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  • पीएम मोदी ने मेलोनी को भेंट किया शिरुई लिली सिल्क स्टोल, भारत की सांस्कृतिक विरासत ने जीता अंतरराष्ट्रीय मंच पर दिल

    पीएम मोदी ने मेलोनी को भेंट किया शिरुई लिली सिल्क स्टोल, भारत की सांस्कृतिक विरासत ने जीता अंतरराष्ट्रीय मंच पर दिल

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी पांच देशों की यात्रा के दौरान इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जुड़े विशेष उपहार भेंट किए, जिसने एक बार फिर भारत की पारंपरिक कला और हस्तशिल्प की वैश्विक पहचान को मजबूती दी है। इस यात्रा के दौरान दिए गए उपहार केवल औपचारिक भेंट नहीं थे, बल्कि उनमें भारत की विविधता, परंपरा और सांस्कृतिक गहराई की झलक भी स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

    पीएम मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री को मूगा सिल्क स्टोल और शिरुई लिली सिल्क स्टोल भेंट किया, जो भारत के अलग-अलग क्षेत्रों की विशिष्ट कारीगरी और प्राकृतिक सौंदर्य को दर्शाते हैं। मूगा सिल्क असम की ब्रह्मपुत्र घाटी से आने वाला एक दुर्लभ और प्रतिष्ठित प्राकृतिक रेशम है, जिसे इसकी सुनहरी चमक और मजबूती के लिए जाना जाता है। यह सिल्क बिना किसी कृत्रिम रंग के तैयार किया जाता है और समय के साथ इसकी चमक और भी निखरती जाती है, जो इसे अत्यंत खास बनाता है।

    वहीं शिरुई लिली सिल्क स्टोल मणिपुर के शिरुई काशोंग पर्वत की धुंध भरी वादियों से प्रेरित है। इस क्षेत्र में पाया जाने वाला शिरुई लिली फूल अपनी दुर्लभता और अद्वितीय सुंदरता के लिए जाना जाता है। हल्के गुलाबी और सफेद रंग की पंखुड़ियों वाला यह फूल स्थानीय समुदाय की सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं का प्रतीक माना जाता है। इस स्टोल में न केवल इस फूल की सुंदरता को दर्शाया गया है, बल्कि वहां की लोककथाओं और सांस्कृतिक भावनाओं को भी बारीकी से उकेरा गया है।

    भारत द्वारा दिए गए इन उपहारों का एक खास पहलू यह भी है कि इनमें भारत और इटली की सांस्कृतिक समानताओं की झलक भी दिखाई देती है। इटली में भी लिली फूल को पवित्रता और सौंदर्य का प्रतीक माना जाता है, जिससे दोनों देशों के बीच एक अनोखा सांस्कृतिक जुड़ाव और समझ विकसित होती है। यह प्रतीकात्मक समानता दोनों देशों के संबंधों को और अधिक गहरा बनाती है।

    इसके अलावा पीएम मोदी ने इटली के राष्ट्रपति को आगरा की प्रसिद्ध पच्चीकारी कला से बना मार्बल इनले वर्क बॉक्स और भारतीय शास्त्रीय संगीत के महान कलाकारों की सीडी भी भेंट की। यह उपहार भारत की कला, संगीत और शिल्प परंपरा का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो सदियों से भारतीय संस्कृति की पहचान बने हुए हैं।

    आगरा की पच्चीकारी कला, जिसे मार्बल इनले वर्क भी कहा जाता है, विश्व प्रसिद्ध है और इसका ऐतिहासिक संबंध भी भारत और इटली की कला परंपराओं से जुड़ा हुआ माना जाता है। यह कला दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान का एक महत्वपूर्ण उदाहरण भी प्रस्तुत करती है।

    कुल मिलाकर प्रधानमंत्री मोदी द्वारा दिए गए ये सांस्कृतिक उपहार केवल औपचारिक भेंट नहीं, बल्कि भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत, शिल्प कौशल और परंपराओं को विश्व मंच पर प्रस्तुत करने का एक प्रभावशाली माध्यम बने हैं, जिससे भारत-इटली संबंधों को एक नई सांस्कृतिक गहराई मिली है।

  • तमिलनाडु में बड़ा राजनीतिक बदलाव: मुख्यमंत्री विजय ने 23 मंत्रियों को दिलाई शपथ, कांग्रेस की एंट्री से बढ़ा सियासी समीकरण

    तमिलनाडु में बड़ा राजनीतिक बदलाव: मुख्यमंत्री विजय ने 23 मंत्रियों को दिलाई शपथ, कांग्रेस की एंट्री से बढ़ा सियासी समीकरण


    नई दिल्ली । तमिलनाडु की राजनीति में गुरुवार को एक बड़ा बदलाव देखने को मिला जब मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने अपने मंत्रिमंडल का व्यापक विस्तार करते हुए 23 नए मंत्रियों को शपथ दिलाई। यह समारोह चेन्नई के लोक भवन में आयोजित किया गया, जहां राज्यपाल द्वारा सभी नवनियुक्त मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई गई। इस विस्तार के बाद राज्य की राजनीति में नए समीकरण बनते दिखाई दे रहे हैं, खासकर गठबंधन राजनीति के संदर्भ में इसे एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    नए मंत्रियों में सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कड़गम के 21 विधायक शामिल हैं, जबकि पहली बार कांग्रेस के दो विधायकों को भी मंत्रिमंडल में जगह दी गई है। कांग्रेस के एस. राजेश कुमार और पी. विश्वनाथन के मंत्री बनने को राजनीतिक दृष्टि से एक ऐतिहासिक बदलाव माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय बाद राज्य की सरकार में कांग्रेस की औपचारिक भागीदारी हुई है। यह घटनाक्रम राज्य की पारंपरिक राजनीतिक संरचना में नए बदलावों का संकेत देता है।

    मुख्यमंत्री विजय द्वारा किया गया यह विस्तार केवल प्रशासनिक कदम नहीं बल्कि राजनीतिक संतुलन साधने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है। लंबे समय से तमिलनाडु की राजनीति द्रविड़ दलों के इर्द-गिर्द घूमती रही है, लेकिन इस नए बदलाव ने गठबंधन की राजनीति को नई दिशा दे दी है। सरकार में कांग्रेस की एंट्री ने राजनीतिक हलकों में चर्चा को और तेज कर दिया है, क्योंकि यह कदम दशकों पुराने राजनीतिक परिदृश्य को प्रभावित कर सकता है।

    हालांकि इस विस्तार में सरकार के दो अन्य सहयोगी दलों इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग और विदुथलाई चिरुथाईगल कात्ची के विधायकों को फिलहाल जगह नहीं दी गई है। दोनों दलों की ओर से सरकार में शामिल होने की इच्छा जताई गई है, लेकिन मंत्रियों के नामों को लेकर अंतिम सहमति न बन पाने के कारण उन्हें इस चरण में शामिल नहीं किया जा सका। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल अस्थायी स्थिति है और आगामी फेरबदल में इन दलों को भी प्रतिनिधित्व मिल सकता है।

    संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार राज्य मंत्रिमंडल में अधिकतम 35 मंत्री हो सकते हैं। इस विस्तार के बाद मंत्रिमंडल की कुल संख्या 32 तक पहुंच गई है, जिससे अभी भी तीन पद खाली हैं। इन खाली पदों को लेकर राजनीतिक अटकलें तेज हैं और माना जा रहा है कि भविष्य में इन्हें सहयोगी दलों के लिए सुरक्षित रखा जा सकता है।

    नए मंत्रियों की सूची में कई नए चेहरे शामिल हैं, जिससे सरकार में युवा और नए नेतृत्व को भी अवसर मिला है। यह बदलाव प्रशासनिक स्तर पर नई ऊर्जा और गति लाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। साथ ही यह भी संकेत मिलते हैं कि सरकार आने वाले समय में अपनी नीतियों और कार्यशैली में और अधिक व्यापक दृष्टिकोण अपनाने की तैयारी में है।

    कुल मिलाकर यह कैबिनेट विस्तार तमिलनाडु की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। इससे न केवल सत्ता संतुलन बदला है बल्कि आने वाले समय में राज्य की राजनीतिक दिशा और गठबंधन समीकरणों पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ने की संभावना है।

  • वर्षों की मेहनत, अनुशासन और जुनून की उड़ान: तुलसी रेड्डी ने फतह की दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट

    वर्षों की मेहनत, अनुशासन और जुनून की उड़ान: तुलसी रेड्डी ने फतह की दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट


    नई दिल्ली। तेलंगाना के हैदराबाद क्षेत्र के कुतबुल्लापुर मंडल के बोवरामपेट गांव के रहने वाले पर्वतारोही तुलसी रेड्डी पालपुनूरी ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर सफलतापूर्वक पहुंचकर एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है जिसने पूरे देश को गौरव और प्रेरणा से भर दिया है। वर्षों की कठिन ट्रेनिंग, अनुशासन और निरंतर प्रयासों के बाद मिली यह सफलता केवल एक पर्वतारोहण उपलब्धि नहीं बल्कि आत्मविश्वास, धैर्य और जीवन में बदलाव की एक जीवंत कहानी है। तुलसी रेड्डी की यह यात्रा साधारण जीवनशैली से शुरू होकर असाधारण उपलब्धि तक पहुंचने की एक प्रेरणादायक मिसाल बन गई है।

    तुलसी रेड्डी की शुरुआत किसी पेशेवर खिलाड़ी या पर्वतारोही के रूप में नहीं हुई थी, बल्कि वे सामान्य जीवन जीते हुए फिटनेस की ओर आकर्षित हुए। उन्होंने स्वास्थ्य सुधार के लिए जिम जाना शुरू किया और धीरे-धीरे यह आदत उनके जीवन का जुनून बन गई। फिटनेस के प्रति बढ़ते समर्पण ने उन्हें एंड्योरेंस स्पोर्ट्स की ओर प्रेरित किया, जहां उन्होंने लंबी दूरी की दौड़ और कठिन शारीरिक चुनौतियों को अपनाया। इसके बाद उन्होंने पर्वतारोहण की दुनिया में कदम रखा और खुद को ऊंचाइयों की कठिन परिस्थितियों के लिए तैयार करना शुरू किया। लगातार मेहनत और अभ्यास के कारण उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय स्तर के अभियानों में भाग लिया और धीरे-धीरे उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में अपनी क्षमता साबित की।

    अपने अभियान के दौरान तुलसी रेड्डी ने केवल एवरेस्ट ही नहीं बल्कि दुनिया की कई कठिन चोटियों को भी सफलतापूर्वक पार किया। इनमें यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रस, दक्षिण अमेरिका की एकोंकागुआ, अफ्रीका की किलिमंजारो और भारत तथा आसपास के उच्च पर्वतीय क्षेत्रों की कई कठिन चोटियां शामिल हैं। इन सभी अभियानों ने उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से और अधिक मजबूत बनाया। कठिन मौसम, ऑक्सीजन की कमी और जोखिम भरे रास्तों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और हर चुनौती को सीख के रूप में स्वीकार किया। एवरेस्ट अभियान के दौरान भी उन्हें कई कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उनकी तैयारी और दृढ़ संकल्प ने उन्हें सफलता की ओर अग्रसर किया।

    एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचना उनके लिए केवल एक लक्ष्य की प्राप्ति नहीं था, बल्कि वर्षों की मेहनत, त्याग और परिवार तथा साथियों के सहयोग का परिणाम था। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार, गाइड्स और टीम को दिया जिन्होंने हर कदम पर उनका साथ निभाया। उनके परिवार ने इस उपलब्धि को गर्व और भावनात्मक क्षण बताया। तुलसी रेड्डी की यह उपलब्धि आज उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है जो जीवन में बड़े सपने देखते हैं लेकिन उन्हें पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत निरंतर हो तो कोई भी ऊंचाई असंभव नहीं होती।

  • राष्ट्रीय मुद्दों पर मंथन के लिए दिल्ली में उच्च स्तरीय बैठक, सरकार की रणनीति और संभावित बदलावों पर नजर

    राष्ट्रीय मुद्दों पर मंथन के लिए दिल्ली में उच्च स्तरीय बैठक, सरकार की रणनीति और संभावित बदलावों पर नजर


    नई दिल्ली ।
    विदेश दौरे से लौटने के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर सक्रिय राजनीतिक और प्रशासनिक मोड में दिखाई दे रहे हैं। गुरुवार को राजधानी दिल्ली में होने वाली मंत्रिपरिषद की अहम बैठक को लेकर पूरे राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब देश के सामने कई आंतरिक और बाहरी चुनौतियाँ मौजूद हैं और सरकार की नीतिगत दिशा पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। इस उच्च स्तरीय बैठक में सभी केंद्रीय मंत्रियों, स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्रियों और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी रहने की संभावना है, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि चर्चा केवल औपचारिक समीक्षा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसमें महत्वपूर्ण निर्णय और भविष्य की रणनीति पर भी मंथन किया जा सकता है।

    सूत्रों के अनुसार बैठक में सरकार विभिन्न मंत्रालयों के कार्यों की विस्तृत समीक्षा कर सकती है। खासतौर पर ऐसे विभाग जिन पर हाल के समय में प्रदर्शन को लेकर सवाल उठे हैं, उन पर अधिक ध्यान दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। इसके साथ ही देश की मौजूदा आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों को देखते हुए नीतिगत सुधारों पर भी विचार किया जा सकता है। बैठक में वैश्विक परिस्थितियों का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर कैसे पड़ रहा है, इस विषय को भी गंभीरता से लिया जा सकता है। विशेष रूप से ऊर्जा आपूर्ति, अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता और उसके घरेलू प्रभाव जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में रहने की संभावना है।

    इसी बीच देश में NEET परीक्षा से जुड़े विवाद ने सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती खड़ी कर दी है। लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा यह मुद्दा लगातार राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बना हुआ है। परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और संस्थागत कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों के बीच सरकार पर दबाव बढ़ा है कि वह इस पूरे मामले में ठोस और भरोसेमंद कदम उठाए। माना जा रहा है कि बैठक में इस विषय पर भी विस्तृत चर्चा हो सकती है और भविष्य में परीक्षा प्रणाली को अधिक मजबूत और सुरक्षित बनाने के लिए कुछ नए निर्णय सामने आ सकते हैं।

    इसके अलावा वैश्विक स्तर पर चल रहे तनावपूर्ण हालात भी भारत की नीति निर्धारण प्रक्रिया को प्रभावित कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा संसाधनों की स्थिति और आपूर्ति श्रृंखला में संभावित बाधाओं को देखते हुए सरकार इस दिशा में पहले से अधिक सतर्क रुख अपनाने की कोशिश कर रही है। बैठक में यह भी विचार किया जा सकता है कि आम जनता पर किसी भी तरह के आर्थिक दबाव को कम करने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं।

    राजनीतिक दृष्टि से भी इस बैठक को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसे सरकार के वर्तमान कार्यकाल की एक बड़ी समीक्षा बैठक के रूप में देखा जा रहा है। प्रशासनिक गलियारों में यह चर्चा भी है कि आने वाले समय में कुछ विभागों में बदलाव या नई जिम्मेदारियों का पुनर्वितरण संभव है। हालांकि इस पर कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है, लेकिन बैठक के एजेंडे को लेकर उत्सुकता लगातार बढ़ती जा रही है।

  • साइबर खतरों को लेकर गंभीर आरोप: डॉ. भार्गव मल्लप्पा ने मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाया

    साइबर खतरों को लेकर गंभीर आरोप: डॉ. भार्गव मल्लप्पा ने मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाया


    नई दिल्ली । डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराधों और निजता के उल्लंघन को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जब पीपल फोरम ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. भार्गव मल्लप्पा ने अपने परिवार को कथित रूप से निशाना बनाए जाने और मोबाइल टैपिंग जैसी गतिविधियों के आरोप लगाते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। यह मामला न केवल व्यक्तिगत सुरक्षा से जुड़ा बताया जा रहा है, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बढ़ते असुरक्षित वातावरण की ओर भी इशारा करता है, जहां आम नागरिकों की निजता खतरे में पड़ती दिख रही है।

    डॉ. मल्लप्पा ने अपने आरोपों में कहा है कि उनके परिवार के सदस्यों को संदिग्ध डिजिटल गतिविधियों के जरिए निशाना बनाया गया, जिसमें अज्ञात व्यक्ति द्वारा टेलीग्राम जैसे माध्यम से संदिग्ध लिंक भेजे जाने की घटना शामिल है। यह लिंक केवल उन्हें ही नहीं, बल्कि उनकी पत्नी और भाई को भी भेजा गया, जिससे यह आशंका और गहरी हो गई कि यह कोई सामान्य घटना नहीं बल्कि सुनियोजित डिजिटल हमला हो सकता है। इन घटनाओं को लेकर उन्होंने संबंधित शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग व्यवस्था में दर्ज कराई थी, जिसके बाद मामला जांच की प्रक्रिया में बताया जा रहा है।

    इस शिकायत में 13 अप्रैल को दर्ज की गई ऑनलाइन अपराध संबंधी प्रविष्टि का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें डिजिटल साक्ष्य और संबंधित रिकॉर्ड जांच एजेंसियों को सौंपे जाने की बात कही गई है। डॉ. मल्लप्पा का कहना है कि इस तरह की घटनाएं केवल व्यक्तिगत उत्पीड़न तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह नागरिकों की मौलिक स्वतंत्रता, निजता और सुरक्षा पर सीधा हमला हैं।

    उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मोबाइल टैपिंग, साइबर धोखाधड़ी और डिजिटल माध्यमों से डराने-धमकाने जैसी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जिन्हें अब अलग-अलग घटनाओं के रूप में नहीं देखा जा सकता। उनके अनुसार, यह एक व्यापक पैटर्न की ओर संकेत करता है, जिसे रोकने के लिए संस्थागत स्तर पर सख्त और त्वरित कार्रवाई आवश्यक है।

    डॉ. मल्लप्पा ने मानवाधिकार आयोग से अपील की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए, जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बढ़ती संदिग्ध गतिविधियों को देखते हुए देश के साइबर सुरक्षा ढांचे को और मजबूत करने की आवश्यकता है, ताकि आम नागरिक सुरक्षित वातावरण में डिजिटल सेवाओं का उपयोग कर सकें।

    उन्होंने जोर देकर कहा कि जागरूकता की कमी और तकनीकी सुरक्षा में खामियां ऐसे मामलों को और बढ़ावा देती हैं, इसलिए सरकार और संबंधित संस्थानों को मिलकर एक मजबूत रणनीति तैयार करनी चाहिए। इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या मौजूदा डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था नागरिकों की निजता की रक्षा करने में पर्याप्त है या नहीं, और क्या भविष्य में ऐसे मामलों पर और सख्त कदम उठाने की आवश्यकता होगी।

  • भारत-यूरोप संबंधों को नई दिशा, पीएम मोदी की पांच देशों की यात्रा से खुल सकते हैं विकास के नए रास्ते

    भारत-यूरोप संबंधों को नई दिशा, पीएम मोदी की पांच देशों की यात्रा से खुल सकते हैं विकास के नए रास्ते


    नई दिल्ली ।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पांच देशों की लंबी और महत्वपूर्ण विदेश यात्रा पूरी करने के बाद गुरुवार को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली लौट आए। इस यात्रा को भारत की विदेश नीति और वैश्विक संबंधों के विस्तार की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। इस दौरे के दौरान प्रधानमंत्री ने संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड्स, स्वीडन, नॉर्वे और इटली का दौरा किया, जहां विभिन्न देशों के शीर्ष नेतृत्व के साथ व्यापक चर्चा हुई।

    यात्रा के अंतिम चरण में इटली में प्रधानमंत्री मोदी और वहां की प्रधानमंत्री के बीच हुई बैठक विशेष रूप से चर्चा में रही। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर सहमति जताते हुए उन्हें ‘विशेष रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर तक ले जाने का फैसला किया। यह कदम आने वाले समय में दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग को नई गति देने वाला माना जा रहा है।

    इस मुलाकात के दौरान कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर विस्तार से बातचीत हुई, जिनमें रक्षा, ऊर्जा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, विज्ञान और प्रौद्योगिकी शामिल रहे। दोनों देशों ने आगामी वर्षों में व्यापारिक संबंधों को कई गुना बढ़ाने का लक्ष्य भी निर्धारित किया है। इसके साथ ही शिक्षा, संस्कृति और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी है।

    इस यात्रा के दौरान वैश्विक परिस्थितियों पर भी विचार-विमर्श हुआ, जिसमें पश्चिम एशिया की स्थिति और रूस-यूक्रेन संघर्ष जैसे विषय प्रमुख रहे। इन चर्चाओं के जरिए भारत ने अपने संतुलित और स्पष्ट कूटनीतिक दृष्टिकोण को एक बार फिर दुनिया के सामने रखा है। यह दर्शाता है कि भारत अब वैश्विक मंच पर केवल दर्शक नहीं बल्कि एक सक्रिय और निर्णायक भूमिका निभा रहा है।

    दिल्ली लौटने के तुरंत बाद प्रधानमंत्री मोदी का कार्यक्रम भी काफी व्यस्त रहा। राजधानी पहुंचते ही उन्होंने शाम को एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें सरकार के कामकाज की समीक्षा और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की गई। इस बैठक को नीति निर्माण और प्रशासनिक सुधारों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस पांच देशों की यात्रा से भारत को कई स्तरों पर लाभ मिल सकता है। एक ओर जहां विदेशी निवेश और व्यापारिक अवसरों में बढ़ोतरी की संभावना है, वहीं दूसरी ओर तकनीकी सहयोग और ऊर्जा क्षेत्र में नई संभावनाएं खुल सकती हैं। यूरोपीय देशों और पश्चिम एशिया के साथ मजबूत होते संबंध भारत की आर्थिक और रणनीतिक स्थिति को और अधिक सुदृढ़ करेंगे।

    इसके अलावा, इस यात्रा से भारतीय उद्योगों और स्टार्टअप्स के लिए भी नए अवसर पैदा हो सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ने से रोजगार के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है और देश की आर्थिक वृद्धि को भी गति मिल सकती है।

  • पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर दिल्ली में श्रद्धांजलि सभा, कांग्रेस नेताओं ने किया नमन

    पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर दिल्ली में श्रद्धांजलि सभा, कांग्रेस नेताओं ने किया नमन

    नई दिल्ली । पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 35वीं पुण्यतिथि के अवसर पर राजधानी दिल्ली स्थित वीरभूमि में बुधवार सुबह श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व सहित कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में पहुंचे। सुबह से ही परिसर में श्रद्धा और भावनाओं का माहौल देखने को मिला, जहां लोग शांत वातावरण में पूर्व प्रधानमंत्री को नमन करते नजर आए। सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने परिवार के अन्य सदस्यों के साथ वीरभूमि पहुंचकर राजीव गांधी को श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस दौरान पूरा वातावरण गंभीर और भावुक बना रहा, जबकि कार्यकर्ताओं की भी भारी मौजूदगी देखने को मिली।

    कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और पूरे क्षेत्र में निगरानी व्यवस्था को मजबूत रखा गया था। श्रद्धांजलि समारोह में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष सहित कई वरिष्ठ नेता भी उपस्थित रहे और सभी ने राजीव गांधी के राजनीतिक जीवन और देश के प्रति उनके योगदान को याद किया। नेताओं ने उन्हें आधुनिक भारत की सोच रखने वाला दूरदर्शी नेता बताया और उनके कार्यकाल में किए गए विकास कार्यों को भी स्मरण किया।

    इस अवसर पर पार्टी की ओर से देशभर में भी अलग-अलग स्थानों पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें कई जगह सामाजिक गतिविधियां जैसे रक्तदान शिविर और पौधारोपण कार्यक्रम भी शामिल रहे। राजधानी दिल्ली में वीरभूमि के बाहर सुबह से ही कार्यकर्ताओं और समर्थकों की आवाजाही बनी रही। लोग फूल लेकर पहुंचे और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी श्रद्धांजलि व्यक्त की।

    राजीव गांधी का निधन 21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरुम्बुदुर में एक चुनावी सभा के दौरान हुआ था। उस दौरान एक आत्मघाती हमलावर ने माला पहनाने के बहाने उनके करीब आकर विस्फोट कर दिया था, जिसमें उनकी मृत्यु हो गई थी। यह घटना देश के इतिहास में एक अत्यंत दुखद अध्याय के रूप में दर्ज है, जिसने पूरे राष्ट्र को शोक में डुबो दिया था।

    तब से हर वर्ष 21 मई को कांग्रेस पार्टी और उनके समर्थक राजीव गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं और उनके योगदान को याद करते हैं। 35 वर्ष बाद भी यह दिन उनके राजनीतिक जीवन, विचारों और देश के लिए किए गए कार्यों को स्मरण करने का अवसर बन गया है, जहां नेता और कार्यकर्ता एकजुट होकर उन्हें नमन करते हैं।

  • कैंसर से पीड़ित मरीजों के लिए एक खुशखबरी आई है। भारतीय दवाई नियामक बोर्ड ने कैंसर के लिए 7 मिनट टेंकेट्रिक इंजेक्शन को मंजूरी दे दी है।

    कैंसर से पीड़ित मरीजों के लिए एक खुशखबरी आई है। भारतीय दवाई नियामक बोर्ड ने कैंसर के लिए 7 मिनट टेंकेट्रिक इंजेक्शन को मंजूरी दे दी है।


    नई दिल्ली । भारत में हर वर्ष हजारों की संख्या में लोग कैंसर की चपेट में आकर मौत के मुंह में समा जाते हैं। लाखों भारतीय हर समय इस जानलेवा बीमारी से जूझ रहे हैं। इतना ही नहीं जितनी भी रिपोर्ट्स इस बीमारी को लेकर सामने आती हैं, उसमें भारतीयों के ऊपर सबसे बड़ा खतरा कैंसर को ही बताया जाता है। कैंसर को लेकर कई लोगों की आम धारणा है कि बीमारी से पहले इंसान इसके इलाज से ज्यादा कमजोर हो जाता है। अब इस परेशानी को दूर करने के लिए कैंसर की एक नई ‘7 मिनट कैंसर इंजेक्शन’ को मंजूरी मिली है। इससे कैंसर का इलाज काफी आसान और सरल होने की संभावना है।
    मेडीकल के क्षेत्र की बड़ी कंपनी रोश की कैंसर दवा के नए टेंकेट्रिक इंजेक्शन को भारत दवा नियामक संस्था CDSCO ने मंजूरी दे दी है। मुंबई के कैंसर विशेषज्ञ डॉक्टर रमन नारंग के मुताबिक सामान्य तौर पर इम्यूनोथेरेपी में दवाईयां नसों के जरिए दी जाती है, जिसमें 30 मिनट से एक घंटे का वक्त लगता है। लेकिन इस नए इंजेक्शन में सिर्फ सात मिनट का वक्त लगता है। दूसरी बात इसे ड्रिप के जरिए नहीं बल्कि त्वचा के जरिए भी दिया जा सकता है।
    कैसे काम करती है नया 7 मिनट टेकेंट्रिक इंजेक्शन
    सामान्य रूप से कैंसर का इलाज कीमोथैरेपी के जरिए किया जाता है। इस इलाज प्रक्रिया में थैरेपी सीधा कैंसर कोशिकाओं पर हमला करती हैं। इसकी वजह से शरीर की जो स्वस्थ कोशिकाओं होती हैं, वह भी प्रभावित होती हैं, जिसकी वजह से मरीजों को बाल झड़ना, कमजोरी, उल्टी और थकान जैसी समस्या महसूस होती है। कीमोथैरपी की प्रक्रिया में इंसान बहुत ही ज्यादा कमजोर भी हो जाता है।
    विशेषज्ञों के मुताबिक नई 7 मिनट टेकेंट्रिक इंजेक्शन की इम्यूनोथेरेपी अलग तरीके से काम करती है। डॉक्टर्स के मुताबिक यह इंजेक्शन शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाकर कैंसर कोशिकाओं से लड़ने में मदद करती है। इस इंजेक्शन की दवा शरीर में मौजूद कैंसर कोशिकाओं को छिपने नहीं देती बल्कि प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत करके सीधा उस पर हमला करती है। दूसरी बात कैंसर की दवाई को सामान्य तौर पर नसों के जरिए शरीर में भेजा जाता है, लेकिन इस इंजेक्शन को त्वचा के नीचे से सीधा प्रवेशित कराया जा सकता है। इसकी वजह से यह जल्दी काम करती है।
    इस मामले के जानकार लोगों के मुताबिक, 7 मिनट इंजेक्शन भारत में बढ़ते कैंसर मरीजों के लिए एक चमत्कार साबित हो सकता है। इससे लंबी दूरी से अस्पताल आने वाले मरीजों को राहत मिलेगी, दूसरी तरफ अस्पताल में भी उनको कम समय लगेगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत में हर साल 14 से 15 लाख नए कैंसर मरीज सामने आते हैं। अगर यह दवाई कारगर सिद्द होती है तो इससे इन मरीजों के लिए इलाज थोड़ा आसान साबित होगा।
    दवाई अपने साथ कुछ समस्याएं लेकर भी आई
    हर दवाई के अपने कुछ साइड इफेक्ट भी होते हैं। डॉक्टर्स के मुताबिक यह इंजेक्शन हर कैंसर मरीज के लिए उपयुक्त नहीं है। इसके अलावा इसके कुछ साइड इफेक्ट जैसे- बुखार, कमजोरी, सांस लेने में दिक्कत, स्किन की दिक्कत या फेंफड़ों में सूजन भी आ सकती है। ऐसे में किसी भी तरह के इलाज के लिए डॉक्टर्स की निगरानी बहुत जरूरी है।
    भले ही कंपनी और डॉक्टर्स इस इलाज को कैंसर मरीजों के लिए चमत्कार बता रहे हैं। लेकिन इसकी सबसे बड़ी परेशानी इसकी कीमत है। रिपोर्ट्स के मुताबिक एक कैंसर मरीज को अपना इलाज पूरा करवाने के लिए इस इंजेक्शन के कम से कम 6 डोज की जरूरत होती है। वर्तमान में इस इंजेक्शन के एक डोज की कीमत 3.7 लाख रुपए है। ऐसे में अगर कोई पूरा इलाज लेता है, तो केवल दवाई का खर्च ही 22 लाख रुपए के आसपास पहुंच जाएगा। भारत जैसे मध्यम आय वाली जनता के लिए यह रकम बहुत ज्यादा है।
    भले ही कंपनी और रिपोर्ट्स इस इलाज को बेहतर बता रही हों। लेकिन डॉक्टर्स ने इसको लेकर अपना दूसरा नजरिया भी रखा है। डॉक्टर्स का कहना है कि यह कोई जादुई इलाज नहीं है। लेकिन वर्तमान में कैंसर मरीजों को लंबे इलाज और परेशानी का सामना करना पड़ता है, उससे राहत देने के लिए यह पर्याप्त है।
  • रोम से स्वदेश रवाना हुए PM मोदी…. अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मजबूत करेगा 5 देशों का दौरा

    रोम से स्वदेश रवाना हुए PM मोदी…. अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मजबूत करेगा 5 देशों का दौरा


    रोम (इटली)।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने अपने पांच देशों के आधिकारिक दौरे को पूरा करते हुए बुधवार को इटली (Italy) के रोम (Rome) से भारत के लिए प्रस्थान किया। यह दौरा भारत की वैश्विक कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मजबूत करने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


    इटली यात्रा में रिश्तों को मिली नई मजबूती

    प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी इटली यात्रा को बेहद सफल बताते हुए कहा कि उनकी चर्चा इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर केंद्रित रही। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि भारत और इटली ने अपने संबंधों को स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप तक पहुंचाने का निर्णय लिया है, जिससे आने वाले समय में दोनों देशों के सहयोग को नई गति मिलेगी। पीएम मोदी ने इटली के राष्ट्रपति सर्जियो मटेरेला से मुलाकात कर व्यापार, निवेश, संस्कृति, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, महत्वपूर्ण खनिज, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा की।


    आतंक के वित्तपोषण के खिलाफ भारत इटली की पहल वैश्विक नजीर: मोदी

    पीएम मोदी ने कहा कि आतंकवाद मानवता के लिए एक गंभीर चुनौती है और भारत-इटली दोनों इस बात पर एकमत हैं। आतंकवाद के वित्तपोषण के खिलाफ हमारी पहल ने पूरी दुनिया के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत किया है। पीएम मोदी ने कहा, भारत और इटली ने स्पष्ट संदेश दिया है कि जिम्मेदार लोकतंत्र न केवल आतंकवाद की निंदा करते हैं, बल्कि इसके वित्तीय नेटवर्क को बाधित करने के लिए ठोस कदम भी उठाते हैं। पीएम ने यूक्रेन और पश्चिम एशिया संकट के बारे में कहा कि हम यूक्रेन, पश्चिम एशिया और अन्य तनावों के संबंध में लगातार एक-दूसरे के संपर्क में हैं। भारत का दृष्टिकोण स्पष्ट है कि सभी समस्याओं का समाधान संवाद और कूटनीति से होना चाहिए। इटली की पीएम जियोर्जिया मेलनी के साथ वार्ता के बाद साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में मोदी ने कहा, दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के साथ-साथ हमारी सेनाओं में भी सहयोग बढ़ रहा है।


    इटली दौरे की बड़ी उपलब्धियां

    – दोनों देशों के संबंध को विशेष रणनीतिक साझेदारी में बदलने से द्विपक्षीय संबंध तेजी से आगे बढ़ेगा।
    – भारत-इटली रक्षा औद्योगिक रोडमैप: रक्षा सहयोग और रक्षा उत्पादन तंत्र मजबूत होगा।
    – दुर्लभ खजिनों के क्षेत्र में सहयोग का एमओयू से खोज-खनन-उत्पादन में तेजी। आधुनिक तकनीक और निवेश में सहयोग बढ़ेगा।
    – ईडी-इटली के वित्तीय निगरानी विभाग में सहयोग से टैक्स संबंधी अपराधों, धनशोधन और आतंकवाद के खिलाफ फंडिंग पर मिलकर काम होगा।
    – भारत-इटली में 2027 को संस्कृति और पर्यटन वर्ष के रूप में मनाने का समझौता: दोनों देशों में सांस्कृतिक आदान-प्रदान और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
    – भारतीय नर्सों को काम के लिए इटली भेजने का समझौता: इससे भारतीय स्वास्थ्य क्षेत्र में रोजगार बढ़ेगा। दुनिया में भारतीय कार्यबल की गुणवत्ता को मान्यता।
    – गुजरात के लोथल में नेशनल मेरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स निर्माण के एमओयू से भारतीय सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण होगा।
    – उच्च शिक्षा और शोध में सहयोग का रोडमैप: शोध की गुणवत्ता, औद्योगिक संपर्क और आधुनिक शिक्षण का तंत्र विकसित होगा। क्षमता निर्माण होगा।
    – समुद्री परिवहन क्षेत्र में सहयोग के लिए एमओयू से समुद्री बुनियादी ढांचा मजबूत होगा।


    रणनीतिक साझेदारी को मिला नया आयाम

    दोनों देशों ने संयुक्त रणनीतिक कार्य योजना 2025-29 की प्रगति की समीक्षा की और व्यापार, निवेश, तकनीक, रक्षा, ब्लू इकोनॉमी, कनेक्टिविटी, शिक्षा और जन-से-जन संबंधों जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई। इटली सरकार ने भी इस यात्रा को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि भारत और इटली के संबंध अब अपने सबसे उच्च स्तर पर पहुंच चुके हैं।


    MEA ने बताया यात्रा को सफल

    विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी इस दौरे को बेहद सफल बताया। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी की 5 देशों की यात्रा के अंतिम चरण में इटली में कई महत्वपूर्ण परिणाम सामने आए हैं। पीएम मोदी ने 15 से 20 मई तक संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली का दौरा किया। इस दौरान भारत ने कई देशों के साथ अपने आर्थिक, रणनीतिक और तकनीकी संबंधों को मजबूत किया।


    भारत और इटली के बीच का द्विपक्षीय व्यापार

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इससे पहले जून 2024 में ग्रुप ऑफ सेवन (G7) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए इटली गए थे। अब उनका यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब भारत और इटली के बीच द्विपक्षीय संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं।

    विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों देश संयुक्त रणनीतिक कार्य योजना 2025-2029 को सक्रिय रूप से लागू कर रहे हैं। इस व्यापक रोडमैप के तहत व्यापार, निवेश, रक्षा और सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, नवाचार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और लोगों के बीच संपर्क जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया जा रहा है।

    मंत्रालय ने बताया कि वर्ष 2025 में भारत-इटली द्विपक्षीय व्यापार 16.77 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है। वहीं अप्रैल 2000 से सितंबर 2025 के बीच इटली से भारत में 3.66 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) दर्ज किया गया। दोनों देश रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।


    यात्रा के दौरान मिले कई सम्मान

    इसी यात्रा क्रम में नॉर्वे दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ग्रैंड क्रॉस ऑफ द रॉयल ऑर्डर ऑफ मेरिट’ से सम्मानित किया गया, जो उनका 32वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान है। नॉर्वे में उन्होंने भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भी भाग लिया। इसके अलावा स्वीडन में उन्हें ‘रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार’ से सम्मानित किया गया और दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करते हुए रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने पर सहमति जताई।

  • ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की एंट्री से सियासत गरम, 2029 चुनाव और केजरीवाल संग गठजोड़ पर अभिजीत ने दिया बयान

    ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की एंट्री से सियासत गरम, 2029 चुनाव और केजरीवाल संग गठजोड़ पर अभिजीत ने दिया बयान


    नई दिल्ली।
    सोशल मीडिया पर अचानक उभरी ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ इन दिनों राजनीतिक और डिजिटल दोनों मंचों पर चर्चा का विषय बनी हुई है। इस आंदोलन के पीछे 30 वर्षीय अभिजीत दीपके हैं, जिन्होंने हाल ही में बॉस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस में मास्टर्स किया है। उनका दावा है कि यह सिर्फ एक पार्टी नहीं, बल्कि देश के युवाओं की नाराजगी और हताशा की आवाज है।

    अभिजीत ने बताया कि कुछ दिन पहले तक वह अमेरिका में नौकरी के लिए आवेदन कर रहे थे, लेकिन चीफ जस्टिस की उस टिप्पणी ने उन्हें झकझोर दिया जिसमें सोशल मीडिया पर सक्रिय युवाओं की तुलना ‘कॉकरोच’ और ‘परजीवी’ से की गई थी। इसी के बाद उन्होंने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि अगर यही बयान किसी राजनीतिक नेता ने दिया होता तो शायद इतना असर नहीं होता, लेकिन जब संविधान की रक्षा करने वाले पद पर बैठा व्यक्ति ऐसी टिप्पणी करे तो युवाओं को चोट पहुंचना स्वाभाविक है।

    अभिजीत के मुताबिक, पार्टी को शुरू हुए महज कुछ ही दिनों में लाखों लोग इससे जुड़ गए। इंस्टाग्राम पर पार्टी के 33 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हो चुके हैं, जबकि वेबसाइट पर लाखों युवाओं ने रजिस्ट्रेशन कराया है। उनका कहना है कि यह किसी प्रायोजित अभियान का नतीजा नहीं, बल्कि युवाओं के भीतर जमा गुस्से का विस्फोट है।

    अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी से रिश्तों को लेकर भी अभिजीत ने खुलकर बात की। उन्होंने माना कि वह 2020 से 2023 के बीच आम आदमी पार्टी के कम्युनिकेशन विभाग से जुड़े थे और शिक्षा-स्वास्थ्य मॉडल से प्रभावित होकर काम किया था। हालांकि उन्होंने साफ किया कि फिलहाल उनकी नई मुहिम किसी भी पारंपरिक राजनीतिक दल से दूरी बनाए रखना चाहती है।

    केजरीवाल के समर्थन को लेकर उन्होंने कहा कि कोई भी समर्थन दे सकता है, लेकिन ‘जेन-जी’ के युवा नहीं चाहते कि इस आंदोलन पर किसी स्थापित पार्टी की छाया पड़े। 2029 के चुनाव लड़ने के सवाल पर अभिजीत ने कहा कि अभी इस पर फैसला लेना जल्दबाजी होगी। पहले युवाओं की राय ली जाएगी और उसी आधार पर आगे की रणनीति तय होगी। उनका कहना है कि मौजूदा राजनीति युवाओं की असली समस्याओं से दूर हो चुकी है और अब राजनीतिक विमर्श बदलने की जरूरत है।

    कॉकरोच जनता पार्टी ने अपनी वेबसाइट पर पांच सूत्रीय एजेंडा भी जारी किया है। इसमें न्यायपालिका और चुनाव आयोग की स्वतंत्रता, महिलाओं को 50 प्रतिशत प्रतिनिधित्व, मीडिया स्वामित्व पर सवाल और राजनीतिक जवाबदेही जैसे मुद्दे शामिल हैं। अभिजीत का कहना है कि यह एक आदर्श लोकतांत्रिक व्यवस्था की दिशा में सोच है।

    उन्होंने मौजूदा राजनीति पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में वर्षों से हिंदू-मुस्लिम जैसे मुद्दों पर राजनीति हो रही है, जबकि युवाओं के सामने रोजगार, शिक्षा, तकनीक और भविष्य जैसे बड़े सवाल खड़े हैं। उन्होंने ‘नीट पेपर लीक’ मामले का जिक्र करते हुए कहा कि सिस्टम की विफलता ने कई युवाओं का भविष्य प्रभावित किया है।

    अभिजीत ने दावा किया कि यह आंदोलन केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहेगा। उनका कहना है कि देश के युवा अब अपनी आवाज लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से उठाने के लिए तैयार हैं। फंडिंग और संगठनात्मक ढांचे को लेकर उन्होंने कहा कि फिलहाल टीम रणनीति तैयार कर रही है और जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाया जाएगा। उनका उद्देश्य एक स्वतंत्र और लंबे समय तक चलने वाला युवा आंदोलन खड़ा करना है।