Category: National

  • पश्चिम बंगाल उपचुनाव से पहले शुभेंदु अधिकारी की अल्पसंख्यक मतदाताओं से अपील, नंदीग्राम में बड़ी जीत का दावा

    पश्चिम बंगाल उपचुनाव से पहले शुभेंदु अधिकारी की अल्पसंख्यक मतदाताओं से अपील, नंदीग्राम में बड़ी जीत का दावा

    नई दिल्ली ।पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव से पहले मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अल्पसंख्यक मतदाताओं से विकास के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी के साथ आने की अपील की है। उन्होंने दोनों सीटों के अल्पसंख्यक मतदाताओं से कहा कि 6 अक्टूबर को होने वाला चुनाव उनके लिए एक तरह की परीक्षा है और उन्हें तय करना है कि वे सरकार के साथ रहना चाहते हैं या नहीं।

    शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि मतदाताओं को धर्म के आधार पर नहीं, बल्कि विकास के मुद्दे पर फैसला करना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी सरकार राज्य में विकास के काम को आगे बढ़ाएगी। नंदीग्राम और रेजीनगर दोनों सीटों पर अल्पसंख्यक मतदाताओं की अच्छी संख्या है, इसलिए अधिकारी की अपील चुनावी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है।

    अधिकारी ने कहा कि दोनों विधानसभा क्षेत्रों के अल्पसंख्यक मतदाताओं के पास इस उपचुनाव में अपनी राजनीतिक स्थिति स्पष्ट करने का अवसर है। उनके अनुसार, यदि मतदाता सरकार के साथ विकास के लिए आगे बढ़ना चाहते हैं तो उन्हें इस चुनाव में अपना फैसला बताना होगा। उन्होंने 6 अक्टूबर के मतदान को सरकार के साथ समर्थन और सहयोग की परीक्षा के रूप में पेश किया।

    नंदीग्राम सीट से बीजेपी ने हसीरानी रथ को उम्मीदवार बनाया है। वह पार्टी नेता चंद्रनाथ रथ की मां हैं, जो शुभेंदु अधिकारी के पूर्व सहयोगी और निजी सहायक रह चुके थे। चंद्रनाथ रथ की मई में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हसीरानी रथ ने मंगलवार को हल्दिया में अपना नामांकन दाखिल किया। इस दौरान शुभेंदु अधिकारी भी मौजूद रहे।

    उपचुनाव के लिए नंदीग्राम और रेजीनगर में अलग-अलग राजनीतिक दलों ने उम्मीदवार उतारे हैं। नंदीग्राम में बीजेपी ने हसीरानी रथ को मैदान में उतारा है, जबकि रेजीनगर से पार्टी ने साखराव सरकार को उम्मीदवार बनाया है। दोनों सीटों पर 6 अक्टूबर को मतदान होना है और मतगणना 9 अक्टूबर को होगी।

    शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम में बीजेपी की जीत को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि पिछली बार वह करीब 10 हजार वोटों के अंतर से जीते थे, जबकि इस बार पार्टी को 50 हजार से अधिक वोटों की बढ़त मिल सकती है। उन्होंने अपने इस दावे के समर्थन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काम को लेकर जनता के समर्थन का हवाला दिया।

    नंदीग्राम में बीजेपी उम्मीदवार हसीरानी रथ ने भी चुनाव को लेकर जीत का भरोसा जताया है। वहीं, उनके बेटे चंद्रनाथ रथ की हत्या का मामला भी चुनावी चर्चा का हिस्सा बना हुआ है। इस मामले की जांच पहले राज्य पुलिस और विशेष जांच दल ने की थी, जिसके बाद जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो को सौंप दी गई।

    नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव ऐसे समय हो रहे हैं, जब दोनों सीटें खाली हुई हैं। नंदीग्राम सीट शुभेंदु अधिकारी और रेजीनगर सीट हुमायूं कबीर के दूसरी सीट बरकरार रखने के कारण खाली हुई। अब दोनों क्षेत्रों में उपचुनाव के जरिए नए विधायक का चुनाव किया जाएगा।

    अधिकारी की अल्पसंख्यक मतदाताओं से अपील के बीच चुनावी मुकाबले में विकास, सरकार के कामकाज और अलग-अलग दलों के उम्मीदवार प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं। वहीं, नंदीग्राम में बीजेपी की संभावित जीत के अंतर को लेकर अधिकारी द्वारा किया गया दावा चुनावी नतीजे आने के बाद ही स्पष्ट होगा।

  • पीएम विश्वकर्मा योजना ने हासिल किया 30 लाख पंजीकरण का लक्ष्य, 24.37 लाख कारीगरों को मिला कौशल प्रशिक्षण

    पीएम विश्वकर्मा योजना ने हासिल किया 30 लाख पंजीकरण का लक्ष्य, 24.37 लाख कारीगरों को मिला कौशल प्रशिक्षण

    नई दिल्ली ।पीएम विश्वकर्मा योजना ने लॉन्च होने के तीन साल के भीतर 30 लाख लाभार्थियों के पंजीकरण का लक्ष्य हासिल कर लिया है। योजना के तहत देश के पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को कौशल प्रशिक्षण, टूलकिट, ऋण सहायता, डिजिटल प्रोत्साहन और बाजार से जुड़ने के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। योजना की प्रगति से संबंधित जानकारी में इसके तहत अब तक हुई गतिविधियों और सहायता का विवरण दिया गया है।

    योजना के तहत 24.37 लाख से अधिक कारीगरों को बुनियादी कौशल प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसके अलावा 18.16 लाख से अधिक कारीगरों को टूलकिट प्रदान की गई हैं। कच्चा माल खरीदने, औजारों को बेहतर बनाने और कारोबार के विस्तार में मदद के लिए 6.19 लाख से अधिक ऋण मंजूर किए गए हैं। इन ऋणों की कुल राशि करीब 5,316 करोड़ रुपये है।

    डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए भी योजना के तहत लाभार्थियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। अब तक 8.11 लाख से अधिक लाभार्थियों को डिजिटल प्रोत्साहन दिया गया है। इसके तहत 42 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वितरित की जा चुकी है।

    योजना के तहत कारीगरों को बदलते बाजार और तकनीक से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है। ब्रांडिंग, उत्पाद डिजाइन, पैकेजिंग और मार्केटिंग के लिए एआई टूल्स के इस्तेमाल को लेकर 12,000 से अधिक कारीगरों को प्रशिक्षण दिया गया है। इसका उद्देश्य पारंपरिक उत्पादों को बेहतर तरीके से बाजार तक पहुंचाने में कारीगरों की मदद करना है।

    बाजार से जुड़ाव बढ़ाने के लिए 30,000 से अधिक विश्वकर्मा लाभार्थियों को सरकारी ई-मार्केटप्लेस यानी जीईएम, ओएनडीसी, मीशो, अमेजन, फैबइंडिया और सुलेखा जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है। इसके जरिए कारीगरों को अपने उत्पादों के लिए व्यापक बाजार उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।

    योजना के प्रचार और कारीगरों तक इसकी जानकारी पहुंचाने के लिए देशभर में विभिन्न कार्यक्रम भी आयोजित किए गए हैं। अब तक 1,500 से अधिक जागरूकता कार्यक्रम और शिविर, 50 से अधिक कार्यशालाएं, 82 व्यापार मेले, 37 राज्य स्तरीय प्रदर्शनियां और 50 से अधिक फ्लैश मॉब आयोजित किए गए हैं।

    पीएम विश्वकर्मा योजना का उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को शुरुआत से लेकर बाजार तक सहायता उपलब्ध कराना है। ऐसे कारीगर हाथों के कौशल, परिवार आधारित ज्ञान और छोटे स्तर के उद्यमों पर निर्भर रहते हैं। योजना के जरिए गुरु-शिष्य परंपरा और परिवारों में पीढ़ियों से चले आ रहे पारंपरिक कौशल को मजबूत और संरक्षित करने का प्रयास किया जा रहा है।

    पंजीकरण और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद लाभार्थियों को पीएम विश्वकर्मा प्रमाणपत्र और पहचान पत्र के माध्यम से मान्यता दी जाती है। कौशल प्रशिक्षण में आधुनिक औजारों, बेहतर कार्यप्रणालियों और नए डिजाइन से जुड़ी जानकारी दी जाती है। इसके साथ डिजिटल लेनदेन, मार्केटिंग और उद्यमिता से संबंधित प्रशिक्षण भी दिया जाता है।

    योजना के तहत बुनियादी प्रशिक्षण पांच से सात दिनों का होता है, जबकि उन्नत प्रशिक्षण 15 दिन या उससे अधिक समय का हो सकता है। प्रशिक्षण के दौरान प्रशिक्षुओं को प्रतिदिन 500 रुपये का स्टाइपेंड दिया जाता है। मार्केटिंग सहायता में व्यापार मेले, प्रदर्शनियां, ब्रांडिंग, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, विज्ञापन और प्रचार जैसी गतिविधियां शामिल हैं।

  • मराठा आरक्षण की मांग पर जरांगे मुंबई रवाना, पुलिस की अनुमति नहीं; फडणवीस ने गणेशोत्सव में बाधा न डालने की अपील की

    मराठा आरक्षण की मांग पर जरांगे मुंबई रवाना, पुलिस की अनुमति नहीं; फडणवीस ने गणेशोत्सव में बाधा न डालने की अपील की

    नई दिल्ली ।महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे मनोज जरांगे मुंबई के लिए रवाना हो गए हैं। मुंबई पुलिस की ओर से आजाद मैदान में प्रस्तावित आंदोलन की अनुमति नहीं दिए जाने के बावजूद उन्होंने जालना जिले के अंतरवाली सराटी से मुंबई की ओर कूच किया। जरांगे के 19 सितंबर को मुंबई पहुंचने की संभावना है। उनका यह कदम ऐसे समय में सामने आया है, जब राज्य में गणेशोत्सव चल रहा है और मुंबई में बड़ी संख्या में लोग धार्मिक आयोजनों में शामिल हो रहे हैं।

    जरांगे पिछले कई दिनों से मराठा आरक्षण की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर हैं। मुंबई पहुंचने के लिए उन्हें करीब 400 किलोमीटर का सफर तय करना है। शुरुआती योजना में बड़ी संख्या में समर्थकों के साथ मुंबई जाने की बात थी, लेकिन पुलिस की अनुमति नहीं मिलने के बाद उन्होंने अपने साथ सीमित संख्या में लोगों को लेकर आगे बढ़ने का फैसला किया। रास्ते में मराठा समुदाय के लोग उनसे जुड़ रहे हैं। उनके काफिले के बीड के पाटोदा, अहिल्यानगर के श्रीगोंदा, पुणे के हडपसर और रायगढ़ के खोपोली से होते हुए मुंबई पहुंचने की योजना है।

    आंदोलन को देखते हुए प्रशासन ने यात्रा मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक पुलिस ने अधिकारियों, होमगार्ड और रैपिड सिटी पुलिस की टुकड़ियों समेत 648 जवानों की तैनाती की है। प्रशासन की चिंता मुख्य रूप से इस बात को लेकर है कि जरांगे के साथ रास्ते में बड़ी संख्या में समर्थक जुड़ सकते हैं और उनका मुंबई पहुंचना गणेशोत्सव के दौरान भीड़ तथा यातायात व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।

    मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि गणेशोत्सव के दौरान आम लोगों और श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने आंदोलन के समय को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि त्योहार के दौरान सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित नहीं होनी चाहिए। फडणवीस के अनुसार सरकार ने जरांगे की 13 में से 12 मांगों को स्वीकार कर उन पर कार्रवाई की है, जबकि बची हुई मांग से जुड़ी कानूनी अड़चनें भी उन्हें बताई गई हैं।

    दूसरी ओर, जरांगे ने मुंबई जाने के अपने फैसले का बचाव किया है। उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट की सुनवाई का हवाला देते हुए कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने के अधिकार को रोका नहीं जा सकता। हाईकोर्ट ने 11 सितंबर की सुनवाई में भी लोकतंत्र और शांतिपूर्ण आंदोलन के अधिकार को लेकर टिप्पणी की थी।

    जरांगे ने सरकार पर गंभीर आरोप भी लगाए हैं और दावा किया है कि उन्हें नुकसान पहुंचाने की साजिश की जा रही है। ये आरोप उनके और सरकार के बीच बढ़ते तनाव के बीच सामने आए हैं। वहीं उनकी पत्नी सुमित्रा ने कहा कि सरकार की ओर से समय पर निर्णय नहीं लिए जाने के कारण उन्हें मुंबई जाने का फैसला करना पड़ा। उन्होंने फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस से भी अपने पति से जरांगे की आरक्षण संबंधी मांग पर बात करने की अपील की।

    मराठा आरक्षण को लेकर जरांगे का आंदोलन पहले भी मुंबई तक पहुंच चुका है। अगस्त 2025 में उन्होंने आजाद मैदान में बड़ा आंदोलन किया था, जिसके बाद सरकार द्वारा उनकी कई मांगें स्वीकार किए जाने के बाद आंदोलन समाप्त हुआ था। अब एक बार फिर मुंबई की ओर उनके कूच से मराठा आरक्षण का मुद्दा राज्य में केंद्र में आ गया है।

  • गंगा स्नान के दो वायरल वीडियो में दिखी समान गतिविधियां, महिला के अलग रूप से AI छेड़छाड़ का शक गहराया

    गंगा स्नान के दो वायरल वीडियो में दिखी समान गतिविधियां, महिला के अलग रूप से AI छेड़छाड़ का शक गहराया

    नई दिल्ली । गंगा स्नान से जुड़े दो वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। दोनों वीडियो में एक महिला गंगा में स्नान करती दिखाई दे रही है, लेकिन महिला के पहनावे और दृश्य में स्पष्ट अंतर नजर आता है। एक वीडियो में महिला बेहद कम कपड़ों में दिखाई दे रही है, जबकि दूसरे वीडियो में वह सलवार सूट पहने हुए गंगा स्नान करती नजर आती है। दोनों वीडियो सामने आने के बाद इनकी वास्तविकता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

    वायरल वीडियो की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दोनों में महिला के बाद एक युवक गंगा में स्नान करने के लिए जाता दिखाई देता है। इसके बाद एक बुजुर्ग व्यक्ति भी गंगा की ओर जाता नजर आता है। घटनाओं और गतिविधियों का यह क्रम दोनों वीडियो में काफी हद तक एक जैसा दिखाई देता है। महिला के दृश्य में अंतर होने के कारण अब वीडियो के साथ डिजिटल छेड़छाड़ की आशंका जताई जा रही है।

    पहले वीडियो में महिला गंगा में स्नान करती और डुबकी लगाती दिखाई देती है। इसी दौरान एक युवक भी गंगा स्नान के लिए आगे बढ़ता है। उसके बाद बुजुर्ग व्यक्ति को भी गंगा की ओर जाते हुए दिखाया गया है। सोशल मीडिया पर इस वीडियो को अलग-अलग दावों के साथ साझा किया जा रहा है। हालांकि, वीडियो कब रिकॉर्ड किया गया था, इसे किस स्थान पर बनाया गया और इसमें दिखाई दे रहे लोगों की पहचान क्या है, इसकी पुष्टि नहीं हुई है।

    इसके बाद सामने आए दूसरे वीडियो में महिला पूरे कपड़ों में सलवार सूट पहने हुए दिखाई देती है। इस वीडियो में भी महिला के स्नान के बाद युवक और बुजुर्ग के गंगा की ओर जाने की गतिविधियां पहले वीडियो से मिलती-जुलती नजर आती हैं। यही समानता दोनों वीडियो की सत्यता को लेकर चर्चा का प्रमुख कारण बनी हुई है।

    दोनों वीडियो में महिला के दृश्य में अंतर और बाकी गतिविधियों की समानता को देखते हुए इनके AI की मदद से तैयार किए जाने या डिजिटल तरीके से बदले जाने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, अभी तक इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है कि वीडियो वास्तव में AI से बनाए गए हैं या इनमें किसी तरह की तकनीकी छेड़छाड़ की गई है। इसलिए फिलहाल इसे केवल आशंका के तौर पर ही देखा जा रहा है।

    वीडियो के वायरल होने के बाद श्रीगंगा सभा की ओर से भी चिंता व्यक्त की गई है। संस्था के अध्यक्ष और उत्तराखंड सरकार में राज्यमंत्री नितिन गौतम ने कहा कि उन्होंने भी सोशल मीडिया पर ये वीडियो देखे हैं। उनका कहना है कि यदि AI के जरिए महिलाओं के चित्र या वीडियो को इस तरह गंगा के बीच दिखाया जा रहा है तो यह निंदनीय है।

    नितिन गौतम ने ऐसे वीडियो को तीर्थ और महिलाओं को बदनाम करने की कोशिश बताते हुए शासन-प्रशासन से कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि इस तरह की सामग्री तैयार करने और प्रसारित करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने धार्मिक मर्यादा के उल्लंघन के तहत भी मामला दर्ज किए जाने की मांग रखी।

    उन्होंने यह भी कहा कि तकनीक के कारण इस तरह की सामग्री तैयार करना आसान हो गया है और फिर उसे सोशल मीडिया पर फैलाया जा सकता है। उनके अनुसार ऐसे मामलों में कार्रवाई जरूरी है।

    फिलहाल दोनों वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इनके रिकॉर्ड होने की तारीख, वास्तविक स्थान और वीडियो में दिखाई दे रहे लोगों की पहचान भी स्पष्ट नहीं है। इसलिए सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावों को सत्य मानने से पहले आधिकारिक या तकनीकी जांच का इंतजार करना जरूरी है। वीडियो में दिखाई देने वाली समान गतिविधियां AI से छेड़छाड़ की आशंका जरूर पैदा करती हैं, लेकिन इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

  • PM मोदी की जिनपिंग को दो टूक… बोले- सीमा पर शांति होगी .. तभी आगे बढ़ेंगे रिश्ते…

    PM मोदी की जिनपिंग को दो टूक… बोले- सीमा पर शांति होगी .. तभी आगे बढ़ेंगे रिश्ते…


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने पिछले सप्ताह ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit) से इतर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Chinese President Xi Jinping) के साथ हुई मुलाकात के दौरान चीन के साथ संबंधों को लेकर भारत (India) की चिंताओं को स्पष्ट रूप से सामने रखा। भारत सरकार के अनुसार, मोदी ने कहा कि दोनों देशों को एक-दूसरे की मूल चिंताओं के प्रति संवेदनशीलता दिखानी चाहिए।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के संबंध में विदेश मंत्रालय चीनी पक्ष की ओर से जारी बयान पर पूछे गए सवाल का जवाब दिया। चीनी बयान में मोदी के हवाले से कहा गया था कि तिब्बत और ताइवान को लेकर भारत की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है और भारत अपनी धरती पर किसी को भी चीन विरोधी गतिविधियां संचालित करने की अनुमति नहीं देता। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, ‘प्रधानमंत्री ने भारतीय चिंताओं का भी उल्लेख किया और इस बात पर जोर दिया कि दोनों पक्षों को एक-दूसरे की मूल चिंताओं के प्रति संवेदनशीलता दिखानी चाहिए।’


    सीमा पर शांति को रिश्ते आगे बढ़ाने की बुनियाद बताया

    जायसवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने शी जिनपिंग के साथ बातचीत में इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों के बीच संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए सीमा पर शांति और स्थिरता जरूरी है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों पक्षों को तीन पारस्परिक सिद्धांतों- आपसी सम्मान, आपसी हित और आपसी संवेदनशीलता से निर्देशित होना चाहिए।


    भारत ने चीन के साथ संबंधों में अपनी चिंताएं रखीं

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शी जिनपिंग को यह भी स्पष्ट किया कि सीमा पर शांति दोनों देशों के बीच संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए एक आवश्यक आधार है। भारत और चीन के बीच सीमा पर बार-बार पैदा हुए तनाव के बीच भारत ने पिछले 16 वर्षों से सार्वजनिक रूप से अपनी ‘वन चाइना’ नीति को उसी तरह स्पष्ट रूप से व्यक्त करना बंद कर दिया है।


    तिब्बत और ताइवान पर भारत की नीति में बदलाव नहीं

    हालांकि व्यवहार में तिब्बत और ताइवान को लेकर भारत की स्थिति लगातार बनी हुई है। केंद्र सरकार का कहना है कि ताइवान को लेकर उसकी नीति स्पष्ट और निरंतर है। भारत व्यापार, निवेश, पर्यटन, संस्कृति, शिक्षा और लोगों के बीच आपसी संपर्क जैसे क्षेत्रों में ताइवान के साथ संबंधों को बढ़ावा देता है और सहयोग की सुविधा प्रदान करता है।


    तिब्बत को लेकर भारत का रुख भी स्पष्ट

    तिब्बत के मामले में भारत अब भी यह मानता है कि तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र चीन जनवादी गणराज्य के क्षेत्र का हिस्सा है। यह स्थिति वर्ष 2003 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और चीन के तत्कालीन प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ के बीच हस्ताक्षरित ‘संबंधों और व्यापक सहयोग के सिद्धांतों पर घोषणा’ में भी दर्ज की गई थी। इस घोषणा में यह भी कहा गया था कि भारत अपनी जमीन से तिब्बतियों को चीन विरोधी राजनीतिक गतिविधियां संचालित करने की अनुमति नहीं देता।


    चीन के बयान में भारत की स्वतंत्र विदेश नीति का भी जिक्र
    चीनी पक्ष की ओर से जारी बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने शी जिनपिंग से यह भी कहा कि भारत एक स्वतंत्र विदेश नीति का पालन करता है और चीन के प्रति भारत के दृष्टिकोण का किसी तीसरे देश से कोई लेना-देना नहीं है। हालांकि, भारत की ओर से जारी आधिकारिक बयान में तिब्बत या ताइवान का कोई उल्लेख नहीं किया गया।


    ‘दोस्त, प्रतिद्वंद्वी नहीं’ वाले फॉर्मूले पर भी चर्चा

    दिलचस्प बात यह है कि इस बार भारत ने अपने बयान में चीन के उस ‘दोस्त, प्रतिद्वंद्वी नहीं’ वाले फॉर्मूले का इस्तेमाल नहीं किया, जिसका उल्लेख पिछले साल तियानजिन में मोदी-शी मुलाकात के बाद चीन की ओर से जारी बयान में किया गया था।


    जयशंकर और वांग यी की बातचीत में भी उठा था मुद्दा

    जुलाई में मनीला में विदेश मंत्री एस. जयशंकर की अपने चीनी समकक्ष वांग यी के साथ हुई मुलाकात के बाद भी चीन ने जयशंकर के हवाले से भारत द्वारा चीन की संप्रभुता का सम्मान करने जैसी बातें कही थीं। इसके बाद विदेश मंत्रालय ने स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा था कि जयशंकर ने वांग यी से बातचीत में यह बात कही थी कि संप्रभुता से जुड़े मुद्दे भारत को चीन के सामने उठाने चाहिए।

    चीन के कब्जे को लेकर भारत ने जताई आपत्ति
    उन्होंने कहा कि भारत किसी भी तरह से चीन की संप्रभुता का उल्लंघन नहीं करता। हालांकि, चीन 1963 से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के कुछ हिस्सों पर अवैध कब्जा किए हुए है, जबकि इन क्षेत्रों पर भारत के अधिकार को चीन भी स्वीकार करता रहा है।

  • सांसद प्रिया सरोज से शादी करेंगे क्रिकेटर रिंकू सिंह…. लखनऊ में इस तारीख को लेंगे सात फेरे…

    सांसद प्रिया सरोज से शादी करेंगे क्रिकेटर रिंकू सिंह…. लखनऊ में इस तारीख को लेंगे सात फेरे…


    लखनऊ।
    क्रिकेटर रिंकू सिंह (Cricketer Rinku Singh) और समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) की सांसद प्रिया सरोज (MP Priya Saroj) की शादी की तारीख और स्थान तय हो गया है। इसके साथ ही शादी को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर भी विराम लग गया है। खेल और राजनीति (Sports and Politics) के इस हाई प्रोफाइल गठबंधन का लंबे समय से प्रशंसकों और समर्थकों को इंतजार था। रिंकू और प्रिया सरोज लखनऊ में 4 दिसंबर को सात फेरे लेंगे। दोनों की सगाई भी लखनऊ में ही हुई थी। उस समय चर्चा थी कि शादी वाराणसी के होटल ताज में होगी। प्रिया सरोज के संसदीय क्षेत्र मछली शहर में वाराणसी जिले का पिंडरा विधानसभा क्षेत्र भी आता है।


    लखनऊ के होटल रमाडा में होगा आयोजन

    प्रिया के पिता जौनपुर के केराकत से विधायक और पूर्व सांसद तूफानी सरोज ने बताया कि दोनों परिवारों की सहमति से तारीख और स्थल तय कर लिया गया है। लखनऊ के रमाडा होटल में चार दिसंबर को भव्य आयोजन होगा। इसकी तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं। बनारस में करखियांव (कठेरवा) स्थित प्रिया के गांव में बने घर को सजाया संवारा जा रहा है।दोनों की सगाई भी लखनऊ के ही द सेंट्रम होटल में हुई थी।

    बताया जा रहा है कि दोनों परिवारों में शादी की तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो चुकी हैं। वीवीआईपी वेडिंग में क्रिकेट और राजनीति से जुड़े दिग्गजों के जमावड़े की उम्मीद है। प्रिया सरोज समाजवादी पार्टी की सांसद हैं तो उसके सभी सांसदों-विधायकों के रहने की तो पहले से ही उम्मीद है। रिंकू सिंह जिस कोलकाता राइडर के साथ खेलते हैं उस टीम के मेंबर के अलावा भारतीय टीम के भी तमाम खिलाड़ियों को न्योता देने की उम्मीद है।


    वाराणसी के बजाय क्यों लखनऊ

    रिंकू और प्रिया सरोज की सगाई राजधानी लखनऊ में ही हुई थी। ऐसे में उस समय चर्चा की थी शादी का आयोजन प्रिया सरोज के संसदीय क्षेत्र से जुड़ी धार्मिक नगरी वाराणसी में होगा। यहां के होटल ताज का नाम भी फाइनल बताया जा रहा था। लेकिन अब लखनऊ के होटल में आयोजन पर मुहर लग रही है। इसके पीछे क्रिकेट और राजनीति से जुड़ी हस्तियों के आने-जाने और सुरक्षा को प्राथमिकता को कारण बताया जा रहा है।


    यूपी के ही अलीगढ़ के रहने वाले हैं रिंकू सिंह

    क्रिकेटर रिंकू सिंह और प्रिया सरोज दोनों की यूपी के रहने वाले हैं। रिंकू सिंह अलीगढ़ के एक मध्यम परिवार से आते हैं। अपनी कड़ी मेहनत प्रतिभा के बल पर रिंकू सिंह ने भारतीय क्रिकेट टीम में जगह पक्की की और पूरी दुनिया में अपना लोहा मनवाया है। उनकी गिनती शानदार फिनिशर के रूप में होती है। आईपीएल में हाथ से निकलते मैच में कोलाकाता नाईट राइडर के लिए एक ओवर में पांच लगातार छक्के मारकर रिंकू सिंह ने इतिहास रचा था।

    वहीं, प्रिया सरोज जौनपुर की केराकत सीट से तीन बार विधायक और मछली शहर से सांसद रहे तूफानी सरोज की बेटी हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में सपा ने प्रिया को मछली शहर से टिकट दिया और वह जीत हासिल कर सबसे कम उम्र की सांसदों में शामिल हो गईं।

  • भारत में भी दिखने लगा अल नीनो का असर…. जेब पर पड़ रहा भारी, चीनी के कई चीजें हुई महंगी

    भारत में भी दिखने लगा अल नीनो का असर…. जेब पर पड़ रहा भारी, चीनी के कई चीजें हुई महंगी


    नई दिल्ली।
    अल नीनो (El Niño) ने दस्तक दे दी है। अब भारत (India) में भी इसका असर दिखने लगा है। यहां अल नीनो ने मौसम को बुरी तरह प्रभावित किया है। मौसम ने फसलों पर असर डाला और फसलें अब आपकी जेब पर असर डाल रही हैं। चीनी (Sugar) के बाद अंडे और चिकन के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक जिस तरह गन्ने का उत्पादन गिरा है, अगर उसी तरह मक्के का उत्पादन भी घटा तो इन चीजों के दाम और बढ़ सकते हैं। चावल और सोयाबीन जैसी फसलें भी संकट के केंद्र में हैं।

    गौरतलब है कि अल नीनो की स्थिति में मानसून कमजोर और अनियमित रहता है। साथ ही ज्यादा गर्मी रहने से मिट्टी में नमी कम हो जाती है, जिससे खरीफ फसलों की पैदावार घट सकती है। इस बार मौसम विज्ञानियों ने सदी के सबसे ताकतवर अल नीनो की दस्तक की चेतावनी दी है। भारत में इसका असर दिखना शुरू हो गया है और साल के अंत तक इसके पीक पर पहुंचने की संभावना है।


    चीनी हुई कड़वी

    हाल ही में चीनी की कीमतें सालाना आधार पर 40 प्रतिशत बढ़ गई हैं। इसकी वजह पिछले साल ज्यादा बारिश और फफूंद के कारण गन्ने की पैदावार घटना है। पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण और निर्यात के कारण भी चीनी के दाम बढ़े हैं। त्योहार सीजन से पहले चीनी 49 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर अगस्त में 65 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई। हालांकि अब दाम स्थिर हैं।


    मक्का बिगाड़ेगा बजट

    इस साल मक्का उत्पादन भी कम होने के आसार नजर आ रहे हैं। इसके दाम में पहले ही करीब तीस फीसदी की बढ़ोतरी हो चुकी है, जिसका असर बाजार पर दिख रहा है। अगर पैदावार कम हुई तो पशु आहार और महंगा होगा। इसके महंगा होने से मुर्गी पालन की लागत बढ़ेगी, जिसका असर अंडे और चिकन के दाम पर पड़ेगा। बारिश की कमी से 2026-27 में गन्ना उत्पादन कम रह सकता है। चीनी की मांग को देखते हुए अगले सीजन में गन्ने से एथेनॉल उत्पादन कम किया जाएगा। ऐसे में एथेनॉल मक्के से बनेगा। मगर इस साल मक्का उत्पादन भी कम रहने की आशंका है। ऐसे में इसके दाम बढ़ेंगे।


    पशु आहार भी महंगा

    भारत में 2025 में पोल्ट्री उद्योग 2.6 लाख करोड़ रुपये का था। मक्का, सोयाबीन खली महंगे होने से पोल्ट्री की लागत बढ़ेगी, क्योंकि ये प्रमुख पशु-मुर्गी आहार हैं। दरअसल देश में 25 फीसदी एथेनॉल गन्ने से बनता है, बाकी अनाज खासकर मक्का से बनाया जाता है। बीती एक अप्रैल से ई-20 पेट्रोल की बिक्री अनिवार्य हुई। इससे चीनी उत्पादन घटने के बावजूद 2025-26 में 30 लाख टन से ज्यादा गन्ने से एथेनॉल बनाया गया।

  • पाकिस्तान से खजूर की खेप भारत लाने का खुलासा? DRI ने 13 कंटेनरों में 362 टन माल किया जब्त

    पाकिस्तान से खजूर की खेप भारत लाने का खुलासा? DRI ने 13 कंटेनरों में 362 टन माल किया जब्त


    नई दिल्ली। महाराष्ट्र में राजस्व खुफिया निदेशालय यानी DRI ने 362 मीट्रिक टन से ज्यादा सूखे खजूर की एक बड़ी खेप जब्त की है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह माल पाकिस्तान के कराची पोर्ट से भेजा गया था। हालांकि भारत पहुंचने से पहले इसे संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE से आया हुआ बताया गया। आयात से जुड़े दस्तावेजों में भी माल का मूल देश UAE दर्ज किया गया था। मामले की जांच के दौरान DRI को खेप के पाकिस्तान कनेक्शन की जानकारी मिली जिसके बाद इसे रोक लिया गया।

    यह कार्रवाई DRI की ओर से चलाए जा रहे ऑपरेशन डीप मैनिफेस्ट के तहत की गई है। एजेंसी ऐसे मामलों पर नजर रख रही है जिनमें पाकिस्तान मूल के सामान को किसी तीसरे देश के जरिए भारत लाने की कथित कोशिश की जाती है। इसी अभियान के तहत महाराष्ट्र में एक मुंबई स्थित कंपनी की ओर से आयात किए गए 13 कंटेनरों को जांच के लिए रोका गया।

    ये सभी कंटेनर नासिक के अंबड स्थित कंटेनर फ्रेट स्टेशन पर पहुंचे थे। आयात दस्तावेजों में इनके भीतर मौजूद सूखे खजूर का मूल देश UAE बताया गया था। दस्तावेजों के आधार पर पहली नजर में यह खेप संयुक्त अरब अमीरात से भारत आई हुई लग रही थी। लेकिन DRI की जांच आगे बढ़ने पर माल की असली सप्लाई चेन को लेकर सवाल खड़े हुए।

    एजेंसी की शुरुआती जांच के मुताबिक खजूर वास्तव में पाकिस्तान के कराची बंदरगाह से रवाना हुए थे। इसके बाद इन्हें UAE के जेबेल अली पोर्ट के रास्ते भारत भेजा गया। जांच में यह भी सामने आया कि जेबेल अली में कथित तौर पर कंटेनरों को बदला गया था। इसके बाद दूसरे जहाज के जरिए माल को भारत भेजे जाने की बात सामने आई है। इस प्रक्रिया ने DRI के सामने ट्रांसशिपमेंट के जरिए माल की वास्तविक उत्पत्ति छिपाने की आशंका को बढ़ा दिया।

    DRI को संदेह है कि यह खेप ऐसे नेटवर्क का हिस्सा हो सकती है जिसका संबंध पाकिस्तानी नागरिकों से जुड़ी संस्थाओं से है। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि माल की बुकिंग से लेकर ट्रांसशिपमेंट और भारत में आयात तक पूरी प्रक्रिया में कौन कौन लोग या संस्थाएं शामिल थीं। साथ ही आयात दस्तावेजों में मूल देश के तौर पर UAE दर्ज किए जाने के पीछे की वजह की भी जांच की जा रही है।

    दरअसल केंद्र सरकार ने 2 मई 2025 से पाकिस्तान से सामान के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष आयात पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। यह फैसला पहलगाम आतंकी हमले के बाद लिया गया था। ऐसे में किसी तीसरे देश के जरिए पाकिस्तान मूल के सामान को भारत लाने की कोशिश सामने आने पर जांच एजेंसियों की निगरानी बढ़ गई है।

    DRI अब इस मामले में गलत घोषणा ट्रांसशिपमेंट और आयात दस्तावेजों में कथित हेरफेर से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है। 362 टन से ज्यादा खजूर की यह खेप इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसकी सप्लाई चेन में कराची से UAE और फिर भारत तक का रास्ता सामने आया है। एजेंसी की आगे की जांच से यह स्पष्ट होगा कि इस पूरे नेटवर्क में किन लोगों की भूमिका थी और भारत में प्रतिबंधित सामान की कथित एंट्री कराने की कोशिश किस स्तर तक की गई थी।

  • रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% टैरिफ लगाएगा अमेरिका…, भारत की दो टूक

    रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% टैरिफ लगाएगा अमेरिका…, भारत की दो टूक


    नई दिल्ली।
    अमेरिका (America) ने रूस (Russia) से ज्यादा तेल खरीद (Buy Oil) रहे देशों पर 100 फीसदी टैरिफ (Tariff) लगाने के लिए कानून बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सीनेट से बिल को मंजूरी मिलने के बाद अब इसे हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव (House of Representatives) में भी लाया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक अमेरिकी कांग्रेस के निचले सदन में इस बिल पर गुरुवार को वोटिंग होगी। अगर यह बिल पास हो जाता है तो भारत पर 100 फीसदी टैरिफ लग सकता है। हालांकि इसके बावजूद भारत (India) ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका चाहे जो कर ले, भारत रूस से तेल खरीदता रहेगा और दबाव के आगे नहीं झुकेगा।

    भारत ने मंगलवार को एक बयान में कहा है कि अमेरिका भले ही टैरिफ लगा ले, भारत दबाव में नहीं आएगा और रूस से तेल की खरीद जारी रखेगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों से जुड़े फैसले अपने 140 करोड़ नागरिकों के हितों को ध्यान में रखकर करता है। वह आगे भी इस पर कायम रहेगा।


    लिंडसे ग्राहम बिल सीनेट से हुआ था पास

    अमेरिका में इस बिल को लिंडसे ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान बिल का नाम दिया गया है। अमेरिकी सीनेट में 86-11 के भारी बहुमत से इसे पास करा लिया गया था। इसका सीधा सीधा मकसद भारत और चीन जैसे देशों पर टैरिफ थोपना है। इसमें रूस से सबसे ज्यादा तेल खरीदने वाले पांच देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने का प्रावधान किया गया है। भारत सरकार से जुड़े सूत्रों ने कहा कि वे स्थिति पर नजर रखे हुए हैं, लेकिन यह साफ है कि भारत सरकार इस बारे में अपनी नीति में कोई बदलाव नहीं करेगी और रूस से तेल की खरीद जारी रखेगी।


    भारत का नाम लिखने की मांग

    इससे पहले यह खबर सामने आई थी कि हाल ही में कुछ अमेरिकी सांसदों ने इस बिल में कुछ बदलावों की सिफारिश की है। सांसदों ने मांग की है कि इस बिल में प्रतिबंध लगाने वाले देशों में सीधे भारत का नाम लिख दिया जाए। इससे पहले बिल में पहले सिर्फ ‘रूस से तेल खरीदने वाले देशों’ का जिक्र था। इसमें किसी देश का नाम नहीं था। हालांकि अब इसमें भारत का नाम अलग से जोड़ने की मांग की गई है।

    इसके अलावा सांसदों का कहना है कि बिल में रूस से सबसे ज्यादा तेल खरीदने वाले 10 देशों का नाम साफ-साफ लिखा जाए और उन पर 100 फीसदी टैरिफ ठोका जाए। इन देशों में भारत, चीन, तुर्की, अजरबैजान, हंगरी, स्लोवाक गणराज्य, यूएई, सिंगापुर, कजाखिस्तान और किर्गिस्तान शामिल हैं।


    अमेरिका ने पहले लगाया है जुर्माना

    अमेरिका इस मुद्दे को लेकर भारत को कई बार निशाना बना चुका है। अमेरिका ने आरोप लगाए है कि भारत रूस से तेल खरीद कर यूक्रेन युद्ध में उसकी आर्थिक मदद कर रहा है। अमेरिका ने इसका हवाला देते हुए पिछले साल भारत पर 50 फीसदी टैरिफ भी लगा दिया था। हालांकि भारत ने तब भी स्पष्ट किया था कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों और राष्ट्रीय हितों को सुनिश्चित करने के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा।

  • BJP से अलग होने के बाद खुलकर बोले शहजाद पूनावाला: मोदी से राहुल गांधी तक कई मुद्दों पर रखी अपनी बात

    BJP से अलग होने के बाद खुलकर बोले शहजाद पूनावाला: मोदी से राहुल गांधी तक कई मुद्दों पर रखी अपनी बात


    नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी से इस्तीफा देने के बाद शहजाद पूनावाला एक बार फिर अपने बयानों को लेकर चर्चा में हैं। एक पॉडकास्ट में उन्होंने भाजपा छोड़ने से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस नेता राहुल गांधी तक कई मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा से अलग होने के बाद अब पार्टी उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकती। हालांकि इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वह भाजपा को दूसरी पार्टियों की तुलना में बेहतर मानते हैं।

    वरिष्ठ पत्रकार बरखा दत्त के साथ इनसाइड आउट पॉडकास्ट में शहजाद पूनावाला ने अपने राजनीतिक सफर और भाजपा छोड़ने के फैसले को लेकर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि अब जब वह भाजपा में नहीं हैं तो अपनी बात खुलकर रख सकते हैं। इसी दौरान उन्होंने पार्टी के काम करने के तरीके और कुछ राजनीतिक मुद्दों पर अपनी असहमति भी सामने रखी।

    शहजाद पूनावाला ने कहा कि भाजपा छोड़ने के बाद पार्टी उन्हें नुकसान नहीं पहुंचा सकती। उन्होंने यह भी दावा किया कि अब उन्हें भाजपा की ओर से कोई पैसा नहीं मिल रहा है। इसके बावजूद उन्होंने पार्टी को लेकर अपनी राय रखते हुए कहा कि भाजपा में अभी भी कुछ जवाबदेही दिखाई देती है। उन्होंने अपने तर्क के तौर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का उल्लेख किया।

    पूनावाला ने पेपर लीक के मुद्दे पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कर्नाटक पंजाब और झारखंड में पेपर लीक से जुड़े मामलों का जिक्र करते हुए पूछा कि वहां संबंधित शिक्षा मंत्रियों से इस्तीफा क्यों नहीं लिया गया। उनका कहना था कि अलग अलग राज्यों में सामने आए ऐसे मामलों पर राजनीतिक जवाबदेही का सवाल उठना स्वाभाविक है।

    पॉडकास्ट के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर भी कड़ी टिप्पणी की। पूनावाला ने मोदी की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए उनके इस्तीफे की मांग से जुड़ी बात कही। उन्होंने प्रधानमंत्री की तुलना देश के अलग अलग दौर के नेताओं के संदर्भ में करते हुए अपनी राजनीतिक राय रखी। यह टिप्पणी उनके निजी राजनीतिक आकलन के तौर पर सामने आई है।

    राहुल गांधी को लेकर पूछे गए सवाल पर भी शहजाद पूनावाला ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2009 से 2026 के बीच राहुल गांधी में बदलाव आया है और उन्होंने खुद में कुछ सुधार किए हैं। हालांकि उनके मुताबिक अभी भी कई ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें बदलाव की जरूरत है। उन्होंने राहुल गांधी की राजनीतिक शैली में निरंतरता की कमी होने की बात भी कही।

    पूनावाला ने कहा कि राहुल गांधी को कई मुद्दों पर लगता है कि उन्हें सब कुछ पता है। उन्होंने अपने और राहुल गांधी के बीच एक समानता का भी उल्लेख किया। साथ ही उन्होंने कुछ आंदोलनों और उनके कथित फंडिंग से जुड़े दावों का जिक्र किया।

    शहजाद पूनावाला का यह बयान ऐसे समय आया है जब भाजपा से उनके अलग होने के बाद उनकी राजनीतिक भूमिका को लेकर भी चर्चा जारी है। जुलाई में भाजपा से इस्तीफा देने के बाद उन्होंने पार्टी छोड़ने के पीछे आर्थिक कारणों का उल्लेख किया था। उन्होंने यह भी कहा था कि पार्टी के प्रवक्ताओं को वेतन नहीं मिलता है। अब पॉडकास्ट में दिए गए उनके बयान से साफ है कि भाजपा से अलग होने के बावजूद वह राष्ट्रीय राजनीति और पार्टी से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय सार्वजनिक रूप से रख रहे हैं।