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  • वंतारा ने माधुरी की सेहत को बताया पहली प्राथमिकता, कोल्हापुर वापसी के बाद भी जारी रहेगी पशु चिकित्सा निगरानी व्यवस्था

    वंतारा ने माधुरी की सेहत को बताया पहली प्राथमिकता, कोल्हापुर वापसी के बाद भी जारी रहेगी पशु चिकित्सा निगरानी व्यवस्था

    नई दिल्ली । कोल्हापुर की ‘महादेवी’ के नाम से पहचानी जाने वाली हथिनी माधुरी अब हाई-पावर्ड कमेटी यानी HPC के आदेश के तहत वापस कोल्हापुर लौटेगी। 9 सितंबर 2026 को जारी आदेश में कमेटी ने माधुरी को लौटाने की अनुमति दी, लेकिन उसकी सुरक्षा और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए कई शर्तें भी तय की हैं। वंतारा ने कहा है कि वह HPC के आदेश का पूरी तरह पालन करेगा और माधुरी की भलाई को सर्वोच्च प्राथमिकता देगा।

    निर्धारित शर्तों के अनुसार, कोल्हापुर लौटने के बाद माधुरी का इस्तेमाल किसी जुलूस या अन्य काम के लिए नहीं किया जा सकेगा। उसकी 24 घंटे देखभाल सुनिश्चित करनी होगी और हर दो सप्ताह में उसका मेडिकल चेकअप किया जाएगा। पशु चिकित्सा से जुड़ी जांच की रिपोर्ट संबंधित सक्षम अधिकारियों को भी उपलब्ध कराई जाएगी।

    माधुरी की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर वंतारा ने कहा कि उसकी सेहत फिलहाल स्थिर है, लेकिन पुरानी बीमारियां पूरी तरह ठीक नहीं हुई हैं। ऐसे में उसे लगातार पशु चिकित्सा देखभाल और नियमित निगरानी की आवश्यकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए उसके कोल्हापुर लौटने के बाद भी चिकित्सा व्यवस्था और निगरानी जारी रखने की तैयारी की गई है।

    माधुरी को 30 जुलाई 2025 को HPC के निर्देश पर जामनगर स्थित वंतारा लाया गया था। इन निर्देशों को बॉम्बे हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी सही ठहराया था। वंतारा के अनुसार, उसने माधुरी की कस्टडी की मांग नहीं की थी। उसे सक्षम अधिकारियों के निर्देश के तहत देखभाल के लिए वहां लाया गया था।

    माधुरी से कोल्हापुर के लोगों की भावनाएं जुड़ी होने की बात भी वंतारा ने स्वीकार की है। महाराष्ट्र सरकार, अधिकारियों, संबंधित पक्षों और समुदाय के लोगों के साथ बातचीत के बाद 6 अगस्त 2025 को वंतारा ने स्पष्ट किया था कि वह इन भावनाओं का सम्मान करता है और सक्षम अधिकारियों के निर्देशों का पालन करेगा। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों को HPC के समक्ष अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया था।

    HPC ने सभी पक्षों की बात सुनने के साथ संबंधित रिपोर्ट भी मंगाई। कमेटी ने नंदनी स्थित उस सुविधा केंद्र का निरीक्षण किया, जहां माधुरी को वापस रखा जाना है। इसके बाद 9 सितंबर 2026 को विस्तृत और तर्कपूर्ण आदेश जारी करते हुए उसे कोल्हापुर लौटाने की अनुमति दी गई।

    माधुरी की वापसी के लिए वंतारा ने रहने की स्थिति, पशु चिकित्सा सुविधाओं, मेडिकल उपकरण, दवाइयों और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं तैयार करने में मदद की है। वंतारा के पशु चिकित्सक हर दो सप्ताह में कोल्हापुर जाकर माधुरी की मेडिकल जांच करेंगे। HPC के निर्देश के अनुसार इन जांचों की रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों को दी जाएगी।

    वंंतारा ने स्पष्ट किया है कि माधुरी के कोल्हापुर लौटने के साथ उसकी जिम्मेदारी समाप्त नहीं होगी। संस्था का कहना है कि माधुरी की भलाई उसके स्थान पर निर्भर नहीं करती। उसकी सेहत, सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना प्राथमिकता है, ताकि उसे लंबी, सुरक्षित और बेहतर जिंदगी मिल सके।

  • मथुरा में 6 दिसंबर को नहीं होगी कार सेवा, अखाड़ा परिषद ने किया कार्यक्रम रद्द, जाने क्‍या कहा ?

    मथुरा में 6 दिसंबर को नहीं होगी कार सेवा, अखाड़ा परिषद ने किया कार्यक्रम रद्द, जाने क्‍या कहा ?

    मथुरा। श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह प्रकरण को लेकर 6 दिसंबर को मथुरा में प्रस्तावित कार सेवा पर अखाड़ा परिषद ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। हरिद्वार में परिषद से जुड़े संतों ने कहा कि 6 दिसंबर को अखाड़ा परिषद की ओर से मथुरा में किसी भी तरह की कार सेवा नहीं की जाएगी। परिषद ने कार सेवा से खुद को अलग करते हुए कहा कि मामले का समाधान न्यायालय के जरिए ही होना चाहिए।

    हरिद्वार में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर निर्माण के संकल्प के साथ लाई गई रजत शिला के विधि-विधान से पूजन के दौरान संतों ने यह बात कही। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष डॉ. रवींद्र पुरी महाराज और निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद महाराज ने अपने स्थान पर संकल्पित रजत शिला का पूजन किया।

    न्यायालय के आदेश के बिना समर्थन नहीं
    डॉ. रवींद्र पुरी महाराज ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जा सकता। श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े मामले का समाधान न्यायालय के माध्यम से ही संभव है। संतों ने स्पष्ट किया कि न्यायालय के आदेश के बिना वे किसी प्रकार की कार सेवा का समर्थन नहीं करेंगे।

    श्रीकृष्ण जन्मभूमि प्रकरण में हिंदू पक्ष के याचिकाकर्ता दिनेश फलाहारी महाराज ने भी कहा कि उन्हें न्यायालय पर पूरा विश्वास है। उन्होंने अयोध्या मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह वहां न्यायालय के माध्यम से फैसला आया, उसी तरह मथुरा प्रकरण में भी न्यायालय से निर्णय आने की उम्मीद है।

    उन्होंने कहा कि 6 दिसंबर को अखाड़ा परिषद की ओर से किसी भी प्रकार की कार सेवा का कार्यक्रम नहीं होगा। उनका दावा है कि प्रकरण से संबंधित प्राचीन साक्ष्य न्यायालय में प्रस्तुत किए जा चुके हैं और इन्हीं के आधार पर न्यायालय निर्णय करेगा।

    सोशल मीडिया की भ्रामक खबरों से सावधान रहने की अपील
    महामंडलेश्वर राधानंद गिरी महाराज ने कहा कि कुछ लोग सोशल मीडिया के माध्यम से भ्रामक खबरें प्रसारित कर रहे हैं। उन्होंने सनातन समाज से ऐसी खबरों पर विश्वास नहीं करने की अपील की। उनका कहना था कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले में संत समाज न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा रखता है।

    हरिद्वार में हुए संकल्पित रजत शिला पूजन कार्यक्रम में राष्ट्रीय कार्यक्रम प्रभारी-संयोजक पं. राजेश पाठक, महामंडलेश्वर डॉ. रमनपुरी महाराज, महंत दिव्यात्मानंद पुरी महाराज, श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के राष्ट्रीय महामंत्री जय राम शर्मा, महंत बाबा हरिदास महाराज, राष्ट्रीय मंत्री उद्देश सैनी, राष्ट्रीय प्रचारक गुलाब चंद सैनी, राष्ट्रीय महामंत्री गिर्राज वाल्मीकि, कान्हा कौशिक, अनिल कृष्ण शास्त्री, ब्रह्मानंद गिरी, महेशानंद सरस्वती, पूजा भार्गव, रामनारायण बृजवासी, गोविंद बल्लभ शास्त्री और मयंक शर्मा सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

  • यूपी में सामान्य से ज्यादा बारिश, अगस्त ने पलटा मानसून का रुख, चित्रकूट में सबसे ज्‍यादा बरसा पानी

    यूपी में सामान्य से ज्यादा बारिश, अगस्त ने पलटा मानसून का रुख, चित्रकूट में सबसे ज्‍यादा बरसा पानी


    लखनऊ। मानसून की शुरुआत में बारिश की कमी से चिंतित उत्तर प्रदेश में अब तस्वीर बदल गई है। अलनीनो के प्रभाव के चलते कमजोर मानसून की आशंका जताई गई थी, लेकिन अगस्त में सक्रिय रहे कई मौसमी सिस्टम ने बारिश की कमी पूरी कर दी। प्रदेश में अब मानसूनी बारिश सामान्य औसत से ऊपर पहुंच गई है।

    एक जून से 8 सितंबर तक 100.3% बारिश
    उत्तर प्रदेश में एक जून से 8 सितंबर तक 649.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश का आंकड़ा 647.3 मिलीमीटर है। इस तरह प्रदेश में अब तक सामान्य की 100.3 प्रतिशत बारिश हो चुकी है। खास बात यह है कि सितंबर का आधे से ज्यादा महीना अभी बाकी है।

    कमजोर मानसून का अनुमान, अगस्त में बदली तस्वीर
    मौसम विभाग ने अलनीनो की सक्रियता को देखते हुए मानसून के कमजोर रहने का अनुमान जताया था। जून से सितंबर के दौरान देश में दीर्घकालिक औसत की करीब 90 प्रतिशत बारिश होने का पूर्वानुमान था। मानसून की शुरुआत में जून-जुलाई में बारिश अपेक्षाकृत कम भी रही, लेकिन अगस्त में लगातार सक्रिय हुए कम दबाव के क्षेत्रों और अन्य मानसूनी सिस्टम ने पूरी स्थिति बदल दी। प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश के दौर आए और बारिश की कमी तेजी से पूरी हुई।

    अगस्त में सामान्य से 24% ज्यादा बारिश
    जून-जुलाई की कम बारिश के बाद अगस्त में प्रदेश में 291.3 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि सामान्य बारिश 235.5 मिलीमीटर होती है। यानी अगस्त में सामान्य से 24 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई। यह अगस्त 2018 के बाद सबसे अधिक बारिश वाले अगस्त में दूसरे स्थान पर रहा। अगस्त 2018 में प्रदेश में 293.1 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड हुई थी।

    प्रदेश का औसत सामान्य, लेकिन जिलों में तस्वीर अलग
    प्रदेश का औसत बारिश का आंकड़ा भले ही सामान्य से ऊपर पहुंच गया हो, लेकिन जिलों में बारिश का वितरण एक जैसा नहीं रहा। कहीं बारिश ने सामान्य आंकड़े को काफी पीछे छोड़ दिया तो कुछ जिले अब भी कमी से जूझ रहे हैं।

    चित्रकूट सबसे आगे, कुशीनगर में सबसे ज्यादा कमी
    चित्रकूट में अब तक 1201.1 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जो प्रदेश में सर्वाधिक है। इसके विपरीत कुशीनगर में सिर्फ 204.6 मिलीमीटर बारिश हुई है। यहां सामान्य के मुकाबले करीब 67 प्रतिशत बारिश की कमी बनी हुई है। मऊ में भी सामान्य से करीब 53 प्रतिशत कम बारिश हुई है।

    इस तरह प्रदेश में मानसून का औसत आंकड़ा सामान्य से ऊपर पहुंचने के बावजूद जिलों में बारिश की तस्वीर पूरी तरह एक जैसी नहीं है। यही वजह है कि एक ही प्रदेश में कहीं मानसून ने जमकर पानी बरसाया तो कहीं अब भी बारिश का इंतजार बना हुआ है।

  • मायावती का सपा-कांग्रेस पर तीखा हमला, बोलीं- नीला रंग पहनने से नहीं बदलेगी जातिवादी सोच

    मायावती का सपा-कांग्रेस पर तीखा हमला, बोलीं- नीला रंग पहनने से नहीं बदलेगी जातिवादी सोच

    लखनऊ। बसपा सुप्रीमो मायावती ने सपा और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि बीएसपी के नीले रंग को अपनाने और मंचों व कपड़ों में इसका इस्तेमाल करने से विपक्षी दलों की सोच नहीं बदल जाएगी। बहुजन समाज के हित की बात करने से पहले इन दलों को अपना दिल और दिमाग साफ करना चाहिए। मायावती ने सपा के पीडीए और कांग्रेस की राजनीति पर भी सवाल उठाए।

    मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि सपा, कांग्रेस और अन्य विरोधी दल बीएसपी के नीले रंग को अपनाकर उसे कपड़ों और मंचों पर इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन इससे गरीबों, दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों और अन्य उपेक्षित वर्गों के प्रति उनकी वर्षों पुरानी सोच नहीं बदल सकती। उन्होंने आरोप लगाया कि इन दलों की सोच जातिवादी, संकीर्ण, सामंती और पूंजीवादी रही है।

    उन्होंने कहा कि केवल नीला रंग अपनाने से कोई दिल से अंबेडकरवादी नहीं बन सकता। बहुजन समाज के वास्तविक हित और कल्याण के लिए पहले इन दलों को अपनी सोच में बदलाव लाना होगा। मायावती ने आरोप लगाया कि ये दल इन वर्गों के मुद्दों पर “गिरगिट की तरह रंग बदलते हैं” और कहते कुछ हैं, जबकि करते उसके विपरीत हैं।

    पीडीए को लेकर सपा पर निशाना
    मायावती ने सपा के पीडीए को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों के मुद्दे पर सपा की सोच, चाल, चरित्र और चेहरा अलग-अलग रहा है। उन्होंने दावा किया कि बहुजन समाज के हितों की वास्तविक लड़ाई केवल बीएसपी ही लड़ती रही है।

    उन्होंने बीएसपी से निष्कासित नेताओं को लेकर भी विरोधी दलों पर हमला बोला। मायावती ने कहा कि अनुशासनहीनता समेत विभिन्न कारणों से पार्टी से निकाले गए कई लोग बाद में दूसरी पार्टियों में चले गए और कुछ ने छोटे संगठन या राजनीतिक दल भी बना लिए। उनके मुताबिक, ऐसे लोग व्यक्तिगत स्वार्थ और अवसरवाद की राजनीति करते हैं और बहुजन समाज के सामूहिक हित के लिए काम नहीं कर सकते।

    कांग्रेस को बताया ‘डूबता जहाज’
    मायावती ने कांग्रेस पर भी तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जिन लोगों को बीएसपी से निकाले जाने के बाद अपने साथ लेने की बात कर रही है, वह खुद “डूबते जहाज” जैसी स्थिति में है। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी पार्टी में शामिल होकर कोई अपना राजनीतिक भविष्य अंधकार में क्यों डालेगा।

    मायावती ने अपने बयान में बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर का भी उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने अपने जीवनकाल में बहुजन समाज के लोगों को कांग्रेस से सावधान रहने की चेतावनी दी थी।

    अशोक सिद्धार्थ के इस्तीफे पर भी बोला हमला
    मायावती ने बीएसपी से जुड़े रहे और आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि पार्टी की ओर से राजनीति से संन्यास लेने की सलाह दिए जाने के बाद अशोक सिद्धार्थ ने तत्काल घोषणा नहीं की। मायावती के मुताबिक, उन्होंने पूरी रात इसे रोकने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाए और अगले दिन सुबह करीब 6:30 बजे मजबूरी में अपने राजनीतिक संन्यास की घोषणा की।

    मायावती ने कहा कि सही समय आने पर पार्टी के लोगों को इस मामले में और भी जानकारी दी जाएगी। उन्होंने बीएसपी कार्यकर्ताओं से मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को समझने और पार्टी व आंदोलन के हित में सतर्क रहने की अपील की।

  • उत्तर प्रदेश में गड्ढामुक्ति अभियान तेज होगा, योगी ने बारिश के बाद जरूरत के अनुसार स्थायी नवीनीकरण के दिए निर्देश

    उत्तर प्रदेश में गड्ढामुक्ति अभियान तेज होगा, योगी ने बारिश के बाद जरूरत के अनुसार स्थायी नवीनीकरण के दिए निर्देश

    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश में बारिश और बाढ़ से खराब हुई सड़कों की स्थिति सुधारने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जिन सड़कों की हालत बारिश के कारण खराब हुई है, उन्हें पहले आवागमन के योग्य बनाया जाए और बरसात खत्म होने के बाद जरूरत के अनुसार उनका स्थायी नवीनीकरण कराया जाए। मुख्यमंत्री ने यह निर्देश शुक्रवार को लोक निर्माण विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान दिए।

    योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश में अभी बारिश जारी है, इसलिए सड़कों की स्थिति पर लगातार नजर रखने की जरूरत है। उन्होंने बारिश के कारण नए क्षतिग्रस्त मार्गों का भी सर्वे कराने के निर्देश दिए। आगामी पर्व और त्योहारों के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के आवागमन को देखते हुए उन्होंने प्रमुख मार्गों पर यातायात में किसी तरह की परेशानी नहीं होने देने को कहा।

    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि त्योहारों से पहले जरूरी मरम्मत और नवीनीकरण के कार्य पूरे किए जाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि गड्ढामुक्ति अभियान केवल पैचवर्क तक सीमित नहीं रहना चाहिए। जहां सड़क तत्काल खराब स्थिति में है, वहां पहले उसे मोटरेबल बनाया जाए और बारिश का मौसम समाप्त होने के बाद आवश्यकता के अनुसार स्थायी नवीनीकरण कराया जाए।

    बैठक में बताया गया कि अतिवृष्टि के अलावा एक्सप्रेस-वे, राष्ट्रीय मार्ग और रेलवे सहित निर्माणाधीन परियोजनाओं के कारण भारी वाहनों की आवाजाही से भी कई सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। इन सड़कों का विभागवार सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे के आधार पर खराब मार्गों को चिन्हित किया जाएगा और गड्ढामुक्ति के लिए विभागवार लक्ष्य तय किए जाएंगे।

    आगामी पर्वों को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में 681 महत्वपूर्ण मार्ग चिन्हित किए गए हैं। इनमें गणेश चतुर्थी, विश्वकर्मा पूजा, नवरात्रि, दीपावली, छठ पूजा और कार्तिक पूर्णिमा जैसे पर्वों के दौरान अधिक आवागमन वाले मार्ग शामिल हैं। इन मार्गों को प्राथमिकता के आधार पर बेहतर स्थिति में रखने की तैयारी की जा रही है।

    मुख्यमंत्री ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अधिकारियों से भी उनकी कार्ययोजना की जानकारी ली। इसके अलावा मंडी परिषद, पंचायती राज, सिंचाई, ग्राम्य विकास, नगर विकास, आवास एवं शहरी नियोजन तथा अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग की योजनाओं की भी समीक्षा की गई। उन्होंने सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय के साथ काम करने पर जोर दिया।

    विभागीय प्रस्तुतिकरण के अनुसार गड्ढामुक्ति अभियान में नौ विभागों के अधीन आने वाले मार्ग शामिल हैं। इन विभागों के तहत करीब 4.36 लाख किलोमीटर सड़कें हैं। मौजूदा लक्ष्य के तहत करीब 50 हजार किलोमीटर सड़कों को गड्ढामुक्त किया जाना है। अब तक करीब 5,751 किलोमीटर सड़कों पर काम पूरा होने की जानकारी दी गई।

    बैठक में नवीनीकरण और विशेष मरम्मत के कार्यों की भी समीक्षा हुई। नवीनीकरण के लिए करीब 30 हजार किलोमीटर और विशेष मरम्मत के लिए करीब पांच हजार किलोमीटर का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अब तक करीब 14 हजार किलोमीटर में नवीनीकरण और करीब 700 किलोमीटर में विशेष मरम्मत की प्रगति बताई गई।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़कें आम लोगों के रोजमर्रा के जीवन से सीधे जुड़ी हैं। उन्होंने शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों, मुख्य बाजारों, सरकारी कार्यालयों और अधिक जन आवागमन वाले अन्य स्थानों की सड़कों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। साथ ही अधिकारियों से कहा कि जहां मरम्मत की जरूरत है, वहां बिना देरी काम शुरू कराया जाए और सड़क को जल्द आवागमन योग्य बनाया जाए। उन्होंने काम की गति के साथ गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।

  • ब्रिक्स में भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स की बढ़ी मांग, यूएई और चीन की हिस्सेदारी 88.50 प्रतिशत, नए व्यापार अवसरों पर नजर

    ब्रिक्स में भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स की बढ़ी मांग, यूएई और चीन की हिस्सेदारी 88.50 प्रतिशत, नए व्यापार अवसरों पर नजर

    नई दिल्ली ।भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात क्षेत्र ने ब्रिक्स देशों के साथ व्यापार में मजबूत वृद्धि दर्ज की है। वित्त वर्ष 2025-26 में ब्रिक्स सदस्य देशों को भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 49.27 प्रतिशत बढ़ा। यह वृद्धि देश के कुल इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में दर्ज 26.53 प्रतिशत की बढ़ोतरी से काफी अधिक रही। उद्योग जगत को उम्मीद है कि 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बाद डिजिटल सहयोग और व्यापार सुगमता से जुड़े प्रस्तावों को आगे बढ़ाने से निर्यात की रफ्तार और तेज हो सकती है।

    इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कंप्यूटर सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के अनुसार, ब्रिक्स देशों के साथ बढ़ता व्यापार यह संकेत देता है कि डिजिटल और तकनीकी सहयोग को कारोबारी अवसरों में बदलने की पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं। यदि डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और व्यापार सुगमता से जुड़े प्रस्ताव प्रभावी तरीके से लागू किए जाते हैं, तो भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यातकों को इसका सीधा लाभ मिल सकता है।

    ब्रिक्स देशों में संयुक्त अरब अमीरात और चीन भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों के सबसे बड़े आयातक बने हुए हैं। दोनों देशों की संयुक्त हिस्सेदारी ब्रिक्स देशों को भारत के कुल इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में 88.50 प्रतिशत रही। इससे इन दोनों बाजारों की भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबार में महत्वपूर्ण भूमिका का पता चलता है।

    उत्पादों की श्रेणी में दूरसंचार उपकरण भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात का सबसे बड़ा सेगमेंट रहा। ब्रिक्स देशों को होने वाले कुल इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में दूरसंचार उपकरणों की हिस्सेदारी 74.60 प्रतिशत रही। इससे इस क्षेत्र में भारत और ब्रिक्स बाजारों के बीच व्यापार की प्रमुख दिशा भी सामने आती है।

    ब्रिक्स देशों का भारत के कुल वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में लगभग 19.61 प्रतिशत योगदान है। उद्योग के अनुसार, सदस्य देशों के बीच गहरा सहयोग नेटवर्क उपकरणों, डिवाइस सर्टिफिकेशन और साझा डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को संचालित करने वाले सॉफ्टवेयर की मांग बढ़ा सकता है।

    भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान डिजिटल सहयोग और व्यापार से जुड़े कई प्रस्तावों को एजेंडे में शामिल किया गया है। उद्योग का मानना है कि इन प्रस्तावों का प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि सदस्य देश उन्हें कितनी तेजी और गंभीरता से लागू करते हैं।

    ब्रिक्स डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर रिपॉजिटरी पर चर्चा और पिछले महीने पुणे में भारत तथा ब्राजील के बीच हुआ सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी समझौता इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताए गए हैं। इस समझौते में 5जी, 6जी, ओपन रैन और उपग्रह कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर जोर दिया गया है। ये क्षेत्र भविष्य में ब्रिक्स के डिजिटल सहयोग का आधार बन सकते हैं।

    प्रस्तावित ब्रिक्स ग्लोबल वैल्यू चेन एक्शन प्लान 2026-2030 और एमएसएमई सहयोग पोर्टल को भी भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इन पहलों से खासतौर पर छोटे और मध्यम उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति शृंखलाओं से जुड़ने और नए बाजारों तक पहुंच बनाने का अवसर मिल सकता है।

    इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र के लिए प्रस्तावित ब्रिक्स इनवॉइस डिस्काउंटिंग तंत्र भी महत्वपूर्ण है। इसका उद्देश्य एमएसएमई के सामने आने वाली व्यापार वित्तपोषण संबंधी चुनौतियों को कम करना है। उद्योग जगत के मुताबिक, सऊदी अरब, रूस, इंडोनेशिया और दक्षिण अफ्रीका जैसे बाजारों में विस्तार की योजना बना रहे भारतीय निर्यातकों के लिए यह व्यवस्था उपयोगी हो सकती है।

  • पुतिन की भारत यात्रा में सुरक्षा का कड़ा इंतजाम, बख्तरबंद ऑरस सीनेट कार और विशेष सुरक्षा व्यवस्था चर्चा में

    पुतिन की भारत यात्रा में सुरक्षा का कड़ा इंतजाम, बख्तरबंद ऑरस सीनेट कार और विशेष सुरक्षा व्यवस्था चर्चा में

    नई दिल्ली ।रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 में हिस्सा लेने भारत पहुंचे हैं। उनके भारत दौरे के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई विशेष इंतजाम किए गए हैं। पुतिन के जमीनी सफर के लिए रूस की खास बख्तरबंद ऑरस सीनेट लिमोजीन का इस्तेमाल किया जाता है। इसे बेहद सुरक्षित वाहन के तौर पर तैयार किया गया है और इसे अक्सर चलते-फिरते बंकर के रूप में बताया जाता है।

    पुतिन की यह खास कार सीधे मॉस्को से लाई जाती है। इसकी सुरक्षा विशेषताओं में रन-फ्लैट टायर और आपात स्थिति के लिए अलग ऑक्सीजन सप्लाई जैसी सुविधाएं शामिल हैं। दी गई जानकारी के अनुसार, यह वाहन स्नाइपर की गोलीबारी, बारूदी सुरंगों और रासायनिक हमलों जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयार किया गया है।

    पुतिन की हवाई यात्रा के लिए खास तौर पर संशोधित इल्यूशिन आईएल-96-300पीयू विमान का इस्तेमाल किया जाता है। इसे फ्लाइंग क्रेमलिन के नाम से जाना जाता है। सुरक्षा व्यवस्था में उनके साथ डिकॉय जेट, सुरक्षित कमांड सिस्टम और उन्नत मिसाइल डिफेंस सिस्टम भी शामिल बताए गए हैं।

    भारत में पुतिन की सुरक्षा की जिम्मेदारी रूस की फेडरल प्रोटेक्टिव सर्विस यानी एफएसओ और भारत के आतंकवाद-रोधी बलों के बीच समन्वय से संभाली जा रही है। जमीन पर राष्ट्रपति की सुरक्षा के सबसे अंदरूनी घेरे में रूसी प्रेसिडेंशियल सिक्योरिटी सर्विस के विशेष अधिकारी तैनात रहते हैं। इन अधिकारियों को एफएसओ की एडवांस्ड टीमें सहयोग देती हैं।

    रूसी सुरक्षा दल उन सभी स्थानों की जांच करता है, जहां पुतिन के जाने का कार्यक्रम होता है। इसके साथ ही रूसी प्रतिनिधिमंडल अपने लॉजिस्टिक्स पर भी नियंत्रण बनाए रखता है। सुरक्षा व्यवस्था के तहत पुतिन के साथ निजी शेफ और खाने-पीने की चीजों की जांच के लिए पोर्टेबल लैब जैसी सुविधाएं भी रखी जाती हैं।

    ऑपरेशनल सुरक्षा को मजबूत करने के लिए चुनिंदा होटलों में डमी वीआईपी यानी नकली वीआईपी की व्यवस्था का भी उल्लेख किया गया है। इसके अलावा जैविक कचरे के निपटारे से जुड़े प्रोटोकॉल भी सुरक्षा इंतजाम का हिस्सा बताए गए हैं।

    ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के मद्देनजर दिल्ली, एयरोसिटी और गुरुग्राम के चुने गए होटलों में भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है। प्रत्येक होटल को अलग सुरक्षित क्षेत्र के रूप में व्यवस्थित किया गया है। इन स्थानों की सुरक्षा व्यवस्था में कानून लागू करने वाली एजेंसियों और खुफिया एजेंसियों की भूमिका है।

    हर होटल में डीसीपी रैंक के अधिकारी को वेन्यू कमांडर बनाया गया है, जबकि बड़े क्षेत्रों की निगरानी स्पेशल कमिश्नर रैंक के अधिकारी कर रहे हैं। होटल के भीतर दो कमरों को ऑपरेशनल कमांड हब में बदला गया है। ये दिल्ली पुलिस के सेंट्रल सी4आई कमांड नोड से जुड़े हैं और आपात स्थिति के प्रबंधन के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं।

    होटलों की बाहरी दीवारों और हॉलवे पर एडवांस्ड एआई कैमरे लगाए गए हैं। इनमें घुसपैठ का पता लगाने और लोगों की गतिविधियों को पहचानने वाला सॉफ्टवेयर इस्तेमाल किया जाता है। दीवार फांदने या रेंगने जैसी असामान्य गतिविधियों की पहचान भी इन कैमरों के जरिए की जा सकती है।

    होटल कर्मचारियों की पृष्ठभूमि जांच भी की गई है। उन्हें डिजिटल की-कार्ड के जरिए केवल निर्धारित मंजिलों तक पहुंच की अनुमति दी गई है। इस तरह पुतिन की भारत यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था विमान, वाहन, होटल और उनके निर्धारित कार्यक्रम वाले स्थानों तक कई स्तरों में व्यवस्थित की गई है।

  • मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल ने बताया राष्ट्रपति के ADC पद से रिटायरमेंट का कारण, परिवार को बताया सबसे बड़ी प्राथमिकता

    मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल ने बताया राष्ट्रपति के ADC पद से रिटायरमेंट का कारण, परिवार को बताया सबसे बड़ी प्राथमिकता

    नई दिल्ली । राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पूर्व एड-डी-कैंप मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल ने 30 साल की उम्र में सेना से समय से पहले रिटायरमेंट लेने के फैसले के बारे में खुलकर बात की है। उन्होंने बताया कि यह निर्णय किसी निजी असंतुष्टि की वजह से नहीं, बल्कि पारिवारिक जिम्मेदारियों को प्राथमिकता देने के लिए लिया गया था। सेना की वर्दी पहनना उनके लिए केवल नौकरी नहीं, बल्कि लंबे समय से देखा गया सपना था।

    मेजर ऋषभ ने बताया कि उन्होंने कभी सेना छोड़ने के बारे में नहीं सोचा था। उन्होंने एक दशक से ज्यादा समय इस सपने को पूरा करने और सैन्य जीवन को जीने में बिताया। इसके बावजूद एक समय ऐसा आया जब उन्हें अपने व्यक्तिगत करियर और माता-पिता के प्रति जिम्मेदारियों के बीच किसी एक को चुनना पड़ा।

    उनके मुताबिक, उन्होंने अपनी महत्वाकांक्षाओं के बजाय माता-पिता के साथ रहने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि एक बेटे के तौर पर उनकी कुछ जिम्मेदारियां और वादे हैं, जिन्हें उन्हें पूरा करना है। उनके सामने खुद को चुनने या माता-पिता को प्राथमिकता देने का विकल्प था और वह ऐसा फैसला नहीं लेना चाहते थे, जिसके बारे में बाद में उन्हें पछतावा हो।

    मेजर ऋषभ ने स्पष्ट किया कि सेना छोड़ने का निर्णय जल्दबाजी में नहीं लिया गया। उन्होंने परिवार के साथ बातचीत करने के बाद यह फैसला किया। उनके लिए यह कदम भावनात्मक रूप से कठिन था, लेकिन उन्होंने इसे जरूरी त्याग माना। सैन्य करियर उम्मीद से पहले खत्म होने के बावजूद उन्हें देश की सेवा में बिताए हर पल पर गर्व है।

    राष्ट्रपति के ADC के तौर पर अपनी भूमिका को लेकर भी उन्होंने कई बातें बताईं। उनके अनुसार इस पद पर रहते हुए सख्त प्रोटोकॉल का पालन करना पड़ता है और इसका असर निजी जीवन पर भी पड़ता है। ADC के कार्यकाल के दौरान शादी करने की अनुमति नहीं होने की बात भी उन्होंने बताई।

    मेजर ऋषभ ने अपनी शादी को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि उन्होंने शादी नहीं की है और फिलहाल शादी करने की उनकी कोई योजना भी नहीं है। इस तरह उन्होंने उन अटकलों को खारिज किया, जिनमें उनकी रिटायरमेंट को शादी की योजना से जोड़कर देखा जा रहा था।

    उन्होंने यह भी बताया कि ADC के तौर पर जिम्मेदारियों के कारण निजी जीवन काफी सीमित हो जाता है। परिवार से लंबे समय तक दूर रहना पड़ता है और निजी जिंदगी के लिए बहुत कम समय मिल पाता है। सार्वजनिक जिम्मेदारियों की लगातार मांग के कारण उन्हें कई ऐसे सामान्य अनुभवों का त्याग करना पड़ा, जिन्हें आम जीवन का हिस्सा माना जाता है।

    मेजर ऋषभ ने इस अनुभव को केवल कठिनाइयों के तौर पर नहीं देखा। उनके मुताबिक, सीमित निजी जीवन और लगातार जिम्मेदारियों के बीच यह समय आत्मचिंतन का अवसर भी रहा। उन्होंने अपने फैसले को परिवार के प्रति जिम्मेदारी और जरूरी त्याग के रूप में प्रस्तुत किया।

    सेना छोड़ने के बावजूद उनके बयान में सैन्य सेवा के प्रति सम्मान साफ नजर आया। उन्होंने देश की सेवा में बिताए समय को गर्व के साथ याद किया और बताया कि परिवार से बातचीत के बाद लिया गया यह फैसला उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन उन्हें लगा कि इस समय माता-पिता के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को प्राथमिकता देना जरूरी है।

  • ब्रिक्स बिजनेस फोरम में पीयूष गोयल और एस. जयशंकर ने व्यापार नियम सरल करने, बाजार खोलने और आर्थिक सहयोग बढ़ाने की बात कही

    ब्रिक्स बिजनेस फोरम में पीयूष गोयल और एस. जयशंकर ने व्यापार नियम सरल करने, बाजार खोलने और आर्थिक सहयोग बढ़ाने की बात कही

    नई दिल्ली । दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स बिजनेस फोरम की बैठक में भारत ने ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार बढ़ाने और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बदलते वैश्विक व्यापारिक और राजनीतिक माहौल के बीच सदस्य देशों के लिए आपसी सहयोग बढ़ाने को महत्वपूर्ण बताया।

    बैठक के दौरान पीयूष गोयल ने कहा कि ब्रिक्स देशों की अर्थव्यवस्था में व्यापार की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने बताया कि ब्रिक्स देशों में दुनिया की करीब आधी आबादी रहती है और ये देश वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद यानी GDP का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं। दुनिया के कुल व्यापार में भी ब्रिक्स देशों की हिस्सेदारी लगभग 25 प्रतिशत बताई गई।

    गोयल ने भारत की व्यापारिक क्षमताओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत बड़ी मात्रा में इंजीनियरिंग सामान और इलेक्ट्रॉनिक्स दूसरे देशों को भेजता है। दवाओं के क्षेत्र में भी भारत की मजबूत स्थिति है और वह ब्रिक्स देशों को आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराने वाला भरोसेमंद देश बन सकता है।

    केंद्रीय मंत्री ने ब्रिक्स के सदस्य और साझेदार देशों से अपने बाजारों तक पहुंच आसान बनाने की अपील की। उनका कहना था कि केवल टैक्स कम करने से व्यापार में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं होगी। इसके साथ ही सामान के आयात-निर्यात से जुड़े नियमों और प्रक्रियाओं को भी सरल बनाने की आवश्यकता है।

    गोयल ने कहा कि कारोबार करने वाली कंपनियों के लिए सामान की मंजूरी की प्रक्रिया में कम समय लगना चाहिए। उनका मानना है कि यदि व्यापार से जुड़ी प्रक्रियाएं आसान होंगी और मंजूरी में तेजी आएगी तो कंपनियों के लिए अलग-अलग ब्रिक्स देशों के बाजारों में कारोबार करना अधिक सुविधाजनक हो सकता है।

    बैठक में सप्लाई चेन को मजबूत बनाने का मुद्दा भी प्रमुख रहा। गोयल ने कच्चे माल और जरूरी खनिजों के लिए अलग-अलग देशों पर अत्यधिक निर्भरता कम करने की जरूरत बताई। बदलते वैश्विक हालात के बीच आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत और अधिक भरोसेमंद बनाने को उन्होंने महत्वपूर्ण बताया।

    विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी ब्रिक्स देशों के बीच मिलकर काम करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स के संस्थागत सहयोग के 20 वर्ष पूरे हो रहे हैं और यह संगठन के लिए महत्वपूर्ण समय है। उनके अनुसार, इन वर्षों में ब्रिक्स के सदस्य, इसके काम और चर्चा के मुद्दों में बदलाव आया है।

    जयशंकर ने कहा कि दुनिया इस समय राजनीतिक तनाव, महामारी और मौसम में बदलाव जैसी कई बड़ी चुनौतियों से गुजर रही है। इन परिस्थितियों का असर कारोबार पर भी पड़ रहा है। ऐसे समय में देशों को तेजी से बदलती परिस्थितियों के अनुसार खुद को तैयार करना होगा।

    विदेश मंत्री ने डिजिटल तकनीक के बढ़ते महत्व का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि नई तकनीक कारोबार करने के तरीकों को बदल रही है। डिजिटल सुविधाओं के विस्तार से कंपनियों का काम तेजी से हो सकता है और उत्पादन बढ़ाने के साथ आर्थिक विकास के नए अवसर भी सामने आ सकते हैं।

    बैठक में भारत का मुख्य संदेश ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार को आसान बनाने पर केंद्रित रहा। बाजारों तक पहुंच सरल करने, व्यापार नियमों को सुगम बनाने, सामान की मंजूरी में तेजी लाने और सप्लाई चेन मजबूत करने को आपसी व्यापार बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया गया।

  • 84 साल की उम्र में अमिताभ बच्चन ने बताई अधूरी ख्वाहिश, बोले- संगीत सीखने की इच्छा आज भी पूरी नहीं हो पाई

    84 साल की उम्र में अमिताभ बच्चन ने बताई अधूरी ख्वाहिश, बोले- संगीत सीखने की इच्छा आज भी पूरी नहीं हो पाई

    नई दिल्ली ।अमिताभ बच्चन ने अपनी जिंदगी से जुड़ी एक ऐसी अधूरी इच्छा के बारे में बताया है, जिसे लेकर उन्हें आज भी अफसोस है। अभिनय और अपनी दमदार आवाज के लिए पहचान रखने वाले अभिनेता ने बताया कि उन्हें संगीत सीखने की काफी इच्छा थी, लेकिन वह इसे कभी सीख नहीं पाए। उन्होंने यह बात क्विज रियलिटी शो ‘कौन बनेगा करोड़पति-18’ के आगामी एपिसोड के दौरान बातचीत में साझा की।

    शो में अमिताभ बच्चन की बातचीत कंटेस्टेंट कृतज्ञा नैयर के साथ हुई। कृतज्ञा ने अभिनेता से एक लोकप्रिय गेम ‘दिस और दैट’ खेलने का अनुरोध किया। उन्होंने अमिताभ बच्चन को बताया कि वह कंटेंट बनाती हैं और इस गेम के जरिए एक रील बनाना चाहती हैं, ताकि उनके फॉलोअर्स भी बढ़ सकें।

    इसी बातचीत के दौरान कृतज्ञा ने अमिताभ बच्चन से एक दिलचस्प सवाल पूछा। उन्होंने जानना चाहा कि क्या अभिनेता अपने अतीत के किसी एक दिन को दोबारा जीना पसंद करेंगे या फिर ऐसा कोई दिन जीना चाहेंगे, जो उन्होंने अब तक नहीं जिया है, लेकिन हमेशा से उसे जीने की इच्छा रही है।

    इस सवाल के जवाब में अमिताभ बच्चन ने कहा कि उनकी जिंदगी में इतनी घटनाएं हुई हैं कि यह तय करना आसान नहीं है कि वह किस दिन को दोबारा जीना चाहेंगे। इसके साथ ही उन्होंने उस दूसरी संभावना पर बात की, जिसमें ऐसा कोई दिन जीने की इच्छा शामिल है, जिसे उन्होंने अभी तक अनुभव नहीं किया।

    इसी दौरान अमिताभ बच्चन ने अपनी संगीत से जुड़ी इच्छा का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि वह संगीत सीखना चाहते थे, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। अभिनेता ने कहा कि जब वह संगीतकारों और गीतकारों को सुनते हैं तो उनके मन में यह सवाल आता है कि कोई इतना अच्छा कैसे गा सकता है। उन्होंने माना कि उन्होंने खुद कभी संगीत नहीं सीखा।

    अमिताभ बच्चन ने यह भी बताया कि उनके घर में संगीत सीखने के लिए जरूरी वाद्य यंत्र मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने संगीत सीखने के लिए घर में कई यंत्र जुटाकर रखे हुए हैं, लेकिन इसके बावजूद वह इस कला को सीख नहीं सके।

    अभिनेता ने अपने अंदाज में कहा कि इन वाद्य यंत्रों के ऊपर फूलों की माला चढ़ाकर वह इस उम्मीद में रहते हैं कि एक दिन वह संगीत सीखना शुरू करेंगे। हालांकि, वह दिन अब तक नहीं आया और संगीत सीखने की उनकी इच्छा अधूरी रह गई।

    अमिताभ बच्चन ने अपनी उम्र का जिक्र करते हुए कहा कि अब वह 84 साल के हो गए हैं और अभी तक उन्हें संगीत नहीं आया। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि इस बात का उन्हें बहुत दुख है। उनकी यह बात उनकी उस पुरानी इच्छा को सामने लाती है, जिसे वह चाहने के बावजूद पूरा नहीं कर सके।

    इस बातचीत में अमिताभ बच्चन ने यह भी दिखाया कि जिंदगी में कई उपलब्धियां हासिल करने के बावजूद कुछ व्यक्तिगत इच्छाएं ऐसी रह सकती हैं, जिन्हें पूरा करने का अवसर नहीं मिल पाता। संगीत सीखना और वाद्य यंत्र बजाना उनके लिए ऐसी ही एक अधूरी ख्वाहिश है।