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  • यात्रियों को राहत: रेलवे ने शुरू कीं 3 स्पेशल ट्रेनें, झांसी स्टेशन पर मिलेगा ठहराव

    यात्रियों को राहत: रेलवे ने शुरू कीं 3 स्पेशल ट्रेनें, झांसी स्टेशन पर मिलेगा ठहराव


    झांसी। यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ को देखते हुए रेलवे ने तीन विशेष ट्रेनों के संचालन का फैसला किया है। ये सभी स्पेशल ट्रेनें वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी रेलवे स्टेशन पर निर्धारित ठहराव के साथ अपने गंतव्य तक जाएंगी।

    मुंबई सेंट्रल-कटिहार स्पेशल (09189) का संचालन प्रत्येक शनिवार 29 अगस्त तक किया जाएगा। यह ट्रेन झांसी स्टेशन पर सुबह 8:09 बजे पहुंचेगी। वापसी में कटिहार-मुंबई सेंट्रल स्पेशल (09190) 28 जुलाई से प्रत्येक मंगलवार 1 सितंबर तक चलेगी और झांसी स्टेशन पर रात 10:40 बजे (22:40 बजे) रुकेगी। दोनों दिशाओं में यह ट्रेन कुल पांच-पांच फेरे लगाएगी।

    इसके अलावा सूरत-छपरा स्पेशल (09065) का संचालन 28 जुलाई से प्रत्येक मंगलवार 29 सितंबर तक किया जाएगा। यह ट्रेन झांसी स्टेशन पर रात 1:30 बजे पहुंचेगी। वापसी में छपरा-सूरत स्पेशल (09066) 29 जुलाई से प्रत्येक बुधवार 30 सितंबर तक चलेगी और झांसी स्टेशन पर शाम 5:25 बजे (17:25 बजे) ठहरेगी। यह ट्रेन दोनों दिशाओं में नौ-नौ फेरे लगाएगी।

    वहीं अहमदाबाद-दरभंगा स्पेशल (09465) 31 जुलाई से प्रत्येक शुक्रवार 11 सितंबर तक संचालित होगी। यह ट्रेन झांसी स्टेशन पर दोपहर 12:30 बजे पहुंचेगी। वापसी में दरभंगा-अहमदाबाद स्पेशल (09466) 3 अगस्त से प्रत्येक सोमवार 14 सितंबर तक चलेगी और झांसी स्टेशन पर रात 12:05 बजे (00:05 बजे) ठहराव करेगी। इस स्पेशल ट्रेन के भी दोनों दिशाओं में छह-छह फेरे निर्धारित किए गए हैं।

    रेलवे का कहना है कि इन विशेष ट्रेनों के संचालन से लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों को राहत मिलेगी और त्योहार व अवकाश के दौरान बढ़ने वाली भीड़ को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

  • कांवड़ यात्रा: कल रात से NH-58 पर ट्रैफिक डायवर्जन होगा लागू, दिल्ली-देहरादून और गंगा एक्सप्रेसवे से गुजरेंगे वाहन

    कांवड़ यात्रा: कल रात से NH-58 पर ट्रैफिक डायवर्जन होगा लागू, दिल्ली-देहरादून और गंगा एक्सप्रेसवे से गुजरेंगे वाहन


    मेरठ। कांवड़ यात्रा को लेकर मेरठ पुलिस ने विस्तृत ट्रैफिक डायवर्जन प्लान जारी कर दिया है। इसके तहत 29 जुलाई की रात 12 बजे से एनएच-58 और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। वहीं, 4 अगस्त की आधी रात से हल्के और मध्यम वाहनों पर भी डायवर्जन लागू कर दिया जाएगा। यह व्यवस्था 12 अगस्त तक प्रभावी रहेगी।

    इस दौरान केवल पासधारक वाहनों को तय समय में कांवड़ मार्गों को छोड़कर आवाजाही की अनुमति मिलेगी। हालांकि, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे और गंगा एक्सप्रेसवे पर सामान्य यातायात पूर्ववत जारी रहेगा। एसपी ट्रैफिक राजेश श्रीवास्तव ने बताया कि डायवर्जन प्लान पड़ोसी जिलों और अन्य राज्यों की पुलिस के साथ समन्वय के बाद तैयार किया गया है। जरूरत पड़ने पर यातायात व्यवस्था में बदलाव भी किया जा सकता है।

    शहर में शुरू होंगी तैयारियां
    नगर निगम मंगलवार से कांवड़ यात्रा मार्गों पर बल्लियां लगाने और स्ट्रीट लाइटों की व्यवस्था शुरू करेगा। नगर आयुक्त सौरभ गंगवार ने अधिकारियों को इसी सप्ताह सभी तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही मुख्य मार्गों के गड्ढे भरने और नालियों की सफाई का कार्य भी तेज कर दिया गया है।

    दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर ये रहेगा प्लान
    4 अगस्त से दिल्ली, गाजियाबाद और नोएडा की ओर से आने वाले हल्के और मध्यम वाहनों का भी डायवर्जन लागू होगा। भारी वाहनों को डासना से मोड़ दिया जाएगा, जबकि अन्य वाहनों को भोजपुर चौराहे से निवाड़ी और हापुड़ की ओर भेजा जाएगा। एनएच-58 की बाईं लेन पर दोनों दिशाओं का ट्रैफिक चलेगा, जबकि दाईं लेन हरिद्वार से लौटने वाले कांवड़ियों के लिए आरक्षित रहेगी।

    NH-58 पर भारी वाहनों की एंट्री बंद
    29 जुलाई से जलाभिषेक तक राधाना से पूरा महादेव और चौधरी चरण सिंह कांवड़ मार्ग (गंग नहर पटरी) पर सभी प्रकार के भारी, हल्के और मध्यम वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। गाजियाबाद से आने वाले भारी वाहनों को दुहाई मोड़ से ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे पर डायवर्ट किया जाएगा। अन्य वाहनों को मोदीनगर से डीएमई होते हुए भोजपुर और पेरिफेरल एक्सप्रेसवे की ओर भेजा जाएगा।

    दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे रहेगा विकल्प
    दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा और राजस्थान से उत्तराखंड व सहारनपुर जाने वाले वाहनों को एनएच-09 से डासना, फिर पेरिफेरल एक्सप्रेसवे और खेकड़ा इंटरचेंज के जरिए दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर भेजा जाएगा। हरिद्वार, रुड़की और मुजफ्फरनगर से आने वाले वाहनों को भी संबंधित जिलों से ही एक्सप्रेसवे की ओर डायवर्ट किया जाएगा।

    गंगा एक्सप्रेसवे से आने वाले वाहनों के लिए व्यवस्था
    गंगा एक्सप्रेसवे से दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, हरियाणा, बागपत, शामली, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, हरिद्वार और देहरादून जाने वाले वाहनों को सिंभावली कट से उतारकर एनएच-09, डासना और पेरिफेरल एक्सप्रेसवे के जरिए दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर भेजा जाएगा।

    मेरठ, मुजफ्फरनगर और बिजनौर की ओर जाने वाले वाहनों को सिंभावली कट से एनएच-09, ततारपुर, हापुड़ बाईपास, टियाला अंडरपास, किठौर, परीक्षितगढ़, मवाना, बहसूमा, रामराज, मीरापुर और जानसठ मार्ग से भेजा जाएगा। बिजौली कट से उतरने वाले वाहनों के लिए भी अलग रूट निर्धारित किया गया है।

    प्रमुख वैकल्पिक मार्ग
    दिल्ली से देहरादून/हरिद्वार: गाजीपुर बॉर्डर–यूपी गेट–एनएच-09–डासना–पिलखुवा–हापुड़ बाईपास–टियाला–किठौर–परीक्षितगढ़–बहसूमा–रामराज–मीरापुर–देवबंद–आशारोड़ी।
    गाजियाबाद से बिजनौर: डासना–पिलखुवा–टियाला–किठौर–परीक्षितगढ़–बहसूमा–रामराज–मीरापुर–गंगा बैराज।
    बुलंदशहर से हरिद्वार/देहरादून: जोखाबाद–ईस्टर्न पेरिफेरल–डासना–पिलखुवा–किठौर–देवबंद–छुटमलपुर–मोहंड–आशारोड़ी।
    मेरठ से शामली: नानू नहर पुल–भूनी चौराहा–फुगाना मार्ग।

    हेल्पलाइन नंबर
    केंद्रीय कमांड एवं कंट्रोल सेंटर: 0121-2667080
    सिटी कंट्रोल रूम: 9454401587
    ग्रामीण कंट्रोल रूम: 9454417431
    यातायात कंट्रोल रूम: 9454404000

  • जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर कार्रवाई पर रोक, मायावती बोलीं- ध्वस्तीकरण नहीं, नियमों के तहत निकले समाधान

    जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर कार्रवाई पर रोक, मायावती बोलीं- ध्वस्तीकरण नहीं, नियमों के तहत निकले समाधान


    लखनऊ। रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों को गिराने की प्रस्तावित कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगने के बाद बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसे मामलों में तोड़फोड़ की कार्रवाई के बजाय संस्थानों को नियमानुसार नियमित करने और व्यावहारिक समाधान तलाशने पर जोर देना चाहिए।

    मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी अपने संदेश में मायावती ने कहा कि रामपुर विकास प्राधिकरण द्वारा बिना स्वीकृत मानचित्र के निर्माण का हवाला देकर भवनों को गिराने की प्रक्रिया पर रोक लगाना उचित कदम है। उनका कहना था कि ऐसे मामलों में जनहित और शिक्षा दोनों को ध्यान में रखकर निर्णय लिया जाना चाहिए।

    छात्रों के भविष्य का भी रखें ध्यान
    बसपा सुप्रीमो ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानी मोहम्मद अली जौहर के नाम पर स्थापित इस विश्वविद्यालय का मामला केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां अध्ययन कर रहे छात्रों के भविष्य से भी जुड़ा हुआ है। इसलिए सरकार को पहले नियमों के अनुरूप समाधान निकालने का प्रयास करना चाहिए।

    उन्होंने यह भी कहा कि यदि प्रदेश के अन्य शिक्षण संस्थानों में भी निर्माण संबंधी नियमों का पालन नहीं हुआ है, तो उन्हें ध्वस्त करने के बजाय आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कर नियमित करने की दिशा में कदम उठाए जाने चाहिए। मायावती ने उम्मीद जताई कि सरकार जनहित को प्राथमिकता देते हुए इस सुझाव पर सकारात्मक विचार करेगी।

    अंतरिम राहत के बाद अंतिम सुनवाई बाकी
    उल्लेखनीय है कि मुरादाबाद मंडलायुक्त की अदालत ने सोमवार को मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को अंतरिम राहत देते हुए 38 भवनों को गिराने की कार्रवाई पर अंतिम निर्णय तक रोक लगा दी थी। मंडलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह के अनुसार, यूनिवर्सिटी की ओर से दायर याचिका पर यह अंतरिम आदेश दिया गया है। मामले में सभी पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड की जांच के बाद अंतिम फैसला सुनाया जाएगा।

  • यूपी पुलिस में 15 वरिष्ठ IPS अधिकारियों के तबादले, तरुण गाबा बने लखनऊ के नए पुलिस कमिश्नर

    यूपी पुलिस में 15 वरिष्ठ IPS अधिकारियों के तबादले, तरुण गाबा बने लखनऊ के नए पुलिस कमिश्नर


    लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने पुलिस महकमे में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 15 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के तबादले किए हैं। इस बदलाव में तरुण गाबा को लखनऊ का नया पुलिस कमिश्नर नियुक्त किया गया है, जबकि अशोक मुथा को पुलिस महानिदेशक (डीजी) अग्निशमन एवं आपात सेवाएं की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सरकार का कहना है कि यह बदलाव पुलिस व्यवस्था को अधिक प्रभावी, जवाबदेह और सुचारु बनाने के उद्देश्य से किया गया है।

    तबादला सूची के अनुसार, मधुर अशोक जैन को पुलिस महानिदेशक मुख्यालय से स्थानांतरित कर पुलिस महानिदेशक अग्निशमन एवं आपात सेवाएं बनाया गया है। वहीं, लखनऊ के पुलिस आयुक्त अमरेंद्र कुमार सेंगर को पुलिस महानिरीक्षक (अभिसूचना) मुख्यालय भेजा गया है।

    राम कुमार को लखनऊ रेंज से गोरखपुर जोन का अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी) नियुक्त किया गया है। नवीन अरोरा को तकनीकी सेवाओं से हटाकर वाराणसी जोन की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि पीयूष मोर्डिया को वाराणसी जोन से प्रयागराज का पुलिस आयुक्त बनाया गया है।

    इसी क्रम में संजय गुप्ता को पुलिस मुख्यालय से एडीजी कानून-व्यवस्था, धर्मेंद्र सिंह को प्रयागराज रेंज का पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) नियुक्त किया गया है। इसके अलावा मोहित गुप्ता, विनीत कुमार सिंह, राजेंद्र कुमार, आनंद प्रकाश तिवारी, अरुण कुमार सिंह और आनंद कुमार समेत अन्य अधिकारियों को भी नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

    सरकार ने सभी स्थानांतरित अधिकारियों को जल्द से जल्द नई तैनाती पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए हैं। इस फेरबदल को प्रदेश की कानून-व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • युवा उद्यमिता को नई दिशा देने की तैयारी, 'यूथ अड्डा' से आत्मनिर्भरता पर यूपी सरकार का बड़ा फोकस

    युवा उद्यमिता को नई दिशा देने की तैयारी, 'यूथ अड्डा' से आत्मनिर्भरता पर यूपी सरकार का बड़ा फोकस


    नई दिल्ली । बदलती अर्थव्यवस्था और डिजिटल युग में युवाओं की प्राथमिकताएं तेजी से बदल रही हैं। पारंपरिक नौकरी की बजाय बड़ी संख्या में युवा अब स्टार्टअप, नवाचार, डिजिटल कारोबार और स्वरोजगार को अपने भविष्य के रूप में देख रहे हैं। इसी बदलते परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने युवाओं को उद्यमिता की ओर प्रोत्साहित करने के लिए ‘यूथ अड्डा’ पहल को विस्तार देने की दिशा में काम तेज किया है। इस पहल का उद्देश्य युवाओं को केवल रोजगार तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाला बनाना है।

    राज्य सरकार का मानना है कि आज की पीढ़ी केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि उसे ऐसा मंच चाहिए जहां विचारों को व्यवसाय में बदलने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण, मार्गदर्शन, तकनीकी सहयोग और बाजार तक पहुंच की सुविधा एक ही स्थान पर मिल सके। इसी सोच के साथ ‘यूथ अड्डा’ को एक समग्र उद्यमिता मंच के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां बिजनेस आइडिया से लेकर वित्तीय सहयोग और व्यवसाय विस्तार तक की पूरी प्रक्रिया में सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

    इस पहल का मुख्य फोकस विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, पॉलीटेक्निक संस्थानों और आईटीआई में पढ़ने वाले विद्यार्थियों पर रखा गया है। सरकार चाहती है कि छात्र अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद केवल नौकरी की तलाश तक सीमित न रहें, बल्कि अपनी क्षमता और नवाचार के आधार पर नए उद्यम स्थापित करने की दिशा में भी आगे बढ़ें। इसके लिए उन्हें प्रारंभिक स्तर से ही व्यवसाय योजना तैयार करने, बाजार की जरूरतों को समझने और उद्यम संचालन की जानकारी दी जाएगी।

    डिजिटल अर्थव्यवस्था को ध्यान में रखते हुए इस मंच पर आधुनिक तकनीकों से जुड़े प्रशिक्षण पर भी विशेष जोर दिया गया है। युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन तकनीक, इलेक्ट्रिक व्हीकल, डिजिटल कॉमर्स, ई-कॉमर्स और अन्य उभरती तकनीकों की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार का उद्देश्य है कि प्रदेश के युवा वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप अपने कौशल को विकसित कर सकें और भविष्य की तकनीकी आवश्यकताओं के लिए तैयार रहें।

    ‘यूथ अड्डा’ केवल प्रशिक्षण कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहेगा। यहां युवाओं को व्यवसाय योजना तैयार करने, परियोजना रिपोर्ट बनाने, बैंक ऋण प्राप्त करने, उद्यम पंजीकरण, जीएसटी प्रक्रिया, डिजिटल ब्रांडिंग, ऑनलाइन मार्केटिंग और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जुड़ने तक निरंतर सहयोग प्रदान करने की व्यवस्था की गई है। साथ ही नए उद्यमियों के जोखिम को कम करने के लिए विभिन्न फ्रेंचाइजी मॉडल और अनुभवी विशेषज्ञों की मेंटरशिप भी उपलब्ध कराई जाएगी।

    राज्य सरकार इस पहल को केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रखना चाहती। लक्ष्य है कि ‘यूथ अड्डा’ की सुविधाएं प्रदेश के सभी 75 जिलों तक पहुंचें, ताकि ग्रामीण और छोटे शहरों के युवाओं को भी समान अवसर मिल सकें। महिला स्वयं सहायता समूहों, स्थानीय उत्पादों और सूक्ष्म उद्योगों को भी इस पहल से जोड़कर उन्हें पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन संबंधी सहयोग उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सके।

    इस मंच पर वर्षभर विभिन्न गतिविधियां आयोजित करने की भी योजना है। बैंकर्स मीट, स्टार्टअप क्लिनिक, टेक्नोलॉजी वर्कशॉप, बिजनेस आइडिएशन कार्यक्रम, फाउंडर्स टॉक और उद्योग विशेषज्ञों के संवाद जैसे आयोजन युवाओं को व्यावहारिक अनुभव और नेटवर्किंग का अवसर देंगे। सरकार ने वर्ष 2027 तक लाखों युवाओं को इस पहल से जोड़ने, हजारों नए उद्यम स्थापित कराने और बड़े स्तर पर वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

    सरकार का मानना है कि यदि युवा रोजगार मांगने की बजाय रोजगार उपलब्ध कराने वाले बनते हैं, तो इससे प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। साथ ही सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को भी मजबूती मिलेगी और आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होगी। इसी उद्देश्य से विभिन्न विभागों, वित्तीय संस्थानों और उद्योग विशेषज्ञों के सहयोग से ‘यूथ अड्डा’ को एक दीर्घकालिक उद्यमिता इकोसिस्टम के रूप में विकसित किया जा रहा है।

  • लोकसभा में एंटी-पेपर लीक संशोधन विधेयक पेश, जितेंद्र सिंह बोले- तेज जांच और त्वरित सजा होगी

    लोकसभा में एंटी-पेपर लीक संशोधन विधेयक पेश, जितेंद्र सिंह बोले- तेज जांच और त्वरित सजा होगी

    नई दिल्ली । देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और संगठित परीक्षा घोटालों पर प्रभावी रोक लगाने के उद्देश्य से सरकार ने लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया। विधेयक पर चर्चा की शुरुआत करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी, सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ अब पहले से अधिक सख्त और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

    उन्होंने बताया कि यह संशोधन वर्ष 2024 में लागू किए गए पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) कानून को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से लाया गया है। सरकार का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में सामने आए परीक्षा घोटालों ने लाखों अभ्यर्थियों का भरोसा प्रभावित किया है। इसलिए कानून को और मजबूत बनाकर ऐसी घटनाओं पर निर्णायक रोक लगाने की आवश्यकता महसूस की गई।

    विधेयक की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों की व्यवस्था है। प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार पेपर लीक से जुड़े मामलों की जांच अधिकतम दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी। इसके बाद संबंधित अदालत को तीन महीने के भीतर मुकदमे की सुनवाई पूरी कर फैसला सुनाना होगा। इस प्रकार किसी भी मामले में घटना से लेकर न्यायिक निर्णय तक की पूरी प्रक्रिया अधिकतम पांच महीने में पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।

    सरकार ने अपील प्रक्रिया को भी समयबद्ध बनाने का प्रस्ताव रखा है। यदि कोई पक्ष अदालत के फैसले से असंतुष्ट होता है तो उसे 30 दिनों के भीतर अपील करनी होगी। साथ ही ऐसे मामलों की सुनवाई को अनावश्यक रूप से लंबा न खींचने के लिए विशेष न्यायिक व्यवस्था का भी प्रावधान किया गया है, जिससे दोषियों के खिलाफ शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।

    लोकसभा में चर्चा के दौरान जितेंद्र सिंह ने कहा कि पेपर लीक की घटनाएं किसी एक राज्य या किसी एक परीक्षा तक सीमित नहीं रही हैं। विभिन्न राज्यों में समय-समय पर कई प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं के मामले सामने आए हैं। उनका कहना था कि सरकार ऐसे संगठित अपराधों को समाप्त करने के लिए व्यापक कानूनी ढांचा तैयार कर रही है ताकि भविष्य में परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनी रहे।

    उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि अतीत में रेलवे भर्ती परीक्षा और चिकित्सा प्रवेश परीक्षाओं सहित कई बड़े पेपर लीक मामलों के बावजूद ठोस कानूनी व्यवस्था विकसित नहीं की गई। उनके अनुसार पहले गठित विभिन्न समितियों ने केंद्रीय परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की सिफारिशें की थीं, लेकिन उन पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। वर्तमान सरकार ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी का गठन किया और वर्ष 2024 में इस विषय पर व्यापक कानून लागू किया।

    केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि सरकार विशेषज्ञ समितियों की सिफारिशों को लगातार लागू कर रही है। उन्होंने कहा कि विभिन्न विशेषज्ञ समूहों और टास्क फोर्स की अधिकांश प्रमुख सिफारिशों को पहले ही लागू किया जा चुका है, जबकि शेष सुझावों पर भी चरणबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है। उनका कहना था कि नई व्यवस्था का उद्देश्य केवल अपराधियों को दंडित करना नहीं, बल्कि परीक्षा प्रणाली को तकनीकी और प्रशासनिक रूप से अधिक सुरक्षित बनाना भी है।

    सरकार का मानना है कि यह संशोधन लाखों विद्यार्थियों के हितों की रक्षा करेगा और प्रतियोगी परीक्षाओं में निष्पक्षता तथा पारदर्शिता को मजबूत करेगा। चर्चा के दौरान यह भी दोहराया गया कि परीक्षा प्रणाली में किसी भी प्रकार की अनियमितता या संगठित धोखाधड़ी को अब गंभीर अपराध माना जाएगा और दोषियों के खिलाफ त्वरित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। सरकार ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रस्तावित संशोधन से छात्रों का भरोसा और मजबूत होगा तथा भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।

  • CJP के वायरल जश्न वीडियो पर सोनम वांगचुक की नसीहत, सफलता के साथ जिम्मेदारी निभाने की दी सलाह

    CJP के वायरल जश्न वीडियो पर सोनम वांगचुक की नसीहत, सफलता के साथ जिम्मेदारी निभाने की दी सलाह

    नई दिल्ली । केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कुछ सदस्यों द्वारा मनाए गए जश्न का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। इस वीडियो को लेकर शुरू हुई बहस के बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसी भी उपलब्धि या सफलता का उत्सव मनाना स्वाभाविक है, लेकिन उसके साथ विनम्रता, जिम्मेदारी और गरिमा बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक होता है। उन्होंने समर्थकों से आग्रह किया कि किसी भी आंदोलन की सफलता को ऐसे तरीके से मनाया जाए जिससे उसके मूल उद्देश्य और सामाजिक संदेश की गंभीरता बनी रहे।

    वांगचुक का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब सोशल मीडिया पर CJP के कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं के जश्न मनाने वाले वीडियो व्यापक रूप से साझा किए जा रहे हैं। वायरल वीडियो में पार्टी से जुड़े कुछ लोग धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद खुशी जाहिर करते और उत्सव मनाते दिखाई दे रहे हैं। इन दृश्यों को लेकर अलग-अलग वर्गों में विभिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं और इसे लेकर सार्वजनिक चर्चा तेज हो गई है।

    सोनम वांगचुक ने कहा कि किसी भी संघर्ष का उद्देश्य केवल लक्ष्य प्राप्त करना नहीं होता, बल्कि उस पूरी प्रक्रिया में सामाजिक मूल्यों और नैतिक जिम्मेदारियों को भी बनाए रखना जरूरी है। उनके अनुसार जीत तभी सार्थक मानी जाएगी जब उसमें विनम्रता और दूसरों के प्रति सम्मान भी दिखाई दे। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि किसी भी जन आंदोलन की विश्वसनीयता उसके समर्थकों के आचरण से भी तय होती है।

    हाल के दिनों में वांगचुक CJP के नेतृत्व में चल रहे छात्र आंदोलन से जुड़े प्रमुख चेहरों में शामिल रहे हैं। उन्होंने छात्रों की मांगों के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। बाद में उन्हें स्वास्थ्य कारणों से पुलिस द्वारा अस्पताल ले जाया गया। उन्होंने 23 जुलाई को अपनी 26 दिन लंबी भूख हड़ताल समाप्त की थी। यह निर्णय उस आश्वासन के बाद लिया गया, जिसमें प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं करने और NEET पेपर लीक प्रकरण के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को उचित सहायता देने की बात कही गई थी।

    धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सामने आए जश्न के वीडियो पर सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने इसे आंदोलन की सफलता पर युवाओं की स्वाभाविक खुशी बताया, जबकि कई अन्य लोगों ने इसे अनुचित समय पर किया गया उत्सव करार दिया। आलोचकों का कहना था कि आंदोलन की पृष्ठभूमि छात्रों की समस्याओं और परीक्षा प्रणाली से जुड़े गंभीर मुद्दों पर आधारित थी, इसलिए जश्न का स्वरूप अधिक संयमित होना चाहिए था।

    इस बीच CJP की ओर से भी पूरे विवाद पर प्रतिक्रिया दी गई। पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि वायरल वीडियो में युवाओं का उत्साह और उनकी अभिव्यक्ति का तरीका दिखाई देता है। उनके अनुसार नई पीढ़ी अपने विचार अलग-अलग माध्यमों से व्यक्त करती है और लोकतांत्रिक आंदोलनों में भागीदारी के तरीके समय के साथ बदलते रहते हैं। उन्होंने कहा कि युवा सड़क पर बैठकर, सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से या अन्य रचनात्मक तरीकों से भी अपनी बात समाज के सामने रख सकते हैं।

    धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शुरू हुई इस बहस ने आंदोलन की शैली, सार्वजनिक व्यवहार और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे विषयों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। एक ओर आंदोलन की उपलब्धियों पर समर्थकों में उत्साह दिखाई दे रहा है, वहीं दूसरी ओर कई लोग यह भी मान रहे हैं कि किसी भी लोकतांत्रिक सफलता का उत्सव संवेदनशीलता, संतुलन और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ मनाया जाना चाहिए।

  • प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज मामले में आठ राज्यों को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस, जांच पर दिया जोर

    प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज मामले में आठ राज्यों को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस, जांच पर दिया जोर

    नई दिल्ली । जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज और बल प्रयोग के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर टिप्पणी करते हुए निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर जोर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस तरह की घटनाओं में तथ्यों की जांच होना आवश्यक है ताकि यह तय किया जा सके कि हिंसा किन परिस्थितियों में हुई और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी बनती है। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि जवाबदेही तय करने के लिए स्पष्ट प्रोटोकॉल तैयार करना भी जरूरी है।

    मामले की सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि शुरुआत में प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा था, लेकिन बाद में हिंसा की स्थिति कैसे बनी, इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके पीछे दो संभावनाएं हो सकती हैं। पहली यह कि पुलिस की ओर से आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग किया गया हो और दूसरी यह कि प्रदर्शनकारियों के बीच ऐसे तत्व शामिल हो गए हों जिन्होंने जानबूझकर हिंसा भड़काने का प्रयास किया हो। अदालत ने कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश और जवाबदेही की व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए।

    याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत में कहा कि यदि किसी प्रदर्शन के दौरान कुछ लोग कानून का उल्लंघन करते हैं तो पुलिस उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर सकती है, लेकिन जहां तक संभव हो बल प्रयोग से बचा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान कुछ ऐसे पुलिसकर्मी मौजूद थे जो वर्दी में नहीं थे और उनके पास हथियार भी थे। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि इन लोगों ने भी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल का इस्तेमाल किया।

    सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से यह मांग भी रखी गई कि पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के लिए विशेष जांच दल का गठन किया जाए। साथ ही यह भी कहा गया कि प्रदर्शन में शामिल लोगों की डिजिटल तकनीक के माध्यम से पहचान कर उसे सार्वजनिक करने पर रोक लगाई जानी चाहिए, क्योंकि प्रदर्शन में कई छात्र और नाबालिग भी शामिल थे। अदालत ने इन दलीलों को रिकॉर्ड पर लेते हुए व्यापक पहलुओं पर विचार करने की आवश्यकता जताई।

    सुनवाई के दौरान बिहार में प्रदर्शन से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया गया। एक अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि वहां कई नाबालिगों, यहां तक कि कम उम्र के बच्चों को भी हिरासत में लिए जाने के आरोप सामने आए हैं। इसी दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने जुनैद से जुड़े मामले का भी उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें प्रताड़ित किए जाने की शिकायत है। इस पर केंद्र की ओर से उपस्थित सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि यह अलग विषय है और इसे वर्तमान मामले से अलग देखा जाना चाहिए।

    सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सहित आठ राज्यों को नोटिस जारी किया। इन राज्यों में महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, बिहार, असम, केरल और अन्य संबंधित राज्य शामिल हैं। अदालत ने कहा कि उसके समक्ष विभिन्न राज्यों से ऐसे मामले आए हैं जिनमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, जीवन के अधिकार और प्रदर्शन के दौरान पुलिस की ओर से अत्यधिक बल प्रयोग के आरोप लगाए गए हैं। अदालत ने यह भी कहा कि लाठीचार्ज, पैलेट गन और आंसू गैस के इस्तेमाल से कुछ लोगों, जिनमें मीडिया कर्मी भी शामिल हैं, के घायल होने की बातें सामने आई हैं।

    सुनवाई के अंत में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संबंधित मामलों की जांच जारी रह सकती है, लेकिन फिलहाल किसी प्रकार की जल्दबाजी में कार्रवाई करने के बजाय पहले तथ्यों की निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए। अदालत ने संकेत दिया कि भविष्य में ऐसे मामलों के लिए स्पष्ट मानक और जवाबदेही की व्यवस्था विकसित करना न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।

  • बांकीपुर सीट पर फिर कमल खिलने का दावा, नितिन नवीन बोले- जनता का विश्वास आज भी BJP के साथ

    बांकीपुर सीट पर फिर कमल खिलने का दावा, नितिन नवीन बोले- जनता का विश्वास आज भी BJP के साथ


    नई दिल्ली । 
    बिहार की हाई-प्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। मतदान से पहले भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने पार्टी की जीत का विश्वास जताते हुए कहा कि बांकीपुर की जनता का लंबे समय से भाजपा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) पर भरोसा बना हुआ है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के लोगों का समर्थन इस बार भी भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में दिखाई देगा और विकास के मुद्दे पर जनता एक बार फिर पार्टी के साथ खड़ी होगी।

    नितिन नवीन ने कहा कि बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा का जनाधार कई दशकों से मजबूत रहा है। उनके अनुसार यह विश्वास केवल चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि जनता और पार्टी के बीच लगातार बने संबंधों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि उनके पिता स्वर्गीय नवीन किशोर सिन्हा के समय से ही इस क्षेत्र में भाजपा को व्यापक जनसमर्थन मिलता रहा है और पार्टी ने हमेशा जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप काम करने का प्रयास किया है।

    उन्होंने दावा किया कि भाजपा ने राजनीति को सेवा और विकास के माध्यम के रूप में आगे बढ़ाया है। उनका कहना था कि जनता ने हमेशा उन कार्यों को महत्व दिया है जिनका सीधा लाभ क्षेत्र के लोगों को मिला। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस बार भी मतदाता विकास, सुशासन और स्थिर नेतृत्व को प्राथमिकता देते हुए भाजपा उम्मीदवार नीरज सिन्हा के पक्ष में मतदान करेंगे।

    विपक्षी दलों की चुनौती से जुड़े सवाल पर नितिन नवीन ने कहा कि लोकतंत्र में हर दल को चुनाव लड़ने का अधिकार है, लेकिन जनता अंततः उसी उम्मीदवार और दल का चयन करती है जिसने क्षेत्र के विकास के लिए लगातार कार्य किया हो। उन्होंने कहा कि वह स्वयं इस विधानसभा क्षेत्र से लगातार पांच बार विधायक रहे हैं और अपने कार्यकाल के दौरान विकास परियोजनाओं तथा जनसुविधाओं को प्राथमिकता दी गई। उनका मानना है कि यही काम भाजपा के पक्ष में सकारात्मक माहौल तैयार करेगा।

    उन्होंने बिहार के राजनीतिक और प्रशासनिक हालात का भी उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य ने पिछले वर्षों में विकास और सुशासन की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव देखा है। उनके अनुसार वर्तमान व्यवस्था में कानून-व्यवस्था और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया गया है। उन्होंने कहा कि यदि जनता एक बार फिर भाजपा को समर्थन देती है तो विकास कार्यों की गति और तेज होगी तथा क्षेत्र में नई योजनाओं को आगे बढ़ाया जाएगा।

    बांकीपुर विधानसभा सीट पर 30 जुलाई को मतदान प्रस्तावित है, जबकि मतगणना 3 अगस्त को होगी। यह उपचुनाव इसलिए कराया जा रहा है क्योंकि नितिन नवीन के राज्यसभा सदस्य बनने के बाद यह सीट रिक्त हो गई थी। वह इस क्षेत्र से लगातार पांच बार विधायक रहे हैं, जबकि उनके पिता भी कई बार इसी सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके थे। वर्ष 1995 से यह सीट भाजपा के कब्जे में रही है, जिससे इस चुनाव का राजनीतिक महत्व और बढ़ गया है।

    इस बार मुकाबला त्रिकोणीय माना जा रहा है। भाजपा ने नीरज सिन्हा को अपना उम्मीदवार बनाया है, जबकि राष्ट्रीय जनता दल ने रेखा गुप्ता को मैदान में उतारा है। वहीं जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर भी चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में सभी दलों ने चुनाव प्रचार तेज कर दिया है और अब राजनीतिक दलों के साथ-साथ मतदाताओं की नजर भी 30 जुलाई के मतदान और 3 अगस्त को घोषित होने वाले परिणामों पर टिकी हुई है। यही नतीजे तय करेंगे कि बांकीपुर की जनता इस बार किस उम्मीदवार और किस राजनीतिक दल पर अपना भरोसा जताती है।

  • जंतर-मंतर प्रदर्शन में भोजन व्यवस्था संभालने वाले जुनैद की सुप्रीम कोर्ट में याचिका, परिवार को परेशान करने का लगाया आरोप

    जंतर-मंतर प्रदर्शन में भोजन व्यवस्था संभालने वाले जुनैद की सुप्रीम कोर्ट में याचिका, परिवार को परेशान करने का लगाया आरोप

    नई दिल्ली । जंतर-मंतर पर आयोजित CJP प्रदर्शन से जुड़े मोहम्मद जुनैद ने पुलिस द्वारा कथित उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने शीर्ष अदालत में दायर अपनी याचिका में दावा किया है कि उन्हें और उनके परिवार को लगातार परेशान किया जा रहा है। याचिका में न्यायालय से हस्तक्षेप कर उचित संरक्षण और राहत देने की मांग की गई है। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब प्रदर्शन से जुड़े कई पहलुओं को लेकर अलग-अलग स्तर पर चर्चा जारी है।

    याचिका के अनुसार, जुनैद का आरोप है कि पुलिस उन्हें दिल्ली से अपने साथ ले गई और कई घंटे तक अपने कब्जे में रखने के बाद हरिद्वार के पास छोड़ दिया। उनका कहना है कि इस दौरान उन्हें कथित रूप से धमकाया भी गया। उन्होंने अदालत को बताया कि इस पूरी घटना के कारण वे मानसिक दबाव में हैं और उन्हें अपनी तथा अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है।

    जुनैद ने अपनी याचिका में यह भी आरोप लगाया है कि पुलिस की कार्रवाई केवल उनके तक सीमित नहीं रही, बल्कि उनके परिवार के अन्य सदस्यों को भी परेशान किया जा रहा है। उनके अनुसार, उनके पिता से पूछताछ की गई और उनकी बहन के ससुराल पक्ष के लोगों को भी अनावश्यक रूप से परेशान किया गया। उन्होंने अदालत से आग्रह किया है कि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित कराई जाए और उनके परिवार को किसी भी प्रकार के कथित उत्पीड़न से सुरक्षा प्रदान की जाए।

    मोहम्मद जुनैद उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के नाहल गांव के निवासी हैं। CJP प्रदर्शन के दौरान उनकी भूमिका मुख्य रूप से आंदोलन में शामिल लोगों के लिए भोजन और पीने के पानी जैसी आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने की रही। शुरुआत में वे सार्वजनिक रूप से कम दिखाई देते थे और पर्दे के पीछे रहकर व्यवस्थाएं संभालते थे, लेकिन प्रदर्शन के अंतिम चरण में उनकी पहचान प्रतिभागियों के बीच एक प्रमुख सहयोगी के रूप में बनने लगी।

    बताया गया है कि उन्होंने आंदोलन के भीतर कोई औपचारिक पद नहीं संभाला था। उनकी जिम्मेदारी प्रदर्शन स्थल पर आने वाले लोगों के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना और व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखना थी। इसी भूमिका के कारण उनका नाम उस समय चर्चा में आया, जब पुलिस उनके घर पहुंची और तलाशी की कार्रवाई की गई।

    परिवार का कहना है कि तलाशी के दौरान कुछ दस्तावेज भी अपने कब्जे में लिए गए। उनके अनुसार, पुलिस उनके पिता को पूछताछ के लिए थाने भी लेकर गई थी। परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि उनके रिश्तेदारों को भी अलग-अलग स्थानों पर परेशान किया गया, जिससे पूरे परिवार में चिंता का माहौल बना हुआ है।

    दूसरी ओर, संबंधित पुलिस अधिकारियों की ओर से पहले इन आरोपों का खंडन किया जा चुका है। विशेष रूप से मेरठ में रिश्तेदारों को हिरासत में लेने या उनके खिलाफ किसी कार्रवाई के दावों को पुलिस ने अस्वीकार करते हुए कहा था कि संबंधित थानों में ऐसी किसी कार्रवाई का रिकॉर्ड नहीं मिला। इस कारण मामले में दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं।

    अब इस पूरे प्रकरण पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और उसके निर्देश महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। अदालत याचिका में लगाए गए आरोपों, उपलब्ध तथ्यों और संबंधित पक्षों के जवाब पर विचार करने के बाद आगे की प्रक्रिया तय करेगी। ऐसे में इस मामले की अगली सुनवाई और न्यायालय की टिप्पणी पर सभी की नजर बनी हुई है।