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  • केतन हत्याकांड: खाटू श्याम में सिया-चेतन ने की थी गुपचुप शादी? फूलों की माला वाली तस्वीर से बढ़ा शक

    केतन हत्याकांड: खाटू श्याम में सिया-चेतन ने की थी गुपचुप शादी? फूलों की माला वाली तस्वीर से बढ़ा शक


    पुणे। केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच आगे बढ़ने के साथ सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी के रिश्ते को लेकर नए सवाल सामने आ रहे हैं। पुलिस अब इस पहलू की भी जांच कर रही है कि क्या दोनों ने दिसंबर 2025 में राजस्थान के प्रसिद्ध खाटू श्याम मंदिर में परिवार से छिपकर शादी की थी। जांच के दौरान पुलिस को दोनों की एक तस्वीर मिली है, जिसमें सिया और चेतन फूलों की माला पहने नजर आ रहे हैं। हालांकि, मंदिर में उनकी शादी का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड या CCTV फुटेज पुलिस को अब तक नहीं मिला है।

    मोबाइल बातचीत से मिला राजस्थान कनेक्शन

    पुणे ग्रामीण पुलिस के अनुसार, सिया और चेतन के मोबाइल फोन की बातचीत का विश्लेषण करने के दौरान कथित शादी का सुराग मिला। पुलिस अधिकारियों ने 7 जुलाई को बताया था कि दोनों के बीच हुई बातचीत से संकेत मिले हैं कि उन्होंने परिवार की जानकारी के बिना शादी की हो सकती है।

    इस सुराग की पुष्टि के लिए पुलिस टीम जुलाई में राजस्थान पहुंची। जांचकर्ताओं ने खाटू श्याम मंदिर में दोनों की कथित शादी से जुड़े दस्तावेज और CCTV फुटेज खंगाले, लेकिन ऐसा कोई आधिकारिक रिकॉर्ड या वीडियो नहीं मिला, जिससे शादी की पुष्टि हो सके।

    हालांकि, जांच के दौरान पुलिस को सिया और चेतन की एक तस्वीर जरूर मिली। इसमें दोनों के गले में फूलों की मालाएं दिखाई दे रही हैं। पुलिस ने इस तस्वीर को जांच में महत्वपूर्ण माना है। खबरों के मुताबिक, इसे चार्जशीट के साथ अदालत के समक्ष भी पेश किया गया है। तस्वीर से दोनों की कथित शादी का शक जरूर गहरा हुआ है, लेकिन अकेले तस्वीर के आधार पर शादी की आधिकारिक पुष्टि नहीं होती।

    अक्टूबर 2025 से करीब आए, दिसंबर में राजस्थान गए

    पुलिस जांच के मुताबिक, सिया और चेतन अक्टूबर 2025 से एक-दूसरे के करीब आए थे। बताया गया है कि दोनों के परिवार इस रिश्ते के पक्ष में नहीं थे। दिसंबर 2025 में दोनों कुछ दोस्तों के साथ राजस्थान गए थे।

    पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दोनों ने पहले पुणे से फ्लाइट के जरिए राजस्थान जाने की योजना बनाई थी, लेकिन फ्लाइट कैंसिल होने के बाद उन्होंने ट्रेन से सफर किया। राजस्थान से वापसी भी ट्रेन से ही हुई थी।

    जांच एजेंसियों को इस यात्रा से जुड़े कुछ सबूत भी मिले हैं। इसी अवधि में सिया के परिवार की ओर से उसके लिए शादी की तलाश चल रही थी। बाद में उसका रिश्ता केतन अग्रवाल के साथ तय हुआ।

    19 फरवरी को हुई थी सगाई

    सिया और केतन अग्रवाल की सगाई 19 फरवरी 2026 को हुई थी। दोनों की शादी नवंबर में राजस्थान के उदयपुर में प्रस्तावित थी। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि सिया और चेतन के बीच इस दौरान संपर्क बना हुआ था।

    जांच एजेंसियों का आरोप है कि इसी रिश्ते के चलते सिया और चेतन ने कथित तौर पर केतन को रास्ते से हटाने की साजिश रची। पुलिस अब दोनों के रिश्ते, राजस्थान यात्रा और खाटू श्याम मंदिर से जुड़ी तस्वीर समेत अन्य सबूतों को आपस में जोड़कर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां तलाश रही है।

    माला वाली तस्वीर ने बढ़ाया सवाल

    फिलहाल जांच में सबसे अहम सवाल यही है कि सिया और चेतन की फूलों की माला पहने तस्वीर किस मौके की है। क्या दोनों ने वास्तव में खाटू श्याम मंदिर में शादी की थी या तस्वीर किसी दूसरे अवसर की है, इसका स्पष्ट जवाब अभी सामने नहीं आया है।

    मंदिर से शादी का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड और CCTV फुटेज नहीं मिलने के कारण पुलिस के पास फिलहाल इस कथित शादी की पुष्टि करने वाला निर्णायक दस्तावेज नहीं है। ऐसे में तस्वीर और मोबाइल बातचीत जांच के अहम हिस्से जरूर हैं, लेकिन दोनों की शादी हुई थी या नहीं, यह अभी जांच का विषय बना हुआ है।

  • केदारनाथ गर्भगृह की वायरल रील से मचा हड़कंप, मंदिर समिति ने जांच शुरू कर कार्रवाई के संकेत दिए

    केदारनाथ गर्भगृह की वायरल रील से मचा हड़कंप, मंदिर समिति ने जांच शुरू कर कार्रवाई के संकेत दिए

    नई दिल्ली । उत्तराखंड के केदारनाथ धाम से गर्भगृह से जुड़ा एक कथित वीडियो वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर सामने आई इस रील को लेकर मंदिर की धार्मिक मर्यादा और निर्धारित व्यवस्थाओं के पालन पर सवाल उठ रहे हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए बद्री-केदार मंदिर समिति ने वीडियो बनाने और उसे प्रसारित करने वाले लोगों की पहचान की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

    केदारनाथ धाम में इन दिनों यात्रा का दौर जारी है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। इसी बीच गर्भगृह से संबंधित वीडियो और रील सोशल मीडिया पर सामने आने लगीं। इनमें से एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद मंदिर व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों का ध्यान इस मामले की ओर गया।

    बताया गया है कि ‘हर्षित किचरा’ नाम के एक इंस्टाग्राम हैंडल से गर्भगृह के अंदर का वीडियो पोस्ट किया गया था। वीडियो सामने आने के बाद इसे बड़ी संख्या में लोगों ने देखा और साझा किया। इसके बाद मंदिर के भीतर वीडियो बनाने की अनुमति और वहां लागू नियमों के पालन को लेकर चर्चा तेज हो गई।

    मामले पर बद्री-केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने गंभीरता जताई है। उन्होंने कहा कि गर्भगृह से संबंधित वीडियो बनाने और उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित करने वालों को चिह्नित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे ऐसे वीडियो की निगरानी भी की जा रही है।

    मंदिर समिति की ओर से पूरे मामले के कानूनी और धार्मिक पहलुओं की भी जांच कराई जा रही है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि वीडियो किस परिस्थिति में बनाया गया और मंदिर में लागू नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं। यदि जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

    समिति ने यह भी स्पष्ट किया है कि मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। यदि जांच के दौरान मंदिर समिति या मंदिर की व्यवस्था से जुड़े किसी व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। यानी जांच का दायरा केवल वीडियो बनाने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रखा जाएगा।

    गर्भगृह मंदिर का अत्यंत महत्वपूर्ण और धार्मिक रूप से संवेदनशील हिस्सा माना जाता है। ऐसे स्थान से वीडियो सामने आने के बाद श्रद्धालुओं के बीच भी इसे लेकर चर्चा शुरू हो गई है। मंदिर व्यवस्था से जुड़े नियमों का उद्देश्य धार्मिक परंपराओं और पूजा की निर्धारित प्रक्रिया की मर्यादा बनाए रखना है।

    फिलहाल मंदिर समिति की जांच जारी है और वायरल वीडियो से जुड़े लोगों की पहचान की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि वीडियो किसने बनाया, उसे किस तरह सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया और इस दौरान मंदिर की व्यवस्थाओं से जुड़े किसी नियम का उल्लंघन हुआ या नहीं।

    मंदिर समिति ने संकेत दिया है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। साथ ही समिति की ओर से यह संदेश भी दिया गया है कि धार्मिक स्थल की व्यवस्था और निर्धारित नियमों के उल्लंघन को गंभीरता से लिया जाएगा।

  • त्योहारी सीजन में हवाई किरायों में 100 फीसदी तक उछाल, दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-बेंगलुरु रूट पर यात्रियों की बढ़ी परेशानी

    त्योहारी सीजन में हवाई किरायों में 100 फीसदी तक उछाल, दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-बेंगलुरु रूट पर यात्रियों की बढ़ी परेशानी

    नई दिल्ली । देश में त्योहारी सीजन शुरू होने के साथ हवाई यात्रियों की परेशानी बढ़ती नजर आ रही है। विमान टिकटों के किराए में अचानक तेज बढ़ोतरी का दावा किया गया है। व्यापारियों और उद्यमियों के संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री यानी CTI ने केंद्र सरकार से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और विमान कंपनियों के किराए पर नियंत्रण के लिए कदम उठाने की मांग की है।

    CTI के अनुसार, कुछ दिन पहले जिन घरेलू उड़ानों के टिकट अपेक्षाकृत कम कीमत पर उपलब्ध थे, उनके किराए में अब 50 से 100 फीसदी तक बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। संगठन का कहना है कि त्योहारी मौसम में हवाई यात्रा की मांग बढ़ने वाली है और इसी दौरान किराए में इतनी बड़ी वृद्धि आम यात्रियों, खासकर मध्यम वर्ग और उच्च मध्यम वर्ग के लिए आर्थिक दबाव बढ़ा रही है।

    त्योहारी सीजन गणपति महोत्सव से शुरू होकर दिवाली और छठ पूजा तक जारी रहने वाला है। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग अपने घरों और परिवारों तक पहुंचने के लिए यात्रा करते हैं। ऐसे में हवाई यात्रा की मांग बढ़ने की संभावना रहती है। बढ़ती मांग के बीच टिकटों के दाम में तेज वृद्धि यात्रियों के यात्रा बजट को प्रभावित कर सकती है।

    किराए में बढ़ोतरी का असर प्रमुख घरेलू रूटों पर भी बताया गया है। कुछ समय पहले दिल्ली और मुंबई के बीच आने-जाने का हवाई किराया करीब 10 हजार रुपये था, जो अब बढ़कर 18 हजार से 25 हजार रुपये तक पहुंचने का दावा किया गया है। इसी तरह दिल्ली-अहमदाबाद रूट पर पहले करीब 10 से 12 हजार रुपये का किराया था, जो अब 18 से 20 हजार रुपये तक बताया जा रहा है।

    दिल्ली-बेंगलुरु रूट पर भी किराए में बड़ा अंतर सामने आया है। पहले जहां आने-जाने का टिकट करीब 12 से 15 हजार रुपये में उपलब्ध था, वहीं अब इसके लिए 30 से 35 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। दिल्ली-कोलकाता रूट पर भी पहले लगभग 11 हजार रुपये का किराया था, जो अब करीब 20 हजार रुपये तक पहुंच गया है।

    CTI ने विमान कंपनियों की क्षमता में कमी का मुद्दा भी उठाया है। संगठन के मुताबिक, सितंबर में घरेलू उड़ानों की सीट क्षमता में 5.6 फीसदी की कमी आई है। इसमें इंडिगो की क्षमता 4.5 फीसदी और एयर इंडिया की 8.8 फीसदी कम होने का दावा किया गया है। CTI का कहना है कि बड़ी विमान कंपनियों के पास घरेलू बाजार का बड़ा हिस्सा होने के कारण सीटों की उपलब्धता में कमी का सीधा असर किराए पर पड़ता है।

    इसके अलावा छोटे बच्चों के हवाई किराए में बढ़ोतरी का मुद्दा भी उठाया गया है। CTI के मुताबिक, तीन दिन से दो साल तक के बच्चों का शुल्क 2,000 रुपये से बढ़ाकर 3,000 रुपये कर दिया गया है, जबकि इस आयु वर्ग के बच्चों को अलग सीट उपलब्ध नहीं कराई जाती।

    CTI ने सरकार से मांग की है कि त्योहारी सीजन में यात्रियों को राहत देने के लिए विमान कंपनियों के किराए की स्थिति की तत्काल समीक्षा की जाए और जरूरत पड़ने पर उचित कदम उठाए जाएं।

  • हरदीप सिंह पुरी के बयान से पंजाब की सियासत गरम, भाजपा ने पुराने 22 सीटों वाले समझौते से अलग रुख साफ किया

    हरदीप सिंह पुरी के बयान से पंजाब की सियासत गरम, भाजपा ने पुराने 22 सीटों वाले समझौते से अलग रुख साफ किया


    नई दिल्ली ।
    पंजाब में भारतीय जनता पार्टी और शिरोमणि अकाली दल के बीच संभावित गठबंधन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज है। इसी बीच केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि यदि दोनों दल भविष्य में साथ आते हैं तो सीटों का बंटवारा बराबरी के आधार पर होना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि भाजपा अब पुराने गठबंधन के उस फॉर्मूले पर आगे नहीं बढ़ना चाहती, जिसमें उसे विधानसभा की सीमित सीटों पर चुनाव लड़ना पड़ता था।

    पंजाब विधानसभा में कुल 117 सीटें हैं। हरदीप सिंह पुरी के बयान के मुताबिक भाजपा आधी सीटों पर दावेदारी चाहती है। उन्होंने पुराने 22 से 23 सीटों वाले फॉर्मूले को स्वीकार करने से इनकार किया और कहा कि भाजपा अब जूनियर पार्टनर की भूमिका में नहीं रहना चाहती। हालांकि गठबंधन को लेकर अंतिम फैसला पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व करेगा।

    भाजपा और अकाली दल लंबे समय तक पंजाब की राजनीति में गठबंधन के सहयोगी रहे हैं। पुराने समीकरण में अकाली दल अधिक सीटों पर चुनाव लड़ता था, जबकि भाजपा मुख्य रूप से शहरी क्षेत्रों में अपनी राजनीतिक मौजूदगी के आधार पर सीमित सीटों पर मैदान में उतरती थी। वर्ष 2020 में कृषि कानूनों के मुद्दे पर दोनों दलों का गठबंधन टूट गया था।

    अब भाजपा पंजाब में अपनी राजनीतिक मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रही है। पार्टी की गतिविधियों और नेताओं के बयानों से संकेत मिलता है कि वह राज्य में अपने संगठनात्मक आधार को पहले की तुलना में अधिक व्यापक बनाना चाहती है। हाल के समय में भाजपा ने अलग-अलग राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले नेताओं और प्रभावशाली चेहरों को अपने साथ जोड़ा है।

    पंजाब की राजनीति में भाजपा की पारंपरिक पकड़ मुख्य रूप से शहरी क्षेत्रों और हिंदू मतदाताओं के बीच रही है। पार्टी अब ग्रामीण क्षेत्रों और सिख समुदाय के बीच भी अपना आधार बढ़ाने की कोशिश कर रही है। इसी रणनीति के तहत कई प्रमुख सिख चेहरों के भाजपा से जुड़ने को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    दूसरी ओर, अकाली दल के साथ संभावित गठबंधन को लेकर बातचीत और अटकलों के बीच भाजपा अपने हिस्से को लेकर स्पष्ट रुख अपनाती दिखाई दे रही है। पार्टी का जोर पुराने सहयोगी के साथ संबंधों को पुनर्जीवित करने की स्थिति में बराबरी की भूमिका पर है।

    वर्ष 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिला था। उस चुनाव में अकाली दल को तीन सीटें और भाजपा को दो सीटें मिली थीं। इसके बाद दोनों दलों की राजनीतिक स्थिति को लेकर अलग-अलग चर्चाएं होती रही हैं। ऐसे में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले दोनों पार्टियों के बीच सीटों के बंटवारे का सवाल महत्वपूर्ण बन गया है।

    हालिया राजनीतिक घटनाक्रम में भाजपा ने पंजाब में अपने संगठन और जनाधार के विस्तार पर भी जोर बढ़ाया है। पार्टी की ओर से राज्य के सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों में अपनी राजनीतिक गतिविधियां बढ़ाने की बात सामने आई है। ऐसे में अकाली दल के साथ संभावित समझौते में सीटों की संख्या और भूमिका को लेकर बातचीत आसान नहीं होगी।

    फिलहाल भाजपा और अकाली दल के बीच गठबंधन पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। हरदीप सिंह पुरी के बयान ने इतना स्पष्ट किया है कि यदि दोनों दल दोबारा साथ आते हैं तो भाजपा पुराने छोटे साझेदार वाले समीकरण के बजाय बराबरी की शर्त पर समझौता चाहती है। अब देखना होगा कि अकाली दल इस प्रस्ताव पर क्या रुख अपनाता है और दोनों दल आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए किस तरह का राजनीतिक समीकरण तैयार करते हैं।

  • गिरगांव चा राजा गणपति की पर्यावरण-अनुकूल परंपरा ने बनाया खास, 24 फीट की मूर्ति में दिखती है अनोखी कलात्मक झलक

    गिरगांव चा राजा गणपति की पर्यावरण-अनुकूल परंपरा ने बनाया खास, 24 फीट की मूर्ति में दिखती है अनोखी कलात्मक झलक

    नई दिल्ली । मुंबई के गिरगांव इलाके में स्थापित होने वाला ‘गिरगांव चा राजा’ गणपति अपनी भव्यता के साथ पर्यावरण-अनुकूल परंपरा के लिए भी खास पहचान रखता है। हर साल गणेशोत्सव के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस गणपति की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसकी मूर्ति मिट्टी से तैयार की जाती है और पर्यावरण संरक्षण का संदेश लंबे समय से इस परंपरा का हिस्सा रहा है।

    ‘गिरगांव चा राजा’ की परंपरा की शुरुआत वर्ष 1928 में दक्षिण मुंबई की निकडवारी लेन से हुई थी। उस समय पर्यावरण प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन जैसे विषय आज की तरह सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा नहीं थे। इसके बावजूद इस गणपति मंडल से जुड़े लोगों ने मिट्टी की मूर्ति स्थापित करने का फैसला किया।

    उस समय कई गणपति मूर्तियां प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनाई जाती थीं, लेकिन ‘गिरगांव चा राजा’ के लिए मिट्टी को प्राथमिकता दी गई। इसका उद्देश्य प्राकृतिक जल स्रोतों में मूर्ति विसर्जन से होने वाले पर्यावरणीय प्रभाव को कम करना था। यह परंपरा कई दशकों से लगातार निभाई जा रही है और आज भी इसकी मूर्ति पर्यावरण-अनुकूल सामग्री से तैयार की जाती है।

    गणपति उत्सव के दौरान इस परंपरा को पर्यावरण संरक्षण के संदेश से भी जोड़ा जाता है। मिट्टी से बनी मूर्ति के कारण विसर्जन के बाद इसके प्राकृतिक रूप से घुलने की प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान होती है। यही वजह है कि यह गणपति पर्यावरण-अनुकूल गणेशोत्सव की चर्चा में विशेष स्थान रखता है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2017 में अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में ‘गिरगांव चा राजा’ का उल्लेख किया था। उन्होंने पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाली इसकी परंपरा की सराहना की थी। इसके बाद यह गणपति प्रधानमंत्री मोदी के पसंदीदा गणपति के तौर पर भी चर्चित हुआ।

    इस गणपति की मूर्ति अपनी कलात्मक विशेषताओं के कारण भी श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित करती है। इसकी ऊंचाई करीब 24 फीट बताई जाती है। मूर्ति की सूंड पर भगवान कृष्ण की तस्वीर बनाई जाती है, जो इसे एक अलग और विशिष्ट स्वरूप देती है।

    गिरगांव चा राजा का विसर्जन भी गणेशोत्सव का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। विशाल मूर्ति को गिरगांव की ऐतिहासिक गलियों से होते हुए गिरगांव चौपाटी तक ले जाया जाता है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुलूस में शामिल होते हैं।

    विसर्जन यात्रा में पारंपरिक वेशभूषा में युवा ढोल और लेजिम के साथ शामिल होते हैं। संगीत और पारंपरिक नृत्य के बीच गणपति को विदाई दी जाती है। गिरगांव की गलियों से अरब सागर तक पहुंचने वाली यह यात्रा स्थानीय गणेशोत्सव की प्रमुख परंपराओं में शामिल है।

    ‘गिरगांव चा राजा’ की खासियत केवल उसकी विशाल मूर्ति या कलात्मक सजावट तक सीमित नहीं है। करीब एक सदी से चली आ रही मिट्टी की मूर्ति बनाने की परंपरा इसे पर्यावरण संरक्षण से जोड़ती है। यही वजह है कि गणपति उत्सव के दौरान यह पंडाल धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण जागरूकता का भी संदेश देता है।

    वर्षों से चली आ रही इस परंपरा में आधुनिक समय के पर्यावरणीय सरोकार भी जुड़े हैं। मिट्टी की मूर्ति, अनोखी कलाकारी और पारंपरिक विसर्जन जुलूस ने ‘गिरगांव चा राजा’ को मुंबई के प्रमुख गणपति उत्सवों में अलग पहचान दिलाई है।

  • राहुल गांधी के इंदौर कार्यक्रम में मोदी की मिमिक्री पर विवाद, बीजेपी ने बुजुर्ग महिला और मां के अपमान का लगाया आरोप

    राहुल गांधी के इंदौर कार्यक्रम में मोदी की मिमिक्री पर विवाद, बीजेपी ने बुजुर्ग महिला और मां के अपमान का लगाया आरोप

     
    मध्य प्रदेश : के इंदौर में आयोजित राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिमिक्री को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कार्यक्रम में स्टैंड-अप कॉमेडियन पुलकित मणि ने प्रधानमंत्री मोदी की आवाज और बोलने के अंदाज की नकल की। इसी दौरान एक बुजुर्ग महिला से जुड़े प्रसंग का मजाक बनाए जाने को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर निशाना साधा है।

    कार्यक्रम के दौरान की गई मिमिक्री का वीडियो सामने आने के बाद बीजेपी नेताओं ने इसे राजनीतिक मर्यादा और संवेदनशीलता से जोड़ते हुए सवाल उठाए। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि पार्टी कॉमेडियंस और जोकर्स की पार्टी बन गई है। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस की आलोचना की।

    शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने भी राहुल गांधी और कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के साथ संवाद के लिए आयोजित कार्यक्रम का इस्तेमाल प्रधानमंत्री मोदी की दिवंगत मां के अपमान और मजाक के लिए किया गया। जोशी ने इसे मानवीय संवेदना और राजनीतिक संस्कृति से जुड़ा गंभीर मामला बताया।

    बीजेपी की ओर से यह भी कहा गया कि मां को राजनीति का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए। पार्टी नेताओं ने राहुल गांधी की मौजूदगी में हुए इस मंचीय कार्यक्रम को लेकर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री से जुड़े निजी और पारिवारिक संदर्भों को मजाक का हिस्सा बनाया गया।

    वहीं कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने बीजेपी के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के मंच पर प्रधानमंत्री मोदी की मां से संबंधित कोई बात नहीं हुई। उनका कहना था कि राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री की मां का उल्लेख नहीं किया और लगाए जा रहे आरोपों में तथ्य नहीं हैं। तिवारी ने आरोप लगाने से पहले पूरे मामले को सही तरीके से देखने की बात कही।

    विवाद के बीच राहुल गांधी ने इंदौर कार्यक्रम में उठाए गए छात्रों के मुद्दों को भी सामने रखा। उन्होंने बताया कि एक छात्रा ने उनसे सवाल किया कि सरकार के पास दिया जलाने के लिए पैसा है, लेकिन छात्राओं के लिए हॉस्टल बनाने के लिए क्यों नहीं है। राहुल गांधी ने कहा कि गांवों से शहरों में पढ़ाई के लिए आने वाली छात्राओं को हॉस्टल नहीं मिलने पर पीजी में रहना पड़ता है।

    उन्होंने कहा कि किराए और सुरक्षित आवास का खर्च अधिक होने के कारण कई छात्राओं के लिए पढ़ाई जारी रखना मुश्किल हो जाता है। कार्यक्रम में छात्रों ने शिक्षा, भर्ती, परीक्षा, आरक्षण, हॉस्टल और रोजगार से जुड़े सवाल उठाए।

    ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम का यह पांचवां संस्करण था। इससे पहले कोटा, देहरादून, प्रयागराज और पुणे में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। इंदौर में एक छात्रा ने सरकारी परीक्षाएं पास करने के बावजूद ओबीसी आरक्षण से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया के कारण नियुक्ति रुकने का मुद्दा उठाया। वहीं एक छात्र ने MPPSC में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ आवाज उठाने पर कार्रवाई होने की बात कही। इस बीच मोदी की मिमिक्री को लेकर शुरू हुआ विवाद कार्यक्रम के अन्य छात्र मुद्दों पर भारी पड़ता दिखाई दिया।

  • DUSU चुनाव नतीजों पर निशिकांत दुबे का राहुल गांधी पर निशाना, मंच साझा करने को लेकर कसा तंज

    DUSU चुनाव नतीजों पर निशिकांत दुबे का राहुल गांधी पर निशाना, मंच साझा करने को लेकर कसा तंज

    नई दिल्ली । दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव 2026 के नतीजों के बाद भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को लेकर तंज कसते हुए उनके हालिया कार्यक्रमों और मंच साझा करने को लेकर टिप्पणी की। दुबे ने कहा कि राहुल गांधी को सुनने के लिए लोग तैयार नहीं हैं और उन्हें कलाकारों का सहारा लेना पड़ रहा है।

    दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने केंद्रीय पैनल के चार में से तीन पदों पर जीत हासिल की। यश डबास अध्यक्ष, रिया छावड़ी सचिव और लक्ष्य राज सिंह संयुक्त सचिव चुने गए। वहीं उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने जीत दर्ज की। इस चुनाव में कुल मतदान 40.46 प्रतिशत रहा।

    नतीजों के बाद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम पर टिप्पणी करते हुए कहा कि देशभर में ‘झूठ की गूंज’ चल रही है। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी को सुनने के लिए कोई आने को तैयार नहीं है। दुबे ने राहुल गांधी के चुनावी प्रदर्शन को लेकर भी टिप्पणी की और कहा कि वह 100 से ज्यादा चुनाव हार चुके हैं। यह संख्या उनके बयान का हिस्सा है।

    निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी के हालिया मंच साझा करने वाले कार्यक्रमों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि गुजरात में आयोजित एक कार्यक्रम में राहुल गांधी ने नेहा राठौर के साथ मंच साझा किया। इसके बाद इंदौर में एक स्टैंडअप कॉमेडियन के साथ भी वह मंच पर नजर आए।

    इसी संदर्भ में निशिकांत दुबे ने तंज कसते हुए कहा कि अगर स्थिति इसी तरह बनी रही तो वह दिन दूर नहीं जब राहुल गांधी को राखी सावंत के साथ भी मंच साझा करना पड़ेगा। उनका यह बयान DUSU चुनाव परिणाम के बाद राहुल गांधी पर की गई राजनीतिक टिप्पणी के रूप में सामने आया।

    दुबे ने राहुल गांधी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मजाक बनाने के लिए कलाकारों का सहारा लेने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के कार्यक्रमों में कलाकारों की मौजूदगी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने DUSU चुनाव परिणाम को भी युवाओं के राजनीतिक रुझान से जोड़ते हुए अपनी बात रखी।

    DUSU चुनाव के परिणामों में अध्यक्ष पद पर यश डबास ने 24,576 वोट हासिल किए, जबकि विजय शंकर मीणा को 22,523 वोट मिले। उपाध्यक्ष पद पर दीपांशु शौकीन को 30,615 वोट मिले। सचिव पद पर रिया छावड़ी ने 21,650 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। संयुक्त सचिव पद पर लक्ष्य राज सिंह 16,615 वोट के साथ विजयी रहे।

    इस तरह केंद्रीय पैनल के चार पदों में से तीन पर ABVP उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की, जबकि उपाध्यक्ष पद निर्दलीय उम्मीदवार के खाते में गया। चुनाव परिणाम के बाद छात्र राजनीति को लेकर राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी भी तेज हो गई है।

    निशिकांत दुबे ने DUSU परिणामों के अलावा झारखंड में SIR की प्रक्रिया को लेकर भी राज्य सरकार पर आरोप लगाए। सारठ में SIR प्रक्रिया के दौरान 34 लोगों से जुड़ी कथित अनियमितताओं के सवाल पर उन्होंने दावा किया कि पूरे राज्य में प्रक्रिया के दौरान जो गड़बड़ियां हो रही हैं, उन्हें सरकार खुद करवा रही है।

    उन्होंने सारठ के पूर्व विधायक रणधीर सिंह की प्रशंसा करते हुए कहा कि वह बेहतर काम कर रहे हैं। दुबे ने यह भी कहा कि भाजपा कार्यकर्ता SIR की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए जुटे हुए हैं। इस दौरान उन्होंने झारखंड में MMDR बिल के विरोध सहित कई राजनीतिक मुद्दों पर भी अपनी बात रखी।

  • दिल्ली पुलिस की बड़ी कार्रवाई, अवैध रूप से रह रहे 40 विदेशी नागरिकों की पहचान, 31 नाइजीरियाई नागरिक शामिल

    दिल्ली पुलिस की बड़ी कार्रवाई, अवैध रूप से रह रहे 40 विदेशी नागरिकों की पहचान, 31 नाइजीरियाई नागरिक शामिल

    नई दिल्ली । दिल्ली में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान और दस्तावेजों के सत्यापन को लेकर पुलिस ने अभियान चलाया। इस कार्रवाई के दौरान द्वारका जिले में 43 अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ जांच की गई। पुलिस के अनुसार, अभियान में 40 विदेशी नागरिकों की पहचान और सत्यापन किया गया। इनमें 30 पुरुष और 10 महिलाएं शामिल हैं।

    जांच के दौरान सबसे अधिक संख्या नाइजीरियाई नागरिकों की सामने आई। कुल 31 नाइजीरियाई नागरिकों का सत्यापन किया गया, जिनमें 28 पुरुष और तीन महिलाएं शामिल हैं। इसके अलावा युगांडा के चार नागरिक भी जांच के दायरे में आए, जो सभी महिलाएं हैं। तंजानिया की तीन महिलाओं और आइवरी कोस्ट के दो पुरुष नागरिकों का भी सत्यापन किया गया।

    इस अभियान को अंजाम देने के लिए द्वारका जिले के सभी थानों और विशेष इकाइयों के पुलिसकर्मियों को मिलाकर 25 टीमों का गठन किया गया था। करीब 150 पुलिसकर्मी इस कार्रवाई में शामिल रहे। टीमों ने पहले से जुटाई गई स्थानीय जानकारी, फील्ड वेरिफिकेशन और मानव सूचना के आधार पर चिन्हित ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई की।

    पुलिस की जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना था कि संबंधित विदेशी नागरिक दिल्ली में किस आधार पर रह रहे हैं। इसके साथ ही उनके पास वैध पासपोर्ट, वीजा और भारत में रहने के लिए जरूरी अन्य दस्तावेज मौजूद हैं या नहीं, इसकी भी जांच की गई।

    सत्यापन के दौरान पुलिस ने यह भी पता लगाने की कोशिश की कि संबंधित विदेशी नागरिक अपने वीजा की शर्तों का पालन कर रहे हैं या नहीं। इसके अलावा उनके दस्तावेजों की वैधता और उनके किसी आपराधिक गतिविधि में शामिल होने की संभावना की भी जांच की जा रही है।

    पुलिस के अनुसार, दस्तावेजों और रहने की स्थिति की जांच के बाद नियमों का उल्लंघन सामने आने पर संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य दिल्ली में विदेशी नागरिकों के वैध दस्तावेजों और उनके रहने की स्थिति का सत्यापन करना है।

    जांच के बाद 10 विदेशी नागरिकों के खिलाफ निर्वासन की प्रक्रिया शुरू करने के लिए कार्रवाई की गई है। इनमें पांच नाइजीरियाई नागरिक, चार युगांडा के नागरिक और एक तंजानियाई नागरिक शामिल हैं। इन 10 लोगों में छह महिलाएं और चार पुरुष हैं।

    पुलिस की इस कार्रवाई के दौरान अलग-अलग देशों के नागरिकों की जानकारी और दस्तावेजों का सत्यापन किया गया। अधिकारियों का ध्यान विशेष रूप से इस बात पर रहा कि संबंधित विदेशी नागरिकों के पास भारत में रहने के लिए आवश्यक वैध दस्तावेज हैं या नहीं और वे वीजा से जुड़ी शर्तों का पालन कर रहे हैं या नहीं।

    द्वारका जिले में एक साथ कई स्थानों पर की गई इस कार्रवाई के जरिए पुलिस ने विदेशी नागरिकों के दस्तावेजों और उनके भारत में रहने की स्थिति की जांच की। जिन मामलों में नियमों के उल्लंघन की जानकारी सामने आई है, उनमें आगे की कार्रवाई संबंधित प्रक्रिया और एजेंसियों के समन्वय के आधार पर की जाएगी।

  • गुजरात सरकार ने टेंडर वैलिडेशन अवधि 120 से घटाकर 90 दिन की, मंजूरी प्रक्रिया के लिए 51 और 66 दिन की समय-सीमा तय

    गुजरात सरकार ने टेंडर वैलिडेशन अवधि 120 से घटाकर 90 दिन की, मंजूरी प्रक्रिया के लिए 51 और 66 दिन की समय-सीमा तय

    नई दिल्ली । गुजरात सरकार ने विकास और निर्माण कार्यों से जुड़े टेंडर की मंजूरी प्रक्रिया में बदलाव करते हुए वैलिडेशन की अवधि 120 दिन से घटाकर 90 दिन कर दी है। नई व्यवस्था का उद्देश्य प्रशासनिक स्तर पर होने वाली देरी को कम करना और सड़क, पुल तथा सरकारी भवनों जैसी विकास परियोजनाओं को निर्धारित समय के भीतर शुरू करना है।

    नई व्यवस्था के तहत केवल फाइनेंशियल बिड वाले टेंडर की पूरी मंजूरी प्रक्रिया अधिकतम 51 दिनों में पूरी करनी होगी। वहीं जिन टेंडर में तकनीकी और वित्तीय दोनों स्तरों पर जांच की जरूरत होगी, उनके लिए अधिकतम 66 दिन की समय-सीमा निर्धारित की गई है।

    जिन मामलों में ठेकेदारों की प्री-क्वालिफिकेशन की आवश्यकता नहीं है और केवल फाइनेंशियल बिड शामिल है, उनमें फील्ड या क्षेत्रीय कार्यालय से लेकर सचिवालय और वित्त विभाग तक की पूरी प्रक्रिया 51 दिनों के भीतर पूरी करनी होगी। इसका उद्देश्य अलग-अलग प्रशासनिक स्तरों पर फाइलों के लंबित रहने की स्थिति को कम करना है।

    प्री-क्वालिफिकेशन वाले टेंडर में प्रक्रिया अपेक्षाकृत विस्तृत होगी। ऐसे मामलों में तकनीकी और वित्तीय दोनों बिड की जांच की जाती है। इसके लिए संबंधित कार्यालयों और प्रशासनिक स्तरों पर होने वाली पूरी प्रक्रिया को अधिकतम 66 दिनों में पूरा करने की समय-सीमा तय की गई है।

    सरकार ने टेंडर प्रक्रिया के दौरान होने वाली बातचीत यानी नेगोशिएशन को भी सीमित करने का निर्णय लिया है। निर्धारित नियमों के अनुसार व्यापक प्रचार के बाद यदि एक से अधिक टेंडर प्राप्त होते हैं, तो सामान्य परिस्थितियों में बातचीत से बचा जाएगा। केवल आवश्यकता महसूस होने पर ही नेगोशिएशन किया जा सकेगा।

    यदि बातचीत आवश्यक होती है तो इसे केवल एक स्तर पर सक्षम अधिकारी के स्तर पर किए जाने की व्यवस्था होगी। कई प्रशासनिक स्तरों पर बातचीत की अनुमति नहीं होगी। इससे टेंडर प्रक्रिया में लगने वाले अतिरिक्त समय को कम करने का प्रयास किया गया है।

    नई व्यवस्था में तय समय-सीमा का पालन नहीं होने की स्थिति में जवाबदेही निर्धारित करने का भी प्रावधान किया गया है। यदि किसी प्रस्ताव पर निर्धारित अवधि के भीतर कार्रवाई नहीं होती है तो देरी के कारणों को संबंधित स्तर पर दर्ज करना होगा। साथ ही देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारी की जवाबदेही भी तय की जाएगी।

    यदि किसी प्रस्ताव के अधूरे होने के कारण प्रक्रिया में देरी होती है तो इसकी जिम्मेदारी उस स्तर की होगी जहां से प्रस्ताव आगे भेजा गया था। इस प्रावधान का उद्देश्य टेंडर से जुड़ी फाइलों और प्रस्तावों को पूरा करके समय पर आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी सुनिश्चित करना है।

    ये बदलाव विभिन्न विकास और निर्माण कार्यों से जुड़े टेंडरों पर लागू होंगे। इनमें सड़क, पुल और सरकारी भवनों सहित अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाएं शामिल हैं। सरकार के अनुसार निर्धारित समय-सीमा के कारण टेंडर मंजूरी की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ सकेगी।

    नई व्यवस्था के तहत टेंडर की वैलिडिटी अवधि घटाकर 90 दिन किए जाने के साथ मंजूरी के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय की गई है। इससे परियोजनाओं की प्रशासनिक प्रक्रिया को लंबा खिंचने से रोकने और निर्माण कार्यों को तय कार्यक्रम के अनुसार शुरू करने पर जोर दिया गया है।

    सरकार का कहना है कि समयबद्ध टेंडर मंजूरी से प्रशासनिक देरी कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही सड़क, पुल और अन्य सार्वजनिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के पूरा होने के बाद नागरिकों को संबंधित सुविधाओं और सेवाओं का लाभ जल्द उपलब्ध कराने में भी सहायता मिलेगी।

  • मायावती का नया फैसला, आकाश और दीपिका को जिम्मेदारी नहीं; ईशान आनंद को फिर मिलेगा पार्टी में मौका

    मायावती का नया फैसला, आकाश और दीपिका को जिम्मेदारी नहीं; ईशान आनंद को फिर मिलेगा पार्टी में मौका


    नई दिल्ली ।
    बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने अपने परिवार के सदस्यों की पार्टी में भूमिका को लेकर एक बार फिर बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि आकाश आनंद और उनकी बहन दीपिका आनंद को अब पार्टी में कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने अपने भाई आनंद कुमार के परिवार से ईशान आनंद को सम्मानजनक जिम्मेदारी देकर आगे बढ़ाने की बात कही है।

    मायावती ने कहा कि उन्होंने यह निर्णय अपने अनुभवों और पार्टी के हित को ध्यान में रखते हुए लिया है। उनके मुताबिक राजनीति में सफलता और समाज के लिए काम करने के लिए व्यक्ति को अपने भाई-बहनों और नजदीकी रिश्तेदारों के मोह से ऊपर उठकर पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ काम करना चाहिए।

    उन्होंने कहा कि बहुजन समाज ही उनका असली परिवार है। उनके अनुसार शोषित वर्ग को सत्ता में भागीदारी दिलाकर उसके हित और कल्याण को सुनिश्चित करना उनका प्रमुख राजनीतिक लक्ष्य है। इसी उद्देश्य के तहत वह जरूरत पड़ने पर अपने परिवार के सदस्यों के खिलाफ भी निर्णय लेने के लिए तैयार हैं।

    आकाश आनंद को लेकर मायावती ने कहा कि उनके भाई आनंद कुमार के विशेष आग्रह पर उन्हें राजनीति में आगे बढ़ाया गया था। हालांकि, शादी के बाद आकाश के रवैये और गतिविधियों को लेकर उन्होंने असहमति जताई। मायावती ने कहा कि इन्हीं परिस्थितियों के कारण आकाश को कुछ समय पहले पार्टी से अलग करना पड़ा।

    मायावती ने आकाश आनंद की पार्टी में वापसी की संभावना से भी इनकार किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में उन्हें दोबारा पार्टी में जिम्मेदारी देना संगठन के हित में उचित नहीं होगा। उनके मुताबिक आकाश और उनकी बहन दीपिका को अब पार्टी की किसी भी जिम्मेदारी से पूरी तरह दूर रखा जाएगा और इस फैसले में बदलाव नहीं किया जाएगा।

    दीपिका को लेकर मायावती ने कहा कि पहले उनके परिवार के किसी सदस्य को आगे बढ़ाने को लेकर उनके मन में दुविधा थी। लेकिन भविष्य में पारिवारिक परिस्थितियों के कारण संगठन के सामने किसी तरह की परेशानी पैदा न हो, इसे ध्यान में रखते हुए उन्होंने दीपिका को भी पार्टी की जिम्मेदारी से दूर रखने का फैसला किया है।

    इसके स्थान पर ईशान आनंद को आगे बढ़ाने की घोषणा की गई है। मायावती ने कहा कि आनंद कुमार के परिवार में से अब केवल ईशान आनंद को पार्टी में सम्मानजनक जिम्मेदारी दी जाएगी। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि ईशान ने भविष्य में कोई गंभीर पार्टी विरोधी गतिविधि की, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

    मायावती ने कहा कि ऐसी स्थिति में आनंद कुमार के परिवार के किसी अन्य सदस्य को भी पार्टी में छोटी या बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। इसके बजाय संगठन में काम कर रहे दलित वर्ग के किसी समर्पित और वफादार कार्यकर्ता को आगे बढ़ाया जाएगा।

    अपने फैसले को स्पष्ट करते हुए मायावती ने बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम और डॉ. भीमराव आंबेडकर का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कांशीराम ने अपने नजदीकी रिश्तेदारों को राजनीतिक लाभ देने से दूरी बनाए रखी थी और अपना जीवन बहुजन समाज के हित के लिए समर्पित किया।

    मायावती ने डॉ. आंबेडकर के 23 फरवरी 1956 के एक पत्र का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस पत्र में सार्वजनिक संपत्ति और संगठनात्मक जिम्मेदारियों के मामले में व्यक्तिगत रिश्तों से ऊपर नियम और सार्वजनिक हित को प्राथमिकता देने का संदेश मिलता है।

    मायावती ने बताया कि देश, जनहित और संगठन से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए 23 सितंबर को BSP की ऑल इंडिया बैठक बुलाई गई है। उन्होंने कहा कि इस बैठक के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं को संगठन के काम में पूरी मजबूती और निष्ठा के साथ जुटने की दिशा में आगे बढ़ाया जाएगा।