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  • ममता बनर्जी के सामने एक साथ तीन बड़े संकट, अब सुप्रीम कोर्ट से लगाई आस

    ममता बनर्जी के सामने एक साथ तीन बड़े संकट, अब सुप्रीम कोर्ट से लगाई आस


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहा विवाद शुक्रवार को कई नए मोड़ से गुजरा। चुनाव आयोग ने ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फूल-घास’ वाले पारंपरिक चुनाव चिह्न को फिलहाल फ्रीज कर दोनों गुटों को नए नाम और प्रतीक आवंटित किए। इसके कुछ ही समय बाद नंदीग्राम उपचुनाव में ममता बनर्जी गुट की प्रत्याशी संचिता प्रधान डे ने नामांकन वापस ले लिया। ममता ने इसके बाद कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को समर्थन देने का ऐलान किया, लेकिन कुछ घंटे बाद ही पुलिस ने मिलन प्रधान को एक पुराने हत्या मामले में गिरफ्तार कर लिया।

    घटनाक्रम के बीच ममता बनर्जी गुट ने चुनाव आयोग के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। पार्टी नाम और चुनाव चिह्न से जुड़े मामले के अलावा 10 बागी विधायकों की अयोग्यता पर विधानसभा अध्यक्ष की ओर से निर्णय में देरी को लेकर भी अलग याचिका दायर की गई है। रिपोर्टों के मुताबिक पहली याचिका में आयोग के अंतरिम आदेश को चुनौती दी गई है, जबकि दूसरी में अयोग्यता की प्रक्रिया लंबित रहने के दौरान पार्टी के नाम और प्रतीक को लेकर किए गए इंतजाम पर सवाल उठाया गया है। इन मामलों पर 21 सितंबर को सुनवाई संभावित बताई जा रही है।

    ममता गुट को मिला नया नाम और चुनाव चिह्न

    चुनाव आयोग के अंतरिम इंतजाम के तहत ममता बनर्जी के गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न दिया गया है। वहीं प्रतिद्वंद्वी गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है। मूल ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फूल-घास’ वाला प्रतीक फिलहाल दोनों गुटों के इस्तेमाल के लिए रोक दिया गया है। यह व्यवस्था अक्टूबर में होने वाले उपचुनावों के मद्देनजर अंतरिम तौर पर की गई है।

    ममता गुट ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग ने पार्टी के बहुसंख्यक कैडर और मूल संगठनात्मक ढांचे को पर्याप्त महत्व दिए बिना बागी गुट के दावों को प्राथमिकता दी। गुट का कहना है कि पार्टी के नाम और पारंपरिक चिह्न पर अंतिम फैसला करने से पहले विधायकों की सदस्यता से जुड़े विवाद का निपटारा होना चाहिए।

    10 बागी विधायकों की सदस्यता पर भी विवाद

    ममता गुट के वरिष्ठ नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी समेत 10 बागी विधायकों को दल-बदल कानून के तहत अयोग्य ठहराने की मांग की है। इस मामले में विधानसभा सचिवालय की ओर से संबंधित विधायकों को नोटिस जारी कर एक सप्ताह में जवाब मांगा गया है।

    सूची में ऋतब्रत बनर्जी के अलावा अरूप राय, फिरहाद हकीम, संदीपन साहा, अखरुज्जमान अंसारी, शिउली साहा, सबीना यास्मिन, बिप्लब मित्रा, जावेद खान और रथिन घोष शामिल हैं।

    विवाद केवल विधायकों की सदस्यता तक सीमित नहीं है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद को लेकर भी दोनों खेमों के बीच कानूनी लड़ाई चल रही है। ममता गुट ने शोभनदेव चट्टोपाध्याय को इस पद के लिए अपना उम्मीदवार बनाया था, जबकि विधानसभा अध्यक्ष ने ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता दी। ममता गुट ने इस फैसले को कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। अगस्त में हाईकोर्ट ने तत्काल राहत देने से इनकार करते हुए ऋतब्रत को फिलहाल सीमित अवधि के लिए पद पर बने रहने की अनुमति दी थी।

    एक दिन में बदली नंदीग्राम की तस्वीर

    6 अक्टूबर को प्रस्तावित नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव में शुक्रवार को घटनाक्रम तेजी से बदला। ममता गुट की प्रत्याशी संचिता प्रधान डे ने अचानक अपना नामांकन वापस ले लिया। इससे पहले वह अपने पति सत्यजीत के साथ राज्य सचिवालय नबन्ना पहुंचीं और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की थी। नामांकन वापस लेने की वजह तत्काल स्पष्ट नहीं हो सकी। ममता बनर्जी ने बाद में कहा कि उनकी प्रत्याशी पर दबाव बनाया गया था।

    इसके बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को समर्थन देने की घोषणा की। उन्होंने कांग्रेस को ‘सिस्टर पार्टी’ बताते हुए इसे INDIA ब्लॉक को मजबूत करने की दिशा में कदम बताया। हालांकि कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि उनकी पार्टी ने TMC से समर्थन नहीं मांगा था।

    समर्थन के कुछ घंटे बाद मिलन प्रधान गिरफ्तार

    ममता के समर्थन की घोषणा के कुछ ही घंटे बाद कांग्रेस के नंदीग्राम प्रत्याशी मिलन प्रधान को पश्चिम बंगाल पुलिस ने एक पुराने हत्या मामले में गिरफ्तार कर लिया। रिपोर्टों के अनुसार मामला 2007 के नंदीग्राम भूमि आंदोलन से जुड़ा है और उनके खिलाफ पहले से गिरफ्तारी वारंट लंबित था। उन्हें अदालत में पेश किए जाने की बात कही गई है।

    गिरफ्तारी के समय को लेकर कांग्रेस और ममता गुट ने सवाल उठाए। ममता बनर्जी ने कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध से जोड़ा, जबकि कांग्रेस नेताओं ने भी गिरफ्तारी की टाइमिंग पर आपत्ति जताई। दूसरी ओर, पुलिस और भाजपा की ओर से इसे कानून के तहत कार्रवाई बताया गया और राजनीतिक आरोपों को खारिज किया गया। इसलिए गिरफ्तारी के पीछे राजनीतिक मंशा होने का दावा फिलहाल संबंधित पक्षों के आरोप के रूप में ही सामने आया है।

    28 साल पुरानी पार्टी पहचान पर कानूनी लड़ाई

    ममता बनर्जी ने 1998 में कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस बनाई थी। ‘फूल-घास’ वाला पारंपरिक चुनाव चिह्न लंबे समय से पार्टी की पहचान रहा है। मौजूदा विवाद में पहली बार दोनों गुट इस नाम और प्रतीक पर अपना दावा कर रहे हैं। चुनाव आयोग ने फिलहाल दोनों को अलग-अलग नाम और चिह्न देकर उपचुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का अंतरिम इंतजाम किया है।

    नंदीग्राम और रेजीनगर में उपचुनाव 6 अक्टूबर को और मतगणना 9 अक्टूबर को प्रस्तावित है। ऐसे में ममता गुट के लिए एक ओर मूल पार्टी नाम और प्रतीक को लेकर कानूनी लड़ाई अहम है, वहीं दूसरी ओर बागी विधायकों की अयोग्यता का मामला भी इससे जुड़ा हुआ है।

    राहुल गांधी का भाजपा पर आरोप, भाजपा ने पलटवार किया

    कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान की गिरफ्तारी पर राहुल गांधी ने भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि गिरफ्तारी राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा है और भाजपा निष्पक्ष चुनाव में भरोसा नहीं करती। राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा विपक्षी दलों और चुनावी मुकाबले को कमजोर करने की कोशिश कर रही है।

    भाजपा ने इन आरोपों को विपक्ष की प्रतिक्रिया बताते हुए पलटवार किया। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस के राजनीतिक इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव आयोग स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है और पार्टी के नाम तथा चुनाव चिह्न से जुड़े विवाद में आयोग अपने नियमों के तहत निर्णय लेता है। इस पूरे घटनाक्रम में दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब निगाहें सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और नंदीग्राम उपचुनाव की आगे की प्रक्रिया पर हैं।

  • जेन-जी से मोहन भागवत का संवाद- अहंकार देता है सब कुछ अपने नियंत्रण में होने का भ्रम, धर्म को समझने के लिए सोच बदलना जरूरी

    जेन-जी से मोहन भागवत का संवाद- अहंकार देता है सब कुछ अपने नियंत्रण में होने का भ्रम, धर्म को समझने के लिए सोच बदलना जरूरी


    नई दिल्ली। उज्जैन में आयोजित युवा धर्म संसद में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने युवाओं से धर्म संस्कृति और जीवन मूल्यों को लेकर संवाद किया। तीन दिवसीय युवा धर्म संसद के दूसरे दिन भागवत ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि धर्म को केवल बुढ़ापे से जोड़कर देखना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि गीता और रामायण को अक्सर लोग रिटायरमेंट के बाद पढ़ने वाली किताबों के तौर पर देखते हैं लेकिन धर्म व्यक्ति के जीवन की शुरुआत से अंत तक बना रहता है। उज्जैन में आयोजित इस कार्यक्रम में देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में युवा शामिल हुए।

    मोहन भागवत ने अपने संबोधन में अहंकार को लेकर भी युवाओं से बात की। उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति अहंकार में यह मानकर काम करता है कि सब कुछ उसके नियंत्रण में है और हर चीज उसकी इच्छा के अनुसार होनी चाहिए तो वह एक तरह के भ्रम में पड़ जाता है। उन्हें लगता है कि परिस्थितियां भी उनकी इच्छा के मुताबिक ही चलेंगी लेकिन ऐसा नहीं होता। भागवत ने प्रकृति के नियमों का उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ चीजें अपने निर्धारित नियमों के अनुसार चलती हैं। व्यक्ति उनके बारे में विश्वास करे या न करे लेकिन उनका होना और अपना काम करना जारी रहता है।

    उन्होंने युवाओं से कहा कि धर्म को समझने के लिए पहले से मन में बैठी धारणाओं पर भी विचार करना जरूरी है। भागवत ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य युवाओं के दिमाग को किसी खास विचार से भरना नहीं है। उन्होंने युवाओं से अपने स्तर पर सोचने और चर्चा करने की बात कही। उनके अनुसार धर्म को समझने की प्रक्रिया इतनी व्यापक है कि व्यक्ति पूरा जीवन इसके अर्थ को समझने में लगा सकता है।

    भागवत ने धर्म को केवल पूजा या किसी एक धार्मिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं बताया। उन्होंने कहा कि धर्म का संबंध व्यक्ति के आचरण और कर्तव्य से भी है। जिस तरह पानी का स्वभाव बहना है और आग का स्वभाव जलना है उसी तरह व्यक्ति और समाज के लिए भी उनके स्वभाव और जिम्मेदारी के अनुरूप कर्तव्य निर्धारित होते हैं। उन्होंने कहा कि धर्म का एक अर्थ कर्तव्य भी है। पुत्र का अपना कर्तव्य है तो राजा का अपना कर्तव्य होता है।

    उन्होंने महाभारत और भगवद्गीता का उल्लेख करते हुए कहा कि महाभारत के माध्यम से धर्म को समझने के कई प्रसंग सामने आते हैं। उनके अनुसार युधिष्ठिर ने अपने जीवन में धर्म को समझने और उसका पालन करने का प्रयास किया। भागवत ने युवाओं से कहा कि सुख और इच्छाओं की पूर्ति के लिए भी धर्म के रास्ते को छोड़ना उचित नहीं है। उन्होंने डर लालच या किसी अन्य दबाव में धर्म से विचलित नहीं होने की बात कही।

    युवा धर्म संसद का आयोजन उज्जैन में 17 से 19 सितंबर तक किया जा रहा है। आयोजकों के अनुसार इसमें 24 राज्यों से 1500 से अधिक युवा शामिल हो रहे हैं। कार्यक्रम में धर्म संस्कृति शिक्षा तकनीक परिवार मानवीय मूल्य और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका जैसे विषयों पर संवाद हो रहा है। 19 सितंबर को होने वाले समापन कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के शामिल होने की जानकारी दी गई है।

  • इंजीनियरिंग करने वालों के लिए सरकारी नौकरी का मौका: UPSC ESE में 480 पदों पर भर्ती आवेदन की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर

    इंजीनियरिंग करने वालों के लिए सरकारी नौकरी का मौका: UPSC ESE में 480 पदों पर भर्ती आवेदन की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर


    नई दिल्ली। सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे इंजीनियरिंग डिग्री धारक युवाओं के लिए महत्वपूर्ण खबर है। संघ लोक सेवा आयोग यानी UPSC ने इंजीनियरिंग सर्विस परीक्षा 2027 के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है। आयोग की ओर से जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक इस भर्ती अभियान के जरिए कुल 480 पदों पर उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा। इन पदों के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इच्छुक अभ्यर्थी निर्धारित समय सीमा के भीतर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर 2026 शाम 6 बजे तक तय की गई है।

    UPSC ESE 2027 भर्ती के तहत इंजीनियरिंग की अलग अलग शाखाओं से जुड़े पद शामिल किए गए हैं। इनमें सिविल इंजीनियरिंग श्रेणी प्रथम के पद शामिल हैं। इसके अलावा मैकेनिकल इंजीनियरिंग श्रेणी द्वितीय इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग श्रेणी तृतीय और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग श्रेणी चतुर्थ के पदों पर भी उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा। ऐसे में संबंधित इंजीनियरिंग शाखा से पढ़ाई कर चुके अभ्यर्थियों के लिए यह भर्ती सरकारी सेवा में जाने का अवसर प्रदान करती है।

    आवेदन करने के लिए उम्मीदवार के पास मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान से संबंधित इंजीनियरिंग विषय में निर्धारित डिग्री या डिप्लोमा होना जरूरी है। अभ्यर्थियों की आयु सीमा भी आयोग ने निर्धारित की है। उम्मीदवार की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष और अधिकतम उम्र 30 वर्ष होनी चाहिए। आयु की गणना 1 जनवरी 2027 के आधार पर की जाएगी। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट का लाभ दिया जाएगा।

    इस भर्ती में उम्मीदवारों का चयन कई चरणों में होगा। सबसे पहले लिखित प्रारंभिक परीक्षा आयोजित की जाएगी। प्रारंभिक परीक्षा में सफल होने वाले उम्मीदवारों को मुख्य लिखित परीक्षा में शामिल होने का अवसर मिलेगा। इसके बाद व्यक्तित्व परीक्षण या इंटरव्यू आयोजित किया जाएगा। चयन प्रक्रिया के आगे के चरण में मेडिकल जांच और निर्धारित शारीरिक मानकों को भी पूरा करना होगा। सभी चरणों में निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले अभ्यर्थियों को संबंधित पदों पर नियुक्ति दी जाएगी।

    UPSC के कार्यक्रम के अनुसार इंजीनियरिंग सर्विस परीक्षा 2027 की प्रारंभिक परीक्षा 31 जनवरी 2027 को आयोजित होने की संभावना है। वहीं मुख्य परीक्षा 18 जून 2027 को होने की संभावित तारीख तय की गई है। हालांकि उम्मीदवारों को परीक्षा से संबंधित अंतिम कार्यक्रम और अन्य जरूरी बदलावों के लिए आयोग की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी को देखते रहना चाहिए।

    आवेदन प्रक्रिया के दौरान उम्मीदवारों को निर्धारित शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से करना होगा। सामान्य ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के उम्मीदवारों के लिए आवेदन शुल्क 200 रुपये निर्धारित किया गया है। वहीं एससी एसटी पीडब्ल्यूबीडी और महिला उम्मीदवारों को आवेदन शुल्क में छूट दी गई है।

    इच्छुक अभ्यर्थियों को आवेदन करने से पहले अपनी शैक्षणिक योग्यता आयु सीमा और अन्य पात्रता शर्तों को ध्यान से जांच लेना चाहिए। आवेदन में किसी तरह की गलती से बचने के लिए सभी जरूरी दस्तावेज और जानकारी पहले से तैयार रखना उपयोगी रहेगा। भर्ती से जुड़ी विस्तृत शर्तों परीक्षा पैटर्न और अन्य नियमों की जानकारी के लिए उम्मीदवारों को UPSC की ओर से जारी आधिकारिक नोटिफिकेशन जरूर पढ़ना चाहिए।

  • ग्रहों के जन्म पर नई पहेली: इतना युवा और इतना विशाल ग्रह इतनी दूर कैसे बना? वैज्ञानिक भी हैरान

    ग्रहों के जन्म पर नई पहेली: इतना युवा और इतना विशाल ग्रह इतनी दूर कैसे बना? वैज्ञानिक भी हैरान


    नई दिल्ली। खगोल विज्ञान की दुनिया में वैज्ञानिकों को एक ऐसी खोज मिली है जिसने ग्रहों के निर्माण को लेकर मौजूदा समझ के सामने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। वैज्ञानिकों ने एलियास 2-24 बी नाम के एक बेहद युवा ग्रह की पुष्टि की है। इसकी उम्र 10 लाख साल से भी कम मानी जा रही है। खास बात यह है कि यह ग्रह आकार में करीब बृहस्पति जितना विशाल है और अपने तारे से पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी से करीब 55 गुना ज्यादा दूर स्थित है। इतनी कम उम्र में इतनी दूर एक विशाल गैसीय ग्रह का मौजूद होना वैज्ञानिकों के लिए किसी पहेली से कम नहीं है।

    एलियास 2-24 बी जिस तारे की परिक्रमा कर रहा है वह खुद भी बेहद युवा है। उसके चारों तरफ गैस धूल बर्फ और चट्टानी पदार्थ से बनी एक विशाल डिस्क मौजूद है। आमतौर पर माना जाता है कि ग्रहों का निर्माण इसी तरह की डिस्क से होता है। समय के साथ इसमें मौजूद छोटे कण और चट्टानी टुकड़े आपस में जुड़ते हैं। धीरे धीरे बड़े पिंड बनते हैं और फिर वे अपने आसपास मौजूद पदार्थ को खींचकर ग्रह का आकार लेना शुरू करते हैं। लेकिन एलियास 2-24 बी की उम्र को देखते हुए इसकी मौजूदगी इस प्रक्रिया को लेकर वैज्ञानिकों के लिए कई नए सवाल खड़े कर रही है।

    इस ग्रह का सुराग पहली बार तब मिला जब चिली में मौजूद एएलएमए वेधशाला ने एलियास 2-24 के आसपास मौजूद धूल और गैस की डिस्क में एक बड़ा गैप देखा। इसके बाद यूरोपीय दक्षिणी वेधशाला के वेरी लार्ज टेलीस्कोप ने इसी क्षेत्र में बेहद कमजोर रोशनी का एक बिंदु दर्ज किया। हालांकि उस समय यह तय नहीं हो पाया था कि वह वास्तव में ग्रह है या फिर दूर मौजूद किसी दूसरे तारे की रोशनी। इस रहस्य को सुलझाने में वैज्ञानिकों को कई साल लग गए।

    शोधकर्ताओं ने बाद में पुराने आंकड़ों की भी जांच की। नासा की ओर से वित्तपोषित केक वेधशाला के 2018 और 2020 के अवलोकनों में इसी वस्तु को दर्ज किया गया था। दोनों समय उसकी स्थिति की तुलना करने पर पता चला कि वह एलियास 2-24 के साथ ही गति कर रही थी। इससे इस बात की पुष्टि करने में मदद मिली कि यह कोई दूर का पृष्ठभूमि तारा नहीं बल्कि एलियास 2-24 की परिक्रमा करने वाला ग्रह है।

    अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि एलियास 2-24 बी इतनी जल्दी बना कैसे। वैज्ञानिक मॉडलों के मुताबिक बृहस्पति जैसे विशाल ग्रह को बनने में लाखों साल लग सकते हैं। सूर्य से बृहस्पति जितनी दूरी के आसपास किसी विशाल ग्रह के बनने में करीब 50 लाख साल लगने का अनुमान लगाया जाता है। वहीं एलियास 2-24 बी इससे भी करीब 10 गुना ज्यादा दूर है और उसकी उम्र 10 लाख साल से कम है। यही अंतर मौजूदा ग्रह निर्माण मॉडल के सामने चुनौती पेश करता है।

    यह खोज इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नवजात ग्रह आमतौर पर अपने जन्मस्थान की गैस और धूल के बीच छिपे रहते हैं। ऊपर से उनके युवा तारे की तेज रोशनी उनकी कमजोर चमक को दबा देती है। ऐसे में किसी ग्रह को उसके जन्म के इतने शुरुआती चरण में देख पाना बेहद दुर्लभ मौका माना जा रहा है।

    वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि एलियास 2-24 बी का अध्ययन यह समझने में मदद करेगा कि गैस और धूल से विशाल ग्रह कितनी तेजी से बन सकते हैं। भविष्य में नासा का नैंसी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप ऐसे और युवा ग्रहों की खोज में मदद कर सकता है। इस तरह एलियास 2-24 बी सिर्फ एक नया ग्रह नहीं बल्कि ग्रहों के जन्म की प्रक्रिया को समझने के लिए एक अहम प्राकृतिक प्रयोगशाला बन सकता है।

  • टेस्ट में सभी निकले नेगेटिव फिर भी हुई कार्रवाई: दो घंटे की समयसीमा चूके तो 8 क्रू पर गिरी गाज

    टेस्ट में सभी निकले नेगेटिव फिर भी हुई कार्रवाई: दो घंटे की समयसीमा चूके तो 8 क्रू पर गिरी गाज


    नई दिल्ली। एअर इंडिया एक्सप्रेस की एक इंटरनेशनल फ्लाइट के क्रू मेंबर को पोस्ट फ्लाइट ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट में हुई महज 35 मिनट की देरी भारी पड़ गई। एयरलाइन ने दुबई से अमृतसर पहुंची फ्लाइट के चार पायलट और चार केबिन क्रू मेंबर समेत कुल आठ कर्मचारियों को तीन महीने के लिए सस्पेंड कर दिया है। खास बात यह है कि सभी आठ क्रू मेंबर की जांच रिपोर्ट नेगेटिव आई थी। इसके बावजूद तय समयसीमा का पालन नहीं होने के कारण एयरलाइन ने नियमों के तहत कड़ी कार्रवाई की।

    मामला 2 अगस्त 2026 का बताया जा रहा है। एअर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट AX-192 दुबई से उड़ान भरकर सुबह करीब 9 बजकर 50 मिनट पर अमृतसर के श्री गुरु राम दास जी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंची थी। अंतरराष्ट्रीय उड़ान के बाद क्रू मेंबर के लिए पोस्ट फ्लाइट अल्कोहल टेस्ट की प्रक्रिया अनिवार्य होती है। नियम के मुताबिक भारत में विमान के लैंड करने के दो घंटे के भीतर यह प्रक्रिया पूरी करनी होती है। लेकिन इस फ्लाइट के आठ क्रू मेंबर तय समयसीमा में टेस्ट के लिए नहीं पहुंच सके। उन्होंने लैंडिंग के करीब दो घंटे 35 मिनट बाद जरूरी प्रक्रिया पूरी की। यानी निर्धारित समय से 35 मिनट की देरी हुई।

    रिपोर्ट के मुताबिक फ्लाइट के अमृतसर पहुंचने के बाद एक क्रू मेंबर की तबीयत खराब हो गई थी। इसके बाद क्रू ने पोस्ट अराइवल से जुड़ी जरूरी औपचारिकताएं पूरी कीं और अपने निर्धारित होटल चले गए। बाद में सभी सदस्य टेस्ट कराने के लिए एयरपोर्ट लौटे। जब तक वे एयरपोर्ट पहुंचे तब तक विमान के लैंड करने के दो घंटे 35 मिनट हो चुके थे। इसी वजह से अनिवार्य टेस्ट की निर्धारित समयसीमा का पालन नहीं हो सका।

    देरी के बाद एयरलाइन ने सभी आठ क्रू मेंबर का जरूरी टेस्ट कराया। जांच में सभी की रिपोर्ट नेगेटिव आई। इसका मतलब था कि जांच में किसी भी सदस्य के शराब के सेवन की पुष्टि नहीं हुई। इसके बावजूद नियमों के तहत निर्धारित समय के भीतर प्रक्रिया पूरी नहीं करने को गंभीर प्रक्रियात्मक उल्लंघन माना गया। एयर इंडिया एक्सप्रेस ने इस मामले की जानकारी नागरिक उड्डयन महानिदेशालय यानी DGCA को भी दी। इसके बाद सभी आठ क्रू मेंबर को ड्यूटी से हटा दिया गया और तीन महीने के निलंबन की कार्रवाई की गई।

    इस मामले ने विमानन क्षेत्र में सुरक्षा से जुड़ी प्रक्रियाओं के महत्व को फिर सामने ला दिया है। खासकर हाल के दिनों में फ्लाइट क्रू की साइकोएक्टिव पदार्थों से जुड़ी जांच को लेकर निगरानी बढ़ी है। एअर इंडिया की फुकेट से दिल्ली आने वाली एक फ्लाइट में उड़ान के दौरान करीब 300 फीट की अचानक ऊंचाई कम होने की घटना के बाद क्रू टेस्टिंग को लेकर भी चर्चा तेज हुई थी। इसके बाद एअर इंडिया ने अपने पूरे ग्रुप के पायलटों के लिए साइकोएक्टिव सब्सटेंस स्क्रीनिंग को अनिवार्य करने का ऐलान किया था। इसमें एअर इंडिया एक्सप्रेस भी शामिल है।

    इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि विमानन सुरक्षा व्यवस्था में केवल टेस्ट का नतीजा ही महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि तय प्रक्रिया और समयसीमा का पालन भी उतना ही जरूरी माना जाता है। दुबई-अमृतसर फ्लाइट के मामले में सभी आठ क्रू मेंबर टेस्ट में नेगेटिव पाए गए लेकिन निर्धारित दो घंटे की समयसीमा से 35 मिनट की देरी के कारण उन्हें तीन महीने का निलंबन झेलना पड़ा।

  • लालबागचा राजा के दर्शन करने पहुंचे अनंत अंबानी, लाल कुर्ते में दिखे और गणपति बप्पा का लिया आशीर्वाद

    लालबागचा राजा के दर्शन करने पहुंचे अनंत अंबानी, लाल कुर्ते में दिखे और गणपति बप्पा का लिया आशीर्वाद

    नई दिल्ली । गणपति विसर्जन के बाद अनंत अंबानी एक बार फिर भगवान गणेश के दर्शन के लिए पहुंचे। अनंत अंबानी मुंबई के प्रसिद्ध लालबागचा राजा के दरबार में पहुंचे और बप्पा के सामने शीश झुकाकर आशीर्वाद लिया। इस दौरान उनकी तस्वीरें और वीडियो सामने आए, जिनमें वह कड़ी सुरक्षा के बीच गणपति पंडाल की ओर जाते दिखाई दे रहे हैं।

    अनंत अंबानी अपने काफिले के साथ लालबागचा राजा के दर्शन करने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने लाल रंग का कुर्ता पहना हुआ था। पंडाल में पहुंचने के बाद उन्होंने भगवान गणेश के चरणों में सिर झुकाया और आशीर्वाद लिया। दर्शन के दौरान उनकी भक्ति का अंदाज कैमरे में कैद हुआ। इसके बाद उनकी झलकियां सोशल मीडिया पर सामने आईं और लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गईं।

    अनंत अंबानी की भगवान गणेश के प्रति आस्था पहले भी कई मौकों पर देखने को मिली है। गणेश उत्सव के दौरान अंबानी परिवार हर साल धार्मिक आयोजनों में हिस्सा लेता है। इस वर्ष भी अनंत अंबानी ने पत्नी राधिका मर्चेंट और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ गणपति उत्सव में हिस्सा लिया था। परिवार ने घर पर गणपति बप्पा का स्वागत किया और पूजा-अर्चना के साथ उत्सव मनाया।

    गणपति उत्सव के बाद परिवार के सदस्यों ने बप्पा का विसर्जन भी किया था। इस दौरान परिवार के लोग उत्साह के साथ गणपति विसर्जन के लिए पहुंचे थे। अनंत अंबानी भी इस मौके पर नजर आए थे। विसर्जन के कुछ समय बाद उनका लालबागचा राजा के दर्शन के लिए पहुंचना सामने आया है।

    लालबागचा राजा मुंबई के प्रसिद्ध गणपति पंडालों में शामिल है और गणेश उत्सव के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। अनंत अंबानी का इस गणपति मंडल से जुड़ाव भी रहा है। वर्ष 2024 में उन्हें लालबागचा राजा सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल की ओर से बोर्ड का मानद सलाहकार सदस्य नियुक्त किए जाने की घोषणा की गई थी।

    इसके बाद से अनंत अंबानी लालबागचा राजा के दर्शन के लिए नियमित रूप से पहुंचते रहे हैं। पिछले वर्ष भी उन्होंने यहां पहुंचकर भगवान गणेश का आशीर्वाद लिया था। अंबानी परिवार के अन्य सदस्य भी अलग-अलग मौकों पर लालबागचा राजा के दर्शन करते रहे हैं।

    इस बार भी अनंत अंबानी के दर्शन से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद उनकी धार्मिक आस्था को लेकर सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। वीडियो में वह सुरक्षा घेरे के बीच पंडाल में प्रवेश करते और भगवान गणेश के सामने श्रद्धा से सिर झुकाते दिखाई दे रहे हैं।

    अनंत अंबानी के लिए गणेश उत्सव केवल पारिवारिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा है। वह अलग-अलग मौकों पर भगवान गणेश के दर्शन और पूजा में शामिल होते रहे हैं। लालबागचा राजा के दर्शन के दौरान सामने आई उनकी ताजा झलकियों में भी यही धार्मिक जुड़ाव दिखाई दिया। गणपति विसर्जन के बाद उनका बप्पा के दरबार में पहुंचना इस साल के गणेश उत्सव से जुड़ी उनकी गतिविधियों में एक और प्रमुख अवसर रहा।

  • पीएम मोदी के 76वें जन्मदिन पर काशी में विशेष पूजा, राजनाथ सिंह और योगी ने शुरू की सेवा संकल्प बाइक यात्रा

    पीएम मोदी के 76वें जन्मदिन पर काशी में विशेष पूजा, राजनाथ सिंह और योगी ने शुरू की सेवा संकल्प बाइक यात्रा

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन के अवसर पर वाराणसी में विशेष धार्मिक और सेवा कार्यक्रम आयोजित किए गए। काशी विश्वनाथ धाम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान समेत कई प्रमुख नेताओं ने पूजा-अर्चना की। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दीर्घायु और मंगलकामना के लिए विशेष अनुष्ठान किए गए।

    काशी विश्वनाथ मंदिर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा की गई। 11 हवन कुंडों पर आहुतियां दी गईं और बाबा विश्वनाथ का महारुद्राभिषेक किया गया। नेताओं ने मंदिर में विधि-विधान से पूजन कर प्रधानमंत्री के लिए मंगलकामना की। वाराणसी में प्रधानमंत्री के जन्मदिन से जुड़े कार्यक्रमों में धार्मिक आयोजन के साथ सेवा और जनसंपर्क से जुड़े कार्यक्रम भी शामिल किए गए हैं।

    जन्मदिन के अवसर पर वाराणसी से वडनगर तक सेवा संकल्प बाइक यात्रा भी शुरू की गई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यात्रा को हरी झंडी दिखाई। इस यात्रा का उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्ष के सार्वजनिक जीवन से जुड़े कार्यक्रमों के तहत सेवा और जनसंपर्क गतिविधियों को आगे बढ़ाना है। यात्रा में बड़ी संख्या में युवा और बाइक सवार शामिल हुए हैं।

    वाराणसी और वडनगर को इस आयोजन में विशेष रूप से जोड़ा गया है। वडनगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मस्थान है, जबकि वाराणसी उनका संसदीय क्षेत्र है। इसी वजह से दोनों स्थानों पर जन्मदिन से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। वडनगर से भी वाराणसी की दिशा में बाइक यात्रा रवाना की गई है। इस आयोजन के जरिए दोनों शहरों को सेवा संकल्प अभियान से जोड़ा गया है।

    प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन के मौके पर देश के अलग-अलग हिस्सों में भी विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। वाराणसी में धार्मिक अनुष्ठान और बाइक यात्रा के अलावा सेवा गतिविधियों पर जोर दिया गया। वहीं गुजरात के वडनगर में भी पूजा-अर्चना और अन्य कार्यक्रम हुए। इस दौरान प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने से जुड़े आयोजनों को भी अभियान का हिस्सा बनाया गया है।

    वाराणसी में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन से जुड़े कई प्रमुख नेता भी मौजूद रहे। राजनाथ सिंह, योगी आदित्यनाथ, चंद्रबाबू नायडू और चिराग पासवान की मौजूदगी में काशी विश्वनाथ धाम में पूजा हुई। कार्यक्रम में धार्मिक अनुष्ठान के साथ सेवा संकल्प यात्रा को भी जोड़ा गया। प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर आयोजित इन कार्यक्रमों के जरिए वाराणसी और वडनगर को एक साथ जोड़ा गया है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को गुजरात के वडनगर में हुआ था। इस वर्ष उनके 76वें जन्मदिन के साथ उनके सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने से जुड़े कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। जन्मदिन के मौके पर देशभर में सेवा, रक्तदान, धार्मिक अनुष्ठान और अन्य सामाजिक गतिविधियां आयोजित की गईं। वाराणसी का कार्यक्रम इन्हीं आयोजनों की कड़ी में प्रमुख रहा, जहां पूजा-अर्चना के बाद सेवा संकल्प बाइक यात्रा को आगे बढ़ाया गया।

  • पीएम मोदी के 76वें जन्मदिन पर तमिलनाडु CM सी. जोसेफ विजय ने दी शुभकामनाएं, मजबूत भारत बनाने के प्रयासों की सराहना

    पीएम मोदी के 76वें जन्मदिन पर तमिलनाडु CM सी. जोसेफ विजय ने दी शुभकामनाएं, मजबूत भारत बनाने के प्रयासों की सराहना

    नई दिल्ली ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन पर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने उन्हें शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री विजय के संदेश में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और मजबूत भारत के निर्माण के लिए किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख किया गया। विजय ने प्रधानमंत्री के अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र की कामना भी की।

    मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से साझा किए गए संदेश में विजय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मजबूत भारत के निर्माण के लिए समर्पण के साथ नेतृत्व कर रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री के स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की कामना की। विजय का यह संदेश 17 सितंबर को प्रधानमंत्री मोदी के 76वें जन्मदिन के अवसर पर सामने आया।

    मुख्यमंत्री विजय के संदेश में इस्तेमाल की गई भाषा को लेकर राजनीतिक चर्चा भी शुरू हुई है। इसकी वजह यह है कि विजय ने प्रधानमंत्री को केवल औपचारिक जन्मदिन की शुभकामना देने के बजाय उनके नेतृत्व और मजबूत भारत के निर्माण के प्रयासों का विशेष रूप से उल्लेख किया। संदेश में प्रधानमंत्री के प्रति सम्मान और सकारात्मक भाषा दिखाई दी।

    सी. जोसेफ विजय तमिलनाडु के मुख्यमंत्री होने के साथ तमिलगा वेत्री कषगम के प्रमुख भी हैं। उनके राजनीतिक रुख को देखते हुए प्रधानमंत्री मोदी के लिए इस्तेमाल किए गए शब्दों पर विशेष ध्यान गया है। हालांकि, जन्मदिन की शुभकामना में व्यक्त किए गए विचारों से किसी व्यापक राजनीतिक बदलाव का निष्कर्ष निकालना अलग विषय है। फिलहाल संदेश में प्रधानमंत्री के नेतृत्व और मजबूत भारत के निर्माण के प्रयासों की सराहना स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

    विजय और भारतीय जनता पार्टी के बीच राजनीतिक मतभेद सार्वजनिक रूप से सामने आते रहे हैं। विधानसभा चुनाव से पहले विजय ने भाजपा को अपनी पार्टी का वैचारिक विरोधी बताया था। इसके बावजूद मुख्यमंत्री बनने के बाद केंद्र और तमिलनाडु सरकार के बीच विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर संवाद और समन्वय भी देखने को मिला है। ऐसे में प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर दिया गया यह संदेश राजनीतिक रूप से चर्चा का विषय बना है।

    प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन पर देश के अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी उन्हें शुभकामनाएं दीं। इनमें विपक्षी दलों के नेता भी शामिल रहे। तमिलनाडु में मुख्यमंत्री विजय के अलावा राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर और अन्य राजनीतिक नेताओं ने भी प्रधानमंत्री को जन्मदिन की बधाई दी।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को गुजरात के वडनगर में हुआ था। इस वर्ष उनका 76वां जन्मदिन मनाया जा रहा है। जन्मदिन के अवसर पर देशभर में अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस दौरान राजनीतिक नेताओं ने प्रधानमंत्री के अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र की कामना की।

    मुख्यमंत्री विजय का संदेश ऐसे समय आया है जब तमिलनाडु की राजनीति में केंद्र और राज्य के संबंधों को लेकर लगातार चर्चा बनी हुई है। उनके संदेश में प्रधानमंत्री के साथ राजनीतिक मुद्दों पर मतभेदों का कोई उल्लेख नहीं था। इसके बजाय संदेश पूरी तरह जन्मदिन की शुभकामनाओं और मजबूत भारत के निर्माण के लिए प्रधानमंत्री के नेतृत्व की सराहना पर केंद्रित रहा।

  • पीएम मोदी के जन्मदिन पर योगी ने दी बधाई, बोले- 145 करोड़ भारतीयों के जीवन में सुख-समृद्धि का नवप्रभात ला रहे

    पीएम मोदी के जन्मदिन पर योगी ने दी बधाई, बोले- 145 करोड़ भारतीयों के जीवन में सुख-समृद्धि का नवप्रभात ला रहे

    लखनऊ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने उन्हें शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री योगी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रधानमंत्री के उत्तम स्वास्थ्य और सुदीर्घ एवं यशस्वी जीवन की कामना की। वहीं सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी प्रधानमंत्री को जन्मदिन की बधाई देते हुए स्वस्थ, सक्रिय और सार्थक जीवन की शुभकामनाएं दीं।

    योगी ने मोदी को बताया ‘नए भारत का शिल्पी’
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के स्वप्नद्रष्टा और ‘नए भारत के शिल्पी’ के रूप में संबोधित किया। उन्होंने लिखा कि 145 करोड़ भारतीयों के जीवन में सुख, समृद्धि, सुरक्षा और स्वाभिमान का नवप्रभात लाने के लिए प्रधानमंत्री निरंतर राष्ट्रसेवा में जुटे हैं। योगी ने प्रधानमंत्री को जन्मदिन की हार्दिक बधाई देते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घ एवं यशस्वी जीवन की कामना की।

    ‘राष्ट्र प्रथम’ के संकल्प का किया उल्लेख
    मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि ‘राष्ट्र प्रथम’ के संकल्प, कर्मनिष्ठा और लोक-कल्याण के प्रति प्रधानमंत्री का समर्पित जीवन ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को साकार करने के लिए प्रेरणा देता है। उनके मुताबिक प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत आत्मनिर्भरता, सुशासन, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और वैश्विक प्रतिष्ठा के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। योगी ने मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम से प्रधानमंत्री को उत्तम स्वास्थ्य तथा सुदीर्घ और यशस्वी जीवन प्रदान करने की प्रार्थना भी की।

    अखिलेश यादव ने भी दी जन्मदिन की शुभकामना
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर भाजपा की ओर से देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। भाजपा ने 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक ‘सेवा संकल्प अभियान’ चलाने की घोषणा की है। यह अभियान प्रधानमंत्री के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन के अवसर से भी जोड़ा गया है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ‘एक्स’ पर प्रधानमंत्री को जन्मदिन की बधाई देते हुए उनके स्वस्थ, सक्रिय और सार्थक जीवन की कामना की।

    अयोध्या में सफाई अभियान से हुई सेवा संकल्प की शुरुआत
    प्रधानमंत्री के जन्मदिन के अवसर पर अयोध्या के लता मंगेशकर चौक पर ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत बड़े स्तर पर सफाई अभियान चलाया गया। इसका आयोजन अयोध्या नगर निगम की ओर से किया गया।

    अयोध्या की जिला पंचायत अध्यक्ष रोली सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री का जन्मदिन उनके 25 वर्षों के सेवा-कार्य से भी जुड़ा है। उन्होंने कहा कि इस अवसर पर मेयर के नेतृत्व में सफाई अभियान को सम्मान के रूप में चुना गया है। उन्होंने भगवान राम से प्रधानमंत्री के लंबे और स्वस्थ जीवन की कामना की, ताकि वे देश को ‘विश्व गुरु’ बनाने की दिशा में मार्गदर्शन करते रहें।

    अयोध्या के महापौर महंत गिरीश पति त्रिपाठी ने कहा कि प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान के तहत लता मंगेशकर चौक पर विशेष सफाई अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस पहल के माध्यम से शहर की सफाई के साथ प्रधानमंत्री के लिए प्रार्थना भी की जा रही है, ताकि वे ‘मां भारती’ की सेवा के लिए समर्पित रहते हुए देश को ‘विकसित भारत’ की दिशा में आगे ले जाएं।

    लखनऊ में 17 अक्टूबर तक चलेंगे विभिन्न कार्यक्रम
    प्रधानमंत्री के जन्मदिन के उपलक्ष्य में लखनऊ नगर निगम 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक ‘स्वच्छता ही सेवा एवं सेवा संकल्प अभियान-2026’ चलाएगा। इसके तहत शहर में सफाई, श्रमदान और जनजागरूकता से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। बुधवार को महापौर सुषमा खर्कवाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में अभियान की रूपरेखा तय की गई।

    अभियान की शुरुआत नगर निगम क्षेत्र की नालियों और सीवर लाइनों की सफाई से होगी। प्रत्येक वार्ड में एक नोडल अधिकारी निगरानी करेगा। सभी आठ जोनों में विशेष स्वच्छता और श्रमदान कार्यक्रम भी होंगे। ‘संकल्प फॉर वे ऑफ लाइफ’ के तहत आरडब्ल्यूए और एनजीओ सदस्यों की ओर से दीप प्रज्वलित किए जाएंगे।

    25 सितंबर से 2 अक्टूबर तक 200 घंटे का वृहद सफाई अभियान चलेगा। जलकल विभाग पानी की टंकियों की सफाई करेगा। 27 सितंबर से 17 अक्टूबर तक एकल उपयोग प्लास्टिक के खिलाफ अभियान चलेगा। विश्व पर्यटन दिवस पर शहर के पर्यटन स्थलों पर विशेष सफाई अभियान होगा। 17 अक्टूबर तक हर जोन में सफाई मित्रों और उनके परिवारों के लिए स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएंगे। स्कूलों में ‘मेरे सपनों का भारत’ विषय पर चित्रकला और वाद-विवाद प्रतियोगिताएं भी होंगी।

    राष्ट्र प्रेरणा स्थल पर जलेंगे तीन लाख दीप
    एलडीए की ओर से राष्ट्र प्रेरणा स्थल पर तीन लाख दीप जलाने का कार्यक्रम रखा गया है। बुधवार शाम सात बजे होने वाले इस आयोजन की तैयारियों का एलडीए उपाध्यक्ष ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कार्यक्रम के मुख्य अतिथि होंगे। उप मुख्यमंत्री और कई मंत्री भी दीप प्रज्वलन में शामिल होंगे।

    आयोजन की तैयारियों में एलडीए की टीम जुटी हुई है। सूत्रों के मुताबिक, कार्यक्रम के चलते राष्ट्र प्रेरणा स्थल को तीन दिन के लिए आम लोगों के लिए बंद किया गया है।

    भाजपा कार्यकर्ता अस्पतालों में करेंगे सेवा
    भाजपा महानगर इकाई की ओर से ‘सेवा और समर्पण के 25 वर्ष-सेवा संकल्प अभियान’ के तहत विभिन्न सेवा कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। अस्पतालों में फल वितरण और रक्तदान शिविर लगाए जाएंगे। उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और महानगर अध्यक्ष आनंद द्विवेदी सिविल अस्पताल में मरीजों को फल वितरित करेंगे। महानगर के अन्य अस्पतालों में भी जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता सेवा कार्यों में शामिल होंगे।

    अभियान के तहत सभी बूथों पर 200 लाभार्थियों के घर ‘आशीर्वाद का दीया’ जलाने का कार्यक्रम भी है। झूलेलाल वाटिका में संगठन महामंत्री धर्मपाल दीप प्रज्वलित करेंगे, जबकि सेंट्रल पार्क, समर विहार में महानगर अध्यक्ष आनंद द्विवेदी मौजूद रहेंगे। विश्वविद्यालय में आयोजित रक्तदान शिविर में कैबिनेट मंत्री भूपेंद्र चौधरी शामिल होंगे। इसके अलावा शहर के दस प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर भी दीप प्रज्वलन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

  • अखिलेश ने एक्सप्रेसवे का वीडियो दिखाकर भाजपा पर साधा निशाना, बोले- निर्माण पूरा होने से पहले ही टूटने लगते हैं

    अखिलेश ने एक्सप्रेसवे का वीडियो दिखाकर भाजपा पर साधा निशाना, बोले- निर्माण पूरा होने से पहले ही टूटने लगते हैं


    लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार में बने एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए हैं। सपा कार्यालय में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का वीडियो दिखाते हुए कहा कि भाजपा सरकार में किसी प्रोजेक्ट का निर्माण पूरा बाद में होता है, जबकि उसके टूटने की शुरुआत पहले ही हो जाती है। उन्होंने बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका उद्घाटन किया था और इसका मेंटीनेंस अभी भी जारी है। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे में उद्घाटन के कुछ समय बाद क्षति की खबरें भी सामने आई हैं।

    रिवरफ्रंट और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता का किया जिक्र
    अखिलेश यादव ने लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की स्थिति को लेकर वीडियो दिखाते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि दिल्ली और लखनऊ वालों के बीच इस बात को लेकर मुकाबला चल रहा है कि किसके पास ज्यादा मुनाफा होगा। उन्होंने सपा सरकार के दौरान बने रिवरफ्रंट और अन्य निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को बेहतर बताया।

    उन्होंने आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे का भी जिक्र किया और कहा कि उसका डिजाइन सबसे अच्छा है, लेकिन भाजपा के लोग अब उसे खराब कर रहे हैं। उन्होंने रिवरफ्रंट पर लगे फव्वारों और सपा सरकार के दौरान बच्चों को दिए गए लैपटॉप का उल्लेख करते हुए कहा कि ये अभी भी वैसे ही हैं।

    लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे को लेकर इससे पहले भी गुणवत्ता के सवाल उठते रहे हैं। अगस्त में सड़क के हिस्सों को लेकर मरम्मत और पंखों से सुखाने का वीडियो सामने आने के बाद भी अखिलेश यादव ने सरकार पर निशाना साधा था।

    यूपीआई भुगतान पर टैक्स को लेकर भी हमला
    अखिलेश यादव ने यूपीआई से भुगतान करने पर व्यापारियों पर लगाए गए टैक्स को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने यूपीआई को “रुपये ऐंठने वाली योजना” बताते हुए कहा कि चुंगीजीवी लोगों को रुपये ऐंठने वाली योजना बंद कर देनी चाहिए। उनका आरोप था कि ऐसी योजनाएं उद्योगपतियों की जेबें भरने के लिए बनाई जा रही हैं। इस मुद्दे को लेकर उनके बयान की हालिया रिपोर्टिंग भी सामने आई है।

    https://x.com/yadavakhilesh/status/2100210386243084303

    200 करोड़ पौधे लगाने के दावे पर सवाल
    सपा प्रमुख ने प्रदेश में 200 करोड़ पेड़ लगाए जाने के सरकारी दावे पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि सपा सरकार के दौरान एक हजार एकड़ जमीन पर एक लाख 34 हजार पेड़ लगवाए गए थे। अखिलेश ने सवाल किया कि यदि सरकार ने 200 करोड़ पौधे लगाए हैं तो वह यह भी बताए कि इतनी बड़ी संख्या में पौधे लगाने के लिए जमीन कहां है। यह दावा और उनका सवाल हालिया रिपोर्टिंग में भी दर्ज है।

    पूर्व मंत्री राम आश्रय कुशवाहा सपा में लौटे
    इस दौरान पूर्व मंत्री राम आश्रय कुशवाहा भाजपा छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए। सपा की सदस्यता लेने के बाद उन्होंने कहा कि उन्हें आज भी नेताजी यानी मुलायम सिंह यादव अपने बीच महसूस होते हैं। उन्होंने कहा कि जब तक अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री नहीं बना देते, तब तक वह घर नहीं बैठेंगे।

    राजनीतिक रूप से अखिलेश यादव के इस कार्यक्रम में सरकार पर कई मुद्दों को लेकर निशाना साधने के साथ पार्टी में पूर्व मंत्री की वापसी को भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तौर पर देखा गया।