Category: Sports

  • 2027 वर्ल्ड कप के लिए अभी से तैयारी में जुटी टीम इंडिया गंभीर ने बताया रोहित-विराट और हार्दिक-बुमराह का महत्व

    2027 वर्ल्ड कप के लिए अभी से तैयारी में जुटी टीम इंडिया गंभीर ने बताया रोहित-विराट और हार्दिक-बुमराह का महत्व


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम इस समय वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे सीरीज की तैयारियों में जुटी है लेकिन टीम की नजरें सिर्फ मौजूदा मुकाबलों पर नहीं हैं। भारतीय टीम के हेड कोच गौतम गंभीर ने साल 2027 में होने वाले वनडे वर्ल्ड कप को लेकर अपनी रणनीति पर खुलकर बात की है। गंभीर के बयान के बाद सबसे ज्यादा चर्चा रोहित शर्मा और विराट कोहली की भूमिका को लेकर हो रही है। दोनों दिग्गजों ने टेस्ट और टी20 क्रिकेट से संन्यास ले लिया है लेकिन वनडे फॉर्मेट में अभी भी टीम का हिस्सा हैं।

    गौतम गंभीर ने कप्तान शुभमन गिल की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि वनडे क्रिकेट में गिल बेहद भाग्यशाली हैं क्योंकि उन्हें रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे अनुभवी खिलाड़ियों का साथ मिल रहा है। गंभीर के मुताबिक रोहित और विराट सिर्फ मैदान पर ही नहीं बल्कि मैदान के बाहर भी गिल की मदद कर सकते हैं। ऐसे में युवा कप्तान को इन दोनों दिग्गजों के अनुभव से काफी कुछ सीखने का मौका मिल रहा है।

    गंभीर ने गिल के नेतृत्व की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि कम उम्र में कप्तानी की जिम्मेदारी संभालने के बावजूद गिल ने मैदान पर शांत स्वभाव दिखाया है। वह टीम के हित में फैसले लेने से पीछे नहीं हटते और उनका रवैया निस्वार्थ रहा है। कोच के बयान से साफ है कि भारतीय टीम मैनेजमेंट गिल की कप्तानी को भविष्य की बड़ी योजनाओं के लिहाज से देख रहा है।

    हालांकि 2027 वर्ल्ड कप को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि उस समय रोहित शर्मा और विराट कोहली टीम में होंगे या नहीं। गंभीर ने इस सवाल पर सीधे तौर पर कोई अंतिम फैसला नहीं बताया लेकिन वनडे टीम में दोनों की मौजूदगी और गिल को मिल रहे उनके अनुभव को अहम बताया है। इसका मतलब यह है कि फिलहाल टीम मैनेजमेंट वनडे फॉर्मेट में उपलब्ध खिलाड़ियों के साथ आगे की तैयारी पर ध्यान दे रहा है।

    गंभीर ने 2027 वर्ल्ड कप की योजना में हार्दिक पंड्या और जसप्रीत बुमराह को भी बेहद अहम बताया। उन्होंने हार्दिक को ऐसा ऑलराउंडर बताया जिसकी उपयोगिता किसी भी टीम के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है। हार्दिक जरूरत पड़ने पर गेंद से पूरे दस ओवर का योगदान दे सकते हैं और नंबर छह या सात पर बल्लेबाजी करते हुए तेजी से रन बनाने की क्षमता रखते हैं।

    जसप्रीत बुमराह को लेकर भी टीम मैनेजमेंट की योजना महत्वपूर्ण दिखाई देती है। गंभीर ने संकेत दिया कि बड़े टूर्नामेंट से पहले खिलाड़ियों को पर्याप्त मैच खेलने की जरूरत है। वर्कलोड मैनेजमेंट जरूरी है लेकिन लगातार क्रिकेट से दूरी भी खिलाड़ियों की लय को प्रभावित कर सकती है। इसलिए वर्ल्ड कप से पहले सही मात्रा में गेम टाइम देना भारतीय टीम की योजना का अहम हिस्सा होगा।

    2027 वनडे वर्ल्ड कप अभी दूर है लेकिन भारतीय टीम ने इसकी तैयारी को लेकर अपनी दिशा तय करनी शुरू कर दी है। रोहित और विराट का अनुभव गिल की कप्तानी के लिए कितना महत्वपूर्ण रहेगा और आने वाले समय में दोनों दिग्गज वर्ल्ड कप तक टीम का हिस्सा बने रहेंगे या नहीं यह आने वाले मुकाबलों और चयन संबंधी फैसलों के साथ स्पष्ट होगा। फिलहाल गंभीर का बयान भारतीय क्रिकेट के भविष्य और 2027 वर्ल्ड कप की तैयारियों को लेकर चर्चा जरूर तेज कर चुका है।

  • रोशिबिना देवी ने फिर बढ़ाया भारत का मान गोल्ड का सपना टूटा लेकिन लगातार तीसरे एशियन गेम्स में जीता मेडल

    रोशिबिना देवी ने फिर बढ़ाया भारत का मान गोल्ड का सपना टूटा लेकिन लगातार तीसरे एशियन गेम्स में जीता मेडल


    नई दिल्ली। भारत की स्टार वुशू खिलाड़ी रोशिबिना देवी नाओरेम ने एशियन गेम्स 2026 में सिल्वर मेडल जीतकर बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली है। नागोया में आयोजित प्रतियोगिता के महिला 60 किलोग्राम सांडा वर्ग के फाइनल में रोशिबिना का सामना चीन की झांग शियाओयू से हुआ। खिताबी मुकाबले में भारतीय खिलाड़ी को 0-2 से हार का सामना करना पड़ा। झांग ने दोनों राउंड में 5-0 की बढ़त बनाकर मुकाबला कुल 10-0 से अपने नाम किया और गोल्ड मेडल जीता।

    रोशिबिना फाइनल में गोल्ड से जरूर चूक गईं लेकिन उनका एशियन गेम्स में पदक जीतने का सिलसिला लगातार तीसरी बार जारी रहा। वह 2018 के जकार्ता-पालेमबांग एशियन गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीत चुकी हैं। इसके बाद 2023 के हांगझोऊ एशियन गेम्स में उन्होंने सिल्वर मेडल अपने नाम किया था। अब 2026 में भी सिल्वर जीतकर उन्होंने एशियन गेम्स में लगातार तीन संस्करणों में पदक जीतने की उपलब्धि हासिल कर ली है।

    रोशिबिना देवी एशियन गेम्स में वुशू के लगातार तीन पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन गई हैं। उनके लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि तीनों पदक महिला 60 किलोग्राम सांडा वर्ग में ही आए हैं। 2018 में ब्रॉन्ज के बाद 2023 और 2026 में सिल्वर जीतकर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी निरंतरता दिखाई है।

    इस बार फाइनल मुकाबले में चीन की झांग शियाओयू ने शुरुआत से ही बढ़त बनाए रखी। पहले राउंड में झांग ने 5-0 से जीत दर्ज की और दूसरे राउंड में भी यही स्कोर दोहराया। इस तरह मुकाबला 10-0 के स्कोर पर समाप्त हुआ। रोशिबिना को सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा।

    मणिपुर के बिष्णुपुर जिले के क्वासिफाई गांव से आने वाली रोशिबिना देवी किसान परिवार से ताल्लुक रखती हैं। वह इम्फाल स्थित SAI NCOE में प्रशिक्षण लेती हैं। महिला 60 किलोग्राम सांडा वर्ग में वह कोच मैबाम प्रेमकुमार सिंह की निगरानी में तैयारी करती हैं। शुरुआती दौर से ही वुशू में उनकी रुचि रही और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उन्होंने लगातार बेहतर प्रदर्शन किया।

    रोशिबिना ने 2019 साउथ एशियन गेम्स में सांडा 60 किलोग्राम वर्ग में गोल्ड मेडल जीता था। इसके अलावा 2017 एशियन जूनियर वुशू चैंपियनशिप में भी उन्होंने गोल्ड हासिल किया था। 2016 वर्ल्ड जूनियर वुशू चैंपियनशिप में उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल जीता। 2023 मॉस्को वुशू स्टार चैंपियनशिप में भी उनके नाम गोल्ड रहा।

    उनकी उपलब्धियों को देखते हुए 2023 में उन्हें अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। इसी वर्ष इंटरनेशनल वुशू फेडरेशन ने उन्हें Female Wushu Athlete of the Year Sanda का सम्मान भी दिया था। एशियन गेम्स 2026 का सिल्वर उनके पदकों की सूची में एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ गई है।

    गोल्ड मेडल मुकाबले में 10-0 की हार के बावजूद रोशिबिना का एशियन गेम्स रिकॉर्ड खास बन गया है। 2018 से शुरू हुआ उनका पदक सफर 2023 और फिर 2026 में भी जारी रहा। लगातार तीन एशियन गेम्स में पदक जीतने वाली भारतीय महिला वुशू खिलाड़ी के तौर पर उन्होंने इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया है।

  • 14 साल की उम्र में जापान पहुंचे थे जय मीणा अब एशियन गेम्स में भारत को दिलाया पहला सॉफ्ट टेनिस मेडल

    14 साल की उम्र में जापान पहुंचे थे जय मीणा अब एशियन गेम्स में भारत को दिलाया पहला सॉफ्ट टेनिस मेडल


    नई दिल्ली । एशियन गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ी जय मीणा ने सॉफ्ट टेनिस में इतिहास रच दिया है। पुरुष सिंगल्स स्पर्धा में मीणा ने भारत के लिए इस खेल का पहला एशियन गेम्स पदक अपने नाम किया। सेमीफाइनल में उन्हें जापान के ताकुया कुरोसाका के खिलाफ 2-4 से हार का सामना करना पड़ा लेकिन सेमीफाइनल तक पहुंचने के कारण उनका ब्रॉन्ज मेडल पक्का हो गया। इस उपलब्धि के साथ जय मीणा ने सॉफ्ट टेनिस में भारत का नाम एशियन गेम्स के पदक विजेताओं में दर्ज करा दिया।

    मीणा का यह सफर आसान नहीं रहा। क्वार्टर फाइनल में उन्होंने शेरविन नुगुइट के खिलाफ बेहद रोमांचक मुकाबला खेला। निर्णायक गेम में एक समय वह पीछे चल रहे थे लेकिन उन्होंने शानदार वापसी करते हुए लगातार चार अंक हासिल किए। इस वापसी ने उन्हें 4-3 से जीत दिलाई और इसी के साथ उन्होंने सेमीफाइनल में जगह बना ली। क्वार्टर फाइनल की इस जीत के साथ ही भारत का सॉफ्ट टेनिस में पहला एशियन गेम्स पदक भी सुनिश्चित हो गया था। सेमीफाइनल में जापानी खिलाड़ी के खिलाफ हार के बाद मीणा का अभियान ब्रॉन्ज मेडल के साथ समाप्त हुआ।

    जय मीणा की सॉफ्ट टेनिस तक पहुंचने की कहानी भी काफी दिलचस्प है। शुरुआत में उनकी दिलचस्पी क्रिकेट में थी और वह क्रिकेटर बनना चाहते थे। देवास के पायनियर पब्लिक स्कूल में दाखिले के बाद उनका ध्यान स्कूल में बने सॉफ्ट टेनिस कोर्ट की तरफ गया। शुरुआत में वह खिलाड़ियों को खेलते हुए देखते थे और बाद में बॉल बॉय के तौर पर उनकी मदद करने लगे। इसी दौरान इस खेल के प्रति उनकी रुचि बढ़ती गई और उन्होंने खुद सॉफ्ट टेनिस खेलना शुरू कर दिया।

    स्कूल और जिला स्तर की प्रतियोगिताओं से शुरुआत करने वाले जय मीणा ने जल्द ही राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना ली। महज 14 साल की उम्र में उन्होंने जापान जाकर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। वर्ष 2022 में गुजरात में आयोजित 36वें नेशनल गेम्स में उन्होंने पुरुष सिंगल्स का गोल्ड मेडल जीता। उन्होंने पुरुष टीम और डबल्स स्पर्धा में भी मध्य प्रदेश के लिए पदक जीतने में अहम भूमिका निभाई।

    इसके बाद जय मीणा की उपलब्धियों का सिलसिला लगातार आगे बढ़ता रहा। वर्ष 2025 में वह पुरुष सिंगल्स के नेशनल चैंपियन बने। एशियन गेम्स 2022 में भी उन्होंने पुरुष सिंगल्स में क्वार्टर फाइनल तक का सफर तय किया था। इसके साथ ही पुरुष टीम स्पर्धा में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बनाई।

    वर्ष 2024 में जय मीणा ने आध्या तिवारी के साथ वर्ल्ड सॉफ्ट टेनिस चैंपियनशिप के मिक्स्ड डबल्स में ब्रॉन्ज मेडल जीता था। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने भारत को इस प्रतियोगिता में पहला पदक दिलाया। इसके बाद 2025 की एशियन सॉफ्ट टेनिस चैंपियनशिप में भी उन्होंने पुरुष सिंगल्स में सेमीफाइनल तक पहुंचकर ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया और इस प्रतियोगिता में पदक जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बने।

    जय मीणा के लिए एशियन गेम्स 2026 का ब्रॉन्ज मेडल उनके लंबे सफर की एक और बड़ी उपलब्धि है। टारगेट एशियन गेम्स ग्रुप के एथलीट के रूप में यह उनका तीसरा एशियन गेम्स है। इससे पहले वह जकार्ता 2018 और हांगझोऊ 2022 में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। अब नागोया में सॉफ्ट टेनिस का पहला भारतीय एशियन गेम्स पदक जीतकर उन्होंने अपने करियर में एक ऐतिहासिक अध्याय जोड़ दिया है।

  • एशियन गेम्स में भारत का कबड्डी में दबदबा लगातार तीसरी जीत के साथ सेमीफाइनल का टिकट पक्का

    एशियन गेम्स में भारत का कबड्डी में दबदबा लगातार तीसरी जीत के साथ सेमीफाइनल का टिकट पक्का


    नई दिल्ली । एशियन गेम्स 2026 में भारतीय पुरुष कबड्डी टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली है। बुधवार को टोकाई सिटिजन्स जिम्नेजियम में खेले गए ग्रुप ए के मुकाबले में भारत ने बांग्लादेश को 48-25 से हराया। इस जीत के साथ भारतीय टीम ने ग्रुप चरण में लगातार तीसरी जीत दर्ज की और सेमीफाइनल में पहुंचने के साथ अपना पदक भी सुनिश्चित कर लिया।

    सुनील कुमार की कप्तानी में भारतीय टीम ने टूर्नामेंट की शुरुआत जापान के खिलाफ जीत के साथ की थी। इसके बाद दक्षिण कोरिया को भी भारत ने 63-31 के बड़े अंतर से हराया। बांग्लादेश के खिलाफ मुकाबले में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शुरुआत से ही आक्रामक अंदाज अपनाया और विरोधी टीम को दबाव में रखा। रेडिंग में भारतीय खिलाड़ियों ने लगातार अंक जुटाए जबकि डिफेंस ने बांग्लादेश के रेडर्स को ज्यादा मौके नहीं दिए।

    पहले हाफ में भारत का दबदबा पूरी तरह नजर आया। टीम ने सफल रेड से 18 अंक हासिल किए और सात बोनस अंक अपने खाते में जोड़े। भारतीय डिफेंस ने बांग्लादेश को दो बार ऑलआउट भी किया। इसके चलते भारत ने हाफ टाइम तक 29-9 की मजबूत बढ़त बना ली। दूसरी तरफ बांग्लादेश की टीम भारतीय डिफेंस के सामने लगातार संघर्ष करती नजर आई। पहले हाफ में उसे पांच आउट अंक और तीन बोनस अंक ही मिल सके। एक सुपर टैकल से भी बांग्लादेश को अंक मिला लेकिन भारतीय टीम की बड़ी बढ़त पर इसका कोई खास असर नहीं पड़ा।

    दूसरे हाफ की शुरुआत में भारतीय टीम ने अपनी रणनीति में बदलाव किया। अर्जुन देशवाल को देवांक दलाल की जगह मैदान पर उतारा गया। इसके बाद बांग्लादेश ने अपने खेल में सुधार किया और भारतीय टीम पर दबाव बनाने की कोशिश की। बांग्लादेश ने दूसरे हाफ में आठ आउट अंक और आठ बोनस अंक हासिल किए। इसके बावजूद भारत ने अपनी लय नहीं टूटने दी। भारतीय टीम ने दूसरे हाफ में 19 अंक जुटाए और एक बार फिर बांग्लादेश को ऑलआउट किया।

    भारत ने पूरे मुकाबले के दौरान अपनी बढ़त को बनाए रखा और अंत में 48-25 से मुकाबला अपने नाम कर लिया। यह जीत इसलिए भी अहम रही क्योंकि इसके साथ भारतीय टीम ने ग्रुप ए में लगातार तीसरी जीत दर्ज की और नॉकआउट चरण में अपनी जगह सुनिश्चित कर ली।

    भारतीय टीम का ग्रुप चरण का आखिरी मुकाबला गुरुवार को चीनी ताइपे के खिलाफ होगा। सेमीफाइनल में जगह पहले ही पक्की होने के बाद इस मुकाबले में भी टीम की नजर अपनी जीत की लय बरकरार रखने पर होगी। कबड्डी प्रतियोगिता में सेमीफाइनल मुकाबले 25 सितंबर को खेले जाएंगे जबकि पुरुष वर्ग का स्वर्ण पदक मुकाबला 26 सितंबर को होगा।

    भारतीय पुरुष कबड्डी टीम एशियन गेम्स में अपने अभियान को खिताबी जीत तक पहुंचाने के इरादे से मैदान में है। बांग्लादेश के खिलाफ मिली जीत ने टीम को नॉकआउट चरण से पहले एक और मजबूत आधार दिया है। अब सेमीफाइनल में भारत का सामना किस टीम से होगा यह ग्रुप चरण के बाकी मुकाबलों के परिणाम के बाद तय होगा।

  • राइजा ढिल्लों चौथे और परिनाज धालीवाल आठवें स्थान पर व्यक्तिगत स्कीट में मेडल से रह गईं दूर

    राइजा ढिल्लों चौथे और परिनाज धालीवाल आठवें स्थान पर व्यक्तिगत स्कीट में मेडल से रह गईं दूर


    नई दिल्ली । एशियन गेम्स 2026 में भारतीय निशानेबाज राइजा ढिल्लों और परिनाज धालीवाल ने टीम स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया लेकिन व्यक्तिगत स्कीट स्पर्धा में दोनों निशानेबाज मेडल जीतने से चूक गईं। आइची नागोया में आयोजित प्रतियोगिता में राइजा ढिल्लों चौथे स्थान पर रहीं जबकि परिनाज धालीवाल को आठवें स्थान से संतोष करना पड़ा। दोनों खिलाड़ियों ने क्वालिफिकेशन में 125 में से 111 शॉट का स्कोर हासिल करके फाइनल में जगह बनाई थी लेकिन पदक मुकाबले में उनका प्रदर्शन टीम स्पर्धा जैसा नहीं रहा।

    तीन दिनों तक चले क्वालिफिकेशन राउंड के बाद राइजा और परिनाज ने समान 111 का स्कोर बनाया। क्वालिफिकेशन में राइजा आठवें स्थान पर और परिनाज नौवें स्थान पर रहते हुए फाइनल के लिए पहुंचीं। फाइनल में भारतीय खिलाड़ियों के पास पदक जीतने का मौका था लेकिन मुकाबला आगे बढ़ने के साथ दोनों निशानेबाज पोडियम की दौड़ से बाहर हो गईं। राइजा चौथे स्थान तक पहुंचीं जबकि परिनाज आठवें स्थान पर रहीं।

    इससे पहले महिला स्कीट टीम स्पर्धा में राइजा ढिल्लों परिनाज धालीवाल और माहेश्वरी चौहान की भारतीय टीम ने कांस्य पदक जीता था। भारतीय टीम ने क्वालिफिकेशन में कुल 331 का स्कोर हासिल किया था। चीन की टीम ने 347 के स्कोर के साथ स्वर्ण पदक जीता जबकि कजाकिस्तान ने 336 के स्कोर के साथ रजत पदक अपने नाम किया। इस तरह महिला स्कीट टीम स्पर्धा में भारतीय खिलाड़ियों ने पोडियम पर जगह बनाकर देश के खाते में एक और पदक जोड़ा।

    शूटिंग में भारत का प्रदर्शन केवल महिला स्कीट टीम स्पर्धा तक सीमित नहीं रहा। पुरुषों की स्कीट टीम स्पर्धा में भी भारतीय निशानेबाजों ने कांस्य पदक हासिल किया। ओलंपियन अनंतजीत सिंह नरुका मैराज अहमद खान और भवतेघ सिंह की भारतीय टीम ने कुल 346 का स्कोर बनाया और तीसरा स्थान हासिल किया। इस स्पर्धा में कतर ने स्वर्ण पदक जबकि कुवैत ने रजत पदक जीता। इस पदक के साथ आइची नागोया में शूटिंग में भारत के पदकों की संख्या सात तक पहुंच गई।

    पुरुषों की व्यक्तिगत स्कीट स्पर्धा के क्वालिफिकेशन में अनंतजीत सिंह नरुका भारतीय चुनौती को फाइनल तक पहुंचाने वाले एकमात्र निशानेबाज रहे। उन्होंने 125 में से 119 का स्कोर किया। वहीं मैराज अहमद खान ने 116 और भवतेघ सिंह ने 111 का स्कोर बनाया। दोनों निशानेबाज फाइनल में जगह नहीं बना सके।

    शूटिंग के 10 मीटर एयर पिस्टल इवेंट में भी भारतीय खिलाड़ियों को पदक के लिए इंतजार करना पड़ा। ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर महिलाओं की व्यक्तिगत 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा के फाइनल में पांचवें स्थान पर रहीं। उन्होंने फाइनल में 181.1 का स्कोर किया लेकिन पोडियम तक नहीं पहुंच सकीं।

    महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल टीम स्पर्धा में भी भारत चौथे स्थान पर रहा। भारतीय टीम ने 1719 के स्कोर के साथ 44 एक्स दर्ज किए। वियतनाम ने समान 1719 के स्कोर के साथ 46 एक्स दर्ज करते हुए कांस्य पदक हासिल किया। चीन ने 1735 और 56 एक्स के स्कोर के साथ स्वर्ण पदक जीता जबकि दक्षिण कोरिया ने 1730 और 55 एक्स के साथ रजत पदक अपने नाम किया।

    भारतीय शूटिंग दल ने एशियन गेम्स में अलग अलग स्पर्धाओं में लगातार चुनौती पेश की है। राइजा और परिनाज के लिए टीम स्पर्धा का कांस्य पदक उपलब्धि रहा लेकिन व्यक्तिगत मुकाबले में पदक से चूकना निराशाजनक रहा। अब भारतीय निशानेबाजों की नजर बाकी स्पर्धाओं पर होगी जहां टीम पदकों की संख्या को और बढ़ाने की कोशिश करेगी।

  • पाकिस्तान टीम का साथ छोड़ नीदरलैंड्स पहुंचे एशले नोफके दो साल के करार के साथ संभाली बड़ी जिम्मेदारी

    पाकिस्तान टीम का साथ छोड़ नीदरलैंड्स पहुंचे एशले नोफके दो साल के करार के साथ संभाली बड़ी जिम्मेदारी


    नई दिल्ली । नीदरलैंड्स क्रिकेट टीम को नया हेड कोच मिल गया है। रॉयल डच क्रिकेट एसोसिएशन ने ऑस्ट्रेलिया के पूर्व तेज गेंदबाज एशले नोफके को पुरुष क्रिकेट टीम का मुख्य कोच नियुक्त किया है। नोफके के साथ शुरुआती तौर पर दो साल का करार किया गया है जो 2028 तक चलेगा। वह रयान कुक की जगह लेंगे। रयान कुक ने परिवार के साथ ज्यादा समय बिताने के लिए अपने पद से हटने का फैसला किया था। नई जिम्मेदारी मिलने के बाद नोफके के सामने नीदरलैंड्स टीम को 2027 वनडे वर्ल्ड कप और 2028 टी20 वर्ल्ड कप के क्वालिफिकेशन अभियान में आगे ले जाने की चुनौती होगी।

    49 वर्षीय एशले नोफके को अंतरराष्ट्रीय और फ्रेंचाइजी क्रिकेट दोनों का लंबा अनुभव है। वह हाल तक पाकिस्तान पुरुष क्रिकेट टीम के साथ सहायक कोच और बॉलिंग कोच की भूमिका निभा रहे थे। पाकिस्तान टीम के साथ उनके कार्यकाल में उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करने का महत्वपूर्ण अनुभव मिला। अब नीदरलैंड्स क्रिकेट ने उनके अनुभव को देखते हुए उन्हें टीम की कमान सौंपी है।

    नई जिम्मेदारी पर नोफके ने नीदरलैंड्स पुरुष टीम के साथ काम करने को लेकर उत्साह जताया है। उन्होंने टीम को प्रतिभाशाली और प्रेरित खिलाड़ियों का समूह बताया। उनका कहना है कि वह खिलाड़ियों के विकास को आगे बढ़ाने के साथ पूरे क्रिकेट प्रोग्राम को मजबूत करने पर ध्यान देंगे। नोफके के अनुसार उनकी कार्यशैली रणनीति या योजना से पहले खिलाड़ियों के साथ जुड़ाव बनाने से शुरू होती है। वह जल्द ही टीम के साथ काम शुरू करने को लेकर उत्साहित हैं।

    खिलाड़ी के तौर पर भी नोफके का करियर काफी लंबा रहा है। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के लिए एक वनडे और दो टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले। घरेलू क्रिकेट में उन्होंने क्वींसलैंड और वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया का प्रतिनिधित्व किया। इंग्लैंड में उन्होंने डरहम मिडलसेक्स ग्लूसेस्टरशायर और वॉर्सेस्टरशायर जैसी काउंटी टीमों के लिए भी क्रिकेट खेला। वह 2008 में आयोजित पहले आईपीएल मैच में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की टीम का हिस्सा भी रहे थे। उस मुकाबले में आरसीबी का सामना कोलकाता नाइट राइडर्स से हुआ था।

    दाएं हाथ के तेज गेंदबाज के रूप में नोफके ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 386 विकेट हासिल किए और 3766 रन भी बनाए। उनके करियर की खास उपलब्धियों में एक घरेलू सीजन में 500 से ज्यादा रन और 50 विकेट हासिल करना भी शामिल है। वह ऐसा करने वाले चुनिंदा ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों में रहे हैं।

    खेल से संन्यास के बाद कोचिंग में आने पर भी नोफके ने लगातार अपनी पहचान बनाई। उन्होंने ब्रिस्बेन हीट को महिला बिग बैश लीग का खिताब दिलाने में भूमिका निभाई। इसके अलावा क्वींसलैंड फायर के साथ डब्ल्यूएनसीएल ट्रॉफी जीती और द हंड्रेड में लंदन स्पिरिट को उसका पहला खिताब दिलाने वाले कोचिंग स्टाफ का हिस्सा रहे। भारत में आयोजित महिला प्रीमियर लीग में भी वह यूपी वॉरियर्स के सहायक कोच और गेंदबाजी कोच की भूमिका निभा चुके हैं।

    नोफके ने न्यूजीलैंड में ओटागो के पुरुष क्रिकेट प्रोग्राम के साथ भी काम किया। इसके बाद वह पाकिस्तान की पुरुष टीम से जुड़े जहां उन्होंने माइक हेसन के साथ सहायक कोच और बॉलिंग लीड के तौर पर जिम्मेदारी संभाली। पाकिस्तान टीम के साथ रहते हुए टीम ने 2026 टी20 वर्ल्ड कप में सुपर 8 चरण और 2025 एशिया कप के फाइनल तक का सफर तय किया।

    अब नीदरलैंड्स के साथ नोफके के सामने एक नई चुनौती है। टीम को अगले कुछ वर्षों में बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों के लिए क्वालिफाई करने की दिशा में आगे बढ़ाना उनका प्रमुख लक्ष्य होगा। उनके अंतरराष्ट्रीय अनुभव और विभिन्न क्रिकेट परिस्थितियों में काम करने की क्षमता को देखते हुए नीदरलैंड्स क्रिकेट को उनसे टीम के विकास में महत्वपूर्ण योगदान की उम्मीद होगी।

  • 19-0 फिर 17-1 और अब 20-1 भारतीय महिला हॉकी टीम का एशियन गेम्स में गोलों का तूफान

    19-0 फिर 17-1 और अब 20-1 भारतीय महिला हॉकी टीम का एशियन गेम्स में गोलों का तूफान


    नई दिल्ली । एशियन गेम्स 2026 में भारतीय महिला हॉकी टीम का शानदार अभियान लगातार आगे बढ़ रहा है। बुधवार को पूल बी के मुकाबले में भारत ने थाईलैंड को 20-1 के बड़े अंतर से हराकर टूर्नामेंट में लगातार तीसरी जीत दर्ज की। गिफू प्रीफेक्चुरल ग्रीन स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में भारतीय खिलाड़ियों ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया और पूरे मैच के दौरान थाईलैंड की टीम पर दबाव बनाए रखा। इस जीत के साथ भारतीय टीम पूल बी में शीर्ष स्थान पर बनी हुई है।

    भारत की इस बड़ी जीत की सबसे बड़ी स्टार दीपिका रहीं जिन्होंने अकेले नौ गोल दागे। ड्रैग फ्लिक विशेषज्ञ दीपिका ने अपने सभी नौ गोल पेनल्टी कॉर्नर के जरिए किए। उन्होंने लगातार भारतीय हमलों को गोल में बदलकर थाईलैंड की रक्षापंक्ति को मुश्किल में डाल दिया। दीपिका का यह प्रदर्शन इसलिए भी खास रहा क्योंकि इससे पहले उज्बेकिस्तान के खिलाफ मुकाबले में उन्होंने आठ गोल किए थे। थाईलैंड के खिलाफ नौ गोल के साथ उन्होंने अपना ही रिकॉर्ड बेहतर कर दिया। टूर्नामेंट में तीन मैचों के बाद दीपिका के नाम 20 गोल हो चुके हैं।

    भारत के लिए नवनीत कौर ने भी शानदार प्रदर्शन किया और चार गोल किए। रुतुजा पिसल ने हैट्रिक पूरी की। इसके अलावा नेहा लालरेम्सियामी साक्षी राणा और कप्तान सलीमा टेटे ने भी गोल कर टीम की जीत में योगदान दिया। भारतीय टीम के हमलों में लगातार तेजी और तालमेल नजर आया। पेनल्टी कॉर्नर के मौकों को भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार तरीके से भुनाया और थाईलैंड को वापसी का कोई बड़ा अवसर नहीं दिया।

    थाईलैंड की टीम पूरे मुकाबले में भारतीय डिफेंस पर ज्यादा दबाव नहीं बना सकी। उसे मैच का एकमात्र गोल चौथे क्वार्टर के अंतिम हिस्से में मिला। सुपांसा समंसो ने पेनल्टी कॉर्नर के जरिए गोल किया। उनके ड्रैग फ्लिक में हल्का डिफ्लेक्शन हुआ और गेंद भारतीय गोल में पहुंच गई। इसके बावजूद भारत की बढ़त इतनी बड़ी थी कि इस गोल से मुकाबले की दिशा पर कोई असर नहीं पड़ा।

    भारतीय टीम ने इससे पहले टूर्नामेंट की शुरुआत उज्बेकिस्तान के खिलाफ 19-0 की बड़ी जीत से की थी। इसके बाद भारत ने इंडोनेशिया को 17-1 से हराया। अब थाईलैंड के खिलाफ 20-1 की जीत के साथ भारत ने लगातार तीसरी बार बड़े अंतर से मुकाबला अपने नाम किया है। शुरुआती तीन मुकाबलों में भारतीय टीम ने कुल 56 गोल किए हैं जबकि उसके खिलाफ केवल दो गोल हुए हैं।

    भारतीय महिला हॉकी टीम का अगला मुकाबला शुक्रवार को जापान से होना है। यह मैच नॉकआउट चरण से पहले टीम के लिए अहम होगा। भारत की टीम 2023 के हांगझोऊ एशियन गेम्स में जीते गए कांस्य पदक से बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश में है। महिला हॉकी में भारत ने आखिरी बार 1982 में एशियन गेम्स का स्वर्ण पदक जीता था। इस बार टीम की नजर लंबे अंतराल के बाद फिर से स्वर्ण पदक हासिल करने पर है।

    लगातार तीन मुकाबलों में जिस तरह भारतीय टीम ने गोल किए हैं उससे उसका आक्रामक खेल बेहद प्रभावशाली नजर आया है। खासतौर पर दीपिका की पेनल्टी कॉर्नर पर शानदार फिनिशिंग टीम के लिए बड़ा हथियार बनी हुई है। अब जापान के खिलाफ मुकाबले में भारतीय टीम इसी लय को बरकरार रखना चाहेगी और नॉकआउट चरण से पहले अपनी स्थिति और मजबूत करने की कोशिश करेगी।

  • आईपीएल में दिग्गज गेंदबाजों पर बरसे वैभव अब न्यूजीलैंड की उछाल वाली पिच पर होगी परीक्षा

    आईपीएल में दिग्गज गेंदबाजों पर बरसे वैभव अब न्यूजीलैंड की उछाल वाली पिच पर होगी परीक्षा


    नई दिल्ली । भारतीय युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने बेहद कम उम्र में क्रिकेट की दुनिया में अपनी अलग पहचान बना ली है। आईपीएल से लेकर भारत ए और भारतीय अंडर 19 टीम तक अपने प्रदर्शन से प्रभावित करने वाले वैभव अब न्यूजीलैंड की परिस्थितियों में खुद को साबित करते नजर आ सकते हैं। भारत और न्यूजीलैंड के बीच 22 अक्टूबर से 1 नवंबर तक पांच टी20 मैचों की सीरीज खेली जानी है और इस सीरीज को लेकर न्यूजीलैंड के कोच रॉब वॉल्टर की नजर भी इस युवा बल्लेबाज पर है। वॉल्टर ने वैभव को रोमांचक खिलाड़ी बताते हुए कहा है कि वह उन्हें तेज और उछाल वाली पिचों पर बल्लेबाजी करते हुए देखना चाहते हैं।

    न्यूजीलैंड की पिचों पर अक्सर तेज गेंदबाजों को अतिरिक्त उछाल और गति मिलने की संभावना रहती है। ऐसे में वैभव के लिए यह परिस्थितियां एक अलग तरह की चुनौती हो सकती हैं। रॉब वॉल्टर का कहना है कि उन्होंने वैभव को आईपीएल में दुनिया के बेहतरीन गेंदबाजों के खिलाफ आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए देखा है। अब वह यह देखना चाहते हैं कि अलग परिस्थितियों में वैभव का खेल किस तरह सामने आता है और न्यूजीलैंड की परिस्थितियों में उनके गेंदबाज इस युवा बल्लेबाज के सामने किस तरह की रणनीति अपनाते हैं।

    वॉल्टर ने यह भी कहा कि एक कोच के तौर पर वह अपने खिलाड़ियों को दबाव वाली परिस्थितियों में प्रदर्शन करते हुए देखना चाहते हैं। इसी नजरिए से वह वैभव की बल्लेबाजी का इंतजार कर रहे हैं। उनके बयान से यह भी संकेत मिलता है कि न्यूजीलैंड टीम इस युवा भारतीय बल्लेबाज को लेकर पूरी तरह सतर्क है और उसकी बल्लेबाजी को गंभीरता से देख रही है।

    वैभव के लिए भारतीय टीम तक पहुंचने का सफर भी बेहद खास रहा है। कम उम्र में आईपीएल में धमाकेदार बल्लेबाजी के बाद उन्होंने भारत ए और भारत अंडर 19 टीम के लिए भी अपनी क्षमता दिखाई। इसके बाद उन्हें भारतीय टी20 टीम में जगह मिली। वह भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम के लिए खेलने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ियों में शामिल हैं। इसी साल उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ टी20 मुकाबले से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया था।

    डेब्यू सीरीज वैभव के लिए उम्मीद के मुताबिक नहीं रही लेकिन इसके बाद जिम्बाब्वे दौरे पर उन्होंने शानदार वापसी की। वहां उनके प्रदर्शन ने उन्हें प्लेयर ऑफ द सीरीज का पुरस्कार दिलाया। अब तक वह छह टी20 मैचों की छह पारियों में 193 रन बना चुके हैं। उनके नाम दो अर्धशतक हैं और उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 81 रन है। इन आंकड़ों से साफ है कि कम उम्र के बावजूद वैभव ने टी20 क्रिकेट में तेजी से अपनी जगह बनाई है।

    वैभव फिलहाल एशियन गेम्स के लिए भारतीय टीम का भी हिस्सा हैं। हालांकि जापान के खिलाफ मुकाबले में उन्हें प्लेइंग इलेवन में शामिल नहीं किया गया था। ऐसे में आने वाले मुकाबलों में उन्हें कितने मौके मिलते हैं यह भी देखने वाली बात होगी। इसके बाद न्यूजीलैंड दौरा उनके लिए एक और महत्वपूर्ण चुनौती बन सकता है।

    न्यूजीलैंड में तेज गति और उछाल वाली पिचों पर वैभव का प्रदर्शन इसलिए भी खास होगा क्योंकि वहां की परिस्थितियां भारतीय उपमहाद्वीप की पिचों से अलग होती हैं। रॉब वॉल्टर की नजरें भी इसी बात पर हैं कि आईपीएल में बड़े गेंदबाजों के खिलाफ बेखौफ बल्लेबाजी करने वाला यह युवा खिलाड़ी न्यूजीलैंड की परिस्थितियों और दबाव में किस तरह अपनी बल्लेबाजी को ढालता है। भारत और न्यूजीलैंड की टी20 सीरीज में वैभव को मौका मिलता है तो उनके प्रदर्शन पर क्रिकेट प्रशंसकों के साथ न्यूजीलैंड टीम की भी नजर रहने की उम्मीद है।

  • IPL 2027 से पहले CSK ने जहीर खान को बनाया नया हेड कोच, स्टीफन फ्लेमिंग की जगह संभालेंगे कमान

    IPL 2027 से पहले CSK ने जहीर खान को बनाया नया हेड कोच, स्टीफन फ्लेमिंग की जगह संभालेंगे कमान

    नई दिल्ली ।चेन्नई सुपर किंग्स ने आईपीएल 2027 से पहले अपनी कोचिंग व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। टीम ने पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज जहीर खान को नया मुख्य कोच नियुक्त किया है। जहीर अब लंबे समय तक टीम की कमान संभालने वाले स्टीफन फ्लेमिंग की जगह जिम्मेदारी निभाएंगे। इस नियुक्ति के साथ चेन्नई की कोचिंग व्यवस्था में एक नए दौर की शुरुआत हो गई है।

    स्टीफन फ्लेमिंग का चेन्नई सुपर किंग्स के साथ करीब 18 साल का जुड़ाव रहा। उन्होंने 2008 में खिलाड़ी के रूप में टीम से जुड़ने के बाद 2009 से मुख्य कोच की भूमिका संभाली थी। उनके कार्यकाल में टीम ने पांच आईपीएल खिताब जीते। फ्लेमिंग ने 2026 के बाद चेन्नई से अलग होने का फैसला किया और अब इंग्लैंड की टेस्ट टीम के मुख्य कोच की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

    जहीर खान के लिए यह आईपीएल में किसी फ्रेंचाइजी के मुख्य कोच के रूप में पहला कार्यकाल होगा। हालांकि, वह कोचिंग और खिलाड़ी विकास से जुड़े पदों पर पहले भी काम कर चुके हैं। भारतीय टीम के साथ वह 2017 में गेंदबाजी सलाहकार की भूमिका निभा चुके हैं। इसके अलावा मुंबई इंडियंस के साथ उन्होंने क्रिकेट संचालन और खिलाड़ी विकास से जुड़े पदों पर काम किया।

    जहीर लखनऊ सुपर जायंट्स के साथ भी मेंटर की भूमिका निभा चुके हैं। इस अनुभव के कारण वह आईपीएल के माहौल और फ्रेंचाइजी क्रिकेट की जरूरतों से परिचित हैं। अब उन्हें चेन्नई की टीम के प्रदर्शन और खिलाड़ियों के विकास से जुड़ी जिम्मेदारी संभालनी होगी।

    जहीर का नाम चेन्नई की टीम के भीतर चर्चा के बाद तय किया गया। टीम के प्रबंधन से जुड़े फैसलों में महेंद्र सिंह धोनी, कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ और अन्य प्रमुख सदस्यों की राय भी शामिल रही। जहीर और धोनी भारतीय टीम के दौर से एक-दूसरे को जानते हैं और 2011 विश्व कप जीतने वाली टीम का हिस्सा रहे हैं।

    जहीर का अंतरराष्ट्रीय करियर भी शानदार रहा है। उन्होंने भारत के लिए 92 टेस्ट, 200 वनडे और 17 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले। तीनों प्रारूपों में उनके नाम कुल 610 विकेट हैं। 2011 विश्व कप में उन्होंने 21 विकेट हासिल किए थे और भारतीय टीम को खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी।

    आईपीएल में जहीर ने 100 मुकाबले खेले और 102 विकेट लिए। उन्होंने मुंबई इंडियंस, रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और दिल्ली की टीम का प्रतिनिधित्व किया। खिलाड़ी के रूप में संन्यास लेने के बाद उन्होंने धीरे-धीरे क्रिकेट प्रशासन, मेंटरशिप और खिलाड़ी विकास की भूमिकाओं में कदम बढ़ाया।

    चेन्नई सुपर किंग्स के लिए जहीर की नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब टीम लगातार तीन सत्रों से प्लेऑफ में जगह नहीं बना सकी है। 2025 और 2026 में टीम का प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा। ऐसे में नई कोचिंग व्यवस्था के सामने टीम के प्रदर्शन में सुधार के साथ खिलाड़ियों के संयोजन और रणनीति को मजबूत करने की चुनौती होगी।

    आईपीएल 2027 में जहीर के सामने चेन्नई की टीम को नए सिरे से तैयार करने और उसके मौजूदा खिलाड़ियों की क्षमता का बेहतर इस्तेमाल करने की जिम्मेदारी होगी। धोनी और टीम प्रबंधन के साथ उनका तालमेल भी चेन्नई की आगामी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहेगा।

  • एशियन गेम्स में भारत का रोमांचक दिन बैडमिंटन टीम बाहर लक्ष्य सेन की वापसी से जगी उम्मीद क्रिकेट में 216 रन

    एशियन गेम्स में भारत का रोमांचक दिन बैडमिंटन टीम बाहर लक्ष्य सेन की वापसी से जगी उम्मीद क्रिकेट में 216 रन


    नई दिल्ली। एशियन गेम्स 2026 में मंगलवार का दिन भारतीय खिलाड़ियों के लिए उतार चढ़ाव भरा रहा। भारत की नजरें अलग अलग खेलों में पदक की दावेदारी मजबूत करने पर थीं लेकिन कई मुकाबलों में टीम को निराशा भी हाथ लगी। महिला बैडमिंटन टीम को जापान के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में 1-3 से हार का सामना करना पड़ा और इसके साथ ही उसका पदक अभियान समाप्त हो गया। वहीं पुरुष टेबल टेनिस टीम भी दक्षिण कोरिया के खिलाफ प्री क्वार्टर फाइनल में 0-3 से हारकर प्रतियोगिता से बाहर हो गई। दूसरी ओर पुरुष बैडमिंटन में लक्ष्य सेन ने शुरुआती झटके के बाद शानदार वापसी करते हुए मुकाबले को निर्णायक गेम तक पहुंचा दिया।

    महिला बैडमिंटन क्वार्टर फाइनल में भारत और जापान के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। पीवी सिंधू ने अकाने यामागुची के खिलाफ पहला गेम 23-21 से जीतकर भारत को अच्छी शुरुआत दिलाई लेकिन जापानी खिलाड़ी ने अगले दोनों गेम 21-18 और 21-11 से जीतकर मुकाबला अपने नाम कर लिया। इसके बाद उन्नति हुड्डा को भी तोमोका मियाजाकी के खिलाफ 16-21 और 18-21 से हार मिली। त्रिशा जॉली और गायत्री गोपीचंद ने युकी फुकुशिमा और मायु मात्सुमोतो की जोड़ी को 21-17 और 21-16 से हराकर भारत की उम्मीदें बनाए रखीं लेकिन अगले मुकाबले में तन्वी शर्मा को नोजोमी ओकुहारा के खिलाफ 21-12 और 21-10 से हार का सामना करना पड़ा। इस नतीजे के साथ जापान ने 3-1 से जीत दर्ज कर भारतीय टीम को बाहर कर दिया।

    पुरुष बैडमिंटन में भारत और जापान के बीच क्वार्टर फाइनल मुकाबले में लक्ष्य सेन के सामने कोडाई नाराओका की चुनौती थी। पहले गेम में लक्ष्य को 11-21 से हार का सामना करना पड़ा। शुरुआत में जापानी खिलाड़ी ने फ्रंट कोर्ट पर लगातार प्रभावी शॉट खेले और लक्ष्य को दबाव में रखा। हालांकि दूसरे गेम में भारतीय खिलाड़ी ने जोरदार वापसी की और नाराओका को केवल पांच अंक लेने दिए। लक्ष्य ने दूसरा गेम 21-5 से जीतकर मुकाबला निर्णायक गेम में पहुंचा दिया।

    टेबल टेनिस में भी भारतीय टीम को मुश्किल का सामना करना पड़ा। पुरुष टीम दक्षिण कोरिया के खिलाफ 0-3 से हार गई। हरमीत देसाई को जंग वूजिन ने 3-1 से हराया जबकि मानुष शाह को ओ जुनसुंग के खिलाफ पांच गेम तक चले मुकाबले में 2-3 से हार मिली। तीसरे मुकाबले में मानव ठक्कर को आन जेह्युन ने 3-1 से मात दी। इस हार के साथ भारतीय टीम का अभियान समाप्त हो गया।

    फेंसिंग में भी भारत को मिश्रित परिणाम मिले। पुरुष फॉयल के व्यक्तिगत मुकाबले में सचिन और सांसम हेमाश सिंह का सफर आगे नहीं बढ़ सका। दोनों को कजाकिस्तान के खिलाड़ियों के खिलाफ हार मिली। वहीं महिला एपी में तनिक्षा खत्री ने थाईलैंड की संग्गियो नत्पापत को 15-10 से हराकर राउंड ऑफ 16 में जगह बनाई। इससे इस स्पर्धा में भारत की उम्मीदें बनी हुई हैं।

    महिला क्रिकेट में भारत ने श्रीलंका के खिलाफ स्वर्ण पदक मुकाबले में शानदार बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में तीन विकेट पर 216 रन बनाए। स्मृति मंधाना ने 79 रन की पारी खेलकर मजबूत आधार तैयार किया जबकि शेफाली वर्मा ने 48 रन बनाए। इसके बाद ऋचा घोष ने सिर्फ 22 गेंदों में 49 रन बनाकर भारतीय स्कोर को 216 तक पहुंचा दिया। श्रीलंका के सामने स्वर्ण पदक जीतने के लिए 217 रन का लक्ष्य रखा गया है।

    एशियन गेम्स में भारत का अभियान अभी जारी है और कई खेलों में भारतीय खिलाड़ियों के पास पदक की दावेदारी मजबूत करने का मौका है। मंगलवार के मुकाबलों में जहां कुछ टीमों का सफर समाप्त हुआ वहीं क्रिकेट और फेंसिंग जैसे खेलों में भारतीय खिलाड़ियों ने उम्मीदें कायम रखी हैं।