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  • भारतीय मुक्केबाजों का गोल्डन पंच, अंकुश पंघाल बोले- विश्वास नहीं खोया, इसलिए मिली जीत

    भारतीय मुक्केबाजों का गोल्डन पंच, अंकुश पंघाल बोले- विश्वास नहीं खोया, इसलिए मिली जीत


    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का 10वां दिन भारतीय मुक्केबाजी के लिए यादगार साबित हुआ। भारतीय बॉक्सरों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 10 पदक अपने नाम किए, जिनमें सात स्वर्ण पदक शामिल रहे। इस दमदार प्रदर्शन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि भारतीय मुक्केबाजी विश्व स्तर पर लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही है। स्वर्ण पदक जीतने वाले मुक्केबाज अंकुश पंघाल ने अपनी सफलता का सबसे बड़ा राज आत्मविश्वास को बताया और कहा कि कठिन समय में खुद पर भरोसा बनाए रखना ही उनकी जीत की सबसे बड़ी वजह बना।

    फाइनल मुकाबले के बाद अंकुश पंघाल ने कहा कि शुरुआत उनके लिए बिल्कुल आसान नहीं रही। पहले बाउट में वह 0-5 से पीछे हो गए थे, जिससे उन पर काफी दबाव बन गया था। हालांकि उन्होंने घबराने के बजाय अपने खेल और खुद की क्षमता पर भरोसा बनाए रखा। यही आत्मविश्वास अंत तक उनके साथ रहा और आखिरकार उन्होंने मुकाबला पलटते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। अंकुश ने कहा कि परिवार और कोच का विश्वास हमेशा उनके साथ रहा और यही वजह है कि वह दबाव के बावजूद अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सके। उन्होंने अपना स्वर्ण पदक अपने परिवार और कोच को समर्पित किया तथा कहा कि अब उनका अगला लक्ष्य एशियाई खेलों में भी स्वर्ण पदक जीतना है।

    महिला मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन को फाइनल में हार का सामना करना पड़ा और उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा। मुकाबले के बाद उन्होंने स्वीकार किया कि स्वर्ण पदक नहीं जीत पाने का थोड़ा अफसोस जरूर है लेकिन टीम इंडिया के शानदार प्रदर्शन ने उनकी खुशी बढ़ा दी। उन्होंने कहा कि यह उनका पहला कॉमनवेल्थ गेम्स पदक है और इसलिए इसकी अहमियत उनके लिए बेहद खास है। लवलीना ने कहा कि अब वह एशियाई खेलों की तैयारी में पूरी ताकत झोंकेंगी और वहां स्वर्ण पदक जीतने की कोशिश करेंगी। उन्होंने अपना यह पदक असम में बाढ़ से प्रभावित लोगों को समर्पित करते हुए उनके जल्द सामान्य जीवन में लौटने की कामना भी की।

    पुरुषों की 90 प्लस किलोग्राम स्पर्धा में रजत पदक जीतने वाले नरेंद्र ने भी अपने प्रदर्शन का ईमानदारी से आकलन किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने मुकाबले में अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश की लेकिन विरोधी मुक्केबाज की रणनीति उनके अनुमान से अलग थी। उनके अनुसार प्रतिद्वंद्वी लगातार मूवमेंट करता रहा जिससे उसे प्रभावी ढंग से पकड़ पाना मुश्किल साबित हुआ। नरेंद्र ने कहा कि वह अपनी कमियों पर काम करेंगे और एशियाई खेलों में इस हार की भरपाई करने का प्रयास करेंगे।

    स्वर्ण पदक विजेता सचिन सिवाच ने भी अपने फाइनल मुकाबले की कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि शुरुआती दो राउंड में वह 2-3 से पीछे थे और उनके पास आखिरी राउंड में सब कुछ दांव पर लगाने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। इसी सोच के साथ उन्होंने लगातार आक्रामक अंदाज अपनाया और विरोधी पर दबाव बनाया। सचिन ने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास था कि वह मुकाबला पलट सकते हैं और आखिरकार उनका विश्वास सही साबित हुआ। उनके अनुसार खेल में तकनीक जितनी जरूरी है उतना ही जरूरी मानसिक मजबूती और जीत का विश्वास भी होता है।

    भारतीय मुक्केबाजों का यह प्रदर्शन केवल पदकों तक सीमित नहीं रहा बल्कि उसने यह भी दिखाया कि मेहनत, आत्मविश्वास और मजबूत मानसिकता के दम पर किसी भी चुनौती को पार किया जा सकता है। अब सभी खिलाड़ियों की नजरें एशियाई खेलों और आने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं पर हैं, जहां वे इसी शानदार लय को बरकरार रखते हुए भारत के लिए और अधिक पदक जीतने का लक्ष्य लेकर उतरेंगे।

  • देश सेवा से खेलों तक जीत का सफर, पैरा एथलीट सोमन राणा ने कॉमनवेल्थ में रचा इतिहास

    देश सेवा से खेलों तक जीत का सफर, पैरा एथलीट सोमन राणा ने कॉमनवेल्थ में रचा इतिहास


    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए कई ऐतिहासिक पल देखने को मिले लेकिन शॉट पुट एफ57 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाले पैरा एथलीट सोमन राणा की कहानी हर भारतीय के लिए प्रेरणा बन गई। भारतीय सेना में देश की सेवा करते हुए अपना दाहिना पैर गंवाने वाले सोमन ने हिम्मत नहीं हारी बल्कि कठिन परिस्थितियों को चुनौती देकर ऐसा मुकाम हासिल किया जिस पर पूरा देश गर्व कर रहा है। उनकी यह जीत केवल एक स्वर्ण पदक नहीं बल्कि साहस, आत्मविश्वास और अदम्य इच्छाशक्ति की मिसाल है।

    ग्लासगो में आयोजित प्रतियोगिता में सोमन राणा ने 13.40 मीटर की दूरी तक गोला फेंकते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। यह उनके करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा। इससे पहले वह 2022 के एशियाई पैरा खेलों में रजत पदक जीत चुके थे, लेकिन इस बार उन्होंने अपनी मेहनत और लगातार अभ्यास के दम पर स्वर्णिम सफलता हासिल कर ली।

    सोमन राणा ने बताया कि उनका जीवन वर्ष 2006 में पूरी तरह बदल गया था। भारतीय सेना में ड्यूटी के दौरान हुए हादसे में उन्होंने अपना दाहिना पैर खो दिया। उस समय उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती सामान्य जीवन में लौटने की थी। उन्होंने कहा कि जब किसी व्यक्ति को मामूली चोट लगती है तो चलना भी मुश्किल हो जाता है, लेकिन उनका पूरा पैर चला गया था। ऐसे में कृत्रिम पैर के सहारे दोबारा चलना और फिर खेलों में उतरना बेहद कठिन था।

    उन्होंने बताया कि शुरुआती दिनों में उन्हें यह समझ ही नहीं आता था कि कृत्रिम पैर के साथ सामान्य जीवन कैसे जिएंगे। लेकिन समय के साथ उन्होंने खुद को संभाला और नई परिस्थितियों के अनुरूप ढालना शुरू किया। वर्ष 2017 में उन्हें पैरालंपिक खेलों के बारे में जानकारी मिली और तभी उन्होंने तय कर लिया कि अब खेलों के जरिए देश के लिए कुछ बड़ा करना है।

    सोमन ने कहा कि दूसरे पैरा खिलाड़ियों को देखकर उनके भीतर नया आत्मविश्वास पैदा हुआ। उन्होंने महसूस किया कि कई खिलाड़ी ऐसे हैं जिनके दोनों पैर नहीं हैं फिर भी वे दुनिया भर में देश का नाम रोशन कर रहे हैं। यही सोच उनके लिए सबसे बड़ी प्रेरणा बनी। उन्होंने अपने डर को पीछे छोड़कर लगातार मेहनत की और हर दिन खुद को पहले से बेहतर बनाने में जुट गए।

    उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय भारतीय सेना, पैरालंपिक कमेटी ऑफ इंडिया, भारतीय खेल प्राधिकरण और अपने परिवार को दिया। सोमन ने कहा कि इन सभी का सहयोग और विश्वास ही उन्हें इस मुकाम तक लेकर आया। अगर परिवार और संस्थाओं का साथ नहीं मिलता तो शायद यह सपना पूरा करना इतना आसान नहीं होता।

    सोमन राणा की कहानी यह साबित करती है कि जीवन में मुश्किलें चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हों, अगर इरादे मजबूत हों तो हर चुनौती को अवसर में बदला जा सकता है। उन्होंने देश की रक्षा करते हुए अपना एक पैर खोया लेकिन उसी जज्बे के साथ खेल के मैदान में उतरकर भारत को स्वर्ण पदक दिलाया। उनकी यह उपलब्धि लाखों युवाओं और दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में मिला यह स्वर्ण पदक केवल सोमन राणा की व्यक्तिगत जीत नहीं बल्कि भारतीय सेना, खेल जगत और पूरे देश के लिए गर्व का क्षण है। उनका संघर्ष और सफलता आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देती है कि सच्ची जीत शरीर की ताकत से नहीं बल्कि मन की दृढ़ता और हौसले से हासिल होती है।

  • कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की शानदार सफलता, राष्ट्रपति मुर्मु और उपराष्ट्रपति ने खिलाड़ियों को दी बधाई

    कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की शानदार सफलता, राष्ट्रपति मुर्मु और उपराष्ट्रपति ने खिलाड़ियों को दी बधाई


    नई दिल्ली। भारत के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का 10वां दिन ऐतिहासिक उपलब्धियों से भरा रहा। भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए एक ही दिन में 16 पदक अपने नाम किए, जिनमें मुक्केबाजी से 10 पदक शामिल रहे। इस शानदार सफलता पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने खिलाड़ियों को बधाई देते हुए कहा कि उनके साहस, समर्पण और संघर्ष ने पूरे देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने लंबी दूरी के धावक गुलवीर सिंह की ऐतिहासिक उपलब्धि की विशेष सराहना की। उन्होंने कहा कि पुरुषों की 5000 मीटर दौड़ में ब्रॉन्ज और इससे पहले 10000 मीटर में सिल्वर मेडल जीतकर गुलवीर ने कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय एथलेटिक्स के इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया है। राष्ट्रपति ने कहा कि दोनों स्पर्धाओं में भारत के लिए पहला पदक जीतना न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है बल्कि आने वाली पीढ़ियों के खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा बनेगा।

    राष्ट्रपति ने भारतीय मुक्केबाजों के शानदार प्रदर्शन को भी देश के लिए गर्व का क्षण बताया। पुरुषों के 90 प्लस किलोग्राम वर्ग में सिल्वर जीतने वाले नरेंद्र बेरवाल की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि कठिन मुकाबलों में उनका जुझारूपन और आत्मविश्वास भविष्य की बड़ी सफलताओं का संकेत है। पुरुषों के 80 किलोग्राम वर्ग में गोल्ड जीतने वाले अंकुश पंघाल को बधाई देते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि रिंग में उनके बेहतरीन प्रदर्शन ने पूरे देश को गौरवान्वित किया है और तिरंगे को सबसे ऊंचे स्थान पर पहुंचाया है।

    60 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतने वाले सचिन सिवाच की प्रशंसा करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि फाइनल मुकाबले में उनका धैर्य, संयम और शानदार तकनीक उन्हें स्वर्ण पदक तक लेकर गई। उन्होंने विश्वास जताया कि सचिन भविष्य में भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन करेंगे। महिला मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन के सिल्वर मेडल को भी उन्होंने भारतीय खेलों की बड़ी उपलब्धि बताया और कहा कि उनका अनुशासन तथा दृढ़ संकल्प हर खिलाड़ी के लिए प्रेरणा है।

    उधर उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने भी भारतीय मुक्केबाजों के प्रदर्शन की खुलकर सराहना की। उन्होंने अरुंधति चौधरी, सचिन सिवाच और अंकुश पंघाल को गोल्ड मेडल जीतने पर बधाई देते हुए कहा कि इन खिलाड़ियों ने अपने शानदार प्रदर्शन और अटूट जज्बे से देश का सम्मान बढ़ाया है। साथ ही लवलीना बोरगोहेन के सिल्वर मेडल को भी उन्होंने भारत के लिए गर्व का क्षण बताया।

    उपराष्ट्रपति ने महिलाओं के 60 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण जीतने वाली प्रिया घांगस और 51 किलोग्राम वर्ग में गोल्ड जीतने वाली साक्षी चौधरी को भी शुभकामनाएं दीं। इसके अलावा महिलाओं की 63 किलोग्राम जूडो स्पर्धा में कांस्य पदक जीतने वाली उन्नति शर्मा की उपलब्धि को भी उन्होंने देश के लिए गौरवपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय खिलाड़ियों का संघर्ष, मेहनत और समर्पण पूरे देश के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है।

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का लगातार शानदार प्रदर्शन यह साबित कर रहा है कि देश खेलों के हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रहा है। राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति की ओर से मिली सराहना ने खिलाड़ियों का मनोबल और बढ़ाया है। अब पूरे देश की नजरें आने वाले मुकाबलों पर हैं, जहां भारतीय खिलाड़ी पदकों की संख्या बढ़ाकर इतिहास रचने की तैयारी में जुटे हैं।

  • CWG 2026: भारत की पदक तालिका में लंबी छलांग….एक दिन में 8 गोल्ड सहित रिकॉर्ड 16 मेडल जीते

    CWG 2026: भारत की पदक तालिका में लंबी छलांग….एक दिन में 8 गोल्ड सहित रिकॉर्ड 16 मेडल जीते


    नई दिल्ली।
    ग्लासगो में जारी कॉमनवेल्थ गेम्स (Glasgow Commonwealth Games) के 10वें दिन भारत (India) की झोली में रिकॉर्ड 16 मेडल (Record 16 medals) आए। इन मेडल के दम पर भारत ने ओवरऑल मेडल टैली में लंबी छलांग लगाई है। भारत अब कुल 39 मेडल के साथ चौथे पायदान पर पहुंच गया है।

    भारत ने 10वें दिन 8 गोल्ड, 5 सिल्वर और 3 बॉन्ज मेडल जीते, जिसमें 7 गोल्ड तो बॉक्सिंग में आए। बॉक्सर प्रीति पवार, जैस्मीन लैम्बोरिया, साक्षी चौधरी, प्रिया घनघस, अरुंधति चौधरी, सचिन सिवाच और अंकुश पंघाल ने टॉप मेडल जीते, जबकि जदुमणि सिंह, लवलीना बोरगोहेन और नरेंद्र बेरवाल ने अपने-अपने वेट कैटेगरी में सिल्वर मेडल जीते। लॉन्ग-डिस्टेंस रनर गुलवीर सिंह ने पुरुषों की 5000m फाइनल में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर CWG 2026 का अपना दूसरा मेडल जीता। दूसरी ओर, पुरुषों के F57 शॉट पुट इवेंट में भारत 1-2 पर रहा, जिसमें सोमन राणा ने गोल्ड और शुभम जुयाल ने सिल्वर मेडल जीता। पुरुषों के ट्रिपल जंप इवेंट में, प्रवीण चित्रवेल ने सिल्वर मेडल जीता, जबकि सेल्वा प्रभु थिरुमारन ने ब्रॉन्ज़ मेडल जीता। जूडोका उन्नति शर्मा ने भी ब्रॉन्ज़ मेडल जीता। भारत के कुल 39 मेडल (13 गोल्ड, 17 ​​सिल्वर और नौ ब्रॉन्ज) हो गए हैं, जिससे देश मेडल टेबल में चौथे नंबर पर आ गया है।


    कॉमनवेल्थ गेम्स के 10वें दिन मेडल जीतने वाले भारतीय एथलीट्स

    गोल्ड प्रीति पवार – महिलाओं की 54kg (बॉक्सिंग)
    गोल्ड जैस्मिन लैम्बोरिया – महिलाओं की 57kg (बॉक्सिंग)
    गोल्ड सोमन राणा – पुरुषों की शॉट पुट F57 (पैरा एथलेटिक्स)
    गोल्ड साक्षी चौधरी – महिलाओं की 51kg (बॉक्सिंग)
    गोल्ड प्रिया घनघस – महिलाओं की 60kg (बॉक्सिंग)
    गोल्ड अरुंधति चौधरी – महिलाओं की 70kg (बॉक्सिंग)
    गोल्ड सचिन सिवाच – पुरुषों की 60kg (बॉक्सिंग)
    गोल्ड अंकुश पंघाल – पुरुषों का 80kg (बॉक्सिंग)
    सिल्वर प्रवीण चित्रावेल – पुरुषों का ट्रिपल जंप (एथलेटिक्स)
    सिल्वर जदुमणि सिंह मंडेंगबाम – पुरुषों का 55kg (बॉक्सिंग)
    सिल्वर शुभम जुयाल – पुरुषों का शॉट पुट F57 (पैरा एथलेटिक्स)
    सिल्वर लवलीना बोरगोहेन – महिलाओं का 75kg (बॉक्सिंग)
    सिल्वर नरेंद्र बेरवाल – पुरुषों का +90kg (बॉक्सिंग)
    ब्रॉन्ज सेल्वा प्रभु थिरुमारन – पुरुषों की ट्रिपल जंप (एथलेटिक्स)
    ब्रॉन्ज उन्नति शर्मा – महिलाओं की -57kg (जूडो)
    ब्रॉन्ज गुलवीर सिंह – पुरुषों की 5000m (एथलेटिक्स)


    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में गोल्ड मेडल जीतने वाले भारतीय एथलीट्स (13)

    मीराबाई चानू – महिलाओं की 48kg (वेटलिफ्टिंग)
    शर्मिला धनखड़ – महिलाओं की शॉट पुट F57 (पैरा एथलेटिक्स)
    दिलीप महादू गावित – पुरुषों की 100m T47 (पैरा एथलेटिक्स)
    अस्मिता डे – महिलाओं की -48kg (जूडो)
    हर्ष सिंह – पुरुषों की -60kg (जूडो)
    प्रीति पवार – महिलाओं की 54kg (बॉक्सिंग)
    जैस्मिन लैम्बोरिया – महिलाओं की 57kg (बॉक्सिंग)
    सोमन राणा – पुरुषों की शॉट पुट F57 (पैरा एथलेटिक्स)
    साक्षी चौधरी – महिलाओं की 51kg (बॉक्सिंग)
    प्रिया घनघस – महिलाओं की 60kg (बॉक्सिंग)
    अरुंधति चौधरी – महिलाओं की 70kg (बॉक्सिंग)
    सचिन सिवाच – पुरुषों की 60kg (बॉक्सिंग)
    अंकुश पंघाल – पुरुषों का 80kg (बॉक्सिंग)


    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में सिल्वर मेडल जीतने वाले भारतीय एथलीट्स (17)

    ऋषिकांत सिंह – पुरुषों का 60kg (वेटलिफ्टिंग)
    मुथुपंडी राजा – पुरुषों का 65kg (वेटलिफ्टिंग)
    ज्ञानेश्वरी यादव – महिलाओं का 53kg (वेटलिफ्टिंग)
    वल्लूरी अजय बाबू – पुरुषों का 79kg (वेटलिफ्टिंग)
    हरजिंदर कौर – महिलाओं का 69kg (वेटलिफ्टिंग)
    सर्वेश कुशारे – पुरुषों का हाई जंप (एथलेटिक्स)
    गुलवीर सिंह – पुरुषों का 10,000m (एथलेटिक्स)
    एम. श्रीशंकर – पुरुषों का लॉन्ग जंप (एथलेटिक्स)
    मोहम्मद बेसिल – पुरुषों का 100m T47 (पैरा एथलेटिक्स)
    लवप्रीत सिंह – पुरुषों का +110kg (वेटलिफ्टिंग)
    यामिनी मौर्या – महिलाओं का -57kg (जूडो)
    नीरज चोपड़ा – पुरुषों का जेवलिन थ्रो (एथलेटिक्स)
    प्रवीण चित्रावेल – पुरुषों का ट्रिपल जंप (एथलेटिक्स)
    जदुमणि सिंह मंडेंगबाम – पुरुषों का 55kg (बॉक्सिंग)
    शुभम जुयाल – पुरुषों का शॉट पुट F57 (पैरा एथलेटिक्स)
    लवलीना बोरगोहेन – महिलाओं का 75kg (बॉक्सिंग)
    नरेंद्र बेरवाल – पुरुषों का +90kg (बॉक्सिंग)


    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाले भारतीय एथलीट्स (9)

    झंडू कुमार – पुरुषों का हैवीवेट (पैरा पावरलिफ्टिंग)
    बिंद्यारानी देवी – महिलाओं का 58kg (वेटलिफ्टिंग)
    शिल्पा के. शायला – महिलाओं का शॉट पुट F57 (पैरा एथलेटिक्स)
    सीमा कालीरमना – महिलाओं का डिस्कस थ्रो (एथलेटिक्स)
    तेजस्विन शंकर – डेकाथलॉन (एथलेटिक्स)
    यश वीर सिंह – पुरुषों की जैवलिन थ्रो (एथलेटिक्स)
    सेल्वा प्रभु थिरुमारन – पुरुषों की ट्रिपल जंप (एथलेटिक्स)
    उन्नति शर्मा – महिलाओं की -57kg (जूडो)
    गुलवीर सिंह – पुरुषों की 5000m (एथलेटिक्स)

  • देशसेवा और फिटनेस का संगम, राष्ट्रपति मुर्मु ने सोल्जरथॉन व NCC साइक्लोथॉन का किया शुभारंभ

    देशसेवा और फिटनेस का संगम, राष्ट्रपति मुर्मु ने सोल्जरथॉन व NCC साइक्लोथॉन का किया शुभारंभ


    नई दिल्ली। देश में फिटनेस राष्ट्रभक्ति और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने के उद्देश्य से राजधानी दिल्ली में शनिवार को कई प्रेरणादायक कार्यक्रम आयोजित किए गए। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रपति भवन परिसर से पीबीजी सोल्जरथॉन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जबकि केंद्रीय युवा मामले एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम से एनसीसी साइक्लोथॉन 2026 की शुरुआत कर युवाओं को अनुशासन फिटनेस और राष्ट्र निर्माण का संदेश दिया। इन आयोजनों ने देशवासियों विशेषकर युवाओं में देशभक्ति और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति नई ऊर्जा का संचार किया।

    राष्ट्रपति भवन में आयोजित पीबीजी सोल्जरथॉन का आयोजन सैनिकों के साथ दौड़ें सैनिकों के लिए दौड़ें विषय पर किया गया। इस पहल का उद्देश्य भारतीय सशस्त्र बलों के साहस समर्पण और बलिदान को सम्मान देना तथा आम नागरिकों और सैनिकों के बीच मजबूत भावनात्मक जुड़ाव स्थापित करना था। इस अवसर पर मिजोरम के राज्यपाल और इस अभियान के संरक्षक जनरल वीके सिंह भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सैनिकों और आम नागरिकों ने भाग लेकर एक साथ दौड़ लगाई और राष्ट्रीय ध्वज के साथ देश के वीर जवानों के प्रति अपना सम्मान और समर्थन व्यक्त किया।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने इस अवसर पर कहा कि सोल्जरथॉन केवल एक दौड़ नहीं बल्कि नागरिकों और सशस्त्र बलों के बीच विश्वास और सम्मान का मजबूत सेतु है। उन्होंने कहा कि हमारे सैनिक सीमाओं पर दिन रात देश की रक्षा करते हैं और उनके साहस तथा त्याग को सम्मान देना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। राष्ट्रपति ने कहा कि इस तरह के आयोजन समाज में राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत करते हैं और लोगों को सैनिकों के प्रति अपनी जिम्मेदारी का एहसास कराते हैं।

    दूसरी ओर भारत की आजादी के 79 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित एनसीसी साइक्लोथॉन 2026 को केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया और रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस कार्यक्रम में 79 एनसीसी कैडेट शामिल हुए जिन्होंने अनुशासन फिटनेस और राष्ट्रसेवा का संदेश दिया। कार्यक्रम में ओलंपिक पदक विजेता और विश्व चैंपियन मुक्केबाज मैरी कॉम की उपस्थिति ने युवाओं का उत्साह और बढ़ा दिया।

    मनसुख मांडविया ने कहा कि एनसीसी केवल एक संगठन नहीं बल्कि अनुशासन नेतृत्व क्षमता और समाज सेवा की पाठशाला है। उन्होंने कहा कि आज के युवा विकसित भारत के सबसे मजबूत आधार हैं और उनकी ऊर्जा देश के भविष्य को नई दिशा दे सकती है। उन्होंने युवाओं से फिट रहने समाज के प्रति जिम्मेदार बनने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।

    मैरी कॉम ने भी युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि एनसीसी की वर्दी केवल कपड़ा नहीं बल्कि देश के प्रति जिम्मेदारी और सेवा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता पाने के लिए अनुशासन मेहनत और समर्पण सबसे महत्वपूर्ण हैं तथा युवा इन्हीं मूल्यों को अपनाकर अपने सपनों को साकार कर सकते हैं।

    इसी क्रम में जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम से नशा मुक्त भारत अभियान के तहत फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल के 84वें संस्करण का भी आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को नियमित व्यायाम स्वस्थ जीवनशैली और नशामुक्त समाज के प्रति जागरूक करना था।

    इन सभी आयोजनों ने यह संदेश दिया कि फिट शरीर अनुशासित जीवन और राष्ट्र के प्रति समर्पण ही विकसित भारत की मजबूत नींव हैं। सैनिकों के सम्मान से लेकर युवाओं की भागीदारी तक दिल्ली में आयोजित ये कार्यक्रम देशभक्ति सामाजिक एकता और स्वस्थ भारत के संकल्प को नई मजबूती देने वाले साबित हुए।

  • CWG 2026: भारत ने 10वें दिन रचा इतिहास, पदक विजेताओं को पीएम मोदी ने दी शुभकामनाएं

    CWG 2026: भारत ने 10वें दिन रचा इतिहास, पदक विजेताओं को पीएम मोदी ने दी शुभकामनाएं


    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का दसवां दिन भारतीय खेल इतिहास के सबसे यादगार दिनों में शामिल हो गया। ग्लासगो में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए एक ही दिन में 16 पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। इनमें 7 स्वर्ण पदक शामिल रहे जिसने भारत की पदक तालिका को और मजबूत कर दिया। मुक्केबाजी से लेकर पैरा एथलेटिक्स तक भारतीय खिलाड़ियों ने हर मंच पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। खिलाड़ियों की इस शानदार उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी पदक विजेताओं को बधाई देते हुए उनके प्रदर्शन की खुलकर सराहना की और इसे देश के युवाओं के लिए प्रेरणादायक बताया।

    दसवें दिन भारतीय मुक्केबाजों का दबदबा सबसे ज्यादा देखने को मिला। भारत ने बॉक्सिंग में कुल 10 पदक अपने नाम किए और कई खिलाड़ियों ने स्वर्ण जीतकर तिरंगा ऊंचा लहराया। पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में सचिन सिवाच ने शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि उनकी यह सफलता आने वाली पीढ़ी के मुक्केबाजों को प्रेरित करेगी और वे भविष्य में भी देश का नाम रोशन करते रहेंगे।

    महिला मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन ने 75 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीतकर एक बार फिर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। प्रधानमंत्री ने उनके संघर्ष और निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि उनका समर्पण देशभर के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

    महिलाओं के 70 किलोग्राम वर्ग में अरुंधति चौधरी ने स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। उनकी तकनीक आत्मविश्वास और आक्रामक खेल की प्रधानमंत्री ने खुलकर तारीफ की। वहीं 60 किलोग्राम वर्ग में प्रिया घांगस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सफलता उनके कौशल और मानसिक मजबूती का प्रमाण है।

    भारत की एक और महिला मुक्केबाज साक्षी ने 51 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर देश को गौरवान्वित किया। प्रधानमंत्री ने उन्हें निर्णायक जीत के लिए बधाई देते हुए भविष्य में और बड़ी सफलताओं की शुभकामनाएं दीं। पुरुषों के 55 किलोग्राम वर्ग में जदुमणि सिंह मंडेंगबाम ने रजत पदक जीतकर भारत की झोली में एक और महत्वपूर्ण पदक जोड़ा। प्रधानमंत्री ने उनकी दृढ़ता अनुशासन और संघर्ष की सराहना की।

    पैरा एथलेटिक्स में भी भारत ने शानदार प्रदर्शन किया। पुरुषों के शॉट पुट एफ57 वर्ग में सोमन राणा ने स्वर्ण पदक जीतकर नया इतिहास रच दिया। यह इस स्पर्धा में भारत का पहला कॉमनवेल्थ स्वर्ण पदक है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पूरी प्रतियोगिता के दौरान उनका फोकस और अटूट संकल्प साफ दिखाई दिया। इसी स्पर्धा में शुभम जुयाल ने रजत पदक जीतकर भारत की सफलता में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ा। प्रधानमंत्री ने उनकी तकनीक और समर्पण की प्रशंसा करते हुए भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

    भारतीय खिलाड़ियों के इस शानदार प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया कि देश अब हर खेल में वैश्विक स्तर पर मजबूती से अपनी पहचान बना रहा है। एक ही दिन में 16 पदकों का ऐतिहासिक प्रदर्शन भारतीय खेलों के बढ़ते स्तर और खिलाड़ियों की कड़ी मेहनत का परिणाम है। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहा है और खिलाड़ियों की यह सफलता देशवासियों के लिए गर्व का विषय बन गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बधाई ने खिलाड़ियों का उत्साह और बढ़ाया है तथा पूरे देश में इस ऐतिहासिक उपलब्धि का जश्न मनाया जा रहा है।

  • भारत की लंबी दूरी की दौड़ को मिला नया हीरो, गुलवीर सिंह ने 5000 मीटर में ब्रॉन्ज जीतकर बनाया ऐतिहासिक रिकॉर्ड

    भारत की लंबी दूरी की दौड़ को मिला नया हीरो, गुलवीर सिंह ने 5000 मीटर में ब्रॉन्ज जीतकर बनाया ऐतिहासिक रिकॉर्ड


    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय एथलेटिक्स के लिए एक और ऐतिहासिक पल सामने आया है। लंबी दूरी के धावक गुलवीर सिंह ने पुरुषों की 5000 मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीतकर ऐसा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया जो अब तक कोई भारतीय ट्रैक एंड फील्ड खिलाड़ी हासिल नहीं कर पाया था। इससे पहले वह 10000 मीटर स्पर्धा में रजत पदक जीत चुके थे। इसी के साथ गुलवीर कॉमनवेल्थ गेम्स के एक ही संस्करण में दो पदक जीतने वाले पहले भारतीय ट्रैक एंड फील्ड एथलीट बन गए। उनकी इस उपलब्धि ने भारतीय एथलेटिक्स को नई पहचान देने के साथ देश का गौरव भी बढ़ाया है।

    स्कॉट्सटाउन स्टेडियम में आयोजित 5000 मीटर फाइनल बेहद रोमांचक रहा। शुरुआत में गुलवीर आठवें स्थान पर चल रहे थे लेकिन उन्होंने शानदार रणनीति और धैर्य का परिचय देते हुए धीरे धीरे अपनी रफ्तार बढ़ाई। शुरुआती 400 मीटर उन्होंने 1 मिनट 10.6 सेकंड में पूरे किए। इसके बाद अगले चरण में उन्होंने तेजी दिखाई और चौथे स्थान तक पहुंच गए। लगातार शानदार लय बनाए रखते हुए उन्होंने 3000 मीटर की दूरी 8 मिनट 16.6 सेकंड में पूरी की और अंतिम चरण में जबरदस्त स्प्रिंट लगाकर तीसरे स्थान पर कब्जा जमा लिया।

    गुलवीर सिंह ने 13 मिनट 24.95 सेकंड का समय निकालते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया। केन्या के मैथ्यू किपचुम्बा किपसांग ने 13 मिनट 23.61 सेकंड के साथ स्वर्ण पदक जीता जबकि ऑस्ट्रेलिया के काय रॉबिन्सन ने 13 मिनट 24.70 सेकंड का समय निकालकर रजत पदक हासिल किया। अंतिम 200 मीटर में गुलवीर ने जिस संयम और गति का प्रदर्शन किया उसने उन्हें पोडियम तक पहुंचा दिया।

    इससे पहले 10000 मीटर दौड़ में भी गुलवीर सिंह ने 27 मिनट 49.78 सेकंड का समय निकालते हुए रजत पदक जीता था। उस प्रदर्शन ने ही संकेत दे दिया था कि भारतीय धावक इस बार इतिहास रचने के इरादे से मैदान में उतरे हैं। 5000 मीटर में कांस्य जीतने के साथ उन्होंने अपनी शानदार फिटनेस और निरंतरता का भी परिचय दिया।

    उत्तर प्रदेश के अतरौली के रहने वाले 28 वर्षीय गुलवीर सिंह भारतीय सेना में कार्यरत हैं। सीमित संसाधनों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने वाले गुलवीर की सफलता युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बन गई है। कठिन मेहनत अनुशासन और लगातार अभ्यास की बदौलत उन्होंने यह मुकाम हासिल किया है।

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का प्रदर्शन लगातार मजबूत होता जा रहा है। अब तक भारतीय दल 39 पदक जीत चुका है जिनमें 13 स्वर्ण 17 रजत और 9 कांस्य पदक शामिल हैं। पदक तालिका में भारत चौथे स्थान पर बना हुआ है और आने वाले मुकाबलों में देश को खिलाड़ियों से और भी शानदार प्रदर्शन की उम्मीद है।

    गुलवीर सिंह की ऐतिहासिक उपलब्धि केवल एक व्यक्तिगत सफलता नहीं बल्कि भारतीय एथलेटिक्स के लिए नई उम्मीद और नई दिशा का प्रतीक है। यह जीत बताती है कि भारत अब लंबी दूरी की दौड़ में भी दुनिया की बड़ी ताकतों को चुनौती देने की क्षमता रखता है। आने वाले वर्षों में गुलवीर जैसे खिलाड़ी देश को वैश्विक प्रतियोगिताओं में और भी बड़ी सफलताएं दिलाने का दम रखते हैं।

  • भारत ने बॉक्सिंग में लगाई गोल्ड की हैट्रिक, अरुंधति चौधरी ने इंग्लैंड की स्टार को हराकर जीता स्वर्ण

    भारत ने बॉक्सिंग में लगाई गोल्ड की हैट्रिक, अरुंधति चौधरी ने इंग्लैंड की स्टार को हराकर जीता स्वर्ण


    ग्लासगो।
    राष्ट्रमंडल खेल 2026 के 10वें दिन भारतीय मुक्केबाजों का दबदबा देखने को मिला। भारत ने बॉक्सिंग में स्वर्ण पदकों की हैट्रिक पूरी कर ली। अरुंधति चौधरी ने महिलाओं के 70 किलोग्राम भारवर्ग के फाइनल में इंग्लैंड की स्टार मुक्केबाज को हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

    अरुंधति से पहले प्रीति पवार और जैस्मिन लांबोरिया भी अपने-अपने फाइनल मुकाबले जीतकर भारत की झोली में स्वर्ण पदक डाल चुकी हैं। इसके साथ ही भारतीय बॉक्सिंग दल ने प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन जारी रखा है।

    10वें दिन कई पदकों पर भारत की नजर

    ग्लासगो में जारी राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय दल का प्रदर्शन लगातार बेहतर रहा है। भारत अब तक 30 पदक अपने नाम कर चुका है और 10वें दिन भी कई स्पर्धाओं में भारतीय खिलाड़ियों से पदक की उम्मीद है।

    बॉक्सिंग के अलावा एथलेटिक्स में भी भारतीय खिलाड़ियों ने मोर्चा संभाला। पुरुष ट्रिपल जंप फाइनल में प्रवीण चित्रावेल और सेल्वा प्रभु तिरुमरन पदक के लिए उतरे। पैरा एथलेटिक्स के पुरुष शॉट पुट F57 फाइनल में सोमन राणा ने स्वर्ण पदक जीता, जबकि शुभम जुयाल ने रजत पदक अपने नाम किया।

    बॉक्सिंग में इन खिलाड़ियों के फाइनल

    भारतीय मुक्केबाजों के कई फाइनल मुकाबले 10वें दिन खेले गए। कार्यक्रम के अनुसार:

    • प्रीति पवार — 54 किग्रा
    • जैस्मिन लांबोरिया — 57 किग्रा
    • जादुमणि सिंह — 55 किग्रा
    • साक्षी चौधरी — 51 किग्रा
    • प्रिया घंघास — 60 किग्रा
    • अरुंधति चौधरी — 70 किग्रा
    • लवलीना बोरगोहेन — 75 किग्रा
    • सचिन सिवाच — 60 किग्रा
    • अंकुश पंघाल — 80 किग्रा
    • नरेंद्र बरवाल — 90 किग्रा से अधिक

    जूडो में भी भारतीय खिलाड़ियों पर नजर

    बॉक्सिंग के साथ जूडो में भी भारत की पदक उम्मीदें कायम रहीं। उन्नति शर्मा (-63 किग्रा) और करणजीत सिंह मान (-90 किग्रा) राउंड ऑफ 16 में उतरे, जबकि हर्ष तोकस (-81 किग्रा) और इनुंगनबी तकेल्लामबम (-70 किग्रा) ने क्वार्टर फाइनल में चुनौती पेश की।

    एथलेटिक्स से साइक्लिंग तक मुकाबले

    एथलेटिक्स में देव कुमार मीणा और कुलदीप कुमार पुरुष पोल वॉल्ट फाइनल में चुनौती पेश करने वाले हैं। वहीं गुलवीर सिंह पुरुष 5000 मीटर फाइनल में उतरेंगे। मिक्स्ड 4×400 मीटर रिले में भी भारत पदक की दौड़ में रहेगा।

    ट्रैक साइक्लिंग में डेविड बेकहम एलकटोचूंगो, रोनाल्डो सिंह और रोजित सिंह पुरुष स्प्रिंट में भारत की चुनौती पेश करेंगे। लॉन बॉल्स में भी भारतीय खिलाड़ी पदक की दौड़ में बने हुए हैं।

    इस तरह राष्ट्रमंडल खेलों का 10वां दिन भारत के लिए कई खेलों में पदक जीतने की संभावनाओं से भरा रहा। खासकर बॉक्सिंग में लगातार स्वर्ण पदकों ने भारतीय दल के प्रदर्शन को और मजबूत कर दिया है।

  • कॉमनवेल्थ गेम्स: 10 मिनट में भारत को दो गोल्ड, प्रीति-जैस्मिन ने जीती बॉक्सिंग फाइनल, अब तक मिले 7 गोल्ड

    कॉमनवेल्थ गेम्स: 10 मिनट में भारत को दो गोल्ड, प्रीति-जैस्मिन ने जीती बॉक्सिंग फाइनल, अब तक मिले 7 गोल्ड

    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय मुक्केबाजों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए महज 10 मिनट के अंतराल में दो स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिए। पहले प्रीति पवार ने महिला 54 किग्रा वर्ग का फाइनल जीतकर गोल्ड दिलाया, इसके तुरंत बाद जैस्मिन लांबोरिया ने महिला 57 किग्रा वर्ग के खिताबी मुकाबले में जीत दर्ज कर भारत की झोली में सातवां स्वर्ण पदक डाल दिया।

    जैस्मिन ने फाइनल में नॉर्दर्न आयरलैंड की मिकाएला वॉल्स को हराया, जबकि प्रीति पवार ने कनाडा की सवाना डोलमागो को शिकस्त देकर स्वर्ण पदक हासिल किया। इन दोनों जीतों के साथ भारत के कुल पदकों की संख्या 27 पहुंच गई, जिसमें 7 गोल्ड शामिल हैं। भारत फिलहाल पदक तालिका में छठे स्थान पर है।

    अब 8 और भारतीय मुक्केबाज गोल्ड की दौड़ में
    भारतीय बॉक्सिंग टीम का अभियान अभी जारी है। दिनभर में आठ भारतीय मुक्केबाज अपने-अपने फाइनल मुकाबलों में स्वर्ण पदक के लिए चुनौती पेश करेंगे। इनमें जदुमणि सिंह (55 किग्रा), साक्षी चौधरी (51 किग्रा), प्रिया घंघास (60 किग्रा), अरुंधति चौधरी (70 किग्रा), लवलीना बोरगोहेन (75 किग्रा), सचिन सिवाच (60 किग्रा), अंकुश पंघाल (80 किग्रा) और नरेंद्र बरवाल (90+ किग्रा) शामिल हैं।

    ट्रिपल जंप में भारत को दो और पदक
    एथलेटिक्स में भी भारत का प्रदर्शन दमदार रहा। प्रवीण चित्रावेल ने 16.58 मीटर की छलांग लगाकर रजत पदक जीता, जबकि सेल्वा प्रभु ने 16.52 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ कांस्य पदक अपने नाम किया। इस स्पर्धा का स्वर्ण जाम्बिया के जॉर्डन स्कॉट ने 16.72 मीटर की छलांग के साथ जीता।

    प्रीति और जैस्मिन का शानदार रिकॉर्ड
    हरियाणा की प्रीति पवार इससे पहले 2022 एशियन चैंपियनशिप और 2023 एशियन गेम्स में कांस्य पदक जीत चुकी हैं। वह पेरिस ओलिंपिक 2024 में भी भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। इसके अलावा उन्होंने 2026 एशियन चैंपियनशिप और 2025 वर्ल्ड बॉक्सिंग कप फाइनल में स्वर्ण पदक जीते हैं।

    वहीं जैस्मिन लांबोरिया, जो वर्तमान में 57 किग्रा वर्ग की विश्व नंबर-1 मुक्केबाज हैं, 2025 वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप और वर्ल्ड बॉक्सिंग कप फाइनल की भी स्वर्ण विजेता हैं। उन्होंने 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में कांस्य पदक जीता था और पेरिस ओलिंपिक 2024 में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया था।

    जूडो में उन्नति क्वार्टर फाइनल में
    जूडो की महिला 63 किग्रा स्पर्धा में उन्नति शर्मा ने राउंड ऑफ-16 में लामुलेला मागागुला को हराकर क्वार्टर फाइनल में प्रवेश कर लिया।

    आज 44 गोल्ड मेडल इवेंट्स
    शनिवार को कॉमनवेल्थ गेम्स में कुल 44 स्वर्ण पदक मुकाबले खेले जा रहे हैं। भारत के खिलाड़ी बॉक्सिंग, एथलेटिक्स, पैरा एथलेटिक्स, जूडो, ट्रैक साइक्लिंग और लॉन बॉल्स में भी पदक जीतने की चुनौती पेश कर रहे हैं।

    अन्य प्रमुख अपडेट
    – पैरा एथलेटिक्स की पुरुष 1500 मीटर T54 स्पर्धा में रमेश शनमुगम सातवें स्थान पर रहे।
    – महिला 10,000 मीटर रेस वॉक में भारत की रवीना गायकवाड़ को तीन रेड कार्ड मिलने के कारण अयोग्य (डिस्क्वालिफाई) घोषित कर दिया गया।
    – लॉन बॉल्स में भारतीय जोड़ी नवनीत सिंह और दिनेश कुमार का मुकाबला इंग्लैंड से होगा, जबकि नयनमोनी सैकिया महिला सिंगल्स में दक्षिण अफ्रीका की खिलाड़ी के खिलाफ उतरेंगी।

  • कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में तेजस्विन शंकर का ऐतिहासिक कारनामा, डेकाथलॉन में भारत को मिला पहला पदक

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में तेजस्विन शंकर का ऐतिहासिक कारनामा, डेकाथलॉन में भारत को मिला पहला पदक


    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के स्टार एथलीट तेजस्विन शंकर ने ऐसा इतिहास रचा है, जिसने भारतीय एथलेटिक्स को नई पहचान दिला दी है। पुरुषों की डेकाथलॉन स्पर्धा में 7976 अंक हासिल कर उन्होंने कांस्य पदक अपने नाम किया और राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में इस कठिन स्पर्धा में पदक जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए। यह उपलब्धि इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि डेकाथलॉन को ट्रैक एंड फील्ड की सबसे चुनौतीपूर्ण प्रतियोगिताओं में गिना जाता है, जिसमें खिलाड़ी की ताकत, गति, तकनीक, सहनशक्ति और मानसिक मजबूती सभी की एक साथ परीक्षा होती है।

    इस स्पर्धा का स्वर्ण पदक ग्रेनाडा के लिंडन विक्टर ने 8096 अंकों के साथ जीता, जबकि कनाडा के अनुभवी एथलीट डेमियन वार्नर 8036 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहे। तेजस्विन शंकर ने दोनों दिग्गज खिलाड़ियों के बीच शानदार प्रदर्शन करते हुए तीसरा स्थान हासिल किया और भारत के लिए ऐतिहासिक कांस्य पदक सुनिश्चित किया।

    तेजस्विन की शुरुआत 100 मीटर दौड़ में सातवें स्थान से हुई थी, लेकिन इसके बाद उन्होंने शानदार वापसी की। लंबी कूद में दूसरे स्थान पर रहते हुए उन्होंने अंकतालिका में सुधार किया। हाई जंप में 2.15 मीटर की शानदार छलांग लगाकर पहला स्थान हासिल किया और कुल रैंकिंग में दूसरे स्थान पर पहुंच गए। पहले दिन के अंत तक उन्होंने खुद को पदक की दौड़ में मजबूती से बनाए रखा।

    दूसरे दिन भी तेजस्विन ने दमदार प्रदर्शन जारी रखा। 110 मीटर बाधा दौड़ और डिस्कस थ्रो में उन्होंने दूसरा स्थान हासिल किया। हालांकि पोल वॉल्ट और भाला फेंक में उन्हें उम्मीद के मुताबिक अंक नहीं मिले, जिससे वह तीसरे स्थान पर खिसक गए। इसके बावजूद अंतिम इवेंट 1500 मीटर दौड़ में उन्होंने संयम बनाए रखा और कुल 7976 अंक के साथ कांस्य पदक जीतकर भारतीय खेल इतिहास में अपना नाम दर्ज करा दिया।

    डेकाथलॉन को एथलेटिक्स की सबसे कठिन स्पर्धाओं में से एक माना जाता है। यह प्रतियोगिता दो दिनों तक चलती है और इसमें कुल 10 अलग-अलग इवेंट शामिल होते हैं। पहले दिन खिलाड़ियों को 100 मीटर दौड़, लंबी कूद, शॉटपुट, हाई जंप और 400 मीटर दौड़ में हिस्सा लेना होता है। दूसरे दिन 110 मीटर बाधा दौड़, डिस्कस थ्रो, पोल वॉल्ट, भाला फेंक और 1500 मीटर दौड़ आयोजित की जाती है। हर स्पर्धा में प्रदर्शन के आधार पर अंक दिए जाते हैं और अंत में सभी 10 इवेंट्स के अंकों को जोड़कर अंतिम परिणाम तय किया जाता है।

    समय आधारित प्रतियोगिताओं जैसे 100 मीटर, 400 मीटर और 1500 मीटर में कम समय लेने वाले खिलाड़ी को अधिक अंक मिलते हैं। वहीं लंबी कूद, हाई जंप, पोल वॉल्ट, शॉटपुट, डिस्कस और भाला फेंक जैसी फील्ड स्पर्धाओं में जितनी अधिक दूरी या ऊंचाई हासिल होती है, उतने अधिक अंक दिए जाते हैं। इसके लिए विश्व एथलेटिक्स द्वारा निर्धारित आधिकारिक स्कोरिंग प्रणाली लागू होती है।

    तेजस्विन शंकर का यह कांस्य पदक केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं बल्कि भारतीय एथलेटिक्स के लिए मील का पत्थर है। लगातार दो दिनों तक दस अलग-अलग स्पर्धाओं में उच्च स्तर का प्रदर्शन करना किसी भी खिलाड़ी के लिए आसान नहीं होता। ऐसे में इस कठिन प्रतियोगिता में भारत का पहला पदक जीतकर तेजस्विन ने साबित कर दिया कि भारतीय खिलाड़ी अब बहु-इवेंट एथलेटिक्स में भी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को चुनौती देने की क्षमता रखते हैं। उनकी यह ऐतिहासिक सफलता आने वाली पीढ़ी के एथलीटों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी और भारतीय एथलेटिक्स के भविष्य को नई दिशा देगी।