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  • फतेहपुर से योगी का बड़ा ऐलान: NEET पेपर लीक के दोषियों की संपत्ति होगी जब्त, संसद में आएगा सख्त कानून

    फतेहपुर से योगी का बड़ा ऐलान: NEET पेपर लीक के दोषियों की संपत्ति होगी जब्त, संसद में आएगा सख्त कानून


    फतेहपुर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को फतेहपुर जिले के मदारीपुर कला मैदान में आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इस दौरान उन्होंने विकास कार्यों के साथ-साथ कानून-व्यवस्था, भर्ती प्रक्रिया और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर भी सरकार का पक्ष रखा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले फतेहपुर आकांक्षी जिलों में शामिल था और रोजगार, स्वास्थ्य तथा बुनियादी सुविधाओं के मामले में काफी पीछे था। उन्होंने दावा किया कि पिछले नौ वर्षों में जिले की तस्वीर बदली है और अब यह आकांक्षी जिलों की श्रेणी से बाहर आ चुका है।

    योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पहले युवाओं की नौकरियों में धांधली होती थी, जबकि वर्तमान सरकार पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के जरिए योग्य अभ्यर्थियों को नियुक्ति दे रही है। उन्होंने मेडिकल कॉलेज, सड़क, पुल, बिजली, अस्पताल, निवेश और कंपोजिट विद्यालय जैसी परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि विकास अब केवल चुनिंदा क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि गांव-गांव तक पहुंच रहा है।

    विपक्ष पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकारों के दौरान युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ और नकल माफिया को संरक्षण मिला। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ सरकार सख्त कार्रवाई कर रही है। NEET परीक्षा से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि दोषियों को केवल सजा ही नहीं मिलेगी, बल्कि उनकी संपत्तियां भी जब्त की जाएंगी। साथ ही पेपर लीक रोकने के लिए संसद में सख्त कानून लाने की भी बात कही।

    कानून-व्यवस्था पर मुख्यमंत्री ने दोहराया कि प्रदेश में माफिया और अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं बची है। उन्होंने कहा कि ऐसे तत्वों के सामने अब केवल जेल या फिर कड़ी कानूनी कार्रवाई का रास्ता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी के नेताओं ने सरकारी जमीनों पर कब्जे किए थे, जिन्हें अब मुक्त कराया जा रहा है।

    अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि डिजिटल इंडिया और राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने देश के युवाओं को नई पहचान दी है। उन्होंने फतेहपुर की जनता से विकास की रफ्तार बनाए रखने के लिए भाजपा को मजबूत समर्थन देने की अपील भी की।

  • 'विनीत जोशी का ट्रांसफर सजा नहीं, जवाबदेही तय करे सरकार', NEET विवाद पर विजेता दहिया का हमला

    'विनीत जोशी का ट्रांसफर सजा नहीं, जवाबदेही तय करे सरकार', NEET विवाद पर विजेता दहिया का हमला


    नई दिल्ली। NEET पेपर लीक विवाद को लेकर देशभर में जारी छात्र आंदोलन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की पूर्व प्रवक्ता विजेता दहिया ने परीक्षा प्रणाली की जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि किसी अधिकारी का सिर्फ तबादला कर देना समस्या का समाधान नहीं है और न ही इसे सजा माना जा सकता है। उनका कहना है कि जब किसी विभाग में गंभीर लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदारी तय होना सबसे जरूरी है।

    आईएएनएस से बातचीत में विजेता दहिया ने कहा कि NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र महीनों नहीं, बल्कि कई बार वर्षों तक दिन-रात मेहनत करते हैं। परीक्षा के बाद सफलता की उम्मीद लेकर बैठे छात्रों को जब यह पता चलता है कि पेपर लीक जैसी घटनाओं के कारण पूरी परीक्षा प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ गई है और दोबारा परीक्षा देनी पड़ सकती है, तो इसका उनके मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि यही वजह है कि कई लोग इन घटनाओं से जुड़ी छात्र मौतों को केवल आत्महत्या नहीं, बल्कि व्यवस्था की विफलता का परिणाम मानते हैं।

    दहिया ने दावा किया कि छात्र आंदोलन को लेकर सरकार और सीजेपी के प्रतिनिधियों के बीच सकारात्मक बातचीत हुई है। उनके अनुसार सरकार ने सिद्धांततः यह आश्वासन दिया है कि पेपर लीक प्रकरण से प्रभावित होकर जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने पर विचार किया जाएगा। इसके अलावा आंदोलनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने का भी भरोसा दिया गया है। हालांकि उन्होंने कहा कि आंदोलन की तीसरी और प्रमुख मांग शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तथा जिम्मेदारी तय करने की रही है।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन का उद्देश्य केवल विरोध प्रदर्शन करना नहीं, बल्कि परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुधार सुनिश्चित कराना है। उनका मानना है कि देश के लाखों छात्रों का भरोसा तभी लौटेगा, जब सरकार ठोस और प्रभावी कदम उठाएगी।

    विपक्षी दलों से फंडिंग मिलने के आरोपों को भी विजेता दहिया ने सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन पूरी तरह आम लोगों के सहयोग से चल रहा है। कई लोग अपनी क्षमता के अनुसार भोजन, पंखे, कूलर, कालीन और अन्य आवश्यक सामान उपलब्ध करा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई बार इतनी अधिक सहायता मिल जाती है कि अतिरिक्त सहयोग लेने से भी मना करना पड़ता है। उनके अनुसार यह किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि जनता और छात्रों का आंदोलन है।

    विजेता दहिया ने कहा कि वे अब सीजेपी की आधिकारिक प्रवक्ता नहीं हैं, लेकिन एक समर्थक के रूप में आंदोलन से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि शुरुआत से ही राजनीतिक दलों से अपील की गई थी कि यदि वे छात्रों का समर्थन करना चाहते हैं तो पार्टी के झंडों के बिना आंदोलन में शामिल हों। उन्होंने माना कि विभिन्न दलों के समर्थन से आंदोलन को मजबूती मिली है, लेकिन इसकी मूल भावना गैर-दलीय जन आंदोलन की ही है।

    उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी के तबादले का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि यदि किसी अधिकारी के कार्यकाल में इतनी बड़ी गड़बड़ी सामने आती है तो केवल विभाग बदल देना जवाबदेही तय करने के बराबर नहीं है। उनका कहना है कि वास्तविक सुधार तभी संभव होगा, जब जिम्मेदार लोगों के खिलाफ स्पष्ट कार्रवाई हो और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था बनाई जाए।

  • NEET विवाद पर बड़ा फैसला 36 दिन के आंदोलन के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने छोड़ा पद सरकार ने स्वीकारा इस्तीफा

    NEET विवाद पर बड़ा फैसला 36 दिन के आंदोलन के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने छोड़ा पद सरकार ने स्वीकारा इस्तीफा


    नई दिल्ली: देशभर में परीक्षा प्रणाली को लेकर उठे विवाद और दिल्ली के जंतर-मंतर पर 36 दिनों से जारी छात्र आंदोलन के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा राजनीतिक फैसला लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। लंबे समय से छात्र संगठन, विपक्षी दल और विभिन्न सामाजिक संगठन परीक्षा प्रणाली में कथित गड़बड़ियों को लेकर उनकी जवाबदेही तय करने और इस्तीफे की मांग कर रहे थे। सरकार के इस फैसले को आंदोलन की सबसे बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

    पिछले कई सप्ताह से राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर हजारों छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे थे। आंदोलन के दौरान सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की बातचीत भी हुई, लेकिन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर सहमति नहीं बन सकी थी। आखिरकार सरकार ने बड़ा निर्णय लेते हुए धर्मेंद्र प्रधान को पद छोड़ने का निर्देश दिया और उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया।

    इस्तीफे की खबर सामने आते ही जंतर-मंतर पर मौजूद प्रदर्शनकारियों में उत्साह का माहौल बन गया। छात्रों ने नारेबाजी कर इसे लोकतांत्रिक संघर्ष और एकजुटता की जीत बताया। छात्र नेताओं का कहना है कि यह केवल पहला कदम है और अब सरकार को परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और व्यापक शिक्षा सुधारों के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।

    विपक्षी दलों ने भी इस घटनाक्रम को छात्रों और जनता की आवाज की जीत बताया है। विपक्ष का दावा है कि संसद से लेकर सड़क तक लगातार बने जनदबाव और विरोध प्रदर्शनों के कारण सरकार को यह फैसला लेना पड़ा। विपक्षी नेताओं ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षा प्रणाली को अधिक विश्वसनीय बनाने की मांग दोहराई है।

    अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी किसे सौंपी जाएगी। राजनीतिक गलियारों में नए शिक्षा मंत्री के नाम को लेकर चर्चाएं तेज हैं। माना जा रहा है कि केंद्र सरकार जल्द ही नए शिक्षा मंत्री की घोषणा कर सकती है और शिक्षा सुधारों के लिए नई कार्ययोजना भी सामने ला सकती है।

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच देशभर के छात्र और अभिभावक सरकार के अगले कदम पर नजर बनाए हुए हैं। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और तकनीक आधारित बनाने के लिए बड़े फैसले लिए जा सकते हैं।

  • देश की राजनीति में बड़ा झटका NEET विवाद के बीच धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा जवाबदेही का दिया संदेश

    देश की राजनीति में बड़ा झटका NEET विवाद के बीच धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा जवाबदेही का दिया संदेश

    नई दिल्ली: देशभर में NEET-UG परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर जारी विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए काम किया है और किसी भी परिस्थिति में अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटे।

    धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया पर अपने इस्तीफे की जानकारी साझा करते हुए एक भावुक संदेश भी जारी किया। उन्होंने लिखा कि पिछले चार दशक से अधिक समय से वे छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहे हैं। उनका विश्वास हमेशा इस बात पर रहा है कि मजबूत, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही किसी भी राष्ट्र के विकास की आधारशिला होती है।

    उन्होंने अपने पत्र में कहा कि 3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने तत्काल कार्रवाई की। मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई, परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजित करने का निर्णय लिया गया और अगले वर्ष से NEET परीक्षा को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) मोड में कराने की घोषणा भी की गई।

    धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि सरकार ने परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और छात्रों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उनका मानना है कि सार्वजनिक जीवन में जवाबदेही लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसी भावना के तहत उन्होंने अपना इस्तीफा सौंपने का निर्णय लिया।

    गौरतलब है कि NEET-UG परीक्षा में कथित पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं को लेकर पिछले कई सप्ताह से देशभर में छात्र संगठन प्रदर्शन कर रहे थे। दिल्ली के जंतर-मंतर सहित कई राज्यों में परीक्षा प्रणाली में सुधार, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और जवाबदेही तय करने की मांग उठाई जा रही थी।

    हालांकि, इस घटनाक्रम पर केंद्र सरकार की ओर से आधिकारिक रूप से इस्तीफा स्वीकार किए जाने अथवा नए शिक्षा मंत्री की नियुक्ति को लेकर विस्तृत जानकारी का इंतजार है।

    नोट: यह खबर आपके द्वारा साझा की गई जानकारी पर आधारित है। यदि आधिकारिक तौर पर राष्ट्रपति भवन या प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से इस्तीफा स्वीकार किए जाने या नए मंत्री की घोषणा होती है, तो उससे संबंधित स्थिति अलग हो सकती है।

  • SVEP से ग्रामीण उद्यमिता को नई उड़ान, 4.32 लाख कारोबारों को मिला सहारा; 86% लाभार्थी वंचित वर्गों से

    SVEP से ग्रामीण उद्यमिता को नई उड़ान, 4.32 लाख कारोबारों को मिला सहारा; 86% लाभार्थी वंचित वर्गों से


    नई दिल्ली: ग्रामीण भारत में उद्यमिता को बढ़ावा देने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में केंद्र सरकार की स्टार्ट-अप विलेज एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम (SVEP) योजना प्रभावी साबित हो रही है। सरकार ने शनिवार को जानकारी दी कि जून 2026 के अंत तक इस योजना के माध्यम से 4.32 लाख ग्रामीण उद्यमों को सहायता प्रदान की जा चुकी है। इससे न केवल हजारों लोगों को स्वरोजगार मिला है, बल्कि उनकी आय और मुनाफे में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

    सरकार के अनुसार, इस योजना का सबसे बड़ा लाभ समाज के वंचित वर्गों तक पहुंचा है। करीब 86 प्रतिशत लाभार्थी उद्यमी अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और अल्पसंख्यक समुदायों से आते हैं। यह योजना सामाजिक समावेशन और आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत उदाहरण बनकर उभरी है।

    असम, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश ऐसे राज्य हैं, जहां SVEP के तहत सबसे अधिक ग्रामीण उद्यम स्थापित किए गए हैं। इन राज्यों में स्थानीय स्तर पर छोटे व्यवसायों को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और संस्थागत सहयोग मिलने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिली है।

    SVEP का संचालन स्टेट रूरल लाइवलीहुड मिशन (SRLM) के माध्यम से किया जाता है। इसके तहत गैर-कृषि आधारित ग्रामीण उद्यमों को व्यवसाय शुरू करने और आगे बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण, मेंटरिंग, वित्तीय सहायता तथा सामुदायिक सहयोग उपलब्ध कराया जाता है। योजना का उद्देश्य गांवों में आत्मनिर्भर उद्यमियों की नई पीढ़ी तैयार करना है।

    सरकार ने बताया कि स्वयं सहायता समूह (SHG), कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन-एंटरप्राइज प्रमोशन (CRP-EP), बैंक लिंकेज और प्रधानमंत्री मुद्रा योजना जैसी योजनाओं के साथ समन्वय कर SVEP का दायरा लगातार बढ़ाया गया है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यम शुरू करने के लिए वित्त और मार्गदर्शन दोनों उपलब्ध हो रहे हैं।

    योजना के विस्तार के लिए केंद्र सरकार ने फरवरी 2026 तक 942.09 करोड़ रुपए की केंद्रीय हिस्सेदारी जारी की है। यह राशि योजना की शुरुआत के शुरुआती वर्षों में जारी 112.39 करोड़ रुपए की तुलना में लगभग 738 प्रतिशत अधिक है, जो सरकार की बढ़ती प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

    योजना के तहत प्रत्येक ब्लॉक के लिए 6.50 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जबकि प्रति उद्यम औसत निवेश 27,083 रुपए निर्धारित किया गया है। सरकार का कहना है कि सीमित निवेश के बावजूद यह मॉडल ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ और लाभकारी व्यवसाय स्थापित करने में सफल रहा है।

    SVEP की एक खास विशेषता इसका कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन-एंटरप्राइज प्रमोशन (CRP-EP) मॉडल है। इन संसाधन व्यक्तियों का चयन प्रशिक्षण और प्रमाणन के बाद किया जाता है। इनमें स्थानीय लोगों को प्राथमिकता दी जाती है और कम से कम 90 प्रतिशत CRP-EP स्वयं सहायता समूहों से जुड़े परिवारों से चुने जाते हैं। साथ ही इस कैडर में महिलाओं की न्यूनतम 60 प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित की गई है।

    प्रत्येक CRP-EP लगभग 50 उद्यमों को प्रशिक्षण, व्यवसायिक मार्गदर्शन, बैंक ऋण और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने में सहयोग करता है। सरकार का मानना है कि मजबूत सामुदायिक संस्थाओं और स्थानीय नेतृत्व के सहयोग से ग्रामीण उद्यमिता न केवल गरीबी उन्मूलन का प्रभावी माध्यम बन रही है, बल्कि महिलाओं, युवाओं और पहली पीढ़ी के उद्यमियों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में भी अहम भूमिका निभा रही है।

  • 69 हजार 725 करोड़ का मेगा निवेश भारत को वैश्विक शिपबिल्डिंग हब बनाने की तैयारी समुद्री अर्थव्यवस्था को मिलेगा बूस्ट

    69 हजार 725 करोड़ का मेगा निवेश भारत को वैश्विक शिपबिल्डिंग हब बनाने की तैयारी समुद्री अर्थव्यवस्था को मिलेगा बूस्ट


    नई दिल्ली: भारत को वैश्विक समुद्री शक्ति बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए देश के जहाज निर्माण (शिपबिल्डिंग) उद्योग के लिए 69,725 करोड़ रुपए के व्यापक पैकेज को मंजूरी दी है। इस महत्वाकांक्षी पैकेज का उद्देश्य घरेलू शिपयार्ड की क्षमता बढ़ाना, उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना, समुद्री क्षेत्र के लिए दीर्घकालिक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना और रोजगार के नए अवसर सृजित करना है।

    लोकसभा में पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने बताया कि सरकार भारतीय शिपबिल्डिंग सेक्टर को मजबूत करने के लिए बहुस्तरीय रणनीति पर काम कर रही है। इसके तहत 24,736 करोड़ रुपए की शिपबिल्डिंग फाइनेंशियल असिस्टेंस स्कीम लागू की जाएगी, जिससे भारतीय शिपयार्ड की लागत वैश्विक शिपयार्ड के मुकाबले अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेगी।

    इस पैकेज का सबसे बड़ा हिस्सा 25,000 करोड़ रुपए का मैरीटाइम डेवलपमेंट फंड है। इसमें 20,000 करोड़ रुपए का मैरीटाइम इन्वेस्टमेंट फंड और 5,000 करोड़ रुपए का इंटरेस्ट इंसेंटिवाइजेशन फंड शामिल किया गया है। इस फंड के जरिए जहाज निर्माण, बंदरगाहों और समुद्री अवसंरचना परियोजनाओं को दीर्घकालिक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

    सरकार ने 19,989 करोड़ रुपए की शिपबिल्डिंग डेवलपमेंट स्कीम (SBDS) को भी मंजूरी दी है। इस योजना के तहत नए ग्रीनफील्ड शिपबिल्डिंग क्लस्टर विकसित किए जाएंगे और मौजूदा शिपयार्ड का विस्तार किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य देश की जहाज निर्माण क्षमता बढ़ाकर प्रति वर्ष 45 लाख ग्रॉस टनेज तक पहुंचाना है।

    यह पहल मैरीटाइम इंडिया विजन 2030 और मैरीटाइम अमृतकाल विजन 2047 के अनुरूप है, जिनका उद्देश्य भारत को विश्व के प्रमुख जहाज निर्माण केंद्रों में शामिल करना है। सरकार का मानना है कि इससे समुद्री व्यापार, निर्यात और औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी।

    शिपबिल्डिंग उद्योग को प्रोत्साहन देने के लिए सरकार ने कई नीतिगत सुधार भी किए हैं। 19 सितंबर 2025 को 10,000 ग्रॉस टनेज (GT) या उससे अधिक क्षमता वाले भारतीय ध्वज वाले वाणिज्यिक जहाजों और भारत में निर्मित 1,500 GT या उससे अधिक क्षमता वाले जहाजों को इन्फ्रास्ट्रक्चर का दर्जा दिया गया था। इससे इस क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने और वित्तपोषण आसान बनाने में मदद मिलेगी।

    सरकार ने जहाजों की मांग को एकीकृत करने की रणनीति भी तैयार की है। इसके तहत 400 से अधिक नए जहाजों के अधिग्रहण की योजना बनाई गई है, जिससे भारतीय शिपयार्ड को लंबे समय तक ऑर्डर मिलने की स्पष्टता रहेगी और उद्योग में स्थिरता आएगी।

    इसके अलावा आंध्र प्रदेश, गुजरात और तमिलनाडु में तीन नए ग्रीनफील्ड शिपबिल्डिंग क्लस्टर विकसित करने को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी गई है। इन क्लस्टरों के जरिए आधुनिक तकनीक, कौशल विकास, रोजगार सृजन और समुद्री उद्योग के विस्तार को बढ़ावा मिलेगा।

    सरकार का मानना है कि यह ऐतिहासिक निवेश पैकेज भारत की समुद्री अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई देगा, घरेलू जहाज निर्माण उद्योग को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करेगा और देश को भविष्य में एक प्रमुख वैश्विक शिपबिल्डिंग हब के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

  • भारत की दो टूक…. जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में भारतीय क्षेत्रों पर चीन ने कर रखा है अवैध कब्जा

    भारत की दो टूक…. जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में भारतीय क्षेत्रों पर चीन ने कर रखा है अवैध कब्जा


    नई दिल्ली।
    भारत (India) ने दो टूक शब्दों में कहा है कि उसने कभी भी चीन (China) की संप्रभुता का उल्लंघन नहीं किया है, उलटा चीन जम्मू और कश्मीर (Jammu and Kashmir) तथा लद्दाख (Ladakh) में भारतीय क्षेत्र पर अवैध कब्जा किए हुए है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल (Randhir Jaiswal) से शुक्रवार को मीडिया ब्रीफिंग में यह सवाल पूछा गया कि हाल ही में मनीला में भारत और चीन के विदेश मंत्रियों की वार्ता के बाद चीन ने कहा है कि भारतीय विदेश मंत्री ने वार्ता के दौरान कहा कि ताइवान को लेकर भारत के रुख में बदलाव नहीं आया है और वह चीन की संप्रभुता का सम्मान करता है।

    प्रवक्ता जायसवाल ने स्पष्ट किया कि विदेश मंत्री ने साथ ही यह भी कहा कि भारत किसी भी प्रकार से चीन की संप्रभुता का उल्लंघन नहीं करता है और वह चीन से भी इसी तरह के सम्मान की अपेक्षा करता है लेकिन चीन ने 1963 से भारतीय क्षेत्रों पर अवैध कब्जा कर रखा है।

    प्रवक्ता ने आगे कहा , “विदेश मंत्री ने कहा कि जब संप्रभुता के मुद्दों की बात आती है, तो वास्तव में भारत को ही उन्हें उठाना चाहिए और भारत उन्हें उठाता भी है। भारत किसी भी प्रकार से चीन की संप्रभुता का उल्लंघन नहीं करता और इस मामले में लगातार एक समान रुख पर कायम रहा है। लेकिन चीन 1963 से जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख में भारतीय क्षेत्र पर अवैध कब्ज़ा किए हुए है, जहां भारत का अधिकार स्वयं चीन द्वारा भी आधिकारिक रूप से स्वीकार किया गया है। इसके अतिरिक्त, जम्मू कश्मीर के उन क्षेत्रों में, जो भारत के हैं, चीन की परियोजनाएं चल रही हैं, और हम इसका विरोध करते हैं।” उल्लेखनीय है कि जयशंकर और चीन के विदेश मंत्री के बीच मनीला में आसियान क्षेत्रीय मंच की बैठक से इतर द्विपक्षीय वार्ता हुई थी।


    ‘भारत जानबूझकर नहीं छोड़ रहा पानी’

    वहीं, भारत ने पाकिस्तान के मीडिया में आ रही इन रिपोर्टों को पूरी तरह से निराधार बताया है जिनमें, आरोप लगाया गया है कि भारत जानबूझकर पानी छोड़ कर पाकिस्तान में बाढ की स्थिति उत्पन्न कर रहा है। भारत का कहना है कि चेनाब नदी में पानी की वृद्धि जम्मू और आसपास के क्षेत्रों में भारी मॉनसूनी बारिश का नतीजा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को यहां मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि पाकिस्तानी मीडिया का यह आरोप कि भारत जानबूझकर पानी छोड़ कर बाढ़ की स्थिति उत्पन्न कर रहा है , पूरी तरह से निराधार है। उन्होंने कहा कि 20 से 23 जुलाई के दौरान चेनाब नदी के बहाव में हाल ही में हुई वृद्धि, जम्मू और उसके आसपास केक्षेत्रों में हुई भारी मानसूनी बारिश का सीधा नतीजा है।

    बाढ़ पर विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
    प्रवक्ता ने कहा कि गौर करने वाली बात यह है कि पाकिस्तान के लाहौर स्थित बाढ़ पूर्वानुमान विभाग ने 22 जुलाई को जारी अपनी बाढ़ चेतावनी में, चेनाब नदी में बाढ़ के ऊंचे स्तर का कारण ऊपरी जल क्षेत्र में हुई भारी बारिश को ही बताया था। इसमें यह भी कहा गया था कि मराला में पानी का तेज बहाव बना रहेगा और बारिश कम होने पर यह धीरे-धीरे घटेगा। जायसवाल ने कहा कि इसलिए, नदी के बहाव में यह वृद्धि भारी मानसूनी बारिश की एक प्राकृतिक प्रतिक्रिया है न कि भारत द्वारा जानबूझकर उठाए गए कदम का नतीजा। मौसम की वजह से आई बाढ़ की इस घटना को ऊपरी क्षेत्र से की गई छेड़छाड़ के रूप में पेश करने की कोशिशें गलत और तकनीकी रूप से आधारहीन हैं। उन्होंने कहा कि यह पाकिस्तान की अपनी आधिकारिक बाढ़ चेतावनियों के भी विपरीत है।

  • मानसून की सक्रियता से देशभर में हो रही झमाझम बारिश, 29 जुलाई तक कई राज्यों में अलर्ट

    मानसून की सक्रियता से देशभर में हो रही झमाझम बारिश, 29 जुलाई तक कई राज्यों में अलर्ट


    नई दिल्ली।
    देश में मानसून (Monsoon) की सक्रियता बढ़ने से बारिश की स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार, 16 से 22 जुलाई के दौरान देश में लगभग सामान्य बारिश (Normal Rainfall) दर्ज की गई, जिससे 1 जून से शुरू हुए दक्षिण-पश्चिम मानसून (South-West Monsoon) सीजन में वर्षा की कुल कमी घटकर 17 प्रतिशत रह गई है। हालांकि, भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में अल नीनो (El Niño) के लगातार मजबूत होने से मानसून के शेष सीजन को लेकर चिंता बरकरार है।


    देश के किन हिस्सों में कितनी बारिश हुई?

    आईएमडी के मुताबिक, उत्तर-पश्चिम, मध्य तथा पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में वर्षा सामान्य के आसपास रही, जबकि दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में सामान्य से 26 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई। 1 जून से 23 जुलाई तक देश में सामान्य 370.9 मिलीमीटर के मुकाबले 306.9 मिलीमीटर वर्षा हुई है। इस तरह मानसून सीजन में अब भी 17 प्रतिशत बारिश की कमी बनी हुई है। क्षेत्रवार देखें तो पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक है, जहां अब तक सामान्य से 32 प्रतिशत कम बारिश हुई है। दक्षिण भारत में यह कमी 26 प्रतिशत है। इसके मुकाबले उत्तर-पश्चिम भारत में 10 प्रतिशत और मध्य भारत में केवल 6 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है।


    किन राज्यों में सामान्य से ज्यादा और किनमें कम बारिश हुई?

    लद्दाख और जम्मू-कश्मीर में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। वहीं पंजाब, हरियाणा, गुजरात, गोवा, बिहार, झारखंड और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में सामान्य से 20 से 58 प्रतिशत तक कम बारिश हुई है।


    अल नीनो को लेकर मौसम विभाग की चिंता क्यों बढ़ी हुई है?

    आईएमडी के अनुसार, भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्री सतह का तापमान सामान्य से ऊपर बना हुआ है और अल नीनो लगातार मजबूत हो रहा है। मौसम संबंधी विभिन्न मॉडल इसके आगे और प्रभावी होने के संकेत दे रहे हैं। अल नीनो का असर आमतौर पर भारतीय मानसून को कमजोर करने और बारिश के क्षेत्रीय वितरण में असंतुलन पैदा करने के रूप में देखा जाता है। इसलिए मानसून के बाकी सीजन में इसकी स्थिति बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।


    24 से 29 जुलाई के बीच मौसम का मिजाज कैसा रहेगा?

    24 से 29 जुलाई के दौरान देशभर में एक साथ कई मौसम प्रणालियां सक्रिय रहने का अनुमान है। इसके कारण पश्चिम भारत में सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना है। दक्षिण-पूर्व राजस्थान, गुजरात, उत्तर कोंकण और उत्तर मध्य महाराष्ट्र में भारी से बहुत भारी तथा कुछ स्थानों पर अत्यंत भारी बारिश हो सकती है। वहीं पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के साथ-साथ पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों में भी व्यापक वर्षा होने का अनुमान है।


    गुजरात में बारिश ने कितनी तबाही मचाई?

    गुजरात में पिछले तीन दिनों से जारी मूसलाधार बारिश के कारण 38 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। इसके अलावा 352 से अधिक लोगों का सुरक्षित बचाव किया गया है। राज्य में बारिश से जुड़ी घटनाओं में अब तक पांच लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि दर्जनों गांवों का संपर्क बाकी क्षेत्रों से टूट गया है।


    असम में बाढ़ की स्थिति कितनी गंभीर है?

    असम में लगातार बारिश और बाढ़ के कारण मृतकों की संख्या बढ़कर 61 हो गई है। राज्य में सात लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हैं और राहत एवं बचाव कार्य जारी है।


    जम्मू-कश्मीर में यात्रा व्यवस्था पर क्या असर पड़ा है?

    जम्मू-कश्मीर में अमरनाथ यात्रा बालटाल मार्ग से फिर शुरू कर दी गई है। हालांकि, भूस्खलन के कारण श्री मचैल माता यात्रा फिलहाल बंद है। वहीं वैष्णो देवी यात्रा भी शनिवार से दोबारा बहाल किए जाने की तैयारी की जा रही है।

  • इंस्टाग्राम पर पीएम मोदी का जलवा रिकॉर्ड व्यूज के बाद युवाओं के लिए जारी किया खास धन्यवाद संदेश

    इंस्टाग्राम पर पीएम मोदी का जलवा रिकॉर्ड व्यूज के बाद युवाओं के लिए जारी किया खास धन्यवाद संदेश


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर सोशल मीडिया के जरिए देश के युवाओं और नागरिकों से संवाद स्थापित किया है। हाल ही में जारी उनके वीडियो संदेश को मिली अभूतपूर्व प्रतिक्रिया के बाद उन्होंने नया वीडियो साझा कर सभी लोगों का आभार व्यक्त किया। खास तौर पर युवाओं और जेन जी का धन्यवाद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि लोगों का स्नेह और सकारात्मक सुझाव उन्हें लगातार प्रेरित करते हैं तथा भविष्य में भी यह संवाद और अधिक मजबूती के साथ जारी रहेगा।

    अपने नए वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछली रात देशवासियों से संवाद का अवसर मिला और जिस तरह लोगों ने वीडियो को देखा उस पर अपनी प्रतिक्रिया दी तथा सकारात्मक सुझाव साझा किए उसके लिए वह सभी के आभारी हैं। उन्होंने कहा कि जनता का विश्वास और स्नेह उनके लिए सबसे बड़ी ताकत है और आने वाले समय में भी यह रिश्ता लगातार मजबूत होता रहेगा। वीडियो के साथ साझा किए गए संदेश में भी प्रधानमंत्री ने युवाओं को विशेष रूप से धन्यवाद देते हुए लिखा कि जिन्होंने उनका वीडियो देखा और उस पर अपनी प्रतिक्रिया दी उनके प्रति वह आभार व्यक्त करते हैं।

    प्रधानमंत्री का यह संदेश ऐसे समय आया है जब उनका पिछला इंस्टाग्राम वीडियो सोशल मीडिया पर रिकॉर्ड व्यूज हासिल कर सुर्खियों में बना हुआ है। बताया जा रहा है कि वीडियो को पहले चौबीस घंटे के भीतर 30 करोड़ से अधिक बार देखा गया। इस असाधारण प्रतिक्रिया ने इसे इंस्टाग्राम पर सबसे ज्यादा देखे जाने वाले वीडियो में शामिल कर दिया। बड़ी संख्या में लोगों ने वीडियो पर अपनी राय और सुझाव भी साझा किए जिससे यह सोशल मीडिया पर चर्चा का प्रमुख विषय बन गया।

    वीडियो की लोकप्रियता का असर प्रधानमंत्री के सोशल मीडिया अकाउंट पर भी दिखाई दिया। रिकॉर्ड व्यूज के साथ उनके इंस्टाग्राम अकाउंट पर बड़ी संख्या में नए फॉलोअर्स जुड़े। इससे यह साफ हो गया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रधानमंत्री की पहुंच लगातार मजबूत बनी हुई है और युवाओं के बीच उनकी सक्रिय मौजूदगी पहले की तरह प्रभावी है।

    आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ऐसे वैश्विक राजनेता हैं जिन्होंने इंस्टाग्राम पर 10 करोड़ से अधिक फॉलोअर्स का आंकड़ा पार किया है। सोशल मीडिया पर उनकी लोकप्रियता लंबे समय से चर्चा का विषय रही है और विभिन्न राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर उनके वीडियो और संदेशों को बड़ी संख्या में लोग देखते और साझा करते हैं।

    सोशल मीडिया विश्लेषकों का मानना है कि डिजिटल माध्यम अब नेताओं और नागरिकों के बीच सीधे संवाद का सबसे प्रभावी मंच बन चुका है। प्रधानमंत्री का ताजा वीडियो भी इसी बदलते दौर की एक मिसाल माना जा रहा है जहां कुछ ही घंटों में करोड़ों लोगों तक संदेश पहुंच गया। बड़ी संख्या में युवाओं ने वीडियो पर अपनी प्रतिक्रिया दर्ज कर यह संकेत दिया कि सोशल मीडिया अब केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं बल्कि जनसंवाद का भी महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म बन चुका है।

    प्रधानमंत्री के नए धन्यवाद संदेश को भी लोगों की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। उनके समर्थकों का कहना है कि जनता से सीधे संवाद की यह शैली लोकतांत्रिक सहभागिता को मजबूत बनाती है जबकि बड़ी संख्या में युवाओं ने इसे प्रेरणादायक पहल बताया है। रिकॉर्ड व्यूज और लगातार बढ़ती डिजिटल पहुंच के बीच प्रधानमंत्री का यह नया संदेश सोशल मीडिया पर एक बार फिर चर्चा का केंद्र बन गया है।

  • इंस्टाग्राम पर फिर आए पीएम मोदी, युवाओं का जताया आभार, कहा- 'थैंक यू फ्रेंड्स'

    इंस्टाग्राम पर फिर आए पीएम मोदी, युवाओं का जताया आभार, कहा- 'थैंक यू फ्रेंड्स'


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार देर रात इंस्टाग्राम पर एक और वीडियो साझा कर युवाओं और सोशल मीडिया यूजर्स का आभार जताया। उन्होंने एक दिन पहले पोस्ट किए गए अपने वीडियो पर मिले सकारात्मक सुझावों और समर्थन के लिए लोगों को धन्यवाद देते हुए कहा कि उनका यह स्नेह और जुड़ाव आगे भी बना रहेगा।

    वीडियो में प्रधानमंत्री ने कहा, “थैंक यू फ्रेंड्स। कल देर रात आपसे जुड़ने का मौका मिला। मैंने जो वीडियो साझा किया था, उस पर आपने जिस तरह प्रतिक्रिया दी और सकारात्मक सुझाव दिए, उसके लिए आप सभी का धन्यवाद। आपका यह प्यार आगे भी बना रहेगा और हमारा संवाद लगातार मजबूत होता रहेगा। थैंक यू, थैंक यू दोस्तों।”

    वीडियो पोस्ट होने के महज 20 मिनट के भीतर इसे 10 लाख से अधिक बार देखा गया, जिससे सोशल मीडिया पर इसकी तेजी से चर्चा होने लगी।

    मंत्रियों को सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने की सलाह
    हाल ही में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने मंत्रिपरिषद के सदस्यों को सोशल मीडिया, विशेष रूप से इंस्टाग्राम पर अधिक सक्रिय रहने की सलाह दी थी। सूत्रों के अनुसार उन्होंने बैठक में यह भी पूछा कि कितने मंत्री नियमित रूप से इंस्टाग्राम का उपयोग करते हैं।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि बड़ी संख्या में युवा इस प्लेटफॉर्म पर सक्रिय हैं, इसलिए सरकार को उनसे सीधे संवाद स्थापित करने और सरकारी योजनाओं व संदेशों को प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया का अधिक उपयोग करना चाहिए।

    NEET मुद्दे पर भी दिया था संदेश
    इससे पहले गुरुवार रात करीब 11:52 बजे प्रधानमंत्री मोदी ने एक सेल्फी वीडियो जारी कर छात्रों से सीधा संवाद किया था। उन्होंने NEET पेपर लीक विवाद का जिक्र करते हुए भरोसा दिलाया कि सरकार छात्रों के साथ खड़ी है और पेपर लीक जैसी घटनाओं को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    उन्होंने कहा था कि परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसी क्रम में सरकार फास्ट-ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था और परीक्षा संबंधी अपराधों पर कड़ी सजा के प्रावधान वाले प्रस्तावित कानून पर भी विचार कर रही है।