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  • यूपी चुनाव से पहले BSP में बड़ा भूचाल! मायावती ने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से निकाला बाहर

    यूपी चुनाव से पहले BSP में बड़ा भूचाल! मायावती ने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से निकाला बाहर


    नई दिल्ली ।बहुजन समाज पार्टी में यूपी विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। बसपा प्रमुख मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से पूरी तरह बाहर कर दिया है। मायावती ने आकाश आनंद को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से मुक्त करने के साथ ही संगठन से भी अलग कर दिया है। इससे पहले 3 सितंबर 2026 को उन्हें राष्ट्रीय संयोजक के पद से हटाया गया था। अब इस कार्रवाई के बाद बसपा के भीतर परिवार और संगठन को लेकर चल रही खींचतान एक बार फिर चर्चा में आ गई है।

    मायावती ने आकाश आनंद पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह पार्टी की विचारधारा और हितों से ज्यादा पारिवारिक रिश्तों को प्राथमिकता दे रहे थे। मायावती के मुताबिक आकाश आनंद पहले उनके एक्स पोस्ट को लगातार रिपोस्ट किया करते थे लेकिन जब उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ से जुड़ा मामला सामने आया तो उन्होंने मायावती की संबंधित पोस्ट को रिपोस्ट नहीं किया। बसपा प्रमुख ने इसे पार्टी के प्रति उनके रुख में बदलाव का संकेत माना।

    मायावती ने सवाल उठाया कि जो व्यक्ति डबल माइंड होकर काम करेगा वह बहुजन समाज पार्टी का भला कैसे कर सकता है। उनका कहना है कि पार्टी में जिम्मेदारी निभाने वाले व्यक्ति को संगठन और बहुजन आंदोलन को प्राथमिकता देनी चाहिए। इसी को आधार बनाते हुए उन्होंने आकाश आनंद को पार्टी से अलग करने का फैसला लिया है।

    इस पूरे विवाद में आकाश आनंद के ससुर और पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ का नाम भी प्रमुखता से सामने आया है। मायावती ने कहा कि सिद्धार्थ ने राजनीति से संन्यास लेने का फैसला सही समय पर नहीं लिया। उनका कहना है कि यदि अशोक सिद्धार्थ ने पहले ही राजनीति से दूरी बना ली होती तो बसपा और बहुजन आंदोलन के साथ आकाश आनंद को भी लगातार मुश्किल परिस्थितियों का सामना नहीं करना पड़ता।

    मायावती ने अशोक सिद्धार्थ की राजनीतिक भूमिका और उनकी मंशा पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें वास्तव में आकाश आनंद के राजनीतिक भविष्य और बहुजन आंदोलन की चिंता होती तो वह काफी पहले राजनीति से किनारा कर लेते। हालांकि अब अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया है।

    आकाश आनंद को पार्टी से बाहर करने के बाद मायावती ने अब अपना ध्यान सीधे 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव पर केंद्रित कर दिया है। उन्होंने बसपा कार्यकर्ताओं से विरोधियों के राजनीतिक हथकंडों का मजबूती से मुकाबला करने की अपील की है। मायावती ने कार्यकर्ताओं से सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय के सिद्धांत पर आगे बढ़ते हुए पूरी ताकत के साथ चुनावी तैयारी में जुटने को कहा है।

    बसपा प्रमुख ने 2027 में उत्तर प्रदेश में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने का लक्ष्य भी कार्यकर्ताओं के सामने रखा है। आकाश आनंद पर हुई कार्रवाई से पार्टी की आगामी रणनीति को लेकर भी कई सवाल खड़े हो गए हैं। अब देखना होगा कि इस बड़े फैसले का बसपा के संगठन और उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति पर क्या असर पड़ता है।

  • डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा चुनावी दांव; 'हर वयस्क नागरिक को देंगे 5,000 डॉलर'

    डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा चुनावी दांव; 'हर वयस्क नागरिक को देंगे 5,000 डॉलर'


    वाशिंगटन)।
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दो बयानों ने अमेरिकी राजनीति और अर्थव्यवस्था में नई चर्चा छेड़ दी है। ट्रंप ने दावा किया है कि यदि रिपब्लिकन पार्टी प्रतिनिधि सभा और सीनेट, दोनों में जीत हासिल करती है तो हर वयस्क अमेरिकी नागरिक को 5,000 डॉलर यानी करीब 4.2 लाख रुपये का डिविडेंड दिया जाएगा। दूसरी ओर, उन्होंने ईरान के साथ जारी युद्ध के कारण बढ़ी तेल कीमतों को लेकर कहा है कि इनके मध्यावधि चुनाव तक कम होने की संभावना कम है।

    ‘आर्थिक सफलता का नागरिकों को मिलेगा फायदा’

    ट्रंप ने कहा कि रिपब्लिकन पार्टी के हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट दोनों पर नियंत्रण हासिल करने की स्थिति में अमेरिकी नागरिकों को 5,000 डॉलर का डिविडेंड दिया जाएगा। उन्होंने इसे अमेरिका की कथित आर्थिक सफलता से जोड़ते हुए इसकी तुलना किसी सफल कंपनी द्वारा अपने शेयरधारकों को नकद राशि बांटने से की।

    ट्रंप के इस बयान को आगामी मिडटर्म चुनावों से पहले एक बड़े राजनीतिक वादे के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, इस योजना को लागू करने के लिए इसकी वित्तीय व्यवस्था और कानूनी प्रक्रिया समेत कई सवालों पर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।

    सेना के जवानों को 1,776 डॉलर देने का किया जिक्र

    ट्रंप ने पिछले साल अमेरिकी सैन्यकर्मियों को दी गई राशि का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने सैनिकों को 1,776 डॉलर दिए थे। हालांकि, मूल राशि 1,775 डॉलर थी और ट्रंप के मुताबिक उन्होंने इसमें खुद एक डॉलर जोड़कर इसे 1,776 डॉलर किया था।

    उन्होंने बताया कि 1776 का आंकड़ा अमेरिका की स्वतंत्रता के वर्ष से जुड़ा हुआ है। इसलिए उन्होंने राशि को 1,776 डॉलर करने का फैसला किया।

    ईरान युद्ध से तेल की कीमतों में उछाल

    इसी बीच ट्रंप ने ईरान युद्ध के कारण तेल की कीमतों में तेज वृद्धि का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, मौजूदा परिस्थितियों में मिडटर्म चुनाव से पहले तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट की संभावना कम है।

    अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान के बीच अंतरराष्ट्रीय ब्रेंट क्रूड की कीमत तीन प्रतिशत से अधिक बढ़कर जुलाई के बाद पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। अमेरिका और ईरान के बीच हमले तेज होने के बीच बाजार में आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी है।

    ‘चुनाव के बाद गिरने लगेगी तेल की कीमत’

    डलास में रिपब्लिकन मिडटर्म कन्वेंशन के लिए रवाना होने से पहले पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि चुनाव के तुरंत बाद तेल की कीमतें नीचे जाना शुरू कर देंगी। हालांकि, उन्होंने संकेत दिया कि कीमतों में गिरावट के लिए मिडटर्म चुनाव के बाद थोड़ा और समय लग सकता है।

    ट्रंप ने यह भी उम्मीद जताई कि चुनाव के बाद ईरान पीछे हट जाएगा। उनका कहना था कि ईरान ज्यादा समय तक मौजूदा स्थिति में टिक नहीं पाएगा।

    सातवें महीने में पहुंचा युद्ध

    अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष अब सातवें महीने में पहुंच गया है। खास बात यह है कि युद्ध की शुरुआत में ट्रंप ने इसे कुछ ही सप्ताह में समाप्त होने की उम्मीद जताई थी। अब तेल कीमतों और संघर्ष की अवधि को लेकर उनके ताजा बयानों ने अमेरिकी राजनीति के साथ-साथ वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी ध्यान केंद्रित कर दिया है।

  • शमशान घाट जाने की थी तैयारी, तभी आया फोन- अंतिम संस्कार रोक दीजिए; एंबुलेंस के झटके के बाद जिंदा मिला शख्स

    शमशान घाट जाने की थी तैयारी, तभी आया फोन- अंतिम संस्कार रोक दीजिए; एंबुलेंस के झटके के बाद जिंदा मिला शख्स


    ऋषिकेश।
    उत्तराखंड के ऋषिकेश में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे परिवार को अचानक हैरान कर दिया। जिस व्यक्ति को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया था, उसके शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाते समय परिजनों ने एंबुलेंस में अचानक सांसें चलने की बात कही। इसके बाद अंतिम संस्कार की तैयारियां रोक दी गईं और व्यक्ति को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया।

    यह मामला ऋषिकेश के गीता नगर गली नंबर-5 निवासी साईं राम से जुड़ा है। परिजनों के मुताबिक, डॉक्टरों द्वारा मृत घोषित किए जाने के बाद वे अंतिम संस्कार की तैयारी में जुट गए थे। मुक्तिधाम सेवा समिति से अंतिम यात्रा के लिए वाहन भी बुक करा लिया गया था।

    श्मशान ले जाते समय एंबुलेंस का पहिया गड्ढे में गया

    बताया गया कि साईं राम के शव को एंबुलेंस से अंतिम संस्कार के लिए ले जाया जा रहा था। जब वाहन श्यामपुर रेलवे फाटक के पास पहुंचा, तभी सड़क पर बने एक गहरे गड्ढे में एंबुलेंस का पहिया चला गया।

    परिजनों के अनुसार, वाहन को जोरदार झटका लगा। इसी दौरान साईं राम के शरीर में हलचल हुई और उन्होंने आंखें खोल दीं। परिजनों ने सांसें चलने की बात कही, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाने का फैसला किया गया।

    अंतिम यात्रा वाहन की बुकिंग भी हो चुकी थी

    मुक्तिधाम सेवा समिति के पंकज गुप्ता के मुताबिक, दोपहर में साईं राम के अंतिम संस्कार के लिए वाहन की बुकिंग कराई गई थी। इसके बाद वाहन और चालक की व्यवस्था कर दी गई थी।

    उन्होंने बताया कि करीब 2:30 बजे परिवार की ओर से फोन आया और अंतिम यात्रा वाहन की बुकिंग रद्द करने को कहा गया। जब इसकी वजह पूछी गई तो परिजनों ने बताया कि एंबुलेंस के गड्ढे में जाने के बाद लगे झटके के दौरान साईं राम की सांसें चलने लगी हैं।

    दो बार हार्ट अटैक और किडनी फेल होने की बात

    परिजनों के अनुसार, साईं राम की तबीयत काफी खराब थी। डॉक्टरों ने उनके गुर्दे फेल होने और दो बार हार्ट अटैक आने की बात कही थी और उन्हें मृत घोषित कर दिया था।

    हालांकि, बाद में सांसें चलने की सूचना के बाद उन्हें उपचार के लिए एम्स ऋषिकेश में भर्ती कराया गया। फिलहाल उनका इलाज चल रहा है।

    घटना ने खड़े किए कई सवाल

    इस घटना की जानकारी सामने आने के बाद इलाके में इसकी चर्चा हो रही है। हालांकि, एंबुलेंस के गड्ढे में जाने से लगे झटके और साईं राम के शरीर में दोबारा सांस चलने के बीच चिकित्सकीय संबंध की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    मामले ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि किसी मरीज को मृत घोषित किए जाने की प्रक्रिया में किन चिकित्सकीय मानकों का पालन किया गया था। फिलहाल साईं राम की वास्तविक चिकित्सकीय स्थिति और उन्हें मृत घोषित किए जाने की परिस्थितियां ही इस पूरे मामले को स्पष्ट करने में अहम होंगी।

  • जनगणना: इस बार मिलेगी Self Enumeration की सुविधा….16 नवंबर से शुरू होगी ऑनलाइन प्रक्रिया

    जनगणना: इस बार मिलेगी Self Enumeration की सुविधा….16 नवंबर से शुरू होगी ऑनलाइन प्रक्रिया


    नई दिल्ली।
    जनगणना-2027 (Census 2027) को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। इस बार लोगों को अपना जनगणना ब्योरा खुद दर्ज करने (Self Enumeration) की सुविधा भी मिल रही है। 16 से 30 नवंबर तक स्व-गणना (Self Enumeration) की जा सकेगी। वहीं, 1 दिसंबर से 4 जनवरी तक प्रगणक घर-घर पहुंचकर जनगणना करेंगे।

    स्व-गणना पूरी करने वाले परिवार को एक स्व-गणना पहचान संख्या मिलेगी। इसे सुरक्षित रखना होगा और घर पहुंचने वाले प्रगणक को यह संख्या बतानी होगी।


    जाति और राष्ट्रीयता के लिए प्रमाणपत्र नहीं मांगा जाएगा

    जनगणना के दौरान जाति और राष्ट्रीयता से जुड़ी जानकारी व्यक्ति की ओर से दी गई सूचना के आधार पर दर्ज की जाएगी। इसके लिए किसी नागरिक से प्रमाणपत्र या अन्य दस्तावेज नहीं मांगा जाएगा। जनगणना के दूसरे चरण में प्रत्येक परिवार से निर्धारित 40 सवाल पूछकर जानकारी दर्ज की जाएगी।


    5 से 9 जनवरी तक होगा पुनरीक्षण

    1 दिसंबर से शुरू होने वाली घर-घर जनगणना प्रक्रिया 4 जनवरी तक चलेगी। इसके बाद 5 से 9 जनवरी तक पुनरीक्षण किया जाएगा। 5 जनवरी 2027 की मध्यरात्रि को जनगणना की संदर्भ तिथि निर्धारित की गई है।


    50 फील्ड ट्रेनर होंगे तैयार

    औरैया में जनगणना की तैयारियों को लेकर जिलाधिकारी बृजेश कुमार की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट स्थित मानस सभागार में जिला स्तरीय जनगणना समन्वय समिति की बैठक हुई। इसमें तैयारियों की समीक्षा की गई और संबंधित विभागों को समय से सभी व्यवस्थाएं पूरी करने के निर्देश दिए गए।

    जिले में जनगणना के लिए 50 फील्ड ट्रेनर चिह्नित किए गए हैं। अक्टूबर में मास्टर ट्रेनर इन्हें प्रशिक्षण देंगे। इसके बाद 20 नवंबर से पहले फील्ड ट्रेनर प्रगणकों और सुपरवाइजरों को जनगणना की प्रक्रिया समझाएंगे।


    स्कूल-कॉलेज से गांवों तक चलेगा जागरूकता अभियान

    जनगणना में लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए स्कूलों और कॉलेजों में भी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें- पेंटिंग, रंगोली, भाषण, निबंध, प्रश्नोत्तरी, प्रभात फेरी जैसी गतिविधियां शामिल होंगी।

    ग्रामीण और शहरी इलाकों में वॉल पेंटिंग, बैनर-पोस्टर, होर्डिंग, कूड़ा संग्रहण वाहनों और सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली के जरिए भी लोगों को जागरूक किया जाएगा। डीएम ने छोटे जागरूकता वीडियो और डिजिटल प्रचार सामग्री तैयार कर सोशल मीडिया के जरिए लोगों तक पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।


    जनगणना के आंकड़े क्यों अहम

    बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि जनगणना से जुटाए जाने वाले आंकड़े भविष्य की विकास योजनाओं, संसाधनों के वितरण और नीति निर्माण का आधार बनते हैं। उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ तैयारियां समय से पूरी करने को कहा।

  • SIR में इन्फोसिस फाउंडर नीलेकणी सहित कई हस्तियों के नाम अटके, भेजे नोटिस….

    SIR में इन्फोसिस फाउंडर नीलेकणी सहित कई हस्तियों के नाम अटके, भेजे नोटिस….


    बेंगलुरु।
    भारत (India) के कई राज्यों में SIR यानी मतदाता सूची (Electoral Roll) का विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) जारी है, जिनमें कर्नाटक भी शामिल है। खबर है कि कई बड़ी हस्तियों को नोटिस जारी कर दिए गए हैं, जिनमें इन्फोसिस के सह संस्थापक नंदन नीलेकणी (Nandan Nilekani), एक्टर शिवराजकुमार और जेरोधा के फाउंडर कामत ब्रदर्स यानी नितिन और निखिल शामिल हैं। अधिकारियों ने इन नोटिस पर हैरानी जताई है और जांच की बात कही है। खास बात है कि इन नोटिसों की बात ऐसे समय पर आई है, जब भारत रत्न प्रोफेसर सीएनआर राव का नाम चिह्नित किए जाने का मामला तूल पकड़ रहा है। जबकि, अधिकारियों का कहना है कि कोई नोटिस नहीं दिया गया है।

    हाल ही में पंजाब में हुए SIR में राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम कटने पर भी जमकर सियासी बवाल हुआ था। चड्ढा ने पंजाब में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी पर बदले की कार्रवाई के आरोप लगाए थे। हालांकि, बाद में उनका नाम दिल्ली की मतदाता सूची में शामिल कर लिया गया था।

    एक रिपोर्ट में अनिवाश नाम के एक एक्स यूजर के हवाले से बताया गया है कि नितिन और निखिल कामत और उनके माता-पिता के नाम मेल नहीं खा रहे हैं। इस वजह से उनका नाम चिह्नित किया गया है। जबकि, नीलेकणी को अनमैप्ड बताया गया है। खास बात है कि उन्होंने भारत में आधार की शुरुआत में बड़ी भूमिका निभाई थी। रिपोर्ट के अनुसार, बेंगलुरु जिला निर्वाचन अधिकारी और जीबीए मुख्य आयुक्त माहेश्वर राव से नोटिस को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा, ‘यह हैरानी की बात है और हम इसकी जांच करेंगे।’


    पीएम मोदी ने सौंपी है बड़ी जिम्मेदारी

    जुलाई में छात्र आंदोलन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक हाई पावर टास्क फोर्स गठित की थी, जिसकी कमान नीलेकणी को सौंपी गई थी। इस टास्क फोर्स का काम NTA की तरफ से कराई जाने वाली परीक्षाओं में सुधार का था। उनके साथ पूर्व इसरो चीफ एस सोमनाथ, पूर्व आईबी निदेशक तपन डेका समेत कई बड़े नाम शामिल थे।


    कई बड़ी हस्तियों के नाम शामिल

    अन्य मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कई और हस्तियों के नाम भी चुनावी रिकॉर्ड 2002 की पुरानी डेटाबेस सूची से सीधे मेल नहीं खा रहे हैं। अभिनेता शिवराजकुमार को अनमैप्ड श्रेणी में रखा गया है। इसका मतलब है कि उनके पते की जानकारी नहीं मिल सकी है। उनका वर्तमान चुनावी डेटा 2002 की सूची से सीधे लिंक नहीं हो पा रहा था। शिवराजकुमार के मामले में उनके पिता का नाम दिवंगत मुथुराज दर्ज है, जो महान अभिनेता डॉक्टर राजकुमार का वास्तविक नाम है।

    अभिनेता प्रकाश राज के नाम काटे जाने के दावों को खारिज करते हुए अधिकारी कार्यालय ने साफ किया कि उनका नाम शांतिनगर निर्वाचन क्षेत्र की सूची में है।


    क्या कट जाएंगे नाम

    चुनाव अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इन मतदाताओं को अयोग्य नहीं पाया गया है और न ही उनके नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। यह समस्या केवल 2002 के पुराने रिकॉर्ड और वर्तमान पहचान के बीच नाम, माता-पिता के नाम की जानकारी या स्पेलिंग में अंतर के कारण आई है। 4 सितंबर तक के आंकड़े बताते हैं कि ऐसे मतदाताओं को 43.81 लाख से अधिक नोटिस तैयार किए गए हैं, जिनमें से 7.31 लाख से अधिक नोटिस दिए जा चुके हैं।


    भारत रत्न राव को नहीं दिया नोटिस

    बेंगलुरु चुनाव अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि राव को नोटिस नहीं दिया गया है। दरअसल, उनका नाम 2002 की मल्लेश्वरम विधानसभा क्षेत्र की सूची में केवल रामा के रूप में दर्ज था। जबकि वर्तमान में उनका नाम प्रो सीएन राव एम दर्ज है। अधिकारियों का कहना है कि बीएलओ ने खुद उनके घर जाकर विवरण जुटाया और उनका नाम अंतिम सूची में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

  • E20 पेट्रोल पर सरकार की बड़ी तैयारी…. और ज्यादा एथनॉल मिलाने का बनाया प्लान

    E20 पेट्रोल पर सरकार की बड़ी तैयारी…. और ज्यादा एथनॉल मिलाने का बनाया प्लान


    नई दिल्ली।
    पेट्रोल (Petrol) में एथनॉल (Ethanol) मिलाने की मौजूदा E20 व्यवस्था (E20 system) के बाद सरकार अब इससे आगे बढ़ने की तैयारी कर रही है। प्रधानमंत्री के सलाहकार तरुण कपूर (Tarun Kapoor) ने बुधवार को कहा कि सरकार पेट्रोल में 20 फीसदी से अधिक एथनॉल ब्लेंडिंग की अनुमति देने पर काम कर रही है। हालांकि, ज्यादा एथनॉल वाले ईंधन का इस्तेमाल फ्लेक्सी-फ्यूल व्हीकल्स (Flex-fuel vehicles-FFV) के जरिए किया जाएगा।


    क्या है सरकार का प्लान?

    एक कार्यक्रम में तरुण कपूर ने कहा कि E20 प्रोग्राम अबतक बहुत सफल रहा है और कई वाहन कंपनियों ने जल्द ही फ्लेक्सी-फ्यूल गाड़ियां पेश करने की योजना की घोषणा की है। उन्होंने कहा, ”अब हमारा ध्यान फ्लेक्सी-फ्यूल गाड़ियों पर है और ऐसी सम्मिश्रण की मंजूरी देना है जो E20 से ज्यादा हो।” उन्होंने कहा कि ऐसी गाड़ियों की पेशकश के साथ-साथ ईंधन बिक्री केंद्रों पर शुद्ध एथनॉल की उपलब्धता भी बढ़ानी होगी। कपूर ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के बीच जैव-ईंधन पर जोर देना और भी जरूरी हो गया है। इस संकट ने आपूर्ति में रुकावट डाली है और कच्चे तेल की कीमतों को लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा दिया है, साथ ही और बढ़ोतरी की आशंका भी बनी हुई है। उन्होंने कहा, ”यह जरूरी है कि हम देश में जो कुछ भी उपलब्ध है, उसका इस्तेमाल करने की कोशिश करें।”

    उन्होंने कहा कि देश में एथनॉल उत्पादन की क्षमता पेट्रोल में इसे मिलाने की जरूरतों से ज्यादा हो गई है और इस अतिरिक्त क्षमता का पूरा इस्तेमाल करने के लिए उद्योग को एथनॉल के अन्य इस्तेमाल के तरीकों पर भी विचार करना होगा।

    एथनॉल कितना, पेट्रोल कितना?
    बता दें कि E20 में 80 फीसदी पेट्रोल और 20 फीसदी एथनॉल मिलाया जाता है। सरकार अब E20 से आगे जाकर एथनॉल की मात्रा बढ़ाने पर विचार कर रही है। हालांकि, तरुण कपूर ने यह भी कहा कि इसका इस्तेमाल सामान्य पेट्रोल वाहनों के बजाय फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों में करने की दिशा में काम किया जा रहा है। ये ऐसी गाड़ियां होती हैं, जिन्हें पेट्रोल के साथ अलग-अलग अनुपात में एथनॉल वाले ईंधन पर भी चलने के लिए डिजाइन किया जाता है।


    डीजल के लिए भी है प्लान

    डीजल सेग्मेंट के बारे में कपूर ने कहा कि सरकार जैव-ईंधन एडिटिव्स पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि अगर आइसोब्यूटेनॉल के साथ किए जा रहे प्रयोग सफल होते हैं, तो यह जैव-ईंधन के लिए एक ‘बड़ा’ नया रास्ता खोल सकते हैं, क्योंकि रिफाइनरी उत्पादन में डीजल का बड़ा हिस्सा होता है। उन्होंने सरकार की नई गोवर्धन योजना का भी जिक्र किया, जो संपींडित बायोगैस (सीबीजी) को बढ़ावा देने के लिए अलग-अलग मंत्रालयों से मिलने वाले मदद को एक साथ लाती है। इस क्षेत्र में अब तक सीमित प्रगति हुई है।

  • भारत दौरे पर दिल्ली पहुंचे 50वें इमाम प्रिंस रहीम आगा खान V… आज राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री से मिलेंगे

    भारत दौरे पर दिल्ली पहुंचे 50वें इमाम प्रिंस रहीम आगा खान V… आज राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री से मिलेंगे


    नई दिल्‍ली।
    इस्लामी समुदाय (Islamic community) के 50वें इमाम (50th Imam) प्रिंस रहीम आगा खान पंचम (Prince Rahim Aga Khan V) बुधवार देर रात अपनी पहली भारत यात्रा (India Tour) पर नई दिल्ली (New Delhi) पहुंचे। इस दौरान एयरपोर्ट पर विदेश मंत्रालय के अधिकारियों द्वारा उनका रेड कार्पेट स्वागत किया गया। आगा खान पंचम 9 से 15 सितंबर तक भारत दौरे रहेंगे। इस दौरान वह दिल्ली में वे राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, उपराष्ट्रपति, गृह मंत्री और विदेश मंत्री से मुलाकात करेंगे।

    व‍िदेश मंत्रायल के अनुसार, आगा खान पंचम की यह भारत यात्रा उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन के निमंत्रण पर हो रही है। प्रिंस रहीम आगा खान करीब एक सप्‍ताह तक भारत की यात्रा पर रहेंगे। इस दौरान वो अहमदाबाद, मुंबई और हैदराबाद भी जाएंगे।


    राष्ट्रपति मुर्मू-पीएम मोदी से करेंगे मुलाकात

    दिल्ली प्रवास के दौरान आगा खान की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात भी प्रस्‍ताव‍ित है। इसके अलावा, वह गृह मंत्री और विदेश मंत्री से भी मिलेंगे। इन बैठकों के अलावा भारत यात्रा के दौरान आगा खान पंचम अहमदाबाद, मुंबई और हैदराबाद का भी दौरा करेंगे। इन शहरों में आगा खान डेवलपमेंट नेटवर्क (एकेडीएन) विभिन्न विकास कार्यों और सामुदायिक पहलों से जुड़ा हुआ है।

    आगा खान पंचम के रूप में इस्माइली समुदाय के 50वें इमाम का पद संभालने के बाद यह हिज हाइनेस प्रिंस रहीम आगा खान पंचम की भारत की पहली यात्रा होगी।


    2025 में संभाला था 50वें इमाम का पद

    प्रिंस आगा खान पंचम ने फरवरी 2025 में अपने पिता प्रिंस करीम आगा खान चतुर्थ के निधन के बाद 50वें इमाम का पद संभाला। उस दौरान प्रिंस करीम अल-हुसैनी आगा खान चतुर्थ और शिया इस्माइली मुसलमानों के 49वें इमाम के इंतकाल की जानकारी इस्माइली धार्मिक समुदाय ने अपनी वेबसाइट्स पर दी थी।

    आगा खान चतुर्थ ने अपना पूरा जीवन लोक कल्याण के लिए समर्पित कर दिया था। उन्होंने विश्व के सबसे गरीब और सबसे हाशिए पर रहने वाले समुदायों की मदद की है।

    आगा खान ने वर्ष 1967 में ‘आगा खान फाउंडेशन’ की स्थापना की थी। यह फाउंडेशन अफ्रीका, एशिया, यूरोप, मध्य पूर्व और उत्तरी अमेरिका के 18 देशों में काम करता है। आगा खान फाउंडेशन ने उनके परिवार और विश्व भर के इस्माइली समुदाय के प्रति अपनी संवेदना जताई है।

  • दिल्ली आ रहे चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग… भारत के साथ हो सकती है दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति पर बड़ी डील

    दिल्ली आ रहे चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग… भारत के साथ हो सकती है दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति पर बड़ी डील


    नई दिल्ली।
    देश की राजधानी दिल्ली (Delhi) में इस सप्ताह ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit) में हिस्सा लेने के लिए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Chinese President Xi Jinping) भारत (India) आ रहे हैं। इस दौरे पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हैं। जिनपिंग अपने साथ तोहफा भी ला रहे हैं।

    दुर्लभ खनिजों (Rare Minerals) की आपूर्ति को लेकर भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय समझौते के आसार हैं। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा के मद्देनजर इस समझौते की रूपरेखा को अंतिम रूप दिया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच 12 सितंबर की शाम को द्विपक्षीय वार्ता होगी। वहीं रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के साथ 11 को द्विपक्षीय वार्ता होगी।

    गौरतलब है कि पूर्व में चीन के साथ हुई बातचीत में वह भारत को दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति का भरोसा दिला चुका है। अब सूत्रों का कहना है कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान चीन के राष्ट्रपति के साथ द्विपक्षीय वार्ता में इस समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं।


    भारत तीसरे स्थान पर

    इससे पहले भारत में दुनिया के करीब छह फीसदी दुर्लभ खनिज होने का अनुमान है। इस मामले में भारत तीसरे स्थान पर है। हालांकि अभी तक इनका पर्याप्त दोहन नहीं हो पाया है। कुछ समय पहले भारत ने नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन शुरू किया है, जिसका मकसद ऐसे दुलर्भ खनिजों की खोजना है। सरकार ने बताया था कि भूगर्भ सर्वेक्षण विभाग ने आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल, झारखंड, राजस्थान, गुजरात,महाराष्ट्र में 7.23 मिलियन टन दुर्लभ खनिजों की मौजूदगी का पता लगाया है।


    क्या है दुर्लभ खनिज?

    दुर्लभ खनिजों की श्रेणी में कुल 17 तत्व हैं, जिनमें से सात चीन में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं। इनमें स्कैडियम, सैमरियम, डिस्प्रोसियम, टेरबियम, इट्रियम, गैडोलिनियम और ल्यूटेनियम शामिल हैं। दुनिया में इन दुर्लभ खनिजों की उपलब्धता का करीब 80 फीसदी हिस्सा अकेले चीन में है। ऐसे में कई देश इनकी आपूर्ति के लिए चीन पर निर्भर हैं। यदि भारत के साथ यह समझौता होता है तो भारत को भी इन खनिजों की आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी।

    रूस सहयोग को तैयार

    इस बीच, रूस ने भी कहा है कि वह भारत को दुर्लभ खनिजों की खोज में मदद करने के लिए तैयार है। यह एक बेहद जटिल कार्य है और रूस की कंपनियों के पास इस क्षेत्र में विशेषज्ञता है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि रूस इस संबंध में भारत को सहयोग देने के लिए तैयार है। पुतिन की भारत यात्रा के दौरान द्विपक्षीय वार्ता में इस मुद्दे पर भी चर्चा होने की संभावना है।

  • विजय माल्या बोले- कॉकरोच बन जाना चाहिए, शायद उनकी जिंदगी बेहतर है

    विजय माल्या बोले- कॉकरोच बन जाना चाहिए, शायद उनकी जिंदगी बेहतर है


    नई दिल्ली। भगोड़े कारोबारी विजय माल्या ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में अपनी स्थिति की तुलना ‘कॉकरोच’ से करते हुए कहा है कि शायद कॉकरोच की जिंदगी बेहतर होती है। माल्या का यह बयान ऐसे समय आया है, जब भारत में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) नाम का व्यंग्यात्मक युवा आंदोलन चर्चा में है। माल्या ने अपने खिलाफ हुई कार्रवाई को कथित अन्याय से जोड़ते हुए यह टिप्पणी की है।

    माल्या ने एक्स पर क्या लिखा?
    माल्या ने एक्स पर लिखा, “मैंने जितनी भी नाइंसाफियां झेली हैं और झेल रहा हूं, उन्हें देखते हुए सोचता हूं कि क्या मुझे कॉकरोच बन जाना चाहिए। शायद कॉकरोच की जिंदगी बेहतर हो।”

    माल्या लंबे समय से अपने खिलाफ हुई कार्रवाई और लगाए गए आरोपों पर सवाल उठाते रहे हैं। हालिया पोस्ट में भी उन्होंने खुद को ‘भगोड़ा’ कहे जाने पर आपत्ति जताई और दावा किया कि ब्रिटेन के कानूनी प्रतिबंधों के चलते वह वहां से बाहर नहीं जा सकते।

    ‘कॉकरोच’ शब्द से शुरू हुआ व्यंग्यात्मक आंदोलन

    2026 में ‘कॉकरोच’ शब्द सोशल मीडिया की राजनीति में एक अलग प्रतीक के तौर पर सामने आया। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ यानी CJP की शुरुआत व्यंग्यात्मक ऑनलाइन आंदोलन के रूप में हुई थी। इसके संस्थापक अभिजीत दीपके हैं। आंदोलन के जरिए बेरोजगारी, शिक्षा व्यवस्था, परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और युवाओं की राजनीतिक भागीदारी जैसे मुद्दे उठाए गए।

    CJP के नाम को उस समय ज्यादा चर्चा मिली, जब सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की ओर से कुछ बेरोजगार युवाओं और कार्यकर्ताओं के लिए ‘कॉकरोच’ और ‘पैरासाइट’ जैसे शब्द इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई। आंदोलन से जुड़े लोगों ने ‘कॉकरोच’ शब्द को अपमान के बजाय व्यंग्यात्मक पहचान के रूप में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया।

    इसके बाद आंदोलन सोशल मीडिया से आगे बढ़कर सड़क पर भी दिखाई दिया और शिक्षा व परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किए गए। जुलाई में पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को भी आंदोलन से जुड़े दबाव के संदर्भ में बताया गया है।

    विजय माल्या पर क्या मामले हैं?

    विजय माल्या कभी भारत के प्रमुख कारोबारी चेहरों में गिने जाते थे। वह यूनाइटेड ब्रुअरीज समूह से जुड़े रहे और किंगफिशर एयरलाइंस के प्रमोटर थे। एयरलाइन के वित्तीय संकट के बाद भारतीय बैंकों का हजारों करोड़ रुपये का बकाया सामने आया।

    माल्या मार्च 2016 में भारत छोड़कर ब्रिटेन चले गए। इसके बाद भारतीय एजेंसियों ने उनके खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं और बकाये से जुड़े मामलों में कार्रवाई की। भारत सरकार उनकी वापसी के लिए प्रत्यर्पण प्रक्रिया भी चला रही है।

    संपत्तियों को लेकर माल्या का दावा

    माल्या का कहना है कि उनके खिलाफ हुई कार्रवाई में उनके साथ अन्याय हुआ है। हालिया बयानों में उन्होंने दावा किया है कि उनकी संपत्तियों से बैंकों और एजेंसियों ने उनकी देनदारी से अधिक रकम वसूल की है।

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, माल्या ने दावा किया कि करीब 14,131 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की गई हैं, जबकि वह अपनी देनदारी करीब 6,203 करोड़ रुपये बताते हैं। ये आंकड़े माल्या के दावे के तौर पर ही देखे जाने चाहिए, अदालत द्वारा स्थापित तथ्य के रूप में नहीं।

    अगस्त 2026 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने माल्या की संपत्तियों की जब्ती और बैंक रिकवरी से जुड़े लंबे समय से लंबित विवाद को खत्म करने की जरूरत पर टिप्पणी की थी। अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय से मामले की मौजूदा स्थिति स्पष्ट करने को कहा था। माल्या के वकील ने अदालत में दावा किया था कि बैंकों ने करीब 15,000 करोड़ रुपये की वसूली कर ली है।

    CJP से जुड़े विवाद भी जारी

    ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ हाल के दिनों में भी सक्रिय रही है। सितंबर में इसके समर्थकों ने दिल्ली के संसद मार्ग थाने तक मार्च किया और एक प्रदर्शन के दौरान छात्रा के पिता पर कथित हमले के मामले में कार्रवाई की मांग की।

    9 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा के एक कार्यकारी मजिस्ट्रेट की ओर से CJP के प्रदर्शन में शामिल एक कानून छात्र को नोटिस जारी किए जाने के मामले पर संज्ञान लिया। कोर्ट ने इस मामले में प्राधिकरण से स्पष्टीकरण मांगने की बात कही।

    इसी बीच CJP से जुड़ा एक और कानूनी विवाद सामने आया है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने CJP, अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में 2 करोड़ रुपये का मानहानि मुकदमा दायर किया है।

  • लाल किला धमाका: जूते से एक्टिवेट किया था IED, NIA चार्जशीट में सामने आया पूरा प्लान

    लाल किला धमाका: जूते से एक्टिवेट किया था IED, NIA चार्जशीट में सामने आया पूरा प्लान


    नई दिल्ली। लाल किले के पास पिछले साल हुए बम धमाके को लेकर NIA की चार्जशीट में अहम खुलासा हुआ है। जांच एजेंसी के मुताबिक, डॉ. उमर उन नबी ने धमाका घबराहट में नहीं, बल्कि सोची-समझी योजना के तहत किया था। उसने अपने जूते में लगी पीजोइलेक्ट्रिक प्लेट के जरिए कमांड मैकेनिज्म का इस्तेमाल कर कार में रखे IED को एक्टिवेट किया था। यानी धमाके के लिए पैर या जूते से संचालित होने वाला ट्रिगर तैयार किया गया था।

    NIA के मुताबिक, इससे यह आशंका भी दूर होती है कि नबी से किसी गलती या घबराहट के कारण विस्फोट हुआ था। जांच में सामने आया कि लाल किले के इलाके को पहले से निशाना बनाया गया था। एजेंसी का कहना है कि हमलावरों के लिए लाल किला भारतीय सत्ता का प्रतीक था और इसी वजह से यहां हमला करने की योजना बनाई गई।

    इस साल मई में NIA ने मामले में 10 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। दिल्ली की एक अदालत ने 29 अगस्त को इसका संज्ञान लिया। धमाके में नबी समेत 12 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 29 लोग घायल हुए और 24 वाहन तबाह हुए। NIA के अनुसार, हमले में अंसार गजवत-उल-हिंद (AGuH) से जुड़े डॉक्टरों के एक समूह की भूमिका थी, जिसका संबंध भारतीय उपमहाद्वीप में अल-कायदा (AQIS) से बताया गया है।

    फॉरेंसिक जांच में जूते से मिला अहम सुराग

    NIA की चार्जशीट के अनुसार, फॉरेंसिक जांच से यह पुष्टि हुई कि विस्फोट में वाहन के अंदर रखा IED इस्तेमाल किया गया था। घटनास्थल से ‘रेड-टेप’ ब्रांड का एक जूता मिला। उसके सिर्फ एक जूते की एड़ी में धातु का टुकड़ा लगा था। जांच एजेंसी के मुताबिक, यह IED को नियंत्रित करने के लिए इस्तेमाल किए गए कमांड मैकेनिज्म की ओर इशारा करता है।

    चार्जशीट में कहा गया है कि नाक से लिए गए स्वैब की जांच में TATP (ट्राई-एसीटोन ट्राई-पेरोक्साइड) और अमोनियम नाइट्रेट के अंश मिले। NIA का दावा है कि इससे संकेत मिलता है कि विस्फोट के वक्त नबी कार में मौजूद था और उसी ने कमांड मैकेनिज्म के जरिए IED को एक्टिवेट किया।

    पीजोइलेक्ट्रिक प्लेट से तैयार किया गया था ट्रिगर

    जांच एजेंसी के मुताबिक, IED तैयार करने में सह-आरोपी और बम विशेषज्ञ जासिर बिलाल वानी की भूमिका थी। चार्जशीट में कहा गया है कि उसने ट्रांसड्यूसर तकनीक का इस्तेमाल किया था। इसमें पीजोइलेक्ट्रिक प्लेट के जरिए दबाव या कंपन जैसी यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदला जा सकता है और इसके विपरीत भी।

    NIA का दावा है कि वानी ने यह पीजोइलेक्ट्रिक प्लेट नबी को दी थी। घटनास्थल से मिले नबी के जूते में इसके पाए जाने और विस्फोटक विशेषज्ञों की जांच के आधार पर एजेंसी ने निष्कर्ष निकाला कि नबी ने इसी ट्रिगर मैकेनिज्म का इस्तेमाल कर विस्फोटक सामग्री से भरी हुंडई i20 में धमाका किया।

    लाल किले की कई बार रेकी का दावा

    चार्जशीट में नबी की लाल किले के इलाके में लगातार आवाजाही का भी जिक्र है। NIA के मुताबिक, दिसंबर 2023 से मई 2025 के बीच वह कम से कम 12 बार इस क्षेत्र में गया था। इनमें कुछ यात्राएं उसने अकेले कीं, जबकि कुछ मौकों पर वह डॉ. मुजम्मिल शकील और डॉ. शहीद सईद के साथ था।

    जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपियों ने लाल किले के आसपास IED तैयार करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक सामान भी खरीदा था। NIA का कहना है कि आरोपियों की नजर में लाल किला भारतीय राज्य का प्रतीक था।

    एजेंसी ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी में नबी के ठिकाने से मिले हाथ से लिखे नोट्स का भी हवाला दिया है। इनमें AGuH के सदस्यों को लोकतंत्र का विरोधी बताया गया और भारत में शरिया कानून लागू करने की इच्छा का उल्लेख था। NIA के अनुसार, इसी विचारधारा के तहत लाल किले के आसपास कई बार आवाजाही की गई।

    सुसाइड बॉम्बर तैयार करने की भी कोशिश

    NIA की चार्जशीट में यह भी दावा किया गया है कि नबी और AGuH से जुड़े गिरफ्तार सदस्य मुजम्मिल शकील ऐसे युवाओं की तलाश में रहते थे, जिन्हें संगठन के लिए कट्टरपंथी बनाया जा सके। छात्रों और साथी डॉक्टरों में से संभावित लोगों को भी इसके लिए संपर्क किया जाता था।

    एजेंसी के मुताबिक, नबी ने जासिर बिलाल वानी और शोपियां निवासी यासिर अहमद डार को आतंकी समूह में शामिल होने के लिए तैयार किया। डार को दिसंबर 2025 में गिरफ्तार किया गया था। चार्जशीट में दावा है कि नबी और गिरफ्तार विचारक इरफान अहमद वागे ने वानी और डार को सुसाइड बॉम्बर बनने के लिए प्रेरित किया था।

    डार को दिया गया था ‘45’ कोड नाम

    चार्जशीट के अनुसार, नवंबर 2024 में नबी ने डार को श्रीनगर के इकबाल पार्क बुलाया था। वहां उसकी वागे से मुलाकात कराई गई। NIA का कहना है कि दोनों ने डार को और कट्टरपंथी बनाया और नबी ने उसे ‘45’ कोड नाम दिया।

    इसके बाद मुजम्मिल शकील ने पुलवामा में डार से मुलाकात की और उसे भरोसा दिलाया कि समय आने पर उसे इस्लाम के लिए बुलाया जाएगा। मई-जून 2025 में नबी और वागे ने डार को फिदायीन ऑपरेशन के लिए शपथ दिलाई। NIA के मुताबिक, इस पूरी प्रक्रिया की रिकॉर्डिंग वागे के मोबाइल फोन में मिली थी।