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  • पाकिस्तान की शानदार वापसी, स्पिन आक्रमण के दम पर विदेशी धरती पर टेस्ट जीत दर्ज

    पाकिस्तान की शानदार वापसी, स्पिन आक्रमण के दम पर विदेशी धरती पर टेस्ट जीत दर्ज


    नई दिल्ली। पाकिस्तान क्रिकेट टीम ने आखिरकार विदेशी धरती पर जीत का लंबा इंतजार खत्म कर दिया है। त्रिनिदाद के पोर्ट ऑफ स्पेन स्थित क्वींस पार्क ओवल मैदान पर खेले गए दूसरे टेस्ट मैच में पाकिस्तान ने वेस्टइंडीज को आठ विकेट से हराकर न सिर्फ शानदार जीत दर्ज की बल्कि लगभग तीन साल से चले आ रहे विदेशी सरजमीं पर हार के सिलसिले को भी समाप्त कर दिया। इस जीत के साथ पाकिस्तान ने दो मैचों की टेस्ट सीरीज 1 1 से बराबर कर सम्मानजनक वापसी की।

    बाबर आजम को दोबारा टेस्ट टीम की कमान मिलने के बाद यह उनकी पहली विदेशी सीरीज थी और उन्होंने शुरुआत ही यादगार जीत के साथ की। इससे पहले पाकिस्तान ने घर से बाहर आखिरी टेस्ट जीत जुलाई 2023 में श्रीलंका के खिलाफ हासिल की थी। इसके बाद टीम लगातार आठ विदेशी टेस्ट मुकाबले हार चुकी थी। ऐसे में वेस्टइंडीज के खिलाफ मिली यह जीत टीम के आत्मविश्वास के लिए बेहद अहम मानी जा रही है।

    मैच की शुरुआत में वेस्टइंडीज ने पहली पारी में 344 रन बनाए और पाकिस्तान के सामने मजबूत चुनौती पेश की। जवाब में पाकिस्तान ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 387 रन बनाए और 43 रन की महत्वपूर्ण बढ़त हासिल कर ली। पहली पारी में मिली यही बढ़त बाद में मैच का निर्णायक मोड़ साबित हुई।

    दूसरी पारी में वेस्टइंडीज की बल्लेबाजी पाकिस्तान के स्पिन आक्रमण के सामने पूरी तरह बिखर गई। अली उस्मान और साजिद खान ने शानदार गेंदबाजी करते हुए चार चार विकेट अपने नाम किए। दोनों स्पिनरों ने वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया और पूरी टीम महज 117 रन पर सिमट गई। पाकिस्तान के गेंदबाजों ने अनुशासित लाइन और लेंथ के साथ लगातार दबाव बनाए रखा जिससे मेजबान टीम वापसी नहीं कर सकी।

    जीत के लिए मिले 75 रन के आसान लक्ष्य का पीछा करने उतरी पाकिस्तान की शुरुआत हालांकि अच्छी नहीं रही। इमाम उल हक केवल 9 रन बनाकर पवेलियन लौट गए जबकि अजान अवैस भी 9 रन ही बना सके। शुरुआती दो विकेट जल्दी गिरने के बाद कप्तान बाबर आजम और अब्दुल्ला शफीक ने जिम्मेदारी संभाली और किसी भी तरह का जोखिम उठाए बिना टीम को लक्ष्य तक पहुंचा दिया।

    अब्दुल्ला शफीक ने 51 गेंदों में नाबाद 24 रन बनाए जबकि कप्तान बाबर आजम भी 24 रन बनाकर अंत तक टिके रहे। दोनों बल्लेबाजों ने संयमित खेल दिखाते हुए पाकिस्तान को आठ विकेट से यादगार जीत दिलाई। यह जीत सिर्फ एक टेस्ट मैच की सफलता नहीं बल्कि विदेशी परिस्थितियों में टीम के आत्मविश्वास की वापसी का संकेत भी मानी जा रही है।

    पहले टेस्ट में 90 रन से मिली हार के बाद पाकिस्तान पर सीरीज गंवाने का खतरा मंडरा रहा था लेकिन दूसरे मुकाबले में टीम ने हर विभाग में शानदार प्रदर्शन करते हुए जोरदार वापसी की। बल्लेबाजों ने पहली पारी में मजबूत स्कोर खड़ा किया तो गेंदबाजों ने दूसरी पारी में मैच पूरी तरह अपने नाम कर लिया।

    इस जीत से बाबर आजम की कप्तानी को भी मजबूती मिली है और आने वाले विदेशी दौरों के लिए पाकिस्तान टीम का मनोबल काफी बढ़ा है। लंबे समय बाद विदेशी धरती पर मिली यह सफलता टीम के लिए नई शुरुआत का संकेत मानी जा रही है।

  • गोल्ड मेडल की असली सच्चाई आई सामने, जानें किस धातु से बनता है स्वर्ण पदक और क्यों चढ़ाई जाती है सोने की परत

    गोल्ड मेडल की असली सच्चाई आई सामने, जानें किस धातु से बनता है स्वर्ण पदक और क्यों चढ़ाई जाती है सोने की परत

    नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में जब कोई एथलीट स्वर्ण पदक जीतता है, तो उसकी चमक पूरे देश को गौरवान्वित करती है। आम तौर पर लोगों की धारणा यही रहती है कि यह पदक पूरी तरह से ठोस सोने का बना होता है। हालांकि वास्तविक सच इससे काफी अलग है। आधुनिक ओलंपिक और बड़ी वैश्विक खेल प्रतियोगिताओं में दिए जाने वाले गोल्ड मेडल पूरी तरह सोने के नहीं होते, बल्कि इन्हें खास अंतरराष्ट्रीय मानकों और वैज्ञानिक प्रक्रियाओं के तहत तैयार किया जाता है।

    खेल नियमों के अनुसार एक स्वर्ण पदक का मुख्य हिस्सा चांदी का बना होता है। किसी भी मानक गोल्ड मेडल में कम से कम 92.5 प्रतिशत शुद्ध चांदी का उपयोग किया जाता है। इसके ऊपरी हिस्से पर ही केवल असली सोने की एक पतली परत चढ़ाई जाती है। यही परत पदक को उसकी खास सुनहरी चमक और पहचान प्रदान करती है, जिससे यह देखने में पूरी तरह सोने का प्रतीत होता है।

    अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के नियमों के तहत एक स्वर्ण पदक का कुल वजन सामान्यतः 500 ग्राम के आसपास रखा जाता है। इतने वजन वाले पदक में मात्र 6 ग्राम शुद्ध सोना होना अनिवार्य होता है, जो ऊपर से कोटेड होता है। बाकी का पूरा हिस्सा उच्च गुणवत्ता वाली चांदी से ही निर्मित होता है। यदि पूरा पदक शुद्ध सोने से तैयार किया जाए, तो इसकी लागत काफी अधिक बढ़ जाएगी और यह व्यावहारिक नहीं रहेगा।

    शुद्ध सोना एक बेहद मुलायम धातु मानी जाती है, जिससे यदि पूरा मेडल बनाया जाए तो उसके आसानी से मुड़ने या खराब होने का जोखिम बना रहता है। चांदी अधिक मजबूत, टिकाऊ और लंबे समय तक सुरक्षित रहने वाली धातु है। इसी कारण चांदी के आधार पर सोने की कोटिंग करना सबसे उपयुक्त और टिकाऊ विकल्प माना जाता है।

    अगर इतिहास की बात करें तो वर्ष 1912 के स्टॉकहोम ओलंपिक तक खिलाड़ियों को पूरी तरह सोने के बने मेडल ही दिए जाते थे। इसके बाद प्रथम विश्व युद्ध के दौरान और बढ़ती लागत के चलते नियमों में बदलाव किया गया। वर्तमान व्यवस्था में केवल सोने की परत चढ़ाने का नियम लागू है, जिससे पदकों की गुणवत्ता और मजबूती दोनों बनी रहती है।

    किसी भी खिलाड़ी के लिए स्वर्ण पदक की असली कीमत उसकी धातु की बाजार दर से नहीं तय होती। यह पदक वर्षों की कड़ी मेहनत, त्याग, अनुशासन और अपने देश को शीर्ष पर पहुंचाने के गौरव का प्रतीक होता है। यही ऐतिहासिक और भावनात्मक सम्मान इस पदक को दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित खेल पुरस्कार बनाता है।

  • रविचंद्रन अश्विन को पांचवें नंबर पर रखना पड़ा भारी, अर्शदीप सिंह बोले पर्सनली मैसेज कर मांगूंगा माफी

    रविचंद्रन अश्विन को पांचवें नंबर पर रखना पड़ा भारी, अर्शदीप सिंह बोले पर्सनली मैसेज कर मांगूंगा माफी


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह एक बार फिर अपने बेबाक और मजाकिया अंदाज की वजह से सुर्खियों में हैं। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने अपने पसंदीदा भारतीय गेंदबाजों की रैंकिंग तैयार की। इस सूची में रविचंद्रन अश्विन को पांचवें स्थान पर रखने के बाद उन्हें खुद ही एहसास हुआ कि भारत के दिग्गज स्पिनर के साथ शायद कुछ ज्यादा ही अन्याय हो गया है। इसके बाद उन्होंने हंसते हुए कहा कि वह अश्विन भाई से व्यक्तिगत रूप से मैसेज करके माफी मांगेंगे।

    एक यूट्यूब इंटरव्यू के दौरान अर्शदीप सिंह से उनके पसंदीदा पांच भारतीय गेंदबाजों का चयन करने और उन्हें क्रमवार रैंक देने के लिए कहा गया। उन्होंने बिना ज्यादा सोच विचार किए अपनी सूची तैयार की जिसमें पहले स्थान पर भुवनेश्वर कुमार को रखा। अर्शदीप ने कहा कि भुवनेश्वर उनके निजी पसंदीदा गेंदबाज हैं और उनके लिए वह हमेशा विशेष रहेंगे इसलिए इस मामले में वह थोड़े पक्षपाती भी हैं।

    दूसरे स्थान पर उन्होंने मोहम्मद शमी को चुना। अर्शदीप के मुताबिक शमी की सीम पोजिशन और किसी भी पिच पर गेंद को स्विंग कराने की क्षमता उन्हें दुनिया के बेहतरीन तेज गेंदबाजों में शामिल करती है। तीसरे स्थान पर उन्होंने चाइनामैन स्पिनर कुलदीप यादव को रखा और कहा कि विकेट लेने की उनकी कला उन्हें बेहद खास बनाती है। चौथे नंबर पर युजवेंद्र चहल को जगह मिली जिनके साथ अर्शदीप आईपीएल में पंजाब किंग्स के लिए खेल चुके हैं। उन्होंने चहल के अनुभव और शानदार रिकॉर्ड की भी जमकर तारीफ की।

    जब सूची में आखिरी नाम रविचंद्रन अश्विन का आया तो अर्शदीप खुद असहज नजर आए। उन्होंने तुरंत कहा कि वह अश्विन को सबसे नीचे रखना नहीं चाहते थे लेकिन सूची में ऊपर कोई स्थान बचा ही नहीं था। इसके बाद उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि सॉरी अश्विन भाई मैं आपको पर्सनली मैसेज करके माफी मांग लूंगा। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और क्रिकेट प्रशंसकों को उनका अंदाज काफी पसंद आया।

    अर्शदीप ने यह भी याद दिलाया कि इंडियन प्रीमियर लीग में पंजाब टीम के लिए खेलते समय रविचंद्रन अश्विन उनके पहले कप्तान रहे थे। उन्होंने कहा कि अश्विन केवल महान स्पिनर ही नहीं बल्कि शानदार लीडर और सीनियर खिलाड़ी भी हैं जिनसे उन्होंने काफी कुछ सीखा है। यही वजह है कि उन्हें सूची में नीचे रखने पर उन्हें खुद भी अजीब महसूस हुआ।

    हाल के महीनों में अर्शदीप भारतीय टीम के सीमित ओवरों के अहम गेंदबाज बनकर उभरे हैं। इंग्लैंड दौरे पर उन्होंने वनडे और टी20 सीरीज में टीम का हिस्सा रहते हुए प्रभावशाली प्रदर्शन किया। इसके बाद जिम्बाब्वे के खिलाफ टी20 सीरीज में उन्हें आराम दिया गया जबकि श्रीलंका दौरे की टेस्ट टीम में उन्हें शामिल नहीं किया गया है। हालांकि आगामी सीमित ओवरों की सीरीज में उनसे एक बार फिर शानदार प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है।

    क्रिकेट के मैदान पर अपनी सटीक गेंदबाजी और मैदान के बाहर अपने हंसमुख स्वभाव के लिए पहचाने जाने वाले अर्शदीप सिंह का यह बयान एक बार फिर दिखाता है कि भारतीय टीम के खिलाड़ियों के बीच आपसी सम्मान और दोस्ताना माहौल कितना मजबूत है। यही कारण है कि उनका यह हल्का फुल्का मजाक भी फैंस के बीच चर्चा का विषय बन गया है।

  • IND vs SL: श्रीलंका पहुंचते ही टीम इंडिया की बढ़ी चिंता, प्रैक्टिस मैच पर बारिश का खतरा

    IND vs SL: श्रीलंका पहुंचते ही टीम इंडिया की बढ़ी चिंता, प्रैक्टिस मैच पर बारिश का खतरा


    नई दिल्ली। श्रीलंका दौरे पर पहुंची भारतीय क्रिकेट टीम को पहले ही बड़ा झटका लग सकता है। 7 अगस्त से कोलंबो में शुरू होने वाले तीन दिवसीय अभ्यास मैच पर बारिश का खतरा मंडरा रहा है। मौसम पूर्वानुमान के अनुसार मैच के तीनों दिन तेज बारिश की संभावना है, जिससे टीम इंडिया की तैयारियां प्रभावित हो सकती हैं।

    तीनों दिन बारिश की संभावना
    मौसम एजेंसी AccuWeather के अनुसार 7 से 9 अगस्त के बीच कोलंबो में लगातार बारिश होने की संभावना है। पहले दिन बारिश की आशंका 91 फीसदी तक जताई गई है, जबकि लगभग पूरे दिन बादल छाए रहने का अनुमान है। कैंडी से कोलंबो के बीच भी लगातार बारिश दर्ज की गई है, जिससे मैदान की स्थिति प्रभावित हो सकती है।

    टेस्ट सीरीज से पहले अहम था अभ्यास मैच
    यह तीन दिवसीय मुकाबला भारतीय टीम के लिए श्रीलंका की परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढालने का महत्वपूर्ण अवसर था। 15 अगस्त से गॉल में शुरू होने वाले पहले टेस्ट से पहले टीम इसी मैच के जरिए संयोजन और रणनीति पर काम करना चाहती थी। यदि मुकाबला बारिश की भेंट चढ़ता है, तो युवा टीम को बिना पर्याप्त मैच अभ्यास के टेस्ट सीरीज में उतरना पड़ सकता है।

    पहले से चोटों की चुनौती
    बारिश की चिंता के बीच टीम पहले ही कुछ खिलाड़ियों की फिटनेस को लेकर परेशान है। स्टार तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह घुटने की चोट के कारण पूरी सीरीज से बाहर हो चुके हैं। उनकी जगह आकिब नबी को पहली बार भारतीय टेस्ट टीम में शामिल किया गया है। वहीं युवा बल्लेबाज साई सुदर्शन की उपलब्धता भी फिटनेस क्लीयरेंस पर निर्भर है।

    भारतीय टेस्ट टीम
    शुभमन गिल (कप्तान)
    केएल राहुल (उप-कप्तान)
    यशस्वी जायसवाल
    ऋषभ पंत (विकेटकीपर)
    ध्रुव जुरेल (विकेटकीपर)
    साई सुदर्शन*
    रवींद्र जडेजा
    कुलदीप यादव
    मानव सुतार
    मोहम्मद सिराज
    प्रसिद्ध कृष्णा
    गुरनूर बराड़
    देवदत्त पडिक्कल
    सारांश जैन
    आकिब नबी
    साई सुदर्शन की अंतिम उपलब्धता फिटनेस रिपोर्ट पर निर्भर करेगी।

    वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के लिहाज से यह दौरा भारत के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। ऐसे में अभ्यास मैच पर बारिश का खतरा टीम की तैयारियों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

  • पोर्ट ऑफ स्पेन टेस्ट में पाकिस्तान का शिकंजा, वेस्टइंडीज के 6 विकेट गिरे, हार का खतरा गहराया

    पोर्ट ऑफ स्पेन टेस्ट में पाकिस्तान का शिकंजा, वेस्टइंडीज के 6 विकेट गिरे, हार का खतरा गहराया


    नई दिल्ली। पोर्ट ऑफ स्पेन के क्वींस पार्क ओवल में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मैच में पाकिस्तान ने तीसरे दिन शानदार प्रदर्शन करते हुए मुकाबले पर मजबूत पकड़ बना ली है। पहली पारी में बढ़त हासिल करने के बाद पाकिस्तानी गेंदबाजों ने दूसरी पारी में वेस्टइंडीज के बल्लेबाजी क्रम को पूरी तरह झकझोर दिया। दिन का खेल समाप्त होने तक मेजबान टीम 103 रन पर 6 विकेट गंवा चुकी थी और उसकी कुल बढ़त सिर्फ 60 रन तक पहुंच सकी थी। ऐसे में चौथे दिन पाकिस्तान जीत से कुछ ही कदम दूर दिखाई दे रहा है।

    वेस्टइंडीज ने पहली पारी में 344 रन बनाए थे लेकिन पाकिस्तान ने शानदार जवाब देते हुए 387 रन बनाकर 43 रन की अहम बढ़त हासिल की। पाकिस्तान की इस बढ़त की सबसे बड़ी वजह अब्दुल्ला शफीक की धैर्यपूर्ण और शानदार बल्लेबाजी रही। टीम में शान मसूद की जगह शामिल किए गए शफीक ने 323 गेंदों का सामना करते हुए नाबाद 160 रन बनाए। उनकी पारी में 15 चौके और 3 छक्के शामिल रहे। उन्होंने शुरुआत से अंत तक जिम्मेदारी के साथ बल्लेबाजी करते हुए पाकिस्तान को मजबूत स्थिति में पहुंचाया।

    पाकिस्तान के कप्तान बाबर आजम भी शतक से चूक गए लेकिन उनकी 88 रन की पारी टीम के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हुई। बाबर ने मध्यक्रम को मजबूती दी और अब्दुल्ला शफीक के साथ अहम साझेदारी निभाई। इसके अलावा अजान अवैस ने भी 55 रन का उपयोगी योगदान देकर टीम के स्कोर को मजबूत बनाया। वेस्टइंडीज की ओर से जोमेल वार्रिकन सबसे सफल गेंदबाज रहे जिन्होंने 6 विकेट हासिल किए जबकि शेमार जोसेफ ने 2 विकेट अपने नाम किए।

    दूसरी पारी में बल्लेबाजी करने उतरी वेस्टइंडीज की शुरुआत बेहद खराब रही। सलामी बल्लेबाज टैगेनारिन चंदरपॉल 17 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। आमिर जांगू भी केवल 13 रन ही बना सके और साजिद खान ने उन्हें बोल्ड कर दिया। अनुभवी बल्लेबाज रोस्टन चेज 17 रन और शाई होप 15 रन बनाकर आउट हो गए जिससे टीम पर दबाव लगातार बढ़ता गया।

    मध्यक्रम में केवम हॉज ने कुछ देर संघर्ष जरूर किया और 71 गेंदों में 34 रन बनाए लेकिन वह भी बड़ी पारी खेलने में सफल नहीं हो सके। निचले क्रम में जेयडन सील्स बिना खाता खोले आउट हो गए जिससे वेस्टइंडीज की स्थिति और खराब हो गई। दिन का खेल समाप्त होने तक जस्टिन ग्रीव्स एक रन बनाकर क्रीज पर मौजूद थे और अब चौथे दिन मेजबान टीम की उम्मीदें काफी हद तक उन्हीं पर टिकी रहेंगी।

    पाकिस्तान की ओर से अनुभवी स्पिनर साजिद खान ने शानदार गेंदबाजी करते हुए 32 रन देकर 4 विकेट झटके। उनकी सटीक लाइन और टर्न ने वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। अली उस्मान ने भी बेहतरीन सहयोग करते हुए 2 विकेट हासिल किए और विपक्षी बल्लेबाजी पर लगातार दबाव बनाए रखा।

    अब मैच का चौथा दिन बेहद अहम होने वाला है। वेस्टइंडीज को हार से बचने के लिए लंबी बल्लेबाजी करनी होगी और अपनी बढ़त को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाना होगा। दूसरी ओर पाकिस्तान की नजर जल्द से जल्द शेष चार विकेट लेकर आसान लक्ष्य हासिल करने और सीरीज में महत्वपूर्ण जीत दर्ज करने पर होगी। मौजूदा स्थिति को देखते हुए पाकिस्तान का पलड़ा पूरी तरह भारी नजर आ रहा है और यदि गेंदबाज इसी लय में रहे तो टीम चौथे दिन ही मुकाबला अपने नाम कर सकती है।

  • आएशा जफर की ऑलराउंड चमक, पाकिस्तान ने आखिरी मैच जीता, सीरीज श्रीलंका के कब्जे में

    आएशा जफर की ऑलराउंड चमक, पाकिस्तान ने आखिरी मैच जीता, सीरीज श्रीलंका के कब्जे में


    नई दिल्ली । श्रीलंका और पाकिस्तान महिला क्रिकेट टीमों के बीच खेली गई तीन मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज का समापन रोमांचक मुकाबले के साथ हुआ। दांबुला के रंगिरी दांबुला इंटरनेशनल स्टेडियम में खेले गए तीसरे और अंतिम मैच में पाकिस्तान ने शानदार प्रदर्शन करते हुए श्रीलंका को 4 विकेट से हरा दिया। हालांकि यह जीत पाकिस्तान के लिए केवल सांत्वना साबित हुई क्योंकि शुरुआती दोनों मुकाबले जीतकर श्रीलंका पहले ही सीरीज अपने नाम कर चुकी थी। इसके साथ ही मेजबान टीम ने 2-1 से सीरीज जीतकर घरेलू मैदान पर अपनी श्रेष्ठता कायम रखी।

    मैच में पाकिस्तान ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया और उसके गेंदबाजों ने कप्तान के इस निर्णय को सही साबित किया। श्रीलंका की बल्लेबाजी शुरुआत से ही संघर्ष करती नजर आई और नियमित अंतराल पर विकेट गिरते रहे। कप्तान चमारी अथापथु ने जिम्मेदारी संभालते हुए सबसे अधिक 34 रन बनाए। उन्होंने 33 गेंदों की अपनी पारी में पांच चौकों की मदद से टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाने की कोशिश की। उनके अलावा संजाना काविंदी ने 20 और इमेशा दुलानी ने 17 रन का योगदान दिया। निर्धारित 20 ओवर में श्रीलंका की टीम 6 विकेट खोकर 113 रन ही बना सकी।

    पाकिस्तान की गेंदबाजी काफी अनुशासित रही। मोमिमा रियासत ने दो विकेट हासिल किए, जबकि उमे हानी, नशरा संधू, तुबा हसन और आएशा जफर ने एक-एक सफलता अर्जित की। गेंदबाजों ने श्रीलंका को बड़े शॉट खेलने का मौका नहीं दिया और पूरे मैच में दबाव बनाए रखा।

    114 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी पाकिस्तान की टीम ने संयमित बल्लेबाजी की। कप्तान मुनीबा अली ने 19 रन बनाकर अच्छी शुरुआत दिलाई, जबकि शावल जुल्फिकार ने 21 रन का उपयोगी योगदान दिया। मैच की सबसे महत्वपूर्ण पारी चौथे नंबर पर बल्लेबाजी करने आईं आएशा जफर ने खेली। उन्होंने 31 गेंदों पर 39 रन बनाए, जिसमें छह चौके शामिल रहे। दबाव के बीच उनकी यह पारी पाकिस्तान की जीत की नींव साबित हुई। अंत में सायरा जबीन ने नाबाद 12 रन बनाकर टीम को 18.2 ओवर में 6 विकेट खोकर लक्ष्य तक पहुंचा दिया।

    श्रीलंका की ओर से कप्तान चमारी अथापथु ने गेंद से भी शानदार प्रदर्शन किया और चार ओवर में 20 रन देकर दो विकेट झटके। कविशा दिल्हाड़ी ने भी दो विकेट हासिल किए, जबकि निमाशा मीपागे को एक सफलता मिली। बावजूद इसके श्रीलंकाई गेंदबाज पाकिस्तान की जीत नहीं रोक सके।

    शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन के लिए आएशा जफर को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। उन्होंने बल्ले से 39 रन बनाने के साथ गेंदबाजी में भी एक विकेट लेकर अपनी टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई। वहीं पूरी सीरीज में लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन करने वाली श्रीलंका की इमेशा दुलानी को प्लेयर ऑफ द सीरीज का पुरस्कार मिला। उन्होंने तीन मैचों में कुल 123 रन बनाकर टीम की सफलता में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

    हालांकि पाकिस्तान ने अंतिम मुकाबला जीतकर आत्मविश्वास हासिल किया, लेकिन शुरुआती दोनों मैचों में छह-छह विकेट से मिली जीत के दम पर श्रीलंका ने 2-1 से सीरीज अपने नाम कर यह साबित कर दिया कि घरेलू परिस्थितियों में उसकी टीम कितनी मजबूत है। दूसरी ओर पाकिस्तान इस जीत से सकारात्मक संकेत लेकर आगामी अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों की तैयारी करेगा।

  • कॉमनवेल्थ गेम्स में चमका भारत, स्वदेश लौटते ही खिलाड़ियों का भव्य अभिनंदन, अब एशियन गेम्स और वर्ल्ड कप पर नजर

    कॉमनवेल्थ गेम्स में चमका भारत, स्वदेश लौटते ही खिलाड़ियों का भव्य अभिनंदन, अब एशियन गेम्स और वर्ल्ड कप पर नजर


    नई दिल्ली । भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में अपने बेहतरीन प्रदर्शन से पूरी दुनिया में खेल शक्ति के रूप में अपनी मजबूत पहचान दर्ज कराई है। प्रतियोगिता से स्वदेश लौटने पर भारतीय खिलाड़ियों का दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर जोरदार स्वागत किया गया। ढोल नगाड़ों, फूल मालाओं और भारत माता के जयघोष के बीच खिलाड़ियों का अभिनंदन हुआ। बड़ी संख्या में खेल प्रेमी, परिवार के सदस्य और खेल अधिकारी खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाने पहुंचे। खिलाड़ियों ने इस सम्मान को अपने जीवन का सबसे भावुक पल बताते हुए कहा कि देशवासियों का यह प्यार उन्हें भविष्य में और बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा देगा।

    भारतीय मुक्केबाजों का प्रदर्शन इस बार सबसे अधिक चर्चा में रहा। बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष अजय सिंह ने कहा कि कॉमनवेल्थ गेम्स के 96 वर्ष के इतिहास में पहली बार भारत ने मुक्केबाजी में सात स्वर्ण पदक जीतकर नया इतिहास रचा है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय खिलाड़ियों, कोचिंग स्टाफ और सभी सहयोगी संस्थाओं को देते हुए कहा कि भारतीय बॉक्सिंग अब वैश्विक स्तर पर नई पहचान बना चुकी है और आने वाले वर्षों में भारत की चुनौती और मजबूत होगी।

    स्वर्ण पदक विजेता मुक्केबाज साक्षी चौधरी ने एयरपोर्ट पर मिले भव्य स्वागत को अविस्मरणीय बताया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान पूरे देश का है और उनकी सफलता में भारत सरकार, बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया तथा हरियाणा सरकार के सहयोग की बड़ी भूमिका रही है। साक्षी ने अपना स्वर्ण पदक देशवासियों को समर्पित करते हुए कहा कि भविष्य में भी उनका लक्ष्य भारत के लिए अधिक से अधिक पदक जीतना रहेगा। उनके दादा सतपाल सिंह ने कहा कि परिवार को साक्षी पर गर्व है और युवाओं को मेहनत तथा आत्मविश्वास के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ना चाहिए। वहीं परिवार की सदस्य प्रिया ने कहा कि साक्षी की जीत पूरे परिवार के लिए गर्व और खुशी का अवसर है।

    भारतीय मुक्केबाज प्रीति पवार ने भी शानदार प्रदर्शन पर खुशी जताते हुए कहा कि सरकार, सेना और खेल संस्थाओं से मिले सहयोग ने खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ाया है। उन्होंने बताया कि अब जल्द ही राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर शुरू होगा जहां एशियन गेम्स और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी की जाएगी। वहीं अरुंधति चौधरी ने अपनी सफलता का श्रेय भारतीय सेना, आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट और कॉर्प्स ऑफ मिलिट्री पुलिस को दिया। उन्होंने कहा कि सैनिक होने के कारण देश के लिए बेहतर प्रदर्शन करने की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। उनका अगला लक्ष्य उज्बेकिस्तान में होने वाला विश्व कप है।

    पुरुषों के 90 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीतने वाले नरेंद्र बेरवाल ने कहा कि इस सफलता के पीछे कई महीनों की कठिन तैयारी और विशेष प्रशिक्षण शिविरों का योगदान है। उन्होंने बताया कि अब पूरा ध्यान एशियन गेम्स की तैयारी पर रहेगा। दूसरी ओर पैरा एथलीटों ने भी शानदार प्रदर्शन कर देश का मान बढ़ाया। पुरुष शॉट पुट एफ 57 वर्ग में स्वर्ण पदक जीतने वाले सोमन राणा ने कहा कि यह पदक पूरे देश और भारतीय सेना को समर्पित है। महिला शॉट पुट एफ 57 वर्ग की स्वर्ण पदक विजेता शर्मिला धनखड़ ने इसे अपने जीवन का सबसे बड़ा सम्मान बताया और सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई सुविधाओं के लिए आभार व्यक्त किया।

    पैरा एथलीट सुवर्णा राज ने विश्वास जताया कि भारत आने वाले वर्षों में खेलों की महाशक्ति बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। वहीं पदक विजेता शुभम जुयाल ने कहा कि हर खिलाड़ी का सपना देश के लिए पदक जीतना होता है और अब चार वर्ष बाद भारत में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए तैयारी का नया दौर शुरू होगा। खिलाड़ियों के जोश और आत्मविश्वास ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारतीय खेलों का भविष्य लगातार नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है।

  • बुमराह की गैरमौजूदगी में तेज गेंदबाजी की नई परीक्षा, श्रीलंका दौरे पर किस पर दांव लगाएगा भारत?

    बुमराह की गैरमौजूदगी में तेज गेंदबाजी की नई परीक्षा, श्रीलंका दौरे पर किस पर दांव लगाएगा भारत?


    नई दिल्ली । भारत के श्रीलंका दौरे से पहले टीम इंडिया को बड़ा झटका लगा है। तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह चोट के कारण दो मैचों की टेस्ट सीरीज से बाहर हो गए हैं। बाएं घुटने में लगातार बनी परेशानी और अंतिम फिटनेस टेस्ट पास नहीं कर पाने के कारण चयनकर्ताओं ने उन्हें आराम देने का फैसला किया है। उनकी जगह जम्मू कश्मीर के तेज गेंदबाज आकिब नबी को पहली बार भारतीय टेस्ट टीम में शामिल किया गया है।

    बुमराह की गैरमौजूदगी ने भारतीय गेंदबाजी आक्रमण का पूरा संतुलन बदल दिया है। पिछले कुछ वर्षों में नई गेंद से बुमराह और मोहम्मद सिराज की जोड़ी विपक्षी बल्लेबाजों के लिए सबसे बड़ी चुनौती रही है। अब टीम प्रबंधन को श्रीलंका की परिस्थितियों के अनुसार नई रणनीति तैयार करनी होगी। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि सिराज के साथ नई गेंद कौन संभालेगा।

    सबसे मजबूत दावेदार के रूप में प्रसिध कृष्णा का नाम सामने आ रहा है। उनकी अतिरिक्त उछाल और लंबी कद-काठी श्रीलंका की पिचों पर उपयोगी साबित हो सकती है। यदि टीम तीन तेज गेंदबाजों के साथ उतरती है तो आकिब नबी को भी डेब्यू का मौका मिल सकता है। घरेलू क्रिकेट में लगातार शानदार प्रदर्शन और इंडिया ए के लिए प्रभावी गेंदबाजी ने उन्हें राष्ट्रीय टीम तक पहुंचाया है।

    हालांकि आकिब नबी का अंतरराष्ट्रीय अनुभव नहीं है लेकिन चयनकर्ताओं ने उन पर भरोसा जताकर साफ संकेत दिया है कि भविष्य को ध्यान में रखते हुए युवा खिलाड़ियों को अवसर दिया जाएगा। जम्मू कश्मीर से आने वाले आकिब नबी घरेलू क्रिकेट में पिछले दो सत्रों में 100 से अधिक विकेट लेकर चर्चा में आए थे और इंडिया ए के लिए भी प्रभावशाली प्रदर्शन कर चुके हैं।

    श्रीलंका की पिचें आमतौर पर स्पिन गेंदबाजों के लिए मददगार मानी जाती हैं लेकिन नई गेंद से शुरुआती विकेट निकालना हमेशा अहम रहता है। ऐसे में मोहम्मद सिराज पर अतिरिक्त जिम्मेदारी होगी। उन्हें न सिर्फ आक्रमण की अगुवाई करनी होगी बल्कि युवा गेंदबाजों का मार्गदर्शन भी करना पड़ेगा। भारतीय टीम चाहे दो तेज गेंदबाजों के साथ खेले या तीन के साथ लेकिन सिराज की भूमिका निर्णायक रहने वाली है।

    टीम प्रबंधन के सामने एक और चुनौती गेंदबाजों के कार्यभार को संतुलित रखने की होगी। आगामी अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम को देखते हुए बुमराह पर किसी तरह का जोखिम नहीं लिया गया है। यही वजह है कि मेडिकल टीम और चयन समिति ने उन्हें पूरी तरह फिट होने तक आराम देने का फैसला किया है ताकि वह भविष्य की महत्वपूर्ण श्रृंखलाओं में पूरी क्षमता के साथ वापसी कर सकें।

    अब सभी की नजर भारत की अंतिम प्लेइंग इलेवन पर रहेगी। क्या टीम अनुभव पर भरोसा करेगी या फिर युवा आकिब नबी को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण का मौका मिलेगा यह मैच से पहले साफ होगा। इतना तय है कि बुमराह की अनुपस्थिति ने भारतीय टीम को प्लान बी पर काम करने के लिए मजबूर कर दिया है और श्रीलंका दौरा युवा तेज गेंदबाजों के लिए खुद को साबित करने का बड़ा मंच बन सकता है।

  • भारत के खिलाफ मैदान में उतरेंगे भारतीय मूल के नील पटेल, ऑस्ट्रेलिया U-19 टीम में चयन से चर्चा में युवा बल्लेबाज

    भारत के खिलाफ मैदान में उतरेंगे भारतीय मूल के नील पटेल, ऑस्ट्रेलिया U-19 टीम में चयन से चर्चा में युवा बल्लेबाज


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट की लोकप्रियता पूरी दुनिया में फैली हुई है और भारतीय मूल के कई खिलाड़ी अलग अलग देशों का प्रतिनिधित्व करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं। अब इसी सूची में एक नया नाम जुड़ गया है। भारतीय मूल के 16 वर्षीय बल्लेबाज नील पटेल को क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने भारत के खिलाफ होने वाली अंडर 19 सीरीज के लिए अपनी 16 सदस्यीय टीम में शामिल किया है। उनकी इस उपलब्धि ने क्रिकेट जगत में उत्सुकता बढ़ा दी है क्योंकि बेहद कम उम्र में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के घरेलू क्रिकेट में ऐसे रिकॉर्ड बनाए हैं जिन्होंने चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा।

    भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच अंडर 19 दौरे की शुरुआत 13 सितंबर से होगी। इस दौरे में दोनों टीमों के बीच सीमित ओवरों के मुकाबलों के साथ साथ लाल गेंद से भी मैच खेले जाएंगे। इस सीरीज को भविष्य के सितारों की परीक्षा माना जा रहा है और नील पटेल उन खिलाड़ियों में शामिल हैं जिन पर सभी की नजरें रहेंगी।

    नील पटेल न्यू साउथ वेल्स के लिए ओपनिंग बल्लेबाज के रूप में खेलते हैं। शुरुआत से ही उन्होंने अपनी बेहतरीन तकनीक धैर्य और लंबी पारी खेलने की क्षमता से प्रभावित किया है। यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स क्रिकेट क्लब की ओर से खेलते हुए उन्होंने महज 16 वर्ष की उम्र में सिडनी प्रीमियर क्रिकेट के फर्स्ट ग्रेड मुकाबलों में एक कैलेंडर वर्ष के दौरान 1000 से अधिक रन बनाकर इतिहास रच दिया। इतनी कम उम्र में यह उपलब्धि हासिल करने वाले खिलाड़ियों में उनका नाम शामिल हो गया है।

    हाल ही में नील ने फर्स्ट ग्रेड क्रिकेट में अपना पहला शतक भी लगाया। नई गेंद के सामने संयम के साथ बल्लेबाजी करना और लंबे समय तक क्रीज पर टिके रहना उनकी सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है। यही कारण है कि क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने उन्हें एडिलेड में आयोजित अंडर 19 टैलेंट कैंप के लिए भी चुना था जहां उन्होंने अपने प्रदर्शन से चयनकर्ताओं को प्रभावित किया।

    नील केवल बल्लेबाज ही नहीं बल्कि उपयोगी गेंदबाज भी हैं। जरूरत पड़ने पर वह टीम के लिए गेंद से भी अहम योगदान देते हैं। उनकी ऑलराउंड क्षमता उन्हें ऑस्ट्रेलियाई अंडर 19 टीम का महत्वपूर्ण खिलाड़ी बनाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उनका प्रदर्शन इसी तरह जारी रहा तो आने वाले वर्षों में वह ऑस्ट्रेलिया की सीनियर टीम तक भी पहुंच सकते हैं।

    भारत के खिलाफ होने वाली यह सीरीज नील पटेल के करियर की सबसे बड़ी परीक्षा होगी। भारतीय जूनियर टीम हमेशा मजबूत मानी जाती है और ऐसे में उनके सामने खुद को साबित करने का सुनहरा अवसर होगा। भारतीय मूल होने के कारण भारतीय क्रिकेट प्रेमियों की नजर भी उन पर रहेगी। हालांकि इस सीरीज में वह ऑस्ट्रेलिया की जर्सी पहनकर भारत के खिलाफ मैदान में उतरेंगे।

    क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की घोषित अंडर 19 टीम में केसी बार्टन हेडन बारबुलोविक एली ब्रेन विल बायरम ब्लेक कैटल जैक ज़ोस्नेक स्पेंसर ग्रीन कॉनर ग्रेगरी चार्ली हेंडरसन ज़ेड होलिक मैथ्यू लॉफ नील पटेल जैकब पिट्ज़ पैट्रिक सुलिवन थियो त्सिंगोस और थॉमस वासिओ शामिल हैं। अब सभी की निगाहें इस युवा टीम और खासकर नील पटेल पर टिकी रहेंगी कि वह भारत के खिलाफ अपने प्रदर्शन से कितना प्रभावित कर पाते हैं।

  • पूर्व CSK खिलाड़ी वंश बेदी ने चौके-छक्कों से पलटा मुकाबला, सेंट्रल दिल्ली किंग्स ने दर्ज की शानदार जीत

    पूर्व CSK खिलाड़ी वंश बेदी ने चौके-छक्कों से पलटा मुकाबला, सेंट्रल दिल्ली किंग्स ने दर्ज की शानदार जीत

    नई दिल्ली । दिल्ली प्रीमियर लीग (डीपीएल) 2026 में सेंट्रल दिल्ली किंग्स ने एक रोमांचक मुकाबले में आउटर दिल्ली वॉरियर्स को चार विकेट से हराकर शानदार जीत दर्ज की। बारिश के कारण 10-10 ओवर का किया गया यह मुकाबला आखिरी गेंदों तक रोमांच से भरपूर रहा। जीत के सबसे बड़े नायक रहे चेन्नई सुपर किंग्स के पूर्व खिलाड़ी वंश बेदी, जिन्होंने दबाव की स्थिति में विस्फोटक बल्लेबाजी करते हुए टीम को यादगार जीत दिलाई।

    अरुण जेटली स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में टॉस हारने के बाद पहले बल्लेबाजी करते हुए आउटर दिल्ली वॉरियर्स ने निर्धारित 10 ओवर में पांच विकेट के नुकसान पर 130 रन का मजबूत स्कोर बनाया। छोटे प्रारूप में यह लक्ष्य चुनौतीपूर्ण माना जा रहा था और सेंट्रल दिल्ली किंग्स के सामने 131 रन बनाने की कठिन चुनौती थी।

    आउटर दिल्ली वॉरियर्स की ओर से यजस शर्मा ने 16 गेंदों में 39 रन की तेज पारी खेली। वहीं मोहित पंवार ने 18 गेंदों पर 37 रन बनाकर टीम की पारी को मजबूती दी। अक्षय सैनी ने भी 15 गेंदों में 31 रन जोड़ते हुए स्कोर को 130 तक पहुंचाने में अहम योगदान दिया।

    लक्ष्य का पीछा करने उतरी सेंट्रल दिल्ली किंग्स को कप्तान यश ढुल ने तेज शुरुआत दिलाई। उन्होंने सिर्फ 16 गेंदों में 35 रन बनाए, जिसमें दो चौके और तीन छक्के शामिल रहे। इसके बाद जोंटी सिद्धू ने 12 गेंदों में 25 रन बनाकर रन गति बनाए रखी। हालांकि बीच के ओवरों में लगातार विकेट गिरने से मुकाबला एक बार फिर संतुलन की स्थिति में पहुंच गया।

    ऐसे समय में वंश बेदी ने जिम्मेदारी संभाली और आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए मैच का रुख बदल दिया। उन्होंने केवल 16 गेंदों में नाबाद 47 रन बनाए। इस पारी के दौरान उनके बल्ले से तीन चौके और पांच शानदार छक्के निकले। लगभग 294 के स्ट्राइक रेट से खेली गई उनकी पारी ने विपक्षी टीम की जीत की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।

    मुकाबले का सबसे रोमांचक क्षण अंतिम दो ओवरों में देखने को मिला। नौवें ओवर की आखिरी चार गेंदों पर वंश बेदी ने एक चौका और लगातार तीन छक्के लगाकर मैच पूरी तरह अपनी टीम के पक्ष में कर दिया। इसके बाद अंतिम ओवर में भी उन्होंने लगातार दो चौके और एक छक्का जड़ते हुए टीम को एक गेंद शेष रहते 133 रन तक पहुंचा दिया। सेंट्रल दिल्ली किंग्स ने 9.5 ओवर में छह विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया।

    इस जीत के बाद वंश बेदी का एक वीडियो भी चर्चा का विषय बना, जिसमें वह लोकप्रिय फिल्मी संवाद ‘फ्लावर नहीं, फायर हूं मैं’ कहते नजर आए। उनकी यह प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई और क्रिकेट प्रशंसकों ने उनकी मैच जिताऊ पारी की जमकर सराहना की।

    वंश बेदी की इस विस्फोटक बल्लेबाजी ने एक बार फिर साबित किया कि सीमित ओवरों के क्रिकेट में दबाव के क्षणों में संयम और आक्रामकता का सही संतुलन किसी भी मैच का परिणाम बदल सकता है। उनकी शानदार पारी ने सेंट्रल दिल्ली किंग्स को टूर्नामेंट में एक और महत्वपूर्ण जीत दिलाई और टीम का आत्मविश्वास भी बढ़ाया।