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  • D-फार्मा से नर्सिंग तक फर्जी डिग्रियों का खेल चाय बेचने वाले के नाम दर्ज थी यूनिवर्सिटी पांच गिरफ्तार

    D-फार्मा से नर्सिंग तक फर्जी डिग्रियों का खेल चाय बेचने वाले के नाम दर्ज थी यूनिवर्सिटी पांच गिरफ्तार


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के एटा में फर्जी मेडिकल कॉलेज और यूनिवर्सिटी के नाम पर चल रहे बड़े फर्जीवाड़े का पुलिस ने खुलासा किया है। मारहरा थाना क्षेत्र में सामने आए इस मामले में आरोप है कि वर्ष 2022 से छात्रों को मेडिकल से जुड़े अलग अलग पाठ्यक्रमों में दाखिला दिलाने के नाम पर रकम वसूली जा रही थी। छात्रों और उनके परिजनों को भरोसा दिलाया जाता था कि उन्हें मान्य डिग्री और मार्कशीट उपलब्ध कराई जाएगी। पुलिस के मुताबिक इस पूरे खेल के जरिए अब तक दो करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम ऐंठी जा चुकी है। मामले में पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है और उनके कब्जे से फर्जीवाड़े से जुड़े कई अहम दस्तावेज बरामद किए हैं।

    इस पूरे मामले का खुलासा भी बेहद चौंकाने वाले घटनाक्रम के बाद हुआ। पुलिस के मुताबिक 16 सितंबर को रामसेवक नाम के व्यक्ति ने डायल 112 पर सूचना दी कि उसके भाई सतेंद्र कुमार का कुछ लोगों ने अपहरण कर लिया है और उसकी रिहाई के बदले 20 लाख रुपये की फिरौती मांगी जा रही है। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया और सतेंद्र की तलाश शुरू कर दी। पुलिस ने उसे आगरा से सकुशल बरामद कर लिया। इसके बाद जब पूरे मामले की जांच आगे बढ़ी तो अपहरण की कहानी ही संदिग्ध निकली। पुलिस के अनुसार सतेंद्र ने कथित तौर पर खुद अपने अपहरण की साजिश रची थी। आरोप है कि छात्रों और उनके परिजनों से ली गई रकम वापस करने से बचने के लिए उसने यह पूरा ड्रामा रचा।

    जांच के दौरान पुलिस को कथित फर्जी यूनिवर्सिटी के बारे में जानकारी मिली। पुलिस के मुताबिक बीएस मेडिकल कॉलेज एंड यूनिवर्सिटी के नाम से वर्ष 2022 से कई मेडिकल और पैरामेडिकल पाठ्यक्रमों में दाखिले कराए जा रहे थे। इनमें डी-फार्मा बी-फार्मा बीएससी नर्सिंग डीएमएलटी बीएमएलटी जीएनएम और एएनएम जैसे पाठ्यक्रम शामिल थे। छात्रों को इन पाठ्यक्रमों के बाद डिग्री और मार्कशीट देने का भरोसा दिया जाता था और इसी आधार पर उनसे फीस के नाम पर रकम ली जाती थी।

    मामले में सबसे हैरान करने वाली बात यह सामने आई कि पुलिस के मुताबिक कथित यूनिवर्सिटी चाय बेचने वाले भगवान दास के नाम पर संचालित की जा रही थी। पुलिस ने इस मामले में सतेंद्र कुमार गौरव अग्रवाल भगवान दास नरेंद्र उर्फ पप्पू और मोहम्मद शरीफ कुरैशी को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस कथित फर्जी संस्थान के संचालन में और कौन लोग शामिल थे और छात्रों से वसूली गई रकम का नेटवर्क किस तरह काम करता था।

    पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से लैपटॉप फर्जी चेक छात्रों के आई कार्ड फीस रसीदें अटेंडेंस शीट प्रश्नपत्र परीक्षा पुस्तिकाएं मार्कशीट मुहर और प्रचार सामग्री बरामद की है। इन सामानों की बरामदगी से पुलिस को कथित फर्जी शैक्षणिक संस्थान के कामकाज और छात्रों को दिए जाने वाले दस्तावेजों की जांच में मदद मिल रही है। सभी आरोपियों को न्यायालय के समक्ष पेश किया गया है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका और फर्जी यूनिवर्सिटी के जरिए की गई कथित ठगी की पूरी कड़ी की जांच कर रही है।

  • केतन हत्याकांड में 'माही' की फर्जी पहचान से खुला बड़ा राज, आरोपियों ने AI से लेकर ऑनलाइन खोज तक रची थी पूरी साजिश

    केतन हत्याकांड में 'माही' की फर्जी पहचान से खुला बड़ा राज, आरोपियों ने AI से लेकर ऑनलाइन खोज तक रची थी पूरी साजिश


    नई दिल्ली । किसी सस्पेंस-थ्रिलर फिल्म की पटकथा को भी पीछे छोड़ दे, ऐसी खौफनाक साजिश रचकर केतन अग्रवाल की हत्या करने के मामले में पुणे ग्रामीण पुलिस ने शुक्रवार को अदालत में 5,053 पन्नों का विस्तृत आरोप पत्र दाखिल कर दिया है। इस विस्तृत चार्जशीट में पुलिस ने मुख्य आरोपी सिया, उसके प्रेमी चेतन चौधरी और उनके दोस्त रितेश हांगे की पूरी साजिश का पर्दाफाश किया है। इस पूरे मर्डर केस की सबसे बड़ी और अहम कड़ी ‘माही’ नाम का वह फेक अकाउंट बना, जिसके जरिए केतन को सिया के जन्मदिन का सरप्राइज देने के बहाने लोहागढ़ किले पर बुलाया गया और फिर वहां उसे मौत के घाट उतार दिया गया।

    केतन को ‘माही’ नाम के फेक अकाउंट से मैसेज में क्या?

    चार्जशीट में किए गए खुलासे के मुताबिक, जब हत्या की पिछली तमाम कोशिशें नाकाम हो गईं, तब सिया और चेतन के दोस्त रितेश हांगे ने केतन को फंसाने के लिए एक नया डिजिटल जाल बिछाया। आरोपियों ने अपनी एक परिचित लड़की की तस्वीर का इस्तेमाल करके सोशल मीडिया पर ‘माही’ नाम से एक फर्जी अकाउंट बनाया। इसके बाद 18 जून को इसी ‘माही’ नाम के फेक अकाउंट से केतन के मोबाइल पर एक मैसेज भेजा गया। मैसेज में लिखा था, “मैं सिया की खास दोस्त माही बोल रही हूं। हमें लोहागढ़ किले पर सिया का जन्मदिन मनाना है और उसे एक बहुत बड़ा सरप्राइज देना है। तुम सिया को लेकर चुपचाप किले पर आ जाओ।”

    बेहद सीधे और भोले-भाले स्वभाव का केतन इस फेक अकाउंट और सरप्राइज पार्टी के मैसेज को पूरी तरह सच मान बैठा। वह बिना किसी शक-शुब्हे के बेहद खुशी-खुशी सिया को साथ लेकर लोहागढ़ किले की ओर निकल पड़ा। उसे जरा भी अंदाजा नहीं था कि जिस सरप्राइज पार्टी के नाम पर उसे बुलाया जा रहा है, वह दरअसल उसकी हत्या का तयशुदा डेथ-ट्रैप है।

    पुणे में हत्या, आंखों ही आंखों में चेतन को इशारा

    पूर्व नियोजित प्लान के तहत आरोपी चेतन चौधरी पहले से ही किले के एग्जिट रूट से होकर ऊपर पहुंच चुका था और किले के मंदिर में घात लगाकर केतन के आने का इंतजार कर रहा था। जैसे ही केतन और सिया वहां पहुंचे, सिया ने आंखों ही आंखों में चेतन को इशारा कर दिया। इसके बाद जब केतन बेखबर होकर गहरी खाई के ठीक किनारे खड़ा था, तभी पीछे से सिया ने उसके कंधे पर और चेतन ने उसके पैर पर पूरी ताकत से धक्का दे दिया। केतन संभल पाता या खुद को संभाल पाता, उससे पहले ही चेतन ने उसे लात मारकर सैकड़ों फीट गहरी खाई में धकेल दिया। इस हादसे में मौके पर ही केतन की मौत हो गई। वारदात को अंजाम देने के तुरंत बाद सबूत मिटाने के लिए आरोपियों ने उस ‘माही’ नाम के फेक अकाउंट को हमेशा के लिए डिलीट कर दिया।

    पुणे के रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की 18 जून को हत्या हुई थी। पुलिस ने मंगेतर सिया, कथित प्रेमी चेतन और एक अन्य शख्स रितेश हांगे को गिरफ्तार किया है। केतन को लोहागढ़ किले से धक्का देकर मौत के घाट उतारा गया। ‘माही’ नाम से बनाए गए एक फर्जी इंस्टाग्राम अकाउंट का इस्तेमाल हुआ, वारदात के बाद अकाउंट डिलीट किया।

    महाराष्ट्र की वडगांव मावल अदालत में दायर आरोपपत्र में संदेशों, तस्वीरों, मोबाइल फोन डेटा, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, गवाहों के बयान और तकनीकी विश्लेषण प्रमाण पत्र, पांच प्रत्यक्षदर्शियों के बयान सहित कई ठोस सबूत हैं। हत्याकांड को अंजाम देने से पहले सिया ने पिछले साल मार्च में लोहागढ़ में हुई ऐसी एक अन्य घटना के बारे में ऑनलाइन जानकारी भी जुटाई। आरोपियों ने केतन की हत्या से पहले मर्डर से संबंधित फिल्में देखीं, ऑनलाइन खोजबीन के लिए एआई टूल चैटजीपीटी का इस्तेमाल किया। पुलिस से बचने के तरीकों पर पॉडकास्ट भी सुने।

    सुपारी किलरों से भी संपर्क

    पुलिस जांच में यह बात भी सामने आई है कि केतन को रास्ते से हटाने की साजिश मार्च 2026 से ही रची जा रही थी। शुरुआत में तीनों आरोपियों ने तय किया था कि केतन की हत्या नहीं करनी है, बल्कि उसे जिंदगी भर के लिए ‘अपाहिज’ बना देना है। इसके लिए उन्होंने दूसरे राज्यों के कुछ सुपारी किलरों से भी संपर्क साधा था। हालांकि, बाद में आरोपियों को डर लगा कि अगर बाहर का कोई अपराधी पकड़ा गया तो उनका भांडा फोड़ हो जाएगा। खास बात यह है कि आरोपियों ने जिन लोगों से संपर्क किया था, उनमें से एक व्यक्ति अब इस केस में पुलिस का मुख्य गवाह बन गया है।

    एआई का इस्तेमाल और हत्या के लिए ठिकाने की तलाश

    जब बाहर से सुपारी देने का प्लान फेल हो गया, तो मई के महीने में सिया, चेतन और रितेश ने फैसला किया कि वे खुद ही इस कांटे को रास्ते से निकालेंगे। पुलिस के चंगुल से कैसे बचना है और सबूतों को कैसे मिटाना है, इसके लिए आरोपियों ने चैटजीपीटी का इस्तेमाल किया, क्राइम पॉडकास्ट सुने, कई मर्डर फिल्में देखीं और मेघालय के चर्चित ‘सोनम केस’ का गहराई से अध्ययन किया। इसके बाद उन्होंने लोनावला के टाइगर पॉइंट समेत कई पहाड़ी इलाकों की बाकायदा रेकी की। उन्होंने देखा कि टाइगर पॉइंट पर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, इसलिए आखिरकार उन्होंने ‘लोहागढ़’ किले को चुना। दरअसल, मार्च 2025 में लोहागढ़ किले पर एक युवती की गिरकर मौत हो चुकी थी। आरोपियों का हिसाब था कि वे पुलिस और लोगों के सामने यह झूठी कहानी गढ़ देंगे कि ‘सेल्फी लेते वक्त केतन का पैर फिसल गया और वह खाई में गिर गया।’

    केतन की बाली ट्रिप कैसे रद्द हुई?

    6 जून को केतन और सिया प्री-वेडिंग शूट के लिए सीधे ‘बाली’ जाने वाले थे। लेकिन वहां जाने से ठीक पहले 4 जून को भी सिया ने केतन को लोहागढ़ ले जाकर ठिकाने लगाने की कोशिश की थी, हालांकि वह प्रयास नाकाम रहा। इसके बाद 6 जून को जब वे मुंबई के लिए निकले, तो रास्ते में खालापुर के एक कैफे के वॉशरूम में सिया ने चुपके से केतन का पासपोर्ट फाड़कर फ्लश कर दिया। पासपोर्ट नष्ट होने के कारण केतन की बाली ट्रिप रद्द हो गई और आरोपियों के लिए लोहागढ़ में मर्डर करने का रास्ता एक बार फिर साफ हो गया।

  • DUSU चुनाव में ABVP की 3 सीटों पर जीत, भाजपा ने राहुल गांधी पर साधा निशाना, कहा- ‘मुंह पर करारा तमाचा’

    DUSU चुनाव में ABVP की 3 सीटों पर जीत, भाजपा ने राहुल गांधी पर साधा निशाना, कहा- ‘मुंह पर करारा तमाचा’


    नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने केंद्रीय पैनल की चार में से तीन सीटों पर जीत दर्ज की है। ABVP के यश डबास अध्यक्ष, रिया छाबड़ी सचिव और लक्ष्य राज सिंह संयुक्त सचिव चुने गए हैं। वहीं उपाध्यक्ष पद पर पूर्व NSUI सदस्य और निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने जीत हासिल की। कांग्रेस से संबद्ध NSUI केंद्रीय पैनल की चारों सीटों में से कोई भी नहीं जीत सकी।

    चुनाव परिणाम सामने आने के बाद भाजपा ने इसे कांग्रेस नेता राहुल गांधी की राजनीति पर निशाना साधने का आधार बनाया। भाजपा प्रवक्ता सिद्धार्थ यादव ने कहा कि डूसू का परिणाम राहुल गांधी के लिए ‘मुंह पर करारा तमाचा’ है। उन्होंने दावा किया कि नतीजों ने राहुल गांधी की ‘झूठ और नकारात्मक प्रचार’ की राजनीति को खारिज कर दिया है।

    ‘युवा राष्ट्रवादी विचारों से दूर जा रहे हैं’ वाला नैरेटिव खारिज हुआ : भाजपा

    भाजपा प्रवक्ता सिद्धार्थ यादव ने पार्टी मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि राहुल गांधी लंबे समय से ऐसा माहौल बनाने की कोशिश कर रहे थे कि देश के युवा राष्ट्रवादी विचारों से दूर जा रहे हैं और नई पीढ़ी झूठ एवं साजिश की राजनीति को पसंद कर रही है। यादव ने कहा कि डूसू चुनाव के नतीजे इस विमर्श को खारिज करते हैं।

    उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस, वाम दल और उनके पूरे तंत्र की ओर से जिस राजनीतिक विमर्श को आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही थी, डूसू के परिणामों ने उसे ध्वस्त कर दिया है। यादव ने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय में देश के अलग-अलग हिस्सों से छात्र पढ़ने आते हैं, इसलिए यहां का चुनाव व्यापक युवा रुझानों को भी दर्शाता है।

    ‘डूसू का नतीजा राहुल के खिलाफ Gen Z का जनादेश’

    सिद्धार्थ यादव ने डूसू चुनाव परिणाम को राहुल गांधी के खिलाफ ‘Gen Z का जनादेश’ बताया। उन्होंने राहुल गांधी की राजनीति को ‘झूठ और नकारात्मक प्रचार’ की राजनीति बताते हुए कहा कि छात्र मतदाताओं ने इसे खारिज किया है।

    यादव ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि वह कई जगहों पर ‘झूठ की गूंज’ सुनाने का काम कर रहे हैं और पूछा कि क्या उन्हें छात्रों की ओर से उठ रही ‘सच की हुंकार’ की आवाज सुनाई दे रही है।

    अमित शाह बोले- युवा शक्ति को राष्ट्रविरोधी एजेंडे की प्रयोगशाला न बनाया जाए

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी ABVP की जीत पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय में देश के हर हिस्से से विद्यार्थी पढ़ने आते हैं और यहां का जनादेश पूरे भारत के युवाओं के मन का प्रतिबिंब होता है। शाह ने ABVP की जीत को उन ताकतों के लिए संदेश बताया, जो युवाओं को अपने एजेंडे के लिए ‘प्रयोगशाला’ में बदलना चाहती हैं।

    शाह ने कहा कि देश का युवा ‘राष्ट्र प्रथम’ की विचारधारा के साथ खड़ा है। उन्होंने ABVP की जीत का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि इससे संगठन के कार्यकर्ताओं को छात्र हित और राष्ट्र निर्माण से जुड़े काम आगे बढ़ाने की ऊर्जा मिलेगी।

    भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी ABVP की जीत को सकारात्मक छात्र राजनीति में युवाओं के भरोसे से जोड़ते हुए इसका स्वागत किया।

    अध्यक्ष पद पर यश डबास ने 2,053 वोट से जीत दर्ज की

    अध्यक्ष पद पर ABVP के यश डबास को 24,576 वोट मिले। उन्होंने NSUI के विजय शंकर मीणा को 2,053 वोटों के अंतर से हराया। मीणा को 22,523 वोट मिले।

    उपाध्यक्ष पद पर सबसे ज्यादा वोट पाने वाले उम्मीदवार भी निर्दलीय दीपांशु शौकीन रहे। उन्हें 30,615 वोट मिले। शौकीन पहले NSUI से जुड़े थे और टिकट नहीं मिलने के बाद निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में उतरे। उन्होंने ABVP के इशू मौर्य को हराया, जिन्हें 16,910 वोट मिले। NSUI के वीर छत्रथ को 4,313 वोट मिले।

    सचिव पद पर रिया छाबड़ी, संयुक्त सचिव लक्ष्य राज सिंह विजयी

    सचिव पद पर ABVP की रिया छाबड़ी ने 21,650 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। NSUI की नम्रता चौधरी को 14,869 वोट मिले। वहीं संयुक्त सचिव पद पर ABVP के लक्ष्य राज सिंह ने 16,615 वोट हासिल किए और समाजवादी छात्र सभा के विशेष यादव को 15,778 वोट मिले।

    इस तरह ABVP ने अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव के पद अपने नाम किए, जबकि उपाध्यक्ष पद निर्दलीय दीपांशु शौकीन के खाते में गया। इस बार के चुनाव में NSUI केंद्रीय पैनल की किसी भी सीट पर जीत दर्ज नहीं कर सकी।

    पिछले साल के चुनाव में भी ABVP ने अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पदों पर जीत दर्ज की थी, जबकि उपाध्यक्ष पद NSUI के खाते में गया था। इस बार उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार की जीत ने ABVP के तीन पदों की बढ़त के बीच चुनाव परिणाम को अलग राजनीतिक तस्वीर दी है।

  • DUSU चुनाव में बदली तस्वीर यश डबास अध्यक्ष तो दीपांशु शोकीन उपाध्यक्ष जानिए किसे कितने वोट मिले

    DUSU चुनाव में बदली तस्वीर यश डबास अध्यक्ष तो दीपांशु शोकीन उपाध्यक्ष जानिए किसे कितने वोट मिले


    नई दिल्ली। दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ यानी DUSU चुनाव 2026 के नतीजों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी ABVP ने चार केंद्रीय पदों में से तीन पर जीत दर्ज की है। अध्यक्ष पद पर ABVP के यश डबास ने जीत हासिल की जबकि सचिव पद पर रिया छावड़ी और संयुक्त सचिव पद पर लक्ष्य राज सिंह विजयी रहे। उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शोकीन ने जीत दर्ज की। इस तरह केंद्रीय पैनल में ABVP के तीन उम्मीदवार चुने गए जबकि एक पद निर्दलीय उम्मीदवार के खाते में गया।

    अध्यक्ष पद का मुकाबला खास तौर पर चर्चा में रहा। मतगणना के अलग अलग चरणों में ABVP और NSUI के उम्मीदवारों के बीच बढ़त बदलती रही। अंतिम उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार यश डबास को 22434 वोट मिले जबकि NSUI के विजय शंकर मीणा को 21390 वोट प्राप्त हुए। इस तरह डबास ने 1044 वोट के अंतर से अध्यक्ष पद अपने नाम किया। शुरुआती चरणों में NSUI के उम्मीदवार ने भी बढ़त बनाई थी लेकिन बाद के राउंड में तस्वीर बदली और यश डबास आगे निकल गए।

    सचिव पद पर ABVP की रिया छावड़ी ने जीत दर्ज की। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार उन्हें 19846 वोट मिले जबकि NSUI की नम्रता चौधरी को 13963 वोट मिले। संयुक्त सचिव पद पर ABVP के लक्ष्य राज सिंह विजयी रहे। इस सीट पर मुकाबला काफी करीबी रहा। लक्ष्य राज सिंह को 14965 वोट मिले जबकि निर्दलीय उम्मीदवार विशेष यादव को 14836 और NSUI के गोपाल चौधरी को 14482 वोट प्राप्त हुए। तीनों उम्मीदवारों के बीच अंतर कम रहा और अंतिम चरण में लक्ष्य राज सिंह ने यह सीट अपने नाम की।

    उपाध्यक्ष पद का परिणाम इस चुनाव की अलग तस्वीर सामने लाता है। यहां निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शोकीन ने जीत दर्ज की। उन्हें 28873 वोट मिले जबकि ABVP के ईशू मौर्य को 15346 और NSUI के वीर चतरथ को 4010 वोट मिले। मतगणना के शुरुआती दौर से ही शोकीन इस मुकाबले में आगे बने रहे और अंत तक उनकी बढ़त कायम रही।

    दीपांशु शोकीन का चुनाव अभियान भी चर्चा में रहा। वे स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर मैदान में थे और छात्र सुविधाओं तथा कैंपस से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रचार कर रहे थे। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक उनका संबंध दिल्ली यूनिवर्सिटी के बुद्धिस्ट स्टडीज विभाग से है। उनके उपाध्यक्ष पद जीतने से इस बार DUSU के केंद्रीय पैनल में एक निर्दलीय उम्मीदवार की भी जगह बनी है।

    इस बार DUSU चुनाव में मतदान प्रतिशत को लेकर भी खास चर्चा रही। अलग अलग रिपोर्टों में अंतिम मतदान प्रतिशत के आंकड़े में अंतर बताया गया है जबकि शुरुआती आधिकारिक रिपोर्टों में करीब 40 फीसदी मतदान दर्ज होने की जानकारी सामने आई थी। मतगणना के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और दो हजार से अधिक पुलिस तथा पैरामिलिट्री जवानों की तैनाती की गई थी।

    चुनाव परिणाम से पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने विजय जुलूसों पर रोक लगाने के निर्देश दिए थे। अदालत ने चुनाव प्रचार के दौरान नियमों के उल्लंघन और सुरक्षा से जुड़े मामलों पर भी सख्त रुख अपनाया था। परिणाम के बाद भी यह रोक लागू रही।

  • भारत के हमले का असर अब भी दिख रहा सरगोधा एयरबेस का रनवे महीनों बाद भी पूरी तरह तैयार नहीं

    भारत के हमले का असर अब भी दिख रहा सरगोधा एयरबेस का रनवे महीनों बाद भी पूरी तरह तैयार नहीं


    नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों पर हुए हमलों का असर लंबे समय बाद भी दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। ताजा हाई रिजॉल्यूशन सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर पाकिस्तान के सरगोधा स्थित मुसहफ एयरबेस के रनवे पर अब भी मरम्मत और निर्माण का काम जारी बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक हमले के करीब 16 महीने बाद भी रनवे और टैक्सी ट्रैक के एक महत्वपूर्ण हिस्से पर दोबारा काम किया जा रहा है। तस्वीरों में रनवे के जंक्शन पर खुदाई और नई सतह तैयार करने की गतिविधियां नजर आने की बात कही गई है।

    सरगोधा का मुसहफ एयरबेस पाकिस्तान की वायुसेना के प्रमुख ठिकानों में शामिल माना जाता है। यह लाहौर से लगभग 172 किलोमीटर उत्तर पश्चिम दिशा में और भारत पाकिस्तान सीमा के पास अमृतसर से करीब 200 किलोमीटर पश्चिम में स्थित है। इसकी भौगोलिक स्थिति और सैन्य महत्व के कारण ऑपरेशन सिंदूर के दौरान यह भारत के निशाने पर रहे प्रमुख एयरबेस में शामिल था।

    रिपोर्ट के अनुसार 12 सितंबर 2026 की सैटेलाइट तस्वीरों में रनवे और टैक्सी ट्रैक के मिलन वाले हिस्से में अलग रंग का क्षेत्र दिखाई देता है। यह हिस्सा आसपास की डामर वाली सतह से अलग नजर आ रहा है। तस्वीरों के विश्लेषण के आधार पर यहां दोबारा खुदाई और रीसरफेसिंग का काम किए जाने की संभावना जताई गई है। एयरबेस के उत्तरी हिस्से में पहले हुए हमले से बने गड्ढे के क्षेत्र में भी जमीन की ऊपरी परत हटाकर नीचे के स्तर तक काम किए जाने की बात सामने आई है।

    विशेषज्ञों के अनुसार किसी रनवे की मरम्मत केवल ऊपर से नई परत बिछाने तक सीमित नहीं होती। यदि हमले के बाद की गई अस्थायी मरम्मत के नीचे की जमीन कमजोर हो गई हो या सतह में असमानता अथवा धंसने जैसी समस्या सामने आई हो तो पूरे प्रभावित हिस्से को दोबारा तैयार करना पड़ सकता है। यही वजह है कि सैटेलाइट तस्वीरों में अलग अलग हिस्सों में अलग स्तर का निर्माण कार्य दिखाई देने की बात कही गई है।

    ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मुसहफ एयरबेस पर हुए हमले की पुरानी सैटेलाइट तस्वीरों में मुख्य रनवे पर नुकसान के निशान दिखाई देने का दावा किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक करीब 3200 मीटर लंबे रनवे पर दो स्थानों को निशाना बनाया गया था। इनमें एक जगह लगभग 8 से 9 मीटर चौड़ा और 4 से 5 मीटर गहरा गड्ढा बनने की बात सामने आई थी। दूसरा निशाना पहले स्थान से करीब 660 मीटर की दूरी पर था।

    10 मई 2025 को भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव के दौरान पाकिस्तान के कई सैन्य ठिकानों और वायु रक्षा से जुड़े प्रतिष्ठानों को निशाना बनाए जाने की जानकारी सामने आई थी। भारतीय पक्ष ने ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान के एयरबेस और अन्य सैन्य ढांचे को निशाना बनाने की बात कही थी। इसके बाद दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई रोकने को लेकर बातचीत हुई और युद्धविराम की स्थिति बनी।

    अब करीब 16 महीने बाद सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों में सरगोधा एयरबेस के प्रभावित हिस्सों में निर्माण गतिविधियां दिखाई देने का दावा इस बात की ओर संकेत करता है कि हमले से प्रभावित बुनियादी ढांचे की बहाली में लंबा समय लग रहा है। हालांकि सैटेलाइट तस्वीरों से किसी सैन्य ठिकाने की पूरी परिचालन स्थिति का आकलन करना संभव नहीं होता। इसलिए यह कहना अलग विषय है कि एयरबेस पूरी तरह परिचालन में है या नहीं। इतना जरूर है कि रनवे के कुछ हिस्सों में निर्माण और सतह सुधार का काम अभी भी जारी दिखाई दे रहा है।

  • होमगार्ड बनने का सपना अधूरा रह गया 4800 मीटर दौड़ के आखिरी दौर में अभ्यर्थी की हार्ट अटैक से मौत

    होमगार्ड बनने का सपना अधूरा रह गया 4800 मीटर दौड़ के आखिरी दौर में अभ्यर्थी की हार्ट अटैक से मौत


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में होमगार्ड भर्ती की शारीरिक दक्षता परीक्षा के दौरान एक दर्दनाक हादसा सामने आया। बरेली से भर्ती परीक्षा देने पहुंचे 24 वर्षीय शिवम यादव की दौड़ के दौरान अचानक तबीयत बिगड़ गई और वह ट्रैक पर गिर पड़े। शिवम ने 4800 मीटर की दौड़ के 11 राउंड पूरे कर लिए थे और अंतिम राउंड में अपने लक्ष्य से करीब 60 से 70 मीटर की दूरी पर थे। इसी दौरान वह अचानक गश खाकर गिर गए। मौके पर मौजूद पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उन्हें तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

    शिवम बरेली के सुभाषनगर थाना क्षेत्र के नई बस्ती वंशीनगला बेनीपुर चौधरी के रहने वाले थे। उनके पिता विनोद कुमार पेशे से अधिवक्ता हैं और बरेली बार एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष भी रह चुके हैं। बेटे की मौत की खबर मिलने के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। अस्पताल में शिवम का शव देखकर उनके पिता की भी हालत बिगड़ गई और उन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। घटना की जानकारी मिलने के बाद मुरादाबाद के एसएसपी सतपाल अंतिल भी जिला अस्पताल पहुंचे।

    शिवम ने होमगार्ड भर्ती की लिखित परीक्षा और दस्तावेजों की जांच की प्रक्रिया पूरी कर ली थी। शुक्रवार को उन्हें शारीरिक दक्षता परीक्षा में शामिल होना था। इसके लिए वह गुरुवार रात करीब 11 बजे अपने पिता के साथ बरेली से मुरादाबाद के लिए रवाना हुए थे। शुक्रवार सुबह करीब पांच बजे वह भर्ती स्थल पर पहुंच गए। जांच और बायोमेट्रिक उपस्थिति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें 9वीं वाहिनी पीएसी के मैदान में दौड़ के लिए भेजा गया। शिवम के रिश्ते का भाई हिमांशु भी भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने मुरादाबाद पहुंचा था।

    हिमांशु के मुताबिक शिवम पांचवीं शिफ्ट में दौड़ रहे थे। अभ्यर्थियों को 28 मिनट के भीतर 4800 मीटर की दूरी पूरी करनी थी। शिवम ने शुरुआती 11 राउंड पूरे कर लिए थे और अब केवल आखिरी राउंड बाकी था। सुबह करीब 8 बजकर 16 मिनट पर वह अंतिम राउंड में दौड़ रहे थे। मंजिल करीब नजर आ रही थी लेकिन अचानक उनकी रफ्तार थम गई और वह ट्रैक पर गिर पड़े। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत मदद की कोशिश की और उन्हें अस्पताल ले जाया गया।

    पोस्टमार्टम करने वाली टीम में शामिल डॉक्टर राहुल चौधरी के अनुसार प्रारंभिक तौर पर मौत का कारण हार्ट अटैक सामने आया है। डॉक्टर के मुताबिक अचानक बहुत तेज गति से दौड़ने के कारण दिल पर अत्यधिक दबाव पड़ने की आशंका है। उनका कहना है कि ऐसी शारीरिक परीक्षा की तैयारी के दौरान शरीर और दिल को धीरे धीरे बढ़ते अभ्यास के जरिए लंबे समय तक तेज दौड़ के लिए तैयार करना जरूरी है।

    शिवम की शादी वर्ष 2023 में कोमल से हुई थी। उनकी दो साल की बेटी शैली है। पति की मौत की खबर के बाद पत्नी कोमल समेत परिवार के अन्य लोग अस्पताल की मोर्चरी पहुंचे। शव देखते ही पत्नी बेसुध हो गई। जिस नौकरी के जरिए शिवम अपने परिवार के भविष्य को बेहतर बनाने का सपना लेकर दौड़ रहे थे वह सपना अंतिम राउंड में ही हमेशा के लिए टूट गया। पुलिस ने पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी करने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया।

  • स्पैम कॉल करने वालों पर कसेगा शिकंजा, TRAI ने AI आधारित निगरानी और सख्त कार्रवाई का ढांचा किया मजबूत

    स्पैम कॉल करने वालों पर कसेगा शिकंजा, TRAI ने AI आधारित निगरानी और सख्त कार्रवाई का ढांचा किया मजबूत


    नई दिल्ली।
    लगातार आने वाली अनचाही और स्पैम कॉल से परेशान मोबाइल उपभोक्ताओं के लिए दूरसंचार नियामक ट्राई (TRAI) ने कार्रवाई का दायरा और मजबूत किया है। ट्राई ने 18 सितंबर 2026 को अनचाही वाणिज्यिक संचार (UCC) पर अंकुश लगाने के लिए तकनीक आधारित प्रवर्तन और उपभोक्ता सुरक्षा से जुड़ा नया ढांचा जारी किया। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग आधारित व्यवस्था के जरिए संदिग्ध स्पैम गतिविधियों की पहचान तथा अलग-अलग टेलीकॉम कंपनियों के बीच सूचना साझा करने का प्रावधान शामिल है।

    AI से संदिग्ध नंबरों की पहचान

    TRAI की व्यवस्था में AI/ML आधारित UCC_Detect प्रणाली का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसका उद्देश्य ऐसे नंबरों और प्रेषकों की पहचान करना है जिनसे बड़े पैमाने पर अनचारा व्यावसायिक संचार किए जाने की आशंका हो। फरवरी 2026 में ट्राई ने इसी तकनीक आधारित व्यवस्था के जरिए इंटर-ऑपरेटर सूचना साझा करने और नियामकीय कार्रवाई के लिए दिशा-निर्देश जारी किए थे।

    यदि किसी एक प्रेषक से जुड़े कई मोबाइल नंबर लगातार स्पैम गतिविधि में सामने आते हैं तो संबंधित टेलीकॉम कंपनी उस प्रेषक की अतिरिक्त जांच कर सकती है। उपलब्ध ढांचे में जरूरत पड़ने पर KYC की दोबारा जांच और भौतिक सत्यापन जैसे कदमों का भी प्रावधान है।

    10 दिन में पांच नंबर मिलने पर बढ़ सकती है जांच

    नए प्रावधानों के तहत यदि किसी प्रेषक से जुड़े पांच या उससे अधिक नंबर 10 दिनों के भीतर स्पैम गतिविधि के लिए चिन्हित होते हैं, तो उसके कनेक्शन और KYC की समीक्षा की जा सकती है। जरूरत पड़ने पर संबंधित नंबरों से आउटगोइंग कॉल या अन्य दूरसंचार सेवाओं को प्रतिबंधित किया जा सकता है। लगातार नियमों का उल्लंघन होने पर कनेक्शन समाप्त करने की कार्रवाई भी संभव है।

    ऑटो डायलर और रोबोकॉल पर भी निगरानी

    TRAI ने Application-to-Person (A2P) वॉयस कॉल के इस्तेमाल को लेकर भी नियम तय किए हैं। इनमें ऑटो डायलर, रोबोकॉल, पहले से रिकॉर्ड किए गए संदेश और स्वचालित या रिकॉर्डेड आवाज वाली कॉल शामिल हैं।

    ऐसी कॉल करने वाली कंपनियों और संस्थाओं को अपने टेलीकॉम ऑपरेटर को पहले से जानकारी देनी होगी कि वे A2P कॉलिंग सिस्टम का इस्तेमाल कर रही हैं और किन नंबरों से कॉल की जाएगी। ट्राई के नियमों के तहत ऑटो डायलर या रोबोकॉल के इस्तेमाल और उनके उद्देश्य की पूर्व सूचना देना जरूरी है।

    1600 और 1601 सीरीज से पहचान आसान

    TRAI ने सेवा और ट्रांजैक्शन संबंधी कॉल को पहचानने के लिए 1600 और 1601 नंबरिंग सीरीज के इस्तेमाल को भी आगे बढ़ाया है। अगस्त 2026 में यूटिलिटी, कूरियर और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र की संस्थाओं के लिए 1601 सीरीज के चरणबद्ध कार्यान्वयन की शुरुआत की गई। इसका उद्देश्य वास्तविक सेवा संबंधी कॉल और संदिग्ध या फर्जी कॉल के बीच अंतर करना है।

    BFSI और सरकारी संस्थाओं के लिए 1600 सीरीज को पहले ही लागू करने की दिशा में नियम बनाए जा चुके हैं, ताकि उपभोक्ता ऐसी संस्थाओं की वास्तविक सेवा एवं ट्रांजैक्शन कॉल को आसानी से पहचान सकें।

    कॉल मैनेजमेंट ऐप्स के लिए भी नियम

    TRAI ने कॉल मैनेजमेंट ऐप्स के कामकाज को लेकर भी प्रावधान किए हैं। 140 और 1600 सीरीज से आने वाली वैध कॉल को केवल नंबर सीरीज के आधार पर स्पैम के रूप में टैग या ब्लॉक करने की अनुमति नहीं है। इसका उद्देश्य वैध सेवा और ट्रांजैक्शन संबंधी कॉल को अनावश्यक रूप से स्पैम फिल्टर में जाने से रोकना है। इसके अलावा कमर्शियल हेडर और कंटेंट टेम्पलेट के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए भी निगरानी और प्रवर्तन व्यवस्था को मजबूत किया गया है।

    उपभोक्ताओं को मिलेगी शिकायत और अपील की सुविधा

    TRAI के नए ढांचे में उपभोक्ता संरक्षण पर भी जोर दिया गया है। संदिग्ध और अनचाहे व्यावसायिक संचार की पहचान के साथ शिकायतों के निपटारे और नियामकीय कार्रवाई की प्रक्रिया को मजबूत किया गया है। ट्राई का यह कदम स्पैम कॉल के साथ-साथ ऐसे संचार के जरिए होने वाले संभावित वित्तीय धोखाधड़ी के जोखिम को कम करने की दिशा में है।

    इस तरह आने वाले समय में टेलीकॉम नेटवर्क पर स्पैम गतिविधियों की पहचान केवल शिकायतों के आधार पर नहीं, बल्कि AI/ML आधारित विश्लेषण, नंबरिंग सीरीज और टेलीकॉम कंपनियों के बीच साझा की जाने वाली सूचनाओं के आधार पर भी की जा सकेगी।

  • MP हाईकोर्ट के जज अवनिंद्र सिंह की अनोखी मिसाल: GPF के पूरे 1.1 करोड़ रुपये PM CARES Fund को देंगे

    MP हाईकोर्ट के जज अवनिंद्र सिंह की अनोखी मिसाल: GPF के पूरे 1.1 करोड़ रुपये PM CARES Fund को देंगे


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जज जस्टिस अवनिंद्र कुमार सिंह ने अपने रिटायरमेंट के मौके पर ऐसा संकल्प लिया है जिसकी चर्चा हो रही है। 18 सितंबर 2026 को सेवानिवृत्त हुए जस्टिस सिंह ने 17 सितंबर को आयोजित अपने विदाई समारोह में घोषणा की कि उन्हें रिटायरमेंट के बाद जनरल प्रोविडेंट फंड यानी GPF से मिलने वाली पूरी राशि करीब 1.1 करोड़ रुपये वह PM CARES Fund में दान करेंगे। उन्होंने कहा कि यह राशि राष्ट्र निर्माण के काम में उपयोग हो सके इसलिए वह इसे अपने पास रखने के बजाय दान करने का फैसला कर रहे हैं।

    जस्टिस अवनिंद्र कुमार सिंह ने विदाई समारोह में अपने जीवन और न्यायिक सेवा के अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि रिटायरमेंट उनके लिए जीवन का अंत नहीं बल्कि एक नए अध्याय की शुरुआत है। उनके मुताबिक व्यक्ति केवल पूजा करके ही ईश्वर की सेवा नहीं करता बल्कि समाज और धरती पर मौजूद जीवन तथा अन्य संसाधनों की देखभाल करके भी अपनी जिम्मेदारी निभा सकता है। इसी सोच के तहत उन्होंने अपनी पत्नी के साथ एक और महत्वपूर्ण संकल्प लिया है।

    जस्टिस सिंह और उनकी पत्नी ने मृत्यु के बाद अपने शरीर को मेडिकल स्टडी और वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए दान करने का फैसला किया है। उन्होंने बताया कि इसके लिए दोनों ने मेडिकल कॉलेज में संकल्प लिया है। उनका कहना है कि मृत्यु के बाद भी शरीर का उपयोग अगर चिकित्सा शिक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए हो सके तो इससे आने वाली पीढ़ियों को लाभ मिल सकता है। उनके इस निर्णय को विदाई समारोह में मौजूद लोगों ने भी महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा।

    अपने भाषण के दौरान जस्टिस सिंह ने अपने बचपन की यादों को भी साझा किया। उन्होंने बताया कि उनकी मां के निधन के बाद उनकी मौसी ने उन्हें अपने बेटे की तरह पाला। उन्होंने अपने पिता अपनी मौसी और मौसी के पति के प्रभाव का भी उल्लेख किया। जस्टिस सिंह ने बताया कि उनकी मौसी हमेशा उन्हें मेहनत और ईमानदार प्रयास के महत्व की सीख देती थीं। उनके अनुसार जीवन में सफलता का कोई आसान रास्ता नहीं होता और मेहनत तथा सच्ची कोशिश के बिना हासिल की गई सफलता लंबे समय तक कायम नहीं रहती।

    जस्टिस अवनिंद्र कुमार सिंह का न्यायिक करियर भी लंबा रहा है। उन्होंने 31 मई 1990 को सिविल जज क्लास-2 के तौर पर न्यायिक सेवा में प्रवेश किया था। इसके बाद उन्होंने न्यायिक सेवा में अलग अलग जिम्मेदारियां संभालीं। वर्ष 2018 में उन्हें छतरपुर में प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज के पद पर नियुक्त किया गया। इसके बाद 2022 में उन्होंने धार में प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज के तौर पर जिम्मेदारी संभाली।

    इसके बाद 1 मई 2023 को जस्टिस अवनिंद्र कुमार सिंह ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जज के रूप में शपथ ली। करीब तीन साल तक हाईकोर्ट में न्यायिक जिम्मेदारी निभाने के बाद वह 18 सितंबर 2026 को सेवानिवृत्त हुए। अपने विदाई भाषण के अंत में उन्होंने रिटायरमेंट को किसी यात्रा का अंतिम पड़ाव मानने के बजाय एक नए मंच से समाज के लिए काम करने की शुरुआत बताया।

    करीब 1.1 करोड़ रुपये की GPF राशि दान करने और पत्नी के साथ देहदान का संकल्प लेने की घोषणा ने उनके विदाई समारोह को खास बना दिया। उनका यह फैसला न्यायिक सेवा से विदाई के साथ समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को आगे भी जारी रखने की उनकी सोच को सामने रखता है।

  • सुप्रीम कोर्ट ने शराबबंदी पर उठाए सवाल….600 से ज्यादा मौतों का जिक्र कर गिनाए 5 बड़े नुकसान

    सुप्रीम कोर्ट ने शराबबंदी पर उठाए सवाल….600 से ज्यादा मौतों का जिक्र कर गिनाए 5 बड़े नुकसान


    नई दिल्ली।
    शराबबंदी (Alcohol Prohibition) के असर पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने इससे जुड़ी पांच प्रमुख ‘बुराइयां’ गिनाई हैं। कोर्ट ने कहा कि शराब पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने से राजस्व का नुकसान, प्रतिबंध लागू कराने पर खर्च, पुलिस में भ्रष्टाचार, अवैध शराब बनाने और नशीली दवाओं (Narcotic drugs) से जुड़ी समस्या जैसे खतरे पैदा हो सकते हैं।

    जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने यह टिप्पणी महाराष्ट्र पॉइजन्स रूल्स के नियम 18A और 18B को रद्द करते हुए की। इन नियमों के तहत मेथनॉल की खरीद को नियंत्रित किया गया था और गैर-दवा निर्माताओं को इसकी बिक्री से पहले उसमें कड़वा पदार्थ और रंग मिलाना अनिवार्य किया गया था।


    कोर्ट ने शराबबंदी से जुड़े 5 ‘नुकसान’ गिनाए

    सुप्रीम कोर्ट ने शराबबंदी से जुड़े जिन पांच पहलुओं की ओर इशारा किया, वे हैं-
    – राजस्व का नुकसान
    – शराबबंदी लागू कराने पर होने वाला खर्च
    – पुलिस में भ्रष्टाचार
    – अवैध तरीके से शराब बनाने का बढ़ता कारोबार
    – नशीली दवाओं से जुड़ी समस्या
    पीठ ने गुजरात और दूसरे राज्यों में जहरीली शराब से हुई घटनाओं का भी जिक्र किया।


    गुजरात में 600 से ज्यादा लोगों की मौत का जिक्र

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने कहा कि हाल में गुजरात के भावनगर और मध्य प्रदेश के सागर में हुई जहरीली शराब की घटनाएं अधिकारियों के लिए चेतावनी हैं। इन दोनों घटनाओं में क्रमशः 13 और 15 लोगों की जान गई थी। पीठ ने कहा कि इतिहास बताता है कि पूरी तरह शराबबंदी कई बार शराब के कारोबार को भूमिगत कर देती है। इससे बिना नियमन वाली और जानलेवा शराब के चलन का खतरा बढ़ जाता है।

    कोर्ट ने गुजरात का उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य में सख्त शराबबंदी नीति है। पीठ के मुताबिक, राज्य के गठन और देश की आजादी के बाद से वहां कम से कम 10 बड़ी जहरीली शराब त्रासदियां हो चुकी हैं, जिनमें 600 से अधिक लोगों की मौत हुई है।


    1991 में मेथनॉल वाली जहरीली शराब से 93 मौतें

    सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र में बनाए गए नियमों की पृष्ठभूमि का भी उल्लेख किया। ये नियम 1991 में मुंबई में मेथनॉल मिली नकली शराब पीने से 93 लोगों की मौत के बाद बनाए गए थे। इन नियमों में मेथनॉल की खरीद पर रोक-टोक और गैर-दवा निर्माताओं को इसकी बिक्री से पहले उसमें कड़वा पदार्थ और रंग मिलाने की शर्त रखी गई थी।

    महाराष्ट्र सरकार की दलील खारिज
    सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार की याचिका को स्वीकार नहीं किया और कहा कि संबंधित नियमों का जहरीली शराब की घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से कोई तार्किक संबंध दिखाई नहीं देता। पीठ ने स्पष्ट किया कि वह राज्य की मंशा पर सवाल नहीं उठा रही है। हालांकि, केवल अच्छी मंशा किसी नियम को मनमानेपन की कसौटी पर सही साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

    कोर्ट ने कहा कि राज्य यह बताने में असफल रहा कि मेथनॉल में कड़वा पदार्थ और रंग मिलाने की प्रक्रिया लगातार उसके इस्तेमाल को रोकने या हतोत्साहित करने में कैसे प्रभावी होगी।


    ‘दूसरे मिलावटी पदार्थों से नकली शराब बनाने से कैसे रोकेंगे?’

    पीठ ने यह सवाल भी उठाया कि इन पदार्थों को मिलाने से जहरीली शराब पीने से होने वाली मौतों को निश्चित तौर पर कैसे रोका जा सकेगा। कोर्ट के मुताबिक, एक और अहम सवाल का जवाब भी नहीं दिया गया है- अगर मेथनॉल में कुछ पदार्थ मिलाए जाते हैं, तो दूसरे मिलावटी पदार्थों का इस्तेमाल करके नकली शराब बनाने पर रोक कैसे लगेगी। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र के संबंधित नियमों को रद्द कर दिया।

  • LIC के साथ ₹2684 करोड़ के धोखाधड़ी मामले में CBI का एक्शन…. अनिल अंबानी समेत कई पर केज दर्ज!

    LIC के साथ ₹2684 करोड़ के धोखाधड़ी मामले में CBI का एक्शन…. अनिल अंबानी समेत कई पर केज दर्ज!


    नई दिल्ली।
    अनिल अंबानी (Anil Ambani) की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। दरअसल, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई-CBI) ने रिलायंस कैपिटल लिमिटेड (आरसीएपी) (Reliance Capital Limited – RCAP), इसके पूर्व चेयरमैन अनिल अंबानी, पूर्व समूह प्रबंध निदेशक सतीश सेठ, अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और अन्य लोगों के खिलाफ एक मामला दर्ज किया है। एक खबर के मुताबिक यह मामला भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) (Life Insurance Corporation of India – LIC) के निवेश से जुड़े 2684 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी से जुड़ा है। हालांकि, अनिल अंबानी के प्रवक्ता ने आरोपों को खारिज किया है।


    क्या कहा प्रवक्ता ने?

    प्रवक्ता ने आधिकारिक बयान में कहा, ”सीबीआई द्वारा दर्ज प्राथमिकी रिलायंस कैपिटल लिमिटेड से संबंधित है। अनिल अंबानी 2005 से नवंबर 2021 तक रिलायंस कैपिटल लिमिटेड के बोर्ड में गैर कार्यकारी निदेशक/चेयरमैन रहे। नवंबर 2021 में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कंपनी के निदेशक मंडल को हटाकर एक प्रशासक नियुक्त कर दिया था।” प्रवक्ता के मुताबिक अनिल अंबानी ने किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया है और कानून के तहत उन्हें मिले सभी अधिकारों को वह सुरक्षित रखते हैं।


    क्या है आरोप?

    सीबीआई के अनुसार, एलआईसी का आरोप है कि 12 अप्रैल 2012 से 9 मार्च 2018 के बीच उसने रिलायंस कैपिटल लिमिटेड द्वारा जारी किए गए पांच अपरिवर्तनीय ‘डिबेंचर’ खरीदे थे, जिनकी कुल कीमत 3,900 करोड़ रुपये थी। ये निवेश सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों, फंड की जरूरतों और मौजूदा कर्ज को फिर से री-फाइनेंस के लिए किए गए थे।

    एलआईसी का आरोप है कि आरोपी व्यक्तियों ने आपराधिक साजिश रची और कई अपराध किए, जिनमें धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, आपराधिक कदाचार, फंड का गलत इस्तेमाल/गबन और खातों में हेराफेरी शामिल हैं। एलआईसी का आरोप है कि आरोपियों ने गलत जानकारी देकर उसे कंपनी में निवेश करने के लिए छल से राजी किया और उसके बाद धोखाधड़ी से फंड को अन्य खातों में भेज दिया। इन कथित कृत्यों की वजह से एलआईसी को 2,684 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ।


    पहले भी कई मामले दर्ज

    सीबीआई ने बताया कि उसने पहले कई सरकारी बैंकों, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) और एलआईसी से मिली शिकायतों के आधार पर रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड, रिलायंस कैपिटल लिमिटेड, रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड, रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड और रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड के खिलाफ आठ प्राथमिकी दर्ज की थीं।

    इन मामलों में अब तक छह आरोपपत्र दाखिल किये जा चुके हैं और सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। बयान में कहा गया है कि मामलों की जांच चल रही है और उच्चतम न्यायालय इनकी निगरानी कर रहा है।