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  • इकरा हसन बोलीं- यूपी में भाजपा को सपा ही हरा सकती है, कांग्रेस अकेले कुछ नहीं कर पाएगी

    इकरा हसन बोलीं- यूपी में भाजपा को सपा ही हरा सकती है, कांग्रेस अकेले कुछ नहीं कर पाएगी

    शामली। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन को लेकर खींचतान के बीच कैराना से सपा सांसद इकरा हसन ने कांग्रेस पर निशाना साधा है। शामली में दिशा समिति की बैठक के बाद प्रेसवार्ता में उन्होंने कहा कि प्रदेश में भाजपा को हराने की राजनीतिक ताकत समाजवादी पार्टी के पास है। उनका कहना था कि गठबंधन नहीं रहा तो इसका नुकसान कांग्रेस को होगा, जबकि सपा पर इसका असर नहीं पड़ेगा।

    बोलीं- अखिलेश यादव ही भाजपा को हरा सकते हैं

    इकरा हसन ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा के मुकाबले समाजवादी पार्टी ही मुख्य राजनीतिक चुनौती है। उन्होंने दावा किया कि यदि प्रदेश में भाजपा को कोई हरा सकता है तो वह सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव हैं। कांग्रेस के प्रदर्शन को लेकर उन्होंने कहा कि पार्टी अकेले चुनाव लड़ती है तो उसके लिए मुश्किलें बढ़ेंगी।

    उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सपा-कांग्रेस गठबंधन में सीट बंटवारे और आगे की रणनीति को लेकर सार्वजनिक तौर पर मतभेद सामने आ रहे हैं। कांग्रेस नेता इमरान मसूद और इकरा हसन के बीच भी इस मुद्दे पर बयानबाजी हुई है।

    दिशा की बैठक में विकास कार्यों में देरी पर सवाल

    प्रेसवार्ता से पहले हुई दिशा समिति की बैठक में इकरा हसन ने कैराना संसदीय क्षेत्र से जुड़े कई विकास कार्यों में देरी का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी सांसद होने के कारण उनके क्षेत्र के काम प्रभावित हो रहे हैं। बैठक में पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता राजकुमार सिंह से भी उन्होंने सवाल किए। अधिकारी ने स्पष्ट किया कि वह किसी राजनीतिक दल से जुड़े नहीं हैं और शासन के निर्देशों के अनुसार काम कर रहे हैं।

    सांसद ने बताया कि गढ़ी दथेडा से नाई नगला होते हुए थालवा और कैराना से इस्सौपुर खुरगान तक सड़क निर्माण के लिए शासन से मंजूरी मिल चुकी है। उन्होंने 800 मीटर सड़क का निर्माण कराने और स्वीकृत कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने की मांग की।

    चौसाना-माल्हीपुर में राजकीय इंटर कॉलेज की मांग

    बैठक में शिक्षा से जुड़े मुद्दे भी प्रमुखता से उठे। इकरा हसन ने चौसाना और माल्हीपुर में राजकीय इंटर कॉलेज नहीं होने का मामला रखा। उन्होंने बताया कि ग्रामीण कॉलेज निर्माण के लिए जमीन उपलब्ध कराने को तैयार हैं। सांसद ने डीआईओएस और जिलाधिकारी से दोनों क्षेत्रों में राजकीय इंटर कॉलेज के प्रस्ताव तैयार कराने को कहा।

    उन्होंने बंतीखेड़ा जूनियर हाईस्कूल तथा इस्सौपुर खुरगान के स्कूलों में गणित और विज्ञान के शिक्षकों की कमी का मुद्दा भी उठाया। इसके अलावा चहारदीवारी विहीन प्राथमिक विद्यालयों की सूची जिलाधिकारी को सौंपी गई। कैराना के दिगंबर जैन इंटर कॉलेज को दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करने का प्रस्ताव भी बैठक में रखा गया। दिशा समिति की बैठक में स्कूलों की सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

    बलवा-बनत पुल और हाईवे की बदहाली पर भी नाराजगी

    बैठक में बलवा और शामली सदर तहसील क्षेत्र में स्वीकृत उपरिगामी पुलों के निर्माण की प्रगति पर भी सवाल उठे। एनएचएआई बागपत इकाई के अभियंता सत्यम सेठ ने बताया कि बिजली के खंभे हटने के बाद दोनों पुलों का निर्माण शुरू किया जाएगा। इन्हें 18 महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

    दिल्ली-शामली-सहारनपुर हाईवे पर गड्ढों और मरम्मत में देरी का मुद्दा भी सांसद ने उठाया। अधिकारी के मुताबिक गौरीपुर से खेकड़ा तक हाईवे की मरम्मत पूरी हो चुकी है, जबकि गौरीपुर मोड़ से शामली तक जल्द पेचवर्क कराया जाएगा। एनएचएआई के परियोजना निदेशक नरेंद्र सिंह के बैठक में मौजूद नहीं रहने पर इकरा हसन ने नाराजगी जताई।

    आयुष्मान योजना में गड़बड़ी के आरोप, जांच के निर्देश

    बैठक में आयुष्मान योजना से जुड़ी कथित गड़बड़ियों का मामला भी सामने आया। आरोप लगाया गया कि योजना के तहत अस्पतालों में 40 करोड़ 42 लाख रुपये की गड़बड़ी हुई है। इसके अलावा धनराशि लेकर अल्ट्रासाउंड लाइसेंस जारी करने के आरोप भी लगाए गए।

    मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी आलोक यादव ने सीएमओ डॉ. तृतीय कुमार को जांच के निर्देश दिए। इसके साथ ही कांधला-किवाना की जर्जर सड़क, स्कूलों में शिक्षकों की कमी और जल जीवन मिशन के तहत सड़कें खोदने के बाद मरम्मत नहीं किए जाने का मुद्दा भी बैठक में उठा।

  • यूपी में PDA की काट के लिए भाजपा का ‘तब बनाम अब’ फॉर्मूला, जातीय समीकरण साधने की तैयारी

    यूपी में PDA की काट के लिए भाजपा का ‘तब बनाम अब’ फॉर्मूला, जातीय समीकरण साधने की तैयारी


    मेरठ।
    उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सपा और भाजपा ने अपनी राजनीतिक तैयारियां तेज कर दी हैं। सपा जहां PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण के जरिए चुनावी जमीन मजबूत करने में जुटी है, वहीं भाजपा ने इसके जवाब में ‘तब बनाम अब’ का फॉर्मूला आगे बढ़ाया है। पार्टी संगठन और सरकार के स्तर पर सपा सरकार के पांच साल और भाजपा सरकार के करीब एक दशक के कार्यकाल के बीच का फर्क जनता तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।

    पुराने शासन बनाम मौजूदा सरकार का फर्क बताने की तैयारी
    भाजपा अपने अभियान में सपा सरकार के कार्यकाल के दौरान कानून-व्यवस्था, दंगों और अपराध से जुड़े मुद्दों को उठा रही है। मुख्तार अंसारी, अतीक अहमद और आजम खान जैसे नामों का उल्लेख करते हुए पार्टी नेता उस दौर की परिस्थितियों को चुनावी मुद्दा बना रहे हैं। इसके साथ ही कांवड़ यात्रा से जुड़े पुराने घटनाक्रमों का भी जिक्र किया जा रहा है।

    इसके मुकाबले भाजपा सरकार के कार्यकाल में कानून-व्यवस्था, अपराधियों पर कार्रवाई, एक्सप्रेसवे, रैपिड रेल, मेट्रो, औद्योगिक निवेश और मेडिकल कॉलेजों के विस्तार को उपलब्धियों के तौर पर जनता के सामने रखा जा रहा है। कार्यकर्ताओं को भी दोनों सरकारों के कामकाज के अंतर को लोगों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी दी जा रही है।

    PDA के बीच जातीय समीकरण पर भी नजर
    2027 के चुनाव में PDA को सपा की अहम रणनीति माना जा रहा है। पश्चिमी यूपी में जाट और गुर्जर जैसे सामाजिक समूहों को लेकर भी राजनीतिक सक्रियता बढ़ी है। भाजपा की ओर से जातीय भेदभाव और समाज को बांटने की राजनीति के आरोपों को मुद्दा बनाया जा रहा है।

    मेरठ में शक्ति केंद्र संयोजक सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर जातीय आधार पर समाज को बांटने और महापुरुषों को जातियों में बांटने का आरोप लगाया। उन्होंने कार्यकर्ताओं से ऐसे प्रयासों के प्रति लोगों को जागरूक करने की अपील की।

    हर मंच से सपा सरकार के दौर की तुलना
    भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी तक के भाषणों में सपा सरकार के दौर और मौजूदा भाजपा सरकार के कामकाज की तुलना देखने को मिल रही है। पार्टी का जोर इस संदेश पर है कि मतदाताओं को दोनों शासनकाल के बीच का अंतर खुद समझना चाहिए।

    मेरठ में आयोजित कार्यक्रमों में भी भाजपा नेताओं ने सपा सरकार पर अपराधियों को संरक्षण देने के आरोप लगाए और 2027 में पार्टी की सरकार बनाने के लिए संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करने पर जोर दिया।

  • UP : सहारनपुर में नितिन नवीन का चुनावी मंथन, पुराने नेताओं से लिया फीडबैक, 2027 की तैयारियों पर की चर्चा

    UP : सहारनपुर में नितिन नवीन का चुनावी मंथन, पुराने नेताओं से लिया फीडबैक, 2027 की तैयारियों पर की चर्चा

    सहारनपुर। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भाजपा ने पश्चिमी यूपी में संगठनात्मक तैयारियां तेज कर दी हैं। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने सहारनपुर में करीब ढाई घंटे तक पार्टी के पूर्व और वर्तमान जनप्रतिनिधियों व पदाधिकारियों के साथ अलग-अलग बैठकें कीं। अंबाला रोड स्थित रिसॉर्ट में हुई इन बैठकों में संगठन की स्थिति, पुराने अनुभवों का इस्तेमाल और आगामी चुनाव की तैयारियों को लेकर चर्चा हुई।

    पहले पुराने नेताओं से संवाद, फिर मौजूदा टीम के साथ बैठक
    सहारनपुर पहुंचने के बाद नितिन नवीन ने सबसे पहले पश्चिमी यूपी के पूर्व जनप्रतिनिधियों और पूर्व पदाधिकारियों के साथ बैठक की। करीब दो घंटे चली इस बैठक में नेताओं के राजनीतिक अनुभव और संगठन के साथ उनके तालमेल से जुड़े विषयों पर फीडबैक लिया गया। साथ ही 2027 के चुनाव को लेकर संगठन की तैयारियों और आगे की रणनीति पर भी विचार-विमर्श किया गया।

    इसके बाद करीब आधे घंटे तक वर्तमान जनप्रतिनिधियों और पदाधिकारियों के साथ दूसरी बैठक हुई। इसमें चुनावी तैयारियों के साथ संगठन की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की गई। टिकट के संभावित दावेदारों की स्थिति और क्षेत्रवार फीडबैक पर भी मंथन किए जाने की बात सामने आई है। दोनों बैठकों में मीडिया की एंट्री प्रतिबंधित रही।

    पश्चिमी यूपी के संगठन पर फोकस
    नितिन नवीन के सहारनपुर दौरे को पश्चिमी यूपी में संगठन को चुनाव के लिए तैयार करने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है। इससे पहले मेरठ में भी उन्होंने पार्टी नेताओं, पदाधिकारियों और शक्ति केंद्र स्तर के कार्यकर्ताओं के साथ संवाद किया। सहारनपुर में भी पुराने नेताओं से अनुभव और मौजूदा संगठन से जमीनी स्थिति का फीडबैक लेने की रणनीति अपनाई गई।

    रविदास मंदिर में पूजन, दलित कार्यकर्ता के घर भोजन
    संगठनात्मक बैठकों के बाद नितिन नवीन ओजपुरा पहुंचे। यहां उन्होंने श्री गुरु रविदास मंदिर में दर्शन और पूजन किया। इसके बाद वे अनुसूचित जाति वर्ग के एक भाजपा कार्यकर्ता के घर पहुंचे और भोजन किया। कार्यक्रम पूरा होने के बाद उनके दिल्ली रवाना होने का कार्यक्रम था।

    ‘माफिया’ से सेमीकंडक्टर-एआई तक पहुंचा यूपी : नितिन नवीन
    सहारनपुर में नितिन नवीन ने उत्तर प्रदेश के विकास को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जिस प्रदेश को पहले माफिया के नाम से जाना जाता था, आज वही युवा शक्ति के साथ सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा है।

    उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की पहचान अब एक्सप्रेसवे और विकास की नई परियोजनाओं से बन रही है। उनके मुताबिक प्रदेश में मिसाइल निर्माण जैसे काम हो रहे हैं, जो नए उत्तर प्रदेश की तस्वीर पेश करते हैं। नितिन नवीन ने कहा कि उत्तर प्रदेश अब ‘उत्तम प्रदेश’ की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

  • वंदे मातरम के छह अंतरे अनिवार्य करने के कानून को चुनौती, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

    वंदे मातरम के छह अंतरे अनिवार्य करने के कानून को चुनौती, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

    नई दिल्ली ।वंदे मातरम के छह अंतरे गाने को अनिवार्य करने वाले प्रावधान को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। मंगलवार को हुई सुनवाई में अदालत ने केंद्र से दो सप्ताह के भीतर अपना पक्ष रखने को कहा। मामला कर्नाटक के संगीतकार टीएम कृष्णा की ओर से दायर रिट याचिका से जुड़ा है।

    याचिका में केंद्र सरकार के उस सर्कुलर को चुनौती दी गई है, जिसमें वंदे मातरम के छह पदों के गायन को अनिवार्य किए जाने का प्रावधान किया गया है। याचिकाकर्ता ने इस व्यवस्था को लेकर संवैधानिक और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े सवाल उठाए हैं।

    टीएम कृष्णा की ओर से अदालत में कहा गया कि वंदे मातरम के चार पदों में हिंदू देवी-देवताओं का उल्लेख है। याचिका में तर्क दिया गया है कि लोगों को इन पदों का गायन करने के लिए बाध्य करना धार्मिक और वैचारिक समर्थन के लिए मजबूर करने के समान हो सकता है।

    याचिका में वंदे मातरम को राष्ट्रगान के समान दर्जा देने से जुड़े हालिया संशोधन को भी चुनौती दी गई है। इसमें यह सवाल उठाया गया है कि क्या इस तरह का प्रावधान कानून के स्तर पर लागू किया जा सकता है और इसके तहत किसी व्यक्ति पर गायन के लिए दबाव बनाया जा सकता है।

    सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस पहलू की जांच करने पर सहमति जताई कि वंदे मातरम नहीं गाने को दंडनीय अपराध बनाया जा सकता है या नहीं। अदालत ने हालांकि इस चरण पर यह तय करने से इनकार किया कि राष्ट्रगीत को केवल दो अंतरों तक सीमित रखा जाना चाहिए या छह अंतरों तक इसका गायन किया जाना चाहिए।

    मामले की सुनवाई के दौरान धार्मिक कारणों से वंदे मातरम नहीं गाने वाले व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई किए जाने का मुद्दा भी सामने आया। अदालत ने इस विषय को याचिका में उठाए गए संवैधानिक सवालों के संदर्भ में देखा।

    केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल ने सुनवाई के दौरान कानून बनाए जाने से जुड़े तर्क रखे। वहीं याचिका में उस संशोधन को भी चुनौती दी गई है, जिसके तहत वंदे मातरम को राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम से जुड़े कानून के दायरे में लाने की बात कही गई है।

    याचिकाकर्ता ने इस संशोधन को मनमाना बताते हुए अदालत से इसकी संवैधानिक वैधता की जांच करने की मांग की है। याचिका का मुख्य सवाल यह है कि राष्ट्रीय गीत के गायन को किस सीमा तक अनिवार्य किया जा सकता है और ऐसा नहीं करने पर किसी व्यक्ति के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है या नहीं।

    सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल मामले में कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है। अदालत ने केंद्र सरकार को जवाब दाखिल करने का समय दिया है, जिसके बाद मामले में आगे की सुनवाई होगी।

    मामले में धार्मिक स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राष्ट्रीय गीत से जुड़े कानूनी प्रावधानों के बीच संतुलन का प्रश्न महत्वपूर्ण रहेगा। अदालत अब केंद्र के जवाब के बाद इन मुद्दों पर आगे विचार करेगी।

  • साहिल की मौत के बाद IIT बॉम्बे ने बदली हॉस्टल की व्यवस्था, सीलिंग फैन हटाकर वॉल फैन लगाने की तैयारी तेज

    साहिल की मौत के बाद IIT बॉम्बे ने बदली हॉस्टल की व्यवस्था, सीलिंग फैन हटाकर वॉल फैन लगाने की तैयारी तेज

     
    नई दिल्ली । IIT बॉम्बे में BTech छात्र साहिल रविंद्र वाकोडे की मौत के बाद हॉस्टल और कैंपस में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा बदलाव किया जा रहा है। संस्थान ने हॉस्टल में लगे सीलिंग फैन हटाकर उनकी जगह वॉल फैन लगाने का फैसला किया है। कैंपस में वॉल फैन पहुंचने की तस्वीरें भी सामने आई हैं।

    हॉस्टल में पंखों की व्यवस्था बदलने को लेकर चर्चा जुलाई में ही शुरू हो गई थी। एक छात्र की मौत के बाद सीलिंग फैन हटाने और वॉल फैन लगाने के विकल्प पर विचार किया गया था। हालांकि, 18 सितंबर को साहिल की मौत के बाद इस प्रक्रिया को तेज कर दिया गया।

    साहिल एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग में बीटेक के दूसरे वर्ष का छात्र था। वह महाराष्ट्र के यवतमाल जिले का रहने वाला था। 18 सितंबर को परीक्षा से जुड़े घटनाक्रम के बाद वह अपने हॉस्टल के कमरे में पहुंचा था। बाद में उसी दिन उसे कमरे में मृत पाया गया।

    जांच में सामने आए सीसीटीवी फुटेज के अनुसार, परीक्षा के दौरान साहिल दोपहर करीब 12:30 से 12:45 बजे के बीच अपनी जेब में रखी किसी वस्तु को देखने के लिए झुका था। इसके बाद एक प्रोफेसर ने उससे सवाल किया और उसे अलग ले जाया गया। करीब 1:25 बजे वह हॉस्टल के कमरे में पहुंचा और उसके बाद बाहर नहीं निकला।

    मामले की जांच में परीक्षा हॉल, कैंपस और हॉस्टल की सीसीटीवी फुटेज की पड़ताल की जा रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन फुटेज को सार्वजनिक नहीं किया गया है। जांच का उद्देश्य घटना से पहले के पूरे घटनाक्रम और उससे जुड़े तथ्यों को समझना है।

    साहिल के परिवार ने उसके साथ जाति आधारित भेदभाव और उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। परिवार ने मामले की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी से कराने की मांग की है। माता-पिता की शिकायत के आधार पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण कानून के तहत मामला दर्ज किया गया है। प्राथमिकी में एक प्रोफेसर का नाम भी शामिल किया गया है।

    घटना के बाद संस्थान की ओर से साहिल की परीक्षा से जुड़ी स्थिति को लेकर एक बयान दिया गया था। इसमें दावा किया गया था कि उसने परीक्षा का प्रश्नपत्र ChatGPT पर अपलोड किया था और कथित तौर पर नकल करते पकड़े जाने के बाद उसकी मौत हुई। बाद में संस्थान ने इस बयान को वापस लेते हुए माफी मांगी और कहा कि पूरी जांच पूरी होने से पहले ऐसा निष्कर्ष देना उचित नहीं था।

    साहिल की मौत के बाद संस्थान में छात्रों का विरोध-प्रदर्शन भी जारी रहा। छात्र जवाबदेही, पारदर्शिता, छात्र कल्याण और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की मांग कर रहे हैं। हॉस्टल की सुरक्षा व्यवस्था और संस्थागत प्रक्रियाओं को लेकर भी छात्रों के बीच सवाल उठे हैं।

    उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस साल IIT बॉम्बे में यह तीसरी छात्र आत्महत्या बताई जा रही है। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं के बीच छात्र मानसिक स्वास्थ्य, सुरक्षा और संस्थागत जवाबदेही को लेकर चर्चा फिर तेज हुई है।

    सीलिंग फैन की जगह वॉल फैन लगाने का फैसला इसी व्यापक सुरक्षा व्यवस्था में किए जा रहे बदलावों का हिस्सा है। हालांकि, साहिल की मौत के कारणों और उससे जुड़े आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

  • SC-ST एक्ट को चुनौती पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी, 2020 के फैसले की समीक्षा से किया इनकार

    SC-ST एक्ट को चुनौती पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी, 2020 के फैसले की समीक्षा से किया इनकार


    नई दिल्ली ।
    अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के खिलाफ अत्याचार रोकने के लिए बनाए गए SC/ST अत्याचार निवारण कानून के कुछ प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि कानून में आरोपी को उत्पीड़न से बचाने के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय मौजूद हैं और 2020 में दिए गए फैसले के कुछ ही वर्षों बाद उसकी दोबारा समीक्षा करने का फिलहाल कोई आधार नहीं दिखता।

    याचिका में SC/ST एक्ट के कई प्रावधानों को समानता के अधिकार के खिलाफ बताते हुए उनमें बदलाव की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता बृजभूषण सैनी की ओर से कानून के प्रावधानों पर सवाल उठाए गए और यह दलील दी गई कि एक वर्ग को सुरक्षा देने के उद्देश्य से बनाए गए कानून का इस्तेमाल दूसरे वर्ग के उत्पीड़न के लिए नहीं होना चाहिए।

    याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील विष्णु शंकर जैन ने अदालत के सामने कानून के कथित दुरुपयोग का मुद्दा उठाया। उनका तर्क था कि कई मामलों में कानून के प्रावधानों का गलत इस्तेमाल होने की आशंका बनी रहती है। उन्होंने सजा की दर कम होने का भी उल्लेख किया और कहा कि गलत मामलों के कारण आरोपियों को गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

    याचिका में FIR दर्ज करने और गिरफ्तारी से पहले शुरुआती जांच की व्यवस्था पर भी सवाल उठाया गया। दलील दी गई कि बिना प्रारंभिक जांच के FIR दर्ज करने और आरोपी की गिरफ्तारी की व्यवस्था से कानून के दुरुपयोग की संभावना बढ़ सकती है। इसके साथ ही SC/ST एक्ट के तहत अग्रिम जमानत पर लागू प्रतिबंध को भी चुनौती दी गई।

    याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि कानून के तहत गलत तरीके से दर्ज किए गए मामलों में आरोपियों को आर्थिक नुकसान और अन्य परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसी आधार पर कानून के कुछ प्रावधानों की संवैधानिक वैधता पर पुनर्विचार की मांग की गई थी।

    मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने की। पीठ में जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे। अदालत ने याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए 2020 के अपने फैसले का संदर्भ दिया।

    पीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही SC/ST एक्ट से जुड़े प्रावधानों और उनमें किए गए बदलावों को लेकर अपना फैसला दे चुका है। उस निर्णय के बाद अभी केवल छह वर्ष का समय बीता है। ऐसे में इस अवधि के भीतर ही पुराने फैसले की दोबारा समीक्षा करने का कोई पर्याप्त आधार अदालत को नजर नहीं आता।

    अदालत की टिप्पणी के बाद SC/ST एक्ट के संबंधित प्रावधानों में तत्काल बदलाव की मांग वाली यह याचिका आगे नहीं बढ़ सकी। मामले में उठाए गए मुद्दों में FIR, गिरफ्तारी, अग्रिम जमानत और कानून के संभावित दुरुपयोग से जुड़े सवाल प्रमुख थे।

    SC/ST एक्ट का उद्देश्य अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों के खिलाफ होने वाले अत्याचारों को रोकना और ऐसे मामलों में कानूनी संरक्षण उपलब्ध कराना है। मौजूदा सुनवाई में अदालत ने कानून के मूल उद्देश्य के साथ-साथ आरोपियों के लिए उपलब्ध कानूनी सुरक्षा उपायों को भी ध्यान में रखा और 2020 के फैसले को तत्काल दोबारा खोलने से इनकार किया।

  • CID पूछताछ के बाद TMC विधायक परेश राम दास की तबीयत बिगड़ी, सीने में दर्द के बाद अस्पताल में भर्ती

    CID पूछताछ के बाद TMC विधायक परेश राम दास की तबीयत बिगड़ी, सीने में दर्द के बाद अस्पताल में भर्ती

    नई दिल्ली ।पश्चिम बंगाल में 2023 के पंचायत चुनाव के दौरान हुई हिंसा से जुड़े एक मामले में पूछताछ के लिए पहुंचे तृणमूल कांग्रेस विधायक परेश राम दास की सोमवार को अचानक तबीयत बिगड़ गई। करीब पांच घंटे तक चली पूछताछ के दौरान उन्होंने सीने में दर्द और सांस लेने में परेशानी की शिकायत की। इसके बाद उन्हें कोलकाता के एसएसकेएम अस्पताल में भर्ती कराया गया।

    परेश राम दास दक्षिण 24 परगना जिले की कैनिंग पश्चिम विधानसभा सीट से विधायक हैं। उन्हें पंचायत चुनाव के दौरान हुई हिंसा से संबंधित मामले की जांच के सिलसिले में पूछताछ के लिए बुलाया गया था। विधायक सोमवार सुबह करीब 11 बजे भवानी भवन स्थित जांच कार्यालय पहुंचे थे।

    पूछताछ के दौरान शाम करीब चार बजे उन्होंने अपनी तबीयत खराब होने की जानकारी दी। सीने में दर्द और सांस लेने में परेशानी की शिकायत के बाद उन्हें अस्पताल ले जाने की व्यवस्था की गई। अस्पताल पहुंचने पर उनका इलाज शुरू किया गया और डॉक्टरों ने उन्हें निगरानी में रखा।

    इस मामले में विधायक को इससे पहले भी पूछताछ के लिए तलब किया जा चुका है। जांच 2023 के पंचायत चुनाव के दौरान कैनिंग इलाके में हुई हिंसा और उससे जुड़े आरोपों पर केंद्रित है। इसी सिलसिले में विधायक से मामले से संबंधित जानकारी और घटनाक्रम को लेकर सवाल किए जा रहे थे।

    पूछताछ के लिए पहुंचने से पहले विधायक ने सोशल मीडिया पर एक संदेश भी पोस्ट किया था। इसमें उन्होंने कैनिंग को अलविदा कहने और दोबारा मिलने तथा बातचीत करने की बात कही थी। उनके इस संदेश को लेकर समर्थकों के बीच भी चर्चा हुई।

    परेश राम दास के करीबी लोगों के अनुसार, वह पहले स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के कारण इलाज करा चुके हैं। हाल ही में वह इलाज के लिए चेन्नई भी गए थे। सोमवार को जांच के लिए पहुंचते समय उनके पास इनहेलर भी मौजूद था।

    पंचायत चुनाव के दौरान पश्चिम बंगाल के कई इलाकों में हिंसा की घटनाएं सामने आई थीं। कैनिंग क्षेत्र से जुड़े मामले की जांच के दौरान कई लोगों से पूछताछ की गई है। विधायक से भी इसी जांच के तहत पूछताछ की जा रही थी।

    करीब पांच घंटे तक चली पूछताछ के बाद अचानक तबीयत बिगड़ने से जांच की प्रक्रिया प्रभावित हुई। अब आगे की पूछताछ और जांच से संबंधित कार्रवाई विधायक की स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए तय की जा सकती है।

    फिलहाल परेश राम दास अस्पताल में चिकित्सकीय निगरानी में हैं। उनकी तबीयत को लेकर डॉक्टरों की निगरानी जारी है। मामले में जांच एजेंसी की ओर से आगे की कार्रवाई स्वास्थ्य स्थिति और जांच की जरूरत के अनुसार की जाएगी।

  • भाजपा में जाने की तैयारी कर चुके थे राहुल बोंडरे, फिर राहुल गांधी के एक फोन से बदल गया पूरा राजनीतिक घटनाक्रम

    भाजपा में जाने की तैयारी कर चुके थे राहुल बोंडरे, फिर राहुल गांधी के एक फोन से बदल गया पूरा राजनीतिक घटनाक्रम

    नई दिल्ली ।महाराष्ट्र में कांग्रेस के पूर्व विधायक राहुल बोंडरे के भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की चर्चाओं के बीच राजनीतिक घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया। बोंडरे के भाजपा में जाने की तैयारी की खबरों के बाद कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने उनसे फोन पर बातचीत की। इसके बाद बोंडरे के अपने फैसले पर दोबारा विचार करने की बात सामने आई है।

    राहुल बोंडरे बुलढाना जिले के चिखली विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक रह चुके हैं। पिछले कुछ समय से उनके भाजपा में शामिल होने की अटकलें चल रही थीं। बताया गया कि उन्होंने सोशल मीडिया पर लाइव प्रसारण के दौरान भाजपा में जाने का फैसला सार्वजनिक भी किया था।

    इस दौरान उन्होंने कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल और पार्टी के अन्य नेताओं का धन्यवाद भी किया था। बोंडरे इससे पहले भी दो बार भाजपा में जाने के संकेत दे चुके थे। इसलिए उनके संभावित दल-बदल को महाराष्ट्र कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा था।

    इसी बीच राहुल गांधी का बोंडरे से फोन पर संपर्क हुआ। बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने उनकी पार्टी के लिए भूमिका और योगदान की सराहना की तथा उनसे कांग्रेस में बने रहने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि पार्टी को बोंडरे की जरूरत है और उन्हें अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।

    बातचीत के बाद बोंडरे ने राहुल गांधी के फोन का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने उनकी सुध ली। उन्होंने यह भी कहा कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, वह कांग्रेस के लिए काम करते रहेंगे। इस घटनाक्रम के बाद उनके भाजपा में शामिल होने की योजना फिलहाल बदलती हुई दिखाई दी।

    राहुल गांधी और राहुल बोंडरे के बीच बातचीत का एक वीडियो भी सामने आया है। हालांकि, इस वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। वीडियो में दोनों नेताओं के बीच बातचीत होती दिखाई देती है और बोंडरे कांग्रेस में बने रहने की बात कहते नजर आते हैं।

    बोंडरे के भाजपा में शामिल होने की संभावित तारीख को लेकर भी चर्चा सामने आई थी। चिखली से भाजपा विधायक श्वेता महाले ने उनके भाजपा में शामिल होने की बात कही थी। यह भी बताया गया था कि 22 सितंबर को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मौजूदगी में उन्हें पार्टी में शामिल कराया जा सकता है। हालांकि, बाद के घटनाक्रम में बोंडरे के रुख में बदलाव की बात सामने आई।

    बोंडरे ने 2024 का विधानसभा चुनाव चिखली सीट से लड़ा था। इस चुनाव में उनका मुकाबला श्वेता महाले से हुआ था। वह करीब 3,702 मतों के अंतर से चुनाव हार गए थे। इसके बाद भी दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक मुकाबला क्षेत्र में चर्चा का विषय रहा है।

    महाराष्ट्र में हाल के दिनों में नेताओं के संभावित दल-बदल को लेकर लगातार राजनीतिक चर्चाएं चल रही हैं। सितंबर की शुरुआत में शिवसेना के कुछ विधायकों के दूसरे गुट के संपर्क में होने के दावे भी सामने आए थे।

    शिवसेना विधायक मुर्जी पटेल ने दावा किया था कि उद्धव ठाकरे गुट के 14 विधायक एकनाथ शिंदे गुट के संपर्क में हैं और आने वाले दिनों में उनके शामिल होने की संभावना है। उन्होंने इसे संभावित ‘ऑपरेशन टाइगर’ से जोड़कर भी बताया था।

    हालांकि, इन दावों पर संबंधित विधायकों की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई थी और उनके नाम भी सार्वजनिक नहीं किए गए थे। इससे पहले उद्धव ठाकरे गुट के पांच सांसदों के दूसरे गुट में शामिल होने की बात सामने आ चुकी थी। ऐसे राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच राहुल बोंडरे का मामला महाराष्ट्र की राजनीति में चर्चा का नया विषय बन गया है।

  • राम मंदिर दान चोरी की गोपनीय जानकारी लीक करने वाले तक पहुंची पुलिस, लखनऊ कनेक्शन भी सामने आया

    राम मंदिर दान चोरी की गोपनीय जानकारी लीक करने वाले तक पहुंची पुलिस, लखनऊ कनेक्शन भी सामने आया

    नई दिल्ली ।अयोध्या स्थित राम मंदिर में दान चोरी मामले की जांच अब केवल चोरी की घटनाओं तक सीमित नहीं रह गई है। पुलिस की पड़ताल मंदिर और ट्रस्ट से जुड़ी गोपनीय जानकारियों के बाहर पहुंचने की कड़ी तक भी पहुंच गई है। जांच के दौरान पूर्व और वर्तमान कर्मचारियों से पूछताछ की गई है और उनके बयान दर्ज किए गए हैं।

    पूछताछ से मिली जानकारियों के आधार पर पुलिस उस व्यक्ति तक पहुंची है, जिस पर दान चोरी से संबंधित संवेदनशील जानकारी एक प्रमुख राजनीतिक नेता तक पहुंचाने का संदेह है। जांच में यह भी सामने आया है कि संबंधित व्यक्ति की नेता से संपर्क था और वह उनसे मिलने के लिए लखनऊ भी गया था।

    गोपनीय जानकारी लीक होने का मामला उस समय जांच के दायरे में आया, जब चढ़ावा चोरी की घटना के करीब एक महीने बाद ट्रस्ट पदाधिकारियों के बीच हुई बातचीत से जुड़ी जानकारियां सामने आईं। इस बातचीत में मंदिर और ट्रस्ट के भीतर की सूचनाओं के बाहर पहुंचने को लेकर चिंता जताई गई थी।

    इसके बाद पुलिस ने यह पता लगाने पर ध्यान केंद्रित किया कि मंदिर और ट्रस्ट से जुड़ी अंदरूनी जानकारी किस व्यक्ति के माध्यम से बाहर पहुंची। जांच के दौरान एक कर्मचारी के प्रमुख राजनीतिक नेता के संपर्क में रहने और उनसे मिलने के लिए लखनऊ जाने की जानकारी सामने आई।

    पुलिस अब इस जानकारी का मिलान अन्य उपलब्ध साक्ष्यों और पूछताछ में सामने आए तथ्यों से कर रही है। जांच में मिले साक्ष्यों के आधार पर संदिग्ध के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

    जांच का एक हिस्सा संदिग्ध की सोशल मीडिया गतिविधियों से भी जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, जुलाई के बाद उसके फेसबुक अकाउंट से कई पोस्ट हटा दी गईं। 28 जुलाई के बाद अकाउंट पर कोई नई पोस्ट भी नहीं की गई। पुलिस ने हटाई गई पोस्ट से संबंधित डेटा हासिल करने के लिए साइबर सेल की मदद ली है।

    जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि चढ़ावा चोरी की घटना के बाद संबंधित लोगों के बीच किस तरह संपर्क हुआ और उस दौरान कौन-कौन सी सूचनाएं साझा की गईं। सोशल मीडिया गतिविधियों और आपसी संपर्कों को जांच के उपलब्ध तथ्यों से जोड़कर देखा जा रहा है।

    दान चोरी मामले में बैंक के संबंधित कर्मचारियों से भी पूछताछ पूरी की जा चुकी है। भारतीय स्टेट बैंक से जुड़े सभी संबंधित कर्मचारियों के बयान दर्ज किए गए हैं। इनमें तीन कर्मचारियों से विस्तृत पूछताछ की गई। इनमें से दो कर्मचारियों से मिली जानकारी को जांच में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    पुलिस इन बयानों को अन्य साक्ष्यों के साथ मिलाकर मामले की पूरी कड़ी तैयार करने में जुटी है। जांच का उद्देश्य चोरी की घटना के साथ-साथ उससे जुड़ी सूचनाओं के संभावित लीक की भूमिका को भी स्पष्ट करना है।

    मामले की विवेचना अब अंतिम चरण में बताई जा रही है। पुलिस 25 सितंबर को आरोपपत्र दाखिल करने की तैयारी में है। जांच के दौरान दो और नाम सामने आने की संभावना भी जताई गई है, हालांकि इन नामों को लेकर अंतिम कार्रवाई उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी।

    22 सितंबर को आरोपियों की गिरफ्तारी के 90 दिन पूरे हो रहे हैं। कानून के अनुसार, निर्धारित अवधि के भीतर आरोपपत्र दाखिल नहीं होने की स्थिति में आरोपियों को जमानत का अधिकार मिल सकता है। इसलिए अब आरोपपत्र दाखिल होने और आरोपियों की जमानत से जुड़े घटनाक्रम पर भी नजर बनी हुई है।

  • सिर्फ 5 मिनट में 70% चार्ज और 700 किमी तक रेंज! सनवोडा की नई EV बैटरी में क्या है खास जानिए पूरी डिटेल

    सिर्फ 5 मिनट में 70% चार्ज और 700 किमी तक रेंज! सनवोडा की नई EV बैटरी में क्या है खास जानिए पूरी डिटेल


    नई दिल्ली। इलेक्ट्रिक वाहनों की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है लेकिन चार्जिंग में लगने वाला समय अब भी ग्राहकों के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। इसी चुनौती के बीच चीन की बैटरी निर्माता कंपनी सनवोडा ईवीबी ने ऐसी नई बैटरी तकनीक पेश की है जिसे लेकर इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग में काफी चर्चा हो रही है। शानडोंग के झाओझुआंग में आयोजित एक बैटरी उद्योग सम्मेलन में कंपनी ने अपनी नई 15C LFP बैटरी तकनीक पेश की। कंपनी के मुताबिक यह बैटरी बेहद कम समय में बड़ी मात्रा में चार्ज हो सकती है और इससे इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग को लेकर मौजूदा तस्वीर बदल सकती है

    सनवोडा के अनुसार नई 15C LFP बैटरी केवल 5 मिनट में 10 प्रतिशत से 70 प्रतिशत तक चार्ज हो सकती है। इतना ही नहीं कंपनी का दावा है कि करीब 9 मिनट में बैटरी 97 प्रतिशत तक चार्ज हो सकती है। कंपनी के मुताबिक चार्जिंग के दौरान वाहन को हर एक मिनट में लगभग 100 किलोमीटर की ड्राइविंग रेंज मिल सकती है। यही वजह है कि इस तकनीक को लेकर इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में काफी दिलचस्पी दिखाई जा रही है

    मौजूदा समय में कई प्रमुख कंपनियां भी तेज चार्जिंग तकनीक पर काम कर रही हैं। टेस्ला के सुपरचार्जर सिस्टम 250 किलोवाट तक की चार्जिंग क्षमता देने में सक्षम हैं जबकि कई आधुनिक बीएमडब्ल्यू इलेक्ट्रिक वाहन भी 250 किलोवाट तक की चार्जिंग स्पीड को सपोर्ट करते हैं। मर्सिडीज बेंज के कुछ मॉडल 200 से 330 किलोवाट तक की डीसी फास्ट चार्जिंग क्षमता के साथ आते हैं। ऐसे में सनवोडा का 15C बैटरी तकनीक को लेकर किया गया दावा खासा बड़ा माना जा रहा है

    हालांकि इतनी तेज चार्जिंग के साथ सबसे बड़ी चुनौती बैटरी का गर्म होना है। कम समय में बड़ी मात्रा में ऊर्जा बैटरी में पहुंचाने पर थर्मल स्ट्रेस बढ़ सकता है और इससे बैटरी की क्षमता तथा लंबे समय तक प्रदर्शन प्रभावित होने की आशंका रहती है। सनवोडा का कहना है कि उसकी नई तकनीक को इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है। कंपनी के अनुसार अत्यधिक चार्जिंग लोड के दौरान भी बैटरी के तापमान को नियंत्रित रखने के लिए विशेष तकनीकी व्यवस्था की गई है

    ठंडे मौसम में भी इस बैटरी के प्रदर्शन को लेकर कंपनी ने बड़े दावे किए हैं। सनवोडा के मुताबिक माइनस 20 डिग्री सेल्सियस जैसे कम तापमान में भी बैटरी तेजी से चार्ज हो सकती है। कंपनी का दावा है कि ऐसे तापमान में 10 से 97 प्रतिशत तक चार्ज होने में करीब 15 मिनट लग सकते हैं और वाहन को लगभग 700 किलोमीटर तक की रेंज मिल सकती है

    तेज चार्जिंग के कारण बैटरी की उम्र कम होने की आम चिंता को लेकर भी सनवोडा ने अपनी तकनीक पर भरोसा जताया है। कंपनी ने नई बैटरी के लिए 10 साल या 3 लाख किलोमीटर की वारंटी देने की बात कही है। कंपनी के मुताबिक अल्ट्रा फास्ट चार्जिंग के इस्तेमाल पर भी इस वारंटी के लिए अलग प्रतिबंध नहीं लगाया गया है

    सनवोडा पहले से ही जीली डोंगफेंग और जीएसी जैसी चीनी वाहन कंपनियों को बैटरी सेल्स की आपूर्ति करती है। हालांकि 15C तकनीक के वास्तविक प्रदर्शन का आकलन बड़े पैमाने पर इस्तेमाल और वास्तविक सड़क परिस्थितियों में होने के बाद ही किया जा सकेगा। फिलहाल कंपनी के दावे अगर व्यावहारिक स्तर पर भी सफल साबित होते हैं तो ईवी चार्जिंग के क्षेत्र में यह तकनीक एक महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है