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  • ब्राजील ने भारत को 4-0 से हराया, एस्तेवाओ और सैमुअल लीनो के गोल से ऐतिहासिक मुकाबले में दर्ज की बड़ी जीत

    ब्राजील ने भारत को 4-0 से हराया, एस्तेवाओ और सैमुअल लीनो के गोल से ऐतिहासिक मुकाबले में दर्ज की बड़ी जीत

    नई दिल्ली: कोलकाता के साल्ट लेक स्टेडियम में शनिवार को खेले गए ऐतिहासिक फ्रेंडली मुकाबले में ब्राजील की सीनियर पुरुष राष्ट्रीय फुटबॉल टीम ने भारत को 4-0 से हरा दिया। भारतीय सरजमीं पर ब्राजील का यह पहला सीनियर अंतरराष्ट्रीय मुकाबला था। शुरुआत में भारतीय टीम ने ब्राजील को कुछ समय तक बराबरी की चुनौती दी, लेकिन मुकाबला आगे बढ़ने के साथ ब्राजील ने नियंत्रण हासिल कर लिया। हाफ-टाइम से पहले ही ब्राजील ने दो गोल कर अपनी स्थिति मजबूत कर ली थी। मैच में एस्तेवाओ, पेड्रो और सैमुअल लीनो ने ब्राजील के लिए गोल किए।

    मुकाबले के 28वें मिनट में एस्तेवाओ ने भारतीय रक्षापंक्ति को छकाते हुए नियर-पोस्ट की ओर तेज शॉट लगाया। गेंद भारतीय कप्तान और गोलकीपर गुरप्रीत सिंह संधू के हाथ से छूकर नेट में चली गई और ब्राजील को बढ़त मिल गई। इसके बाद 42वें मिनट में एस्तेवाओ ने पेनल्टी एरिया में पेड्रो को पास दिया, जिसे पेड्रो ने गोल में बदलकर ब्राजील की बढ़त 2-0 कर दी। हाफ-टाइम के दौरान ब्राजील के मुख्य कोच कार्लो एंसेलोटी ने पांच बदलाव किए। ब्रूनो गुइमारेस, गैब्रिएल मैगालहेस, वांडरसन, सैमुअल लीनो और डगलस लुइज को मैदान पर उतारा गया।

    दूसरे हाफ में सैमुअल लीनो ने ब्राजील की बढ़त को और मजबूत किया। 58वें मिनट में भारतीय टीम डिफेंस से गेंद आगे बढ़ाने के प्रयास में उसे गंवा बैठी। इसका फायदा उठाकर लीनो बाईं ओर जगह बनाने में सफल रहे और उन्होंने दूर के कोने में नीचा कर्लिंग शॉट लगाकर स्कोर 3-0 कर दिया। इसके कुछ समय बाद भारत के पास गोल करने का मौका आया। रयान विलियम्स ब्राजील के पेनल्टी बॉक्स में पहुंचे, लेकिन उनके प्रयास को रोक दिया गया। इंजरी टाइम के 94वें मिनट में लीनो ने बॉक्स के किनारे से कट-इन करते हुए अपना दूसरा गोल दागा और ब्राजील की 4-0 की जीत पक्की कर दी।

    भारत और ब्राजील की सीनियर पुरुष टीमों के बीच यह इतिहास की पहली अंतरराष्ट्रीय भिड़ंत थी। भारतीय जमीन पर ब्राजील का यह पहला सीनियर मैच भी रहा। ब्राजीलियाई फुटबॉल कन्फेडरेशन के अनुसार, भारत ब्राजील का सामना करने वाली 92वीं अलग राष्ट्रीय टीम बना। रैंकिंग के लिहाज से भी मुकाबला खास रहा। ब्राजील ने पिछले 28 वर्षों में भारत जितनी कम रैंकिंग वाली टीम के खिलाफ मैच नहीं खेला था, जबकि भारत ने 1993 में फीफा रैंकिंग शुरू होने के बाद ब्राजील जितनी ऊंची रैंकिंग वाली टीम का सामना नहीं किया था। कोलकाता पहुंचने से पहले ब्राजील ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 1-1 से ड्रॉ और 4-2 की जीत दर्ज कर चुका था। ब्राजील के कोच के तौर पर कार्लो एंसेलोटी का यह 20वां मैच था।

    मुकाबले के लिए सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम किए गए थे। साल्ट लेक स्टेडियम में करीब 2,000 पुलिसकर्मी और 400 से ज्यादा वॉलंटियर्स तैनात किए गए थे। अतिरिक्त केंद्रीय बल भी लगाए गए और स्टेडियम में मौजूद सीसीटीवी के अलावा 100 से अधिक अस्थायी कैमरे लगाए गए। इसके बावजूद करीब 85,000 दर्शकों की क्षमता वाले स्टेडियम का बड़ा हिस्सा खाली नजर आया।

    कम भीड़ के पीछे दुर्गा पूजा से ठीक पहले मैच का आयोजन, टिकटों की ऊंची कीमत और ब्राजील के स्टार खिलाड़ी नेमार की गैरमौजूदगी को प्रमुख कारण माना गया। आयोजन से जुड़ी लागत कम करने के लिए टिकटों की कीमतें ऊंची रखी गई थीं। बाद में स्थानीय क्लबों के प्रशंसकों के लिए छूट दी गई और मैच के दिन एक टिकट पर एक मुफ्त टिकट का ऑफर भी शुरू किया गया, लेकिन इसके बावजूद स्टेडियम पूरी तरह नहीं भर सका।

  • सीरीज जीत के बाद भी बढ़ी टेंशन, आखिरी ODI में 6-7 कैच छूटने पर गिल का फूटा गुस्सा, वर्ल्ड कप से पहले दी कड़ी चेतावनी

    सीरीज जीत के बाद भी बढ़ी टेंशन, आखिरी ODI में 6-7 कैच छूटने पर गिल का फूटा गुस्सा, वर्ल्ड कप से पहले दी कड़ी चेतावनी


    नई दिल्ली। भारत और वेस्टइंडीज के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज भले ही टीम इंडिया ने 2-1 से अपने नाम कर ली हो लेकिन मुल्लांपुर में खेले गए आखिरी मुकाबले ने भारतीय टीम की तैयारियों पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। शनिवार को हुए इस मुकाबले में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 351 रन का मजबूत स्कोर खड़ा किया था और वेस्टइंडीज के सामने 352 रन का लक्ष्य रखा था। इसके बावजूद भारतीय गेंदबाज इस स्कोर का बचाव नहीं कर सके। वेस्टइंडीज ने पांच विकेट से मुकाबला अपने नाम कर लिया और इस जीत में कप्तान शाई होप की शानदार पारी सबसे बड़ी वजह रही।

    शाई होप ने भारतीय गेंदबाजों का डटकर सामना करते हुए नाबाद 162 रन बनाए। ग्रोइन इंजरी के बावजूद उन्होंने जिस तरह बल्लेबाजी की उसने भारतीय टीम की मुश्किलें बढ़ा दीं। वेस्टइंडीज ने 352 रन का लक्ष्य 48.2 ओवर में हासिल कर लिया। यह वनडे क्रिकेट में वेस्टइंडीज का सबसे बड़ा सफल रन चेज भी रहा। होप के लिए यह लगातार दूसरा शतक था। इससे पहले गुवाहाटी वनडे में भी उन्होंने शतकीय पारी खेली थी।

    मुकाबला खत्म होने के बाद भारतीय कप्तान शुभमन गिल ने टीम की कमियों पर खुलकर बात की। गिल की सबसे बड़ी नाराजगी भारतीय टीम की फील्डिंग को लेकर थी। मुकाबले के दौरान भारतीय खिलाड़ियों ने करीब 6-7 कैच छोड़े। इतने मौके गंवाने का सीधा फायदा वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों को मिला और शाई होप ने भी मिले मौकों का पूरा फायदा उठाते हुए मैच भारत से दूर कर दिया। गिल ने माना कि वर्ल्ड कप से पहले इस तरह की फील्डिंग चिंता बढ़ाने वाली है और टीम को इस क्षेत्र में तत्काल सुधार करना होगा।

    कप्तान की दूसरी बड़ी चिंता डेथ ओवर्स की गेंदबाजी रही। गिल के मुताबिक आखिरी ओवरों में भारतीय टीम को अपनी रणनीति को लेकर स्पष्टता की जरूरत है। टीम को यह तय करना होगा कि किस स्थिति में बल्लेबाजों पर दबाव बनाने के लिए आक्रामक गेंदबाजी करनी है और कब रन रोकने के लिए रक्षात्मक फील्ड लगानी है। गिल ने यह भी संकेत दिया कि कई बार टीम डेथ ओवर्स की रणनीति जरूरत से पहले शुरू कर देती है जबकि उस समय मिडिल ओवर्स की तरह गेंदबाजी करने की जरूरत होती है।

    इस हार के बावजूद सीरीज जीतना भारत के लिए राहत की बात है लेकिन वर्ल्ड कप से पहले फील्डिंग और डेथ बॉलिंग जैसी कमजोरियां टीम मैनेजमेंट के लिए गंभीर विषय बन गई हैं। बड़े टूर्नामेंट में छोटी सी गलती भी मुकाबले का रुख बदल सकती है। ऐसे में भारतीय टीम को अगले मुकाबलों में इन कमियों को दूर करने पर खास ध्यान देना होगा।

    दूसरी ओर वेस्टइंडीज के कप्तान शाई होप ने अपनी शानदार पारी के पीछे पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की सलाह का भी जिक्र किया। होप ने बताया कि धोनी ने उन्हें समझाया था कि बल्लेबाज के पास अक्सर उसकी सोच से ज्यादा समय होता है। इसी सोच के साथ होप अब नतीजे के बजाय अपनी प्रक्रिया पर ध्यान देते हैं। मुल्लांपुर में उनकी पारी ने इसी सोच का शानदार उदाहरण पेश किया और वेस्टइंडीज को ऐतिहासिक जीत दिला दी।

  • क्रिकेट से हॉकी तक भारतीय खिलाड़ियों का जलवा, एशियन गेम्स में 21 स्वर्ण पदकों के साथ भारत ने रचा इतिहास

    क्रिकेट से हॉकी तक भारतीय खिलाड़ियों का जलवा, एशियन गेम्स में 21 स्वर्ण पदकों के साथ भारत ने रचा इतिहास


    नई दिल्ली। जापान के आइची नागोया में आयोजित एशियन गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश का मान बढ़ाया। प्रतियोगिता के आखिरी दिन भारत ने गोल्डन पंच लगाते हुए कुल 9 पदक अपने नाम किए। इनमें 5 गोल्ड 2 सिल्वर और 2 ब्रॉन्ज मेडल शामिल रहे। इस शानदार प्रदर्शन के साथ भारत के पदकों की कुल संख्या 85 तक पहुंच गई। भारतीय खिलाड़ियों ने पूरे टूर्नामेंट में अलग-अलग खेलों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया और पदक तालिका में चौथा स्थान हासिल किया। हालांकि कुछ देशों के मुकाबले रविवार को भी जारी रहने के कारण अंतिम पदक तालिका में बदलाव की संभावना जताई गई थी।

    भारत ने एशियन गेम्स 2026 में कुल 21 स्वर्ण 27 रजत और 37 कांस्य पदक जीते। पदक तालिका में चीन 169 स्वर्ण सहित कुल 341 पदकों के साथ पहले स्थान पर रहा। मेजबान जापान ने 83 स्वर्ण समेत 269 पदक जीतकर दूसरा स्थान हासिल किया जबकि दक्षिण कोरिया 39 स्वर्ण सहित 150 पदकों के साथ तीसरे नंबर पर रहा। भारत के बाद उज्बेकिस्तान 21 स्वर्ण और कुल 70 पदकों के साथ पांचवें स्थान पर रहा। भारतीय दल के प्रदर्शन ने दिखाया कि देश के खिलाड़ी अब कई खेलों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार मजबूत चुनौती पेश कर रहे हैं।

    आखिरी दिन भारतीय खिलाड़ियों की सफलता में तीरंदाजी और गोल्फ का अहम योगदान रहा। 17 वर्षीय तीरंदाज कुमकुम मोहोड ने महिला रिकर्व व्यक्तिगत स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए दक्षिण कोरिया की ओ येजिन को शूट ऑफ में पराजित किया। मुकाबले के निर्णायक क्षण में परफेक्ट 10 का स्कोर कर उन्होंने स्वर्ण पदक अपने नाम किया। वहीं महिला व्यक्तिगत स्ट्रोक प्ले गोल्फ में प्रणवी शरथ उर्स ने 15 अंडर पार के स्कोर के साथ पहला स्थान हासिल किया और भारत की झोली में एक और गोल्ड मेडल डाल दिया।

    कुश्ती में अमन सहरावत ने पुरुषों के फ्रीस्टाइल 57 किलोग्राम वर्ग में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए उत्तर कोरिया के पहलवान को हराया और स्वर्ण पदक जीता। पुरुष हॉकी टीम ने भी फाइनल में मलेशिया को 5-1 से हराकर गोल्ड मेडल हासिल किया। भारतीय टीम ने लगातार दूसरी बार इस स्पर्धा में स्वर्ण जीतकर अपनी श्रेष्ठता साबित की। इस जीत के साथ भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 के लिए भी सीधा क्वालिफिकेशन हासिल किया। क्रिकेट में भी भारत ने शानदार प्रदर्शन किया। फाइनल में पाकिस्तान को 19 रन से हराकर भारतीय पुरुष टीम ने गोल्ड मेडल जीता। भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 6 विकेट पर 211 रन बनाए जबकि पाकिस्तान की टीम 192 रन तक ही पहुंच सकी।

    अन्य मुकाबलों में महिला गोल्फ टीम ने रजत पदक जीता। अंतिम पंघाल ने महिला कुश्ती के 53 किलोग्राम वर्ग में सिल्वर मेडल अपने नाम किया। दीपक पूनिया ने पुरुषों के फ्रीस्टाइल 97 किलोग्राम वर्ग में कांस्य पदक हासिल किया। तीरंदाजी में नीरज चौहान ने पुरुष रिकर्व व्यक्तिगत स्पर्धा के कांस्य पदक मुकाबले में धीरज बोम्मदेवरा को 6-4 से हराकर ब्रॉन्ज जीता।

    इस प्रतियोगिता में भारत के 495 खिलाड़ियों ने 36 खेलों की स्पर्धाओं में हिस्सा लिया। हॉकी क्रिकेट तीरंदाजी कुश्ती और गोल्फ सहित कई खेलों में मिली सफलताओं ने भारतीय अभियान को यादगार बनाया। 21 स्वर्ण सहित 85 पदकों का आंकड़ा भारतीय खिलाड़ियों की मेहनत और प्रतिस्पर्धी क्षमता को दर्शाता है।

  • IND vs WI सीरीज में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाडी बने शुभमन गिल, विराट कोहली टॉप-5 से बाहर

    IND vs WI सीरीज में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाडी बने शुभमन गिल, विराट कोहली टॉप-5 से बाहर


    नई दिल्ली।
    शुभमन गिल (Shubman Gill) की अगुवाई वाली टीम इंडिया (Team India) को वेस्टइंडीज (West Indies) के खिलाफ तीसरे वनडे में 5 विकेट से हार का सामना करना पड़ा। हालांकि टीम इंडिया (Team India) ने यह सीरीज 2-1 से अपने नाम की, क्योंकि भारत सीरीज के पहले दो मैच जीतकर सीरीज अपने नाम कर चुका था। न्यू चंडीगढ़ में खेले गए आखिरी वनडे में ना तो कप्तान शुभमन गिल कमाल दिखा सकते और ना ही विराट कोहली (Virat Kohli), दोनों ही खिलाड़ी काफी सस्ते में पवेलियन लौटे।

    हालांकि गिल IND vs WI वनडे सीरीज में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों की लिस्ट में फिर भी पहले पायदान पर रहे, मगर किंग कोहली टॉप-5 से बाहर हो गए। जी हां, कोहली का टॉप-5 से बहार होना हैरान कर देने वाला है। तिरुवनंतपुरम में खेले गए पहले वनडे में विराट ने 139 रनों की नाबाद पारी खेलते हुए टीम इंडिया की जीत में अहम भूमिका निभाई थी। भारत बनाम वेस्टइंडीज वनडे सीरीज में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले टॉप-5 बल्लेबाजों में शुभमन गिल के अलावा एक और भारतीय है, जबकि लिस्ट में तीन बल्लेबाज वेस्टइंडीज के हैं।


    शुभमन गिल ने बनाए IND vs WI सीरीज में सबसे ज्यादा रन

    भारतीय कप्तान शुभमन गिल 334 रनों के साथ भारत बनाम वेस्टइंडीज वनडे सीरीज में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे। गिल के अलावा कोई भी बल्लेबाज 300 रन का आंकड़ा पार नहीं कर पाया। उन्होंने इस सीरीज में एक शतक और एक दोहरा शतक लगाया। गिल ने 3 मैचों में 167 की हैरतअंगेज औसत के साथ यह रन बनाए। हालांकि तीसरे वनडे में उनके हाथ निराशा लगी क्योंकि वह मात्र 1 रन बनाकर ही आउट हो गए थे।

    रोहित शर्मा लिस्ट में शामिल होने वाले दूसरे भारतीय हैं। पहले वनडे में हिटमैन को अच्छी शुरुआत मिली थी, मगर वह उसे बड़ी पारी में तबदील नहीं कर पाए थे। वह 32 रन बनाकर आउट हो गए थे। हालांकि उन्होंने यह गलती गुवाहटी में खेले गए दूसरे वनडे में नहीं की थी। रोहित ने दूसरे वनडे में शतक जड़ा था और भारत को 406 रनों का विशाल टारगेट चेज कराने में अपना अहम योगदान दिया था। इसके बाद तीसरे वनडे में उनके बल्ले से 92 रनों की पारी निकली, वह 8 रनों से सीरीज का दूसरा शतक पूरा करने से चूक गए। रोहित शर्मा ने इंडिया वर्सेस वेस्टइंडीज वनडे सीरीज में 75 की औसत के साथ 225 रन बनाए और वह लिस्ट में चौथे पायदान पर रहें।

    सीरीज के पहले मैच में शतक जड़ने वाले विराट कोहली के बल्ले से इस सीरीज में 168 रन ही निकले और वह टॉप-5 से बाहर 6ठे पायदान पर रहे। कोहली दूसरे और तीसरे वनडे में ज्यादा कुछ कमाल नहीं दिखा पाए।

    IND vs WI वनडे सीरीज में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले टॉप-5 खिलाड़ी
    प्लेयर – रन

    शुभमन गिल – 334
    शे होप – 278
    अमीर जंगू – 239
    रोहित शर्मा – 225
    जोन कैम्पबेल – 173


    शे होप समेत 3 वेस्टइंडीज के खिलाड़ी लिस्ट में

    वेस्टइंडीज के कप्तान शे होप समेत 3 खिलाड़ी IND vs WI वनडे सीरीज में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों की लिस्ट में टॉप-5 में रहे। होप ने सीरीज में दो शतक जड़े, न्यू चंडीगढ़ में खेले गए आखिरी मुकाबले में उन्होंने 162 रनों की नाबाद पारी खेल भारत के खिलाफ 352 रनों का विशाल टारगेट चेज करने में अहम रोल अदा किया। उनके बल्ले से सीरीज में कुल 278 रन निकले, वह शुभमन गिल के बाद सीरीज में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों की रेस में दूसरे पायदान पर रहे। वहीं अमीर जंगू 239 रनों के साथ तीसरे तो जोन कैम्पबेल 173 रनों के साथ लिस्ट में पांचवें और आखिरी पायदान पर रहे।

  • एशियन गेम्स में सबसे कम उम्र में गोल्ड जीतने वाले ये हैं 5 भारतीय, वैभव सूर्यवंशी ने तोड़ा 8 साल पुराना रिकॉर्ड

    एशियन गेम्स में सबसे कम उम्र में गोल्ड जीतने वाले ये हैं 5 भारतीय, वैभव सूर्यवंशी ने तोड़ा 8 साल पुराना रिकॉर्ड


    नई दिल्ली। 15 साल की उम्र में वैभव सूर्यवंशी ने एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया है। पाकिस्तान के खिलाफ पुरुष टी20 फाइनल में भारतीय टीम की जीत के साथ वह एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले सबसे कम उम्र के भारतीय बन गए और उन्होंने निशानेबाज सौरभ चौधरी का करीब आठ साल पुराना रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया।

    वैभव ने यह उपलब्धि 15 साल, 6 महीने और 6 दिन की उम्र में हासिल की। इससे पहले यह रिकॉर्ड सौरभ चौधरी के नाम था, जिन्होंने 2018 के जकार्ता एशियन गेम्स में पुरुषों की 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में 16 साल, 3 महीने और 9 दिन की उम्र में गोल्ड जीता था। हालांकि, एक अहम फर्क है-सौरभ अब भी सबसे कम उम्र में व्यक्तिगत स्पर्धा का एशियन गेम्स गोल्ड जीतने वाले भारतीय हैं, जबकि वैभव का गोल्ड टीम स्पर्धा में आया है।

    एशियन गेम्स में सबसे कम उम्र में गोल्ड जीतने वाले 5 भारतीय

    1. वैभव सूर्यवंशी – क्रिकेट
    वैभव इस सूची में पहले स्थान पर हैं। 2026 ऐची-नागोया एशियन गेम्स में पाकिस्तान के खिलाफ पुरुष क्रिकेट टीम की गोल्ड मेडल जीत के साथ उन्होंने 15 साल, 6 महीने और 6 दिन की उम्र में यह उपलब्धि हासिल की। फाइनल में वैभव ने 9 गेंदों पर 15 रन बनाए, जिसमें दो छक्के शामिल थे।

    2. सौरभ चौधरी – शूटिंग
    2018 जकार्ता एशियन गेम्स में सौरभ चौधरी ने पुरुषों की 10 मीटर एयर पिस्टल में गोल्ड जीता था। उस समय उनकी उम्र 16 साल, 3 महीने और 9 दिन थी। वैभव के रिकॉर्ड से पहले करीब आठ साल तक यही सबसे कम उम्र में भारतीय गोल्ड मेडल जीतने का रिकॉर्ड था।

    3. कुमकुम मोहोड – तीरंदाजी
    महाराष्ट्र की 17 वर्षीय कुमकुम मोहोड ने 2026 ऐची-नागोया एशियन गेम्स में महिला व्यक्तिगत रिकर्व तीरंदाजी में गोल्ड जीता। वह एशियन गेम्स में व्यक्तिगत रिकर्व गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय बनीं। दक्षिण कोरिया की ओह येजिन के खिलाफ शूट-ऑफ में कुमकुम ने दबाव के बीच शानदार प्रदर्शन करते हुए खिताब अपने नाम किया।

    4. जी. कमलिनी – क्रिकेट
    तमिलनाडु की विकेटकीपर-बल्लेबाज जी. कमलिनी 18 साल की उम्र में 2026 एशियन गेम्स में गोल्ड जीतने वाली भारतीय महिला क्रिकेट टीम का हिस्सा बनीं। भारत ने फाइनल में श्रीलंका को 147 रन से हराकर लगातार दूसरी बार महिला क्रिकेट का एशियन गेम्स गोल्ड जीता। कमलिनी का जन्म 20 जुलाई 2008 को मदुरै में हुआ था।

    5. पलक गुलिया – शूटिंग
    निशानेबाज पलक गुलिया ने 2023 हांगझोउ एशियन गेम्स में महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में गोल्ड जीता था। वह उस समय 17 साल, 10 महीने और 20 दिन की थीं। उन्होंने फाइनल में 242.1 अंक के एशियन गेम्स रिकॉर्ड स्कोर के साथ स्वर्ण पदक हासिल किया था।

    पाकिस्तान को 19 रन से हराकर भारत ने जीता गोल्ड

    वैभव का रिकॉर्ड भारत और पाकिस्तान के बीच खेले गए रोमांचक पुरुष टी20 फाइनल के बाद बना। जापान के निसिन स्थित कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 211 रन बनाए। इसके जवाब में पाकिस्तान की टीम 20 ओवर में 192/6 रन ही बना सकी और भारत ने मुकाबला 19 रन से जीत लिया।

    भारत की पारी में अभिषेक शर्मा ने 28 गेंदों पर 61 रन की तेजतर्रार पारी खेली। इसके बाद तिलक वर्मा ने 22 गेंदों पर नाबाद 51 रन बनाकर टीम को 200 के पार पहुंचाया। वैभव ने भी पारी की शुरुआत करते हुए 9 गेंदों पर 15 रन बनाए।

    पाकिस्तान की ओर से हसन नवाज ने 51 गेंदों पर 96 रन बनाकर भारतीय गेंदबाजों पर दबाव बनाया, लेकिन भारत ने आखिरी ओवरों में संयम बनाए रखा और पाकिस्तान को 192 रन पर रोक दिया। इस जीत के साथ भारत ने पुरुष क्रिकेट में अपना एशियन गेम्स गोल्ड भी बरकरार रखा।

    वैभव की इस उपलब्धि के साथ एक और बात भी खास है। वह एशियन गेम्स में सबसे कम उम्र के भारतीय गोल्ड मेडलिस्ट तो बन गए हैं, लेकिन सबसे कम उम्र के भारतीय पदक विजेता का रिकॉर्ड अभी संजना बथुला के नाम है, जिन्होंने 2023 हांगझोउ गेम्स में 15 साल, 3 महीने और 11 दिन की उम्र में कांस्य पदक जीता था।

  • अब प्रथम श्रेणी क्रिकेट नहीं खेलेंगे युजवेंद्र चहल…. संन्यास का किया ऐलान

    अब प्रथम श्रेणी क्रिकेट नहीं खेलेंगे युजवेंद्र चहल…. संन्यास का किया ऐलान


    नई दिल्ली।
    भारतीय स्पिनर (Indian spinner) युजवेंद्र चहल (Yuzvendra Chahal) ने शुक्रवार को प्रथम श्रेणी क्रिकेट (First-class cricket) से संन्यास (Retirement Announced) का एलान कर दिया है। चहल ने इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिये प्रथम श्रेणी क्रिकेट को अलविदा कहने की घोषणा की। हालांकि, उन्होंने भारत के लिए खेलने की इच्छा जाहिर की है। चहल पिछले कुछ समय से भारतीय टीम से बाहर चल रहे हैं, लेकिन उन्होंने राष्ट्रीय टीम में वापसी की उम्मीद नहीं छोड़ी है।


    चहल ने लाल गेंद क्रिकेट को कहा अलविदा

    चहल ने लिखा, मैंने जो पहली क्रिकेट बॉल पकड़ी थी, वह लाल रंग की थी। मैं 10 साल का था और मुझे तब अंदाजा भी नहीं था कि मुझे इस खेल से कितना गहरा लगाव हो जाएगा। मेरे लिए रेड-बॉल क्रिकेट कभी भी सिर्फ एक और प्रारूप नहीं था। इसी फार्मेट में मैंने सब्र, मुश्किलों का सामना करने की हिम्मत और घंटों तक मैदान पर डटे रहकर हर रन और हर विकेट के लिए संघर्ष करने की असली खुशी को समझा।


    भारत के लिए कभी नहीं खेला टेस्ट

    लेग-स्पिनर चहल को भारत के लिए टेस्ट खेलने का कभी मौका नहीं मिला। उन्होंने लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड पर नॉर्थम्प्टनशायर के लिए रेड बॉल प्रारूप में अपना आखिरी मैच खेला। चहल ने अपने करियर में 49 प्रथम श्रेणी मैच खेले, जिसमें उन्होंने 32.27 की औसत से 148 विकेट लिए। उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 6/25 रहा। हाल ही में उन्होंने नॉर्थम्प्टनशायर के लिए काउंटी क्रिकेट खेला और लॉर्ड्स में मिडलसेक्स के खिलाफ अपने आखिरी मैच में दो विकेट लिए। 2026-27 सीजन में 36 वर्षीय खिलाड़ी ने काउंटी चैंपियनशिप में पांच मैच खेले और 21 विकेट लिए। उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन डरहम के खिलाफ रहा, जहां उन्होंने कुल नौ विकेट लिए जिसमें पहली पारी में पांच विकेट लेना भी शामिल था।


    चहल बोले- मेरा सफर खत्म नहीं हुआ

    उन्होंने आगे लिखा, मैंने अपना आखिरी प्रथम श्रेणी मैच लॉर्ड्स में खेला। यह कहते हुए भावुकता महसूस होती है क्योंकि टेस्ट कैप पाना हमेशा से मेरा सपना रहा था, जिसे मैंने कई वर्षों तक संजोकर रखा था। भले ही वह सपना पूरा न हो सका, लेकिन मैं अपने इस सफर से सचमुच संतुष्ट हूं और इस प्रारूप में मिले हर मौके के लिए बेहद शुक्रगुजार हूं। रेड बॉल ने मुझे मेरी जिंदगी की कुछ सबसे खूबसूरत यादें दी हैं और कोई भी मुझसे वे यादें कभी नहीं छीन सकता। लेकिन मेरा सफर अभी खत्म नहीं हुआ है।

    चहल ने कहा, अपने देश के लिए खेलने की भूख अभी भी मुझमें जबरदस्त है। मुझे यकीन है कि मुझमें अभी भी क्रिकेट बाकी है और वनडे और टी20 प्रारूप में एक और मौका पाने के लिए मैं अपनी पूरी जान लगा दूंगा। हरियाणा क्रिकेट संघ, रणबीर सिंह महिंद्रा सर और श्री अनिरुद्ध सिंह चौधरी सर का खास शुक्रिया, जिन्होंने मेरे पूरे सफर में लगातार मेरा साथ दिया और मुझ पर भरोसा जताया। पहली बार रेड बॉल पकड़ने वाले 10 साल के बच्चे से लेकर अपना आखिरी प्रथम श्रेणी मैच खेलने तक, यह सफर वाकई जबरदस्त रहा है।


    टेस्ट क्रिकेट में नहीं मिले ज्यादा मौके

    चहल भारत के लिए लाल गेंद प्रारूप में नहीं खेले और इस फॉर्मेट में उन्हें ज्यादा मौके भी नहीं मिले। चहल भारत की टेस्ट टीम रणनीति का कभी हिस्सा नहीं रहे। उन्होंने काउंटी क्रिकेट में जरूर अपना दम दिखाया, लेकिन अब वह इस प्रारूप में खेलते नजर नहीं आएंगे।

  • ल्हुआन-ड्रे प्रीटोरियस ने T20 में बनाए नाबाद 188 रन…. रचा इतिहास, क्रिस गेल का रिकॉर्ड तोड़ा

    ल्हुआन-ड्रे प्रीटोरियस ने T20 में बनाए नाबाद 188 रन…. रचा इतिहास, क्रिस गेल का रिकॉर्ड तोड़ा


    नई दिल्ली।
    ल्हुआन-ड्रे प्रीटोरियस (Luan-Dre Pretorius) ने उस समय इतिहास रचा जब उन्होंने साउथ अफ्रीका (South Africa) की डोमेस्टिक टी20 लीग (Domestic T20 League) में 188 रनों की नाबाद पारी खेली। इस पारी के दम पर उन्होंने टी20 क्रिकेट (T20 Cricket) में सबसे बड़ी पारी खेलने का वर्ल्ड रिकॉर्ड (World Record) अपने नाम किया। पिछले 13 सालों से यह रिकॉर्ड यूनिवर्स बॉस क्रिस गेल के नाम था, जिन्होंने आईपीएल 2013 में पुणे सुपर जाएंट्स के खिलाफ नाबाद 175 रन बनाए थे, अब प्रीटोरियस ने गेल का यह रिकॉर्ड तोड़ टी20 क्रिकेट में सबसे बड़ी पारी खेलने का वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है।

    लुआन-ड्रे प्रीटोरियस ने शुक्रवार को घरेलू CSA T20 चैलेंज मैच में नाइट्स के खिलाफ साउथ अफ्रीका टाइटन्स फ्रेंचाइजी के लिए 79 गेंदों पर नाबाद 188 रन बनाए। प्रीटोरियस ने अपनी इस पारी में 13 छक्के और 15 चौके लगाए। प्रीटोरियस को डबल सेंचुरी पूरी ना कर पाने का गम जरूर रहेगा, अगर उनके पास एक ओवर भी और होता तो शायद वह नया इतिहास लिख सकते थे।

    प्रीटोरियस की इस पारी के दम पर टाइटन्स ने 267 रन बोर्ड पर लगाए। 20 साल का यह खब्बू बल्लेबाज इस समय जबरदस्त फॉर्म में है। हाल ही में नामीबिया, जिम्बाब्वे और साउथ अफ्रीका के बीच हुई ट्राई सीरीज में उन्होंने 53 गेंदों पर 101 रनों की शानदार पारी खेली थी।


    प्रीटोरियस ने 24 गेंदों में ठोकी फिफ्टी, 40 गेंदों में पूरा किया शतक

    प्रीटोरियस ने अपनी इस पारी की शुरुआत तेज तर्रा की और 24 गेंदों में अपना पचास रन पूरे किए। उन्हें अपना शतक बनाने में सिर्फ 16 और गेंदें लगीं। वहीं 150 का आंकड़ा 58 गेंदों में छुआ। प्रीटोरियस ने पुरुषों के T20 में सबसे लंबी पारियों के मामले में एरॉन फिंच और मार्कस स्टोइनिस की बराबरी भी की।

    प्रीटोरियस के दम पर टाइटन्स ने 3 विकेट पर 267 रन बनाए, जो कॉम्पिटिशन के इतिहास का दूसरा सबसे बड़ा स्कोर है। इससे पहले उन्होंने 2022 में इसी टीम के खिलाफ 3 विकेट पर 271 रन बनाए थे उस मैच में डेवाल्ड ब्रेविस ने 162 रनों की पारी खेली थी, जो CSA T20 चैलेंज का सबसे बड़ा इंडिविजुअल स्कोर भी था। हालांकि अब यह रिकॉर्ड प्रीटोरियस के नाम हो गया है। वहीं टाइटन्स के पास अब CSA T20 चैलेंज के इतिहास के पांच सबसे बड़े टीम टोटल हैं।

    यह 2026-27 सीजन में प्रिटोरियस का पहला गेम था, और वह कुछ जबरदस्त फॉर्म के साथ कॉम्पिटिशन में आए थे। अपने पिछले दो मैचों में, उन्होंने सितंबर में ट्राई-सीरीज में ज़िम्बाब्वे और नामीबिया के ख़िलाफ़ क्रमशः 94 और 101 रन बनाए थे। उन्होंने सभी फॉर्मेट में सिर्फ 22 इंटरनेशनल मैच खेले हैं, लेकिन यह प्रिटोरियस का 91वां T20 था, एक ऐसा फॉर्मेट जिसमें वह 150.44 की स्ट्राइक रेट से बैटिंग करते हैं।

  • एशियन गेम्स 2026: भारत-पाकिस्तान के बीच फाइनल मुकाबला आज…. मैच से दूर रहेंगे नकवी

    एशियन गेम्स 2026: भारत-पाकिस्तान के बीच फाइनल मुकाबला आज…. मैच से दूर रहेंगे नकवी


    नई दिल्ली।
    एशियन गेम्स 2026 (Asian Games 2026 ) में भारत और पाकिस्तान (India vs Pakistan) के बीच मेन्स क्रिकेट प्रतियोगिता (Men’s cricket tournament) का फाइनल 3 अक्टूबर (शनिवार) को होना है. यह गोल्ड मेडल मुकाबला निशिन के कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क में सुबह 10 से निर्धारित है. इस मुकाबले की शुरुआत से सभी की नजरें इस बात पर टिकी थीं कि एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) के अध्यक्ष के तौर पर मोहसिन नकवी (Mohsin Naqvi) फाइनल में मौजूद रहेंगे या नहीं. इसकी एक वजह हाल के भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मुकाबलों में ट्रॉफी प्रेजेंटेशन को लेकर हुई घटनाएं हैं. हालांकि इसे लेकर सस्पेंस खत्म हो चुका है. फाइनल में एसीसी और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के प्रमुख नकवी का साया नहीं होगा।

    एसीसी ने बताया कि मोहसिन नकवी पहले से तय प्रतिबद्धताओं के कारण एशियन गेम्स के फाइनल डे में शामिल नहीं हो पाएंगे. उन्होंने गोल्ड और ब्रॉन्ज मेडल मुकाबले में उतरने वाली चारों टीमों को शुभकामनाएं दी हैं. नकवी ने भी कहा है कि उनकी पूर्व निर्धारित व्यस्तताएं उन्हें नागोया से दूर रखेंगी, हालांकि वह मुकाबलों के एक्शन का इंतजार कर रहे हैं।

    मेन्स एशिया कप 2025 और विमेंस एशिया कप 2026 में भारतीय टीम्स की खिताबी जीत के बाद ट्रॉफी प्रेजेंशन को लेकर विवाद हुआ था. भारतीय टीम्स ने मोहसिन नकवी के हाथों ट्रॉफी लेना स्वीकार नहीं किया था. उन दोनों टूर्नामेंट में भारतीय टीम ने बगैर ट्रॉफी के ही जश्न मनाया. ऐसे में एशियन गेम्स के फाइनल में उनकी संभावित मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठ रहे थे. अब एसीसी की ओर से उनकी गैरमौजूदगी की पुष्टि हो चुकी है. यानी आज भारत-पाकिस्तान के गोल्ड मेडल मैच में नकवी स्टेडियम में मौजूद नहीं होंगे।


    सेमीफाइनल में पस्त हो गया था श्रीलंका

    भारत और पाकिस्तान दोनों को टूर्नामेंट में आईसीसी रैंकिंग के आधार पर सीधे क्वार्टर फाइनल में जगह मिली थी. बारिश के कारण दोनों के क्वार्टर फाइनल मुकाबले रद्द हो गए और बेहतर सीडिंग के कारण दोनों टीमें सेमीफाइनल में पहुंच गईं. भारत का सेमीफाइनल श्रीलंका के खिलाफ हुआ. भारतीय टीम ने टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 169/7 का स्कोर बनाया. ईशान किशन ने 4 चौके और पांच छक्के की मदद से नाबाद 80 रनों की शानदार पारी खेली, जबकि वैभव सूर्यवंशी ने 21 गेंदों में 38 रन बनाकर तेज शुरुआत दी. इसके बाद भारतीय गेंदबाजों ने श्रीलंका की पारी को सिर्फ 45 रनों पर समेट दिया और भारत ने 124 रन से मुकाबला जीत लिया।

    उधर पहले सेमीफाइनल में पाकिस्तानी टीम का सामना बांग्लादेश से हुआ था. बारिश के कारण मुकाबला वो 13-13 ओवर्स का कर दिया गया. बांग्लादेश ने 111/7 रन बनाए, जिसके जवाब में पाकिस्तान ने 11.3 ओवर में 6 विकेट से लक्ष्य हासिल कर लिया. अब दोनों टीमें गोल्ड मेडल के लिए आमने-सामने हैं।

    भारत एशियन गेम्स में मेन्स क्रिकेट का डिफेंडिंग चैंपियन है. टीम ने 2023 के हांगझोउ एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीता था. अब श्रेयस अय्यर की कप्तानी वाली भारतीय टीम के पास लगातार दूसरी बार स्वर्ण पदक जीतने का मौका है. यह मुकाबला इसलिए भी खास है क्योंकि एशियन गेम्समें पहली बार मेन्स क्रिकेट में भारत और पाकिस्तान आमने-सामने हैं. इससे पहले एशियन गेम्स में दोनों की भिड़ंत नहीं हुई थी. भारतीय टीम में श्रेयस अय्यर, अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन, ईशान किशन, अक्षर पटेल, वॉशिंगटन सुंदर, जसप्रीत बुमराह और वैभव सूर्यवंशी जैसे खिलाड़ी शामिल हैं. उधर पाकिस्तान की कमान साहिबजादा फरहान के हाथों में है।

  • भारत के स्वर्णिम अभियान में चमकीं दो बेटियां, कुमकुम मोहोड ने रचा इतिहास तो प्रणवी उर्स ने गोल्ड जीतकर बढ़ाया मान

    भारत के स्वर्णिम अभियान में चमकीं दो बेटियां, कुमकुम मोहोड ने रचा इतिहास तो प्रणवी उर्स ने गोल्ड जीतकर बढ़ाया मान


    नई दिल्ली। एशियन गेम्स 2026 का 14वां दिन भारतीय खिलाड़ियों के लिए कई बड़ी उपलब्धियां लेकर आया है। 3 अक्टूबर को आइची-नागोया में जारी इन खेलों में भारत के खिलाड़ियों ने तीरंदाजी और गोल्फ में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किए। वहीं कुश्ती में अमन सहरावत और अंतिम पंघल ने अपने मुकाबले जीतकर फाइनल में जगह बना ली है। क्रिकेट में भी भारत और पाकिस्तान के बीच गोल्ड मेडल मुकाबले पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। भारतीय खिलाड़ी अलग-अलग स्पर्धाओं में पदक जीतने के इरादे से मैदान पर उतर रहे हैं और देश की पदक तालिका में और इजाफा करने की कोशिश कर रहे हैं।

    दिन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में तीरंदाज कुमकुम मोहोड का प्रदर्शन शामिल रहा। महज 17 साल की कुमकुम ने महिला रिकर्व व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। वह एशियन गेम्स में इस स्पर्धा का व्यक्तिगत स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय तीरंदाज बन गई हैं। फाइनल में उनका सामना दक्षिण कोरिया की ओह येजिन से हुआ। मुकाबला बेहद रोमांचक रहा और नतीजा शूट ऑफ के जरिए निकला जिसमें कुमकुम ने बाजी मार ली। इससे पहले उन्होंने सेमीफाइनल में चीन की झू जिंगयी को 6-2 से हराकर फाइनल में जगह बनाई थी। कुमकुम ने दक्षिण कोरिया की विश्व और ओलंपिक चैंपियन कांग चाए-यंग को हराकर भी अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। उनकी इस उपलब्धि के साथ भारतीय तीरंदाजी टीम के शानदार अभियान में एक और स्वर्ण पदक जुड़ गया।

    गोल्फ में भी भारत के लिए ऐतिहासिक सफलता दर्ज हुई। प्रणवी शरथ उर्स ने महिला व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर नया इतिहास बनाया। वह एशियन गेम्स में व्यक्तिगत गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला गोल्फर बन गई हैं। फाइनल राउंड से पहले प्रणवी ने 15 अंडर 195 के स्कोर के साथ तीन शॉट की बढ़त हासिल की थी। उनकी इस उपलब्धि के साथ भारतीय गोल्फ को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी पहचान मिली। महिला टीम स्पर्धा में भी भारतीय खिलाड़ियों ने दमदार प्रदर्शन किया। प्रणवी शरथ उर्स अदिति अशोक और दीक्षा डागर की तिकड़ी ने रजत पदक अपने नाम किया। इस तरह गोल्फ में भारत को एक स्वर्ण और एक रजत पदक मिला।

    कुश्ती में भी भारतीय खिलाड़ियों ने उम्मीदें बढ़ा दी हैं। पुरुषों के 57 किलोग्राम वर्ग के सेमीफाइनल में अमन सहरावत ने ताजिकिस्तान के ऐयाल बेलोल्यूब्स्की को 14-8 से हराकर फाइनल में प्रवेश किया। वहीं महिला 53 किलोग्राम वर्ग में अंतिम पंघल ने विश्व पदक विजेता जिन झांग को 6-1 से मात देकर खिताबी मुकाबले में जगह बनाई। दोनों पहलवानों के फाइनल में पहुंचने से भारत की पदक उम्मीदों को मजबूती मिली है।

    क्रिकेट में भारत और पाकिस्तान के बीच स्वर्ण पदक का मुकाबला जारी है। इससे पहले श्रीलंका की पुरुष क्रिकेट टीम ने बांग्लादेश को 63 रन से हराकर कांस्य पदक जीता। भारत ने एशियन गेम्स के 13वें दिन भी शानदार प्रदर्शन किया था। 2 अक्टूबर को भारतीय खिलाड़ियों ने कुल 10 पदक जीते थे जिनमें छह स्वर्ण दो रजत और दो कांस्य शामिल थे। अब 14वें दिन तीरंदाजी गोल्फ कुश्ती क्रिकेट हॉकी और अन्य खेलों में भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर नजर बनी हुई है। देश को उम्मीद है कि प्रतियोगिता के इस अहम चरण में खिलाड़ी अपने दमदार प्रदर्शन से पदकों की संख्या और बढ़ाएंगे।

  • 2 अक्टूबर को भारत का कमाल लवलीना का गोल्ड और तीरंदाजी में ऐतिहासिक जीत से बढ़ा मेडल का आंकड़ा

    2 अक्टूबर को भारत का कमाल लवलीना का गोल्ड और तीरंदाजी में ऐतिहासिक जीत से बढ़ा मेडल का आंकड़ा


    नई दिल्ली। आइची नागोया एशियन गेम्स 2026 में 2 अक्टूबर का दिन भारतीय खिलाड़ियों के नाम रहा। 13वें दिन भारत की नजरें बॉक्सिंग तीरंदाजी कुश्ती हॉकी और कई अन्य खेलों पर थीं और दिन आगे बढ़ने के साथ भारतीय खिलाड़ियों ने पदकों की झड़ी लगा दी। सबसे खास प्रदर्शन स्टार बॉक्सर लवलीना बोरगोहेन का रहा जिन्होंने अपने जन्मदिन के दिन देश को गोल्ड मेडल का तोहफा दिया। इसके अलावा भारतीय महिला रिकर्व टीम ने भी ऐतिहासिक स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

    लवलीना बोरगोहेन ने महिला 75 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में चीन की बाओ जियी को 5-0 से हराकर स्वर्ण पदक जीता। 2 अक्टूबर को अपना 29वां जन्मदिन मना रहीं लवलीना के लिए यह जीत बेहद खास रही। इस स्वर्ण के साथ वह एशियन गेम्स में गोल्ड जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला बॉक्सर बन गईं। उनसे पहले यह उपलब्धि मैरी कॉम ने 2014 इंचियोन एशियन गेम्स में हासिल की थी।

    लवलीना की जीत के कुछ ही समय बाद तीरंदाजी से भी भारत के लिए बड़ी खबर आई। अंकिता भकत कीर्ति शर्मा और कुमकुम मोहोड की भारतीय महिला रिकर्व टीम ने दक्षिण कोरिया को फाइनल में 5-3 से हराकर गोल्ड मेडल जीत लिया। यह इस स्पर्धा में भारतीय महिला रिकर्व टीम का पहला एशियन गेम्स स्वर्ण पदक है। मुकाबले में भारतीय तीरंदाजों ने तेज हवा के बीच दबाव बनाए रखा और मजबूत कोरियाई टीम के खिलाफ शानदार प्रदर्शन किया।

    हालांकि पुरुष रिकर्व टीम को फाइनल में दक्षिण कोरिया के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। धीरज बोम्मादेवरा नीरज चौहान और यशदीप भोगे की भारतीय टीम को 1-5 से शिकस्त मिली और उसे सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा। इससे पहले भारतीय टीम ने सेमीफाइनल में ईरान को 6-0 से हराकर फाइनल में जगह बनाई थी।

    कुश्ती में भी भारत की उम्मीदें बनी रहीं। सुजीत कलकल ने 65 किलोग्राम वर्ग में ओलंपिक चैंपियन को हराकर फाइनल में जगह बनाई। ऐसे में उनके मुकाबले पर भी भारतीय प्रशंसकों की नजरें टिकी रहीं। दिन के मुकाबलों में भारत ने बॉक्सिंग और तीरंदाजी के अलावा कई अन्य खेलों में भी पदक की उम्मीद बनाए रखी।

    1 अक्टूबर यानी 12वें दिन भारत ने छह पदक जीते थे जिनमें दो सिल्वर और चार ब्रॉन्ज शामिल थे। इसके बाद 2 अक्टूबर के मुकाबलों ने भारत की पदक तालिका को और मजबूत किया। दिन के दौरान भारत 70 पदकों के आंकड़े तक पहुंच गया जिसमें 12 गोल्ड 24 सिल्वर और 34 ब्रॉन्ज शामिल थे।

    एशियन गेम्स के 13वें दिन का सबसे बड़ा आकर्षण लवलीना का जन्मदिन पर गोल्ड जीतना और भारतीय महिला रिकर्व टीम का ऐतिहासिक स्वर्ण रहा। वहीं पुरुष रिकर्व टीम का सिल्वर भी भारत की मजबूत तीरंदाजी अभियान को दर्शाता है। अब प्रतियोगिता के बाकी मुकाबलों में भी भारतीय खिलाड़ियों से पदकों की उम्मीद बनी हुई है और मेडल टैली में भारत की स्थिति पर सभी की नजरें टिकी हैं।