग्यता और सैलरी

    IIM Mumbai Recruitment 2026: मैनेजमेंट ट्रेनी के लिए वैकेंसी, जानें योग्यता और सैलरी


    नई दिल्ली। भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) मुंबई ने मैनेजमेंट ट्रेनी के 10 संविदात्मक पदों पर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। संस्थान ने विभिन्न विभागों में इन नियुक्तियों के लिए योग्य, ऊर्जावान और गतिशील पेशेवरों से आवेदन आमंत्रित किए हैं।

    जारी अधिसूचना के अनुसार कुल 10 पदों में विश्लेषण एवं निर्णय विज्ञान, संचालन एवं आपूर्ति शृंखला, सतत प्रबंधन और ओबीएचआर प्रबंधन में 1-1 पद शामिल हैं। वहीं, मार्केटिंग विभाग में 2 और प्रशासनिक कार्यों के लिए 4 पद निर्धारित किए गए हैं।

    इन पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 27 मई से शुरू हो चुकी है और इच्छुक उम्मीदवार 16 जून 2026 शाम 5 बजे तक आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। संस्थान ने स्पष्ट किया है कि आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे।

    शैक्षणिक योग्यता के तहत उम्मीदवारों के पास संबंधित क्षेत्र में कम से कम 60 प्रतिशत अंकों के साथ मास्टर डिग्री या बीटेक/समकक्ष व्यावसायिक डिग्री होना आवश्यक है। साथ ही, संबंधित क्षेत्र में अनुभव रखने वाले या पीएचडी कर रहे उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाएगी।

    आयु सीमा अधिकतम 32 वर्ष निर्धारित की गई है, हालांकि पीएचडी धारक या अनुभवी उम्मीदवारों को 35 वर्ष तक की छूट दी जाएगी।

    चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा या कौशल परीक्षा, साक्षात्कार, दस्तावेज़ सत्यापन और मेरिट सूची शामिल होगी। चयनित उम्मीदवारों को प्रतिमाह 35,000 से 45,000 रुपये तक का वेतन दिया जाएगा। इसके अलावा 8,000 रुपये आवास भत्ता, 2,000 रुपये यात्रा भत्ता और 500 रुपये मोबाइल खर्च प्रतिपूर्ति भी दी जाएगी।

    यह नियुक्ति पूरी तरह संविदात्मक आधार पर होगी, जिसकी प्रारंभिक अवधि एक वर्ष की रहेगी। प्रदर्शन और संस्थान की आवश्यकता के आधार पर इसे अधिकतम चार वर्षों तक बढ़ाया जा सकता है।

  • बंगाल में TMC में अंदरूनी संकट गहराया, दो और पार्षदों ने छोड़े पद, नेतृत्व पर उठाए सवाल

    बंगाल में TMC में अंदरूनी संकट गहराया, दो और पार्षदों ने छोड़े पद, नेतृत्व पर उठाए सवाल

    कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। अब पार्टी के मजबूत माने जाने वाले शहरी निकायों और नगर निगमों में भी बगावत के सुर सुनाई देने लगे हैं। ताजा घटनाक्रम में कोलकाता नगर निगम के दो वरिष्ठ पार्षदों ने अपने महत्वपूर्ण पदों से इस्तीफा दे दिया है।

    बुधवार को टीएमसी नेता सुशांत घोष ने बरो-12 चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया, जबकि अरूप चक्रवर्ती ने नगर निगम की अकाउंट्स कमेटी के चेयरमैन पद छोड़ने का ऐलान किया। हालांकि दोनों नेताओं ने फिलहाल पार्षद पद नहीं छोड़ा है।

    नेतृत्व के खिलाफ खुलकर नाराजगी
    इस्तीफे के साथ दोनों नेताओं ने पार्टी नेतृत्व की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। अरूप चक्रवर्ती ने कहा कि चुनावी हार को स्वीकार करना जरूरी है, क्योंकि हार मानने से इनकार करने पर पिछली जीतों का महत्व भी खत्म हो जाता है। राजनीतिक गलियारों में उनके बयान को पार्टी नेतृत्व पर सीधा हमला माना जा रहा है।

    दोनों नेताओं का आरोप है कि चुनाव परिणाम आने के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता और मंत्री आम कार्यकर्ताओं और पार्षदों से दूरी बना चुके हैं। चक्रवर्ती ने कहा कि लंबे समय तक कुछ प्रभावशाली नेताओं ने मुख्यमंत्री तक पहुंच को भी सीमित कर दिया था और अब हार के बाद वही नेता सार्वजनिक जीवन से गायब हैं।

    भाजपा सरकार की तारीफ से बढ़ीं अटकले
    सुशांत घोष ने अपने घर के बाहर हुए जानलेवा हमले का जिक्र करते हुए पुलिस जांच पर सवाल उठाए और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।

    भवानीपुर से शुरू हुआ असंतोष
    टीएमसी के भीतर विरोध का यह सिलसिला हाल ही में तब शुरू हुआ था, जब पार्षद देबोलीना बिस्वास ने केएमसी के बरो-9 अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था। भवानीपुर विधानसभा सीट पर पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद यह नाराजगी सामने आई थी। भवानीपुर को लंबे समय तक टीएमसी का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है।

    पार्टी के भीतर बढ़ रहा संकट
    राज्य की सत्ता से बाहर होने के बाद टीएमसी में लगातार अंदरूनी खींचतान बढ़ती जा रही है। हाल ही में वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तिदार ने भी पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था। कई विधायक, सांसद और पार्षद पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की बैठकों से दूरी बनाए हुए हैं और संगठन की कार्यप्रणाली पर खुलकर सवाल उठा रहे हैं।

    सूत्रों के अनुसार, सत्ता परिवर्तन के बाद अब तक 60 से ज्यादा टीएमसी पार्षद विभिन्न नगरपालिकाओं और नगर निगमों में अपने पद छोड़ चुके हैं या संगठनात्मक गतिविधियों से अलग हो गए हैं। कई पार्षदों ने कार्यालय आना भी बंद कर दिया है, जिससे नगर निकायों के कामकाज पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछले एक दशक तक नगरपालिकाएं और नगर निगम टीएमसी की सबसे मजबूत राजनीतिक ताकत रहे, लेकिन अब वहीं पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनते दिखाई दे रहे हैं।

  • राजस्थान का श्रीगंगानगर दुनिया का सबसे गर्म शहर बना, तापमान 48.2 डिग्री सेल्सियस

    राजस्थान का श्रीगंगानगर दुनिया का सबसे गर्म शहर बना, तापमान 48.2 डिग्री सेल्सियस

    श्रीगंगानगर। राजस्थान का श्रीगंगानगर बुधवार को भीषण गर्मी के चलते दुनिया का सबसे गर्म स्थान बन गया। यहां अधिकतम तापमान 48.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिसने उत्तर भारत में पड़ रही लू और गर्मी की स्थिति को और गंभीर बना दिया है।

    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मई के अंतिम दिनों में पड़ रही तेज गर्मी, शुष्क रेगिस्तानी हवाएं और साफ आसमान इस असामान्य तापमान वृद्धि के मुख्य कारण हैं। इस रिकॉर्ड तापमान ने उत्तर प्रदेश के बांदा में पहले दर्ज किए गए उच्च तापमान के स्तर को भी छू लिया है। इस समय उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्से भीषण गर्मी और लू की चपेट में हैं।

    कई शहरों में 45 से 46 डिग्री के पार तापमान
    बुधवार को बीकानेर और रोहतक में 46.6 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया। जैसलमेर और चूरू में 46.4 डिग्री, झांसी में 46 डिग्री, हिसार में 45 डिग्री और नई दिल्ली में 44.6 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ। मौसम विभाग के अनुसार अगले एक दिन तक इसी तरह की भीषण गर्मी बनी रह सकती है। हालांकि, गुरुवार शाम से उत्तर और मध्य भारत के कई हिस्सों में आंधी, धूल भरी हवाएं और गरज के साथ बारिश की संभावना जताई गई है, जिससे तापमान में गिरावट आ सकती है।

    क्यों बना श्रीगंगानगर सबसे गर्म
    मौसम विशेषज्ञों के अनुसार श्रीगंगानगर का तापमान बढ़ने के पीछे कई भौगोलिक और मौसमी कारण हैं। यह क्षेत्र राजस्थान के उत्तरी हिस्से में भारत-पाकिस्तान सीमा के पास स्थित है और थार रेगिस्तान के बेहद करीब है। मई के अंत में यहां की जमीन तेजी से गर्म हो जाती है, जिससे तापमान अचानक बढ़ जाता है। इसके अलावा उत्तर-पश्चिम दिशा से आने वाली शुष्क और गर्म हवाएं भी तापमान को और बढ़ा देती हैं।

    नमी की कमी और साफ आसमान ने बढ़ाई गर्मी
    विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय वातावरण में नमी की कमी है, जिससे बादल नहीं बन पा रहे हैं और सूरज की किरणें सीधे जमीन पर पड़ रही हैं। सूखी मिट्टी भी गर्मी को और बढ़ा रही है, क्योंकि जमीन में नमी न होने पर सूर्य की ऊर्जा सीधे हवा और सतह को गर्म करती है।

    इस समय उत्तर भारत में किसी सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ या बारिश लाने वाली प्रणाली की अनुपस्थिति के कारण भी तापमान लगातार बढ़ रहा है। राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और दिल्ली में कई दिनों से साफ मौसम बना हुआ है, जिससे गर्मी और अधिक जमा हो गई है।

    आने वाले दिनों में राहत की उम्मीद
    मौसम विभाग ने राहत की संभावना जताई है। अनुमान है कि गुरुवार शाम से तेज हवाएं, धूल भरी आंधी और बारिश शुरू हो सकती है, जिससे सप्ताहांत तक तापमान 40 डिग्री से नीचे आने की संभावना है।

    हालांकि, मौसम में बदलाव के दौरान तेज आंधी, बिजली गिरने और नुकसान पहुंचाने वाली हवाओं का खतरा भी बना रह सकता है। ऐसे में लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। फिलहाल श्रीगंगानगर देश और दुनिया के सबसे गर्म क्षेत्रों में शामिल बना हुआ है और भीषण गर्मी ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है।

  • पश्चिम बंगाल में ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना में 30 लाख फर्जी लाभार्थी, CM शुभेंदु अधिकारी का दावा

    पश्चिम बंगाल में ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना में 30 लाख फर्जी लाभार्थी, CM शुभेंदु अधिकारी का दावा

    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में महिलाओं को आर्थिक सहायता देने वाली ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना को लेकर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि योजना के लगभग 30 लाख लाभार्थी अपात्र पाए गए हैं। इनमें कथित तौर पर गैर-भारतीय, मृतक और वोटर लिस्ट से स्थायी रूप से हटाए गए लोगों के नाम शामिल हैं।

    कोलकाता स्थित राज्य सचिवालय नबन्ना में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री ने नई ‘अन्नपूर्णा भंडार’ योजना के आवेदन फॉर्म जारी किए। उन्होंने बताया कि नई योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 3,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। आवेदन पत्रों का सत्यापन प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा किया जाएगा।

    2.20 करोड़ लाभार्थियों में 30 लाख पर सवाल
    मुख्यमंत्री के अनुसार, वर्तमान में ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना के करीब 2.20 करोड़ लाभार्थी हैं, लेकिन इनमें से लगभग 30 लाख नाम संदिग्ध हैं। उन्होंने दावा किया कि कई लाभार्थी गैर-भारतीय, मृतक या फर्जी हैं। सत्यापन के बाद ‘अन्नपूर्णा भंडार’ योजना में लगभग 2 करोड़ वास्तविक लाभार्थियों को शामिल किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत आवेदन किया है या SIR से जुड़े ट्रिब्यूनल में वोटर सूची में शामिल होने की अपील की है, वे इस योजना के पात्र माने जाएंगे।

    पुरानी योजना से दोगुनी सहायता
    मुख्यमंत्री ने कहा कि बीजेपी ने चुनावी घोषणा पत्र में ‘अन्नपूर्णा भंडार’ योजना शुरू करने का वादा किया था, जो पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना की जगह लेगी। पुरानी योजना में सामान्य वर्ग की महिलाओं को 1,500 रुपये और SC/ST वर्ग की महिलाओं को 1,700 रुपये प्रति माह दिए जाते थे। नई योजना में सभी पात्र महिलाओं को 3,000 रुपये प्रतिमाह दिए जाएंगे।

    पारदर्शिता के लिए प्रशासनिक स्तर पर तैयारी
    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार को ऐसी शिकायतें मिली थीं कि जिन लोगों के नाम वोटर सूची से हट चुके हैं और जिन्होंने ट्रिब्यूनल या CAA के तहत आवेदन नहीं किया, वे भी योजना का लाभ उठा रहे थे। इसी कारण लाभार्थियों का दोबारा सत्यापन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि महिला एवं बाल विकास मंत्री अग्निमित्रा पॉल का विभाग इस योजना का नोडल विभाग होगा। इसके साथ ही मुख्य सचिव, वित्त विभाग, जिला मजिस्ट्रेट, बीडीओ, नगर निगम आयुक्त, गृह विभाग और आधार नामांकन से जुड़े विभाग भी इस प्रक्रिया में शामिल रहेंगे।

    नई योजना लागू होने तक जारी रहेगी पुरानी सहायता
    मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि आवेदन प्रक्रिया पूरी होने तक मौजूदा ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना का लाभ बंद नहीं किया जाएगा। सरकार 1 जून से 90 दिनों तक ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से नामांकन अभियान चलाएगी। पंचायत क्षेत्रों में घर-घर जाकर फॉर्म भरवाने की व्यवस्था भी की जाएगी।

    उन्होंने दावा किया कि सत्यापन की कमी के कारण कुछ पुरुषों के नाम भी लाभार्थियों की सूची में शामिल हो गए थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2 जून तक सफलतापूर्वक नामांकन कराने वाली महिलाओं को अगली कैबिनेट बैठक के बाद DBT के जरिए राशि भेज दी जाएगी।

    इसके अलावा उन्होंने घोषणा की कि सोमवार से महिलाओं को राज्य परिवहन की बसों में मुफ्त यात्रा सुविधा मिलेगी। वहीं आयुष्मान भारत योजना के कार्ड जुलाई से वितरित किए जा सकते हैं। केंद्र सरकार के साथ इस संबंध में 8 जून को MoU पर हस्ताक्षर होने की संभावना है।

  • भारत के फिफ्थ जेनरेशन फाइटर जेट एएमसीए की रफ्तार तेज, 30 महीने में पहला प्रोटोटाइप उड़ान के लिए तैयार करने का लक्ष्य

    भारत के फिफ्थ जेनरेशन फाइटर जेट एएमसीए की रफ्तार तेज, 30 महीने में पहला प्रोटोटाइप उड़ान के लिए तैयार करने का लक्ष्य


    नई दिल्ली ।
    भारत ने अपनी वायुसेना को आधुनिक और स्वदेशी तकनीक से सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट यानी एएमसीए कार्यक्रम के लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल जारी कर दिया है। रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी इस आरएफपी के साथ ही देश के पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट के विकास की प्रक्रिया ने अब तेज रफ्तार पकड़ ली है। इस परियोजना का उद्देश्य भारतीय वायुसेना के लिए एक ऐसा आधुनिक लड़ाकू विमान तैयार करना है जो स्टील्थ तकनीक, अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों और लंबी दूरी तक प्रभावी संचालन क्षमता से लैस हो।

    आरएफपी के अनुसार बिडिंग प्रक्रिया 11 जून से शुरू होगी और 27 जुलाई को समाप्त होगी, जबकि 28 जुलाई को बोली खोली जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया के तहत चयनित साझेदार को कॉन्ट्रैक्ट साइन होने के मात्र 30 महीनों के भीतर पहले प्रोटोटाइप की उड़ान सुनिश्चित करनी होगी। परियोजना के तहत कुल पांच लो-ऑब्जर्वेबल प्रोटोटाइप विमान तैयार किए जाएंगे, जिससे परीक्षण और विकास प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। इसके अलावा एक स्ट्रक्चरल टेस्ट स्पेसिमेन भी बनाया जाएगा ताकि विमान की मजबूती और प्रदर्शन का व्यापक मूल्यांकन किया जा सके।

    इस पूरे विकास कार्य की जिम्मेदारी एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी को सौंपी गई है, जो डिजाइन डेटा और तकनीकी ड्रॉइंग्स के आधार पर निजी क्षेत्र की भागीदारी के साथ इस परियोजना को आगे बढ़ाएगी। चयनित बोलीदाता को न केवल निर्माण कार्य करना होगा बल्कि फ्लाइट टेस्टिंग, टाइप सर्टिफिकेशन और तकनीकी मूल्यांकन में भी सहयोग देना होगा। विमान को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि यह आधुनिक युद्ध परिस्थितियों में उच्च स्तर की दक्षता और उत्तरजीविता क्षमता प्रदान कर सके।

    एएमसीए परियोजना के लिए देश के तीन प्रमुख निजी क्षेत्र नेतृत्व वाले कंसोर्टियम को शॉर्टलिस्ट किया गया है, जिनमें टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड, लार्सन एंड टुब्रो के साथ भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड तथा भारत फोर्ज के साथ बीईएमएल जैसी कंपनियां शामिल हैं। यह मॉडल भारत में रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र की बढ़ती भूमिका को भी दर्शाता है।

    इस फाइटर जेट की सबसे बड़ी विशेषता इसकी स्टील्थ तकनीक होगी, जिसके तहत इसे इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि यह दुश्मन के रडार पर आसानी से दिखाई न दे। इसमें हथियारों और मिसाइलों को बाहरी हिस्सों की बजाय विमान के अंदरूनी कम्पार्टमेंट में रखा जाएगा, जिससे इसकी रडार क्रॉस सेक्शन क्षमता और कम हो जाएगी। यह विमान दो इंजन वाला मध्यम श्रेणी का लड़ाकू विमान होगा, जो लगभग 1.2 से 1.8 मैक की रफ्तार से उड़ान भरने में सक्षम होगा।

    रक्षा क्षेत्र के जानकारों के अनुसार यह प्रोजेक्ट भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि वर्तमान में भारतीय वायुसेना निर्धारित स्क्वाड्रन क्षमता से कम विमानों के साथ संचालन कर रही है। ऐसे में एएमसीए, तेजस के उन्नत संस्करणों के साथ मिलकर भविष्य में वायुसेना की ताकत को नई दिशा देगा। भारत पहले ही तेजस फाइटर जेट के जरिए स्वदेशी विमान निर्माण क्षमता को मजबूत कर चुका है और अब इस परियोजना के जरिए अगली पीढ़ी की लड़ाकू तकनीक में प्रवेश कर रहा है।

  • दिल्ली में मोदी–विजय बैठक, मेकेदातु विवाद के बीच तमिलनाडु सीएम की पीएम से पहली औपचारिक भेंट

    दिल्ली में मोदी–विजय बैठक, मेकेदातु विवाद के बीच तमिलनाडु सीएम की पीएम से पहली औपचारिक भेंट

    नई दिल्ली । तमिलनाडु के मुख्यमंत्री Vijay ने बुधवार को प्रधानमंत्री Narendra Modi से नई दिल्ली में मुलाकात की, जिसे दोनों नेताओं के बीच पिछले एक दशक से अधिक समय के बाद हुई महत्वपूर्ण राजनीतिक भेंट माना जा रहा है। मुख्यमंत्री बनने के बाद यह उनकी प्रधानमंत्री से पहली औपचारिक मुलाकात रही, जिससे राजनीतिक हलकों में इस बैठक को लेकर चर्चा तेज हो गई है। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से भी इस मुलाकात की जानकारी साझा की गई, जिसमें इसे शिष्टाचार भेंट बताया गया। हालांकि आधिकारिक बयान में विस्तृत एजेंडा सामने नहीं आया, लेकिन माना जा रहा है कि बातचीत का केंद्र तमिलनाडु से जुड़े विकास मुद्दे, केंद्र प्रायोजित योजनाएं और राज्य में चल रही परियोजनाएं रहीं।

    यह मुलाकात ऐसे समय पर हुई है जब दक्षिण भारत की राजनीति में कावेरी जल विवाद से जुड़े मेकेदातु प्रोजेक्ट को लेकर तनाव की स्थिति बनी हुई है। तमिलनाडु सरकार लंबे समय से इस परियोजना का विरोध कर रही है और मुख्यमंत्री विजय ने हाल ही में प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने की मांग की थी। राज्य सरकार का कहना है कि कावेरी नदी पर किसी भी नए बांध या परियोजना से तमिलनाडु के हिस्से के जल प्रवाह पर असर पड़ सकता है, जिससे कृषि क्षेत्र और किसानों की आजीविका पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। इसी पृष्ठभूमि में यह मुलाकात राजनीतिक रूप से और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।

    मुख्यमंत्री विजय का राजनीतिक सफर पिछले कुछ वर्षों में तेजी से आगे बढ़ा है। फिल्मी दुनिया से राजनीति में आए विजय ने अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाते हुए राज्य में नई पार्टी का गठन किया और धीरे-धीरे जनाधार मजबूत किया। उनके नेतृत्व में पार्टी ने युवा मतदाताओं और शहरी क्षेत्रों में प्रभावशाली समर्थन हासिल किया, जिससे पारंपरिक राजनीतिक समीकरणों में बदलाव देखने को मिला। मुख्यमंत्री बनने के बाद उनकी यह दिल्ली यात्रा पहली बड़ी औपचारिक राजनीतिक मुलाकातों में से एक मानी जा रही है।

    जानकारी के अनुसार, विजय और प्रधानमंत्री मोदी की यह मुलाकात लगभग 12 साल बाद हुई है। इससे पहले दोनों नेताओं की मुलाकात 2014 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान कोयंबटूर में हुई थी, जब विजय एक अभिनेता के रूप में राजनीतिक कार्यक्रम में शामिल हुए थे। अब दोनों नेताओं का मिलना पूरी तरह से अलग राजनीतिक संदर्भ में हुआ है, जहां एक तरफ प्रधानमंत्री देश के शीर्ष नेतृत्व में हैं और दूसरी ओर विजय एक राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में केंद्र से संवाद कर रहे हैं।

    बैठक के दौरान प्रशासनिक सहयोग, विकास योजनाओं और केंद्र-राज्य समन्वय से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। तमिलनाडु सरकार का जोर राज्य में बुनियादी ढांचे, औद्योगिक निवेश और कृषि क्षेत्र के विकास पर है, जिसके लिए केंद्र सरकार के साथ बेहतर तालमेल को जरूरी माना जा रहा है।

    राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह मुलाकात केवल शिष्टाचार भेंट नहीं बल्कि भविष्य की राजनीतिक दिशा को भी संकेत देती है। विशेषकर मेकेदातु जैसे संवेदनशील मुद्दे और राज्य-केंद्र संबंधों की पृष्ठभूमि में यह बैठक आने वाले समय में नीतिगत फैसलों पर असर डाल सकती है। फिलहाल दोनों पक्षों ने इसे सकारात्मक और औपचारिक बातचीत बताया है, लेकिन इसके राजनीतिक निहितार्थों पर नजर बनी हुई है।

  • पद्मनाभस्वामी मंदिर में सुरक्षा पर बड़ा सवाल, खजाने से गायब हुए सोने और हीरे के बहुमूल्य आभूषण

    पद्मनाभस्वामी मंदिर में सुरक्षा पर बड़ा सवाल, खजाने से गायब हुए सोने और हीरे के बहुमूल्य आभूषण


    नई दिल्ली । केरल के ऐतिहासिक और विश्वप्रसिद्ध श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। मंदिर के खजाने से सोने और हीरे के बहुमूल्य आभूषणों के गायब होने की खबर सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। प्रारंभिक जांच और पुलिस रिपोर्ट में मंदिर की इन्वेंट्री में कई महत्वपूर्ण वस्तुओं की कमी दर्ज की गई है, जिसके बाद मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है। देश के सबसे समृद्ध और प्रतिष्ठित मंदिरों में शामिल इस धार्मिक स्थल से जुड़े इस घटनाक्रम ने श्रद्धालुओं और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है।

    पुलिस महानिदेशक द्वारा गृह विभाग को सौंपी गई विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार मंदिर के रिकॉर्ड में लगभग 78 ग्राम सोने के आभूषण कम पाए गए हैं। इसके साथ ही ‘वैरम नामा’ नामक हीरे से जड़ा एक अत्यंत कीमती आभूषण भी रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं मिला। बताया जा रहा है कि यह आभूषण कई महीने पहले मरम्मत के लिए बाहर भेजा गया था, लेकिन अब तक उसे वापस मंदिर में जमा नहीं कराया गया। इसी प्रकार मंदिर का एक सोने का दीया भी रखरखाव कार्य के लिए बाहर भेजा गया था, जो अभी तक वापस नहीं आया है।

    मामले के सामने आने के बाद मंदिर प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। सदियों पुराने इस मंदिर में मौजूद संपत्तियों और बहुमूल्य धरोहरों की सुरक्षा को लेकर पहले से ही विशेष सतर्कता बरती जाती रही है, लेकिन अब सामने आई इस चूक ने पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता को चुनौती दी है। प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि इतने संवेदनशील और ऐतिहासिक महत्व वाले मंदिर में रिकॉर्ड प्रबंधन और निगरानी प्रणाली को और अधिक मजबूत किए जाने की आवश्यकता है।

    रिपोर्ट में सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए कई अहम सुझाव भी दिए गए हैं। इसमें मंदिर की सभी सोने और चांदी की वस्तुओं को सुरक्षित तिजोरियों में रखने की अनुशंसा की गई है। इसके अलावा श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले चढ़ावे के लिए अलग और सुरक्षित लॉकर व्यवस्था विकसित करने पर भी जोर दिया गया है। मंदिर परिसर में प्रवेश करने वाले प्रत्येक व्यक्ति की सख्त जांच सुनिश्चित करने की सिफारिश की गई है, ताकि बिना उचित सत्यापन के कोई भी संवेदनशील क्षेत्रों तक पहुंच न सके।

    श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर का इतिहास अत्यंत प्राचीन और समृद्ध माना जाता है। तिरुवनंतपुरम स्थित यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है और दक्षिण भारत की श्री वैष्णव परंपरा में इसका विशेष धार्मिक महत्व है। मंदिर को देश ही नहीं बल्कि विश्व के सबसे धनी मंदिरों में गिना जाता है। वर्षों पहले मंदिर के गुप्त तहखानों से मिले बहुमूल्य खजाने ने इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया था। ऐसे में अब आभूषणों के गायब होने की खबर ने सुरक्षा और संरक्षण व्यवस्था पर नई बहस छेड़ दी है।

    प्रशासन फिलहाल पूरे मामले की गहन जांच में जुटा हुआ है। मंदिर से जुड़े रिकॉर्ड, मरम्मत प्रक्रिया और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की विस्तार से जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले में किसी भी स्तर की लापरवाही पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं श्रद्धालुओं की मांग है कि मंदिर की प्राचीन धरोहरों की सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीक और पारदर्शी निगरानी प्रणाली को तत्काल लागू किया जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।

  • एयर इंडिया पर बढ़ा परिचालन दबाव: तकनीकी खराबी से बीच सफर लौटी फ्लाइट, अब घरेलू उड़ानों में भी कटौती की तैयारी

    एयर इंडिया पर बढ़ा परिचालन दबाव: तकनीकी खराबी से बीच सफर लौटी फ्लाइट, अब घरेलू उड़ानों में भी कटौती की तैयारी

    नई दिल्ली । एयर इंडिया की दिल्ली से सैन फ्रांसिस्को जा रही एक अंतरराष्ट्रीय उड़ान बुधवार को तकनीकी खराबी के कारण बीच रास्ते से वापस लौट आई। करीब आठ घंटे तक हवा में रहने के बाद विमान की दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सुरक्षित इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई। इस घटना के दौरान विमान में लगभग 230 यात्री सवार थे, जिनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पायलट ने एहतियातन उड़ान को वापस दिल्ली मोड़ने का फैसला लिया। घटना के बाद एयर इंडिया ने विमान की विस्तृत तकनीकी जांच शुरू कर दी है।

    जानकारी के अनुसार बोइंग 777-300 ईआर विमान ने निर्धारित समय पर दिल्ली से उड़ान भरी थी और वह सैन फ्रांसिस्को के लिए लंबी अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर था। उड़ान भरने के कुछ घंटों बाद विमान के तकनीकी सिस्टम में गड़बड़ी के संकेत मिले। उस समय विमान विदेशी हवाई क्षेत्र के ऊपर उड़ान भर रहा था। संभावित जोखिम को देखते हुए पायलट और एयरलाइन की तकनीकी टीम ने तत्काल स्थिति की समीक्षा की और सुरक्षा मानकों के तहत विमान को वापस दिल्ली लाने का निर्णय लिया गया।

    विमान की सुरक्षित लैंडिंग के बाद यात्रियों ने राहत की सांस ली। एयरपोर्ट पर एयर इंडिया की ग्राउंड टीम ने यात्रियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था शुरू की। प्रभावित यात्रियों को होटल, भोजन और दूसरी उड़ानों की सुविधा उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की गई। एयरलाइन ने यात्रियों को हुई असुविधा पर खेद जताते हुए कहा कि सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा और विमान की गहन तकनीकी जांच पूरी होने के बाद ही आगे कोई निर्णय लिया जाएगा।

    इस घटना ने एक बार फिर देश में विमान सुरक्षा और एयरलाइंस के बढ़ते परिचालन दबाव को लेकर बहस तेज कर दी है। हाल के वर्षों में अंतरराष्ट्रीय और घरेलू उड़ानों की संख्या तेजी से बढ़ी है, लेकिन साथ ही तकनीकी रखरखाव, ईंधन लागत और परिचालन खर्च भी लगातार बढ़ रहे हैं। विमानन क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि लंबी दूरी की उड़ानों में तकनीकी निगरानी और रखरखाव की जिम्मेदारी और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि ऐसे विमानों में छोटी तकनीकी गड़बड़ी भी बड़े जोखिम का कारण बन सकती है।

    इसी बीच एयर इंडिया की ओर से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में कटौती की तैयारी की खबर ने भी यात्रियों की चिंता बढ़ा दी है। बढ़ती ईंधन कीमतों और भारी परिचालन लागत के कारण एयरलाइन आने वाले महीनों में अपनी उड़ानों के फेरों को सीमित करने की योजना बना रही है। जानकारी के मुताबिक जून से अगस्त 2026 के बीच कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय रूटों पर उड़ानों की संख्या कम की जा सकती है। एयरलाइन का कहना है कि यह कदम परिचालन लागत को नियंत्रित करने और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के लिए उठाया जा रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि उड़ानों में कटौती का असर यात्रियों पर सीधे तौर पर पड़ सकता है। टिकटों की उपलब्धता कम होने से किराए बढ़ सकते हैं और यात्रियों को शेड्यूल में बदलाव जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। वहीं एयर इंडिया के सामने एक ओर सुरक्षा मानकों को बनाए रखने की चुनौती है, तो दूसरी ओर आर्थिक दबाव के बीच परिचालन संतुलन कायम रखना भी बड़ी जिम्मेदारी बन गया है। फिलहाल एयरलाइन ने साफ किया है कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और तकनीकी जांच पूरी होने तक संबंधित विमान को सेवा में शामिल नहीं किया जाएगा।

  • पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हलचल बढ़ी, BJP सांसद का दावा- हरी झंडी मिलते ही TMC में बड़ा टूट संभव

    पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हलचल बढ़ी, BJP सांसद का दावा- हरी झंडी मिलते ही TMC में बड़ा टूट संभव

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़े राजनीतिक बदलाव की अटकलों ने सियासी माहौल को गर्म कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी के सांसद सौमित्र खान के एक बयान ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने दावा किया है कि तृणमूल कांग्रेस के लगभग 20 सांसद और 50 विधायक भाजपा के संपर्क में हैं और पार्टी नेतृत्व की अनुमति मिलते ही वे पाला बदल सकते हैं। इस बयान के सामने आने के बाद राज्य की राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं और विपक्षी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया है।

    लगातार तीसरी बार लोकसभा पहुंचे सौमित्र खान ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि तृणमूल कांग्रेस के कई जनप्रतिनिधि अपनी ही पार्टी की कार्यप्रणाली और नेतृत्व से संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के भीतर लंबे समय से असंतोष का माहौल बना हुआ है और कई नेता राजनीतिक भविष्य को लेकर नई संभावनाओं की तलाश में हैं। खान ने कहा कि यदि भाजपा नेतृत्व चाहे तो आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा परिवर्तन देखने को मिल सकता है। हालांकि उन्होंने उन नेताओं के नाम सार्वजनिक नहीं किए जो कथित तौर पर भाजपा के संपर्क में बताए जा रहे हैं।

    इस दावे के बाद राजनीतिक गलियारों में दल-बदल विरोधी कानून को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। पश्चिम बंगाल की 42 लोकसभा सीटों में से फिलहाल तृणमूल कांग्रेस के पास 29 सांसद हैं, जबकि भाजपा के पास 12 और कांग्रेस के पास एक सीट है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि किसी दल के दो-तिहाई सांसद एक साथ पार्टी बदलते हैं तो दल-बदल विरोधी कानून के तहत उनकी सदस्यता पर खतरा नहीं रहता। ऐसे में 29 सांसदों वाली पार्टी के लिए यह आंकड़ा लगभग 19 से 20 सांसदों का बनता है, जो सौमित्र खान के दावे के काफी करीब माना जा रहा है।

    दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा सांसद के बयान को पूरी तरह निराधार बताया है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि भाजपा जानबूझकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही है और ऐसा कोई राजनीतिक संकट तृणमूल कांग्रेस में मौजूद नहीं है। पार्टी नेताओं का कहना है कि भाजपा राज्य में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने के लिए इस तरह के दावे कर रही है, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है। तृणमूल कांग्रेस ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी पूरी तरह एकजुट है और नेतृत्व के खिलाफ किसी तरह की नाराजगी जैसी बातें केवल राजनीतिक प्रचार का हिस्सा हैं।

    पश्चिम बंगाल में दलबदल की राजनीति कोई नई बात नहीं है। वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले भी तृणमूल कांग्रेस के कई बड़े नेताओं ने भाजपा का दामन थामा था। हालांकि चुनाव के बाद राजनीतिक परिस्थितियां बदलीं और कई नेता फिर से अपनी पुरानी पार्टी में लौट गए। लेकिन इस बार राज्य की राजनीति पहले से अलग नजर आ रही है। बीते कुछ समय में तृणमूल कांग्रेस के कुछ नेताओं द्वारा सार्वजनिक मंचों पर असंतोष जाहिर किए जाने की घटनाओं ने राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दी है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए पश्चिम बंगाल में सियासी समीकरण तेजी से बदल सकते हैं। भाजपा लगातार राज्य में अपने संगठन को मजबूत करने में जुटी है, जबकि तृणमूल कांग्रेस अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए सक्रिय रणनीति पर काम कर रही है। ऐसे में सौमित्र खान का यह बयान आने वाले समय में बंगाल की राजनीति को और अधिक दिलचस्प बना सकता है।