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  • 11 हजार की नौकरी, 5 मकान और SUV का मालिक! PNB के 17.29 करोड़ के जाली नोट कांड में संविदा कर्मचारी पर शक

    11 हजार की नौकरी, 5 मकान और SUV का मालिक! PNB के 17.29 करोड़ के जाली नोट कांड में संविदा कर्मचारी पर शक

    सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के करेंसी चेस्ट से मिले 17.29 करोड़ रुपये के जाली नोटों के मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, नए सवाल सामने आ रहे हैं। अब बैंक का एक संविदा कर्मचारी जांच एजेंसियों के रडार पर है। महज 11 हजार रुपये मासिक वेतन पर ड्राइवर-लोडर के तौर पर काम करने वाले इस कर्मचारी की संपत्तियों ने जांच अधिकारियों का ध्यान खींचा है।

    जांच में सामने आया है कि कर्मचारी के पास पांच मकान, SUV और अपना ड्राइवर तक है। इसी वजह से उसकी आय और संपत्ति के बीच के अंतर को लेकर एजेंसियां पड़ताल कर रही हैं। इस मामले में करेंसी चेस्ट के निलंबित मैनेजर अमित कुमार को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) चंडीगढ़ से गिरफ्तार कर चुकी है।

    मैनेजर का PA बनकर करता था काम?

    सहारनपुर पुलिस और NIA की संयुक्त जांच में पता चला है कि संविदा कर्मचारी का आधिकारिक काम कैश वैन चलाने तथा कैश की लोडिंग-अनलोडिंग तक सीमित था। हालांकि, जांच एजेंसियों के मुताबिक वह करेंसी चेस्ट के भीतर मैनेजर अमित कुमार के पर्सनल असिस्टेंट (PA) की तरह काम करता था।

    बताया जा रहा है कि उसे मुख्य चेस्ट एरिया में बेरोकटोक आने-जाने की सुविधा हासिल थी। यही वजह है कि एजेंसियां अब उसकी भूमिका की बारीकी से जांच कर रही हैं।

    असली नोटों की जगह जाली करेंसी रखने का शक

    जांच का एक प्रमुख बिंदु यह है कि क्या करेंसी चेस्ट में रखे असली नोटों के बंडलों से रकम निकालकर उनकी जगह जाली नोट रखे गए थे। एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि यदि असली रकम चेस्ट से बाहर निकाली गई तो उसे ठिकाने लगाने में संविदा कर्मचारी की कोई भूमिका थी या नहीं।

    फिलहाल जांच एजेंसियां उसके खिलाफ मिले संपत्ति संबंधी इनपुट और करेंसी चेस्ट में उसकी पहुंच के बीच संबंध तलाश रही हैं।

    जाली नोटों का नेटवर्क कितना बड़ा?

    NIA अब इस सवाल का भी जवाब तलाश रही है कि करेंसी चेस्ट में इतनी बड़ी मात्रा में 500 रुपये के उच्च गुणवत्ता वाले जाली नोट आखिर कहां से पहुंचे। जांच एजेंसी इस संभावना को भी देख रही है कि कहीं इस पूरे मामले के पीछे कोई बड़ा सिंडिकेट या विदेशी नेटवर्क तो सक्रिय नहीं था।

    नेपाल सीमा से जुड़े किसी नेटवर्क की संभावित भूमिका को लेकर भी जांच की जा रही है। हालांकि, इस दिशा में जांच अभी जारी है और किसी निष्कर्ष पर पहुंचना बाकी है।

    बैंक शाखाओं और ATM तक तो नहीं पहुंचे नकली नोट?

    NIA और SIT के साथ RBI की संयुक्त ऑडिट टीम भी करेंसी चेस्ट से जुड़े रिकॉर्ड और नकदी के प्रवाह की जांच कर रही है। एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि बरामद जाली नोटों में से कोई हिस्सा पहले ही बैंक की दूसरी शाखाओं, ATM या बाजार में तो नहीं पहुंच गया।

    17.29 करोड़ रुपये की जाली करेंसी की बरामदगी के बाद अब जांच का फोकस सिर्फ करेंसी चेस्ट तक सीमित नहीं है। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल हैं और असली रकम तथा जाली नोटों की अदला-बदली किस तरीके से की गई।

  • शादी के लिए बांदा में आशिक का हाईवोल्टेज ड्रामा केन नदी के रेलवे पुल पर चढ़कर दी कूदने की धमकी पुलिस ने ऐसे संभाला मामला

    शादी के लिए बांदा में आशिक का हाईवोल्टेज ड्रामा केन नदी के रेलवे पुल पर चढ़कर दी कूदने की धमकी पुलिस ने ऐसे संभाला मामला


    उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश के बांदा में शादी की जिद को लेकर एक युवक ने ऐसा कदम उठा लिया जिसे देखकर मौके पर मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया। मटौंध थाना क्षेत्र के भूरागढ़ इलाके में करीब 20 वर्षीय युवक केन नदी के रेलवे पुल की लगभग 30 फीट ऊंची रेलिंग पर चढ़ गया और नीचे कूदने की धमकी देने लगा। युवक लगातार अपनी कथित प्रेमिका को मौके पर बुलाने की मांग कर रहा था। उसका कहना था कि अगर उसकी शादी लड़की से नहीं कराई गई तो वह पुल से छलांग लगा देगा। युवक के इस हाईवोल्टेज ड्रामे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और काफी देर तक उसे समझाने का प्रयास करती रही।

    बताया जा रहा है कि युवक लड़की से शादी करना चाहता था लेकिन लड़की इसके लिए तैयार नहीं थी। शादी को लेकर दोनों के बीच विवाद की स्थिति बनी हुई थी। इसी बात से नाराज होकर युवक रेलवे पुल की रेलिंग पर जा चढ़ा। राहगीरों ने जब उसे इतनी ऊंचाई पर खतरनाक स्थिति में देखा तो तुरंत पुलिस को सूचना दी। कुछ ही देर में पुलिस टीम मौके पर पहुंच गई और युवक को सुरक्षित नीचे उतारने के लिए बातचीत शुरू की।

    पुलिस ने युवक को काफी समझाया लेकिन वह नीचे आने को तैयार नहीं था। वह बार बार अपनी कथित प्रेमिका को बुलाने की मांग कर रहा था। युवक का कहना था कि लड़की को सामने लाया जाए और उससे शादी करा दी जाए। पुलिस ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उसकी मांग पर लड़की को मौके पर बुलाया। लड़की के पहुंचने के बाद पुलिस ने युवक को समझाया और किसी तरह उसे रेलिंग से नीचे उतार लिया। इसके बाद पुलिस ने राहत की सांस ली क्योंकि युवक काफी ऊंचाई पर खड़ा था और किसी भी तरह की जल्दबाजी गंभीर हादसे का कारण बन सकती थी।

    युवक के सुरक्षित नीचे उतरने के बाद मामले में एक और अहम मोड़ सामने आया। पुलिस के मुताबिक युवक के खिलाफ पहले से ही एक मुकदमा दर्ज था और वह पुलिस की नजर में वांछित चल रहा था। बताया गया कि लड़की की शिकायत पर उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 69 के तहत मामला दर्ज किया गया था। पुलिस पहले से ही उसकी गिरफ्तारी के प्रयास कर रही थी। ऐसे में पुल से नीचे उतारने के बाद पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया।

    अपर पुलिस अधीक्षक शिवराज के मुताबिक पुलिस को सूचना मिली थी कि केन नदी के भूरागढ़ इलाके में रेलवे पुल के ऊपर एक व्यक्ति चढ़ा हुआ है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और समझा बुझाकर युवक को सुरक्षित नीचे उतारा गया। युवक की पहचान विकास के रूप में हुई। पुलिस अधिकारी के अनुसार उसके खिलाफ पहले से अभियोग दर्ज था और विवेचना के दौरान उसके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य जुटाए गए थे। इसी आधार पर उसकी गिरफ्तारी की गई और उसे न्यायालय के समक्ष पेश करने की कार्रवाई की गई।

    पुलिस के अनुसार युवक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वीडियो बनाने का काम भी करता था। उसके खिलाफ दर्ज मामले में जांच जारी थी। पुल पर युवक के चढ़ने और पुलिस द्वारा उसे नीचे उतारने का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आ गया। घटना ने एक बार फिर दिखाया कि निजी रिश्तों से जुड़े विवाद में भावनात्मक दबाव और खतरनाक कदम कितनी बड़ी परेशानी खड़ी कर सकते हैं। फिलहाल पुलिस ने युवक को सुरक्षित नीचे उतारने के बाद कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

  • धमकियों के बीच कश्मीरी पंडित कर्मचारियों ने अमित शाह को लिखी चिट्ठी, सुरक्षा बढ़ाने और जांच की मांग उठाई

    धमकियों के बीच कश्मीरी पंडित कर्मचारियों ने अमित शाह को लिखी चिट्ठी, सुरक्षा बढ़ाने और जांच की मांग उठाई

    नई दिल्ली ।कश्मीर घाटी में प्रधानमंत्री पुनर्वास पैकेज के तहत काम कर रहे कश्मीरी पंडित कर्मचारियों ने बढ़ती धमकियों के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर सुरक्षा को लेकर तत्काल कदम उठाने की मांग की है। कर्मचारियों का कहना है कि वे करीब 15 वर्षों से घाटी में अपना जीवन दोबारा बसाने की कोशिश कर रहे हैं और मौजूदा परिस्थितियों में उन्हें फिर से विस्थापन की ओर धकेले जाने का डर सताने लगा है।

    ऑल PM पैकेज एम्प्लॉईज फोरम के अध्यक्ष सनी रैना ने पत्र के जरिए कश्मीरी हिंदू कर्मचारियों और उनके परिवारों की चिंताओं को सामने रखा है। उनका कहना है कि भले ही बाहर से हालात सामान्य दिखाई दें, लेकिन घाटी में रहने वाले परिवारों के बीच डर और तनाव बना हुआ है। कर्मचारियों को अपनी सुरक्षा के साथ बच्चों के भविष्य की भी चिंता है।

    कर्मचारियों ने कहा है कि हाल में सामने आ रही हर धमकी उन्हें 1990 के दशक की घटनाओं की याद दिलाती है। उनके मुताबिक उस दौर में भी धमकी भरे पत्र और नोटिस डर का माहौल बनाने के शुरुआती संकेत बने थे। इसके बाद बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडितों को घाटी छोड़नी पड़ी थी। अब नए धमकी भरे पत्रों के सामने आने से पुराना भय दोबारा गहराने लगा है।

    पिछले कुछ हफ्तों में प्रधानमंत्री पुनर्वास पैकेज के तहत तैनात कर्मचारियों को लगातार धमकियां मिलने की बात सामने आई है। कई पत्रों में सरकारी नौकरी छोड़ने का अल्टीमेटम दिए जाने और ऐसा नहीं करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी का उल्लेख है। इन धमकियों के पीछे यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल यानी ULC नाम के संगठन का नाम सामने आ रहा है।

    कर्मचारियों की चिंता केवल धमकी भरे पत्रों तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि निजी जानकारी ऑनलाइन लीक होने से भी असुरक्षा बढ़ी है। सोशल मीडिया पर कुछ कर्मचारियों के फोन नंबर, घर के पते और वाहनों के रजिस्ट्रेशन नंबर तक प्रसारित किए जाने की बात कही गई है। इससे घाटी में रहने वाले परिवारों की चिंता और बढ़ गई है।

    कर्मचारियों ने अपनी आवासीय स्थिति को लेकर भी चिंता जताई है। बड़ी संख्या में कर्मचारी अभी किराए के कमरों में रह रहे हैं। वहीं, जिन स्थानों पर ट्रांजिट कॉलोनियां बनाई गई हैं, वहां सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि पर्याप्त सुरक्षा के अभाव में वे खुद को खतरे के बीच महसूस कर रहे हैं।

    गृह मंत्री को भेजे गए पत्र में धमकियों की गंभीरता से जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है। कर्मचारियों ने PM पैकेज के तहत काम कर रहे लोगों, उनके परिवारों और आवासीय कॉलोनियों की सुरक्षा बढ़ाने की अपील की है। साथ ही सभी आवासों की सुरक्षा समीक्षा कराने की मांग रखी गई है।

    कर्मचारियों ने यह भी कहा है कि धमकी मिलने की स्थिति में शिकायत दर्ज कराने और समय पर सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। उनका स्पष्ट कहना है कि वे कश्मीर घाटी छोड़ना नहीं चाहते। पिछले 15 वर्षों में उन्होंने उस जीवन को फिर से खड़ा करने की कोशिश की है, जो कई दशक पहले उजड़ गया था।

    2022 में राहुल भट की हत्या के बाद भी घाटी में कार्यरत कश्मीरी पंडित कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठे थे। अब नई धमकियों के बाद उनकी चिंता फिर सामने आई है। कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें नौकरी और सुरक्षा में से किसी एक को चुनने के लिए मजबूर न किया जाए। वे घाटी में रहकर काम करना चाहते हैं, लेकिन इसके लिए सुरक्षित माहौल की मांग कर रहे हैं।

  • चित्रकूट की बाढ़ का सामने आया बड़ा कारण! नदी किनारे अवैध निर्माण और अव्यवस्थित विकास ने बदला मंदाकिनी का प्राकृतिक बहाव

    चित्रकूट की बाढ़ का सामने आया बड़ा कारण! नदी किनारे अवैध निर्माण और अव्यवस्थित विकास ने बदला मंदाकिनी का प्राकृतिक बहाव


    सतना । सतना जिले के चित्रकूट में लगातार हो रही बाढ़ ने एक बार फिर नदी और इंसानी बस्तियों के बीच बिगड़ते संतुलन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पांच दिनों के भीतर तीन बार आई बाढ़ के बाद अब अतिक्रमण अव्यवस्थित विकास और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या मंदाकिनी नदी का प्राकृतिक रास्ता निर्माण और अतिक्रमण की वजह से इतना संकरा हो गया है कि बारिश का पानी अपना रास्ता छोड़कर घरों और दुकानों में पहुंचने लगा है। 29 अगस्त को आई भीषण बाढ़ से चित्रकूट में 500 करोड़ रुपये से ज्यादा के नुकसान का अनुमान सामने आया है। वहीं करीब 1000 करोड़ लीटर पानी के घरों और दुकानों में घुसने का दावा किया गया है।

    पर्यावरणविद और प्रोफेसर घनश्यामदास गुप्ता के आकलन के अनुसार चित्रकूट क्षेत्र में मंदाकिनी नदी करीब पांच किलोमीटर तक बहती है। नदी के दोनों किनारों पर लगभग 100 मीटर के दायरे में निर्माण और अतिक्रमण होने की बात सामने आई है। यदि दोनों तरफ के इस क्षेत्र को जोड़ा जाए तो करीब 10 लाख वर्ग मीटर का क्षेत्र बनता है। विशेषज्ञ के अनुसार यदि यहां पानी के फैलाव के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध होती तो बड़ी मात्रा में पानी को समाने की क्षमता रहती। लेकिन निर्माण और अतिक्रमण ने नदी के प्राकृतिक फैलाव को सीमित कर दिया है जिससे तेज बारिश के दौरान पानी के लिए रास्ता कम पड़ने लगा।

    मंदाकिनी के किनारे अतिक्रमण का मामला नया नहीं है। जबलपुर हाईकोर्ट के अधिवक्ता नित्यानंद मिश्रा के अनुसार एनजीटी ने वर्ष 2014 के बाद 2016 और 2018 में भी जिला प्रशासन को सरयू और मंदाकिनी के किनारे 100 मीटर के दायरे में बने भवनों का सर्वे कराने के निर्देश दिए थे। 1980 के बाद बने निर्माणों को ग्रीन बेल्ट के उल्लंघन के रूप में चिह्नित कर कार्रवाई करने की बात भी सामने आई थी। शुरुआती दौर में कुछ निर्माण हटाए गए लेकिन बाद में कार्रवाई की रफ्तार धीमी पड़ गई।

    चित्रकूट की जल समस्या सिर्फ मंदाकिनी तक सीमित नहीं है। यहां कभी मंदाकिनी पयस्वनी और सरयू के संगम की धार्मिक और ऐतिहासिक मान्यता रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार पयस्वनी और सरयू अब अपने पुराने स्वरूप में नहीं हैं। अतिक्रमण प्रदूषण और बढ़ते निर्माण ने इन जलधाराओं की स्थिति को प्रभावित किया है। राघवप्रयाग घाट के आसपास भी नालों के जरिए गंदा पानी मंदाकिनी में पहुंचने की शिकायतें सामने आती रही हैं।

    मंदाकिनी संरक्षण के लिए करीब 24.62 करोड़ रुपये का रिवर फ्रंट प्रोजेक्ट भी सवालों के घेरे में है। आरोग्यधाम के पास 600 मीटर लंबी और सात मीटर ऊंची प्रोटेक्शन वॉल बनाई गई थी। कुछ लोगों का आरोप है कि इस निर्माण से नदी के प्राकृतिक बहाव पर असर पड़ा। हालांकि इस संबंध में लगाए गए आरोपों की प्रशासनिक जांच जरूरी होगी।

    बाढ़ के बाद मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी नदी के प्राकृतिक प्रवाह को लेकर चिंता जताई है। सीएम डॉ. मोहन यादव ने नदी किनारे अतिक्रमण का रिकॉर्ड तैयार कराने की बात कही है जबकि यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने नदी को उसके स्वाभाविक प्रवाह के लिए पर्याप्त जगह देने की जरूरत बताई है।

    अब मंदाकिनी के किनारे हुए निर्माणों की जांच के लिए पांच सदस्यीय टीम गठित की गई है। मझगवां एसडीएम के नेतृत्व वाली टीम में नगर परिषद के अधिकारी नायब तहसीलदार पीडब्ल्यूडी और जल संसाधन विभाग के अधिकारी शामिल हैं। टीम नदी के प्राकृतिक प्रवाह में बाधा डालने वाले सरकारी और निजी निर्माणों को चिह्नित करेगी और नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही मंदाकिनी के हाई फ्लड लेवल को भी नए सिरे से चिन्हित किया जाएगा। 28 और 29 अगस्त की रात नदी का जलस्तर निर्धारित 139.60 मीटर के मुकाबले करीब 145.76 मीटर तक पहुंच गया था। अब सवाल सिर्फ बाढ़ का नहीं बल्कि यह है कि मंदाकिनी को उसका पुराना रास्ता और फैलाव वापस कैसे मिले।

  • किसानों को घटिया बीज से बचाने की तैयारी, नए कानून में QR कोड, राष्ट्रीय रजिस्टर और 30 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रस्ताव

    किसानों को घटिया बीज से बचाने की तैयारी, नए कानून में QR कोड, राष्ट्रीय रजिस्टर और 30 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रस्ताव


    नई दिल्ली ।
    किसानों को नकली और घटिया गुणवत्ता वाले बीजों से बचाने के लिए केंद्र सरकार नया बीज अधिनियम लाने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित कानून के जरिए करीब 60 साल पुराने मौजूदा कानूनी ढांचे में बदलाव किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य बीजों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने, कारोबार में पारदर्शिता बढ़ाने और नकली बीजों के कारोबार पर प्रभावी कार्रवाई के लिए मजबूत व्यवस्था तैयार करना है।

    प्रस्तावित कानून में बीज से जुड़े उल्लंघनों को तीन श्रेणियों में बांटने की योजना है। मामूली उल्लंघन करने वालों के लिए पहली बार चेतावनी और दोबारा उल्लंघन पर जुर्माने का प्रावधान प्रस्तावित है। जानबूझकर किए गए उल्लंघनों में बीज के पैकेट पर QR कोड नहीं लगाना, जरूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराना और गलत ब्रांडिंग जैसे मामले शामिल किए जाने का प्रस्ताव है।

    ऐसे मामलों में आर्थिक दंड का प्रावधान भी रखा गया है। उपलब्ध प्रस्ताव के अनुसार, कुछ उल्लंघनों के लिए पहली बार 1 लाख रुपये और दूसरी बार 2 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। वहीं गंभीर अपराधों को तीसरी श्रेणी में रखा गया है। इसमें नकली बीज बेचना, बिना पंजीकरण कारोबार करना और जानबूझकर धोखाधड़ी जैसे मामले शामिल हैं। गंभीर उल्लंघनों के लिए 30 लाख रुपये तक का जुर्माना और जेल की सजा का प्रस्ताव है।

    प्रस्तावित कानून के तहत सभी बीज और रोपण सामग्री का राष्ट्रीय रजिस्टर में पंजीकरण अनिवार्य किया जाएगा। बिना पंजीकरण वाले बीजों को अवैध माना जाएगा और उन्हें बाजार में बेचने की अनुमति नहीं होगी। प्रत्येक बीज पैकेट पर QR कोड लगाने का भी प्रस्ताव है। इसके जरिए किसान बीज की उत्पत्ति, निर्माता, प्रयोगशाला से मिली मंजूरी और आपूर्ति श्रृंखला में उसकी आवाजाही से जुड़ी जानकारी हासिल कर सकेंगे।

    सरकार का तर्क है कि मौजूदा व्यवस्था में लगभग 70 प्रतिशत बीज कानून के दायरे से बाहर हैं। अलग-अलग राज्यों में बीजों से जुड़ी प्रक्रियाएं भी अलग हैं और मौजूदा कानून में दंड के प्रावधान पर्याप्त नहीं माने जा रहे हैं। इसी वजह से नकली और खराब गुणवत्ता वाले बीजों के खिलाफ अधिक प्रभावी कार्रवाई के लिए नए कानून की जरूरत बताई गई है।

    प्रस्तावित कानून में किसानों के पारंपरिक बीज अधिकार सुरक्षित रखने की बात कही गई है। किसान पारंपरिक और किसान किस्म के बीजों का इस्तेमाल, आदान-प्रदान और बिक्री पहले की तरह कर सकेंगे। ऐसे पारंपरिक बीजों का पंजीकरण अनिवार्य नहीं होगा। व्यक्तिगत उपयोग, गांव में वितरण या किसी कंपनी के लिए बीज तैयार करने वाले किसानों के लिए डिजिटल पंजीकरण भी जरूरी नहीं होगा।

    नए कानून में ट्रेसबिलिटी को अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य बीज फेल होने की स्थिति में जिम्मेदारी तय करना है। सभी बीज किस्मों को एकीकृत राष्ट्रीय ऑनलाइन रजिस्टर में दर्ज किया जाएगा। राज्य सरकारों को राज्य स्तरीय समितियों की सिफारिश के आधार पर नई बीज किस्में जारी करने का अधिकार देने का भी प्रस्ताव है।

    किसानों के नुकसान की स्थिति में प्रत्येक राज्य में सीड सिक्योरिटी फंड बनाने का प्रावधान प्रस्तावित है। बीज फेल होने पर सत्यापन समिति जांच करेगी और किसान को 15 दिनों के भीतर मुआवजा देने की व्यवस्था का प्रस्ताव है।

    मौजूदा बीज अधिनियम 1966 में बनाया गया था, जबकि बीज नियंत्रण आदेश 1983 में लागू हुआ था। सरकार ने प्रस्तावित नए कानून पर पिछले साल सुझाव मांगे थे और करीब 18,000 सुझाव प्राप्त हुए। 10 सितंबर को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने 20 किसान संगठनों के साथ परामर्श किया। सरकार के अनुसार, प्रस्तावित सीड बिल संसद के शीतकालीन सत्र में लाया जा सकता है।

  • मोदी-पुतिन बैठक में रक्षा और व्यापार पर फोकस, Su-57, S-400 और ब्रह्मोस-NG सहयोग पर चर्चा की उम्मीद

    मोदी-पुतिन बैठक में रक्षा और व्यापार पर फोकस, Su-57, S-400 और ब्रह्मोस-NG सहयोग पर चर्चा की उम्मीद

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच भारत मंडपम में अहम बैठक हो रही है। दोनों नेताओं की मुलाकात के दौरान भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर बातचीत जारी है। बैठक में दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद हैं। बातचीत का दायरा रक्षा सौदों के अलावा व्यापार, उद्योग, परमाणु ऊर्जा और रोजगार से जुड़े क्षेत्रों तक रहने की संभावना है।

    मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और व्लादिमीर पुतिन ने एक-दूसरे से गले मिलकर अभिवादन किया। इसके बाद दोनों देशों के बीच सहयोग से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा शुरू हुई। रक्षा क्षेत्र में Su-57 फाइटर जेट, S-400 की बाकी खेप और एडवांस ब्रह्मोस-NG जैसे विषयों पर बातचीत होने की संभावना जताई जा रही है।

    रूस की ओर से भारत में Su-57 फाइटर जेट के उत्पादन और इससे जुड़ी जरूरी तकनीक साझा करने की पेशकश पर भी समझौते की उम्मीद है। Su-57 को एडवांस स्टेल्थ फाइटर जेट के तौर पर पेश किया गया है। इस विमान की क्षमताओं को लेकर भी बातचीत में चर्चा होने की संभावना है।

    भारत-रूस संबंधों में रक्षा सहयोग के अलावा आर्थिक और औद्योगिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के मुद्दे भी महत्वपूर्ण रहेंगे। दोनों देशों के बीच उद्योग, रेलवे, स्टील और टनलिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा संभव है। इसके साथ भारतीय कंपनियों के लिए रूसी बाजार में अधिक अवसर उपलब्ध कराने के विषय पर भी बातचीत हो सकती है।

    परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना भी बैठक के संभावित एजेंडे में शामिल है। इसके अलावा महत्वपूर्ण खनिजों, कुशल कामगारों और उर्वरक से जुड़े क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करने पर विचार किया जा सकता है। खनिजों की खोज और उनकी आपूर्ति के क्षेत्र में साझेदारी बढ़ाने तथा नए संयुक्त प्रोजेक्ट शुरू करने पर भी चर्चा संभव है।

    व्यापारिक संबंधों को लेकर भी दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण बातचीत की संभावना है। भारत और रूस के बीच वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय कारोबार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य पर चर्चा हो सकती है। इसके लिए विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने और दोनों देशों की कंपनियों के लिए नए अवसर तैयार करने पर विचार किया जा सकता है।

    राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन गुरुवार देर रात भारत की राजधानी दिल्ली पहुंचे थे। उनके आगमन पर एयरपोर्ट पर विदेश राज्य मंत्री केवी सिंह ने उनका स्वागत किया था। इसके बाद अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति के बीच भारत मंडपम में बैठक हो रही है।

    बैठक में रक्षा सहयोग से जुड़े प्रस्तावों के साथ आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी के विभिन्न पहलुओं पर बातचीत पर नजर है। Su-57, S-400 और ब्रह्मोस-NG जैसे रक्षा विषयों के अलावा उद्योग, रेलवे, स्टील, टनलिंग, परमाणु ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, उर्वरक और कुशल कामगारों से जुड़े संभावित सहयोग पर भी चर्चा होने की संभावना है। दोनों देशों के बीच व्यापार को 2030 तक 100 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य भी बातचीत के प्रमुख मुद्दों में शामिल हो सकता है।

  • Jhansi: बड़ागांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खुद ही समस्या से जूझ रहा, जलभराव के कारण मरीज परेशान

    Jhansi: बड़ागांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खुद ही समस्या से जूझ रहा, जलभराव के कारण मरीज परेशान


    झांसी। बड़ागांव का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) इन दिनों खुद जलभराव की समस्या से जूझ रहा है। अस्पताल परिसर में करीब 20 दिन से पानी भरा है। इससे मरीजों और तीमारदारों को मुख्य गेट से ओपीडी और इमरजेंसी तक पहुंचने के लिए पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है। लंबे समय से पानी जमा होने के कारण मच्छरजनित और संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है।

    अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक, जलभराव की समस्या से जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को कई बार अवगत कराया जा चुका है। दो बार उच्च अधिकारियों और स्थानीय विधायक को भी इसकी जानकारी दी गई, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका है। ऐसे में जहां मरीजों का इलाज होना चाहिए, उसी अस्पताल परिसर को अपनी समस्या के ‘इलाज’ का इंतजार है।

    हर साल होती है जलभराव की समस्या

    सीएचसी के सीएमएस डॉ. वैभव पुरोहित ने बताया कि अस्पताल परिसर नीची जगह पर है। आसपास का क्षेत्र ऊंचाई पर होने के कारण हर साल यहां जलभराव की स्थिति बनती है। समस्या से उच्च अधिकारियों को अवगत कराया गया है। पिछले वर्ष भी स्थायी समाधान का आश्वासन मिला था, लेकिन अभी तक समस्या का समाधान नहीं हो सका।

    प्रसव पीड़ा में पानी से होकर अस्पताल पहुंची गर्भवती

    स्थानीय निवासी अनूपा जोशी ने बताया कि 8 सितंबर को उनकी बहू वंदना को प्रसव पीड़ा हुई। मध्यरात्रि करीब दो बजे वह उन्हें लेकर अस्पताल पहुंचीं। परिसर में पानी भरा देखकर परेशानी हुई, लेकिन प्रसव पीड़ा अधिक होने के कारण मजबूरी में बहू को पानी से होकर अस्पताल तक ले जाना पड़ा।

    वहीं, वृद्ध मरीज अशोक निरंजन ने बताया कि उम्र अधिक होने के कारण उन्हें उपचार के लिए सीएचसी जाना पड़ता है। कई दिनों से परिसर में पानी भरा होने के कारण ओपीडी तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। डॉक्टर ने फॉलोअप जांच के लिए बुलाया था, लेकिन जलभराव के कारण अस्पताल जाने में डर लग रहा है। पानी में गिरने या चोट लगने की आशंका बनी रहती है।

    मोटर से पानी निकालने की कोशिश, नहीं मिल रही सफलता

    सीएमओ डॉ. शिशिर पुरी ने बताया कि सीएचसी के आसपास का क्षेत्र ऊंचाई पर होने के कारण परिसर में जलभराव होता है। मोटर लगाकर पानी की निकासी कराई जा रही है, लेकिन इसमें ज्यादा सफलता नहीं मिल रही है। उन्होंने बताया कि समस्या से बीडीओ को अवगत कराकर इसके स्थायी निदान के लिए कहा गया है।

  • यूपी में बारिश से खराब सड़कों पर सीएम योगी सख्त, बोले- तत्काल मोटरेबल बनाएं, बरसात बाद कराएं नवीनीकरण

    यूपी में बारिश से खराब सड़कों पर सीएम योगी सख्त, बोले- तत्काल मोटरेबल बनाएं, बरसात बाद कराएं नवीनीकरण

    लखनऊ। बारिश और बाढ़ से क्षतिग्रस्त सड़कों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि बरसात अभी जारी है, इसलिए खराब सड़कों की फिलहाल मरम्मत कर उन्हें आवागमन के योग्य बनाया जाए। बारिश का मौसम खत्म होने के बाद जरूरत के अनुसार इनका स्थायी नवीनीकरण कराया जाए।

    शुक्रवार को लोक निर्माण विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी पर्व-त्योहारों के दौरान बड़ी संख्या में लोगों का आवागमन होगा। ऐसे में प्रमुख मार्गों पर लोगों को परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने बारिश से नए क्षतिग्रस्त मार्गों का लगातार सर्वे कराने और पर्वों से पहले जरूरी मरम्मत व नवीनीकरण पूरा करने के निर्देश दिए।

    681 प्रमुख मार्गों पर विशेष फोकस
    आगामी पर्वों को देखते हुए प्रदेश में 681 महत्वपूर्ण मार्ग चिन्हित किए गए हैं। इनमें गणेश चतुर्थी, विश्वकर्मा पूजा, नवरात्रि, दीपावली, छठ पूजा और कार्तिक पूर्णिमा के दौरान अधिक आवागमन वाले मार्ग शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने इन सड़कों को प्राथमिकता के आधार पर गड्ढामुक्त और बेहतर स्थिति में रखने के निर्देश दिए।

    उन्होंने कहा कि गड्ढामुक्ति अभियान केवल पैचवर्क तक सीमित नहीं रहना चाहिए। जहां तत्काल मरम्मत की जरूरत है, वहां पहले सड़क को आवागमन योग्य बनाया जाए और बरसात खत्म होने के बाद उसकी स्थिति के अनुसार स्थायी मरम्मत या नवीनीकरण कराया जाए।

    4.36 लाख किमी सड़कों की समीक्षा
    बैठक में बताया गया कि प्रदेश में नौ विभागों के अधीन करीब 4.36 लाख किलोमीटर मार्ग हैं। मौजूदा गड्ढामुक्ति अभियान के तहत करीब 50 हजार किलोमीटर सड़कों को बेहतर करने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें से अब तक करीब 5,751 किलोमीटर मार्गों पर काम पूरा हो चुका है।

    क्षतिग्रस्त सड़कों के सर्वे के बाद विभागवार लक्ष्य अंतिम रूप से तय किए जाएंगे। अधिकारियों ने बताया कि अतिवृष्टि के अलावा एक्सप्रेसवे, राष्ट्रीय राजमार्ग और रेलवे की निर्माणाधीन परियोजनाओं के चलते भारी वाहनों की आवाजाही से भी कई सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। इनका विभागवार सर्वे कराया जा रहा है।

    स्कूल-अस्पताल और बाजारों की सड़कें पहले सुधरें
    मुख्यमंत्री ने शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों, मुख्य बाजारों, सरकारी कार्यालयों और अधिक जन आवागमन वाले अन्य स्थानों की सड़कों को प्राथमिकता पर सुधारने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन स्थानों पर मरम्मत कार्य तत्काल शुरू कराया जाए और सड़क को बिना देरी आवागमन योग्य बनाया जाए। साथ ही काम में तेजी के साथ गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।

    30 हजार किमी सड़कों के नवीनीकरण का लक्ष्य
    नवीनीकरण और विशेष मरम्मत के कार्यों की भी समीक्षा की गई। विभाग के अनुसार करीब 30 हजार किलोमीटर सड़कों के नवीनीकरण और करीब 5 हजार किलोमीटर सड़कों की विशेष मरम्मत का लक्ष्य रखा गया है। अब तक नवीनीकरण के तहत करीब 14 हजार किलोमीटर और विशेष मरम्मत में करीब 700 किलोमीटर की प्रगति बताई गई है।

    कई विभागों की कार्ययोजना की समीक्षा
    मुख्यमंत्री ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अधिकारियों से भी कार्ययोजना की जानकारी ली। इसके अलावा मंडी परिषद, पंचायती राज, सिंचाई, ग्राम्य विकास, नगर विकास, आवास एवं शहरी नियोजन तथा अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग की कार्ययोजनाओं की समीक्षा की गई। उन्होंने सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए।

    बैठक में जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’, पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर, राज्य मंत्री लोक निर्माण विभाग ब्रजेश सिंह, राज्य मंत्री औद्योगिक विकास जसवंत सिंह सैनी, राज्य मंत्री जल शक्ति रामकेश निषाद और राज्य मंत्री ग्राम्य विकास विजय लक्ष्मी गौतम मौजूद रहे।

  • कुत्ता टहलाने के लिए स्टेडियम खाली कराने के मामले में रिंकू दुग्गा को झटका, सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने दिया आदेश

    कुत्ता टहलाने के लिए स्टेडियम खाली कराने के मामले में रिंकू दुग्गा को झटका, सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने दिया आदेश

    नई दिल्ली ।आईएएस अधिकारी रिंकू दुग्गा को त्यागराज स्टेडियम में कुत्ता टहलाने से जुड़े विवाद में सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी है, जिसमें केंद्र सरकार की ओर से दिए गए उनके अनिवार्य सेवानिवृत्ति के आदेश को खारिज करते हुए सेवा में बहाली का रास्ता साफ किया गया था।

    मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने केंद्र सरकार की ओर से दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दिए जाने के बाद रिंकू दुग्गा को नोटिस जारी किया है। पीठ में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के साथ न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल हैं।

    सुप्रीम कोर्ट की ओर से 7 सितंबर को जारी आदेश में कहा गया कि मामले की अगली सुनवाई तक संबंधित अधिकारी की बहाली पर रोक रहेगी। इस मामले में अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होने की बात कही गई है।

    यह विवाद वर्ष 2022 का है। रिंकू दुग्गा 1994 बैच की एजीएमयूटी कैडर की आईएएस अधिकारी हैं। उन पर आरोप लगा था कि दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम को इस वजह से खाली करवाया गया, ताकि वह वहां अपने कुत्ते को टहला सकें और उस दौरान दूसरे लोगों को स्टेडियम में आने की अनुमति न हो।

    इस घटनाक्रम के दौरान उनके पति संजीव खैरवार भी उनके साथ मौजूद थे। संजीव खैरवार भी आईएएस अधिकारी हैं। स्टेडियम से जुड़ी तस्वीर और घटना की रिपोर्ट सामने आने के बाद यह मामला चर्चा में आया और इसे लेकर विवाद खड़ा हुआ।

    बाद में केंद्र सरकार ने रिंकू दुग्गा को अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त कर दिया। इस फैसले को उन्होंने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण यानी सीएटी के समक्ष चुनौती दी। सीएटी ने उनके पक्ष में फैसला देते हुए सेवा बहाल करने का आदेश दिया था।

    इसके बाद मामला दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचा। हाई कोर्ट ने 15 अप्रैल 2026 को सीएटी के फैसले को बरकरार रखा। अदालत ने केंद्र सरकार के उस आदेश को स्वीकार नहीं किया, जिसके तहत रिंकू दुग्गा को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई थी। इसके बाद उनकी सेवा में बहाली का रास्ता खुल गया था।

    केंद्र सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने अब हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी है। शीर्ष अदालत ने मामले में रिंकू दुग्गा को नोटिस भी जारी किया है।

    इस मामले में केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी पेश हुईं। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल बहाली पर रोक लगाते हुए मामले को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।

    अब इस मामले में अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होगी। उस सुनवाई में केंद्र की चुनौती और रिंकू दुग्गा की सेवा से जुड़े विवाद पर आगे की कानूनी प्रक्रिया सामने आएगी। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के कारण दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले के आधार पर उनकी बहाली पर रोक लागू रहेगी, जिसने केंद्र के अनिवार्य सेवानिवृत्ति आदेश को खारिज किया था।

  • राधाष्टमी को लेकर बरसाना में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम, 160 बसें चलाएगा परिवहन निगम

    राधाष्टमी को लेकर बरसाना में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम, 160 बसें चलाएगा परिवहन निगम


    मथुरा। बरसाना में 19 सितंबर को होने वाली राधाष्टमी को लेकर प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा, यातायात, भीड़ नियंत्रण और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तृत खाका तैयार किया गया है। मेला क्षेत्र को सात जोन और 20 सेक्टर में बांटकर व्यवस्थाओं की निगरानी की जाएगी।

    जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार की संयुक्त अध्यक्षता में गुरुवार को हुई बैठक में अधिकारियों को सभी व्यवस्थाएं समय से पूरी करने के निर्देश दिए गए। अपर जिलाधिकारी प्रशासन अमरेश कुमार ने बताया कि श्रद्धालुओं के सुचारु दर्शन के लिए 38 होल्डिंग एरिया बनाए जाएंगे। इसके अलावा 50 पार्किंग स्थल, छह वॉच टावर और 88 बैरियर लगाए जाएंगे।

    12 गोताखोर और नाव रहेगी तैनात
    जल संबंधी घटनाओं से निपटने के लिए 12 गोताखोर और एक नाव तैनात की जाएगी। जिलाधिकारी ने मेला क्षेत्र की सड़कों को गड्ढामुक्त करने, निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने और खाद्य पदार्थों की नियमित जांच के निर्देश दिए हैं। सफाई और सजावट के साथ घोषणा प्रणाली से लगातार अनाउंसमेंट कराने पर भी जोर दिया गया है।

    जर्जर भवनों को चिह्नित कर नोटिस देने और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पर्याप्त दिशा-सूचक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 12 स्वास्थ्य शिविर और मेडिकल टीमें तैनात रहेंगी। बाइक एंबुलेंस के साथ नियमित दूरी पर एंबुलेंस की व्यवस्था भी की जाएगी। श्रद्धालुओं के लिए 35 पानी के टैंकर, 30 मोबाइल शौचालय और 100 लाउडस्पीकर लगाए जाएंगे। सात स्थानों पर जूता घर भी बनाए जाएंगे।

    50 स्थानों पर 155 कैमरों से नजर
    भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखने के लिए बरसाना में 50 स्थानों पर कुल 155 सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। इनमें कस्बे में पहले से लगे 60 कैमरों और राधारानी मंदिर में मौजूद 32 कैमरों के अतिरिक्त नए कैमरे शामिल होंगे। इसके अलावा 27 स्थानों पर 63 अस्थायी कैमरे भी लगाए जाएंगे।

    पीली कोठी, श्रीजी गेट और कटारा पार्क सहित सात स्थानों पर स्टैटिक सेट के जरिए भीड़ की निगरानी की जाएगी। प्रशासन का जोर भीड़ के दबाव वाले स्थानों पर लगातार नजर रखने और जरूरत के मुताबिक श्रद्धालुओं की आवाजाही को नियंत्रित करने पर रहेगा।

    राधाष्टमी पर 160 बसें चलेंगी
    राधाष्टमी पर श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए परिवहन निगम ने भी तैयारी शुरू कर दी है। 18 और 19 सितंबर को 160 बसों के संचालन की तैयारी है। इसके अलावा 40 अतिरिक्त बसों को रिजर्व रखा जाएगा।

    बसों के संचालन के लिए चालक-परिचालकों की व्यवस्था के साथ प्रमुख मार्गों पर निगरानी रखी जाएगी। श्रद्धालुओं को बरसाना पहुंचाने और वापस लाने के लिए प्रमुख मार्गों पर पर्याप्त बसें उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। परिवहन निगम के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक विवेक अहिरवार के अनुसार, श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने पर बसों के फेरे भी बढ़ाए जा सकते हैं।