Category: National

  • सोमनाथ मंदिर और भाजपा कार्यालयों को बम धमकी, मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल का भी ईमेल में जिक्र, गुजरात में सुरक्षा बढ़ी

    सोमनाथ मंदिर और भाजपा कार्यालयों को बम धमकी, मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल का भी ईमेल में जिक्र, गुजरात में सुरक्षा बढ़ी

    नई दिल्ली ।गुजरात में प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर, अहमदाबाद के खानपुर स्थित भाजपा कार्यालय, गांधीनगर के कोबा स्थित भाजपा मुख्यालय और मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गई हैं। धमकी एक ईमेल के जरिए दी गई, जिसमें राज्य की कई महत्वपूर्ण जगहों पर बम लगाए जाने का दावा किया गया था। सूचना मिलने के बाद पुलिस, अग्निशमन विभाग और बम निरोधक दस्ते ने तत्काल सुरक्षा जांच शुरू की।

    धमकी की जानकारी मिलते ही अहमदाबाद के खानपुर स्थित भाजपा के पुराने कार्यालय में सुरक्षा टीमों ने पहुंचकर पूरे परिसर की तलाशी ली। किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए फायर ब्रिगेड की गाड़ियां भी मौके पर तैनात की गईं। जांच के दौरान स्थानीय भाजपा नेता और अन्य संबंधित अधिकारी भी वहां मौजूद रहे।

    गांधीनगर के कोबा स्थित भाजपा मुख्यालय श्री कमलम की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई। इसके अलावा सोमनाथ मंदिर परिसर में भी विशेष सतर्कता बरतते हुए तलाशी अभियान चलाया गया। संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के निर्देश दिए गए।

    शुरुआती जांच में सामने आया है कि धमकी वाले ईमेल में धार्मिक स्थलों और राजनीतिक नेताओं के अलावा गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, राज्य के पुलिसकर्मियों और देश की खुफिया एजेंसी रॉ का भी उल्लेख किया गया है। ईमेल में आपत्तिजनक और देश विरोधी नारे लिखे होने की बात भी सामने आई है।

    अहमदाबाद के खानपुर स्थित भाजपा कार्यालय को मिली धमकी की सूचना सुबह करीब 9 बजे सामने आई। इसके बाद बम निरोधक दस्ते ने पूरे परिसर की बारीकी से जांच की। तलाशी के दौरान किसी तरह की संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक नहीं मिला। अधिकारियों के अनुसार जांच के बाद फिलहाल स्थिति सामान्य है।

    धमकी भरे ईमेल को लेकर साइबर क्राइम टीम भी सक्रिय हो गई है। जांच एजेंसियां ईमेल भेजने वाले की पहचान करने के प्रयास में जुटी हैं। इसके लिए ईमेल से जुड़े तकनीकी विवरण और आईपी एड्रेस की जांच की जा रही है, ताकि संदेश के स्रोत का पता लगाया जा सके।

    पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि धमकी के पीछे वास्तविक सुरक्षा खतरा था या किसी ने दहशत पैदा करने के उद्देश्य से ईमेल भेजा। इसके साथ ही ईमेल में जिन स्थानों और व्यक्तियों का उल्लेख किया गया है, उनकी सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा की जा रही है।

    फिलहाल सोमनाथ मंदिर, अहमदाबाद और गांधीनगर स्थित भाजपा कार्यालयों सहित अन्य संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा बढ़ाई गई है। बम निरोधक दस्ते और पुलिस की तलाशी में अभी तक कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली है। मामले की जांच जारी है और ईमेल भेजने वाले की पहचान सामने आने के बाद धमकी के पीछे की वास्तविक वजह स्पष्ट होने की उम्मीद है।

  • लखीमपुर के स्कूल में शिक्षिका की गोली मारकर हत्या, आरोपी ने खुद को भी मारी गोली, बच्चों के सामने हुई वारदात

    लखीमपुर के स्कूल में शिक्षिका की गोली मारकर हत्या, आरोपी ने खुद को भी मारी गोली, बच्चों के सामने हुई वारदात


    लखीमपुर खीरी।
    सदर कोतवाली क्षेत्र के चिल्ड्रेन अकादमी स्कूल में सोमवार सुबह करीब साढ़े 11 बजे गोलीकांड से हड़कंप मच गया। एक युवक ने स्कूल की शिक्षिका निशात फातिमा को गोली मार दी और इसके बाद खुद को भी गोली मार ली। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के दौरान स्कूल में बच्चे मौजूद थे, जिससे परिसर में अफरा-तफरी मच गई और बच्चे सहम गए।

    स्कूल की पहली मंजिल पर हुई वारदात

    प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक नौरंगाबाद निवासी सऊद अंसारी स्कूल परिसर में पहुंचा था। वह पहली मंजिल पर गया, जहां क्लासरूम के बाहर शिक्षिका निशात फातिमा से उसकी कहासुनी हुई। इसके बाद उसने तमंचे से शिक्षिका को गोली मार दी। कुछ ही देर बाद युवक ने अपनी कनपटी पर भी गोली चला ली। दोनों ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया।

    घटना के बाद स्कूल में मौजूद बच्चों और स्टाफ के बीच अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही पुलिस अधिकारी और पुलिस बल मौके पर पहुंचा। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए। पुलिस ने स्कूल स्टाफ से पूछताछ शुरू कर दी है और घटना से जुड़े दूसरे पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

    बच्चों को भेजा गया घर

    गोलीकांड की खबर फैलते ही स्कूल के बाहर अभिभावकों और स्थानीय लोगों की भीड़ जुट गई। परिजन अपने बच्चों को लेकर चिंतित नजर आए। घटना के बाद स्कूल प्रबंधन ने बच्चों को घर भेज दिया। पुलिस ने घटनास्थल को सुरक्षित कर जांच शुरू की।

    प्रेम प्रसंग के एंगल पर जांच

    पुलिस को शुरुआती तौर पर घटना के पीछे प्रेम प्रसंग का शक है। निशात फातिमा हिदायत नगर की रहने वाली थीं, जबकि सऊद अंसारी नौरंगाबाद का निवासी बताया गया है। दोनों के मोहल्ले आसपास बताए जा रहे हैं। हालांकि, वारदात की वास्तविक वजह की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

    एसपी ने बताया- पहले शिक्षिका को मारी गोली

    पुलिस अधीक्षक डॉ. ख्याति गर्ग के मुताबिक युवक स्कूल परिसर में आया था और पहली मंजिल पर शिक्षिका से उसकी कहासुनी हुई। इसके बाद उसने पहले शिक्षिका को गोली मारी और फिर खुद को गोली मार ली। दोनों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है।

    घटना ने स्कूल परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि युवक हथियार लेकर स्कूल के अंदर तक कैसे पहुंचा और वारदात से पहले उसके और शिक्षिका के बीच क्या बातचीत हुई थी। सीसीटीवी फुटेज और मौके से जुटाए गए साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है।

  • यूपी के चार हिस्सों में बंटने का ओपी राजभर का दावा, बोले- पूर्वांचल बना तो राजभर समाज का बेटा होगा पहला CM

    यूपी के चार हिस्सों में बंटने का ओपी राजभर का दावा, बोले- पूर्वांचल बना तो राजभर समाज का बेटा होगा पहला CM

    अंबेडकरनगर। उत्तर प्रदेश के विभाजन और अलग पूर्वांचल राज्य की मांग को लेकर कैबिनेट मंत्री एवं सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने बड़ा राजनीतिक दावा किया है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश का भविष्य में चार हिस्सों में बंटना तय है और यदि पूर्वांचल अलग राज्य बनता है तो वहां पहला मुख्यमंत्री राजभर समाज से होगा। राजभर ने यह भी कहा कि जिस राजनीतिक दल के साथ उनका गठबंधन होगा, पूर्वांचल में मुख्यमंत्री पद के लिए उनकी दावेदारी रहेगी।

    चार अलग क्षेत्रों की मांग का किया जिक्र
    अंबेडकरनगर में बातचीत के दौरान राजभर ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है और इसकी विशाल आबादी को देखते हुए भविष्य में इसका पुनर्गठन होना तय है। उन्होंने बुंदेलखंड में अलग राज्य की मांग, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हरित प्रदेश की मांग के साथ मध्यांचल और पूर्वांचल को अलग राज्य बनाने की मांग का भी उल्लेख किया।

    राजभर के मुताबिक, पूर्वांचल के छह मंडलों में राजभर समाज की बड़ी आबादी है। उनका कहना है कि यदि पूर्वांचल को अलग राज्य का दर्जा मिलता है तो वहां के राजनीतिक समीकरणों में राजभर समाज की भूमिका महत्वपूर्ण होगी और गठबंधन की स्थिति में मुख्यमंत्री पद पर समाज की दावेदारी मजबूत रहेगी।

    सपा पर माफिया संरक्षण का आरोप
    राजभर ने समाजवादी पार्टी और उसके अध्यक्ष अखिलेश यादव पर भी निशाना साधा। सपा के खिलाफ सामने आए उन पोस्टरों का जिक्र करते हुए, जिनमें अखिलेश यादव के साथ अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी और आजम खान की तस्वीरें दिखाई गई हैं, उन्होंने पोस्टरों में लगाए गए आरोपों का समर्थन किया।

    उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सरकार के कार्यकाल में अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी जैसे अपराधियों को संरक्षण मिला। राजभर ने इसी आधार पर सपा सरकार की पहचान को अपराध और माफियाराज से जोड़ने का दावा किया। साथ ही उन्होंने सपा के पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक के राजनीतिक नारे पर भी कटाक्ष किया।

    अखिलेश-ओवैसी गठबंधन पर भी टिप्पणी
    असदुद्दीन ओवैसी और अखिलेश यादव के बीच संभावित गठबंधन को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी राजभर ने अपनी राय रखी। उन्होंने दावा किया कि अखिलेश यादव और राहुल गांधी खुद को मुस्लिम समाज का राजनीतिक नेतृत्व करने वाला मानते हैं, जबकि ओवैसी चाहते हैं कि मुस्लिम समाज से कोई नेता मुख्यमंत्री बने।

    राजभर के मुताबिक, मुख्यमंत्री पद और राजनीतिक नेतृत्व को लेकर दोनों पक्षों की सोच अलग है, इसलिए अखिलेश यादव और ओवैसी के बीच गठबंधन होना मुश्किल है। यह राजभर का राजनीतिक आकलन है; ओवैसी की ओर से गठबंधन को लेकर हालिया बयान में 2 अक्टूबर तक इंतजार करने की बात सामने आई है।

    पहले भी उठा है यूपी के पुनर्गठन का मुद्दा
    उत्तर प्रदेश को अलग-अलग राज्यों में बांटने की मांग पहले भी राजनीतिक बहस का हिस्सा रही है। राजभर के ताजा बयान में चार हिस्सों के रूप में पूर्वांचल, मध्यांचल, बुंदेलखंड और पश्चिमी क्षेत्र की मांग का संदर्भ सामने आया है। हालांकि, फिलहाल उत्तर प्रदेश के चार राज्यों में विभाजन को लेकर कोई प्रशासनिक फैसला नहीं हुआ है। राजभर का बयान राजनीतिक मांग और भविष्य की संभावित स्थिति को लेकर उनका दावा है।

  • दिल्ली SIR में आडवाणी और जयशंकर समेत कई प्रमुख नामों को नोटिस, खरगे ने प्रक्रिया पर उठाए गंभीर सवाल

    दिल्ली SIR में आडवाणी और जयशंकर समेत कई प्रमुख नामों को नोटिस, खरगे ने प्रक्रिया पर उठाए गंभीर सवाल


    नई दिल्ली ।
    दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। इस प्रक्रिया के तहत पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और चुनाव आयुक्त एस.एस. संधू समेत कई प्रमुख मतदाताओं को विवरणों में विसंगतियों के कारण नोटिस जारी किए गए हैं।

    चुनावी अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली में SIR के तहत 33.13 लाख से अधिक मतदाताओं को उनके विवरण में मिली विसंगतियों के संबंध में नोटिस भेजे गए हैं। इनमें कई मामलों में मौजूदा विवरणों का वर्ष 2002 के पिछले गहन पुनरीक्षण के रिकॉर्ड से मेल नहीं होना सामने आया है। नोटिस जारी होने का अर्थ सीधे तौर पर मतदाता सूची से नाम हटाया जाना नहीं है।

    इस मुद्दे पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर निशाना साधा है। खरगे ने कहा कि बिहार से शुरू हुई SIR प्रक्रिया अब दिल्ली तक पहुंच गई है और प्रमुख लोगों को नोटिस मिलने के बाद यह स्पष्ट हो रहा है कि कांग्रेस इस प्रक्रिया को शुरुआत से ही त्रुटिपूर्ण क्यों बता रही थी।

    खरगे ने SIR को ‘फ्रैंकनस्टीन मॉन्स्टर’ बताते हुए कहा कि जिस प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस पहले से सवाल उठाती रही है, वह अब उन्हीं लोगों को प्रभावित कर रही है, जिनके राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन में महत्वपूर्ण स्थान रहे हैं। उन्होंने इस संदर्भ में लालकृष्ण आडवाणी, एस. जयशंकर और अन्य प्रमुख लोगों को मिले नोटिस का उल्लेख किया।

    उन्होंने यह भी कहा कि पहले भारत रत्न से सम्मानित वैज्ञानिक और पूर्व नौसेना प्रमुख जैसे लोगों को भी नोटिस जारी किए जा चुके हैं। खरगे ने सवाल उठाया कि जब प्रमुख लोगों के मतदाता विवरण में भी विसंगतियां पाई जा रही हैं, तो SIR की प्रक्रिया को किस तरह देखा जाना चाहिए।

    कांग्रेस अध्यक्ष ने चुनाव आयोग की ओर से ‘VIP’ या ‘मार्क्ड’ मतदाताओं के संदर्भ का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने सवाल किया कि क्या देश की सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार व्यवस्था में अब VIP मतदाता और सामान्य मतदाता जैसी अलग-अलग श्रेणियां बनाई जा रही हैं।

    खरगे ने संविधान में निहित ‘एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य’ के सिद्धांत का उल्लेख करते हुए पूछा कि क्या किसी विशेष श्रेणी के मतदाता को अलग महत्व दिया जा सकता है। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि यदि सभी नागरिकों का मताधिकार समान है तो मतदाता सूची की जांच और उससे जुड़े संचार में अलग-अलग व्यवहार क्यों दिखाई देता है।

    उन्होंने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मामलों का भी उल्लेख किया। खरगे के मुताबिक, जिन मामलों में अपील पर फैसला हो चुका है, उनमें 93 प्रतिशत मामलों में अपील करने वालों के पक्ष में निर्णय हुआ है। उनके अनुसार, इससे 1,13,943 लोगों के दोबारा मतदाता सूची में शामिल होने का रास्ता साफ हुआ है।

    खरगे ने SIR के पहले तीन चरणों से जुड़े आंकड़ों का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 13.8 करोड़ मतदाता सूची से बाहर हुए, जो 94.78 करोड़ मतदाताओं की कुल संख्या का लगभग 14.61 प्रतिशत है।

    हालांकि, SIR के तहत नोटिस मिलने को लेकर चुनावी प्रक्रिया में यह स्पष्ट किया गया है कि नोटिस अंतिम कार्रवाई नहीं है। संबंधित मतदाताओं को अपने दस्तावेज और जवाब प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाता है। दस्तावेजों के सत्यापन और आपत्तियों पर विचार के बाद ही मतदाता सूची में अंतिम निर्णय लिया जाता है।

    दिल्ली में SIR को लेकर जारी यह विवाद अब मतदाता सूची के सत्यापन, दस्तावेजों की जांच, मताधिकार और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता जैसे मुद्दों तक पहुंच गया है। एक तरफ कांग्रेस ने प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं, वहीं चुनावी प्रक्रिया के तहत नोटिस को विवरणों के सत्यापन का हिस्सा बताया जा रहा है।

  • मेरठ में नितिन नवीन-योगी की मौजूदगी में मिशन-2027 पर मंथन, युवाओं से बोले- आप ही विकास यात्रा के असली नायक

    मेरठ में नितिन नवीन-योगी की मौजूदगी में मिशन-2027 पर मंथन, युवाओं से बोले- आप ही विकास यात्रा के असली नायक


    मेरठ। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के दो दिवसीय पश्चिमी उत्तर प्रदेश दौरे के पहले दिन सोमवार को मेरठ में संगठन और युवाओं से जुड़े कार्यक्रम हुए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में सुभारती विश्वविद्यालय में युवा संवाद के साथ संगठनात्मक बैठकों में बूथ से जिला स्तर तक की तैयारियों की समीक्षा की गई। नितिन नवीन ने युवाओं को विकास और राष्ट्र निर्माण से जोड़ते हुए कहा कि प्रदेश की विकास यात्रा के असली नायक युवा हैं।

    नितिन नवीन 21 और 22 सितंबर को मेरठ और सहारनपुर के दौरे पर हैं। इस दौरान वे पार्टी के पदाधिकारियों, पूर्व जनप्रतिनिधियों, शक्ति केंद्र संयोजकों और जमीनी कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद कर रहे हैं। मेरठ में उनके साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी भी कार्यक्रमों में शामिल हुए।

    युवा संवाद में रोजगार और विकास पर बात
    स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय के मांगल्य कन्वेंशन सेंटर में आयोजित युवा संवाद में नितिन नवीन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में हो रहे विकास कार्यों और बेहतर कनेक्टिविटी का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कनेक्टिविटी बढ़ने से विकास के साथ रोजगार के नए अवसर भी बन रहे हैं। उत्तर प्रदेश को बड़ी अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ता बताते हुए उन्होंने युवाओं को इस बदलाव का प्रमुख हिस्सा बताया।

    उन्होंने कहा कि युवाओं को केवल देश का भविष्य मानना पर्याप्त नहीं है। युवा आज की मौजूदा ताकत हैं और उनकी प्रतिभा का सही दिशा में इस्तेमाल राष्ट्र निर्माण को गति दे सकता है। उन्होंने युवाओं से अपनी क्षमता को सकारात्मक दिशा में लगाने और देश के विकास में योगदान देने का आह्वान किया।

    मेरठ की खेल पहचान का जिक्र
    नितिन नवीन ने मेरठ को खेल नगरी बताते हुए खेल सामग्री के निर्माण में शहर की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत से निर्यात होने वाली खेल सामग्री, जिसमें क्रिकेट बैट, हॉकी स्टिक और बैडमिंटन से जुड़ी सामग्री शामिल है, उसमें मेरठ की हिस्सेदारी करीब 25 प्रतिशत है।

    उन्होंने 250 करोड़ रुपए की लागत से तैयार हो रहे मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में पहला सत्र शुरू हो चुका है और इससे स्थानीय स्तर की खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।

    युवाओं को दिलाए तीन संकल्प
    युवा संवाद के दौरान नितिन नवीन ने युवाओं से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जब युवा सोचता है तो देश आगे बढ़ता है और जब युवा संकल्प लेता है तो नए युग का निर्माण होता है। इसी क्रम में उन्होंने युवाओं को तीन प्रमुख संकल्प भी दिलाए और अपनी प्रतिभा का सही दिशा में उपयोग करने की बात कही।

    शहीद स्मारक से शुरू हुआ कार्यक्रम
    नितिन नवीन के मेरठ कार्यक्रम की शुरुआत शहीदों को श्रद्धांजलि देने के साथ हुई। उन्होंने कारगिल स्मृति उपवन और इंडियन नेशनल आर्मी (INA) शहीद स्मारक पर पहुंचकर अमर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद युवाओं के साथ रोजगार, स्टार्टअप और विकास से जुड़े विषयों पर संवाद हुआ। कार्यक्रम में 2,000 से अधिक युवाओं की मौजूदगी रही।

    उन्होंने उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे, नमो भारत (रैपिड रेल) और मेरठ मेट्रो जैसी ढांचागत परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी परियोजनाओं से विकास के नए रास्ते खुलते हैं।

    संगठन की जमीनी तैयारियों पर भी मंथन
    मेरठ दौरे का दूसरा प्रमुख हिस्सा संगठनात्मक बैठकें रहीं। नितिन नवीन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पश्चिमी यूपी के पूर्व पदाधिकारियों, सांसदों और विधायकों के साथ बैठक की। इसमें चुनावी तैयारियों के साथ बूथ, शक्ति केंद्र, मंडल और जिला स्तर पर संगठन की गतिविधियों की समीक्षा की गई। पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद के जरिए जमीनी स्थिति की जानकारी लेने पर भी जोर रहा।

    कार्यक्रम स्थल पर नितिन नवीन के स्वागत के लिए बुलडोजर भी लगाए गए। वहीं सुरक्षा और व्यवस्थाओं के मद्देनजर कार्यक्रम स्थल पर प्रवेश, निकास, पार्किंग, पेयजल और अन्य इंतजामों की समीक्षा की गई।

    छात्रों में दिखा उत्साह
    सुभारती विश्वविद्यालय में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और नितिन नवीन के कार्यक्रम को लेकर विद्यार्थियों में भी उत्साह दिखाई दिया। युवा संवाद में शामिल होने के लिए छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। विश्वविद्यालय परिसर में पूरे दिन चहल-पहल बनी रही।

    औघड़नाथ मंदिर जाएंगे, आज मेरठ में प्रवास
    नितिन नवीन मेरठ में औघड़नाथ मंदिर में दर्शन-पूजन भी करेंगे और सोमवार रात मेरठ में प्रवास करेंगे। इसके बाद 22 सितंबर को वे सहारनपुर के लिए रवाना होंगे। वहां भाजपा के एक कार्यकर्ता के घर भोजन करने के बाद पूर्व पदाधिकारियों, सांसदों, विधायकों और जिलास्तरीय संगठन के पदाधिकारियों के साथ संवाद करेंगे। इसके बाद शाकंभरी देवी के दर्शन कर दिल्ली लौटने का कार्यक्रम है।

    इस तरह दो दिन के दौरे में मेरठ से सहारनपुर तक संगठन की जमीनी सक्रियता, कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जुड़े मुद्दों पर पार्टी नेतृत्व की बैठकें प्रस्तावित हैं।

  • अखिलेश के ‘PDA रथ’ के भगवा रंग पर मायावती का हमला, पूछा- क्या मुस्लिम वोटरों से भरोसा उठ गया?

    अखिलेश के ‘PDA रथ’ के भगवा रंग पर मायावती का हमला, पूछा- क्या मुस्लिम वोटरों से भरोसा उठ गया?


    लखनऊ।
    उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने सोमवार को अखिलेश यादव के प्रस्तावित ‘PDA रथ’ के रंग को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि रथ में सपा के पारंपरिक लाल रंग की तुलना में आरएसएस-भाजपा से जुड़ा भगवा रंग ज्यादा नजर आ रहा है। इसी आधार पर उन्होंने सवाल किया कि क्या सपा चुनावी लाभ के लिए अपनी पहचान और रणनीति बदल रही है या उसका मुस्लिम मतदाताओं से भरोसा कम हो गया है।

    ‘रंग बदलने’ की रणनीति पर सवाल
    मायावती ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी के लिए प्रचारित किए जा रहे PDA रथ में सपा का लाल रंग कम और भगवा रंग ज्यादा दिखाई दे रहा है। उन्होंने इसे चुनावी रणनीति से जोड़ते हुए सपा नेतृत्व पर निशाना साधा।

    मायावती ने यह भी दावा किया कि पिछले चुनावों में मुस्लिम समाज ने बड़े पैमाने पर सपा का समर्थन किया, लेकिन इसके बावजूद भाजपा को सत्ता में आने से नहीं रोका जा सका। उन्होंने मुस्लिम मतदाताओं से सवाल किया कि वे बार-बार सपा को वोट देकर अपना वोट क्यों खराब करें। यह मायावती का राजनीतिक दावा है; इसके समर्थन में उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में सपा के पिछले चुनावी प्रदर्शन और भाजपा की सरकार बनने का संदर्भ दिया।

    मुस्लिम वोट को लेकर भी साधा निशाना
    बसपा प्रमुख ने दावा किया कि मुस्लिम मतदाताओं का रुख अब बसपा की ओर बदल रहा है। उन्होंने इसकी तुलना ऊंची जातियों के ब्राह्मण मतदाताओं के पूर्व में बसपा से दूर होने से की। यह भी मायावती का चुनावी आकलन है, न कि स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य।

    उन्होंने उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और विकास के मुद्दे पर भी अपनी पार्टी के शासनकाल का उल्लेख किया। मायावती ने कहा कि उनके मुताबिक बसपा सरकार के दौरान अपराध नियंत्रण, शांति-व्यवस्था, जनकल्याण और विकास के क्षेत्र में काम हुआ था।

    PDA की परिभाषा पर भी अखिलेश को घेरा
    मायावती ने सपा के PDA फॉर्मूले की व्याख्या पर भी सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी जरूरत के हिसाब से सपा ने PDA के अर्थ और सामाजिक समीकरणों को अलग-अलग तरीके से पेश किया है।

    उन्होंने कहा कि कभी इसे ‘पिछड़ा, दलित’, कभी ‘पंडित’ से जोड़कर बताया गया और बाद में खुद को अंबेडकरवादी दिखाने के प्रयास भी किए गए। मायावती ने अखिलेश यादव और सपा नेताओं के नीले रंग के कपड़ों में तस्वीरें खिंचवाने का भी जिक्र किया और दावा किया कि जनता ने इसे स्वीकार नहीं किया।

    बसपा की विचारधारा का किया जिक्र
    मायावती ने अपनी पार्टी की विचारधारा का उल्लेख करते हुए कहा कि बसपा ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के सिद्धांत पर काम करती है। उन्होंने पार्टी को अंबेडकरवादी बताते हुए सभी वर्गों के लिए रोजगार, सम्मान और सामाजिक भागीदारी की बात कही।

    24 सितंबर से अखिलेश का PDA रथ अभियान
    इस बीच अखिलेश यादव 24 सितंबर को PDA रथ के जरिए अपने चुनावी अभियान की शुरुआत करने वाले हैं। रिपोर्टों के मुताबिक उनका कार्यक्रम रायबरेली में हरचंदपुर के विधायक राहुल लोधी के आवास से जुड़ा है। इसी प्रस्तावित अभियान के रथ के रंग को लेकर मायावती ने सवाल उठाए हैं।

    उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सपा और बसपा के बीच यह बयानबाजी दोनों दलों के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का एक और उदाहरण है। फिलहाल मायावती के हमले पर अखिलेश यादव या समाजवादी पार्टी की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

  • यूपी में सपा के खिलाफ पोस्टर वार, अखिलेश के साथ आजम-अतीक-मुख्तार की तस्वीरें, लिखा- ‘यही चलाते थे सरकार’

    यूपी में सपा के खिलाफ पोस्टर वार, अखिलेश के साथ आजम-अतीक-मुख्तार की तस्वीरें, लिखा- ‘यही चलाते थे सरकार’


    लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी और उसके प्रमुख अखिलेश यादव को निशाना बनाकर पोस्टर अभियान सामने आया है। सोमवार को लखनऊ समेत कई शहरों में लगाए गए पोस्टरों में अखिलेश यादव के साथ आजम खान, अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी की तस्वीरें लगाई गई हैं। पोस्टरों पर ‘आजम, अतीक और मुख्तार, यही चलाते थे सरकार’ और ‘अखिलेश के माफिया, माफिया के अखिलेश’ जैसे नारे लिखे गए हैं।

    ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन माफिया’ का नारा
    इन पोस्टरों में ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन माफिया’ का स्लोगन भी इस्तेमाल किया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, अवध से लेकर पूर्वांचल और पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक अलग-अलग क्षेत्रों के लिए नामों की सूची वाले पोस्टर लगाए गए हैं। इनमें अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी और आजम खान के अलावा कई अन्य नाम भी शामिल हैं। पोस्टरों के जरिए सपा शासनकाल की कानून-व्यवस्था और कथित माफिया प्रभाव को लेकर सवाल उठाने की कोशिश की गई है।

    लखनऊ से कई जिलों तक पहुंचे पोस्टर
    लखनऊ के अलावा उन्नाव, इटावा, सीतापुर, बरेली, मेरठ, आजमगढ़ और गाजीपुर समेत कई शहरों में ऐसे पोस्टर सामने आने की रिपोर्ट है। इस अभियान में सपा शासनकाल से जुड़े कथित माफिया नेटवर्क को मुद्दा बनाकर अखिलेश यादव को घेरने की कोशिश की गई है। हालांकि, पोस्टरों पर उन्हें लगाने वाले किसी संगठन या व्यक्ति का नाम स्पष्ट नहीं है। इसलिए इन पोस्टरों के पीछे किसका हाथ है, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

    गोंडा में सपा कार्यकर्ताओं ने पोस्टर फाड़े
    गोंडा में अखिलेश यादव के खिलाफ लगाए गए पोस्टरों को लेकर सपा कार्यकर्ताओं में नाराजगी दिखाई दी। बालपुर चौराहे पर सपा नेता लालचंद्र गौतम ने एक पोस्टर फाड़ दिया। पोस्टर में आजम खान, अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी की तस्वीरों के साथ वही नारे लिखे गए थे।

    अंबेडकरनगर में तीन जगह होर्डिंग
    अंबेडकरनगर के अकबरपुर में शिव बाबा धाम के आसपास तीन स्थानों पर रात में विवादित होर्डिंग लगाए गए। इनमें अखिलेश यादव के साथ अतीक अहमद, आजम खान, मुख्तार अंसारी, गुलशन यादव, मित्रसेन यादव और रिजवान जहीर की तस्वीरें लगाई गई थीं। होर्डिंग पर ‘माफियाराज और अखिलेश, लूट लिया था पूरा प्रदेश’ लिखा गया था। सुबह जानकारी सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और सपा कार्यकर्ताओं ने इन्हें हटाया। पुलिस और एलआईयू ने भी मौके पर पहुंचकर जांच की, लेकिन पोस्टर लगाने वालों का पता नहीं चल सका।

    अयोध्या में राम मंदिर मार्ग पर भी पोस्टर
    अयोध्या में राम मंदिर जाने वाले प्रमुख मार्ग टेढ़ी बाजार ओवरब्रिज पर भी सपा के खिलाफ पोस्टर लगाया गया। इसमें अतीक अहमद, आजम खान और मुख्तार अंसारी की तस्वीरों के साथ ‘अखिलेश के माफिया, माफिया के अखिलेश’ और ‘आजम, अतीक और मुख्तार, यही चलाते थे सरकार’ जैसे नारे लिखे थे। पोस्टर की जानकारी मिलने के बाद प्रशासन ने शहर के विभिन्न स्थानों पर लगाए गए पोस्टर-बैनर हटवाए। लगाने वालों की पहचान अभी सामने नहीं आई है।

    चुनाव से पहले कानून-व्यवस्था पर सियासी घेराबंदी
    2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सामने आए इस पोस्टर अभियान में सपा के पिछले शासनकाल की कानून-व्यवस्था और अपराध से जुड़े मुद्दों को चुनावी बहस के केंद्र में लाने की कोशिश दिखाई दे रही है। दूसरी ओर, पोस्टर लगाने वाले की पहचान और उसके पीछे किसी राजनीतिक संगठन की भूमिका की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। इसलिए पोस्टरों में लगाए गए आरोपों को संबंधित पोस्टर के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए। आने वाले दिनों में इस अभियान पर सपा की आधिकारिक प्रतिक्रिया और प्रशासन की जांच से यह स्पष्ट हो सकता है कि इन पोस्टरों के पीछे कौन है।

  • आगरा में नाला निर्माण के दौरान मिट्टी की ढाय गिरी, 3 मजदूर दबे, 2 की मौत, ठेकेदार की हालत गंभीर

    आगरा में नाला निर्माण के दौरान मिट्टी की ढाय गिरी, 3 मजदूर दबे, 2 की मौत, ठेकेदार की हालत गंभीर

    आगरा। सिकंदरा औद्योगिक क्षेत्र में सोमवार दोपहर नाला निर्माण के दौरान अचानक मिट्टी की ढाय गिरने से बड़ा हादसा हो गया। मिट्टी के नीचे तीन मजदूर दब गए। पुलिस और राहत टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद तीनों को बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने विकास और सुशील को मृत घोषित कर दिया। वहीं ठेकेदार अनुज की हालत गंभीर बताई जा रही है।

    शटरिंग प्लेट की वेल्डिंग के दौरान हादसा
    हादसा सिकंदरा थाना क्षेत्र के औद्योगिक इलाके में सब्जी मंडी के पास पेट्रोल पंप के बगल में हुआ। यहां नाला निर्माण का काम चल रहा था और मजदूर नाले की दीवार बनाने के लिए शटरिंग की प्लेट की वेल्डिंग कर रहे थे।

    इसी दौरान अचानक मिट्टी की ढाय भरभराकर मजदूरों के ऊपर गिर गई। कुछ ही पल में तीन मजदूर मिट्टी में दब गए। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। आसपास मौजूद लोगों ने पुलिस को सूचना दी।

    तीनों को बाहर निकालकर अस्पताल भेजा
    सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और राहत कार्य शुरू कराया। काफी मशक्कत के बाद मिट्टी में दबे तीनों लोगों को बाहर निकाला गया। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया। पुलिस के मुताबिक, हादसे में विकास पुत्र राजेंद्र (22) और सुशील की मौत हो गई। वहीं अनुज पुत्र जयपाल (30), निवासी मुजफ्फरनगर, गंभीर रूप से घायल है।

    अनुज ठेकेदार, साथ में काम कर रहे थे 7 मजदूर
    पुलिस के अनुसार अनुज ठेकेदार है और उसके साथ सात मजदूर काम कर रहे थे। नाले की दीवार के निर्माण के लिए शटरिंग की प्लेट की वेल्डिंग का काम चल रहा था। इसी दौरान मिट्टी की ढाय गिरने से यह हादसा हुआ। पुलिस ने घटनास्थल का जायजा लिया है और हादसे के कारणों की जांच की जा रही है।

  • हामिद अंसारी के नेहरू वाले बयान पर BJP का कांग्रेस पर हमला, सुधांशु त्रिवेदी ने लगाए वैचारिक बदलाव के आरोप

    हामिद अंसारी के नेहरू वाले बयान पर BJP का कांग्रेस पर हमला, सुधांशु त्रिवेदी ने लगाए वैचारिक बदलाव के आरोप

    नई दिल्ली । पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के जवाहरलाल नेहरू से जुड़े एक पुराने कथन के संदर्भ के बाद भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बहस तेज हो गई है। भाजपा सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने 21 सितंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस में अंसारी के बयान को कांग्रेस की मौजूदा वैचारिक दिशा से जोड़ते हुए कई सवाल उठाए।

    विवाद की शुरुआत अंसारी के उस बयान से हुई, जिसमें उन्होंने संविधान विशेषज्ञ और लेखक ए.जी. नूरानी की 2019 में प्रकाशित पुस्तक ‘द आरएसएस: ए मेनेस टू इंडिया’ का हवाला दिया। अंसारी ने पुस्तक में दर्ज एक संदर्भ के आधार पर नेहरू के विचारों का उल्लेख किया था। यह संदर्भ तत्कालीन विदेश सचिव जगत सिंह गुंडेविया द्वारा दर्ज किए गए एक आधिकारिक रिकॉर्ड से जुड़ा बताया गया है।

    अंसारी के अनुसार, उस रिकॉर्ड में नेहरू के हवाले से कहा गया था कि भारत के लिए बड़ा खतरा कम्युनिज्म नहीं, बल्कि हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता है। अंसारी ने यह बात नागरिक राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद से जुड़े व्यापक संदर्भ में रखी थी।

    अंसारी के बयान के बाद भाजपा की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि अंसारी ने जिस पुस्तक और नेहरू के कथन का हवाला दिया, उससे कांग्रेस की मौजूदा विचारधारा पर सवाल उठते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आज की कांग्रेस अति-वामपंथ की दिशा में आगे बढ़ गई है।

    त्रिवेदी ने अपने बयान में कांग्रेस को ‘मुस्लिम लीग माओइस्ट कांग्रेस’ कहा। उन्होंने यह भी कहा कि अंसारी के संदर्भ से यह बात सामने आती है कि नेहरू के दौर में कम्युनिज्म को भी एक खतरे के रूप में देखा जाता था। इसी आधार पर उन्होंने कांग्रेस की वर्तमान राजनीतिक दिशा को लेकर सवाल खड़े किए।

    भाजपा नेता ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के राजनीतिक विमर्श को भी इस बहस से जोड़ते हुए निशाना साधा। उनका कहना था कि राहुल गांधी की ओर से व्यक्त किए जाने वाले विचारों को नेहरू के राजनीतिक संदर्भ से जोड़कर देखा जाना चाहिए। यह टिप्पणी भाजपा और कांग्रेस के बीच जारी वैचारिक बहस का हिस्सा बन गई है।

    त्रिवेदी ने केरल में कांग्रेस और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के राजनीतिक गठबंधन का भी उल्लेख किया। उन्होंने मुस्लिम लीग की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और मोहम्मद इस्माइल से जुड़े राजनीतिक इतिहास का हवाला देते हुए कांग्रेस के मौजूदा गठबंधन पर सवाल उठाए।

    उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि आज की इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग को जिन्ना की मुस्लिम लीग से अलग पहचान के रूप में देखा जाता है, तो कांग्रेस को भी उसके ऐतिहासिक राजनीतिक संदर्भ से अलग करके देखने पर सवाल उठ सकते हैं।

    इस पूरे विवाद का केंद्र नेहरू से जुड़ा वह ऐतिहासिक कथन है, जिसे हामिद अंसारी ने ए.जी. नूरानी की पुस्तक के हवाले से सामने रखा। भाजपा ने इसे कांग्रेस की वैचारिक दिशा पर हमला करने के आधार के रूप में इस्तेमाल किया है। वहीं, इस बहस में नेहरू के कथन के ऐतिहासिक संदर्भ और वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आए हैं।

    नेहरू के पुराने कथन से शुरू हुई यह राजनीतिक बहस अब कांग्रेस की वर्तमान विचारधारा, नागरिक राष्ट्रवाद, हिंदू दक्षिणपंथी राजनीति और कांग्रेस के राजनीतिक गठबंधनों तक पहुंच गई है। हामिद अंसारी की टिप्पणी और सुधांशु त्रिवेदी की प्रतिक्रिया ने इस मुद्दे को मौजूदा राजनीतिक विमर्श में चर्चा का विषय बना दिया है।

  • लद्दाख हिंसा की पहली बरसी पर सोनम वांगचुक का शहीद दिवस कार्यक्रम, 23 सितंबर को 20 किलोमीटर की सांकेतिक पदयात्रा

    लद्दाख हिंसा की पहली बरसी पर सोनम वांगचुक का शहीद दिवस कार्यक्रम, 23 सितंबर को 20 किलोमीटर की सांकेतिक पदयात्रा

    नई दिल्ली ।लद्दाख में पिछले साल हुई हिंसा में मारे गए लोगों की पहली बरसी के मौके पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 23 सितंबर को एक दिवसीय सांकेतिक पदयात्रा निकालने का ऐलान किया है। इसके साथ ही 24 सितंबर को शहीद दिवस से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य मृतकों को श्रद्धांजलि देने के साथ उनके परिवारों के लिए उचित मुआवजे और संबंधित मामलों में दर्ज मुकदमों को वापस लेने की मांग उठाना है।

    वांगचुक के अनुसार, 24 सितंबर को हुई मौतों की पहली बरसी पर उन लोगों को याद किया जाएगा, जिन्होंने लद्दाख की संस्कृति और पर्यावरण की रक्षा तथा संरक्षण के लिए अपनी जान गंवाई। इस अवसर पर शांतिपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किए जाने की योजना है।

    पहले वांगचुक ने 19 से 23 सितंबर तक छह दिवसीय पदयात्रा की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि यदि सरकार की ओर से ठोस आश्वासन नहीं मिलता है तो यह यात्रा निकाली जाएगी। बाद में उन्होंने अपने कार्यक्रम में बदलाव करते हुए छह दिवसीय यात्रा को स्थगित कर दिया।

    अब तय कार्यक्रम के मुताबिक 23 सितंबर को केवल एक दिन की सांकेतिक पदयात्रा होगी। यह पदयात्रा लेह की दिशा में निकाली जाएगी और इसकी दूरी करीब 20 किलोमीटर बताई गई है। कार्यक्रम को शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित करने की बात कही गई है।

    वांगचुक लंबे समय से लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और क्षेत्र को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग उठाते रहे हैं। उनके आंदोलन में लद्दाख के लिए राजनीतिक अधिकारों के साथ क्षेत्र की संस्कृति और पर्यावरण से जुड़े मुद्दे भी प्रमुख रहे हैं।

    शहीद दिवस कार्यक्रम के तहत पिछले वर्ष मारे गए लोगों के परिवारों के लिए उचित मुआवजे की मांग दोहराई जाएगी। इसके अलावा मृतकों से जुड़े मामलों में दर्ज मुकदमों को वापस लेने की मांग भी कार्यक्रम का हिस्सा होगी।

    इस बीच लद्दाख के प्रतिनिधिमंडल और केंद्र सरकार के बीच बातचीत का मुद्दा भी चर्चा में है। गृह मंत्रालय की सब-कमेटी के साथ बैठक के बाद लद्दाख के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्र सरकार की ओर से प्रस्तावित चुनी हुई संस्था से संबंधित ड्राफ्ट पेश नहीं किए जाने पर निराशा जताई थी।

    नए कार्यक्रम के अनुसार, 23 सितंबर को कारगिल में शांतिपूर्ण विरोध रैली भी आयोजित की जाएगी। इसके बाद 24 सितंबर को शहीद दिवस से जुड़े अन्य कार्यक्रम होंगे। इस दौरान पिछले साल की घटनाओं में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दी जाएगी और उनकी मांगों को फिर से सामने रखा जाएगा।

    वांगचुक को पिछले वर्ष लद्दाख में हुई हिंसा के सिलसिले में नेशनल सिक्योरिटी एक्ट के तहत हिरासत में लिया गया था और वह करीब छह महीने तक हिरासत में रहे थे। अब पहली बरसी के मौके पर प्रस्तावित कार्यक्रमों के जरिए लद्दाख से जुड़ी लंबित मांगों को फिर सार्वजनिक रूप से उठाने की तैयारी है।