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  • रांची में बनेंगे तीन नए फ्लाईओवर, 2,335 करोड़ रुपये होंगे खर्च, शहर की यातायात व्यवस्था सुधारने की तैयारी तेज

    रांची में बनेंगे तीन नए फ्लाईओवर, 2,335 करोड़ रुपये होंगे खर्च, शहर की यातायात व्यवस्था सुधारने की तैयारी तेज

    नई दिल्ली ।झारखंड की राजधानी रांची में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने और शहर के सुनियोजित विकास के लिए तीन नए फ्लाईओवर बनाने की तैयारी की जा रही है। इन प्रस्तावित परियोजनाओं पर कुल 2,335.87 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। नगर विकास विभाग ने तीनों फ्लाईओवर से संबंधित प्रस्ताव तैयार कर लिया है।

    प्रस्ताव के अनुसार पहला फ्लाईओवर बिरसा चौक से तुपुदाना चौक तक बनाया जाना है। इसका प्रस्तावित मार्ग टेंडर हार्ट स्कूल के आसपास से होकर जाएगा। दूसरा फ्लाईओवर कटहल मोड़ से दलादिली चौक के बीच प्रस्तावित है। तीसरी परियोजना लालपुर, फिरायालाल और डंगराटोली क्षेत्र को जोड़ने वाले इंटीग्रेटेड फ्लाईओवर की है।

    इन तीनों परियोजनाओं का उद्देश्य रांची के ऐसे इलाकों में यातायात का दबाव कम करना है, जहां बड़ी संख्या में वाहनों की आवाजाही होती है। प्रस्तावित फ्लाईओवर बनने के बाद प्रमुख मार्गों पर वाहनों के आवागमन को अलग स्तर पर ले जाने में मदद मिल सकती है, जिससे सड़क पर जाम की समस्या कम करने की योजना है।

    फिलहाल तीनों फ्लाईओवर की परियोजनाएं प्रस्ताव के शुरुआती चरण में हैं। इनके अंतिम अनुमोदन, बजट आवंटन और निर्माण कार्य शुरू करने की समयसीमा को लेकर औपचारिक प्रक्रिया पूरी होना बाकी है। इसलिए अभी यह स्पष्ट नहीं है कि तीनों परियोजनाओं का निर्माण किस तारीख से शुरू होगा।

    राज्य में शहरी विकास और राजधानी के भविष्य के विस्तार को लेकर हाल में अधिकारियों के साथ चर्चा की गई थी। इस दौरान रांची के सुनियोजित विकास और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप शहर में अधोसंरचना तैयार करने से जुड़े प्रस्तावों पर विचार किया गया। इसी क्रम में राजधानी के सौंदर्यीकरण और विकास से संबंधित रिपोर्ट तथा डिजाइन भी प्रस्तुत किया गया।

    रांची में कुछ अन्य फ्लाईओवर और कॉरिडोर की प्रक्रिया इससे पहले आगे बढ़ चुकी है। करमटोली-चिरौंदी, अरगोड़ा-चापूटोली और हरमू रोड फ्लाईओवर के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी होने और निर्माण एजेंसियों के चयन की जानकारी दी गई है। इन परियोजनाओं का निर्माण जल्द शुरू होने की संभावना है।

    करमटोली-चिरौंदी कॉरिडोर की लंबाई करीब तीन किलोमीटर प्रस्तावित है। यह करमटोली चौक से साइंस सिटी होते हुए चिरौंदी तक जाने वाला मार्ग होगा। वहीं अरगोड़ा-चापूटोली कॉरिडोर करीब चार किलोमीटर लंबा होगा और हरमू रोड से डिबडीह ब्रिज तक सीधी कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने की योजना है।

    हरमू रोड फ्लाईओवर का निर्माण सहजानंद चौक के आसपास से जज कॉलोनी के नजदीक तक प्रस्तावित है। इन परियोजनाओं के जरिए राजधानी के अलग-अलग हिस्सों के बीच यातायात संपर्क बेहतर बनाने की कोशिश की जा रही है।

    प्रस्तावित फ्लाईओवर से घनी आबादी वाले क्षेत्रों में सड़क यातायात का दबाव कम करने पर भी जोर है। इन इलाकों में वाहनों की अधिक आवाजाही के कारण अक्सर जाम की स्थिति बनती है। फ्लाईओवर बनने से मुख्य मार्ग पर वाहनों की आवाजाही को अधिक व्यवस्थित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    रिंग रोड से कनेक्टिविटी भी इन परियोजनाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कुछ प्रस्तावित मार्गों के अंतिम छोर रिंग रोड के नजदीक तक पहुंचने की योजना है। इससे शहर के अंदरूनी हिस्सों से बाहर जाने वाले वाहनों को वैकल्पिक और अपेक्षाकृत सुगम मार्ग मिल सकता है।

    रांची में बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या को देखते हुए सड़क अधोसंरचना के विस्तार की जरूरत लगातार महसूस की जा रही है। तीन नए फ्लाईओवर का प्रस्ताव इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण परियोजना है। हालांकि इनके निर्माण से पहले प्रशासनिक मंजूरी, वित्तीय स्वीकृति और अन्य प्रक्रियाओं को पूरा करना होगा।

  • तेजस में सवार हुए भारत और जापान के एयरफोर्स चीफ, ‘वीर गार्जियन 2026’ में दिखा बढ़ता रक्षा सहयोग

    तेजस में सवार हुए भारत और जापान के एयरफोर्स चीफ, ‘वीर गार्जियन 2026’ में दिखा बढ़ता रक्षा सहयोग

    नई दिल्ली । भारत और जापान के बीच चल रहे संयुक्त हवाई अभ्यास ‘वीर गार्जियन 2026’ के दौरान दोनों देशों के वायुसेना प्रमुखों ने भारतीय स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस में उड़ान का अनुभव लिया। जापान एयर सेल्फ डिफेंस फोर्स के चीफ ऑफ स्टाफ जनरल ताकेहिरो मोरिता और भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह रविवार को जोधपुर एयर फोर्स स्टेशन पहुंचे, जहां तेजस से जुड़ी उड़ान गतिविधि हुई।

    भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने तेजस में अकेले उड़ान भरी। वहीं जापान एयर सेल्फ डिफेंस फोर्स के प्रमुख जनरल ताकेहिरो मोरिता ने भी जोधपुर से भारतीय लड़ाकू विमान तेजस में उड़ान का अनुभव लिया। दोनों देशों के वायुसेना प्रमुखों की यह गतिविधि संयुक्त अभ्यास के दौरान भारत और जापान के बीच हवाई सहयोग को सामने लाती है।

    ‘वीर गार्जियन 2026’ भारत और जापान की वायुसेनाओं के बीच संयुक्त प्रशिक्षण अभ्यास है। इसका आयोजन जोधपुर में 9 सितंबर से 22 सितंबर तक किया जा रहा है। अभ्यास के दौरान दोनों देशों की वायुसेनाएं युद्ध जैसी परिस्थितियों में विभिन्न हवाई अभियानों और युद्धक गतिविधियों का प्रशिक्षण ले रही हैं।

    अभ्यास के तहत दोनों देशों के लड़ाकू विमानों ने एयर स्ट्राइक से जुड़े अभियानों का भी अभ्यास किया है। इसका उद्देश्य दोनों वायुसेनाओं के बीच ऑपरेशनल तालमेल, आपसी समझ और संयुक्त अभियानों के दौरान समन्वय को मजबूत करना है। प्रशिक्षण के दौरान दोनों देशों के वायु योद्धाओं को एक-दूसरे की संचालन प्रक्रियाओं और युद्धक तौर-तरीकों को समझने का अवसर मिल रहा है।

    इस संयुक्त अभ्यास में भारतीय वायुसेना की ओर से स्वदेशी हल्का लड़ाकू विमान तेजस शामिल है। इसके अलावा सुखोई-30 एमकेआई और राफेल जैसे अग्रिम पंक्ति के लड़ाकू विमान भी अभ्यास का हिस्सा हैं। जापान की ओर से एफ-2ए लड़ाकू विमानों ने इसमें भाग लिया है।

    इस बार का अभ्यास इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पहली बार जापान एयर सेल्फ डिफेंस फोर्स के लड़ाकू विमान भारत में आयोजित ‘वीर गार्जियन’ के इस संयुक्त प्रशिक्षण अभ्यास में शामिल हुए हैं। इससे दोनों वायुसेनाओं को अलग-अलग प्रकार के लड़ाकू विमानों के साथ संयुक्त अभियानों और प्रशिक्षण गतिविधियों का अनुभव प्राप्त करने का अवसर मिला है।

    अभ्यास के दौरान अब तक दोनों देशों के वायु योद्धाओं ने अलग-अलग हवाई अभियानों और ऑपरेशनल गतिविधियों को पूरा किया है। संयुक्त प्रशिक्षण के दौरान वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों में काम करने, संचालन प्रक्रियाओं को समझने और बेहतर समन्वय विकसित करने पर ध्यान दिया जा रहा है।

    जोधपुर के आसमान में तेजस की उड़ान ने संयुक्त अभ्यास में भारत की स्वदेशी विमान निर्माण क्षमता को भी प्रमुखता से सामने रखा। दोनों देशों के वायुसेना प्रमुखों की मौजूदगी ने अभ्यास के महत्व को रेखांकित किया। तेजस में उड़ान का अनुभव लेने की गतिविधि भारत और जापान की वायुसेनाओं के बीच बढ़ते व्यावहारिक सहयोग तथा आपसी समझ को मजबूत करने वाले प्रशिक्षण के तौर पर सामने आई है।

  • विदेशी निवेशकों का भारतीय शेयर बाजार से निकासी का रुख, सितंबर में आउटफ्लो 23,676 करोड़ रुपये

    विदेशी निवेशकों का भारतीय शेयर बाजार से निकासी का रुख, सितंबर में आउटफ्लो 23,676 करोड़ रुपये


    नई दिल्ली ।
    विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी एफपीआई की भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली सितंबर में अब तक 23,676 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। 1 से 19 सितंबर के दौरान विदेशी निवेशकों ने सेकेंडरी मार्केट से बड़ी मात्रा में पूंजी निकाली। इससे पहले जुलाई और अगस्त में एफपीआई भारतीय बाजार में शुद्ध खरीदार बने हुए थे।

    सितंबर में विदेशी निवेशकों का रुख पूरी तरह नकारात्मक नहीं रहा है। सेकेंडरी मार्केट में बिकवाली के बावजूद एफपीआई प्राइमरी मार्केट में लगातार निवेश कर रहे हैं। सितंबर में अब तक प्राइमरी बाजार में करीब 2,703 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है।

    इसके साथ ही वर्ष 2026 में एफपीआई का कुल निवेश करीब 48,550 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इससे संकेत मिलता है कि विदेशी निवेशकों की भारतीय बाजार में दिलचस्पी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है, लेकिन सेकेंडरी मार्केट में मौजूदा परिस्थितियों के कारण उनका रुख सतर्क बना हुआ है।

    बाजार रणनीतिकारों के अनुसार, सेकेंडरी मार्केट के अपेक्षाकृत कमजोर प्रदर्शन के बीच प्राइमरी मार्केट में जारी तेजी को एफपीआई निवेश से भी जोड़कर देखा जा सकता है। नए इश्यू और प्राथमिक बाजार से जुड़े अवसरों में विदेशी निवेशकों की भागीदारी बनी हुई है।

    पिछले सप्ताह भारतीय शेयर बाजार दबाव में रहा। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। ऊर्जा कीमतों में तेजी से महंगाई पर संभावित असर और आर्थिक विकास की रफ्तार को लेकर चिंताएं भी बढ़ी हैं।

    सप्ताह के अंत में सेंसेक्स 0.65 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,294.46 अंक पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 0.22 प्रतिशत गिरकर 23,346.40 अंक पर रहा। कई सप्ताह तक बेहतर प्रदर्शन करने के बाद मिडकैप और स्मॉलकैप जैसे प्रमुख सूचकांकों में भी उतार-चढ़ाव वाले सप्ताह के दौरान कोई खास बदलाव नहीं देखने को मिला।

    बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारकों में कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक बॉन्ड यील्ड शामिल रहे। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दर में 25 आधार अंक की बढ़ोतरी के बाद वैश्विक स्तर पर तरलता की स्थिति को लेकर अनिश्चितता और बढ़ी है।

    आने वाले समय में एफपीआई निवेश की दिशा पर ईरान और अमेरिका के बीच जारी टकराव का भी असर पड़ सकता है। इस तनाव से कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर बाजार में चिंता बनी हुई है।

    ऊंची कच्चे तेल की कीमतों के साथ अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का ऊंचा स्तर भारतीय शेयर बाजार के लिए दबाव पैदा करने वाला कारक माना जा रहा है। अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड के 5 प्रतिशत के स्तर पर रहने से विदेशी निवेशकों के लिए वैश्विक निवेश विकल्पों का संतुलन भी प्रभावित हो सकता है।

    हालांकि, भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और कंपनियों की कमाई में सुधार की उम्मीद बाजार के लिए सकारात्मक पहलू बने हुए हैं। ऐसे में एफपीआई के मौजूदा रुख के बावजूद घरेलू आर्थिक मजबूती और बेहतर आय संभावनाएं आगे बाजार की दिशा को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण कारक रहेंगे।

  • मुंबई कोस्टल रोड पर BMW हादसे में तीन की मौत, 200 किमी प्रति घंटे से अधिक रफ्तार की बात सामने आई

    मुंबई कोस्टल रोड पर BMW हादसे में तीन की मौत, 200 किमी प्रति घंटे से अधिक रफ्तार की बात सामने आई

    नई दिल्ली । मुंबई के कोस्टल रोड पर रविवार तड़के एक तेज रफ्तार BMW कार के ब्रिज से नीचे गिरने से बड़ा सड़क हादसा हो गया। दुर्घटना में कार सवार तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि एक युवक गंभीर रूप से घायल हुआ है। घायल का अस्पताल में उपचार चल रहा है।

    जानकारी के मुताबिक काले रंग की BMW कार मरीन ड्राइव से हाजी अली की ओर जा रही थी। सुबह करीब 5:20 बजे कार अचानक अनियंत्रित हो गई। इसके बाद वाहन ने ब्रिज की बाउंड्री वॉल और रेलिंग को टक्कर मारी और उसे तोड़ते हुए नीचे जा गिरा।

    हादसा इतना भीषण था कि कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। दुर्घटना के बाद वाहन के कई हिस्से टूट गए। घटनास्थल की तस्वीरों में कार की स्थिति से टक्कर की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

    बताया गया है कि कार में कुल चार लोग सवार थे। हादसे के बाद तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक करीब 20 वर्षीय युवक गंभीर रूप से घायल हुआ। उसे उपचार के लिए नायर अस्पताल के ट्रॉमा वार्ड में भर्ती कराया गया है।

    मृतकों में 21 वर्षीय शनाय गज्जल और 17 वर्षीय धैर्य सेठ की पहचान हुई है। तीसरे मृतक की पहचान अभी नहीं हो सकी है। करीब 25 वर्षीय इस युवक को अस्पताल पहुंचाए जाने के बाद मृत घोषित किया गया।

    हादसे के बाद घटनास्थल पर राहत और बचाव का काम किया गया। दुर्घटनाग्रस्त BMW को हटाने और मौके पर मौजूद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए संबंधित टीमों ने कार्रवाई की। गंभीर रूप से घायल युवक का अस्पताल में इलाज जारी है।

    प्रारंभिक पुलिस रिपोर्ट में BMW की रफ्तार 200 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक होने की बात सामने आई है। बताया गया है कि तेज गति के कारण चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका। हालांकि हादसे की परिस्थितियों और वाहन की वास्तविक गति से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है।

    जानकारी के अनुसार अनियंत्रित होने के बाद कार पहले सड़क के डिवाइडर से टकराई। इसके बाद यह कोस्टल रोड के किनारे लगे बिजली के खंभे से टकराई और फिर ब्रिज की संरचना को नुकसान पहुंचाते हुए नीचे जा गिरी।

    हादसे के कारण कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। दुर्घटना की गंभीरता को देखते हुए मामले की जांच की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वाहन किस परिस्थिति में अनियंत्रित हुआ और हादसे से पहले सड़क पर उसकी गति कितनी थी।

    मुंबई कोस्टल रोड शहर के प्रमुख मार्गों में शामिल है और यहां वाहनों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। ऐसे में तेज गति से वाहन चलाने की स्थिति में नियंत्रण खोने पर गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।

    रविवार सुबह हुए इस हादसे में तीन लोगों की जान चली गई, जबकि एक युवक गंभीर रूप से घायल है। मृतकों की पहचान की प्रक्रिया और दुर्घटना से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच आगे जारी है।

  • बंगाल में SIR से जुड़ी 37 लाख से अधिक अपीलें लंबित, तेजी से निपटारे के लिए 42 चुनाव ट्रिब्यूनल की मांग

    बंगाल में SIR से जुड़ी 37 लाख से अधिक अपीलें लंबित, तेजी से निपटारे के लिए 42 चुनाव ट्रिब्यूनल की मांग

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया के बाद सामने आई अपीलों के निपटारे को लेकर लंबित मामलों की संख्या लगातार बड़ी बनी हुई है। राज्य में SIR से संबंधित कुल 38,20,683 अपीलें दाखिल की गई थीं। इनमें से अब तक करीब 1.02 लाख मामलों का ही निपटारा हो सका है, जबकि 37 लाख से अधिक अपीलें अभी लंबित हैं।

    लंबित मामलों की बड़ी संख्या को देखते हुए इनके निपटारे की गति बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। मौजूदा रफ्तार बनी रहने पर सभी लंबित अपीलों के निपटारे में लंबा समय लगने का अनुमान सामने आया है। इसी को ध्यान में रखते हुए चुनाव संबंधी मामलों की सुनवाई के लिए ट्रिब्यूनल की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है।

    वर्तमान में पश्चिम बंगाल में इन अपीलों की सुनवाई के लिए 19 ट्रिब्यूनल काम कर रहे हैं। प्रस्ताव के अनुसार इनकी संख्या बढ़ाकर 42 किए जाने की जरूरत बताई गई है। इसका उद्देश्य लंबित मामलों की सुनवाई को तेज करना और बड़ी संख्या में जमा अपीलों का समयबद्ध तरीके से निपटारा करना है।

    लंबित अपीलों में बड़ी संख्या उन मामलों की है, जिनमें SIR के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को चुनौती दी गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 22 लाख से अधिक अपीलें ऐसे मतदाताओं की ओर से दाखिल की गई हैं, जिनके नाम सूची से हटा दिए गए थे। इसके अलावा करीब 16 लाख अपीलें ऐसी हैं, जिनमें SIR के बाद मतदाता सूची में नाम शामिल किए जाने को चुनौती दी गई है।

    आंकड़ों के मुताबिक ट्रिब्यूनल के सामने पहुंची करीब 38 लाख अपीलों में 57 प्रतिशत से अधिक मामले मतदाता सूची से नाम हटाए जाने से जुड़े हैं। इससे स्पष्ट है कि लंबित मामलों का बड़ा हिस्सा मतदाता सूची में नाम हटने से संबंधित विवादों से जुड़ा हुआ है।

    ट्रिब्यूनल की संख्या 42 करने के प्रस्ताव के पीछे एक प्रमुख आधार राज्य के संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या भी है। पश्चिम बंगाल में कुल 42 लोकसभा क्षेत्र हैं। प्रस्ताव के अनुसार प्रत्येक संसदीय क्षेत्र के अनुरूप एक ट्रिब्यूनल होने से मामलों की सुनवाई और निपटारे की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित किया जा सकता है।

    SIR के बाद मतदाता सूची में नामों को लेकर दाखिल हुई अपीलों का निपटारा चुनावी प्रक्रिया के लिहाज से महत्वपूर्ण है। बड़ी संख्या में लंबित मामलों के कारण सुनवाई की प्रक्रिया पर दबाव बना हुआ है। ऐसे में अतिरिक्त ट्रिब्यूनल गठित करने का प्रस्ताव लंबित अपीलों के बोझ को कम करने और सुनवाई की गति बढ़ाने से जुड़ा है।

    यह मामला सुप्रीम कोर्ट के समक्ष चल रही SIR संबंधी कार्यवाही के संदर्भ में सामने आया है। लंबित अपीलों की संख्या, मौजूदा ट्रिब्यूनलों की क्षमता और मामलों के निपटारे की गति को देखते हुए संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है। अब इस दिशा में आगे की प्रक्रिया और अदालत के समक्ष प्रस्ताव पर होने वाली कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी।

  • नंदीग्राम उपचुनाव से पहले कांग्रेस प्रत्याशी की गिरफ्तारी पर सियासत तेज, हिमंत सरमा ने राहुल गांधी पर साधा निशाना

    नंदीग्राम उपचुनाव से पहले कांग्रेस प्रत्याशी की गिरफ्तारी पर सियासत तेज, हिमंत सरमा ने राहुल गांधी पर साधा निशाना

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से पहले कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान की गिरफ्तारी को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस मामले को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने राहुल गांधी के उस बयान पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें कांग्रेस नेता ने प्रत्याशी की गिरफ्तारी को लोकतंत्र की हत्या बताया था।

    हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस प्रत्याशी की गिरफ्तारी का बचाव करते हुए कहा कि पुलिस ने अपना कर्तव्य निभाया है। उन्होंने दावा किया कि मिलन प्रधान के खिलाफ करीब 19 साल पुराने मामले लंबित थे और इन्हीं मामलों में पुलिस ने कार्रवाई की है।

    असम के मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी की आलोचना करते हुए उनके बयानों पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने जिस व्यक्ति को चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा बनाया है, उसके खिलाफ पुराने आपराधिक मामले दर्ज होने की बात सामने आई है। उन्होंने यह भी दावा किया कि वर्ष 2007 में मिलन प्रधान के खिलाफ हत्या से जुड़े दो या तीन मामले दर्ज किए गए थे।

    हिमंत सरमा ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामलों में गिरफ्तारी वारंट लंबित हैं, तो पुलिस के लिए कार्रवाई करना उसके कर्तव्य का हिस्सा है। उन्होंने इसी आधार पर नंदीग्राम से कांग्रेस प्रत्याशी की गिरफ्तारी को उचित ठहराया।

    राहुल गांधी पर टिप्पणी करते हुए हिमंत सरमा ने बेहद तीखे शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने राहुल गांधी को पागल व्यक्ति बताया और उनके अलग-अलग सार्वजनिक रूपों का जिक्र करते हुए तंज कसा। उन्होंने कहा कि कभी राहुल गांधी दाढ़ी के साथ दिखाई देते हैं, कभी बिना दाढ़ी के और कभी विदेश में तो कभी भारत में नजर आते हैं।

    इस पूरे विवाद की शुरुआत मिलन प्रधान की गिरफ्तारी के बाद हुई। राहुल गांधी ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़कर देखा था। इसके बाद हिमंत सरमा ने राहुल गांधी के बयान का जवाब देते हुए गिरफ्तारी के पीछे लंबित मामलों और पुलिस की कार्रवाई का उल्लेख किया।

    पश्चिम बंगाल पुलिस के अनुसार, मिलन प्रधान को चार लंबित मामलों में जारी गिरफ्तारी वारंट के आधार पर गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक ये वारंट गैर-जमानती मामलों में कथित संलिप्तता से जुड़े हैं। इन मामलों का संबंध वर्ष 2007 में नंदीग्राम में हुए भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन के दौरान दर्ज घटनाओं से बताया गया है।

    पुलिस के अनुसार, लंबित मामलों में दंगा, हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण और आपराधिक धमकी जैसे आरोपों से जुड़े प्रकरण शामिल हैं। गिरफ्तारी को लेकर राजनीतिक विवाद के बीच पुलिस ने इन्हीं लंबित मामलों और वारंट को कार्रवाई का आधार बताया है।

    नंदीग्राम उपचुनाव के मद्देनजर मिलन प्रधान की गिरफ्तारी ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। एक ओर कांग्रेस की तरफ से गिरफ्तारी को लेकर सवाल उठाए गए हैं, वहीं दूसरी ओर हिमंत सरमा ने पुलिस की कार्रवाई का समर्थन किया है। फिलहाल विवाद का केंद्र प्रत्याशी की गिरफ्तारी, पुराने मामलों में जारी वारंट और इस कार्रवाई को लेकर सामने आए राजनीतिक बयानों पर बना हुआ है।

  • 2027 चुनाव के बाद क्या होगी योगी आदित्यनाथ की भूमिका, PM पद की अटकलों पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया रुख

    2027 चुनाव के बाद क्या होगी योगी आदित्यनाथ की भूमिका, PM पद की अटकलों पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया रुख


    नई दिल्ली ।
    उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भविष्य की भूमिका को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। खास तौर पर यह सवाल उठ रहा है कि 2027 के चुनाव के बाद योगी आदित्यनाथ की भूमिका क्या होगी और क्या वह राष्ट्रीय राजनीति में कोई बड़ी जिम्मेदारी संभाल सकते हैं। प्रधानमंत्री पद को लेकर चल रही अटकलों के बीच मुख्यमंत्री ने अपनी प्राथमिकता स्पष्ट की है।

    एक इंटरव्यू में योगी आदित्यनाथ से पूछा गया कि 2027 के बाद वह खुद को राष्ट्रीय राजनीति में कहां देखते हैं और क्या प्रधानमंत्री पद की दौड़ में शामिल होना चाहते हैं। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके लिए जिम्मेदारी और देशहित सबसे महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी ने उन्हें उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी दी है, जिसे वह बड़ी जिम्मेदारी मानते हैं।

    योगी आदित्यनाथ ने कहा कि फिलहाल उनका पूरा ध्यान उत्तर प्रदेश को आगे बढ़ाने पर है। उन्होंने राज्य के आर्थिक, सामाजिक और प्रशासनिक विकास को अपनी प्राथमिकता बताया। उनके जवाब में प्रधानमंत्री पद के लिए किसी तरह की दावेदारी सामने नहीं आई। मुख्यमंत्री ने अपनी मौजूदा जिम्मेदारी को ही केंद्र में रखते हुए उत्तर प्रदेश की सेवा और बेहतर शासन पर जोर दिया।

    2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच सीट बंटवारे पर भी उनसे सवाल किया गया। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सहयोगी दलों के साथ सीट शेयरिंग का फैसला संगठन से जुड़ा विषय है। मुख्यमंत्री के तौर पर उनकी जिम्मेदारी सरकार की योजनाओं का लाभ आम लोगों तक पहुंचाना है।

    उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं का फायदा समाज के हर वर्ग, जिले और परिवार तक पहुंचना जरूरी है। उनके अनुसार प्रदेश के प्रत्येक वर्ग का विकास होना चाहिए और लोग राज्य के विकास में अपना योगदान दे सकें, यह भी महत्वपूर्ण है।

    इंटरव्यू के दौरान अयोध्या के बाद काशी और मथुरा पर ध्यान केंद्रित किए जाने को लेकर भी सवाल पूछा गया। इस पर योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अयोध्या, काशी और मथुरा उत्तर प्रदेश की विरासत का हिस्सा हैं। उनके मुताबिक विरासत का संरक्षण और विकास एक साथ आगे बढ़ सकते हैं।

    मुख्यमंत्री ने काशी विश्वनाथ धाम का उदाहरण देते हुए कहा कि वर्ष 2021 में इसके उद्घाटन के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु वहां पहुंचे। उनके अनुसार इससे स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिला। नाव चलाने वालों, दुकानदारों, पुजारियों, ऑटो चालकों, होटल संचालकों और होम स्टे से जुड़े लोगों को इससे काम मिलने की बात उन्होंने कही।

    योगी आदित्यनाथ ने धार्मिक स्थलों के विकास को केवल आस्था से जोड़कर नहीं देखा, बल्कि स्थानीय रोजगार और आर्थिक गतिविधियों से भी जोड़ा। उनका कहना था कि विरासत को संरक्षित करने के साथ विकास की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकता है।

    2027 के चुनाव से पहले योगी की भूमिका को लेकर अलग-अलग राजनीतिक चर्चाएं सामने आ रही हैं, लेकिन प्रधानमंत्री पद को लेकर पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री ने भविष्य की किसी भूमिका का दावा नहीं किया। उन्होंने फिलहाल उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी, विकास और शासन व्यवस्था को ही अपनी प्राथमिकता बताया।

    इस तरह 2027 के बाद उनकी भूमिका को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच योगी आदित्यनाथ का मौजूदा रुख उत्तर प्रदेश की सेवा और राज्य को आर्थिक, सामाजिक तथा प्रशासनिक स्तर पर आगे बढ़ाने पर केंद्रित है।

  • DUSU चुनाव में ABVP ने तीन पद जीते, राजीव शुक्ला बोले- विपक्ष साथ लड़ता तो बदल सकता था नतीजा

    DUSU चुनाव में ABVP ने तीन पद जीते, राजीव शुक्ला बोले- विपक्ष साथ लड़ता तो बदल सकता था नतीजा

    नई दिल्ली । दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव 2026 के नतीजों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने चार केंद्रीय पदों में से तीन पर जीत दर्ज की है। अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पद ABVP के खाते में गए, जबकि उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने जीत हासिल की। परिणाम सामने आने के बाद छात्र राजनीति के साथ-साथ राजनीतिक दलों के बीच भी इस चुनाव को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

    अध्यक्ष पद पर ABVP के यश डबास ने जीत दर्ज की। उन्हें 24,576 वोट मिले, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी NSUI के विजय शंकर मीणा को 22,523 वोट मिले। इस तरह डबास ने 2,053 वोटों के अंतर से अध्यक्ष पद अपने नाम किया। सचिव पद पर ABVP की रिया छावड़ी विजयी रहीं, जबकि संयुक्त सचिव पद पर लक्ष्य राज सिंह ने जीत दर्ज की।

    उपाध्यक्ष पद का परिणाम हालांकि बाकी तीन पदों से अलग रहा। इस सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने 30,615 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। ABVP के ईशु मौर्या को 16,910 वोट मिले, जबकि NSUI के वीर छत्रथ को 4,313 वोट प्राप्त हुए। शौकीन पहले NSUI से जुड़े रहे हैं और इस बार उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा।

    चुनाव में कुल मतदान प्रतिशत 40.46 रहा। चार केंद्रीय पदों के लिए हुए मुकाबले में ABVP ने तीन सीटों पर जीत हासिल की, जबकि NSUI किसी भी केंद्रीय पद पर जीत दर्ज नहीं कर सकी। वर्ष 2015 के बाद यह पहली बार है जब NSUI चार प्रमुख पदों में से कोई भी पद हासिल नहीं कर पाई है।

    नतीजों के बाद कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद राजीव शुक्ला ने चुनाव को लेकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि विपक्ष से जुड़े छात्र संगठनों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा। उनके अनुसार, अगर ये संगठन एक साथ चुनाव मैदान में उतरते तो परिणाम अलग हो सकता था और इंडिया गठबंधन से जुड़े पक्ष को अधिक सफलता मिल सकती थी।

    राजीव शुक्ला की प्रतिक्रिया के बाद DUSU चुनाव के नतीजों को लेकर राजनीतिक चर्चा का एक और पहलू सामने आया। उनके बयान का आधार यह था कि अलग-अलग उम्मीदवारों के मैदान में होने से संबंधित वोटों का बंटवारा हुआ और इसका चुनावी परिणाम पर असर पड़ा।

    दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव को छात्र राजनीति में महत्वपूर्ण माना जाता है। विश्वविद्यालय के केंद्रीय पैनल के चुनाव में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव जैसे पदों के लिए मुकाबला होता है। इन चुनावों में छात्र मुद्दों के साथ विभिन्न छात्र संगठनों की राजनीतिक सक्रियता भी दिखाई देती है।

    इस बार चुनाव के दौरान छात्रों से जुड़े कई मुद्दे चर्चा में रहे। इनमें हॉस्टल, पीजी व्यवस्था और सुरक्षा जैसे विषय प्रमुख रहे। चुनाव परिणामों ने एक ओर ABVP को तीन केंद्रीय पद दिए, वहीं उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार की जीत ने अलग तस्वीर पेश की।

    इस परिणाम के बाद छात्र संगठनों के बीच रणनीति और चुनावी तालमेल को लेकर चर्चा होना स्वाभाविक है। हालांकि अलग-अलग संगठनों के प्रदर्शन और वोटों के बंटवारे को लेकर राजनीतिक नेताओं की व्याख्या उनके अपने आकलन पर आधारित है। DUSU के ताजा परिणामों ने दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति में अलग-अलग संगठनों की स्थिति को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

  • Royal Enfield को टक्कर देने वाली Triumph की दो बाइक्स सस्ती, कंपनी ने घटाई कीमतें जानिए नया प्राइस और फीचर्स

    Royal Enfield को टक्कर देने वाली Triumph की दो बाइक्स सस्ती, कंपनी ने घटाई कीमतें जानिए नया प्राइस और फीचर्स


    नई दिल्ली। त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले ऑटोमोबाइल बाजार में कंपनियां ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए अपनी तैयारियां तेज कर रही हैं। इसी बीच प्रीमियम मोटरसाइकिल निर्माता Triumph ने अपनी 400 सीसी रेंज में शामिल दो बाइक्स की कीमतों में कटौती की है। कंपनी ने Speed 400 और Tracker 400 के दाम कम किए हैं। खास बात यह है कि इन दोनों मोटरसाइकिलों की कीमतों में करीब दो महीने पहले ही बढ़ोतरी की गई थी। अब कंपनी ने एक बार फिर कीमतों में बदलाव करते हुए ग्राहकों को राहत दी है।

    Triumph की ओर से इस साल जून के बाद कीमतों में यह तीसरा बदलाव बताया जा रहा है। अप्रैल में कंपनी ने अपनी 350 सीसी रेंज को भारतीय बाजार में पेश किया था। उस समय Speed 400 की शुरुआती एक्स शोरूम कीमत 2.32 लाख रुपये थी जबकि Tracker 400 को 2.46 लाख रुपये की शुरुआती कीमत के साथ उतारा गया था। इसके बाद जुलाई में दोनों बाइक्स के दाम बढ़ाए गए थे। अब कंपनी ने बढ़ी हुई कीमतों में कटौती कर दी है।

    कीमतों में हुए नए बदलाव के बाद Triumph Speed 400 अब 2.34 लाख रुपये एक्स शोरूम कीमत में उपलब्ध होगी। इससे पहले इसकी कीमत 2.40 लाख रुपये थी। यानी कंपनी ने इस बाइक की कीमत में 6000 रुपये की कमी की है। दूसरी ओर Tracker 400 की कीमत अब 2.42 लाख रुपये हो गई है। इसकी पिछली कीमत 2.49 लाख रुपये थी। इस तरह Tracker 400 भी 7000 रुपये सस्ती हुई है। कीमतों में यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब त्योहारी सीजन में दोपहिया वाहनों की खरीदारी बढ़ने की उम्मीद रहती है।

    कंपनी की 400 सीसी रेंज में केवल Speed 400 और Tracker 400 की कीमत में कटौती की गई है। Speed T4 की कीमत में कोई बदलाव नहीं हुआ है और यह 2.09 लाख रुपये एक्स शोरूम की शुरुआती कीमत पर उपलब्ध है। इसी तरह Scrambler 400 X की कीमत 2.65 लाख रुपये और 400 X C की कीमत 2.99 लाख रुपये बनी हुई है। Thruxton 400 की कीमत भी पहले की तरह 2.75 लाख रुपये एक्स शोरूम है।

    Triumph ने Scrambler 400 X के ग्राहकों के लिए हालांकि एक नया बदलाव किया है। कंपनी ने इस बाइक को दो नए कलर ऑप्शन के साथ पेश किया है। इसमें Matte Pewter Grey और Matte Khaki Green जैसे नए रंग शामिल किए गए हैं। हालांकि इसके इंजन और फीचर्स में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है। बाइक की कीमत भी पहले जैसी ही रखी गई है।

    Triumph की 400 सीसी रेंज में Speed T4 सबसे किफायती मॉडल है जबकि 400 X C सबसे महंगी बाइक है। Speed 400 और Tracker 400 की कीमत में हुई कमी ऐसे ग्राहकों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है जो प्रीमियम बाइक खरीदने की योजना बना रहे हैं। त्योहारी सीजन में कंपनियों के ऑफर और कीमतों में बदलाव के बीच आने वाले समय में इस सेगमेंट में मुकाबला और दिलचस्प होने की उम्मीद है।

  • पंजाब विधानसभा चुनाव की तैयारी…. समान सीटों के बंटवारे की शर्त पर होगा BJP-अकाली दल का गठबंधन

    पंजाब विधानसभा चुनाव की तैयारी…. समान सीटों के बंटवारे की शर्त पर होगा BJP-अकाली दल का गठबंधन


    चंडीगढ़।
    केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता हरदीप सिंह पुरी (Hardeep Singh Puri) ने स्पष्ट किया है कि यदि भविष्य में पंजाब विधानसभा चुनावों (Punjab Assembly elections) के लिए भारतीय जनता पार्टी और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के बीच गठबंधन होता है तो वह केवल समान सीटों के बंटवारे की शर्त पर ही होगा। अमृतसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा अब राज्य में छोटे भाई या जूनियर पार्टनर की भूमिका नहीं निभाएगी।

    हरदीप पुरी ने साफ किया कि पिछला 22-23 सीटों वाला पुराना फॉर्मूला अब नहीं चलेगा। पंजाब की कुल 117 विधानसभा सीटों में से पहले भाजपा केवल 22-23 सीटों पर चुनाव लड़ती थी और बाकी सीटों पर अकाली दल उम्मीदवार उतारता था।

    आपको बता दें कि अगस्त में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के बीच हुई मुलाकात के बाद दोनों पुराने सहयोगियों के फिर से साथ आने की अटकलें लगाई जा रही थीं। कृषि कानूनों के विरोध में अकाली दल ने 2020 में एनडीए का साथ छोड़ दिया था।

    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार पंजाब में नशे के प्रकोप को जड़ से खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है और राज्य के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने पर युद्ध स्तर पर काम कर रही है। उन्होंने राज्य की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के शासन में पंजाब के हालात खराब हो चुके हैं। राज्य की जनता और यहां तक कि पुलिस बल भी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है।