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  • 21 दिन की पैरोल पर बाहर आया डेरा प्रमुख, सिरसा पहुंचने के साथ ही बढ़ी राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियां

    21 दिन की पैरोल पर बाहर आया डेरा प्रमुख, सिरसा पहुंचने के साथ ही बढ़ी राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियां

    नई दिल्ली। डेरा प्रमुख गुरमीत सिंह एक बार फिर पैरोल पर जेल से बाहर आने के बाद सुर्खियों में है। मंगलवार सुबह वह रोहतक की सुनारिया जेल से बाहर निकला और कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच सिरसा स्थित डेरा मुख्यालय पहुंच गया। उसके सिरसा पहुंचते ही पूरे इलाके में हलचल बढ़ गई और प्रशासनिक एजेंसियां पूरी तरह सतर्क नजर आईं। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पहले से ही डेरे के आसपास विशेष बंदोबस्त किए गए थे और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त निगरानी रखी गई थी।

    जानकारी के अनुसार, डेरा प्रमुख को 21 दिन की पैरोल मिली है। सुबह तड़के ही उसके जेल से बाहर आने की प्रक्रिया शुरू हुई और कुछ समय बाद वह सुरक्षा घेरे में सिरसा के लिए रवाना हुआ। उसके साथ करीबी लोग भी मौजूद थे और वाहनों का काफिला विशेष सुरक्षा व्यवस्था के साथ आगे बढ़ा। सिरसा पहुंचने से पहले ही डेरे के आसपास बड़ी संख्या में अनुयायियों की मौजूदगी देखने को मिली। कई लोग उसके आगमन का इंतजार कर रहे थे, जिसके चलते प्रशासन ने पहले से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी थी।

    गुरमीत सिंह पहले भी कई बार पैरोल और फरलो पर जेल से बाहर आ चुका है। इस बार की रिहाई को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं क्योंकि बीते वर्षों में उसकी पैरोल को लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आती रही हैं। हर बार उसके बाहर आने पर समर्थकों और विरोधियों के बीच अलग-अलग तरह की चर्चाएं शुरू हो जाती हैं। यही कारण है कि प्रशासन भी इस पूरे मामले को संवेदनशील मानते हुए अतिरिक्त सावधानी बरत रहा है।

    डेरा प्रमुख फिलहाल साध्वी यौन शोषण मामले में सजा काट रहा है। हालांकि उससे जुड़े कई अन्य मामलों में समय-समय पर कानूनी स्थिति में बदलाव देखने को मिला है। इसी वजह से उसके नाम को लेकर राजनीतिक और सामाजिक चर्चाएं भी लगातार बनी रहती हैं। उसके सिरसा आने के बाद एक बार फिर पूरे इलाके में गतिविधियां बढ़ गई हैं।

    बताया जा रहा है कि पिछली पैरोल के दौरान भी उसने डेरे से जुड़े कई कामों की समीक्षा की थी। उस समय पुराने परिसर के पुनर्निर्माण और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर गतिविधियां तेज हुई थीं। इस बार भी माना जा रहा है कि वह डेरे से जुड़े विभिन्न कार्यों पर ध्यान दे सकता है। हालांकि अभी आधिकारिक तौर पर उसके कार्यक्रमों को लेकर ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है।

    पैरोल पर उसकी यह रिहाई एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। लगातार मिल रही पैरोल और उससे जुड़े घटनाक्रमों को लेकर राजनीतिक गलियारों से लेकर आम लोगों के बीच बहस का दौर शुरू हो गया है। फिलहाल प्रशासन की नजर पूरे घटनाक्रम पर बनी हुई है और सुरक्षा एजेंसियां हालात पर लगातार निगरानी रख रही हैं। आने वाले दिनों में उसकी गतिविधियों और मुलाकातों पर भी सभी की नजर बनी रह सकती है।

  • आम आदमी की जेब पर बढ़ा बोझ, CNG के दामों में फिर 2 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी

    आम आदमी की जेब पर बढ़ा बोझ, CNG के दामों में फिर 2 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी

    नई दिल्ली । महंगाई के लगातार बढ़ते दौर के बीच आम लोगों को एक और झटका लगा है। सीएनजी की कीमतों में फिर बढ़ोतरी की गई है, जिसके बाद राजधानी दिल्ली में अब सीएनजी की नई दर 83 रुपये 9 पैसे प्रति किलो हो गई है। ताजा संशोधन के अनुसार प्रति किलो 2 रुपये का इजाफा किया गया है। लगातार बढ़ती कीमतों ने निजी वाहन चालकों से लेकर सार्वजनिक परिवहन और व्यावसायिक वाहनों पर निर्भर लोगों की चिंता बढ़ा दी है। खास बात यह है कि बीते 12 दिनों के भीतर यह तीसरी बड़ी वृद्धि मानी जा रही है और इस दौरान कुल 6 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

    लगातार बढ़ती कीमतों से बढ़ी चिंता

    सीएनजी को लंबे समय से पेट्रोल और डीजल के मुकाबले सस्ता और बेहतर विकल्प माना जाता रहा है। यही कारण है कि बड़ी संख्या में लोग निजी कारों, टैक्सी सेवाओं और सार्वजनिक वाहनों में सीएनजी का इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि हाल के दिनों में इसकी कीमतों में लगातार वृद्धि ने इस विकल्प की आर्थिक उपयोगिता पर सवाल खड़े करने शुरू कर दिए हैं। आम उपभोक्ताओं का मानना है कि बार-बार बढ़ रही कीमतें सीधे उनके मासिक खर्च को प्रभावित कर रही हैं।

    दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में ऑटो, टैक्सी और सार्वजनिक वाहन सीएनजी आधारित हैं। ऐसे में दाम बढ़ने का असर केवल निजी वाहन उपयोगकर्ताओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि परिवहन सेवाओं की लागत भी बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कीमतों में इसी तरह वृद्धि जारी रही तो इसका असर किराया दरों पर भी दिखाई दे सकता है।

    परिवहन क्षेत्र पर बढ़ सकता है असर

    सीएनजी दरों में वृद्धि का सीधा प्रभाव माल ढुलाई और दैनिक परिवहन व्यवस्था पर पड़ सकता है। परिवहन से जुड़े कारोबारियों का मानना है कि परिचालन लागत बढ़ने से भविष्य में किराये और सेवाओं के खर्च में बदलाव संभव है। सार्वजनिक परिवहन से जुड़े छोटे ऑपरेटरों के लिए लगातार बढ़ती ईंधन कीमतें चिंता का विषय बनती जा रही हैं।

    शहरी इलाकों में बड़ी संख्या में लोग रोजमर्रा के सफर के लिए सीएनजी वाहनों पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में बढ़ती कीमतें उनके मासिक बजट पर भी असर डाल सकती हैं। बीते कुछ वर्षों में सीएनजी को अपेक्षाकृत किफायती विकल्प माना गया था, लेकिन लगातार मूल्य वृद्धि से उपभोक्ताओं की उम्मीदों को झटका लगा है।

    आम आदमी के बजट पर बढ़ेगा दबाव

    विशेषज्ञों का कहना है कि ईंधन की कीमतों में बदलाव का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता बल्कि इसका प्रभाव कई अन्य क्षेत्रों तक पहुंचता है। परिवहन लागत बढ़ने से वस्तुओं की आपूर्ति और सेवा क्षेत्र पर भी दबाव बन सकता है। ऐसे में लगातार बढ़ती कीमतें महंगाई के व्यापक प्रभाव को और तेज कर सकती हैं। फिलहाल लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में कीमतों में स्थिरता आती है या फिर बढ़ोतरी का सिलसिला जारी रहता है।

  • शादी से जुड़े मामलों में अदालत ने तय की अहम सीमा, सामान्य आरोपों पर परिवार के सभी सदस्यों को नहीं घसीटा जा सकता

    शादी से जुड़े मामलों में अदालत ने तय की अहम सीमा, सामान्य आरोपों पर परिवार के सभी सदस्यों को नहीं घसीटा जा सकता


    नई दिल्ली। वैवाहिक विवादों से जुड़े मामलों को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने कहा है कि केवल सामान्य और बिना ठोस तथ्यों वाले आरोपों के आधार पर पति के सभी रिश्तेदारों को आपराधिक मामलों में शामिल करना उचित नहीं माना जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि घरेलू विवादों में पीड़ित पक्ष की शिकायत और सम्मान बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन कानून का इस्तेमाल संतुलित तरीके से होना भी उतना ही जरूरी है।

    वैवाहिक मामलों में बढ़ी न्यायिक चिंता
    हाल के वर्षों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिनमें पारिवारिक विवादों के दौरान पति के साथ-साथ पूरे परिवार के कई सदस्यों को भी आरोपी बनाया गया। अदालत ने माना कि वैवाहिक संबंधों में तनाव और कड़वाहट बढ़ने पर भावनात्मक परिस्थितियों में आरोपों का दायरा भी बढ़ सकता है। ऐसे मामलों में सावधानीपूर्वक जांच जरूरी है ताकि किसी निर्दोष व्यक्ति को अनावश्यक कानूनी प्रक्रिया का सामना न करना पड़े।

    सामान्य आरोपों पर नहीं बन सकता आधार
    अदालत ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ विशेष और स्पष्ट आरोप मौजूद नहीं हैं, तो केवल रिश्तेदारी के आधार पर उसके खिलाफ कार्रवाई उचित नहीं मानी जा सकती। न्यायिक प्रक्रिया में प्रत्येक आरोपी की भूमिका और उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों की अलग-अलग जांच की जानी चाहिए। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि केवल व्यापक और अस्पष्ट दावों के आधार पर मामला आगे बढ़ाना न्याय के मूल सिद्धांतों के अनुरूप नहीं होगा।

    कानून के दुरुपयोग पर जताई चिंता
    सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि यदि जांच और आरोपों की गंभीरता पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आपराधिक प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल उत्पीड़न के साधन के रूप में हो सकता है। अदालत ने संकेत दिया कि न्यायिक संस्थाओं की जिम्मेदारी है कि वे ऐसे मामलों में संवेदनशीलता और सावधानी दोनों के साथ काम करें।

    पीड़ित पक्ष की गरिमा भी उतनी ही जरूरी

    अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि घरेलू हिंसा या उत्पीड़न की शिकायतों को हल्के में नहीं लिया जा सकता। पीड़ितों की सुरक्षा और सम्मान सर्वोच्च प्राथमिकता है। लेकिन इसके साथ यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि कानूनी कार्रवाई तथ्यों और पर्याप्त आधार पर आगे बढ़े। न्याय व्यवस्था का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं बल्कि निष्पक्षता बनाए रखना भी है।

    यह टिप्पणी ऐसे समय में सामने आई है जब पारिवारिक और वैवाहिक विवादों से जुड़े मामलों को लेकर समाज और कानूनी क्षेत्र में लगातार चर्चा हो रही है। अदालत के इस दृष्टिकोण को भविष्य के मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण दिशा माना जा रहा है।
  • भीषण गर्मी से जनजीवन प्रभावित, देश के कई राज्यों में पानी-बिजली की किल्लत

    भीषण गर्मी से जनजीवन प्रभावित, देश के कई राज्यों में पानी-बिजली की किल्लत

    नई दिल्ली । देशभर में पड़ रही प्रचंड गर्मी ने लोगों का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। कई राज्यों में तापमान 45 से 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने से पानी और बिजली की मांग तेजी से बढ़ गई है। राजधानी दिल्ली सहित उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई शहरों और गांवों में जल संकट और बिजली कटौती की गंभीर स्थिति बन गई है। कहीं लोग पानी के लिए लंबी कतारों में खड़े नजर आ रहे हैं, तो कहीं अनियमित बिजली आपूर्ति ने रोजमर्रा की जिंदगी मुश्किल कर दी है।

    गर्मी बढ़ने के साथ टैंकरों पर निर्भरता बढ़ गई है। कई इलाकों में बोरवेल सूखने लगे हैं और भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। बिजली संकट के चलते पानी की मोटरें भी बंद पड़ रही हैं, जिससे हालात और खराब हो रहे हैं।

    दिल्ली के दक्षिणपुरी और देवली क्षेत्रों में पिछले करीब दो महीने से पानी की सप्लाई प्रभावित बताई जा रही है। ब्लॉक 10 और 11 समेत कई इलाकों में लोगों के घरों के नल सूख चुके हैं। लोग बाल्टी और डिब्बे लेकर घंटों पानी का इंतजार कर रहे हैं। संगम विहार, अंबेडकर नगर, खानपुर, तिगड़ी, मदनगीर और तुगलकाबाद एक्सटेंशन जैसे इलाकों में भी जल संकट गहरा गया है। वहीं पूर्वी दिल्ली के दिलशाद गार्डन में स्थानीय लोगों ने जल बोर्ड कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया।

    महाराष्ट्र में भी गर्मी और पानी की कमी ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मुंबई में पानी की उपलब्धता घटने के बाद 10 प्रतिशत पानी कटौती लागू की गई है। शहर की सात झीलों का जलस्तर 19.22 प्रतिशत से नीचे पहुंच गया है। अमरावती, अकोला, मेलघाट और चंद्रपुर जैसे जिलों में तापमान 45 से 47 डिग्री तक पहुंच गया है। ग्रामीण इलाकों में लोग टैंकरों के सहारे हैं और कई गांवों में महिलाएं दूर-दराज से पानी लाने को मजबूर हैं।

    चंद्रपुर के कुछ गांवों में आज भी लोग सूखे नालों में गड्ढे खोदकर रिसता पानी पीने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है।

    मध्य प्रदेश के दतिया और बुरहानपुर जिलों में भी हालात गंभीर बने हुए हैं। दतिया में 3 से 4 दिन में एक बार सीमित समय के लिए पानी की सप्लाई हो रही है, जबकि कई क्षेत्रों में दूषित पानी आने की शिकायतें हैं। बुरहानपुर के धुलकोट इलाके में भी पानी की भारी किल्लत बनी हुई है।

    उत्तर प्रदेश में भी बिजली और पानी दोनों संकट का कारण बने हुए हैं। लखनऊ के फैजुल्लागंज इलाके में बिजली कटौती के चलते पानी की सप्लाई प्रभावित हो रही है। गोरखपुर, प्रयागराज, सहारनपुर और कानपुर में भी लोग जल संकट और बिजली कटौती से परेशान हैं। गाजियाबाद और खोड़ा क्षेत्रों में टैंकरों पर निर्भरता लगातार बढ़ रही है।

    सहारनपुर की अजीज कॉलोनी में करीब 300 परिवार पिछले एक महीने से पानी की समस्या झेल रहे हैं। वहीं कानपुर के 80 फीट रोड इलाके में लंबे समय तक बिजली गुल रहने से लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

    देशभर में बढ़ती गर्मी के बीच पानी और बिजली की समस्या ने आम लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है। कई जगहों पर लोगों में नाराजगी बढ़ रही है और स्थानीय स्तर पर विरोध प्रदर्शन भी देखने को मिल रहे हैं।

  • CBSE मूल्यांकन विवाद ने पकड़ा राजनीतिक रंग, राहुल गांधी बोले- सवाल पूछने वाली युवा पीढ़ी से डर रही सरकार

    CBSE मूल्यांकन विवाद ने पकड़ा राजनीतिक रंग, राहुल गांधी बोले- सवाल पूछने वाली युवा पीढ़ी से डर रही सरकार


    नई दिल्ली। CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली को लेकर उठे विवाद ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। परीक्षा परिणामों और मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर छात्रों की शिकायतों के बीच विपक्ष ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर कई सवाल खड़े किए जा रहे हैं। इसी मुद्दे को आधार बनाकर सरकार और विपक्ष के बीच बयानबाजी भी तेज हो गई है।

    शिक्षा व्यवस्था पर बढ़ा राजनीतिक दबाव

    लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi ने CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली में कथित गड़बड़ियों को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े संस्थानों की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर सवाल उठना चिंता का विषय है। उनका कहना था कि लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े मामलों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई होनी चाहिए।

    OSM प्रणाली पर उठे नए सवाल
    कक्षा 12वीं की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली एक डिजिटल प्रक्रिया है, जिसमें छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन कर स्क्रीन पर जांचा जाता है। हाल के दिनों में इस प्रणाली को लेकर कई तरह की शिकायतें सामने आई हैं। कुछ छात्रों ने गलत मूल्यांकन और अंकों में विसंगति जैसे मुद्दे उठाए हैं। इसी के बाद यह मामला चर्चा का विषय बन गया और इसे लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगीं।

    युवाओं और छात्रों की भूमिका पर बहस
    विवाद के दौरान यह मुद्दा भी सामने आया कि नई पीढ़ी अब शिक्षा और व्यवस्था से जुड़े सवालों पर खुलकर अपनी बात रख रही है। छात्रों की आवाज और उनकी शिकायतों को लेकर बहस तेज हुई है। विपक्ष का कहना है कि युवाओं की बात सुनी जानी चाहिए और उनकी चिंताओं को गंभीरता से लिया जाना जरूरी है। शिक्षा से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग लगातार उठ रही है।

    सुधार की मांग हुई तेज
    विपक्षी नेताओं ने शिक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया है। परीक्षा प्रक्रिया से लेकर मूल्यांकन और परिणाम तक पूरे ढांचे को और मजबूत बनाने की बात कही जा रही है। उनका मानना है कि छात्रों का भरोसा बनाए रखने के लिए एक ऐसी व्यवस्था तैयार करनी होगी जिसमें किसी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना कम से कम हो।

    शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर चर्चा

    इस पूरे विवाद के बाद एक बार फिर देश की परीक्षा प्रणाली और मूल्यांकन प्रक्रिया पर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक के इस्तेमाल के साथ-साथ मजबूत निगरानी और स्पष्ट प्रक्रिया भी जरूरी है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर और बहस देखने को मिल सकती है क्योंकि यह सीधे लाखों छात्रों और उनके भविष्य से जुड़ा विषय है।

  • बकरा मंडियों में दिखी त्योहार की चमक, लाखों के बकरों ने खींचा ध्यान, खरीदारों के सामने बढ़ी नई चुनौतियां

    बकरा मंडियों में दिखी त्योहार की चमक, लाखों के बकरों ने खींचा ध्यान, खरीदारों के सामने बढ़ी नई चुनौतियां

    नई दिल्ली। बकरीद के त्योहार से पहले देशभर की बकरा मंडियों में रौनक अपने चरम पर पहुंच गई है। उत्तर भारत से लेकर मध्य और पश्चिम भारत तक मंडियों में बड़ी संख्या में खरीदारों और व्यापारियों की भीड़ दिखाई दे रही है। त्योहार के करीब आते ही बाजारों में खरीदारी की रफ्तार बढ़ गई है और खास नस्ल के बकरों की मांग तेजी से बढ़ती नजर आ रही है। इस बार कई ऐसे बकरे लोगों का ध्यान खींच रहे हैं जिनकी कीमत लाखों रुपये तक पहुंच गई है।

    विशेष बकरों ने बढ़ाया आकर्षण

    देश के कई शहरों की मंडियों में दूर-दराज इलाकों से व्यापारी अपने खास बकरे लेकर पहुंचे हैं। कई बकरे अपने भारी वजन, अलग पहचान और विशेष नस्ल के कारण चर्चा में बने हुए हैं। कुछ स्थानों पर ऐसे बकरे भी पहुंचे हैं जिनकी कीमत 11 लाख रुपये तक बताई जा रही है। इन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग मंडियों का रुख कर रहे हैं। कई खरीदार इन बकरों के साथ तस्वीरें लेते भी दिखाई दे रहे हैं।

    त्योहारी बाजार में बढ़ी हलचल
    त्योहार नजदीक आने के साथ बाजारों में खरीदारी का माहौल और अधिक सक्रिय हो गया है। सुबह से देर रात तक मंडियों में भीड़ बनी हुई है। कई लोग अपनी पसंद और बजट के अनुसार बकरों का चयन कर रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों में ग्राहकों की संख्या लगातार बढ़ी है और आने वाले दिनों में इसमें और तेजी आने की उम्मीद है।

    महंगाई बनी बड़ी चुनौती
    इस बार व्यापारियों और खरीदारों दोनों के सामने बढ़ती लागत एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है। चारा, परिवहन और देखभाल का खर्च बढ़ने का असर बकरों की कीमतों पर साफ दिखाई दे रहा है। कई व्यापारियों का कहना है कि पहले की तुलना में खर्च काफी बढ़ चुका है, जिसके कारण कीमतों में भी अंतर दिखाई दे रहा है। दूसरी ओर ग्राहक भी बजट के हिसाब से खरीदारी करने की कोशिश कर रहे हैं।

    भीषण गर्मी ने बढ़ाई परेशानी
    त्योहार की तैयारियों के बीच तेज गर्मी ने भी चिंता बढ़ाई है। लगातार बढ़ते तापमान का असर व्यापारियों और पशुओं दोनों पर देखा जा रहा है। कई जगह व्यापारी बकरों को गर्मी से बचाने के लिए विशेष इंतजाम कर रहे हैं। छाया, पानी और देखभाल पर अतिरिक्त ध्यान दिया जा रहा है ताकि पशुओं की सेहत प्रभावित न हो।

    मंडियों में बढ़ी उम्मीदें
    व्यापारियों को उम्मीद है कि त्योहार से पहले के अंतिम दिनों में बिक्री और बढ़ेगी। खरीदार भी अपने परिवार और परंपराओं के अनुसार तैयारी में जुटे हुए हैं। हर साल की तरह इस बार भी बकरीद की तैयारियों ने बाजारों में अलग उत्साह पैदा किया है और देशभर की मंडियां इस उत्साह का केंद्र बन गई हैं।

  • चारधाम यात्रा : अब तक 22 लाख तीर्थयात्री कर चुके हैं दर्शन…. 5 हफ्तों में 92 श्रद्धालुओं की मौत

    चारधाम यात्रा : अब तक 22 लाख तीर्थयात्री कर चुके हैं दर्शन…. 5 हफ्तों में 92 श्रद्धालुओं की मौत


    देहरादून।
    उत्तराखंड (Uttarakhand) में चारधाम यात्रा (Chardham Yatra) के शुरुआती 5 हफ्तों में विभिन्न स्वास्थ्य कारणों की वजह से 92 तीर्थयात्रियों की मौत हो चुकी है। आंकड़े बताते हैं कि सबसे ज्यादा 45 मौतें केदारनाथ (Kedarnath) में हुईं, जबकि बदरीनाथ (Badrinath) में 24, यमुनोत्री में 13 और गंगोत्री (Gangotri) में 10 तीर्थयात्रियों ने अपनी जान गंवाई। इनत तमाम चुनौतियों के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, सोमवार शाम तक 22 लाख से अधिक श्रद्धालु चारों धामों के दर्शन कर चुके हैं।

    केदारनाथ में सबसे अधिक 44 मौतें
    उत्तराखंड के राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (एसईओसी) की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, केदारनाथ में सबसे अधिक 44 मौतें दर्ज की गई हैं। बदरीनाथ में 24 , मुनात्री और गंगोत्री में क्रमशः 13 और 10 श्रद्धालुओं की मौतें हुई हैं। ये मौतें विभिन्न स्वास्थ्य कारणों से हुई हें। इनमें ऊंचाई से संबंधित बीमारियां और हृदय गति रुकना शामिल हैं। एक अन्य व्यक्ति की मौत केदारनाथ में प्राकृतिक आपदा के कारण हुई है।


    चारधाम यात्रा में 92 पहुंचा मौतों का आंकड़ा

    इस साल चारधाम यात्रा में मौतों का आंकड़ा 92 पर पहुंच गया है। आंकड़े बतलाते हैं कि सोमवार शाम सात बजे तक 22 लाख से अधिक श्रद्धालु चारधामों के दर्शन के लिए पहुंच चुके हैं। केदारनाथ में सबसे अधिक 8.72 लाख श्रद्धालु पहुंचे। इसके बाद बदरीनाथ में 6.13 लाख, गंगोत्री और यमुनोत्री में क्रमश: 3.85 एवं 3.87 लाख श्रद्धालु पहुंचे।


    अलर्ट मोड पर आपदा प्रबंधन विभाग

    उच्च हिमालयी क्षेत्र की इस यात्रा को लेकर आपदा प्रबंधन विभाग अलर्ट मोड पर है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शीर्ष अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मौसम प्रतिकूल होने पर हर एक श्रद्धालु की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाए। इतना ही नहीं सिक्खों के विश्व प्रसिद्ध तीर्थस्थल श्री हेमकुंड साहिब भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।


    गंगा दशहरा के मौके पर लगाई आस्था की डुबकी

    इस बीच गंगा दशहरा के मौके पर सोमवार को हरिद्वार में गंगा किनारे बहुत से श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई। लोगों ने नियम-कानून के साथ गंगा जी में स्नान किया। माना जाता है कि इस पवित्र मौके पर गंगा में नहाने से सारे पाप धुल जाते हैं। गंगा दशहरा पर्व उस घटना का प्रतीक है जब गंगा नदी धरती पर अवतरित हुई थीं। इसी दिन मां गंगा स्वर्ग से धरती पर आई थीं। शास्त्रों के मुताबिक गंगा दशहरा गंगा नदी के धरती पर आगमन की याद में मनाया जाता है।

  • अफ्रीका में इबोला के प्रकोप के बाद भारत सरकार अलर्ट मोड पर … कोविड जैसे प्रोटोकॉल लागू

    अफ्रीका में इबोला के प्रकोप के बाद भारत सरकार अलर्ट मोड पर … कोविड जैसे प्रोटोकॉल लागू


    नई दिल्ली।
    अफ्रीका (Africa) के कुछ हिस्सों में इबोला (Ebola) के प्रकोप के मद्देनजर भारत सरकार (Government of India) अलर्ट मोड पर नजर आ रही है। खबर है कि विमानन नियामक डीजीसीए ने एयरलाइनों से विभिन्न उपायों को लागू करने के लिए कहा है। इनमें उड़ान के दौरान उद्घोषणाएं करना और प्रभावित देशों से आने वाले यात्रियों से अनिवार्य रूप से स्व-घोषणा प्रपत्र या सेल्फ डिक्लेरेशन फॉर्म भरवाना शामिल है।


    भारत में क्या है स्थिति

    सरकार ने सोमवार को कहा कि देश में अब तक इबोला वायरस (Ebola Virus) के संक्रमण का कोई मामला सामने नहीं आया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा (JP Nadda) ने भारत में बीमारी के किसी भी प्रसार को रोकने के लिए तैयारियों और निगरानी के उपायों की समीक्षा की। नड्डा ने अधिकारियों को देश भर में हवाई अड्डों, बंदरगाहों और भूमि सीमा पार करने सहित देश के सभी प्रवेश बिंदुओं पर इबोला स्क्रीनिंग व्यवस्था को पूरी तरह से सतर्क और मजबूत रखने का निर्देश दिया।

    WHO यानी विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इबोला के प्रकोप को ‘अंतरराष्ट्रीय चिंता वाला सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल’ घोषित किया है जिसके बाद केंद्र सरकार ने एहतियाती कदम तेज कर दिए हैं।


    यहां के यात्रियों को भरने होंगे फॉर्म

    नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने इबोला रोग के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य तैयारियों को लेकर SOP जारी की है। युगांडा और कांगो के साथ प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से संपर्क रखने वाली एयरलाइनों को यात्रियों को विमान से उतारने से पहले स्व-घोषणा प्रपत्रों को अनिवार्य रूप से भरवाना और एकत्र करना होगा।


    सूची में ये एयरलाइन्स

    एअर इंडिया, इंडिगो, अकासा एयर, एमिरेट्स, एयर फ्रांस, एतिहाद एयरवेज और इजिप्टएयर उन 13 एयरलाइनों में शामिल हैं, जो कांगो से यात्रियों को ले जाने वाली एयरलाइनों की सूची में हैं। युगांडा से यात्रियों को ले जाने वाली 17 एयरलाइनों की सूची में एअर इंडिया, इंडिगो और केएलएम शामिल हैं।


    ये लक्षण दिखने पर तुरंत करना होगा सूचित

    एयरलाइनों को उड़ान के दौरान यह उद्घोषणा करना भी अनिवार्य किया गया है कि इबोला रोग के वर्तमान खतरे को देखते हुए, बुखार, कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द, गले में खराश, उल्टी, दस्त, चकत्ते, रक्तस्राव जैसे लक्षण वाले किसी भी यात्री को आगमन पर तुरंत चालक दल और आव्रजन/चिकित्सा इकाई को सूचित करना चाहिए।

    विमान में संदिग्ध मामलों के लिए, डीजीसीए ने कहा कि अन्य उपायों के अलावा, यात्री को विमान के पिछले हिस्से में भेजा जाना चाहिए और यदि संभव हो तो संबंधित यात्री के आगे और बगल की तीन पंक्तियां खाली रखी जानी चाहिए। एयरलाइनों को यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि उनके पास तीन तह वाले मास्क, एक बार उपयोग में लाये जाने वाले दस्ताने, पीपीई किट, सैनिटाइजर के पर्याप्त भंडार हो।


    शुरू हुई जांच

    गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानसेरिया ने सोमवार को कहा कि अफ्रीका के कुछ हिस्सों में इबोला के प्रकोप के मद्देनजर अहमदाबाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर युगांडा, कांगो और दक्षिण सूडान से आने वाले यात्रियों की जांच की जा रही है। पानसेरिया ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग प्रभावित अफ्रीकी देशों से आने वाले यात्रियों की कड़ी निगरानी कर रहा है। अहमदाबाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर शाम छह बजे से सुबह 10 बजे के बीच युगांडा, कांगो और दक्षिण सूडान से आने वाले यात्रियों की गहन जांच की जा रही है।

  • पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम का असर…. अब दवाओं से लेकर खाने-पीने तक, हर चीज होगी महंगी!

    पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम का असर…. अब दवाओं से लेकर खाने-पीने तक, हर चीज होगी महंगी!


    नई दिल्ली।
    पेट्रोल-डीजल की कीमतों (Petrol-Diesel Price) में दनादन बढ़ोतरी (Hike) हो रही है. महज 10 दिन में ही तेल कंपनियों (Oil Companies) ने चार बार इनमें बढ़ोतरी की है और इस दौरान फ्यूल प्राइस 7 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा बढ़ चुका है. लगातार पेट्रोल-डीजल (Petrol-Diesel Price) महंगा होने से देश में महंगाई का बड़ा खतरा खड़ा हो रहा है, ऐसा इसलिए क्योंकि इसका असर जल्द ही उन जगहों पर दिखना शुरू हो सकता है, जहां देश के आम लोगों को सबसे ज्यादा तकलीफ होगी. इसकी वजह है ट्रांसपोर्टेशन महंगा हो जाएगा और ऐसा होने से खाने-पीने की चीजों से लेकर किराने का सामान, दवाएं, ट्रैवलिंग समेत रोजमर्रा की जरूरत के सामानों के दाम बढ़ सकते हैं।


    10 दिन 4 बार महंगा हुआ पेट्रोल-डीजल

    देश में तेल कंपनियों ने 15 मई को चार साल बाद पहली बार पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का ऐलान किया था और इनकी कीमत में 3 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया था. इसके बाद 19 मई को फिर फ्यूल बम फूटा और ईंधन की कीमत में 87 पैसे प्रति लीटर का इजाफा किया गया. बात यहीं नहीं रुकी और 23 मई को 97 पैसे प्रति लीटर दाम बढ़ाए गए.

    इसके बाद 25 मई को तेल कंपनियों ने चौथी बढ़ोतरी करते हुए पेट्रोल 2.61 रुपये प्रति लीटर, जबकि डीजल 2.71 रुपये प्रति लीटर महंगा कर दिया. इसके बाद दिल्ली में पेट्रोल 100 रुपये के पार निकल गया और 1 लीटर के लिए 102.12 रुपये खर्च करने पड़ेंगे, जबकि डीजल बढ़कर 95.20 रुपये प्रति लीटर हो गया है।


    ट्रांसपोर्टेशन लागत के साथ बढ़ेगी महंगाई

    पेट्रोल-डीजल का महंगा होना, महंगाई के जोखिम को बढ़ाने वाला साबित होता है. इसका उदाहरण बीते 15 मई को ही मिल गया, जबकि Petrol-Diesel-CNG Hike की खबर के बाद अचानक अमूल और मदर डेयरी जैसी कंपनियों ने अपने पैकेज्ड दूध को महंगा कर दिया. यही नहीं मुंबई में ब्रेड महंगी हो गई और टैक्सी यूनियनों ने यात्री किराए में बढ़ोतरी की मांग शुरू कर दी.

    देश में पेट्रोल-डीजल बम फूटने के बाद परिवहन उद्योग ने भी अब औपचारिक रूप से ईंधन की बढ़ती लागत को दूसरे व्यवसायों पर डालना शुरू कर दिया है, जो इस बात का संकेत है कि महंगे डीजल का प्रभाव पेट्रोल पंपों पर ही नहीं, बल्कि तमाम दूसरी चीजों से होते हुए इकोनॉमी तक असर डालेगा. ऑल इंडिया ट्रांसपोर्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन (AITWU) ने चेतावनी दी है कि डीजल की बढ़ती कीमतों (Diesel Price Hike) के कारण देश भर में ट्रांसपोर्टेशन संचालन प्रभावित होता जा रहा है.

    रिपोर्ट की मानें, तो एसोसिएशन ने बीते 20 मई से राष्ट्रव्यापी फ्यूल एडजस्टमेंट फैक्टर (FAF) लागू किया है, जिससे ट्रांसपोर्टरों को डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी पर माल ढुलाई दरों को बढ़ाने की अनुमति होगी.


    आम ग्राहकों पर होगा सीधा असर

    Petrol-Diesel महंगा होने और ट्रांसपोर्टरों को माल ढुलाई रेट्स बढ़ाने की अनुमति से FMCG कंपनियों, मैन्युफैक्चरर्स, रिटेल विक्रेताओं, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स और फूड सप्लायर्स के लिए लॉजिस्टिक्स लागत में सीधी बढ़ोतरी हो सकती है और इसकी भरपाई के लिए कंपनियां बोझ आखिर में सीधे ग्राहकों पर ही डालेंगी, यानी उनके लिए तमाम सामान महंगे हो जाएंगे.


    FAF से कैसे महंगी होगी माल ढुलाई

    AITWU के मुताबिक, सिर्फ डीजल ही ट्रक के परिचालन लागत का लगभग 65% हिस्सा है. इसी को लेकर एसोसिएशन के फैसले पर नजर डालें, तो साफ किया गया था कि 15 मई के प्राइस हाइक से ऊपर डीजल की कीमतों में हर 1 रुपये की वृद्धि के लिए माल ढुलाई रेट ऑटोमैटिक 0.65% बढ़ जाएगा. यानी अगर डीजल की कीमत 10 रुपये बढ़ती है, तो माल ढुलाई की लागत 6.5 फीसदी बढ़ जाएगी. बता दें कि अब तक डीजल 7 रुपये से ज्यादा महंगा हो चुका है. संगठन ने ये भी साफ किया कि इसका उद्देश्य डीजल की बढ़ती लागत की भरपाई करना है।


    क्या कुछ महंगा होने वाला है!

    Diesel Price Hike के चलते माल ढुलाई की लागत बढ़ने से ग्राहकों द्वारा यूज की जाने वाली रोजमर्रा की चीजों के दाम पर सबसे ज्यादा और पहले असर दिखेगा. इनमें सब्जियां, फल, दूध, डेयरी प्रोडक्ट्स, दवाएं, एफएमसीजी वस्तुओं शामिल हैं. इसके अलावा ट्रांसपोर्टेशन महंगा होने से निर्माण सामग्री, इलेक्ट्रॉनिक्स और ई-कॉमर्स डिलीवरी भी लागत की भरपाई ग्राहकों की जेब से करेंगी. क्योंकि ये सभी सामान, दुकानों और गोदामों तक पहुंचने से पहले ट्रकों के माध्यम से ले जाए जाते हैं।


    पहले रुपया अब पेट्रोल-डीजल ने रुलाया

    पहले से ही देश में डॉलर के मुकाबले लगातार टूटते जा रहे भारतीय रुपये ने महंगाई के जोखिम को बढ़ा दिया था, क्योंकि विदेशों से आयात किए जाने वाले सामनों का पेमेंट डॉलर में ही किया जाता है और रुपया कमजोर होने से ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं. वहीं अब पेट्रोल-डीजल के दाम लगातार बढ़ने से महंगाई का खतरा और भी बढ़ गया है।

    साफ तौर पर कहें, ये मामला सिर्फ पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं है, बल्कि आम उपभोक्ताओं पर महंगाई का तगड़ा बम फूटने के संकेत हैं, जिसकी शुरुआत दूध समेत कई चीजों से पहले ही हो चुकी है।

  • किसानों के लिए राहत की खबर: उर्वरकों की कमी का संकट टला, सरकार ने जारी किए बड़े आंकड़े

    किसानों के लिए राहत की खबर: उर्वरकों की कमी का संकट टला, सरकार ने जारी किए बड़े आंकड़े

    नई दिल्ली। खरीफ सीजन से पहले किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। देशभर में उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर चल रही आशंकाओं के बीच केंद्र सरकार ने साफ किया है कि देश में खाद की कोई कमी नहीं है और आपूर्ति पूरी तरह स्थिर बनी हुई है। सरकार का कहना है कि मौजूदा समय में उर्वरकों का भंडार सामान्य जरूरत से काफी अधिक है, जिससे आने वाले महीनों में किसानों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

    सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार देश में इस वर्ष उर्वरकों की कुल आवश्यकता लगभग 390 लाख मीट्रिक टन से अधिक रहने का अनुमान है। इसके मुकाबले मौजूदा समय में 200 लाख मीट्रिक टन से अधिक उर्वरकों का स्टॉक उपलब्ध है। यह मात्रा सामान्य मानकों से काफी ज्यादा मानी जा रही है। इससे संकेत मिलते हैं कि खेती के महत्वपूर्ण सीजन में मांग बढ़ने के बावजूद सप्लाई चेन पर किसी प्रकार का दबाव नहीं पड़ेगा।

    अधिकारियों ने बताया कि वैश्विक परिस्थितियों और अंतरराष्ट्रीय तनावों के बावजूद भारत ने घरेलू उत्पादन और आयात दोनों मोर्चों पर मजबूत स्थिति बनाए रखी है। हाल के समय में कई देशों में आपूर्ति संबंधी चुनौतियां सामने आईं, लेकिन भारत ने पहले से रणनीतिक तैयारी करके संभावित संकट को काफी हद तक नियंत्रित रखा। इसी का परिणाम है कि उर्वरकों की उपलब्धता लगातार बनी हुई है।

    देश में यूरिया, डीएपी, एनपीके और अन्य मिश्रित उर्वरकों का उत्पादन भी संतोषजनक स्तर पर रहा है। साथ ही आयात के जरिए भी आपूर्ति को मजबूत किया गया है। सरकार ने आगामी खरीफ सीजन को ध्यान में रखते हुए बड़ी मात्रा में आवश्यक उर्वरकों का स्टॉक पहले ही सुरक्षित कर लिया है। इससे किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने में आसानी होगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि खेती के मौसम में उर्वरकों की उपलब्धता सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक होती है। यदि समय पर खाद नहीं मिले तो उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है। ऐसे में पर्याप्त स्टॉक का होना कृषि क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

    सरकार का यह भी कहना है कि उर्वरक उत्पादन में उपयोग होने वाले कच्चे माल की उपलब्धता की लगातार समीक्षा की जा रही है। इससे भविष्य में किसी तरह की आपूर्ति बाधा से बचा जा सकेगा। आने वाले महीनों में मांग बढ़ने की संभावना के बीच प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां भी तेज कर दी गई हैं। फिलहाल उपलब्ध आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि देश में खाद संकट जैसी स्थिति बनने की आशंका बेहद कम है और किसानों को इस बार पर्याप्त आपूर्ति मिलने की उम्मीद है।