Category: Sports

  • हार्दिक पांड्या फिर चोटिल, न्यूजीलैंड सीरीज से बाहर, तीन सप्ताह आराम के बाद जिम्बाब्वे सीरीज से वापसी संभव

    हार्दिक पांड्या फिर चोटिल, न्यूजीलैंड सीरीज से बाहर, तीन सप्ताह आराम के बाद जिम्बाब्वे सीरीज से वापसी संभव

    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम के ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या की वापसी की राह एक बार फिर चोट के कारण रुक गई है। उनकी दाहिनी पिंडली में दोबारा चोट सामने आई है, जिसके चलते वह कम से कम तीन सप्ताह तक प्रतिस्पर्धी क्रिकेट से दूर रहेंगे। इस चोट के कारण हार्दिक न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाली टी20 और वनडे सीरीज का हिस्सा नहीं बन पाएंगे। पिछले चार महीनों में यह कम से कम तीसरा मौका है, जब चोट ने उनकी वापसी की योजना को प्रभावित किया है।

    हार्दिक की ‘रिटर्न टू प्ले’ तारीख 20 सितंबर तय की गई थी। इसी योजना के तहत उन्हें छह अक्टूबर से ऑस्ट्रेलिया ए के खिलाफ शुरू होने वाली वनडे सीरीज के लिए भारत ए टीम में चुना गया था। हालांकि, ताजा स्कैन में उनकी दाहिनी पिंडली में चोट सामने आने के बाद यह योजना भी प्रभावित हो गई है।

    मेडिकल आकलन के तहत हार्दिक को करीब दो सप्ताह तक पूरी तरह आराम करने की सलाह दी गई है। इसके बाद उनकी स्थिति का दोबारा मूल्यांकन किया जाएगा और यह तय होगा कि वह रिहैबिलिटेशन कब शुरू कर सकते हैं। उनकी फिटनेस पर आगे की वापसी इसी प्रक्रिया के आधार पर तय होगी।

    न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज 22 अक्टूबर से शुरू होनी है। इसके बाद दोनों टीमों के बीच वनडे मुकाबले खेले जाएंगे। मौजूदा स्थिति में हार्दिक के इस पूरी सीरीज तक फिट होकर मैदान पर लौटने की संभावना नहीं है। ऐसे में उनकी वापसी के लिए टीम प्रबंधन को आगे के विकल्पों पर विचार करना होगा।

    हार्दिक की चोट की शुरुआत अफगानिस्तान के खिलाफ टी20 सीरीज से ठीक पहले हुई थी। फील्डिंग ड्रिल के दौरान उन्हें घुटने के आसपास अचानक तेज दर्द महसूस हुआ था। इसके बाद उन्होंने ब्रेक लिया और कुछ दिनों तक आराम किया। फिटनेस प्रमाणपत्र हासिल करने की तैयारी के दौरान दर्द फिर उभर आया। इसके बाद कराए गए स्कैन में चोट की पुष्टि हुई थी।

    32 वर्षीय हार्दिक आईपीएल के बाद से बेंगलुरु में रहकर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में ट्रेनिंग कर रहे थे। उनका लक्ष्य फिटनेस हासिल करके प्रतिस्पर्धी क्रिकेट में वापसी करना था, लेकिन लगातार सामने आ रही परेशानियों ने उनकी योजना को प्रभावित किया है। पिछले चार महीनों में अफगानिस्तान वनडे, इंग्लैंड टी20 और अब ऑस्ट्रेलिया ए सीरीज के दौरान उनकी वापसी चोट की वजह से प्रभावित हुई है।

    हार्दिक को एशियन गेम्स के लिए भारतीय दल के साथ जापान भेजने की भी योजना थी। इसके लिए यात्रा संबंधी प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन ताजा चोट के बाद उनकी उपलब्धता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

    अब हार्दिक के लिए अगला संभावित मौका जिम्बाब्वे के खिलाफ वनडे सीरीज हो सकता है। अगर वह तब तक पूरी तरह फिट होते हैं तो उस सीरीज से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी कर सकते हैं। इसके अलावा उनकी मैच फिटनेस परखने के लिए घरेलू क्रिकेट में विजय हजारे ट्रॉफी या सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में खेलने का विकल्प भी मौजूद हो सकता है। हालांकि, अंतिम फैसला उनकी फिटनेस और मेडिकल आकलन के आधार पर ही होगा।

  • ओमान की टीम में 9 अल बलूशी खिलाड़ी एशियन गेम्स में एक ही परिवार नाम ने खींचा सबका ध्यान

    ओमान की टीम में 9 अल बलूशी खिलाड़ी एशियन गेम्स में एक ही परिवार नाम ने खींचा सबका ध्यान


    नई दिल्ली। एशियन गेम्स 2026 में क्रिकेट मुकाबलों के बीच ओमान की टीम अपनी हार से ज्यादा एक अनोखे संयोग को लेकर चर्चा में आ गई है। हॉन्ग कॉन्ग के खिलाफ मुकाबले में ओमान की प्लेइंग इलेवन में एक ही सरनेम वाले सात खिलाड़ी मैदान पर उतरे। यही नहीं ओमान के पूरे स्क्वॉड में इस सरनेम वाले खिलाड़ियों की संख्या नौ है। क्रिकेट मुकाबले में ऐसा संयोग देखकर हर किसी का ध्यान ओमान की टीम की तरफ चला गया।

    25 सितंबर को निशिन के कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क में हॉन्ग कॉन्ग और ओमान के बीच मुकाबला खेला गया। हॉन्ग कॉन्ग ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया और निर्धारित 20 ओवर में आठ विकेट खोकर 121 रन बनाए। लक्ष्य का पीछा करने उतरी ओमान की टीम 20 ओवर में छह विकेट पर 80 रन ही बना सकी और उसे 41 रन से हार का सामना करना पड़ा।

    हालांकि मैच का नतीजा ओमान के पक्ष में नहीं रहा लेकिन उसकी प्लेइंग इलेवन ने खूब सुर्खियां बटोरीं। ओमान की टीम में मोहम्मद अल बलूशी शुऐब अल बलूशी जुबैर अल बलूशी वहीद अल बलूशी ईसा अल बलूशी नवीद अल बलूशी और फारिस अल बलूशी शामिल थे। यानी मैदान पर मौजूद 11 खिलाड़ियों में से सात के नाम के साथ अल बलूशी सरनेम जुड़ा हुआ था।

    अगर पूरे स्क्वॉड की बात करें तो वसीम अल बलूशी और कैस अल बलूशी के नाम भी इसी सूची में शामिल हैं। इस तरह ओमान के स्क्वॉड में कुल नौ खिलाड़ी ऐसे हैं जिनके नाम के साथ अल बलूशी जुड़ा हुआ है। यही वजह रही कि मुकाबले के दौरान ओमान की टीम का यह अनोखा संयोग क्रिकेट प्रशंसकों के बीच चर्चा का विषय बन गया।

    इस मुकाबले में एक और दिलचस्प बात देखने को मिली। ओमान की बल्लेबाजी की शुरुआत भी अल बलूशी सरनेम वाले खिलाड़ियों ने की। मोहम्मद अल बलूशी और शुऐब अल बलूशी के बाद जुबैर अल बलूशी और वहीद अल बलूशी ने बल्लेबाजी की जिम्मेदारी संभाली। हालांकि हॉन्ग कॉन्ग के गेंदबाजों के सामने ओमान के बल्लेबाज बड़ी पारी नहीं खेल सके। शुऐब अल बलूशी ने सबसे ज्यादा 20 रन बनाए जबकि मोहम्मद ने दो रन जुबैर ने खाता नहीं खोला और वहीद सिर्फ एक रन बना सके। ईसा अल बलूशी ने सात रन बनाए।

    गेंदबाजी में भी अल बलूशी नाम का दबदबा देखने को मिला। मोहम्मद अल बलूशी शुऐब अल बलूशी और नवीद अल बलूशी ने मिलकर हॉन्ग कॉन्ग के पांच विकेट हासिल किए। मोहम्मद सबसे सफल गेंदबाज रहे जिन्होंने 17 रन देकर तीन विकेट अपने नाम किए।

    मोहम्मद अल बलूशी ने इसी साल ओमान के लिए टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में डेब्यू किया था। वह अब तक छह टी20 इंटरनेशनल मुकाबले खेल चुके हैं और उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 81 रन है जो उन्होंने बहरीन के खिलाफ बनाया था। शुऐब भी छह टी20 इंटरनेशनल खेल चुके हैं और उनके नाम 117 रन के साथ चार विकेट हैं।

    जुबैर अल बलूशी ने भी छह टी20 इंटरनेशनल मुकाबले खेले हैं जबकि वहीद ने हॉन्ग कॉन्ग के खिलाफ अपना अंतरराष्ट्रीय डेब्यू किया। नवीद अल बलूशी ने पांच टी20 इंटरनेशनल मैचों में सात विकेट हासिल किए हैं। फारिस अल बलूशी के नाम दो टी20 इंटरनेशनल मुकाबलों में 10 रन हैं।

    अब ओमान की टीम के सामने मलेशिया की चुनौती है। क्वार्टर फाइनल में जगह बनाने के लिए यह मुकाबला उसके अभियान में अहम साबित होगा। ऐसे में सभी की नजर इस बात पर होगी कि क्या अल बलूशी सरनेम वाले खिलाड़ियों से सजी ओमान की टीम अगले मुकाबले में अपने प्रदर्शन से भी सुर्खियां बटोर पाती है।

  • मैराथन में भारत की ऐतिहासिक वापसी सावन बरवाल ने जीता सिल्वर बनाया नया नेशनल रिकॉर्ड

    मैराथन में भारत की ऐतिहासिक वापसी सावन बरवाल ने जीता सिल्वर बनाया नया नेशनल रिकॉर्ड


    नई दिल्ली। एशियन गेम्स 2026 में भारतीय एथलेटिक्स के लिए 26 सितंबर का दिन बेहद खास बन गया। नागोया में भारत के लंबी दूरी के धावक सावन बरवाल ने पुरुष मैराथन में सिल्वर मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। उनके इस प्रदर्शन के साथ एशियन गेम्स की मैराथन स्पर्धा में भारत का 44 साल लंबा पदक का इंतजार खत्म हो गया। सावन ने 2 घंटे 11 मिनट 37 सेकंड का समय निकालकर रेस पूरी की। यह उनका पर्सनल बेस्ट प्रदर्शन होने के साथ राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी बन गया।

    मैराथन के फाइनल में जापान के इचिटाका यामाशिता ने 2 घंटे 10 मिनट 49 सेकंड के समय के साथ गोल्ड मेडल अपने नाम किया। सावन उनसे 48 सेकंड पीछे रहे। चीन के पेइयू फेंग ने 2 घंटे 12 मिनट 13 सेकंड के समय के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता। सावन ने रेस के शुरुआती हिस्से में जिस तरह का प्रदर्शन किया उससे साफ था कि वह पदक की मजबूत दावेदारी पेश कर रहे हैं।

    रेस की शुरुआत से ही सावन ने अपनी गति बनाए रखी। 5 किलोमीटर के पड़ाव पर वह दूसरे स्थान पर थे लेकिन 10 किलोमीटर तक पहुंचते पहुंचते उन्होंने बढ़त हासिल कर ली। 15 किलोमीटर और 20 किलोमीटर के पड़ाव पर भी सावन सबसे आगे बने रहे। हाफ मैराथन यानी 21.1 किलोमीटर की दूरी उन्होंने 1 घंटे 5 मिनट 54 सेकंड में पूरी की और उस समय भी वह रेस में आगे चल रहे थे।

    25 किलोमीटर तक सावन की बढ़त कायम रही और उन्होंने 1 घंटे 18 मिनट 19 सेकंड का समय दर्ज किया। इसके बाद जापान के यामाशिता ने रफ्तार बढ़ाई और 30 किलोमीटर के आसपास सावन को पीछे छोड़ दिया। हालांकि भारतीय धावक ने हार नहीं मानी और 35 किलोमीटर के पड़ाव तक फिर से बढ़त हासिल कर ली। रेस के अंतिम हिस्से में मुकाबला बेहद कड़ा रहा लेकिन 40 किलोमीटर के बाद यामाशिता ने निर्णायक बढ़त बना ली। अंत में सावन ने सिल्वर मेडल के साथ रेस पूरी की।

    इस पदक का ऐतिहासिक महत्व इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि भारत ने एशियन गेम्स में इससे पहले पुरुष मैराथन का पदक 1982 के दिल्ली एशियन गेम्स में जीता था। उससे पहले 1951 के एशियन गेम्स में भारत को मैराथन में गोल्ड और ब्रॉन्ज मेडल मिले थे। सावन का नागोया सिल्वर भारत के लिए 44 साल बाद इस स्पर्धा में आया पदक है। खास बात यह भी है कि 1982 के बाद यह पहला मौका है जब भारत ने देश के बाहर आयोजित एशियन गेम्स की मैराथन में पदक जीता है।

    सावन के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि वह इससे पहले राष्ट्रीय रिकॉर्ड अपने नाम कर चुके हैं। इसी साल अप्रैल में रॉटरडैम मैराथन में उन्होंने 2 घंटे 11 मिनट 58 सेकंड का समय निकालकर शिवनाथ सिंह के 48 साल पुराने राष्ट्रीय रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा था। शिवनाथ सिंह ने 1978 में 2 घंटे 12 मिनट का रिकॉर्ड बनाया था। अब नागोया में सावन ने अपने ही राष्ट्रीय रिकॉर्ड में और सुधार कर दिया।

    भारत के दूसरे धावक कार्तिक करकेरा भी इस फाइनल में उतरे थे। वह 19 धावकों के बीच 17वें स्थान पर रहे। वहीं सावन बरवाल का सिल्वर भारतीय एथलेटिक्स के लिए एक बड़ी उपलब्धि बन गया है।

  • Bigg Boss 20 में रीति तिवारी ने पार की हद तो सलमान खान ने लगा दी फटकार जानिए क्या हुआ था टास्क में

    Bigg Boss 20 में रीति तिवारी ने पार की हद तो सलमान खान ने लगा दी फटकार जानिए क्या हुआ था टास्क में


    नई दिल्ली। Bigg Boss 20 के घर में विवाद थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। कंटेस्टेंट्स के बीच लगातार बहस और टकराव देखने को मिल रहा है और अब रीति तिवारी से जुड़ा विवाद वीकेंड का वार तक पहुंच गया है। साथी कंटेस्टेंट काजी तौकीर और उदिति सिंह के साथ हुई तीखी बहस के बाद रीति के व्यवहार और भाषा को लेकर सवाल उठ रहे थे। अब शो के नए प्रोमो में सलमान खान भी इस पूरे मामले पर अपनी नाराजगी जाहिर करते नजर आ रहे हैं।

    दरअसल घर में कंटेस्टेंट्स के बीच एक दूसरे को डिस करने का टास्क रखा गया था। इसी दौरान रीति तिवारी और उदिति सिंह के बीच मुकाबला होना था। हालांकि उदिति के पीछे हटने के बाद काजी तौकीर इस मुकाबले में सामने आए। टास्क के दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई और माहौल लगातार गरमाता चला गया।

    आरोप है कि इस दौरान रीति ने उदिति और काजी के खिलाफ ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया जिसे शो के प्रसारण के दौरान म्यूट करना पड़ा। इस पर घर के अंदर भी मामला बढ़ गया। अपनी सफाई में रीति ने कहा कि उनके शब्दों का इस्तेमाल टास्क के दौरान राइमिंग के लिए किया गया था और उन्हें सामान्य स्लैंग की तरह इस्तेमाल किया गया।

    मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। एक अन्य टास्क के दौरान रीति और काजी के बीच फिर से तनाव देखने को मिला। इस दौरान रीति ने काजी को उनके पिता का हवाला देते हुए चेतावनी दी। इसके बाद घर का माहौल और ज्यादा गरमा गया। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर दर्शकों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं।

    अब वीकेंड का वार के प्रोमो में सलमान खान इस मामले पर अपनी बात रखते नजर आ रहे हैं। प्रोमो में सलमान ने रीति के व्यवहार को लेकर सवाल उठाया और कहा कि बदतमीजी की भी एक सीमा होती है। उन्होंने यह भी इशारा किया कि घर के बाकी सदस्य भी रीति को उकसाने में भूमिका निभा रहे थे।

    सलमान खान ने आसिफ खान से भी सवाल किया कि अगर इसी तरह की बात उनकी अपनी बहन के लिए कही गई होती तो क्या वह इसे आसानी से स्वीकार कर लेते। सलमान के इस सवाल के बाद शो में मौजूद कंटेस्टेंट्स का रिएक्शन भी देखने लायक रहा।

    Bigg Boss में अक्सर टास्क के दौरान प्रतियोगियों के बीच बहस देखने को मिलती है लेकिन कई बार बात निजी टिप्पणियों और आपत्तिजनक भाषा तक पहुंच जाती है। ऐसे मामलों में वीकेंड का वार में सलमान खान कंटेस्टेंट्स के व्यवहार पर सवाल उठाते रहे हैं। इस बार भी रीति तिवारी से जुड़े विवाद को लेकर सलमान का रुख प्रोमो में सख्त नजर आ रहा है।

    अब यह देखना दिलचस्प होगा कि वीकेंड का वार के पूरे एपिसोड में सलमान खान रीति तिवारी को क्या कहते हैं और रीति इस फटकार पर किस तरह अपनी सफाई देती हैं। साथ ही काजी तौकीर और उदिति सिंह के साथ आगे उनके रिश्ते किस दिशा में जाते हैं यह भी शो के आने वाले एपिसोड में देखने को मिलेगा।

  • सहवाग को मिला रियलिटी शो का ऑफर तो बच्चों ने कर दिया मना बोले पापा यहां तो खूब होते हैं झगड़े

    सहवाग को मिला रियलिटी शो का ऑफर तो बच्चों ने कर दिया मना बोले पापा यहां तो खूब होते हैं झगड़े


    नई दिल्ली। क्रिकेट के मैदान पर अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से दुनिया भर में पहचान बनाने वाले वीरेंद्र सहवाग अब मनोरंजन की दुनिया में एक नई पारी शुरू करने जा रहे हैं पूर्व भारतीय क्रिकेटर जल्द ही रियलिटी शो Rise and Fall 2 को होस्ट करते दिखाई देंगे। शो के प्रीमियर से पहले सहवाग ने अपनी नई जिम्मेदारी को लेकर कई दिलचस्प बातें साझा की हैं। सबसे ज्यादा चर्चा उनके बच्चों के रिएक्शन की हो रही है जिन्होंने पिता के इस फैसले को लेकर अपनी चिंता जाहिर कर दी थी।

    सहवाग ने बताया कि जब शो का प्रोमो सामने आया और उनके बच्चों को पता चला कि वह एक रियलिटी शो की मेजबानी करने वाले हैं तो उन्होंने पिता से सवाल कर दिया। बच्चों ने पूछा कि पापा आप यह शो क्यों कर रहे हैं। उन्हें लगा कि यह काम सहवाग के लिए सही नहीं होगा। बच्चों की चिंता की एक बड़ी वजह शो का फॉर्मेट था क्योंकि उन्हें पता था कि रियलिटी शो में प्रतियोगियों के बीच बहस और विवाद देखने को मिल सकते हैं।

    सहवाग के मुताबिक बच्चों ने उन्हें बताया कि ऐसे शो में अक्सर लड़ाई और बहस होती है। इसलिए उन्हें इस बात की चिंता थी कि उनके पिता इस तरह के माहौल का हिस्सा क्यों बन रहे हैं। हालांकि सहवाग ने बच्चों को समझाया कि उनके लिए भी यह बिल्कुल नया अनुभव है और जिंदगी में कभी कभी अलग तरह की चुनौतियों को स्वीकार करना चाहिए।

    दिलचस्प बात यह है कि सिर्फ सहवाग के बच्चों ने ही इस शो को लेकर संकोच नहीं जताया था बल्कि शुरुआत में खुद वीरेंद्र सहवाग भी इसकी मेजबानी के लिए तैयार नहीं थे। उन्होंने बताया कि जब उन्हें पहली बार Rise and Fall 2 को होस्ट करने का प्रस्ताव मिला था तो उन्होंने सीधे मना कर दिया था। उनका कहना था कि वह होस्टिंग नहीं कर सकते।

    इसके बाद शो की टीम ने सहवाग को इसके फॉर्मेट के बारे में विस्तार से समझाया। उन्हें शो की कुछ क्लिप्स भी दिखाई गईं और बताया गया कि यह लाइव कार्यक्रम नहीं है बल्कि पहले से रिकॉर्ड किया जाता है। टीम ने उन्हें भरोसा दिलाया कि शो के दौरान आने वाली किसी भी परेशानी में उन्हें पूरा सहयोग मिलेगा। इसके बाद सहवाग ने इसे अपने लिए एक नए चैलेंज के तौर पर लेने का फैसला किया।

    सहवाग ने यह भी बताया कि अब उन्हें शो की पूरी टीम से अच्छा सपोर्ट मिल रहा है। क्रिकेट से अलग कैमरे के सामने एक होस्ट की भूमिका निभाना उनके लिए नया अनुभव जरूर है लेकिन वह इसे लेकर उत्साहित हैं। क्रिकेट के कई दूसरे सितारे भी मनोरंजन की दुनिया से जुड़ चुके हैं। सौरव गांगुली से लेकर हरभजन सिंह शिखर धवन और रोहित शर्मा तक अलग अलग टीवी और मनोरंजन कार्यक्रमों में नजर आ चुके हैं।

    सहवाग का मानना है कि पहले क्रिकेटर्स के लिए मनोरंजन की दुनिया में ऐसे मौके कम होते थे। उन्होंने सौरव गांगुली का उदाहरण देते हुए बताया कि दादागिरी जैसे कार्यक्रमों के जरिए क्रिकेटर्स के लिए इस क्षेत्र में नई राह खुली। अब सहवाग खुद इसी नई भूमिका में नजर आने वाले हैं।

    वीरेंद्र सहवाग ने 20 अक्टूबर 2015 को अपने 37वें जन्मदिन पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से संन्यास लिया था। करीब डेढ़ दशक लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर के बाद अब उनकी एक नई पारी कैमरे के सामने शुरू होने जा रही है। Rise and Fall 2 का प्रीमियर 26 सितंबर को Amazon पर होना है। अब दर्शकों की नजर इस बात पर होगी कि क्रिकेट के मैदान वाला सहवाग का बेबाक अंदाज रियलिटी शो की मेजबानी में कितना अलग दिखाई देता है।

  • एशियन गेम्स में भारत का जोरदार प्रदर्शन शूटिंग में गोल्ड के बाद कबड्डी के दोनों फाइनल में एंट्री स्क्वैश में भी मेडल पक्का

    एशियन गेम्स में भारत का जोरदार प्रदर्शन शूटिंग में गोल्ड के बाद कबड्डी के दोनों फाइनल में एंट्री स्क्वैश में भी मेडल पक्का


    नई दिल्ली। एशियन गेम्स 2026 में भारत के लिए 25 सितंबर का दिन पदकों और शानदार मुकाबलों से भरा रहा। प्रतियोगिता के इस चरण में भारतीय खिलाड़ियों ने शूटिंग कबड्डी स्क्वैश हॉकी और बॉक्सिंग समेत कई खेलों में अपना दम दिखाया। दिन की शुरुआत ही शूटिंग में बड़ी उपलब्धि के साथ हुई जब कमलजीत और सुरुचि सिंह की जोड़ी ने 10 मीटर एयर पिस्टल मिक्स्ड टीम स्पर्धा में गोल्ड मेडल अपने नाम किया। भारतीय जोड़ी ने 484.6 अंक के एशियन गेम्स रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता। यह भारत का शूटिंग में पहला गोल्ड और एशियन गेम्स में कुल दूसरा गोल्ड रहा।

    शूटिंग में भारत को एक और पदक मिला। पुरुषों की 50 मीटर राइफल 3 पोजीशन टीम स्पर्धा में ऐश्वर्य प्रताप सिंह तोमर रुद्रांक्ष पाटिल और नीरज कुमार की तिकड़ी ने सिल्वर मेडल जीता। हालांकि व्यक्तिगत स्पर्धा में ऐश्वर्य प्रताप सिंह तोमर फाइनल तक पहुंचे लेकिन वह पांचवें स्थान पर रहे जबकि नीरज कुमार आठवें स्थान पर रहे। इस तरह शूटिंग में भारत का प्रदर्शन कई पदकों के साथ जारी रहा।

    कबड्डी के मैदान से भी भारत के लिए बड़ी खबर सामने आई। भारतीय महिला टीम ने सेमीफाइनल में नेपाल को 48-24 से हराकर फाइनल में जगह बनाई। इसके बाद पुरुष टीम ने भी थाईलैंड के खिलाफ शानदार प्रदर्शन करते हुए 66-28 की जीत दर्ज की और फाइनल का टिकट हासिल कर लिया। इस तरह एशियन गेम्स में भारतीय महिला और पुरुष दोनों कबड्डी टीमें खिताबी मुकाबले में पहुंच गईं।

    स्क्वैश में भी भारत के खाते में पदक पक्के हुए। अभय सिंह ने पुरुष सिंगल्स के क्वार्टर फाइनल में जापान के रयुनोसुके त्सुकुए को 11-4 11-3 11-6 से हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई। महिला सिंगल्स में अनाहत सिंह ने हमवतन तन्वी खन्ना को 3-0 से हराकर अंतिम चार में प्रवेश किया। मिक्स्ड डबल्स में जोशना चिनप्पा और वेलवन सेंथिलकुमार की जोड़ी ने भी सेमीफाइनल में जगह बनाकर पदक सुनिश्चित किया।

    हॉकी में भी भारतीय महिला टीम ने जापान के खिलाफ 3-1 से जीत दर्ज की। भारत की ओर से लालरेमसियामी इशिका और नवनीत ने गोल किए। इस जीत के साथ भारतीय टीम ने सेमीफाइनल में जगह बनाई। वहीं बॉक्सिंग में सचिन सिवाच ने 60 किलोग्राम वर्ग में मोहम्मद अबू जाजेह को 4-1 से हराकर क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया और वह पदक से एक जीत दूर पहुंच गए।

    टेबल टेनिस में भारत को कुछ सफलता मिली तो कुछ मुकाबलों में निराशा भी हाथ लगी। दिव्या चितले और मनुष शाह की जोड़ी ने सेमीफाइनल में पहुंचकर पदक पक्का किया जबकि मानव ठक्कर का पुरुष सिंगल्स अभियान दूसरे दौर में हार के साथ खत्म हो गया। भारतीय तैराकों ने भी फाइनल में जगह बनाकर उम्मीदें कायम रखीं। साजन प्रकाश पुरुषों की 200 मीटर बटरफ्लाई के फाइनल में पहुंचे जबकि ऋषभ दास और उत्कर्ष पाटिल ने 200 मीटर बैकस्ट्रोक के फाइनल में जगह बनाई।

    25 सितंबर की शुरुआत भारत ने 17 पदकों के साथ की थी और शूटिंग के गोल्ड तथा सिल्वर के बाद पदक संख्या 19 तक पहुंच गई। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार भारत के खाते में अब 2 गोल्ड 8 सिल्वर और 9 ब्रॉन्ज हैं। एशियन गेम्स में भारतीय दल के लिए आगे भी एथलेटिक्स कबड्डी शूटिंग स्क्वैश बैडमिंटन और अन्य खेलों में मुकाबले जारी हैं।

  • नागोया एशियाई खेलों में भारत की बड़ी चुनौती, 17 मेडल के बाद सिर्फ एक गोल्ड, हांगझोउ के प्रदर्शन से कितना बदला समीकरण

    नागोया एशियाई खेलों में भारत की बड़ी चुनौती, 17 मेडल के बाद सिर्फ एक गोल्ड, हांगझोउ के प्रदर्शन से कितना बदला समीकरण


    नई दिल्ली। एशियन गेम्स 2026 में भारत के खाते में 24 सितंबर तक कुल 17 मेडल आ चुके हैं लेकिन इनमें गोल्ड सिर्फ एक है। भारत ने 7 सिल्वर और 9 ब्रॉन्ज मेडल भी जीते हैं। पदकों की कुल संख्या देखकर प्रदर्शन सामान्य नजर आ सकता है लेकिन मेडल टैली में भारत 14वें स्थान पर है और यही आंकड़ा भारतीय खेल व्यवस्था के सामने कई सवाल खड़े कर रहा है। खास बात यह है कि नागोया एशियन गेम्स की तैयारी के लिए पिछले तीन साल में खिलाड़ियों की ट्रेनिंग इंटरनेशनल एक्सपोजर उपकरण कोचिंग और विशेषज्ञ सेवाओं पर 702.86 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इसके अलावा टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम यानी TOPS के जरिए 97.84 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इस तरह कुल सरकारी निवेश करीब 800.70 करोड़ रुपये तक पहुंचता है।

    नागोया में भारत का एकमात्र गोल्ड महिला क्रिकेट टीम ने जीता है। भारतीय टीम ने श्रीलंका को 147 रनों से हराकर लगातार दूसरी बार एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसके बाद भारत को सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल जरूर मिले लेकिन गोल्ड की संख्या में बढ़ोतरी नहीं हो सकी। यही आंकड़ा सबसे ज्यादा चर्चा में है क्योंकि इससे पहले हांगझोउ एशियन गेम्स में भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 106 मेडल जीते थे। इनमें 28 गोल्ड 38 सिल्वर और 40 ब्रॉन्ज शामिल थे। भारत उस प्रदर्शन के साथ चौथे स्थान पर रहा था।

    हांगझोउ के बाद भारतीय खेलों से उम्मीदें भी काफी बढ़ गई हैं। पहली बार 100 से ज्यादा मेडल जीतने के बाद अब एशियन गेम्स में भारत के प्रदर्शन को उसी पैमाने पर देखा जा रहा है। हालांकि नागोया गेम्स अभी खत्म नहीं हुए हैं इसलिए अंतिम मेडल टैली आने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। भारत के कई खेलों में अभी मुकाबले बाकी हैं और आने वाले दिनों में मेडल की संख्या बढ़ सकती है।

    इस बार भारत ने 501 खिलाड़ियों का दल उतारा है जिसमें 310 खिलाड़ी पहली बार एशियन गेम्स में हिस्सा ले रहे हैं। टीम के साथ 265 सदस्यीय सपोर्ट स्टाफ भी मौजूद है। तैयारी पर खर्च की बात करें तो इंटरनेशनल एक्सपोजर पर 251.4 करोड़ रुपये घरेलू ट्रेनिंग पर 118.3 करोड़ रुपये उपकरणों पर 89.2 करोड़ रुपये विदेशी विशेषज्ञों पर 86.3 करोड़ रुपये और विदेशी ट्रेनिंग पर 39.8 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इन आंकड़ों से साफ है कि तैयारी का दायरा काफी बड़ा रहा है।

    भारत की चुनौती केवल मेडल की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है बल्कि अलग अलग खेलों में गोल्ड जीतने की क्षमता बढ़ाना भी महत्वपूर्ण है। हांगझोउ में शूटिंग और एथलेटिक्स ने भारत को बड़ी संख्या में पदक दिलाए थे। एथलेटिक्स से 29 और शूटिंग से 22 पदक आए थे। शूटिंग ने 7 गोल्ड जबकि एथलेटिक्स ने 6 गोल्ड जीते थे। नागोया में शुरुआती चरण में इन खेलों से वैसी गोल्ड बढ़त दिखाई नहीं दी है।

    मेडल टैली में चीन जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश भारत से आगे हैं। हांगझोउ में भी भारत इन देशों के बाद चौथे स्थान पर रहा था। ऐसे में नागोया भारतीय खेलों के लिए सिर्फ पदकों की संख्या बढ़ाने का मंच नहीं है बल्कि अलग अलग खेलों में मजबूत प्रदर्शन की क्षमता परखने का अवसर भी है। एशियन गेम्स का प्रदर्शन लॉस एंजिलिस 2028 ओलंपिक की तैयारियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। इसलिए नागोया के अंतिम आंकड़े आने के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत कुल कितने मेडल जीतता है और उनमें गोल्ड की हिस्सेदारी कितनी रहती है।

  • आखिरी 500 मीटर में बदला पूरा मुकाबला सतनाम-सलमान ने ऐसे जीता रोइंग में ब्रॉन्ज मेडल

    आखिरी 500 मीटर में बदला पूरा मुकाबला सतनाम-सलमान ने ऐसे जीता रोइंग में ब्रॉन्ज मेडल


    नई दिल्ली। एशियन गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन जारी है। नागोया में गुरुवार को रोइंग के पुरुष डबल स्कल्स मुकाबले में सतनाम सिंह और सलमान खान की जोड़ी ने भारत के लिए ब्रॉन्ज मेडल जीत लिया। भारतीय जोड़ी ने नागरागावा इंटरनेशनल रेगाटा कोर्स पर 6 मिनट 13.25 सेकेंड का समय दर्ज किया। मुकाबले में दोनों रोअर्स ने शुरुआत से ही दमदार प्रदर्शन किया और लंबे समय तक पदक की मजबूत स्थिति में बने रहे।

    सतनाम सिंह और सलमान खान 1500 मीटर तक दूसरे स्थान पर चल रहे थे। हालांकि आखिरी 500 मीटर में उनकी रफ्तार थोड़ी कम हुई और भारतीय जोड़ी तीसरे स्थान पर पहुंच गई। इसके बावजूद दोनों ने अपनी स्थिति बरकरार रखी और भारत के खाते में एक और पदक जोड़ दिया। चीन की यी शुडी और यीदे नी की जोड़ी ने 6 मिनट 9.37 सेकेंड के समय के साथ गोल्ड मेडल जीता। उज्बेकिस्तान की पावेल सोरिन और मेखरोजबेक मामातकुलोव की जोड़ी ने 6 मिनट 10.49 सेकेंड के समय के साथ सिल्वर हासिल किया।

    इस पदक के साथ सतनाम सिंह ने एशियन गेम्स में लगातार दूसरी बार रोइंग में मेडल जीता है। इससे पहले उन्होंने 2023 हांगझोऊ एशियन गेम्स में पुरुषों के क्वाड्रपल स्कल्स इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया था। अब डबल स्कल्स में सलमान खान के साथ उनकी जोड़ी ने भारत को एक और पदक दिलाया है।

    उत्तर प्रदेश के अमेठी के रहने वाले सलमान खान का रोइंग करियर साल 2018 में शुरू हुआ। वह भारतीय सेना के बॉम्बे इंजीनियर ग्रुप में शामिल हुए थे। उनके कोचों ने उनकी क्षमता को पहचाना और उन्हें रोइंग टीम का हिस्सा बनाया। शुरुआती दौर में उन्होंने बटालियन और इंटर सेंटर प्रतियोगिताओं में पदक जीते। एक समय ऐसा भी आया जब सलमान ने खेल छोड़ने के बारे में सोचा लेकिन कोचों के भरोसे ने उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। बाद में उन्हें आर्मी रोइंग नोड में प्रशिक्षण का मौका मिला।

    साल 2023 में सलमान को टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम में शामिल किया गया। 2024 एशियन रोइंग कप में गोल्ड जीतने के बाद उन्हें भारतीय सेना में नायब सूबेदार के पद पर प्रमोशन मिला।

    वहीं पंजाब के मानसा जिले के पट्टा मालुका गांव के सतनाम सिंह ने रोइंग से पहले नेशनल लेवल पर हैंडबॉल खेला था। 2018 में ओलंपियन स्वर्ण सिंह विर्क की सलाह पर उन्होंने रोइंग को अपनाया। इसके बाद उन्होंने तेजी से पहचान बनाई। सतनाम 2018 यूथ ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और सीनियर नेशनल रोइंग चैंपियनशिप में भी खिताब जीत चुके हैं।

    इस मुकाबले में भारत को एक और पदक की उम्मीद थी। पुरुषों के सिंगल स्कल्स फाइनल में बलराज पंवार 6 मिनट 54.80 सेकेंड के समय के साथ चौथे स्थान पर रहे। वह 1500 मीटर तक दूसरे स्थान पर थे लेकिन अंतिम 500 मीटर में पीछे हो गए। इसके बावजूद सतनाम और सलमान की जोड़ी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए रोइंग में भारत को ब्रॉन्ज दिलाकर देश का गौरव बढ़ाया।

  • 2027 वर्ल्ड कप के लिए अभी से तैयारी में जुटी टीम इंडिया गंभीर ने बताया रोहित-विराट और हार्दिक-बुमराह का महत्व

    2027 वर्ल्ड कप के लिए अभी से तैयारी में जुटी टीम इंडिया गंभीर ने बताया रोहित-विराट और हार्दिक-बुमराह का महत्व


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम इस समय वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे सीरीज की तैयारियों में जुटी है लेकिन टीम की नजरें सिर्फ मौजूदा मुकाबलों पर नहीं हैं। भारतीय टीम के हेड कोच गौतम गंभीर ने साल 2027 में होने वाले वनडे वर्ल्ड कप को लेकर अपनी रणनीति पर खुलकर बात की है। गंभीर के बयान के बाद सबसे ज्यादा चर्चा रोहित शर्मा और विराट कोहली की भूमिका को लेकर हो रही है। दोनों दिग्गजों ने टेस्ट और टी20 क्रिकेट से संन्यास ले लिया है लेकिन वनडे फॉर्मेट में अभी भी टीम का हिस्सा हैं।

    गौतम गंभीर ने कप्तान शुभमन गिल की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि वनडे क्रिकेट में गिल बेहद भाग्यशाली हैं क्योंकि उन्हें रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे अनुभवी खिलाड़ियों का साथ मिल रहा है। गंभीर के मुताबिक रोहित और विराट सिर्फ मैदान पर ही नहीं बल्कि मैदान के बाहर भी गिल की मदद कर सकते हैं। ऐसे में युवा कप्तान को इन दोनों दिग्गजों के अनुभव से काफी कुछ सीखने का मौका मिल रहा है।

    गंभीर ने गिल के नेतृत्व की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि कम उम्र में कप्तानी की जिम्मेदारी संभालने के बावजूद गिल ने मैदान पर शांत स्वभाव दिखाया है। वह टीम के हित में फैसले लेने से पीछे नहीं हटते और उनका रवैया निस्वार्थ रहा है। कोच के बयान से साफ है कि भारतीय टीम मैनेजमेंट गिल की कप्तानी को भविष्य की बड़ी योजनाओं के लिहाज से देख रहा है।

    हालांकि 2027 वर्ल्ड कप को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि उस समय रोहित शर्मा और विराट कोहली टीम में होंगे या नहीं। गंभीर ने इस सवाल पर सीधे तौर पर कोई अंतिम फैसला नहीं बताया लेकिन वनडे टीम में दोनों की मौजूदगी और गिल को मिल रहे उनके अनुभव को अहम बताया है। इसका मतलब यह है कि फिलहाल टीम मैनेजमेंट वनडे फॉर्मेट में उपलब्ध खिलाड़ियों के साथ आगे की तैयारी पर ध्यान दे रहा है।

    गंभीर ने 2027 वर्ल्ड कप की योजना में हार्दिक पंड्या और जसप्रीत बुमराह को भी बेहद अहम बताया। उन्होंने हार्दिक को ऐसा ऑलराउंडर बताया जिसकी उपयोगिता किसी भी टीम के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है। हार्दिक जरूरत पड़ने पर गेंद से पूरे दस ओवर का योगदान दे सकते हैं और नंबर छह या सात पर बल्लेबाजी करते हुए तेजी से रन बनाने की क्षमता रखते हैं।

    जसप्रीत बुमराह को लेकर भी टीम मैनेजमेंट की योजना महत्वपूर्ण दिखाई देती है। गंभीर ने संकेत दिया कि बड़े टूर्नामेंट से पहले खिलाड़ियों को पर्याप्त मैच खेलने की जरूरत है। वर्कलोड मैनेजमेंट जरूरी है लेकिन लगातार क्रिकेट से दूरी भी खिलाड़ियों की लय को प्रभावित कर सकती है। इसलिए वर्ल्ड कप से पहले सही मात्रा में गेम टाइम देना भारतीय टीम की योजना का अहम हिस्सा होगा।

    2027 वनडे वर्ल्ड कप अभी दूर है लेकिन भारतीय टीम ने इसकी तैयारी को लेकर अपनी दिशा तय करनी शुरू कर दी है। रोहित और विराट का अनुभव गिल की कप्तानी के लिए कितना महत्वपूर्ण रहेगा और आने वाले समय में दोनों दिग्गज वर्ल्ड कप तक टीम का हिस्सा बने रहेंगे या नहीं यह आने वाले मुकाबलों और चयन संबंधी फैसलों के साथ स्पष्ट होगा। फिलहाल गंभीर का बयान भारतीय क्रिकेट के भविष्य और 2027 वर्ल्ड कप की तैयारियों को लेकर चर्चा जरूर तेज कर चुका है।

  • रोशिबिना देवी ने फिर बढ़ाया भारत का मान गोल्ड का सपना टूटा लेकिन लगातार तीसरे एशियन गेम्स में जीता मेडल

    रोशिबिना देवी ने फिर बढ़ाया भारत का मान गोल्ड का सपना टूटा लेकिन लगातार तीसरे एशियन गेम्स में जीता मेडल


    नई दिल्ली। भारत की स्टार वुशू खिलाड़ी रोशिबिना देवी नाओरेम ने एशियन गेम्स 2026 में सिल्वर मेडल जीतकर बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली है। नागोया में आयोजित प्रतियोगिता के महिला 60 किलोग्राम सांडा वर्ग के फाइनल में रोशिबिना का सामना चीन की झांग शियाओयू से हुआ। खिताबी मुकाबले में भारतीय खिलाड़ी को 0-2 से हार का सामना करना पड़ा। झांग ने दोनों राउंड में 5-0 की बढ़त बनाकर मुकाबला कुल 10-0 से अपने नाम किया और गोल्ड मेडल जीता।

    रोशिबिना फाइनल में गोल्ड से जरूर चूक गईं लेकिन उनका एशियन गेम्स में पदक जीतने का सिलसिला लगातार तीसरी बार जारी रहा। वह 2018 के जकार्ता-पालेमबांग एशियन गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीत चुकी हैं। इसके बाद 2023 के हांगझोऊ एशियन गेम्स में उन्होंने सिल्वर मेडल अपने नाम किया था। अब 2026 में भी सिल्वर जीतकर उन्होंने एशियन गेम्स में लगातार तीन संस्करणों में पदक जीतने की उपलब्धि हासिल कर ली है।

    रोशिबिना देवी एशियन गेम्स में वुशू के लगातार तीन पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन गई हैं। उनके लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि तीनों पदक महिला 60 किलोग्राम सांडा वर्ग में ही आए हैं। 2018 में ब्रॉन्ज के बाद 2023 और 2026 में सिल्वर जीतकर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी निरंतरता दिखाई है।

    इस बार फाइनल मुकाबले में चीन की झांग शियाओयू ने शुरुआत से ही बढ़त बनाए रखी। पहले राउंड में झांग ने 5-0 से जीत दर्ज की और दूसरे राउंड में भी यही स्कोर दोहराया। इस तरह मुकाबला 10-0 के स्कोर पर समाप्त हुआ। रोशिबिना को सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा।

    मणिपुर के बिष्णुपुर जिले के क्वासिफाई गांव से आने वाली रोशिबिना देवी किसान परिवार से ताल्लुक रखती हैं। वह इम्फाल स्थित SAI NCOE में प्रशिक्षण लेती हैं। महिला 60 किलोग्राम सांडा वर्ग में वह कोच मैबाम प्रेमकुमार सिंह की निगरानी में तैयारी करती हैं। शुरुआती दौर से ही वुशू में उनकी रुचि रही और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उन्होंने लगातार बेहतर प्रदर्शन किया।

    रोशिबिना ने 2019 साउथ एशियन गेम्स में सांडा 60 किलोग्राम वर्ग में गोल्ड मेडल जीता था। इसके अलावा 2017 एशियन जूनियर वुशू चैंपियनशिप में भी उन्होंने गोल्ड हासिल किया था। 2016 वर्ल्ड जूनियर वुशू चैंपियनशिप में उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल जीता। 2023 मॉस्को वुशू स्टार चैंपियनशिप में भी उनके नाम गोल्ड रहा।

    उनकी उपलब्धियों को देखते हुए 2023 में उन्हें अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। इसी वर्ष इंटरनेशनल वुशू फेडरेशन ने उन्हें Female Wushu Athlete of the Year Sanda का सम्मान भी दिया था। एशियन गेम्स 2026 का सिल्वर उनके पदकों की सूची में एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ गई है।

    गोल्ड मेडल मुकाबले में 10-0 की हार के बावजूद रोशिबिना का एशियन गेम्स रिकॉर्ड खास बन गया है। 2018 से शुरू हुआ उनका पदक सफर 2023 और फिर 2026 में भी जारी रहा। लगातार तीन एशियन गेम्स में पदक जीतने वाली भारतीय महिला वुशू खिलाड़ी के तौर पर उन्होंने इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया है।