Category: National

  • प्रह्लाद जोशी ने संभाली शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी, पहले दिन वरिष्ठ अधिकारियों संग शिक्षा सुधारों पर मंथन

    प्रह्लाद जोशी ने संभाली शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी, पहले दिन वरिष्ठ अधिकारियों संग शिक्षा सुधारों पर मंथन

    नई दिल्ली । केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने रविवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री के रूप में कार्यभार संभाल लिया। मंत्रालय की जिम्मेदारी ग्रहण करने के तुरंत बाद उन्होंने शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर विभाग की मौजूदा स्थिति, प्राथमिकताओं और आगे की कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा की। ऐसे समय में उन्हें यह अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है, जब देश में शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर व्यापक विमर्श जारी है।

    पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार किए जाने के बाद प्रधानमंत्री की सलाह पर प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया। कार्यभार संभालने के बाद उन्होंने मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों से विभिन्न योजनाओं, लंबित मामलों और आगामी कार्यक्रमों की जानकारी ली। मंत्रालय के लिए यह शुरुआती बैठक आगे की नीतिगत दिशा तय करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    देश की शिक्षा व्यवस्था में हाल के वर्षों में कई बड़े बदलाव हुए हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के विभिन्न प्रावधानों को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। ऐसे में नए शिक्षा मंत्री के सामने इन सुधारों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने, राज्यों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने और शिक्षा से जुड़े कार्यक्रमों की गति बनाए रखने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी। विद्यालयी शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा और अनुसंधान तक अनेक क्षेत्रों में नीतिगत निर्णयों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

    प्रह्लाद जोशी केंद्र सरकार के अनुभवी मंत्रियों में शामिल हैं। वह पहले से ही उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। इसके अतिरिक्त वह संसदीय कार्य, कोयला और खान मंत्रालय जैसे महत्वपूर्ण विभागों का नेतृत्व भी कर चुके हैं। लंबे प्रशासनिक अनुभव और संसदीय कार्यप्रणाली की गहरी समझ के कारण उन्हें सरकार में लगातार महत्वपूर्ण दायित्व सौंपे जाते रहे हैं।

    कर्नाटक की धारवाड़ लोकसभा सीट से लगातार पांच बार सांसद चुने जा चुके प्रह्लाद जोशी को संगठनात्मक क्षमता और प्रभावी प्रशासनिक शैली के लिए भी जाना जाता है। शिक्षा मंत्रालय की नई जिम्मेदारी के साथ अब उनसे ऐसी नीतियों को आगे बढ़ाने की अपेक्षा की जा रही है, जो विद्यार्थियों, शिक्षकों और शैक्षणिक संस्थानों के लिए अधिक प्रभावी और परिणामकारी साबित हों।

    मंत्रालय के सामने सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता को और मजबूत करना, परीक्षा प्रक्रिया में भरोसा कायम रखना तथा तकनीक आधारित मूल्यांकन प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाना शामिल माना जा रहा है। इसके साथ ही उच्च शिक्षा संस्थानों में अनुसंधान को प्रोत्साहन, डिजिटल शिक्षा का विस्तार, कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा और विद्यालयी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार भी आगामी कार्ययोजना का अहम हिस्सा रह सकते हैं।

    कार्यभार संभालने के साथ ही मंत्रालय में प्रारंभिक समीक्षा बैठकों का दौर शुरू हो गया है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में शिक्षा मंत्रालय परीक्षा सुधार, विश्वविद्यालयों के विकास, अनुसंधान को बढ़ावा देने और विद्यार्थियों से जुड़े लंबित विषयों पर तेजी से निर्णय लेने की दिशा में आगे बढ़ेगा। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े सभी पक्षों की निगाह अब इस बात पर रहेगी कि नए शिक्षा मंत्री अपने अनुभव के आधार पर शिक्षा प्रणाली में सुधारों को किस गति और प्रभावशीलता के साथ आगे बढ़ाते हैं।

  • कारगिल विजय दिवस पर देश ने याद किया वीरों का शौर्य, जयशंकर और राजनाथ सिंह ने बलिदान को दी भावपूर्ण श्रद्धांजलि

    कारगिल विजय दिवस पर देश ने याद किया वीरों का शौर्य, जयशंकर और राजनाथ सिंह ने बलिदान को दी भावपूर्ण श्रद्धांजलि

    नई दिल्ली । देश ने रविवार को 27वां कारगिल विजय दिवस पूरे सम्मान और गर्व के साथ मनाया। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने कारगिल युद्ध के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भी देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों के अदम्य साहस और समर्पण को नमन करते हुए कहा कि उनका शौर्य आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

    विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कारगिल विजय दिवस के अवसर पर अपने संदेश में कहा कि यह दिन उन बहादुर सैनिकों के साहस, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रभक्ति को याद करने का अवसर है, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय सैनिकों की सेवा और त्याग को देश हमेशा सम्मान और गर्व के साथ याद रखेगा। उनके अनुसार कारगिल के वीरों की गाथा केवल सैन्य इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संकल्प और आत्मविश्वास की पहचान भी है।

    कारगिल विजय दिवस भारत की उस ऐतिहासिक जीत की याद दिलाता है, जब वर्ष 1999 में भारतीय सेना ने दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए दुश्मन के कब्जे से रणनीतिक चोटियों को दोबारा अपने नियंत्रण में लिया था। बर्फ से ढकी ऊंची पहाड़ियों, प्रतिकूल मौसम और लगातार हो रही गोलाबारी के बीच भारतीय जवानों ने अद्वितीय साहस, धैर्य और दृढ़ संकल्प का परिचय दिया। 26 जुलाई को मिली इस विजय ने भारतीय सेना की क्षमता और राष्ट्र की एकजुटता का संदेश पूरी दुनिया तक पहुंचाया।

    कारगिल विजय दिवस के अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कारगिल युद्ध स्मारक पहुंचकर वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने ध्वजारोहण समारोह में भाग लिया और शौर्य विजय यात्रा के समापन कार्यक्रम में भी शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने भारतीय सेना के जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि कारगिल युद्ध स्मारक पर लहराता तिरंगा उन वीर सैनिकों के अद्वितीय बलिदान का प्रतीक है, जिन्होंने राष्ट्र की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।

    रक्षा मंत्री ने कहा कि वर्ष 1999 में भारतीय सीमा पर हुई घुसपैठ का भारतीय सेना ने अदम्य साहस और रणनीतिक कौशल के साथ जवाब दिया। उन्होंने कहा कि दुश्मन ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों का लाभ उठाने की कोशिश की थी, लेकिन भारतीय सैनिकों ने असाधारण वीरता का परिचय देते हुए सभी चुनौतियों को परास्त कर दिया। उन्होंने कहा कि कारगिल के योद्धाओं ने केवल ऊंची चोटियां ही नहीं जीतीं, बल्कि पूरे देश का विश्वास और सम्मान भी मजबूत किया।

    राजनाथ सिंह ने कैप्टन विक्रम बत्रा, कैप्टन मनोज पांडे सहित अनेक वीर सैनिकों के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी वीरगाथाएं आज भी देश के युवाओं को राष्ट्रसेवा, कर्तव्य और त्याग का संदेश देती हैं। उन्होंने कहा कि कारगिल विजय दिवस केवल एक सैन्य जीत का स्मरण नहीं है, बल्कि यह हर नागरिक को देश के प्रति अपने दायित्वों का एहसास कराने वाला अवसर भी है। उनके अनुसार सेवा, समर्पण और बलिदान जैसे मूल्य ही किसी भी मजबूत राष्ट्र की आधारशिला होते हैं।

    उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय सशस्त्र बल लगातार देश की सुरक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहे हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हर मोर्चे पर सजग हैं। कारगिल विजय दिवस के अवसर पर पूरे देश ने वीर शहीदों के अद्वितीय योगदान को स्मरण करते हुए उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। यह दिवस एक बार फिर देशवासियों को राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने और वीर सैनिकों के बलिदान से प्रेरणा लेने का संदेश देता है।

  • 'मन की बात' के 136वें एपिसोड की एनडीए नेताओं ने की सराहना, बोले- समाज के सकारात्मक प्रयासों को मिलती है राष्ट्रीय पहचान

    'मन की बात' के 136वें एपिसोड की एनडीए नेताओं ने की सराहना, बोले- समाज के सकारात्मक प्रयासों को मिलती है राष्ट्रीय पहचान

    नई दिल्ली ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 136वें एपिसोड को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के कई नेताओं ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने इस कार्यक्रम को जनभागीदारी, सामाजिक जागरूकता और राष्ट्र निर्माण को प्रोत्साहित करने वाला प्रभावी मंच बताया। नेताओं का कहना है कि यह कार्यक्रम राजनीति से अलग समाज के सकारात्मक प्रयासों, नवाचारों और प्रेरणादायी कहानियों को राष्ट्रीय पहचान देने का कार्य करता है।

    भाजपा नेताओं ने कहा कि ‘मन की बात’ के माध्यम से देश के अलग-अलग हिस्सों में हो रहे उल्लेखनीय कार्यों को व्यापक स्तर पर सामने लाया जाता है। उनका मानना है कि इस कार्यक्रम से आम नागरिकों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय स्तर पर काम कर रहे लोगों के प्रयासों को सम्मान मिलता है, जिससे अन्य लोगों को भी प्रेरणा मिलती है। उन्होंने इसे समाज में सकारात्मक सोच विकसित करने का माध्यम बताया।

    छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कार्यक्रम में राज्य से जुड़े विभिन्न प्रयासों का उल्लेख किए जाने पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि हाल के महीनों में बस्तर ओलंपिक्स, बस्तर पांडुम, मल्हार से जुड़े ऐतिहासिक संदर्भ और इस बार जल संरक्षण अभियान के तहत कोरबा की पहल का जिक्र राज्य के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने स्थानीय मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमाओं और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने की अपील को भी महत्वपूर्ण बताया।

    त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने कहा कि ‘मन की बात’ की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सकारात्मक सोच और जनता से लगातार संवाद बनाए रखना है। उनके अनुसार, कार्यक्रम में त्रिपुरा में स्वदेशी रूप से तैयार किए गए पहले संगीत वाद्ययंत्र का उल्लेख होने से राज्य के कारीगरों और कलाकारों का उत्साह बढ़ा है। उन्होंने इसे स्थानीय प्रतिभाओं को राष्ट्रीय पहचान दिलाने वाला प्रयास बताया।

    केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कार्यक्रम में कारगिल विजय दिवस के अवसर पर वीर सैनिकों को दी गई श्रद्धांजलि, पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के योगदान के स्मरण और राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के संदर्भ को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय हस्तशिल्प, हथकरघा और स्वदेशी उत्पादों को प्रोत्साहित करने का संदेश देश के कारीगरों के लिए उत्साहवर्धक है।

    केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि कार्यक्रम में राजनीतिक विषयों के बजाय समाज के विभिन्न वर्गों द्वारा किए जा रहे प्रेरक कार्यों को प्रमुखता दी जाती है। उन्होंने जल संरक्षण, वृक्षारोपण, स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक हस्तशिल्प जैसे विषयों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने को इस कार्यक्रम की विशेषता बताया। वहीं भाजपा सांसद राधामोहन दास अग्रवाल ने कहा कि कार्यक्रम नागरिकों के योगदान को महत्व देता है और वर्षों से देशभर की प्रेरक कहानियों को लोगों तक पहुंचा रहा है।

    उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने ‘मन की बात’ को दुनिया के लोकप्रिय मासिक कार्यक्रमों में से एक बताते हुए कहा कि इसके माध्यम से ऐसे लोगों की प्रेरक कहानियां सामने आती हैं, जिनकी मेहनत और उपलब्धियां सामान्यतः चर्चा में नहीं आ पातीं। वहीं बिहार सरकार के मंत्री दिलीप जायसवाल ने इसे देश के विभिन्न क्षेत्रों और समुदायों को जोड़ने वाला मंच बताया। पूर्व मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह ने कारगिल विजय दिवस पर वीर सैनिकों के साहस और बलिदान को याद करने को नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी संदेश बताया।

  • जंतर-मंतर प्रदर्शन का हवाला देकर अखिलेश यादव बोले, अब संविधान और चुनावी सुधार की लड़ाई भी होगी तेज

    जंतर-मंतर प्रदर्शन का हवाला देकर अखिलेश यादव बोले, अब संविधान और चुनावी सुधार की लड़ाई भी होगी तेज

    नई दिल्ली ।समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने देश में शिक्षा और परीक्षा से जुड़े हालिया घटनाक्रम के बाद चुनाव सुधार और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाने की बात कही है। उन्होंने कहा कि छात्रों के आंदोलन ने एक नई शुरुआत की है और भविष्य में यह अभियान चुनावी सुधार तथा लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से जुड़े विषयों तक भी पहुंचेगा। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में नई बहस शुरू हो गई है।

    अखिलेश यादव ने छात्रों के आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि युवाओं की एकजुटता और संघर्ष ने महत्वपूर्ण परिणाम दिए हैं। उनके अनुसार, शिक्षा और परीक्षा से जुड़े मुद्दों पर उठी आवाज ने यह साबित किया है कि संगठित जनआंदोलन लोकतांत्रिक व्यवस्था में बदलाव का माध्यम बन सकते हैं। उन्होंने आंदोलन में शामिल छात्रों और उनके समर्थन में खड़े सभी लोगों को बधाई देते हुए इसे लोकतांत्रिक भागीदारी की मिसाल बताया।

    सपा प्रमुख ने कहा कि अब संविधान में निहित अधिकारों को आधार बनाकर चुनाव सुधार और ईवीएम जैसे मुद्दों पर भी व्यापक चर्चा और जनभागीदारी देखने को मिल सकती है। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को और अधिक मजबूत बनाने के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही आवश्यक है। उन्होंने संकेत दिया कि विपक्ष भविष्य में इन विषयों को भी राजनीतिक और सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बनाएगा।

    अपने बयान में अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर भी कई राजनीतिक आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि चुनावी प्रक्रिया, जनप्रतिनिधियों की खरीद-फरोख्त, भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग जैसे मुद्दों पर जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखना सभी संस्थाओं और राजनीतिक दलों की साझा जिम्मेदारी है। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    उन्होंने कानून व्यवस्था, किसानों, मजदूरों, व्यापारियों, महिलाओं और युवाओं से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि विपक्ष इन विषयों को लगातार उठाता रहेगा। उनके अनुसार लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिक अधिकारों की रक्षा और संवैधानिक मूल्यों का पालन सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में जनता बदलाव की दिशा में अपनी भूमिका निभाएगी।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हाल के घटनाक्रमों के बीच विपक्ष शिक्षा, रोजगार और चुनावी सुधार जैसे मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रहा है। वहीं सत्तापक्ष इन आरोपों को पहले भी खारिज करता रहा है और अपनी नीतियों तथा चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी और संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप बताता रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में इन मुद्दों पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।

    लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनावी प्रक्रिया और सार्वजनिक संस्थाओं से जुड़े प्रश्न समय-समय पर राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनते रहे हैं। ऐसे मामलों में अंतिम निर्णय संबंधित संवैधानिक संस्थाओं, न्यायिक प्रक्रियाओं और कानूनी प्रावधानों के अनुसार ही होता है। फिलहाल अखिलेश यादव के इस बयान ने शिक्षा, चुनाव सुधार और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

  • कैंट रेलवे स्टेशन क्षेत्र में पुरुषों की शिकायत पर कार्रवाई, दो युवतियां न्यायिक हिरासत में भेजी गईं

    कैंट रेलवे स्टेशन क्षेत्र में पुरुषों की शिकायत पर कार्रवाई, दो युवतियां न्यायिक हिरासत में भेजी गईं


    नई दिल्ली । 
    उत्तर प्रदेश के वाराणसी में एंटी रोमियो स्क्वॉड की कार्रवाई से जुड़ा एक अलग तरह का मामला सामने आया है। आमतौर पर महिलाओं और छात्राओं के साथ छेड़छाड़ या उत्पीड़न की शिकायतों पर कार्रवाई करने वाली एंटी रोमियो टीम ने इस बार दो युवतियों को पुरुषों से कथित छेड़छाड़, अभद्र टिप्पणियां और अश्लील इशारे करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। पुलिस ने दोनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायालय में पेश किया, जहां से न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

    यह घटना वाराणसी के कैंट रेलवे स्टेशन क्षेत्र की बताई गई है। पुलिस के अनुसार, शुक्रवार शाम करीब पांच बजे चौकाघाट-लहरतारा फ्लाईओवर के नीचे दो युवतियों के राह चलते पुरुषों के साथ कथित रूप से अभद्र व्यवहार करने की सूचना पुलिस कंट्रोल रूम को मिली। शिकायत में आरोप लगाया गया कि दोनों राहगीरों की ओर अश्लील टिप्पणियां कर रही थीं और आपत्तिजनक इशारे कर रही थीं। सूचना मिलते ही एंटी रोमियो स्क्वॉड और स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों महिलाओं को हिरासत में ले लिया।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मौके पर पहुंचने पर दोनों युवतियों ने अपना चेहरा ढका हुआ था। प्रारंभिक पूछताछ और मौके पर मौजूद लोगों से जानकारी लेने के बाद उन्हें थाने लाया गया, जहां आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई। पुलिस का कहना है कि सार्वजनिक स्थान पर कथित अश्लील हरकतों और अभद्र व्यवहार से जुड़े आरोपों के आधार पर उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 296 के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया।

    जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि गिरफ्तार की गई दोनों महिलाएं बिहार की रहने वाली हैं। हालांकि उनकी पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद दोनों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया गया। मामले की आगे की जांच जारी है और पुलिस अन्य तथ्यों की भी पड़ताल कर रही है।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि एंटी रोमियो स्क्वॉड का उद्देश्य सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी प्रकार की छेड़छाड़, अभद्रता या उत्पीड़न की घटनाओं को रोकना है। कानून सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होता है और शिकायत मिलने पर आरोपी के महिला या पुरुष होने के आधार पर कार्रवाई में कोई भेदभाव नहीं किया जाता। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्थानों पर अनुचित व्यवहार या किसी व्यक्ति को असहज करने वाली गतिविधियों के मामलों में निर्धारित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई जारी रहेगी।

    वाराणसी की यह घटना इसलिए चर्चा में है क्योंकि एंटी रोमियो स्क्वॉड की कार्रवाई इस बार महिलाओं के खिलाफ हुई है। हालांकि पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि मामले में लगाए गए आरोपों की जांच विधिक प्रक्रिया के तहत की जा रही है और अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। प्रशासन ने लोगों से सार्वजनिक स्थानों पर मर्यादित व्यवहार बनाए रखने और किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को देने की अपील की है, ताकि सभी नागरिकों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित किया जा सके।

  • बाबा वैद्यनाथ धाम में श्रावणी मेले की तैयारियां तेज, सुरक्षा और सुविधाओं के लिए एआई आधारित निगरानी व्यवस्था होगी लागू

    बाबा वैद्यनाथ धाम में श्रावणी मेले की तैयारियां तेज, सुरक्षा और सुविधाओं के लिए एआई आधारित निगरानी व्यवस्था होगी लागू

    नई दिल्ली । झारखंड के विश्व प्रसिद्ध बाबा वैद्यनाथ धाम में आयोजित होने वाले राजकीय श्रावणी मेला 2026 को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। इस वर्ष मेला 30 जुलाई से 28 अगस्त तक आयोजित होगा। श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और सुचारु व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ने कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। सबसे अहम निर्णय यह है कि पूरे मेले के दौरान बाबा वैद्यनाथ मंदिर में वीआईपी और वीवीआईपी दर्शन की व्यवस्था पूरी तरह बंद रहेगी, जिससे सभी श्रद्धालुओं को समान अवसर के साथ दर्शन की सुविधा मिल सके।

    श्रावणी मेले की तैयारियों की समीक्षा के दौरान संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए कि 28 जुलाई तक सभी आवश्यक व्यवस्थाएं हर हाल में पूरी कर ली जाएं। इसके बाद 29 जुलाई को देवघर और दुमका में उपलब्ध सुविधाओं की दोबारा समीक्षा की जाएगी, ताकि मेले के शुभारंभ से पहले किसी भी कमी को दूर किया जा सके। अधिकारियों से समयबद्ध तरीके से सभी कार्य पूरे करने पर विशेष जोर दिया गया।

    श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए इस बार आधुनिक तकनीक का व्यापक उपयोग किया जाएगा। मेले में एआई आधारित इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम स्थापित किया जाएगा, जहां से सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और विभिन्न गतिविधियों की निगरानी की जाएगी। इसके अलावा एआई कैमरे, फेस रिकॉग्निशन प्रणाली, ट्रैफिक प्रबंधन प्रणाली, ड्रोन निगरानी, वाहन पहचान कैमरे और हेड काउंटिंग तकनीक का उपयोग भी किया जाएगा। शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए क्यूआर आधारित शिकायत प्रणाली और डिजिटल सूचना व्यवस्था भी विकसित की जाएगी।

    श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए टेंट सिटी की क्षमता बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि अधिक संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर आवास उपलब्ध कराया जा सके। इसके साथ ही पेयजल, शौचालय, स्नानगृह, साफ-सफाई, कूड़ेदान और कचरा उठाने की व्यवस्था चौबीसों घंटे सुचारु रखने पर विशेष जोर दिया गया है। गर्मी और उमस से राहत देने के लिए मिस्ट कूलिंग सिस्टम और अन्य शीतलन सुविधाओं का भी विस्तार किया जाएगा।

    सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए मेला क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस चौकियां, ट्रैफिक नियंत्रण केंद्र, स्वास्थ्य केंद्र, सूचना एवं सहायता केंद्र, विद्युत केंद्र और मातृत्व विश्राम गृह जैसी सुविधाओं को बेहतर बनाया जाएगा। इसके अलावा पूरे क्षेत्र में पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था, आकर्षक प्रवेश द्वार और वैकल्पिक बिजली आपूर्ति की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में श्रद्धालुओं को परेशानी न हो।

    देवघर और बासुकीनाथ के बीच श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए जिला प्रशासन और राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़े अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ यातायात व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। उद्देश्य यह है कि श्रद्धालुओं को यात्रा के दौरान जाम या अन्य अव्यवस्थाओं का सामना न करना पड़े।

    प्रशासन का मानना है कि आधुनिक तकनीक, प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था और बेहतर आधारभूत सुविधाओं के समन्वय से इस वर्ष का श्रावणी मेला अधिक सुव्यवस्थित, सुरक्षित और श्रद्धालु-केंद्रित होगा। समान दर्शन व्यवस्था, डिजिटल सेवाओं और एआई आधारित निगरानी प्रणाली के माध्यम से श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव उपलब्ध कराने की तैयारी की गई है।

  • इंडोनेशिया के साथ रक्षा समझौतों का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा, वैश्विक स्तर पर बढ़ी भारतीय रक्षा तकनीक की साख

    इंडोनेशिया के साथ रक्षा समझौतों का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा, वैश्विक स्तर पर बढ़ी भारतीय रक्षा तकनीक की साख

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को प्रसारित ‘मन की बात’ कार्यक्रम के 136वें एपिसोड में भारत की बढ़ती रक्षा क्षमताओं और स्वदेशी रक्षा तकनीक पर दुनिया के बढ़ते विश्वास का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि रक्षा उत्पादन, रक्षा निर्यात और मित्र देशों के साथ रणनीतिक सहयोग के क्षेत्र में भारत लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। प्रधानमंत्री ने हाल ही में हुई अपनी इंडोनेशिया यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइलों से जुड़े महत्वपूर्ण समझौते भारत की रक्षा तकनीक पर वैश्विक भरोसे को दर्शाते हैं।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का रक्षा क्षेत्र अब केवल घरेलू जरूरतों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश स्वदेशी तकनीक के दम पर मित्र देशों के लिए भी एक भरोसेमंद रक्षा साझेदार बनकर उभर रहा है। उन्होंने कहा कि आधुनिक रक्षा उपकरणों के विकास और निर्यात में भारत की बढ़ती भागीदारी आत्मनिर्भर भारत अभियान की सफलता को भी मजबूत कर रही है।

    इंडोनेशिया के साथ हुए समझौतों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि दोनों देशों ने ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और अस्त्र एयर-टू-एयर मिसाइल से जुड़े महत्वपूर्ण रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाया है। इसके अलावा समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने के लिए भी दोनों देशों ने साझा रूपरेखा तैयार की है। उन्होंने कहा कि इस तरह के समझौते भारत की तकनीकी क्षमता और वैश्विक विश्वसनीयता को नई पहचान दे रहे हैं।

    प्रधानमंत्री मोदी ने कारगिल विजय दिवस के अवसर पर वर्ष 1999 के युद्ध में शहीद हुए सैनिकों को श्रद्धांजलि भी अर्पित की। उन्होंने कहा कि 26 जुलाई हर भारतीय के लिए गर्व का दिन है, क्योंकि इसी दिन भारतीय सैनिकों ने कठिन परिस्थितियों में अदम्य साहस और वीरता का परिचय देते हुए कारगिल की चोटियों पर विजय प्राप्त की थी। उन्होंने कहा कि देश अपने वीर सैनिकों के बलिदान को कभी नहीं भूल सकता और नई पीढ़ी तक उनकी गाथाएं पहुंचाना सभी की जिम्मेदारी है।

    उन्होंने बताया कि इसी उद्देश्य से इस वर्ष विशेष ‘शौर्य विजय यात्रा’ का आयोजन किया गया है। यह मोटरसाइकिल अभियान राष्ट्रीय युद्ध स्मारक, नई दिल्ली से शुरू होकर कारगिल युद्ध स्मारक, द्रास तक पहुंचेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह अभियान देशवासियों को सैनिकों के बलिदान और राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण की याद दिलाने का माध्यम बनेगा।

    प्रधानमंत्री ने भारतीय नौसेना में शामिल आधुनिक युद्धपोत आईएनएस महेंद्रगिरी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह युद्धपोत भारत में डिजाइन और निर्मित किया गया है तथा इसमें 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग हुआ है। उनके अनुसार यह भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमता और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का सशक्त उदाहरण है।

    उन्होंने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन द्वारा विकसित पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट प्रणाली और अन्य स्वदेशी रक्षा प्रणालियों का भी जिक्र किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि इन उपलब्धियों के पीछे भारतीय वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की वर्षों की मेहनत और नवाचार की भावना है। उन्होंने हाल में सफल रहे स्वदेशी मिसाइल परीक्षणों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत लगातार अपनी रक्षा तैयारियों को आधुनिक और सशक्त बना रहा है।

    प्रधानमंत्री ने देशवासियों से कारगिल विजय दिवस के अवसर पर वीर शहीदों को श्रद्धांजलि देने और सुरक्षित, सक्षम तथा आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के संकल्प को और मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत अपने सैनिकों के साहस और स्वदेशी तकनीक की शक्ति के बल पर वैश्विक मंच पर नई पहचान बना रहा है।

  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की तीन यूरोपीय देशों की राजकीय यात्रा संपन्न, भारत के कूटनीतिक रिश्तों को मिला नया विस्तार

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की तीन यूरोपीय देशों की राजकीय यात्रा संपन्न, भारत के कूटनीतिक रिश्तों को मिला नया विस्तार

    नई दिल्ली । राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु मोल्दोवा, उत्तरी मैसेडोनिया और रोमानिया की अपनी तीन देशों की राजकीय यात्रा सफलतापूर्वक पूरी करने के बाद रविवार को नई दिल्ली लौट आईं। यह यात्रा भारत और यूरोप के उभरते साझेदार देशों के साथ संबंधों को नई दिशा देने की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विभिन्न स्तरों पर हुई बैठकों और समझौतों ने यह संकेत दिया कि भारत शिक्षा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और रणनीतिक सहयोग के क्षेत्रों में यूरोपीय देशों के साथ अपने संबंधों को और व्यापक बनाने की दिशा में सक्रिय है।

    यात्रा का अंतिम पड़ाव रोमानिया रहा, जहां राष्ट्रपति मुर्मु का राजधानी बुखारेस्ट में पूरे राजकीय सम्मान के साथ स्वागत किया गया। उन्हें औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया और इसके बाद रोमानिया के राष्ट्रपति निकुसोर डैन के साथ द्विपक्षीय वार्ता हुई। दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, शिक्षा और बहुपक्षीय सहयोग जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की। साथ ही बदलते वैश्विक और क्षेत्रीय परिदृश्य में दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर भी विचार साझा किए गए।

    रोमानिया प्रवास के दौरान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, खेल सहयोग और उच्च शिक्षा से जुड़े तीन महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। इनमें बुखारेस्ट विश्वविद्यालय में भारतीय अध्ययन की चेयर स्थापित करने का निर्णय भी शामिल रहा। इसे दोनों देशों के बीच शैक्षणिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। लगभग तीन दशक बाद किसी भारतीय राष्ट्रपति की यह पहली राजकीय यात्रा भी रही, जिससे इस दौरे का महत्व और बढ़ गया।

    रोमानिया से पहले राष्ट्रपति मुर्मु ने उत्तरी मैसेडोनिया का दौरा किया। राजधानी स्कोप्जे में उनका औपचारिक स्वागत किया गया, जहां उन्होंने राष्ट्रपति गोर्दाना सिलजानोव्स्का-दावकोवा और प्रधानमंत्री ह्रिस्टिजान मिकोस्की से अलग-अलग मुलाकात की। दोनों देशों के नेताओं ने आर्थिक सहयोग, शिक्षा, पर्यटन, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। दोनों पक्षों ने आपसी विश्वास और साझा हितों के आधार पर दीर्घकालिक सहयोग को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की।

    इस राजकीय यात्रा की शुरुआत मोल्दोवा से हुई, जहां राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु इस देश का दौरा करने वाली पहली भारतीय राष्ट्रपति बनीं। राजधानी चिसीनाउ में उन्होंने संसद का दौरा किया और संसदीय मैत्री समूह के सदस्यों के साथ बैठक की। इस दौरान लोकतांत्रिक मूल्यों, संसदीय सहयोग, आर्थिक साझेदारी और जन-से-जन संपर्क को मजबूत करने पर विशेष बल दिया गया। दोनों देशों ने भविष्य में सहयोग के नए अवसर तलाशने और पारस्परिक हितों पर आधारित संबंधों को आगे बढ़ाने की इच्छा व्यक्त की।

    पूरी यात्रा के दौरान राष्ट्रपति के साथ भारतीय प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद रहा, जिसने विभिन्न बैठकों और आधिकारिक कार्यक्रमों में भाग लिया। प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा, कृषि, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, व्यापार और सांस्कृतिक सहयोग जैसे क्षेत्रों में संवाद को आगे बढ़ाने के प्रयास किए। इससे भारत और इन तीनों देशों के बीच संस्थागत सहयोग के नए अवसर विकसित होने की संभावना बढ़ी है।

    यह यात्रा ऐसे समय में संपन्न हुई है जब भारत यूरोप के विभिन्न देशों के साथ अपने रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को लगातार विस्तार दे रहा है। मोल्दोवा, उत्तरी मैसेडोनिया और रोमानिया के साथ हुए संवाद तथा समझौते भविष्य में शिक्षा, विज्ञान, संस्कृति, व्यापार और बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग को नई गति देने में सहायक माने जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह राजकीय यात्रा भारत की संतुलित और सक्रिय विदेश नीति को और मजबूती प्रदान करने के साथ-साथ यूरोप में उसकी कूटनीतिक उपस्थिति को भी नया आयाम देगी।

  • क्रिकेट खेलते समय गहरे गड्ढे में गिरा मासूम, ग्रेटर नोएडा हादसे के बाद सुरक्षा व्यवस्था कटघरे में.

    क्रिकेट खेलते समय गहरे गड्ढे में गिरा मासूम, ग्रेटर नोएडा हादसे के बाद सुरक्षा व्यवस्था कटघरे में.

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में एक दर्दनाक हादसे ने निर्माण कार्यों के दौरान बरती जा रही सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नॉलेज पार्क क्षेत्र स्थित कलाधाम सोसायटी के पास बोरिंग कार्य के लिए खोदे गए खुले और पानी से भरे गहरे गड्ढे में गिरने से छह वर्षीय अव्यान सूर्या की मौत हो गई। यह घटना उस समय हुई जब मासूम अपने दोस्तों के साथ क्रिकेट खेल रहा था। हादसे के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है, वहीं प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी भी देखी जा रही है।

    बताया गया कि अव्यान अपने साथियों के साथ सोसायटी के बाहर खेल रहा था। खेल के दौरान वह करीब 15 फीट गहरे गड्ढे के पास पहुंच गया और अचानक उसमें गिर गया। गड्ढे में बारिश का पानी भरा हुआ था, जिससे बच्चे को तुरंत बाहर निकालना संभव नहीं हो सका। अन्य बच्चों के शोर मचाने पर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और काफी प्रयास के बाद उसे बाहर निकाला। इसके बाद उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

    घटना के बाद सड़क पर पड़े क्रिकेट बैट और विकेट उस दर्दनाक पल की गवाही देते नजर आए, जब खेलते-खेलते एक मासूम की जिंदगी हमेशा के लिए थम गई। अव्यान के पिता सीवान यादव, जो केंद्रीय विद्यालय में उपप्रधानाचार्य हैं, ने बेटे की मौत पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि यदि संबंधित अधिकारियों ने समय रहते सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए होते तो यह हादसा टाला जा सकता था। उन्होंने कहा कि उनका बेटा अभी दुनिया को ठीक से देख भी नहीं पाया था और अन्य बच्चों की तरह उसे भी बाहर खेलना बेहद पसंद था।

    स्थानीय लोगों का आरोप है कि बोरिंग कार्य के लिए यह गड्ढा कई दिन पहले खोदा गया था। लगातार बारिश के कारण उसमें पानी भर गया, लेकिन उसके चारों ओर न तो बैरिकेडिंग की गई और न ही किसी प्रकार का चेतावनी बोर्ड लगाया गया। लोगों का कहना है कि खुले गड्ढे के आसपास सुरक्षा घेरा बनाना और लोगों को सतर्क करना संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी थी, लेकिन इस दिशा में आवश्यक सावधानी नहीं बरती गई।

    हादसे के बाद पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए बोरिंग कार्य से जुड़े ठेकेदार, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सुपरवाइजर और तकनीकी सुपरवाइजर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। ठेकेदार मनोज जैन को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद आवश्यक कानूनी कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

    यह घटना सार्वजनिक स्थलों पर निर्माण कार्यों के दौरान सुरक्षा मानकों के पालन की आवश्यकता को एक बार फिर सामने लेकर आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि खुले गड्ढों, निर्माण स्थलों और अन्य जोखिम वाले क्षेत्रों में पर्याप्त सुरक्षा घेरा, चेतावनी संकेत और नियमित निगरानी अनिवार्य होनी चाहिए, ताकि ऐसे हादसों को रोका जा सके। स्थानीय नागरिकों ने भी प्रशासन से मांग की है कि भविष्य में किसी भी निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए और लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, जिससे ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

  • मैदानों से लेकर पहाड़ों तक झमाझम बारिश…. कई क्षेत्रों में बाढ़ के हालात, आज इन राज्यों में अलर्ट

    मैदानों से लेकर पहाड़ों तक झमाझम बारिश…. कई क्षेत्रों में बाढ़ के हालात, आज इन राज्यों में अलर्ट


    नई दिल्ली।
    देशभर में मानसून (Monsoon) अब पूरी तरह से एक्टिव हो चुका है. मैदानों से लेकर पहाड़ों तक में बरसात जमकर (Heavy rainfall) हो रही है. पहाड़ों में भूस्खलन (Landslide) से कई जगहें रास्ते ठप पड़े हैं. मैदानी इलाकों में कई जगह बाढ़ के हालात भी बन रहे हैं. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, देश के विभिन्न हिस्सों में आज भी हल्की से मध्यम और कुछ राज्यों में भारी बारिश का अनुमान है. जहां दिल्ली-एनसीआर में रुक-रुक कर बौछारें पड़ने से मौसम सुहावना रहेगा. वहीं पहाड़ी राज्यों और तटीय इलाकों में मानसूनी हवाओं की वजह से अलर्ट जारी किया गया है।

    दिल्ली-एनसीआर में आज कैसा रहेगा मौसम?
    सबसे पहले बात दिल्ली-एनसीआर की कर लेते हैं. मौसम विभाग के मुताबिक, इस क्षेत्र में बादलों का डेरा बना रहेगा और हल्की बारिश की संभावना है. दिन भर में एक या दो बार हल्की से मध्यम बारिश के आसार हैं. इस दौरान अधिकतम तापमान 32 से 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25 से 27 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है. आज बारिश के साथ-साथ 20 से 30 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से ठंडी हवाएं चल सकती हैं. हालांकि, बारिश के बीच के उमस ज्यादा रहने की वजह से लोगों को हल्की चिपचिपाहट का सामना करना पड़ सकता है।


    पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का खतरा

    उत्तर भारत के पहाड़ी इलाकों खासकर हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में मानसून की रफ्तार तेज बनी हुई है. मौसम विभाग ने इन राज्यों के कई संवेदनशील इलाकों में भारी बारिश की चेतावनी दी है. साथ ही, पहाड़ी ढलानों पर भूस्खलन होने और नदियां उफान पर रहने का खतरा जताया गया है. ऐसे में यात्रियों और स्थानीय निवासियों को पहाड़ों की अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है।

    मुंबई में रुक-रुक होती रहेगी तेज बारिश
    देश के मध्य, पश्चिम और पूर्वी भारत की बात की जाए तो यहां पर मानसून पूरी तरह मेहरबान है. कोंकण, गोवा और गुजरात के तटीय क्षेत्रों में मानसूनी बारिश पूरी तरह जारी है. अनुमान है कि मुंबई और उसके आसपास के इलाकों में आज भी रुक-रुक कर तेज बारिश का दौर जारी रह सकता है. गुजरात क्षेत्र में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश के आसार जताए गए हैं. मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, बिहार और झारखंड में भी तेज बारिश की उम्मीद है. बिहार और ओडिशा में बारिश के साथ गर्जन के साथ तेज हवाएं चलने की भी उम्मीद है।


    पूर्वोत्तर भारत झमाझम बरसेंगे बादल

    दक्षिण भारत के तटीय कर्नाटक और केरल में मध्यम से व्यापक बारिश की संभावना है. वहीं तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है. पूर्वोत्तर भारत में आने वाले असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश में भी मानसूनी बादल छाए रहेंगे और कई स्थानों पर झमाझम बारिश होगी. तेज बरसात की वजह से कई जगहों पर बिजली गिरने और भूस्खलन होने का खतरा बना रहेगा।