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  • अमिताभ कांत ने बताया, देश हित में चीन के साथ सहयोग क्यों जरूरी, क्लीन टेक और औद्योगिक क्षमता पर दिया जोर

    अमिताभ कांत ने बताया, देश हित में चीन के साथ सहयोग क्यों जरूरी, क्लीन टेक और औद्योगिक क्षमता पर दिया जोर

    नई दिल्ली । इंडिया टुडे के BRICS Roundtable में नीति आयोग के पूर्व CEO अमिताभ कांत ने वैश्विक अर्थव्यवस्था, क्लीन टेक्नोलॉजी और भारत की औद्योगिक क्षमता पर विस्तार से विचार रखे. उन्होंने स्पष्ट किया कि वैश्विक उथल-पुथल के इस दौर में भारत के राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए अमेरिका और चीन दोनों पक्षों के साथ संतुलित रणनीति बनाकर काम करना अनिवार्य है.

    अमिताभ कांत के अनुसार, क्लीन टेक्नोलॉजी के लगभग सभी प्रमुख वर्टिकल्स में चीन का दबदबा है. दुनिया की करीब 95% क्लीन बैटरियां और 85% इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) चीन में बनते हैं. इसके अलावा, क्रिटिकल मिनरल्स की प्रोसेसिंग तकनीक के साथ-साथ सोलर सेक्टर पर करीब 80% और विंड एनर्जी में 77% नियंत्रण चीन का ही है.

    दूसरी ओर, जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuels) के बाजार में अमेरिका का बड़ा प्रभाव है. भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए अभी भी बड़े पैमाने पर जीवाश्म ईंधन का आयात करता है, जिस पर सालाना लगभग 180 अरब डॉलर का खर्च आता है. पश्चिम एशिया में तनाव या युद्ध की स्थिति बनते ही कच्चे तेल के दाम बढ़ते हैं, जिससे भारत के आयात बिल, रुपये की स्थिरता और पूरी अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ता है.

    देश हित में चीन के साथ काम करना क्यों है जरूरी?

    ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश को भविष्य में तेजी से क्लीन टेक्नोलॉजी की दिशा में आगे बढ़ना होगा. ऐसे में भारत के राष्ट्रीय हित में चीन के साथ तकनीकी स्तर पर सहभागिता बनाना जरूरी है, लेकिन चीन को इस तकनीक को ‘वेपनाइज’ बनाने से रोकना होगा. चीन को यह तकनीक BRICS देशों और ग्लोबल साउथ के साथ साझा करनी चाहिए.

    चीन के नॉन-टैरिफ बैरियर्स और बाजार की असमानता

    चीन की नीति मुख्य रूप से निर्यात पर केंद्रित है, जबकि वह दूसरे देशों के आयात के लिए अपना बाजार आसानी से नहीं खोलता. चीन में मौजूद नॉन-टैरिफ बैरियर्स के कारण भारत के फार्मास्यूटिकल और ड्रग मैन्युफैक्चरर्स वहां आसानी से प्रवेश नहीं कर पाते. आगामी BRICS शिखर सम्मेलन और द्विपक्षीय वार्ताओं में भारत को चीन के सामने अपने बाजारों को खोलने और क्लीन टेक साझा करने का मुद्दा मजबूती से उठाना चाहिए.

    अमिताभ कांत ने कहा कि क्लीन टेक्नोलॉजी में किसी एक देश का अत्यधिक नियंत्रण वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बन सकता है। ग्लोबल साउथ के देशों के सतत विकास के लिए तकनीक, निवेश और बाजारों का आपस में साझा होना जरूरी है, ताकि एकाधिकार की स्थिति से बचा जा सके.

    भारत की आर्थिक वृद्धि पर बात करते हुए उन्होंने एक ग्लोबल इन्वेस्टमेंट बैंक की रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें भारत में नई औद्योगिक क्रांति की बात कही गई है. इसके पीछे स्पेस, सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर और एयरोस्पेस जैसे हाई-ग्रोथ सेक्टर्स की मुख्य भूमिका है.

    भारत में औद्योगिक वृद्धि को रफ्तार देने के लिए सरकार ने उन क्षेत्रों को निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स के लिए खोल दिया है, जिन पर पहले सरकारी नियंत्रण था. जियो-स्पेशियल, ड्रोन, स्पेस और डिफेंस सेक्टर्स में निजी भागीदारी और स्टार्टअप्स के आने से नई तकनीक, निवेश और प्रतिस्पर्धा को बड़ा प्रोत्साहन मिला है.

    डिजाइनिंग से आगे बढ़कर मैन्युफैक्चरिंग पर भारत का फोकस

    भारत अब केवल तकनीक और चिप डिजाइन करने तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि मैन्युफैक्चरिंग क्षमता भी बढ़ा रहा है. सेमीकंडक्टर PLI योजना की सफलता और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में आई तेजी इसका प्रमाण हैं. भारत का लक्ष्य घरेलू मांग पूरी करने के साथ-साथ ग्लोबल सप्लाई चेन का प्रमुख हिस्सा बनना है.

    BRICS देश दुनिया की कुल GDP का लगभग 40% हिस्सा संभालते हैं. अमिताभ कांत ने सुझाव दिया कि भारत को अपनी अध्यक्षता के दौरान संगठन का ध्यान राजनीतिक ध्रुवीकरण या ‘पश्चिम-विरोधी’ रुख पर ले जाने के बजाय व्यापार, निवेश, जलवायु और विकास जैसे व्यावहारिक मुद्दों पर केंद्रित रखना चाहिए.

    पश्चिम एशिया के तनाव और विभिन्न सदस्य देशों की अलग-अलग प्राथमिकताओं के बीच भारत को ‘कंसेंसस बिल्डिंग’ की भूमिका निभानी होगी. जैसा कि भारत ने G20 सम्मेलन में संवेदनशील मुद्दों पर आम सहमति बनाकर दिखाया था, वैसा ही नेतृत्व BRICS में भी दिखाकर सभी देशों को एक न्यूनतम साझा एजेंडे पर साथ लाना होगा.

  • रिया अहीर और शहजाद पूनावाला में छिड़ी जुबानी जंग, ‘अंकल’ कहने पर राहुल गांधी और IQ का जिक्र कर भड़के

    रिया अहीर और शहजाद पूनावाला में छिड़ी जुबानी जंग, ‘अंकल’ कहने पर राहुल गांधी और IQ का जिक्र कर भड़के

    नई दिल्ली । रियलिटी शो बिग बॉस 20 में एंट्री नहीं मिलने के बाद मॉडल रिया अहीर और भाजपा के पूर्व प्रवक्ता शहजाद पूनावाला के बीच सोशल मीडिया पर जुबानी जंग छिड़ गई है। पूनावाला ने रिया पर निशाना साधते हुए उनके वायरल प्रोटेस्ट वीडियो और बिग बॉस में एंट्री को लेकर सवाल उठाए थे। इसके जवाब में रिया ने उन्हें ‘अंकल’ कहते हुए अपनी उम्र से तुलना की। इसके बाद पूनावाला ने भी पलटवार किया और राहुल गांधी का जिक्र करते हुए रिया की ‘मैथ्स’ और ‘आईक्यू’ पर तंज कसा।

    बिग बॉस में एंट्री नहीं मिलने के बाद शुरू हुआ विवाद

    मुंबई की मॉडल रिया अहीर उस समय चर्चा में आई थीं, जब विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस वैन को रोकने का उनका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इसके बाद वह बिग बॉस 20 में जनता के वोट से एंट्री पाने की दौड़ में शामिल हुईं। हालांकि, इस वोटिंग में पंजाबी अभिनेत्री लव गिल ने बाजी मारी और रिया शो में जगह नहीं बना सकीं।

    इसके बाद शहजाद पूनावाला ने एक रील के जरिए रिया पर निशाना साधा। उन्होंने उनके वायरल फोटो और बिग बॉस में एंट्री की कोशिश को लेकर सवाल उठाए। पूनावाला ने दावा किया कि रिया को ‘लेफ्ट-विंग इकोसिस्टम’ और ‘एंटी-मोदी यूट्यूबर्स’ का समर्थन हासिल था।

    पूनावाला ने यह भी आरोप लगाया कि रिया बिग बॉस के मंच का इस्तेमाल ‘एंटी-नेशनल’ और ‘एंटी-सनातन’ विचार फैलाने के लिए करना चाहती थीं। उन्होंने राहुल गांधी का भी जिक्र करते हुए रिया की हार पर तंज कसा।

    रिया ने शहजाद को कहा- ‘अंकल’

    पूनावाला की रील का जवाब रिया अहीर ने दो वीडियो के जरिए दिया। उन्होंने अपने जवाब की शुरुआत शहजाद पूनावाला को ‘अंकल’ कहकर की। रिया ने उनसे कहा कि उन्हें अपनी उम्र के लोगों के साथ राजनीति करनी चाहिए, ‘छोटी लड़कियों’ के साथ नहीं। रिया ने कहा कि पूनावाला उनकी उम्र से ‘दोगुने से भी ज्यादा’ हैं।

    रिया ने पूनावाला के उन दावों को भी खारिज किया, जिनमें उन्होंने राजनीतिक नेताओं के साथ उनके जुड़ाव की बात कही थी। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ इस्तेमाल की जा रही यही स्क्रिप्ट 50 अन्य ‘चीप इन्फ्लुएंसर्स’ भी इस्तेमाल कर चुके हैं।

    भारतीय सेना पर टिप्पणी को लेकर भी दिया जवाब

    रिया ने भारतीय सेना के सम्मान को लेकर लगाए गए आरोप पर भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि अगर कोई यह कह रहा है कि वह भारतीय सेना का सम्मान नहीं करतीं, तो उन्हें इसका सबूत दिखाना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि उन्होंने भारतीय सेना, किसी प्रोफेशनल, संस्था, धर्म या किसी व्यक्ति का कब अपमान किया है।

    रिया ने विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस वाहन से जुड़ी अपनी टिप्पणी पर भी सफाई दी। उन्होंने लव गिल के साथ हुई बातचीत का जिक्र करते हुए कहा कि अगर ड्राइवर वाहन नहीं रोकता तो शायद उसी समय उनकी जिंदगी का उद्देश्य पूरा हो जाता।

    रिया ने अपने सोशल वर्क का भी किया जिक्र

    अपने दूसरे वीडियो में रिया ने लोगों की मदद करते हुए कुछ वीडियो साझा किए। इनमें महाराष्ट्र के लातूर जिले के एक कुष्ठ प्रभावित गांव का दौरा और स्कूली बच्चों को स्टेशनरी देने की कोशिशें शामिल थीं।

    रिया ने पूनावाला और उनके जैसे लोगों पर उन लोगों को निशाना बनाने का आरोप लगाया, जिनकी राजनीतिक सोच उनसे अलग है। उन्होंने यह भी कहा कि बिग बॉस का इस्तेमाल राजनीतिक एजेंडा या धर्म को बढ़ावा देने के लिए नहीं किया जा सकता क्योंकि यह शो मनोरंजन के लिए है।

    अपने वीडियो के अंत में रिया ने महिलाओं, मंदिर, इंस्टाग्राम और अपनी उम्र से आधी उम्र की लड़कियों को छोड़ देने की बात कहते हुए पूनावाला पर निशाना साधा।

    पूनावाला का पलटवार- ‘आप 28 की हैं, यंग गर्ल नहीं’

    रिया के जवाब के बाद पूनावाला ने सोशल मीडिया पर पलटवार किया। उन्होंने लिखा कि उन्हें अफसोस है कि रिया बिग बॉस के घर में एंट्री करने से पहले ही बाहर हो गईं।

    पूनावाला ने राहुल गांधी का जिक्र करते हुए कहा कि जब वह अपने चुनाव नहीं जीत सकते तो रिया को कैसे जिताएंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी मूल वीडियो मुख्य रूप से पत्रकार अरफा खानम शेरवानी को लेकर थी और रिया का जिक्र उसमें केवल एक हिस्से के तौर पर आया था।

    उम्र को लेकर रिया की टिप्पणी पर पूनावाला ने कहा कि रिया 28 साल की हैं और वह 38 साल के हैं, इसलिए तकनीकी रूप से वह उनकी उम्र से दोगुने नहीं हैं। इसके साथ ही उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि शायद स्कूल में ‘मैथ्स’ रिया का मजबूत विषय नहीं था।

    पूनावाला ने मजाकिया अंदाज में कहा कि शायद रिया ने उन्हें ‘56 साल के राहुल गांधी’ समझ लिया है। इसके बाद उन्होंने रिया के पुराने इंस्टाग्राम सब्सक्रिप्शन का भी जिक्र करते हुए उन पर तंज कसा।

    ‘आपका IQ और ज्ञान राहुल गांधी जैसा है’- पूनावाला

    पूनावाला ने अपने जवाब में रिया के ‘आईक्यू और नॉलेज’ पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि रिया उन्हें नहीं जानतीं तो यह ठीक है, लेकिन उनके मुताबिक रिया का आईक्यू और ज्ञान राहुल गांधी जैसा है। उन्होंने रिया के वंदे मातरम से जुड़े सवाल के दौरान दिए गए जवाब का भी जिक्र किया।

    इस तरह बिग बॉस 20 में एंट्री को लेकर शुरू हुआ विवाद अब सोशल मीडिया पर दोनों के बीच उम्र, राजनीति, प्रदर्शन और विचारधारा को लेकर तीखी बयानबाजी तक पहुंच गया है।

    कांग्रेस छोड़ भाजपा में आए पूनावाला ने भाजपा भी छोड़ी

    शहजाद पूनावाला का राजनीतिक सफर कांग्रेस से शुरू हुआ था। बाद में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा और पार्टी के प्रमुख प्रवक्ताओं में शामिल रहे। हालांकि, अगस्त 2026 में उन्होंने भाजपा के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। पूनावाला ने अपने फैसले के पीछे आर्थिक और निजी परिस्थितियों को वजह बताया। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अपने बुनियादी खर्चों के लिए पैसे की जरूरत है और अब वह निजी क्षेत्र में जाने की योजना बना रहे हैं।

    हालांकि इस बीच अटकलें लगाई जाने लगीं कि शहजाद पूनावाला फिर से कांग्रेस में वापसी कर सकते हैं। बाद में खुद शहजाद पूनावाला ने इन अटकलों पर विराम लगाते हुए इस तरह की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया था। भाजपा छोड़ने के बावजूद उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा की विचारधारा के प्रति अपना समर्थन जारी रखने की बात कही थी।

  • MPSC छात्र की आत्महत्या के बाद अभिजीत दीपके परिवार से मिलेंगे, कर्ज और परीक्षा व्यवस्था को लेकर उठे सवाल

    MPSC छात्र की आत्महत्या के बाद अभिजीत दीपके परिवार से मिलेंगे, कर्ज और परीक्षा व्यवस्था को लेकर उठे सवाल

    नई दिल्ली । कॉकरोच जनता पार्टी फाउंडर अभिजीत दीपके MPSC परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्र के परिवार से मिलने पहुंच रहे हैं। छात्र ने पुणे में खुदकुशी कर ली थी। पुलिस को शक है कि कर्ज से परेशान होकर यह कदम उठाया गया है। मृतक की पहचान प्रथमेश देशमुख के रूप में हुई है।

    दीपके ने गुरुवार को पोस्ट किया, ‘मैं MPSC के एक छात्र प्रथमेश देशमुख के शोकाकुल परिवार से मिलने जा रहा हूं, जिन्होंने कल आत्महत्या कर ली थी।’ खबर है कि सीजेपी पदाधिकारी सौरभ दास भी नोएडा पहुंच रहे हैं, जहां वह प्रशासन की तरफ से 5 लाख का नोटिस पाने वाले छात्र अक्षत से मुलाकात करेंगे।

    पुलिस उपायुक्त कृषिकेश रावले ने बताया कि मृतक प्रथमेश देशमुख एमपीएससी परीक्षा की तैयारी के लिए पुणे के नवी पेठ इलाके में किराये के मकान में रह रहा था। उन्होंने बताया कि वह सुबह कमरे में फंदे से लटका हुआ पाया गया, जिसके बाद कुछ निवासियों ने पुलिस को सूचना दी। उन्होंने बताया कि आत्महत्या का सही समय पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

    सुसाइड नोट मिला

    पुलिस ने जानकारी दी है, ‘देशमुख कथित रूप से आर्थिक दबाव में था और उसे कई लोगों के करीब ढाई लाख रुपये लौटाने थे। उसका परिवार भी आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहा था। उसने एक नोट छोड़ा है, जिसमें लोगों से लिए कर्ज और लौटाई जा चुकी रकम के बारे में जानकारियां दी गईं हैं।’

    बताया गया कि दो पन्नों के इस नोट में 8-19 लोगों के नाम लिखे हैं। पुलिस यह पता लगाने के लिए उसके परिवार के सदस्यों से पूछताछ कर रही है कि उसने पैसे क्यों उधार लिए थे और मामले की जांच जारी है।

    छत्रपति संभाजीनगर में हो रहा है प्रदर्शन

    मंगलवार को छत्रपति संभाजीनगर में MPSC में कथित भ्रष्टाचार और पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। खास बात है कि यह दीपके का गृहनगर भी है। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि आयोग में शीर्ष पदों पर साफ छवि वाले अधिकारियों को नियुक्त किया जाए। इससे पहले सोमवार को पुणे में भी प्रदर्शन हुआ था और देशमुख ने पुणे में ही आत्महत्या की है।

    इसके अलावा प्रदर्शनकारी पूर्व में हुई परीक्षाओं पर भी सवाल उठा रहे हैं और जांच की भी मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि कोरोना वायरस महामारी के बाद हुई परीक्षाओं को लेकर भी संदेह है। एक छात्र ने कहा था, ‘हमें पता होना चाहिए कि आखिर क्या हो रहा है। मैं चार साल से पढ़ाई कर रहा हूं और परीक्षाएं दे रहा हूं। आज पैसे वाले लोग इसका फायदा उठा रहे हैं।’

  • उन्नाव के स्कूल में हेड मास्टर पर बच्चों की पिटाई और निजी काम कराने के गंभीर आरोप, वायरल वीडियो से मचा हड़कंप

    उन्नाव के स्कूल में हेड मास्टर पर बच्चों की पिटाई और निजी काम कराने के गंभीर आरोप, वायरल वीडियो से मचा हड़कंप

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है. पुरवा तहसील के मदारपुर जूनियर स्कूल के हेड मास्टर पर स्कूली बच्चों को बेरहमी से पीटने का आरोप लगा है. साथ ही, उनका मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न करने का भी गंभीर आरोप लगा है. इस घटना से जुड़ा एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने शिक्षा विभाग की कार्यशैली और बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

    छोटी-छोटी बातों पर बर्बरता के आरोप

    पीड़ित बच्चों के परिजनों के अनुसार, स्कूल के हेड मास्टर मासूम बच्चों से अपने व्यक्तिगत और गैर-शैक्षणिक काम करवाते थे. आरोप है कि अगर कोई स्टूडेंट उन्हें ‘गुड मॉर्निंग’ बोलना भूल जाता था, तो उसकी बेरहमी से पिटाई की जाती थी. इसके अलावा, हेड मास्टर बच्चों से अपनी निजी गाड़ी धुलवाता और टॉयलेट में पानी डालने जैसे काम भी जबरन करवाते थे. इन कामों को करने में जरा सी भी चूक होने पर बच्चों को बेरहमी से प्रताड़ित किया जाता था.

    परिजनों ने एसडीएम से की शिकायत

    जब बच्चों ने अपने साथ हो रही इस बर्बरता की जानकारी घर पर दी, तो परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा. घटना से आक्रोशित परिजनों ने एसडीएम पुरवा से मुलाकात कर आरोपी हेड मास्टर के खिलाफ शिकायत की. परिजनों ने वायरल वीडियो का हवाला देते हुए आरोपी हेड मास्टर के खिलाफ कड़े कानूनी कदम उठाने की मांग की है. एसडीएम ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के बाद सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है.

    शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

    सरकारी स्कूलों में बच्चों को बेहतर शिक्षा और सुरक्षित माहौल देने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन मदारपुर जूनियर स्कूल की इस घटना ने सरकारी दावों की पोल खोलकर रख दी है. स्कूल में शिक्षा लेने जाने वाले मासूमों के साथ ऐसा दुर्व्यवहार न केवल उनके मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डालता है, बल्कि उनके मन में शिक्षा के प्रति खौफ भी पैदा करता है. फिलहाल, इस वायरल वीडियो और परिजनों की शिकायत के बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) स्तर पर क्या कार्रवाई होती है ये देखने वाली बात होगी.

  • भारत के पास 190 परमाणु वॉरहेड, 225 तक हथियार बनाने की क्षमता, जल-थल-नभ से जवाब देने की तैयारी

    भारत के पास 190 परमाणु वॉरहेड, 225 तक हथियार बनाने की क्षमता, जल-थल-नभ से जवाब देने की तैयारी

    नई दिल्ली । चीन और पाकिस्तान की ओर से बढ़ते खतरे को देखते हुए भारत लगातार अपनी सैन्य क्षमताओं में इजाफा कर रहा है. भारत के परमाणु हथियारों को लेकर एक नई रिपोर्ट में कई बड़े खुलासे किए गए हैं.

    भारत के पास 190 न्यूक्लियर वॉरहेड

    रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के पास अब करीब 190 परमाणु वॉरहेड मौजूद हैं. भारत ने अपने एटमी पावरबैंक को बेहद एडवांस और पावरफुल बना लिया है. रिपोर्ट में कहा गया कि भारत के पास करीब 140 से 225 परमाणु बम बनाने के लिए पर्याप्त मात्रा में ‘वेपन-ग्रेड प्लूटोनियम’ (परमाणु ईंधन) तैयार हो चुका है. इसमें भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (BARC) के ध्रुव रिएक्टर की अहम भूमिका रही है.

    नई रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के पास अब 3 तरीके (न्यूक्लियर ट्रायड) से परमाणु हमला करने वाले 9 अलग-अलग सिस्टम पूरी तरह तैयार और चालू हैं. भारतीय वायुसेना के मिराज-2000 और जगुआर लड़ाकू विमानों को परमाणु हथियार ले जाने और सटीक निशाना लगाने के लिए आधुनिक एविओनिक्स से लैस रखा गया है.

    वहीं, अग्नि सीरीज (अग्नि-1 से लेकर अग्नि-5) और पृथ्वी मिसाइलें भारत की जमीन से मार करने वाली बड़ी ताकत हैं. अग्नि-5 की रेंज 5,000 किलोमीटर से ज्यादा है, जो पूरे एशिया और चीन के दूर के हिस्सों तक मार कर सकती है. इसके अलावा रिपोर्ट्स ये भी हैं कि भारत अग्नि 6 मिसाइल भी बना रहा है, जिसकी रेंज 12000 किलोमीटर तक है. इसके अलावा ब्रह्मोस सुपरसॉनिक मिसाइलों को भी न्यूक्लियर वॉरहेड से लैस किया जा सकता है.

    समुद्र से भी मार कर सकता है भारत

    इसके अलावा समुद्र में भी दुश्मनों पर हमला करने के लिए भारत ने कमर कस रखी है. भारत की स्वदेशी एटमी एनर्जी से चलने वाली पनडुब्बी आईएनएस अरिहंत और इस कैटेगरी की अन्य पनडुब्बियां समुद्र की गहराइयों में तैनात रहकर दुश्मन पर दूसरा जवाबी हमला करने की काबिलियत रखती हैं.

    इतन ही नहीं, अब भारत अपनी मिसाइलों को स्पेशल सीलबंद डिब्बों (कैनिस्टर) में रख रहा है. वहां ये लंबे वक्त तक सुरक्षित रहती हैं. इससे इन्हें सड़क या रेल मार्ग से कहीं भी ले जाना बेहद आसान होता है, और हमले का आदेश मिलते ही इन्हें कुछ ही मिनटों में लॉन्च किया जा सकता है.

    कई शहरों पर गिराए जा सकते हैं परमाणु बम!

    इसके अलावा, भारत Multiple Independently Targetable Re-entry Vehicle तकनीक पर भी काम कर रहा है, जिससे एक ही मिसाइल से एक साथ अलग-अलग शहरों या ठिकानों पर कई परमाणु बम गिराए जा सकते हैं.

    हालांकि, भारत सरकार अपने परमाणु हथियारों के बारे में कभी कोई आधिकारिक बयान नहीं देती. लेकिन DRDO अक्सर उन हथियारों के बारे में जानकारी देता है, जिन्हें वह विकसित कर रहा है. भारत की परमाणु नीति नो फर्स्ट यूज की है. यानी भारत खुद से पहले दुश्मन पर न्यूक्लियर अटैक नहीं करेगा. लेकिन अगर दुश्मन हिमाकत करता है तो भारत के 190 परमाणु हथियार दुनिया के नक्शे से दुश्मन देश का सफाया कर देंगे.

  • कांग्रेस ने मधु गौड़ याश्की को दी बड़ी जिम्मेदारी, ऑल इंडिया प्रोफेशनल्स कांग्रेस का चेयरपर्सन नियुक्त किया

    कांग्रेस ने मधु गौड़ याश्की को दी बड़ी जिम्मेदारी, ऑल इंडिया प्रोफेशनल्स कांग्रेस का चेयरपर्सन नियुक्त किया

    हैदराबाद: ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) ने मधु गौड़ याश्की को ऑल इंडिया प्रोफेशनल्स कांग्रेस का चेयरपर्सन नियुक्त किया है। AICC के महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल ने बुधवार को एक प्रेस बयान में कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने याश्की को ऑल इंडिया प्रोफेशनल्स कांग्रेस का चेयरपर्सन नियुक्त किया है।

    बयान में कहा गया है कि पार्टी निवर्तमान चेयरपर्सन प्रवीण चक्रवर्ती के योगदान की सराहना करती है। तेलंगाना में कांग्रेस पार्टी के एक प्रमुख नेता, मधु गौड़ याश्की के पास दशकों का अनुभव है और वे पार्टी आलाकमान के साथ करीबी तालमेल के लिए जाने जाते हैं। उच्च शिक्षित मधु गौड़ याश्की पिछड़े वर्गों के प्रमुख नेताओं में से एक हैं और अपने सभ्य और सौम्य व्यवहार के लिए भी जाने जाते हैं। अलग तेलंगाना राज्य के प्रबल समर्थक, वे पहली बार 2004 में निज़ामाबाद से लोकसभा के लिए चुने गए थे, जिसमें उन्होंने तेलुगु देशम पार्टी के सैयद यूसुफ अली को 1.37 लाख से अधिक वोटों से हराया था। उन्होंने 2009 में तेलंगाना राष्ट्र समिति (TRS) के बिगाला गणेश गुप्ता को 60,000 से अधिक वोटों से हराकर अपनी लोकसभा सीट बरकरार रखी।

    याश्की ने कांग्रेस संसदीय दल के डिप्टी चीफ व्हिप के रूप में भी काम किया। हालांकि, 2014 के लोकसभा चुनावों में, वे पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव की बेटी के. कविता से हार गए, जिन्होंने तेलंगाना राष्ट्र समिति (TRS) के टिकट पर चुनाव लड़ा था। याश्की ने 2019 में फिर से चुनाव लड़ा लेकिन काफी पीछे रहते हुए तीसरे स्थान पर रहे। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के धर्मपुरी अरविंद ने यह सीट जीती और TRS की अपनी निकटतम प्रतिद्वंद्वी के. कविता को हराया।

    2023 में, याश्की को तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (TPCC) की अभियान समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। उन्होंने 2023 के चुनावों में तेलंगाना विधानसभा के लिए असफल चुनाव लड़ा। पार्टी ने याश्की को हैदराबाद के निर्वाचन क्षेत्रों में से एक, LB नगर से मैदान में उतारा था। हालांकि, वे भारत राष्ट्र समिति (BRS) और BJP उम्मीदवारों के बाद तीसरे स्थान पर रहे। तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (TPCC) के तत्कालीन अध्यक्ष ए. रेवंत रेड्डी के मुख्यमंत्री बनने के बाद, उन्हें 2024 में राज्य कांग्रेस प्रमुख के पद के लिए प्रमुख दावेदारों में से एक माना जा रहा था। हालांकि, पार्टी ने महेश कुमार गौड़ को TPCC प्रमुख चुना।

  • इंसानी कचरे से बने बायोचार से मजबूत होगा कंक्रीट, रिसर्च में इमारतों की मजबूती और टिकाऊपन बढ़ने का दावा

    इंसानी कचरे से बने बायोचार से मजबूत होगा कंक्रीट, रिसर्च में इमारतों की मजबूती और टिकाऊपन बढ़ने का दावा

    नई दिल्ली । वैज्ञानिकों ने एक ऐसी खोज की है जो आने वाले समय में निर्माण उद्योग (Construction Industry) का चेहरा बदल सकती है। ‘साइंटिफिक रिपोर्ट्स’ जर्नल में प्रकाशित एक हालिया स्टडी के अनुसार, सेप्टिक टैंकों और सैनिटेशन सिस्टम से मिलने वाले इंसानी कचरे को प्रोसेस करके ‘बायोचार’ बनाया गया है। इस बायोचार का इस्तेमाल कंक्रीट में सीमेंट की जगह आंशिक रूप से (Partial Replacement) किया जा सकता है, जिससे इमारतें न केवल अधिक मजबूत बनेंगी, बल्कि पर्यावरण को भी बड़ा फायदा पहुंचेगा।

    वैज्ञानिकों ने पाया है कि ट्रीट किए गए मल के कचरे से बना मटीरियल कंक्रीट में सीमेंट की जगह कुछ हद तक इस्तेमाल किया जा सकता है और सही मात्रा में मिलाने पर यह कंक्रीट की मज़बूती को काफ़ी बढ़ा सकता है। ‘साइंटिफिक रिपोर्ट्स’ में छपी इस रिसर्च में मल के कचरे (सेप्टिक टैंक और सैनिटेशन सिस्टम से इकट्ठा किया गया ट्रीट किया हुआ इंसानी कचरा) से बने बायोचार का कंक्रीट में सीमेंट के आंशिक विकल्प के तौर पर इस्तेमाल करने की संभावनाओं को परखा गया। खास ट्रीटमेंट प्लांट मल के कचरे को इकट्ठा करते हैं और उसे प्रोसेस करते हैं।

    रिसर्चर ने इस मटीरियल को बायोचार (कार्बन से भरपूर पदार्थ) में बदला और इसे कंक्रीट में मिलाकर देखा कि क्या इससे कंस्ट्रक्शन मटीरियल ज़्यादा मज़बूत और टिकाऊ बन सकता है। नतीजे चौंकाने वाले थे। जिस कंक्रीट में सीमेंट की जगह 10% बायोचार (मल के कचरे से बना) मिलाया गया था, उसमें 91 दिनों की क्योरिंग (पकने की प्रक्रिया) के बाद कंप्रेसिव स्ट्रेंथ में 21% और फ्लेक्सुरल स्ट्रेंथ में 42% की बढ़ोतरी देखी गई।

    कंप्रेसिव स्ट्रेंथ यह बताती है कि कंक्रीट कितना दबाव झेल सकता है, जबकि फ्लेक्सुरल स्ट्रेंथ यह बताती है कि वह मुड़ने और टूटने (क्रैकिंग) का कितना अच्छा मुकाबला कर सकता है। रिसर्चर ने बायोचार की अलग-अलग मात्राओं का टेस्ट किया और कई गुणों की जांच की, जिनमें मज़बूती, पानी सोखने की क्षमता, पोरॉसिटी (छिद्रों की मात्रा) और सूखने पर सिकुड़न (drying shrinkage) शामिल हैं।

    नतीजों से पता चला कि सीमेंट की जगह 5% से 10% तक बायोचार का इस्तेमाल करने से कंक्रीट की परफॉर्मेंस बेहतर हो सकती है। 15% बायोचार मिलाने पर, 28 दिनों के बाद पानी सोखने की क्षमता और पोरॉसिटी पारंपरिक कंक्रीट के बराबर ही पाई गई। यह मटीरियल समय के साथ स्थिर भी रहा। 120 दिनों के बाद, 10% बायोचार वाले मोर्टार में सूखने पर सिकुड़न साधारण पोर्टलैंड सीमेंट मोर्टार जैसी ही देखी गई, जिससे पता चलता है कि यह मटीरियल लंबे समय तक अपना आकार और स्थिरता बनाए रख सकता है।

    स्टडी में यह भी पाया गया कि जैसे-जैसे बायोचार की मात्रा बढ़ाई गई, कंक्रीट के नमूनों में भारी धातुओं की मात्रा कम होती गई, जिससे पर्यावरण में हानिकारक पदार्थों के रिसने (leaching) की संभावना कम हो सकती है।

    इस रिसर्च से पर्यावरण को दोहरा फ़ायदा हो सकता है: ट्रीट किए गए इंसानी कचरे का उपयोगी इस्तेमाल और कंक्रीट में सीमेंट की ज़रूरत में कमी। सीमेंट बनाने में बहुत ज़्यादा ऊर्जा लगती है और यह दुनिया भर में कार्बन उत्सर्जन का एक बड़ा कारण है। हालांकि, निर्माण कार्य में मल-कीचड़ से बने बायोचार का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करने से पहले और रिसर्च और असल दुनिया में टेस्टिंग की ज़रूरत होगी। लेकिन यह स्टडी बताती है कि भविष्य की इमारतें कुछ हद तक उस चीज़ से बन सकती हैं जिसे हम आज फ्लश करके बहा देते हैं।

  • भारत के न्योते पर बांग्लादेश की चुप्पी से बढ़ी हलचल, शेख हसीना प्रत्यर्पण और चीन से बढ़ती नजदीकी पर नजर

    भारत के न्योते पर बांग्लादेश की चुप्पी से बढ़ी हलचल, शेख हसीना प्रत्यर्पण और चीन से बढ़ती नजदीकी पर नजर


    नई दिल्ली ।
    बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए भारत आएंगे या नहीं, इसे लेकर स्थिति अभी साफ नहीं है। भारत में 12-13 सितंबर के बीच ब्रिक्स बैठक होनी है। लगभग सभी देश इसमें शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन बांग्लादेश के शिखर सम्मेलन से दूरी बनाने की अटकलें तेज हो गई हैं। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा गया है।

    यह घटनाक्रम ऐसे समय पर हो रहा है, जब शेख हसीना के प्रत्यर्पण और तीस्ता नदी के मुद्दे पर दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है। साथ ही बांग्लादेश में चीन के बढ़ते दखल के भी संकेत मिल रहे हैं। भारत अब तक बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान को नई दिल्ली आने का दो बार न्योता दे चुका है।

    बुधवार को बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलील-उर-रहमान पत्रकारों से बात कर रहे थे। इस दौरान उनसे पीएम रहमान के ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होने को लेकर सवाल पूछा गया। सवाल सुनते ही उन्होंने चुप्पी साध ली और विषय बदलने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि वह वहां अपने देश के प्रतिनिधि के तौर पर नहीं हैं और उनसे महासभा के अध्यक्ष के रूप में ही सवाल किए जाएं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई द्विपक्षीय मुद्दा है तो वह विदेश मंत्री के तौर पर उस पर अलग से बात कर सकते हैं।

    भारत का न्योता

    भारत ने रहमान को BIMSTEC शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए भी बुलाया है। इसमें भारत, श्रीलंका, थाईलैंड, बांग्लादेश, म्यांमा, नेपाल और भूटान शामिल हैं। हालांकि, भारत की तरफ से यह भी कहा जा चुका है कि रहमान के आने की अभी कोई पुष्टि नहीं है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इसकी जानकारी दी थी।

    इससे पहले जब रहमान प्रधानमंत्री बने, तब भारत ने उन्हें नई दिल्ली आने का न्योता दिया था। हालांकि, उस समय भी उनकी यात्रा की पुष्टि नहीं हुई थी और ऐसी खबरें सामने आई थीं कि रहमान चीन जाने की तैयारी कर रहे हैं। वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने यात्रा उस समय के लिए टाल दी थी। बाद में वह म्यांमार और बीजिंग पहुंचे थे।

    एक ओर बांग्लादेश भारत के सामने अपनी शर्तें रख रहा है, वहीं बैठकों में डीजल सप्लाई बढ़ाने समेत कई तरह की मदद भी मांग रहा है।

    किस मूड में है बांग्लादेश

    अगस्त में बांग्लादेश ने कहा था कि प्रधानमंत्री को भारत यात्रा की कोई जल्दी नहीं है। विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने कहा था कि अगर राष्ट्रीय हितों के आधार पर किसी समझौते पर पहुंचा जाता है तो अगले सप्ताह या उसके अगले सप्ताह यात्रा हो सकती है। उन्होंने कहा था कि इसे लेकर कोई जल्दबाजी नहीं है। इससे पहले भी बांग्लादेश ने कहा था कि रहमान की यात्रा के लिए भारत को अनुकूल माहौल बनाना होगा।

    क्या शेख हसीना हैं वजह

    साल 2024 में हुए छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना बांग्लादेश छोड़कर भारत आ गई थीं। बाद में जब 2026 में रहमान सरकार ढाका में आई, तो उनके प्रत्यर्पण की मांग तेज हो गई। हाल ही में एक और मंत्री जाहिद उर रहमान ने कहा है कि हसीना को भारत से लेकर आएंगे और उन्हें फांसी दे दी जाएगी। हालांकि, इससे पहले बांग्लादेश सरकार ने कहा था कि पूर्व प्रधानमंत्री को सभी कानूनी सहायता और सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।

    प्रत्यर्पण के मुद्दे पर पहले से तनावपूर्ण रिश्ते तब और खराब हुए, जब हसीना ने भारत में रहते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस की। बांग्लादेश ने प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले ही इस पर आपत्ति जताई थी और बाद में अपना रुख और सख्त कर लिया था। भारत ने स्पष्ट किया था कि हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस से सरकार का कोई लेना-देना नहीं है।

    क्या चीन है कारण

    जून में तारिक रहमान चीन की यात्रा पर पहुंचे थे और इस दौरान बांग्लादेश की ओर से बीजिंग से निवेश मांगने की खबरें सामने आई थीं। यात्रा के दौरान कई द्विपक्षीय समझौते भी हुए थे। बांग्लादेश ने बीजिंग से तीस्ता नदी के मुद्दे पर मदद मांगी थी। इसके अलावा मोंगला पोर्ट पर SEZ यानी स्पेशल इकोनॉमिक जोन बनाए जाने से जुड़ी डील भी चर्चा में रही थी। ढाका के इन कदमों को भारत बारीकी से देख रहा था।

  • मुंबई में 20 बिल्लियों की हत्या से सनसनी, क्षत-विक्षत शव मिलने के बाद पुलिस ने शुरू की जांच, CCTV फुटेज खंगाली

    मुंबई में 20 बिल्लियों की हत्या से सनसनी, क्षत-विक्षत शव मिलने के बाद पुलिस ने शुरू की जांच, CCTV फुटेज खंगाली

    मुंबई: के चेंबूर इलाके में करीब 20 बिल्लियों की हत्या और उनके क्षत-विक्षत शव मिलने के बाद हड़कंप मच गया। मामले को गंभीरता से लेते हुए मुंबई पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाल रही है, ताकि इस घटना के पीछे जिम्मेदार लोगों की पहचान की जा सके।

    मामला चेंबूर के पंजरापोल इलाके का है। स्थानीय स्तर पर बिल्लियों की देखभाल करने वाली रूबीना पठान ने इन बिल्लियों के क्षत-विक्षत शव देखे। इसके बाद मामले की जानकारी पुलिस को दी गई। पशुओं के साथ क्रूरता के इस मामले में PETA India ने भी दखल दिया और स्थानीय कैट केयरगिवर तथा RCF पुलिस स्टेशन के साथ मिलकर FIR दर्ज कराने में मदद की।

    CCTV फुटेज से खुलेगा राज

    पुलिस के मुताबिक, फिलहाल आरोपियों की पहचान नहीं हो पाई है। जांच टीम इलाके में लगे CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग की जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बिल्लियों को किसने और किस वजह से निशाना बनाया। इसके अलावा घटनास्थल और आसपास के इलाकों से भी जरूरी जानकारी जुटाई जा रही है।

    इस घटना ने पशु प्रेमियों और स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ा दी है। एक साथ इतनी बड़ी संख्या में बिल्लियों की हत्या और उनके शवों का क्षत-विक्षत हालत में मिलना सामान्य घटना नहीं माना जा रहा है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या सभी घटनाएं एक ही व्यक्ति या समूह से जुड़ी हैं।

    PETA ने रखा 50 हजार रुपये का इनाम

    मामले में सुराग देने वाले लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए PETA India ने भी इनाम की घोषणा की है। संगठन ने ऐसी जानकारी देने वाले व्यक्ति को 50,000 रुपये तक का इनाम देने का ऐलान किया है, जिससे बिल्लियों की हत्या के लिए जिम्मेदार व्यक्ति या व्यक्तियों की गिरफ्तारी और दोषसिद्धि में मदद मिल सके।

    मुंबई पुलिस ने इस मामले में BNS की धारा 325 और पशु क्रूरता रोकथाम कानून की धारा 11 के तहत केस दर्ज किया है। BNS की धारा 325 के तहत किसी जानवर को मारना, जहर देना या उसे गंभीर रूप से घायल करना अपराध है। दोषी साबित होने पर 5 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।

  • रायबरेली की दिशा बैठक में राहुल गांधी के सवालों पर BJP मंत्री ने घेरा कहा सरकार की खामी ढूंढने पर ज्यादा जोर

    रायबरेली की दिशा बैठक में राहुल गांधी के सवालों पर BJP मंत्री ने घेरा कहा सरकार की खामी ढूंढने पर ज्यादा जोर


    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के रायबरेली में जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति यानी दिशा की बैठक उस समय चर्चा में आ गई जब कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और बीजेपी के राज्य मंत्री दिनेश प्रताप सिंह के बीच एक योजना को लेकर तीखी बहस होती दिखाई दी। बैठक का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है जिसे खुद राज्य मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने अपने फेसबुक अकाउंट पर साझा किया है। राहुल गांधी अपने दो दिवसीय रायबरेली दौरे पर पहुंचे थे और इसी दौरान उन्होंने जिले में आयोजित दिशा की बैठक में हिस्सा लिया। बैठक में विकास योजनाओं की प्रगति और उनके क्रियान्वयन को लेकर अधिकारियों से सवाल किए गए।

    वायरल वीडियो में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना को लेकर राहुल गांधी और मंत्री दिनेश प्रताप सिंह के बीच सवाल जवाब होता नजर आ रहा है। बताया गया कि योजना की समीक्षा के दौरान राहुल गांधी ने अधिकारी से पूछा कि इस योजना के तहत क्या काम किया जाता है। इसी दौरान दिनेश प्रताप सिंह ने राहुल गांधी से कहा कि इस योजना की जानकारी उन्हें होनी चाहिए। इसके बाद चर्चा योजना के प्रचार प्रसार के लिए निर्धारित बजट पर पहुंच गई। राहुल गांधी ने प्रचार प्रसार के मद में कितना बजट रखा गया है इसकी जानकारी मांगी। मंत्री ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी का ज्यादा ध्यान सरकार की योजनाओं में कमियां तलाशने पर है जबकि उनका जोर इस बात पर होना चाहिए कि योजनाओं का लाभ आम लोगों तक पहुंचे।

    दिनेश प्रताप सिंह ने बैठक के बाद सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए राहुल गांधी की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि दिशा की बैठक का उद्देश्य केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं की निगरानी करना तथा उनके क्रियान्वयन में आने वाली समस्याओं को दूर करना है। मंत्री के मुताबिक राहुल गांधी को योजनाओं की जानकारी लेकर उनके प्रभाव और लाभार्थियों तक पहुंच की समीक्षा करनी चाहिए। हालांकि बैठक में राहुल गांधी की ओर से उठाए गए सवालों का फोकस योजनाओं के बजट और जमीनी स्थिति पर रहा।

    बैठक में राहुल गांधी ने रायबरेली की खराब सड़कों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। वे प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनाई गई सड़कों में गड्ढों की तस्वीरें लेकर पहुंचे थे। उन्होंने अधिकारियों को तस्वीरें दिखाते हुए सवाल किया कि जिन सड़कों का निर्माण कराया गया है उनमें गड्ढे क्यों हैं और उन्हें ठीक करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। राहुल गांधी ने यह भी पूछा कि कौन सी सड़क किस कार्यदायी संस्था ने बनाई है और उसकी जिम्मेदारी किसकी है। उन्होंने अधिकारियों से सड़कों की स्थिति को लेकर जवाब मांगा।

    बैठक में मौजूद अधिकारियों ने राहुल गांधी के सवालों का जवाब दिया। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अधिशासी अभियंता ने कहा कि सड़कों में मौजूद गड्ढों को जल्द ठीक कराया जाएगा। राहुल गांधी ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता और रखरखाव से जुड़े मुद्दों पर भी अधिकारियों से जवाब तलब किया। इस दौरान बैठक का माहौल काफी गंभीर नजर आया।

    रायबरेली में हुई इस बैठक के बाद राहुल गांधी बाहर निकले लेकिन उन्होंने मीडिया से कोई बातचीत नहीं की और बिना कुछ कहे वहां से चले गए। दूसरी ओर बैठक का वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राहुल गांधी की रायबरेली सक्रियता और स्थानीय विकास के मुद्दों को लेकर उनके सवालों ने राजनीतिक हलकों का ध्यान खींचा है। वहीं बीजेपी मंत्री की ओर से लगाए गए आरोपों ने इस पूरे घटनाक्रम को और ज्यादा सुर्खियों में ला दिया है।