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  • कॉपीराइट कारणों से पोस्ट ब्लॉक होने पर सौरव दास ने Meta से मांगा जवाब, सोशल मीडिया दबाव को लेकर सरकार पर निशाना

    कॉपीराइट कारणों से पोस्ट ब्लॉक होने पर सौरव दास ने Meta से मांगा जवाब, सोशल मीडिया दबाव को लेकर सरकार पर निशाना

    नई दिल्ली ।सौरव दास ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट की कुछ पोस्ट लगातार ब्लॉक किए जाने को लेकर Meta की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पोस्ट हटाए जाने या ब्लॉक होने से उनके अकाउंट की रीच भी प्रभावित हो रही है। उन्होंने इस पूरे मामले में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की शिकायतों की जांच करने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं।

    सौरव दास के मुताबिक, उनके इंस्टाग्राम अकाउंट की कई पोस्ट लगातार ब्लॉक की जा रही हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या Meta किसी शिकायत के आधार पर कार्रवाई करने से पहले उसकी उचित तरीके से जांच करता है या नहीं। उनका कहना है कि इस तरह की कार्रवाई का सीधा असर उनके अकाउंट की पहुंच पर पड़ रहा है।

    सौरव ने इस मामले से जुड़ा एक स्क्रीनशॉट भी एक्स पर साझा किया। स्क्रीनशॉट में बताया गया कि 10 सितंबर को इंस्टाग्राम पर प्रकाशित उनकी एक पोस्ट को कॉपीराइट से जुड़े कारणों के चलते ब्लॉक किया गया। इसी कार्रवाई को लेकर उन्होंने Meta की व्यवस्था और शिकायतों के निपटारे की प्रक्रिया पर सवाल उठाए।

    उन्होंने सोशल मीडिया कंपनियों की भूमिका को लेकर भी अपनी चिंता जाहिर की। सौरव का कहना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को यूजर्स की शिकायतों और रिपोर्ट पर खुद उचित जांच करनी चाहिए। उनके अनुसार, कंपनियों को किसी सरकारी दबाव में काम नहीं करना चाहिए और प्लेटफॉर्म से जुड़ी कार्रवाई पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए।

    इस मामले में सौरव दास ने मोदी सरकार पर भी निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके अकाउंट को लगातार टारगेट किया जा रहा है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार उन्होंने अपने इस दावे के समर्थन में सरकार की ओर से किसी खास दबाव का कोई सार्वजनिक सबूत पेश नहीं किया है। इसलिए सरकार की ओर से कथित दबाव का आरोप फिलहाल उनके दावे के स्तर पर ही है।

    सौरव दास की ओर से उठाए गए सवालों का एक प्रमुख हिस्सा अकाउंट की रीच से भी जुड़ा है। उनका कहना है कि पोस्ट के ब्लॉक होने और हटाए जाने की घटनाओं से उनके अकाउंट की पहुंच में कमी आई है। इसी वजह से उन्होंने Meta की कार्रवाई के तरीके और शिकायतों की जांच को लेकर सवाल उठाए हैं।

    सौरव दास के LinkedIn प्रोफाइल के अनुसार, वह दिल्ली में रहते हैं और खोजी पत्रकार के तौर पर भी काम कर चुके हैं। उन्होंने जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है। उन्होंने 2017 में RTI के जरिए जानकारी जुटाना शुरू किया था। उस समय उनकी उम्र 18 साल थी।

    बाद में सौरव दास ने पत्रकारिता में काम शुरू किया और वर्ष 2020 से पेशेवर तौर पर लिखना शुरू किया। उनके लेख कानून, सरकार, अदालत, अपराध और व्यवस्था से जुड़े विषयों पर रहे हैं। उनके लेख विभिन्न मीडिया संस्थानों में भी प्रकाशित हुए हैं। इनमें द कारवां, अल जजीरा, द वायर और द हिंदू शामिल हैं।

    फिलहाल विवाद का मुख्य केंद्र 10 सितंबर की वह इंस्टाग्राम पोस्ट है, जिसे कॉपीराइट से जुड़े कारणों के चलते ब्लॉक किए जाने की जानकारी स्क्रीनशॉट में सामने आई। सौरव दास ने इस कार्रवाई के साथ अपने अकाउंट की घटती रीच और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

  • ब्रिक्स की 20वीं वर्षगांठ पर पीएम मोदी ने रखा अगले दो दशकों का रोडमैप, निरंतरता और कार्यान्वयन तंत्र का प्रस्ताव

    ब्रिक्स की 20वीं वर्षगांठ पर पीएम मोदी ने रखा अगले दो दशकों का रोडमैप, निरंतरता और कार्यान्वयन तंत्र का प्रस्ताव

    नई दिल्ली ।भारत मंडपम में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का औपचारिक आगाज हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदस्य देशों के प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए सम्मेलन का उद्घाटन किया। अपने संबोधन में उन्होंने ब्रिक्स की भूमिका को स्पष्ट करते हुए कहा कि यह समूह किसी के विरुद्ध नहीं है, बल्कि सभी का सम्मान करने और साथ लेकर आगे बढ़ने की सोच के साथ काम करता है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता पीपल सेंट्रिक और ह्यूमैनिटी फर्स्ट अप्रोच पर आधारित रही है। इस दौरान लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता को प्राथमिकता दी गई। उन्होंने कहा कि भारत ने इन प्राथमिकताओं के जरिए ब्रिक्स सहयोग को सामान्य जन से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया है।

    उन्होंने बताया कि भारत की अध्यक्षता के दौरान 350 से अधिक बैठकों का आयोजन किया गया और करीब 30 शहरों में सदस्य देशों की टीमों का स्वागत किया गया। प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स अध्यक्षता को सफल बनाने में सक्रिय योगदान और समर्थन देने के लिए सभी सदस्य देशों का आभार भी जताया।

    ब्रिक्स के 20 वर्ष पूरे होने को प्रधानमंत्री मोदी ने संगठन के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। उन्होंने कहा कि मानव जीवन में 20 वर्ष की उम्र परिपक्वता और जिम्मेदारी के नए चरण की शुरुआत का संकेत देती है। इसी तरह ब्रिक्स भी अपने विकास के ऐसे दौर में पहुंच चुका है, जहां सपनों के साथ जिम्मेदारियां जुड़ती हैं और सामर्थ्य को नई दिशा देने की जरूरत होती है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 20 वर्षों में ब्रिक्स ने वैश्विक मंच पर अपनी अलग पहचान बनाई है। सदस्य देश एक-दूसरे के दृष्टिकोण का सम्मान करते हुए आगे बढ़ते हैं। उन्होंने जोर दिया कि ब्रिक्स की सोच किसी के खिलाफ खड़े होने की नहीं, बल्कि सभी को साथ लेकर आगे बढ़ने की है।

    अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने अगले 20 वर्षों के लिए नए और महत्वाकांक्षी एजेंडे पर काम करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि अब ब्रिक्स के भीतर बनी एकता और सहमति को वैश्विक मंच पर ठोस परिणामों में बदलने का समय है। इसके लिए संगठन को अपनी कार्यप्रणाली पर भी ध्यान देना होगा।

    प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स की अध्यक्षता हर वर्ष बदलने की व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि अध्यक्षता बदलने से संस्थागत गति प्रभावित नहीं होनी चाहिए। इसी उद्देश्य से उन्होंने ब्रिक्स में निरंतरता और कार्यान्वयन तंत्र विकसित करने का प्रस्ताव रखा।

    उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था के तहत ट्रोइका के माध्यम से ब्रिक्स की विभिन्न पहलों और उनके परिणामों का फॉलोअप किया जा सकेगा। इससे अलग-अलग अध्यक्षताओं के बीच निरंतरता बनाए रखने में मदद मिलेगी और पहले से तय पहलों के क्रियान्वयन पर भी ध्यान दिया जा सकेगा।

    18वें शिखर सम्मेलन के उद्घाटन संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने इस तरह ब्रिक्स के मौजूदा स्वरूप, भारत की अध्यक्षता की प्राथमिकताओं और संगठन के अगले 20 वर्षों की दिशा पर अपना दृष्टिकोण रखा। उनके संबोधन में सहयोग, निरंतरता, कार्यान्वयन और वैश्विक स्तर पर ठोस परिणाम हासिल करने पर विशेष जोर रहा।

  • लखनऊ पुस्तक महोत्सव में CM योगी की युवाओं से अपील, पाठ्यक्रम के साथ अच्छी किताबें खरीदें

    लखनऊ पुस्तक महोत्सव में CM योगी की युवाओं से अपील, पाठ्यक्रम के साथ अच्छी किताबें खरीदें

    लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने युवाओं से पाठ्यक्रम की किताबों के साथ साहित्य, महापुरुषों की आत्मकथाएं, धार्मिक ग्रंथ और वैज्ञानिक शोध से जुड़ी पुस्तकें पढ़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपना ‘बुक बैंक’ बनाना चाहिए। किताबें व्यक्ति को नई दिशा देने के साथ जीवन की मुश्किल परिस्थितियों में मार्गदर्शन भी कर सकती हैं।

    मुख्यमंत्री शनिवार को लखनऊ विश्वविद्यालय में आयोजित 5वें गोमती पुस्तक महोत्सव-2026 के उद्घाटन समारोह में युवाओं को संबोधित कर रहे थे। इससे पहले उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में लगी पुस्तक प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने बच्चों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पुस्तक ‘एग्जाम वॉरियर्स’ वितरित की और इसे हर बच्चे के लिए पढ़ने योग्य बताया।

    योगी ने कहा कि ‘एग्जाम वॉरियर्स’ केवल स्कूली विद्यार्थियों के लिए उपयोगी नहीं है, बल्कि हर युवा और नागरिक के लिए मार्गदर्शक बन सकती है। जीवन में हर व्यक्ति को किसी न किसी परीक्षा से गुजरना पड़ता है। कभी डिग्री और सर्टिफिकेट के लिए तो कभी जीवन की अलग-अलग परिस्थितियों में। मुश्किल समय में जब हिम्मत जवाब देने लगती है, तब ऐसी किताबें संबल दे सकती हैं।

    ‘युवा किताब नहीं पढ़ता, यह कहना अन्याय’

    मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कहना सही नहीं है कि आज का युवा किताबों से दूर हो गया है या सोशल मीडिया पर अपना समय बर्बाद कर रहा है। उनके मुताबिक जरूरत युवाओं तक किताबें पहुंचाने की व्यवस्था करने की है।

    उन्होंने बताया कि लखनऊ में पुस्तक महोत्सव शुरू करने का प्रस्ताव आने पर उन्होंने तत्कालीन अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी से चर्चा कर इसे प्रोत्साहित करने को कहा था। लखनऊ में आयोजन का अच्छा परिणाम मिलने के बाद उन्होंने गोरखपुर में भी पुस्तक महोत्सव कराने का सुझाव दिया। वहां लखनऊ से भी ज्यादा लोगों की भागीदारी हुई और अधिक पुस्तकों की बिक्री हुई। इससे यह धारणा गलत साबित हुई कि आज का युवा किताबें नहीं पढ़ता।

    ज्ञान को संकुचित दायरे में न बांधें

    योगी ने कहा कि समाज और राष्ट्र भी तब कमजोर होते हैं, जब वे अपनी क्षमता खोने लगते हैं और अपनी विरासत से दूर हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को पहले सीमित दायरे में बांधने का प्रयास किया गया, जिसके दुष्परिणाम समाज और देश को भुगतने पड़े।

    उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश भारतीय ज्ञान परंपरा की महत्वपूर्ण भूमि रहा है। लखनऊ से करीब 70 किलोमीटर दूर नैमिषारण्य में ऋषियों ने चिंतन और ज्ञान की परंपरा को आगे बढ़ाया। काशी ज्ञान और संवाद की भूमि रही है। वहीं मुजफ्फरनगर स्थित शुक्रतीर्थ को करीब 5 हजार वर्ष पहले श्रीमद्भागवत महापुराण की पहली कथा के वाचन की परंपरा से जोड़ा जाता है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि ज्ञान के रास्ते खुले रखने चाहिए। केवल स्कूल, कॉलेज या विश्वविद्यालय में पाठ्यक्रम पढ़ लेना ही व्यक्ति को पूर्ण रूप से ज्ञानवान नहीं बनाता। समाज, देश और दुनिया को समझने के लिए अलग-अलग विषयों और विचारों से परिचित होना जरूरी है।

    9 दिन तक चलेगा पुस्तक महोत्सव

    योगी ने कहा कि पुस्तक महोत्सव युवाओं, छात्रों, लेखकों और प्रकाशकों को एक मंच देता है। यहां ज्ञानवर्धक, मनोरंजक और रोचक पुस्तकों से परिचित होने का अवसर मिलता है। गोमती पुस्तक महोत्सव-2026 अगले 9 दिनों तक चलेगा। इस दौरान पुस्तकों के विमोचन के साथ लेखकों से संवाद और उनकी रचनात्मक यात्रा को समझने का अवसर भी मिलेगा।

    उन्होंने कहा कि आत्मकथाओं के जरिए महापुरुषों के संघर्ष को जाना जा सकता है और वैज्ञानिकों के शोध व उनकी यात्राओं को पुस्तकों के माध्यम से समझा जा सकता है। किताबें रचनात्मकता को आगे बढ़ाने और जीवन को नई दिशा देने का माध्यम बन सकती हैं।

    57,600 ग्राम पंचायतों में पुस्तकालय की व्यवस्था

    मुख्यमंत्री ने डिजिटल युग का जिक्र करते हुए कहा कि तकनीक ने गांव और शहर के बीच की दूरी कम की है। ग्राम सचिवालयों में केवल प्रधान और ग्राम पंचायत अधिकारी के बैठने की व्यवस्था नहीं की गई, बल्कि ग्रामीणों के लिए कॉन्फ्रेंस रूम और डिजिटल लाइब्रेरी भी बनाई गई हैं।

    उन्होंने बताया कि प्रदेश की 57,600 ग्राम पंचायतों में पुस्तकालय की व्यवस्था की गई है और इनमें नेशनल बुक ट्रस्ट की पुस्तकें उपलब्ध कराई गई हैं। उनके मुताबिक सुविधा मिलने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों के युवा अपनी प्रतिभा का बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।

    स्कूलों की तस्वीर बदली, स्मार्ट क्लास की सुविधा

    योगी ने बेसिक और माध्यमिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों की पुरानी स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले कई स्कूलों के भवन और व्यवस्थाएं जर्जर थीं। ऑपरेशन कायाकल्प के जरिए स्कूलों की स्थिति में बदलाव किया गया। भवनों का निर्माण हुआ और स्मार्ट क्लास जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।

    चित्रकूट का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि एक साल के अंतराल में स्कूल की स्थिति में ऐसा बदलाव आया कि तीसरी कक्षा की एक छात्रा ने डिजिटल लाइब्रेरी संचालित करके दिखाई और पाठ्यक्रम से जुड़ी सामग्री भी प्रदर्शित की। उनके मुताबिक पहले सुविधाओं के अभाव में बच्चों को अपनी क्षमता दिखाने का अवसर नहीं मिलता था।

    किताब खरीदें और अपना ‘बुक बैंक’ तैयार करें

    मुख्यमंत्री ने युवाओं से कहा कि जब भी किताब खरीदने का अवसर मिले तो पाठ्यक्रम की पुस्तकों के साथ ऐसी किताबों को भी प्राथमिकता दें, जो रचनात्मकता और सकारात्मक सोच विकसित करें। अच्छी साहित्यिक कृति, धार्मिक ग्रंथ, महापुरुष की आत्मकथा या वैज्ञानिक शोध पर आधारित पुस्तक जीवनभर प्रेरणा दे सकती है।

    उन्होंने युवाओं से खाली समय में किताब पढ़ने की आदत विकसित करने और अपना ‘बुक बैंक’ तैयार करने की अपील की। साथ ही कहा कि युवाओं को अपनी राह खुद तैयार करनी है और पुस्तक मेले इसमें महत्वपूर्ण मंच साबित हो सकते हैं।

    ‘नेशनल बुक ट्रस्ट की किताबों का सबसे बड़ा खरीदार यूपी’

    योगी ने गोमती पुस्तक महोत्सव के आयोजकों, नेशनल बुक ट्रस्ट और सहयोगी संस्थाओं का आभार जताते हुए कहा कि इसे केवल लखनऊ तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। पुस्तक मेले को प्रदेश के दूसरे हिस्सों तक ले जाने की जरूरत है और उत्तर प्रदेश सरकार इसमें पूरा सहयोग करेगी।

    उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार नेशनल बुक ट्रस्ट की पुस्तकों की सबसे बड़ी खरीदार है। गांवों, स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में पुस्तकालय उपलब्ध कराने का काम किया जा रहा है। यह समय की जरूरत है और ज्ञान की इस परंपरा को और व्यापक बनाने की आवश्यकता है।

  • भारत मंडपम में शुरू हुआ 18वां BRICS शिखर सम्मेलन, पीएम मोदी ने सदस्य देशों के योगदान और समर्थन के लिए जताया आभार

    भारत मंडपम में शुरू हुआ 18वां BRICS शिखर सम्मेलन, पीएम मोदी ने सदस्य देशों के योगदान और समर्थन के लिए जताया आभार

    नई दिल्ली ।भारत की मेजबानी में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन का शनिवार को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आधिकारिक आगाज हो गया। दो दिन तक चलने वाला यह सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को आयोजित किया जा रहा है। इसमें BRICS देशों के साथ पार्टनर देशों के नेता भी हिस्सा ले रहे हैं। इसके अलावा आउटरीच कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किए गए देशों के प्रतिनिधि भी सम्मेलन में पहुंचे हैं।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के साथ शिखर सम्मेलन की औपचारिक शुरुआत हुई। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने भारत की BRICS अध्यक्षता को सफल बनाने में सभी देशों की ओर से मिले सक्रिय योगदान और समर्थन के लिए आभार जताया।

    पीएम मोदी ने कहा कि इस वर्ष का BRICS शिखर सम्मेलन एक ऐतिहासिक पड़ाव है। इसकी वजह यह है कि इस वर्ष BRICS अपनी स्थापना के 20 साल पूरे कर रहा है। उन्होंने संगठन की दो दशक लंबी यात्रा का उल्लेख करते हुए इसके अगले चरण को लेकर भी अपनी बात रखी।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि इंसानी जिंदगी में 20 साल की उम्र परिपक्वता और जिम्मेदारी के एक नए दौर की शुरुआत होती है। इसी संदर्भ में उन्होंने BRICS की 20 साल की यात्रा को भी महत्वपूर्ण बताया और आगे की दिशा तय करने की जरूरत पर जोर दिया।

    अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान सहयोग और समर्थन देने वाले सभी प्रतिभागी देशों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि भारत की अध्यक्षता को सफल बनाने में सभी के सक्रिय योगदान की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

    18वां BRICS शिखर सम्मेलन ऐसे समय आयोजित हो रहा है जब संगठन अपनी स्थापना के दो दशक पूरे होने के पड़ाव पर है। सम्मेलन के दौरान सदस्य देशों और साझेदार देशों के नेता एक साथ मौजूद हैं। इसके अलावा आउटरीच के लिए आमंत्रित देशों के प्रतिनिधियों की भागीदारी भी हो रही है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने BRICS की आगे की यात्रा के संदर्भ में अगले 20 वर्षों के लिए नए एजेंडे पर काम करने की जरूरत बताई। उनके संबोधन का प्रमुख संदेश संगठन की अब तक की यात्रा के बाद भविष्य की प्राथमिकताओं और दिशा को लेकर रहा।

    भारत मंडपम में आयोजित इस दो दिवसीय सम्मेलन में BRICS देशों के साथ पार्टनर देशों की भागीदारी हो रही है। सम्मेलन के लिए आमंत्रित प्रतिनिधियों की मौजूदगी से भी इसका दायरा व्यापक हुआ है।

    BRICS के 20 वर्ष पूरे होने के मौके पर आयोजित यह शिखर सम्मेलन भारत की मेजबानी में हो रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में इस अवसर को संगठन की यात्रा के महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में रेखांकित किया।

    उन्होंने भारत की अध्यक्षता के दौरान मिले सहयोग के लिए सभी का आभार व्यक्त करते हुए संगठन के आगामी वर्षों की दिशा पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता बताई। उनके मुताबिक 20 साल की यात्रा के बाद BRICS के लिए आगे के दो दशकों को ध्यान में रखते हुए नए एजेंडे पर काम करना होगा।

    शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में जारी रहेगा। इसमें BRICS सदस्य देशों, पार्टनर देशों और आउटरीच के लिए आमंत्रित देशों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। सम्मेलन के पहले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के साथ इसकी औपचारिक शुरुआत हुई।

  • वाराणसी की सड़कों पर सीवर का पानी, विदेशी पर्यटक भी परेशान, अखिलेश यादव ने योगी सरकार की व्यवस्था पर उठाए सवाल

    वाराणसी की सड़कों पर सीवर का पानी, विदेशी पर्यटक भी परेशान, अखिलेश यादव ने योगी सरकार की व्यवस्था पर उठाए सवाल

    नई दिल्ली । वाराणसी के भेलूपुर स्थित शिवाला इलाके में सीवर का पानी सड़कों और आसपास के घरों तक पहुंचने से लोगों की परेशानी बढ़ गई। सड़कों और गलियों में गंदा पानी जमा होने के कारण स्थानीय लोगों को आने-जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। काशी घूमने पहुंचे विदेशी पर्यटक भी जलभराव वाले रास्तों से गुजरते नजर आए।

    शिवाला क्षेत्र में सीवर का पानी सड़क पर जमा होने के साथ आसपास की गलियों में भी फैल गया। कई स्थानों पर पानी घरों के आसपास तक पहुंच गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, जलभराव के कारण रोजमर्रा के काम प्रभावित हुए और आवागमन में भी परेशानी हुई। अस्सी क्षेत्र के कुछ रास्तों पर भी जलभराव की स्थिति सामने आई।

    वाराणसी में सामने आई इस स्थिति को लेकर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने योगी आदित्यनाथ सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए शहर की व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। वीडियो में शिवाला इलाके की स्थिति और गंदे पानी से होकर गुजरते लोगों को दिखाया गया था।

    मामला सामने आने के बाद जलकल विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल के निर्देश पर अधिकारियों ने प्रभावित इलाके का निरीक्षण किया। टीम ने पुरानी ट्रंक सीवर लाइन और कोनिया सीवेज पंपिंग स्टेशन का भी निरीक्षण किया।

    जांच के दौरान कुछ पंप बंद मिले। इसके बाद संबंधित विभाग के साथ समन्वय कर खराब पड़े पंपों को ठीक कराने का काम शुरू किया गया। अधिकारियों की कार्रवाई के बाद बंद पंपों को दोबारा चालू कराया गया।

    नगर निगम के अनुसार, करीब डेढ़ घंटे में पंप फिर से चलने लगे। इसके बाद सड़कों और गलियों में जमा सीवर के पानी को निकालने की प्रक्रिया शुरू की गई। इससे प्रभावित इलाकों में जमा पानी को हटाया गया और आवागमन की परेशानी को दूर करने का प्रयास किया गया।

    वाराणसी के अलग-अलग हिस्सों में पिछले कुछ दिनों से जलभराव और सीवर से जुड़ी शिकायतें सामने आने की बात कही गई है। शिवाला और अस्सी क्षेत्र की स्थिति के बाद नगर निगम की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे। खास तौर पर उन इलाकों में समस्या सामने आई जहां स्थानीय लोगों के साथ काशी घूमने आने वाले पर्यटक भी पहुंचते हैं।

    शिवाला में सीवर का पानी सड़क पर जमा होने के दौरान विदेशी पर्यटकों को भी उसी रास्ते से गुजरना पड़ा। इससे इलाके में मौजूद लोगों के साथ बाहर से आए पर्यटकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।

    नगर निगम ने तत्काल समस्या से निपटने के बाद भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए स्थायी ड्रेनेज प्लान तैयार करने की बात कही है। विभाग की ओर से पंपों की स्थिति की जांच और सीवर व्यवस्था को लेकर की गई कार्रवाई के बाद तत्काल जमा पानी निकालने का काम पूरा किया गया।

    इस पूरे घटनाक्रम में एक ओर जलभराव और सीवर के पानी को लेकर स्थानीय लोगों की परेशानी सामने आई, वहीं दूसरी ओर मामले को लेकर अखिलेश यादव ने सरकार पर राजनीतिक तंज कसा। उनके वीडियो साझा करने के बाद संबंधित विभाग ने मौके पर कार्रवाई करते हुए बंद पंपों को चालू कराया और जमा पानी निकालने का काम शुरू किया।

  • कश्मीरी पंडित कर्मचारियों ने अमित शाह को लिखी चिट्ठी, कहा- 15 साल में बसाया घर, फिर बेघर मत होने दो

    कश्मीरी पंडित कर्मचारियों ने अमित शाह को लिखी चिट्ठी, कहा- 15 साल में बसाया घर, फिर बेघर मत होने दो

    नई दिल्ली। कश्मीर घाटी में प्रधानमंत्री पुनर्वास पैकेज (PM पैकेज) के तहत काम कर रहे कश्मीरी पंडित कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर चिंता एक बार फिर बढ़ गई है। लगातार मिल रही धमकियों के बीच कर्मचारियों ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को चिट्ठी लिखकर तत्काल सुरक्षा कदम उठाने की मांग की है। कर्मचारियों का कहना है कि वे करीब 15 साल से घाटी में अपने जीवन को दोबारा बसाने की कोशिश कर रहे हैं और अब उन्हें फिर से विस्थापन की ओर धकेले जाने का डर सताने लगा है।

    ऑल PM पैकेज एम्प्लॉईज फोरम के अध्यक्ष सनी रैना ने चिट्ठी के माध्यम से कश्मीरी हिंदू कर्मचारियों और उनके परिवारों की चिंताओं को सामने रखा है। उनका कहना है कि भले ही ऊपर से हालात सामान्य दिखाई देते हों, लेकिन जमीन पर डर और तनाव का माहौल बना हुआ है। कई परिवार अपनी सुरक्षा के साथ-साथ बच्चों के भविष्य को लेकर भी चिंतित हैं।

    कर्मचारियों ने कहा है कि हाल के दिनों में सामने आई हर धमकी उन्हें 1990 के दशक की घटनाओं की याद दिलाती है। उस दौर में धमकी भरे पत्र और नोटिस डर का माहौल बनाने के शुरुआती संकेत बने थे। इसके बाद बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडितों को घाटी छोड़नी पड़ी थी। अब दोबारा धमकी भरे पत्र सामने आने से कर्मचारियों के बीच पुराने भय की स्थिति बन रही है।

    पिछले कुछ हफ्तों के दौरान PM पैकेज के तहत घाटी में तैनात कर्मचारियों को लगातार धमकियां मिलने की बात सामने आई है। कई पत्रों में उन्हें सरकारी नौकरी छोड़ने की चेतावनी दी गई है और ऐसा नहीं करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई। इन मामलों में यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल (ULC) नाम के संगठन का उल्लेख सामने आया है।

    कर्मचारियों की चिंता उस समय और बढ़ गई, जब उनका निजी डेटा ऑनलाइन लीक होने की बात सामने आई। सोशल मीडिया पर कुछ कर्मचारियों के फोन नंबर, घर के पते और वाहनों के रजिस्ट्रेशन नंबर तक साझा किए जाने की जानकारी सामने आई है। इससे घाटी में रह रहे कर्मचारियों और उनके परिवारों में सुरक्षा को लेकर डर बढ़ गया है।

    कर्मचारियों का कहना है कि बड़ी संख्या में लोग अभी भी किराए के कमरों में रहने को मजबूर हैं। वहीं, जहां ट्रांजिट कॉलोनियां बनाई गई हैं, वहां भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में कर्मचारियों ने आवासीय क्षेत्रों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा और उसे मजबूत करने की मांग की है।

    अमित शाह को लिखी चिट्ठी में धमकियों की गंभीरता से जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है। कर्मचारियों ने PM पैकेज के तहत काम कर रहे लोगों, उनके परिवारों और आवासीय कॉलोनियों की सुरक्षा बढ़ाने की अपील की है। साथ ही ऐसा प्रभावी सिस्टम बनाने की मांग की गई है, जिसके जरिए किसी कर्मचारी को धमकी मिलने पर वह तुरंत शिकायत दर्ज करा सके और समय पर सुरक्षा सहायता मिल सके।

    कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि वे कश्मीर घाटी छोड़ना नहीं चाहते। उनका कहना है कि पिछले 15 वर्षों में उन्होंने उस जीवन को फिर से खड़ा करने की कोशिश की है, जो कई दशक पहले उजड़ गया था। वर्ष 2022 में राहुल भट की हत्या के बाद भी घाटी में कार्यरत कश्मीरी पंडित कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठे थे। अब नई धमकियों ने एक बार फिर उनकी सुरक्षा की चिंता बढ़ा दी है। कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें नौकरी और सुरक्षा में से किसी एक को चुनने के लिए मजबूर न किया जाए। वे कश्मीर में रहकर काम करना चाहते हैं, लेकिन इसके लिए सुरक्षित माहौल चाहते हैं।

  • BRICS Summit 2026 केदिल्ली पहुंचे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, प्रधानमंत्री मोदी से शाम को द्विपक्षीय बैठक में कई मुद्दों पर होगी चर्चा

    BRICS Summit 2026 केदिल्ली पहुंचे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, प्रधानमंत्री मोदी से शाम को द्विपक्षीय बैठक में कई मुद्दों पर होगी चर्चा

    नई दिल्ली ।18वें BRICS शिखर सम्मेलन 2026 में शामिल होने के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग शनिवार को दिल्ली पहुंच गए। उनके भारत आगमन पर केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने दिल्ली के पालम हवाई अड्डे पर उनका स्वागत किया। शी जिनपिंग के दिल्ली पहुंचने के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी प्रस्तावित द्विपक्षीय बैठक को लेकर भी गतिविधियां तेज हो गई हैं।

    जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच आज शाम करीब पौने छह बजे द्विपक्षीय बैठक होने वाली है। BRICS शिखर सम्मेलन से इतर होने वाली इस मुलाकात में दोनों देशों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।

    शी जिनपिंग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत पहुंचे हैं। उनके साथ चीन का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी दिल्ली आया है। इस प्रतिनिधिमंडल में चीन कम्युनिस्ट पार्टी के राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य काई ची और चीन के विदेश मंत्री वांग यी शामिल हैं।

    काई ची चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के जनरल ऑफिस के निदेशक भी हैं। शी जिनपिंग के साथ उनकी मौजूदगी को दोनों देशों के बीच होने वाली महत्वपूर्ण बातचीत के संदर्भ में देखा जा रहा है।

    प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग की द्विपक्षीय बैठक में सीमा विवाद और दोनों देशों के संबंधों से जुड़े मुद्दों पर बातचीत होने की संभावना है। इसके अलावा व्यापार, कृषि क्षेत्र और बाजार में आपूर्ति श्रृंखला से संबंधित विषय भी चर्चा में शामिल हो सकते हैं।

    बैठक के दौरान आर्थिक और तकनीकी सहयोग से जुड़े मुद्दों पर भी बातचीत होने की उम्मीद है। इसके साथ ही वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC पर मजबूत सैन्य सुरक्षा व्यवस्था और आयात से जुड़े विषयों पर भी दोनों नेताओं के बीच चर्चा हो सकती है।

    BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए कई देशों के प्रमुख नेता पहले ही दिल्ली पहुंच चुके हैं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 11 सितंबर को दिल्ली पहुंचे थे। भारत पहुंचने पर केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने उनका स्वागत किया था।

    ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान भी BRICS शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए दिल्ली पहुंचे हैं। उनका स्वागत केंद्रीय राज्य मंत्री शंतनु ठाकुर ने किया था। इस तरह शिखर सम्मेलन के लिए कई प्रमुख देशों के नेताओं की दिल्ली में मौजूदगी हो चुकी है।

    शी जिनपिंग के भारत दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के साथ होने वाली बैठक पर विशेष ध्यान रहेगा। दोनों नेताओं के बीच बातचीत में द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े विभिन्न मुद्दों के साथ व्यापार, आर्थिक और तकनीकी विषयों पर चर्चा की संभावना है।

    सीमा से जुड़े विषय और LAC पर सुरक्षा व्यवस्था भी प्रस्तावित बातचीत के महत्वपूर्ण मुद्दों में शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा कृषि, आपूर्ति श्रृंखला और आयात से संबंधित विषयों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।

    फिलहाल शी जिनपिंग के दिल्ली पहुंचने के बाद BRICS शिखर सम्मेलन की गतिविधियों के बीच प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय बैठक अहम कार्यक्रमों में शामिल है। दोनों नेताओं की मुलाकात आज शाम करीब पौने छह बजे प्रस्तावित है, जिसके दौरान दोनों देशों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत होने की उम्मीद है।

  • TMC Symbol Row: उपचुनाव से पहले चुनाव आयोग ने दोनों गुटों की दलीलें सुनीं, 16 सितंबर से पहले निर्णय की तैयारी

    TMC Symbol Row: उपचुनाव से पहले चुनाव आयोग ने दोनों गुटों की दलीलें सुनीं, 16 सितंबर से पहले निर्णय की तैयारी

    नई दिल्ली ।तृणमूल कांग्रेस के नाम, लोगो और चुनाव चिह्न को लेकर ममता बनर्जी गुट और बागी गुट के बीच चल रही खींचतान के बीच चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों के प्रतिनिधिमंडलों से चर्चा की। आयोग ने दोनों गुटों के पांच-पांच सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल को दिल्ली बुलाया था। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आयोग पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न से जुड़े दावों पर निर्णय ले सकता है।

    दोनों प्रतिनिधिमंडलों के साथ बैठक राष्ट्रीय राजधानी स्थित इंडिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट में हुई। बागी गुट के प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई ऋतब्रत बनर्जी ने की। इस गुट के साथ बैठक का समय शनिवार सुबह 11 बजे निर्धारित किया गया था। वहीं ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट के प्रतिनिधिमंडल के साथ दोपहर 12 बजे चर्चा का समय तय किया गया।

    चुनाव आयोग के सचिव अश्वनी कुमार मोहल ने 9 सितंबर को दोनों गुटों को बैठक के लिए संदेश भेजा था। बैठक के लिए भेजे गए संदेश में मुलाकात के एजेंडे का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया था। हालांकि, बैठक का मुख्य विषय दोनों पक्षों के पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर किए जा रहे दावों से संबंधित बताया गया।

    आयोग दोनों गुटों की ओर से प्रस्तुत किए गए तर्कों को सुनने के बाद इस संबंध में आगे का निर्णय ले सकता है। पार्टी के नाम, लोगो और चुनाव चिह्न को लेकर दोनों पक्षों के दावों के बीच चुनाव आयोग की यह बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा उपचुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है।

    पश्चिम बंगाल की दो विधानसभा सीटों नंदीग्राम और रेजिनगर में 6 अक्टूबर को उपचुनाव होना है। नंदीग्राम पूर्वी मिदनापुर जिले में स्थित है। इन दोनों सीटों पर उपचुनाव के लिए आचार संहिता लागू हो चुकी है। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 16 सितंबर निर्धारित है।

    ऐसे में चुनाव आयोग को उपचुनाव की अंतिम नामांकन तारीख से पहले पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न से जुड़े मामले पर फैसला लेना होगा। दोनों गुटों के दावों को लेकर आयोग की ओर से होने वाला निर्णय आगामी चुनाव प्रक्रिया के लिहाज से महत्वपूर्ण रहेगा।

    उपचुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां भी आगे बढ़ रही हैं। कांग्रेस ने नंदीग्राम और रेजिनगर दोनों विधानसभा सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं। वहीं हुमायूं कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी ने रेजिनगर विधानसभा सीट से अपना प्रत्याशी घोषित किया है।

    टीएमसी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर दोनों पक्षों के बीच जारी विवाद के बीच आयोग की ओर से प्रतिनिधिमंडलों को अलग-अलग समय पर बुलाकर उनकी बात सुनी गई। अब दोनों पक्षों के दावों और उनके पक्ष में दिए गए तर्कों पर विचार करने के बाद चुनाव आयोग को अपना निर्णय लेना है।

    इस पूरे मामले में 16 सितंबर की नामांकन अंतिम तारीख महत्वपूर्ण है। इसके बाद 6 अक्टूबर को नंदीग्राम और रेजिनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होना है। इसलिए चुनाव आयोग के फैसले का सीधा संबंध आगामी उपचुनाव की प्रक्रिया से भी जुड़ा हुआ है।

  • भारत में छिपा है अपना Mini Italy झील किनारे बसा लवासा अपनी खूबसूरती और यूरोपीय अंदाज से जीत लेगा दिल

    भारत में छिपा है अपना Mini Italy झील किनारे बसा लवासा अपनी खूबसूरती और यूरोपीय अंदाज से जीत लेगा दिल


    नई दिल्ली। अगर आपका मन इटली घूमने का है लेकिन विदेश यात्रा का बजट फिलहाल इजाजत नहीं देता तो महाराष्ट्र का लवासा आपको एक अलग तरह का ट्रैवल एक्सपीरियंस दे सकता है। पहाड़ियों के बीच बसा यह खूबसूरत हिल टाउन अपनी रंगीन इमारतों शांत झील और यूरोपीय अंदाज वाली प्लानिंग के कारण बाकी पर्यटन स्थलों से काफी अलग नजर आता है। यही वजह है कि लवासा को अक्सर Mini Italy of India या Italy of India जैसे नामों से पुकारा जाता है। महाराष्ट्र पर्यटन भी लवासा को यूरोपीय वास्तुकला से प्रेरित और खूबसूरत झील के आसपास बसा हिल टाउन बताता है।

    लवासा की सबसे खास बात यहां का माहौल है। यहां पहुंचते ही आपको ऐसा महसूस हो सकता है जैसे आप किसी विदेशी हॉलिडे टाउन में आ गए हों। आसपास की पहाड़ियां झील का शांत पानी और उसके किनारे बनी खूबसूरत इमारतें मिलकर इस जगह को बेहद आकर्षक बनाती हैं। खासतौर पर दासवे झील के आसपास का इलाका पर्यटकों को सबसे ज्यादा पसंद आता है। झील किनारे बनी सड़कें और आसपास नजर आने वाली रंग बिरंगी इमारतें यहां के पूरे नजारे को खास बना देती हैं।

    लवासा की वास्तुकला को इटली के मशहूर शहर पोर्टोफिनो की शैली से प्रेरित बताया जाता है। पोर्टोफिनो अपने समुद्री किनारे रंगीन इमारतों छोटी गलियों कैफे और खूबसूरत पहाड़ियों के लिए जाना जाता है। इसी तरह का वातावरण महाराष्ट्र की पहाड़ियों के बीच तैयार करने की कोशिश लवासा में दिखाई देती है। यहां इमारतों के रंग और डिजाइन से लेकर झील किनारे के वॉकिंग एरिया तक में यूरोपीय शहरों की झलक नजर आती है।

    यहां की रंगीन इमारतें भी पर्यटकों के आकर्षण का बड़ा कारण हैं। टेराकोटा पीच मस्टर्ड ऑलिव ग्रीन और ब्रिक रेड जैसे रंगों वाली इमारतें झील के आसपास बेहद खूबसूरत दिखाई देती हैं। कई जगहों पर आर्च छोटी बालकनी टाइल वाली छत और हल्के रंग की दीवारें देखने को मिलती हैं। पहाड़ों और पानी के बीच इन इमारतों का नजारा तस्वीरों के लिए भी शानदार बैकग्राउंड तैयार करता है।

    लवासा में घूमने का एक अलग आनंद पैदल चलते हुए आसपास की खूबसूरती को महसूस करने में है। झील किनारे बने रास्ते कैफे और बैठने की जगहें पर्यटकों को आराम से समय बिताने का मौका देती हैं। यहां सुबह का शांत माहौल हो या शाम के समय झील के आसपास का नजारा दोनों ही समय यह जगह बेहद आकर्षक नजर आती है।

    लवासा की खासियत केवल इसकी खूबसूरत इमारतें नहीं हैं। पहाड़ियों और झील से घिरा शांत वातावरण इसे वीकेंड ट्रिप के लिए भी आकर्षक बनाता है। महाराष्ट्र में पहले से ही लोनावला जैसे कई लोकप्रिय हिल स्टेशन हैं लेकिन लवासा अपनी यूरोपीय शैली वाली पहचान के कारण अलग अनुभव देता है। महाराष्ट्र पर्यटन भी राज्य के हिल स्टेशनों को प्राकृतिक सुंदरता और मनोरंजन के लिहाज से प्रमुख पर्यटन विकल्पों में शामिल करता है।

    अगर आप भारत में रहते हुए कुछ ऐसा देखना चाहते हैं जो आम पहाड़ी पर्यटन स्थलों से अलग हो तो लवासा आपकी ट्रैवल लिस्ट में शामिल हो सकता है। यहां झील है पहाड़ हैं रंग बिरंगी इमारतें हैं कैफे हैं और सबसे खास बात है विदेशी शहर जैसा माहौल। इसी अनोखे मेल के कारण लवासा को Mini Italy of India कहा जाता है और यहां पहुंचकर आपको कुछ देर के लिए सचमुच ऐसा लग सकता है कि आप भारत में नहीं बल्कि किसी यूरोपीय शहर में छुट्टियां मना रहे हैं।

  • विवादों के समाधान पर चीन का बड़ा संकेत, जिनपिंग की भारत यात्रा से पहले सीमा मुद्दे पर बढ़ी उम्मीद

    विवादों के समाधान पर चीन का बड़ा संकेत, जिनपिंग की भारत यात्रा से पहले सीमा मुद्दे पर बढ़ी उम्मीद

    नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच रिश्तों में सुधार के संकेतों के बीच चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा को काफी अहम माना जा रहा है। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए नई दिल्ली पहुंचे जिनपिंग की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक प्रस्तावित है। इस मुलाकात से पहले भारत में चीन के राजदूत शू फेइहोंग के बयान ने दोनों देशों के संबंधों को लेकर सकारात्मक उम्मीदें बढ़ाई हैं।

    चीनी राजदूत ने कहा है कि चीन और भारत बातचीत को आगे बढ़ाने, सहयोग मजबूत करने और आपसी मतभेदों का उचित समाधान निकालने के लिए मिलकर काम करेंगे। उनके इस बयान को सीमा विवाद समेत दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे मुद्दों को बातचीत के जरिए सुलझाने की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

    लगातार तीसरे साल मोदी-शी की मुलाकात

    शू फेइहोंग ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में बताया कि चीन और भारत राष्ट्रपति शी जिनपिंग तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच होने वाली द्विपक्षीय बैठक की तैयारियां कर रहे हैं। रूस के कजान और चीन के तियानजिन में दोनों नेताओं की मुलाकातों के बाद यह लगातार तीसरा वर्ष होगा, जब मोदी और शी आमने-सामने बातचीत करेंगे।

    चीनी राजदूत ने कहा कि चीन दोनों नेताओं की ओर से दिए गए रणनीतिक मार्गदर्शन को लागू करने के लिए भारत के साथ मिलकर काम करेगा। दोनों देशों के संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिए से आगे बढ़ाने, संवाद बढ़ाने और सहयोग मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा।

    उन्होंने कहा कि दोनों देश अपने मतभेदों को उचित तरीके से सुलझाने के साथ अच्छे पड़ोसियों की तरह मित्रता निभाएंगे और एक-दूसरे की सफलता में साझेदार बनकर आगे बढ़ेंगे।

    धीरे-धीरे सामान्य हो रहे भारत-चीन संबंध

    पिछले कुछ वर्षों में भारत और चीन के रिश्तों में धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिले हैं। वर्ष 2024 में रूस के कजान में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और 2025 में चीन के तियानजिन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच महत्वपूर्ण बातचीत हुई थी।

    इन मुलाकातों के बाद दोनों देशों के बीच संवाद बढ़ाने और द्विपक्षीय संबंधों को आगे ले जाने की कोशिशें तेज हुई हैं। ऐसे में नई दिल्ली में प्रस्तावित मोदी-शी बैठक को इस प्रक्रिया की अगली महत्वपूर्ण कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है।

    भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का भी चीन ने किया समर्थन

    शी जिनपिंग की भारत यात्रा से पहले चीन ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का भी समर्थन किया है। शू फेइहोंग ने एक अन्य सोशल मीडिया पोस्ट में कहा था कि चीन ब्रिक्स सहयोग को काफी महत्व देता है और इस वर्ष सफल ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के आयोजन में भारत का समर्थन करता है।

    यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। सम्मेलन में दुनिया की कई प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के राष्ट्राध्यक्ष और प्रतिनिधि हिस्सा लेने पहुंचे हैं।

    मोदी-शी की बैठक पर टिकी निगाहें

    ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान होने वाली प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग की द्विपक्षीय बैठक पर दोनों देशों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भी नजर है। बैठक में सीमा विवाद, व्यापार, निवेश, क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक परिस्थितियों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।

    चीनी राजदूत के ताजा बयान से संकेत मिलता है कि बीजिंग भारत के साथ मतभेदों को टकराव के बजाय संवाद और कूटनीति के माध्यम से सुलझाने पर जोर दे रहा है। ऐसे में नई दिल्ली में होने वाली मोदी-शी वार्ता भारत-चीन संबंधों की आगे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।