Category: National

  • गुरु पूर्णिमा पर काशी में मुस्लिमों ने उतारी संत की आरती, वृंदावन में प्रेमानंद महाराज के स्वागत में बिछे फूल

    गुरु पूर्णिमा पर काशी में मुस्लिमों ने उतारी संत की आरती, वृंदावन में प्रेमानंद महाराज के स्वागत में बिछे फूल

    अयोध्या। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर बुधवार को उत्तर प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर श्रद्धा और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। मथुरा, वाराणसी, प्रयागराज, अयोध्या और गोरखपुर समेत कई शहरों में हजारों श्रद्धालुओं ने अपने गुरुओं का पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। जगह-जगह धार्मिक अनुष्ठान, भजन-कीर्तन और विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए।

    मथुरा में संत प्रेमानंद महाराज के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। शिष्यों ने उनके स्वागत में करीब 50 मीटर लंबे मार्ग पर फूल बिछाए और दंडवत प्रणाम कर गुरु के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।

    गोरखपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर पहुंचकर महायोगी गुरु गोरखनाथ की पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने अपने गुरु ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

    अयोध्या में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर 100 से अधिक मंदिरों को आकर्षक फूलों से सजाया गया। सुबह से ही सरयू घाटों पर स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। अनुमान है कि दो लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचे।

    वाराणसी में सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल देखने को मिली। यहां मुस्लिम समुदाय के लोगों ने जगद्गुरु बाबा बालक दास की आरती उतारकर उनका आशीर्वाद लिया। वहीं, गंगा घाटों पर भी श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान कर गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया।

    प्रयागराज में सनातनी किन्नर अखाड़े की ओर से गुरु वंदना यात्रा निकाली गई। आचार्य महामंडलेश्वर कौशल्या नंद गिरि रथ पर सवार रहीं, जबकि किन्नर समुदाय के सदस्य भजनों की धुन पर नृत्य करते हुए यात्रा में शामिल हुए। छत्तीसगढ़ से करीब 600 किलोमीटर की यात्रा कर पहुंचीं सोनिया अपने परिवार और लड्डू गोपाल की प्रतिमा के साथ संगम में स्नान करने पहुंचीं। उन्होंने कहा कि लड्डू गोपाल के घर आने के बाद उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आए हैं।
    प्रयागराज में सनातनी किन्नर अखाड़े की ओर से गुरु वंदना यात्रा निकाली गई। आचार्य महामंडलेश्वर कौशल्या नंद गिरि रथ पर सवार रहीं, जबकि किन्नर समुदाय के सदस्य भजनों की धुन पर नृत्य करते हुए यात्रा में शामिल हुए। छत्तीसगढ़ से करीब 600 किलोमीटर की यात्रा कर पहुंचीं सोनिया अपने परिवार और लड्डू गोपाल की प्रतिमा के साथ संगम में स्नान करने पहुंचीं। उन्होंने कहा कि लड्डू गोपाल के घर आने के बाद उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आए हैं।

    गुरु पूर्णिमा के अवसर पर प्रसिद्ध कथावाचक देवकी नंदन महाराज के दर्शन और पूजन के लिए 10 हजार से अधिक श्रद्धालु पहुंचे। भजन-कीर्तन और धार्मिक आयोजनों के बीच भक्तों ने गुरु का आशीर्वाद लिया और गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व को आत्मसात किया।

    वात्सल्य ग्राम आश्रम में पद्म भूषण साध्वी ऋतम्भरा के शिष्यों ने श्रद्धापूर्वक उनका पूजन किया। इस दौरान उन्होंने आध्यात्मिक जीवन, सेवा और संस्कारों का संदेश दिया। उधर, काशी विश्वनाथ मंदिर में मध्य आरती के दौरान बाबा विश्वनाथ का विशेष श्रृंगार कर उन्हें राम नाम की माला अर्पित की गई, जिसने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।

  • राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर संसद में सपा का प्रदर्शन: दानपेटी लेकर पहुंचीं डिंपल, छात्र आंदोलन पर भी घेरा

    राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर संसद में सपा का प्रदर्शन: दानपेटी लेकर पहुंचीं डिंपल, छात्र आंदोलन पर भी घेरा


    लखनऊ। राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे को लेकर समाजवादी पार्टी ने बुधवार को संसद भवन परिसर में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। सपा सांसदों ने दानपेटी के साथ प्रदर्शन करते हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान सपा सांसद डिंपल यादव दानपेटी लेकर संसद पहुंचीं और सांसदों के साथ-साथ मीडिया कर्मियों से भी उसमें प्रतीकात्मक रूप से धनराशि डालने की अपील की। इसके बाद कई सांसदों ने दानपेटी में नोट डाले, जबकि पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इसमें सहयोग राशि डाली। प्रदर्शन के दौरान सांसदों ने “चढ़ावा चोर, गद्दी छोड़” के नारे लगाए।

    डिंपल यादव ने आरोप लगाया कि चढ़ावे के पैसे का दुरुपयोग हुआ है और मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी घटना के बाद राज्य सरकार को जवाब देना चाहिए कि यह कैसे हुआ। उनका आरोप था कि विशेष जांच दल (SIT) का गठन केवल लोगों का ध्यान भटकाने के लिए किया गया।

    अखिलेश यादव ने कहा कि यदि दानपात्र तक सुरक्षित नहीं रह सके तो व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि जो लोग आस्था से जुड़े मामलों की रक्षा नहीं कर पाए, उनसे युवाओं के भविष्य की सुरक्षा की भी उम्मीद नहीं की जा सकती।

    इसी दौरान अखिलेश यादव ने छात्र आंदोलन के मुद्दे पर भी राहुल गांधी का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि छात्रों पर पैलेट गन चलाए जाने की घटना गंभीर है और इसकी जिम्मेदारी केंद्रीय गृह मंत्री को लेनी चाहिए।

    उधर, लोकसभा की कार्यवाही बुधवार सुबह 11 बजे शुरू होते ही विपक्ष के हंगामे की भेंट चढ़ गई। लगातार नारेबाजी के कारण सदन की कार्यवाही पहले दोपहर 12 बजे तक और बाद में कई बार स्थगित करनी पड़ी। दोपहर तीन बजे कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, लेकिन करीब 22 मिनट ही चल सकी। इस दौरान ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पारित किया गया। इसके बाद सदन की कार्यवाही गुरुवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

    पेपर लीक से जुड़े इस संशोधन विधेयक पर लगातार दूसरे दिन चर्चा हुई। इससे पहले मंगलवार को इस विषय पर करीब नौ घंटे तक बहस चली थी।

    इस बीच फैजाबाद (अयोध्या) से सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस मामले में “बड़ी मछलियों” को बचाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने दावा किया कि जनता सब देख रही है और आगामी चुनाव में इसका असर दिखाई देगा।

  • झांसी में फिर सक्रिय हुआ मानसून, बूंदाबांदी से बदला मौसम, अगले पांच दिन बारिश का पूर्वानुमान

    झांसी में फिर सक्रिय हुआ मानसून, बूंदाबांदी से बदला मौसम, अगले पांच दिन बारिश का पूर्वानुमान

    झांसी। एक सप्ताह की सुस्ती के बाद झांसी में मानसून ने दोबारा रफ्तार पकड़ ली है। मंगलवार रात हुई हल्की बूंदाबांदी से मौसम का मिजाज बदल गया और लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिली। मौसम विभाग ने अगले पांच दिनों तक जिले में बारिश की संभावना जताई है, जिससे तापमान में भी गिरावट आने के आसार हैं।

    बीते कई दिनों से बारिश नहीं होने के कारण जिले में धान की फसल प्रभावित हो रही थी। वहीं लगातार बढ़ते तापमान और उमस ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी थी। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव के क्षेत्र के सक्रिय होने से मानसूनी गतिविधियां एक बार फिर तेज हुई हैं।

    मंगलवार शाम करीब पांच बजे आसमान में घने बादल छा गए। इसके बाद ठंडी हवाएं चलीं और रात करीब आठ बजे हल्की बूंदाबांदी शुरू हो गई, जिससे वातावरण में ठंडक घुल गई।

    कृषि विज्ञान केंद्र, भरारी के मौसम वैज्ञानिक डॉ. आदित्य कुमार सिंह ने बताया कि बुधवार से अगले पांच दिनों तक जिले में वर्षा होने की संभावना है। 31 जुलाई तक हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है, जबकि 1 और 2 अगस्त को तेज बारिश होने का अनुमान है। बारिश के असर से अधिकतम तापमान घटकर 32 से 33 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है।

    प्रदेश में सबसे गर्म जिलों में रहा झांसी
    मंगलवार को झांसी का अधिकतम तापमान 36.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 4.3 डिग्री अधिक रहा। वहीं न्यूनतम तापमान 27.1 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो सामान्य से 2.2 डिग्री अधिक था। प्रदेश में बस्ती (36.7 डिग्री सेल्सियस) के बाद झांसी दूसरे सबसे अधिक तापमान वाला जिला रहा।

  • झांसी-कानपुर हाईवे पर खड़े ट्रक से टकराई स्लीपर बस, चालक समेत दो की मौत, 30 यात्री घायल

    झांसी-कानपुर हाईवे पर खड़े ट्रक से टकराई स्लीपर बस, चालक समेत दो की मौत, 30 यात्री घायल


    झांसी। झांसी-कानपुर हाईवे पर मंगलवार देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसे में स्लीपर बस खड़े ट्रक से जा भिड़ी। हादसे में बस चालक समेत दो लोगों की मौत हो गई, जबकि करीब 25 से 30 यात्री घायल हो गए। घायलों में तीन की हालत गंभीर बताई जा रही है। सभी को उपचार के लिए महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है।

    जानकारी के अनुसार, प्रयागराज से मध्य प्रदेश के विदिशा लौट रही स्लीपर बस मंगलवार रात करीब 1:30 बजे बड़ागांव थाना क्षेत्र में पारीछा पावर प्लांट के सामने हाईवे पर खराब होकर खड़े ट्रक से पीछे से टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि बस का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और चालक स्टेयरिंग में फंस गया। हादसे में बस चालक इस्लाम बेग (35), निवासी अशोकनगर (मध्य प्रदेश) और बस में सवार कन्ना (69), निवासी रामनगर, विदिशा की मौके पर ही मौत हो गई।

    राहत-बचाव में जुटे पुलिस और स्थानीय लोग
    दुर्घटना के बाद बस में अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई। सूचना मिलते ही बड़ागांव थाना पुलिस और एंबुलेंस मौके पर पहुंचीं। स्थानीय लोगों की मदद से चालक को बस से बाहर निकाला गया और सभी घायलों को तत्काल अस्पताल भेजा गया। बताया जा रहा है कि बस में सवार अधिकांश यात्री मध्य प्रदेश के रहने वाले थे, जो प्रयागराज में अस्थि विसर्जन कर अपने घर लौट रहे थे।

    झपकी आने की आशंका
    हादसे के बाद पुलिस ने क्षतिग्रस्त बस और ट्रक को हटवाकर हाईवे पर यातायात बहाल कराया। एसपी सिटी प्रीति सिंह ने बताया कि सभी घायलों का इलाज मेडिकल कॉलेज में चल रहा है। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि बस चालक को झपकी आने के कारण यह दुर्घटना हुई। मामले की जांच जारी है।

  • यूपी चुनाव से पहले 'जयंती राजनीति' तेज, भाजपा-सपा महापुरुषों के जरिए साध रहीं जातीय समीकरण

    यूपी चुनाव से पहले 'जयंती राजनीति' तेज, भाजपा-सपा महापुरुषों के जरिए साध रहीं जातीय समीकरण

    मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अभी समय है, लेकिन राजनीतिक दलों ने जातीय और सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है। भाजपा और समाजवादी पार्टी (सपा) अपने-अपने परंपरागत वोट बैंक को साधने के लिए संतों, समाज सुधारकों और महापुरुषों की जयंती व पुण्यतिथि पर बड़े पैमाने पर कार्यक्रम आयोजित कर रही हैं। इसके लिए दोनों दलों ने प्रदेशभर में लंबे अभियान और आयोजनों की रूपरेखा तैयार की है।

    भाजपा ने संत रविदास महाराज की जयंती को केंद्र में रखकर करीब सात महीने तक चलने वाला ‘समरसता संकल्प अभियान’ शुरू करने का फैसला किया है। वहीं, पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) रणनीति पर आगे बढ़ रही सपा बुधवार को पूरे प्रदेश में महाराजा दक्ष प्रजापति की जयंती पर जिला और महानगर स्तर पर कार्यक्रम आयोजित कर रही है।

    महापुरुषों के जरिए सामाजिक संदेश देने की तैयारी
    हाल के महीनों में डॉ. भीमराव आंबेडकर और लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की जयंती पर भी सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने व्यापक स्तर पर आयोजन किए थे। अब भाजपा ने संत रविदास महाराज के जीवन और विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से 29 जुलाई (गुरु पूर्णिमा) से 20 फरवरी 2027 (संत रविदास जयंती) तक विशेष अभियान चलाने की घोषणा की है।

    इस अभियान के दौरान धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ जनसंपर्क गतिविधियों के माध्यम से समता, सामाजिक न्याय, सेवा और मानवता के संदेश का प्रचार किया जाएगा।

    सपा भी जयंती आयोजनों पर दे रही जोर
    समाजवादी पार्टी भी विभिन्न समाजों के महापुरुषों की जयंती और पुण्यतिथि पर कार्यक्रम आयोजित कर अपने सामाजिक आधार को मजबूत करने की कोशिश में जुटी है। इसी क्रम में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर महाराजा दक्ष प्रजापति जयंती मनाई जा रही है। इसके बाद 5 अगस्त को पार्टी संस्थापक नेताओं में शामिल जनेश्वर मिश्र की जयंती पर भी परंपरागत कार्यक्रम होंगे।

    भाजपा करेगी पुजारियों का सम्मान
    गुरु पूर्णिमा के अवसर पर भाजपा महानगर इकाई शहर के सभी दस मंडलों में कार्यक्रम आयोजित करेगी। महानगर अध्यक्ष गिरीश भंडूला के अनुसार, इस दौरान शहर के 100 मंदिरों के पुजारियों का सम्मान किया जाएगा। इसके लिए पार्टी पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

    पांच महीनों में सपा के कई आयोजन
    मार्च से जुलाई के बीच सपा ने विभिन्न महापुरुषों की जयंती और पुण्यतिथि पर करीब 11 कार्यक्रम आयोजित किए। इनमें कांशीराम, सम्राट अशोक, महर्षि कश्यप, महाराजा निषादराज गुहा, महात्मा ज्योतिराव फुले, डॉ. भीमराव आंबेडकर, अहिल्याबाई होल्कर, महारानी दुर्गावती, छत्रपति साहूजी महाराज, बाबा लक्खी शाह बंजारा और फूलन देवी से जुड़े आयोजन शामिल रहे।

    भाजपा के प्रमुख आयोजन
    भाजपा ने भी इस वर्ष नेताजी सुभाष चंद्र बोस, डॉ. भीमराव आंबेडकर, अहिल्याबाई होल्कर और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सहित कई महापुरुषों की जयंती और स्मृति कार्यक्रमों का आयोजन किया। आंबेडकर जयंती के अवसर पर दीपोत्सव, प्रतिमा स्वच्छता अभियान और सम्मान कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।

    कार्यकर्ताओं से जुड़ाव पर भी जोर
    चुनावी तैयारियों के बीच जनप्रतिनिधि और पार्टी पदाधिकारी संगठन के कार्यकर्ताओं से व्यक्तिगत स्तर पर जुड़ाव बढ़ाने की भी कोशिश कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर कार्यकर्ताओं के जन्मदिन और वैवाहिक वर्षगांठ की शुभकामनाओं के साथ-साथ उनके कार्यक्रमों में व्यक्तिगत उपस्थिति दर्ज कराकर संगठनात्मक संबंध मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

  • बारिश ने बढ़ाई मुश्किलें: उत्तराखंड में यात्रा पर ब्रेक, छत्तीसगढ़ में बिजली गिरने से पांच की मौत, कई राज्यों में रेड अलर्ट

    बारिश ने बढ़ाई मुश्किलें: उत्तराखंड में यात्रा पर ब्रेक, छत्तीसगढ़ में बिजली गिरने से पांच की मौत, कई राज्यों में रेड अलर्ट


    नई दिल्ली । देशभर में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है और कई राज्यों में लगातार हो रही बारिश आम जनजीवन पर भारी पड़ रही है। उत्तराखंड में मूसलाधार बारिश और भूस्खलन की घटनाओं को देखते हुए प्रशासन ने चारधाम यात्रा को एहतियातन दो दिनों के लिए स्थगित कर दिया है। वहीं चंपावत बागेश्वर और टिहरी जिलों में खराब मौसम के चलते कक्षा 12 तक के सभी स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में अवकाश घोषित किया गया है ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

    राजस्थान में भी तेज बारिश ने लोगों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। धौलपुर सहित कई शहरों के बाजारों और निचले इलाकों में पानी भर गया जिससे यातायात प्रभावित हुआ और व्यापारिक गतिविधियां भी प्रभावित रहीं। चित्तौड़गढ़ के बेगूं क्षेत्र में लगातार बारिश के बाद प्रसिद्ध मेनाल जलप्रपात पूरे वेग से बहने लगा जबकि रणथंभौर क्षेत्र में कई स्थानों पर जलस्तर बढ़ने से रास्तों पर पानी बहता दिखाई दिया।

    छत्तीसगढ़ में बारिश के साथ आकाशीय बिजली ने कहर बरपाया। राज्य के अलग अलग हिस्सों में बिजली गिरने की तीन घटनाओं में पांच लोगों की मौत हो गई जबकि ग्यारह लोग घायल हो गए। मौसम विभाग ने अगले दो दिनों तक राज्य के कई जिलों में भारी बारिश और बिजली गिरने की आशंका जताते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।

    गुजरात में भी लगातार हो रही भारी बारिश और बाढ़ जैसी स्थिति का असर औद्योगिक गतिविधियों पर देखने को मिला। साणंद स्थित टाटा मोटर्स प्लांट और उसके आसपास स्थित कई सप्लायर इकाइयों का संचालन अस्थायी रूप से प्रभावित हुआ। वहीं महिसागर जिले का प्रसिद्ध सात कुंड जलप्रपात भी बारिश के बाद पूरे उफान पर पहुंच गया।

    उत्तर प्रदेश के मेरठ सहित कई शहरों में सड़कों पर जलभराव की स्थिति बन गई जिससे लोगों को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बिहार के कई जिलों में भी लगातार बारिश के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है और निचले इलाकों में पानी भरने लगा है।

    भारतीय मौसम विभाग के अनुसार इस समय देश के ऊपर दो मजबूत मानसूनी सिस्टम सक्रिय हैं। बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र ओडिशा झारखंड और छत्तीसगढ़ से आगे बढ़ते हुए मध्य एवं उत्तर पश्चिम भारत को प्रभावित कर रहा है। इसी कारण मध्य भारत उत्तर पश्चिम भारत और पूर्वी राज्यों में अगले चार से पांच दिनों तक सामान्य से अधिक तथा कई स्थानों पर भारी से अत्यधिक भारी बारिश होने की संभावना है।

    दिल्ली में भी मंगलवार को 50 मिलीमीटर से अधिक बारिश दर्ज की गई। राजधानी के कई इलाकों में जलभराव हुआ मेट्रो स्टेशनों और प्रमुख सड़कों पर पानी भर गया तथा कई पेड़ गिरने की घटनाएं सामने आईं। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है।

    मौसम विभाग ने लोगों से नदी नालों के पास जाने से बचने सुरक्षित स्थानों पर रहने तथा प्रशासन द्वारा जारी दिशा निर्देशों का पालन करने की अपील की है क्योंकि आने वाले दिनों में मानसून का प्रभाव और अधिक बढ़ सकता है।

  • E20 पेट्रोल को लेकर AAP का विरोध तेज, केजरीवाल बोले- सरकार नीति नहीं बदलेगी तो होगा राष्ट्रीय आंदोलन

    E20 पेट्रोल को लेकर AAP का विरोध तेज, केजरीवाल बोले- सरकार नीति नहीं बदलेगी तो होगा राष्ट्रीय आंदोलन

    नई दिल्ली । पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण यानी ई20 ईंधन को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार से इस नीति पर पुनर्विचार करने की मांग करते हुए कहा है कि यदि फैसला वापस नहीं लिया गया तो देशभर में आंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि पुराने वाहनों में ई20 पेट्रोल के इस्तेमाल को लेकर लोगों की चिंताओं का अब तक स्पष्ट समाधान नहीं किया गया है।

    एक प्रेस वार्ता के दौरान केजरीवाल ने दावा किया कि उन्होंने देश की 29 ऑटोमोबाइल कंपनियों से यह पूछा था कि क्या वर्ष 2023 से पहले निर्मित वाहनों में ई20 पेट्रोल का उपयोग पूरी तरह सुरक्षित है। उनका कहना था कि इस संबंध में किसी भी कंपनी ने उन्हें लिखित जवाब नहीं दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनियां इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से स्पष्ट रुख अपनाने से बच रही हैं।

    उन्होंने कहा कि वाहन मालिकों के मन में कई व्यावहारिक सवाल हैं, जिनका जवाब मिलना जरूरी है। यदि ई20 पेट्रोल के उपयोग से किसी वाहन में तकनीकी खराबी आती है या माइलेज प्रभावित होता है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा, इस पर सरकार और वाहन निर्माता कंपनियों को स्पष्ट स्थिति बतानी चाहिए। उनके अनुसार लाखों उपभोक्ताओं को अपने वाहनों के लिए उपयुक्त ईंधन की जानकारी पाने का अधिकार है।

    केजरीवाल ने यह भी दावा किया कि कई ऑटोमोबाइल कंपनियों के अधिकारियों से उनकी फोन पर बातचीत हुई, जिसमें ई20 ईंधन से जुड़े तकनीकी पहलुओं पर चर्चा हुई। हालांकि उन्होंने किसी कंपनी का नाम सार्वजनिक नहीं किया। उनका आरोप था कि कंपनियां इस विषय पर खुलकर अपनी राय रखने से बच रही हैं।

    आम आदमी पार्टी प्रमुख ने ई20 नीति को लेकर व्यापक सार्वजनिक चर्चा की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर लोगों की राय जानने और विशेषज्ञों के विचार सामने लाने के लिए एक टाउनहॉल कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कार्यक्रम के आयोजन में प्रशासनिक स्तर पर बाधाएं उत्पन्न की जा रही हैं।

    प्रेस वार्ता के दौरान केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधे अपील करते हुए कहा कि सरकार को जनता की चिंताओं को गंभीरता से लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोगों को अपनी बात शांतिपूर्ण ढंग से रखने का अधिकार है और किसी भी नीति पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ई20 नीति पर पुनर्विचार नहीं किया गया तो आम आदमी पार्टी इस मुद्दे को लेकर देशव्यापी जनआंदोलन शुरू करेगी।

    ई20 नीति का उद्देश्य पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण बढ़ाकर जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना और वैकल्पिक ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देना है। हालांकि इसके प्रभाव को लेकर विभिन्न पक्षों की ओर से अलग-अलग राय सामने आती रही है। इसी बीच केजरीवाल के बयान के बाद इस विषय पर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

    अब इस मुद्दे पर केंद्र सरकार, ऑटोमोबाइल कंपनियों और अन्य संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि ई20 नीति को लेकर उठाए गए सवालों और आंदोलन की चेतावनी का आगे क्या असर पड़ता है।

  • पेपर लीक कानून को मिली मंजूरी, राहुल गांधी के आरोपों और विवादित शब्दों पर लोकसभा में जोरदार हंगामा

    पेपर लीक कानून को मिली मंजूरी, राहुल गांधी के आरोपों और विवादित शब्दों पर लोकसभा में जोरदार हंगामा


    नई दिल्ली । लोकसभा ने बुधवार को सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और अनुचित साधनों पर रोक लगाने से जुड़े पब्लिक एग्जामिनेशन अनुचित साधनों की रोकथाम संशोधन विधेयक 2026 को विपक्ष के हंगामे के बीच ध्वनिमत से पारित कर दिया। हालांकि सदन में सबसे ज्यादा चर्चा बिल से अधिक नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के भाषण और उनके द्वारा इस्तेमाल किए गए कुछ शब्दों को लेकर रही। करीब पचास मिनट के भाषण के दौरान कई बार सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने सामने आ गए जिससे सदन का माहौल बेहद गर्म हो गया।

    राहुल गांधी ने परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों को युवाओं के भविष्य के साथ बड़ा अन्याय बताया। उन्होंने कहा कि लाखों छात्र मेहनत के बावजूद परीक्षा प्रक्रिया की खामियों का खामियाजा भुगत रहे हैं। उनके अनुसार यह केवल परीक्षा व्यवस्था की नहीं बल्कि पूरी प्रशासनिक व्यवस्था की विफलता है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखने में सरकार असफल रही है और शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

    भाषण के दौरान राहुल गांधी ने छात्रों से हुई बातचीत का हवाला देते हुए कुछ ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया जिन पर सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू तुरंत खड़े हो गए और कहा कि नेता प्रतिपक्ष को संसदीय मर्यादा का पालन करना चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी से अपने शब्द वापस लेने और सदन से माफी मांगने की मांग की। इस दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी कई बार हस्तक्षेप करते हुए असंसदीय शब्दों के प्रयोग पर आपत्ति जताई और उन्हें कार्यवाही से हटाने के निर्देश दिए।

    राहुल गांधी ने अपने संबोधन में यह भी आरोप लगाया कि छात्रों के प्रदर्शन के दौरान गृह मंत्री की ओर से पुलिस कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। इस दावे का सरकार ने कड़ा विरोध किया। किरेन रिजिजू ने आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि गोली चलाने जैसे आदेश किसी मंत्री द्वारा नहीं बल्कि प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत सक्षम अधिकारी देते हैं। उन्होंने कहा कि इतने गंभीर आरोप बिना किसी प्रमाण के लगाना उचित नहीं है और नेता प्रतिपक्ष को सदन से माफी मांगनी चाहिए।

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी अध्यक्ष से अनुरोध किया कि विवादित शब्दों को कार्यवाही से हटाया जाए। हंगामे के बीच कई बार सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसदों ने नारेबाजी की जिससे सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए बाधित भी हुई। बाद में कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।

    राहुल गांधी ने अपने भाषण में यह भी कहा कि देश का भविष्य सड़कों पर अपने अधिकारों के लिए आवाज उठा रहा है और प्रदर्शन कर रहे छात्र किसी राजनीतिक एजेंडे से नहीं बल्कि अपने भविष्य की सुरक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को केवल औपचारिक कदम बताते हुए कहा कि इससे समस्या का समाधान नहीं होगा बल्कि परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की जरूरत है।

    उधर सरकार ने संशोधन विधेयक को परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम बताया। सरकार का कहना है कि नए प्रावधानों से पेपर लीक और परीक्षा में होने वाली गड़बड़ियों पर सख्त कार्रवाई का रास्ता और मजबूत होगा। वहीं विपक्ष का कहना है कि केवल कानून बनाने से समस्या खत्म नहीं होगी बल्कि उसे प्रभावी तरीके से लागू करना भी उतना ही जरूरी है।

  • केंद्रीय मंत्री पद छोड़ने के बाद भी ओडिशा भाजपा में मजबूत पकड़, धर्मेंद्र प्रधान के स्वागत से मिले राजनीतिक संकेत

    केंद्रीय मंत्री पद छोड़ने के बाद भी ओडिशा भाजपा में मजबूत पकड़, धर्मेंद्र प्रधान के स्वागत से मिले राजनीतिक संकेत

    नई दिल्ली । केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद पहली बार ओडिशा पहुंचे वरिष्ठ भाजपा नेता धर्मेंद्र प्रधान का पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं ने जोरदार स्वागत किया। नीट पेपर लीक विवाद के बीच मंत्री पद से उनके इस्तीफे के बाद राज्य की राजनीति में उनकी भूमिका और भविष्य को लेकर लगातार चर्चाएं चल रही हैं। हालांकि ओडिशा में उनके स्वागत और पार्टी कार्यकर्ताओं की मौजूदगी ने संकेत दिया कि संगठन के भीतर उनकी राजनीतिक पकड़ अब भी मजबूत बनी हुई है।

    धर्मेंद्र प्रधान लंबे समय तक केंद्र सरकार में महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं और ओडिशा भाजपा के प्रमुख रणनीतिकारों में उनकी पहचान रही है। उनके इस्तीफे के बाद भाजपा के कई नेताओं ने सार्वजनिक रूप से उनका समर्थन व्यक्त किया था। संसद में भी एनडीए के कई सांसदों ने उनका स्वागत कर उनके प्रति सम्मान और समर्थन का संदेश दिया था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम संगठन में उनके प्रभाव को दर्शाता है।

    राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी है कि मंत्री पद से हटने के बाद उनकी प्रशासनिक भूमिका भले बदल गई हो, लेकिन संगठनात्मक स्तर पर उनका अनुभव और नेटवर्क भाजपा के लिए अब भी महत्वपूर्ण बना हुआ है। पार्टी के भीतर लंबे समय से सक्रिय रहने के कारण उनकी पकड़ संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच मजबूत मानी जाती है।

    धर्मेंद्र प्रधान का राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू हुआ था। उनकी सक्रियता अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और संघ परिवार से जुड़ी रही है। उनके पिता देवेंद्र प्रधान भी राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय रहे और केंद्रीय मंत्री का दायित्व निभा चुके थे। वर्ष 2014 के बाद केंद्र में भाजपा सरकार बनने के साथ धर्मेंद्र प्रधान राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख नेताओं में शामिल हुए और विभिन्न मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली।

    ओडिशा में भाजपा के विस्तार में भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। पिछले एक दशक में उन्होंने संगठन को मजबूत करने और राज्य में पार्टी का जनाधार बढ़ाने के लिए लगातार काम किया। वर्ष 2017 के स्थानीय निकाय चुनावों तथा 2019 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में भाजपा के प्रदर्शन को मजबूत करने में उनकी रणनीतिक भूमिका की चर्चा होती रही है। राज्य में लंबे समय तक सत्तारूढ़ रहे राजनीतिक दल के मुकाबले भाजपा को मजबूत विकल्प बनाने के प्रयासों में भी उनका योगदान माना जाता है।

    हालांकि हालिया राजनीतिक घटनाक्रम के बाद यह सवाल भी उठ रहे हैं कि ओडिशा भाजपा में नेतृत्व की भूमिका किस दिशा में आगे बढ़ेगी। राज्य में मौजूदा सरकार और संगठन के बीच समन्वय को लेकर भी राजनीतिक विश्लेषक नजर बनाए हुए हैं। माना जा रहा है कि आने वाले समय में ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकाय चुनाव पार्टी के लिए महत्वपूर्ण होंगे और इन चुनावों में संगठनात्मक रणनीति के लिहाज से धर्मेंद्र प्रधान की भूमिका पर भी ध्यान रहेगा।

    राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि किसी नेता का प्रभाव केवल सरकारी पद से नहीं, बल्कि संगठन में उसकी स्वीकार्यता, कार्यकर्ताओं से जुड़ाव और नेतृत्व क्षमता से भी तय होता है। ओडिशा दौरे के दौरान मिले स्वागत ने यह संकेत दिया है कि धर्मेंद्र प्रधान अभी भी राज्य की भाजपा राजनीति के प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। आने वाले राजनीतिक घटनाक्रम यह तय करेंगे कि भविष्य में उनकी संगठनात्मक और राजनीतिक भूमिका किस रूप में आगे बढ़ती है।

  • रणभूमि से आगे मानवीय सेवा तक भारतीय सेना की पहचान, राजनाथ सिंह ने गिनाईं सैन्य चिकित्सा की नई प्राथमिकताएं

    रणभूमि से आगे मानवीय सेवा तक भारतीय सेना की पहचान, राजनाथ सिंह ने गिनाईं सैन्य चिकित्सा की नई प्राथमिकताएं

    नई दिल्ली । रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भारतीय सशस्त्र बलों की पहचान केवल युद्ध के मैदान में उनके साहस और पराक्रम से नहीं होती, बल्कि मानवीय सहायता, आपदा राहत और सेवा भावना में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं, मानवीय संकटों और कठिन परिस्थितियों में भारतीय सैनिक हमेशा लोगों की सहायता के लिए सबसे आगे रहते हैं। उनके अनुसार देश की सुरक्षा के साथ-साथ मानवता की सेवा भी भारतीय सेनाओं की मूल पहचान का हिस्सा है।

    रक्षा मंत्री ने लखनऊ स्थित कमांड हॉस्पिटल में देश के पहले समर्पित ‘डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री मेडिसिन’ की स्थापना के अवसर पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि भारतीय सैनिक दुनिया के सबसे चुनौतीपूर्ण और विषम भौगोलिक क्षेत्रों में अपनी जिम्मेदारियां निभाते हैं। सियाचिन की अत्यधिक बर्फीली ऊंचाइयों से लेकर रेगिस्तानी इलाकों की भीषण गर्मी तक, जवानों को अनेक प्रकार की शारीरिक और चिकित्सीय चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

    राजनाथ सिंह ने कहा कि कठिन तैनाती के दौरान सैनिकों को संक्रामक रोगों, अत्यधिक गर्मी और ठंड से होने वाली चोटों, अधिक ऊंचाई से जुड़ी बीमारियों, थकान, पोषण संबंधी समस्याओं, निर्जलीकरण और अन्य स्वास्थ्य जोखिमों से जूझना पड़ता है। उनका विश्वास है कि नया विभाग इन परिस्थितियों के अनुरूप वैज्ञानिक और प्रभावी चिकित्सा प्रोटोकॉल विकसित करेगा, जिससे सैनिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और समय पर उपचार उपलब्ध कराया जा सकेगा।

    उन्होंने आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप का उल्लेख करते हुए कहा कि आज सुरक्षा चुनौतियां पारंपरिक हथियारों तक सीमित नहीं रह गई हैं। रासायनिक, जैविक और रेडियोलॉजिकल खतरों जैसे नए जोखिम लगातार सामने आ रहे हैं। ऐसे में यह विभाग इन उभरती चुनौतियों पर अनुसंधान और विकास का प्रमुख केंद्र बनेगा तथा सैन्य चिकित्सा के क्षेत्र में नई तकनीकों और उपचार पद्धतियों को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    रक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय सैन्य चिकित्सा सेवाओं की प्रतिष्ठा केवल देश की सीमाओं तक सीमित नहीं है। भारत संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना मिशनों में प्रमुख सैन्य योगदान देने वाले देशों में शामिल है। विदेशों में तैनात भारतीय सैन्य चिकित्सकों को भी विभिन्न प्रकार की चिकित्सा चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे अनुभवों के आधार पर विकसित होने वाला यह विभाग भविष्य में वैश्विक स्तर पर भी सैन्य चिकित्सा के क्षेत्र में योगदान देने में सक्षम होगा।

    उन्होंने कहा कि कमांड हॉस्पिटल, लखनऊ लंबे समय से सैन्य चिकित्सा, अनुसंधान और अनुशासन का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। यहां के चिकित्सकों ने ‘ऑपरेशन विजय’ और कारगिल युद्ध जैसे महत्वपूर्ण अभियानों के दौरान उल्लेखनीय सेवाएं दी हैं। अब इसी संस्थान में स्थापित हो रहा ‘डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री मेडिसिन’ सैन्य स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देने के साथ-साथ चिकित्सा अनुसंधान को भी मजबूत करेगा।

    राजनाथ सिंह ने कहा कि किसी भी राष्ट्र के विकास की आधारशिला केवल आर्थिक और सामाजिक प्रगति नहीं होती, बल्कि उसकी सैन्य शक्ति और सैनिकों का मनोबल भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने कहा कि जब कोई सैनिक देश की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व समर्पित करता है, तो उसके पीछे ऐसा मजबूत स्वास्थ्य तंत्र होना चाहिए जो हर परिस्थिति में उसका साथ दे। उनके अनुसार यह नया विभाग इसी विश्वास को और मजबूत करेगा तथा सशस्त्र बलों के कल्याण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित होगा।