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  • केतन हत्याकांड में अब परिवार की भूमिका पर उठे सवाल पिता बोले चार्जशीट पढ़ने के बाद ही बताऊंगा पूरी बात

    केतन हत्याकांड में अब परिवार की भूमिका पर उठे सवाल पिता बोले चार्जशीट पढ़ने के बाद ही बताऊंगा पूरी बात


    नई दिल्ली। पुणे के रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या के मामले में अब उनकी मंगेतर सिया गोयल के परिवार के कुछ सदस्यों की कथित भूमिका को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। केतन के पिता विशाल अग्रवाल ने सिया के परिवार के कई लोगों के मामले में शामिल होने का शक जताया है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि उन्होंने अभी पुलिस की ओर से दाखिल आरोपपत्र को नहीं पढ़ा है इसलिए वह आरोपपत्र की पूरी सामग्री देखने के बाद ही इस संबंध में विस्तार से अपनी बात रखेंगे। पुणे ग्रामीण पुलिस ने इस मामले में सिया गोयल उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी और चेतन के दोस्त रितेश हांगे के खिलाफ पांच हजार से अधिक पन्नों का आरोपपत्र अदालत में दाखिल किया है।

    मामला 18 जून की उस घटना से जुड़ा है जिसमें केतन अग्रवाल की लोहागढ़ किले से नीचे धकेले जाने के बाद मौत हो गई थी। पुलिस ने जांच के दौरान सिया गोयल चेतन चौधरी और रितेश हांगे को गिरफ्तार किया था। अब आरोपपत्र दाखिल होने के बाद केतन के परिवार की ओर से मामले में कई सवाल उठाए जा रहे हैं। केतन के पिता विशाल अग्रवाल ने कहा है कि उन्हें सिया के परिवार के कुछ सदस्यों की कथित भूमिका पर भी संदेह है। उनके मुताबिक सिया के पिता मां भाई चाचा और चाची की भूमिका को लेकर उनके मन में सवाल हैं। हालांकि उन्होंने इन बातों को फिलहाल आरोपपत्र की जानकारी के आधार पर अंतिम रूप से नहीं कहा है।

    विशाल अग्रवाल ने आरोपपत्र की प्रति हासिल करने के लिए अदालत का रुख किया है। उनका कहना है कि जब तक वह पांच हजार से अधिक पन्नों वाले इस दस्तावेज को पढ़ नहीं लेते तब तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। वह आरोपपत्र में पुलिस ने किन लोगों के खिलाफ क्या तथ्य और सबूत रखे हैं यह जानने के बाद ही आगे टिप्पणी करना चाहते हैं। उन्होंने मामले की जांच को सही दिशा में आगे बढ़ने की बात भी कही है लेकिन परिवार के अन्य सदस्यों की कथित भूमिका को लेकर उनका शक अभी बना हुआ है।

    इस मामले में सिया गोयल और चेतन चौधरी की कथित गुप्त शादी की खबर को लेकर भी केतन के पिता ने सवाल उठाया है। उनका कहना है कि यदि दोनों की शादी पहले ही हो चुकी थी तो फिर सिया के परिवार की ओर से उनके बेटे के साथ उसकी शादी कराने की कोशिश क्यों की गई। इसी सवाल के आधार पर वह मामले की परिस्थितियों को लेकर और जानकारी सामने आने की उम्मीद कर रहे हैं। हालांकि कथित गुप्त शादी से जुड़े दावे और परिवार के सदस्यों की कथित भूमिका को लेकर अंतिम स्थिति आरोपपत्र और न्यायिक प्रक्रिया से ही स्पष्ट होगी।

    केतन के पिता ने इससे पहले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सामने मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक अदालत में कराने की मांग रखी थी। उन्होंने वरिष्ठ अधिवक्ता उज्ज्वल निकम को इस मामले में विशेष लोक अभियोजक नियुक्त करने की मांग भी की है। उनका कहना है कि इन मांगों पर उन्हें अभी तक कोई ठोस जानकारी नहीं मिली है और वह सरकार से जरूरी अधिसूचना जारी करने का अनुरोध दोहरा रहे हैं।

    विशाल अग्रवाल ने अपने बेटे की हत्या के लिए जिम्मेदार लोगों को मौत की सजा दिए जाने की मांग भी दोहराई है। फिलहाल मामले में तीन आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल हो चुका है और आगे की न्यायिक प्रक्रिया में आरोपपत्र में दर्ज तथ्यों और सबूतों की जांच होगी। ऐसे में सिया के परिवार के अन्य सदस्यों की भूमिका को लेकर लगाए गए संदेह की वास्तविक स्थिति भी अदालत में सामने आने वाले तथ्यों से ही स्पष्ट होगी।

  • अजनार नदी के बाद यमुना की सफाई में जुटे 'बिट्टू तबाही', साढ़े चार घंटे में 585 किलो कचरा निकाला

    अजनार नदी के बाद यमुना की सफाई में जुटे 'बिट्टू तबाही', साढ़े चार घंटे में 585 किलो कचरा निकाला


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश की अजनार नदी से सफाई अभियान की शुरुआत कर चर्चा में आए सुरेंद्र सिंह चौधरी उर्फ ‘बिट्टू तबाही’ अब दिल्ली की यमुना नदी के किनारे सफाई अभियान चला रहे हैं। उन्होंने दिल्ली में अपने पहले सफाई अभियान के दौरान स्थानीय लोगों और वॉलंटियर्स के साथ मिलकर करीब साढ़े चार घंटे में 585 किलो कचरा हटाने का दावा किया है। इस अभियान का वीडियो उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा किया है, जो अब चर्चा में है।

    यमुना किनारे चलाए गए अभियान के दौरान फूल-मालाओं, पूजा सामग्री, प्लास्टिक और अन्य तरह का कचरा हटाया गया। बिट्टू के मुताबिक, सफाई अभियान में स्थानीय लोगों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और कचरे को एकत्र करने में टीम की मदद की।

    यमुना किनारे जमा था कचरे का ढेर

    दिल्ली पहुंचने के बाद बिट्टू तबाही ने यमुना किनारे की स्थिति को अपने वीडियो में दिखाया। उनके अनुसार, घाट और आसपास के इलाके में बड़ी मात्रा में फूल-मालाएं, पूजा सामग्री, प्लास्टिक तथा अन्य कचरा जमा था।

    धार्मिक आयोजनों और रोजमर्रा की गतिविधियों के बाद पूजा सामग्री और अन्य सामान नदी के किनारे या आसपास छोड़े जाने से वहां कचरा जमा होने की समस्या सामने आती रही है। बिट्टू ने इसी स्थान से अपनी सफाई ड्राइव शुरू की। अभियान के दौरान स्थानीय लोग और वॉलंटियर्स भी उनके साथ जुड़ते गए।

    साढ़े चार घंटे में 585 किलो कचरा हटाने का दावा

    बिट्टू तबाही ने सोशल मीडिया पर साझा वीडियो में बताया कि दिल्ली में यह उनकी पहली क्लीनअप ड्राइव थी। उनके अनुसार, करीब साढ़े चार घंटे चले अभियान में टीम ने कुल 585 किलो कचरा हटाया।

    उन्होंने बताया कि यह अभियान वर्ल्ड क्लीनअप डे से जुड़ी गतिविधियों के तहत आयोजित किया गया। तीन दिन चलने वाली इस मुहिम में अलग-अलग स्थानों पर सफाई अभियान के साथ लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने की योजना बनाई गई थी। बिट्टू ने सफाई अभियान में सहयोग करने वाले स्थानीय लोगों और वॉलंटियर्स का आभार भी जताया।

    सफाई में स्थानीय लोगों ने भी बढ़ाया हाथ

    अभियान के दौरान आसपास रहने वाले कुछ लोग भी सफाई टीम के साथ जुड़ गए। किसी ने कचरा उठाने में मदद की तो किसी ने उसे एक स्थान पर एकत्र करने का काम किया।

    बिट्टू का कहना है कि जब स्थानीय लोग खुद सफाई अभियान का हिस्सा बनते हैं तो उसका असर केवल एक दिन की सफाई तक सीमित नहीं रहता। इससे दूसरे लोगों को भी सार्वजनिक स्थानों को साफ रखने के प्रति जागरूक होने का संदेश मिलता है।

    अजनार नदी से मिली पहचान

    सुरेंद्र सिंह चौधरी को ‘बिट्टू तबाही’ नाम से पहचान मध्य प्रदेश की अजनार नदी की सफाई के दौरान मिली। उन्होंने नदी किनारे जमा गंदगी और कचरे को खुद हटाते हुए वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किए थे। धीरे-धीरे उनके सफाई अभियान ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया।

    उनके अभियान की चर्चा द ओशन क्लीनअप के संस्थापक और सीईओ बोयन स्लैट तक पहुंचने की बात भी सामने आई थी। इसके बाद उन्हें संगठन के साथ काम करने का न्योता मिलने की जानकारी सामने आई।

    अब दूसरे राज्यों तक अभियान ले जाने की तैयारी

    अजनार नदी के बाद बिट्टू तबाही अपनी सफाई मुहिम को दूसरे राज्यों तक ले जाने की तैयारी में हैं। उनका कहना है कि अभियान का उद्देश्य केवल कचरा हटाना नहीं, बल्कि लोगों को नदियों और सार्वजनिक स्थानों को स्वच्छ रखने के लिए जागरूक करना भी है।

    दिल्ली में अभियान शुरू करने के बाद उन्होंने अलग-अलग राज्यों में जाकर लोगों को मुहिम से जोड़ने की बात कही है। उनका मानना है कि स्थानीय लोग जब सफाई अभियान में सीधे भागीदारी करते हैं तो उसका प्रभाव अधिक व्यापक हो सकता है।

    गुरुग्राम के खेड़की दौला में अगला अभियान

    दिल्ली के बाद बिट्टू तबाही ने अपने अगले पड़ाव की जानकारी भी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दी है। उन्होंने बताया कि अब उनकी सफाई मुहिम गुरुग्राम पहुंचेगी। उन्होंने गुरुग्राम के खेड़की दौला का जिक्र करते हुए लोगों से अगली सफाई ड्राइव में शामिल होने की अपील की है।

    सोशल मीडिया पर लोगों ने किया समर्थन

    यमुना किनारे सफाई अभियान का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने बिट्टू तबाही के प्रयास की सराहना की। कई लोगों ने उन्हें अभियान जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया। कुछ यूजर्स ने सकारात्मक टिप्पणियों के साथ दिल और फायर इमोजी भी साझा किए।

    हालांकि, नदी और सार्वजनिक स्थानों की सफाई के साथ वहां दोबारा कचरा न पहुंचे, यह सुनिश्चित करना भी चुनौती है। ऐसे अभियानों के साथ लोगों की भागीदारी और व्यवहार में बदलाव को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • जम्मू-सियालदह एक्सप्रेस पर पथराव, इंजन का शीशा टूटा; वंदेभारत को रास्ते में रोका, जांच में जुटीं एजेंसियां

    जम्मू-सियालदह एक्सप्रेस पर पथराव, इंजन का शीशा टूटा; वंदेभारत को रास्ते में रोका, जांच में जुटीं एजेंसियां


    सांबा।
    जम्मू-कश्मीर के सांबा के पास सोमवार देर रात जम्मू-सियालदह एक्सप्रेस पर पथराव की घटना सामने आई। करीब 9:30 बजे हुई इस घटना में ट्रेन के इंजन का सामने का शीशा क्षतिग्रस्त हो गया। घटना के बाद सुरक्षा बलों और पुलिस ने मौके तथा आसपास के इलाकों में जांच शुरू कर दी।

    घटना की सूचना मिलने के बाद डीजीपी नलिन प्रभात भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने मामले की जांच किए जाने की जानकारी दी। पुलिस और सुरक्षा बलों की टीमें रेलवे ट्रैक के साथ आसपास के क्षेत्रों में भी जांच कर रही हैं।

    चालक ने पहले फायरिंग की दी थी जानकारी

    सांबा के एसपी अनुज कुमार ने बताया कि ट्रेन के इंजन का शीशा क्षतिग्रस्त हुआ है। उनके अनुसार, ट्रेन चालक ने शुरुआत में फायरिंग की बात कही थी, लेकिन रात करीब 1:30 बजे तक की जांच में मामला पथराव का सामने आया।

    उन्होंने कहा कि पुलिस के साथ सुरक्षा बल भी रेलवे ट्रैक की जांच कर रहे हैं और आसपास के इलाकों पर नजर रखी जा रही है।

    वंदेभारत को रास्ते में रोका गया

    जम्मू-सियालदह एक्सप्रेस पर पथराव की घटना के बाद सुरक्षा कारणों से दिल्ली-कटरा वंदेभारत एक्सप्रेस को भी कठुआ और सांबा के बीच रोक दिया गया। इसके चलते ट्रेन करीब तीन घंटे की देरी से जम्मू पहुंची।

    घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियां पथराव करने वालों का पता लगाने के लिए घटनास्थल और आसपास के इलाकों की जांच कर रही हैं।

    पहले भी आतंकी वारदात का गवाह रहा है यह रेल मार्ग

    सांबा-जम्मू रेल मार्ग का सुरक्षा के लिहाज से पुराना संवेदनशील इतिहास रहा है। 10 फरवरी 2000 को इसी रेल मार्ग पर जम्मू तवी-सियालदह एक्सप्रेस के सात डिब्बे आईईडी विस्फोट में पटरी से उतर गए थे। इस आतंकी वारदात में पांच यात्रियों की मौत हुई थी।

    मौजूदा घटना के बाद रेलवे ट्रैक और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एजेंसियां सतर्क हैं और पूरे मामले की जांच की जा रही है।

  • मौसम ने फिर ली करवट… बना दमदार वेटर सिस्टम… कई राज्यों में होगी झमाझम बारिश

    मौसम ने फिर ली करवट… बना दमदार वेटर सिस्टम… कई राज्यों में होगी झमाझम बारिश


    नई दिल्ली।
    देश के कई हिस्सों में मौसम फिर करवट (Change Weather) लेने वाला है. बंगाल की खाड़ी (Bay of Bengal) में बना सिस्टम अब मजबूत हो रहा है और इसका असर पूर्वी और दक्षिणी राज्यों में दिखाई देने लगा है. इस वेदर सिस्टम (Weather system) का ओडिशा (Odisha) में सबसे ज्यादा असर होने का अनुमान है, जहां अगले दो दिनों के लिए बेहद भारी बारिश का अलर्ट है. दूसरी ओर दिल्ली-NCR में मंगलवार को मौसम फिलहाल साफ रहने वाला है, लेकिन सप्ताह के दूसरे हिस्से में बारिश और गरज-चमक का दौर बढ़ सकता है. यूपी के अलग-अलग इलाकों में भी मौसम के इस बदलाव का असर दिखेगा।

    बंगाल की खाड़ी के पश्चिम-मध्य और उससे सटे उत्तर-पश्चिम हिस्से में बना कम दबाव का क्षेत्र अब डिप्रेशन में बदल चुका है. इसके अगले 24 घंटे में और मजबूत होकर डीप डिप्रेशन में बदलने की संभावना है. इसके बाद यह पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ते हुए 23 सितंबर की रात से 24 सितंबर की शुरुआती घंटों के बीच उत्तरी आंध्र प्रदेश-दक्षिणी ओडिशा तट को पार कर सकता है. इस वेदर सिस्टम का सबसे ज्यादा असर ओडिशा में देखने को मिल सकता है।


    दिल्ली-NCR में आज बारिश से राहत

    दिल्ली-NCR में मंगलवार यानी 22 सितंबर को फिलहाल भारी बारिश का कोई अलर्ट नहीं है. आईएमडी के 22 सितंबर के अपडेट में दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ के लिए आज से 24 सितंबर तक कोई चेतावनी नहीं है. 25 से 27 सितंबर के लिए गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना जरूर जताई गई है. यानी मंगलवार को दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में बड़े पैमाने पर बारिश की उम्मीद नहीं है. हालांकि सप्ताह के आखिर में मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है।


    यूपी में कब बदलेगा मौसम?

    पूर्वी उत्तर प्रदेश में 24 सितंबर से मौसम की गतिविधियां बढ़ सकती हैं. मौसम विभाग के मुताबिक 24 सितंबर को गरज-चमक और तेज हवाओं की स्थिति बन सकती है, जबकि 25 सितंबर से भारी बारिश का दौर शुरू होने की संभावना है. 26 से 28 सितंबर तक भी पूर्वी यूपी में भारी बारिश और गरज-चमक का अलर्ट है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 25 सितंबर से मौसम में बदलाव शुरू हो सकता है. यहां 25 सितंबर को गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना है, जबकि 26 से 28 सितंबर के बीच भारी बारिश का अनुमान है।


    पहाड़ों में होगी सामान्य बारिश

    उत्तराखंड की राजधानी देहरादून समेत चमोली, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, उत्तरकाशी, नैनीताल समेत कई जिलों में 22 से 25 सितंबर के दौरान बाारिश होने की संभावना है. मौसम विभाग के मुताबिक 25-26 सितंबर के दौरान बारिश का दायरा बढ़कर कई स्थानों तक पहुंच सकता है. इस दौरान गरज-चमक के साथ कई जगहों पर बहुत भारी बारिश हो सकती है. वहीं, हिमाचल प्रदेश में आज कुछ जगहों पर हल्की बारिश हो सकती है, जबकि आने वाले दिनों में मौसम सामान्य ही रहेगा।


    ओडिशा में सबसे ज्यादा असर
    मौसम विभाग ने 23 और 24 सितंबर को ओडिशा के कई हिस्सों में बेहद भारी बारिश की चेतावनी दी है. 25 सितंबर को भी भारी से बहुत भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है, जबकि 26 सितंबर को कुछ इलाकों में भारी बारिश की संभावना है. 23 सितंबर को कंधमाल, गजपति, गंजाम और पुरी में 20 सेंटीमीटर से ज्यादा बेहद भारी बारिश का अलर्ट है. इसके लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है. 24 सितंबर को कालाहांडी, कंधमाल और रायगड़ा में भी बेहद भारी बारिश का रेड अलर्ट है. मौसम का असर अगले कुछ दिनों तक बना रह सकता है. भारी बारिश के साथ कुछ इलाकों में जलभराव और दूसरी परेशानियां बढ़ सकती हैं।


    तेज हवाओं से समुद्र में उठेंगी ल​हरें

    बंगाल की खाड़ी में बने वेदर सिस्टम के मजबूत होने का असर समुद्र पर भी दिखेगा. दक्षिण ओडिशा और उत्तरी आंध्र प्रदेश के तट के आसपास 23 से 24 सितंबर के बीच तेज हवाएं चल सकती हैं. पश्चिम-मध्य और उससे सटे उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में 23 सितंबर को हवा की रफ्तार करीब 75 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है. ऐसे में समुद्र में जाने वाले लोगों और मछुआरों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।


    केरल समेत इन राज्यों में भी बारिश

    केरल में भी इस सप्ताह मौसम नम रहने का अनुमान है. 21 से 25 सितंबर के बीच कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है. पथनमथिट्टा, कोट्टायम, अलप्पुझा, एर्नाकुलम, इडुक्की और त्रिशूर में कुछ जगहों पर भारी बारिश हो सकती है. जिन इलाकों में जलभराव या भूस्खलन का खतरा रहता है, वहां लोगों को सतर्क रहने और स्थानीय प्रशासन की सलाह मानने को कहा गया है।


    बंगाल से पूर्वोत्तरी राज्यों तक बारिश

    असम और मेघालय में 22 सितंबर को गरज-चमक और बिजली गिरने की संभावना है. 23 से 25 सितंबर के बीच यहां भारी बारिश हो सकती है. उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भी 22 सितंबर को गरज-चमक, बिजली और तेज हवाओं का असर दिख सकता है. 23 और 24 सितंबर को भारी बारिश और 25 सितंबर को बहुत भारी बारिश की संभावना है।

  • सिम का दुरुपयोग अब पड़ेगा भारी…. हो सकती है 3 साल की जेल और 50 लाख तक का जुर्माना

    सिम का दुरुपयोग अब पड़ेगा भारी…. हो सकती है 3 साल की जेल और 50 लाख तक का जुर्माना


    नई दिल्ली।
    दूरसंचार विभाग (Telecommunications Department) ने सोमवार को फर्जी तरीके से सिम (Sim) जारी करने, दूरसंचार पहचान संख्या के गलत इस्तेमाल और आईएमईआई नंबर (IMEI number) से छेड़छाड़ को लेकर सावधान किया है। विभाग ने कहा कि ऐसे मामलों में तीन साल तक की जेल और 50 लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है।

    मध्य प्रदेश लाइसेंस सेवा क्षेत्र (एलएसए) में फर्जी तरीके से सिम जारी किए जाने से जुड़ा मामला सामने आने के बाद यह सलाह जारी की गई। जांच में पता चला कि छत्तीसगढ़ में एक प्वाइंट ऑफ सेल एजेंट ने नागरिकों के दस्तावेजों का उनकी जानकारी के बिना इस्तेमाल कर 25 मोबाइल कनेक्शन जारी कर दिए। इसके बाद दूरसंचार विभाग, संबंधित कंपनियों ने पीओएस एजेंट को ब्लैकलिस्ट कर दिया। साथ ही भविष्य में नई सिम जारी करने पर रोक लगा दी।

    बताया जा रहा है कि पीओएस द्वारा जारी 25 मोबाइल नंबरों की दूरसंचार विभाग के डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म पर जांच की गई। संदिग्ध नंबरों का दोबारा सत्यापन कराया गया और जो नंबर सत्यापन में विफल रहे, उन्हें बंद कर दिया गया।


    आईएमईआई नंबर से छेड़छाड़ भी अपराध

    विभाग ने कहा, मोबाइल फोन के अंतरराष्ट्रीय मोबाइल उपकरण पहचान नंबर (आईएमईआई) से छेड़छाड़ या बदला हुआ आईएमईआई इस्तेमाल करना दंडनीय अपराध है। दूरसंचार अधिनियम, 2023 के तहत ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है।


    गलत इस्तेमाल पर ग्राहक भी होगा जिम्मेदार
    दूरसंचार विभाग ने कहा कि अपने नाम पर जारी सिम दूसरे को देना या बेचना भारी पड़ सकता है। अगर उस सिम का इस्तेमाल गैरकानूनी गतिविधि में होता है, तो मूल ग्राहक की भी कानूनी जिम्मेदारी होगी। ऐसे में संचार साथी पोर्टल सिम की जांच करते रहे।

    दूरसंचार विभाग ने लोगों को आगाह किया है कि वे अपने नाम से जारी किए गए सिम कार्ड साझा न करें या स्थानांतरित न करें क्योंकि सिम का दुरुपयोग पाए जाने पर कानूनी दायित्व मूल ग्राहक पर आ सकता है। लोगों को सलाह दी जाती है कि वे ‘संचारसाथी’ पोर्टल और मोबाइल ऐप के माध्यम से नियमित रूप से अपने मोबाइल कनेक्शन की जांच करें।

    विभाग ने कहा है कि लोगों को ऐसे मॉडेम, मॉड्यूल, सिम बॉक्स या अन्य ऐसे उपकरण जिनका आईएमईआई नंबर बदला जा सकता है या जिनमें छेड़छाड़ की जा सकती है, उनका उपयोग न करें या उन्हें असेंबल न करायें। लोगाें को जाली दस्तावेजों, धोखाधड़ी और जालसाजी से सिम कार्ड प्राप्त करने,अपने नाम से प्राप्त सिम कार्डों को ऐसे लोगों को हस्तांतरित करने, बेचने या सौंपने से बचने की सलाह दी गयी है जो उनका दुरुपयोग कर सकते हैं।

    विभाग ने याद दिलाया है कि कॉलिंग लाइन आइडेंटिटी या दूरसंचार पहचान से जुड़ी अन्य चीजों को बदलने के लिए मोबाइल एप्लिकेशन, वेबसाइट या किसी अन्य माध्यम का उपयोग करना , अपने नाम से सिम कार्ड प्राप्त करना और बाद में साइबर धोखाधड़ी या किसी अन्य गैरकानूनी गतिविधि में दुरुपयोग के लिए सिम कार्ड को उधार देना, किराए पर देना या उसका दुरुपयोग करना भी कानूनी दृष्टि से गलत है। और इससे मूल ग्राहक के लिए कानूनी दायित्व उत्पन्न हो सकता है।

  • कर्नाटक में बंदर के अचानक हमले से 91 वर्षीय महिला की मौत, CCTV में कैद हुआ दर्दनाक घटनाक्रम

    कर्नाटक में बंदर के अचानक हमले से 91 वर्षीय महिला की मौत, CCTV में कैद हुआ दर्दनाक घटनाक्रम

    कर्नाटक के कोप्पल जिले में बंदर के अचानक हमले से 91 वर्षीय बुजुर्ग महिला की मौत हो गई। घटना उस समय हुई, जब नजमुन्निसा बेगम अपने घर के बाहर परिसर में टहल रही थीं। इसी दौरान एक बंदर अचानक दीवार फांदकर घर के परिसर में दाखिल हुआ और तेजी से उनकी ओर बढ़ते हुए उन्हें धक्का दे दिया।

    अचानक लगे धक्के से नजमुन्निसा बेगम अपना संतुलन नहीं संभाल सकीं और कंक्रीट के फर्श पर गिर पड़ीं। गिरने के दौरान उनके सिर में गंभीर चोट लगी। घटना के बाद उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।

    बताया गया कि घटना शनिवार शाम की है। नजमुन्निसा बेगम रोज की तरह अपने घर के बाहर आंगन में टहल रही थीं। इसी दौरान बाहर से कुछ आवाज सुनाई दी। आवाज सुनकर वह घर से बाहर आईं। तभी अचानक बंदर दीवार के ऊपर से छलांग लगाकर परिसर में पहुंच गया।

    बंदर ने परिसर में आते ही महिला की ओर छलांग लगाई और उन्हें जोरदार धक्का दे दिया। हमले से महिला जमीन पर गिर गईं। उनकी उम्र अधिक होने के कारण गिरने से उन्हें गंभीर चोट लगी। सिर में चोट लगने के बाद उनकी हालत बिगड़ गई और उन्हें उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया।

    घटना का पूरा दृश्य घर के बाहर लगे CCTV कैमरे में रिकॉर्ड हो गया। फुटेज में बंदर को महिला की ओर तेजी से आते और उन्हें धक्का देते हुए देखा जा सकता है। महिला के गिरने के बाद घर के अंदर से एक अन्य महिला बाहर आती है।

    इसके बाद बंदर उस महिला की ओर भी बढ़ता है और उस पर हमला करने की कोशिश करता दिखाई देता है। इसी दौरान आसपास के लोग मौके पर पहुंच जाते हैं। लोगों को आता देख बंदर वहां से भाग जाता है। इसके बाद घायल नजमुन्निसा बेगम को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनकी मौत हो गई।

    नजमुन्निसा बेगम क्षेत्र के प्रसिद्ध लेखक एम.एस. सवदत्ती की पत्नी थीं। बताया गया कि वह नियमित रूप से अपने घर के परिसर में टहलती थीं। इसी दौरान अचानक बंदर के पहुंचने से यह पूरी घटना कुछ ही क्षणों में घट गई।

    इस घटना ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। सामान्य रूप से घर के बाहर टहल रही बुजुर्ग महिला को अचानक बंदर ने धक्का दिया और वह गंभीर रूप से घायल हो गईं। CCTV फुटेज में घटना का क्रम रिकॉर्ड होने से हमले के दौरान हुई गतिविधियां सामने आई हैं।

    91 वर्षीय महिला की मौत के बाद इलाके में भी इस घटना को लेकर चर्चा है। घर के परिसर में अचानक हुए इस हमले ने एक सामान्य शाम को दर्दनाक हादसे में बदल दिया। नजमुन्निसा बेगम की मौत से परिवार में शोक का माहौल है।

  • राम मंदिर में चंदा चोरी का बड़ा खुलासा, CCTV में 105 घटनाएं आईं सामने; 25 सितंबर तक चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी

    राम मंदिर में चंदा चोरी का बड़ा खुलासा, CCTV में 105 घटनाएं आईं सामने; 25 सितंबर तक चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी

    नई दिल्ली । अयोध्या स्थित राम मंदिर में चंदा चोरी के मामले की जांच अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान मामले की जांच से जुड़ी कई अहम जानकारियां सामने रखी गईं। जांच के दौरान मंदिर परिसर में लगे CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग खंगाली गई, जिसमें चंदा चोरी की 105 घटनाओं का पता चला है। इन घटनाओं से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई गई।

    जांच में CCTV फुटेज के अलावा गवाहों के बयान और दूसरे उपलब्ध साक्ष्यों को भी शामिल किया गया। रिकॉर्डिंग का बारीकी से विश्लेषण कर घटनाओं की परिस्थितियों को समझने और संबंधित लोगों की पहचान करने की कोशिश की गई। जांच में सामने आए अलग-अलग साक्ष्यों को आपस में मिलाकर मामले की कड़ियों को जोड़ने का काम किया गया है।

    अदालत को यह भी जानकारी दी गई कि मंदिर में कीमती सामान से संबंधित रसीदें सॉफ्टवेयर के जरिए तैयार की जाती हैं। इन रसीदों को सुरक्षित रखने के लिए SBI लॉकर में रखा जाता है। जांच के दौरान रसीदों की व्यवस्था, रिकॉर्ड और अन्य जरूरी सामग्री को भी देखा गया। CCTV में सामने आई 105 घटनाएं अब मामले की जांच का अहम हिस्सा बन गई हैं।

    जांच की मौजूदा स्थिति के मुताबिक पड़ताल लगभग पूरी हो चुकी है। 25 सितंबर तक चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी की जा रही है। चार्जशीट दाखिल होने के बाद संबंधित मजिस्ट्रेट कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई करेंगे। इस समयसीमा को देखते हुए मामले की जांच और आरोप पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो गई है।

    सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से जांच की स्टेटस रिपोर्ट उपलब्ध कराने की मांग भी की गई। हालांकि अदालत ने रिपोर्ट देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि फिलहाल मामले को सेशन जज से अपने पास लेने की आवश्यकता नहीं है। अगर आगे किसी अतिरिक्त जांच की जरूरत महसूस होती है, तो उस संबंध में उचित आदेश जारी किया जा सकता है।

    चंदा चोरी के मामले के बाद राम मंदिर ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है। ट्रस्ट में CEO व्यवस्था लागू की गई है और पूर्व सैन्य अधिकारी जितेंद्र मिश्रा को मुख्य कार्यकारी अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है। नई व्यवस्था के तहत प्रशासनिक कामकाज को नए तरीके से संचालित करने की तैयारी की गई है।

    मामले में पहली गिरफ्तारी के बाद 90 दिन की अवधि पूरी होने की तारीख भी अहम है। बताया गया कि 25 सितंबर को यह अवधि पूरी हो रही है। यदि निर्धारित समय तक चार्जशीट दाखिल नहीं होती है तो गिरफ्तार आरोपियों को कानून के तहत स्वत: जमानत मिलने की स्थिति बन सकती है। इसी वजह से समय पर आरोप पत्र दाखिल करना जांच के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    अब 25 सितंबर तक चार्जशीट दाखिल होने और उसके बाद होने वाली कानूनी कार्रवाई पर नजर रहेगी। CCTV में सामने आई 105 घटनाओं, गवाहों के बयानों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

  • विकास दिव्यकीर्ति की पत्नी तरुणा वर्मा ने 80 के दशक की यादें कीं साझा, मोबाइल और सोशल मीडिया से दूर जिंदगी को बताया खास

    विकास दिव्यकीर्ति की पत्नी तरुणा वर्मा ने 80 के दशक की यादें कीं साझा, मोबाइल और सोशल मीडिया से दूर जिंदगी को बताया खास


    नई दिल्ली । सोशल मीडिया पर इन दिनों 1980 के दशक की तस्वीरों का ट्रेंड देखने को मिल रहा है। लोग अपनी तस्वीरों को उस दौर की फैशन और फोटोग्राफी शैली में बदलकर पुरानी यादों को ताजा कर रहे हैं। इसी बीच शिक्षक विकास दिव्यकीर्ति की पत्नी और दृष्टि आईएएस की डायरेक्टर तरुणा वर्मा ने भी 80 के दशक से जुड़ी यादों को एक तस्वीर के जरिए साझा किया है।

    तरुणा वर्मा ने अपने पति विकास दिव्यकीर्ति की तस्वीर शेयर करते हुए कहा कि यह तस्वीर वास्तव में 80 के दशक की नहीं, बल्कि वर्तमान समय की है। इसके साथ उन्होंने उस दौर को याद किया, जब लोगों की जिंदगी मोबाइल फोन, इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसी सुविधाओं से पूरी तरह दूर थी।

    उन्होंने अपने पोस्ट में उस समय के जीवन को याद करते हुए लिखा कि आज यह सोचकर हैरानी होती है कि बिना मोबाइल और सोशल मीडिया के लोग किस तरह अपनी जिंदगी बिताते थे। उस दौर में फोन पर लगातार समय बिताने की आदत नहीं थी और लोगों के पास एक-दूसरे के साथ समय बिताने के लिए ज्यादा मौके होते थे।

    तरुणा वर्मा ने बचपन के दिनों को याद करते हुए गर्मियों की दोपहर का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि घरवालों के मना करने के बावजूद बच्चे छिपकर अपनी सहेलियों के साथ खेलने निकल जाते थे। तेज धूप के बावजूद खेल-कूद का उत्साह कम नहीं होता था और बच्चों का ध्यान अपनी त्वचा या धूप से होने वाले बदलावों पर नहीं रहता था।

    उन्होंने उस समय और आज के दौर के बीच अंतर को अपने अंदाज में सामने रखा। उनके मुताबिक, पहले चेहरे पर दाग-धब्बे होने जैसी बातों को लेकर इतनी चिंता नहीं होती थी। लोग अपनी रोजमर्रा की जिंदगी और दोस्तों के साथ बिताए पलों में ज्यादा सहज रहते थे।

    तरुणा वर्मा ने बचपन के खेलों का जिक्र करते हुए कबड्डी और रुमाल चोर जैसी गतिविधियों को याद किया। इन खेलों में दोस्तों के बीच जीतने की होड़ होती थी, लेकिन उस प्रतिस्पर्धा का आधार सोशल मीडिया पर मिलने वाले लाइक्स नहीं थे। उन्होंने पुराने समय की दोस्ती और आज की सोशल मीडिया वाली दोस्ती के बीच के अंतर को भी अपने पोस्ट में रेखांकित किया।

    उन्होंने आज के दौर में सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाले दिखावे की ओर भी इशारा किया। उनकी बातों में यह भाव नजर आया कि अब कई बार लोगों के बीच तुलना और लाइक्स की प्रतिस्पर्धा रिश्तों और दोस्ती के सहजपन को प्रभावित करती है।

    उन्होंने बिजली चले जाने के एक सामान्य अनुभव को भी आज के मोबाइल-केंद्रित जीवन से जोड़कर बताया। पहले बिजली जाने पर लोग एक-दूसरे के साथ बैठते थे, जबकि अब कुछ समय के लिए फोन और इंटरनेट उपलब्ध न होने पर बेचैनी महसूस होने लगती है।

    तरुणा वर्मा और विकास दिव्यकीर्ति की शादी 1998 में हुई थी। उनका एक बेटा है, जिसका नाम सात्विक है। तरुणा वर्मा वर्तमान में दृष्टि आईएएस की डायरेक्टर हैं। वह दृष्टि वेलफेयर फाउंडेशन से भी जुड़ी हुई हैं और संस्थान में अध्यापन का अनुभव रखती हैं।

  • सोनिया गांधी के वोटर लिस्ट मामले में कोर्ट का बड़ा आदेश, पुराना फैसला रद्द; 29 सितंबर को फिर होगी सुनवाई

    सोनिया गांधी के वोटर लिस्ट मामले में कोर्ट का बड़ा आदेश, पुराना फैसला रद्द; 29 सितंबर को फिर होगी सुनवाई

    नई दिल्ली । कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी से जुड़े पुराने मतदाता सूची मामले में दिल्ली की विशेष अदालत ने मजिस्ट्रेट कोर्ट के पहले के आदेश को रद्द कर दिया है। इस आदेश में पुलिस जांच और एफआईआर दर्ज करने की मांग को खारिज किया गया था। अब मामले को संबंधित एसीजेएम अदालत के पास वापस भेज दिया गया है, जहां शिकायत पर नए सिरे से सुनवाई होगी। अगली सुनवाई 29 सितंबर को निर्धारित की गई है।

    यह मामला सोनिया गांधी का नाम 1980 की नई दिल्ली संसदीय क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज होने के आरोपों से जुड़ा है। शिकायत में कहा गया है कि सोनिया गांधी को भारतीय नागरिकता 30 अप्रैल 1983 को मिली थी। ऐसे में नागरिकता हासिल करने से करीब तीन साल पहले 1980 की मतदाता सूची में उनका नाम दर्ज होने को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

    शिकायतकर्ता विकास त्रिपाठी ने आरोप लगाया है कि मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए कथित तौर पर जाली या फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। शिकायत में 1980, 1982 और 1983 के घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया गया है कि 1980 में नाम दर्ज होने के बाद 1982 में उसे क्यों हटाया गया और 1983 में नागरिकता मिलने के बाद नाम दोबारा किस आधार पर शामिल किया गया।

    इन्हीं आरोपों के आधार पर पुलिस से जांच और एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई थी। हालांकि, मजिस्ट्रेट अदालत ने पहले इस मांग को खारिज कर दिया था। इसके बाद शिकायतकर्ता ने उस आदेश को चुनौती देते हुए पुनरीक्षण याचिका दायर की।

    विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने अब निचली अदालत के आदेश को रद्द करते हुए कहा कि उसमें मामले से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों और कानूनी पहलुओं पर पर्याप्त विचार नहीं किया गया था। अदालत ने पुराने आदेश को ऐसा आदेश माना जिसमें निष्कर्ष के पीछे पर्याप्त कारण स्पष्ट नहीं किए गए थे।

    अदालत ने यह भी कहा कि एफआईआर की मांग पर फैसला लेने से पहले संबंधित पुलिस अधिकारी की बात सुनी जानी चाहिए थी और पुलिस थाने से स्थिति रिपोर्ट मंगाई जानी चाहिए थी। सुनवाई के दौरान यह भी स्पष्ट किया गया कि मजिस्ट्रेट को पहले यह देखना था कि शिकायत में किसी संज्ञेय अपराध के होने का आधार बनता है या नहीं।

    विशेष अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वह स्वयं मजिस्ट्रेट की भूमिका निभाकर सीधे एफआईआर दर्ज करने का आदेश नहीं दे सकती। इसी कारण मामले को वापस एसीजेएम अदालत भेजा गया है। अब संबंधित अदालत शिकायत में लगाए गए आरोपों, उपलब्ध दस्तावेजों और पुलिस के पक्ष पर नए सिरे से विचार करेगी।

    एसीजेएम अदालत को दोनों पक्षों को सुनने के बाद कारणों सहित नया आदेश पारित करना होगा। पुलिस से स्थिति रिपोर्ट और संबंधित पक्षों की दलीलों पर भी विचार किया जाएगा। इसके बाद तय होगा कि मामले में एफआईआर दर्ज करने या आगे की जांच के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं या नहीं।

    महत्वपूर्ण रूप से, ताजा अदालत के आदेश का अर्थ यह नहीं है कि सोनिया गांधी के खिलाफ लगाए गए आरोप साबित हो गए हैं। अदालत ने फिलहाल पुराने आदेश को रद्द कर मामले की दोबारा सुनवाई का रास्ता खोला है। अब 29 सितंबर की सुनवाई में आगे की कानूनी प्रक्रिया स्पष्ट होगी।

  • FASTag यूजर्स के लिए बड़ी राहत, अब बिना स्टिकर बदले बदल सकेंगे बैंक; OneTag से आसान होगा पोर्टेबिलिटी का पूरा काम

    FASTag यूजर्स के लिए बड़ी राहत, अब बिना स्टिकर बदले बदल सकेंगे बैंक; OneTag से आसान होगा पोर्टेबिलिटी का पूरा काम


    नई दिल्ली । नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने FASTag यूजर्स के लिए OneTag पोर्टेबिलिटी सुविधा शुरू की है। इसके तहत वाहन मालिक अपनी कार की विंडस्क्रीन पर लगे मौजूदा FASTag स्टिकर को हटाए बिना उससे जुड़े बैंक या इशूअर को बदल सकेंगे। इससे बैंक बदलने के लिए नया FASTag खरीदने और पुराने स्टिकर को हटाने की जरूरत नहीं रहेगी।

    अब तक अगर किसी वाहन मालिक को FASTag का बैंक बदलना होता था, तो उसे पुराने FASTag को वाहन से हटाकर नया टैग लेना पड़ता था। इस प्रक्रिया में समय और अतिरिक्त खर्च दोनों होते थे। OneTag सुविधा के जरिए इस परेशानी को दूर करने की कोशिश की गई है। यह प्रक्रिया मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी की तरह होगी, जिसमें नंबर वही रहता है और केवल सेवा प्रदाता बदला जाता है।

    इस सुविधा की शुरुआत मुंबई में आयोजित ग्लोबल फिनटेक फेस्ट के दौरान की गई। नई व्यवस्था में वाहन की विंडस्क्रीन पर लगा मौजूदा FASTag स्टिकर ही इस्तेमाल होता रहेगा। FASTag ID में भी बदलाव नहीं होगा। इससे बार-बार नया टैग लेने की आवश्यकता कम होगी और वाहन मालिकों के लिए बैंक बदलना अधिक सुविधाजनक हो जाएगा।

    FASTag को नए बैंक में पोर्ट करने के लिए वाहन मालिक को सबसे पहले अपने मोबाइल में राजमार्गयात्रा ऐप पर लॉगिन करना होगा। इसके बाद वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज करके यह जांचना होगा कि FASTag पोर्टेबिलिटी के लिए वाहन पात्र है या नहीं।

    पात्रता की पुष्टि होने के बाद मौजूदा FASTag बैंक की ओर से रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर छह अंकों का वेरिफिकेशन कोड भेजा जाएगा। इस कोड को ऐप में दर्ज करने के बाद वाहन मालिक अपनी पसंद का नया FASTag इशूअर बैंक चुन सकेगा। इसके बाद नए बैंक के साथ ग्राहक सत्यापन और वॉलेट ऑनबोर्डिंग की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। प्रक्रिया पूरी होते ही FASTag पोर्टेबिलिटी पूरी हो जाएगी।

    हालांकि, बैंक बदलने के बाद तुरंत दोबारा पोर्टेबिलिटी की सुविधा नहीं मिलेगी। अगर कोई यूजर भविष्य में फिर किसी दूसरे बैंक में FASTag पोर्ट करना चाहता है, तो उसे छह महीने तक इंतजार करना होगा। सफल पोर्टेबिलिटी के बाद पुराना बैंक मौजूदा FASTag वॉलेट बंद करेगा और उसमें बची राशि को रिफंड करेगा। इसके बाद छह महीने का कूलिंग पीरियड लागू रहेगा।

    फिलहाल OneTag पोर्टेबिलिटी कुछ चुनिंदा बैंकों और इशूअर्स के जरिए उपलब्ध कराई गई है। इनमें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, एयरटेल पेमेंट बैंक, एक्सिस बैंक, सिटी यूनियन बैंक, फेडरल बैंक, एचडीएफसी बैंक, इंडसइंड बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, करूर वैश्य बैंक और आईसीआईसीआई बैंक शामिल हैं।

    इस सुविधा से FASTag व्यवस्था में भी बदलाव की उम्मीद है। नया टैग बनाने, उसकी डिलीवरी और उससे जुड़े खर्च कम होने के साथ पुराने FASTag को ही जारी रखने की सुविधा मिलेगी। इससे वाहन मालिकों के लिए बैंक बदलने की प्रक्रिया सरल होगी और FASTag के संचालन को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिल सकती है।