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  • रेजीनगर उपचुनाव से पहले हुमायूं कबीर का बड़ा ऐलान, बेटे के लिए प्रचार से बनाई दूरी, प्रशासन पर लगाए पक्षपात के आरोप

    रेजीनगर उपचुनाव से पहले हुमायूं कबीर का बड़ा ऐलान, बेटे के लिए प्रचार से बनाई दूरी, प्रशासन पर लगाए पक्षपात के आरोप

    नई दिल्ली ।पश्चिम बंगाल में रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव से पहले राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदल रहा है। एजेयूपी प्रमुख हुमायूं कबीर ने अपने बेटे और पार्टी उम्मीदवार गुलाम नबी आजाद के लिए चुनाव प्रचार नहीं करने का ऐलान किया है। उन्होंने प्रशासन पर पक्षपात और दुश्मनी का आरोप लगाते हुए कहा कि वह अब जनता के फैसले को स्वीकार करेंगे।

    हुमायूं कबीर का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब रेजीनगर उपचुनाव को लेकर पहले ही कई राजनीतिक घटनाक्रम सामने आ चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों से वह मिलते हैं या बातचीत करते हैं, उनके खिलाफ गिरफ्तारी या धमकी जैसी कार्रवाई की जा रही है। कबीर के मुताबिक उनकी पार्टी के करीब 25 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है।

    उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में पार्टी को पारंपरिक तरीके से प्रचार करने की जरूरत नहीं है। वह सोशल मीडिया के माध्यम से मतदाताओं तक अपनी बात पहुंचाएंगे और मतदान के दिन जमीन पर मौजूद रहेंगे। उनका कहना है कि पार्टी का चुनाव चिह्न टेबल है और मतदाता इसे पहचानते हैं।

    हुमायूं कबीर ने पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन का रवैया उनकी पार्टी के प्रति पक्षपातपूर्ण है। उनका कहना था कि सरकारी अधिकारियों को संविधान और कानून के मुताबिक काम करना चाहिए, न कि किसी राजनीतिक दल के पक्ष में। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी ऐसे किसी दबाव के सामने पीछे नहीं हटेगी।

    इस बीच हुमायूं कबीर के प्रचार से दूरी बनाने के बाद उनके बेटे गुलाम नबी आजाद ने भी प्रचार से दूर रहने का फैसला किया है। इससे रेजीनगर उपचुनाव में एजेयूपी की चुनावी रणनीति को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। पार्टी की ओर से अब मतदाताओं तक पहुंचने के लिए सोशल मीडिया और मतदान के दिन की सक्रियता पर जोर दिया जा रहा है।

    रेजीनगर उपचुनाव में तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी को लेकर भी हाल में बड़ा घटनाक्रम सामने आया था। उन्होंने पहले चुनाव से अपना नाम वापस लेने की घोषणा की थी। कुछ समय बाद उन्होंने अपना फैसला बदल दिया और चुनाव मैदान में बने रहने का ऐलान किया। इसके बाद उपचुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो गईं।

    रेजीनगर सीट हुमायूं कबीर के लिए भी महत्वपूर्ण रही है। हालिया विधानसभा चुनाव में उन्होंने इस सीट से जीत दर्ज की थी। उन्हें करीब 51 प्रतिशत वोट मिले थे और उन्होंने 58,876 मतों के अंतर से जीत हासिल की थी। उन्होंने नौदा विधानसभा सीट से भी चुनाव जीता था। बाद में उन्होंने रेजीनगर सीट छोड़ने का फैसला किया, जिसके कारण यहां उपचुनाव की स्थिति बनी।

    अब 6 अक्टूबर को होने वाले रेजीनगर उपचुनाव से पहले हुमायूं कबीर का प्रचार से हटना चुनावी समीकरणों में एक नया घटनाक्रम है। उनके आरोपों पर प्रशासन और अन्य राजनीतिक पक्षों की प्रतिक्रियाएं भी आगे महत्वपूर्ण होंगी। फिलहाल एजेयूपी ने जनता के फैसले को स्वीकार करने की बात कही है और चुनावी प्रक्रिया के अगले चरण पर नजर बनी हुई है।

  • पुरुलिया में शुभेंदु अधिकारी का ऐलान, कुर्मी आंदोलन से जुड़े सभी मामले होंगे वापस, समुदाय के विकास के लिए 50 करोड़ रुपये

    पुरुलिया में शुभेंदु अधिकारी का ऐलान, कुर्मी आंदोलन से जुड़े सभी मामले होंगे वापस, समुदाय के विकास के लिए 50 करोड़ रुपये

    नई दिल्ली ।पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पुरुलिया जिले में आयोजित करम उत्सव के एक कार्यक्रम में कुर्मी समुदाय को लेकर बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि 2025 के कुर्मी आंदोलन के दौरान दर्ज किए गए सभी मामलों को वापस लिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले समुदाय से किए गए वादों को सरकार पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ेगी।

    पश्चिम बंगाल के पश्चिमी जिलों में कुर्मी समुदाय लंबे समय से अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने समेत कई मांगों को लेकर आंदोलन करता रहा है। आंदोलन के दौरान कई बार विरोध प्रदर्शन हुए और यह मुद्दा राज्य की राजनीति में भी चर्चा का विषय बना रहा है।

    शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि पिछले वर्ष हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान कुर्मी समुदाय के सदस्यों के खिलाफ दर्ज किए गए मामलों को वापस लेने का फैसला किया गया है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में वह दुर्गापुर में हुई एक बैठक के दौरान भी घोषणा कर चुके हैं।

    मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार ने कुर्मी समुदाय के आंदोलन को दबाने का प्रयास किया और समुदाय के भीतर विभाजन पैदा करने का काम किया। यह आरोप शुभेंदु अधिकारी की ओर से लगाया गया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार कुर्मी समुदाय से किए गए वादों को पूरा करेगी।

    उन्होंने बताया कि समुदाय के विकास के लिए इस वर्ष के बजट में 50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। आने वाले समय में इस राशि को बढ़ाने की बात भी कही गई है। सरकार की ओर से कुर्मी समुदाय के विकास से जुड़े मुद्दों को आगे बढ़ाने का आश्वासन दिया गया है।

    कुर्मी समुदाय की प्रमुख मांगों में अनुसूचित जनजाति का दर्जा शामिल है। समुदाय की ओर से लंबे समय से इस मांग को उठाया जाता रहा है। इसके अलावा कुर्माली भाषा को संवैधानिक मान्यता देने की मांग भी इससे जुड़े प्रमुख मुद्दों में रही है।

    शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि उनकी सरकार कुर्माली और राजबंशी भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए प्रयास करेगी। उन्होंने सत्ता संभालने के बाद कुर्मी समुदाय के लिए सरकार की ओर से उठाए गए कदमों का भी उल्लेख किया।

    कुर्मी आंदोलन से जुड़े मामलों की वापसी की घोषणा के साथ सरकार ने समुदाय के विकास और भाषाई पहचान से जुड़े मुद्दों पर भी अपना रुख सामने रखा है। हालांकि, मामलों को वापस लेने की घोषणा के बाद संबंधित कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया के जरिए इसे लागू किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार चुनाव से पहले किए गए वादों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी क्रम में कुर्मी समुदाय से जुड़े मामलों की वापसी, विकास के लिए बजट प्रावधान और भाषाओं को संवैधानिक मान्यता दिलाने की कोशिशों का उल्लेख किया गया।

    पुरुलिया में हुई घोषणा के बाद कुर्मी समुदाय से जुड़े पुराने आंदोलन और उसकी मांगें एक बार फिर चर्चा में हैं। सरकार के फैसले का केंद्र बिंदु 2025 के आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों को वापस लेना है। इसके साथ ही विकास और भाषा से जुड़े मुद्दों को लेकर भी सरकार ने अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट की हैं।

    कुर्मी समुदाय के लिए 50 करोड़ रुपये के बजट प्रावधान को आने वाले समय में बढ़ाने की बात भी कही गई है। अब मामलों की वापसी और अन्य घोषणाओं को लागू करने के लिए आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

  • ओवैसी ने यूपी में मुस्लिम नेतृत्व का मुद्दा उठाया, AIMIM के संगठन और संभावित गठबंधन पर जल्द तस्वीर साफ होने के संकेत

    ओवैसी ने यूपी में मुस्लिम नेतृत्व का मुद्दा उठाया, AIMIM के संगठन और संभावित गठबंधन पर जल्द तस्वीर साफ होने के संकेत

    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले राजनीतिक दलों की तैयारियों के बीच AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने राज्य में गठबंधन की संभावनाओं को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश में लगातार संगठन को मजबूत करने और स्थानीय स्तर पर लोगों से जुड़ने का काम कर रही है। गठबंधन को लेकर उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले दिनों में तस्वीर अधिक स्पष्ट हो सकती है।

    ओवैसी ने उत्तर प्रदेश में अपनी पार्टी के संगठन का जिक्र करते हुए कहा कि AIMIM के स्थानीय नेता लगातार लोगों के बीच काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि राज्य में अलग-अलग बिरादरियों की राजनीतिक नेतृत्व व्यवस्था मौजूद है, लेकिन मुस्लिम समाज के लिए वैसी मजबूत राजनीतिक आवाज नहीं बन पाई है। उन्होंने लोकतंत्र में प्रत्येक समाज को अपनी बात रखने का अवसर मिलने की बात कही।

    समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन के सवाल पर ओवैसी ने कहा कि अगले 10 से 12 दिनों में स्थिति स्पष्ट हो सकती है। उन्होंने व्यापक विपक्षी एकजुटता की संभावना का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि सभी साथ आकर चुनाव लड़ते हैं तो भाजपा को रोकने में मदद मिल सकती है। इस बयान के बाद यूपी में AIMIM और सपा के बीच संभावित राजनीतिक समीकरण को लेकर चर्चा तेज हुई है।

    ओवैसी ने बिहार के चुनावी अनुभव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वहां उनकी पार्टी ने गठबंधन के तहत छह सीटों की मांग की थी, लेकिन इस पर सहमति नहीं बन सकी। उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्येक राजनीतिक दल को अपनी रणनीति और संगठन के हिसाब से काम करना चाहिए।

    उत्तर प्रदेश में AIMIM की गतिविधियां भी लगातार बढ़ रही हैं। ओवैसी राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में कार्यक्रम कर रहे हैं और पार्टी के संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने संकेत दिया है कि उनकी पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव में मैदान में रहेगी और इसके लिए व्यापक समर्थन की जरूरत होगी।

    मुस्लिम समाज से जुड़े मुद्दों पर भी ओवैसी ने अपनी बात रखी। उन्होंने सहारनपुर की मस्जिद और पुराने कब्रिस्तान से संबंधित कार्रवाई का उल्लेख किया। इसके अलावा उन्होंने कुछ लोगों को कथित फर्जी मुठभेड़ों में मारे जाने और लखनऊ में परवेज नाम के व्यक्ति के साथ भीड़ द्वारा मारपीट किए जाने का आरोप लगाया। ये दावे ओवैसी की ओर से किए गए हैं।

    उन्होंने आरोप लगाया कि एक समुदाय को निशाना बनाए जाने का मुद्दा चुनाव में महत्वपूर्ण रहेगा। वहीं महिला मतदाताओं को लेकर उन्होंने कहा कि AIMIM चुनाव लड़ेगी और पार्टी को सभी वर्गों के समर्थन की आवश्यकता होगी।

    गठबंधन को लेकर ओवैसी ने अभी किसी दल के साथ अंतिम समझौते की घोषणा नहीं की है। ताजा बयानों में उन्होंने समान सोच रखने वाले दलों के साथ मिलकर काम करने की संभावना खुली रखी है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार AIMIM ने उत्तर प्रदेश चुनाव के लिए गठबंधन से जुड़े फैसले की घोषणा 2 अक्टूबर तक करने का संकेत दिया है।

    इस बीच उत्तर प्रदेश की राजनीति में विभिन्न दल अपने संगठन और चुनावी रणनीति को मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे में AIMIM का गठबंधन को लेकर रुख आने वाले दिनों में राज्य के राजनीतिक समीकरणों और विपक्षी दलों के बीच बातचीत का एक महत्वपूर्ण विषय बना रहेगा।

  • IIT बॉम्बे में साहिल वाकोडे की मौत के बाद छात्रों का विरोध, 18 मांगों पर प्रशासन सहमत, प्रोफेसर सूर्यनारायण डुल्ला निलंबित

    IIT बॉम्बे में साहिल वाकोडे की मौत के बाद छात्रों का विरोध, 18 मांगों पर प्रशासन सहमत, प्रोफेसर सूर्यनारायण डुल्ला निलंबित

    नई दिल्ली ।आईआईटी बॉम्बे में छात्र साहिल वाकोडे की मौत के बाद शुरू हुआ छात्रों का विरोध प्रदर्शन बातचीत के बाद आगे बढ़ा है। संस्थान प्रशासन ने छात्रों की ओर से रखी गई 18 मांगों के चार्टर पर सहमति जताई है। इस बीच प्रोफेसर सूर्यनारायण डुल्ला को भी निलंबित कर दिया गया है।

    साहिल वाकोडे 18 सितंबर को आईआईटी बॉम्बे के हॉस्टल स्थित कमरे में मृत पाए गए थे। वह एनर्जी साइंस विभाग के छात्र थे। उनकी मौत के बाद बड़ी संख्या में छात्रों ने संस्थान प्रशासन के सामने कई मांगें रखीं और मामले की निष्पक्ष तथा स्वतंत्र जांच की मांग की।

    रविवार देर रात आईआईटी बॉम्बे के निदेशक प्रोफेसर शिरीष केदारे ने छात्रों के साथ बैठक की। बैठक में छात्रों की 18 मांगों पर विस्तार से चर्चा हुई। इसके बाद संस्थान ने मांगों के चार्टर पर सहमति जताई। कुछ मांगों को लागू करने की दिशा में कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।

    छात्रों की प्रमुख मांगों में साहिल की मौत की स्वतंत्र जांच शामिल है। छात्रों ने साहिल से संबंधित एक लिंक्डइन पोस्ट को लेकर सार्वजनिक माफी की मांग भी रखी है। इसके अलावा वे जांच की अंतरिम रिपोर्ट 30 सितंबर तक और पूरी रिपोर्ट 15 अक्टूबर तक जारी किए जाने की मांग कर रहे हैं।

    छात्रों ने शिक्षकों और प्रोफेसरों के लिए स्पष्ट नियम बनाने की मांग भी रखी है। इसके साथ ही कैंपस अस्पताल में चौबीसों घंटे मनोचिकित्सक की सुविधा उपलब्ध कराने और छात्रों के लिए काउंसलिंग व्यवस्था को मजबूत करने की मांग की गई है।

    छात्रों का कहना है कि संस्थान के बड़े और महत्वपूर्ण फैसलों में उनकी राय को भी शामिल किया जाना चाहिए। इसके अलावा मांगों को एक महीने के भीतर पूरा नहीं किए जाने की स्थिति में उन्होंने निदेशक और कुछ अन्य अधिकारियों के इस्तीफे की मांग भी रखी है।

    साहिल की मौत के मामले को लेकर उनके पिता रविंद्र वाकोडे ने एक प्रोफेसर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका आरोप है कि प्रोफेसर सूर्यनारायण डुल्ला पिछले करीब तीन महीने से साहिल को जाति को लेकर अपमानित कर रहे थे। पिता ने यह भी आरोप लगाया कि साहिल को गलत मामले में फंसाने की धमकी दी गई थी।

    संस्थान के अनुसार 18 सितंबर को परीक्षा के दौरान साहिल को मोबाइल फोन से नकल करते हुए पकड़ा गया था। इसके कुछ समय बाद उनके हॉस्टल के कमरे में मृत पाए जाने की जानकारी सामने आई। इस घटनाक्रम के बाद मामले को लेकर छात्रों में आक्रोश बढ़ा और विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ।

    साहिल के पिता की शिकायत के आधार पर पवई पुलिस ने प्रोफेसर सूर्यनारायण डुल्ला के खिलाफ मामला दर्ज किया है। उनके खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है। मामले की जांच क्राइम ब्रांच कर रही है।

    सूर्यनारायण डुल्ला आईआईटी बॉम्बे के डिपार्टमेंट ऑफ एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग में प्रोफेसर हैं और लंबे समय से संस्थान से जुड़े हुए हैं। छात्रों के विरोध के बीच संस्थान ने 20 सितंबर की शाम उनके निलंबन की कार्रवाई की।

    अब छात्रों की 18 मांगों को लागू करने की प्रक्रिया और मामले में आगे की कार्रवाई पर नजर है। संस्थान की ओर से आने वाले ओपन हाउस में मांगों पर हुई प्रगति और अन्य कदमों की जानकारी दिए जाने की संभावना है। जांच की रिपोर्ट सामने आने के बाद मामले से जुड़े आरोपों और घटनाक्रम की स्थिति भी और स्पष्ट हो सकेगी।

  • उत्तर प्रदेश में देर रात बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 10 वरिष्ठ IAS अधिकारियों के विभाग बदले, रणवीर प्रसाद को ऊर्जा विभाग की जिम्मेदारी

    उत्तर प्रदेश में देर रात बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 10 वरिष्ठ IAS अधिकारियों के विभाग बदले, रणवीर प्रसाद को ऊर्जा विभाग की जिम्मेदारी

    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश सरकार ने देर रात 10 वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के विभागों में बड़ा फेरबदल किया है। प्रशासनिक बदलाव के तहत कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी नए अधिकारियों को सौंपी गई है। इस फेरबदल में ऊर्जा, परिवहन, चिकित्सा, उच्च शिक्षा, कृषि, पंचायती राज, खाद्य एवं रसद और वन एवं पर्यावरण जैसे विभाग शामिल हैं।

    सबसे महत्वपूर्ण बदलाव ऊर्जा विभाग में किया गया है। डॉ. आशीष कुमार गोयल को ऊर्जा विभाग से हटाकर श्रम एवं सेवायोजन विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। उनकी जगह रणवीर प्रसाद को प्रमुख सचिव ऊर्जा और अतिरिक्त ऊर्जा की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    रणवीर प्रसाद को ऊर्जा विभाग के साथ उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन, पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन, राज्य विद्युत उत्पादन निगम और यूपीएसएलडीसी के अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी दी गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली से जुड़ी शिकायतों के बीच ऊर्जा विभाग में हुआ यह बदलाव महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    परिवहन विभाग में भी नई जिम्मेदारी दी गई है। अमृत अभिजात को उनके मौजूदा विभागों के साथ परिवहन विभाग का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। उनके पास पहले से पर्यटन, संस्कृति और धर्मार्थ कार्य विभाग की जिम्मेदारी है। अब परिवहन विभाग भी उनके कार्यक्षेत्र में शामिल हो गया है।

    चिकित्सा और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी अधिकारियों की जिम्मेदारियां बदली गई हैं। अमित कुमार घोष को चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग से हटाकर उच्च शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी दी गई है।

    वी हेकाली झिमोमी को चिकित्सा शिक्षा विभाग सौंपा गया है। इससे पहले उनके पास वन एवं पर्यावरण विभाग की जिम्मेदारी थी। इस बदलाव के बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग का प्रशासनिक दायित्व भी नए अधिकारी के पास चला गया है।

    प्रशासनिक फेरबदल के तहत डॉ. एमकेएस सुंदरम को कृषि से जुड़े कई विभागों की जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें कृषि, कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार और निर्यात प्रोत्साहन विभाग का प्रमुख सचिव बनाया गया है।

    रविंद्र को पंचायती राज विभाग का प्रमुख सचिव बनाया गया है। वहीं अनिल कुमार को पंचायती राज विभाग से हटाकर खाद्य एवं रसद तथा उपभोक्ता मामले विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें आयुक्त खाद्य एवं रसद का अतिरिक्त दायित्व भी सौंपा गया है।

    महेंद्र प्रसाद अग्रवाल को उच्च शिक्षा विभाग से हटाकर वन एवं पर्यावरण तथा जलवायु परिवर्तन विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। इसके साथ ही अमित गुप्ता को स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग के साथ प्राविधिक शिक्षा विभाग का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।

    इस फेरबदल के साथ राज्य सरकार ने कई प्रमुख विभागों की प्रशासनिक जिम्मेदारियों में बदलाव किया है। खास तौर पर ऊर्जा और बिजली से जुड़े विभागों में हुए परिवर्तन पर ध्यान केंद्रित किया गया है। नई जिम्मेदारियों के तहत अधिकारियों को संबंधित विभागों के कामकाज को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी संभालनी होगी।

    ऊर्जा विभाग में बदलाव ऐसे समय हुआ है, जब ग्रामीण इलाकों में बिजली आपूर्ति और उससे जुड़ी शिकायतों को लेकर प्रशासनिक स्तर पर लगातार काम किया जा रहा है। रणवीर प्रसाद को ऊर्जा विभाग के साथ बिजली क्षेत्र की प्रमुख संस्थाओं की जिम्मेदारी मिलने से विभागीय कामकाज में उनके अधिकार क्षेत्र का विस्तार हुआ है।

    वहीं परिवहन, चिकित्सा शिक्षा और उच्च शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी नए अधिकारियों की तैनाती की गई है। कृषि, पंचायती राज, खाद्य एवं रसद तथा पर्यावरण से जुड़े विभागों में बदलाव के जरिए सरकार ने वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की जिम्मेदारियों का पुनर्विन्यास किया है।

  • रॉकेट से सैटेलाइट तक देश में बनेंगे अहम पुर्जे, इसरो ने जारी किए टेंडर; फ्लाइट सोलर पैनल भी होंगे स्वदेशी

    रॉकेट से सैटेलाइट तक देश में बनेंगे अहम पुर्जे, इसरो ने जारी किए टेंडर; फ्लाइट सोलर पैनल भी होंगे स्वदेशी

    नई दिल्ली । भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन रॉकेट और सैटेलाइट में इस्तेमाल होने वाले कई अहम पुर्जे देश में बनाएगा। इसरो के अलग-अलग केंद्रों ने इन तकनीकी कामों के लिए टेंडर जारी किए हैं। इनमें सबसे अहम रॉड एंड बेयरिंग का स्वदेशी विकास है।

    विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र ने इसके लिए अलग से टेंडर जारी किया है। खास बात यह है कि इसमें विदेशी मूल के उपकरण निर्माताओं और उनके एजेंटों को बोली लगाने की अनुमति नहीं है। इससे इस तकनीकी क्षेत्र में देश के भीतर विकास और निर्माण को बढ़ावा देने की दिशा में प्रयास किया जा रहा है।

    इसरो के यूआर राव सैटेलाइट सेंटर ने वाइब्रेशन टेस्ट फिक्स्चर के लिए टेंडर जारी किया है। इसका इस्तेमाल कंपन की स्थिति में अंतरिक्ष में भेजे जाने वाले उपकरणों और संरचनाओं को जांचने के लिए किया जाता है। अंतरिक्ष अभियानों के दौरान उपकरणों को विभिन्न परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, इसलिए उनकी जांच के लिए ऐसे परीक्षण महत्वपूर्ण होते हैं।

    सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र ने एचपीएस3 एक्सियल थ्रस्ट मेजरमेंट सिस्टम के लिए टेंडर निकाला है। यह रॉकेट से जुड़े परीक्षणों में महत्वपूर्ण होता है। इसके अलावा अंतरिक्ष संचार केंद्र ने एक्स-बैंड सिमुलेशन अप-कन्वर्टर और एक्साइटर के लिए भी टेंडर जारी किया है। ये उपकरण अंतरिक्ष संचार से जुड़े तकनीकी कार्यों में उपयोग किए जाते हैं।

    फ्लाइट सोलर पैनल का फैब्रिकेशन और टेस्टिंग भी इस प्रक्रिया का अहम हिस्सा है। यूआरएससी ने फ्लाइट सोलर पैनल के निर्माण और परीक्षण के लिए टेंडर मांगा है। इसमें ऐसे सौर पैनलों के निर्माण और उनकी जांच से जुड़ी गतिविधियों को आगे बढ़ाया जाएगा, जिनका इस्तेमाल वास्तविक अंतरिक्ष मिशन में किया जाना है।

    सैटेलाइटों में सौर पैनल सूर्य की रोशनी से बिजली बनाने का मुख्य साधन होते हैं। अंतरिक्ष मिशनों में इनका उपयोग उपग्रहों के लिए आवश्यक विद्युत ऊर्जा उपलब्ध कराने में किया जाता है। इसलिए इनके निर्माण और परीक्षण की प्रक्रिया अंतरिक्ष अभियानों की तैयारियों में महत्वपूर्ण भूमिका रखती है।

    इसरो की ओर से अलग-अलग तकनीकी जरूरतों के लिए जारी किए गए ये टेंडर रॉकेट और सैटेलाइट से जुड़े उपकरणों के देश में विकास और निर्माण की दिशा में उठाए गए कदम हैं। रॉड एंड बेयरिंग से लेकर परीक्षण उपकरणों और संचार प्रणालियों तक कई क्षेत्रों में घरेलू क्षमता विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।

    फ्लाइट सोलर पैनल के निर्माण और परीक्षण को भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा बनाया गया है। इससे अंतरिक्ष मिशनों में इस्तेमाल होने वाले महत्वपूर्ण उपकरणों और प्रणालियों के लिए देश के भीतर निर्माण तथा परीक्षण क्षमता को आगे बढ़ाने का प्रयास दिखाई देता है।

  • मोहम्मद शमी की जयंत चौधरी से मुलाकात के बाद सियासी चर्चा तेज, अमरोहा से खुद या भाई के चुनाव लड़ने की अटकलें

    मोहम्मद शमी की जयंत चौधरी से मुलाकात के बाद सियासी चर्चा तेज, अमरोहा से खुद या भाई के चुनाव लड़ने की अटकलें

    नई दिल्ली/उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद शमी और राष्ट्रीय लोक दल के अध्यक्ष जयंत चौधरी की मुलाकात के बाद राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। दोनों की मुलाकात रविवार को दिल्ली में हुई। इसके बाद शमी के राजनीति में आने और अमरोहा सदर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की संभावनाओं को लेकर कयास लगाए जाने लगे हैं। हालांकि, अभी तक शमी या राष्ट्रीय लोक दल की ओर से चुनाव लड़ने को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।

    मोहम्मद शमी अमरोहा सदर तहसील के सहसपुर अलीनगर के रहने वाले हैं। ऐसे में जयंत चौधरी से उनकी मुलाकात को उनके गृह जिले की राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। चर्चा है कि शमी अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत अमरोहा से कर सकते हैं। इसी बीच उनके बड़े भाई मोहम्मद हसीब को भी चुनाव मैदान में उतारने की संभावना की चर्चा सामने आई है। हालांकि, इस बारे में भी अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    अमरोहा सीट का सियासी इतिहास भी इस चर्चा को अहम बनाता है। इस विधानसभा सीट पर पहला चुनाव 1957 में हुआ था। वर्तमान में समाजवादी पार्टी के महबूब अली लंबे समय से यहां चुनाव जीतते आ रहे हैं। उन्होंने 2002 से लगातार इस सीट पर जीत दर्ज की है। पिछले चार चुनाव उन्होंने समाजवादी पार्टी के टिकट पर जीते हैं। इससे पहले 2002 में वह राष्ट्रीय परिवर्तन दल के टिकट पर चुनाव जीते थे और बाद में समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए थे।

    2022 के विधानसभा चुनाव में महबूब अली ने भाजपा के राम सिंह को 71,036 वोटों के अंतर से हराया था। महबूब अली को 1,28,735 वोट मिले थे, जबकि राम सिंह को 57,699 वोट हासिल हुए थे। अमरोहा विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या भी काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक करीब 3.25 लाख मतदाताओं वाली इस सीट पर मुस्लिम मतदाताओं की संख्या लगभग दो लाख बताई जाती है।

    मोहम्मद शमी की जयंत चौधरी से मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब वह लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से बाहर हैं। उन्होंने भारत के लिए अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला 9 मार्च 2025 को न्यूजीलैंड के खिलाफ खेला था। इसके बाद से भारतीय टीम में उनकी वापसी को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है। हाल में वेस्टइंडीज दौरे के लिए घोषित टीम में भी उनका नाम नहीं था।

    जयंत चौधरी के साथ मुलाकात की तस्वीर सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या शमी खुद चुनावी मैदान में उतरेंगे या परिवार के किसी सदस्य को राजनीति में आगे बढ़ाएंगे। फिलहाल दोनों ही संभावनाएं चर्चा का हिस्सा हैं और किसी भी विकल्प पर आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है। ऐसे में अमरोहा से शमी या उनके भाई के चुनाव लड़ने की चर्चा को अभी राजनीतिक अटकलों के तौर पर ही देखा जा रहा है।

  • माता वैष्णो देवी हेलीपैड टर्मिनल में तड़के लगी आग, टिकट और डोनेशन काउंटर समेत कॉफी शॉप का सामान जलकर राख

    माता वैष्णो देवी हेलीपैड टर्मिनल में तड़के लगी आग, टिकट और डोनेशन काउंटर समेत कॉफी शॉप का सामान जलकर राख

    नई दिल्ली । जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में स्थित माता वैष्णो देवी के बेस कैंप कटड़ा स्थित हेलीपैड टर्मिनल में कल तड़के करीब 3:15 बजे आग लग गई। इसकी चपेट में आने से टिकट बुकिंग काउंटर, डोनेशन काउंटर और एक कॉफी शॉप का सारा सामान जल गया। घटना के समय टर्मिनल बंद था और यात्रियों की आवाजाही नहीं थी, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई।

    त्रिकुटा पहाड़ियों पर स्थित विश्व प्रसिद्ध माता वैष्णो देवी मंदिर के दर्शनार्थ आने वाले श्रद्धालुओं के लिए हेलीपैड टर्मिनल एक बेहद महत्वपूर्ण सुविधा केंद्र है। यह एक ट्रांजिट पॉइंट है और यहां से श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए मंदिर की ओर रवाना होते हैं। हेलिकॉप्टर सेवा से संबंधित टिकटों की बुकिंग, यात्रियों का पंजीकरण, सुरक्षा जांच और अन्य आवश्यक प्रक्रियाएं इस ट्रांजिट पॉइंट पर पूरी की जाती हैं।

    आग की सूचना मिलते ही हेलीपैड के कर्मचारी, वहां मौजूद सुरक्षा कर्मी और फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज की टीम तुरंत हरकत में आ गई। त्वरित कार्रवाई के चलते 30 मिनट में आग पर पूरी तरह से काबू पा लिया गया। दमकल कर्मियों ने आग को टर्मिनल के अन्य संवेदनशील हिस्सों में फैलने से रोक लिया, अन्यथा नुकसान कहीं अधिक हो सकता था। घटना के बाद संबंधित विभागों के अधिकारियों ने मौके का मुआयना कर स्थिति का जायजा लिया है। अधिकारियों ने कहा कि नुकसान का आकलन किया जा रहा है।

    महत्वपूर्ण दस्तावेज, टिकट काउंटर के कुछ कंप्यूटर जले

    आधिकारिक जानकारी के अनुसार प्रारंभिक जांच में आग लगने का मुख्य कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि महत्वपूर्ण दस्तावेज, टिकट काउंटर के कुछ कंप्यूटर और अन्य सामान कुछ ही देर में जलकर राख हो गए। आग से टर्मिनल को आंशिक रूप से नुकसान पहुंचा है। आग के चलते सुबह हेलीकॉप्टर भी करीब डेढ़ घंटे देरी से शुरू हो सका। सामान्य परिस्थितियों में हेलीकॉप्टर सुबह सात बजे से उड़ान भरने लगते हैं।

  • दिल्ली SIR में आडवाणी, जयशंकर और धनखड़ समेत कई दिग्गजों को नोटिस, चुनाव आयुक्त एसएस संधू का नाम भी सूची में

    दिल्ली SIR में आडवाणी, जयशंकर और धनखड़ समेत कई दिग्गजों को नोटिस, चुनाव आयुक्त एसएस संधू का नाम भी सूची में

    नई दिल्ली । दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत कई दिग्गजों के नाम गड़बड़ी के कारण नोटिस जारी किए गए हैं. इसमें पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, विदेश मंत्री एस जयशंकर, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, चुनाव आयुक्त एसएस संधू सहित कई अन्य शामिल हैं.

    दिल्ली में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) जारी है. इस दौरान कई दिग्गजों के नाम SIR के तहत नोटिस पहुंच रहा है. सामने आया है कि इनमें पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, विदेश मंत्री एस जयशंकर, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ तक के नाम शामिल हैं. यहां तक चुनाव आयुक्त एसएस संधू का भी नाम इस लिस्ट में है, जिनके SIR विवरण में विसंगतियां हैं और उन्हें भी नोटिस जारी किया गया है.

    दिलचस्प है कि इस लिस्ट में प्रख्यात अर्थशास्त्री बिबेक देबरॉय का नाम भी है, जिनका दिसंबर 2024 में निधन हो चुका है.

    दिल्ली में SIR के बाद 97 लाख से ज्यादा वोटर्स की ड्राफ्ट लिस्ट जारी की गई है. इसमें करीब 33.13 लाख वोटर्स के रिकॉर्ड में किसी न किसी तरह की गड़बड़ी या अंतर मिला है. इन्हें नोटिस जारी किए जा रहे हैं. ज्यादातर मामले ऐसे हैं, जिनमें मौजूदा वोटर की जानकारी का 2002 में हुए पिछले SIR की वोटर लिस्ट से मिलान नहीं हो पाया है.

    नोटिस मिलने का मतलब यह नहीं है कि किसी का नाम वोटर लिस्ट से काट दिया जाएगा. नोटिस पाने वाले लोगों को अपनी बात रखने और जरूरी दस्तावेज देने का मौका मिलेगा.

    पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, उनकी बेटी प्रतिभा और बहू गीतिका को SIR के तहत नोटिस मिला है. इन तीनों के मौजूदा रिकॉर्ड का 2002 की वोटर लिस्ट से मिलान नहीं हो पाया. हालांकि एलके आडवाणी के बेटे जयंत के रिकॉर्ड का मिलान हो गया है. परिवार के सभी चार सदस्य नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र के वोटर हैं.

    विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनकी पत्नी क्योको जयशंकर को भी नोटिस मिला है. दोनों के रिकॉर्ड को ‘Unmapped with Last SIR’ कैटेगरी में रखा गया है. आसान भाषा में इसका मतलब है कि उनके मौजूदा वोटर रिकॉर्ड का 2002 में हुए पिछले SIR की वोटर लिस्ट से मिलान नहीं हो सका. दोनों नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र के सुनहरी बाग इलाके के वोटर हैं. पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और उनकी पत्नी सुदेश को भी नोटिस दिया गया है.

    चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू का नाम भी इस लिस्ट में आया है. उनके मामले में नाम का अंतर सामने आया है. उन्होंने SIR फॉर्म में अपना नाम ‘डॉ. एसएस संधू’ लिखा है, जबकि वोटर लिस्ट में उनका नाम ‘सुखबीर सिंह संधू’ दर्ज है. संधू नई मोती बाग के रहने वाले हैं और दिल्ली कैंट विधानसभा क्षेत्र के वोटर हैं. दस्तावेज देखकर नाम से जुड़ी गड़बड़ी ठीक की जाएगी. उनके बेटे दमनबीर के रिकॉर्ड में माता-पिता के नाम से जुड़ा अंतर पाया गया है.

    पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया, उनकी पत्नी सीमा सिसोदिया और बेटे मीर को भी नोटिस मिला है. उनकी पत्नी सीमा के रिकॉर्ड में उनके नाम से जुड़ा अंतर मिला है, जबकि बेटे मीर के रिकॉर्ड में माता-पिता के नाम से जुड़ी गड़बड़ी सामने आई है. विदेश सचिव विक्रम मिसरी को भी नोटिस मिला है. उनका रिकॉर्ड भी पिछले SIR से नहीं जुड़ पाया है.

    इसके अलावा पूर्व JNU कुलपति एम. जगदीश कुमार, दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग, नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया, सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडे, पूर्व सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी और CBI डायरेक्टर प्रवीण सूद जैसे कई बड़े नाम भी इस लिस्ट में हैं.

    दिवंगत अर्थशास्त्री बिबेक देबरॉय का नाम भी सामने आया है. उनका नवंबर 2024 में निधन हो गया था. इसके बावजूद उनका नाम उन लोगों की लिस्ट में आया है, जिनके रिकॉर्ड में अंतर मिला है. उनका नाम अंतिम वोटर लिस्ट से हटाया जाएगा.

    इससे पहले दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनके परिवार के सदस्यों को भी नोटिस मिल चुका है. राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल और उनकी पत्नी को भी इसी वजह से नोटिस मिला है. दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को भी नोटिस मिला था, लेकिन दस्तावेजों की जांच के बाद उनका रिकॉर्ड सही पाया गया.

    मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने साफ किया है कि नोटिस मिलने का मतलब वोटर लिस्ट से नाम कटना नहीं है. किसी भी व्यक्ति का नाम हटाने से पहले उसे अपनी बात रखने का मौका दिया जाएगा. नोटिस पाने वाले वोटर्स को अपने विधानसभा क्षेत्र के निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी या बूथ लेवल ऑफिसर के पास जवाब और जरूरी दस्तावेज जमा करने होंगे. नोटिस से जुड़े मामलों को 29 अक्टूबर तक निपटाया जाना है. इसके बाद दिल्ली की अंतिम वोटर लिस्ट 4 नवंबर को जारी की जाएगी।

  • मेडिसिन की होम डिलीवरी व्यवस्था हो सकती है बंद….. एडवाइजरी बोर्ड ने दिए समीक्षा के निर्देश

    मेडिसिन की होम डिलीवरी व्यवस्था हो सकती है बंद….. एडवाइजरी बोर्ड ने दिए समीक्षा के निर्देश


    नई दिल्ली।
    कोविड (COVID) के दौरान शुरू हुई दवाओं की होम डिलीवरी वाली व्यवस्था (Medicines Home Delivery System) पर रोक लग सकती है। दवा कारोबारियों के संगठनों की ओर से इसकी मांग उठी है। इसपर ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (डीटीएबी) (Drugs Technical Advisory Board – DTAB) ने होम डिलीवरी की व्यवस्था की दोबारा समीक्षा करने को कहा है।

    इसके लिए बनी उपसमिति को मौजूदा स्थिति के आधार पर मामले पर फिर विचार करना होगा। जरूरत पड़ने पर दवा कारोबारियों के संगठनों को भी अपनी बात रखने का मौका दिया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, उप समिति में कई सदस्य होम डिलीवरी जारी रखने के पक्ष में हैं। उनका मानना है कि इससे दूर-दराज और खासतौर पर गांवों में रहने वाले लोगों को सहूलियत मिल रही है। वहीं, डीटीएबी ने ब्लड डोनेट करने वालों की पहचान भी डिजिटल करने का फैसला लिया है। रक्तदान के दौरान रक्तदाताओं की पहचान को आधार और आभा से जोड़ने की भी सिफारिश की गई है। बोर्ड के मुताबिक इससे रक्तदाताओं की पहचान और रक्तदान के बाद उनकी निगरानी में मदद मिलेगी। इसका एक उद्देश्य ऐसे दाताओं की पहचान करना भी है, जिन्हें किसी वजह से रक्तदान से रोका गया हो।