Category: National

  • डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ी सख्ती, अश्लील सामग्री और कानून उल्लंघन के आरोप में 50 ओटीटी प्लेटफॉर्म ब्लॉक

    डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ी सख्ती, अश्लील सामग्री और कानून उल्लंघन के आरोप में 50 ओटीटी प्लेटफॉर्म ब्लॉक

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने अश्लील सामग्री के प्रसारण और डिजिटल कानूनों के उल्लंघन के मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए पिछले दो वर्षों में 50 ओटीटी प्लेटफॉर्म की भारत में सार्वजनिक पहुंच बंद कर दी है। सरकार का कहना है कि यह कार्रवाई डिजिटल माध्यमों पर गैरकानूनी सामग्री के प्रसार को रोकने और इंटरनेट को अधिक सुरक्षित एवं जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से की गई है।

    लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार यह कार्रवाई उन ओटीटी प्लेटफॉर्म और इंटरमीडियरी के खिलाफ की गई, जिन पर अश्लील सामग्री प्रसारित करने और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम सहित अन्य संबंधित कानूनी प्रावधानों के उल्लंघन के आरोप थे। सरकार ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में उपलब्ध कानूनी अधिकारों का उपयोग करते हुए संबंधित प्लेटफॉर्म की भारत में सार्वजनिक पहुंच को प्रतिबंधित किया गया।

    सरकार के अनुसार डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध सामग्री को लेकर यदि किसी प्रकार की शिकायत प्राप्त होती है तो उसका परीक्षण किया जाता है। जांच में कानून का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित इंटरमीडियरी या प्लेटफॉर्म को गैरकानूनी सामग्री हटाने अथवा उस तक पहुंच रोकने के निर्देश जारी किए जाते हैं। आवश्यकता पड़ने पर सार्वजनिक पहुंच को भी प्रतिबंधित किया जा सकता है।

    केंद्र सरकार ने कहा कि उसकी डिजिटल नीति का मुख्य उद्देश्य ऐसा इंटरनेट वातावरण तैयार करना है, जो सभी उपयोगकर्ताओं के लिए सुरक्षित, विश्वसनीय और जिम्मेदार हो। विशेष रूप से बच्चों और किशोरों को हानिकारक ऑनलाइन सामग्री से बचाने को सरकार प्राथमिकता दे रही है। इसी दिशा में डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए निर्धारित नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जा रहा है।

    सरकार ने यह भी बताया कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और सूचना प्रौद्योगिकी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस एवं डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) नियम, 2021 डिजिटल प्लेटफॉर्म के संचालन के लिए व्यापक कानूनी ढांचा उपलब्ध कराते हैं। इन नियमों के तहत सभी इंटरमीडियरी के लिए ड्यू डिलिजेंस का पालन करना अनिवार्य है, ताकि ऑनलाइन माध्यमों का उपयोग कानून और सामाजिक जिम्मेदारी के अनुरूप हो सके।

    नियमों के अनुसार डिजिटल प्लेटफॉर्म को अपने उपयोगकर्ताओं को स्पष्ट रूप से यह बताना होता है कि वे ऐसी किसी भी सामग्री को अपलोड, प्रकाशित, साझा या प्रसारित न करें, जो बच्चों के लिए हानिकारक हो, अश्लील हो या देश के किसी भी लागू कानून का उल्लंघन करती हो। यदि प्लेटफॉर्म इन दायित्वों का पालन नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल मनोरंजन और ऑनलाइन स्ट्रीमिंग सेवाओं के तेजी से विस्तार के साथ कंटेंट मॉडरेशन की चुनौती भी बढ़ी है। ऐसे में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानूनी जवाबदेही के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। सरकार का कहना है कि उसका उद्देश्य वैध डिजिटल सेवाओं को बाधित करना नहीं, बल्कि कानून का उल्लंघन करने वाले प्लेटफॉर्म पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

    सरकार ने दोहराया कि भविष्य में भी यदि किसी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर गैरकानूनी या अश्लील सामग्री प्रसारित किए जाने की शिकायत सामने आती है और जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित कानूनों के तहत आवश्यक कार्रवाई जारी रहेगी। इसके माध्यम से सुरक्षित, पारदर्शी और जिम्मेदार डिजिटल इकोसिस्टम विकसित करने की दिशा में प्रयास लगातार जारी रहेंगे।

  • हाई-टेंशन लाइन की चपेट में आया जगन्नाथ रथ, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल और जांच के आदेश

    हाई-टेंशन लाइन की चपेट में आया जगन्नाथ रथ, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल और जांच के आदेश

    नई दिल्ली । झारखंड के खूंटी जिले में लापरवाही और व्यवस्थागत खामियों के चलते एक भीषण दुर्घटना में दो निर्दोष स्कूली छात्रों की जान चली गई, जबकि छह अन्य गंभीर रूप से झुलस गए। यह हृदयविदारक घटना तोरपा थाना क्षेत्र स्थित श्री हरि प्लस टू विद्यालय परिसर के समीप घटी। लंच ब्रेक के दौरान जब छात्र विद्यालय परिसर के आसपास मौजूद थे, तभी पास में खड़े भगवान जगन्नाथ के रथ को स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू की गई। इसी दौरान लोहे के कलपुर्जों और लकड़ी से निर्मित यह भारी रथ ऊपर से गुजर रही 11 हजार वोल्ट की हाई-टेंशन विद्युत लाइन के सीधे संपर्क में आ गया। क्षण भर में ही पूरे रथ में अत्यधिक उच्च क्षमता का करंट दौड़ गया, जिसकी चपेट में आकर वहां मौजूद बच्चे बुरी तरह प्रभावित हो गए।

    घटना के घटित होते ही घटनास्थल पर अफ़रा-तफ़री और चीख-पुकार मच गई। विद्युत आघात के कारण अचेत हुए और झुलसे हुए सभी बच्चों को तत्काल स्थानीय प्रशासन एवं विद्यालय प्रबंधन की सहायता से खूंटी के सदर अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल के चिकित्सा प्रभारियों के अनुसार, जांच के दौरान दो छात्रों को मृत घोषित कर दिया गया, जबकि छह घायलों का आपातकालीन चिकित्सा कक्ष में गहन उपचार जारी है। घायलों में से एक छात्र की स्थिति अत्यंत चिंताजनक बताई जा रही है। हादसे की सूचना मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया और अस्पताल परिसर में पीड़ित परिवारों के रुदन से माहौल गमगीन हो गया। परिजनों का आरोप है कि स्कूली बच्चों से भारी-भरकम रथ ढकेलवाने का कार्य लिया जाना अत्यंत लापरवाही भरा कदम था।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन की टीमें जांच में जुट गई हैं। खूंटी के उपायुक्त ने इस दुर्घटना को अत्यंत पीड़ादायक करार देते हुए संपूर्ण घटनाक्रम की उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए हैं। प्रशासनिक अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि हाई-टेंशन लाइन के नीचे रथ संचालन और बच्चों की भागीदारी के बिंदुओं पर विस्तृत पड़ताल की जा रही है, तथा जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। राज्य के मुख्यमंत्री ने भी इस दुखद हादसे पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट की हैं और घायलों को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

  • ब्रिटेन के शेल्टर होम में गधों को पहनाए जा रहे हैं विशेष पायजामे और लेगिंग्स..

    ब्रिटेन के शेल्टर होम में गधों को पहनाए जा रहे हैं विशेष पायजामे और लेगिंग्स..

    नई दिल्ली । भीषण गर्मी के दौर में जहां मानव जीवन प्रभावित हो रहा है, वहीं बेजुबान जानवरों के सामने भी स्वास्थ्य संबंधी गंभीर चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। ब्रिटेन में तापमान में लगातार हो रही वृद्धि के कारण काटने वाले जहरीले कीड़ों की तादाद में भारी उछाल दर्ज किया गया है। इन मक्खियों और कीड़ों के लगातार हमलों के कारण जानवरों की त्वचा पर दर्दनाक घाव, जलन और खुजली की समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। इस विकट स्थिति से रेस्क्यू किए गए गधों को बचाने के लिए ब्रिटेन के डेवोन स्थित द डॉन्की सैंक्चुअरी ने एक बेहद व्यावहारिक और अनोखा तरीका अपनाया है। संस्था ने कीड़ों के सीधे संपर्क को रोकने के लिए लगभग चालीस गधों को विशेष रूप से तैयार किए गए ढीले पायजामे, लेगिंग्स और कॉटन के वस्त्र पहनाना शुरू किया है। पहली नज़र में यह पहल भले ही कौतूहल पैदा करती हो, लेकिन इसके पीछे की वैज्ञानिक सोच और संवेदनशीलता की व्यापक स्तर पर सराहना हो रही है।

    इस अनूठे सुरक्षा उपाय के विकास की प्रक्रिया बेहद योजनाबद्ध रही है। शुरुआत में संस्था के विशेषज्ञों ने जानवरों के पैरों की सुरक्षा के लिए पारंपरिक मोजे पहनाने का प्रयास किया था, लेकिन खेतों में निरंतर विचरण के कारण मोजे बार-बार फिसल कर निकल जाते थे। इसके बाद कर्मचारियों ने बड़े आकार के पायजामे, मैटरनिटी ट्राउज़र और लेगिंग्स का उपयोग कर नए सिरे से परीक्षण किया। कपड़े का आवरण इतना आरामदायक और ढीला रखा गया है कि जानवरों को चलने-फिरने, घास चरने और दैनिक गतिविधियों में किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। ये वस्त्र कीड़ों के डंक और गधों की संवेद्य त्वचा के बीच एक अभेद्य भौतिक अवरोधक का कार्य करते हैं। रासायनिक कीटनाशक स्प्रे के बार-बार छिड़काव की तुलना में यह उपाय अधिक दीर्घकालिक और सुरक्षित सिद्ध हो रहा है।

    संस्था द्वारा गधों के शारीरिक नाप और आवश्यकताओं के अनुसार विशेष रूप से तैयार किए गए इन परिधानों को ‘डॉन-गेरी’ नाम दिया गया है, जो ‘डॉन्की’ और ‘डंगरी’ शब्दों का एक रचनात्मक संयोजन है। यह प्रयोग केवल जानवरों के स्वास्थ्य संरक्षण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसने अपशिष्ट प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक सकारात्मक संदेश दिया है। कपड़ों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए संस्था ने पुराने और अप्रयुक्त सूती कपड़ों के दान की अपील की है। इस अभियान में स्कॉटलैंड स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ सेंट एंड्रयूज की री-यूज शॉप ने भी सक्रिय सहभागिता निभाई है। छात्रों और स्थानीय नागरिकों द्वारा दान किए गए वस्त्रों को पुनर्चक्रित कर बेजुबान जानवरों के लिए सुरक्षात्मक पोशाक में परिवर्तित किया जा रहा है।

    वर्ष 1969 में स्थापित द डॉन्की सैंक्चुअरी वैश्विक स्तर पर उपेक्षित और प्रताड़ित जानवरों के कल्याण के लिए समर्पित एक प्रमुख वैश्विक संगठन के रूप में कार्य कर रहा है। संस्था का मानना है कि जानवरों की स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए हमेशा अत्यधिक जटिल या खर्चीली तकनीकों की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि थोड़ी सी संवेदनशीलता और नवोन्मेषी सोच से बड़ी समस्याओं का स्थायी समाधान खोजा जा सकता है। भीषण गर्मी के इस मौसम में बेजुबान गधों को कीड़ों के जानलेवा संक्रमण और असहनीय दर्द से मुक्त रखने वाली यह मानवीय पहल वर्तमान में वैश्विक स्तर पर पशु कल्याण के क्षेत्र में एक उत्कृष्ट और अनुकरणीय उदाहरण बनकर उभरी है।

  • छात्रों के मुद्दे पर सियासी संग्राम राहुल गांधी की रिहाई के बाद सरकार पर बड़ा हमला शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तेज

    छात्रों के मुद्दे पर सियासी संग्राम राहुल गांधी की रिहाई के बाद सरकार पर बड़ा हमला शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तेज


    नई दिल्ली । देश की राजधानी दिल्ली में छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर मंगलवार को राजनीतिक माहौल बेहद गरम रहा। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस और विपक्षी दलों के नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी प्रियंका गांधी सहित कई सांसदों और नेताओं को हिरासत में लिया। कुछ घंटों बाद सभी नेताओं को रिहा कर दिया गया जिसके बाद विपक्ष ने सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया और संसद में इस मुद्दे पर तत्काल चर्चा कराने की मांग दोहराई।

    रिहाई के बाद राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने सुबह लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर छात्रों के साथ हुई घटना पर संसद में चर्चा कराने का अनुरोध किया था। उनके अनुसार अध्यक्ष ने कहा कि इसके लिए सरकार की सहमति आवश्यक होगी। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार इस विषय पर बहस कराने में रुचि नहीं रखती इसलिए विपक्ष ने लोकतांत्रिक तरीके से प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन करने का निर्णय लिया।

    राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों की प्रमुख मांगों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का इस्तीफा संसद मार्च के दौरान छात्रों के साथ कथित मारपीट और दुर्व्यवहार करने वालों पर कार्रवाई तथा छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी मामलों को वापस लेना शामिल है। उन्होंने कहा कि पूरा विपक्ष चाहता है कि लोकसभा और राज्यसभा दोनों में इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा हो ताकि छात्रों की चिंताओं का समाधान निकल सके।

    दूसरी ओर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने रिहाई के बाद कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि छात्रों की मांगें पूरी तरह जायज हैं और लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की समस्याओं को सुनने के बजाय उनकी आवाज दबाने का प्रयास कर रही है। प्रियंका गांधी ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार के लिए संसद में कानून लाने की आवश्यकता बताई।

    वहीं केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि राहुल गांधी छात्रों का राजनीतिक लाभ उठाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं और छात्रों के हित में लगातार काम कर रही है और केवल राजनीतिक बयानबाजी से समस्याओं का समाधान नहीं होगा।

    भारतीय जनता पार्टी ने भी कांग्रेस के प्रदर्शन पर तीखी प्रतिक्रिया दी। भाजपा नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन को अनुचित बताते हुए राहुल गांधी के आचरण की आलोचना की और कहा कि विरोध प्रदर्शन की भी एक मर्यादा होती है। भाजपा का कहना है कि संसद के भीतर सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए सरकार तैयार है लेकिन अराजकता फैलाने की राजनीति उचित नहीं है।

    दिनभर चले इस घटनाक्रम के बाद दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी प्रियंका गांधी और अन्य हिरासत में लिए गए नेताओं को रिहा कर दिया। इसके बावजूद छात्रों के मुद्दे को लेकर राजनीतिक टकराव फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा है। विपक्ष लगातार संसद में चर्चा और सरकार से जवाबदेही की मांग कर रहा है जबकि सरकार अपने रुख पर कायम है। आने वाले दिनों में संसद के भीतर इस मुद्दे को लेकर तीखी बहस होने की संभावना जताई जा रही है।

  • चारधाम यात्रा में उमड़ रहा जनसैलाब…. 94 दिन में दर्शन करने वालों की संख्या 45 लाख पार

    चारधाम यात्रा में उमड़ रहा जनसैलाब…. 94 दिन में दर्शन करने वालों की संख्या 45 लाख पार


    देहरादून।
    प्रदेश में संचालित चारधाम यात्रा (Char Dham Yatra) इस बार भी नया रिकॉर्ड (New record) बना रही है। 94 दिन की यात्रा में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं (Devotees) की संख्या 45 लाख पार हो चुकी है जबकि बीते वर्ष इसी अवधि में कुल 41 लाख 47 हजार 540 श्रद्धालु दर्शन को पहुंचे थे। पिछले वर्ष की तुलना में 3.52 लाख यात्री अधिक पहुंचे हैं।

    अभी तक सर्वाधिक 15 लाख 27 हजार 936 श्रद्धालु भगवान बदरीविशाल (Lord Badrivishal) के दर्शन को पहुंच चुके हैं, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 12 लाख 19 हजार 744 था। इस प्रकार यहां भी श्रद्धालुओं की संख्या 03 लाख 08 हजार 192 अधिक रही है।

    प्रदेश सरकार की ओर से मानसून सीजन को देखते हुए सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं आपदा प्रबंधन पर पूरी नजर रखे हुए हैं।

    19 अप्रैल को शुरू हुई चारधाम यात्रा मंगलवार को 94 दिन पूर्ण कर चुकी है। इस अवधि में बद्रीनाथ में सर्वाधिक 15,27, 936 श्रद्धालु दर्शन को पहुंचे हैं। जबकि केदारनाथ में 14,11,861, गंगोत्री में 7,03,064 और यमुनोत्री धाम में 6,47,447 तीर्थयात्री दर्शन कर चुके हैं। हेमकुंड साहिब में भी यात्रियों की संख्या 2,10,896 पहुंच चुकी है।

    चारधाम यात्रियों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है। मौसम खराब होने के बावजूद चारों धामों में यात्रियों के आने का सिलसिला लगातार जारी है। मानसून को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग को 24 घंटे अलर्ट मोड पर रखा गया है। भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील स्थानों पर पुलिस जवानों की तैनाती की गई है।
    -पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

  • Chip पैकेजिंग का नया ग्लोबल हब बनेगा भारत…. सरकार ने बनाया चीन को मात देने का मेगा प्लान

    Chip पैकेजिंग का नया ग्लोबल हब बनेगा भारत…. सरकार ने बनाया चीन को मात देने का मेगा प्लान


    नई दिल्ली।
    वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन (Global Electronics Supply Chain) में चीन (China) का विकल्प बनने के लिए भारत (India) ने एक और बड़ा कदम उठाया है। देश जल्द ही चिप पैकेजिंग (Chip Packaging) के वैश्विक केंद्र के तौर पर उभरेगा। निर्माताओं को भारत में चिप निर्माण संयंत्र स्थापित करने के लिए आकर्षित करने के प्रयास किए जाएंगे।

    सरकार कंपनियों को यूनिट लगाने पर पूंजीगत व्यय का 35 फीसदी तक वित्तीय सहायता देगी। पारंपरिक पैकेजिंग इकाइयों को यह सहायता 25 फीसदी तक होगी। इससे वैश्विक आपूर्ति शृंखला में भारत की स्थिति मजबूत होगी। सरकार का मानना है कि केवल चिप निर्माण ही नहीं, बल्कि उनकी टेस्टिंग और पैकेजिंग भी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा है।


    नई रणनीति से यूं आएगा बदलाव

    नई रणनीति के तहत विश्व-स्तरीय अग्रणी कंपनियां जैसे इंटेल, लॉकहीड मार्टिन और एप्लाइड मैटेरियल्स ने भारत में निवेश में रुचि दिखाई है। नई पैकेजिंग और टेस्टिंग इकाइयां शुरू होने से इलेक्ट्रॉनिक्स, हार्डवेयर और इंजीनियरिंग क्षेत्र में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के हजारों अवसर पैदा होंगे। ऑटोमोबाइल, स्मार्टफोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और रक्षा उपकरणों में इस्तेमाल होने वाली चिप्स के लिए भारत की आयात पर निर्भरता कम होगी।

    सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में एटीएमपी यानी असेंबली, टेस्टिंग, पैकेजिंग यूनिट व ओएसएटी यानी आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर, असेंबली टेस्ट इकाइयों को स्वीकृति मिल गई है। सेमिकॉन 2.0 के तहत कम्प्यूटिंग, मेमोरी, पावर, नेटवर्किंग व सेंसर जैसे निर्माण खंडों की पहचान की गई है। देश की पहली फैब यूनिट 2028 में शुरू होने की उम्मीद है। पहली कंपाउंड सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन यूनिट और पहली थ्री डी ग्लास सब्सट्रेट पैकेजिंग सुविधा स्थापित की जा रही है। अगली पीढ़ी की पैकेजिंग तकनीक आकर्षित करने के लिए सब्सिडी की व्यवस्था की गई है, ताकि दिग्गज सेमीकंडक्टर कंपनियां भारत में निवेश के लिए आकर्षित हों।

  • पहले शादी टालने की थी साजिश, फिर बना हत्या का प्लान; सिया-चेतन केस में जांच के नए खुलासे

    पहले शादी टालने की थी साजिश, फिर बना हत्या का प्लान; सिया-चेतन केस में जांच के नए खुलासे


    मुंबई। केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच में रोज नए तथ्य सामने आ रहे हैं। पुलिस का कहना है कि आरोपी सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी ने शुरुआत में हत्या की योजना नहीं बनाई थी। दोनों पहले ऐसी घटना करवाना चाहते थे जिससे केतन घायल हो जाए और शादी टल जाए। लेकिन बाद में उन्होंने इस योजना को छोड़कर हत्या की साजिश रची।

    घायल करने की योजना क्यों बदली?

    जांच अधिकारियों के अनुसार, सिया अपने परिवार की बदनामी नहीं चाहती थी और न ही वह घर छोड़कर चेतन के साथ शादी करना चाहती थी।

    ऐसे में दोनों ने पहले किसी दुर्घटना के जरिए केतन को घायल करने का विचार बनाया, ताकि विवाह टल सके। हालांकि बाद में उन्हें लगा कि इस योजना में पकड़े जाने का खतरा ज्यादा है, इसलिए उन्होंने हत्या की योजना पर काम शुरू कर दिया।

    इंटरनेट और फिल्मों से जुटाई जानकारी

    पुलिस की जांच में सामने आया है कि दोनों ने वारदात को दुर्घटना का रूप देने के कई विकल्पों पर विचार किया। इसके लिए उन्होंने कथित तौर पर सस्पेंस फिल्मों से तरीके समझने की कोशिश की और इंटरनेट पर भी काफी खोजबीन की। आखिरकार दोनों इस नतीजे पर पहुंचे कि ऊंचाई से धक्का देकर हत्या करना सबसे आसान तरीका हो सकता है।

    कई जगहों की रेकी के बाद चुना लोहागढ़ किला

    जांच में यह भी पता चला है कि लोहागढ़ किला पहली पसंद नहीं था। पुलिस के मुताबिक, दोनों ने लोनावला के टाइगर प्वाइंट, विसापुर किले और अन्य ऊंचाई वाले इलाकों का भी निरीक्षण किया। वे एक-दूसरे को इन स्थानों की तस्वीरें भेजते रहे और आखिर में पुणे के पास स्थित लोहागढ़ किले को वारदात के लिए चुना। जांच एजेंसियों का मानना है कि उनकी कोशिश ऐसी जगह चुनने की थी, जहां घटना के बाद सबूत मिलना मुश्किल हो।

    रिश्ते में बाधा बना केतन

    पुलिस का दावा है कि सिया गोयल और चेतन चौधरी अपने रिश्ते को आगे बढ़ाना चाहते थे। उन्हें आशंका थी कि यदि सिया की शादी केतन अग्रवाल से हो गई तो दोनों का संबंध हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा। इसी वजह से उन्होंने कथित तौर पर केतन को रास्ते से हटाने की साजिश रची।

    बाली ट्रिप ने बढ़ाई जल्दबाजी

    जांच के मुताबिक जून में प्रस्तावित बाली यात्रा नजदीक आने के साथ ही दोनों ने अपनी योजना को जल्द अंजाम देने का फैसला किया। पुलिस को संदेह है कि 14 जून को लोहागढ़ किले पर हत्या का एक प्रयास पहले भी किया गया था, लेकिन वह सफल नहीं हो पाया।

    18 जून को हुई थी गिरफ्तारी

    पुलिस ने 18 जून को रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की मौत के मामले में सिया गोयल और चेतन चौधरी को गिरफ्तार किया था। आरोप है कि दोनों ने पूर्व नियोजित साजिश के तहत लोहागढ़ किले की चट्टान से धक्का देकर केतन की हत्या कर दी। जांच एजेंसियों का कहना है कि अब तक की पड़ताल में सुपारी देकर हत्या कराए जाने जैसा कोई तथ्य सामने नहीं आया है।

    फिलहाल दोनों आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं और पुणे की यरवडा केंद्रीय जेल में बंद हैं। मामले की जांच जारी है।

  • NEET विवाद पर कांग्रेस ने बदली रणनीति, छात्र आंदोलन में बढ़ाई सक्रियता; सरकार पर संसद से सड़क तक बनाया दबाव

    NEET विवाद पर कांग्रेस ने बदली रणनीति, छात्र आंदोलन में बढ़ाई सक्रियता; सरकार पर संसद से सड़क तक बनाया दबाव


    नई दिल्ली। NEET पेपर लीक विवाद को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच कांग्रेस ने अपनी राजनीतिक रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। शुरुआत में आंदोलन से सीमित दूरी बनाए रखने वाली पार्टी अब खुलकर छात्रों के समर्थन में उतर आई है। संसद के भीतर से लेकर सड़क तक कांग्रेस ने सरकार को घेरने की तैयारी तेज कर दी है, जिससे इस मुद्दे पर राजनीतिक मुकाबला और तीखा हो गया है।

    शुरुआत में दूरी, बाद में बदला रुख

    पेपर लीक मामले के सामने आने के बाद कांग्रेस ने देशभर में छात्रों से जुड़े कार्यक्रमों की शुरुआत तो की, लेकिन जंतर-मंतर पर चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आंदोलन से खुद को अलग रखा। पार्टी के भीतर यह धारणा थी कि सीजेपी का आंदोलन राजनीतिक रूप से भाजपा को लाभ पहुंचाने वाला हो सकता है। हालांकि, सीजेपी की अपील पर कांग्रेस के राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा जंतर-मंतर पहुंचे, लेकिन उन्होंने केवल भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक से मुलाकात की।

    पार्टी ने औपचारिक रूप से आंदोलन का समर्थन नहीं किया।

    छात्र जुटे तो कांग्रेस ने बदली रणनीति

    कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि संसद मार्च के दौरान देश के अलग-अलग राज्यों से बड़ी संख्या में छात्रों की भागीदारी और पूरे दिन चले विरोध प्रदर्शन ने यह संकेत दिया कि युवाओं में सरकार के खिलाफ व्यापक असंतोष है। इसके बाद पार्टी ने आंदोलन को अधिक सक्रियता से आगे बढ़ाने का फैसला किया।

    रणनीति बदलने के साथ ही लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने संसद के भीतर इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। राहुल गांधी ने सदन में इस मामले पर चर्चा कराने की मांग को लेकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से भी मुलाकात की।

    कानूनी सहायता का भी ऐलान

    कांग्रेस ने प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए छात्रों और युवाओं को कानूनी मदद उपलब्ध कराने की घोषणा भी की है।

    पार्टी का कहना है कि आंदोलन के दौरान किसी भी छात्र के साथ अन्याय होने पर उसकी हरसंभव सहायता की जाएगी। इससे संकेत मिलता है कि कांग्रेस अब इस आंदोलन में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने के पक्ष में है।

    धरना, हिरासत और फिर रिहाई

    मंगलवार को राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और अन्य विपक्षी नेता प्रधानमंत्री आवास के निकट निषेधाज्ञा वाले क्षेत्र में धरने पर बैठ गए। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। कुछ घंटों तक हिरासत में रखने के बाद रात में सभी नेताओं को रिहा कर दिया गया।

    राजनीतिक मुकाबला हुआ तेज

    NEET पेपर लीक विवाद अब केवल शिक्षा व्यवस्था का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह विपक्ष और सरकार के बीच बड़ा राजनीतिक संघर्ष बनता जा रहा है। कांग्रेस की सक्रियता के बाद संसद और सड़क दोनों जगह इस मुद्दे पर सरकार पर दबाव बढ़ने की संभावना मानी जा रही है।

  • आंध्र और महाराष्ट्र के बाद अब बिहार में कोरोना की दस्‍तक, भागलपुर में बाप-बेटी पॉजिटिव निकले

    आंध्र और महाराष्ट्र के बाद अब बिहार में कोरोना की दस्‍तक, भागलपुर में बाप-बेटी पॉजिटिव निकले


    नई दिल्‍ली । आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में कोरोना के मामले सामने आने के बाद बिहार में भी मामले सामने आ रहे हैं. बिहार के भागलपुर जिले में एक 65 साल के बुजुर्ग और उनकी 35 साल की बेटी कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं. दोनों को जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज और अस्पताल यानी जेएलएनएमसीएच में भर्ती कर इलाज दिया जा रहा है. अस्पताल अधीक्षक एचपी दुबे ने सोमवार को इसकी जानकारी दी. शुरुआत में दुबे ने दूसरे मरीज को बुजुर्ग की पत्नी बताया था, लेकिन बाद में उन्होंने साफ किया कि वह उनकी बेटी हैं.

    अस्पताल अधिकारियों के मुताबिक बुजुर्ग की तबीयत 15 जुलाई को बिगड़ी थी. शुरुआत में उनका इलाज एक निजी क्लिनिक में हुआ, लेकिन कोरोना जैसे लक्षण दिखने पर उन्हें जेएलएनएमसीएच रेफर किया गया.

    रविवार को उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया और आरटी-पीसीआर जांच में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई. इसके बाद जब उनके संपर्क में आए लोगों की जांच की गई तो उनकी बेटी भी पॉजिटिव पाई गईं.

    अस्पताल अधीक्षक दुबे ने बताया कि दोनों मरीजों को गहन चिकित्सा निगरानी में रखा गया है और डॉक्टरों की एक टीम लगातार उनकी हालत पर नजर रख रही है और इलाज कर रही है. उन्होंने बताया कि कोरोना प्रोटोकॉल लागू कर दिया गया है और जिला कार्यक्रम प्रबंधक को निर्देश दिया गया है कि दोनों मरीजों के आसपास रहने वाले लोगों की भी जांच कराई जाए.

    भागलपुर जिला प्रशासन ने भी एक आधिकारिक बयान जारी कर दोनों पॉजिटिव मामलों की पुष्टि की है. जेएलएनएमसीएच के मेडिसिन विभाग के प्रमुख राजकमल चौधरी ने कहा कि दोनों मरीजों की हालत स्थिर है और घबराने की कोई जरूरत नहीं है. जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे सतर्क रहें लेकिन घबराएं नहीं. प्रशासन ने कहा कि सही सावधानी और समय पर इलाज से कोरोना के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है.

  • सरकार ने की सोनम वांगचुक से संवाद की पहल शुरू, मेदांता अस्पताल पहुंचे जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह

    सरकार ने की सोनम वांगचुक से संवाद की पहल शुरू, मेदांता अस्पताल पहुंचे जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह


    नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से बातचीत की दिशा में केंद्र सरकार ने पहल शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह ने गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल पहुंचकर वांगचुक से मुलाकात की। इस मुलाकात को सरकार और वांगचुक के बीच संभावित संवाद की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है।

    हाईकोर्ट के आदेश पर मेदांता में कराया गया भर्ती
    दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देश के बाद सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से डिस्चार्ज कर आगे के उपचार के लिए गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया। अदालत ने उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में इलाज की आवश्यकता बताई थी।

    28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर
    सोनम वांगचुक कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन के समर्थन में 28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। उनकी प्रमुख मांगों में शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करना, NEET सहित विभिन्न परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं की जांच तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग शामिल है।

    पत्नी की याचिका पर मिला राहत का आदेश
    इससे पहले वांगचुक का इलाज दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में चल रहा था। उनकी पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने अदालत से अनुरोध किया था कि बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए उन्हें मेदांता अस्पताल स्थानांतरित किया जाए। याचिका पर सुनवाई के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने तत्काल उन्हें मेदांता भेजने का निर्देश दिया।

    डॉक्टरों ने जताई थी स्वास्थ्य को लेकर चिंता
    सुनवाई के दौरान एम्स और सफदरजंग अस्पताल के चिकित्सकों ने मेडिकल रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश की। डॉक्टरों ने बताया कि वांगचुक के शरीर में पोटेशियम का स्तर कम है और टीएलसी (TLC) रिपोर्ट को लेकर भी चिकित्सकीय चिंता बनी हुई है। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने विशेषज्ञ निगरानी में इलाज को आवश्यक माना।

    सरकार ने नहीं जताई कोई आपत्ति
    सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सोनम वांगचुक को मेदांता अस्पताल में भर्ती कराने पर केंद्र सरकार को कोई आपत्ति नहीं है। इसके बाद हाईकोर्ट ने उनके स्थानांतरण की अनुमति देते हुए बेहतर उपचार सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।