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  • केन-बेतवा लिंक परियोजना पर बढ़ा विवाद, 44,600 करोड़ की योजना को लेकर पीएम मोदी ने राज्यों को दिए तेजी से समाधान के निर्देश

    केन-बेतवा लिंक परियोजना पर बढ़ा विवाद, 44,600 करोड़ की योजना को लेकर पीएम मोदी ने राज्यों को दिए तेजी से समाधान के निर्देश

    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच प्रस्तावित केन-बेतवा लिंक परियोजना एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा के केंद्र में आ गई है। लगभग 44,600 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी जल परियोजना को लेकर प्रधानमंत्री स्तर पर हुई हालिया बैठक में इसके क्रियान्वयन में आ रही बाधाओं पर विस्तार से विचार किया गया। इस दौरान प्रधानमंत्री ने संबंधित राज्यों को निर्देश दिए कि परियोजना से जुड़े लंबित मुद्दों का जल्द समाधान किया जाए ताकि इसे निर्धारित समयसीमा के भीतर आगे बढ़ाया जा सके। यह परियोजना देश की प्रमुख नदी जोड़ो योजनाओं में से एक मानी जाती है, जिसका उद्देश्य जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन और सूखा प्रभावित क्षेत्रों में सिंचाई सुविधा को मजबूत करना है।

    केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत मध्य प्रदेश की केन नदी को उत्तर प्रदेश की बेतवा नदी से जोड़ा जाना प्रस्तावित है। इस योजना के माध्यम से दोनों नदियों के जल प्रवाह को संतुलित कर बुंदेलखंड क्षेत्र में पानी की उपलब्धता बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना पर केंद्र सरकार का बड़ा निवेश प्रस्तावित है, जबकि इसका अधिकांश वित्तीय भार केंद्र द्वारा वहन किया जा रहा है। इस योजना के तहत नहर प्रणाली, बांध निर्माण और जल वितरण ढांचे का व्यापक विकास किया जाएगा, जिससे लाखों हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद है।

    परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसका भौगोलिक और पर्यावरणीय प्रभाव है। केन नदी मध्य प्रदेश के कैमूर क्षेत्र से निकलकर उत्तर प्रदेश में यमुना में मिलती है, जबकि बेतवा नदी रायसेन जिले से शुरू होकर आगे बढ़ते हुए यमुना में समाहित होती है। इन दोनों नदियों के प्राकृतिक प्रवाह को जोड़ने के लिए बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाना है, जिसमें बांध, नहरें और पावर उत्पादन इकाइयाँ शामिल हैं। इस परियोजना के माध्यम से कुछ क्षेत्रों में बिजली उत्पादन और जल आपूर्ति को भी बेहतर बनाने की योजना है।

    हालांकि, इस महत्वाकांक्षी योजना के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित गांवों का पुनर्वास और विस्थापन है। परियोजना के कारण लगभग दो दर्जन गांव प्रभावित हो रहे हैं, जिनमें कई गांव जलभराव क्षेत्र में आते हैं, जबकि कुछ वन्यजीव अभयारण्यों के दायरे में स्थित हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुनर्वास और मुआवजे की व्यवस्था पर्याप्त नहीं है, जिसके चलते विरोध की स्थिति बनी हुई है। ग्रामीणों और प्रशासन के बीच इस मुद्दे को लेकर लंबे समय से बातचीत जारी है, लेकिन समाधान पूरी तरह सामने नहीं आ सका है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी परियोजना के लिए सामाजिक और पर्यावरणीय संतुलन बेहद आवश्यक है। जल संसाधनों के बेहतर उपयोग के साथ-साथ स्थानीय समुदायों के हितों का ध्यान रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यही कारण है कि केंद्र सरकार ने राज्यों को निर्देश दिए हैं कि सभी संबंधित पक्षों से चर्चा कर समाधान निकाला जाए ताकि परियोजना आगे बढ़ सके।

    फिलहाल केन-बेतवा लिंक परियोजना देश की सबसे चर्चित जल परियोजनाओं में शामिल है, जो भविष्य में बुंदेलखंड क्षेत्र की जल समस्या को काफी हद तक हल कर सकती है। लेकिन इसके साथ जुड़े सामाजिक और प्रशासनिक मुद्दे इसे एक जटिल परियोजना भी बनाते हैं। आने वाले समय में इस पर होने वाले निर्णयों पर पूरे क्षेत्र की निगाहें टिकी रहेंगी।

  • कर्नाटक की राजनीति में बड़ा मोड़, 36 साल से अजेय डीके शिवकुमार के सामने अब सबसे कठिन अग्निपरीक्षा

    कर्नाटक की राजनीति में बड़ा मोड़, 36 साल से अजेय डीके शिवकुमार के सामने अब सबसे कठिन अग्निपरीक्षा

    नई दिल्ली । कर्नाटक की राजनीति में हालिया नेतृत्व परिवर्तन ने राज्य के राजनीतिक समीकरणों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। कांग्रेस संगठन के भीतर सहमति बनने के बाद डीके शिवकुमार को राज्य की कमान सौंपे जाने के फैसले को आने वाले विधानसभा चुनावों की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, इस नई जिम्मेदारी के साथ उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि क्या वे राज्य में पिछले लगभग चार दशकों से चले आ रहे सत्ता परिवर्तन के पैटर्न को बदल पाएंगे।

    राजनीतिक जानकारों के अनुसार कर्नाटक में पिछले करीब 40 वर्षों से यह प्रवृत्ति देखी गई है कि कोई भी सरकार लगातार दोबारा सत्ता में वापसी नहीं कर पाई है। हर चुनाव में मतदाताओं ने बदलाव का रुख अपनाया है, जिससे किसी भी दल के लिए अपनी सत्ता को बरकरार रखना एक कठिन चुनौती साबित हुआ है। इसी संदर्भ में डीके शिवकुमार के नेतृत्व को कांग्रेस की भविष्य की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है, जहां लक्ष्य केवल शासन चलाना नहीं बल्कि आगामी चुनाव में फिर से जनादेश हासिल करना भी है।

    डीके शिवकुमार का राजनीतिक सफर लंबे संघर्ष और संगठनात्मक कौशल से भरा रहा है। वे छात्र राजनीति से निकलकर राज्य की मुख्यधारा की राजनीति तक पहुंचे और धीरे-धीरे कांग्रेस संगठन में एक मजबूत स्तंभ के रूप में स्थापित हुए। अपने राजनीतिक जीवन में उन्होंने कई चुनावों में सफलता हासिल की है और अब तक पराजय का सामना नहीं करना पड़ा है, जो उन्हें राज्य के प्रमुख नेताओं में एक अलग पहचान देता है। पार्टी संगठन को मजबूत करने और संकट के समय विधायकों को एकजुट रखने में उनकी भूमिका को भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

    कांग्रेस ने 2023 के विधानसभा चुनाव में मिली सफलता के बाद उन्हें उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी थी, जहां उन्होंने सरकार और संगठन दोनों स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाई। अब मुख्यमंत्री के रूप में उनकी जिम्मेदारी और भी बढ़ गई है, क्योंकि उन्हें न केवल प्रशासनिक स्थिरता बनाए रखनी है, बल्कि आगामी चुनाव के लिए मजबूत जनाधार भी तैयार करना है।

    राज्य की सामाजिक और राजनीतिक संरचना भी इस चुनौती को और जटिल बनाती है। कर्नाटक में विभिन्न समुदायों की भूमिका चुनावी परिणामों को प्रभावित करती रही है। ऐसे में सभी प्रमुख सामाजिक समूहों के बीच संतुलन बनाए रखना सरकार के लिए आवश्यक होगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी प्रकार का असंतुलन आगामी चुनाव में सीधे परिणामों पर असर डाल सकता है।

    कांग्रेस के लिए यह बदलाव एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य संगठन को नई ऊर्जा देना और मतदाताओं के बीच एक नया संदेश पहुंचाना है। वहीं विपक्षी दल भी इस बदलाव को ध्यान में रखते हुए अपनी रणनीति तैयार करने में जुटे हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि डीके शिवकुमार अपने प्रशासनिक अनुभव और संगठनात्मक क्षमता के दम पर कर्नाटक की राजनीति में स्थापित इस लंबे ट्रेंड को बदलने में सफल हो पाते हैं या नहीं।

    आने वाले दो वर्ष न केवल उनके नेतृत्व की परीक्षा होंगे, बल्कि यह भी तय करेंगे कि कर्नाटक की राजनीति में बदलाव की परंपरा जारी रहती है या कोई नया अध्याय शुरू होता है।

  • गर्मी से मिलेगी जल्‍द राहत, भारत की ओर बढ़ रहा बादलों का विशाल सिस्टम, कई राज्यों में बारिश के आसार

    गर्मी से मिलेगी जल्‍द राहत, भारत की ओर बढ़ रहा बादलों का विशाल सिस्टम, कई राज्यों में बारिश के आसार

    नई दिल्ली। उत्तर-पश्चिम भारत में पड़ रही भीषण गर्मी के बीच मौसम अब राहत की खबर लेकर आ रहा है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक भारत की ओर करीब 2500 किलोमीटर चौड़ा बादलों का विशाल समूह तेजी से बढ़ रहा है, जिससे कई राज्यों में बारिश और आंधी का दौर शुरू हो सकता है।

    भारत के मौसम उपग्रह इनसैट-3डीएस ने इस विशाल बादल प्रणाली की तस्वीरें कैद की हैं। मौसम विभाग के अनुसार, यह सिस्टम उत्तर और मध्य भारत में सक्रिय मौसम बदलाव का संकेत दे रहा है, जो आने वाले दिनों में तेज बारिश और तापमान में गिरावट ला सकता है।

    उत्तर भारत से मध्य भारत तक फैला बादलों का घना घेरा
    मौसम विभाग द्वारा जारी सैटेलाइट तस्वीरों में पाकिस्तान और उत्तर-पश्चिम भारत से लेकर पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और मध्य भारत के कई हिस्सों तक बादलों का बड़ा जमावड़ा दिखाई दे रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिस्टम भीषण गर्मी के बाद राहत देने वाला साबित हो सकता है। बादलों का यह घना समूह तूफानी गतिविधियों और प्री-मानसून बारिश का संकेत माना जा रहा है।

    दिल्ली में बारिश और तेज हवाओं से राहत
    गुरुवार शाम दिल्ली के कई इलाकों में तेज हवाओं और हल्की बारिश ने मौसम बदल दिया। लंबे समय से जारी गर्मी से लोगों को काफी राहत मिली। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, राजधानी में गरज-चमक के साथ आंधी चली, जिसमें पालम क्षेत्र में हवा की रफ्तार 61 किलोमीटर प्रति घंटा दर्ज की गई।

    तापमान में 5 डिग्री तक गिरावट
    मौसम में बदलाव के बाद दिल्ली के अधिकतम तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई। इससे पहले राजधानी के कई इलाकों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया था।

    31 मई तक जारी रह सकता है बारिश का दौर
    मौसम विभाग का अनुमान है कि दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में 31 मई तक गरज-चमक और बारिश की गतिविधियां जारी रह सकती हैं। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक राजस्थान के उत्तरी हिस्सों में पहले ही बारिश और आंधी शुरू हो चुकी है। यह मौसम प्रणाली धीरे-धीरे दिल्ली और अन्य उत्तर भारतीय राज्यों की ओर बढ़ रही है।

    गुजरात की ओर बढ़ेगा सिस्टम
    विशेषज्ञों का कहना है कि शुक्रवार को तूफानी गतिविधियां और तेज हो सकती हैं। यह सिस्टम 30 मई तक सक्रिय रहेगा और इसके बाद 30-31 मई के बीच गुजरात की ओर बढ़ने की संभावना है।

    इन वजहों से बदला मौसम
    मौसम विभाग ने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ, राजस्थान और आसपास बने चक्रवाती परिसंचरण तथा बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी भरी हवाओं के कारण मौसम में यह बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। विभाग का कहना है कि इस बार होने वाली प्री-मानसून बारिश अप्रैल और मई की शुरुआत में हुई बारिश से अधिक प्रभावी और व्यापक हो सकती है।

  • सीएम बनने से पहले डीके शिवकुमार को बड़ी राहत, कोर्ट ने दी विदेश यात्रा की मंजूरी

    सीएम बनने से पहले डीके शिवकुमार को बड़ी राहत, कोर्ट ने दी विदेश यात्रा की मंजूरी

    बेंगलुरु। कर्नाटक के भावी मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को बेंगलुरु की विशेष अदालत से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उन्हें 2017 के आयकर चोरी मामले में दो साल की अवधि के लिए विदेश यात्रा करने की अनुमति दे दी है। हालांकि, यह अनुमति कुछ सख्त शर्तों के साथ दी गई है।

    अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट केएन शिवकुमार ने डीके शिवकुमार की उस याचिका को मंजूरी दी, जिसमें उन्होंने आधिकारिक और व्यावसायिक कार्यों के लिए विदेश जाने की अनुमति मांगी थी। यह अनुमति उनकी जमानत शर्तों में संशोधन के तहत दी गई है।

    किन देशों की यात्रा कर सकेंगे
    अदालत ने डीके शिवकुमार को अगले दो वर्षों के दौरान कई देशों की यात्रा की अनुमति दी है, जिनमें शामिल हैं-
    अमेरिका
    यूरोपीय देश
    यूनाइटेड किंगडम
    ऑस्ट्रेलिया
    रूस
    अरब देश

    कोर्ट की सख्त शर्तें लागू
    अदालत ने स्पष्ट किया है कि हर विदेश यात्रा से पहले डीके शिवकुमार को अपने यात्रा कार्यक्रम की पूरी जानकारी जांच एजेंसी को देनी होगी। इसके अलावा उन्हें अदालत के समक्ष आवश्यकतानुसार पेश होना होगा।

    कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि किसी भी शर्त का उल्लंघन होता है, तो जांच एजेंसी या अभियोजन पक्ष विदेश यात्रा की अनुमति रद्द कराने के लिए अदालत में आवेदन कर सकता है। 15 मई के आदेश में अदालत ने यह भी कहा था कि किसी भी तरह की चूक होने पर जांच एजेंसी आवश्यक कार्रवाई के लिए स्वतंत्र होगी।

    क्या है पूरा मामला
    यह मामला 2017 में आयकर विभाग की छापेमारी से जुड़ा है। जांच एजेंसी का आरोप है कि बेंगलुरु-मैसूरु हाईवे स्थित ईगलटन गोल्फ रिजॉर्ट सहित कई स्थानों पर तलाशी के दौरान सबूतों को नष्ट करने की कोशिश की गई थी। इस दौरान लगभग 8.83 करोड़ रुपये नकद बरामद होने का दावा भी किया गया था।

    इस मामले में डीके शिवकुमार के साथ अन्य लोग भी आरोपी हैं और उनके खिलाफ आयकर अधिनियम तथा आईपीसी की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज है। हालांकि डीके शिवकुमार लगातार इन आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते रहे हैं।

    अदालत ने क्यों दी अनुमति
    अदालत ने अपने आदेश में कहा कि डीके शिवकुमार को अपने विभागीय कार्यों और कारोबारी गतिविधियों के विस्तार के लिए विदेश यात्रा की आवश्यकता पड़ सकती है। उनके द्वारा दिए गए कारण प्रथम दृष्टया उचित प्रतीत होते हैं।

    कोर्ट ने यह भी माना कि इसी मामले में एक अन्य आरोपी को पहले विदेश यात्रा की अनुमति दी जा चुकी है, इसलिए समान आधार पर उन्हें भी राहत दी गई है। साथ ही अदालत ने यह भी नोट किया कि कुछ सह-आरोपियों के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई हुई है, ऐसे में फिलहाल ट्रायल के लिए उनकी व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य नहीं मानी गई है।

    राजनीतिक पृष्ठभूमि भी चर्चा में
    यह राहत ऐसे समय में आई है जब कर्नाटक की राजनीति में नेतृत्व परिवर्तन और मुख्यमंत्री पद को लेकर चर्चाएं तेज हैं। कांग्रेस नेता सिद्धारमैया ने हाल ही में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया है, जिससे राज्य में सत्ता संतुलन को लेकर नई राजनीतिक हलचल शुरू हो गई है।

  • उत्तराखंड में जंगलों की आग विकराल: मदद न करने वालों पर होगी जेल कार्रवाई, 2 लोगों की मौत

    उत्तराखंड में जंगलों की आग विकराल: मदद न करने वालों पर होगी जेल कार्रवाई, 2 लोगों की मौत


    नई दिल्ली। उत्तराखंड में बढ़ती गर्मी के साथ जंगलों में आग अब भयावह रूप लेती जा रही है। पहाड़ी इलाकों से शुरू हुई वनाग्नि अब मैदानी जिलों तक फैल चुकी है। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि राज्य सरकार और वन विभाग को सख्त कदम उठाने पड़े हैं। लगातार फैल रही आग के बीच सरकार ने साफ कर दिया है कि जंगलों की आग बुझाने में सहयोग नहीं करने वालों पर अब कानूनी कार्रवाई की जाएगी। दोषी पाए जाने पर जेल और जुर्माने दोनों का प्रावधान रहेगा।

    वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस सीजन में अब तक राज्यभर में 460 से अधिक वनाग्नि की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें लगभग 380 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है। गुरुवार को ही प्रदेश में 37 नई घटनाएं दर्ज की गईं। देहरादून जिला अब सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में शामिल हो गया है। यहां के चार वन प्रभागों में करीब 74 हेक्टेयर जंगल जल चुके हैं, जबकि चमोली जिले में 68 हेक्टेयर वन क्षेत्र आग की चपेट में आया है।

    वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि लगातार बढ़ते तापमान, बारिश की कमी, सूखी वनस्पतियों और तेज हवाओं के कारण आग तेजी से फैल रही है। कई क्षेत्रों में दुर्गम पहाड़ी रास्तों के चलते आग बुझाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। राज्यभर में हाई अलर्ट जारी कर संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त टीमें तैनात कर दी गई हैं।

    सबसे ज्यादा नुकसान देहरादून के कालसी वन प्रभाग में हुआ है, जहां करीब 37 हेक्टेयर जंगल जल गए। वहीं चकराता, मसूरी और दून डिवीजन के जंगल भी आग की चपेट में हैं। दूसरी ओर चमोली जिले के बद्रीनाथ वन प्रभाग और अलकनंदा सॉयल कंजर्वेशन क्षेत्र में भी आग ने भारी तबाही मचाई है। यहां दो लोगों की मौत की भी पुष्टि हुई है।

    वन विभाग अब सख्त रुख अपनाने जा रहा है। बदरीनाथ-केदारनाथ वन प्रभाग के डीएफओ एसके दुबे ने कहा कि जंगलों में आग बुझाने में सहयोग नहीं करने वालों के खिलाफ केस दर्ज किए जाएंगे। इसमें वन उपज लेने वाले, लकड़ी कटान की अनुमति प्राप्त लोग, मवेशी चराने वाले और जंगलों के आसपास रहने वाले ग्रामीण भी शामिल हो सकते हैं। संशोधित नियमों के अनुसार दोषी पाए जाने पर एक वर्ष तक की जेल और दो हजार रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

    चकराता के देवघर रेंज क्षेत्र में बुधवार रात लगी आग को गुरुवार दोपहर तक काबू किया गया। इस आग में करीब साढ़े सात हेक्टेयर जंगल जल गए, जबकि वन विभाग ने करीब 428 हेक्टेयर जंगल को बचा लिया। वनकर्मियों ने लगातार 12 घंटे तक मशक्कत कर आग पर नियंत्रण पाया। मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज किया गया है।

    इधर त्यूणी और उत्तरकाशी के जंगल भी लगातार धधक रहे हैं। कई इलाकों में किसानों के बाग-बगीचों को भारी नुकसान पहुंचा है और सैकड़ों सेब के पेड़ जल गए हैं। देहरादून शहर में भी अलग-अलग जगहों पर आग लगने की घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें जंगल, ट्रांसफॉर्मर और दुकानों तक को नुकसान पहुंचा है।

    वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि जंगलों में आग लगने की सूचना तुरंत प्रशासन को दें और आग बुझाने में सहयोग करें। अधिकारियों का कहना है कि यदि समय रहते हालात नियंत्रित नहीं हुए तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

  • अब 100, 101, 108 नहीं… इमरजेंसी में सिर्फ 112 करेगा मदद, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश

    अब 100, 101, 108 नहीं… इमरजेंसी में सिर्फ 112 करेगा मदद, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश


    नई दिल्ली। देश में आपातकालीन सेवाओं को लेकर अब बड़ा बदलाव होने जा रहा है। पुलिस, फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस और महिला हेल्पलाइन जैसे अलग-अलग नंबरों की जगह अब सिर्फ एक नंबर ‘112’ ही लोगों की मदद के लिए इस्तेमाल होगा। सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि अगले तीन महीने के भीतर सभी इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबरों को तकनीकी और संचालन स्तर पर ‘112’ से जोड़ दिया जाए।

    सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब सड़क हादसों और आपातकालीन स्थितियों में समय पर मदद नहीं मिलने के मामले लगातार सामने आते रहे हैं। अदालत ने स्पष्ट कहा कि नागरिकों को समय पर ट्रॉमा केयर और आपातकालीन इलाज मिलना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का अहम हिस्सा है। कोर्ट ने कहा कि देशभर में इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम को एक समान और अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत है।

    यह आदेश जस्टिस जेके माहेश्वरी और एएस चंदूरकर की पीठ ने जारी किया। अदालत ने कहा कि मौजूदा समय में अलग-अलग सेवाओं के लिए कई नंबर होने से आम लोगों को भ्रम की स्थिति का सामना करना पड़ता है। ऐसे में एकीकृत हेल्पलाइन नंबर लागू करना जरूरी हो गया है।

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक, अब 100, 101, 102, 108, 1033 और 1091 जैसे सभी हेल्पलाइन नंबरों को ‘112’ में समाहित किया जाएगा। इसका मतलब यह होगा कि किसी भी तरह की इमरजेंसी में नागरिकों को सिर्फ एक नंबर डायल करना होगा और संबंधित सेवा तुरंत उपलब्ध कराई जाएगी।

    अदालत ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे अगले तीन महीने में इस व्यवस्था को पूरी तरह लागू करें और इसके बाद अनुपालन रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश करें। कोर्ट ने यह भी कहा कि ‘हेल्पलाइन 112’ को लेकर व्यापक स्तर पर जनजागरूकता अभियान चलाया जाए, ताकि देश के हर नागरिक तक इसकी जानकारी पहुंच सके।

    सिर्फ हेल्पलाइन नंबर को एकीकृत करने तक ही अदालत ने खुद को सीमित नहीं रखा। सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को ‘गुड समैरिटन कानून’ के तहत एक प्रभावी शिकायत निवारण प्रणाली विकसित करने का भी आदेश दिया है। इसका उद्देश्य सड़क हादसों में घायल लोगों की मदद करने वाले नागरिकों को कानूनी सुरक्षा और प्रोत्साहन देना है।

    इसके अलावा अदालत ने केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय और सड़क परिवहन मंत्रालय को निर्देश दिया है कि तीन महीने के भीतर ट्रॉमा मामलों के लिए एक राष्ट्रीय ‘मेडिकल रेस्क्यू प्रोटोकॉल’ तैयार किया जाए। यह प्रोटोकॉल जारी होने के बाद राज्यों को अगले तीन महीने में उसे अपने यहां लागू करना होगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला देश में आपातकालीन सेवाओं को तेज, सरल और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है। एकीकृत हेल्पलाइन सिस्टम लागू होने से हादसों और संकट की घड़ी में लोगों को तेजी से सहायता मिल सकेगी और कई जानें बचाई जा सकेंगी।

  • मोबिलिटी सेक्टर में नया रिकॉर्ड, भारत टैक्सी बनी सबसे बड़ी कोऑपरेटिव

    मोबिलिटी सेक्टर में नया रिकॉर्ड, भारत टैक्सी बनी सबसे बड़ी कोऑपरेटिव


    नई दिल्ली। गांधीनगर में शुरू हुई “भारत टैक्सी” देश की सबसे बड़ी मोबिलिटी कोऑपरेटिव के रूप में तेजी से उभर रही है। इस प्लेटफॉर्म से अब तक 35 लाख से अधिक यूजर्स और 6 लाख से ज्यादा ड्राइवर, जिन्हें यहां ‘सारथी’ कहा जाता है, जुड़ चुके हैं।

    5 फरवरी को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह द्वारा लॉन्च की गई यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ विजन का एक बड़ा उदाहरण मानी जा रही है। इस मॉडल को तकनीक और सहकारिता के अनोखे संगम के रूप में देखा जा रहा है, जहां ड्राइवर केवल सेवा प्रदाता नहीं बल्कि प्लेटफॉर्म के सह-मालिक हैं।

    भारत टैक्सी का सबसे बड़ा आकर्षण इसका जीरो कमीशन मॉडल है। कंपनी के अनुसार, राइड से होने वाली 100 प्रतिशत कमाई सीधे ड्राइवरों के खाते में जाती है, जिससे उनकी मासिक आय में 25 से 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

    प्लेटफॉर्म से जुड़े ड्राइवरों का कहना है कि पारंपरिक एग्रीगेटर मॉडल की तुलना में यहां कमाई अधिक पारदर्शी और स्थिर है। वहीं यात्रियों को भी फायदा मिल रहा है क्योंकि किराया औसतन 15 प्रतिशत तक कम है और डायनेमिक प्राइसिंग जैसी अनिश्चितताओं से राहत मिली है।

    अहमदाबाद रिक्शा चालक एकता यूनियन के प्रतिनिधियों के अनुसार, इस मॉडल ने ड्राइवरों के आत्मसम्मान और आर्थिक स्थिति दोनों को मजबूत किया है। आवेदन प्रक्रिया भी सरल बताई जा रही है, जिसमें 12 घंटे के भीतर अप्रूवल मिलने का दावा किया गया है।

    कंपनी ने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए गुजरात पुलिस के साथ SOS इंटीग्रेशन लागू किया है, जिससे आपात स्थिति में तुरंत सहायता मिल सके। इसके अलावा सोमनाथ और द्वारकाधीश जैसे तीर्थ स्थलों के लिए विशेष रूट कनेक्टिविटी भी शुरू की गई है।

    भारत टैक्सी ने अब तक 10,000 से अधिक ड्राइवरों को डिजिटल और सॉफ्ट स्किल्स का प्रशिक्षण दिया है और मेट्रो, एयरपोर्ट तथा ट्रांजिट सिस्टम के साथ इंटीग्रेशन के जरिए अपने नेटवर्क को लगातार विस्तार दे रही है।

  • छत्तीसगढ़ की शान तीजन बाई की तबीयत नाजुक, एम्स रायपुर में डॉक्टरों की निगरानी

    छत्तीसगढ़ की शान तीजन बाई की तबीयत नाजुक, एम्स रायपुर में डॉक्टरों की निगरानी


    नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध पंडवानी लोक गायिका और पद्मविभूषण सम्मानित डॉ. तीजन बाई की तबीयत अचानक बिगड़ने के बाद उन्हें रायपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती कराया गया है। गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें तत्काल इंटेंसिव केयर यूनिट (ICU) में स्थानांतरित किया है।

    परिवार के अनुसार, बुधवार देर रात उनकी स्थिति अधिक बिगड़ने पर उन्हें एम्स लाया गया, जहां प्रारंभिक जांच में फेफड़ों में पानी भरने (पल्मोनरी कंजेशन) और निमोनिया की पुष्टि हुई। साथ ही उनका ब्लड प्रेशर भी काफी कम पाया गया, जिससे उनकी स्थिति चिंताजनक हो गई थी।

    तीजन बाई की बहू वेणु देशमुख ने बताया कि समय पर एम्बुलेंस और चिकित्सा सहायता मिलने से अब उनकी स्थिति में पहले की तुलना में सुधार हुआ है और वे खतरे से बाहर बताई जा रही हैं। डॉक्टरों की विशेष टीम लगातार उनकी सेहत पर नजर बनाए हुए है।

    अस्पताल प्रशासन के अनुसार, उम्र और पहले से मौजूद स्वास्थ्य स्थितियों को देखते हुए तीजन बाई का उपचार बेहद सतर्कता के साथ किया जा रहा है।

    छत्तीसगढ़ की इस महान लोक कलाकार को देश-विदेश में पंडवानी गायन को लोकप्रिय बनाने का श्रेय जाता है। उन्होंने महाभारत की कथाओं को अपनी विशिष्ट शैली में प्रस्तुत कर इस लोककला को नई पहचान दी है।

    तीजन बाई ने 1980 में कई देशों की सांस्कृतिक राजदूत के रूप में यात्राएं कीं, जिनमें इंग्लैंड, फ्रांस, स्विट्जरलैंड, जर्मनी, टर्की, माल्टा, साइप्रस, रोमानिया और मॉरीशस शामिल हैं। उन्हें 1988 में पद्मश्री, 1995 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और 2019 में पद्मविभूषण से सम्मानित किया गया था।

    उनकी तबीयत बिगड़ने की खबर से उनके प्रशंसकों में चिंता का माहौल है और देशभर से उनके जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थनाएं की जा रही हैं।

  • SAI Recruitment 2026: 100 असिस्टेंट कोच पदों पर वैकेंसी, जानें योग्यता और आवेदन प्रक्रिया

    SAI Recruitment 2026: 100 असिस्टेंट कोच पदों पर वैकेंसी, जानें योग्यता और आवेदन प्रक्रिया


    नई दिल्ली। सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) ने बड़ा अवसर जारी किया है। संस्थान ने असिस्टेंट कोच के कुल 100 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। यह नियुक्ति प्रतिनियुक्ति (डेप्यूटेशन) के आधार पर की जाएगी।

    जारी अधिसूचना के अनुसार आवेदन प्रक्रिया 26 मई 2026 से शुरू हो चुकी है और इच्छुक उम्मीदवार 27 जून 2026 शाम 5 बजे तक आवेदन कर सकते हैं। आवेदन ऑफलाइन माध्यम से भेजना होगा।

    इन पदों पर चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति प्रारंभ में 3 वर्षों के लिए की जाएगी, जिसे प्रदर्शन के आधार पर अधिकतम 7 वर्षों तक बढ़ाया जा सकता है।

    योग्यता के रूप में उम्मीदवार के पास एसएआई/एनएस-एनआईएस पटियाला से कोचिंग डिप्लोमा या समकक्ष योग्यता होनी चाहिए। इसके अलावा ओलंपिक, पैरालंपिक, एशियाई खेलों या विश्व चैंपियनशिप में भाग लेने वाले खिलाड़ी, द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता या संबंधित खेल कोटा के अंतर्गत योग्य उम्मीदवार भी आवेदन कर सकते हैं।

    सरकारी विभागों में कार्यरत वे अधिकारी भी पात्र हैं जिनके पास समान पद पर अनुभव या लेवल-5 में कम से कम 6 वर्ष की नियमित सेवा हो।

    अधिकतम आयु सीमा 56 वर्ष निर्धारित की गई है, जिसकी गणना 26 मई 2026 के आधार पर की जाएगी।

    चयन प्रक्रिया में पात्रता जांच, इंटरव्यू और मेरिट सूची शामिल होगी। चयनित उम्मीदवारों को 35,400 रुपये से लेकर 1,12,400 रुपये प्रतिमाह तक वेतन दिया जाएगा, साथ ही अन्य भत्तों का लाभ भी मिलेगा।

    आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों को SAI की आधिकारिक वेबसाइट से आवेदन फॉर्म डाउनलोड कर उसे भरना होगा। सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ फॉर्म को निर्धारित पते पर डाक के माध्यम से भेजना अनिवार्य है।

  • सिक्किम पुलिस को ‘राष्ट्रपति का निशान’, मुर्मु ने कहा– जनता के साथ भरोसा बढ़ाना जरूरी

    सिक्किम पुलिस को ‘राष्ट्रपति का निशान’, मुर्मु ने कहा– जनता के साथ भरोसा बढ़ाना जरूरी


    नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गुरुवार को सिक्किम की राजधानी गंगटोक में सिक्किम पुलिस को ‘राष्ट्रपति का निशान’ प्रदान किया। इस अवसर पर उन्होंने पुलिस बल से जुड़े सभी वर्तमान और पूर्व अधिकारियों व कर्मियों को बधाई दी और उनके योगदान की सराहना की।

    राष्ट्रपति ने कहा कि सिक्किम पुलिस ने वर्ष 1897 में अपनी स्थापना के बाद से राज्य में शांति, सुरक्षा और न्याय बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने इसे एक अनुशासित और जनसेवा से जुड़ा हुआ पुलिस बल बताया।

    अपने संबोधन में राष्ट्रपति मुर्मु ने भारत की पुलिस व्यवस्था के ऐतिहासिक संदर्भ का उल्लेख करते हुए कहा कि औपनिवेशिक काल की व्यवस्था में पुलिस का मुख्य उद्देश्य जनता की सेवा नहीं बल्कि नियंत्रण और आदेशों का सख्ती से पालन कराना था। उन्होंने कहा कि इसी कारण पुलिस व्यवस्था में एक समय ‘गुलामी की मानसिकता’ विकसित हो गई थी, जिसे अब बदलने की आवश्यकता है।

    राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि देश को विकसित भारत के लक्ष्य की ओर ले जाने के लिए इस सोच से पूरी तरह मुक्त होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद महत्वपूर्ण हैं, ताकि नागरिकों का भरोसा मजबूत हो सके।

    उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस को अधिक नागरिक-हितैषी बनना चाहिए, जिससे लोग बिना भय के अपनी शिकायतें दर्ज करा सकें। महिलाओं, बच्चों और कमजोर वर्गों के प्रति संवेदनशील व्यवहार को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर भी उन्होंने बल दिया।

    राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि पुलिस को केवल कानून लागू करने वाली संस्था नहीं, बल्कि समाज की सहयोगी और मार्गदर्शक की भूमिका निभानी चाहिए। इससे पुलिस और जनता के बीच विश्वास बढ़ेगा और समाज में सुरक्षा तथा कानून के प्रति सम्मान मजबूत होगा।

    उन्होंने सिक्किम पुलिस की सराहना करते हुए कहा कि राज्य में शांति और भाईचारे को बनाए रखने में इस बल का योगदान उल्लेखनीय रहा है। सिक्किम पुलिस ने अपने व्यवहार और पेशेवर कार्यशैली के जरिए जनता का विश्वास और सम्मान अर्जित किया है।