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  • PM मोदी आज लेंगे कैबिनेट मीटिंग, फेरबदल की अटकलों के बीच लिए जा सकते हैं बड़े फैसले

    PM मोदी आज लेंगे कैबिनेट मीटिंग, फेरबदल की अटकलों के बीच लिए जा सकते हैं बड़े फैसले


    नई दिल्ली।
    पांच देशों के दौरे से वापस आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) गुरुवार को कैबिनेट बैठक (Cabinet Meeting) करेंगे। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, बैठक में विभिन्न मंत्रालयों के कामकाज, लिए गए प्रमुख निर्णयों और उनके नतीजों तथा भविष्य की योजनाओं सहित अन्य विषयों पर चर्चा होगी। पीएम मोदी की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में सभी कैबिनेट मंत्री, स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री और अन्य राज्य मंत्रियों को शामिल होने के निर्देश दिए गए हैं। कैबिनेट में फेरबदल की अटकलों के बीच, यह इस वर्ष कैबिनेट की पहली पूर्ण बैठक होगी।

    सूत्रों ने बताया कि बैठक में विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के कामकाज, हाल के दिनों में लिए गए प्रमुख निर्णयों और उनके परिणामों, तथा भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की जाएगी। विभिन्न सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों के अलग-अलग पहलुओं, उन्हें अधिकतम सफलता के लिए कैसे लागू किया जाए और अन्य विषयों की भी समीक्षा किए जाने की उम्मीद है।


    क्या होगा बैठक का एजेंडा?

    पीएम मोदी के पश्चिम एशिया में जारी संकट और उसके आर्थिक प्रभावों का जिक्र करने की संभावना है और वह मंत्रालयों तथा विभागों को निर्देश दे सकते हैं कि नागरिकों को कम से कम असुविधा हो, इसके लिए किस तरह से आगे बढ़ा जाए। सूत्रों ने बताया कि बैठक में ऊर्जा, कृषि, उर्वरक, विमानन, शिपिंग और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है।

    पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के कुछ ही समय बाद, मोदी ने सभी संबंधित पक्षों को निर्देश दिया था कि वे नागरिकों और इससे प्रभावित क्षेत्रों की समस्याओं को कम करने के लिए हर संभव कदम उठाएं।


    आमजन को फायदा पहुंचाने पर होगी चर्चा

    बैठक में आम लोगों के फायदे के लिए सभी क्षेत्रों में सुधार लाने की सरकार की प्राथमिकता पर भी चर्चा होने की संभावना है। प्रधानमंत्री ने इससे पहले अगले 10 वर्षों के लिए सुधार की प्राथमिकताओं की रूपरेखा पेश करते हुए कहा था कि उनकी सरकार की रिफॉर्म एक्सप्रेस ने व्यवस्थागत बदलाव लाए हैं और आम नागरिकों को काफी हद तक लाभ पहुंचाया है। यह बैठक प.बंगाल, असम और पुडुचेरी में भाजपा की जबर्दस्त जीत के बाद हो रही है।

  • NEET UG: री-एग्जाम से पहले अलर्ट मोड पर सरकार…. अफवाहों पर नकेल कसने की तैयारी

    NEET UG: री-एग्जाम से पहले अलर्ट मोड पर सरकार…. अफवाहों पर नकेल कसने की तैयारी


    नई दिल्ली।
    मेडिकल (Medical) की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) के री-एग्जाम से पहले केंद्र सरकार (Central government) पूरी तरह से अलर्ट मोड में आ गई है। 3 मई को हुई परीक्षा में पेपर लीक (Paper leak) और ग्रेस मार्क्स जैसे विवादों के बाद, अब सरकार सोशल मीडिया पर फैलने वाली झूठी अफवाहों और पैनिक फैलाने वाले पोस्ट्स पर सख्त नकेल कसने की तैयारी में है। छात्रों का भरोसा फिर से बहाल करने के लिए शिक्षा मंत्रालय ने टेक जगत के दिग्गजों- गूगल (Google), मेटा (Meta) और टेलीग्राम (Telegram) को भी अपने साथ जोड़ लिया है, ताकि किसी भी तरह की भ्रामक जानकारी को इंटरनेट पर फैलने से पहले ही रोका जा सके। बता दें कि आज 21 जून को NEET-UG का दोबारा एग्जाम हो रहा है।


    शिक्षा मंत्री ने लिया मोर्चा, दिए ‘फोकस्ड क्रैकडाउन’ के निर्देश

    केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बुधवार को एक हाई-लेवल मीटिंग की अध्यक्षता की। इस महत्वपूर्ण बैठक में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के प्रतिनिधियों के अलावा केंद्रीय खुफिया और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के अधिकारी भी मौजूद रहे। शिक्षा मंत्री ने सख्त हिदायत दी है कि परीक्षा से पहले ऑनलाइन एक्टिव होने वाले उन नेटवर्क्स पर सीधा और ‘फोकस्ड क्रैकडाउन’ किया जाए, जो एक सोची-समझी साजिश के तहत गलत जानकारी फैलाते हैं।


    टेलीग्राम और सीक्रेट ग्रुप्स पर खुफिया एजेंसियों की पैनी नजर

    शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि सबसे बड़ी चिंता टेलीग्राम चैनल्स, अनजान ग्रुप्स और बॉट्स को लेकर है, जो बड़े एग्जाम्स से ठीक पहले अचानक बहुत एक्टिव हो जाते हैं। ये ग्रुप्स व्यूज और पैसों के लालच में ‘पेपर लीक’ के झूठे दावे, क्लिकबेट मैसेज और बिना सिर-पैर की जानकारी सर्कुलेट करते हैं। इससे छात्रों और उनके अभिभावकों के बीच दहशत का माहौल बन जाता है।

    खुफिया इनपुट्स से यह भी खुलासा हुआ है कि कुछ चुनिंदा फोन नंबर्स का इस्तेमाल करके दर्जनों संदिग्ध चैनल ऑपरेट किए जा रहे हैं, जो इनकी संगठित गतिविधि की ओर इशारा करता है। इसके बाद एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर डिजिटल सर्विलांस और कड़ी कर दी गई है। उन ग्रुप्स पर खास नजर है जो छात्रों को एग्जाम से पहले “अंदर की जानकारी” या एडवांस में पेपर देने का दावा करते हैं।


    टेक कंपनियों ने दिया पूरा सहयोग का भरोसा

    राहत की बात यह है कि सरकार की इस सख्ती पर मेटा, गूगल और टेलीग्राम जैसी कंपनियों ने सकारात्मक रुख दिखाया है। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि परीक्षा से जुड़ी किसी भी भ्रामक या फेक जानकारी की पहचान करके उसे तेजी से ब्लॉक और रिमूव किया जाएगा। शिक्षा मंत्री ने कंपनियों से कहा है कि वे नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और पुलिस एजेंसियों के साथ मिलकर काम करें, ताकि प्रोपेगेंडा और खौफ फैलाने वाले चैनल्स को तुरंत बंद किया जा सके।

    अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों को भी परीक्षा से पहले डिजिटल सर्विलांस मजबूत करने को कहा गया है। उन एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स और तेजी से बढ़ रहे ग्रुप्स पर खास नजर रखी जा रही है, जो परीक्षार्थियों को परीक्षा से जुड़ी सामग्री एडवांस में देने या ‘इनसाइड इंफॉर्मेशन’ मुहैया कराने का दावा करते हैं।


    एग्जाम सेंटर पर कैसी होगी व्यवस्था?

    मंगलवार को री-एग्जाम की तैयारियों की समीक्षा करते हुए शिक्षा मंत्री ने साफ कर दिया था कि पिछली परीक्षा की सभी खामियों को पूरी तरह दूर किया जाना चाहिए। सभी राज्यों के जिलाधिकारियों (DM) और पुलिस अधीक्षकों (SP) के साथ को-ऑर्डिनेशन मीटिंग करने के निर्देश दिए गए हैं। इसका मकसद परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा और मॉनिटरिंग के प्रोटोकॉल को सख्ती से लागू करना है। इसके साथ ही, अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि री-एग्जाम के दिन छात्रों के लिए ट्रांसपोर्टेशन (आवाजाही), पीने के पानी और अन्य जरूरी सुविधाओं का खास ख्याल रखा जाए ताकि उन्हें किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।


    क्यों हो रहा है नीट री-एग्जाम?

    आपको बता दें कि 3 मई को आयोजित की गई नीट-यूजी परीक्षा को पेपर लीक के आरोपों के बाद रद्द कर दिया गया था। इसके बाद ही री-एग्जाम की घोषणा की गई थी। इस पूरे विवाद (पेपर लीक के आरोप, ग्रेस मार्क्स विवाद और संगठित नकल) ने परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे, जिसके बाद सरकार अब हर स्तर पर सख्ती बरत रही है।

  • प्रेमानंद जी महाराज का जवाब: विदेश में नॉनवेज खाने के बाद भी लोग तरक्की कैसे करते हैं? जानिए गहरी सीख

    प्रेमानंद जी महाराज का जवाब: विदेश में नॉनवेज खाने के बाद भी लोग तरक्की कैसे करते हैं? जानिए गहरी सीख




    नई दिल्ली। प्रेमानंद जी महाराज  के एकांतिक वार्ता में दिए गए विचारों पर आधारित एक सवाल ने लोगों का ध्यान खींचा है। भक्त ने पूछा कि विदेशों में लोग मांसाहार करते हैं, फिर भी वे तरक्की कैसे कर लेते हैं? इस पर महाराज जी ने जीवन, धर्म और “सच्ची उन्नति” को लेकर गहरी बात समझाई।

    महाराज जी के अनुसार, केवल भौतिक सफलता या पैसा कमाना ही असली उन्नति नहीं है। उन्होंने कहा कि असली उन्नति वह है जिसमें मन की शांति, संस्कार और आध्यात्मिक संतुलन भी शामिल हो। उनके अनुसार, बाहरी सफलता को ही पूरी उन्नति मान लेना एक अधूरी सोच है।

    शाकाहार और कर्म का संदेश
    प्रेमानंद जी महाराज ने यह भी कहा कि हर जीव के जीवन का मूल्य है और कर्म का प्रभाव व्यक्ति पर जरूर पड़ता है। उन्होंने समझाया कि व्यक्ति के कर्म ही उसके जीवन के परिणाम तय करते हैं, और समय के साथ हर चीज का फल मिलता है।

    विदेश और “उन्नति” पर विचार
    भक्त के सवाल पर महाराज जी ने कहा कि केवल धन और भोग-विलास को उन्नति मानना सही नहीं है। उनके अनुसार, सच्ची शांति और संतोष केवल बाहरी सुविधाओं से नहीं मिलता, बल्कि आंतरिक संस्कारों और आध्यात्मिक जीवन से मिलता है।

    आधुनिकता और अध्यात्म का संतुलन
    महाराज जी ने यह भी कहा कि आधुनिक शिक्षा जरूरी है, लेकिन उसके साथ अध्यात्म का संतुलन भी होना चाहिए। उनके अनुसार, यदि दोनों साथ चलें तो समाज अधिक संतुलित और शांतिपूर्ण बन सकता है।

  • तेलंगाना ने केंद्र से मांगी 5,000 करोड़ की विशेष वित्तीय सहायता, यंग इंडिया स्कूल परियोजना के लिए दी मांग

    तेलंगाना ने केंद्र से मांगी 5,000 करोड़ की विशेष वित्तीय सहायता, यंग इंडिया स्कूल परियोजना के लिए दी मांग


    नई दिल्ली।
    तेलंगाना सरकार ने केंद्र से विशेष सहायता योजना (एसएएससीआई) के तहत अतिरिक्त 5,000 करोड़ रुपए की मांग की है, ताकि राज्य में पूंजीगत निवेश और विकास परियोजनाओं को गति दी जा सके। उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने इस संबंध में केंद्रीय वित्त मंत्री से नई दिल्ली में मुलाकात की और राज्य की आर्थिक, शैक्षणिक और मानव संसाधन विकास संबंधी जरूरतों पर विस्तार से चर्चा की। इस बैठक में वित्तीय सहायता की आवश्यकता, विशेष रूप से शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण बुनियादी ढांचे के क्षेत्रों में किए जा रहे बड़े निवेशों की व्याख्या की गई।

    उपमुख्यमंत्री ने केंद्रीय वित्त मंत्री को बताया कि तेलंगाना में शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे निवेश, विशेषकर यंग इंडिया इंटीग्रेटेड रेजिडेंशियल स्कूल्स (वाईआईआईआरएस) परियोजना, राज्य की सामाजिक और शैक्षणिक संरचना में क्रांतिकारी बदलाव लाएंगे। इस परियोजना का कुल बजट 30,000 करोड़ रुपए है और यह लाखों बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और पोषण संबंधी सुविधाएं सुनिश्चित करेगी। उन्होंने आर्थिक मामलों के विभाग से इस परियोजना को एफआरबीएम सीमा से छूट देने की अपील भी की, ताकि दीर्घकालिक मानव पूंजी निवेश पर वित्तीय प्रतिबंध न आए।

    विक्रमार्क ने कहा कि इस पहल से राज्य के वंचित और पिछड़े वर्गों के बच्चों को उच्च गुणवत्ता की शिक्षा और पौष्टिक भोजन मिलेगा, जो उन्हें सशक्त बनाएगा और राज्य की जनसांख्यिकीय क्षमता को मजबूत करेगा। प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय वित्त मंत्री को ज्ञापन सौंपकर एसएएससीआई योजना के तहत अतिरिक्त वित्तीय सहायता की आवश्यकता और इसके महत्व को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया। उन्होंने यह भी बताया कि तेलंगाना की आबादी में पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोग बहुसंख्यक हैं, और उनके सशक्तिकरण के लिए यह योजना निर्णायक साबित होगी।

    केंद्रीय वित्त मंत्री के साथ हुई इस बैठक में राज्य के कृषि और मानव संसाधन विकास से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। कृषि मंत्री तुम्माला नागेश्वर राव और अन्य प्रतिनिधियों ने राज्य में कृषि, ग्रामीण विकास और शिक्षा से जुड़े बड़े निवेशों के महत्व को रेखांकित करते हुए वित्तीय जिम्मेदारी और बजट प्रबंधन अधिनियम के तहत छूट की मांग की। उन्होंने कहा कि इस अतिरिक्त वित्तीय सहायता के बिना राज्य की दीर्घकालिक विकास योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं और मानव पूंजी में निवेश की गति धीमी पड़ सकती है।

    पिछले वर्ष भी इसी प्रकार की बैठक में मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने यंग इंडिया प्रोजेक्ट के लिए विशेष वित्तीय सहायता और एफआरबीएम छूट की मांग की थी, और अब इस मांग को दोबारा केंद्र के समक्ष रखा गया है। अधिकारियों का मानना है कि इस योजना के कार्यान्वयन से तेलंगाना के पिछड़े और वंचित वर्गों को शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक विकास के क्षेत्र में स्थायी लाभ मिलेगा। इसके साथ ही राज्य की आर्थिक क्षमता बढ़ेगी और दीर्घकालिक मानव संसाधन विकास में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।

    इस बैठक में केंद्रीय वित्त मंत्री को यह स्पष्ट किया गया कि तेलंगाना की अधिकांश आबादी सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों से आती है। इस आंकड़े के अनुसार, राज्य की आबादी का 56.33 प्रतिशत पिछड़ा वर्ग, 17.43 प्रतिशत अनुसूचित जाति और 10.45 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति से संबंधित है। इस सामाजिक संरचना को ध्यान में रखते हुए, राज्य सरकार ने एसएएससीआई योजना के तहत अतिरिक्त 5,000 करोड़ रुपए की मांग की है, ताकि शैक्षणिक और सामाजिक सुधारों को समय पर लागू किया जा सके और राज्य में समग्र विकास को बढ़ावा दिया जा सके।

  • डिजिटल-प्रथम पहल: भारत टेक्स 2026 ऐप से अंतरराष्ट्रीय खरीदारों और व्यापारियों को मिलेगा सहज मार्गदर्शन

    डिजिटल-प्रथम पहल: भारत टेक्स 2026 ऐप से अंतरराष्ट्रीय खरीदारों और व्यापारियों को मिलेगा सहज मार्गदर्शन

    नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने वस्त्र मंत्रालय के नेतृत्व में भारत टेक्स 2026 के लिए एक नया डिजिटल ऐप लॉन्च किया है, जिसका उद्देश्य वैश्विक वस्त्र आयोजन में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों का अनुभव सहज और प्रभावशाली बनाना है। सचिव नीलम शमी राव ने बुधवार को इस आधिकारिक ऐप का लोकार्पण किया और बताया कि यह एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म खरीदारों, प्रदर्शकों, सोर्सिंग सलाहकारों, वक्ताओं और आगंतुकों के लिए ‘डिजिटल-प्रथम’ सोच को प्रदर्शित करता है।

    इस ऐप के माध्यम से प्रतिभागी आयोजन संबंधी सभी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। प्रदर्शकों की खोज, बैठकें निर्धारित करना, मार्गदर्शन प्राप्त करना, लीड कैप्चर करना और ज्ञान सत्रों में भाग लेना अब सभी डिजिटल रूप से संभव होगा। इसके अलावा, ऐप वास्तविक समय में अपडेट प्रदान करेगा, जिससे प्रतिभागियों को आयोजन से जुड़ी हर गतिविधि की जानकारी तुरंत मिल सकेगी।

    एक प्रमुख विशेषता इस ऐप का एआई स्मार्ट असिस्टेंट है, जो 24×7 संवादात्मक मार्गदर्शक के रूप में कार्य करेगा। प्रतिभागी सरल भाषा में प्रश्न पूछ सकेंगे और उन्हें कार्यक्रम-सारणी, दिशा-निर्देश और आयोजन स्थल की महत्वपूर्ण जानकारी तुरंत प्राप्त होगी। यह सुविधा न केवल भारतीय, बल्कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों के लिए भी सहज और उपयोगकर्ता-अनुकूल डिज़ाइन की गई है।

    भारत मंडपम में आयोजित होने वाले भारत टेक्स 2026 में ऐप प्रतिभागियों को उन्नत नेविगेशन और दिशा-निर्देश भी उपलब्ध कराएगा। उपयोगकर्ता फ्लोर प्लान देख सकेंगे, बूथ खोज सकेंगे और कंपनियों का पता लगा सकेंगे। आयोजन स्थल के भीतर स्टॉल-स्तरीय मार्गदर्शन से खरीदार और प्रदर्शक आसानी से अपने लक्षित संपर्क तक पहुँच सकेंगे।

    प्रदर्शक खोज मॉड्यूल वैश्विक खरीदारों और व्यापारिक आगंतुकों के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें कंपनियों को नाम, उत्पाद श्रेणी और प्रदर्शक प्रकार के आधार पर खोज और फिल्टर किया जा सकेगा। इससे वस्त्र मूल्य श्रृंखला में लक्षित सोर्सिंग और केंद्रित व्यावसायिक बातचीत संभव हो सकेगी।

    भारत टेक्स 2026 का आयोजन 14 से 17 जुलाई 2026 तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में किया जाएगा। इस महाआयोजन में वैश्विक वस्त्र उद्योग के 7,000 से अधिक अंतरराष्ट्रीय खरीदार और 1,30,000 से अधिक व्यापारिक आगंतुक शामिल होने की उम्मीद है। इसका आयोजन भारत टेक्स ट्रेड फेडरेशन द्वारा किया जा रहा है, जो 11 वस्त्र निर्यात संवर्धन परिषदों और उद्योग निकायों का संघ है। केंद्र सरकार के वस्त्र मंत्रालय का सहयोग इस आयोजन को और प्रभावशाली बनाएगा।

    इस डिजिटल पहल के माध्यम से केंद्र सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि भारत टेक्स 2026 में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों को डिजिटल इंटरफेस के जरिए बेहतर मार्गदर्शन, सहज बातचीत और व्यापारिक अवसरों की जानकारी मिल सके। इसके परिणामस्वरूप, भारत के वैश्विक वस्त्र उद्योग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक प्रतिस्पर्धी और आकर्षक बनाने में मदद मिलेगी।

  • पेट्रोल-डीजल पर समान कर और आर्थिक राहत के लिए सांसद पात्रा ने जीएसटी परिषद में चरणबद्ध योजना की मांग की

    पेट्रोल-डीजल पर समान कर और आर्थिक राहत के लिए सांसद पात्रा ने जीएसटी परिषद में चरणबद्ध योजना की मांग की

    नई दिल्ली।पेट्रोल और डीजल को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में लाने की मांग राजनीतिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर तेज हो रही है। राज्यसभा सांसद डॉ. सस्मित पात्रा ने इस संबंध में केंद्रीय वित्त मंत्री से मुलाकात कर विस्तृत प्रस्ताव सौंपा और इस मुद्दे पर राष्ट्रीय स्तर पर संरचित और व्यापक चर्चा शुरू करने की अपील की। उनके अनुसार, पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी में शामिल करना केवल कर सुधार का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह आम जनता, उद्योग और परिवहन क्षेत्र में आर्थिक संतुलन स्थापित करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

    डॉ. पात्रा ने अपने प्रस्ताव में संविधान के अनुच्छेद 279ए(5) का हवाला देते हुए कहा कि पेट्रोलियम उत्पादों को भविष्य में जीएसटी के दायरे में लाने का प्रावधान पहले से मौजूद है। हालांकि, उन्होंने यह स्वीकार किया कि पहले भी इस विषय पर जीएसटी परिषद में चर्चा हुई थी, लेकिन मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों और महंगाई की चुनौतियों को देखते हुए अब इस पर नए सिरे से व्यावहारिक और संतुलित विचार करना आवश्यक है।

    सांसद ने कहा कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों का सीधा असर महंगाई, परिवहन लागत, लॉजिस्टिक्स खर्च, कृषि उत्पादन लागत, एमएसएमई सेक्टर के संचालन और आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है। वर्तमान में अलग-अलग राज्यों में वैट की अलग-अलग दरें होने के कारण जीएसटी का उद्देश्य—एक समान कर और एकीकृत बाजार—पूरी तरह पूरा नहीं हो पा रहा है। उनके अनुसार, यदि पेट्रोल-डीजल को चरणबद्ध तरीके से जीएसटी में शामिल किया जाता है तो माल ढुलाई और सप्लाई चेन की लागत में कमी आएगी, जिससे उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी और आम लोगों, किसानों तथा ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों को राहत मिलेगी।

    ओडिशा को उदाहरण के रूप में लेते हुए सांसद पात्रा ने बताया कि यह राज्य खनन, उद्योग और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों का बड़ा केंद्र है। यदि यहां के उद्योग और व्यवसाय जीएसटी के तहत समान कर व्यवस्था का लाभ उठाएं, तो न केवल राज्य बल्कि राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को भी स्थिरता और पारदर्शिता मिलेगी। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि राज्यों को मिलने वाले राजस्व पर ध्यान रखते हुए पेट्रोलियम उत्पादों को तुरंत जीएसटी में शामिल करने की बजाय चरणबद्ध और संतुलित मॉडल अपनाया जाए।

    डॉ. पात्रा ने जीएसटी परिषद को सुझाव दिया कि इसके लिए अलग जीएसटी स्लैब, राज्यों के लिए ट्रांजिशनल मुआवजा, सीमित अवधि का उपकर (सेस) और वित्तीय स्थिरता के लिए तय फॉर्मूला तैयार करने पर विचार किया जाए। उन्होंने वित्त मंत्री से आग्रह किया कि इस मुद्दे पर सभी राज्यों के साथ व्यापक चर्चा कराई जाए और एक तकनीकी व वित्तीय विशेषज्ञ समूह का गठन किया जाए, जो चरणबद्ध तरीके से पेट्रोल और डीजल को जीएसटी में शामिल करने का मॉडल तैयार कर सके और राष्ट्रीय सहमति बनाने में मदद करे।

    डॉ. सस्मित पात्रा ने कहा कि पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के तहत लाना केवल कर सुधार नहीं होगा, बल्कि यह देश में आर्थिक संतुलन, उद्योगों की प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और आम लोगों को महंगाई से राहत देने की दिशा में बड़ा कदम साबित होगा। उनका मानना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी, आपूर्ति श्रृंखला की लागत कम होगी और भारत का एकीकृत बाजार अधिक प्रभावी तरीके से काम करेगा।

  • हाई-प्रोफाइल नीट पेपर लीक केस: शुभम खैरनार CBI हिरासत में, बाकी आरोपियों की न्यायिक हिरासत 2 जून तक

    हाई-प्रोफाइल नीट पेपर लीक केस: शुभम खैरनार CBI हिरासत में, बाकी आरोपियों की न्यायिक हिरासत 2 जून तक


    नई दिल्ली। नीट यूजी 2026 पेपर लीक मामला देशभर में सुर्खियों में बना हुआ है। इस हाई-प्रोफाइल जांच में सीबीआई लगातार सक्रिय है और मुख्य आरोपी शुभम खैरनार की कस्टडी को पांच दिन के लिए बढ़ा दिया गया है। अदालत ने मामले में गिरफ्तार बाकी पांच आरोपियों को 2 जून तक न्यायिक हिरासत में भेजा है। इस मामले की जांच दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट में चल रही है।

    इस घटना के बाद, कुल छह आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया। ये आरोपियों महाराष्ट्र, राजस्थान और हरियाणा से जुड़े हुए हैं। मुख्य आरोपी नासिक निवासी शुभम खैरनार के अलावा जयपुर के मांगीलाल बिवाल, विकास बिवाल और दिनेश बिवाल, गुरुग्राम के यश यादव और महाराष्ट्र के अहिल्या नगर निवासी धनंजय लोखंडे शामिल हैं।

    सीबीआई ने अदालत से शुभम खैरनार की कस्टडी बढ़ाने की मांग की। एजेंसी ने यह बताया कि अन्य गिरफ्तार आरोपियों के साथ उसका सामना कराना जरूरी है और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों के आधार पर उससे आगे भी पूछताछ होनी है। साथ ही जांच एजेंसी ने कहा कि मामले में और रिकवरी की आवश्यकता है और शुभम खैरनार को महाराष्ट्र लेकर जांच के सिलसिले में ले जाना पड़ेगा।

    अदालत ने बाकी पांच आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। मांगीलाल बिवाल, विकास बिवाल, दिनेश बिवाल, यश यादव और धनंजय लोखंडे अब 2 जून तक हिरासत में रहेंगे। इस दौरान सीबीआई उनके खिलाफ चल रही जांच को आगे बढ़ा सकेगी और नेटवर्क की पूरी जानकारी जुटा सकेगी।

    वहीं, शुभम खैरनार के वकील ने सीबीआई की कस्टडी बढ़ाने की मांग का विरोध किया। बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि सात दिन की पूछताछ के दौरान एजेंसी को क्या जानकारी मिली, उसे स्पष्ट करना चाहिए। इसके बावजूद अदालत ने सीबीआई की मांग को स्वीकार कर उनके रिमांड को बढ़ा दिया।

    नीट UG 2026 पेपर लीक मामले में लगातार हुई गिरफ्तारियों और पूछताछ के बीच यह स्पष्ट हो गया है कि जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क और इससे जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं। देशभर में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है, और आगे की जांच की दिशा पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

  • TMC सांसद सायनी घोष ने अभिषेक बनर्जी से जुड़े दावों को नकारा, कानूनी कार्रवाई की चेतावनी

    TMC सांसद सायनी घोष ने अभिषेक बनर्जी से जुड़े दावों को नकारा, कानूनी कार्रवाई की चेतावनी


    नई दिल्ली ।
    कोलकाता की राजनीति एक बार फिर संपत्ति विवाद और आरोप-प्रत्यारोप के नए दौर में पहुंच गई है। इस बार चर्चा के केंद्र में तृणमूल कांग्रेस की सांसद सायनी घोष हैं, जिन्होंने अपने ऊपर और पार्टी के महासचिव अभिषेक बनर्जी से कथित तौर पर जुड़ी संपत्तियों को लेकर लगाए गए आरोपों को सख्ती से खारिज कर दिया है। उन्होंने इन दावों को पूरी तरह निराधार और फर्जी बताते हुए कहा है कि कुछ लोग जानबूझकर गलत सूचनाएं फैलाकर राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।

    यह विवाद तब और गहरा गया जब कोलकाता नगर निगम द्वारा कुछ संपत्तियों की जांच शुरू किए जाने की जानकारी सामने आई। यह जांच ऐसे समय में शुरू हुई है जब राजनीतिक हलकों में पहले से ही विभिन्न आरोपों को लेकर तनाव बना हुआ है। आरोपों में यह दावा किया जा रहा था कि कुछ संपत्तियों का संबंध अभिषेक बनर्जी और उनके करीबी लोगों से हो सकता है। हालांकि, इन दावों को लेकर अब तक कोई ठोस आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

    सायनी घोष ने इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस तरह की बातें न केवल गलत हैं बल्कि पूरी तरह से राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी तरह की अफवाह या झूठी खबर को फैलाने वालों के खिलाफ कानूनी कदम उठाया जाएगा। उनके अनुसार, यह प्रयास केवल उनकी और उनकी पार्टी की छवि को खराब करने के लिए किया जा रहा है, जबकि वास्तविकता में इन दावों का कोई आधार नहीं है।

    इस पूरे मामले में राजनीतिक माहौल और अधिक गर्म हो गया है क्योंकि विपक्षी दलों की ओर से पहले ही कई सवाल उठाए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री से जुड़े राजनीतिक विरोधियों ने इन संपत्ति मामलों को लेकर पारदर्शिता की मांग की है और जांच को आगे बढ़ाने की बात कही है। दूसरी ओर, सत्तारूढ़ दल का कहना है कि यह सभी आरोप केवल राजनीतिक लाभ लेने के लिए फैलाए जा रहे हैं और इनका उद्देश्य जनता को भ्रमित करना है।

    सायनी घोष ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि हाल के दिनों में उन्हें व्यक्तिगत रूप से भी निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एक दिन पहले ही उन्हें जान से मारने की धमकी मिलने की घटना सामने आई थी और अब उनके खिलाफ झूठी खबरों का सहारा लेकर बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने इसे एक सुनियोजित अभियान बताया, जिसका मकसद उनकी आवाज को दबाना है।

    इस पूरे घटनाक्रम ने कोलकाता की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है, जहां एक ओर जांच और आरोपों की प्रक्रिया चल रही है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। ऐसे में यह मामला केवल संपत्ति विवाद तक सीमित न रहकर राजनीतिक टकराव का एक बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।

    फिलहाल स्थिति यह है कि जांच की प्रक्रिया जारी है, लेकिन किसी भी पक्ष की ओर से आधिकारिक तौर पर ठोस सबूत प्रस्तुत नहीं किए गए हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मामला और अधिक राजनीतिक रूप से संवेदनशील हो सकता है, जिससे राज्य की राजनीति में नई हलचल देखने को मिल सकती है।

  • चुनावी शोर थमा, पर कर्नाटक कांग्रेस में सत्ता संग्राम जारी, सीएम पद को लेकर फिर गरमाई सियासत

    चुनावी शोर थमा, पर कर्नाटक कांग्रेस में सत्ता संग्राम जारी, सीएम पद को लेकर फिर गरमाई सियासत


    नई दिल्ली ।  कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर सत्ता को लेकर अंदरूनी संघर्ष सामने आने लगा है। हाल ही में पांच राज्यों के चुनावी माहौल के शांत होने के बाद राज्य में सत्तारूढ़ Indian National Congress के भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही खींचतान फिर से चर्चा में आ गई है। मौजूदा मुख्यमंत्री Siddaramaiah और उपमुख्यमंत्री DK Shivakumar के बीच कथित सत्ता-साझेदारी के फॉर्मूले ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है।

    सूत्रों और राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार, 2023 में सरकार गठन के समय दोनों नेताओं के बीच एक अनौपचारिक समझौते की बात सामने आई थी, जिसमें कथित तौर पर ढाई-ढाई साल के नेतृत्व की व्यवस्था का उल्लेख किया गया था। जैसे-जैसे सरकार अपने कार्यकाल के मध्य चरण के करीब पहुंच रही है, वैसे-वैसे यह मुद्दा फिर से सियासी बहस का केंद्र बन गया है।

    उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के हालिया बयानों को लेकर उनके समर्थकों में उत्साह देखा जा रहा है। हालांकि उन्होंने सार्वजनिक रूप से यह कहा है कि वे पार्टी नेतृत्व के निर्णय का पालन करेंगे, लेकिन उनके बयान के राजनीतिक अर्थ निकाले जा रहे हैं। शिवकुमार खेमे का मानना है कि समय आ गया है जब कथित समझौते पर आगे की स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।

    दूसरी ओर, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के समर्थक इस तरह के किसी भी बदलाव की संभावना को सिरे से खारिज कर रहे हैं। उनके अनुसार राज्य में नेतृत्व स्थिर है और सरकार अपना पूरा कार्यकाल सिद्धारमैया के नेतृत्व में ही पूरा करेगी। साथ ही, पार्टी के भीतर विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक समूहों का समर्थन भी इस बहस को और जटिल बना रहा है।

    कर्नाटक की राजनीति में जातीय समीकरण भी इस विवाद को और गहरा बना रहे हैं। सिद्धारमैया का समर्थन मुख्य रूप से पिछड़े वर्गों, दलितों और अल्पसंख्यक समुदायों के बीच मजबूत माना जाता है, जबकि डीके शिवकुमार को वोक्कालिगा समुदाय का प्रमुख चेहरा माना जाता है। इन सामाजिक आधारों के कारण यह मुद्दा केवल राजनीतिक नेतृत्व तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि सामाजिक संतुलन का भी हिस्सा बन गया है।

    इसी बीच, पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व की भूमिका पर भी सबकी नजरें टिकी हुई हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे सहित शीर्ष नेतृत्व से अपेक्षा की जा रही है कि वे इस विवाद का समाधान निकालेंगे। दिल्ली में जल्द ही एक महत्वपूर्ण बैठक की संभावना जताई जा रही है, जिसमें दोनों नेताओं के बीच समन्वय और भविष्य की रणनीति पर चर्चा हो सकती है।

    वहीं विपक्षी दल इस स्थिति को लेकर कांग्रेस पर लगातार हमला कर रहे हैं। उनका आरोप है कि पार्टी जनता के मुद्दों की बजाय सत्ता संघर्ष में उलझी हुई है। हालांकि कांग्रेस नेतृत्व इस विवाद को आंतरिक मामला बताते हुए सार्वजनिक बयानबाजी से बचने की कोशिश कर रहा है।

  • राजधानी में ट्रैफिक क्रांति, 34,800 करोड़ का मास्टर प्लान करेगा दिल्ली-NCR की सड़कों को पूरी तरह बदलने का दावा

    राजधानी में ट्रैफिक क्रांति, 34,800 करोड़ का मास्टर प्लान करेगा दिल्ली-NCR की सड़कों को पूरी तरह बदलने का दावा


    नई दिल्ली ।
      दिल्ली में लंबे समय से चली आ रही ट्रैफिक जाम की समस्या को खत्म करने के लिए सरकार ने एक बड़ा और महत्वाकांक्षी मास्टर प्लान तैयार किया है, जिसके तहत राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में सड़क ढांचे को पूरी तरह नया रूप देने की योजना बनाई गई है। इस 34,800 करोड़ रुपये की परियोजना का उद्देश्य दिल्ली-NCR को सिग्नल-फ्री और तेज रफ्तार यातायात व्यवस्था में बदलना है, जिससे लोगों को रोजमर्रा के जाम से राहत मिल सके।

    इस योजना के तहत लगभग 186 किलोमीटर लंबी नई सड़कों, एक्सप्रेसवे, सुरंगों और एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण किया जाएगा। इन प्रोजेक्ट्स के जरिए उन प्रमुख मार्गों को जोड़ा जाएगा जहां सबसे ज्यादा ट्रैफिक दबाव रहता है, खासकर एयरपोर्ट, बाहरी रिंग रोड और प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों के आसपास। सरकार का लक्ष्य है कि भारी वाहनों को शहर के अंदर आने से रोका जाए और उन्हें वैकल्पिक मार्गों से डायवर्ट किया जाए, जिससे शहरी सड़कों पर दबाव कम हो सके।

    योजना के तहत कई महत्वपूर्ण रूट्स को आपस में जोड़ा जाएगा, जिससे द्वारका, रोहिणी, पंजाबी बाग, गुरुग्राम और आसपास के क्षेत्रों की कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार आएगा। इसके साथ ही एयरपोर्ट और प्रमुख व्यावसायिक इलाकों तक पहुंच को और तेज और आसान बनाने पर भी जोर दिया गया है। इस मास्टर प्लान का उद्देश्य केवल नए मार्ग बनाना नहीं है, बल्कि पूरे ट्रैफिक सिस्टम को पुनर्गठित करना भी है।

    इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा अंडरग्राउंड टनल प्रोजेक्ट भी है, जिसके तहत एयरपोर्ट के आसपास एक लंबी सुरंग बनाई जाएगी, जिससे वाहन बिना किसी ट्रैफिक सिग्नल के सीधे अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे। यह प्रोजेक्ट दिल्ली के व्यस्ततम इलाकों में यात्रा समय को काफी हद तक कम करने में मदद करेगा।

    इसके अलावा दिल्ली और गुरुग्राम के बीच एक नया एलिवेटेड कॉरिडोर भी प्रस्तावित है, जिससे आईएमएस, हौज खास और महिपालपुर जैसे क्षेत्रों से होते हुए तेज और निर्बाध यात्रा संभव हो सकेगी। इस कॉरिडोर का उद्देश्य मौजूदा हाईवे पर दबाव को कम करना और यात्रा को अधिक सुगम बनाना है।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि कई प्रमुख सड़क परियोजनाएं राष्ट्रीय स्तर की एजेंसियों को सौंप दी गई हैं ताकि उनका तेजी से विकास हो सके। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद दिल्ली और एनसीआर के कई हिस्सों में ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह बदलने की उम्मीद है।