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  • कांग्रेस साठ साल में पेपर लीक को लेकर उदासीन रही, मोदी सरकार ने कानून बनाया: अनुराग ठाकुर

    कांग्रेस साठ साल में पेपर लीक को लेकर उदासीन रही, मोदी सरकार ने कानून बनाया: अनुराग ठाकुर


    नई दिल्ली।
    मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 के समर्थन में बोलते हुए पूर्व केंद्रीय कैबिनेट मंत्री एवं सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि संगठित नकल और पेपर लीक राष्ट्र के लिए आतंकवाद और नक्सलवाद के समान खतरा है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने इन दोनों खतरों का उन्मूलन कर दिया है और परीक्षा माफिया को भी उसी दृढ़ संकल्प के साथ जड़ से उखाड़ फेंकेगी। उन्होंने कहा कि यह संशोधन मूल 2024 के कानून को पहले को और मजबूत बनाता है। इसमें सजा को और कठोर किया गया है, जांच को समयबद्ध बनाया गया है तथा उन करोड़ों छात्रों के लिए न्याय की प्रक्रिया को तेज किया गया है।

    अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि “परीक्षा में धांधली, पेपर लीक, यह किसी आतंकवाद और माओवाद से कम खतरनाक नहीं हैं। इसका इलाज भी हम ही करेंगे क्योंकि हर मर्ज की दवा मोदी सरकार के पास है और जब मामला देश के युवाओं और उनके भविष्य का है तो यह सरकार युवाओं की सरकार है और युवाओं के हित में हम हर जरूरी और कड़े कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। आज इस देश के युवा और मोदी सरकार एक प्लेटफार्म पर खड़े हैं और हमारे एक इरादे भी स्पष्ट हैं कि हम एक ऐसा कानून लायेंगें जो टेरोरिज्म के खिलाफ बने के कानून से अधिक कठोर होगा। इसी उदेश्य से हमने 2024 में बने कानून में संशोधन कर इसे और भी मजबूत बनाया है जो इस सदन के सामने पेश किया गया है। यह सरकार केवल समस्या पर चर्चा नहीं करती, बल्कि समाधान की व्यवस्था बनाती है। यह विधेयक अपराधियों, परीक्षा कराने वाली लापरवाह एजेंसी और उनका प्रबंधन , सभी की जवाबदेही सुनिश्चित करता है”

    उन्होंने कहा कि भाजपा और राजग सरकार चिंतन भी करती है और कार्यवाई भी करती है, और कानून भी बनाते हैं। जिन्होंने पूरे पचपन साल साठ सालों तक पूरे ठाठ के साथ इस देश पर राज किया उन्होंने तो कोई कानून नहीं बनाया मगर 2024 में देश को पहला एंटी चीटिंग कानून देने का काम किया और अगर आज उस कानून को और भी कठोर बनाने की मांग उठी तो वह भी एनडीए ने ही किया। आज भारत में कॉलेज से लेकर यूनिवर्सिटी, आईआईटी, आईआईएम, ट्रिपलआईटी, एम्स की संख्या में जो इजाफा हुआ है वह मोदी सरकार की देन है। हमने 2020 में नेशनल एजुकेशन पॉलिसी को लागू किया जिसका उद्देश्य है भारत को ग्लोबल नॉलेज पावर बनाना तो जो लोग आज युवाओं का सीजनल लीडर बनने की कोशिश कर रहे हैं वह अपने गिरेबान में झांकें की उन्होंने युवाओं के लिए क्या किया। जिन्होंने गुलशन को उजाड़ा है आज वह गुलशन में बहार लाने की दुहाई देते हैं तो अच्छा नहीं लगता है।”

    अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा, “विपक्ष को भी आत्ममंथन करना चाहिए कि जब उनके शासन में पेपर लीक होते थे, तब न मजबूत केंद्रीय कानून बना, न ऐसी फास्ट ट्रैक व्यवस्था बनी और न ऐसी जवाबदेही की संरचना खड़ी हुई। यूपीए काल में ऐम्स पीजी जैसी परीक्षाओं से जुड़े गंभीर विवाद और अनियमितताएं सामने आईं, किंतु व्यापक राष्ट्रीय एंटी पेपर लीक फ्रेमवर्क नहीं बनाया गया। राज्यों के अनुभव भी हमें चेतावनी देते हैं, राजस्थान में रीट था भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक के मामले, हिमाचल प्रदेश में सरकारी परीक्षाएं से जुड़ा संकट, झारखंड में जेएसएससी-सीजीएल विवाद और कर्नाटक में परीक्षा-पत्र लीक जैसी घटनाओं ने लाखों युवाओं को अनिश्चितता में डाला। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार में भर्ती परीक्षाओं की एक लंबी शृंखला रही है, जिसने राज्य की भर्ती व्यवस्था की साख को बुरी तरह प्रभावित किया। देश के अलग-अलग राज्यों, कर्नाटक, तेलंगाना, केरल, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, पंजाब अथवा अन्य स्थानों, में किसी भी परीक्षा में अनियमितता हो, उस पर राजनीति नहीं, कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। हमारा मानना है कि दोषी का दल नहीं देखा जाना चाहिए; केवल अपराध देखा जाना चाहिए। मैं विपक्षी दलों से पूछना चाहता हूँ, जब विद्यार्थी चिंतित हों, तब क्या हमारा काम उनकी पीड़ा को राजनीतिक मंच बनाना है, या उनके भविष्य की सुरक्षा के लिए कानून को मजबूत करना है? छात्रों की चिंता को चुनावी नारा बनाना आसान है; उनकी मेहनत को सुरक्षित करने के लिए कानून बनाना कठिन है, और मोदी सरकार ने कठिन रास्ता चुना है।”

  • नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामला: सीबीआई ने 13 आरोपितों के खिलाफ पहली चार्जशीट दाखिल की

    नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामला: सीबीआई ने 13 आरोपितों के खिलाफ पहली चार्जशीट दाखिल की


    नई दिल्ली।
    केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने नीट-यूजी 2026 प्रश्नपत्र लीक मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 13 गिरफ्तार आरोपितों के विरुद्ध राउज एवेन्यू स्थित विशेष अदालत में पहली चार्जशीट दाखिल कर दी है। एजेंसी ने जांच के दौरान जुटाए गए सैकड़ों गवाहों के बयान, दस्तावेज और भौतिक साक्ष्यों के आधार पर आरोपितों के खिलाफ अभियोजन की प्रक्रिया शुरू की है।’

    सीबीआई के अनुसार, चार्जशीट में 360 गवाहों के बयान, 422 दस्तावेज और 43 भौतिक साक्ष्यों को शामिल किया गया है। जांच में आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी, साक्ष्य नष्ट करने, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम-2024 तथा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध पाए गए हैं। फिलहाल सभी 13 आरोपित न्यायिक हिरासत में हैं।

    एजेंसी ने बताया कि 3 मई 2026 को आयोजित नीट-यूजी परीक्षा में अनियमितताओं की शिकायत मिलने के बाद 12 मई को प्राथमिकी दर्ज की गई थी। जांच के लिए 72 अधिकारियों और आठ साइबर फॉरेंसिक विशेषज्ञों की विशेष टीम गठित की गई। इसके बाद महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों में 92 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया गया।

    जांच के दौरान प्रश्नपत्र लीक की पूरी श्रृंखला का खुलासा हुआ। गिरफ्तार आरोपितों में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के तीन विषय विशेषज्ञ, कई कथित बिचौलिये तथा दो कोचिंग संस्थानों से जुड़े पदाधिकारी शामिल हैं।

    चार्जशीट में शामिल आरोपितों के नाम इस प्रकार हैं:

    • मनीषा मंधारे (जीवविज्ञान विषय विशेषज्ञ, एनटीए)
    • प्रल्हाद विठ्ठलराव कुलकर्णी (रसायन विज्ञान विषय विशेषज्ञ, एनटीए)
    • मनीषा संजय हवलदार (भौतिकी विषय विशेषज्ञ, एनटीए)
    • मनीषा संजय वाघमारे
    • धनंजय निवृत्ति लोखंडे
    • शुभम मधुकर खैरनार
    • यश यादव
    • मांगीलाल बिवाल
    • विकास बिवाल
    • दिनेश बिवाल
    • डॉ. मनोज भगवानराव शिरुरे
    • शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर (आरसीसी कोचिंग इंस्टीट्यूट, लातूर के संचालक)
    • तेजस हर्षदकुमार शाह (एपीएमए कोचिंग इंस्टीट्यूट, पुणे में भौतिकी संकाय एवं मुख्य परिचालन अधिकारी)

    सीबीआई ने जांच के दौरान आरोपितों के कथित आर्थिक लेन-देन की भी पड़ताल की है। एजेंसी ने कई बैंक खाते, बैंक लॉकर और एक डीमैट खाता फ्रीज कर दिए हैं। मामले की आगे की सुनवाई विशेष अदालत में होगी, जबकि जांच के अन्य पहलुओं पर भी कार्रवाई जारी है।

  • ईज ऑफ लिविंग और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर केंद्र का बड़ा फोकस, सभी मंत्रालयों को सुधार लागू करने के निर्देश

    ईज ऑफ लिविंग और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर केंद्र का बड़ा फोकस, सभी मंत्रालयों को सुधार लागू करने के निर्देश

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने आम नागरिकों के लिए ‘ईज ऑफ लिविंग’ और उद्योगों के लिए ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को और बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सभी केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों को सुधारों की पहचान कर उन्हें प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए हैं। सरकार का उद्देश्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाना, सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार करना और उद्योगों के लिए अधिक अनुकूल कारोबारी वातावरण तैयार करना है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए सरकार ने सुधारों की निगरानी और प्रगति के मूल्यांकन के लिए पीएमरेफ पोर्टल पर नया ‘रिफॉर्म’ मॉड्यूल भी शुरू किया है।

    सरकार के अनुसार नया मॉड्यूल मंगलवार से कार्य करना शुरू कर चुका है और यह सभी मंत्रालयों एवं विभागों के लिए एक केंद्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य करेगा। इस पोर्टल पर विभिन्न मंत्रालय अपने-अपने क्षेत्रों में किए जा रहे नीतिगत सुधारों, प्रशासनिक उपायों और सुशासन से जुड़ी पहलों का विस्तृत विवरण अपलोड करेंगे। इससे सभी सुधारात्मक प्रयासों का एकीकृत रिकॉर्ड तैयार होगा और उनकी प्रगति की नियमित समीक्षा करना आसान होगा।

    केंद्र सरकार ने निर्देश दिया है कि प्रत्येक मंत्रालय ऐसे सुधारों की पहचान करे जो आम नागरिकों के लिए सरकारी सेवाओं तक पहुंच को सरल बनाएं, प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ाएं तथा उद्योगों के लिए कारोबार करना अधिक सुगम बनाएं। ये सुधार उच्च स्तरीय समिति (एचएलसी) की सिफारिशों, अनौपचारिक मंत्रिसमूह (आईजीओएम) के सुझावों अथवा संबंधित मंत्रालयों द्वारा स्वयं तैयार किए गए प्रस्तावों पर आधारित हो सकते हैं। सरकार का मानना है कि विभागीय स्तर पर नवाचार और सुधारों को बढ़ावा देने से प्रशासनिक दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

    नई व्यवस्था के तहत सभी मंत्रालयों और विभागों के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि वे अपनी सभी सुधार संबंधी पहलों का विवरण पीएमरेफ पोर्टल पर अपलोड करें और समय-समय पर उनकी प्रगति को अपडेट करते रहें। जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक मंत्रालय को हर सप्ताह शुक्रवार दोपहर 12 बजे तक अपनी साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट पोर्टल पर दर्ज करनी होगी। इससे विभिन्न योजनाओं और सुधारों की वास्तविक स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सकेगी तथा आवश्यक होने पर समय रहते सुधारात्मक कदम उठाए जा सकेंगे।

    सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य सुधार प्रक्रिया को एक व्यवस्थित और संस्थागत ढांचे के तहत संचालित करना है, ताकि विभिन्न मंत्रालयों में लागू किए जा रहे नीतिगत और प्रशासनिक सुधारों की प्रभावी निगरानी और मूल्यांकन किया जा सके। इससे मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा, निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होगी और सुधार संबंधी पहलों के क्रियान्वयन में भी गति आएगी। साथ ही विभिन्न विभागों के सफल अनुभवों को साझा कर अन्य क्षेत्रों में भी लागू करने का अवसर मिलेगा।

    पीएमरेफ (प्रधानमंत्री रिफरेंस/रिफॉर्म्स) पोर्टल प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय मंत्रालयों और सरकारी विभागों द्वारा उपयोग किया जाने वाला एक सुरक्षित डिजिटल गवर्नेंस प्लेटफॉर्म है। यह नीतिगत सुधारों, प्रशासनिक पहलों और प्रमुख आधारभूत संरचना परियोजनाओं की निगरानी के साथ-साथ अन्य सरकारी निगरानी प्रणालियों से भी जुड़ा हुआ है। इसके माध्यम से प्रधानमंत्री कार्यालय और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा जारी निर्देशों, निर्णयों और विभिन्न संदर्भों की प्रगति पर भी नजर रखी जाती है। सरकार को उम्मीद है कि नया ‘रिफॉर्म’ मॉड्यूल प्रशासनिक सुधारों को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

  • लोकसभा में परीक्षा संशोधन विधेयक पर गरजे गौरव गोगोई, छात्रों पर कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री से मांगा जवाब

    लोकसभा में परीक्षा संशोधन विधेयक पर गरजे गौरव गोगोई, छात्रों पर कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री से मांगा जवाब

    नई दिल्ली । लोकसभा में ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026’ पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने केंद्र सरकार को कई मुद्दों पर घेरते हुए परीक्षा व्यवस्था, पेपर लीक मामलों और हालिया छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार को केवल कानून में संशोधन करने के बजाय शिक्षा व्यवस्था की मूल समस्याओं के समाधान पर ध्यान देना चाहिए। साथ ही उन्होंने गृह मंत्री से सदन में उपस्थित होकर छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के संबंध में जवाब देने की मांग की।

    विधेयक पर चर्चा की शुरुआत करते हुए गौरव गोगोई ने दावा किया कि वर्ष 2024 में लागू किया गया कानून अपने उद्देश्य को पूरा करने में सफल नहीं रहा। उनका कहना था कि उस समय सरकार ने इसे ऐतिहासिक कदम बताया था और पेपर लीक की घटनाओं पर रोक लगाने का दावा किया था, लेकिन बाद में सामने आए मामलों ने उन दावों पर सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने आरोप लगाया कि नया संशोधन विधेयक भी उसी दिशा में एक औपचारिक कदम बनकर रह जाएगा और इससे मूल समस्याओं का समाधान नहीं होगा।

    कांग्रेस सांसद ने कहा कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए केवल दंडात्मक प्रावधानों को कड़ा करना पर्याप्त नहीं है। उनके अनुसार, यदि परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं की कार्यप्रणाली में सुधार नहीं किया गया तो कानून में बदलाव का अपेक्षित प्रभाव दिखाई नहीं देगा। उन्होंने सरकार से परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाने की मांग की।

    गोगोई ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट-यूजी) से जुड़े पेपर लीक प्रकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि इस मामले में कई लोगों को आरोपी बनाया गया था और अनेक आरोपियों को जमानत भी मिल चुकी है। उन्होंने इसे उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करते हुए दावा किया कि मौजूदा व्यवस्था पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने में प्रभावी साबित नहीं हुई। उन्होंने कहा कि सरकार को इस विषय पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

    उन्होंने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि यदि संस्था में सुधार की आवश्यकता महसूस की गई और उसके शीर्ष अधिकारियों में बदलाव किए गए, तो अन्य जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारियों की भूमिका की भी समीक्षा होनी चाहिए। उन्होंने सरकार से एनटीए से जुड़े प्रशासनिक निर्णयों पर स्पष्टीकरण देने की मांग की।

    चर्चा के दौरान गौरव गोगोई ने जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में युवा अपने भविष्य और परीक्षा प्रणाली को लेकर चिंता व्यक्त करने के लिए सड़कों पर उतरे थे। उनके अनुसार, लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों को अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से रखने का अधिकार है और उनकी मांगों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।

    कांग्रेस सांसद ने हालिया प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई का मुद्दा उठाते हुए कहा कि गृह मंत्री को सदन में आकर यह स्पष्ट करना चाहिए कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग के निर्णय किस स्तर पर लिए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों पर की गई कार्रवाई को लेकर सरकार को विस्तृत जानकारी संसद के समक्ष रखनी चाहिए, ताकि पूरे घटनाक्रम पर पारदर्शिता बनी रहे।

    इसके अलावा गोगोई ने असम में बाढ़ की स्थिति का भी उल्लेख किया और प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष सहायता पैकेज की मांग की। उनका कहना था कि शिक्षा, युवाओं और प्राकृतिक आपदाओं जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार को संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेने चाहिए। अब परीक्षा संशोधन विधेयक पर आगे की संसदीय चर्चा और सरकार की ओर से दिए जाने वाले जवाब पर राजनीतिक दलों और छात्रों की निगाहें टिकी हुई हैं।

  • प्रदर्शनकारियों पर कंगना रनौत का तीखा हमला, बोलीं- "हर क्रिया की प्रतिक्रिया होती है, अब रोने की जरूरत नहीं"

    प्रदर्शनकारियों पर कंगना रनौत का तीखा हमला, बोलीं- "हर क्रिया की प्रतिक्रिया होती है, अब रोने की जरूरत नहीं"

    नई दिल्ली। भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत एक बार फिर अपने सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर सुर्खियों में हैं। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को लेकर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन में अपनी बात रखने वाले लोगों को आलोचना और प्रतिक्रिया का सामना करने के लिए भी तैयार रहना चाहिए। इंस्टाग्राम स्टोरी पर साझा किए गए अपने संदेश में कंगना ने प्रदर्शनकारियों के व्यवहार, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और अभद्र भाषा के इस्तेमाल को लेकर कड़ी नाराजगी व्यक्त की।

    कंगना रनौत ने अपनी पोस्ट में लिखा कि सड़कों पर जिन प्रदर्शनकारियों को आम लोगों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है, उसके लिए वे स्वयं जिम्मेदार हैं। उन्होंने दावा किया कि सोशल मीडिया पर उनकी अभद्र और आपत्तिजनक सामग्री के कारण जनता में नाराजगी बढ़ी है। कंगना ने कहा कि जब कोई व्यक्ति सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखता है, तो उसे दूसरों की प्रतिक्रिया सुनने के लिए भी तैयार रहना चाहिए।

    उन्होंने आगे लिखा कि यदि कोई सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाता है, तो जनता भी उसके प्रति नाराजगी व्यक्त कर सकती है। कंगना के अनुसार यदि किसी को सरकार या देश की नीतियों से असहमति है और वह सार्वजनिक मंचों पर अपमानजनक भाषा का प्रयोग करता है, तो उन लोगों को भी अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है जो देश और सरकार का समर्थन करते हैं। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर नागरिक को अपनी राय रखने का समान अधिकार है।

    अपनी पोस्ट में कंगना ने न्यूटन के सिद्धांत का उल्लेख करते हुए लिखा कि हर क्रिया की बराबर और विपरीत प्रतिक्रिया होती है। उन्होंने कहा कि यदि अब तक लोग कारण और प्रभाव के सिद्धांत को नहीं समझ पाए हैं, तो मौजूदा परिस्थितियां उन्हें यह बात अच्छी तरह समझा देंगी। उनके इस बयान को सोशल मीडिया पर व्यापक प्रतिक्रिया मिल रही है और समर्थक व आलोचक दोनों अपनी-अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं।

    दरअसल, हाल के दिनों में छात्र आंदोलन और उससे जुड़े कई वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए हैं। इन्हीं घटनाओं के संदर्भ में कंगना लगातार अपनी प्रतिक्रिया देती रही हैं। इससे पहले भी उन्होंने प्रदर्शनकारियों की भाषा और विरोध के तरीके पर सवाल उठाते हुए कई पोस्ट साझा किए थे। उन्होंने कुछ वायरल वीडियो का उल्लेख करते हुए प्रदर्शनकारियों की भाषा और व्यवहार की आलोचना की थी।

    कंगना ने इससे पहले एक अन्य पोस्ट में प्रदर्शनकारी युवाओं को लेकर कड़ी टिप्पणी करते हुए लिखा था कि उन्होंने एक साथ इतनी अभद्रता पहले कभी नहीं देखी। उन्होंने कुछ वीडियो को परेशान करने वाला बताते हुए युवाओं की भाषा, व्यवहार और परवरिश पर भी सवाल उठाए थे। उनके इन बयानों ने सोशल मीडिया पर व्यापक बहस को जन्म दिया था और विभिन्न वर्गों की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं।

    भाजपा सांसद होने के साथ-साथ कंगना रनौत सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखने के लिए जानी जाती हैं। उनके कई बयान पहले भी राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बन चुके हैं। इस बार भी उनका ताजा बयान सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। हालांकि, इस मुद्दे पर प्रदर्शनकारियों या संबंधित पक्षों की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

  • राफेल सौदे पर तकनीकी अड़चनें बरकरार, सोर्स कोड और रडार तकनीक साझा करने पर फ्रांस अब भी सतर्क

    राफेल सौदे पर तकनीकी अड़चनें बरकरार, सोर्स कोड और रडार तकनीक साझा करने पर फ्रांस अब भी सतर्क

    नई दिल्ली । भारत और फ्रांस के बीच रक्षा सहयोग लगातार मजबूत होता रहा है, लेकिन राफेल लड़ाकू विमान से जुड़ी उन्नत तकनीकों के हस्तांतरण का मुद्दा अब भी पूरी तरह सुलझ नहीं पाया है। भारतीय वायुसेना के लिए 114 बहुउद्देश्यीय राफेल लड़ाकू विमानों की संभावित खरीद को लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत आगे बढ़ रही है, हालांकि विमान के सोर्स कोड और रडार से जुड़े बौद्धिक संपदा अधिकारों के विषय पर सहमति बनने में अभी समय लग सकता है।

    भारत लंबे समय से ऐसी तकनीकी पहुंच चाहता है, जिससे भविष्य में राफेल विमानों में स्वदेशी हथियारों और नई प्रणालियों का एकीकरण स्वतंत्र रूप से किया जा सके। इसी उद्देश्य से रक्षा मंत्रालय विमान के इंटरफेस डेटा और आवश्यक तकनीकी जानकारी प्राप्त करने पर जोर दे रहा है। इससे भारतीय रक्षा उद्योग को घरेलू तकनीक के साथ राफेल प्लेटफॉर्म को बेहतर ढंग से अनुकूलित करने में मदद मिल सकती है।

    जानकारी के अनुसार, भारत ने इस वर्ष मई में 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए औपचारिक अनुरोध भेजा था। अब फ्रांस की ओर से उसके जवाब का इंतजार किया जा रहा है। जवाब मिलने के बाद दोनों पक्ष कीमत, तकनीकी सहयोग, उत्पादन व्यवस्था और अन्य व्यावसायिक शर्तों पर विस्तृत चर्चा करेंगे। प्रस्तावित समझौते में देश के भीतर बड़े पैमाने पर विनिर्माण को भी प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे रक्षा उत्पादन क्षमता और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिल सके।

    बताया जा रहा है कि प्रस्तावित परियोजना में अधिकांश निर्माण कार्य भारत में ही किए जाने की योजना है। इसके तहत स्थानीय उद्योगों की भागीदारी बढ़ाने और घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यह पहल रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन को गति देने और आधुनिक तकनीक के साथ भारतीय उद्योग को जोड़ने की व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।

    हालांकि तकनीकी स्तर पर दो प्रमुख चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। पहली चुनौती राफेल में इस्तेमाल होने वाले अत्याधुनिक एईएसए रडार से जुड़े बौद्धिक संपदा अधिकारों की है। इन अधिकारों के कारण भारत को रडार प्रणाली में स्वतंत्र बदलाव या नई क्षमताओं के समावेश में सीमाएं आ सकती हैं। दूसरी और अधिक महत्वपूर्ण चुनौती विमान के सोर्स कोड तक पहुंच की है, जिसे फ्रांस अत्यंत संवेदनशील रणनीतिक तकनीक मानता है।

    राफेल का सोर्स कोड विमान के मिशन कंप्यूटर, सेंसर फ्यूजन, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और कई महत्वपूर्ण डिजिटल प्रणालियों का आधार माना जाता है। यही कारण है कि इस तकनीक को फ्रांस राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण संपत्ति के रूप में देखता है और इसके पूर्ण हस्तांतरण को लेकर सावधानी बरत रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्तर की तकनीक साझा करने का निर्णय केवल व्यावसायिक नहीं बल्कि रणनीतिक और सुरक्षा संबंधी पहलुओं से भी जुड़ा होता है।

    भारत के लिए यह मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भविष्य में अस्त्र जैसी स्वदेशी हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों, रुद्रम जैसी एंटी-रेडिएशन मिसाइलों तथा अन्य घरेलू हथियार प्रणालियों को राफेल में आसानी से एकीकृत करने की आवश्यकता होगी। यदि आवश्यक तकनीकी पहुंच उपलब्ध नहीं होती है तो प्रत्येक बड़े उन्नयन या एकीकरण के लिए मूल निर्माता पर निर्भरता बनी रह सकती है।

    रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी को देखते हुए बातचीत आगे बढ़ने की संभावना बनी हुई है। आने वाले दौर की वार्ताओं में तकनीकी सहयोग, उत्पादन साझेदारी और संचालन संबंधी आवश्यकताओं के बीच संतुलन स्थापित करना सबसे बड़ी चुनौती रहेगा। यदि इन मुद्दों पर सहमति बनती है तो यह समझौता भारतीय वायुसेना की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ देश के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को भी नई दिशा दे सकता है।

  • एंटी पेपर लीक विधेयक पर चर्चा से पहले एनडीए बैठक में शामिल हुए नए सहयोगी सांसद, पीएम मोदी की मौजूदगी में हुई रणनीतिक चर्चा

    एंटी पेपर लीक विधेयक पर चर्चा से पहले एनडीए बैठक में शामिल हुए नए सहयोगी सांसद, पीएम मोदी की मौजूदगी में हुई रणनीतिक चर्चा

    नई दिल्ली । संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में एंटी पेपर लीक विधेयक पर चर्चा से पहले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की साप्ताहिक ‘मंगल मिलन’ बैठक आयोजित की गई। संसद भवन परिसर स्थित लाइब्रेरी भवन में हुई इस बैठक की खास बात यह रही कि पहली बार एनसीपीआई के सांसद भी इसमें शामिल हुए। ये सांसद पहले तृणमूल कांग्रेस से जुड़े थे और बाद में अपनी नई राजनीतिक भूमिका के तहत एनडीए का समर्थन कर चुके हैं।

    बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी सहित कई वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री और एनडीए के सांसद मौजूद रहे। संसदीय रणनीति और आगामी विधायी कार्यों को लेकर हुई इस बैठक में गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच समन्वय बढ़ाने और संसद में प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करने पर चर्चा की गई।

    बैठक में शामिल होने के बाद एनसीपीआई सांसद सायोनी घोष ने इसे सकारात्मक और ज्ञानवर्धक अनुभव बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में हुई चर्चा से कई महत्वपूर्ण विषयों को समझने का अवसर मिला। उनके अनुसार बैठक में मुक्त व्यापार समझौतों सहित विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया, जिससे सांसदों को व्यापक दृष्टिकोण प्राप्त हुआ।

    सायोनी घोष के साथ एनसीपीआई की अन्य सांसद काकोली घोष और शताब्दी रॉय भी पहली बार एनडीए संसदीय दल की बैठक में शामिल हुईं। तीनों सांसद पहले तृणमूल कांग्रेस का हिस्सा थीं। एनसीपीआई में शामिल होने के बाद उन्होंने एनडीए के प्रति अपना समर्थन दोहराया और गठबंधन की संसदीय गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी की शुरुआत की।

    बैठक के दौरान सरकार ने सांसदों से ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026’ के समर्थन की भी अपील की। यह विधेयक सार्वजनिक परीक्षाओं में होने वाली गड़बड़ियों और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से लाया गया है। सरकार का कहना है कि इस कानून के जरिए परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, विश्वसनीयता और छात्रों के भविष्य की सुरक्षा को और मजबूत किया जाएगा।

    प्रस्तावित संशोधनों के तहत परीक्षा में अनियमितताओं के मामलों में कड़े दंड का प्रावधान किया गया है। इसमें दोषी पाए जाने पर लंबी अवधि की सजा, भारी आर्थिक दंड, अवैध गतिविधियों से जुड़ी संपत्ति जब्त करने तथा मामलों के शीघ्र निपटारे की व्यवस्था जैसे प्रावधान शामिल हैं। सरकार का मानना है कि इन उपायों से संगठित परीक्षा अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा।

    यह बैठक ऐसे समय आयोजित हुई, जब संसद के भीतर एंटी पेपर लीक विधेयक पर चर्चा की तैयारी चल रही है और दूसरी ओर विपक्ष जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन तथा प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस बल प्रयोग के मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है। ऐसे राजनीतिक माहौल में एनडीए की यह बैठक संसदीय समन्वय और रणनीतिक तैयारी के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    ‘मंगल मिलन’ बैठक एनडीए संसदीय दल की नियमित रणनीतिक बैठक का नया स्वरूप है। इसका उद्देश्य सहयोगी दलों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना, संसद में विभिन्न विषयों पर प्रभावी चर्चा सुनिश्चित करना और फ्लोर मैनेजमेंट को मजबूत बनाना है। साथ ही यह मंच गठबंधन के सभी घटक दलों को अपनी भूमिका स्पष्ट करने, जिम्मेदारियों का समन्वय करने और संसद के भीतर साझा रणनीति के साथ आगे बढ़ने का अवसर भी प्रदान करता है।

  • गोरखपुर में कारोबारी के 10 वर्षीय पोते की अपहरण के बाद हत्या, पड़ोसी शिक्षक के घर के बेसमेंट से मिला शव

    गोरखपुर में कारोबारी के 10 वर्षीय पोते की अपहरण के बाद हत्या, पड़ोसी शिक्षक के घर के बेसमेंट से मिला शव


    गोरखपुर। जिले के खजनी कस्बे में एक ज्वैलरी कारोबारी के 10 वर्षीय पोते की अपहरण के बाद हत्या कर दी गई। बच्चे का शव मंगलवार को उसके घर से करीब 20 मीटर दूर रहने वाले पड़ोसी के मकान के बेसमेंट से बरामद हुआ। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।

    एसएसपी डॉ. कौस्तुभ ने बताया कि वैभव वर्मा सोमवार शाम से लापता था। वह स्कूल से घर लौटने के बाद साइकिल लेकर बाहर खेलने गया था। करीब आधे घंटे बाद परिवार को सूचना मिली कि उसकी साइकिल घर के पीछे लावारिस हालत में खड़ी है। मौके पर पहुंचने पर कुछ दूरी पर बच्चे की एक चप्पल भी मिली, जिसके बाद परिजनों को अपहरण की आशंका हुई और पुलिस को सूचना दी गई।

    CCTV से खुला मामला
    सूचना मिलते ही पुलिस, फॉरेंसिक टीम और डॉग स्क्वॉड मौके पर पहुंची। आसपास के CCTV फुटेज खंगालने पर वैभव एक पड़ोसी व्यक्ति के साथ जाता दिखाई दिया। परिवार ने उसकी पहचान सर्वेश भट्ट के रूप में की, जो पेशे से कंप्यूटर शिक्षक बताया जा रहा है। पुलिस ने सर्वेश को हिरासत में लेकर पूछताछ की। अधिकारियों के अनुसार पूछताछ में उसने बच्चे को अपने साथ ले जाने और बाद में उसकी हत्या करने की बात स्वीकार कर ली।

    बेसमेंट से बोरे में मिला शव
    आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने उसके घर के बेसमेंट की तलाशी ली। वहां अनाज की बोरियों के बीच एक बोरे में बच्चे का शव बरामद किया गया। पुलिस के मुताबिक आरोपी ने वारदात उस समय की, जब उसके परिवार के सदस्य मकान की ऊपरी मंजिल पर मौजूद थे। इसके बाद उसने शव को छिपाकर बाद में ठिकाने लगाने की योजना बनाई थी।

    कैसे गायब हुआ वैभव
    वैभव इलाके के प्रतिष्ठित ज्वैलरी कारोबारी लक्ष्मी नारायण वर्मा का पोता था और नवल्स एकेडमी में चौथी कक्षा का छात्र था। सोमवार दोपहर करीब 1:30 बजे वह स्कूल से घर लौटा, यूनिफॉर्म बदली और साइकिल लेकर बाहर निकल गया। दादी ने उसे खाना खाने के लिए कहा था, लेकिन उसने थोड़ी देर में लौटने की बात कही थी।

    डॉग स्क्वॉड और तलाश अभियान
    पुलिस ने पांच टीमें बनाकर तलाश शुरू की। बच्चे की स्कूल ड्रेस खोजी कुत्ते को सूंघाई गई, जिसके बाद वह चप्पल मिलने वाली जगह से करीब एक किलोमीटर दूर तक गया। इसी दौरान CCTV फुटेज से जांच को अहम सुराग मिला।

    परिवार और स्थानीय लोगों में आक्रोश
    घटना के बाद इलाके में भारी आक्रोश फैल गया। परिजनों और स्थानीय लोगों ने थाने के बाहर प्रदर्शन किया और आरोपी को फांसी की सजा देने की मांग की। पुलिस अधिकारियों ने कठोर कार्रवाई का आश्वासन दिया है। पुलिस ने आरोपी के परिवार के सदस्यों को भी पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है और उसके घर के बाहर सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए हैं।

    मां का हाल ही में हुआ था निधन
    वैभव के पिता हनुमान वर्मा ने बताया कि लगभग डेढ़ महीने पहले उसकी मां श्वेता वर्मा का बीमारी के कारण निधन हो गया था। इसके बाद वैभव अधिकतर समय अपने पिता के साथ ही रहता था। उन्होंने कहा कि CCTV फुटेज देखने के बाद उन्हें अपहरण की आशंका हुई और बाद में संदेह पड़ोसी सर्वेश पर गया। पुलिस ने बताया कि मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है और हत्या के कारणों की विस्तृत जांच जारी है।

  • UP: नोएडा-मेरठ समेत 15 शहरों में तेज बारिश, कई इलाकों में बनी जलभराव की स्थिति

    UP: नोएडा-मेरठ समेत 15 शहरों में तेज बारिश, कई इलाकों में बनी जलभराव की स्थिति


    लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। मंगलवार सुबह से नोएडा, मेरठ, सहारनपुर, गोंडा समेत 15 शहरों में रुक-रुक कर तेज बारिश हो रही है। लगातार बरसात के कारण कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई है और जनजीवन प्रभावित हुआ है।

    सहारनपुर में तड़के करीब चार बजे शुरू हुई मूसलाधार बारिश ने महज दो घंटे में शहर की सड़कों को जलमग्न कर दिया। कई स्थानों पर दो से तीन फीट तक पानी भर गया। डीएम कार्यालय परिसर में घुटनों तक पानी जमा हो गया, जबकि ऑफिसर्स कॉलोनी में भी जलभराव हो गया। इस कॉलोनी में जिला जज, कमिश्नर और नगर आयुक्त सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों के सरकारी आवास हैं। शहर की अधिकांश कॉलोनियां तालाब जैसी नजर आईं।

    नोएडा में भी बारिश ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दीं। कई सड़कों पर कमर तक पानी भर गया, जिससे आवागमन बुरी तरह प्रभावित हुआ। जगह-जगह महिलाएं स्कूली बच्चों को कंधों पर बैठाकर सड़क पार कराती दिखाई दीं, जबकि कई दोपहिया वाहन पानी में आधे डूब गए।

    मेरठ में विकास प्राधिकरण के कार्यालय परिसर में पानी घुस गया। कैंप कार्यालय के बाहर जलभराव होने से महापौर को कुछ समय तक कार्यालय के भीतर ही रुकना पड़ा। वहीं रायबरेली में बारिश के बाद खेत में करीब दो फीट गहरा गड्ढा बन गया। ग्रामीणों ने जांच की तो वहां सुरंग जैसी संरचना दिखाई दी, जिसके बाद सूचना मिलने पर एएसआई की टीम मौके पर पहुंचकर जांच में जुट गई।

    मौसम विभाग (IMD) ने आज प्रदेश के सभी 75 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। विभाग के अनुसार 7 जिलों में अत्यधिक भारी और 53 जिलों में भारी बारिश होने की संभावना है। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही वर्षा के कारण गंगा, यमुना, घाघरा और सरयू नदियों का जलस्तर भी बढ़ रहा है।

    लखीमपुर खीरी में शारदा नदी के कटान से करीब 120 बीघा गन्ने की फसल नदी में समा गई है। वहीं बलिया में सरयू नदी का पानी कई गांवों तक पहुंच गया है।

    लखनऊ स्थित मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के अनुसार मानसूनी ट्रफ एक बार फिर उत्तर प्रदेश की ओर सक्रिय हो रही है। इसके साथ ही बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र भी मजबूत हो रहा है। इसके प्रभाव से प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी दोनों हिस्सों में 30 जुलाई तक हल्की से मध्यम तथा कई स्थानों पर भारी बारिश होने के आसार हैं। मौसम विभाग ने कुछ इलाकों में आकाशीय बिजली गिरने की भी चेतावनी जारी की है।

  • झांसी-मानिकपुर रूट पर 6 ट्रेनें रद्द, 2 एक्सप्रेस बदले रूट से चलेंगी

    झांसी-मानिकपुर रूट पर 6 ट्रेनें रद्द, 2 एक्सप्रेस बदले रूट से चलेंगी


    झांसी। मऊरानीपुर-रोरा रेलखंड पर दोहरीकरण कार्य के तहत होने वाले नॉन-इंटरलॉकिंग कार्य की तिथि में बदलाव किया गया है। अब रेल संरक्षा आयुक्त का निरीक्षण 28 जुलाई की बजाय 29 जुलाई को होगा। इसके चलते झांसी मंडल से गुजरने वाली कई ट्रेनों के संचालन में संशोधन किया गया है।

    मंडल जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि झांसी-बांदा, झांसी-मानिकपुर और ग्वालियर-प्रयागराज रेलखंड पर चलने वाली छह ट्रेनें अलग-अलग तारीखों में निरस्त रहेंगी। वहीं, खजुराहो-उदयपुर सिटी एक्सप्रेस और उदयपुर सिटी-खजुराहो एक्सप्रेस को परिवर्तित मार्ग से चलाया जाएगा। इसके अलावा हावड़ा-आगरा कैंट एक्सप्रेस को भी निर्धारित अवधि के लिए नियंत्रित किया जाएगा।

    इन ट्रेनों का संचालन रहेगा प्रभावित
    11801 ग्वालियर-प्रयागराज एक्सप्रेस – 28 और 29 जुलाई को रद्द।
    11802 प्रयागराज-ग्वालियर एक्सप्रेस – 29 और 30 जुलाई को रद्द।
    64613 झांसी-बांदा मेमू – 28 और 29 जुलाई को रद्द।
    64614 बांदा-झांसी मेमू – 28 और 29 जुलाई को रद्द।
    64611 झांसी-मानिकपुर मेमू – 29 जुलाई को रद्द।
    64612 मानिकपुर-झांसी मेमू – 30 जुलाई को रद्द।

    दो एक्सप्रेस ट्रेनों का बदला जाएगा मार्ग
    19666 उदयपुर सिटी-खजुराहो एक्सप्रेस 28 जुलाई को अपने सामान्य झांसी–महोबा–खजुराहो मार्ग की बजाय झांसी–दैलवारा–बिरारी–खजुराहो रूट से संचालित होगी। इसी तरह 19665 खजुराहो-उदयपुर सिटी एक्सप्रेस 29 जुलाई को खजुराहो–महोबा–झांसी के स्थान पर खजुराहो–बिरारी–दैलवारा–झांसी मार्ग से चलेगी।

    हावड़ा-आगरा कैंट एक्सप्रेस होगी लेट
    20975 हावड़ा-आगरा कैंट एक्सप्रेस को 28 जुलाई को एक फेरे के दौरान प्रयागराज मंडल में 150 मिनट और झांसी मंडल में 60 मिनट, यानी कुल 210 मिनट तक नियंत्रित किया जाएगा।

    रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि यात्रा पर निकलने से पहले अपनी ट्रेन की ताजा स्थिति NTES, रेल कनेक्ट ऐप या रेलवे हेल्पलाइन 139 के माध्यम से अवश्य जांच लें, ताकि किसी भी असुविधा से बचा जा सके।