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  • सुप्रीम कोर्ट ने कॉकरोच प्रदर्शन मामलों में कमेटी की शक्तियां तय कीं, कहा- FIR का आदेश देने का अधिकार सिर्फ अदालत को

    सुप्रीम कोर्ट ने कॉकरोच प्रदर्शन मामलों में कमेटी की शक्तियां तय कीं, कहा- FIR का आदेश देने का अधिकार सिर्फ अदालत को

    नई दिल्ली ।कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामलों की जांच के लिए गठित पांच सदस्यीय हाई-पावर्ड एनक्वायरी कमेटी की शक्तियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। अदालत ने कहा कि कमेटी आरोपों की जांच कर सकती है, पीड़ितों की पहचान कर सकती है और अपनी सिफारिशें दे सकती है, लेकिन किसी आपराधिक जांच के लिए FIR दर्ज कराने का आदेश देने का अधिकार केवल सुप्रीम कोर्ट के पास रहेगा।

    भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने यह टिप्पणी की। पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं। अदालत ने कहा कि कमेटी सीधे FIR दर्ज करने का आदेश नहीं दे सकती और उसे अदालत की निगरानी में काम करना होगा। कार्यवाही के दौरान आने वाली किसी समस्या के समाधान के लिए कमेटी सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकती है।

    अदालत ने कमेटी को अपनी सहायता के लिए अमिकस या वकील नियुक्त करने की भी अनुमति दी है। इसके अलावा कमेटी अपनी जांच से संबंधित जानकारी व्यापक स्तर पर सार्वजनिक कर सकती है और लोगों से सुझाव तथा आपत्तियां मांग सकती है। संवेदनशील और जरूरतमंद गवाहों तक पहुंच बनाने के लिए अलग व्यवस्था भी तैयार की जा सकती है।

    इसमें हेल्पलाइन जैसी व्यवस्था शामिल हो सकती है, ताकि वे लोग भी अपनी बात कमेटी तक पहुंचा सकें जो सीधे उसके सामने उपस्थित नहीं हो सकते। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र और दिल्ली पुलिस की ओर से अदालत को बताया कि कमेटी की पहली बैठक 15 सितंबर को निर्धारित है।

    सुप्रीम कोर्ट ने एक सितंबर के अपने आदेश का भी उल्लेख किया। अदालत ने उस समय संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए प्रदर्शन से जुड़े आपराधिक मामलों को खत्म करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि 20 से 25 जुलाई के बीच हुए प्रदर्शनों के संबंध में दर्ज FIR पर आगे कार्रवाई या जांच नहीं की जाएगी और उन्हें बंद माना जाएगा। साथ ही इन घटनाओं के संबंध में नई FIR दर्ज नहीं करने का निर्देश भी दिया गया था।

    पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में गठित HPEC को 20 जुलाई के छात्र प्रदर्शन से जुड़े विभिन्न आरोपों की स्वतंत्र जांच करनी है। कमेटी पुलिस पर अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों के साथ सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोपों की भी जांच करेगी। उसे दस्तावेजी सबूत, लोगों के प्रतिवेदन और गुमनाम शिकायतें लेने की अनुमति है।

    सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी की संरचना बदलने की मांग भी खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि कमेटी का गठन स्वयं सुप्रीम कोर्ट ने किया है और काम शुरू होने से पहले इसमें बदलाव नहीं किया जाएगा। हालांकि, किसी पक्ष को कमेटी के कामकाज को लेकर चिंता होने पर वह अदालत के सामने अपनी बात रख सकता है।

    सुनवाई के दौरान 14 वर्षीय लड़की को कथित तौर पर धमकाने और परेशान किए जाने का मामला भी सामने आया। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को संसद मार्ग थाने में दर्ज FIR पर तत्काल कार्रवाई कर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। लड़की फिलहाल उत्तर प्रदेश में रह रही है। अदालत ने उत्तर प्रदेश पुलिस को लड़की और उसके परिवार को पुलिस सुरक्षा तथा जरूरी सुरक्षा उपाय उपलब्ध कराने को भी कहा।

    अदालत ने कहा कि यदि किसी बच्चे या उसके परिवार को आपराधिक कार्रवाई आगे नहीं बढ़ाने के लिए डराया-धमकाया जा रहा है तो HPEC की जांच के नतीजे का इंतजार नहीं किया जा सकता। लड़की के बयान की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी बताते हुए कोर्ट ने कहा कि आरोप सही पाए जाने पर जांच को उसके तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया जाना चाहिए।

    सुनवाई में स्वातंत्र भारद्वाज से जुड़े आपराधिक मामलों का भी उल्लेख हुआ। उनके खिलाफ कथित हमले, आपराधिक धमकी और POCSO से जुड़े मामलों का जिक्र किया गया। वहीं, वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने कमेटी की संरचना, संवेदनशील गवाहों की पहुंच, अंतरिम मुआवजा, पेलेट गन के इस्तेमाल और प्रदर्शनकारियों के डेटा के कथित संग्रह को लेकर चिंताएं रखीं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संबंधित पक्ष अपनी सामग्री और सुझाव कमेटी के सामने रख सकते हैं और जरूरत पड़ने पर अदालत भी इन मुद्दों को स्पष्ट करेगी।

  • राघव चड्ढा और AAP में वोटर लिस्ट विवाद, दिल्ली में नाम जुड़ने पर चड्ढा ने तंज के साथ आरोपों का दिया जवाब

    राघव चड्ढा और AAP में वोटर लिस्ट विवाद, दिल्ली में नाम जुड़ने पर चड्ढा ने तंज के साथ आरोपों का दिया जवाब

    नई दिल्ली ।पंजाब की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से नाम हटने और दिल्ली की मतदाता सूची में नाम जुड़ने को लेकर बीजेपी सांसद राघव चड्ढा और आम आदमी पार्टी के बीच विवाद बढ़ गया है। आम आदमी पार्टी की ओर से सवाल उठाए जाने के बाद चड्ढा ने पलटवार करते हुए पार्टी पर तीखा तंज कसा। उन्होंने कहा कि AAP की हालत ऐसी हो गई है कि उन्हें सपने में भी वह भूत की तरह नजर आते हैं और पार्टी लगातार उनके नाम का जिक्र करती रहती है।

    राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी की स्थिति की तुलना एक ऐसी एक्स गर्लफ्रेंड से की, जिसे उसका बॉयफ्रेंड छोड़कर आगे बढ़ चुका है, लेकिन वह अब भी उसके प्यार में है। इसी दौरान उन्होंने तंज करते हुए कहा कि उन्हें डर है कि कहीं कोई दिलजला आशिक की तरह उनकी याद में अपनी नसें न काट ले। चड्ढा ने कहा कि उन्हें आम आदमी पार्टी की चिंता रहती है।

    दरअसल, पंजाब की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से अपना नाम गायब होने के बाद राघव चड्ढा ने नाराजगी जताई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि पंजाब की AAP सरकार ने राजनीतिक विद्वेष के कारण उनका नाम वोटर लिस्ट में शिफ्टेड कैटेगरी में डाल दिया। चड्ढा का कहना था कि पार्टी छोड़ने के बाद से AAP उन्हें लगातार निशाना बना रही है।

    चड्ढा ने यह भी कहा था कि ऐसा लगता है कि वह अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी को परेशान कर रहे हैं। उनके मुताबिक पार्टी के लोग दिन-रात उनके बारे में सोच रहे हैं और उन पर हमला करने की कोशिश कर रहे हैं।

    इसके बाद आम आदमी पार्टी ने दिल्ली की वोटर लिस्ट में राघव चड्ढा का नाम जुड़ने को लेकर चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। AAP की दिल्ली इकाई के प्रमुख सौरभ भारद्वाज ने कहा कि 31 अगस्त को जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में राजिंदर नगर के संबंधित पोलिंग पार्ट में 746 मतदाता थे। बाद में राघव चड्ढा का नाम 747वें मतदाता के रूप में जुड़ा।

    सौरभ भारद्वाज के अनुसार राजिंदर नगर की मतदाता सूची में सीरियल नंबर 747 पर राघव चड्ढा, पिता सुनील चड्ढा और उम्र 37 साल दर्ज है। उन्होंने चड्ढा के तीन सितंबर के बयान का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने पंजाब में दोबारा मतदाता के तौर पर पंजीकरण कराने की बात कही थी। भारद्वाज ने चुनाव आयोग से पूछा कि जब ड्राफ्ट सूची में 746 नाम थे तो 747वां नाम किस प्रक्रिया के तहत जोड़ा गया।

    AAP प्रवक्ता अनुराग ढांडा ने भी इस मामले में राघव चड्ढा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के मुताबिक चड्ढा ने 26 अगस्त को दिल्ली में वोट बनवाने के लिए फॉर्म-6 दाखिल किया था और दो सितंबर को उनका आवेदन मंजूर हो गया। ढांडा ने आरोप लगाया कि इसके बावजूद तीन सितंबर को चड्ढा पंजाब सरकार पर उनका वोट कटवाने का आरोप लगा रहे थे।

    राघव चड्ढा ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया और कहा कि उन्होंने चुनाव आयोग की सभी लागू गाइडलाइंस और तय प्रक्रिया का पालन किया है। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने भी स्पष्ट किया कि उनका नाम नियमों के तहत जोड़ा गया। कार्यालय के मुताबिक 26 अगस्त को फॉर्म-6 के जरिए आवेदन किया गया था और सात दिन की अनिवार्य नोटिस अवधि पूरी होने के बाद दो सितंबर को निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी ने आवेदन मंजूर किया।

    मुख्य निर्वाचन कार्यालय के अनुसार आवेदन मंजूर होने के बाद संबंधित नाम मसौदा मतदाता सूची की अंतिम क्रम संख्या के बाद डेटाबेस में दिखाई देता है। अंतिम मतदाता सूची पुनरीक्षण अवधि पूरी होने और सभी दावों तथा आपत्तियों के निपटारे के बाद प्रकाशित की जाएगी।

  • अभिजीत दीपके का बड़ा ऐलान, कहा- चुनावी राजनीति से आगे बढ़कर बदलाव लाना है, कॉकरोच आंदोलन को जारी रखने की योजना

    अभिजीत दीपके का बड़ा ऐलान, कहा- चुनावी राजनीति से आगे बढ़कर बदलाव लाना है, कॉकरोच आंदोलन को जारी रखने की योजना


    नई दिल्ली ।
    कॉकरोच जनता पार्टी के नेता अभिजीत दीपके ने कहा है कि उनकी पार्टी और आंदोलन का उद्देश्य केवल चुनाव लड़ना नहीं है। उन्होंने एक हालिया इंटरव्यू में अपने भविष्य के प्लान, कॉकरोच आंदोलन और CJP की आगे की दिशा को लेकर बात की। दीपके ने कहा कि अब जब वे मैदान में उतर चुके हैं तो आंदोलन को जारी रखने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं।

    बीते मई महीने में देश के मुख्य न्यायाधीश की एक टिप्पणी के बाद 30 वर्षीय अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर कॉकरोच जनता पार्टी की स्थापना की थी। उन्होंने इसे शुरुआत में एक तंज के तौर पर शुरू किया था। इसके बाद इस मुहिम से लाखों लोग जुड़ गए और दीपके की पहचान भी तेजी से बढ़ी।

    बाद में अभिजीत दीपके अमेरिका से भारत लौटे। भारत आने के बाद उन्होंने और उनकी पार्टी ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के खिलाफ हुए प्रदर्शनों की अगुवाई की थी। अब उन्होंने एक इंटरव्यू में अपने इस फैसले और आंदोलन को आगे बढ़ाने की योजना के बारे में विस्तार से बात की है।

    अभिजीत दीपके ने बताया कि सरकार की ओर से उन्हें ‘देश के लिए खतरा’ और ‘एंटी नेशनल’ जैसे टैग दिए जाने की बात उन्हें काफी खटकी थी। उन्होंने कहा कि इन बातों से उन्हें बहुत दुख हुआ। दीपके के अनुसार उनके परिवार और वकील ने उन्हें भारत नहीं जाने की सलाह दी थी। इसके बावजूद उन्होंने अमेरिका से भारत लौटने का निर्णय लिया।

    दीपके ने कहा कि जब उनकी अपनी सरकार ने उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया, तभी उन्होंने भारत लौटने का फैसला किया। उनके मुताबिक इस बात ने उन्हें काफी दुख पहुंचाया। उन्होंने सवाल किया कि जब वह विदेश में थे, तब क्या उनकी सरकार को उनके साथ खड़ा नहीं होना चाहिए था।

    उन्होंने कहा कि उन्होंने देश लौटने का फैसला इसलिए किया ताकि यह साबित कर सकें कि वह देश की सुरक्षा के लिए कोई खतरा नहीं हैं। दीपके ने यह भी कहा कि वह अपने देश से प्यार करते हैं, लेकिन उस तरीके से नहीं जिस तरीके से सरकार चाहती है।

    नीट पेपर लीक आंदोलन के बाद कॉकरोचों ने ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान भी शुरू किया है। CJP के नेता सरकारी स्कूलों की बदहाली से जुड़े मुद्दे उठा रहे हैं। इसी संदर्भ में जब दीपके से उनकी आगे की योजना के बारे में पूछा गया तो उन्होंने आंदोलन को पार्टी या चुनावी राजनीति तक सीमित रखने से इनकार किया।

    अभिजीत दीपके ने कहा कि लोगों ने राजनीति को केवल चुनाव और राजनीतिक दलों तक सीमित कर दिया है, जबकि उनका उद्देश्य इससे आगे बढ़ना है। उन्होंने कहा कि वे सिर्फ चुनाव लड़ने के लिए नहीं हैं, बल्कि एक बड़ा बदलाव लाना चाहते हैं।

    उनके मुताबिक इस बदलाव का उद्देश्य लोगों को अपने अधिकार और कर्तव्य समझने में सक्षम बनाना है। साथ ही वे चाहते हैं कि लोग यह भी समझें कि सत्ता में कोई भी राजनीतिक पार्टी आए, उससे जवाबदेही कैसे तय कराई जा सकती है। इस तरह दीपके ने अपने आंदोलन को चुनाव से आगे ले जाने और उसे व्यापक बदलाव से जोड़ने की योजना सामने रखी है।

  • बंगाल में बाबा बागेश्वर की तस्वीर जलाने पर FIR दर्ज, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पुलिस को दी कड़ी कार्रवाई की चेतावनी

    बंगाल में बाबा बागेश्वर की तस्वीर जलाने पर FIR दर्ज, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पुलिस को दी कड़ी कार्रवाई की चेतावनी

    नई दिल्ली ।दुर्गा पूजा के दौरान मांसाहारी भोजन को लेकर बागेश्वर पीठ के महंत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के बयान के बाद पश्चिम बंगाल में विवाद बढ़ता जा रहा है। भवानीपुर पुलिस स्टेशन के सामने बाबा बागेश्वर की तस्वीर जलाने के मामले में पुलिस ने FIR दर्ज की है। इससे पहले विधानसभा में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने उनके बयान का बचाव करते हुए विरोध करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे।

    धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बंगाल में हनुमंत कथा के दौरान दुर्गा पूजा और नवरात्रि के समय मांसाहारी भोजन को लेकर अपील की थी। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो के मुताबिक उन्होंने कहा था कि लोग नवरात्रि के दौरान मूर्ति रखें या नहीं रखें, लेकिन पूजा पंडालों के पास मांसाहारी भोजन नहीं बनाया जाना चाहिए।

    उन्होंने यह भी कहा था कि लोग चाहें तो अपने घरों में मांस खा सकते हैं। उनके मुताबिक दुर्गा पूजा के दौरान पंडालों के आसपास मांस और शराब की दुकानें बंद होनी चाहिए। उन्होंने मांसाहारी भोजन करने वाले हिंदुओं को लेकर भी टिप्पणी की थी। इन बयानों के बाद तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस की ओर से विरोध शुरू हुआ।

    कलकत्ता जिला कांग्रेस कमेटी के आठ सदस्य भवानीपुर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराने पहुंचे थे। कमेटी के प्रमुख प्रदीप प्रसाद ने बताया कि वे बाबा बागेश्वर की तस्वीर लेकर उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराने थाने पहुंचे थे। उन्होंने दावा किया कि उनके साथ मौजूद किसी व्यक्ति ने तस्वीर नहीं जलाई। उनके अनुसार तस्वीर जलाने वाले लोग अलग थे।

    प्रदीप प्रसाद ने यह भी आरोप लगाया कि बंगालियों की छवि खराब करने के लिए बाहर से लोगों को बुलाया जाता है। दूसरी ओर आसनसोल के कांग्रेस नेता प्रसेनजित ने कहा कि उन्होंने बुधवार को बाबा बागेश्वर की तस्वीर जलाकर विरोध किया था। इसके बाद आसनसोल साउथ पुलिस स्टेशन में उनके खिलाफ शिकायत दर्ज की गई।

    इस पूरे विवाद के बीच मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कोलकाता पुलिस कमिश्नर को बाबा बागेश्वर की तस्वीर जलाने वालों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपनी धार्मिक परंपराओं के साथ देशभक्ति, राष्ट्रवाद और अखंड भारत के विचार पर भी बात की थी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने अपनी परंपरा और संस्कृति की बात की है और जिसे इसे स्वीकार करना है, वह करे, जबकि जिसे स्वीकार नहीं करना है, वह न करे। उनके मुताबिक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने किसी पर अपनी बात नहीं थोपी। इसके बावजूद भवानीपुर थाने के सामने उनकी तस्वीर जलाए जाने पर मुख्यमंत्री ने पुलिस आयुक्त को मामले में शामिल लोगों को तुरंत गिरफ्तार करने का निर्देश दिया।

    बाबा बागेश्वर के बयान के बाद शुरू हुआ यह विवाद अब तस्वीर जलाने और उसके बाद दर्ज हुई FIR तक पहुंच गया है। एक तरफ उनके बयान को लेकर राजनीतिक विरोध सामने आया है, वहीं दूसरी ओर तस्वीर जलाने की घटना पर मुख्यमंत्री ने पुलिस कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान मांसाहारी भोजन को लेकर दिया गया बयान अब राजनीतिक और कानूनी विवाद का विषय बन गया है।

  • मंदिर में 13 साल की किशोरी की शादी की चल रही थी तैयारी पुलिस पहुंचते ही मची भगदड़ दूल्हा समेत कई लोग फरार

    मंदिर में 13 साल की किशोरी की शादी की चल रही थी तैयारी पुलिस पहुंचते ही मची भगदड़ दूल्हा समेत कई लोग फरार


    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के मेरठ में बाल विवाह का एक गंभीर मामला सामने आया है। मेडिकल थाना क्षेत्र के शेरगढ़ी इलाके में एक मंदिर में 13 साल की किशोरी की 20 साल के युवक से शादी कराई जा रही थी। मंदिर में शादी की रस्में चल रही थीं और दोनों पक्षों के लोग भी वहां मौजूद थे। इसी दौरान किसी ने पुलिस को नाबालिग लड़की की शादी कराए जाने की सूचना दे दी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंच गई। पुलिस को देखते ही वहां मौजूद लोगों में अफरा तफरी मच गई और दूल्हा समेत दोनों पक्षों के कई लोग मौके से भाग गए।

    पुलिस को यह सूचना डायल 112 के जरिए मिली थी। मामला नाबालिग से जुड़ा होने के कारण पुलिस ने तत्काल कार्रवाई की और टीम को मंदिर भेजा गया। पुलिसकर्मी जब मौके पर पहुंचे तो वहां शादी की रस्में चल रही थीं। बताया गया कि लड़की की उम्र महज 13 साल है। वहीं जिस युवक से उसकी शादी कराई जा रही थी उसकी उम्र 20 साल बताई गई। पुलिस के पहुंचते ही शादी का कार्यक्रम रोक दिया गया।

    मौके पर पुलिस को आखिर में किशोरी और उसकी मां ही मिलीं। दूल्हा और उसके परिवार के लोग वहां से जा चुके थे। लड़की पक्ष के भी कई लोग पुलिस को देखकर मौके से निकल गए। पुलिस किशोरी और उसकी मां को अपने साथ चौकी लेकर पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू की।

    जांच के दौरान किशोरी की उम्र से जुड़े दस्तावेजों और तथ्यों की पड़ताल की गई। उम्र की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने किशोरी को बाल कल्याण समिति यानी CWC के सुपुर्द कर दिया। फिलहाल बाल कल्याण समिति की ओर से किशोरी की काउंसलिंग कराई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि काउंसलिंग और जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    अब पुलिस इस मामले में कई अहम सवालों के जवाब तलाश रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि 13 साल की बच्ची की शादी कराने का फैसला किसने लिया था। शादी में कौन कौन लोग शामिल थे और दूल्हा कौन है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि लड़की के परिवार और युवक के परिवार के बीच शादी को लेकर क्या बातचीत हुई थी। पुलिस के पहुंचते ही दूल्हा और कई लोगों के मौके से भाग जाने को भी जांच का अहम हिस्सा माना जा रहा है।

    सीओ सिविल लाइन दीक्षा के मुताबिक पुलिस को डायल 112 के माध्यम से नाबालिग बच्ची की शादी कराए जाने की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही टीम मौके पर पहुंची और शादी को रुकवा दिया गया। बच्ची के नाबालिग होने की पुष्टि होने के बाद उसे बाल कल्याण समिति के सुपुर्द कर दिया गया है। फिलहाल उसकी काउंसलिंग की जा रही है।

    बाल विवाह बच्चों के अधिकार और उनके भविष्य से जुड़ा गंभीर मामला है। ऐसे मामलों में प्रशासन और पुलिस की त्वरित कार्रवाई बेहद महत्वपूर्ण होती है। मेरठ की इस घटना में समय रहते सूचना मिलने और पुलिस के मौके पर पहुंचने से किशोरी की शादी रुक गई। अब पुलिस की जांच से यह साफ होगा कि इस शादी की तैयारी किसने कराई थी और इसमें शामिल लोगों की भूमिका क्या थी।

  • देश के तटीय क्षेत्रों में आने वाले हैं 3 शक्तिशाली चक्रवाती तूफान…. ISRO ने जारी की चेतावनी

    देश के तटीय क्षेत्रों में आने वाले हैं 3 शक्तिशाली चक्रवाती तूफान…. ISRO ने जारी की चेतावनी


    नई दिल्ली।
    देश के तटीय इलाकों के लिए आने वाले तीन महीने बेहद संवेदनशील होंगे। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) (Indian Space Research Organisation – ISRO) ने अपने उपग्रहों और मौसम निगरानी प्रणालियों से मिले डाटा के आधार पर चेतावनी जारी की है कि अक्तूबर से दिसंबर के दौरान बंगाल की खाड़ी (Bay of Bengal) और अरब सागर (Arabian Sea) में तीन शक्तिशाली चक्रवाती तूफान (Powerful Cyclonic Storm) बन सकते हैं। इसरो ने आगाह किया है कि चक्रवात के साथ तेज हवाएं, भारी बारिश और समुद्र में ऊंची लहरें आ सकती हैं।

    इसरो के अनुसार, चक्रवातों की ताकत का सूचकांक 44 साल के औसत से 83 फीसदी ज्यादा रह सकता है। मतलब ये पहले के मुकाबले ज्यादा तबाही मचा सकते हैं। रिपोर्ट में अक्तूबर-दिसंबर के लिए 1.30 करोड़ का पीडीआई (पावर डिसिपेशन इंडेक्स) बताया गया है। 1982-2025 के दौरान औसत पीडीआई 71 लाख रहा है। पीडीआई एक ऐसा वैज्ञानिक पैमाना है जो किसी चक्रवात की विनाशकारी क्षमता, उसकी अवधि और संख्या को मिलाकर उसकी कुल ऊर्जा का आकलन करता है। पीडीआई की इकाई नॉट्स क्यूब होती है।


    44 साल के बाद सबसे ज्यादा तीव्रता

    रिपोर्ट में 1982 से 2025 तक उत्तर हिंद महासागर में मानसून सीजन के बाद आए चक्रवातों की संख्या और उनके पीडीआई का अध्ययन किया गया है। इस अवधि में पीडीआई का औसत 7.15×10 नॉट्स क्यूब रहा। 2026 के अक्तूबर-दिसंबर में इसके 13.06×10 नॉट्स क्यूब तक पहुंचने का अनुमान है।

    आसान भाषा में कहें तो इस बार सिर्फ यह नहीं देखा जा रहा कि कितने चक्रवात बन सकते हैं। बल्कि यह अनुमान लगाया गया है कि वे कितनी तेज हवा के साथ बनेंगे और कितने समय तक टिक सकते हैं।


    केंद्र सरकार ने निगरानी शुरू की

    इसरो की चेतावनी के बाद केंद्र सरकार, मौसम विभाग और तटीय राज्यों के आपदा प्रबंधन विभागों ने स्थिति पर पैनी नजर रखनी शुरू कर दी है। तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए मौसम विभाग की चेतावनी जारी की जाएगी। मछुआरों और समुद्र में काम करने वाले लोगों के लिए भी ऐसे मौसमी अनुमान महत्वपूर्ण हैं।

  • आज देशभर में बैंक कर्मचारियों की हड़ताल…. 3 दिन नहीं खुलेंगे बैंक

    आज देशभर में बैंक कर्मचारियों की हड़ताल…. 3 दिन नहीं खुलेंगे बैंक


    नई दिल्ली।
    अगर आपको बैंक (Bank) का कोई जरूरी काम है और वह सिर्फ बैंक ब्रांच जाकर ही हो सकता है, तो उसे टालना भारी पड़ सकता है. आने वाले कुछ दिनों में कई जगह बैंक ब्रांच (Bank branch) बंद रहने वाली हैं. ऐसे में कैश निकालने, जमा करने या दूसरे ब्रांच से जुड़े काम के लिए आपको लंबा इंतजार करना पड़ सकता है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि बैंकिंग सेवाएं (Banking Services) पूरी तरह बंद रहेंगी. डिजिटल बैंकिंग, ATM और दूसरे ऑनलाइन ऑप्शन आपके काम आ सकते हैं।

    यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (United Forum of Bank Unions- UFBU) ने 11 सितंबर को देशव्यापी बैंक हड़ताल (Nationwide bank strike) का ऐलान किया है. बैंक यूनियनों ने अपनी कई मांगों को लेकर यह हड़ताल बुलाई है. इसका असर खास तौर पर बैंक ब्रांच में होने वाले सामान्य कामकाज पर पड़ सकता है. हड़ताल के बाद 12 सितंबर को शनिवार और 13 सितंबर को रविवार है. इसके बाद कुछ राज्यों में सोमवार और मंगलवार को गणेश चतुर्थी के चलते भी बैंक बंद रहेंगे. यानी कुछ जगहों पर बैंक ब्रांच से जुड़े काम के लिए ग्राहकों को लगातार कई दिनों तक इंतजार करना पड़ सकता है।

    किन मांगों को लेकर हड़ताल?
    बैंक यूनियनों की प्रमुख मांगों में ‘5 डे बैंकिंग वीक’ लागू करना शामिल है. इसके अलावा परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम (PLI Scheme) की समीक्षा की भी मांग की जा रही है. यूनियनों का कहना है कि सरकार की ओर से सोमवार से शुक्रवार तक हफ्ते में पांच दिन कामकाज और शनिवार, रविवार फुल डे वीक ऑफ लागू करने का वादा किया गया था, जिसे अब पूरा किया जाना चाहिए. इन्हीं मांगों के समर्थन में UFBU ने हड़ताल का फैसला लिया है. यूएफबीयू में एआइबीईए, एआइबीओसी, एनसीबीई, एआइबीओए, बीईएफआइ, आइएनबीओसी और आइएनबीईएफ समेत सात बैंक यूनियनें शामिल हैं. ये बैंकिंग वर्कफोर्स के 90 प्रतिशत से अधिक का प्रतिनिधित्व करती हैं।


    बैंकिंग सेवाएं पूरी तरह बंद रहेंगी?

    ऐसा नहीं है कि हड़ताल के दौरान बैंकिंग की हर सुविधा बंद हो जाएगी. बैंकों ने जरूरी सेवाएं जारी रखने के लिए इंतजाम किए हैं. लेकिन बैंक ब्रांच में होने वाले कई काम प्रभावित हो सकते हैं. अगर आपका काम ऐसा है जिसके लिए बैंक ब्रांच जाना जरूरी है, तो उसमें देरी हो सकती है. खास तौर पर कैश जमा करने, कैश निकालने या किसी दूसरे ऑफलाइन काम के लिए आपको इंतजार करना पड़ सकता है।


    SBI ने ग्राहकों को क्या कहा?

    स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर ग्राहकों के लिए एडवाइजरी जारी की है. बैंक ने कहा है कि हड़ताल के दौरान ब्रांच और ऑफिस के सामान्य कामकाज के लिए जरूरी इंतजाम किए गए हैं. इसके बावजूद 11 सितंबर की प्रस्तावित हड़ताल के कारण बैंकिंग काम प्रभावित हो सकता है. SBI ने ग्राहकों को सलाह दी है कि अगर कोई जरूरी बैंकिंग ट्रांजैक्शन करना है तो उसे डिजिटल या इंटरनेट बैंकिंग के जरिए पूरा करें।


    कैश की जरूरत तो क्या करें?

    अगर आपको कैश की जरूरत है तो बैंक ब्रांच बंद होने की स्थिति में ATM और ADWM (Automated Deposit and Withdrawal Machine) का इस्तेमाल किया जा सकता है. SBI ने ग्राहकों को उपलब्ध बैंकिंग सेवाओं के लिए CSP (Customer Service Point) का इस्तेमाल करने की भी सलाह दी है. इसके अलावा इंटरनेट बैंकिंग, YONO, मोबाइल बैंकिंग, UPI और दूसरे डिजिटल चैनलों के जरिए कई जरूरी काम किए जा सकते हैं. यानी अगर आपका काम ऑनलाइन हो सकता है तो बैंक ब्रांच खुलने का इंतजार करने की जरूरत नहीं है. UPI से पेमेंट, मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग और ATM जैसी सुविधाएं उपलब्ध रहने की स्थिति में उनका इस्तेमाल किया जा सकता है।


    PNB ने जारी की एडवाइजरी

    पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने भी 11 सितंबर की बैंक हड़ताल को लेकर ग्राहकों के लिए एडवाइजरी जारी की है. बैंक ने जरूरी ट्रांजैक्शन के लिए डिजिटल बैंकिंग सेवाओं का इस्तेमाल करने की सलाह दी है. PNB के मुताबिक ग्राहक UPI Payments, मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग, ATM और ADWM जैसी सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं।


    HDFC और ICICI का अपडेट

    HDFC Bank, ICICI Bank और कुछ दूसरे बैंकों की ओर से इस हड़ताल को लेकर फिलहाल कोई अलग बयान सामने नहीं आया है. ऐसे में ग्राहकों को अपने बैंक की तरफ से जारी होने वाले अपडेट पर नजर रखनी चाहिए. अगर आपका अकाउंट इन बैंकों में है और कोई जरूरी काम ब्रांच जाकर करना है, तो ब्रांच जाने से पहले बैंक की वेबसाइट, ऐप या दूसरे आधिकारिक चैनल पर स्थिति जरूर चेक कर लें।


    अगले कुछ दिन रहेंगे मुश्किल

    11 सितंबर की हड़ताल के बाद 12 सितंबर शनिवार और 13 सितंबर रविवार है. इसके बाद कुछ राज्यों में 14 और 15 सितंबर को गणेश चतुर्थी के चलते बैंक हॉलिडे रह सकता है. हालांकि, छुट्टी की स्थिति राज्य के हिसाब से अलग हो सकती है. इसलिए अगर आपको कैश जमा करना है, कैश निकालना है या ऐसा कोई काम करना है जो सिर्फ बैंक ब्रांच में हो सकता है, तो इसके लिए अगले कुछ दिनों का इंतजार करना पड़ सकता है।

  • दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन कल से, 15 हजार पुलिसकर्मी तैनात, मोदी ने कहा- सकारात्मक चर्चा की उम्मीद

    दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन कल से, 15 हजार पुलिसकर्मी तैनात, मोदी ने कहा- सकारात्मक चर्चा की उम्मीद


    नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी के लिए तैयार है। 12 और 13 सितंबर को भारत मंडपम में होने वाले सम्मेलन से पहले सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। करीब 15 हजार दिल्ली पुलिसकर्मी, पैरामिलिट्री की 200 कंपनियां और 500 से ज्यादा CCTV कैमरे सुरक्षा में लगाए गए हैं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शुक्रवार सुबह दिल्ली पहुंच चुके हैं, जबकि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी शनिवार को भारत पहुंचेंगे।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने BRICS नेताओं के भारत पहुंचने से पहले एक्स पर संदेश जारी कर सम्मेलन से सार्थक चर्चा की उम्मीद जताई। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में दुनिया के कई नेता BRICS Summit के लिए जुटेंगे और विश्व कल्याण की भावना के साथ वैश्विक मुद्दों पर सकारात्मक एवं सार्थक विचार-विमर्श होगा।

    35 से ज्यादा सड़कों पर ट्रैफिक प्रभावित
    BRICS सम्मेलन के चलते दिल्ली में आज से 13 सितंबर तक सुरक्षा और यातायात व्यवस्था में बदलाव रहेगा। पुलिस के मुताबिक शहर पूरी तरह बंद नहीं रहेगा, लेकिन VVIP काफिलों की आवाजाही के दौरान कुछ समय के लिए रास्ते रोके जा सकते हैं।

    मथुरा रोड, शांति पथ, जनपथ, अशोक रोड, बाराखंभा रोड और तीन मूर्ति मार्ग समेत 35 से ज्यादा प्रमुख सड़कों पर असर पड़ने की संभावना है। नोएडा से सेंट्रल दिल्ली और द्वारका से एयरपोर्ट जाने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। हर दिन करीब 70 से 80 हाई सिक्योरिटी मूवमेंट होने का अनुमान है। ट्रैफिक व्यवस्था संभालने के लिए करीब 4,800 ट्रैफिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं।

    मेट्रो सामान्य, स्कूलों में छुट्टी
    दिल्ली मेट्रो सामान्य रूप से चलती रहेगी। बस, ऑटो और टैक्सी सेवाएं भी जारी रहेंगी, हालांकि कुछ रूट में बदलाव किया जा सकता है। UPSC और NDA परीक्षार्थियों के साथ अस्पताल जाने वाले लोगों को घर से पर्याप्त समय पहले निकलने की सलाह दी गई है। मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में ट्रैफिक पुलिस को तत्काल सूचना देने को कहा गया है।

    सम्मेलन के मद्देनजर आज स्कूलों में छुट्टी है। वहीं कनॉट प्लेस का बाजार खुला रहेगा, जबकि मेट्रो म्यूजियम और राष्ट्रपति भवन 13 सितंबर तक बंद रहेंगे।

    मोदी-पुतिन मुलाकात पर नजर
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात आज दोपहर प्रस्तावित है। बातचीत में रक्षा, ऊर्जा और परमाणु सहयोग जैसे अहम मुद्दे शामिल हैं। प्रधानमंत्री मोदी ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से भी मुलाकात करेंगे। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग शनिवार शाम प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात करेंगे। इस बैठक में सीमा विवाद और व्यापार से जुड़े मुद्दे चर्चा के केंद्र में रहने की संभावना है।

    कई देशों के नेता होंगे शामिल
    BRICS सम्मेलन में दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इंडोनेशिया, मलेशिया और इथियोपिया समेत कई देशों के नेता हिस्सा लेंगे। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस भी सम्मेलन में शामिल होंगे। सम्मेलन के अंत में ‘न्यू दिल्ली डिक्लेरेशन’ जारी किया जाएगा। फिलीपींस की विदेश मामलों की सचिव मा. थेरेसा पी. लाजारो भी BRICS Summit 2026 में भाग लेने के लिए दिल्ली पहुंच चुकी हैं।

    पुरी में सैंड आर्ट से विदेशी मेहमानों का स्वागत
    BRICS नेताओं के भारत आगमन के मौके पर पुरी के कलाकार मानस कुमार साहू ने सैंड आर्ट तैयार कर उनका अभिनंदन किया। रेत से बनाई गई इस कलाकृति के जरिए भारत की ओर से BRICS देशों के नेताओं का स्वागत किया गया।

    संस्कृत श्लोक से दिया संवाद और मित्रता का संदेश
    प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में संस्कृत श्लोक के जरिए अच्छे लोगों की संगति, संवाद और मित्रता का महत्व भी बताया। श्लोक का भावार्थ है कि सज्जनों के साथ चलना, उनकी संगति करना और उनके साथ संवाद व मित्रता रखना चाहिए, जबकि बुरे लोगों से संबंध नहीं रखना चाहिए।

  • BRICS Summit 2026 में शामिल होने भारत आएंगे शी जिनपिंग, पीएम मोदी के निमंत्रण पर 12-13 सितंबर को होगा दौरा

    BRICS Summit 2026 में शामिल होने भारत आएंगे शी जिनपिंग, पीएम मोदी के निमंत्रण पर 12-13 सितंबर को होगा दौरा

    नई दिल्ली ।चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर भारत दौरे पर आएंगे। चीन के विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को उनके दौरे की जानकारी दी। शी जिनपिंग 12 और 13 सितंबर को भारत में आयोजित होने वाले BRICS सम्मेलन में शामिल होंगे। करीब सात साल बाद उनका भारत दौरा होने जा रहा है।

    शी जिनपिंग का यह दौरा भारत और चीन के संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वर्ष 2020 में गलवान की घटना के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग की यह पहली आमने-सामने की द्विपक्षीय मुलाकात होगी। इससे पहले दोनों नेता किर्गिस्तान के बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन की बैठक के दौरान एक ही मंच पर नजर आए थे। उस दौरान दोनों ने एक-दूसरे से हाथ मिलाया था, लेकिन उनके बीच अलग से द्विपक्षीय बैठक नहीं हुई थी।

    शी जिनपिंग इससे पहले वर्ष 2019 में भारत आए थे। तब उन्होंने तमिलनाडु के मामल्लपुरम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। दोनों नेताओं के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत हुई थी। इससे पहले वर्ष 2016 में शी जिनपिंग गोवा में आयोजित BRICS सम्मेलन में शामिल होने भारत पहुंचे थे। सितंबर 2014 में उन्होंने पहली बार भारत का दौरा किया था। उस समय भी प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग के बीच कई अहम विषयों पर चर्चा हुई थी।

    शी जिनपिंग का आगामी दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत और चीन अपने संबंधों में आई दूरी को कम करने की कोशिश कर रहे हैं। सीमा विवाद के बाद दोनों देशों के बीच लंबे समय तक तनाव की स्थिति रही है। अब दोनों पक्षों के बीच बातचीत आगे बढ़ रही है। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग की प्रस्तावित मुलाकात से भारत-चीन संबंधों को आगे बढ़ाने को लेकर नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    नई दिल्ली में 11 से 13 सितंबर तक BRICS सम्मेलन आयोजित होगा। इस बैठक में कई देशों के प्रमुख नेता शामिल होंगे। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के सम्मेलन में पहुंचने की पुष्टि हो चुकी है।

    BRICS बैठक में वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, निवेश, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। इसके अलावा रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया की स्थिति भी बैठक में चर्चा के प्रमुख विषयों में शामिल हो सकती है।

    सम्मेलन में विकासशील देशों की भूमिका और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में बदलाव जैसे मुद्दों पर भी विचार-विमर्श होने की उम्मीद है। ऐसे में शी जिनपिंग की भारत यात्रा और BRICS बैठक में उनकी भागीदारी दोनों देशों के बीच संबंधों से जुड़े घटनाक्रम के लिहाज से महत्वपूर्ण होगी।

  • अबू सलेम को सुप्रीम कोर्ट से झटका, समयपूर्व रिहाई की याचिका खारिज, 1993 मुंबई ब्लास्ट केस में जेल में रहेगा

    अबू सलेम को सुप्रीम कोर्ट से झटका, समयपूर्व रिहाई की याचिका खारिज, 1993 मुंबई ब्लास्ट केस में जेल में रहेगा

    नई दिल्ली । 1993 मुंबई सीरियल बम धमाके मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे गैंगस्टर अबू सलेम को सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ा झटका लगा है। उसकी समय से पहले रिहाई की मांग वाली याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया है। अदालत ने उसकी दलील को नहीं माना और उसकी उम्मीदों को फिलहाल के लिए झटका दे दिया है।

    यह मामला देश के सबसे भयावह आतंकी हमलों में से एक से जुड़ा है। 12 मार्च 1993 को मुंबई के 12 अलग-अलग इलाकों में एक के बाद एक बम धमाके हुए थे। इन धमाकों में 257 लोगों की जान चली गई थी और लगभग 800 लोग घायल हुए थे।

    जांच में यह बात सामने आई कि बाबरी मस्जिद विध्वंस का बदला लेने के मकसद से ये धमाके करवाए गए थे। अबू सलेम को इस पूरी साजिश का मुख्य किरदार माना गया। जांच में यह साबित हुआ कि वह हमले की योजना बनाने में शामिल था और उसी ने गुजरात के भरुच से मुंबई तक हथियार और विस्फोटक पहुंचाए थे। इसके अलावा उसे हत्या का भी दोषी ठहराया गया था। इन सभी आरोपों के आधार पर विशेष टाडा अदालत ने उसे 25 साल कैद की सजा सुनाई थी।

    इससे पहले भी सलेम कोर्ट में यह दलील दे चुका है कि पुर्तगाल के साथ हुए प्रत्यर्पण समझौते के मुताबिक उसे 25 साल से ज्यादा समय तक जेल में नहीं रखा जा सकता। लेकिन अदालतें इस दलील को कई बार खारिज कर चुकी हैं।

    इससे पहले बॉम्बे हाईकोर्ट भी सलेम की ऐसी ही याचिका ठुकरा चुका है। हाईकोर्ट ने कहा था कि सजा में मिलने वाली छूट की गणना रिहाई की तय तारीख से सिर्फ एक महीने पहले ही की जा सकती है। यानी अभी यह मानना सही नहीं होगा कि उसकी सजा पूरी हो चुकी है।

    अब सुप्रीम कोर्ट का ताजा फैसला भी इसी रुख को आगे बढ़ाता है और साफ करता है कि सलेम की जल्द रिहाई फिलहाल संभव नहीं है।