Category: National

  • निवेश के लिए लंदन गए थे CM विजय या दोस्त की रेस देखने DMK के सवालों पर TVK ने दिया करारा जवाब

    निवेश के लिए लंदन गए थे CM विजय या दोस्त की रेस देखने DMK के सवालों पर TVK ने दिया करारा जवाब


    नई दिल्ली। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलपति विजय इन दिनों ब्रिटेन की यात्रा पर हैं और उनकी इस विदेश यात्रा को लेकर राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। विजय की लंदन यात्रा का आधिकारिक उद्देश्य निवेशकों से मुलाकात और तमिलनाडु में निवेश लाने से जुड़ी संभावनाओं पर चर्चा करना बताया गया है। लेकिन इसी दौरान अभिनेता अजित के साथ उनकी मुलाकात और अभिनेत्री तृषा के साथ नजर आने की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद विपक्षी दल डीएमके ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधना शुरू कर दिया है।

    शनिवार को सोशल मीडिया पर थलपति विजय और अभिनेता अजित का एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ। वीडियो में दोनों काफी सहज और दोस्ताना अंदाज में नजर आए। बताया जा रहा है कि अजित इन दिनों लंदन में मोटर रेसिंग से जुड़े कार्यक्रम में मौजूद हैं। विजय की उनसे मुलाकात के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई। डीएमके प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने मुख्यमंत्री की विदेश यात्रा पर सवाल उठाते हुए कहा कि विजय ने लंदन जाकर निवेश लाने की बात कही थी लेकिन अब तस्वीर सामने है कि वह अपने दोस्त की कार रेस देखने भी पहुंचे हैं।

    डीएमके विधायक मार्कंडेयन ने भी विजय की लंदन यात्रा को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में किसानों और मछुआरों समेत कई वर्गों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे मौजूद हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री को पहले राज्य की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए था। उनके मुताबिक निवेशकों से मुलाकात कुछ समय के लिए टाली भी जा सकती थी लेकिन राज्य के लोगों से जुड़े मुद्दे अधिक प्राथमिकता वाले हैं।

    हालांकि विजय की पार्टी टीवीके ने डीएमके के आरोपों को खारिज करते हुए पलटवार किया है। पार्टी प्रवक्ता नारायणन ने कहा कि मुख्यमंत्री अपने काम पर ध्यान दे रहे हैं और विदेश दौरे के दौरान किसी परिचित या दोस्त से मुलाकात करना कोई गलत बात नहीं है। उन्होंने कहा कि अजित केवल तमिल फिल्मों के बड़े अभिनेता ही नहीं बल्कि मोटर रेसिंग की दुनिया में भी अपनी पहचान रखते हैं। ऐसे में उनसे मुलाकात को तमिलनाडु की ब्रांड वैल्यू से जोड़कर देखा जाना चाहिए।

    दरअसल थलपति विजय की लंदन यात्रा को तमिलनाडु में मोटर स्पोर्ट्स से जुड़ी बड़ी योजना से भी जोड़कर देखा जा रहा है। चेन्नई में एक आधुनिक मोटर स्पोर्ट्स सिटी बनाने की योजना पर विचार किया जा रहा है। इसी सिलसिले में ब्रिटेन में मौजूद विश्वस्तरीय मोटर स्पोर्ट्स सुविधाओं और व्यवस्थाओं का निरीक्षण भी यात्रा का हिस्सा बताया जा रहा है।

    विजय के साथ अभिनेत्री तृषा के नजर आने और अजित के साथ उनकी मुलाकात के वीडियो वायरल होने के बाद मामला अब केवल फिल्मी दुनिया तक सीमित नहीं रहा है। मुख्यमंत्री की यात्रा को लेकर राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो चुकी है। एक तरफ डीएमके इसे सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाने का मुद्दा बना रही है तो दूसरी तरफ टीवीके इसे मुख्यमंत्री के कामकाज और तमिलनाडु की वैश्विक पहचान से जोड़कर देख रही है। ऐसे में विजय की लंदन यात्रा आने वाले दिनों में तमिलनाडु की राजनीति में और चर्चा का विषय बन सकती है।

  • गणपति के कितने रूप कहीं पत्नी नहीं तो कहीं रिद्धि-सिद्धि का साथ जानिए देशभर में क्यों अलग है बप्पा का स्वरूप

    गणपति के कितने रूप कहीं पत्नी नहीं तो कहीं रिद्धि-सिद्धि का साथ जानिए देशभर में क्यों अलग है बप्पा का स्वरूप


    नई दिल्ली। गणेश चतुर्थी का पर्व पूरे देश में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है लेकिन इस त्योहार की खासियत केवल इसकी भव्यता नहीं बल्कि भगवान गणेश को लेकर अलग-अलग क्षेत्रों में प्रचलित मान्यताएं भी हैं। देश के एक हिस्से में गणपति को ब्रह्मचारी माना जाता है तो दूसरे हिस्से में उन्हें रिद्धि-सिद्धि के पति के रूप में पूजा जाता है। कहीं वे बाल गणपति हैं तो कहीं सिद्धि-विनायक और महागणपति के रूप में उनकी आराधना होती है। यही विविधता गणेश उपासना को बेहद व्यापक और रोचक बनाती है।

    भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। महाराष्ट्र में इस पर्व का विशेष महत्व है जहां बड़े-बड़े पंडालों में गणपति की प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। पिछले कुछ दशकों में गणेशोत्सव महाराष्ट्र और दक्षिण तथा पश्चिम भारत से निकलकर उत्तर भारत के कई हिस्सों तक पहुंचा है। अब यह किसी एक क्षेत्र तक सीमित त्योहार नहीं रह गया है। अलग-अलग स्थानों पर गणपति के स्वरूप और उनसे जुड़ी धार्मिक मान्यताएं भी अपने स्थानीय इतिहास और परंपराओं के अनुसार विकसित हुई हैं।

    दक्षिण भारत की कई धार्मिक परंपराओं में भगवान गणेश को अविवाहित और ब्रह्मचारी माना जाता है। यहां उनका ब्रह्मचर्य संयम ज्ञान और आध्यात्मिक शक्ति से जोड़ा जाता है। इससे जुड़ी लोककथाओं में कहा जाता है कि गणेश अपनी माता पार्वती को आदर्श स्त्री मानते थे और उनके समान गुणों वाली स्त्री मिलने पर ही विवाह करना चाहते थे। एक अन्य कथा में यह विचार मिलता है कि संसार की सभी स्त्रियां आदिशक्ति और माता पार्वती का ही अंश हैं इसलिए गणेश ने विवाह न करने का निर्णय लिया। तमिलनाडु के सुचिंद्रम में गणेश के स्त्री रूप विनायकी की प्राचीन प्रतिमा भी इस परंपरा की विशिष्टता को दर्शाती है।

    वहीं उत्तर भारत में गणपति की छवि काफी अलग दिखाई देती है। यहां उन्हें रिद्धि-सिद्धि दाता और सिद्धि-बुद्धि के पति के रूप में पूजा जाता है। कई चित्रों और प्रतिमाओं में गणेशजी के साथ दो स्त्री आकृतियां दिखाई देती हैं। शिव पुराण से जुड़ी कथा में प्रजापति विश्वरूप की पुत्रियों सिद्धि और बुद्धि का विवाह गणेशजी से बताया गया है। इसी परंपरा से क्षेम और लाभ जैसे पुत्रों का उल्लेख मिलता है जो बाद में लोकप्रिय मान्यताओं में शुभ-लाभ के रूप में अधिक प्रसिद्ध हुए।

    इन मान्यताओं का प्रतीकात्मक अर्थ भी काफी महत्वपूर्ण है। बुद्धि विवेक और ज्ञान का प्रतीक है जबकि सिद्धि सफलता या आध्यात्मिक उपलब्धि का संकेत देती है। रिद्धि समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है। यानी गणपति के साथ इन शक्तियों का जुड़ाव यह संदेश देता है कि जहां विवेक और बुद्धि है वहां सफलता और समृद्धि का मार्ग भी खुलता है।

    महाराष्ट्र में गणपति लोकजीवन का अहम हिस्सा हैं। अष्टविनायक की परंपरा से लेकर सार्वजनिक गणेशोत्सव तक यहां गणपति के अनेक स्वरूप देखने को मिलते हैं। वहीं बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान गणेशजी के पास साड़ी में लिपटा केले का पौधा दिखाई देता है जिसे कोला बऊ कहा जाता है। लोकमान्यता में इसे गणेश की पत्नी माना जाता है लेकिन धार्मिक परंपरा में कोला बऊ वास्तव में नवपत्रिका पूजा का हिस्सा है।

    तांत्रिक और शाक्त परंपराओं में भी गणपति के अलग स्वरूप मिलते हैं। उच्छिष्ट गणपति महागणपति ऊर्ध्व गणपति पिंगल गणपति और लक्ष्मी गणपति जैसे रूपों में वे शक्ति के साथ दिखाई देते हैं। इन स्वरूपों को सामान्य वैवाहिक अर्थ में नहीं बल्कि शक्ति और सृजनात्मक ऊर्जा के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।

    इस तरह भगवान गणेश के अलग-अलग रूप और उनसे जुड़ी मान्यताएं एक-दूसरे के विरोधी नहीं बल्कि भारतीय धार्मिक परंपराओं की विविधता को दर्शाती हैं। क्षेत्र बदलने के साथ पूजा की शैली और मान्यता बदल सकती है लेकिन गणपति का मूल भाव वही रहता है। वे बुद्धि विवेक और विघ्नों को दूर करने वाली शक्ति के देवता हैं। यही कारण है कि किसी भी शुभ कार्य से पहले गणेशजी का स्मरण करने की परंपरा आज भी पूरे देश में कायम है।

  • काम की तलाश में निकला था मजदूर जेब खाली थी और लगी थी तेज भूख अन्नपूर्णा मंदिर पहुंचते ही सुरक्षा जांच में फंसा

    काम की तलाश में निकला था मजदूर जेब खाली थी और लगी थी तेज भूख अन्नपूर्णा मंदिर पहुंचते ही सुरक्षा जांच में फंसा


    नई दिल्ली। वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर के पास शनिवार को उस समय सुरक्षा व्यवस्था में हलचल मच गई जब अन्नपूर्णा मंदिर के अन्न क्षेत्र के पास एक युवक को चाकू के साथ देखा गया। सुरक्षाकर्मियों को युवक की गतिविधियां संदिग्ध लगीं जिसके बाद उसे रोककर पूछताछ शुरू की गई। मामला संवेदनशील क्षेत्र से जुड़ा होने के कारण पुलिस को सूचना दी गई और कुछ ही देर में कई सुरक्षा एजेंसियां जांच में जुट गईं। हालांकि घंटों चली पूछताछ और पड़ताल के बाद जो तस्वीर सामने आई उसने पूरे मामले को एक अलग ही दिशा दे दी।

    पुलिस के मुताबिक युवक की पहचान शाहिद जमाल के रूप में हुई है जो चंदौली के मुगलसराय क्षेत्र का रहने वाला बताया गया है। वह मजदूरी करता है और शादी समारोह तथा अन्य आयोजनों में सब्जी और नॉनवेज काटने का काम भी करता है। शनिवार सुबह वह अपने घर से काम की तलाश में पैदल निकला था। काफी देर तक इधर उधर घूमने के बावजूद उसे कोई काम नहीं मिला। जेब में पैसे नहीं थे और कई घंटे बीतने के बाद उसे तेज भूख लगने लगी।

    काम नहीं मिलने और भूख से परेशान युवक ने स्थानीय लोगों से रास्ता पूछा और अन्नपूर्णा मंदिर के अन्न क्षेत्र तक पहुंच गया। उसे उम्मीद थी कि वहां जरूरतमंदों के लिए मिलने वाले निशुल्क भोजन से उसकी भूख मिट जाएगी। लेकिन अन्न क्षेत्र के पास सुरक्षाकर्मियों की नजर उसके पास मौजूद चाकू पर पड़ गई। मंदिर क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए सुरक्षाकर्मियों ने तत्काल उसे रोक लिया और पुलिस को सूचना दी। इसके बाद युवक को दशाश्वमेध थाने ले जाया गया।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने युवक से विस्तार से पूछताछ की। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई। उसके घर और स्थानीय स्तर पर भी जानकारी जुटाई गई। उसके निवास क्षेत्र की पुलिस टीम ने परिजनों और गांव के प्रधान से भी पूछताछ की। इतना ही नहीं मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए आईबी इंटेलिजेंस एलआईयू एटीएस और सीआरपीएफ की इंटेलिजेंस यूनिट ने भी युवक से पूछताछ की।

    जांच के दौरान युवक के मोबाइल की कॉल डिटेल भी खंगाली गई। पुलिस ने सीसीटीएनएस और डीसीआरबी के रिकॉर्ड में उसका आपराधिक इतिहास तलाशा। इन सभी स्तरों पर जांच के बाद फिलहाल ऐसा कोई तथ्य सामने नहीं आया जिससे युवक की गतिविधियों को किसी आपराधिक साजिश से जोड़ा जा सके। पुलिस के अनुसार उसके खिलाफ कोई आपराधिक इतिहास भी नहीं मिला है।

    पूछताछ में चाकू रखने की वजह भी सामने आई। युवक ने बताया कि वह मजदूरी के साथ सब्जी और नॉनवेज काटने का काम करता है और इसी काम के सिलसिले में वह चाकू अपने साथ रखता था। शनिवार को भी वह इसी उम्मीद से घर से निकला था कि कहीं काम मिल जाएगा और कुछ कमाई हो सकेगी। लेकिन कई घंटे तक काम नहीं मिलने के बाद उसकी प्राथमिकता रोजगार से बदलकर भोजन की तलाश तक पहुंच गई।

    इस पूरे घटनाक्रम में एक तरफ मंदिर क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर सुरक्षाकर्मियों की सतर्कता दिखाई दी तो दूसरी तरफ जांच के बाद युवक की मजबूरी की तस्वीर भी सामने आई। जिस युवक को चाकू के कारण संदिग्ध मानकर रोका गया था वह पूछताछ में एक ऐसा मजदूर निकला जो काम की तलाश में घर से निकला था और भूख लगने पर अन्न क्षेत्र तक पहुंचा था। फिलहाल पुलिस ने मामले में सतर्कता बरकरार रखी है और स्थानीय स्तर पर निगरानी जारी है।

  • BRICS: नई दिल्ली घोषणापत्र पर ईरान को राजी करने के लिए करनी पड़ी मशक्कत

    BRICS: नई दिल्ली घोषणापत्र पर ईरान को राजी करने के लिए करनी पड़ी मशक्कत


    नई दिल्ली।
    ब्रिक्स देशों (BRICS Nations) ने एकतरफा टैरिफ, व्यापार प्रतिबंधों और संयुक्त राष्ट्र की मंजूरी के बिना लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों पर कड़ा रुख अपनाया है। शनिवार को सर्वसम्मति से जारी ‘नई दिल्ली घोषणापत्र-2026’ (New Delhi Declaration-2026’) में इन्हें वैश्विक व्यापार और आपूर्ति शृंखलाओं के लिए नुकसानदेह बताते हुए ऐसी कार्रवाइयों से बचने का आह्वान किया गया। वहीं नई दिल्ली डिक्लेरेशन पर ईरान (Iran) को तैयार करना आसान नहीं था। इसके लिए शनिवार सुबह 4 बजे तक मान-मनौव्वल और मशक्कत चलती रही।

    ब्रिक्स ने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) (World Trade Organization (WTO)) की विवाद निपटारा व्यवस्था बहाल करने और वैश्विक व्यापार व्यवस्था को अधिक न्यायसंगत बनाने पर जोर दिया। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक में विकासशील देशों की आवाज और हिस्सेदारी बढ़ाने की मांग की।


    आतंकवाद किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं

    45 पन्नों और 140 बिंदुओं के नई दिल्ली घोषणापत्र का ईरान और यूएई ने भी समर्थन किया। इसमें ब्रिक्स देशों ने आतंकवाद के सभी रूपों की कड़ी निंदा की। कहा गया कि किसी भी वजह या मकसद से अंजाम दी गई आतंकवादी घटनाओं को उचित नहीं ठहराया जा सकता है। ब्रिक्स ने आतंकवाद, इसकी आर्थिक मदद, सीमा पार आतंकवाद और आतंकवादियों को सुरक्षित ठिकाना दिए जाने के खिलाफ मिलकर कार्रवाई करने की प्रतिबद्धता दोहराई। घोषणापत्र में कहा गया है कि आतंकवाद को किसी धर्म, राष्ट्रीयता, सभ्यता या जातीय समूह से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। ब्रिक्स देशों ने ब्रिक्स काउंटर -टेररिज्म वर्किंग ग्रुप और उसके पांच उप-समूहों के काम की सराहना करते हुए आतंकवाद के खिलाफ सहयोग और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई।


    पहलगाम हमले की निंदा

    साझा घोषणापत्र में 22 अप्रैल 2025 को जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की। इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी और कई लोग घायल हुए थे।


    स्थायी सदस्यता का समर्थन

    ब्रिक्स देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन भी दोहराया। घोषणापत्र में चीन और रूस ने भारत की बड़ी भूमिका के समर्थन की बात कही। यूएनएससी में सुधार को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा कि इसे अब और नहीं टाला जा सकता है।


    इजरायल को झटका

    यूएई फलस्तीन समस्या के द्वि राष्ट्र समाधान का समर्थक है। ईरान भी इस प्रस्ताव के पक्ष में रहा। हालांकि, ब्रिक्स का यह प्रस्ताव इजरायल के लिए कूटनीतिक झटका है।


    परमाणु हथियार मुक्त क्षेत्र घोषित हो मध्य एशिया

    नई दिल्ली घोषणा में समूचे मध्य एशिया को परमाणु हथियारों से मुक्त क्षेत्र घोषित करने का भी प्रस्ताव है। यदि संयुक्त राष्ट्र किसी क्षेत्र को परमाणु हथियारों से मुक्त क्षेत्र घोषित करता है तो वहां परमाणु हथियारों का निर्माण और वितरण निषेध होता है। ईरान पर अमेरिकी हमलों के मद्देनजर यह एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव है।


    कैसे राजी हुआ ईरान

    ब्रिक्स में संयुक्त बयान पर यूएई और ईरान आखिर कैसे राजी हुए, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर तो कुछ नहीं कहा गया लेकिन सूत्रों का दावा है कि ईरान संयुक्त बयान में फलस्तीन को लेकर महत्वपूर्ण प्रस्ताव जोड़ने की शर्त पर माना। इन शर्तों में फलस्तीन को संयुक्त राष्ट्र का पूर्ण सदस्य घोषित करने की मांग प्रमुख रूप से शामिल है। यूएई ने भी इनका समर्थन किया। इसके बाद ईरान और यूएई की केमिस्ट्री में बदलाव दिखा।

    सूत्रों के अनुसार, एकमत करने के लिए भारत ने सभी पक्षों से शनिवार सुबह चार बजे तक बात की। दिल्ली घोषणा पत्र के प्रस्ताव संख्या 31 में कहा गया है कि हम इस बात की पुष्टि करते हैं कि इजरायल-फलस्तीन संघर्ष का सही और स्थायी समाधान शांतिपूर्ण तरीकों से ही हासिल किया जा सकता है। ब्रिक्स सभी वैश्विक संगठनों में फलस्तीन के सही प्रतिनिधित्व की जरूरत को मानता है जिसमें विश्व बैंक, आईएमएफ जैसी वित्तीय संस्थाएं भी शामिल हैं।

  • भारत मंडपम में चल रही ब्रिक्स समिट … प्रदर्शन करने पहुंच गए तिब्बती यूथ कांग्रेस के सदस्य…

    भारत मंडपम में चल रही ब्रिक्स समिट … प्रदर्शन करने पहुंच गए तिब्बती यूथ कांग्रेस के सदस्य…


    नई दिल्ली।
    भारत मंडपम (Bharat Mandapam) के पास विरोध-प्रदर्शन कर रहे तिब्बती यूथ कांग्रेस (Tibetan Youth Congress ) के 50 से अधिक सदस्यों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया है। यह जानकारी पुलिस ने दी। गौरतलब है कि इन दिनों प्रगति मैदान स्थित भारत मंडपम में ब्रिक्स सम्मेलन (BRICS Summit) से जुड़ी गतिविधियां चल रही हैं। देश में तमाम विदेशी मेहमान आए हुए हैं। पुलिस का पहरा भी सख्त है।

    शनिवार रात, तिब्बती यूथ कांग्रेस और तिब्बत के अन्य समर्थक BRICS समिट के लिए दिल्ली आए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के दौरे का विरोध करने के लिए ITO के पास जमा हुए। जब कुछ प्रदर्शनकारियों ने भारत मंडपम की ओर मार्च करने की कोशिश की, तो दिल्ली पुलिस ने कई दर्जन लोगों को हिरासत में ले लिया।

    पुलिस सूत्रों ने बताया कि कुछ प्रदर्शनकारी भारत मंडपम के करीब भी पहुंच गए थे और सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें तुरंत हिरासत में ले लिया। आरोप है कि प्रदर्शनकारी VVIP रूट के पास जमा होने की कोशिश कर रहे थे। बाद में उन्हें उस इलाके से दूर छोड़ दिया गया।

    लगातार कई दिनों से हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बाद मजनू का टीला में भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है। शुक्रवार को, ‘स्टूडेंट्स फॉर ए फ्री तिब्बत’ के पाँच कार्यकर्ताओं ने प्रगति मैदान टनल के अंदर खंभों पर चढ़कर तिब्बत का राष्ट्रीय झंडा फहराया और शी जिनपिंग के खिलाफ नारे लगाए।

  • बदरीनाथ में आस्था के बीच बड़ा हादसा तप्तकुंड में ज्यादा देर स्नान बना जानलेवा डॉक्टरों ने दी खास सलाह

    बदरीनाथ में आस्था के बीच बड़ा हादसा तप्तकुंड में ज्यादा देर स्नान बना जानलेवा डॉक्टरों ने दी खास सलाह


    नई दिल्ली। बदरीनाथ धाम में आस्था के साथ तप्तकुंड में स्नान करने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक गंभीर चेतावनी सामने आई है। चमोली जिले में स्थित प्रसिद्ध तप्तकुंड में अधिक संख्या में डुबकी लगाने और लंबे समय तक गर्म पानी में रहने को चिकित्सकों ने स्वास्थ्य के लिए खतरनाक बताया है। शुक्रवार को कुंड में 108 डुबकी लगाने के दौरान दो सगी बहनों की मौत के बाद श्रद्धालुओं से विशेष सावधानी बरतने की अपील की गई है। चिकित्सकों के अनुसार प्राकृतिक रूप से गर्म और सल्फरयुक्त पानी में अधिक समय तक रहने से शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और कुछ परिस्थितियों में यह जानलेवा भी साबित हो सकता है।

    बदरीनाथ के सरकारी अस्पताल के प्रभारी चिकित्सक डॉ. सचिन राणा के अनुसार तप्तकुंड का पानी प्राकृतिक रूप से गर्म और सल्फरयुक्त है। इसके अलावा कुंड के आसपास गर्म हवाओं का प्रभाव भी रहता है। ऐसे वातावरण में लंबे समय तक रहने से शरीर पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। उन्होंने श्रद्धालुओं को सलाह दी है कि कुंड में अधिकतम दो से तीन डुबकी लगाने के बाद बाहर निकल जाना चाहिए। खासकर बुजुर्गों और हृदय संबंधी समस्या वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।

    शुक्रवार को हुआ हादसा इस चेतावनी की गंभीरता को सामने लाता है। 71 वर्षीय रामू देवी और 63 वर्षीय प्रेमा देवी सगी बहनें थीं। बताया गया कि दोनों करीब एक सप्ताह से प्रतिदिन तप्तकुंड में 108 डुबकी लगा रही थीं। शुक्रवार को भी उन्होंने इसी तरह स्नान किया लेकिन इसके बाद दोनों की तबीयत बिगड़ गई। दोनों की हृदय गति रुकने से मौत हो गई। घटना के बाद तीर्थयात्रियों के बीच भी चिंता बढ़ गई और प्रशासन तथा चिकित्सकों की ओर से सावधानी बरतने की जरूरत पर जोर दिया गया।

    तप्तकुंड बदरीनाथ धाम आने वाले श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र है। मान्यता के चलते बड़ी संख्या में लोग यहां स्नान करते हैं। कई श्रद्धालु धार्मिक संकल्प के तहत बार बार डुबकी लगाते हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि धार्मिक आस्था के साथ शरीर की क्षमता और स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी है। गर्म पानी में लंबे समय तक रहने या बार बार डुबकी लगाने से चक्कर आना कमजोरी महसूस होना मूर्छा आना और हृदय संबंधी परेशानी जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

    ऊंचाई वाले क्षेत्र में होने के कारण बदरीनाथ में मौसम और वातावरण मैदानी इलाकों से अलग होता है। ऐसे में श्रद्धालुओं को अपनी शारीरिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए ही स्नान करना चाहिए। यदि स्नान के दौरान चक्कर घबराहट सांस लेने में परेशानी अत्यधिक कमजोरी या बेचैनी महसूस हो तो तुरंत कुंड से बाहर निकलकर चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।

    चिकित्सकों की सलाह का उद्देश्य श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था को रोकना नहीं बल्कि उसे सुरक्षित बनाना है। तप्तकुंड में स्नान करते समय सीमित समय तक रहना और अधिक डुबकी लगाने से बचना जरूरी है। दो महिलाओं की मौत की घटना ने यह साफ कर दिया है कि आस्था के साथ सावधानी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। श्रद्धालुओं को अपनी सेहत को प्राथमिकता देते हुए चिकित्सकों की सलाह का पालन करना चाहिए ताकि बदरीनाथ की यात्रा श्रद्धा के साथ सुरक्षित भी रहे।

  • सुरों से बदलेगी कश्मीर की कहानी एआर रहमान बोले फिल्मों में संघर्ष नहीं अब दिखेगी घाटी की खूबसूरती और कश्मीरियत

    सुरों से बदलेगी कश्मीर की कहानी एआर रहमान बोले फिल्मों में संघर्ष नहीं अब दिखेगी घाटी की खूबसूरती और कश्मीरियत


    नई दिल्ली। ऑस्कर विजेता संगीतकार एआर रहमान ने कश्मीर को लेकर सिनेमा की पारंपरिक सोच बदलने की जरूरत बताई हैनई दिल्ली। शनिवार को श्रीनगर पहुंचे रहमान ने कहा कि कश्मीर को अब केवल संघर्ष और हिंसा की कहानियों से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। यह घाटी अपनी प्राकृतिक सुंदरता शांत वातावरण समृद्ध संस्कृति और सद्भाव के लिए भी जानी जाती है और फिल्मों के माध्यम से दुनिया के सामने कश्मीर की इसी सकारात्मक तस्वीर को मजबूती से पेश किया जा सकता है।

    विज्ञापन की शूटिंग के सिलसिले में श्रीनगर पहुंचे एआर रहमान ने बातचीत के दौरान कहा कि कश्मीर बेहद खूबसूरत शांत और प्रेरणादायक जगह है। उनके मुताबिक सिनेमा केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है बल्कि यह लोगों की सोच और किसी स्थान को देखने का नजरिया बदलने की क्षमता भी रखता है। ऐसे में फिल्मकारों की जिम्मेदारी है कि वे कश्मीर की पुरानी हिंसक छवि को बार बार दोहराने के बजाय घाटी की खूबसूरती शांति और सांस्कृतिक विरासत को अपनी कहानियों का हिस्सा बनाएं।

    रहमान की इस अपील को कश्मीर में पर्यटन और फिल्म निर्माण को बढ़ावा देने की कोशिशों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। लंबे समय तक फिल्मों में कश्मीर को संघर्ष आतंक और तनाव की पृष्ठभूमि के रूप में दिखाया जाता रहा है। हालांकि अब घाटी की प्राकृतिक सुंदरता स्थानीय संस्कृति लोक परंपराओं और सामान्य जनजीवन को केंद्र में रखकर नई कहानियां सामने लाने की संभावना बढ़ रही है। रहमान का मानना है कि अगर सिनेमा कश्मीर के इस बदले हुए पहलू को दुनिया तक पहुंचाता है तो इससे घाटी को लेकर लोगों की धारणा में सकारात्मक बदलाव आ सकता है।

    एआर रहमान ने कश्मीर में आयोजित हो रहे इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल की भी सराहना की। उन्होंने इसे एक अच्छी शुरुआत बताते हुए उम्मीद जताई कि आने वाले समय में यह महोत्सव दुनिया के प्रमुख फिल्म आयोजनों में अपनी अलग पहचान बना सकता है। उन्होंने कहा कि जिस तरह दुनिया भर के लोग बड़े फिल्म फेस्टिवल में हिस्सा लेने के लिए अलग अलग शहरों का रुख करते हैं उसी तरह कश्मीर भी सिनेमा प्रेमियों और फिल्मकारों के लिए आकर्षण का बड़ा केंद्र बन सकता है।

    उनका कहना था कि कश्मीर की मेहमाननवाजी संस्कृति और खूबसूरत वादियां देश और दुनिया के लोगों को अपनी ओर खींच सकती हैं। फिल्म फेस्टिवल के जरिए स्थानीय कलाकारों फिल्मकारों और रचनात्मक प्रतिभाओं को भी बड़ा मंच मिल सकता है। इससे कश्मीर में फिल्म निर्माण की गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन को भी फायदा पहुंचने की उम्मीद है।

    रहमान की बातों में कश्मीर की एक ऐसी तस्वीर दिखाई देती है जिसमें बंदूक और बारूद की जगह संगीत कला सिनेमा और शांति को प्रमुखता मिले। उनका संदेश साफ है कि घाटी की पहचान केवल उसके अतीत के संघर्षों से नहीं बल्कि उसकी खूबसूरती संस्कृति और कश्मीरियत से भी होनी चाहिए। सिनेमा इस बदलाव की कहानी दुनिया तक पहुंचाने का सबसे प्रभावी माध्यम बन सकता है।

  • चंद्रशेखर आजाद ने आकाश आनंद को बताया छोटा भाई, बोले- साथ आए तो मिलकर बाबा साहब का अधूरा मिशन पूरा करेंगे

    चंद्रशेखर आजाद ने आकाश आनंद को बताया छोटा भाई, बोले- साथ आए तो मिलकर बाबा साहब का अधूरा मिशन पूरा करेंगे


    नई दिल्ली । 
    उत्तर प्रदेश की राजनीति में दलित समाज से जुड़े मुद्दों के बीच नगीना से सांसद और आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने बहुजन समाज पार्टी के नेता आकाश आनंद को लेकर बड़ा बयान दिया है। चंद्रशेखर आजाद ने आकाश आनंद को अपना छोटा भाई बताते हुए कहा कि यदि वह उनके साथ आना चाहें तो उनकी पार्टी में उनका स्वागत है। उन्होंने राजनीतिक मतभेदों के बावजूद आकाश आनंद के प्रति किसी तरह का बुरा भाव नहीं होने की बात कही।

    चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि आकाश आनंद ने कई बार उनकी आलोचना की है, लेकिन वह उन्हें अब भी अपना छोटा भाई मानते हैं। उनके मुताबिक, दोनों के बीच राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर उनके मन में आकाश आनंद के लिए कोई दुर्भावना नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर आकाश आनंद साथ काम करने के लिए तैयार होते हैं तो दोनों मिलकर बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों को आगे बढ़ाने और उनके अधूरे काम को पूरा करने की दिशा में काम कर सकते हैं।

    चंद्रशेखर आजाद ने आकाश आनंद के लिए अपनी पार्टी के दरवाजे खुले होने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति बाबा साहब के विचारों और उनके मिशन को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से उनके साथ जुड़ना चाहता है, उसका स्वागत किया जाएगा। उनके अनुसार, महापुरुषों के अधूरे कामों को पूरा करने के लिए मिलकर प्रयास किया जा सकता है।

    चंद्रशेखर आजाद का यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब बहुजन समाज पार्टी में आकाश आनंद को लेकर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम हुआ है। बसपा प्रमुख मायावती ने आकाश आनंद को पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक पद से हटाने के बाद एक बार फिर उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया है। मायावती ने यह भी स्पष्ट किया है कि अब उनके परिवार का कोई सदस्य पार्टी में शामिल नहीं होगा।

    आकाश आनंद को लेकर चंद्रशेखर आजाद का रुख इससे अलग नजर आया है। उन्होंने राजनीतिक मतभेदों के बावजूद उनके साथ आने की संभावना को खुला रखा है। अपने बयान में उन्होंने आकाश आनंद को परिवार के छोटे सदस्य की तरह बताते हुए साथ मिलकर काम करने की इच्छा जाहिर की है।

    चंद्रशेखर आजाद ने अपने राजनीतिक उद्देश्य को डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों को आगे बढ़ाने से जोड़ा। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य बाबा साहब के विचारों और उनके अधूरे काम को आगे ले जाना है। इसी उद्देश्य से उन्होंने उन लोगों के लिए भी पार्टी के दरवाजे खुले होने की बात कही, जो इस मिशन में उनके साथ जुड़ना चाहते हैं।

    उत्तर प्रदेश की राजनीति में दलित समाज से जुड़े नेताओं की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। ऐसे में चंद्रशेखर आजाद का आकाश आनंद को लेकर दिया गया बयान राजनीतिक रूप से चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि, आकाश आनंद की ओर से इस प्रस्ताव पर कोई प्रतिक्रिया सामने आने की जानकारी इस खबर में नहीं दी गई है।

    फिलहाल चंद्रशेखर आजाद ने आकाश आनंद को लेकर अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि व्यक्तिगत मतभेदों के बावजूद वह उन्हें छोटा भाई मानते हैं और यदि दोनों साथ आते हैं तो बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों तथा उनके अधूरे मिशन को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम किया जा सकता है।

  • हरतालिका तीज पर नहीं होगी आखिरी वक्त की भागदौड़, पूजा स्थल, सामग्री और श्रृंगार की तैयारी इस क्रम में करें

    हरतालिका तीज पर नहीं होगी आखिरी वक्त की भागदौड़, पूजा स्थल, सामग्री और श्रृंगार की तैयारी इस क्रम में करें

    नई दिल्ली । हरतालिका तीज का पर्व व्रत और पूजा के साथ तैयारियों के लिए भी खास माना जाता है। इस दिन घर की साफ-सफाई, पूजा स्थल की सजावट, शिव-पार्वती की प्रतिमा की तैयारी, पूजा की थाली और श्रृंगार से जुड़े कई काम करने होते हैं। यदि इन तैयारियों को आखिरी समय तक टाल दिया जाए तो व्रत के दिन काफी भागदौड़ हो सकती है। ऐसे में जरूरी कामों को पहले से अलग-अलग चरणों में पूरा करने से दिन को व्यवस्थित रखा जा सकता है।

    सबसे पहले पूजा स्थल और प्रतिमा की तैयारी कर लें। यदि घर में शिव-पार्वती की पूजा के लिए मिट्टी की प्रतिमा बनाई या रखी जाती है, तो उसे पहले से तैयार करके पूजा की जगह पर सजा दें। चौकी पर साफ कपड़ा बिछाकर प्रतिमा को व्यवस्थित रखा जा सकता है। पूजा स्थल के आसपास फूलों या रंगोली से हल्की सजावट भी की जा सकती है। इससे पूजा की जगह पहले से तैयार रहेगी और बाद में इस काम के लिए समय नहीं निकालना पड़ेगा।

    इसके बाद तीज के लिए पहने जाने वाले कपड़ों और श्रृंगार की सामग्री को एक जगह रख लें। साड़ी या पारंपरिक कपड़ों के साथ चूड़ियां, बिंदी, सिंदूर, गहने और दूसरी जरूरी चीजें पहले से तैयार रखना सुविधाजनक रहेगा। यदि मेहंदी लगानी है तो इसे भी पहले ही लगा लेना बेहतर रहेगा। इससे पूजा के समय तैयार होने की जल्दबाजी से बचा जा सकता है।

    पूजा की थाली को भी समय रहते व्यवस्थित कर लेना चाहिए। इसमें फूल, फल, दीपक, धूप, रोली, अक्षत, पान-सुपारी, प्रसाद और पूजा में इस्तेमाल होने वाली अन्य जरूरी चीजें रखी जा सकती हैं। सारी सामग्री एक साथ रखने और उसे दोबारा जांच लेने से पूजा के दौरान किसी सामान के लिए बार-बार उठने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

    पूजा की सामग्री तैयार होने के बाद पूजा स्थल को एक बार फिर देख लें। चौकी, प्रतिमा और पूजा की थाली को सही जगह पर रखें। यदि फूलों की सजावट या रंगोली बनानी है तो उसे भी इसी दौरान पूरा किया जा सकता है। इस तरह पूजा शुरू होने से पहले सभी जरूरी व्यवस्थाएं पूरी रहेंगी।

    दिन के आखिर में खुद के श्रृंगार की तैयारी करें। साड़ी के साथ पारंपरिक आभूषण, चूड़ियां, बिंदी और सिंदूर को तैयार रखें। सभी चीजें पहले से निकालकर रखने पर शाम के समय एक-एक सामान ढूंढने की परेशानी नहीं होगी और आराम से तैयार होने का समय मिल सकेगा।

    हरतालिका तीज की तैयारियों को सुबह, दोपहर और शाम के कामों में बांटने से पूरे दिन की भागदौड़ कम की जा सकती है। सुबह घर की सफाई और पूजा सामग्री की तैयारी, इसके बाद पूजा स्थल की सजावट और फिर शाम से पहले श्रृंगार की व्यवस्था पूरी की जा सकती है। इससे पूजा के समय जरूरी कामों का दबाव कम रहेगा।

    पूजा की तिथि और मुहूर्त अलग-अलग शहरों में स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग हो सकते हैं। इसलिए पूजा के समय के लिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार जानकारी की पुष्टि करना उचित रहेगा। पहले से तैयारी पूरी रखने से हरतालिका तीज के दिन पूजा और अन्य जरूरी काम व्यवस्थित तरीके से किए जा सकते हैं।