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  • 2027 के विधानसभा चुनावों में कितना असर दिखाएंगे Gen Z, युवाओं की बढ़ती ताकत पर टिकी राजनीतिक दलों की नजर

    2027 के विधानसभा चुनावों में कितना असर दिखाएंगे Gen Z, युवाओं की बढ़ती ताकत पर टिकी राजनीतिक दलों की नजर

    नई दिल्ली । हाल के वर्षों में देश में युवाओं की राजनीतिक भागीदारी और सामाजिक मुद्दों पर उनकी सक्रियता ने नई बहस को जन्म दिया है। विशेष रूप से हालिया छात्र आंदोलनों और सोशल मीडिया अभियानों के बाद अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या 2027 के विधानसभा चुनावों में Gen Z मतदाता चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं। राजनीतिक दल भी इस वर्ग को अपनी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हुए अलग-अलग स्तर पर युवाओं तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

    Gen Z में वर्ष 1997 से 2012 के बीच जन्मे युवाओं को शामिल किया जाता है। वर्ष 2026 के हिसाब से इस वर्ग की उम्र लगभग 14 से 29 वर्ष के बीच है। देश में इनकी आबादी करीब 37 करोड़ बताई जाती है, जबकि 18 वर्ष से अधिक आयु वाले मतदाताओं में भी इस वर्ग की हिस्सेदारी उल्लेखनीय है। यही कारण है कि आने वाले चुनावों में युवा मतदाता राजनीतिक दलों के लिए एक महत्वपूर्ण समूह बनकर उभरे हैं।

    उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गुजरात और गोवा जैसे राज्यों में वर्ष 2027 के दौरान विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। इन राज्यों में बड़ी संख्या में युवा मतदाता चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा होंगे। उत्तर प्रदेश में 18 से 29 वर्ष आयु वर्ग के लगभग चार करोड़ मतदाता हैं, जो कुल मतदाताओं का करीब 30 प्रतिशत माने जा रहे हैं। इसके अलावा पहली बार मतदान करने वाले युवाओं की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

    पंजाब में भी बड़ी संख्या में युवा मतदाताओं की मौजूदगी को देखते हुए राजनीतिक दल उन्हें साधने की तैयारी में हैं। कई दल युवा उम्मीदवारों को अधिक अवसर देने और युवाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता देने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। वहीं उत्तराखंड में भी युवा मतदाता कुल मतदाताओं का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जिससे चुनावी मुकाबले में उनकी भूमिका अहम मानी जा रही है।

    गुजरात में भी युवा मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। राज्य में 20 से 29 वर्ष आयु वर्ग के मतदाताओं की बड़ी संख्या को देखते हुए विभिन्न राजनीतिक दल संगठन और नेतृत्व स्तर पर युवाओं को अधिक जिम्मेदारियां देने की दिशा में कदम उठा रहे हैं। वहीं गोवा में भी नए मतदाताओं की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे युवा वर्ग का चुनावी महत्व और बढ़ गया है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि Gen Z की कार्यशैली पारंपरिक राजनीति से अलग है। यह वर्ग सोशल मीडिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन संवाद के माध्यम से अपनी राय व्यक्त करने में अधिक सक्रिय रहता है। कई सामाजिक और शैक्षणिक मुद्दों पर डिजिटल अभियानों में युवाओं की भागीदारी ने यह संकेत दिया है कि वे केवल ऑनलाइन चर्चा तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि सार्वजनिक विमर्श में भी अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं।

    विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि युवा मतदाता किसी एक राजनीतिक दल का स्थायी समर्थन आधार नहीं माने जा सकते। यह वर्ग रोजगार, शिक्षा, पारदर्शिता, अवसर और शासन से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देता है तथा परिस्थितियों के अनुसार अपना चुनावी निर्णय बदल सकता है। इसी कारण अधिकांश राजनीतिक दल युवाओं से जुड़े विषयों को अपने चुनावी एजेंडे में प्रमुख स्थान देने की तैयारी कर रहे हैं।

    हालांकि यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि Gen Z अकेले चुनावी परिणाम तय कर देगा, लेकिन इतना स्पष्ट है कि कई राज्यों में युवा मतदाता मुकाबले को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। ऐसे में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव इस बात की महत्वपूर्ण परीक्षा होंगे कि युवाओं की बढ़ती राजनीतिक भागीदारी किस हद तक चुनावी नतीजों और राजनीतिक रणनीतियों को प्रभावित करती है।

  • राजस्थान में निकाय और पंचायत चुनाव में 50% टिकट 50 साल से कम उम्र के नेताओं को देगी कांग्रेस

    राजस्थान में निकाय और पंचायत चुनाव में 50% टिकट 50 साल से कम उम्र के नेताओं को देगी कांग्रेस


    जयपुर। राजस्थान में होने वाले निकाय और पंचायत चुनावों से पहले कांग्रेस ने युवाओं को आगे बढ़ाने का बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने घोषणा की कि पार्टी शहरी निकायों और पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव में 50 वर्ष से कम आयु के उम्मीदवारों को 50 प्रतिशत टिकट देगी।

    पार्टी मुख्यालय में शहरी निकाय चुनावों की तैयारियों की समीक्षा बैठक के दौरान डोटासरा ने कहा कि कांग्रेस संगठन में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने और उन्हें नेतृत्व का अवसर देने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है।

    उन्होंने टिकट के दावेदारों को यह भी स्पष्ट संदेश दिया कि केवल आवेदन करने से टिकट की गारंटी नहीं होगी। उम्मीदवारों के चयन में स्थानीय परिस्थितियों, संगठन की जरूरतों और जीत की संभावनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।

    डोटासरा ने वार्ड बदलकर टिकट मांगने की प्रवृत्ति पर भी नाराजगी जताते हुए कहा कि एक वार्ड से दूसरे वार्ड में जाकर दावेदारी करने को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा। टिकट वितरण पूरी तरह संगठनात्मक मानकों और स्थानीय समीकरणों के आधार पर होगा।

    राज्य चुनाव आयोग के अनुसार, पंचायत चुनावों की अधिसूचना 23 सितंबर के आसपास जारी होने की संभावना है। मतदान 13 अक्टूबर से 5 नवंबर के बीच विभिन्न चरणों में कराया जा सकता है, जबकि मतगणना 12 नवंबर तक पूरी होने की उम्मीद है।

    वहीं, शहरी निकाय चुनावों की घोषणा 17 अगस्त के आसपास होने की संभावना है। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार 6 और 9 सितंबर को मतदान तथा 11 सितंबर को मतगणना कराई जा सकती है। हालांकि, अंतिम कार्यक्रम चुनाव आयोग की आधिकारिक अधिसूचना जारी होने के बाद ही तय होगा।

  • कोविड महामारी के दौरान मिले केंद्रीय कोष और उपकरणों के अप्रयुक्त रहने तथा वित्तीय अनियमितताओं पर विपक्षी दल ने जताई आपत्ति

    कोविड महामारी के दौरान मिले केंद्रीय कोष और उपकरणों के अप्रयुक्त रहने तथा वित्तीय अनियमितताओं पर विपक्षी दल ने जताई आपत्ति

    नई दिल्ली । राज्य विधानमंडल में प्रस्तुत की गई नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की नवीनतम रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद प्रशासनिक और वित्तीय प्रबंधन को लेकर राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है। प्रतिवेदन में स्वास्थ्य सेवाओं, प्राकृतिक आपदा राहत वितरण तथा बजटीय आवंटन के निष्पादन में कई स्तरों पर पाई गई कमियों को रेखांकित किया गया है। महामारी के संवेदनशील दौर में उपलब्ध कराए गए संसाधनों के पूर्ण उपयोग न होने और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं में अनुपालन की अनिमितताओं पर विपक्षी दलों ने कड़ा रुख अपनाते हुए जवाबदेही तय करने की मांग की है।

    लेखा परीक्षा रिपोर्ट के मुख्य अंशों के अनुसार स्वास्थ्य क्षेत्र में आवंटित बजट का एक बड़ा हिस्सा निर्धारित समय सीमा तक अप्रयुक्त पड़ा रहा। वैश्विक महामारी के समय उपलब्ध कराए गए महत्वपूर्ण चिकित्सा संसाधनों, जैसे ऑक्सीजन संयंत्रों और सघन चिकित्सा इकाई उपकरणों के कई केंद्रों पर चालू न होने का उल्लेख किया गया है। इसके अतिरिक्त, गंभीर प्राकृतिक आपदाओं के उपरांत राहत राशि के पुनरावृत्त वितरण के मामले भी सामने आए हैं, जिससे राज्य के खजाने पर अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ा। इन निष्कर्षों ने आपदा प्रबंधन और लाभार्थी सत्यापन प्रणालियों की दक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    प्रतिवेदन में औद्योगिक विकास हेतु भूमि आवंटन और विभिन्न राज्य स्तरीय कल्याणकारी योजनाओं के संचालन में भी प्रक्रियागत त्रुटियों की ओर संकेत किया गया है। निर्धारित नियमों का पूरी तरह पालन न होने से हुए वित्तीय नुकसान के साथ-साथ राज्य के समग्र राजकोषीय घाटे और बढ़ते ऋण भार को लेकर चिंता जताई गई है। बजट के एक बड़े हिस्से का वर्ष के अंत तक बिना खर्च हुए रह जाना और अतिरिक्त व्यय के लिए आवश्यक विधायी स्वीकृतियों के लंबित रहने को वित्तीय अनुशासन के दृष्टिकोण से गंभीर माना जा रहा है।

    संसदीय पटल पर रिपोर्ट की प्रति रखे जाने के उपरांत मुख्य विपक्षी दल ने इन निष्कर्षों को प्रशासनिक विफलता करार देते हुए कड़े दंडात्मक कदमों की मांग की है। विपक्षी प्रतिनिधियों का कहना है कि जनकल्याणकारी योजनाओं में पाई गई यह ढिलाई राज्य के दीर्घकालिक आर्थिक विकास को प्रभावित करती है। दूसरी ओर, प्रशासनिक सूत्रों का तर्क है कि ऑडिट रिपोर्ट में उठाए गए अधिकांश बिंदु प्रक्रियागत और तकनीकी प्रकृति के हैं, जिन पर विभागीय समीक्षा के माध्यम से स्थिति स्पष्ट की जाएगी। फिलहाल, इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद राज्य के प्रशासनिक तंत्र में जवाबदेही को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

  • आरक्षण नीति पर डिजिटल मंचों पर छिड़ी नई बहस के बीच सोशल मीडिया अभियान तेजी से युवा आबादी को कर रहा आकर्षित

    आरक्षण नीति पर डिजिटल मंचों पर छिड़ी नई बहस के बीच सोशल मीडिया अभियान तेजी से युवा आबादी को कर रहा आकर्षित

    नई दिल्ली । परीक्षा प्रणालियों में सुधार की मांगों के बाद अब युवाओं ने देश की मौजूदा आरक्षण व्यवस्था को लेकर सोशल मीडिया मंचों पर एक नया व्यापक अभियान छेड़ दिया है। डिजिटल माध्यमों से शुरू हुई इस पहल को महज दो दिनों के भीतर लाखों की संख्या में युवाओं का समर्थन मिला है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बने विशेष पेज ने बहुत ही कम समय में रिकॉर्ड फॉलोअर्स जुटाकर इस विषय को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में ला खड़ा किया है। इस डिजिटल गोलबंदी को केवल ऑनलाइन तक सीमित न रखते हुए आयोजकों ने अब इसे राजधानी के जंतर-मंतर पर प्रत्यक्ष प्रदर्शन में बदलने की तैयारी शुरू कर दी है।

    इस पूरे अभियान का मुख्य उद्देश्य मौजूदा जातिगत आरक्षण प्रणाली के स्थान पर पूर्णतः योग्यता और आर्थिक स्थिति पर आधारित चयन प्रक्रिया को लागू कराना है। अभियान से जुड़े प्रतिनिधियों का तर्क है कि प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी नौकरियों में निष्पक्ष अवसरों के लिए पारदर्शी नीतियां आवश्यक हैं। इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए एक समर्पित डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और वेबसाइट तैयार की गई है, जिसके माध्यम से युवाओं को संगठित किया जा रहा है। अलग-अलग राज्यों से जुड़ रहे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र इस मंच पर खुलकर अपनी प्रतिक्रियाएं और अनुभव साझा कर रहे हैं।

    दूसरी ओर, इस ऑनलाइन पहल के सामने आते ही सोशल मीडिया पर नीति के पक्षधर समूहों की ओर से भी तीखी प्रतिक्रियाएं दर्ज की जा रही हैं। आरक्षण व्यवस्था का समर्थन करने वाले वर्गों का कहना है कि जब तक समाज से सामाजिक विषमताएं पूरी तरह समाप्त नहीं हो जातीं, तब तक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए यह संवैधानिक ढांचा अनिवार्य है। इसके जवाब में कई नए पेज और ऑनलाइन समूह भी सक्रिय हो गए हैं जो मौजूदा आरक्षण व्यवस्था के सामाजिक महत्व को रेखांकित कर रहे हैं। इस प्रकार डिजिटल स्पेस में दोनों पक्षों के बीच विचारों का तीखा आदान-प्रदान देखने को मिल रहा है।

    युवाओं के इस तेजी से बढ़ते रुख को देखते हुए सामाजिक और नीतिगत विश्लेषक इसे नए दौर का डिजिटल जनआंदोलन मान रहे हैं। अभियान के आयोजक अब इस ऑनलाइन समर्थन को एक संगठित ढांचा देने के लिए ऑनलाइन सदस्यता और देशव्यापी नेटवर्किंग पर बल दे रहे हैं। आने वाले समय में यदि यह अभियान दिल्ली की सड़कों तक पहुंचता है, तो यह प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों के लिए एक नई चुनौती पेश कर सकता है। फिलहाल, डिजिटल मंचों पर यह विषय शीर्ष रुझानों में बना हुआ है और युवाओं की भागीदारी लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है।

  • बर्फीले क्षेत्रों में तैनात सैनिकों की सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक स्मार्ट वर्दी विकसित करने की दिशा में रक्षा अनुसंधान संस्थान का बड़ा कदम

    बर्फीले क्षेत्रों में तैनात सैनिकों की सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक स्मार्ट वर्दी विकसित करने की दिशा में रक्षा अनुसंधान संस्थान का बड़ा कदम

    नई दिल्ली । अत्यधिक ऊंचाई और शून्य से नीचे के तापमान वाले सीमावर्ती बर्फीले क्षेत्रों में तैनात भारतीय सैनिकों की सुरक्षा को अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से एक विशेष तकनीक पर काम शुरू किया गया है। हिमस्खलन और बर्फीले तूफानों जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान जवानों की स्थिति का सटीक पता लगाने के लिए अत्याधुनिक स्मार्ट वर्दी का निर्माण किया जा रहा है। इस परियोजना के तहत रक्षा अनुसंधान से जुड़ी कानपुर स्थित प्रयोगशाला और उत्तर प्रदेश टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी संस्थान ने संयुक्त रूप से शोध और अनुसंधान की प्रक्रिया शुरू की है। यह नई व्यवस्था विषम परिस्थितियों में राहत और बचाव कार्यों को अत्यधिक तीव्र और सटीक बनाने में मददगार साबित होगी।

    सुरक्षा और ट्रैकिंग प्रणाली को मजबूत करने के लिए तैयार की जा रही इस वर्दी में विशेष कंडक्टिव इंक की मदद से इलेक्ट्रॉनिक सर्किट प्रिंट किए जा रहे हैं। इन परिपथों को माइक्रो-इलेक्ट्रॉनिक चिप, जीपीएस मॉड्यूल और विभिन्न प्रकार के संवेदनशील सेंसरों से जोड़ा जा रहा है। पूरी तकनीकी व्यवस्था को कपड़े की परतों के भीतर ही इस तरह समाहित किया जाएगा कि सैनिक को अतिरिक्त वजन का अहसास न हो। इस पहनावे को मोड़ने, धुलाई करने या दैनिक उपयोग में लाने पर भी इसकी कार्यक्षमता और सर्किट की गुणवत्ता पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा, जिससे सैनिक हर स्थिति में जुड़े रहेंगे।

    आपात स्थिति में यदि कोई जवान ग्लेशियर या भारी बर्फ की परतों के नीचे दब जाता है, तो वर्दी में मौजूद प्रणाली सक्रिय होकर बचाव दल को लगातार लोकेशन सिग्नल भेजती रहेगी। इससे रेस्क्यू टीम को विस्तृत और अनिश्चित इलाके में समय गंवाने के बजाय सीधे लक्षित स्थान तक पहुंचने में सफलता मिलेगी। पूर्व की घटनाओं में बर्फ में फंसे जवानों तक पहुंचने में कई बार काफी समय लग जाता था, लेकिन इस नई व्यवस्था से खोज अभियान की गति कई गुना बढ़ जाएगी, जिससे जान-माल के नुकसान को न्यूनतम स्तर पर लाया जा सकेगा।

    तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार प्रारंभिक चरण में प्राथमिक ध्यान सटीक लोकेशन ट्रैकिंग पर केंद्रित किया गया है। हालांकि भविष्य के अनुसंधान चरण में इसमें शरीर का तापमान, हृदय गति और अन्य महत्वपूर्ण शारीरिक स्वास्थ्य संकेतकों को मापने की सुविधाएं जोड़ने की योजना भी शामिल है। सियाचिन, लद्दाख और पूर्वोत्तर के अति-ऊंचे क्षेत्रों में तैनात सैन्य बलों के लिए यह तकनीकी विकास एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है। दोनों संस्थानों द्वारा इस तकनीक का प्रोटोटाइप परीक्षण सफल रहने के बाद इसे व्यापक स्तर पर अपनाने की दिशा में कदम बढ़ाए जाएंगे।

  • हेलमेट न पहनने पर छह हजार रुपये का चालान कटने से आक्रोशित बिजली कर्मियों ने सरकारी बकाये को आधार बनाकर पुलिस परिसरों की बत्ती गुल की

    हेलमेट न पहनने पर छह हजार रुपये का चालान कटने से आक्रोशित बिजली कर्मियों ने सरकारी बकाये को आधार बनाकर पुलिस परिसरों की बत्ती गुल की

    नई दिल्ली । राजधानी के सीमावर्ती ग्रामीण क्षेत्र में यातायात पुलिस और विद्युत विभाग के कर्मियों के बीच हुआ विवाद अचानक एक बड़े प्रशासनिक संकट में बदल गया। समेसी उपकेंद्र में कार्यरत संविदा कर्मचारियों का वाहन जांच के दौरान अनुपालन न करने पर छह हजार रुपये का चालान काट दिया गया था। इस कार्रवाई से नाराज विद्युत कर्मचारियों ने विभागीय बकाये के दस्तावेजों की तुरंत समीक्षा की और प्रक्रियागत नियमों का हवाला देते हुए संबंधित पुलिस परिसरों की बिजली आपूर्ति पूरी तरह बंद कर दी। इस अचानक हुई कार्रवाई से स्थानीय पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया और कई घंटों तक थाने तथा आसपास की चौकियों में कामकाज बुरी तरह प्रभावित रहा।

    प्राप्त विवरण के अनुसार विद्युत उपकेंद्र पर तैनात कर्मचारी शाम के समय उच्च तनाव लाइन की नियमित गश्त के लिए निकले थे। इसी दौरान मार्ग पर चलाए जा रहे जांच अभियान के तहत ड्यूटी पर तैनात उपनिरीक्षक ने सुरक्षा मानकों की अनदेखी के चलते वाहन चालक कर्मचारी का भारी जुर्माना जमा करने का चालान जारी कर दिया। कर्मचारियों ने विभागीय परिचय पत्र देने का प्रयास किया लेकिन नियमों का हवाला देते हुए चालान की प्रति सौंप दी गई। इस घटनाक्रम के तुरंत बाद कर्मचारियों ने दफ्तर पहुंचकर राजस्व बकाये की सूची निकाली जिसमें स्थानीय थाने और दो पुलिस बूथों पर लाखों रुपये का बिजली बिल लंबित पाया गया।

    विभाग के पुराने बकाये के आंकड़ों का आधार बनाकर शाम के समय ही नगराम थाने के साथ-साथ दो प्रमुख पुलिस चौकियों का बिजली कनेक्शन काट दिया गया। थाने पर साढ़े तीन लाख रुपये से अधिक और दोनों चौकियों पर डेढ़-डेढ़ लाख रुपये का राजस्व बिल बकाया दर्ज था। अचानक बिजली जाने और बैकअप व्यवस्था सीमित होने के कारण पुलिस परिसरों में अंधेरा छा गया। विभागीय कार्यों के निष्पादन में आ रही परेशानियों को देखते हुए पुलिस के उच्च अधिकारियों को तत्काल पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया गया। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए संबंधित उपनिरीक्षक को फटकार लगाई गई और जारी किए गए चालान को नियमानुसार वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की गई।

    बिजली आपूर्ति बंद होने के बाद संबंधित कर्मियों ने अपने संपर्क माध्यम बंद कर दिए थे, जिससे संवाद स्थापित करने में अधिकारियों को काफी समय लगा। प्रशासनिक स्तर पर वार्ता के बाद विद्युत उपकेंद्र से दूसरी तकनीकी टीम को मौके पर भेजा गया, जिसने देर रात करीब साढ़े नौ बजे आपूर्ति बहाल कराई। लखनऊ में अंतर-विभागीय बकाये और चालान को लेकर इस तरह का तनाव पहले भी कई मौकों पर देखा गया है, जहां यातायात दंडात्मक कार्रवाई के जवाब में विद्युत बकाये पर तत्काल कनेक्शन काटने जैसे कदम उठाए गए। अधिकारियों ने पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाने और भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के निर्देश जारी किए हैं।

  • तेल-गैस की खोज के लिए 80,000 करोड़ का पैकेज… मोदी सरकार कर रही समुद्र मंथन की तैयारी….

    तेल-गैस की खोज के लिए 80,000 करोड़ का पैकेज… मोदी सरकार कर रही समुद्र मंथन की तैयारी….


    नई दिल्ली।
    ईरान-अमेरिका युद्ध (Iran-America War) से उपजे तेल और गैस संकट से भारत (India) ने सबक लिया है। मोदी सरकार (Modi government) तेल-गैस की खोज के लिए अब ‘समुद्र मंथन’ की तैयारी कर रही है। इसके तहत भारत सरकार का पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय डीपवॉटर यानी गहरे समुद्र में तेल और गैस की खोज को बढ़ावा देने के लिए 80,000 करोड़ रुपये का एक विशेष प्रोत्साहन पैकेज तैयार कर रहा है। इस पैकेज के तहत विदेशी कंपनियों को आकर्षित करने के लिए खोजी कुओं की ड्रिलिंग लागत का आधा हिस्सा सरकार वहन करेगी।

    यह पहल ‘National Deepwater Exploration Mission’ यानी ‘समुद्र मंथन’ कार्यक्रम का हिस्सा है। खास बात यह है कि यह योजना पिछले दशक में की गई अन्य सुधारों से कहीं आगे जाती है, क्योंकि इसमें सीधे तौर पर एक्प्लोरेशन लागत की फाइनेंसिंग की जाएगी। पिछली नीतियां वैश्विक तेल कंपनियों से बड़ा निवेश नहीं जुटा पाई थीं।

    भारत ओपन एकरेज लाइसेंसिंग कार्यक्रम के तहत 18 डीपवॉटर और अल्ट्रा-डीपवॉटर ब्लॉकों की नीलामी भी कर रहा है। बोली लगाने की आखिरी तारीख 17 सितंबर तक बढ़ा दी गई है, और सरकार को उम्मीद है कि तब तक प्रोत्साहन पैकेज को अंतिम रूप दे दिया जाएगा।


    कैसे काम करेगी योजना?

    प्रस्ताव के अनुसार, सरकार डीपवॉटर खोजी कुओं की ड्रिलिंग लागत का 50 प्रतिशत तक रिइम्बर्समेंट करेगी। हालांकि, यह प्रस्ताव अभी अन्य मंत्रालयों के साथ चर्चा के दौर में है और कैबिनेट के सामने पेश किए जाने से पहले इसमें बदलाव संभव है।

    हर कुएं के लिए वित्तीय सहायता की एक सीमा तय की जाएगी, ताकि लागत बढ़ने पर नियंत्रण रखा जा सके। सरकार 3D भूकंपीय सर्वेक्षणों के लिए भी आंशिक वित्तपोषण कर सकती है। इस सहायता का मुख्य उद्देश्य एक्स्प्लोरिंग के रिस्क को कम करना और ऐसी वैश्विक कंपनियों को आकर्षित करना है, जिनके पास डीपवॉटर की विशेषज्ञता और उन्नत तकनीकें मौजूद हैं।


    इतनी अधिक लागत क्यों?

    उच्च लागत और भारत में खोज की मामूली सफलता दर लंबे समय से विदेशी कंपनियों को दूर रखती रही है। भूवैज्ञानिक जटिलताओं के आधार पर एक सिंगल डीपवॉटर कुएं की ड्रिलिंग में 1,000 से 1,200 करोड़ रुपये तक खर्च आ सकता है, जबकि अल्ट्रा-डीपवॉटर कुएं की लागत इससे कुछ सौ करोड़ अधिक होती है।


    किन कंपनियों को मिलेगा लाभ?

    ये प्रोत्साहन सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों की कंपनियों के लिए उपलब्ध होंगे। ओएनजीसी ने शनिवार को ‘समुद्र मंथन’ कार्यक्रम के तहत अपना पहला डीपवॉटर खोजी कुआं खोदना शुरू कर दिया है, जो इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।


    विदेशी कंपनियां क्यों नहीं आ पाईं?

    भारत मौजूदा व्यवस्था में, कंपनियों को ब्लॉक मिलने के बाद न्यूनतम कार्य कार्यक्रम पूरा करना होता है, जिसमें भूकंपीय सर्वेक्षण और खोजी कुएं शामिल होते हैं। अगर भूकंपीय आंकड़े कमर्शियल एक्सप्लोरेशन की कम संभावना दिखाते हैं, तो कंपनियां अक्सर ड्रिलिंग नहीं करना चुनती हैं। कई बार वे जोखिम भरे कुएं में सैकड़ों करोड़ निवेश करने के बजाय ब्लॉक वापस कर देती हैं, क्योंकि नियमों का पालन न करने पर दंड का प्रावधान भी है।


    जोखिम कम करने की कोशिश

    यह प्रोत्साहन योजना पुरानी व्यवस्था से बड़ा बदलाव है, क्योंकि इसमें सरकार सीधे तौर पर खोज के जोखिम को कम करने में मदद करेगी। इसके अलावा, सरकार अन्वेषणकर्ताओं के लिए उपलब्ध भूवैज्ञानिक डेटा की गुणवत्ता में भी सुधार कर रही है। इसके लिए ऑफशोर 2D भूकंपीय डेटा अधिग्रहण में भारी निवेश किया गया है और अब पुराने डेटासेट को उन्नत तकनीकों से दोबारा प्रोसेस करने के लिए निजी कंपनियों को लाने की योजना है।

  • कंगना ने राहुल गांधी पर किया तीखा हमला, कहा -‘खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे’ जैसा काम…

    कंगना ने राहुल गांधी पर किया तीखा हमला, कहा -‘खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे’ जैसा काम…


    नई दिल्ली।
    बीजेपी सांसद कंगना रनौत (BJP MP Kangana Ranaut) सोमवार को मॉनसून सत्र (Monsoon Session) में शामिल होने के लिए लोकसभा (Lok Sabha) पहुंचीं। इस दौरान कंगना ने यूपीए सरकार के दौरान एजुकेशन पर किए गए खर्च और पेपर लीक से जुड़ा परीक्षा संशोधन बिल पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने दुनिया के लिए एक बहुत बड़ा उदाहरण पेश किया है।

    कंगना ने कहा ‘हमारे प्रधानमंत्री जी ने ये पूरी दुनिया के लिए बहुत बड़ा उदाहरण पेश किया है। ऐसे नेता जो इतने समर्पित हैं हर छोटे से लेकर बड़े मुद्दे के लिए वे जिस तरह से देशवासियों के लिए समर्पित हैं ये पूरे विश्व के लिए प्रेरणा है। आपने देखा उन्होंने जिस तरह से कमेटी गठित की है और हाई पावर पैक्ट बनाया है जो कि परीक्षाओं के लिए काम करेगा और इसको भ्रष्टाचार मुक्त बनाएगा। चाहे परीक्षा का यह संशोधन बिल अचानक आया हो लेकिन ये प्रधानंत्री की प्रतिबद्धता है।’

    उन्होंने आगे कहा ‘राहुल गांधी जी देख रहे हैं कि यूपीए के समय में क्या होता था शिक्षा का एकदम नाम मात्र बजट होता था। तो यह कहते हैं न खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे तो ये खंभा नोचने जैसा काम है।’


    परीक्षा से जुड़ा कड़े कानून वाला विधेयक पेश

    आपको बता दें कि पेपर लीक पर कड़े प्रावधान वाला परीक्षा संशोधन विधेयक लोकसभा में पेश कर दिया गया है। संशोधित विधेयक का नाम ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा कार्मिक राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने इसे पेश किया है। विधेयक में दोषियों के लिए 10 साल तक के जेल, 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने, संपत्ति जब्ती जैसे कड़े प्रावधान हैं।


    टास्क फोर्स का भी गठन

    प्रधानमंत्री मोदी ने परीक्षा सुधारों के लिए दिग्गज टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट नंदन नीलेकणि के नेतृत्व में एक हाई पावर टास्क फोर्स के गठन का एलान किया है। पीएम ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो में कहा ‘विद्यार्थियों के भविष्य के लिए भारत सरकार लगातार कई कदम उठा रही है. जिन लोगों ने विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया, वो जेलों में सड़ रहे हैं। हम फास्ट ट्रैक कोर्ट बना चुके हैं। हम नया कानून बनाने की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं।’


    पीएम ने खुद दी जानकारी

    पीएम ने आगे कहा ‘हमारी परीक्षा पद्धति भरोसेमंद, पारदर्शी हो और सबसे ज्यादा टेक्नोलॉजी का इ्स्तेमाल हो, इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए, हमने विश्व प्रसिद्ध टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट नंदन नीलेकणि के नेतृत्व में एक हाई-पावर टास्क फोर्स गठित करने का फैसला लिया है। ये टास्क फोर्स परीक्षा सुधारों पर ध्यान देगी और इसकी रिपोर्ट के आधार पर आगामी परीक्षाओं की विश्वसनीयता जल्द से जल्द तय की जाएगी।’

  • FCNR योजना के उत्साहजनक नतीजे…. भारत आ सकते हैं 7 लाख करोड़ रुपये

    FCNR योजना के उत्साहजनक नतीजे…. भारत आ सकते हैं 7 लाख करोड़ रुपये


    नई दिल्ली।
    आरबीआई (RBI) की ओर से विदेशी मुद्रा (Foreign Currency) जुटाने के लिए शुरू की गई एफसीएनआर (बी) योजना (FCNR (B) Scheme) के सकारात्मक नतीजे सामने आए हैं। एसबीआई रिसर्च (SBI Research) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इस योजना के जरिए भारत में कुल 80 से 85 अरब डॉलर (लगभग 7.1 लाख करोड़ रुपये) की विदेशी मुद्रा आ सकती है।


    आखिर 45 दिनों में कैसे टूटा 13 साल पुराना रिकॉर्ड?

    रिपोर्ट में बताया गया है कि योजना के जरिए बैंकों ने महज 45 दिनों में ही इतना फंड जुटा लिया है, जिसने वर्ष 2013 में तीन महीने के दौरान जुटाए गए कुल फंड के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। यह योजना 30 सितंबर तक खुली रहेगी। एसबीआई रिसर्च ने एफसीएनआर (बी) योजना के अपने पुराने अनुमान (40-45 अरब डॉलर) को संशोधित कर बढ़ा दिया है।


    योजना के अंत तक कितना निवेश आने की उम्मीद है?

    रिपोर्ट में कहा गया है कि केवल एफसीएनआर जमा के जरिए ही योजना के अंत तक 65 से 70 अरब डॉलर आने की उम्मीद है। इसके अलावा, अगस्त और सितंबर 2026 में परिपक्व होने वाले पुराने डिपॉजिट का एक बड़ा हिस्सा भी ऊंची ब्याज दरों के आकर्षण में इसी योजना में दोबारा निवेश हो जाएगा।


    अब तक किस माध्यम से कितना निवेश आया है?

    17 जुलाई तक के आंकड़ों के मुताबिक, अब तक आए कुल निवेश में मुख्य योगदान सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का रहा। इसमें बाहरी वाणिज्यिक कर्ज (ईसीबी) से 1.34 अरब डॉलर और विदेशी मुद्रा में कर्ज से 1.97 अरब डॉलर की राशि शामिल है।

    आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि विदेशी मुद्रा को आकर्षित करने के लिए जून में घोषित योजनाओं के तहत अब तक 32 अरब डॉलर की राशि भारत आ चुकी है। टैक्स नियमों में रियायत मिलने के बाद डेट सिक्योरिटीज में विदेशी निवेशकों ने करीब 7 अरब डॉलर का निवेश किया है।

  • बिहार-असम में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज केस होंगे वापस, सरकार से वार्ता के बाद CJP का बड़ा अपडेट

    बिहार-असम में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज केस होंगे वापस, सरकार से वार्ता के बाद CJP का बड़ा अपडेट


    नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सरकार के साथ हुई बातचीत के बाद बताया कि बिहार और असम समेत विभिन्न राज्यों में आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लिया जाएगा। पार्टी के प्रवक्ता सौरभ दास ने देर रात सोशल मीडिया पर यह जानकारी साझा करते हुए कहा कि सरकार की ओर से इस संबंध में सकारात्मक आश्वासन मिला है।

    सौरभ दास ने बताया कि पूरे मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे दिल्ली पुलिस के प्रतिनिधि उनसे मिलने पहुंचे। करीब डेढ़ से दो घंटे तक चली बैठक में सरकार की ओर से किए गए वादों के क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा हुई।

    उन्होंने कहा कि पुलिस प्रतिनिधि अपने साथ बिहार सरकार के गृह विभाग की एक प्रेस विज्ञप्ति भी लाए थे, जिसमें स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर वापस ली जाएंगी और भविष्य में भी उनके विरुद्ध कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।

    सौरभ दास के मुताबिक बैठक में उन अन्य राज्यों पर भी चर्चा हुई, जहां प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि जिन राज्यों को लेकर चिंता जताई गई है, वहां भी जल्द इसी तरह की अधिसूचनाएं जारी की जाएंगी। यदि किसी राज्य में मामलों की वापसी नहीं होती है, तो पार्टी संबंधित सरकार से सीधे संपर्क कर समाधान सुनिश्चित करेगी। शेष राज्यों की सूची भी सरकार को उपलब्ध कराई जाएगी।

    उन्होंने कहा कि आंदोलन की शुरुआत से ही पार्टी हर प्रदर्शनकारी के साथ मजबूती से खड़ी रही है और आगे भी किसी को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा। इस दौरान उन्होंने रत्ना, आशु, अभिजीत और वैष्णवी समेत टीम के अन्य सदस्यों के योगदान का भी उल्लेख किया।

    वहीं, रत्ना सिंह ने कानूनी सहायता को लेकर जानकारी देते हुए बताया कि विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शनकारियों की मदद करने वाले वकीलों से लगातार संपर्क बनाए रखा गया है। फिलहाल औपचारिक लीगल टीम का गठन नहीं हुआ है, लेकिन इसे जल्द अंतिम रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पार्टी ने यह सुनिश्चित किया है कि वकीलों के प्रयास व्यर्थ न जाएं और इस संबंध में लिखित आश्वासन भी प्राप्त हो चुका है।