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  • लोकसभा में पास होने के बाद आज राज्यसभा में पेश होगा 'एंटी-पेपर लीक बिल….

    लोकसभा में पास होने के बाद आज राज्यसभा में पेश होगा 'एंटी-पेपर लीक बिल….


    नई दिल्ली।
    लोकसभा (Lok Sabha) में हंगामे के बीच पास होने के बाद, अब मोदी सरकार (Modi Government) गुरुवार यानी आज 30 जुलाई को ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026’ (Public Examinations -Prevention of Unfair Means- Amendment Bill, 2026) राज्यसभा (Rajya Sabha) में पेश करने जा रही है। देशभर में छात्रों के भारी विरोध प्रदर्शन के बाद लाए गए इस नए और सख्त संशोधन विधेयक पर आज पूरे देश की निगाहें टिकी हैं।

    बुधवार को विपक्ष के भारी हंगामे और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के कड़े तेवरों के बावजूद सरकार ने इसे लोकसभा से ध्वनि मत से पारित करा लिया। अब सवाल यह है कि क्या उच्च सदन यानी राज्यसभा में सरकार को इस बिल को पास कराने में कोई अड़चन आएगी? आइए समझते हैं राज्यसभा का ताजा ‘नंबर गेम’।


    राज्यसभा का नंबर गेम: क्या आसानी से पास होगा बिल?

    राज्यसभा की कुल संख्या 245 है, हालांकि अभी 242 सांसद हैं। अभी खास बहुमत के लिए 162 सांसदों की जरूरत है। वहीं साधारण बहुमत का आंकड़ा 123 है। एंटी-पेपर लीक वाले इस बिल के लिए साधारण बहुमत की ही जरूरत है।

    गठबंधन / दल – सांसदों की संख्या- बहुमत का आंकड़ा (123)

    NDA (सत्ता पक्ष) – 152 – बहुमत से 29 सांसद ज्यादा
    INDIA (विपक्ष) – 63 –
    अन्य दल – 29 –
    रिक्त सीट – 1 –
    कुल – 245 –

    राज्यसभा में NDA के पास अपने दम पर 152 सांसदों का मजबूत आंकड़ा है, जो बहुमत के जादुई आंकड़े (123) से काफी ज्यादा है। ऐसे में ‘एंटी-पेपर लीक संशोधन बिल 2026’ को उच्च सदन से पास कराने में सरकार को कोई खास मुश्किल नहीं होगी, भले ही विपक्ष कितना भी हंगामा क्यों न करे।

    इस कानून का मकसद लोगों, संगठित समूहों और संस्थाओं को अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने और अपराध करने से प्रभावी ढंग से रोकना है, जिससे सार्वजनिक परीक्षाओं की पवित्रता बनी रहे।


    ‘एंटी-पेपर लीक संशोधन बिल 2026’ में नया क्या है?

    साल 2024 के मूल कानून को और अधिक सख्त बनाने के लिए इस 2026 के संशोधन विधेयक में कई कड़े प्रावधान जोड़े गए हैं। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा पेश किए गए इस बिल की मुख्य बातें इस प्रकार हैं।
    – संगठित पेपर लीक और परीक्षा में धांधली करने वाले गिरोह, संस्थानों या अधिकारियों को अब 10 साल तक की सख्त कैद होगी (पहले यह अधिकतम 5 साल थी)।
    – पेपर लीक सिंडिकेट और इसमें शामिल सर्विस प्रोवाइडर संस्थानों पर 10 करोड़ रुपये तक का भारी-भरकम जुर्माना लगाया जाएगा।
    – इन मामलों को लंबा खिंचने से रोकने के लिए हर राज्य में ‘स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट’ बनाए जाएंगे, जहां रोजाना सुनवाई होगी।
    – किसी भी पेपर लीक मामले की जांच राज्य पुलिस या स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को अधिकतम 60 दिनों के भीतर पूरी करनी होगी।


    लोकसभा में खूब हुआ हंगामा

    लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की कुछ टिप्पणियों को लेकर सत्तापक्ष के सदस्यों ने तीखी प्रतिक्रिया दी। इस दौरान हुए हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी। दोपहर ढाई बजे प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने चर्चा का जवाब दिया। इसके बाद विधेयक को ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। विधेयक में पेपर लीक रोकने के कई कड़े प्रावधान किए गए हैं।


    क्यों मची है संसद में रार?

    इस बिल के लोकसभा में पास होने के दौरान भारी राजनीतिक ड्रामा देखने को मिला। हाल ही में हुए NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद के बाद देशभर में 36 दिनों तक छात्रों का प्रदर्शन चला था, जिसके दबाव में तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा तक देना पड़ा।

    बुधवार को लोकसभा में चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर पुलिस ने पैलेट गन का इस्तेमाल किया। इस पर सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई। सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने राहुल के दावों को बेबुनियाद और तथ्यहीन बताते हुए खारिज कर दिया और स्पष्ट किया कि पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए केवल आंसू गैस का इस्तेमाल किया था।

  • मप्र सरकार के 60 फीसदी उपज खरीदने के फैसले के बाद किसानों का आंदोलन खत्म

    मप्र सरकार के 60 फीसदी उपज खरीदने के फैसले के बाद किसानों का आंदोलन खत्म


    – मप्र सरकार प्रत्येक पात्र किसान से करेगी मूंग का 60 प्रतिशत उपार्जन, स्लॉट बुकिंग की अवधि भी 10 दिन बढ़ाई

    भोपाल। मध्य प्रदेश में चल रहे किसान आंदोलन के बीच राज्य सरकार ने प्रत्येक पात्र किसान से 60 फीसदी तक मूंग खरीदी करने का ऐलान किया है। नर्मदापुरम, सीहोर और हरदा जैसे जिलों में लगभग तीन क्विंटल प्रति एकड़ खरीदी की जाएगी। साथ ही स्लॉट बुकिंग की अवधि 10 अगस्त तक बढ़ा दी है और मूंग खरीदी की अंतिम तारीख 20 अगस्त कर दी गई है।

    बुधवार की रात सरकार और किसान प्रतिनिधियों के बीच मंत्रालय में हुई बैठक के बाद किसानों ने अपना आंदोलन समाप्त कर दिया है। सरकार और किसान प्रतिनिधियों के बीच सहमति बनने के बाद किसान अपने-अपने घरों के लिए रवाना हो गए। प्रशासन ने बसों के जरिए किसानों को उनके वाहनों तक पहुंचाया। देर रात तक आंदोलन पूरी तरह समाप्त हो गया।

    एडिशनल सीपी शैलेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि किसानों ने सहमति जता दी है। इसके बाद प्रशासन ने रोशनपुरा चौराहे से किसानों को बसों के जरिए उनकी गाड़ियों तक पहुंचाकर रवाना किया। बाद में रोशनपुरा चौराहा लगभग खाली हो गया। बाणगंगा की ओर जाने वाले मार्ग को छोड़कर बाकी रास्ते यातायात के लिए खोल दिए गए।

    कृषि मंत्री एंदल सिंह कंषाना ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर बुधवार को किसानों के साथ चर्चा के लिए गठित मंत्री समूह की किसान प्रतिनिधियों के साथ चर्चा हुई। किसानों के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार ने यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया है कि अब प्रत्येक पात्र किसान से उसकी मूंग उपज का 25 प्रतिशत नहीं, बल्कि 60 प्रतिशत उपार्जन किया जाएगा, जो नर्मदापुरम, सीहोर एवं हरदा जैसे जिलों में लगभग 3 क्विंटल प्रति एकड़ आता है। यह निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू किया जाएगा और प्रयास रहेगा कि अधिक से अधिक किसानों को इसका लाभ मिले।

    उन्होंने बताया कि किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने स्लॉट बुकिंग की अवधि भी 10 दिन बढ़ाने का निर्णय लिया है। अब किसान 30 जुलाई के स्थान पर 10 अगस्त तक स्लॉट बुकिंग कर सकेंगे। इसी प्रकार उपार्जन की अंतिम तिथि भी 10 अगस्त से बढ़ाकर 20 अगस्त की जा रही है।

    कृषि मंत्री कंषाना ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार सदैव किसानों के हित में कार्य करती आई है। अन्नदाता प्रदेश की अर्थव्यवस्था और समृद्धि का आधार हैं और उनके परिश्रम से उत्पादित उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है ।

    उन्होंने बताया कि भारत सरकार द्वारा इस वर्ष ग्रीष्मकालीन मूंग के उपार्जन के लिए मध्य प्रदेश को 4.52 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। भारत सरकार की योजना के अंतर्गत राज्य के कुल उत्पादन का अधिकतम 25 प्रतिशत उपार्जन किए जाने का प्रावधान है। भारत सरकार के इसी नियम के अंतर्गत निर्णय लिया गया था कि प्रदेश के मूंग उत्पादक किसानों से उनकी उपज का 25 प्रतिशत न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर उपार्जित किया जाएगा।

    उन्होने किसान भाइयों-बहनों को आश्वस्त किया कि मध्य प्रदेश सरकार सदैव किसानों के हित में खड़ी है। जहाँ तक खाद वितरण के लिए लागू की गई ई-टोकन व्यवस्था से संबंधित शिकायतों और व्यावहारिक समस्याओं का प्रश्न है, यह व्यवस्था राज्य शासन का एक महत्वपूर्ण सुधार है और आने वाले समय में इससे किसानों को काफी सुविधा एवं लाभ मिलेगा।

    ई-टोकन व्यवस्था में सुधार के लिये समिति गठित होगी

    कृषि मंत्री ने बताया कि चूँकि यह एक नई व्यवस्था है, इसलिए प्रारंभिक स्तर पर सामने आ रही समस्याओं को देखते हुए मुख्यमंत्री ने कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का निर्णय लिया है। यह समिति ई-टोकन व्यवस्था से जुड़ी सभी समस्याओं का परीक्षण कर राज्य सरकार को अपनी अनुशंसाएँ प्रस्तुत करेगी। समिति की अनुशंसाओं के आधार पर आवश्यक सुधार तत्काल किए जाएंगे। सुझाव प्राप्त होकर सुधार होने तक ई-टोकन से खाद वितरण की व्यवस्था तत्काल प्रभाव से स्थगित की जा रही है।

  • अद्वितीय है महर्षि सांदीपनि आश्रम, भगवान श्रीकृष्ण ने 5100 वर्ष पूर्व इसी पावन स्थल पर ग्रहण की थी विद्या

    अद्वितीय है महर्षि सांदीपनि आश्रम, भगवान श्रीकृष्ण ने 5100 वर्ष पूर्व इसी पावन स्थल पर ग्रहण की थी विद्या


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन स्थित सांदीपनि आश्रम अत्यंत गौरवशाली और अद्वितीय है। लगभग 5100 वर्ष पूर्व स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने इसी पावन स्थल पर महर्षि सांदीपनि से विद्या ग्रहण की थी। भगवान श्रीकृष्ण से शिक्षा प्राप्त कर जगद्गुरु की उपाधि से विभूषित हुए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार देर शाम उज्जैन स्थित ऐतिहासिक महर्षि सांदीपनि आश्रम में श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर उज्जैन के प्रमुख देवस्थानों के विकास कार्यों का शुभारंभ हो रहा है, जिसमें शहर को गीता भवन की बड़ी सौगात भी मिल रही है। उन्होंने कहा कि आज गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर हम सभी गुरुओं का सम्मान कर अपने जीवन को धन्य करें।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर उज्जैन स्थित ऐतिहासिक महर्षि सांदीपनि आश्रम पहुंचे और यहां पूजन-अर्चन और आरती की। पूजा-अर्चना पं. कीर्ति रूपम व्यास एवं राहुल व्यास के द्वारा संपन्न कराई गई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने अपनी स्वरचित पुस्तक ‘महर्षि सांदीपनि: भारतीय गुरुकुल परंपरा के शिल्पी’ की प्रति महर्षि सांदीपनि की प्रतिमा के समक्ष अर्पित की।

    मुख्यमंत्री ने आश्रम परिसर में स्थित अति प्राचीन श्री कुंडेश्वर महादेव और श्री सर्वेश्वर महादेव मंदिर में भी दर्शन-पूजन किया। आश्रम के मुख्य पुजारी परिवार द्वारा मुख्यमंत्री का अंगवस्त्रम् ओढ़ाकर एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत-सम्मान किया गया।

    आश्रम में हुआ पंचामृत अभिषेक और स्लेट पूजन

    महर्षि सांदीपनि व्यास के वंशज एवं मंदिर के मुख्य पुजारी पं. कीर्ति रुपम व्यास ने बताया कि गुरु पूर्णिमा पर आश्रम में प्रतिवर्षानुसार विशेष अनुष्ठान आयोजित किए गए। प्रात:काल भगवान श्रीकृष्ण, भगवान श्री बलराम और गुरु सांदीपनि का पंचामृत अभिषेक एवं विशेष पूजन किया गया। परंपरा अनुसार, प्रथम बार शिक्षा प्रारंभ करने वाले छोटे बच्चों द्वारा ‘स्लेट पूजन’ का आयोजन भी हुआ।

    गुरु गादी परिसर को भव्य और दिव्य स्वरूप प्रदान किया जाएगा

    गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन स्थित वृंदावन पूरा में संत शिरोमणि रविदास महाराज की चरण पादुका और गुरु गादी स्थल पहुंचकर श्रद्धापूर्वक नमन किया एवं श्रद्धापूर्वक चादर चढ़ाई। राज्य के सभी नागरिकों के सुख, समृद्धि और कल्याण की कामना की।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्थल के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि संत रविदास जी महाराज के इस चरण पादुका एवं गुरु गादी परिसर को भव्य और दिव्य स्वरूप प्रदान किया जाएगा, जिसके लिए जल्द ही आवश्यक विकास कार्य शुरू किए जाएंगे। उन्होंने कहा शिरोमणि रविदास महाराज के आदर्श, उपदेश और विचार आज भी समाज में समानता, सद्भाव और मानवता की भावना का संचार करते हैं। उनका जीवन पूरी मानव जाति के लिए एक मार्गदर्शक है।

    इस गरिमामय आयोजन में जन प्रतिनिधियों और रविदास समाज के प्रमुख लोगों की बड़ी संख्या में मौजूदगी रही। कार्यक्रम में नगर अध्यक्ष संजय अग्रवाल, महापौर मुकेश टटवाल, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष रवि सोलंकी और उपाध्यक्ष मुकेश यादव, पूर्व केंद्रीय मंत्री सत्यनारायण जटिया सहित रविदास समाज के संभागीय अध्यक्ष मनोहर सुरेश कुसुमारिया, विजेंद्र चौहान, कमल हनोतिया, कमलकांत राजोरिया, विक्रम परमार, रितेश जटिया, अंबाराम चौहान, प्रशासनिक अधिकारी एवं भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

  • इंडिया मोबाइल कांग्रेस की थीम स्केल विदाउट बाउंड्रीज का अनावरण, 7 से 10 अक्टूबर तक होगा आयोजन

    इंडिया मोबाइल कांग्रेस की थीम स्केल विदाउट बाउंड्रीज का अनावरण, 7 से 10 अक्टूबर तक होगा आयोजन


    नई दिल्ली।
    केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बुधवार को इंडिया मोबाइल कांग्रेस (आईएमसी) के 10वें संस्करण की आधिकारिक थीम ‘स्केल विदाउट बाउंड्रीज़’ का अनावरण किया। उन्होंने कहा कि यह थीम भारत की डिजिटल क्षमताओं, नवाचार और वैश्विक तकनीकी नेतृत्व को नई दिशा देने का प्रतीक है। इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 का आयोजन 7 से 10 अक्टूबर तक नई दिल्ली के यशोभूमि कन्वेंशन सेंटर में होगा।

    इंडिया मोबाइल कांग्रेस के 10वें संस्करण में 100 से अधिक देशों के प्रतिभागियों के शामिल होने की संभावना है। इसमें 1.5 लाख से अधिक आगंतुक, 300 से अधिक प्रदर्शक और साझेदार तथा 1,500 से अधिक प्रौद्योगिकी आधारित उपयोग प्रस्तुत किए जाएंगे। आयोजन का उद्देश्य नीति निर्माताओं, उद्योग जगत, स्टार्टअप, निवेशकों, शिक्षाविदों और वैश्विक प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों को एक मंच पर लाना है।

    ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि जब प्रौद्योगिकी प्रत्येक नागरिक तक पहुंचती है तो अवसर पैदा होते हैं और जब अवसर प्रत्येक नागरिक तक पहुंचते हैं तो परिवर्तन अनिवार्य हो जाता है। आज देश में 133 करोड़ लोगों के हाथों में मोबाइल फोन हैं और डेटा की कीमत 287 रुपये प्रति जीबी से घटकर लगभग आठ रुपये प्रति जीबी रह गई है, जो तकनीक के लोकतंत्रीकरण का उदाहरण है।

    उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि भारत में विकसित प्रौद्योगिकी, नवाचार और समाधान विश्व की सीमाओं को पार करें। भारत अब केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि वैश्विक मानकों, डिजिटल समाधान और नई प्रौद्योगिकियों को दिशा देने वाला देश बन रहा है। उन्होंने कहा कि ‘स्केल विदाउट बाउंड्रीज़’ इसी सोच को दर्शाती है।

    सिंधिया ने कहा कि भारत 6जी प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी वैश्विक नेतृत्व की तैयारी कर रहा है। भारत 6जी गठबंधन और वैश्विक मानकों के विकास में देश की सक्रिय भूमिका भविष्य की डिजिटल व्यवस्था को आकार देने में महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने दूरसंचार क्षेत्र में उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना और ग्वालियर में स्थापित देश के पहले दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार और उद्योग मिलकर काम कर रहे हैं।

    संचार एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी ने कहा कि पिछले दस वर्षों में भारत के दूरसंचार क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन हुआ है। आज देश के प्रत्येक जिले तक 5जी सेवा पहुंच चुकी है और मोबाइल सेवाएं देश के लगभग प्रत्येक नागरिक तक उपलब्ध हैं। भारत ने स्वदेशी 4जी तकनीक भी विकसित की है और अब सरकार का लक्ष्य देश के प्रत्येक गांव तक उच्च गति ब्रॉडबैंड पहुंचाना है।

    उन्होंने कहा कि भारतनेट परियोजना, 5जी फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस (एफडब्ल्यूए), 6जी, क्वांटम संचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उपग्रह संचार जैसी प्रौद्योगिकियों के माध्यम से देश को डिजिटल इंडिया से इंटेलिजेंट इंडिया की दिशा में आगे बढ़ाया जाएगा।

    दूरसंचार विभाग के सचिव एवं डिजिटल संचार आयोग के अध्यक्ष अमित अग्रवाल ने कहा कि इंडिया मोबाइल कांग्रेस आज भारत का प्रमुख डिजिटल मंच बन चुका है। इसमें प्रौद्योगिकी आधारित नवाचारों और वैश्विक भागीदारी में लगातार वृद्धि हुई है। इस वर्ष की थीम भारत की बढ़ती डिजिटल क्षमता और वैश्विक योगदान को प्रतिबिंबित करती है।

    सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) के अध्यक्ष राहुल वत्स ने कहा कि वर्ष 2017 में इंडिया मोबाइल कांग्रेस की शुरुआत 32 हजार आगंतुकों और 100 प्रदर्शकों के साथ हुई थी। आज यह केवल उद्योग का आयोजन नहीं, बल्कि भारत का प्रमुख प्रौद्योगिकी मंच बन चुका है, जहां नीति, उद्योग और नवाचार का संगम होता है। उन्होंने कहा कि पहले भारत दुनिया से सीखने आता था, लेकिन अब दुनिया भारत के नवाचारों को देखने आती है।

    इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 में 5जी और 6जी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, क्वांटम कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा, उपग्रह संचार, डीपटेक, क्लीनटेक, इंडस्ट्री 4.0, एंटरप्राइज ट्रांसफॉर्मेशन, स्मार्ट मोबिलिटी, औद्योगिक स्वचालन और परिवहन प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में नवीनतम तकनीकों का प्रदर्शन किया जाएगा।

    आयोजन को चार प्रमुख स्तंभ सृष्टि (भविष्य का निर्माण), संवर्धन (विकास को गति), सशक्त (अवसरों का विस्तार) और सुरक्षा (विश्वास को सुदृढ़ करना) के आधार पर तैयार किया गया है। इन स्तंभों के माध्यम से सुरक्षित, समावेशी और टिकाऊ डिजिटल नवाचारों को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा।

    स्टार्टअप कार्यक्रम ‘एस्पायर’ के तहत 400 से अधिक स्टार्टअप, 300 से अधिक निवेशक, इनक्यूबेटर, एक्सेलेरेटर और वेंचर कैपिटल संस्थाएं भाग लेंगी। कार्यक्रम के दौरान 700 से अधिक निवेशक-स्टार्टअप बैठकें, मेंटरशिप सत्र, लाइव पिचिंग, नेटवर्किंग और रणनीतिक साझेदारी के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।

    थीम के औपचारिक अनावरण से पहले इंडिया मोबाइल कांग्रेस ने सत्वा कंसल्टिंग के सहयोग से दूरसंचार एवं संबंधित क्षेत्रों के कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) और स्थिरता विशेषज्ञों की गोलमेज बैठक का भी आयोजन किया, जिसमें समावेशी विकास और डिजिटल परिवर्तन को गति देने में सीएसआर की भूमिका पर चर्चा की गई।

  • भारत-अमेरिका व्यापार समझौता तब लागू होगा जब भारत को तुलनात्मक लाभ मिलेगा: गोयल

    भारत-अमेरिका व्यापार समझौता तब लागू होगा जब भारत को तुलनात्मक लाभ मिलेगा: गोयल


    नई दिल्ली।
    केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को कहा कि भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते का पहला चरण तभी लागू होगा, जब अमेरिका यह सुनिश्चित करेगा कि भारत को अपने प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में लाभ मिले।

    पीयूष गोयल ने नई दिल्ली में एक कार्यक्रम से इतर संवाददाताओं को संबोधित करते हुए यह बात कही। वाणिज्य और उद्योग मंत्री ने भरोसा जताया कि भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) का पहला चरण तब लागू हो जाएगा, जब अमेरिका भारतीय निर्यात को पड़ोसी देशों और आसियान देशों के मुकाबले टैरिफ के मामले में बेहतर स्थिति देगा।

    संवाददाताओं से बात करते हुए गोयल ने कहा कि भारत ने बीटीए के शुरुआती चरण पर बातचीत पूरी कर ली है और अब अमेरिका की तरफ से ज़रूरी कदमों का इंतज़ार कर रहा है। उन्होंने कहा कि यही इस समझौते के पहले चरण का मूल आधार है और जैसे ही यह आधार फिर से स्थापित होगा, भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौता लागू करने के लिए तैयार होगा। अमेरिका ने उस जांच के तहत भारत पर 10 फीसदी का टैरिफ लगाया है।

    केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की कानूनी समीक्षा अंतिम चरण में है। गोयल ने कहा, ‘‘जब तक भारत को प्रतिस्पर्धी बढ़त या कम से कम प्रतिस्पर्धी देशों के बराबर शुल्क दरें मिलती रहेंगी, तबतक भारत, अमेरिका को अपना निर्यात बढ़ाता रहेगा और वहां उपलब्ध विशाल बाजार के अवसरों का लाभ भी उठाता रहेगा।’

    उल्लेखनीय है कि भारत और अमेरिका ने 7 फरवरी 2026 को जारी संयुक्त बयान में इस द्विपक्षीय व्यापार समझौते की घोषणा की थी।

  • 1 अगस्त से चीनी कारोबार पर सख्ती, जमाखोरी रोकने के लिए सरकार ने तय की नई स्टॉक सीमा

    1 अगस्त से चीनी कारोबार पर सख्ती, जमाखोरी रोकने के लिए सरकार ने तय की नई स्टॉक सीमा

    नई दिल्ली । देशभर में चीनी की उपलब्धता बनाए रखने और बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। सरकार ने 1 अगस्त 2026 से 30 नवंबर 2026 तक चीनी के थोक और खुदरा कारोबारियों के लिए स्टॉक सीमा लागू करने का निर्णय लिया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य जमाखोरी और सट्टेबाजी जैसी गतिविधियों पर रोक लगाना है, ताकि त्योहारी सीजन के दौरान उपभोक्ताओं को उचित कीमत पर पर्याप्त मात्रा में चीनी उपलब्ध हो सके।

    नए नियम के अनुसार थोक व्यापारी, खुदरा विक्रेता और बड़े रिटेल स्टोर अधिकतम 4,000 क्विंटल तक ही चीनी का स्टॉक अपने पास रख सकेंगे। इसके साथ ही कारोबारियों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि मिलों से खरीदी गई चीनी को 30 दिनों के भीतर बाजार में बेच दिया जाए। निर्धारित अवधि से अधिक समय तक स्टॉक रोककर रखने की अनुमति नहीं होगी। सरकार का मानना है कि इससे बाजार में कृत्रिम कमी पैदा करने की कोशिशों पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।

    सरकार ने कारोबारियों के लिए पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से साप्ताहिक स्टॉक विवरण देना भी अनिवार्य किया है। सभी संबंधित व्यापारियों को प्रत्येक सप्ताह सरकारी पोर्टल पर उपलब्ध चीनी के स्टॉक की जानकारी दर्ज करनी होगी। इससे प्रशासन को बाजार की स्थिति पर लगातार नजर रखने और आवश्यक होने पर त्वरित कार्रवाई करने में सुविधा मिलेगी।

    यह निर्णय ऐसे समय लिया गया है जब त्योहारों के मौसम में चीनी की मांग बढ़ने की संभावना रहती है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मांग बढ़ने के बावजूद बाजार में कृत्रिम संकट उत्पन्न न हो और उपभोक्ताओं को आवश्यक वस्तु उचित मूल्य पर मिलती रहे। साथ ही, चीनी की आपूर्ति श्रृंखला भी सुचारु रूप से संचालित होती रहे।

    सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत लागू किया जाएगा। यदि कोई व्यापारी निर्धारित स्टॉक सीमा या समयसीमा का उल्लंघन करता पाया जाता है तो उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। खाद्य विभाग के अधिकारी जांच के दौरान गोदामों का निरीक्षण कर सकेंगे और नियमों के विरुद्ध पाए गए पुराने स्टॉक को जब्त भी किया जा सकता है।

    नियमों का उल्लंघन करने वाले कारोबारियों के खिलाफ व्यापारिक लाइसेंस रद्द करने, संबंधित सरकारी पोर्टल पर पंजीकरण समाप्त करने और अन्य कानूनी कार्रवाई का भी प्रावधान रखा गया है। गंभीर मामलों में दोष सिद्ध होने पर जुर्माना लगाने के साथ-साथ कारावास की सजा भी दी जा सकती है। सरकार का मानना है कि कड़े प्रावधानों से जमाखोरी की प्रवृत्ति पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि व्यापारियों को अब अपनी खरीद और बिक्री की योजना मांग के अनुरूप बनानी होगी। उन्हें उतनी ही मात्रा में चीनी का स्टॉक रखना होगा, जिसे स्थानीय बाजार में लगभग 20 से 25 दिनों के भीतर आसानी से बेचा जा सके। इससे गोदामों में अनावश्यक भंडारण कम होगा और बाजार में नियमित आपूर्ति बनी रहेगी।

    सरकार को उम्मीद है कि इस व्यवस्था से चीनी की उपलब्धता बेहतर होगी, कीमतों में अनावश्यक उतार-चढ़ाव पर नियंत्रण रहेगा और त्योहारी सीजन के दौरान उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। साथ ही, बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति व्यवस्था अधिक संतुलित बनेगी।

  • शिक्षा मंत्री की नियुक्ति पर संजय राउत का तंज, बोले- देवेंद्र फडणवीस इस जिम्मेदारी के लिए बेहतर विकल्प

    शिक्षा मंत्री की नियुक्ति पर संजय राउत का तंज, बोले- देवेंद्र फडणवीस इस जिम्मेदारी के लिए बेहतर विकल्प

    नई दिल्ली । शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने केंद्र सरकार में शिक्षा मंत्री की नियुक्ति को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने नए शिक्षा मंत्री के चयन पर सवाल उठाते हुए कहा कि शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय की जिम्मेदारी ऐसे व्यक्ति को दी जानी चाहिए, जिसका इस क्षेत्र से गहरा जुड़ाव और समझ हो। इसी दौरान उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का नाम लेते हुए तंज भरे अंदाज में उन्हें इस पद के लिए बेहतर विकल्प बताया।

    संजय राउत ने कहा कि उनके अनुसार देवेंद्र फडणवीस शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी बेहतर तरीके से निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि फडणवीस शिक्षित और प्रशासनिक अनुभव रखने वाले नेता हैं तथा उन्हें शिक्षा मंत्री बनाया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि वर्तमान व्यवस्था में जिस तरह मंत्रालयों का बंटवारा किया जा रहा है, उस पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।

    राउत ने नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी की नियुक्ति पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि शिक्षा क्षेत्र से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े अनुभव वाले व्यक्ति को यह जिम्मेदारी मिलनी चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि प्रह्लाद जोशी को उनके पहले के मंत्रालय में ही रहने दिया जाता तो अधिक उचित होता। हालांकि यह उनका राजनीतिक मत है और इसे लेकर सरकार की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।

    राज्यसभा सांसद ने यह भी दावा किया कि इससे पहले भी वह कई बार सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि देवेंद्र फडणवीस शिक्षा मंत्री की भूमिका निभाने में सक्षम हैं। उन्होंने अपने पुराने बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा मंत्रालय जैसे अहम विभाग में ऐसे व्यक्ति की आवश्यकता है, जो नीति निर्माण और प्रशासनिक निर्णयों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ा सके।

    केंद्र सरकार की शिक्षा व्यवस्था पर निशाना साधते हुए संजय राउत ने आरोप लगाया कि देश में शिक्षा क्षेत्र कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों में सरकारी स्कूलों की स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी लगातार सवाल उठ रहे हैं। उनके अनुसार समय-समय पर सामने आने वाले पेपर लीक जैसे मामलों ने विद्यार्थियों और अभिभावकों की चिंता बढ़ाई है।

    राउत ने अपने बयान में केंद्र सरकार की नीतियों की भी आलोचना की और कहा कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए केवल मंत्रालय में बदलाव पर्याप्त नहीं होगा। उन्होंने दावा किया कि सरकार को शिक्षा की गुणवत्ता, संस्थानों की मजबूती और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली जैसे मुद्दों पर अधिक गंभीरता से काम करना चाहिए। साथ ही उन्होंने कुछ राजनीतिक टिप्पणियां भी कीं, जिनमें उन्होंने सरकार के निर्णयों पर सवाल उठाए।

    राजनीतिक हलकों में संजय राउत का यह बयान चर्चा का विषय बन गया है। शिक्षा मंत्री की नियुक्ति और शिक्षा व्यवस्था को लेकर दिए गए उनके बयान को विपक्ष की ओर से केंद्र सरकार पर एक और राजनीतिक हमला माना जा रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

  • कॉकरोच प्रोटेस्ट से जुड़े कथित आपत्तिजनक पोस्ट पर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई, पीएम मोदी के खिलाफ अभद्र भाषा मामले में एफआईआर दर्ज

    कॉकरोच प्रोटेस्ट से जुड़े कथित आपत्तिजनक पोस्ट पर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई, पीएम मोदी के खिलाफ अभद्र भाषा मामले में एफआईआर दर्ज


    नई दिल्ली । कॉकरोच प्रोटेस्ट से जुड़े कथित आपत्तिजनक पोस्ट और वीडियो को लेकर दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित रूप से अभद्र और आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल के आरोप में पुलिस ने मामला दर्ज किया है। इस कार्रवाई के तहत कुछ न्यूज पोर्टलों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सक्रिय कई हैंडल को नोटिस जारी कर संबंधित जानकारी मांगी गई है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच कानून के प्रावधानों के तहत आगे बढ़ाई जा रही है।

    पुलिस के अनुसार दर्ज एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कथित आपत्तिजनक वीडियो और पोस्ट सबसे पहले किस माध्यम से प्रसारित किए गए, उन्हें किन-किन सोशल मीडिया खातों से साझा किया गया और उनका मूल स्रोत क्या था। इस संबंध में संबंधित व्यक्तियों और संस्थाओं से आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने के लिए नोटिस भी भेजे गए हैं।

    प्राथमिक जानकारी के अनुसार आरोप है कि कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) से जुड़े एक विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री के खिलाफ कथित रूप से अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया। इसके बाद उससे जुड़े वीडियो और अन्य सामग्री सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर प्रसारित हुई। जांच के दौरान पुलिस ने संबंधित प्लेटफॉर्म से ऐसे वीडियो हटाने और उनके प्रसार से जुड़ी तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि संबंधित सामग्री किन खातों के माध्यम से व्यापक स्तर पर साझा की गई।

    दिल्ली पुलिस की सोशल मीडिया मॉनिटरिंग टीम लगातार विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सामग्री की निगरानी कर रही है। अधिकारियों के अनुसार यदि किसी पोस्ट या वीडियो में कानून का उल्लंघन या आपत्तिजनक सामग्री पाए जाने की आशंका होती है, तो संबंधित सोशल मीडिया इंटरमीडियरी को नोटिस जारी कर आवश्यक कार्रवाई के लिए कहा जाता है। अधिकारियों का दावा है कि ऐसे कई पोस्ट और वीडियो पहले ही हटाए जा चुके हैं, जिनमें प्रधानमंत्री के खिलाफ कथित रूप से अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया था।

    इसी क्रम में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से जुड़े एक अन्य मामले का भी उल्लेख सामने आया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 23 जुलाई को साझा की गई एक सेल्फी वीडियो कुछ समय के लिए प्लेटफॉर्म से हटाए जाने के बाद केंद्र सरकार ने संबंधित कंपनी से स्पष्टीकरण मांगा था। कंपनी ने इसे तकनीकी त्रुटि बताते हुए खेद व्यक्त किया, लेकिन सरकार ने उपलब्ध कराए गए जवाब को पर्याप्त नहीं माना और विस्तृत जानकारी की मांग की।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित कंपनी के अधिकारी को भी तलब किया गया है। सरकार का कहना है कि वह इस पूरे घटनाक्रम से जुड़े तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं की विस्तृत जानकारी चाहती है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि संबंधित सामग्री हटाने की परिस्थितियां क्या थीं और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस का कहना है कि कॉकरोच प्रोटेस्ट से जुड़े कथित आपत्तिजनक पोस्ट और वीडियो की जांच तथ्यों एवं उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है। जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई नियमानुसार की जाएगी।

  • राम मंदिर दान मामले की जांच में बड़ा मोड़, SIT की रडार पर पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा, पूछताछ की तैयारी तेज

    राम मंदिर दान मामले की जांच में बड़ा मोड़, SIT की रडार पर पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा, पूछताछ की तैयारी तेज

    नई दिल्ली। अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं और दान राशि की कथित चोरी के मामले की जांच अब तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने मामले में साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया को गति देते हुए जांच का दायरा ट्रस्ट के पूर्व पदाधिकारियों तक बढ़ा दिया है। सूत्रों के अनुसार, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा से जल्द पूछताछ की जा सकती है। जांच एजेंसी उनके बयान के साथ बैंक रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों का मिलान कर पूरे मामले की तह तक पहुंचने की कोशिश करेगी।

    जांच से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, एसआईटी पहले ही मंदिर में चढ़ावे की गिनती से जुड़े बैंक कर्मचारियों के बयान दर्ज कर चुकी है। अब जांच टीम उन अधिकारियों और पदाधिकारियों से भी पूछताछ की तैयारी कर रही है, जिनकी भूमिका दान राशि के प्रबंधन और रिकॉर्ड से जुड़ी रही है। इसी क्रम में डॉ. अनिल मिश्रा को नोटिस भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पूछताछ के दौरान बैंक लेनदेन, वित्तीय दस्तावेजों और अब तक जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर उनसे कई महत्वपूर्ण सवाल किए जा सकते हैं।

    सूत्रों का कहना है कि आवश्यकता पड़ने पर ट्रस्ट से जुड़े अन्य पदाधिकारियों से भी पूछताछ की जा सकती है। इनमें गोपाल राव का नाम भी सामने आ रहा है। हालांकि जांच एजेंसियों की ओर से अभी किसी व्यक्ति की भूमिका को लेकर कोई आधिकारिक निष्कर्ष नहीं दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी तरह तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है तथा किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी पहलुओं की विस्तृत पड़ताल की जाएगी।

    इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 20 जुलाई को निष्पक्ष और व्यापक जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की निगरानी में नई एसआईटी गठित करने का निर्देश दिया था। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने आईजी किरण एस. की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया। टीम में डीआईजी सोमेन वर्मा और एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर को भी शामिल किया गया। सरकार का उद्देश्य जांच को पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ाना बताया गया है।

    हालांकि एसआईटी की औपचारिक बैठक अभी तक आयोजित नहीं हुई है, लेकिन पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच कार्य लगातार जारी है। साक्ष्य जुटाने, दस्तावेजों की जांच और संबंधित लोगों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया समानांतर रूप से चल रही है। इसी क्रम में 26 जुलाई को राज्य सरकार ने एसआईटी का आधिकारिक पुनर्गठन भी किया, ताकि जांच को और प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जा सके।

    दूसरी ओर, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने भी हाल ही में आयोजित विशेष बैठक में कई प्रशासनिक फैसले लिए हैं। ट्रस्ट ने फिलहाल पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति टालने का निर्णय लिया है। साथ ही पूर्णकालिक महासचिव और प्रवक्ता नियुक्त करने की मंजूरी दी गई है। मंदिर की धार्मिक परंपराओं, पूजा व्यवस्था और प्रशासनिक समन्वय को मजबूत करने के उद्देश्य से धार्मिक समिति के पुनर्गठन का भी फैसला लिया गया है।

    जांच एजेंसियों का कहना है कि मामले की जांच पूरी होने के बाद ही किसी भी प्रकार की जिम्मेदारी या कानूनी कार्रवाई को लेकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल एसआईटी सभी वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक दस्तावेजों और संबंधित व्यक्तियों के बयानों का मिलान कर पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हुई है। आने वाले दिनों में इस मामले में कई और अहम लोगों से पूछताछ होने की संभावना जताई जा रही है।

  • एयरफोर्स बाल भारती स्कूल पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, छात्रों से संवाद कर शिक्षा और नैतिक मूल्यों का दिया संदेश

    एयरफोर्स बाल भारती स्कूल पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, छात्रों से संवाद कर शिक्षा और नैतिक मूल्यों का दिया संदेश


    नई दिल्ली ।
    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बुधवार को नई दिल्ली के लोदी रोड स्थित एयरफोर्स बाल भारती स्कूल का दौरा किया। इस अवसर पर उन्होंने विद्यार्थियों के साथ संवाद कर उन्हें शिक्षा, अनुशासन, नैतिक मूल्यों और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी का संदेश दिया। स्कूल प्रशासन ने इस दौरे को संस्थान के इतिहास का एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक अवसर बताया। राष्ट्रपति की मौजूदगी से विद्यार्थियों और शिक्षकों में विशेष उत्साह देखने को मिला।

    स्कूल पहुंचने पर राष्ट्रपति का स्वागत भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह और एयर फोर्स फैमिलीज वेलफेयर एसोसिएशन की अध्यक्ष सरिता सिंह ने किया। विद्यालय परिसर में उनके स्वागत के लिए विशेष तैयारियां की गई थीं। विद्यार्थियों ने पारंपरिक तरीके से उनका अभिनंदन किया और पूरे कार्यक्रम के दौरान अनुशासन तथा उत्साह का परिचय दिया।

    दौरे की शुरुआत सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से हुई, जिसमें विद्यार्थियों ने भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति पर आधारित रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए। विभिन्न प्रस्तुतियों में छात्रों की प्रतिभा, आत्मविश्वास और रचनात्मक क्षमता की झलक दिखाई दी। कार्यक्रम में मौजूद अतिथियों ने विद्यार्थियों के प्रदर्शन की सराहना की और उनके प्रयासों की प्रशंसा की।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों से सीधे संवाद भी किया। उन्होंने छात्रों से उनकी पढ़ाई, भविष्य की योजनाओं, रुचियों और जीवन के लक्ष्यों के बारे में जानकारी ली। बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता केवल प्रतिभा से नहीं बल्कि निरंतर मेहनत, अनुशासन और सकारात्मक सोच से हासिल होती है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने सपनों को पूरा करने के लिए समर्पण और ईमानदारी के साथ प्रयास करने की प्रेरणा दी।

    उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल शैक्षणिक उपलब्धियां प्राप्त करना नहीं, बल्कि जिम्मेदार, संवेदनशील और जागरूक नागरिक तैयार करना भी है। राष्ट्रपति ने विद्यार्थियों से अच्छे नैतिक मूल्यों को अपनाने, समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने और देश के विकास में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। उनके अनुसार शिक्षा और चरित्र निर्माण साथ-साथ आगे बढ़ने चाहिए, तभी व्यक्ति और राष्ट्र दोनों मजबूत बनते हैं।

    अपने दौरे के दौरान राष्ट्रपति ने स्कूल परिसर में आयोजित कला प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। प्रदर्शनी में जूनियर और सीनियर वर्ग के विद्यार्थियों द्वारा तैयार की गई चित्रकृतियों और विभिन्न रचनात्मक कलाकृतियों को प्रदर्शित किया गया था। उन्होंने छात्रों की कल्पनाशीलता, कलात्मक अभिव्यक्ति और सृजनात्मक सोच की सराहना करते हुए कहा कि कला व्यक्तित्व विकास का महत्वपूर्ण माध्यम है और शिक्षा के साथ इसका संतुलित विकास आवश्यक है।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने स्कूल के आधुनिक बुनियादी ढांचे, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने की प्रतिबद्धता और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि ऐसे शिक्षण संस्थान भविष्य के जिम्मेदार नागरिक तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विद्यालय आगे भी शिक्षा, अनुशासन और उत्कृष्टता के क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल करेगा तथा विद्यार्थियों को देश और समाज की सेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा।