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  • जनता दर्शन में सीएम योगी ने सुनीं समस्‍याएं, बोले- भूमाफियाओं पर तुरंत FIR दर्ज कर भेजें जेल

    जनता दर्शन में सीएम योगी ने सुनीं समस्‍याएं, बोले- भूमाफियाओं पर तुरंत FIR दर्ज कर भेजें जेल


    गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर दौरे के दूसरे दिन शुक्रवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में आयोजित जनता दर्शन कार्यक्रम में लोगों की समस्याएं सुनीं। इस दौरान उन्होंने फरियादियों को भरोसा दिलाया कि हर शिकायत पर प्रभावी कार्रवाई होगी और किसी भी पीड़ित के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।

    जमीन कब्जाने वालों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश
    जनता दर्शन के दौरान जमीन पर अवैध कब्जे से जुड़ी शिकायतें सामने आने पर मुख्यमंत्री ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि भूमाफियाओं के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जाए। साथ ही यह भी कहा कि जनता की शिकायतों के निस्तारण में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

    करीब 150 लोगों की सुनी समस्याएं
    गोरखनाथ मंदिर परिसर स्थित महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के बाहर आयोजित जनता दर्शन में मुख्यमंत्री ने करीब 150 लोगों से मुलाकात की। वे स्वयं प्रत्येक फरियादी के पास पहुंचे, उनकी समस्याएं सुनीं और प्रार्थना पत्र लेकर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।

    अधिकारियों को दिया निष्पक्ष और समयबद्ध कार्रवाई का निर्देश
    मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों से कहा कि सभी मामलों का निष्पक्ष, पारदर्शी और तय समय सीमा में निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। अपराध और भूमि कब्जे से जुड़े मामलों में उन्होंने पुलिस को सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

    इलाज के लिए आर्थिक सहायता का दिया भरोसा
    चिकित्सा सहायता से जुड़े प्रार्थना पत्रों पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से अस्पतालों का इस्टीमेट जल्द तैयार कराने को कहा। उन्होंने आश्वस्त किया कि इस्टीमेट मिलते ही सरकार की ओर से आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि मरीजों के इलाज में कोई देरी न हो।

    बच्चों को दिया आशीर्वाद और चॉकलेट
    जनता दर्शन में कुछ महिलाएं अपने बच्चों के साथ भी पहुंची थीं। मुख्यमंत्री ने बच्चों से स्नेहपूर्वक मुलाकात की, उन्हें चॉकलेट दी और आशीर्वाद भी दिया।

    गोशाला पहुंचकर की गोसेवा
    जनता दर्शन के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखनाथ मंदिर की गोशाला पहुंचे। यहां उन्होंने गोवंश को उनके नाम लेकर पुकारा। परिचित आवाज सुनते ही कई गायें उनके पास आ गईं। मुख्यमंत्री ने उन्हें स्नेहपूर्वक दुलार किया, अपने हाथों से गुड़ खिलाया और गोशाला में मौजूद अन्य गायों व नंदी की भी सेवा की। इस दौरान उन्होंने गोशाला के कर्मचारियों को पशुओं की बेहतर देखभाल के लिए आवश्यक निर्देश भी दिए।

  • CJP और सरकार के बीच बातचीत बेनतीजा नहीं, कई मुद्दों पर सहमति; इस्तीफे पर कल होगा फैसला

    CJP और सरकार के बीच बातचीत बेनतीजा नहीं, कई मुद्दों पर सहमति; इस्तीफे पर कल होगा फैसला


    नई दिल्ली। NEET पेपर लीक विवाद को लेकर जारी गतिरोध के बीच शुक्रवार को केंद्र सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रतिनिधियों के बीच दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में अहम बैठक हुई। करीब 10 मिनट चली इस वार्ता में कुछ मुद्दों पर सहमति बनी, जबकि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर कोई अंतिम निर्णय नहीं हो सका। सरकार ने इस विषय पर विचार के लिए शनिवार तक का समय मांगा है।

    बैठक में केंद्र सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह शामिल हुए, जबकि CJP का प्रतिनिधित्व सौरभ दास और आशुतोष रांका ने किया। वार्ता के दौरान प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों को वापस लेने और घायल छात्रों को मुआवजा देने के प्रस्ताव पर दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी। हालांकि, CJP ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

    बैठक के बाद जेपी नड्डा ने बताया कि CJP ने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें और परीक्षा प्रणाली में सुधार से जुड़े पांच सुझाव रखे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार इन प्रस्तावों पर आंतरिक स्तर पर चर्चा करेगी और शनिवार दोपहर होने वाली अगली बैठक में अपना विस्तृत पक्ष रखेगी।

    इससे पहले 20 जुलाई को भी दोनों पक्षों के बीच बातचीत हुई थी, लेकिन वह किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी थी। अब शुक्रवार की बैठक को समाधान की दिशा में पहला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    उधर, NEET पेपर लीक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से अब तक किए गए सुधारों और जांच की वर्तमान स्थिति पर विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। अदालत ने यह भी जानना चाहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सरकार ने क्या ठोस कदम उठाए हैं।

    CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने दावा किया कि सरकार आंदोलन के दबाव में है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देर रात जारी किया गया संदेश भी इसी दबाव का परिणाम है। उनका कहना है कि संगठन अपनी प्रमुख मांगों से पीछे नहीं हटेगा और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी रहेगा।

    इसी बीच, 26 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक ने सरकार से लिखित आश्वासन मिलने के बाद अपना अनशन समाप्त कर दिया। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह ने गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल पहुंचकर उन्हें जूस पिलाया। हालांकि, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर वांगचुक और CJP के रुख में अंतर देखने को मिला।

    राजधानी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। एहतियात के तौर पर मध्य दिल्ली के कई इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। वहीं, कई प्रमुख मेट्रो स्टेशनों पर परिचालन प्रभावित होने की खबर है। प्रदर्शन और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े मामलों पर दिल्ली हाईकोर्ट में भी सुनवाई जारी है।

  • सरकार और CJP के बीच नहीं बनी सहमति, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग जारी, कल होगी अगली बैठक

    सरकार और CJP के बीच नहीं बनी सहमति, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग जारी, कल होगी अगली बैठक


    नई दिल्ली। नीट पेपर लीक मामले को लेकर पिछले तीन सप्ताह से आंदोलन कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और केंद्र सरकार के बीच शुक्रवार को हुई दूसरे दौर की वार्ता किसी अंतिम नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। हालांकि CJP का दावा है कि सरकार ने उनकी तीन प्रमुख मांगों में से दो पर सकारात्मक रुख दिखाया है, लेकिन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर सहमति नहीं बन पाई। इस मुद्दे पर सरकार ने शनिवार तक का समय मांगा है। अब दोनों पक्षों के बीच अगली बैठक शनिवार दोपहर करीब 12 बजे होगी।

    करीब 50 मिनट चली बैठक
    दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में हुई बैठक लगभग 50 मिनट तक चली। CJP की ओर से प्रवक्ता सौरभ दास और आशुतोष रंका मौजूद रहे, जबकि सरकार का प्रतिनिधित्व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने किया।

    इस्तीफे की मांग पर कायम CJP
    बैठक के बाद CJP प्रवक्ता सौरभ दास ने बताया कि मंत्रियों के साथ हुई चर्चा में सरकार उनकी तीन मांगों में से दो पर सकारात्मक नजर आई। उन्होंने कहा कि NEET की तैयारी के दौरान आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा देने और आंदोलनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने के मुद्दे पर सरकार का रुख सकारात्मक रहा। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर संगठन किसी तरह का समझौता करने के लिए तैयार नहीं है।

    दो मांगों पर मिली सैद्धांतिक सहमति
    CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रंका ने कहा कि सरकार ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से जुड़े मुद्दे पर फैसला लेने के लिए शनिवार दोपहर तक का समय मांगा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार जल्द इस पर निर्णय लेगी। रंका के मुताबिक, सरकार ने दो मांगों पर सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। इनमें आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिजनों को मुआवजा और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर व अन्य कानूनी कार्रवाई वापस लेने का प्रस्ताव शामिल है।

    20 जुलाई को भी हुई थी बातचीत
    इससे पहले 20 जुलाई को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के सरकारी आवास पर CJP प्रतिनिधियों और सरकार के बीच दो दौर की बैठक हुई थी, जिसमें भी सौरभ दास और आशुतोष रंका शामिल हुए थे। इसी बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने सरकार की ओर से प्रमुख मांगों पर आश्वासन मिलने के बाद 26 दिनों से जारी अपना अनशन समाप्त कर दिया था। इसके बाद शुक्रवार को कॉन्स्टीट्यूशन क्लब के विठ्ठलभाई पटेल हाउस में दोनों पक्षों के बीच यह नई बैठक आयोजित की गई।

    आंदोलन जारी रखने का ऐलान
    CJP ने पहले ही सरकार के मंत्रियों के आवास या कार्यालय में वार्ता करने से इनकार कर दिया था और किसी तटस्थ स्थान पर बातचीत की मांग की थी। संगठन का कहना है कि जंतर-मंतर पर चल रहा प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा, जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते।

    संगठन की प्रमुख मांगों में धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जवाबदेही तय करना, शिक्षा व्यवस्था में सुधार, NEET पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा तथा आंदोलनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर और कानूनी कार्रवाई वापस लेना शामिल है।

  • राहुल गांधी का सरकार पर हमला, बोले- शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक पेपर लीक पर बहस में शामिल नहीं होगा विपक्ष

    राहुल गांधी का सरकार पर हमला, बोले- शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक पेपर लीक पर बहस में शामिल नहीं होगा विपक्ष

    नई दिल्ली । लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पेपर लीक मामले को लेकर केंद्र सरकार पर एक बार फिर निशाना साधा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री अपने पद से इस्तीफा नहीं देते, तब तक विपक्ष इस मुद्दे पर संसद में होने वाली किसी भी चर्चा में भाग नहीं लेगा। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार जवाबदेही से बचने का प्रयास कर रही है, जबकि विपक्ष की मांग है कि पहले जिम्मेदारी तय की जाए और उसके बाद ही सदन में बहस आगे बढ़े।

    संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें लोकसभा में अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया गया। उन्होंने दावा किया कि जब उनका नाम लेकर चर्चा की गई और वे उसका जवाब देने के लिए खड़े हुए, तब उन्हें बोलने का मौका नहीं मिला। उनके अनुसार संसदीय परंपरा के तहत जिस सदस्य का नाम लिया जाता है, उसे अपनी बात रखने का अवसर दिया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि उनका माइक्रोफोन बंद कर दिया गया और उन्हें अपनी बात पूरी करने का अवसर नहीं दिया गया।

    इससे पहले लोकसभा की कार्यवाही के दौरान केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष से पेपर लीक के मुद्दे पर चर्चा में शामिल होने की अपील की थी। उन्होंने राहुल गांधी से भी आग्रह किया था कि वे अपने दल के सांसदों को सदन में बहस में भाग लेने के लिए प्रेरित करें। हालांकि इसके बाद सदन में हंगामा बढ़ गया और कार्यवाही निर्धारित समय से पहले स्थगित कर दी गई।

    राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष का रुख पूरी तरह स्पष्ट है। उनके अनुसार शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बिना पेपर लीक जैसे गंभीर विषय पर चर्चा का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने कहा कि विपक्ष लगातार तीन प्रमुख मांगों पर कायम है। इनमें शिक्षा मंत्री की जवाबदेही तय करना, छात्रों के साथ हुई कथित कार्रवाई की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई शामिल है। उनका कहना है कि केवल चर्चा से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि जवाबदेही सुनिश्चित करना भी आवश्यक है।

    पेपर लीक के मुद्दे को लेकर पिछले कुछ समय से संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। विभिन्न विपक्षी दल परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग उठा रहे हैं, जबकि सरकार परीक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा जता चुकी है। इसी बीच केंद्र सरकार पेपर लीक से जुड़े कानून को और सख्त बनाने की दिशा में भी कदम उठा रही है, जिससे यह मुद्दा राजनीतिक और विधायी दोनों स्तरों पर चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

    संसद में जारी गतिरोध के बीच अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार और विपक्ष के बीच इस विषय पर सहमति बन पाती है या नहीं। यदि दोनों पक्षों के बीच संवाद आगे बढ़ता है तो पेपर लीक, परीक्षा सुधार और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा संभव हो सकती है। फिलहाल विपक्ष अपने रुख पर कायम है और सरकार सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने के लिए सभी दलों से सहयोग की अपील कर रही है।

  • 'कोई याचिका दाखिल ही नहीं हुई थी', CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया अपना रुख, गलत रिपोर्टिंग पर जताई नाराजगी

    'कोई याचिका दाखिल ही नहीं हुई थी', CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया अपना रुख, गलत रिपोर्टिंग पर जताई नाराजगी

    नई दिल्ली । मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने सीजेपी प्रदर्शन से जुड़े मामले की सुनवाई को लेकर प्रसारित कुछ मीडिया रिपोर्टों पर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने किसी मामले की सुनवाई से इनकार नहीं किया था, बल्कि संबंधित मामले में विधिवत याचिका ही दाखिल नहीं की गई थी। सीजेआई ने कहा कि बिना आवश्यक दस्तावेज और औपचारिक याचिका के किसी भी मामले को न्यायालय की सूची में शामिल नहीं किया जा सकता। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर तथ्यों के विपरीत रिपोर्टिंग पर चिंता भी व्यक्त की।

    सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि कुछ समाचारों में यह दावा किया गया कि उन्होंने मामले को सूचीबद्ध करने से मना कर दिया, जबकि वास्तविक स्थिति इससे अलग थी। उन्होंने बताया कि अदालत की रजिस्ट्री से जानकारी लेने पर पता चला कि निर्धारित समय तक एक भी याचिका या आवश्यक दस्तावेज दाखिल नहीं किया गया था। ऐसे में किसी मामले को सूचीबद्ध करने का प्रश्न ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि केवल किसी प्रतिनिधित्व या पत्र को रिट याचिका नहीं माना जा सकता।

    सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि यदि कोई याचिका विधिसम्मत तरीके से दायर की जाती है तो न्यायालय उस पर कानून के अनुसार विचार करेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी मामले की सुनवाई से बचना नहीं था, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित करना था। उन्होंने कहा कि न्यायालय में प्रत्येक मामले की सुनवाई निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप ही होती है और बिना औपचारिक याचिका के अदालत कार्रवाई नहीं कर सकती।

    मुख्य न्यायाधीश ने मीडिया की भूमिका पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि तथ्यों की पुष्टि किए बिना खबरों का प्रसारण करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में उनके बयान को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया, जिससे यह संदेश गया कि उन्होंने मामले की सुनवाई से इनकार कर दिया है। जबकि वास्तविकता यह थी कि अदालत के समक्ष उस समय कोई विधिवत याचिका उपलब्ध नहीं थी। उन्होंने जिम्मेदार और तथ्य आधारित रिपोर्टिंग की आवश्यकता पर जोर दिया।

    यह मामला उस समय सामने आया जब सीजेपी प्रदर्शन के दौरान छात्रों के साथ कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा अदालत के समक्ष उठाया गया था। एक अधिवक्ता ने न्यायालय का ध्यान इस विषय की ओर आकर्षित करते हुए तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया था। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी मामले पर विचार करने के लिए पहले निर्धारित प्रक्रिया के तहत याचिका दाखिल होना आवश्यक है। इसी प्रक्रिया के अभाव में तत्काल सूचीबद्ध करने का अनुरोध स्वीकार नहीं किया जा सका।

    सीजेआई सूर्यकांत की इस टिप्पणी के बाद न्यायिक प्रक्रिया और मीडिया रिपोर्टिंग की जिम्मेदारी को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। उन्होंने दोहराया कि न्यायपालिका का कार्य पूरी तरह स्थापित कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप चलता है और किसी भी मामले में सुनवाई का निर्णय तथ्यों, दस्तावेजों और विधिक प्रक्रिया के आधार पर ही लिया जाता है। उनके स्पष्टीकरण से यह स्पष्ट हुआ कि मामले में सुनवाई से इनकार नहीं किया गया था, बल्कि आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी नहीं होने के कारण उसे सूचीबद्ध नहीं किया जा सका।

  • IIT कानपुर से IAS तक का सफर, शिक्षा सचिव पद से हटाए गए विनीत जोशी का प्रशासनिक और शैक्षणिक सफर चर्चा में

    IIT कानपुर से IAS तक का सफर, शिक्षा सचिव पद से हटाए गए विनीत जोशी का प्रशासनिक और शैक्षणिक सफर चर्चा में

    नई दिल्ली । पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली को लेकर जारी विवाद के बीच केंद्र सरकार ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी विनीत जोशी का शिक्षा मंत्रालय से तबादला कर उन्हें पंचायती राज मंत्रालय में सचिव नियुक्त किया है। उनके स्थान पर उच्च शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी नए अधिकारी को सौंपी गई है। इस प्रशासनिक बदलाव के बाद विनीत जोशी का लंबा शैक्षणिक और प्रशासनिक सफर एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। शिक्षा क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण संस्थानों का नेतृत्व कर चुके जोशी देश की परीक्षा और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े प्रमुख अधिकारियों में गिने जाते रहे हैं।

    विनीत जोशी 1992 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी हैं। उनका जन्म 2 नवंबर 1968 को उत्तर प्रदेश में हुआ था। उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया। इसके बाद भारतीय विदेश व्यापार संस्थान (आईआईएफटी), नई दिल्ली से अंतरराष्ट्रीय व्यापार में एमबीए किया, जिसमें उन्हें स्वर्ण पदक प्राप्त हुआ। आगे चलकर उन्होंने गुणवत्ता प्रबंधन विषय में पीएचडी भी पूरी की। उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों ने उन्हें प्रशासनिक सेवा में तकनीकी और प्रबंधन दोनों क्षेत्रों की समझ रखने वाले अधिकारी के रूप में पहचान दिलाई।

    शिक्षा क्षेत्र में उनकी सबसे महत्वपूर्ण भूमिकाओं में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के पहले महानिदेशक का पद शामिल रहा। वर्ष 2018 में उन्हें इस नवगठित संस्था की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उनके कार्यकाल में जेईई मेन, नीट और अन्य राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं के संचालन की व्यवस्था को संस्थागत रूप दिया गया। हालांकि हाल के वर्षों में विभिन्न परीक्षाओं में अनियमितताओं और पेपर लीक के मामलों के बाद एनटीए लगातार सार्वजनिक और राजनीतिक बहस के केंद्र में रही।

    विनीत जोशी इससे पहले केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। उनके कार्यकाल के दौरान बोर्ड ने मूल्यांकन प्रणाली में कई बदलाव किए, जिनमें सतत एवं व्यापक मूल्यांकन प्रणाली (सीसीई) को लागू करना प्रमुख रहा। उनका कार्यकाल शिक्षा प्रणाली में सुधार और प्रशासनिक बदलावों के लिए जाना गया, हालांकि कुछ नीतियों पर समय-समय पर बहस भी होती रही।

    शिक्षा मंत्रालय में सचिव के रूप में उन्होंने उच्च शिक्षा और बाद में स्कूली शिक्षा विभाग की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी संभाली। इसके अलावा वे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के कार्यवाहक अध्यक्ष की भूमिका में भी रहे। वर्ष 2023 में मणिपुर में हिंसा के दौरान उन्हें राज्य का मुख्य सचिव नियुक्त किया गया था, जहां उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था संभाली। बाद में उन्हें फिर केंद्र सरकार में वापस बुलाकर शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई।

    हालिया प्रशासनिक फेरबदल ऐसे समय हुआ है जब देश में परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता, पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता को लेकर व्यापक चर्चा चल रही है। सरकार ने शिक्षा मंत्रालय में नए अधिकारियों की नियुक्ति करते हुए उच्च शिक्षा और स्कूली शिक्षा दोनों विभागों में नेतृत्व परिवर्तन किया है। माना जा रहा है कि परीक्षा प्रणाली में सुधार और प्रशासनिक जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में यह बदलाव महत्वपूर्ण माना जाएगा। विनीत जोशी का प्रशासनिक अनुभव और शिक्षा क्षेत्र में उनका लंबा योगदान उन्हें भारतीय शिक्षा प्रशासन के प्रमुख अधिकारियों में शामिल करता है।

  • दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से बदलेगी सफर की रफ्तार, 1386 किमी की दूरी 12 घंटे में, छह राज्यों को मिलेगा हाईस्पीड नेटवर्क

    दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से बदलेगी सफर की रफ्तार, 1386 किमी की दूरी 12 घंटे में, छह राज्यों को मिलेगा हाईस्पीड नेटवर्क


    नई दिल्ली ।
    देश की सबसे महत्वाकांक्षी सड़क परियोजनाओं में शामिल दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है। 1,386 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे पूरा होने के बाद दिल्ली और मुंबई के बीच यात्रा समय को लगभग आधा कर देगा। वर्तमान में करीब 24 घंटे में तय होने वाला सफर घटकर लगभग 12 घंटे का रह जाएगा। इस परियोजना का उद्देश्य केवल तेज यातायात उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि देश के प्रमुख औद्योगिक और आर्थिक क्षेत्रों को आधुनिक सड़क नेटवर्क से जोड़ना भी है।

    दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे छह राज्यों—दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र—से होकर गुजरेगा। राजधानी से शुरू होने वाला यह मार्ग हरियाणा के सोहना और नूंह, राजस्थान के दौसा, सवाई माधोपुर और कोटा, मध्य प्रदेश के झाबुआ और रतलाम, गुजरात के वडोदरा, भरूच और सूरत होते हुए महाराष्ट्र के ठाणे के रास्ते मुंबई तक पहुंचेगा। इस मार्ग से लगभग 20 प्रमुख शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों को हाईस्पीड सड़क संपर्क मिलेगा, जिससे क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।

    एक्सप्रेसवे को फिलहाल आठ लेन के रूप में विकसित किया जा रहा है, जबकि भविष्य में इसे 12 लेन तक विस्तारित करने की योजना है। इस मार्ग पर वाहनों के लिए अधिकतम 120 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन गति निर्धारित की गई है। इससे लंबी दूरी की यात्रा अधिक सुरक्षित, तेज और सुविधाजनक होगी। साथ ही माल परिवहन की लागत और समय दोनों में कमी आने की संभावना है, जिससे उद्योग और व्यापार जगत को सीधा लाभ मिलेगा।

    यह परियोजना आधुनिक तकनीक और पर्यावरणीय संतुलन को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है। एक्सप्रेसवे पर स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम, हाई-टेक सीसीटीवी कैमरे और डिजिटल निगरानी व्यवस्था स्थापित की जा रही है। ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए कई स्थानों पर सौर ऊर्जा आधारित सुविधाएं विकसित की गई हैं। इसके अलावा सड़क सुरक्षा को मजबूत करने के लिए नियमित अंतराल पर ट्रॉमा सेंटर, आपातकालीन सहायता सेवाएं और हेलीकॉप्टर लैंडिंग की सुविधा वाले हेलीपैड भी बनाए जा रहे हैं।

    वन्यजीव संरक्षण को ध्यान में रखते हुए इस एक्सप्रेसवे की विशेष डिजाइन भी चर्चा का विषय है। रणथंभौर और मुकुंदरा हिल्स क्षेत्र से गुजरने वाले हिस्सों में वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही के लिए विशेष एनिमल ओवरपास और अंडरपास तैयार किए गए हैं। साथ ही ध्वनि प्रदूषण कम करने के लिए साउंड बैरियर लगाए जा रहे हैं, जिससे प्राकृतिक आवास और वन्यजीवों पर सड़क यातायात का प्रभाव न्यूनतम रहे।

    विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे देश के लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को नई दिशा देगा। तेज परिवहन व्यवस्था से ईंधन की बचत, कार्बन उत्सर्जन में कमी और सप्लाई चेन की दक्षता में सुधार होगा। राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात के औद्योगिक क्षेत्रों को बेहतर बाजार संपर्क मिलेगा, जबकि पर्यटन, निवेश और स्थानीय रोजगार के अवसर भी बढ़ने की संभावना है। परियोजना पूरी होने के बाद यह एक्सप्रेसवे देश की आर्थिक गतिविधियों को गति देने वाली सबसे महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना परियोजनाओं में शामिल होगा।

  • पेपर लीक पर सरकार की बड़ी तैयारी, 10 साल तक जेल और 1 करोड़ रुपये जुर्माने वाला संशोधन प्रस्ताव आज कैबिनेट में संभव

    पेपर लीक पर सरकार की बड़ी तैयारी, 10 साल तक जेल और 1 करोड़ रुपये जुर्माने वाला संशोधन प्रस्ताव आज कैबिनेट में संभव

    नई दिल्ली । देशभर में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितताओं के मामलों पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 को और अधिक सख्त बनाने की तैयारी में है। सूत्रों के अनुसार, कानून में संशोधन से जुड़ा प्रस्ताव शुक्रवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में रखा जा सकता है। यदि इसे मंजूरी मिलती है तो संशोधन विधेयक आगामी संसदीय प्रक्रिया के तहत लोकसभा में पेश किया जा सकता है। सरकार का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने के साथ-साथ संगठित तरीके से पेपर लीक कराने वाले नेटवर्क पर कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

    प्रस्तावित संशोधनों के तहत मौजूदा दंड प्रावधानों को और कठोर बनाने पर विचार किया जा रहा है। वर्तमान कानून में व्यक्तिगत मामलों में तीन से पांच वर्ष तक की सजा और 10 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। संशोधन के बाद गंभीर मामलों में सजा बढ़ाकर 10 वर्ष तक करने और जुर्माने की राशि में भी उल्लेखनीय वृद्धि किए जाने की संभावना जताई जा रही है। सरकार का मानना है कि कड़े दंड से ऐसे अपराधों पर प्रभावी रोक लगाने में मदद मिलेगी।

    सूत्रों के मुताबिक, संगठित अपराध के मामलों में पांच से दस वर्ष तक की सजा और न्यूनतम एक करोड़ रुपये के जुर्माने का प्रावधान जोड़ा जा सकता है। इसके अलावा परीक्षा संचालन से जुड़े सर्विस प्रोवाइडर या अन्य एजेंसियों की भूमिका यदि किसी अनियमितता में पाई जाती है तो उन पर भी एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इससे परीक्षा प्रक्रिया में शामिल सभी संस्थाओं की जवाबदेही तय करने का प्रयास किया जाएगा।

    सरकार मामलों के त्वरित निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था को भी कानून का हिस्सा बनाने पर विचार कर रही है। प्रस्ताव के अनुसार ऐसे मामलों की सुनवाई विशेष अदालतों में प्राथमिकता के आधार पर की जा सकेगी और उन्हें अधिक अधिकार दिए जा सकते हैं। इसका उद्देश्य लंबी न्यायिक प्रक्रिया से बचते हुए दोषियों को शीघ्र सजा दिलाना और भविष्य में होने वाले अपराधों के प्रति कड़ा संदेश देना है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में छात्रों के नाम जारी अपने संदेश में स्पष्ट कहा था कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए आवश्यक हर कदम उठाएगी। इसी क्रम में कानून को और प्रभावी बनाने की दिशा में यह संशोधन महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों अभ्यर्थियों की मेहनत और विश्वास को प्रभावित किया है। इसके चलते परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग लगातार उठती रही है। प्रस्तावित संशोधनों का उद्देश्य केवल दोषियों को कड़ी सजा देना ही नहीं, बल्कि परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित, निष्पक्ष और पारदर्शी बनाना भी है। यदि मंत्रिमंडल इस प्रस्ताव को मंजूरी देता है तो इसे परीक्षा सुधार और नकल माफिया पर कार्रवाई की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जाएगा।

  • शिक्षा बजट, निजीकरण और पेपर लीक पर सोनिया गांधी का सरकार पर हमला, छात्र आंदोलनों को बताया नीतियों का नतीजा

    शिक्षा बजट, निजीकरण और पेपर लीक पर सोनिया गांधी का सरकार पर हमला, छात्र आंदोलनों को बताया नीतियों का नतीजा

    नई दिल्ली । कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने देशभर में जारी छात्र आंदोलनों के बीच केंद्र सरकार की शिक्षा और रोजगार संबंधी नीतियों पर तीखा हमला बोला है। एक विशेष लेख के माध्यम से उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में शिक्षा व्यवस्था कई गंभीर चुनौतियों से घिरी है और छात्रों के बीच बढ़ता असंतोष सरकार की नीतियों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रहे विवाद, शिक्षा संस्थानों की स्थिति और युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी ने व्यापक चिंता का माहौल पैदा कर दिया है।

    सोनिया गांधी ने कहा कि पिछले कुछ सप्ताह से देश के विभिन्न हिस्सों में छात्र परीक्षा पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं। उनके अनुसार छात्र सरकार से पारदर्शिता, जवाबदेही और ठोस सुधार चाहते हैं, लेकिन उनकी मांगों पर संवाद स्थापित करने के बजाय प्रशासनिक कार्रवाई को प्राथमिकता दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग किया गया, जिससे लोकतांत्रिक संवाद की भावना कमजोर हुई है।

    अपने लेख में उन्होंने शिक्षा बजट को भी प्रमुख मुद्दा बनाया। उनका कहना है कि स्कूली शिक्षा और उच्च शिक्षा के लिए बजट आवंटन में कमी आने से सरकारी संस्थानों की स्थिति प्रभावित हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी स्कूलों और विश्वविद्यालयों की अपेक्षा निजी संस्थानों को बढ़ावा मिलने से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा आम परिवारों की पहुंच से धीरे-धीरे दूर होती जा रही है। उनके अनुसार शिक्षा व्यवस्था में संतुलित निवेश और सरकारी संस्थानों को मजबूत करना समय की आवश्यकता है।

    सोनिया गांधी ने राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा प्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि परीक्षाओं के संचालन से जुड़ी व्यवस्थाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है। उनका आरोप है कि हाल के वर्षों में कई प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और अनियमितताओं के मामले सामने आए हैं, जिससे लाखों विद्यार्थियों का विश्वास प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं की निष्पक्ष जांच और भविष्य में इन्हें रोकने के लिए प्रभावी सुधार लागू किए जाने चाहिए।

    रोजगार के मुद्दे का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं के बीच बेरोजगारी एक गंभीर चुनौती बन चुकी है। उनके अनुसार शिक्षा पूरी करने के बाद भी बड़ी संख्या में युवाओं को अपेक्षित अवसर नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने विश्वविद्यालयों में नियुक्तियों की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाते हुए कहा कि शिक्षा संस्थानों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए योग्यता आधारित और पारदर्शी व्यवस्था आवश्यक है। उनका मानना है कि शिक्षा और रोजगार की नीतियों को एक-दूसरे से जोड़कर दीर्घकालिक समाधान तैयार किए जाने चाहिए।

    लेख के अंत में सोनिया गांधी ने कहा कि छात्रों के हितों की रक्षा करना लोकतांत्रिक व्यवस्था का दायित्व है। उन्होंने कहा कि युवाओं की आवाज को सुनना और उनकी समस्याओं का समाधान संवाद के माध्यम से निकालना सरकार की जिम्मेदारी है। साथ ही उन्होंने पूर्व के छात्र आंदोलनों और सार्वजनिक विरोध प्रदर्शनों का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की मूल पहचान है। उनके इन बयानों के बाद शिक्षा, रोजगार और छात्र आंदोलनों को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।

  • एनएसए हिरासत से 26 दिन के अनशन तक, सोनम वांगचुक के आंदोलन ने बदली सियासी तस्वीर, अस्पताल पहुंचकर केंद्रीय मंत्रियों ने तुड़वाया उपवास

    एनएसए हिरासत से 26 दिन के अनशन तक, सोनम वांगचुक के आंदोलन ने बदली सियासी तस्वीर, अस्पताल पहुंचकर केंद्रीय मंत्रियों ने तुड़वाया उपवास

    नई दिल्ली । करीब 26 दिनों तक चले आमरण अनशन के बाद सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक ने अपना उपवास समाप्त कर दिया। देर रात अस्पताल में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में उन्होंने अनशन तोड़ा। वांगचुक ने बताया कि यह फैसला लंबी बातचीत, विभिन्न पक्षों से मिले आग्रह और देश में किसी भी प्रकार की संभावित हिंसा से बचने की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। उन्होंने कहा कि आंदोलन से जुड़े आगे के निर्णय और बातचीत की शर्तों की जानकारी जल्द साझा की जाएगी तथा समर्थकों से पूरी तरह शांतिपूर्ण व्यवहार बनाए रखने की अपील की।

    सोनम वांगचुक पिछले कई सप्ताह से पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे थे। स्वास्थ्य बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से भी उनका अनशन जारी रहा। इस दौरान देश के विभिन्न राज्यों से छात्र, सामाजिक संगठन और कई सार्वजनिक हस्तियां उनके समर्थन में सामने आईं। आंदोलन के बढ़ते प्रभाव ने इसे राष्ट्रीय स्तर की बहस का विषय बना दिया और सरकार तथा आंदोलनकारी पक्ष के बीच संवाद की संभावनाएं भी तेज हुईं।

    वांगचुक की हालिया भूमिका इसलिए भी चर्चा में रही क्योंकि कुछ महीने पहले तक वे राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत हिरासत में थे। लद्दाख में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद उन्हें एहतियाती कार्रवाई के तहत गिरफ्तार किया गया था और कई महीनों तक जेल में रखा गया। बाद में सरकार ने उनकी हिरासत समाप्त करने का निर्णय लिया और मार्च 2026 में उन्हें रिहा कर दिया गया। रिहाई के बाद उन्होंने फिर से सार्वजनिक जीवन में सक्रिय होकर शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाना शुरू किया।

    सोनम वांगचुक का नाम देश में शिक्षा सुधार और वैकल्पिक शिक्षण मॉडल के लिए लंबे समय से जाना जाता है। उन्होंने लद्दाख में विद्यार्थियों के लिए वैकल्पिक शिक्षा व्यवस्था विकसित करने के उद्देश्य से एसईसीएमओएल संस्थान की स्थापना की। उनके प्रयासों से स्थानीय शिक्षा व्यवस्था में कई बदलाव आए और स्कूलों के परीक्षा परिणामों में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया। शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली तथा उन्हें प्रतिष्ठित रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।

    शिक्षा के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और लद्दाख के संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने के लिए भी वांगचुक लगातार काम करते रहे हैं। पानी की कमी से निपटने के लिए विकसित किए गए उनके ‘आइस स्तूप’ मॉडल को वैश्विक पहचान मिली। इसके अलावा उन्होंने सौर ऊर्जा, टिकाऊ विकास और स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग से जुड़े कई नवाचारों पर भी काम किया है। यही वजह है कि वे केवल एक सामाजिक कार्यकर्ता नहीं बल्कि नवाचार और सामुदायिक विकास के प्रतीक के रूप में भी पहचाने जाते हैं।

    वांगचुक स्वयं को गांधीवादी विचारधारा से प्रेरित बताते हैं और विरोध दर्ज कराने के लिए अहिंसक तरीकों को प्राथमिकता देते हैं। लंबे उपवास, शांतिपूर्ण मार्च और संवाद आधारित आंदोलन उनकी कार्यशैली का हिस्सा रहे हैं। हालिया अनशन समाप्त होने के बाद भी उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी मांगों और मुद्दों पर बातचीत जारी रहेगी, लेकिन किसी भी परिस्थिति में आंदोलन का रास्ता शांतिपूर्ण ही रहेगा। उनके इस कदम ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि लोकतांत्रिक संवाद और शांतिपूर्ण विरोध आज भी सार्वजनिक जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।