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  • शिवराज सिंह चौहान ने सुनाया दिलचस्प राजनीतिक किस्सा, मोदी की डिजिटल सोच और शुरुआती दौर की यादें फिर चर्चा में

    शिवराज सिंह चौहान ने सुनाया दिलचस्प राजनीतिक किस्सा, मोदी की डिजिटल सोच और शुरुआती दौर की यादें फिर चर्चा में

    नई दिल्ली । केंद्रीय कृषि मंत्री और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े अपने पुराने अनुभव साझा करते हुए कई दिलचस्प किस्से सुनाए। इस मौके पर उन्होंने अपनी संस्मरण पुस्तक ‘अपनापन, नरेंद्र मोदी संग मेरे अनुभव’ का विमोचन किया, जिसमें उनके लंबे राजनीतिक जीवन और विभिन्न दौर की स्मृतियों का उल्लेख किया गया है। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने एक ऐसा किस्सा भी साझा किया जिसने पूरे सभागार में हल्का-फुल्का माहौल बना दिया और उपस्थित लोग मुस्कुराने लगे।

    शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि वर्ष 1998 के आसपास, जब मध्य प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियां तेज थीं, उस समय एक बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी नेताओं से पूछा था कि किसके पास ईमेल आईडी है। उस समय डिजिटल तकनीक उतनी सामान्य नहीं थी, जिसके कारण कई नेता इस शब्द से परिचित नहीं थे और कुछ समय के लिए कमरे में सन्नाटा छा गया था।

    उन्होंने आगे बताया कि इसी दौरान एक वरिष्ठ नेता ने मजाकिया अंदाज में ईमेल को ‘फीमेल’ समझ लिया और सवाल पूछ दिया कि यह क्या होता है। इस छोटी सी गलतफहमी के बाद पूरे कमरे में हंसी का माहौल बन गया और गंभीर बैठक कुछ देर के लिए हल्के-फुल्के अंदाज में बदल गई। यह किस्सा उस दौर की तकनीकी जागरूकता और शुरुआती डिजिटल बदलावों की स्थिति को दर्शाता है।

    शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि उस समय से ही नरेंद्र मोदी टेक्नोलॉजी को लेकर काफी सजग थे और नई व्यवस्थाओं को समझने में गहरी रुचि रखते थे। उन्होंने बताया कि युवा मोर्चा अध्यक्ष के रूप में मोदी अक्सर कंप्यूटर और आधुनिक तकनीक पर काम करते नजर आते थे और भविष्य की जरूरतों को लेकर पहले से ही सोच रखते थे।

    उन्होंने यह भी कहा कि शुरुआती दौर में सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के महत्व को बहुत कम लोग समझ पाते थे, लेकिन मोदी ने इन माध्यमों की उपयोगिता को पहले ही पहचान लिया था। बाद में यही सोच प्रशासनिक और राजनीतिक कार्यशैली का अहम हिस्सा बन गई और समय के साथ इसका प्रभाव और भी बढ़ता गया।

    शिवराज ने अपने अनुभवों में यह भी साझा किया कि गुजरात के विकास मॉडल को समझने के दौरान उन्होंने देखा कि नरेंद्र मोदी हर विषय पर व्यक्तिगत रूप से ध्यान देते थे और बैठकों में योजनाओं की बारीकियों को विस्तार से समझते थे। यह उनकी कार्यशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है, जिसने निर्णय प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया।

    कार्यक्रम के अंत में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि नेतृत्व केवल निर्णय लेने की क्षमता नहीं होता, बल्कि समय से पहले भविष्य की जरूरतों को समझने और उसके अनुसार तैयारी करने की क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि उनकी पुस्तक इन्हीं अनुभवों और सीखों का संग्रह है, जिसे उन्होंने जनता के साथ साझा किया है।

  • बकरीद से पहले मुंबई में हंगामा ,सोसायटी में बकरे लाने पर भिड़े लोग

    बकरीद से पहले मुंबई में हंगामा ,सोसायटी में बकरे लाने पर भिड़े लोग


    नई दिल्ली । मुंबई के मीरा रोड इलाके में बकरीद से पहले एक सोसायटी में बकरों की मौजूदगी को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। यह मामला पूनम स्टेट क्लस्टर-1 सोसायटी का बताया जा रहा है जहां कथित रूप से कुर्बानी के लिए 25 बकरियां परिसर के अंदर लाई गई थीं और उन्हें एक अस्थायी टीन शेड में रखा गया था। इस घटना के बाद इलाके में तनाव फैल गया और स्थानीय निवासियों के बीच विरोध शुरू हो गया।

    सोसायटी में रहने वाले कई लोगों ने इस व्यवस्था पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि बिना किसी सामूहिक बैठक और अनुमति के परिसर में टीन शेड बनाकर बकरों को रखना नियमों के खिलाफ है। निवासियों ने यह भी दावा किया कि रहवासी इलाके में इस तरह की गतिविधियों से असुविधा और माहौल खराब हो रहा है। इसके बाद मामला धीरे धीरे गरमाने लगा।

    स्थानीय विरोध के बाद भाजपा से जुड़े नेताओं और हिंदू संगठनों के साथ कुछ निवासियों ने प्रशासन से शिकायत की। शिकायत मिलने पर नगर निगम के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर अस्थायी टीन शेड को हटा दिया। हालांकि इसके बाद भी बकरों की मौजूदगी को लेकर विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ।

    स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब सोमवार रात फिर से तनाव बढ़ गया। बताया जाता है कि टीन शेड हटाने के बाद भी बकरे सोसायटी परिसर में ही मौजूद थे। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई और मामला हाथापाई तक पहुंच गया। झगड़े के दौरान एक अज्ञात व्यक्ति ने ब्लेड से एक युवक पर हमला कर दिया जिसमें वह घायल हो गया।

    घटना के बाद पुलिस ने मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। साथ ही सोसायटी के बाहर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है ताकि स्थिति नियंत्रण में रहे और किसी तरह की और हिंसा न हो।सोसायटी के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि परिसर के अंदर कुर्बानी की कोई अनुमति नहीं ली गई थी। उनका कहना है कि टीन शेड केवल अस्थायी रूप से बकरों को रखने के लिए बनाया गया था लेकिन इस पर आपत्ति के बाद उसे हटा दिया गया।

    वहीं मंगलवार को स्थानीय निवासियों ने प्रदर्शन कर विरोध जताया। उनका कहना था कि हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुसार किसी भी रहवासी इलाके में बिना अनुमति कुर्बानी जैसी गतिविधियां नहीं की जा सकतीं। इसी आधार पर उन्होंने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल इलाके में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।

  • कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थन में उतरा वैष्णव किन्नर अखाड़ा, प्रमुख बोलीं- ‘सच से क्यों डरना?’

    कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थन में उतरा वैष्णव किन्नर अखाड़ा, प्रमुख बोलीं- ‘सच से क्यों डरना?’

    मथुरा। वृंदावन में वैष्णव किन्नर अखाड़ा की प्रमुख हिमांगी सखी ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के समर्थन में बयान देकर नई चर्चा छेड़ दी। पुरुषोत्तम मास के दौरान ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचीं हिमांगी सखी ने कहा कि यह ऑनलाइन समूह देश में फैले भ्रष्टाचार और सामाजिक अव्यवस्थाओं को उजागर करने का काम कर रहा है।

    मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि समाज को सच दिखाने वालों से घबराने की बजाय उनका सामना करना चाहिए। उनके मुताबिक, डर केवल उन्हीं लोगों को लगता है जिनके भीतर गलत काम छिपे होते हैं, जबकि ईमानदार व्यक्ति को किसी प्रकार का भय नहीं होना चाहिए।

    हिमांगी सखी ने कहा कि ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ युवाओं द्वारा बनाई गई एक पहल है, जिसका उद्देश्य भ्रष्टाचार और सामाजिक गंदगी के खिलाफ आवाज उठाना है। उन्होंने कहा कि आज का युवा सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को लेकर पहले से अधिक जागरूक है और सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी बात प्रभावी ढंग से सामने रख रहा है।

    उन्होंने इस पहल को लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में सकारात्मक कदम बताते हुए कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ खुलकर बोलना जरूरी है। हिमांगी सखी ने सार्वजनिक रूप से इस संगठन का समर्थन करते हुए कहा कि वह किन्नर जगद्गुरु शंकराचार्य के रूप में इस मुहिम के साथ खड़ी हैं।

    उन्होंने यह भी दावा किया कि कम समय में इस संगठन ने वैश्विक स्तर पर पहचान बनाई है, जो इस बात का संकेत है कि लोग बदलाव और नई सोच को स्वीकार कर रहे हैं।

    हिमांगी सखी के बयान के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। कुछ लोगों ने इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ साहसिक पहल बताया, जबकि कुछ ने इसे राजनीतिक और सामाजिक विवादों से जोड़कर देखा। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका समर्थन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता और पारदर्शिता के समर्थन में है।

    वृंदावन में दिए गए इस बयान के बाद ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर और प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।

  • अहमदाबाद प्लेन क्रैश साइट पर बनेगा नया हॉस्टल, पीड़ित परिवारों ने सरकार से की स्मारक बनाने की मांग

    अहमदाबाद प्लेन क्रैश साइट पर बनेगा नया हॉस्टल, पीड़ित परिवारों ने सरकार से की स्मारक बनाने की मांग

    अहमदाबाद। गुजरात के अहमदाबाद में 12 जून 2025 को हुए एयर इंडिया विमान हादसे को एक वर्ष पूरा होने वाला है। इसी बीच राज्य सरकार ने उस स्थान पर नया मेडिकल हॉस्टल बनाने की मंजूरी दी है, जहां विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। सरकार के इस फैसले का पीड़ित परिवारों ने विरोध करते हुए उस जगह को स्मारक स्थल के रूप में संरक्षित करने की मांग उठाई है।

    मेघानीनगर इलाके में स्थित ‘अतुल्यम हॉस्टल’ भवन में विमान गिरने के बाद वहां भारी नुकसान हुआ था। इसी स्थान पर अब डॉक्टरों और स्नातकोत्तर छात्रों के लिए आधुनिक सुविधाओं से लैस 8+8 मंजिला नया छात्रावास बनाने की योजना तैयार की गई है। इस परियोजना के लिए टाटा एयरलाइंस की ओर से 53 करोड़ रुपये मुआवजे के रूप में दिए जाएंगे।

    राज्य सरकार ने बताया कि असारवा स्थित सिविल अस्पताल के नए मेडिकल कैंपस में करीब 105 करोड़ रुपये की लागत से सुपर स्पेशलिटी हॉस्टल और कैंटीन ब्लॉक का निर्माण कराया जाएगा। स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रफुल पानसेरिया के अनुसार विमान हादसे में क्षतिग्रस्त ‘अतुल्यम 1 से 4’ ब्लॉक, कैंटीन और सब-स्टेशन भवन के नुकसान की भरपाई के तौर पर स्वास्थ्य विभाग को 53.12 करोड़ रुपये की राशि मिलेगी।

    दुर्घटना के समय हॉस्टल में 92 छात्र मौजूद थे। हादसे के बाद कराए गए स्ट्रक्चरल ऑडिट में भवन को असुरक्षित पाया गया, जिसके बाद उसे गिराने का फैसला लिया गया। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने छात्रों की आवासीय सुविधाओं को प्रभावित न होने देने के उद्देश्य से नए हॉस्टल निर्माण का निर्णय लिया है।

    नया हॉस्टल मेघानीनगर स्थित आईजीपी परिसर में बनाया जाएगा। आने वाले तीन वर्षों में 48 अतिरिक्त सुपर स्पेशलिटी सीटों को ध्यान में रखते हुए कुल 236 डॉक्टरों के रहने की व्यवस्था की जाएगी। परियोजना के लिए सरकार ने पर्याप्त भूमि भी आवंटित कर दी है।

    वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में इस परियोजना के लिए 34.65 करोड़ रुपये का प्रावधान स्वीकृत किया गया है। प्रस्तावित ‘अतुल्यम 1 से 7’ पीजी हॉस्टल आधुनिक सुविधाओं के साथ तैयार होगा। प्रत्येक यूनिट को स्टूडियो अपार्टमेंट शैली में विकसित किया जाएगा, जिसमें सिटिंग एरिया, अटैच किचन, बेडरूम और शौचालय की व्यवस्था होगी। इसके अलावा भवन में फायर सेफ्टी सिस्टम, आरओ प्लांट, बेहतर ड्रेनेज सिस्टम, बेसमेंट पार्किंग, आधुनिक मेस, जिम और मनोरंजन कक्ष जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी।

    हालांकि इस योजना के सामने आने के बाद हादसे में प्रभावित परिवारों ने सरकार को ईमेल भेजकर निर्माण कार्य रोकने की अपील की है। परिवारों का कहना है कि यह सिर्फ एक इमारत या जमीन नहीं, बल्कि उन लोगों की यादों और अपूरणीय क्षति से जुड़ा स्थान है जिन्होंने इस हादसे में अपने प्रियजनों को खोया।

    पीड़ित परिवारों ने मांग की है कि इस जगह को स्मारक स्थल के रूप में सुरक्षित रखा जाए, ताकि यह हादसे में जान गंवाने वालों की स्थायी स्मृति बना रहे। उनका कहना है कि ऐसे स्थानों को जल्द मिटा देना मानवीय संवेदनाओं और जवाबदेही दोनों को कमजोर करता है। परिवारों ने सरकार से आग्रह किया है कि किसी भी अंतिम निर्णय से पहले प्रभावित लोगों से चर्चा की जाए।

  • भीषण गर्मी की चपेट में उत्तर भारत, बांदा बना देश का सबसे गर्म शहर, कई राज्यों में हीटवेव का अलर्ट

    भीषण गर्मी की चपेट में उत्तर भारत, बांदा बना देश का सबसे गर्म शहर, कई राज्यों में हीटवेव का अलर्ट

    नई दिल्ली। उत्तर और मध्य भारत के कई राज्यों में गर्मी ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। लगातार बढ़ते तापमान के बीच उत्तर प्रदेश का बांदा जिला मंगलवार को देश का सबसे गर्म इलाका दर्ज किया गया, जहां अधिकतम तापमान 47.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। मौसम विभाग ने बांदा समेत कई शहरों में गंभीर लू की चेतावनी जारी की है।

    मौसम विभाग के अनुसार मैदानी क्षेत्रों में जब तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच जाता है, तो उसे हीटवेव की स्थिति माना जाता है। इसी कारण उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में लू का अलर्ट जारी किया गया है।

    उत्तर प्रदेश में बांदा के अलावा उरई में 45.8 डिग्री, झांसी में 45.5 डिग्री, प्रयागराज में 45.4 डिग्री, आगरा में 45.3 डिग्री और हमीरपुर में 45.2 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया। राज्य के कई इलाकों में रात के समय भी गर्म हवाओं का असर बना रहा, जिससे लोगों को रात में भी राहत नहीं मिल सकी।

    राजस्थान में भी गर्मी का प्रकोप जारी है। श्रीगंगानगर राज्य का सबसे गर्म शहर रहा, जहां तापमान 47 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बीकानेर और फलोदी में 46 डिग्री, जैसलमेर में 45.6 डिग्री और कोटा में 45.4 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया। राजधानी जयपुर में भी तेज गर्मी रही और अधिकतम तापमान 43.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ।

    महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में भी गर्मी ने लोगों को बेहाल कर दिया है। ब्रह्मपुरी में तापमान 46.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो सामान्य से 3.5 डिग्री अधिक रहा। चंद्रपुर में 46.4 डिग्री, वर्धा में 46 डिग्री, नागपुर के सोनेगांव क्षेत्र में 45.5 डिग्री और गोंदिया में 45.2 डिग्री तापमान दर्ज किया गया।

    हरियाणा में सिरसा सबसे गर्म जिला रहा, जहां तापमान 46 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। रोहतक में पारा 45.6 डिग्री तक पहुंच गया। वहीं पंजाब के बठिंडा में अधिकतम तापमान 45.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

    राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी भीषण गर्मी का असर देखने को मिला। सफदरजंग वेधशाला में अधिकतम तापमान 43.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो सामान्य से 3.1 डिग्री अधिक था। मौसम विभाग के मुताबिक दिल्ली के आयानगर, रिज और लोधी रोड क्षेत्रों में तापमान हीटवेव के आधिकारिक मानक से मामूली कम रहा, अन्यथा पूरी राजधानी गंभीर लू की चपेट में आ सकती थी।

    हालांकि मौसम विभाग ने दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को जल्द राहत मिलने की संभावना जताई है। IMD के अनुसार 29 मई से राजधानी में आंधी और बारिश का दौर शुरू हो सकता है, जिससे तापमान में गिरावट आने की उम्मीद है।

  • बंगलूरू आई युगांडा की महिला में इबोला के लक्षण दिखने के बाद अस्पताल में कराया भर्ती, पुणे भेजे सैंपल

    बंगलूरू आई युगांडा की महिला में इबोला के लक्षण दिखने के बाद अस्पताल में कराया भर्ती, पुणे भेजे सैंपल


    बंगलूरू।
    इबोला वायरस (Ebola Virus) को लेकर दुनिया भर में बढ़ती चिंता के बीच बंगलूरू ( Bengaluru) में युगांडा (Uganda) की एक 28 वर्षीय महिला को एहतियात के तौर पर सरकारी अस्पताल में भर्ती (Admitted Hospital) कराया गया है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि महिला में इबोला जैसे हल्के लक्षण दिखाई देने के बाद उसे विशेष निगरानी में रखा गया है। अधिकारियों के अनुसार महिला हाल ही में इबोला प्रभावित क्षेत्र से भारत आई थी। शुरुआत में वह एक होटल में ठहरी हुई थी, लेकिन शरीर दर्द जैसे लक्षण सामने आने के बाद उसे बंगलूरू के सरकारी ‘एपिडेमिक डिजीज हॉस्पिटल’ में शिफ्ट कर दिया गया।

    जांच के लिए भेजा गया संदिग्ध मरीज का सैंपल
    स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि महिला के सैंपल लेकर जांच के लिए पुणे स्थित राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (एनआईवी) भेजे गए हैं। फिलहाल रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। नियमों के मुताबिक दोबारा जांच भी की जाएगी। अधिकारियों ने कहा कि महिला की हालत अभी स्थिर है और डॉक्टर लगातार उसकी निगरानी कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि चूंकि महिला इबोला प्रभावित इलाके से आई थी और बाद में उसमें हल्के लक्षण दिखाई दिए, इसलिए सावधानी के तौर पर उसे अस्पताल में भर्ती किया गया।


    WHO ने घोषित किया ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी

    दरअसल, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 17 मई को कांगो और युगांडा में फैल रहे इबोला संक्रमण को ‘अंतरराष्ट्रीय स्तर की सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति’ घोषित किया था। इसके बाद कई देशों ने सतर्कता बढ़ा दी है।


    22 मई को कर्नाटक स्वास्थ्य विभाग ने जारी की एडवाइजरी

    इसी के मद्देनजर कर्नाटक स्वास्थ्य विभाग ने पिछले शुक्रवार को एडवाइजरी जारी की थी। इसमें कहा गया था कि जो लोग हाल ही में इबोला प्रभावित अफ्रीकी देशों से लौटे हैं, वे 21 दिनों तक अपनी सेहत की निगरानी करें और खुद पर नजर रखें। स्वास्थ्य विभाग ने यह भी कहा है कि अगर किसी व्यक्ति में बुखार, शरीर दर्द या अन्य संदिग्ध लक्षण दिखाई दें तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें। इसके लिए ‘रैपिड रिस्पॉन्स टीम’ भी निगरानी और सर्विलांस का काम करेगी।


    राजधानी बंगलूरू में बनाया गया आइसोलेशन सेंटर

    बंगलूरू में राजीव गांधी छाती रोग संस्थान को आइसोलेशन सेंटर बनाया गया है, जबकि एपिडेमिक डिजीज हॉस्पिटल को क्वारंटीन और इलाज केंद्र के तौर पर तय किया गया है। वहीं मंगलुरु में श्रीनिवास पोर्ट अस्पताल को क्वारंटीन सेंटर और वेनलॉक जिला अस्पताल को इलाज केंद्र बनाया गया है। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग लोगों से घबराने के बजाय सतर्क रहने की अपील कर रहा है।

  • Karnataka में राज्यसभा चुनाव के लिए मुसलमानों से मांग एक सीट…. बढ़ी कांग्रेस की टेंशन

    Karnataka में राज्यसभा चुनाव के लिए मुसलमानों से मांग एक सीट…. बढ़ी कांग्रेस की टेंशन


    नई दिल्ली।
    कर्नाटक (Karnataka) में आगामी राज्यसभा चुनाव (Rajya Sabha elections) को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। राज्य के मुस्लिम संगठनों (Muslim Organizations) के एक प्रमुख महासंघ ने सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी (Ruling Congress party) के सामने एक बड़ी मांग रख दी है। फेडरेशन ऑफ स्टेट मुस्लिम ऑर्गेनाइजेशन्स ने मंगलवार को कांग्रेस नेतृत्व से पुरजोर मांग की है कि वह कर्नाटक की चार राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले आगामी चुनाव में कम से कम एक सीट मुस्लिम समुदाय के उम्मीदवार को आवंटित करे।

    कर्नाटक से राज्यसभा की चार सीटों के लिए आगामी 18 जून को मतदान होना है। राज्य विधानसभा में विधायकों की मौजूदा संख्या के बल पर यह साफ है कि इन चार में से 3 सीटों पर कांग्रेस की जीत तय है, जबकि 1 सीट भाजपा के नेतृत्व वाले राजग के खाते में जाने की पूरी संभावना है।

    यह चुनाव उन चार मौजूदा सांसदों का कार्यकाल 25 जून को समाप्त होने के कारण हो रहा है, जो रिटायर हो रहे हैं। इनमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व प्रधानमंत्री और जेडीएस नेता एचडी देवेगौड़ा, भाजपा से इरण कडाडी और नारायण कोरा गप्पा शामिल हैं।

    मुस्लिम महासंघ ने अपने बयान में कहा है, “चूंकि कांग्रेस पार्टी आसानी से तीन सीटें जीतने की स्थिति में है, इसलिए हमारी पुरजोर मांग है कि इन जीतने वाली सीटों में से कम से कम एक सीट मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधि को दी जाए।” संगठन ने इस संबंध में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और केपीसीसी अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से इस मामले में व्यक्तिगत रूप से रुचि लेने का आग्रह किया है।


    मुस्लिम संगठन ने जताई चिंता

    मुस्लिम संगठन ने राज्य से संसद में समुदाय के लगातार घटते प्रतिनिधित्व को लेकर गंभीर चिंता जताई है। आंकड़ों का हवाला देते हुए महासंघ ने कहा कि कर्नाटक से राज्यसभा के कुल 12 मौजूदा सदस्यों में से केवल एक सदस्य मुस्लिम समुदाय से है। अतीत में कर्नाटक से कांग्रेस के टिकट पर कम से कम दो मुस्लिम लोकसभा सांसद चुनकर दिल्ली जाते थे, लेकिन वर्तमान में राज्य से एक भी मुस्लिम लोकसभा सांसद नहीं है।

    कांग्रेस द्वारा मुस्लिम उम्मीदवारों को दिए जाने वाले लोकसभा टिकटों की संख्या भी घटकर अब सिर्फ एक रह गई है। महासंघ के अनुसार, “इन परिस्थितियों के कारण संसद में राज्य के मुस्लिम समुदाय का प्रतिनिधित्व अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है।”


    किस बात की दिलाई याद

    महासंघ ने कांग्रेस नेतृत्व को याद दिलाया कि कर्नाटक में कांग्रेस को प्रचंड बहुमत से सत्ता में लाने में मुस्लिम समुदाय ने बेहद निर्णायक भूमिका निभाई थी। समुदाय ने एकजुट होकर और एकमुश्त तरीके से कांग्रेस के पक्ष में मतदान किया। किसी भी अन्य समुदाय की तुलना में मुस्लिमों ने सबसे अधिक अनुपात में कांग्रेस को वोट दिया, जो पार्टी की जीत का एक मुख्य आधार बना।

    महासंघ ने असंतोष जताते हुए कहा, “इतने भारी समर्थन के बावजूद राज्य कैबिनेट, नौकरशाही, प्रमुख सरकारी संस्थानों, विश्वविद्यालयों और बोर्ड-निगमों में मुस्लिमों का प्रतिनिधित्व उनकी आबादी और उनके द्वारा दिए गए समर्थन के मुकाबले बेहद कम है।” बयान में यह भी कहा गया कि समुदाय के भीतर अब यह धारणा घर करने लगी है कि कांग्रेस उन निर्वाचन क्षेत्रों में भी मुस्लिम उम्मीदवारों को मैदान में उतारने से हिचकती है, जहां जीत की संभावना सबसे ज्यादा होती है।


    राहुल गांधी के विचारों का दिया हवाला

    संगठन ने उम्मीद जताई है कि आगामी राज्यसभा चुनावों में इस कमी को दूर कर कांग्रेस नेतृत्व एक सकारात्मक संदेश दे सकता है। उन्होंने हाल ही में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा दिए गए निर्देशों का भी उल्लेख किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, राहुल गांधी ने पार्टी की अल्पसंख्यक शाखा को निर्देश दिए थे कि संगठन के भीतर मुस्लिम समुदाय की भागीदारी और प्रतिनिधित्व को बढ़ाया जाए।

    फेडरेशन ने कहा कि कर्नाटक की सत्ता पर काबिज कांग्रेस को अपने शीर्ष नेतृत्व की इसी सोच और विचारधारा को मजबूत करते हुए राज्यसभा की एक सीट मुस्लिम उम्मीदवार को देनी चाहिए। अब देखना यह होगा कि दिल्ली और बेंगलुरु में बैठा कांग्रेस का आलाकमान इस मांग पर क्या फैसला लेता है।

  • बकरीद का अवकाश 27 या 28 मई को…. जानिए किस दिन रहेगी बैंक की छुट्टी?

    बकरीद का अवकाश 27 या 28 मई को…. जानिए किस दिन रहेगी बैंक की छुट्टी?


    नई दिल्ली।
    बकरीद (Bakrid) यानी ईद-उल-अजहा 2026 (Eid al-Adha 2026) के मौके पर बैंकों की छुट्टी को लेकर लोगों में काफी कन्फ्यूजन है। क्या 27 मई बुधवार यानी आज बैंक बंद रहेंगे या 28 मई गुरुवार को? दरअसल, इस बार चांद दिखने और राज्य सरकारों के अलग-अलग नोटिफिकेशन के चलते तारीखों में फर्क देखने को मिल रहा है। आइए, समझते हैं कि आपके शहर में कब रहेगी बैंकों की छुट्टी (Bank Holiday) और कौन सी सेवाएं जारी रहेंगी।


    केंद्र सरकार ने 28 मई को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया

    केंद्र सरकार (Central Government) ने ईद-उल-अजहा (बकरीद) के अवसर पर अवकाश की तारीख में बदलाव किया है। कार्मिक मंत्रालय ने 22 मई को एक बयान जारी कर कहा कि दिल्ली स्थित सभी केंद्रीय प्रशासनिक कार्यालय 27 मई 2026 के बजाय 28 मई 2026 (गुरुवार) को बंद रहेंगे। यानी केंद्रीय कर्मचारियों के लिए ईद की छुट्टी 28 मई को ही मान्य होगी।


    क्या बैंक 27 मई को बंद रहेंगे या 28 मई को?

    बकरीद पर बैंकों की छुट्टी पूरे देश में एक समान नहीं है। यह मुख्य रूप से तीन बातों पर निर्भर करती है पहला चांद दिखना, दूसरा स्थानीय सरकार की अधिसूचना और तीसरा क्षेत्रीय परंपराएं। इसीलिए कुछ राज्यों में 27 मई को बैंक बंद रहेंगे, तो कुछ जगहों पर 28 मई को छुट्टी रहेगी।


    जम्मू-कश्मीर में बैंकों की छुट्टी आज

    रिजर्व बैंक (RBI) के हॉलीडे कैलेंडर के अनुसार, जम्मू और श्रीनगर में 27 मई 2026 (बुधवार) को बकरीद (ईद-उल-अजहा) के अवसर पर बैंक बंद रहेंगे। इसका मतलब है कि कामर्शियल बैंक, सहकारी बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRB), स्मॉल फाइनेंस बैंक (SFB) और स्थानीय क्षेत्रीय बैंक (LAB) सभी इस दिन बंद रहेंगे।


    केरल में बकरीद पर दो दिन की छुट्टी

    केरल सरकार ने बकरीद के लिए लगातार दो दिनों की सार्वजनिक छुट्टी का ऐलान किया है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा 24 मई को जारी अधिसूचना के अनुसार, राज्य में बकरीद 28 मई को मनाई जा रही है, इसलिए 27 मई और 28 मई दोनों दिन सभी सरकारी कार्यालय, शैक्षणिक संस्थान और सार्वजनिक उपक्रम बंद रहेंगे। यह आदेश निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के तहत आने वाली संस्थाओं पर भी लागू होगा।


    मई 2026 में अब तक कब-कब बंद हुए बैंक

    · 1 मई (शुक्रवार): मजदूर दिवस/बुद्ध पूर्णिमा
    · 9 मई (दूसरा शनिवार)
    · 23 मई (चौथा शनिवार)
    · हर रविवार (4, 11, 18, 25 और 31 मई)
    अब 27 या 28 मई को बकरीद का अवकाश इसमें जुड़ जाएगा।


    आरटीजीएस और एनईएफटी पर कोई असर नहीं

    अगर आपको जरूरी पैसे भेजने हैं तो चिंता न करें। आरटीजीएस और एनईएफटी सेवाएं 24×7 चालू रहती हैं। 14 दिसंबर 2020 से ये सुविधा हर दिन, हर समय उपलब्ध है, फिर चाहे बैंक की छुट्टी ही क्यों न हो।


    क्या ऑनलाइन बैंकिंग छुट्टी वाले दिन काम करेगी?

    हां, ऑनलाइन बैंकिंग सेवाएं बैंक अवकाश के दिन भी बिना रुकावट चलती हैं। आप यूपीआई से पेमेंट, मोबाइल बैंकिंग/नेट बैंकिंग, पैसे का लेन-देन, ऑनलाइन लोन अप्लाई करना और चेकबुक के लिए रिक्वेस्ट आसानी से और घर बैठे अपने मोबाइल से ही कर सकते हैं।


    एटीएम से कैश निकालने में दिक्कत नहीं

    अगर बैंक की शाखाएं बंद हैं, तब भी एटीएम चालू रहते हैं। आप जरूरत के अनुसार कैश निकाल और जमा कर सकते हैं। बस यह जरूर ध्यान रखें कि एटीएम में समय पर कैश भरा हो। बता दें अलग-अलग राज्यों में स्थानीय अवकाश भी लागू रहते हैं। इसलिए बैंक की छुट्टी की सही जानकारी के लिए अपने राज्य का आरबीआई कैलेंडर या संबंधित बैंक की वेबसाइट जरूर चेक कर लें।

  • SIR विवाद पर सुप्रीम कोर्ट आज सुनाएगा फैसला…. जानें क्या है पूरा मामला?

    SIR विवाद पर सुप्रीम कोर्ट आज सुनाएगा फैसला…. जानें क्या है पूरा मामला?


    नई दिल्ली।
    देश में मतदाता सूची (Voter List) के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Review.- SIR) को लेकर विवाद पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) बुधवार को अहम फैसला सुनाने जा रहा है। मामला इस सवाल पर केंद्रित है कि क्या चुनाव आयोग ने अपने संवैधानिक अधिकारों की सीमा लांघते हुए वोटर लिस्ट को लगभग नए सिरे से तैयार करने की कोशिश की। याचिकाकर्ताओं ने अदालत में दावा किया कि आयोग की यह प्रक्रिया लाखों वैध मतदाताओं को मताधिकार से वंचित कर सकती है और इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

    याचिकाओं में कहा गया कि संविधान के अनुच्छेद 326, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और मतदाता पंजीकरण नियम 1960 के तहत चुनाव आयोग को इतनी व्यापक कार्रवाई का अधिकार नहीं है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि SIR के जरिए मतदाता सूचियों का पूरी तरह नया पुनर्गठन किया जा रहा है, जो सामान्य संशोधन प्रक्रिया से अलग है। इस दौरान आधार कार्ड और राशन कार्ड जैसे दस्तावेजों को स्वीकार नहीं किए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं।


    चुनाव आयोग का क्या है पक्ष

    दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने अदालत में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि यह प्रक्रिया मतदाता सूची को शुद्ध और पारदर्शी बनाने के लिए जरूरी है। आयोग का कहना है कि मताधिकार केवल पात्र नागरिकों को ही मिलना चाहिए और फर्जी या अपात्र नाम हटाना उसकी संवैधानिक जिम्मेदारी है। आयोग ने यह भी दलील दी कि वोट देने का अधिकार संविधान और कानून में तय योग्यताओं के अधीन है, इसलिए अपात्र लोगों को सूची से हटाना लोकतंत्र के हित में है।

    इस पूरे विवाद का राजनीतिक असर भी दिखाई दे रहा है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया के जरिए बड़े पैमाने पर असली मतदाताओं के नाम हटाए जा सकते हैं, जबकि सत्तापक्ष इसे चुनावी पारदर्शिता के लिए जरूरी कदम बता रहा है। बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में यह मुद्दा पहले ही राजनीतिक बहस का केंद्र बन चुका है। अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं, क्योंकि यह निर्णय भविष्य में देशभर में मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया और चुनाव आयोग की शक्तियों की सीमा तय कर सकता है।

  • 36 घंटे में बदलेगा मौसम का मिजाज, 17 राज्यों में भारी बारिश-आंधी का अलर्ट; 90 किमी रफ्तार से चल सकती हैं हवाएं

    36 घंटे में बदलेगा मौसम का मिजाज, 17 राज्यों में भारी बारिश-आंधी का अलर्ट; 90 किमी रफ्तार से चल सकती हैं हवाएं


    नई दिल्ली ।
    भीषण गर्मी से जूझ रहे देश के कई हिस्सों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। आगामी 36 घंटों के दौरान मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। कई राज्यों में तेज बारिश, आंधी और वज्रपात की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने देश के अलग-अलग हिस्सों में विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। तेज हवाओं के साथ बारिश का यह दौर कई इलाकों में सामान्य जनजीवन को प्रभावित कर सकता है। किसानों को भी फसलों की सुरक्षा को लेकर सावधान रहने की चेतावनी दी गई है।

    गर्मी के बीच मौसम ने बदली चाल

    लगातार बढ़ते तापमान और लू के हालात के बीच मौसम में यह बदलाव राहत लेकर आ सकता है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार दक्षिण बिहार और आसपास के क्षेत्रों में निचले क्षोभमंडलीय स्तर पर ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय है। इसके साथ ही पश्चिम मध्य बंगाल की खाड़ी और आसपास के इलाकों में भी एक मजबूत मौसम प्रणाली विकसित हुई है। इन प्रणालियों के प्रभाव से पूर्वी और उत्तरी भारत में मौसम तेजी से बदलने की संभावना है।

    मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, झारखंड, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, असम, मेघालय, त्रिपुरा और पश्चिमी मध्य प्रदेश सहित 17 राज्यों में बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया है। कई इलाकों में 80 से 90 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से हवाएं चलने की आशंका जताई गई है।

    पूर्वी राज्यों में ज्यादा असर की आशंका

    मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार पूर्वी भारत के राज्यों में मौसम का प्रभाव अधिक देखने को मिल सकता है। बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के कई जिलों में मध्यम से भारी बारिश की संभावना व्यक्त की गई है। इसके साथ ही बिजली गिरने और वज्रपात का भी खतरा बना रहेगा। ऐसे हालात में लोगों को खुले मैदानों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचने की सलाह दी गई है।

    बिहार के कई जिलों में भारी बारिश और तेज आंधी की संभावना जताई गई है। राजधानी पटना में तापमान में हल्की गिरावट देखने को मिल सकती है। वहीं झारखंड के कई क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ बारिश का असर दिखाई दे सकता है। पश्चिम बंगाल के दक्षिणी और उत्तरी हिस्सों में भी मौसम का प्रभाव बना रहेगा।

    दिल्ली-यूपी समेत उत्तर भारत पर नजर

    राष्ट्रीय राजधानी और उत्तर भारत के कई हिस्सों में भी मौसम तेजी से बदल सकता है। दिल्ली में फिलहाल तापमान ऊंचा बना रहेगा, लेकिन आने वाले दिनों में तेज हवाओं और बारिश की संभावना जताई गई है। उत्तर प्रदेश के पश्चिमी और पूर्वी जिलों में बारिश के साथ तेज हवा चलने के संकेत हैं। कई शहरों में मध्यम से भारी बारिश का पूर्वानुमान जारी किया गया है।

    उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में भी मौसम विभाग ने विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। तेज हवाओं और बारिश के चलते यात्रा करने वाले लोगों को मौसम अपडेट देखने के बाद ही सफर करने की सलाह दी गई है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस बदलाव से कई क्षेत्रों को भीषण गर्मी से राहत मिल सकती है, हालांकि तेज हवाओं और वज्रपात के कारण सतर्कता बेहद जरूरी रहेगी।