Category: National

  • एनएसए हिरासत से 26 दिन के अनशन तक, सोनम वांगचुक के आंदोलन ने बदली सियासी तस्वीर, अस्पताल पहुंचकर केंद्रीय मंत्रियों ने तुड़वाया उपवास

    एनएसए हिरासत से 26 दिन के अनशन तक, सोनम वांगचुक के आंदोलन ने बदली सियासी तस्वीर, अस्पताल पहुंचकर केंद्रीय मंत्रियों ने तुड़वाया उपवास

    नई दिल्ली । करीब 26 दिनों तक चले आमरण अनशन के बाद सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक ने अपना उपवास समाप्त कर दिया। देर रात अस्पताल में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में उन्होंने अनशन तोड़ा। वांगचुक ने बताया कि यह फैसला लंबी बातचीत, विभिन्न पक्षों से मिले आग्रह और देश में किसी भी प्रकार की संभावित हिंसा से बचने की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। उन्होंने कहा कि आंदोलन से जुड़े आगे के निर्णय और बातचीत की शर्तों की जानकारी जल्द साझा की जाएगी तथा समर्थकों से पूरी तरह शांतिपूर्ण व्यवहार बनाए रखने की अपील की।

    सोनम वांगचुक पिछले कई सप्ताह से पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे थे। स्वास्थ्य बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से भी उनका अनशन जारी रहा। इस दौरान देश के विभिन्न राज्यों से छात्र, सामाजिक संगठन और कई सार्वजनिक हस्तियां उनके समर्थन में सामने आईं। आंदोलन के बढ़ते प्रभाव ने इसे राष्ट्रीय स्तर की बहस का विषय बना दिया और सरकार तथा आंदोलनकारी पक्ष के बीच संवाद की संभावनाएं भी तेज हुईं।

    वांगचुक की हालिया भूमिका इसलिए भी चर्चा में रही क्योंकि कुछ महीने पहले तक वे राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत हिरासत में थे। लद्दाख में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद उन्हें एहतियाती कार्रवाई के तहत गिरफ्तार किया गया था और कई महीनों तक जेल में रखा गया। बाद में सरकार ने उनकी हिरासत समाप्त करने का निर्णय लिया और मार्च 2026 में उन्हें रिहा कर दिया गया। रिहाई के बाद उन्होंने फिर से सार्वजनिक जीवन में सक्रिय होकर शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाना शुरू किया।

    सोनम वांगचुक का नाम देश में शिक्षा सुधार और वैकल्पिक शिक्षण मॉडल के लिए लंबे समय से जाना जाता है। उन्होंने लद्दाख में विद्यार्थियों के लिए वैकल्पिक शिक्षा व्यवस्था विकसित करने के उद्देश्य से एसईसीएमओएल संस्थान की स्थापना की। उनके प्रयासों से स्थानीय शिक्षा व्यवस्था में कई बदलाव आए और स्कूलों के परीक्षा परिणामों में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया। शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली तथा उन्हें प्रतिष्ठित रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।

    शिक्षा के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और लद्दाख के संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने के लिए भी वांगचुक लगातार काम करते रहे हैं। पानी की कमी से निपटने के लिए विकसित किए गए उनके ‘आइस स्तूप’ मॉडल को वैश्विक पहचान मिली। इसके अलावा उन्होंने सौर ऊर्जा, टिकाऊ विकास और स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग से जुड़े कई नवाचारों पर भी काम किया है। यही वजह है कि वे केवल एक सामाजिक कार्यकर्ता नहीं बल्कि नवाचार और सामुदायिक विकास के प्रतीक के रूप में भी पहचाने जाते हैं।

    वांगचुक स्वयं को गांधीवादी विचारधारा से प्रेरित बताते हैं और विरोध दर्ज कराने के लिए अहिंसक तरीकों को प्राथमिकता देते हैं। लंबे उपवास, शांतिपूर्ण मार्च और संवाद आधारित आंदोलन उनकी कार्यशैली का हिस्सा रहे हैं। हालिया अनशन समाप्त होने के बाद भी उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी मांगों और मुद्दों पर बातचीत जारी रहेगी, लेकिन किसी भी परिस्थिति में आंदोलन का रास्ता शांतिपूर्ण ही रहेगा। उनके इस कदम ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि लोकतांत्रिक संवाद और शांतिपूर्ण विरोध आज भी सार्वजनिक जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

  • देशव्यापी छात्र प्रदर्शन से पहले हाई अलर्ट, गृह मंत्रालय सतर्क, सोशल मीडिया और एआई आधारित प्रचार सामग्री पर नजर

    देशव्यापी छात्र प्रदर्शन से पहले हाई अलर्ट, गृह मंत्रालय सतर्क, सोशल मीडिया और एआई आधारित प्रचार सामग्री पर नजर


    नई दिल्ली । देशव्यापी छात्र प्रदर्शन के आह्वान को देखते हुए केंद्र सरकार और सुरक्षा एजेंसियों ने सतर्कता बढ़ा दी है। गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की पुलिस को कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक तैयारियां करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों को भी किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा गया है। सुरक्षा एजेंसियां विशेष रूप से सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर प्रसारित हो रही सामग्री पर नजर बनाए हुए हैं।

    अधिकारियों के अनुसार, खुफिया एजेंसियों के पास ऐसे इनपुट हैं कि बड़े प्रदर्शनों के दौरान कुछ असामाजिक या बाहरी तत्व माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर सकते हैं। इसी आशंका को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई है। विशेष रूप से सीमावर्ती राज्यों और संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को समय रहते रोका जा सके।

    सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा एजेंसियां सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली विभिन्न प्रकार की सामग्री की निगरानी कर रही हैं। इसमें एआई आधारित प्रचार सामग्री भी शामिल है, जिसकी प्रामाणिकता और संभावित प्रभाव का आकलन किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी ऑनलाइन सामग्री को लेकर कार्रवाई उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रियाओं के अनुसार की जाएगी।

    खुफिया एजेंसियों ने राज्यों को भीड़ प्रबंधन और संवेदनशील स्थानों की सुरक्षा मजबूत करने की सलाह दी है। राष्ट्रीय राजमार्गों, प्रमुख चौराहों और बड़े शहरों के महत्वपूर्ण इलाकों में निगरानी बढ़ाने के लिए सीसीटीवी नेटवर्क का प्रभावी उपयोग करने पर जोर दिया गया है। आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त पुलिस बल और केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की भी तैयारी रखी गई है।

    केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की इकाइयों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि यदि किसी राज्य से अतिरिक्त सुरक्षा बल की मांग आती है तो आवश्यक कार्रवाई तुरंत की जा सके। इसका उद्देश्य कानून व्यवस्था बनाए रखना और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना है।

    हाल के दिनों में विभिन्न राज्यों में छात्र संगठनों द्वारा आयोजित प्रदर्शनों में कई राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने भी भाग लिया था। कुछ स्थानों पर प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव तथा झड़प की घटनाएं भी सामने आई थीं। इन्हीं अनुभवों को ध्यान में रखते हुए इस बार सुरक्षा व्यवस्था पहले से अधिक मजबूत रखने की तैयारी की गई है।

    प्रशासन ने प्रदर्शन में शामिल होने वाले लोगों से शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने और कानून का पालन करने की अपील की है। साथ ही अफवाहों या अपुष्ट जानकारी पर भरोसा न करने और केवल आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त सूचनाओं पर ही विश्वास करने की सलाह दी गई है।

    Tags: Student Protest, Home Ministry, Security Alert, Intelligence Agencies, India News

  • देश के कई हिस्सों में भारी बारिश से बिगड़े हालात… असम में बाढ़ से 47 मौतें, लाखों लोग प्रभावित

    देश के कई हिस्सों में भारी बारिश से बिगड़े हालात… असम में बाढ़ से 47 मौतें, लाखों लोग प्रभावित


    नई दिल्ली ।
    देश के कई हिस्सों में मानसूनी बारिश (Monsoon Rain) का कहर लगातार जारी है। सबसे गंभीर स्थिति असम (Assam) में है, जहां बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 47 हो गई है। पिछले 24 घंटों में छह और लोगों की जान गई है। वहीं, बाढ़ से प्रभावित लोगों की संख्या बढ़कर 7.21 लाख से अधिक हो गई है। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) के अनुसार, राज्य के 11 जिलों के 37 राजस्व सर्किलों और 883 गांवों में बाढ़ (Flood) का असर है। लगातार हो रही बारिश के कारण कई प्रमुख नदियां अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं और हालात और बिगड़ने की आशंका बनी हुई है।


    कौन से जिले बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं?

    एएसडीएमए (ASDMA) के अनुसार, सबसे अधिक प्रभावित शिवसागर जिला है, जहां करीब 3.75 लाख लोग बाढ़ की चपेट में हैं। इसके बाद चराइदेव में 1.86 लाख और जोरहाट में 1.15 लाख लोग प्रभावित हैं। गोलाघाट, होजाई, कामरूप, डिब्रूगढ़, नगांव, कामरूप (मेट्रो), कार्बी आंगलोंग और तिनसुकिया समेत कुल 11 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं। पिछले दिन तक 10 जिलों में 6.43 लाख लोग प्रभावित थे, लेकिन लगातार बारिश के कारण स्थिति और गंभीर हो गई।


    राहत और बचाव कार्य कहां तक पहुंचा?

    राज्य में 103 राहत शिविरों में 24,124 विस्थापित लोगों को आश्रय दिया गया है, जबकि 255 राहत वितरण केंद्र भी संचालित किए जा रहे हैं। सेना, वायुसेना, एनडीआरएफ और अन्य एजेंसियां राहत एवं बचाव अभियान में जुटी हैं। दूरदराज के इलाकों में फंसे लोगों तक ड्रोन के जरिए भोजन, पेयजल और दवाइयां पहुंचाई जा रही हैं। बाढ़ के कारण 25,375.44 हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न हो गई है। साथ ही कई स्थानों पर सड़कों और अन्य बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचा है।

    कौन-कौन सी नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं?
    बाढ़ की स्थिति इसलिए भी चिंताजनक बनी हुई है क्योंकि डिब्रूगढ़ के खोवांग में बुर्हीदिहिंग, शिवसागर में दिखो और देसांग, गोलाघाट के नुमालीगढ़ में धनसिरी तथा श्रीभूमि में कुशियारा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। मौसम विभाग ने अगले चार दिनों तक राज्य के कई इलाकों में भारी बारिश, आंधी और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है।

    गुजरात में बारिश ने कैसी तबाही मचाई?
    गुजरात के वलसाड, नवसारी, सूरत और तापी जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश को लेकर रेड अलर्ट जारी किया गया है। सबसे अधिक प्रभावित वलसाड जिले के उमरगाम तालुका में बुधवार सुबह से गुरुवार सुबह तक महज 16 घंटे में 1,100 मिलीमीटर से अधिक बारिश दर्ज की गई। राज्य सरकार के अनुसार, अब तक 1,200 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। सूरत में 1,500 और नवसारी के 11 गांवों से 200 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। तापी जिले में बारिश से जुड़ी एक व्यक्ति की मौत हुई है। 300 से अधिक सड़कें अस्थायी रूप से बंद हैं और राज्य परिवहन निगम की 200 से ज्यादा बस सेवाएं प्रभावित हुई हैं।


    सूरत में बारिश से दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे बंद

    गुजरात के सूरत में भारी बारिश के कारण अंबिका नदी उफान पर आ गई है। नदी का पानी पुल के खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है। सुरक्षा के लिए दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे (नेशनल एक्सप्रेसवे 4) पर ईएनए (पलसाना) और खरेल (नवसारी) के बीच वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है। प्रशासन स्थिति पर नज़र रखे हुए है। पानी का स्तर कम होते ही यातायात फिर से शुरू कर दिया जाएगा।


    जम्मू-कश्मीर में बारिश से हालात कितने गंभीर हैं?

    जम्मू-कश्मीर में लगातार हो रही बारिश के कारण तवी, चिनाब और झेलम समेत कई नदियां उफान पर हैं। भूस्खलन और सड़क धंसने की घटनाओं के चलते जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग लगातार दूसरे दिन भी बंद रहा। बारिश से जुड़े हादसों में अब तक 27 लोगों की मौत हो चुकी है। खराब मौसम के कारण अमरनाथ, वैष्णो देवी और शिवखोड़ी यात्राएं लगातार पांचवें दिन भी स्थगित रहीं। कटड़ा में लगभग 15 हजार श्रद्धालु फंसे हुए हैं। कश्मीर विश्वविद्यालय ने 24 और 25 जुलाई को होने वाली परीक्षाएं स्थगित कर दी हैं।


    राजस्थान में मौसम विभाग ने क्या चेतावनी जारी की है?

    मौसम विभाग ने 24 और 25 जुलाई के बीच अजमेर, कोटा, जोधपुर और उदयपुर संभाग में भारी बारिश की संभावना जताई है। वहीं, जयपुर, भरतपुर और बीकानेर संभाग में हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान है।


    हिमाचल प्रदेश में बादल फटने से क्या असर पड़ा?

    हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला समेत कांगड़ा, चंबा, मंडी, कुल्लू और ऊना में गुरुवार को तेज बारिश हुई। चंबा जिले के साच जोत क्षेत्र में बादल फटने से चुराह उपमंडल के सतरूंडी नाला, रानीकोट और कार्थ नाला में अचानक बाढ़ आ गई। इससे कई मार्गों पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया। भारी मात्रा में मलबा और चट्टानें सड़कों पर आ गईं। प्रदेश में 136 सड़कें बंद हैं, जबकि कई इलाकों में बिजली और पेयजल आपूर्ति भी प्रभावित हुई है।

  • दिल्ली प्रदर्शन की आड़ में देश का माहौल बिगाड़ने का प्रयास…. 150 को दबोचा, पिस्टल-चाकू बरामद

    दिल्ली प्रदर्शन की आड़ में देश का माहौल बिगाड़ने का प्रयास…. 150 को दबोचा, पिस्टल-चाकू बरामद


    नई दिल्ली।
    कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) (Cockroach Janata Party -CJP) के बैनर तले जंतर-मंतर पर प्रदर्शन (Jantar Mantar Protest) पर बैठे प्रदर्शनकारी छात्रों की आड़ में दिल्ली व देश का माहौल बिगाड़ने की एक बड़ी साजिश का खुलासा हुआ है। दक्षिण व दक्षिण-पूर्व जिला पुलिस ने छात्रों के भेष में जंतर-मंतर जा रहे 150 से ज्यादा आरोपियों को पकड़ा है। बल्लभगढ़ निवासी दो लड़कों नवीन वत्स, सौरभ के बैग से पिस्टल, चाकू मिला है। बदरपुर थाना पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार किया है।

    दक्षिण रेंज के कई थाना पुलिस को इनपुट मिले थे कि कुछ लोग माहौल खराब करने के लिए के छात्र बनकर जंतर-मंतर जा रहे थे। इन लोगों ने पीछे छात्रों की तरह बैग लटकाया हुआ है। इन इनपुट के बाद बदरपुर, सनलाइट कॉलोनी, निजामुद्दीन, लोधी कॉलोनी, लाजपत नगर आदि थाना इलाकों में पिकेट लगाकर चेकिंग की गई।

    पुलिस बाइक से जा रहे आरोपियों को रोका। इनके बैग से आपत्तिजनक सामग्री जैसे स्प्रे व पत्थर आदि बरामद किए गए। दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि कुछ के मोबाइल फोन में वॉट्सएप पर आपत्तिजनक चैट मिली है। आरोपी वॉट्सएप पर ज्यादा बातें कर रहे हैं। इन चैट में जिक्र है कि जैसे…तैसे जंतर-मंतर इस सामान को पहुंचाओ। जंतर-मंतर पर छात्र बनकर और बैग लटकाकर जाना है। पुलिस इन मोबाइल को फोरेंसिक जांच के लिए भेज रही है।

    इससे निजामुद्दीन, लाजपत नगर, सनलाइट व लोधी कॉलोनी आदि थाना पुलिस ने 20 से 25 से ज्यादा आरोपियों ने रात को पकड़ा था। पुलिस ने सभी को हिरासत में लिया हुआ है और उनसे पूछताछ की जा रही है। आरोपियों ने पूछताछ में स्वीकार किया है कि वह प्रदर्शन में भाग लेने के लिए जा जंतर-मंतर जा रहे थे। जिले के एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि आरोपी जामिया नगर, शाहीनबाग, सनलाइट, फरीदाबाद व नोएडा के रहने वाले हैं।


    कई छात्रों को समझा बुझाकर किया वापस

    पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पकड़े गए 150 छात्रों में से कई छात्रों को समझा बुझाकर वापस कर दिया गया है जबकि कुछ से पूछताछ जारी है। इनके बैग से आपत्तिजनक सामान मिला था। पुलिस का कहना है कि 15 अगस्त नजदीक है। इस प्रदर्शन की आड़ में कुछ आसामाजिक तत्व भी आ सकते हैं जो राजधानी में अपनी नापाक हरकत से देश का माहौल कर सकते हैं। ऐसे में सभी से अपील है कि सतर्क रहें और कोई भी संदिग्ध नजर आने पर पुलिस को 112 पर सूचित करें।

    दक्षिण-पूर्व जिला पुलिस ने 100 से ज्यादा संदिग्ध को पकड़ा है। बदरपुर थाना पुलिस ने चेकिंग के दौरान दो आरोपियों को पकड़ा है। तलाशी लेने पर उनके बैग से पिस्टल व चाकू बरामद किए गए हैं। इनको गिरफ्तार कर लिया गया है। कुछ के बैग से स्प्रे आदि सामान बरामद किया गया है। आरोपियों से पूछताछ जारी है। -डॉ. हेमंत तिवारी पुलिस उपायुक्त दक्षिण-पूर्व जिला

    पुलिस ने काफी संदिग्धों को पकड़ा है और उनके बैग से आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई है। पूरी साजिश को पर्दाफाश करने के लिए आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। – विजय कुमार संयुक्त पुलिस आयुक्त, दक्षिणी रेंज

  • अयोध्याः संतों ने चढ़ावा चोरी के प्रकरण को लेकर देशभर में फैले दुष्प्रचार का पुरजोर प्रतिवाद किया

    अयोध्याः संतों ने चढ़ावा चोरी के प्रकरण को लेकर देशभर में फैले दुष्प्रचार का पुरजोर प्रतिवाद किया


    अयोध्या।
    श्री राम सत्संग भवन धर्म मंडपम, मणिराम दास छावनी में सन्त मण्डल अयोध्या धाम की संगोष्ठी गुरुवार को संपन्न हुई। संगोष्ठी के बाद जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि मंच संचालन – महन्त श्री रामानन्द दास जी महाराज ने किया।

    संचालन करते हुए महन्त डॉ रामानन्द दास जी ने कहा कि योगी जी ने उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बना दिया। उनके कारण पूरे देश में अयोध्या का सम्मान बढ़ा है। प्रत्येक समाज में अच्छे-बुर लोग होते हैं। श्रीरामजन्मभूमि के एक दुर्भाग्यपूर्ण प्रसंग का दुष्प्रचार करके राजनैतिक लोगों ने देशभर भर में भ्रम फैला दिया है। परन्तु गोस्वामी जी ने कहा है कि संत हंस गुन गहहिं पय, परिहरि बारि बिकार। सन्त जन नीर-क्षीर विवेक से जल का त्याग करके दुग्ध ग्रहण करते हैं। आज विरोधी तत्वों को अयोध्या और देश का विकास अच्छा नहीं लग रहा है। वे भांति-भांति के उपद्रव करते हैं। महापुरुष ऐसी शक्तियों को सफल नहीं होने देंगे। आगामी चुनाव में भी वे इन षडयन्त्रों को विफल करेंगे।

    प्रस्तावना : अधिकारी श्री राजकुमारदसमी जी महाराज

    अयोध्या धाम सप्तपुरियों में प्रथम मोक्षदा पुरी है। श्री अयोध्या धाम सात मोक्षदा पुरियों में मुख्यतम है। यह केवल आध्यात्मिक ही नहीं अपितु मानवीय आदशों का भी केन्द्र है। सन्त के इसके अनादिसिद्ध प्रक्ता हैं। अयोध्या के पूज्य सन्त ही अयोध्या के गौरव के प्रमाण हैं। हमें अपनी पूर्वाचार्य-परम्परा के अनुरूप अपने इष्ट-धाम के गौरव बोध के लिए सतत सजग रहना ही चाहिये। यह कितना आश्चर्यजनक एवं त्रासद है कि जिनकी व्यवस्था में चोरी हुई, जो इस दुर्घटना के पीड़ित हैं, उन्हें ही अपराधी बनाने का खेल चल पड़ा।

    यह वास्तव में श्रीराममन्दिर से संगठित और एकात्म हुए हिन्दू समाज की आस्था को छलने का दुष्चक्र था, जिसमें विपक्षियों को काफी सफलता भी प्राप्त हुई। क्योंकि इस दुष्प्रचार को रोकने में हम-आप वैसे सक्रिय नहीं हो सके, जैसे विरोधी हुए। अभद्र टिप्पणियां, व्यक्तिगत लांछन तथा निराधार आरोपों के बवंडर ने सहज श्रद्धा को तार-तार करने का काम किया। हमें समझना होगा कि यह आन्दोलन चोरी के विरुद्ध नहीं, बल्कि श्रीराम मन्दिर से निर्मित हुई धार्मिक-सांस्कृतिक एकजुटता के विरुद्ध है। देश-दुनिया में बसे भारत-भाव के शत्रु हमारी धार्मिक-सांस्कृतिक अस्मिता को आहत करने के लिए संसद से सड़क तक सक्रिय हैं। वास्तव में यह हमारे सचेत होने का समय है। उन्होंने तुलसीदास जी के कथन का उल्लेख करते हुए कहा- जाके प्रिय न राम वैदेही, तजिये ताहि कोटि बैरी सम जद्यपि परम सनेही।

    अपने सम्बोधन में महन्त राघवेश दासजी महाराज ने कहा आज के दौर में कुछ षडयन्त्रकारी श्रीराम मन्दिर पर कुचक्र चला रहे हैं। वो लोग कभी कल्पना नहीं करते थे कि कभी श्रीराम मन्दिर का निर्माण होगा, लेकिन विहिप एवं आरएसएस के अथक प्रयत्न से सफल हुआ। चम्पत राय जी गलत नहीं हैं। हाँ, कुछ चूक हुई है पर हमें एकजुट होकर सब ठीक करना है।

    रामायणी श्री रामकृष्ण दासजी ने कहा कि वास्तव में इस प्रकरण से अयोध्या की जो छवि बनी थी, उसमें कुछ विकृतियां आयी हैं। उनके परिहार के लिए हम सबको लगना होगा। 05 सदस्यीय सन्त-महान्त का धार्मिक समिति में चयन हुआ है। इससे सन्तों का नेतृत्व प्रमुख होगा और सब विघ्न बाधायें दूर होंगी।

    रामायणी श्री कमला दासजी ने कहा कि काल सुभाव करम बरिआईं। भलेउ प्रकृति बस चुकइ भलाई॥ अच्छे लोग भी कभी काल के प्रभाव से चूक जाते हैं। पर महापुरुष उस चूक को सुधार देते हैं। ट्रस्ट में जिन पर अंगुलियां उठाई जा रही हैं वे निर्दोष हैं। दुष्प्रचार को दूर करने के लिए हमें संगठित होना होगा। सन्त समाज का नेतृत्व होने से सबका समाधान होगा।

    महान्त वैदेही वल्लभशरण जी महाराज ने ट्रस्ट में सन्तचरणों के चयन पर सभी को साधुवाद देते हुए कहा कि जिन्होंने राम को कभी स्वीकार नहीं किया वे आज राम मन्दिर में महापुरुषों पर लांछन लगा रहे हैं। हमें ऐसे कालनेमियों को पहचानना चाहिए। हम सब सदैव रामभक्त सरकार के साथ रहे हैं और रहेंगे। विहिप और आरएसएस ने सभी सन्तों को एक मार्ग पर लाने का कार्य किया।

    महान्त शशिकान्त दासजी महाराज आंजनेय सेवा संस्थान ने कहा कि श्रीराममन्दिर के विषय में जो अर्नंगल प्रलाप-चल रहा है वह पूर्णतया निराधार है। पंच परमेश्वर के माध्यम से इसे दूर करने का प्रयास चल रहा है। जिन्होने रामजन्मभूमि के लिए संघर्ष किये उन्हें ही आज कुचक्र चलाकर बदनाम किया जा रहा है। ऐसे दोषियों को किसी प्रकार से बख्शा नहीं जायेगा।

    श्री रामदास जी महाराज – नाका हनुमानगढ़ी ने कहा कि संवाद से बड़े-बड़े विवाद हल हो जाते हैं। उन्होंने धार्मिक समिति के सभी चयनित पांचों महापुरुषों को हार्दिक बधाई दी। वे बोले कि आज अयोध्या के सभी धर्मावलम्बी समाज को अपने सम्बन्धों के आधार पर यहाँ के दूषित वातावरण को अच्छे विचारों द्वारा सुधार करने की आवश्यकता है।

    डॉ भरतदासजी महाराज – रानोपाली ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की जन्मभूमि की मर्यादा को धूमिल करने का प्रयास चल रहा है। इसके लिए हम सभी सन्त महापुरुषों को एकसाथ एक विचार का संवहन करने की आवश्यकता है। हमें सुनी-सुनाई बातों पर मनन करके ही अपने विचार व्यक्त करना चाहिए। हमें व्यक्ति के सम्बन्ध में जान-समझ कर ही वक्तव्य देना चाहिए। हमारी पूजा पद्धति श्रीरामानन्द पद्धति के अनुसार नये सदस्यों के आने से सतत चलती रहेगी।

    महन्त गिरीशदासजी महाराज डांडिया मन्दिर ने कहा कि आज हमें श्रद्धालुओं, धर्मानुरागी व्यक्तियों में व्याप्त भ्रांतियों को दूर करने की आवश्यकता है। यह हम अयोध्यावासियों की नैतिक जिम्मेदारी है। चम्पतराय जी परम सन्त हैं। उनपर लगाये गये आरोप मिथ्या हैं। उन्होंने स्वयं की प्रेरणा से त्यागपत्र दिया। वे निःस्वार्थ श्रीराम जन्मभूमि आन्दोलन में विगत पचासों वर्षों से लगे हुए हैं। उन्होंने जन भावनाओं के अनुकूल श्रीरामनला के आगमन के पथ को प्रशस्त करने में महती भूमिका निभाने का कार्य किया। सभी ट्रस्ट के पदाधिकारियों से निवेदन है कि रामलला दर्शन हेतु अयोध्यावासियों के आधार कार्ड को ही आधार बनाया जाय।

    महन्त मनीष दास जी महाराज पत्थर मन्दिर ने अत्यन्त ओजस्वी वक्तव्य देते हुए कहा कि आज की बैठक का विचार बहुत पहले आ जाना चाहिए। श्री अयोध्या के सन्तों को विषम परिस्थितयों में वक्तव्य देने के बजाय मौन हो जाना ही बेहतर होगा। हमें अपने इष्टधाम के प्रति कदापि गलतबयानी नहीं करना चाहिए। सन्तोष दुबे जैसे लोग हमारे आराध्य के वैभव के संवाहक सन्तों पर गलतबयानी करते हैं यह ठीक नहीं है। अयोध्या में वही होगा जो अयोध्या का सन्त समाज चाहेगा। हम अपने आराध्य देव के लिए विहिप, आरएसएस एवं भाजपा की सकारात्मक भूमिका को कभी भुला नहीं सकते।

    श्रीमहन्त जनार्दन दासजी – तुलसीदास छावनी ने कहा कि अयोध्या धाम श्रीरामजन्मभूमि की घटना को मीडिया ने अनावश्यक प्रचार-प्रसार से बढ़ा दिया। यह घटना उतनी बड़ी नहीं है। हम रामजी के अनुरागी है। राक्षस हर युग में रूप बदल कर साधुवेश में सन्तों की बदनामी कराते रहते हैं। हम धर्म की रक्षा के लिए रामजी की बरह कहीं भी रहें शस्त्र-शास्त्र का त्याग नहीं करते। ट्रस्ट के विधिवत संचालन में सन्त-महापुरुषों को गुण-दोषों के आधार पर रखना चाहिए। उत्सवों आदि के समय इनका विशेष सहयोग लेना चाहिए। हमारे सन्त समाज के महापुरुषों को धर्मसभा के माध्यम से अग्रणी भूमिका में रखना चाहिए।

    महन्त परशुराम दास जी महाराज (हनुमत किला) बोले कि हमें सनातन और हिन्दुत्व को बदनाम करने वालों के प्रति सजग रहना चाहिए। तथाकथित धर्मगुरुओं के लिए एक समिति का गठन करके कार्यवाही करनी चाहिए। मीडिया पर बोलने के लिए हमे व्यक्ति का निर्धारण करना चाहिए।

    जयराम दास जी महाराज-श्रीराम आश्रम ने कहा कि श्री रामानन्दीय परम्परा के अनुसार श्रीरामलला सरकार के सभी उत्सव मनाये जायेंगे। पूज्य सन्तों को ट्रस्ट ने धार्मिक समिति में लिया इसका स्वागत है।

    महन्त श्री सत्यनारायणदास ने कहा कि स्वयं प्रभु भगवान् श्रीराम जी ने व्यक्ति रूप में जीवन जीने का तरीका सिखाया। दानवी प्रवृत्तियाँ अति उत्साह के साथ भगवान से प्रेरित होकर सद्वृत्ति की ओर अग्रसर हों। हम एक जैसी बात ही करें इससे सभी का कल्याण होगा।

    निर्वाणी अनी अखाड़ा- महन्त गौरी शंकरदासजी ने कहा कि जिनका सनातन धर्म एवं मन्दिर से कभी सम्बन्ध नहीं था वे आज मन्दिर में चढ़ावा चोरी पर चर्चा कर रहे है। हम सभी उस महापुरुष के साथ हैं। जो अयोध्या को बदनाम करने का प्रयास कर रहा है हमसब एकजुट होकर उसका पुरजोर विरोध करेंगें।

    श्री रामानुज दासजी महाराज- सीताकान्त सदन ने कहा कि हमें अपनी मर्यादा में रहना चाहिए। हम गुरु-शिष्य परंपरा के संवाहक हैं, जो भी आदेश-निर्देश आचार्यों का हो, हमें उसका पालन करना चाहिए, मनमाना बयान नहीं देना चाहिए।

    श्री सत्येन्द्र दासजी – श्री सीताराम निवासकुंज ने धर्म समिति के चयनित सदस्यों के प्रति का धन्यवाद ज्ञापित किया। अयोध्या में इस तरह की कुचर्चा बिल्कुल बर्दाश्त नही की जायेगी। आज मीडिया के माध्यमों से अयोध्या को बदनाम किया जा रहा है। सन्त मण्डल संगोष्ठी की बैठक पूर्व में ही होनी चाहिए थी।

    महन्त संजय दास – अखाड़ा परिषद अध्यक्ष ने कहा कि मन्दिर आन्दोलन में प्रारम्भकाल से ही श्री चम्पत राय के संघर्ष को आज तक भुलाया नहीं जा सकता। सन्तों की संगोष्ठी दो तीन माह में होती रहनी चाहिए। अनर्गल प्रलाप करने का वालों का सामाजिक बहिष्कार होना चाहिए।

    महन्त मुरलीदास जी महाराज-हनुमान गढ़ी ने मानस की चौपाई का सन्दर्भ देकर कहा कि जिनकर मन इन सन नहिं राता। ते जनु बंचित किए बिधाता। जिनको श्रीराम जी से प्रेम नहीं वे अभागे हैं। हमें हमारे जीवन में ही श्री रामजन्मभूमि मन्दिर दर्शन प्राप्त हुआ। इसके लिए संघ और विहिप के विचार परिवार को साधुवाद ।

    श्री राजकुमार दासजी महाराज अधिकारी श्रीरामवल्लभा कुंज ने आह्वान करते हुए कहा कि हमें सनातन विरोधियों के बहकावे में नहीं जाना चाहिए। हमें सनातन के मान बिन्दुओं की सदैव रक्षा हेतु अग्रसर रहना चाहिए। हमने रामविरोधी विचारधारा का समय भी देखा है। संगठन ने समाज को जोड़ा है। मिथ्या आरोप से बचने की आवश्यकता है। जो चोर हैं वे सलाखों के पीछे हैं। हमे भ्रामक प्रचार से बचना चाहिए।

    आचार्य मिथिलेशनन्दिनीशरण जी श्री सिद्धपीठ श्री हनुमंत निवास ने कहा कि कहीं अग्निकांड होने पर यह पता किया जाता है कि अग्निशमन मन्त्र काम कर रहा था या नहीं। हिन्दू विरोधी शक्तियाँ सतत सक्रिय हैं। जब यह प्रवाद फैला तो तत्काल हम उसके प्रतिकार में सामने नहीं आ सके। जिससे मिथ्या प्रचार को बढ़ावा मिला। दुष्प्रचार से पूर्व हमें दृढता से प्रतिवाद करना था। उन्होंने हाल ही मे दिये अनुपम खेर के वक्तव्य का उल्लेख करते हुये कहा कि “चोरी होने पर हम चोर पकड़े जाते हैं, मालिक को नहीं। परन्तु राममन्दिर में सेवादारों पर ही आरोप लागाने का नाटक हो रहा है।” हमें छद्मवेश वाले धूत्तों से सावधान रहते हुए प्रवाद से बचना चाहिए। दान की वस्तु दाता की नहीं रह जाती, वह पानेवाले की हो जाती है। किन्तु दुष्प्रचार के कारण दाताओं का चित्त व्याकुल हो गया वे हिसाब माँगने का पाप करने लगे। असल में प्रतिकूलता केवल बल का नहीं, बल्कि विवेक का भी हरण करती है। सन्त श्रीरामजी की मर्यादाओं का अनुसरण करते हैं। धार्मिक समिति बनने से पूजा पद्धति में सुचारुता आयेगी। मीडिया को भाव और वेष का अन्तर नहीं पता है। वे बस कंटेंट खोजते हैं। एक नैरेटिव-वार चल रहा है। उसकी पहचान होनी आवश्यक है। हमे अयोध्या के स्वरूप की रक्षा हेतु सम-सामयिक विषयों पर मासिक बैठक कर विचार-विमर्श करना चाहिए। अयोध्या का एक स्वर होना होना चाहिए। राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में अयोध्या का पक्ष रखते हुए हमें भ्रमित नहीं होना चाहिए।

    महान्त कमलनयन दासजी महाराज श्री मणिरामदास छावनी ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि जो हमेशा न्यायालय में रामजी विरोध में साक्ष्य देते थे, वही आज राममन्दिर में चोरी के प्रति चिन्तित हैं। चोरी नहीं हुई, विश्वासघात हुआ है। उन सभी को इसका परिणाम भुगतना पड़ेगा। समय के साथ दूध का दूध और पानी का पानी होगा। समय आ गया है, हमें दुष्प्रचार पर ध्यान देकर बचना और बचाना है। विदेशों से दुष्प्रचार और सनतान की असुरक्षा हेतु फण्डिंग हो रही है। हमें संगठित होकर, विचार-विमर्श करके कुचक्र को विफल करन होगा।

    श्रीरामजन्मभूमि में सामने आये चोरी के प्रकरण को लेकर देश भर में फैले दुष्प्रचार का पूज्य सन्तों ने पुरजोर प्रतिवाद किया। इस बारे में मीडिया/सोशल मीडिया में अनर्गल प्रलाप करने वाले वक्ताओं को आड़े हाथों लिया। संगोष्ठी में अयोध्या की एकता और सद्भाव का आह्वान करते हुए सन्तों ने मिथ्यारोप लगाने वालों को पहचानने और उनका बहिष्कार करने की बात भी कही। इस विशाल सन्त-सभा में सैकडौं सन्त-महान्त सम्मिलित हुए।

  • 77 लाख लोगों ने अपनाया FASTag एनुअल पास, डिजिटल टोल सिस्टम की बढ़ी रफ्तार, जल्द आएगी AI आधारित नई तकनीक

    77 लाख लोगों ने अपनाया FASTag एनुअल पास, डिजिटल टोल सिस्टम की बढ़ी रफ्तार, जल्द आएगी AI आधारित नई तकनीक

    नई दिल्ली। देश में राष्ट्रीय राजमार्गों पर डिजिटल टोल भुगतान व्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है और FASTag एनुअल पास की लोकप्रियता भी तेजी से बढ़ रही है। सरकार के अनुसार पिछले 11 महीनों में 77 लाख से अधिक FASTag एनुअल पास जारी किए जा चुके हैं। इन पासों के माध्यम से 63 करोड़ से अधिक टोल लेनदेन दर्ज किए गए हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि निजी वाहन चालकों के बीच यह सुविधा तेजी से स्वीकार की जा रही है। डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने और टोल प्लाजा पर भीड़ कम करने के उद्देश्य से शुरू की गई यह व्यवस्था अब राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।

    सरकार के मुताबिक कार, जीप और वैन श्रेणी के वाहनों द्वारा किए जाने वाले कुल इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन का लगभग 33 प्रतिशत हिस्सा केवल FASTag एनुअल पास के माध्यम से हो रहा है। राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन प्रणाली के तहत वर्तमान में राष्ट्रीय राजमार्गों पर लगभग 98 प्रतिशत टोल शुल्क FASTag के जरिए ही वसूला जा रहा है। इससे टोल भुगतान की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज, पारदर्शी और सुविधाजनक बनी है।

    FASTag एनुअल पास विशेष रूप से निजी कार, जीप और वैन मालिकों के लिए उपलब्ध कराया गया है। इसकी कीमत 3,075 रुपये निर्धारित की गई है। यह पास एक वर्ष तक या अधिकतम 200 टोल क्रॉसिंग तक वैध रहता है। जो भी सीमा पहले पूरी होती है, उसी के अनुसार इसकी वैधता समाप्त हो जाती है। नियमित रूप से राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रा करने वाले वाहन चालकों के लिए यह सुविधा समय और प्रक्रिया दोनों के लिहाज से उपयोगी मानी जा रही है।

    सरकार का कहना है कि FASTag नेटवर्क को बहु-स्तरीय डिजिटल सुरक्षा प्रणाली के साथ संचालित किया जा रहा है। इसमें टोल प्रबंधन प्रणाली, अधिग्रहण बैंक, भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) तथा FASTag जारी करने वाले बैंक आपस में समन्वित रूप से कार्य करते हैं। प्रत्येक टोल लेनदेन का डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाता है और भुगतान होते ही वाहन मालिक के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर तुरंत सूचना भेजी जाती है। किसी भी प्रकार की शिकायत के समाधान के लिए प्रभावी शिकायत निवारण व्यवस्था भी विकसित की गई है।

    सरकार भविष्य में टोल संग्रह प्रणाली को और आधुनिक बनाने की दिशा में भी काम कर रही है। इसके तहत मल्टी लेन फ्री फ्लो (MLFF) तकनीक लागू करने की तैयारी चल रही है। इस प्रणाली में ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित विश्लेषण और RFID तकनीक का उपयोग किया जाएगा। नई व्यवस्था लागू होने के बाद वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकने या गति कम करने की आवश्यकता नहीं होगी। कैमरा और सेंसर वाहन की पहचान कर संबंधित खाते से स्वतः टोल शुल्क काट देंगे।

    विशेषज्ञों का मानना है कि नई तकनीक लागू होने से टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी कतारों में कमी आएगी, यात्रा का समय बचेगा, ईंधन की खपत कम होगी और सड़क परिवहन व्यवस्था अधिक सुचारु बनेगी। साथ ही डिजिटल भुगतान और टोल संग्रह प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ने के साथ राजमार्गों पर यात्रा करने वाले लाखों लोगों को अधिक सुविधाजनक और निर्बाध सफर का अनुभव मिलेगा।

  • संसद परिसर में NDA और विपक्ष आमने-सामने, जमकर हुई नारेबाजी, दोनों सदनों की कार्यवाही कल तक स्थगित

    संसद परिसर में NDA और विपक्ष आमने-सामने, जमकर हुई नारेबाजी, दोनों सदनों की कार्यवाही कल तक स्थगित


    नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के चौथे दिन गुरुवार को संसद भवन परिसर के बाहर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव खुलकर सामने आया। एक ओर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव सहित इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया, तो दूसरी ओर एनडीए सांसद भी विरोध दर्ज कराने के लिए मैदान में उतर आए। दोनों पक्षों के बीच जमकर नारेबाजी हुई और माहौल काफी देर तक गर्म रहा।

    एनडीए सांसद 21 जुलाई को प्रधानमंत्री आवास के बाहर राहुल गांधी द्वारा दिए गए धरने का विरोध कर रहे थे, जबकि इंडिया ब्लॉक के सांसद NEET पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे।

    प्रदर्शन के दौरान प्रियंका गांधी वाड्रा नारे लगाते हुए एनडीए सांसदों के काफी करीब पहुंच गईं। स्थिति को देखते हुए सुरक्षाकर्मियों ने तत्काल बीच में आकर उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया, जिससे किसी तरह की टकराव की स्थिति नहीं बनने पाई।

    संसद के भीतर भी दोनों सदनों में विपक्ष के हंगामे के कारण कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी। लगातार शोर-शराबे के चलते पहले लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित की गई। दोपहर बाद सदन की बैठक शुरू होते ही फिर से हंगामा शुरू हो गया, जिसके बाद लोकसभा की कार्यवाही शुक्रवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

    उधर, राज्यसभा की कार्यवाही भी पहले दोपहर 3 बजे तक रोकी गई थी। दोबारा बैठक शुरू होने पर विपक्षी सांसदों ने फिर विरोध प्रदर्शन किया, जिसके चलते सभापति ने राज्यसभा की कार्यवाही भी शुक्रवार, 24 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दी।

  • NEET मुद्दे पर जंतर-मंतर बना देशभर के छात्रों का मंच, भोजन-पानी से लेकर समर्थन तक कई हाथ आए साथ

    NEET मुद्दे पर जंतर-मंतर बना देशभर के छात्रों का मंच, भोजन-पानी से लेकर समर्थन तक कई हाथ आए साथ

    नई दिल्ली । राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) से जुड़े मुद्दों को लेकर राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों का विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है। आंदोलन में देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे छात्र शामिल हैं, जो परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, पेपर लीक की घटनाओं पर सख्त कार्रवाई और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शन स्थल पर अलग-अलग राज्यों से आए युवाओं की मौजूदगी ने इसे विविधता और सहभागिता का प्रतीक बना दिया है।

    धरनास्थल पर मौजूद छात्रों का कहना है कि उनका आंदोलन केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की पूरी भर्ती और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग से जुड़ा है। उनका मानना है कि यदि परीक्षा प्रक्रिया निष्पक्ष और भरोसेमंद होगी तो लाखों युवाओं का भविष्य अधिक सुरक्षित होगा। इसी उद्देश्य से वे कठिन परिस्थितियों के बावजूद लगातार प्रदर्शन में शामिल हैं।

    गर्मी और उमस के बीच जंतर-मंतर पर बने अस्थायी शिविरों में बड़ी संख्या में छात्र दिन-रात डटे हुए हैं। प्रदर्शन में शामिल कई छात्र विभिन्न राज्यों से लंबी यात्रा कर दिल्ली पहुंचे हैं। उनका कहना है कि सीमित संसाधनों और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद वे अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हैं। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, यह संघर्ष शिक्षा व्यवस्था में सुधार और युवाओं के अधिकारों से जुड़ा हुआ है।

    धरने के दौरान स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों और स्वयंसेवकों की ओर से भी लगातार सहयोग किया जा रहा है। कई लोग प्रदर्शनकारियों के लिए भोजन, पेयजल और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध करा रहे हैं। छात्रों का कहना है कि इस सहयोग से उन्हें आंदोलन जारी रखने का मनोबल मिलता है और यह दर्शाता है कि समाज के विभिन्न वर्ग भी उनकी मांगों के प्रति संवेदनशील हैं।

    प्रदर्शन स्थल पर अपनी बात रखने के लिए विशेष बोर्ड भी लगाए गए हैं, जहां छात्र अपनी मांगों और सुझावों को लिखकर साझा कर रहे हैं। इनमें परीक्षा प्रणाली में सुधार, पारदर्शी चयन प्रक्रिया, तकनीकी प्रशिक्षण और शिक्षा क्षेत्र में संरचनात्मक बदलाव जैसी मांगें प्रमुख रूप से सामने आ रही हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल विरोध दर्ज कराना नहीं, बल्कि सुधार के लिए ठोस सुझाव देना भी है।

    आंदोलन में शामिल कई छात्रों ने बताया कि उनके परिवारों की राय अलग-अलग रही, लेकिन उन्होंने अपने स्तर पर इस अभियान का हिस्सा बनने का निर्णय लिया। उनका कहना है कि यह केवल व्यक्तिगत भविष्य का नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर शिक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने का प्रयास है। इसी भावना के साथ देश के विभिन्न हिस्सों से छात्र जंतर-मंतर पहुंच रहे हैं।

    इसी बीच कुछ स्थानीय परिवार भी प्रदर्शनकारियों की सहायता के लिए आगे आए हैं। कई लोग अपने घरों से भोजन तैयार कर छात्रों तक पहुंचा रहे हैं। स्वयंसेवकों का कहना है कि कठिन परिस्थितियों में बैठे छात्रों की सहायता करना सामाजिक जिम्मेदारी का हिस्सा है। इस सहयोग को प्रदर्शनकारी भी आंदोलन की बड़ी ताकत मान रहे हैं।

    जंतर-मंतर पर जारी आंदोलन के समानांतर सरकार और CJP के बीच बातचीत की प्रक्रिया भी चल रही है। हालांकि अब तक किसी अंतिम सहमति की घोषणा नहीं हुई है। प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर कायम हैं, जबकि बातचीत के माध्यम से समाधान तलाशने की कोशिश जारी है। फिलहाल धरना शांतिपूर्ण ढंग से जारी है और छात्र अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन स्थल पर डटे हुए हैं।

  • बातचीत को तैयार सरकार, चार बार भेजा न्योता, CJP बोली- जंतर-मंतर आएं, नड्डा के घर नहीं जाएंगे

    बातचीत को तैयार सरकार, चार बार भेजा न्योता, CJP बोली- जंतर-मंतर आएं, नड्डा के घर नहीं जाएंगे


    नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में चल रहे छात्र आंदोलन के बीच केंद्र सरकार ने बातचीत की इच्छा जताई है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने गुरुवार को कहा कि सरकार किसी भी समय वार्ता के लिए तैयार है और पिछले 24 घंटे में CJP को भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के आवास या कार्यालय में चर्चा के लिए चार बार आमंत्रित किया गया, लेकिन संगठन ने सभी प्रस्ताव अस्वीकार कर दिए।

    CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में बातचीत करना चाहती है तो उसके प्रतिनिधि जंतर-मंतर आएं या किसी तटस्थ स्थान पर बैठक करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन किसी राजनीतिक नेता के घर या कार्यालय में बातचीत के लिए नहीं जाएगा।

    इधर, प्रदर्शन को देखते हुए नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन (NDTA) ने कनॉट प्लेस स्थित दुकानों, दफ्तरों और रेस्तरां संचालकों से गुरुवार शाम 6:30 बजे तक प्रतिष्ठान बंद रखने की अपील की है।

    जंतर-मंतर पर CJP के नेतृत्व में छात्रों का आंदोलन 20 जून से लगातार जारी है। प्रदर्शनकारी NEET पेपर लीक मामले में जवाबदेही तय करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। आंदोलन से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक 28 जून से अनिश्चितकालीन अनशन पर हैं और फिलहाल गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती होकर उपचार करा रहे हैं।

    इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को पेपर लीक मामलों पर कड़ा रुख अपनाते हुए घोषणा की कि दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और देश के युवाओं का भविष्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

    प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब CJP का प्रदर्शन 34वें दिन में प्रवेश कर चुका है। वहीं, सोनम वांगचुक का अनशन भी 26 दिन से जारी है और उनका इलाज मेदांता अस्पताल में चल रहा है।

    धरनास्थल पर देशभर से लोगों का समर्थन भी देखने को मिल रहा है। प्रदर्शनकारियों के लिए विभिन्न राज्यों से भोजन भेजा जा रहा है, जबकि छात्राओं की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सैनिटरी पैड जैसी आवश्यक सामग्री भी पहुंचाई जा रही है। वहीं, प्रदर्शन स्थल पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी देखने को मिल रही हैं।

  • CJP प्रदर्शन के बीच वायरल दावे पर दिल्ली पुलिस का स्पष्टीकरण, NSA डिटेंशन शक्तियों की खबर को बताया भ्रामक

    CJP प्रदर्शन के बीच वायरल दावे पर दिल्ली पुलिस का स्पष्टीकरण, NSA डिटेंशन शक्तियों की खबर को बताया भ्रामक

    नई दिल्ली । राजधानी दिल्ली में जारी CJP प्रदर्शन के बीच सोशल मीडिया पर एक दावा तेजी से वायरल हुआ, जिसमें कहा गया कि विरोध प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली पुलिस आयुक्त को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत विशेष डिटेंशन की शक्तियां प्रदान की गई हैं। इस दावे के व्यापक प्रसार के बाद दिल्ली पुलिस ने आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करते हुए इसे भ्रामक बताया और लोगों से केवल प्रमाणित जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है।

    दिल्ली पुलिस ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि जिस आदेश का हवाला देकर सोशल मीडिया पर दावे किए जा रहे हैं, वह किसी विशेष प्रदर्शन या मौजूदा घटनाक्रम से संबंधित नहीं है। पुलिस के अनुसार यह आदेश नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसे निर्धारित अंतराल पर जारी किया जाता है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि संबंधित आदेश 7 जुलाई को जारी किया गया था और इसकी प्रभावी अवधि 19 जुलाई से 18 अक्टूबर तक निर्धारित है।

    पुलिस का कहना है कि यह आदेश CJP के विरोध प्रदर्शन शुरू होने से पहले ही जारी किया जा चुका था। इसलिए इसे वर्तमान प्रदर्शन या किसी विशेष कार्रवाई से जोड़ना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है। दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया कि इस संबंध में कोई नया या विशेष आदेश जारी नहीं किया गया है और वायरल दावों का वास्तविक स्थिति से कोई संबंध नहीं है।

    पुलिस ने नागरिकों से अपील की कि सोशल मीडिया पर प्रसारित किसी भी सूचना को बिना सत्यापन के साझा न करें। अधिकारियों ने कहा कि अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं से भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इसलिए लोगों को केवल आधिकारिक माध्यमों से जारी जानकारी पर ही भरोसा करना चाहिए। पुलिस ने यह भी कहा कि किसी भी संवेदनशील विषय पर गलत जानकारी का प्रसार कानून-व्यवस्था की स्थिति को प्रभावित कर सकता है।

    इधर राजधानी में CJP का विरोध प्रदर्शन जारी है और कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों तथा पुलिस के बीच तनाव की स्थिति भी देखने को मिली है। प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल की तैनाती जारी है। प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखते हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार और सार्वजनिक सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है।

    इस बीच केंद्र सरकार और CJP प्रतिनिधियों के बीच बातचीत का सिलसिला भी जारी है। दोनों पक्षों के बीच अब तक कई दौर की चर्चा हो चुकी है, हालांकि अभी किसी अंतिम सहमति की घोषणा नहीं हुई है। सरकार का कहना है कि संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की कोशिश जारी रहेगी, जबकि CJP ने अपने रुख को लेकर अलग बयान दिया है।

    राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनी हुई है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दावों और वीडियो के बीच प्रशासन बार-बार लोगों से संयम बरतने और अपुष्ट सूचनाओं से बचने की अपील कर रहा है। विशेषज्ञों का भी मानना है कि संवेदनशील परिस्थितियों में केवल आधिकारिक और सत्यापित जानकारी पर भरोसा करना ही अफवाहों को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है।

    दिल्ली पुलिस ने दोहराया है कि वायरल दावे और वास्तविक प्रशासनिक आदेश अलग-अलग विषय हैं। ऐसे में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक स्पष्टीकरण को प्राथमिकता देना आवश्यक है, ताकि गलत सूचना के प्रसार को रोका जा सके और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित न हो।