Category: National

  • भाजपा अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार महाराष्ट्र पहुंचे नितिन नबीन, सिद्धिविनायक और लालबागचा राजा के किए दर्शन

    भाजपा अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार महाराष्ट्र पहुंचे नितिन नबीन, सिद्धिविनायक और लालबागचा राजा के किए दर्शन

    नई दिल्ली ।भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन बुधवार को गणेशोत्सव के बीच अपने पहले महाराष्ट्र दौरे पर मुंबई पहुंचे। भाजपा अध्यक्ष का पद संभालने के बाद यह उनका महाराष्ट्र का पहला दौरा है। मुंबई पहुंचने के बाद उन्होंने प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर में भगवान गणेश के दर्शन किए और पूजा-अर्चना की। इसके बाद नितिन नबीन लालबागचा राजा के दरबार में पहुंचे और गणपति बप्पा का आशीर्वाद लिया।

    नितिन नबीन के मुंबई दौरे के दौरान महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और मुंबई भाजपा अध्यक्ष अमित साटम भी उनके साथ मौजूद रहे। गणेशोत्सव के माहौल में हुए इस दौरे के दौरान उन्होंने महाराष्ट्र और देश की खुशहाली के लिए प्रार्थना की। दर्शन के बाद नितिन नबीन ने कहा कि गणेश उत्सव के अवसर पर महाराष्ट्र आना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने सिद्धिविनायक मंदिर और लालबागचा राजा के दर्शन को विशेष अनुभव बताया।

    नितिन नबीन ने कहा कि महाराष्ट्र में गणेश उत्सव के दौरान आकर वह खुद को सौभाग्यशाली मानते हैं। उन्होंने कहा कि सिद्धिविनायक मंदिर में दर्शन के बाद लालबागचा राजा के दर्शन उनके लिए बेहद खास क्षण है। उन्होंने महाराष्ट्र के लोगों और देशवासियों के कल्याण की कामना करते हुए प्रार्थना की।

    महाराष्ट्र में इस वर्ष गणेशोत्सव की शुरुआत 14 सितंबर से हुई है। मुंबई में गणेश उत्सव के दौरान सिद्धिविनायक मंदिर, लालबागचा राजा समेत कई प्रमुख गणपति स्थलों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी हुई है। लालबागचा राजा का गणेशोत्सव भी 14 सितंबर से शुरू हुआ है और 25 सितंबर तक चलेगा। ऐसे समय में नितिन नबीन का मुंबई दौरा गणेशोत्सव से जुड़े धार्मिक कार्यक्रमों के बीच हुआ।

    मुंबई में दर्शन के बाद नितिन नबीन के एक दिवसीय महाराष्ट्र दौरे में पुणे जाने का कार्यक्रम भी शामिल रहा। उनके कार्यक्रम में मुंबई और पुणे के प्रमुख गणपति मंदिरों तथा गणेश मंडलों में दर्शन और पूजा-अर्चना रखी गई। मुंबई में सिद्धिविनायक मंदिर और लालबागचा राजा के बाद उनका कार्यक्रम मालाबार हिल, बांद्रा रिक्लेमेशन और अन्य गणपति स्थलों पर दर्शन से जुड़ा था।

    मालाबार हिल में मुख्यमंत्री के सरकारी आवास के अलावा एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार के आवास पर स्थापित गणपति के दर्शन का कार्यक्रम भी रखा गया था। इसके बाद बांद्रा रिक्लेमेशन में गणपति दर्शन का कार्यक्रम निर्धारित था। दौरे के अगले चरण में नितिन नबीन के पुणे पहुंचने का कार्यक्रम था, जहां कसबा गणपति और दगडूशेठ हलवाई गणपति समेत अन्य गणपति मंडलों में दर्शन किए जाने थे।

    पुणे के कार्यक्रम में साने गुरुजी तरुण मित्र मंडल और कोथरूड स्थित श्री साई मित्र मंडल के गणपति दर्शन भी शामिल रहे। इस दौरान गणेशोत्सव के धार्मिक माहौल में पूजा-अर्चना और भगवान गणेश के दर्शन उनके दौरे का प्रमुख हिस्सा रहे।

    नितिन नबीन के महाराष्ट्र दौरे की शुरुआत मुंबई में गणेश दर्शन से हुई। सिद्धिविनायक मंदिर और लालबागचा राजा के दर्शन के दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और अमित साटम की मौजूदगी रही। भाजपा अध्यक्ष बनने के बाद नबीन का यह पहला महाराष्ट्र दौरा गणेशोत्सव के दौरान हुआ, जिसमें उन्होंने मुंबई और पुणे के प्रमुख गणपति स्थलों पर पहुंचकर पूजा-अर्चना की और महाराष्ट्र तथा देश के कल्याण की कामना की।

  • अंकित हत्याकांड में गायक भूपेंद्र ढींगरा गिरफ्तार, सोशल मीडिया पर वीडियो डालकर ली थी हत्या की जिम्मेदारी

    अंकित हत्याकांड में गायक भूपेंद्र ढींगरा गिरफ्तार, सोशल मीडिया पर वीडियो डालकर ली थी हत्या की जिम्मेदारी

    शामली। शामली में चर्चित गायक अंकित हत्याकांड में पुलिस को एक और सफलता मिली है। हत्याकांड के बाद सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर वारदात की जिम्मेदारी लेने का दावा करने वाले गुरुग्राम के गायक भूपेंद्र ढींगरा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उसे गुरुग्राम से पकड़ा है। वह गुरुग्राम की कृष्णा कॉलोनी में रहता है।

    वीडियो में खुद हत्या करने का किया था दावा
    पुलिस अधीक्षक के मुताबिक, भूपेंद्र ने सोशल मीडिया पर ज्यादा व्यू पाने के लिए अंकित हत्याकांड की जिम्मेदारी लेने वाला वीडियो पोस्ट किया था। वीडियो में उसने दावा किया था कि हत्याकांड को उसी ने अंजाम दिया है। पुलिस ने इस मामले में उसे वांछित किया था और उसकी तलाश की जा रही थी। जांच के दौरान पुलिस को उसके गुरुग्राम में होने की जानकारी मिली। इसके बाद टीम ने कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया।

    दो आरोपी पहले ही मुठभेड़ में मारे गए
    अंकित हत्याकांड में पुलिस इससे पहले दो आरोपियों को मुठभेड़ में मार गिरा चुकी है। इनमें सोनीपत के एक लाख रुपये के इनामी सुमित और मोहित शामिल हैं।

    वहीं, मामले में एक-एक लाख रुपये के इनामी करनाल निवासी सत्यम और आर्यन अभी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। दोनों की तलाश में पुलिस लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। मामले की जांच और फरार आरोपियों की तलाश जारी है।

  • ब्रिक्स समझौतों से बरेली के जरी-जरदोजी और फर्नीचर कारोबार को नई उम्मीद, विदेशी बाजार तक बनेगी पहुंच

    ब्रिक्स समझौतों से बरेली के जरी-जरदोजी और फर्नीचर कारोबार को नई उम्मीद, विदेशी बाजार तक बनेगी पहुंच

    बरेली। नई दिल्ली के भारत मंडपम में हुए ब्रिक्स सम्मेलन में हुए व्यापारिक करारों से बरेली के कारोबारियों को अपने स्थानीय उत्पादों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में नए अवसर मिलने की उम्मीद जगी है। ‘ईज ऑफ डूइंग कारोबार’ को बेहतर बनाने और वैश्विक व्यापार को बढ़ावा देने वाले इन समझौतों से जरी-जरदोजी, फर्नीचर, बांस उत्पादों के साथ मेंथा तेल और चावल के निर्यात को भी फायदा मिलने की संभावना जताई जा रही है।

    बरेली से हर साल करीब 1450 करोड़ रुपये का कारोबार होता है। इसमें अकेले खाड़ी देशों को होने वाला लगभग 100 करोड़ रुपये का जरी-जरदोजी निर्यात शामिल है। शहर का फर्नीचर और बांस से तैयार सामान भी विदेशी बाजारों में अपनी जगह बना चुका है। हालांकि, स्थानीय कारोबारियों के सामने अब तक सबसे बड़ी चुनौती प्रत्यक्ष निर्यात की सुविधा की रही है। बड़ी मात्रा में माल दिल्ली के कारोबारियों के माध्यम से विदेश भेजा जाता है।

    ब्रिक्स करार से कारोबारियों को सीधे बाजार तक पहुंच की उम्मीद
    राष्ट्रीय व्यापार कल्याण बोर्ड के सदस्य राजेंद्र गुप्ता के मुताबिक, ब्रिक्स देशों के साथ हुए नए व्यापारिक करारों से स्थानीय कारोबारियों के लिए कारोबार का दायरा बढ़ने की उम्मीद है। इससे बरेली के पारंपरिक उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से सीधे जुड़ने के अवसर मिल सकते हैं।

    जरी-जरदोजी बरेली की पहचान से जुड़े प्रमुख पारंपरिक उद्योगों में शामिल है। खाड़ी देशों में इसकी मांग पहले से है। ऐसे में व्यापारिक संबंधों में सुधार होने से निर्यातकों को नए खरीदार और बाजार मिलने की संभावना है।

    मेंथा तेल और फूड फ्लेवर का 1200 करोड़ का निर्यात
    बरेली मंडल के लिए मेंथा कारोबार भी निर्यात की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यहां से खाड़ी देशों और इस्राइल को मेंथा एसेंशियल ऑयल और फूड फ्लेवर का बड़े पैमाने पर निर्यात किया जाता है। इसका कारोबार लगभग 1200 करोड़ रुपये का है। खाड़ी देशों में इन उत्पादों का इस्तेमाल परफ्यूम, शैंपू, क्रीम और अलग-अलग खाद्य पदार्थों में किया जाता है।

    व्यापारिक संबंधों में विस्तार से इस क्षेत्र के निर्यातकों को भी नए अवसर मिलने की उम्मीद है। स्थानीय कारोबारी मानते हैं कि अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच आसान होने से पारंपरिक और कृषि आधारित उत्पादों का कारोबार बढ़ सकता है।

    6 लाख टन चावल उत्पादन, खाड़ी देशों में ब्रांड की मांग
    बरेली जिले में हर साल करीब 6 लाख टन चावल का उत्पादन होता है। यहां के कई चावल ब्रांड सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और ईरान जैसे देशों में लोकप्रिय हैं। बरेली मंडल को चावल उत्पादन और निर्यात क्लस्टर के रूप में विकसित किया जा रहा है।

    मंडल से बासमती और गैर-बासमती चावल देश के बड़े बंदरगाहों के जरिये विदेशी बाजारों तक पहुंचता है। ब्रिक्स देशों के साथ बेहतर व्यापारिक संबंधों से इस क्लस्टर को और विस्तार मिलने की उम्मीद है। कारोबारियों के मुताबिक, निर्यात के नए अवसर मिलने से स्थानीय उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय पहचान और मजबूत हो सकती है।

    ODOP के तहत बांस और फर्नीचर की विदेशों में मांग
    ‘एक जिला, एक उत्पाद’ यानी ओडीओपी योजना के तहत बांस के उत्पाद और फर्नीचर भी विदेशी खरीदारों का ध्यान खींच रहे हैं। फर्नीचर कारोबारी सौरभ गर्ग के मुताबिक, बांस से बने घर सजाने के सामान के अलावा सोफे, टेबल और कुर्सियों की विदेशों में अच्छी मांग है।

    उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों के साथ हुए व्यापारिक समझौतों से एसेंशियल ऑयल के साथ दूसरे स्थानीय उत्पादों के लिए भी निर्यात के नए रास्ते खुल सकते हैं। बरेली में बड़े पैमाने पर फर्नीचर का उत्पादन होता है, लेकिन सीधे निर्यात की सुविधा नहीं होने से कारोबारियों को अभी दिल्ली के जरिये विदेशी बाजारों तक पहुंच बनानी पड़ती है।

    समर्पित फर्नीचर केंद्र से मिल सकता है सीधा विदेशी ऑर्डर
    कारोबारियों का कहना है कि बरेली में यदि समर्पित फर्नीचर केंद्र विकसित होता है तो स्थानीय इकाइयों को विदेशी खरीदारों से सीधे ऑर्डर मिलने की संभावना बढ़ेगी। इससे बिचौलियों पर निर्भरता कम हो सकती है और कारोबारियों की आय में भी बढ़ोतरी हो सकती है।

    ब्रिक्स सम्मेलन के बाद बरेली के कारोबारी अब व्यापारिक करारों के जमीनी स्तर पर लागू होने और निर्यात सुविधाओं के विस्तार की उम्मीद लगाए हैं। जरी-जरदोजी से लेकर फर्नीचर, बांस उत्पाद, मेंथा और चावल तक स्थानीय उत्पादों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में विस्तार की संभावनाएं कारोबारियों के उत्साह को बढ़ा रही हैं।

  • यूपीआई एमडीआर शुल्क पर शरद पवार गुट के नेता जितेंद्र आव्हाड ने सरकार से शुल्क और आम लोगों पर असर स्पष्ट करने की मांग की

    यूपीआई एमडीआर शुल्क पर शरद पवार गुट के नेता जितेंद्र आव्हाड ने सरकार से शुल्क और आम लोगों पर असर स्पष्ट करने की मांग की

    नई दिल्ली । यूपीआई से होने वाले भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। शरद पवार गुट के नेता जितेंद्र आव्हाड ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी भी तरह का नया शुल्क या टैक्स लागू होने पर उसका असर अंततः आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है। उन्होंने सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की कि लोगों से कितना पैसा लिया जाएगा और इसके लिए किस तरह की व्यवस्था लागू की जा रही है।

    जितेंद्र आव्हाड का कहना है कि सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में लोगों को डिजिटल पेमेंट अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया है। बड़ी संख्या में लोग अब रोजमर्रा के सामान और दूसरी जरूरतों के भुगतान के लिए यूपीआई का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में शुल्क लगाने की चर्चा को लेकर सरकार को अपनी स्थिति साफ करनी चाहिए। उनका कहना है कि अगर व्यापारियों पर अतिरिक्त लागत आती है तो उसका असर सामान की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है।

    आव्हाड ने उदाहरण देते हुए कहा कि दुकानदार जब सामान का बिल बनाएंगे और उनकी लागत बढ़ेगी तो उसका कुछ हिस्सा ग्राहकों तक पहुंच सकता है। ऐसे में आम उपभोक्ता को बढ़े हुए खर्च का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार को अलग-अलग नामों से शुल्क की जानकारी देने के बजाय सीधे यह बताना चाहिए कि नई व्यवस्था में कितना पैसा लिया जाएगा और इसका असर किस पर पड़ेगा।

    त्योहारों के दौरान सामान की कीमतों का जिक्र करते हुए आव्हाड ने दीवाली, नवरात्रि और गणेश उत्सव जैसे अवसरों का उदाहरण दिया। उन्होंने पेड़े की कीमत का भी उल्लेख किया और कहा कि लोगों को यह स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए कि किसी वस्तु की कीमत बढ़ने के पीछे कौन-सा शुल्क या लागत जिम्मेदार है। उनका कहना था कि नाम बदलकर लोगों को भ्रमित करना उचित नहीं है और सरकार को शुल्क से जुड़ी पूरी जानकारी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करनी चाहिए।

    मौजूदा व्यवस्था को लेकर सरकारी स्पष्टीकरण में कहा गया है कि एमडीआर सरकार की ओर से वसूला जाने वाला टैक्स नहीं है। प्रस्तावित ढांचे के अनुसार व्यक्ति से व्यक्ति के बीच होने वाले यूपीआई लेनदेन पर शुल्क नहीं होगा। वहीं, निर्धारित शर्तों के तहत कुछ व्यापारी लेनदेन पर एमडीआर लागू होगा। सरकार ने यह भी कहा है कि छोटे व्यापारियों और आम उपयोगकर्ताओं पर अतिरिक्त बोझ सीमित रखने के लिए प्रावधान किए गए हैं।

    आव्हाड ने यूपीआई शुल्क के अलावा मनोज जरांगे पाटील से जुड़े मुद्दे पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि सरकार को मनोज जरांगे से बातचीत करनी चाहिए। उनके अनुसार बातचीत के माध्यम से इस मामले में आगे का रास्ता निकाला जा सकता है और संबंधित पक्षों के बीच संवाद जरूरी है।

    यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी यूसीसी को लेकर भी आव्हाड ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह केवल महाराष्ट्र तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि पूरे देश से जुड़ा मामला है। इस तरह यूपीआई एमडीआर, मनोज जरांगे के मुद्दे और यूसीसी को लेकर उन्होंने सरकार से स्पष्टता और बातचीत की जरूरत पर जोर दिया।

  • कासगंज के विशाल मेगा मार्ट में भीषण आग, 9 दमकल गाड़ियां जुटीं, आसपास के घर खाली कराए, बाजार बंद

    कासगंज के विशाल मेगा मार्ट में भीषण आग, 9 दमकल गाड़ियां जुटीं, आसपास के घर खाली कराए, बाजार बंद


    कासगंज।
    शहर के विशाल मेगा मार्ट में बुधवार दोपहर करीब 1 बजे अचानक आग लगने से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। आग की सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंच गईं। जिलाधिकारी प्रणय सिंह और पुलिस अधीक्षक ओपी सिंह ने घटनास्थल का जायजा लिया, जबकि आग पर काबू पाने के लिए कासगंज के अलावा एटा और हाथरस से दमकल की गाड़ियां बुलाई गईं।

    आग बुझाने के लिए कुल नौ दमकल गाड़ियां लगातार पानी की बौछार कर रही हैं। घटना को करीब दो घंटे बीत चुके हैं, लेकिन दमकलकर्मियों की कोशिशें अब भी जारी हैं। फिलहाल उनका पूरा ध्यान आग को विशाल मेगा मार्ट के भीतर सीमित रखने और उसे पूरी तरह बुझाने पर है।

    पीछे के घरों से लोगों को सुरक्षित निकाला
    प्रशासन के मुताबिक, फिलहाल आग विशाल मेगा मार्ट के अंदर ही लगी हुई है। आग आसपास के घरों तक न पहुंचे, इसके लिए पुलिस ने एहतियाती कदम उठाते हुए मार्ट के पीछे स्थित घरों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया है।

    सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए आसपास का बाजार भी बंद करा दिया गया है। पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर मौजूद हैं और स्थिति पर लगातार नजर रख रही हैं। राहत की बात यह है कि अभी तक आग की इस घटना में किसी व्यक्ति के हताहत होने की सूचना नहीं है।

    DM बोले- लगातार जारी है आग बुझाने का काम
    जिलाधिकारी प्रणय सिंह ने मौके पर पहुंचकर आग की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि आग पर काबू पाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और दमकल की टीमें मौके पर काम कर रही हैं।

    उन्होंने कहा कि आग किस वजह से लगी, इसकी जांच कराई जाएगी। जांच पूरी होने के बाद ही आग लगने के वास्तविक कारण का पता चल सकेगा। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता आग को पूरी तरह बुझाने और आसपास के इलाके में किसी तरह की जनहानि रोकने की है।

  • यूपी में पंचायत सहायकों का मानदेय बढ़ेगा, ₹6 हजार से बढ़ाकर ₹9 हजार करने का ऐलान

    यूपी में पंचायत सहायकों का मानदेय बढ़ेगा, ₹6 हजार से बढ़ाकर ₹9 हजार करने का ऐलान

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पंचायत सहायकों के मानदेय को लेकर सरकार ने बड़ा ऐलान किया है। पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि पंचायत सहायकों को अब ₹6 हजार के बजाय ₹9 हजार मासिक मानदेय दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि मानदेय की राशि अब सीधे पंचायत सहायकों के बैंक खातों में भेजी जाएगी।

    मंत्री राजभर ने बुधवार को मीडिया से बातचीत में बताया कि उन्होंने उसी सुबह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस मुद्दे पर चर्चा की है। उन्होंने धरने पर बैठे पंचायत सहायकों की मांगों को जायज बताते हुए उनके पक्ष में कई घोषणाएं कीं।

    डीएम की कमेटी की जांच के बाद ही हटाया जा सकेगा
    ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि अब पंचायत सहायकों को ग्राम प्रधान या पंचायत सचिव अपनी मर्जी से नहीं हटा सकेंगे। किसी पंचायत सहायक को हटाने के लिए डीएम के नेतृत्व में गठित कमेटी की जांच जरूरी होगी। जांच के बाद ही इस संबंध में कार्रवाई की जा सकेगी।

    मंत्री के मुताबिक, इस व्यवस्था का उद्देश्य पंचायत सहायकों की नौकरी से जुड़े फैसलों में मनमानी पर रोक लगाना है। मानदेय सीधे खाते में पहुंचने से भुगतान की प्रक्रिया में भी बदलाव आएगा।

    संजय निषाद के बयान पर बोले राजभर- चुनाव से पहले सभी अपना दांव आजमा रहे
    कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद के बयान पर भी ओम प्रकाश राजभर ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि संजय निषाद जितनी सीटें हारेंगे, उतनी सीटें राजभर एनडीए को जिताएगा। राजभर ने कहा कि चुनाव नजदीक आने के साथ हर नेता अपने-अपने राजनीतिक दांव आजमा रहा है।

    दरअसल, संजय निषाद ने दावा किया था कि निषाद पार्टी की वजह से भाजपा कई सीटों पर जीत हासिल करने में सफल रही थी। इसी बयान को लेकर राजभर से सवाल किया गया था।

    गोंडा हत्याकांड और सपा पर भी साधा निशाना
    अखिलेश यादव के सरकार से बाहर निकलने को लेकर दिए गए तंज के संदर्भ में राजभर ने गोंडा के व्यापारी हत्याकांड का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस मामले में सरकार ने कानूनी कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार किया और सरकार पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है।

    राजभर ने आरोप लगाया कि 80% घटनाएं सपा से जुड़े लोगों द्वारा की जा रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पीडीए की बैठकों में दलितों को बैठने तक की जगह नहीं मिलती।

    बोले- 2027 में जनता देगी जवाब
    सपा सरकार के कार्यकाल का जिक्र करते हुए ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि जनता उसके कार्यकाल के कारनामों को अभी भूली नहीं है। उन्होंने दावा किया कि 2027 के चुनाव में जनता इसका जवाब देगी।

    राजभर ने कहा कि सिर्फ बयानबाजी के आधार पर सरकार नहीं बनाई जा सकती। चुनावी राजनीति में नेताओं के दावों और बयानों के बीच उन्होंने अपने सहयोगी दल के नेताओं की टिप्पणियों पर भी प्रतिक्रिया दी।

  • महाराष्ट्र के आदिवासी स्कूलों को लेकर सीजेपी का नया अभियान, शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से जुड़ने की अपील

    महाराष्ट्र के आदिवासी स्कूलों को लेकर सीजेपी का नया अभियान, शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से जुड़ने की अपील

    नई दिल्ली ।महाराष्ट्र में आदिवासी बच्चों की शिक्षा और सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर सीजेपी ने नया अभियान शुरू करने की घोषणा की है। संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके ने एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों और आदिवासी स्कूलों की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाते हुए ‘आदिवासी स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू करने की बात कही है। उन्होंने इस अभियान से स्वयंसेवकों, शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के जुड़ने की अपील की है।

    अभिजीत दीपके ने सरकारी आदिवासी स्कूलों की मौजूदा स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिन स्कूलों में आदिवासी बच्चे पढ़ते हैं, वहां पढ़ाई के लिए जरूरी व्यवस्थाएं पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आदिवासी बच्चों को अच्छी और सम्मानजनक शिक्षा मिल सके।

    दीपके ने एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों यानी EMRS की स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आदिवासी बच्चों की शिक्षा के लिए बनाए गए इन स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं और व्यवस्थाओं की स्थिति पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है।

    उन्होंने स्वयंसेवकों, शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे ‘आदिवासी स्कूल ठीक करो’ अभियान से जुड़ें। उनके अनुसार अभियान के जरिए यह सुनिश्चित करने में मदद की जानी चाहिए कि आदिवासी बच्चों को उनके अधिकार के अनुरूप अच्छी शिक्षा और सम्मानजनक शैक्षणिक वातावरण मिल सके।

    दीपके ने महाराष्ट्र के आश्रम स्कूलों में बच्चों की मौत का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि पिछले दो वर्षों में इन स्कूलों में 590 से अधिक बच्चों की मौत हुई है। उन्होंने इन घटनाओं के पीछे स्कूलों में मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता, सांप के काटने की घटनाओं और बच्चों के लिए पर्याप्त बिस्तरों की उपलब्धता नहीं होने जैसी समस्याओं का उल्लेख किया।

    उन्होंने कहा कि बिस्तरों की कमी के कारण बच्चों को जमीन पर सोना पड़ता है और ऐसी परिस्थितियों में सांप के काटने की घटनाएं सामने आती हैं। उन्होंने इसे सरकार की ओर से मेडिकल लापरवाही का मामला बताया।

    सीजेपी का कहना है कि आदिवासी समुदाय का संसाधनों पर पहला हक है और शिक्षा के क्षेत्र में भी उन्हें प्राथमिकता मिलनी चाहिए। संगठन के अनुसार आदिवासी बच्चों को बेहतर से बेहतर शिक्षा सुविधाएं उपलब्ध कराना जरूरी है, ताकि उन्हें अपने अधिकार के अनुरूप शैक्षणिक अवसर मिल सकें।

    दीपके ने आदिवासी स्कूलों से जुड़े आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि कुल 720 स्कूलों को मंजूरी मिली है, लेकिन इनमें से केवल 477 स्कूल ही संचालित हो रहे हैं। उनके अनुसार सिर्फ 341 स्कूलों के पास अपनी पक्की इमारतें हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि इन स्कूलों में 28 हजार से अधिक पद खाली पड़े हैं।

    उन्होंने सवाल उठाया कि जब इन स्कूलों का उद्देश्य आदिवासी बच्चों को अच्छी शिक्षा उपलब्ध कराना था, तो बड़ी संख्या में बच्चे अभी भी स्कूलों, शिक्षकों और बुनियादी सुविधाओं का इंतजार क्यों कर रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर सीजेपी ने अभियान के माध्यम से संबंधित व्यवस्थाओं पर ध्यान देने और लोगों की भागीदारी बढ़ाने की अपील की है।

    अभियान के तहत संगठन ने आदिवासी बच्चों की शिक्षा से जुड़े मुद्दों को उठाने और स्कूलों की स्थिति में सुधार के लिए स्वयंसेवकों, शिक्षाविदों तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं को साथ आने का आह्वान किया है। संगठन ने कहा है कि आदिवासी बच्चों को अच्छी और सम्मानजनक शिक्षा मिलना सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

  • बिहार में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे शिवराज सिंह चौहान, सम्राट चौधरी के साथ बोट से प्रभावित गांवों और खेतों का किया दौरा

    बिहार में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे शिवराज सिंह चौहान, सम्राट चौधरी के साथ बोट से प्रभावित गांवों और खेतों का किया दौरा

    नई दिल्ली । केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान बुधवार को बिहार के दौरे पर पहुंचे, जहां उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा लिया। दोनों नेताओं ने बोट से हाजीपुर के तेरसिया और सरायपुर गांवों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने बाढ़ के पानी में डूबे खेतों और प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति को करीब से देखा।

    बाढ़ प्रभावित इलाकों के दौरे के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने ग्रामीणों से सीधे संवाद किया और उनकी समस्याओं की जानकारी ली। उन्होंने लोगों से बाढ़ के कारण हुए नुकसान के बारे में पूछा। ग्रामीणों से फसलों, मकानों और अन्य संपत्तियों को हुए नुकसान की जानकारी ली गई। इस दौरान प्रभावित लोगों ने बाढ़ के कारण सामने आ रही परेशानियों के बारे में भी केंद्रीय मंत्री को बताया।

    शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बोट के जरिए उन इलाकों का निरीक्षण किया, जहां बाढ़ का पानी फैला हुआ है। तेरसिया और सरायपुर गांवों के साथ आसपास के खेतों में पानी भरने की स्थिति को भी देखा गया। दौरे का उद्देश्य बाढ़ से प्रभावित लोगों की मौजूदा स्थिति और उन्हें हो रही परेशानियों की जानकारी प्रत्यक्ष रूप से लेना था।

    मौके पर मौजूद अधिकारियों से भी बाढ़ की स्थिति के बारे में जानकारी ली गई। अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्रों में चल रहे राहत और बचाव कार्यों की स्थिति से केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री को अवगत कराया। शिवराज सिंह चौहान ने राहत कार्यों की प्रगति भी देखी और प्रभावित इलाकों में लोगों तक पहुंचाई जा रही सहायता की जानकारी ली।

    दौरे के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर बाढ़ से प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रयासरत हैं। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति को समझने के लिए ग्रामीणों से बातचीत की और नुकसान की जानकारी ली।

    बिहार के हाजीपुर क्षेत्र में बाढ़ के कारण गांवों और खेतों में पानी पहुंचने से प्रभावित लोगों के सामने कई तरह की परेशानियां खड़ी हुई हैं। ऐसे में केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री का बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का संयुक्त दौरा स्थिति का प्रत्यक्ष जायजा लेने के उद्देश्य से किया गया। निरीक्षण के दौरान प्रभावित गांवों, जलमग्न खेतों और राहत कार्यों की स्थिति पर ध्यान दिया गया।

    शिवराज सिंह चौहान ने ग्रामीणों से बातचीत के दौरान उनके सामने मौजूद समस्याओं को समझने का प्रयास किया। उन्होंने फसल और मकानों को हुए नुकसान की जानकारी ली, जबकि अधिकारियों से बाढ़ की स्थिति और राहत-बचाव कार्यों के बारे में जानकारी प्राप्त की। दौरे के दौरान केंद्र और राज्य सरकार की ओर से प्रभावित लोगों को सहायता उपलब्ध कराने की बात दोहराई गई।

  • UPI चार्ज को लेकर राहुल गांधी का केंद्र पर हमला, प्रधानमंत्री मोदी से शुल्क वापस लेने की मांग

    UPI चार्ज को लेकर राहुल गांधी का केंद्र पर हमला, प्रधानमंत्री मोदी से शुल्क वापस लेने की मांग


    नई दिल्ली ।
    2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट UPI भुगतानों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR की नई व्यवस्था को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए व्यवस्था को वापस लेने की मांग की है। उन्होंने अपने बयान में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का भी उल्लेख किया।

    राहुल गांधी ने बुधवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया। इसमें उन्होंने UPI पर लागू होने वाली नई शुल्क व्यवस्था को लेकर सरकार की आलोचना की। उन्होंने इंदिरा गांधी के एक पुराने कथन का जिक्र करते हुए कहा कि उनका झुकाव न बाईं ओर था और न दाईं ओर, बल्कि उनकी सोच सीधी थी।

    इसके बाद राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सरकार ने अमेरिका के सामने झुकने का रास्ता अपनाया है। उन्होंने UPI पर शुल्क व्यवस्था को लेकर सरकार से अपना फैसला वापस लेने की अपील की। राहुल गांधी ने कहा कि सरकार को इस मामले में हिम्मत दिखाते हुए UPI शुल्क व्यवस्था को वापस लेना चाहिए।

    इस मुद्दे पर कांग्रेस की ओर से भी सरकार पर सवाल उठाए गए हैं। कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट UPI भुगतान पर लागू होने वाली MDR व्यवस्था को लेकर भुगतान कंपनियों के संभावित लाभ का मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि PhonePe और Google Pay का डिजिटल भुगतान बाजार में बड़ा हिस्सा है और MDR से इनके राजस्व तथा मूल्यांकन पर असर पड़ सकता है।

    हालांकि, सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि MDR को टैक्स नहीं माना जा सकता। नई व्यवस्था के तहत UPI से व्यक्ति-से-व्यक्ति यानी P2P भुगतान पूरी तरह मुफ्त रहेंगे। 2,000 रुपये तक के मर्चेंट भुगतान पर भी MDR नहीं लगेगा। छोटे व्यापारियों के लिए भी शून्य MDR की व्यवस्था जारी रहेगी। सरकार के अनुसार करीब 96 प्रतिशत मर्चेंट UPI लेनदेन नई व्यवस्था से प्रभावित नहीं होंगे।

    नई व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होगी। 2,000 रुपये से अधिक के पात्र व्यक्ति-से-व्यापारी यानी P2M लेनदेन पर सामान्य MDR दर 0.4 प्रतिशत निर्धारित की गई है। कुछ विशेष क्षेत्रों में अलग शुल्क व्यवस्था रखी गई है। उच्च मूल्य वाले पात्र लेनदेन में MDR की अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति लेनदेन निर्धारित की गई है।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि MDR का भुगतानकर्ता ढांचे में इस्तेमाल होने वाला शुल्क है और इसे सरकार द्वारा टैक्स के रूप में वसूल नहीं किया जाएगा। व्यक्ति से व्यक्ति के बीच पैसे भेजने वाले UPI लेनदेन पर राशि की कोई सीमा लागू नहीं होगी और ऐसे भुगतान मुफ्त रहेंगे।

    छोटे व्यापारियों को भी नई व्यवस्था में राहत दी गई है। UPI QR के माध्यम से हर महीने एक लाख रुपये तक प्राप्त करने वाले पात्र छोटे व्यापारियों के लेनदेन पर शून्य MDR का प्रावधान रखा गया है। इसका उद्देश्य छोटे कारोबारियों पर अतिरिक्त भुगतान लागत का असर सीमित रखना है।

    नई व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस ऐसे समय में सामने आई है, जब UPI देश में डिजिटल भुगतान का प्रमुख माध्यम बन चुका है। विपक्ष इसे लेकर सरकार की नीति पर सवाल उठा रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि व्यवस्था का उद्देश्य UPI के संचालन और विस्तार को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाना है। इस पूरे मामले में राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं और नई MDR व्यवस्था के लागू होने के बाद इसके प्रभाव को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

  • पीएम मोदी 17 सितंबर को सेमीकॉन इंडिया 2026 का उद्घाटन करेंगे, 52 देशों की 600 से अधिक कंपनियां लेंगी भाग

    पीएम मोदी 17 सितंबर को सेमीकॉन इंडिया 2026 का उद्घाटन करेंगे, 52 देशों की 600 से अधिक कंपनियां लेंगी भाग

    नई दिल्ली ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 सितंबर को सुबह करीब 10 बजे राष्ट्रीय राजधानी स्थित यशोभूमि में सेमीकॉन इंडिया 2026 का उद्घाटन करेंगे। इस अवसर पर प्रधानमंत्री उपस्थित लोगों को संबोधित भी करेंगे। तीन दिन तक चलने वाला यह सम्मेलन और प्रदर्शनी 17 से 19 सितंबर 2026 तक आयोजित की जाएगी। आयोजन में 52 देशों की 600 से अधिक कंपनियों और प्रतिनिधियों के शामिल होने की जानकारी दी गई है।

    सेमीकॉन इंडिया 2026 की इस वर्ष की थीम ‘सिलिकॉन से सिस्टम तक: इको सिस्टम का निर्माण’ रखी गई है। सम्मेलन में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मूल्य श्रृंखला से जुड़े भारतीय और वैश्विक उद्योगों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। इसके अलावा नीति निर्माता, निवेशक, शोधकर्ता, स्टार्टअप, शैक्षणिक संस्थान और छात्र भी आयोजन में शामिल होंगे।

    सम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य भारत में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में सहयोग, निवेश, नवाचार और प्रतिभा विकास को बढ़ावा देना है। आयोजन के दौरान विभिन्न विषयों पर समानांतर सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें डिस्प्ले उद्योग की प्रगति से जुड़े सत्र, सहयोग और संयुक्त उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए छह कंट्री राउंडटेबल तथा महिला नेतृत्व पर केंद्रित एक मंच भी शामिल है।

    सेमीकॉन इंडिया 2026 में सेमीकंडक्टर की पूरी मूल्य श्रृंखला को एक साथ प्रदर्शित करने पर जोर दिया गया है। इसमें सेमीकंडक्टर सामग्री और उपकरणों से लेकर चिप डिजाइन, निर्माण, उन्नत पैकेजिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और सिस्टम तक की पूरी प्रक्रिया को प्रस्तुत किया जाएगा।

    आयोजन में ‘रेत से सिलिकॉन से सिस्टम तक’ नाम से एक नया मूल्य श्रृंखला अनुभव भी शामिल होगा। इसके माध्यम से सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम में कच्चे स्तर से तैयार सिस्टम तक की पूरी यात्रा को प्रदर्शित किया जाएगा।

    आयोजकों के अनुसार, सेमीकॉन इंडिया 2026 में 600 से अधिक कंपनियों की भागीदारी होगी और करीब 50,000 आगंतुकों के पहुंचने की उम्मीद है। आयोजन में 52 देशों के प्रतिनिधियों के साथ 400 से अधिक अधिकारी और 150 से अधिक वक्ता शामिल होंगे।

    प्रदर्शनी में कई देशों के लिए अलग पवेलियन भी बनाए जाएंगे। जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, नीदरलैंड, सिंगापुर और स्वीडन की भागीदारी वाले छह कंट्री पवेलियन इसमें शामिल होंगे। इसके अलावा 12 स्टेट बूथ भी लगाए जाएंगे।

    सेमीकॉन इंडिया 2026 में स्टार्टअप पवेलियन और इनोवेशन शोकेस भी आयोजित किया जाएगा। इसके साथ स्टूडेंट हैकाथॉन और वर्कफोर्स डेवलपमेंट पवेलियन भी कार्यक्रम का हिस्सा होंगे। इससे सम्मेलन में उद्योग, नवाचार, शिक्षा और कौशल विकास से जुड़े अलग-अलग पहलुओं को एक मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा।

    17 सितंबर से शुरू होने वाले इस तीन दिवसीय आयोजन के दौरान सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र से जुड़े वैश्विक तथा भारतीय हितधारक एक साथ जुटेंगे। सम्मेलन के जरिए सहयोग, निवेश और नवाचार से जुड़े विषयों पर चर्चा होगी तथा सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला के विभिन्न चरणों को प्रदर्शनी के माध्यम से सामने रखा जाएगा।