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  • राम मंदिर के नए CEO को क्‍या मिलेंगी सुविधाएं? नियुक्ति प्रक्रिया हुई तेज, 18 जुलाई तक मांगे गए आवेदन

    राम मंदिर के नए CEO को क्‍या मिलेंगी सुविधाएं? नियुक्ति प्रक्रिया हुई तेज, 18 जुलाई तक मांगे गए आवेदन


    अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति प्रक्रिया तेज कर दी है। ट्रस्ट की ओर से चयनित सीईओ को वेतन और आवास जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। यह पद पूरी तरह ट्रस्ट के अधीन होगा और नियुक्त अधिकारी वेतनभोगी कर्मचारी के रूप में मंदिर के प्रशासनिक कार्यों की जिम्मेदारी संभालेंगे।

    18 जुलाई तक किए जा सकेंगे आवेदन
    सीईओ चयन के लिए गठित तीन सदस्यीय समिति ने पात्रता के मानक तय कर दिए हैं। इच्छुक अभ्यर्थी 18 जुलाई तक आवेदन कर सकते हैं। इस पद के लिए उम्मीदवार का स्नातक (Graduation) होना अनिवार्य है। साथ ही प्रशासन या वित्तीय प्रबंधन के क्षेत्र में कम से कम 20 वर्ष का अनुभव होना चाहिए। आवेदन करने वाले व्यक्ति का हिंदू धर्म का अनुयायी होना भी आवश्यक शर्त रखी गई है। चयनित उम्मीदवार की नियुक्ति तीन वर्ष के लिए की जाएगी।

    22 जुलाई की बैठक से पहले हो सकता है चयन
    श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अगली बैठक 22 जुलाई को प्रस्तावित है। संभावना जताई जा रही है कि इस बैठक से पहले ही नए सीईओ के नाम पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है। नई दिल्ली में आयोजित चयन समिति की बैठक में नियुक्ति प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की गई। समिति में सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी और श्री साईबाबा संस्थान ट्रस्ट, शिरडी के पूर्व अध्यक्ष सुरेश हावरे शामिल हैं।

    चढ़ावा चोरी मामले के बाद तेज हुई प्रक्रिया
    राम मंदिर में चढ़ावे की राशि की चोरी का मामला सामने आने के बाद विशेष जांच दल (SIT) ने जांच की थी। जांच के आधार पर अयोध्या पुलिस अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे चढ़ावे की रकम चुराकर पहले वॉशरूम में छिपाते थे और बाद में मौका मिलने पर उसे बाहर ले जाते थे।
    राम मंदिर में चढ़ावे की राशि की चोरी का मामला सामने आने के बाद विशेष जांच दल (SIT) ने जांच की थी। जांच के आधार पर अयोध्या पुलिस अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे चढ़ावे की रकम चुराकर पहले वॉशरूम में छिपाते थे और बाद में मौका मिलने पर उसे बाहर ले जाते थे।

    जांच में सामने आए नए खुलासे
    एसआईटी की जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों में शामिल अविनाश शुक्ला ने राम मंदिर में नौकरी के दौरान कथित तौर पर करीब 20 लाख रुपये खर्च कर मकान बनवाया। इसके अलावा उसने अपने भाई के नाम पर एक ब्रेज़ा कार खरीदी और अपनी गर्लफ्रेंड को एक आईफोन तथा दो लाख रुपये भी दिए। जांच एजेंसियों के अनुसार, प्रतापगढ़ निवासी अविनाश शुक्ला राम मंदिर में नौकरी मिलने से पहले पीने का पानी बेचने का काम करता था। मामले की जांच अभी जारी है।

  • योगी सरकार का बड़ा प्रशासनिक फेरबदल 182 पीसीएस अधिकारियों के तबादले से यूपी की नौकरशाही में मचा हलचल

    योगी सरकार का बड़ा प्रशासनिक फेरबदल 182 पीसीएस अधिकारियों के तबादले से यूपी की नौकरशाही में मचा हलचल


    उत्तर प्रदेश उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए एक साथ 182 पीसीएस अधिकारियों के तबादले कर दिए हैं। देर रात जारी तबादला सूची के साथ ही प्रदेश की नौकरशाही में व्यापक फेरबदल देखने को मिला। इस निर्णय के तहत कई जिलों में उप जिलाधिकारी बदले गए हैं जबकि विकास प्राधिकरणों नगर निगमों आवास एवं विकास परिषद और राजस्व परिषद सहित कई महत्वपूर्ण विभागों में भी अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

    सरकार का उद्देश्य प्रशासनिक कार्यप्रणाली को अधिक गतिशील बनाना और जिलों में बेहतर प्रशासनिक समन्वय स्थापित करना बताया जा रहा है। व्यापक तबादला सूची में बड़ी संख्या में एसडीएम स्तर के अधिकारियों को नई तैनाती दी गई है जिससे कई जिलों में प्रशासनिक नेतृत्व पूरी तरह बदल गया है।

    जारी आदेश के अनुसार प्रशांत कुमार को उन्नाव से बहराइच भेजा गया है जबकि ध्रुव शुक्ला को गाजीपुर का नया एसडीएम बनाया गया है। कुमार संजय को जालौन अभय कुमार सिंह को राजस्व परिषद में विशेष कार्याधिकारी मनोज प्रकाश को जालौन अरविंद कुमार सिंह को मैनपुरी और पुष्पेंद्र पटेल को अंबेडकरनगर में नई जिम्मेदारी दी गई है। योगेश कुमार गौड़ को सहारनपुर तथा ज्योति शर्मा को कानपुर नगर में एसडीएम बनाया गया है।

    इसके अलावा कई महिला अधिकारियों को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। दीपिका मेहर को शामली सुरभि शर्मा को बागपत प्रतिभा मिश्रा को कानपुर देहात प्रीति तिवारी को बांदा आकांक्षा सिंह को चंदौली मधुमिता सिंह को अंबेडकरनगर रत्निका श्रीवास्तव को रामपुर और वंदना पांडेय को अयोध्या में एसडीएम के रूप में तैनाती मिली है। वहीं कई अधिकारियों को नगर निगमों और विकास प्राधिकरणों में विशेष कार्याधिकारी तथा सहायक नगर आयुक्त के पदों पर नियुक्त किया गया है।

    सरकार ने प्रयागराज कानपुर नगर लखनऊ नोएडा ग्रेटर नोएडा अलीगढ़ और अन्य विकास प्राधिकरणों में भी प्रशासनिक बदलाव किए हैं। कई अधिकारियों को औद्योगिक विकास प्राधिकरणों नगर निगमों और स्थानीय निकाय निदेशालय में नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं जिससे शहरी प्रशासन को और मजबूत बनाने की तैयारी दिखाई दे रही है।

    तबादला सूची में बहराइच मैनपुरी गाजीपुर बाराबंकी उन्नाव जौनपुर मथुरा प्रयागराज बांदा बागपत लखीमपुर खीरी रायबरेली गोरखपुर अयोध्या देवरिया बिजनौर हरदोई बुलंदशहर गोंडा झांसी वाराणसी कुशीनगर सोनभद्र चित्रकूट और फर्रुखाबाद सहित प्रदेश के अधिकांश जिलों को शामिल किया गया है। इससे स्पष्ट है कि सरकार ने सीमित फेरबदल के बजाय व्यापक प्रशासनिक पुनर्संरचना का फैसला किया है।

    प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि इतने बड़े स्तर पर किए गए तबादलों का उद्देश्य शासन की योजनाओं को तेजी से जमीन पर उतारना और कानून व्यवस्था के साथ विकास कार्यों में नई गति लाना है। नए अधिकारियों के कार्यभार संभालने के बाद जिलों में प्रशासनिक कार्यशैली और योजनाओं के क्रियान्वयन में बदलाव देखने को मिल सकता है। आने वाले दिनों में सभी अधिकारी अपनी नई तैनाती वाले जिलों और विभागों में कार्यभार ग्रहण करेंगे जिसके बाद प्रशासनिक गतिविधियां नए सिरे से गति पकड़ेंगी।

  • सेवा और निष्ठा की विरासत का उत्सव सीआरपीएफ स्थापना दिवस पर सरकार ने देशभर के नागरिकों को दिया भागीदारी का अवसर

    सेवा और निष्ठा की विरासत का उत्सव सीआरपीएफ स्थापना दिवस पर सरकार ने देशभर के नागरिकों को दिया भागीदारी का अवसर


    नई दिल्ली । भारत की आंतरिक सुरक्षा की सबसे मजबूत ढाल माने जाने वाले केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल सीआरपीएफ के 88वें स्थापना दिवस को इस वर्ष विशेष अंदाज में मनाया जाएगा। भारत सरकार ने इस अवसर पर देशभर के नागरिकों को सीआरपीएफ के शौर्य समर्पण और सेवा भावना को सम्मान देने के लिए विभिन्न ऑनलाइन प्रतियोगिताओं और जनभागीदारी अभियानों से जोड़ने का फैसला किया है। सरकार ने सभी आयु वर्ग के लोगों से अपील की है कि वे इस राष्ट्रीय अभियान का हिस्सा बनें और देश की सुरक्षा में अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीर जवानों के प्रति सम्मान व्यक्त करें।

    भारत सरकार के नागरिक सहभागिता मंच माई जीओवी ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस विशेष अभियान की घोषणा करते हुए नागरिकों को सेवा और निष्ठा की गौरवशाली विरासत विषय पर आधारित पेंटिंग प्रतियोगिता क्विज शॉर्ट वीडियो प्रतियोगिता और नागरिक प्रतिज्ञा अभियान में भाग लेने का निमंत्रण दिया है। इच्छुक प्रतिभागी माई जीओवी पोर्टल पर जाकर अपना पंजीकरण कर इन प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले सकते हैं।

    सरकार ने अपने संदेश में कहा है कि सीआरपीएफ केवल भारत का सबसे बड़ा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल ही नहीं बल्कि देश की एकता अखंडता और आंतरिक सुरक्षा का सबसे मजबूत स्तंभ भी है। वर्ष 1939 में स्थापित इस बल ने सेवा और निष्ठा के अपने मूल मंत्र को निभाते हुए हर चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में राष्ट्र की सुरक्षा सुनिश्चित की है। चाहे आतंकवाद के खिलाफ अभियान हो वामपंथी उग्रवाद से मुकाबला हो कानून व्यवस्था बनाए रखना हो शांतिपूर्ण चुनाव कराना हो या प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत और बचाव कार्य करना हो सीआरपीएफ ने हर मोर्चे पर अपनी दक्षता और बहादुरी का परिचय दिया है।

    सीआरपीएफ की विशेष इकाइयों रैपिड एक्शन फोर्स और कोबरा ने भी समय समय पर कठिन अभियानों में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। देश के दुर्गम इलाकों से लेकर संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों तक बल के जवान दिन रात राष्ट्र की सुरक्षा में तैनात रहते हैं और अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी निष्ठा के साथ करते हैं।

    इस गौरवशाली यात्रा के दौरान सीआरपीएफ के 2270 से अधिक वीर जवान देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दे चुके हैं। उनका साहस समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। सरकार का मानना है कि स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित प्रतियोगिताएं केवल प्रतिभा प्रदर्शन का मंच नहीं बल्कि नई पीढ़ी को राष्ट्रभक्ति सुरक्षा और सेवा के मूल्यों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम भी बनेंगी।

    सरकार ने सभी नागरिकों से आह्वान किया है कि वे इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाकर सीआरपीएफ के वीर जवानों को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करें। साथ ही अपनी रचनात्मकता और ज्ञान के माध्यम से उस बल के प्रति सम्मान प्रकट करें जिसने दशकों से भारत की एकता संप्रभुता और आंतरिक सुरक्षा की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

  • कतर के पूर्व अमीर के निधन पर भारत में राष्ट्रीय शोक नई दिल्ली मुंबई और केरल में आधा झुका तिरंगा

    कतर के पूर्व अमीर के निधन पर भारत में राष्ट्रीय शोक नई दिल्ली मुंबई और केरल में आधा झुका तिरंगा


    नई दिल्ली । कतर के पूर्व अमीर शेख हमद बिन खलीफा अल थानी के निधन पर भारत ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए पूरे देश में एक दिन का राष्ट्रीय शोक मनाया। भारत सरकार के निर्देश पर सोमवार को नई दिल्ली मुंबई केरल सहित देशभर के उन सभी सरकारी भवनों पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुकाया गया जहां नियमित रूप से तिरंगा फहराया जाता है। इसके साथ ही राष्ट्रीय शोक के सम्मान में सभी आधिकारिक मनोरंजन कार्यक्रम भी स्थगित कर दिए गए। भारत और कतर के दशकों पुराने मजबूत संबंधों को देखते हुए इस निर्णय को दोनों देशों के बीच गहरे विश्वास और मित्रता का प्रतीक माना जा रहा है।

    कतर के पूर्व अमीर शेख हमद बिन खलीफा अल थानी का रविवार को निधन हो गया था। उनके निधन की सूचना मिलते ही भारत सरकार ने राष्ट्रीय शोक की घोषणा की। नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन पर तिरंगा आधा झुका रहा जबकि मुंबई के मंत्रालय और केरल के विभिन्न सरकारी भवनों पर भी राष्ट्रीय ध्वज सम्मान स्वरूप आधा झुकाया गया। विदेश मंत्रालय की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार पूरे देश में ध्वज संहिता का पालन सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश जारी किए गए।

    केरल में इस शोक का विशेष महत्व देखने को मिला क्योंकि राज्य का बड़ा प्रवासी समुदाय लंबे समय से कतर और अन्य खाड़ी देशों में कार्यरत है। कतर के साथ केरल के आर्थिक सामाजिक और सांस्कृतिक संबंध काफी मजबूत माने जाते हैं। राज्य सरकार ने सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए कि अपने अधिकार क्षेत्र के प्रत्येक सरकारी कार्यालय और संस्थान में राष्ट्रीय ध्वज आधा झुकाने की व्यवस्था सुनिश्चित करें और राष्ट्रीय शोक से जुड़े सभी प्रोटोकॉल का पालन कराया जाए।

    विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय शोक के दौरान पूरे भारत में उन सभी सरकारी और सार्वजनिक भवनों पर तिरंगा आधा झुका रहेगा जहां नियमित रूप से ध्वज फहराया जाता है। साथ ही इस दिन किसी भी प्रकार के आधिकारिक सांस्कृतिक या मनोरंजन कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जाएंगे ताकि दिवंगत नेता के प्रति सम्मान व्यक्त किया जा सके।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शेख हमद बिन खलीफा अल थानी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शेख हमद दूरदर्शी नेतृत्व वाले ऐसे शासक थे जिन्होंने कतर को विकास समृद्धि और वैश्विक पहचान की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। प्रधानमंत्री ने उन्हें भारत का सच्चा मित्र बताते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में दोनों देशों के संबंधों को नई मजबूती मिली और सहयोग के अनेक नए रास्ते खुले।

    जानकारी के अनुसार केंद्रीय संसदीय कार्य और अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू भारत सरकार की ओर से शोक संवेदनाएं व्यक्त करने के लिए जल्द ही कतर जा सकते हैं। उल्लेखनीय है कि शेख हमद बिन खलीफा अल थानी ने वर्ष 1995 से 2013 तक कतर का नेतृत्व किया और बाद में सत्ता अपने पुत्र शेख तमीम बिन हमद अल थानी को सौंप दी। उनके कार्यकाल को कतर के आधुनिक विकास और वैश्विक प्रभाव के विस्तार का महत्वपूर्ण दौर माना जाता है।

  • अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग पर ट्रस्ट और सरकारों को नोटिस

    अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग पर ट्रस्ट और सरकारों को नोटिस


    नई दिल्ली । अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं के दान और चढ़ावे के कथित दुरुपयोग से जुड़े मामले ने अब देश की सबसे बड़ी अदालत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इसके साथ ही अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से गठित विशेष जांच दल यानी एसआईटी को अब तक की जांच की विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। अदालत का यह कदम इस मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    सुप्रीम कोर्ट में दायर कई जनहित याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए नकद दान और बहुमूल्य चढ़ावे के प्रबंधन में वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। याचिकाओं में मांग की गई है कि पूरे मामले की जांच अदालत की निगरानी में कराई जाए ताकि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस संवेदनशील विषय में किसी तरह का संदेह न रहे। इन याचिकाओं को राष्ट्रीय जनता दल के सांसद सुधाकर सिंह अधिवक्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी अधिवक्ता अजय कुमार राय अधिवक्ता दिनेश कुमार यादव तथा हिन्दू धर्म परिषद की ओर से दायर किया गया है।

    मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना भी शामिल हैं इस मामले की सुनवाई कर रही है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि राम मंदिर निर्माण के लिए देश ने 123 वर्षों का लंबा संघर्ष देखा लेकिन अब मंदिर में आए दान और चढ़ावे को लेकर नए विवाद खड़े हो गए हैं। अदालत को यह भी बताया गया कि जांच के लिए गठित एसआईटी के पास मौजूद इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है ताकि किसी भी तरह के प्रमाण नष्ट न हो सकें।

    सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में पक्ष रखा। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार उत्तर प्रदेश सरकार और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब किया। अदालत ने एसआईटी को निर्देश दिया कि वह जांच की प्रगति से संबंधित स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करे। इस पर सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में प्रस्तुत की जाएगी। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई अगले सोमवार को तय कर दी है।

    यह पूरा मामला राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान और बहुमूल्य चढ़ावे के कथित दुरुपयोग से जुड़ा है। आरोप सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को विशेष जांच दल का गठन किया था। अब तक इस मामले में आठ लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। वहीं जांच के बीच ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा अपने पदों से इस्तीफा दे चुके हैं।

    सुप्रीम कोर्ट की सक्रियता के बाद इस मामले पर पूरे देश की नजरें टिक गई हैं। अब जांच रिपोर्ट और अगली सुनवाई यह तय करेगी कि आरोपों में कितना दम है और आगे कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ेगी। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में अदालत का हर कदम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • झारखंडः गुमला में पंचायत ने बच्ची से दुष्कर्म का मामला दबाकर आरोपी से वसूला जुर्माना और कर ली शराब-मटन की पार्टी

    झारखंडः गुमला में पंचायत ने बच्ची से दुष्कर्म का मामला दबाकर आरोपी से वसूला जुर्माना और कर ली शराब-मटन की पार्टी


    नई दिल्ली । झारखंड के गुमला जिले से इंसानियत को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है। जिले के घाघरा थाना क्षेत्र स्थित पलमा गांव में तीन साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म की शर्मनाक घटना के बाद गांव की पंचायत ने मामले को रफा-दफा करने के लिए आरोपी से तत्काल 20 हजार का जुर्माना वसूला और इससे शराब एवं मटन पार्टी की।

    इसकी जानकारी मिलने पर पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दुष्कर्म के आरोपी को गिरफ्तार किया। अब गैरकानूनी पंचायत बुलाने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की तैयारी चल रही है। घटना बीते शनिवार, 11 जुलाई 2026 की है, जब पलमा गांव के ही रहने वाले दरिंदे सुनील लोहरा ने तीन वर्षीय मासूम बच्ची को अपनी हवस का शिकार बनाया और उसके साथ बर्बरता की।

    जब इस घटना की जानकारी गांव के कुछ रसूखदारों को लगी, तो उन्होंने पुलिस को सूचना देने या पीड़ित परिवार को कानूनी न्याय दिलाने के बजाय, रविवार को गांव में ही एक गुपचुप पंचायत बुला ली। इस पंचायत का मुख्य उद्देश्य पीड़ित को न्याय दिलाना नहीं, बल्कि पूरे मामले को रफा-दफा करना था। पंचायत में बैठे दबंगों ने अमानवीयता की सारी हदें पार करते हुए मासूम के जख्मों की कीमत लगा दी और आरोपी सुनील लोहरा पर एक लाख रुपये का आर्थिक जुर्माना ठोकने का फरमान सुना दिया।

    दबंगों ने आरोपी से मौके पर ही 20 हजार रुपये नकद वसूल लिए और शेष 80 हजार रुपये की भारी-भरकम राशि एक सप्ताह के भीतर हर हाल में चुकाने की सख्त मोहलत दे दी। लेकिन, संवेदनहीनता का सबसे वीभत्स रूप इसके बाद देखने को मिला। पीड़ित परिवार और तड़पती हुई मासूम बच्ची के चीख-पुकार को पूरी तरह दरकिनार कर, पंचायत के इन कथित पंचों ने आरोपी से मौके पर वसूले गए उसी 20 हजार रुपये से गांव में ही मटन और शराब का बंदोबस्त किया।

    इसके बाद दुष्कर्म के पैसों से इन रसूखदारों ने जमकर जश्न मनाया और मटन-शराब की पार्टी की। इस बीच, गांव के ही एक सजग नागरिक ने हिम्मत दिखाई और गुप्त रूप से घाघरा थाना पुलिस को पूरे घटनाक्रम की सटीक सूचना दे दी। पुलिस प्रशासन तुरंत हरकत में आया और आनन-फानन में घाघरा थाना पुलिस की एक विशेष टीम ने पलमा गांव में भारी दबिश देकर छापेमारी की। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी सुनील लोहरा को उसके ठिकाने से धर दबोचा और उसे सलाखों के पीछे भेज दिया।

    आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट और दुष्कर्म की अत्यंत गंभीर व गैर-जमानती धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस पीड़ित परिवार पर केस दबाने का दबाव बनाने, साक्ष्यों को नष्ट करने और जघन्य सामाजिक अपराध को छुपाने का षड्यंत्र रचने के आरोप में पंचायत के आयोजकों, उसमें शामिल दबंगों और शराब पार्टी करने वालों की पहचान में जुटी है।

  • सरकारी नौकरी का बड़ा अवसर परमाणु ऊर्जा परियोजना में 255 टेक्नीशियन पदों पर भर्ती आवेदन 15 जुलाई से

    सरकारी नौकरी का बड़ा अवसर परमाणु ऊर्जा परियोजना में 255 टेक्नीशियन पदों पर भर्ती आवेदन 15 जुलाई से


    नई दिल्ली । सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक शानदार अवसर सामने आया है। न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट ने स्टाइपेंडरी ट्रेनी और टेक्नीशियन के कुल 255 पदों पर भर्ती के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। यह भर्ती तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले स्थित देश के सबसे बड़े परमाणु ऊर्जा केंद्र के लिए की जाएगी। इच्छुक और पात्र उम्मीदवार 15 जुलाई से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आवेदन प्रक्रिया 4 अगस्त की शाम चार बजे तक जारी रहेगी।

    भर्ती के तहत विभिन्न आरक्षित और अनारक्षित वर्गों के लिए अलग अलग पद निर्धारित किए गए हैं। कुल 255 रिक्तियों में अनुसूचित जाति के लिए 54 पद अनुसूचित जनजाति के लिए 19 पद अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 77 पद आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 20 पद तथा सामान्य वर्ग के लिए 85 पद शामिल हैं। इसके अलावा दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए भी 11 पद आरक्षित रखे गए हैं जिससे अधिक से अधिक योग्य उम्मीदवारों को अवसर मिल सके।

    ऑनलाइन आवेदन केवल एनपीसीआईएल की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे। उम्मीदवारों को निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना पंजीकरण और आवेदन प्रक्रिया पूरी करनी होगी। अंतिम तिथि के बाद किसी भी प्रकार का आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा इसलिए अभ्यर्थियों को समय रहते आवेदन करने की सलाह दी गई है।

    शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो प्लांट ऑपरेटर पद के लिए अभ्यर्थी के पास विज्ञान संकाय से बारहवीं पास होना जरूरी है। फिजिक्स केमिस्ट्री और गणित विषयों के साथ कम से कम 50 प्रतिशत अंक होना अनिवार्य है। वहीं इलेक्ट्रॉनिक्स मैकेनिक इंस्ट्रूमेंट मैकेनिक इलेक्ट्रीशियन फिटर टर्नर मशीनिस्ट और वेल्डर जैसे ट्रेड के लिए उम्मीदवार के पास दसवीं में विज्ञान और गणित में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक तथा संबंधित ट्रेड में दो वर्षीय आईटीआई प्रमाणपत्र होना चाहिए। जिन ट्रेड में आईटीआई की अवधि दो वर्ष से कम है वहां एक वर्ष का संबंधित कार्य अनुभव भी आवश्यक होगा। सभी उम्मीदवारों के लिए दसवीं स्तर तक अंग्रेजी विषय पढ़ा होना भी अनिवार्य रखा गया है।

    आयु सीमा के अनुसार आवेदन करने वाले उम्मीदवारों की न्यूनतम उम्र 18 वर्ष और अधिकतम उम्र 24 वर्ष निर्धारित की गई है। आरक्षित वर्गों के अभ्यर्थियों को केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट प्रदान की जाएगी।

    चयनित उम्मीदवारों को दो वर्ष के प्रशिक्षण कार्यक्रम से गुजरना होगा। प्रशिक्षण के पहले वर्ष में प्रति माह 20 हजार रुपये और दूसरे वर्ष में 22 हजार रुपये का स्टाइपेंड दिया जाएगा। इसके अलावा एक बार तीन हजार रुपये का बुक अलाउंस भी मिलेगा। प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा होने के बाद अभ्यर्थियों को टेक्नीशियन बी के पद पर नियुक्त किया जाएगा। इस पद पर सातवें वेतन आयोग के अनुसार लेवल तीन में 21 हजार 700 रुपये का मूल वेतन मिलेगा। इसके साथ महंगाई भत्ता और अन्य सरकारी भत्तों का लाभ भी दिया जाएगा।

    एनपीसीआईएल की यह भर्ती तकनीकी क्षेत्र में करियर बनाने वाले युवाओं के लिए बेहतरीन अवसर मानी जा रही है। आकर्षक वेतन प्रशिक्षण के दौरान आर्थिक सहायता और भविष्य में स्थायी सरकारी नौकरी की संभावना इस भर्ती को और अधिक महत्वपूर्ण बनाती है। इच्छुक उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि आवेदन करने से पहले आधिकारिक अधिसूचना को ध्यानपूर्वक पढ़ लें और सभी आवश्यक दस्तावेज पहले से तैयार रखें ताकि आवेदन प्रक्रिया में किसी प्रकार की परेशानी न हो।

  • स्वास्थ्य सेवाओं में बदल रहा भारत का भविष्य राजनाथ बोले इलाज के साथ रोकथाम और रिसर्च पर भी बराबर जोर

    स्वास्थ्य सेवाओं में बदल रहा भारत का भविष्य राजनाथ बोले इलाज के साथ रोकथाम और रिसर्च पर भी बराबर जोर


    नई दिल्ली । भारत का स्वास्थ्य क्षेत्र तेजी से बदलाव के दौर से गुजर रहा है और अब सरकार का फोकस केवल बीमारियों के इलाज तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि उनकी रोकथाम पर भी समान रूप से दिया जा रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में कहा कि बीते वर्षों में देश की स्वास्थ्य व्यवस्था अधिक आत्मनिर्भर सुलभ किफायती आधुनिक और जनकेंद्रित बनी है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा शिक्षा अनुसंधान और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार में अभूतपूर्व प्रगति हुई है जिससे देश वैश्विक स्वास्थ्य क्षेत्र में नई पहचान बना रहा है।

    राजनाथ सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में स्वास्थ्य सेवाओं में व्यापक बदलाव देखने को मिला है। वर्ष 2017 से पहले राज्य में केवल 17 मेडिकल कॉलेज थे जबकि अब उनकी संख्या बढ़कर 81 हो चुकी है। इसके अलावा प्रदेश में दो एम्स भी संचालित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश अब हर जिले में मेडिकल कॉलेज की परिकल्पना से भी आगे निकल चुका है और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में नए मानक स्थापित कर रहा है।

    उन्होंने कहा कि बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए पर्याप्त संख्या में डॉक्टरों और विशेषज्ञों की उपलब्धता बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य से सरकार ने मेडिकल शिक्षा का बड़े पैमाने पर विस्तार किया है। आज भारत जीन चिकित्सा परमाणु चिकित्सा और अन्य आधुनिक तकनीकों के जरिए स्वास्थ्य संबंधी वैश्विक चुनौतियों का स्वदेशी समाधान तैयार कर रहा है। उन्होंने बताया कि कैंसर के इलाज में उपयोगी सीएआर टी सेल थेरेपी का दुनिया का सबसे सस्ता संस्करण भारत ने विकसित किया है जिससे यह उपचार अब आम लोगों की पहुंच में भी आ रहा है।

    रक्षा मंत्री ने चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हीमोफीलिया के इलाज के लिए स्वदेशी जीन थेरेपी का सफल परीक्षण किया जा चुका है। पुणे के वैज्ञानिकों ने स्तन कैंसर के उपचार के लिए आधुनिक नैनो दवा विकसित की है। उन्होंने यह भी बताया कि तीन दशक बाद देश में पेनिसिलिन जी का उत्पादन दोबारा शुरू हुआ है। उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना के माध्यम से चिकित्सा उपकरणों के स्वदेशी निर्माण को भी नई गति मिली है। इसी वर्ष भारत ने निमोनिया के इलाज में उपयोगी पहली स्वदेशी मैक्रोलाइड एंटीबायोटिक नैफिथ्रोमाइसिन भी विकसित की है।

    राजनाथ सिंह ने कहा कि वर्ष 2023 में भारत ने पहली स्वदेशी एमआरआई मशीन विकसित कर स्वास्थ्य क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की। उन्होंने बताया कि देशभर में 19 हजार से अधिक जन औषधि केंद्रों के माध्यम से लोगों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाइयां उपलब्ध कराई जा रही हैं जबकि आयुष्मान भारत योजना के जरिए करोड़ों लोगों को मुफ्त इलाज का लाभ मिल रहा है। पिछले बारह वर्षों में स्वास्थ्य क्षेत्र में हुए बदलावों ने आम नागरिकों तक बेहतर चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त किया है।

    रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल इलाज उपलब्ध कराना नहीं बल्कि ऐसी स्वास्थ्य व्यवस्था तैयार करना है जो हर नागरिक के लिए सुलभ किफायती और गुणवत्तापूर्ण हो। उन्होंने अंगदान को मानवता की सबसे बड़ी सेवा बताते हुए कहा कि डॉक्टरों की जिम्मेदारी केवल इलाज तक सीमित नहीं है बल्कि समाज में जागरूकता फैलाने की भी है ताकि अंगदान को लेकर फैली भ्रांतियां दूर हो सकें।

    उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता जीन संपादन कृत्रिम जीव विज्ञान और सटीक चिकित्सा जैसी नई तकनीकें स्वास्थ्य क्षेत्र का भविष्य तय कर रही हैं। ऐसे में डॉक्टरों को लगातार नई तकनीकों और शोध से खुद को अपडेट रखना होगा। उन्होंने नवस्नातक चिकित्सकों से आह्वान किया कि वे केवल डिग्री हासिल करने तक सीमित न रहें बल्कि सेवा समर्पण और संवेदनशीलता के साथ समाज के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।

  • अमरनाथ यात्रियों से भरे काफिले में बड़ा हादसा जम्मू श्रीनगर हाईवे पर चार वाहन भिड़े 18 श्रद्धालु घायल

    अमरनाथ यात्रियों से भरे काफिले में बड़ा हादसा जम्मू श्रीनगर हाईवे पर चार वाहन भिड़े 18 श्रद्धालु घायल

    नई दिल्ली । अमरनाथ यात्रा के दौरान सोमवार को जम्मू श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर बड़ा सड़क हादसा हो गया। रामबन जिले के चंदरकोट क्षेत्र में यात्रा काफिले के साथ चल रहे चार वाहन आपस में टकरा गए जिससे अफरा तफरी मच गई। हादसे में 18 अमरनाथ श्रद्धालु घायल हो गए। राहत की बात यह रही कि सभी को मामूली चोटें आई हैं और उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। पुलिस और प्रशासन की टीम ने मौके पर पहुंचकर तुरंत राहत एवं बचाव अभियान चलाया और सभी घायलों को रामबन जिला अस्पताल पहुंचाया।

    जानकारी के अनुसार हादसा चंदरकोट स्थित लंगर स्थल के पास उस समय हुआ जब पहलगाम की ओर जा रहे अमरनाथ यात्रा काफिले में शामिल वाहन एक दूसरे से टकरा गए। सबसे पहले जम्मू कश्मीर सड़क परिवहन निगम की एक बस आगे चल रही दूसरी एसआरटीसी बस से जा भिड़ी। टक्कर इतनी तेज थी कि दूसरी बस आगे चल रही कार से टकरा गई और कार ने सामने मौजूद एक निजी बस को जोरदार टक्कर मार दी। देखते ही देखते चारों वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गए और यात्रियों में चीख पुकार मच गई।

    हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंच गईं। घायलों को तत्काल एंबुलेंस के जरिए जिला अस्पताल रामबन ले जाया गया जहां उनका उपचार शुरू किया गया। अधिकारियों ने बताया कि किसी भी यात्री की हालत गंभीर नहीं है और सभी खतरे से बाहर हैं।

    अब तक दस घायलों की पहचान हो चुकी है। इनमें उत्तर प्रदेश के कानपुर निवासी हर्ष राजपूत विशाल गुप्ता और पंकज सुवनकर शामिल हैं। महाराष्ट्र के यवतमाल निवासी सुहास जीवन मोवाडे भी हादसे में घायल हुए हैं। राजस्थान के श्रीगंगानगर निवासी भारत भूषण और विनोद कुमार को भी चोटें आई हैं। इसके अलावा राजस्थान के बीकानेर की किरण पंजाब की सीमा रानी राजस्थान के पवन कुमार और गंगा सिन्हा भी घायलों में शामिल हैं। शेष आठ यात्रियों की पहचान की प्रक्रिया जारी है।

    दुर्घटना के कारण जम्मू श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित रहा। पुलिस ने क्षतिग्रस्त वाहनों को सड़क से हटाकर मार्ग को दोबारा सुचारु कराया। हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है और यह पता लगाया जा रहा है कि दुर्घटना चालक की लापरवाही से हुई या किसी तकनीकी खराबी की वजह से।

    गौरतलब है कि इस वर्ष श्री अमरनाथ यात्रा तीन जुलाई से शुरू हुई है और यह 28 अगस्त तक चलेगी। यात्रा के दौरान देशभर से लाखों श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए जम्मू कश्मीर पहुंच रहे हैं। अब तक दो लाख पैंतालीस हजार से अधिक श्रद्धालु पवित्र गुफा में दर्शन कर चुके हैं। प्रशासन की ओर से सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए गए हैं लेकिन इस हादसे ने यात्रा मार्ग पर सुरक्षित संचालन की चुनौती को एक बार फिर सामने ला दिया है।

  • "आओ, अब घर लौट चलें": गुजरात में 25 लोगों ने की शारदापीठ शंकराचार्य की प्रेरणा से घर वापिसी

    "आओ, अब घर लौट चलें": गुजरात में 25 लोगों ने की शारदापीठ शंकराचार्य की प्रेरणा से घर वापिसी


    गुजरात । गुजरात के आदिवासी बहुल छोटा उदेपुर जिले में धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन ‘स्वधर्मानयन’ अभियान को एक नई ऊर्जा मिली है। द्वारका शारदापीठ द्वारा संचालित श्री आनंद वर्धन आश्रम के उद्घाटन अवसर पर 25 आदिवासी एवं वनवासी भाई-बहनों ने जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानन्द सरस्वती के सान्निध्य में गंगाजल ग्रहण कर भगवान श्रीराम का मंत्र लिया और स्वेच्छा से सनातन हिंदू धर्म अपनाने का संकल्प व्यक्त किया। शारदापीठ की ओर से बताया गया कि हमारे लिए यह धार्मिक अनुष्ठान अपनी सांस्कृतिक जड़ों से पुनः जुड़ने का अभियान है।

    उल्‍लेखनीय है कि 11 जुलाई 2026 को गुजरात के छोटा उदेपुर जिले के ग्राम वासणा (कोषिन्द्रा) में द्वारका शारदापीठ द्वारा संचालित श्री आनंद वर्धन आश्रम का उद्घाटन द्वारकाशारदापीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानन्द सरस्वती महाराज के करकमलों से संपन्न हुआ। आदिवासी एवं वनवासी समाज के बीच स्थापित यह आश्रम धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ सामाजिक एवं सांस्कृतिक जागरण का भी केंद्र बनेगा।


    शारदापीठ का कहना है कि इस आश्रम के माध्यम से क्षेत्र के लोगों तक सनातन धर्म की शिक्षाएं, भारतीय संस्कृति, वैदिक परंपराएं तथा नैतिक जीवन मूल्यों को व्यवस्थित रूप से पहुंचाया जाएगा। इसके साथ ही स्थानीय समाज में संस्कार, शिक्षा, सेवा और सामाजिक समरसता से जुड़े कार्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे। आश्रम के उद्घाटन समारोह का सबसे महत्वपूर्ण क्षण वह रहा, जब 25 आदिवासी एवं वनवासी भाई-बहनों ने सार्वजनिक रूप से गंगाजल ग्रहण किया तथा शंकराचार्य स्वामी सदानन्द सरस्वती से भगवान श्रीराम का मंत्र ग्रहण कर सनातन हिंदू धर्म अपनाने का संकल्प लिया।

    इस अवसर पर उन्होंने यह घोषणा भी की कि वे अपने जीवन में सनातन धर्म की परंपराओं का पालन करेंगे तथा अपनी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध रहेंगे। आयोजन से जुड़े लोगों के अनुसार यह पूरी प्रक्रिया स्वेच्छा से संपन्न हुई और इसमें शामिल सभी लोगों ने स्वयं अपनी इच्छा से यह निर्णय लिया।


    ‘स्वधर्मानयन’ को स्थायी आधार देगा नया आश्रम

    अपने उद्बोधन में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानन्द सरस्वती महाराज ने कहा कि वे पिछले कई वर्षों से गुजरात के जनजाति एवं वनवासी क्षेत्रों में ‘स्वधर्मानयन यात्रा’ के माध्यम से लगातार जनजागरण कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वासणा ग्राम में आनंद वर्धन आश्रम की स्थापना इस अभियान को नई दिशा और स्थायी आधार प्रदान करेगी।

    उन्होंने कहा कि अब यह आश्रम धार्मिक अनुष्ठानों के अतिरिक्‍त गांव-गांव तक पहुंचने वाले जागरण अभियान का केंद्र बनेगा। उन्होंने कहा कि भविष्य में वे अधिक व्यापक स्तर पर ग्रामीण क्षेत्रों का भ्रमण करेंगे और लोगों को अपनी सांस्कृतिक एवं धार्मिक परंपराओं के महत्व से परिचित कराएंगे।


    शंकराचार्य सदानन्द सरस्वती महाराज ने कहा, “किसी भी समाज की पहचान उसकी संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों से होती है। यदि समाज अपनी जड़ों से कट जाता है तो उसकी सांस्कृतिक पहचान भी धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगती है, इसलिए अपनी परंपराओं का संरक्षण और उनका पालन प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है।”

    गांव-गांव तक पहुंच रहा है ‘स्वधर्मानयन’ का संदेश

    द्वारका शारदापीठ के अनुसार ‘स्वधर्मानयन’ अभियान का उद्देश्य किसी प्रकार भी प्रकार के विवाद में न पड़ते हुए उन लोगों को उनकी सांस्कृतिक एवं धार्मिक विरासत से पुनः जोड़ना है, जोकि विभिन्न कारणों से अपनी मूल परंपराओं से दूर हो गए हैं। इसी उद्देश्य से पिछले कई वर्षों से गुजरात के आदिवासी अंचलों में नियमित रूप से ग्राम सभाएं, धार्मिक प्रवचन, सत्संग, संस्कार शिविर, यज्ञ तथा जनजागरण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को भारतीय संस्कृति, वैदिक परंपरा, परिवार व्यवस्था, सामाजिक समरसता और सनातन जीवन पद्धति के विषय में जानकारी दी जाती है।


    शारदापीठ का मानना है कि समाज में स्थायी परिवर्तन लाने के लिए धार्मिक अनुष्ठानों के साथ आवश्‍यक यह भी है कि निरंतर संवाद, शिक्षा और सेवा कार्यों को भी माध्यम बनाया जाए। इसी कारण “स्वधर्मानयन अभियान” को सेवा, संस्कार और सांस्कृतिक जागरण के साथ जोड़ा गया है।

    पहले भी अनेक स्थानों पर हुए हैं घर वापसी के कार्यक्रम

    द्वारका शारदापीठ और उसके शंकराचार्यों द्वारा घर वापसी अथवा ‘स्वधर्मानयन’ का अभियान पिछले कई वर्षों से निरंतर चलाया जा रहा है। विशेष रूप से गुजरात, झारखण्‍ड, छत्‍तीसगढ़, मध्‍यप्रदेश समेत कई राज्‍यों के आदिवासी और वनवासी क्षेत्रों में समय-समय पर ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं, जिनमें अनेक परिवारों ने स्वेच्छा से पुनः सनातन परंपरा अपनाने की घोषणा की।

    यहां गुजरात के संदर्भ में ज्ञात हो कि शारदापीठ से जुड़े संतों ने वर्षों से दक्षिण गुजरात, छोटा उदेपुर, पंचमहल, दाहोद तथा अन्य आदिवासी क्षेत्रों में व्यापक संपर्क अभियान चलाया है। इन अभियानों के दौरान गांव-गांव जाकर धार्मिक सभाएं आयोजित की गईं, लोगों से संवाद स्थापित किया गया तथा भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा के विषय में जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया गया।


    इसके अतिरिक्त धार्मिक संस्कार शिविरों, रामकथा, गीता प्रवचन, गौ-सेवा, शिक्षा सहायता, चिकित्सा शिविर और सामाजिक सेवा गतिविधियों के माध्यम से भी स्थानीय समाज के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखा गया। शारदापीठ का दावा है कि इन प्रयासों के परिणामस्वरूप अनेक परिवार अपनी पारंपरिक धार्मिक पहचान के साथ पुनः जुड़े हैं।

    नवस्थापित आनंद वर्धन आश्रम में भी भविष्य में संस्कृत शिक्षा, धार्मिक अध्ययन, बच्चों के संस्कार वर्ग, महिलाओं के सशक्तिकरण कार्यक्रम, योग, आध्यात्मिक प्रशिक्षण तथा सामाजिक सेवा गतिविधियों के संचालन की योजना बताई गई है। आश्रम के माध्यम से स्थानीय युवाओं को भारतीय संस्कृति और राष्ट्र निर्माण से जुड़े विषयों पर भी प्रेरित किया जाएगा।

    शंकराचार्य का आह्वान- ‘अपने धर्म और संस्कृति को जानिए’

    अपने संबोधन में शंकराचार्य स्वामी सदानन्द सरस्वती ने कहा, “समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपने धर्म, संस्कृति और इतिहास का ज्ञान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि नई पीढ़ी अपनी जड़ों को समझेगी, तभी वह अपनी सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रख सकेगी।”

    उन्होंने कहा है- “आने वाले समय में स्वधर्मानयन यात्रा को और अधिक व्यापक बनाया जाएगा। इसके अंतर्गत गुजरात के दूरस्थ आदिवासी और वनवासी क्षेत्रों में लगातार प्रवास, धार्मिक संवाद और जनजागरण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। आनंद वर्धन आश्रम इस पूरे अभियान का प्रमुख केंद्र बनेगा और यहां से सेवा, संस्कार तथा सांस्कृतिक जागरण की गतिविधियों को नई गति मिलेगी।”

    उन्होंने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य लोगों के भीतर अपनी परंपराओं के प्रति आत्मविश्वास जगाना, सामाजिक एकता को मजबूत करना तथा भारतीय संस्कृति के शाश्वत मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाना है। इसी संकल्प के साथ शारदापीठ आने वाले वर्षों में अपने स्वधर्मानयन अभियान को और व्यापक स्वरूप देने की तैयारी कर रहा है।