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  • महिला टी20 विश्व कप में रिकॉर्डों की बारिश, डैन व्याट ने सारा टेलर को छोड़ा पीछे; इंग्लैंड की ऐतिहासिक जीत

    महिला टी20 विश्व कप में रिकॉर्डों की बारिश, डैन व्याट ने सारा टेलर को छोड़ा पीछे; इंग्लैंड की ऐतिहासिक जीत


    नई दिल्ली । आईसीसी महिला टी20 विश्व कप 2026 के उद्घाटन मुकाबले में मेजबान England Women’s Cricket Team ने शानदार प्रदर्शन करते हुए Sri Lanka Women’s Cricket Team को 87 रन से पराजित कर टूर्नामेंट में धमाकेदार शुरुआत की। बर्मिंघम के Edgbaston में खेले गए इस मुकाबले में केवल जीत ही नहीं, बल्कि कई ऐतिहासिक रिकॉर्ड भी बने, जिनमें सबसे प्रमुख नाम डैन व्याट का रहा।

    इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में एक विकेट खोकर 219 रन बनाए। यह महिला टी20 विश्व कप इतिहास का सबसे बड़ा टीम स्कोर बन गया। इससे पहले यह रिकॉर्ड भी इंग्लैंड के नाम था, जिसने 2023 में पाकिस्तान के खिलाफ 213 रन बनाए थे। टीम की इस उपलब्धि में सलामी बल्लेबाज डैन व्याट की भूमिका सबसे अहम रही।

    डैन व्याट ने 62 गेंदों पर नाबाद 105 रन की विस्फोटक पारी खेली। अपनी इस शतकीय पारी के दौरान उन्होंने कई व्यक्तिगत उपलब्धियां भी हासिल कीं। वह महिला टी20 विश्व कप इतिहास में इंग्लैंड की ओर से सबसे ज्यादा रन बनाने वाली तीसरी बल्लेबाज बन गई हैं। इस मामले में उन्होंने इंग्लैंड की पूर्व स्टार बल्लेबाज सारा टेलर को पीछे छोड़ दिया। टेलर के नाम विश्व कप में 541 रन दर्ज थे, जबकि व्याट अब 593 रन तक पहुंच चुकी हैं।

    व्याट की यह पारी महिला टी20 विश्व कप इतिहास की चौथी सबसे बड़ी व्यक्तिगत पारी भी बन गई है। इंग्लैंड की ओर से टूर्नामेंट में सबसे बड़ी पारी खेलने का रिकॉर्ड Heather Knight के नाम है, जिन्होंने 2020 में नाबाद 108 रन बनाए थे। वहीं विश्व कप इतिहास की सबसे बड़ी व्यक्तिगत पारी का रिकॉर्ड Meg Lanning के नाम दर्ज है, जिन्होंने 126 रन बनाए थे।

    डैन व्याट ने एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम की। वह महिला टी20 विश्व कप में सर्वाधिक शतक लगाने वाली संयुक्त रूप से दूसरी बल्लेबाज बन गई हैं। उनके नाम अब तीन शतक दर्ज हैं। इस सूची में शीर्ष स्थान यूएई की बल्लेबाज Esha Oza के पास है, जिन्होंने पांच शतक लगाए हैं।

    इंग्लैंड की बल्लेबाजी के दौरान अंतिम ओवर भी रिकॉर्डबुक में दर्ज हो गया। टीम ने आखिरी ओवर में 26 रन बटोरे, जो महिला टी20 विश्व कप इतिहास का संयुक्त रूप से दूसरा सबसे महंगा ओवर माना जा रहा है। श्रीलंका की गेंदबाज Malki Madara इस ओवर में इंग्लिश बल्लेबाजों के निशाने पर रहीं। उन्होंने अपने चार ओवर के स्पेल में 51 रन देकर एक विकेट लिया। यह महिला टी20 विश्व कप इतिहास का दूसरा सबसे महंगा गेंदबाजी स्पेल है। इस सूची में पहला स्थान भारतीय गेंदबाज Shikha Pandey के नाम है, जिन्होंने 2020 में चार ओवर में 52 रन खर्च किए थे।

    हालांकि श्रीलंका की हार के बीच भी एक रिकॉर्ड दर्ज हुआ। टीम की बल्लेबाज Nilakshi de Silva और मलकी मदारा ने आठवें विकेट के लिए 39 रन की साझेदारी की। यह महिला टी20 विश्व कप इतिहास में आठवें या उससे नीचे के विकेट के लिए सबसे बड़ी साझेदारी मानी जा रही है।

    गेंदबाजी में इंग्लैंड की ओर से फ्रेया केम्प ने शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने अपने विश्व कप पदार्पण मुकाबले में 21 रन देकर चार विकेट हासिल किए। इस उपलब्धि के साथ वह महिला टी20 विश्व कप डेब्यू मैच में चार विकेट लेने वाली चुनिंदा गेंदबाजों में शामिल हो गईं। उनके प्रदर्शन ने इंग्लैंड की जीत को और भी यादगार बना दिया।

    महिला टी20 विश्व कप 2026 का पहला मुकाबला इस तरह रिकॉर्डों, ऐतिहासिक उपलब्धियों और शानदार व्यक्तिगत प्रदर्शनों के लिए लंबे समय तक याद रखा जाएगा।

  • महिला टी20 विश्व कप 2026 में इंग्लैंड का ऐतिहासिक धमाका, रिकॉर्ड 219 रन बनाकर श्रीलंका को 87 रन से रौंदा

    महिला टी20 विश्व कप 2026 में इंग्लैंड का ऐतिहासिक धमाका, रिकॉर्ड 219 रन बनाकर श्रीलंका को 87 रन से रौंदा


    नई दिल्ली । आईसीसी महिला टी20 विश्व कप 2026 का आगाज मेजबान England Women’s Cricket Team के ऐतिहासिक प्रदर्शन के साथ हुआ। बर्मिंघम स्थित Edgbaston में खेले गए टूर्नामेंट के पहले मुकाबले में इंग्लैंड ने बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों विभागों में शानदार प्रदर्शन करते हुए Sri Lanka Women’s Cricket Team को 87 रन के बड़े अंतर से पराजित कर दिया। इस जीत के साथ इंग्लैंड ने महिला टी20 विश्व कप इतिहास में सबसे बड़ा स्कोर बनाने का नया रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया।

    टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी इंग्लैंड की टीम ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया। सलामी बल्लेबाज Amy Jones और Danni Wyatt-Hodge ने पहले विकेट के लिए 135 रन की शानदार साझेदारी कर टीम को मजबूत आधार दिया। एमी जोन्स ने 38 गेंदों में 53 रन की तेजतर्रार पारी खेली, जिसमें कई आकर्षक शॉट देखने को मिले। उनके आउट होने के बाद भी इंग्लैंड की रनगति पर कोई असर नहीं पड़ा।

    दूसरे छोर पर डैनी व्याट ने शानदार बल्लेबाजी का प्रदर्शन करते हुए श्रीलंकाई गेंदबाजों की जमकर खबर ली। उन्होंने 62 गेंदों में नाबाद 105 रन बनाए। अपनी इस यादगार पारी में उन्होंने 13 चौके और एक छक्का लगाया। उनका स्ट्राइक रेट 169 से अधिक रहा, जो उनकी आक्रामक बल्लेबाजी का प्रमाण है। मध्यक्रम में कप्तान Nat Sciver-Brunt ने भी विस्फोटक अंदाज में बल्लेबाजी की और सिर्फ 22 गेंदों में नाबाद 46 रन ठोक दिए। उनकी पारी में छह चौके और एक छक्का शामिल रहा।

    इंग्लैंड ने निर्धारित 20 ओवर में केवल एक विकेट खोकर 219 रन बनाए। यह महिला टी20 विश्व कप के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा टीम स्कोर बन गया। इससे पहले यह रिकॉर्ड भी इंग्लैंड के नाम था, जब उसने 2023 में पाकिस्तान के खिलाफ 213 रन बनाए थे।

    220 रन के विशाल लक्ष्य का पीछा करने उतरी श्रीलंका की टीम शुरुआत से ही दबाव में दिखाई दी। नियमित अंतराल पर विकेट गिरने के कारण टीम कभी भी लक्ष्य की ओर मजबूती से बढ़ती नजर नहीं आई। श्रीलंका की ओर से Nilakshi de Silva ने सर्वाधिक 39 रन बनाए, जबकि Harshitha Samarawickrama ने 29 रन का योगदान दिया। इसके अलावा कोई भी बल्लेबाज बड़ी पारी नहीं खेल सकी और पूरी टीम 132 रन पर सिमट गई।

    गेंदबाजी में इंग्लैंड की ओर से फ्रेया केम्प ने सबसे प्रभावशाली प्रदर्शन किया। उन्होंने मात्र 22 रन देकर चार विकेट झटके और मैच का रुख पूरी तरह इंग्लैंड की ओर मोड़ दिया। इस उपलब्धि के साथ वह महिला टी20 विश्व कप में पदार्पण मैच में चार विकेट लेने वाली चुनिंदा गेंदबाजों में शामिल हो गईं। इसके अलावा Sophie Ecclestone और Charlie Dean ने दो-दो विकेट लिए, जबकि Lauren Bell और Linsey Smith को एक-एक सफलता मिली।

    यह मुकाबला रिकॉर्डों के लिहाज से भी खास रहा। दोनों टीमों ने मिलकर कुल 351 रन बनाए, जो महिला टी20 विश्व कप इतिहास में दोनों पारियों का दूसरा सबसे बड़ा संयुक्त स्कोर है। इससे पहले 2018 में भारत और इंग्लैंड के बीच खेले गए मुकाबले में कुल 354 रन बने थे।

  • साइल लारिन ने बचाई कनाडा की लाज, फीफा वर्ल्ड कप में बोस्निया के खिलाफ 1-1 से ड्रॉ

    साइल लारिन ने बचाई कनाडा की लाज, फीफा वर्ल्ड कप में बोस्निया के खिलाफ 1-1 से ड्रॉ


    नई दिल्ली । फीफा विश्व कप 2026 में सह-मेजबान Canada National Football Team ने अपने पहले मुकाबले में शानदार वापसी करते हुए महत्वपूर्ण अंक हासिल किया। टोरंटो में खेले गए रोमांचक मुकाबले में कनाडा और Bosnia and Herzegovina National Football Team के बीच मुकाबला 1-1 की बराबरी पर समाप्त हुआ। मैच के नायक रहे कनाडा के अनुभवी स्ट्राइकर साइल लारिन, जिन्होंने अंतिम चरण में गोल दागकर अपनी टीम को हार से बचा लिया।

    टोरंटो के खचाखच भरे स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में बोस्निया और हर्जेगोविना ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया। शुरुआती मिनटों में उन्होंने गेंद पर बेहतर नियंत्रण बनाए रखा और कनाडा के रक्षात्मक विभाग पर लगातार दबाव बनाया।

    पहले हाफ में बोस्निया को कॉर्नर किक के जरिए सफलता मिली। Sead Kolasinac द्वारा आगे बढ़ाई गई गेंद पर Jovo Lukic ने शानदार हेडर लगाकर टीम को 1-0 की बढ़त दिला दी। इस गोल के बाद कनाडा पर दबाव और बढ़ गया।

    गोल खाने के बाद कनाडा ने जवाबी हमले तेज किए। टीम के स्टार फॉरवर्ड Jonathan David ने बराबरी का बेहतरीन मौका बनाया, लेकिन बोस्निया के गोलकीपर Nikola Vasilj ने शानदार बचाव करते हुए अपनी टीम की बढ़त बरकरार रखी। इसके बाद Tani Oluwaseyi भी एक आसान अवसर को गोल में नहीं बदल सके।

    दूसरे हाफ में कनाडा ने पूरी ताकत के साथ वापसी की कोशिश की। लगातार हमलों के बीच ओलुवासेयी का एक हेडर गोल के करीब पहुंचा, लेकिन डिफेंडर Nikola Katic ने उसे रोक दिया। वहीं, Richie Laryea के संभावित गोल को भी कोलासिनाक ने गोललाइन से क्लियर कर दिया।

    हालांकि बोस्निया भी लगातार जवाबी हमले करता रहा। कनाडा के गोलकीपर Maxime Crepeau ने कई महत्वपूर्ण बचाव कर अपनी टीम को मुकाबले में बनाए रखा। विशेष रूप से Ermedin Demirovic के खतरनाक प्रयास को रोकना मैच का अहम क्षण साबित हुआ।

    जब ऐसा लग रहा था कि बोस्निया जीत दर्ज कर लेगा, तभी कनाडा के मुख्य कोच Jesse Marsch का रणनीतिक बदलाव काम आ गया। 76वें मिनट में मैदान पर उतारे गए साइल लारिन ने केवल दो मिनट बाद ही मैच का रुख बदल दिया। Promise David के शानदार पास पर लारिन ने गेंद को नियंत्रित किया और सटीक फिनिश के साथ गोल दागकर स्कोर 1-1 कर दिया।

    स्टॉपेज टाइम में लारिन के पास कनाडा को जीत दिलाने का सुनहरा अवसर भी था, लेकिन Tarik Muharemovic ने उनका प्रयास विफल कर दिया। इसके बाद दोनों टीमों ने जीत के लिए प्रयास किए, लेकिन कोई भी निर्णायक गोल नहीं कर सकी।

    इस ड्रॉ के साथ कनाडा ने विश्व कप इतिहास में अपना पहला अंक हासिल किया और घरेलू दर्शकों के सामने आत्मविश्वास से भरी शुरुआत की। वहीं बोस्निया और हर्जेगोविना को भी कठिन मुकाबले से एक महत्वपूर्ण अंक मिला।

  • डैनी व्याट के तूफानी शतक से इंग्लैंड की धमाकेदार शुरुआत, श्रीलंका को 87 रन से रौंदा

    डैनी व्याट के तूफानी शतक से इंग्लैंड की धमाकेदार शुरुआत, श्रीलंका को 87 रन से रौंदा


    नई दिल्ली । आईसीसी महिला टी20 विश्व कप 2026 में मेजबान England Women’s Cricket Team ने अपने अभियान की शुरुआत शानदार जीत के साथ की है। बर्मिंघम के Edgbaston Cricket Ground में खेले गए मुकाबले में इंग्लैंड ने श्रीलंका को 87 रन के बड़े अंतर से हराकर टूर्नामेंट में अपने इरादे साफ कर दिए। इस जीत की सबसे बड़ी नायिका रहीं स्टार बल्लेबाज Danni Wyatt-Hodge, जिन्होंने नाबाद शतकीय पारी खेलकर मैच को एकतरफा बना दिया।

    पहले बल्लेबाजी करते हुए इंग्लैंड ने निर्धारित 20 ओवर में एक विकेट के नुकसान पर 219 रन बनाए। यह स्कोर महिला टी20 विश्व कप के इतिहास का सबसे बड़ा स्कोर भी बन गया। इंग्लैंड की बल्लेबाजों ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया और श्रीलंकाई गेंदबाजों को दबाव में बनाए रखा।

    इंग्लैंड को मजबूत शुरुआत दिलाने में Amy Jones और डैनी व्याट की जोड़ी ने अहम भूमिका निभाई। दोनों बल्लेबाजों ने पहले विकेट के लिए 135 रन की शानदार साझेदारी की। एमी जोन्स ने 38 गेंदों पर 53 रन की उपयोगी पारी खेली, जिसमें चार चौके और एक छक्का शामिल रहा।

    हालांकि मैच की सबसे बड़ी आकर्षण डैनी व्याट की विस्फोटक बल्लेबाजी रही। उन्होंने श्रीलंका के गेंदबाजी आक्रमण की जमकर खबर लेते हुए 62 गेंदों में नाबाद 105 रन बनाए। अपनी पारी में उन्होंने 13 चौके और एक छक्का लगाया। यह पारी न केवल उनके करियर की यादगार पारियों में शामिल हो गई, बल्कि इंग्लैंड को विशाल स्कोर तक पहुंचाने में भी निर्णायक साबित हुई।

    मध्यक्रम में कप्तान Nat Sciver-Brunt ने भी ताबड़तोड़ बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया। उन्होंने केवल 22 गेंदों में नाबाद 46 रन बनाकर श्रीलंकाई गेंदबाजों की मुश्किलें और बढ़ा दीं। अंतिम ओवरों में उनके आक्रामक खेल ने इंग्लैंड को 200 रन के पार पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

    220 रन के विशाल लक्ष्य का पीछा करने उतरी Sri Lanka Women’s Cricket Team की शुरुआत बेहद खराब रही। कप्तान Chamari Athapaththu केवल 4 रन बनाकर पवेलियन लौट गईं। इसके बाद नियमित अंतराल पर विकेट गिरते रहे और टीम कभी भी लक्ष्य के करीब पहुंचती नजर नहीं आई।

    श्रीलंका की ओर से Nilakshi de Silva ने सबसे अधिक 39 रन बनाए, जबकि Harshitha Samarawickrama ने 29 रन का योगदान दिया। हालांकि अन्य बल्लेबाज बड़ी साझेदारी करने में नाकाम रहीं।

    गेंदबाजी में इंग्लैंड की ओर से Freya Kemp ने शानदार प्रदर्शन करते हुए चार विकेट झटके। वहीं Sophie Ecclestone और Charlie Dean ने दो-दो विकेट हासिल किए। इस शानदार गेंदबाजी प्रदर्शन के दम पर श्रीलंका की पूरी टीम 132 रन पर सिमट गई।

    इस जीत के साथ इंग्लैंड ने टूर्नामेंट में मजबूत शुरुआत की है और खिताब की दावेदारी को भी मजबूती से पेश किया है। वहीं श्रीलंका को अगले मुकाबलों में वापसी के लिए अपनी बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों विभागों में सुधार करना होगा।

  • IND vs AFG: ईशान किशन की एंट्री तय, प्रिंस यादव कर सकते हैं डेब्यू; पहले वनडे में रोहित शर्मा पर रहेंगी निगाहें

    IND vs AFG: ईशान किशन की एंट्री तय, प्रिंस यादव कर सकते हैं डेब्यू; पहले वनडे में रोहित शर्मा पर रहेंगी निगाहें


    नई दिल्ली। भारत और अफगानिस्तान के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज का पहला मुकाबला शनिवार को धर्मशाला के हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (एचपीसीए) स्टेडियम में खेला जाएगा। यह सीरीज टीम इंडिया के लिए सिर्फ एक और द्विपक्षीय श्रृंखला नहीं, बल्कि भविष्य की तैयारियों और नए खिलाड़ियों की परीक्षा भी मानी जा रही है। मुकाबला भारतीय समयानुसार दोपहर 1:30 बजे शुरू होगा।

    सीरीज शुरू होने से पहले भारतीय टीम को दो बड़े झटके लगे हैं। स्टार बल्लेबाज Virat Kohli और स्टार ऑलराउंडर Hardik Pandya चोट के कारण पूरी श्रृंखला से बाहर हो चुके हैं। ऐसे में कप्तान Shubman Gill के सामने संतुलित और मजबूत प्लेइंग इलेवन चुनने की चुनौती होगी।

    हालांकि भारतीय टीम के पास युवा और अनुभवी खिलाड़ियों का बेहतरीन मिश्रण मौजूद है। टीम प्रबंधन की नजर अब उन खिलाड़ियों पर होगी जो इस अवसर को भुनाकर भविष्य के लिए अपनी दावेदारी मजबूत करना चाहते हैं। इनमें सबसे बड़ा नाम ईशान किशन का है, जिन्हें विराट कोहली की अनुपस्थिति में नंबर-3 पर बल्लेबाजी का मौका मिल सकता है।

    रोहित-गिल पर होगी मजबूत शुरुआत की जिम्मेदारी
    भारतीय पारी की शुरुआत अनुभवी कप्तान Rohit Sharma और शुभमन गिल करते दिखाई दे सकते हैं। दोनों बल्लेबाज वनडे क्रिकेट में भारत की सबसे भरोसेमंद ओपनिंग जोड़ी माने जाते हैं। रोहित अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से तेज शुरुआत देना चाहेंगे, जबकि शुभमन गिल कप्तानी के साथ-साथ बल्ले से भी अहम योगदान देने की कोशिश करेंगे।

    ईशान किशन के पास बड़ा मौका
    नंबर-3 की भूमिका में ईशान किशन सबसे मजबूत दावेदार नजर आ रहे हैं। बाएं हाथ के बल्लेबाज होने के कारण वह टीम के बल्लेबाजी क्रम में संतुलन भी जोड़ते हैं। उनकी आक्रामक शैली मध्यक्रम पर दबाव कम कर सकती है और टीम को तेज रन गति बनाए रखने में मदद मिलेगी।

    नंबर-4 पर उपकप्तान Shreyas Iyer का खेलना लगभग तय माना जा रहा है। वहीं विकेटकीपर बल्लेबाज KL Rahul पांचवें नंबर पर उतर सकते हैं। राहुल की भूमिका युवा बल्लेबाजों को संभालने और पारी को आगे बढ़ाने की होगी।

    नीतीश और प्रिंस पर खास नजर
    हार्दिक पंड्या की गैरमौजूदगी में ऑलराउंडर Nitish Kumar Reddy के लिए यह बड़ा अवसर साबित हो सकता है। आईपीएल में शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी क्षमता दिखाने का मौका मिलेगा।

    वहीं तेज गेंदबाजी विभाग में सबसे ज्यादा चर्चा युवा गेंदबाज Prince Yadav को लेकर है। आईपीएल में प्रभावित करने के बाद उन्हें राष्ट्रीय टीम में जगह मिली है और धर्मशाला में उनके वनडे डेब्यू की संभावना जताई जा रही है। यदि ऐसा होता है तो यह उनके करियर का सबसे यादगार पल होगा।

    स्पिन विभाग में कुलदीप-सुंदर अहम
    स्पिन आक्रमण की जिम्मेदारी Kuldeep Yadav और Washington Sundar पर होगी। कुलदीप अफगान बल्लेबाजों के खिलाफ अपनी फिरकी से बड़ा असर डाल सकते हैं, जबकि सुंदर बल्ले और गेंद दोनों से टीम को संतुलन देंगे।

    भारत की संभावित प्लेइंग इलेवन
    रोहित शर्मा, शुभमन गिल (कप्तान), ईशान किशन, श्रेयस अय्यर, केएल राहुल (विकेटकीपर), नीतीश कुमार रेड्डी, वॉशिंगटन सुंदर, कुलदीप यादव, अर्शदीप सिंह, प्रिंस यादव और प्रसिद्ध कृष्णा।

  • FIFA World Cup 2026: टोरंटो में रंगारंग ओपनिंग सेरेमनी का जलवा, नोरा फतेही की धमाकेदार परफॉर्मेंस ने जीता दिल

    FIFA World Cup 2026: टोरंटो में रंगारंग ओपनिंग सेरेमनी का जलवा, नोरा फतेही की धमाकेदार परफॉर्मेंस ने जीता दिल


    नई दिल्ली। फीफा विश्व कप 2026 का रोमांच मैदान के साथ-साथ मंच पर भी देखने को मिल रहा है। शुक्रवार को कनाडा के टोरंटो स्थित बीएमओ फील्ड में आयोजित टूर्नामेंट की दूसरी ओपनिंग सेरेमनी ने दुनिया भर के फुटबॉल प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। भव्य रोशनी, संगीत, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और अंतरराष्ट्रीय कलाकारों के शानदार प्रदर्शन ने इस आयोजन को विश्व कप के सबसे यादगार पलों में शामिल कर दिया।

    इस रंगारंग समारोह का सबसे बड़ा आकर्षण बॉलीवुड अभिनेत्री और वैश्विक कलाकार नोरा फतेही रहीं। जैसे ही नोरा मंच पर पहुंचीं, पूरा स्टेडियम तालियों और उत्साह से गूंज उठा। उन्होंने फीफा विश्व कप 2026 के आधिकारिक गीत ‘Siir Siir’ पर दमदार प्रस्तुति दी। अपनी जबरदस्त ऊर्जा, आकर्षक डांस मूव्स और शानदार मंचीय उपस्थिति से नोरा ने हजारों दर्शकों का दिल जीत लिया। सोशल मीडिया पर भी उनकी परफॉर्मेंस के वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं और प्रशंसक उनकी जमकर तारीफ कर रहे हैं।

    ‘Siir Siir’ गीत संगीत निर्माता संजॉय और फ्रांसीसी गायक वेगेड्रीम के सहयोग से तैयार किया गया है। यह गीत फीफा विश्व कप 2026 के आधिकारिक म्यूजिक प्रोजेक्ट का हिस्सा है और टूर्नामेंट के आधिकारिक एल्बम में भी शामिल किया गया है। नोरा की प्रस्तुति ने इस गीत को नई पहचान देने का काम किया और स्टेडियम में मौजूद दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।

    समारोह में कनाडा की सांस्कृतिक विविधता और विरासत को भी बेहद खूबसूरत अंदाज में प्रस्तुत किया गया। विश्व कप ट्रॉफी की विशाल मोजेक-शैली की प्रस्तुति ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा। रोशनी और तकनीक के शानदार समन्वय ने आयोजन को और भी भव्य बना दिया। स्टेडियम में मौजूद हजारों दर्शकों ने इस दृश्य का भरपूर आनंद लिया।

    कार्यक्रम के दौरान प्रसिद्ध कनाडाई गायिका अलानिस मॉरिसेट ने राष्ट्रगान प्रस्तुत किया, जिसने माहौल को भावुक और गौरवपूर्ण बना दिया। वहीं हॉलीवुड अभिनेता विल अर्नेट ने दुनिया भर से आए फुटबॉल प्रशंसकों का स्वागत किया और विश्व कप के जश्न को नई ऊंचाई दी।

    ओपनिंग सेरेमनी में कई अन्य अंतरराष्ट्रीय कलाकारों ने भी अपने प्रदर्शन से समां बांधा। माइकल बब्ले, एलेसिया कारा, जेसी रेयेज, एलियाना और विलियम प्रिंस जैसे कलाकारों ने मंच पर शानदार प्रस्तुतियां देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। संगीत, संस्कृति और खेल के इस अद्भुत संगम ने विश्व कप के उत्सव को और अधिक खास बना दिया।

    फीफा विश्व कप 2026 के कनाडाई चरण की यह ओपनिंग सेरेमनी न केवल खेल प्रेमियों बल्कि संगीत और मनोरंजन जगत के प्रशंसकों के लिए भी एक अविस्मरणीय अनुभव बन गई। नोरा फतेही की शानदार प्रस्तुति और अंतरराष्ट्रीय कलाकारों की मौजूदगी ने इस आयोजन को वैश्विक आकर्षण का केंद्र बना दिया।

  • छोले-कुलचे की रेहड़ी से टीम इंडिया तक: जालंधर के अर्जुन राजपूत का अंडर-19 टीम में चयन, मेहनत ने बदली तकदीर

    छोले-कुलचे की रेहड़ी से टीम इंडिया तक: जालंधर के अर्जुन राजपूत का अंडर-19 टीम में चयन, मेहनत ने बदली तकदीर


    नई दिल्ली। कहते हैं कि सपनों की कोई आर्थिक सीमा नहीं होती। यदि इरादे मजबूत हों, मेहनत सच्ची हो और परिवार का साथ मिले, तो साधारण परिस्थितियों से निकलकर भी असाधारण उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं। पंजाब के जालंधर निवासी अर्जुन राजपूत की कहानी इसी जज्बे और संघर्ष की मिसाल बनकर सामने आई है। छोले-कुलचे की रेहड़ी लगाने वाले एक मेहनतकश पिता के बेटे अर्जुन ने भारतीय अंडर-19 क्रिकेट टीम में चयनित होकर अपने परिवार, शहर और प्रदेश का नाम रोशन कर दिया है।

    जालंधर के राम नगर इलाके में रहने वाले अर्जुन राजपूत का चयन भारतीय अंडर-19 क्रिकेट टीम में हुआ है। अगले महीने 4 जुलाई को टीम श्रीलंका दौरे के लिए रवाना होगी, जहां अर्जुन पहली बार भारत की नीली जर्सी पहनकर मैदान में उतरेंगे। यह पल न केवल उनके लिए बल्कि उनके पूरे परिवार के लिए गर्व और खुशी का अवसर है।

    अर्जुन एक प्रतिभाशाली ऑलराउंडर हैं। वह बाएं हाथ के बल्लेबाज होने के साथ-साथ दाएं हाथ के ऑफ स्पिन गेंदबाज भी हैं। क्रिकेट के प्रति उनका जुनून बचपन से ही दिखाई देने लगा था। उन्होंने महज आठ-नौ वर्ष की उम्र में क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था। सीमित संसाधनों और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया। उन्होंने अपनी क्रिकेट यात्रा की शुरुआत हरभजन सिंह क्रिकेट अकादमी से की, जहां उन्हें कोच विक्रम सिद्धू का मार्गदर्शन मिला।

    अंडर-19 टीम में चयन के बाद अर्जुन ने अपनी खुशी साझा करते हुए कहा कि यह उनके जीवन का बेहद खास क्षण है। उन्होंने कहा कि देश का प्रतिनिधित्व करना हर खिलाड़ी का सपना होता है और वह श्रीलंका दौरे पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की कोशिश करेंगे। अर्जुन ने भरोसा जताया कि टीम पूरे दमखम के साथ खेलेगी और ट्रॉफी जीतकर भारत लौटने का प्रयास करेगी।

    उन्होंने अपने माता-पिता के संघर्ष और त्याग को याद करते हुए कहा कि उनके पिता ने उनके सपनों को पूरा करने के लिए वर्षों तक कड़ी मेहनत की है। अर्जुन के अनुसार, उनके पिता डीएवी कॉलेज के बाहर छोले-कुलचे की रेहड़ी लगाते हैं और उन्होंने कभी भी बेटे की क्रिकेट यात्रा में आर्थिक कठिनाइयों को आड़े नहीं आने दिया। अर्जुन ने भावुक होकर कहा कि अब उनकी जिम्मेदारी है कि वह अपने पिता के सपनों को पूरा करें और उन्हें गर्व महसूस कराएं।

    पिता होती राम के लिए यह उपलब्धि किसी सपने के सच होने से कम नहीं है। उन्होंने बताया कि अर्जुन बचपन से ही क्रिकेट के प्रति समर्पित रहा है और दिन-रात मेहनत करता रहा। जब उन्हें बेटे के भारतीय अंडर-19 टीम में चयन की खबर मिली, तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। वहीं अर्जुन की मां नन्ही देवी ने कहा कि यह पूरे परिवार के लिए बेहद भावुक और गर्व का पल है।

    अर्जुन की बहन किरण राजपूत ने भी कहा कि भाई ने वर्षों तक लगातार मेहनत की और कभी हार नहीं मानी। अब उसकी मेहनत का फल पूरे देश के सामने है। परिवार का सपना था कि अर्जुन भारतीय टीम की नीली जर्सी पहने और अब वह सपना साकार हो चुका है।

    अर्जुन राजपूत की यह सफलता उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। उनकी कहानी यह साबित करती है कि मेहनत, समर्पण और आत्मविश्वास के सामने आर्थिक कठिनाइयां भी छोटी पड़ जाती हैं।

  • जसपाल राणा के निधन पर राष्ट्र शोकाकुल, राष्ट्रपति मुर्मु से लेकर कई दिग्गज नेताओं ने दी श्रद्धांजलि

    जसपाल राणा के निधन पर राष्ट्र शोकाकुल, राष्ट्रपति मुर्मु से लेकर कई दिग्गज नेताओं ने दी श्रद्धांजलि


    नई दिल्ली। भारतीय निशानेबाजी के दिग्गज खिलाड़ी, प्रख्यात कोच और पद्मश्री सम्मानित जसपाल राणा के निधन से पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है। खेल जगत की इस बड़ी क्षति पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से लेकर केंद्र और राज्यों के अनेक वरिष्ठ नेताओं ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है। नेताओं ने अपने संदेशों में जसपाल राणा के खेल जीवन, उनके योगदान और युवा खिलाड़ियों को तैयार करने में निभाई गई उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को याद किया।

    जानकारी के अनुसार, जर्मनी के म्युनिख में आयोजित आईएसएसएफ वर्ल्ड कप से भारतीय दल के साथ लौटते समय उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। इसके बाद उन्हें दिल्ली के साकेत स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 49 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। उनके निधन की खबर सामने आते ही खेल जगत और राजनीतिक क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने शोक संदेश में कहा कि जसपाल राणा भारतीय खेलों के ऐसे प्रतीक थे जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का गौरव बढ़ाया। उन्होंने कहा कि एक खिलाड़ी और मार्गदर्शक के रूप में उनका योगदान सदैव याद रखा जाएगा तथा उनका समर्पण आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।

    केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय शूटिंग में जसपाल राणा का योगदान अमूल्य है। उन्होंने कहा कि युवा प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए उनका समर्पण हमेशा याद रखा जाएगा। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने उनके निधन को भारतीय खेल जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताते हुए कहा कि उन्होंने अपने शानदार करियर के दौरान देश को विश्व मंच पर गौरवान्वित किया।

    केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि जसपाल राणा ने अपनी प्रतिभा, अनुशासन और समर्पण के बल पर भारत को अनेक गौरवपूर्ण क्षण दिए। उन्होंने कहा कि खिलाड़ी और कोच दोनों रूपों में उनका योगदान भारतीय खेल इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज रहेगा।

    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी शोक व्यक्त करते हुए कहा कि जसपाल राणा का निधन भारतीय खेल जगत के लिए बड़ी क्षति है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर भारत को सम्मान दिलाने वाली उनकी उपलब्धियां और युवा खिलाड़ियों के मार्गदर्शन में निभाई गई भूमिका सदैव स्मरणीय रहेगी। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी उन्हें भारतीय निशानेबाजी का गौरव बताते हुए श्रद्धांजलि दी।

    उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जसपाल राणा को देवभूमि उत्तराखंड का गौरव बताते हुए कहा कि उनका व्यक्तित्व और कृतित्व आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा। वहीं दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी उनके निधन को खेल जगत के लिए बड़ी क्षति करार दिया।

    राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी गहरा दुख व्यक्त किया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि जसपाल राणा भारतीय खेलों की सबसे बड़ी हस्तियों में से एक थे। उन्होंने न केवल देश का नाम विश्वभर में रोशन किया बल्कि नई पीढ़ी के निशानेबाजों को भी तैयार किया। कांग्रेस सांसद और बीसीसीआई उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने कहा कि भारतीय निशानेबाजी के स्वर्णिम अध्यायों में जसपाल राणा का नाम हमेशा सम्मान के साथ लिया जाएगा।

    जसपाल राणा ने अपने करियर में अनेक अंतरराष्ट्रीय पदक जीतकर भारत को गौरवान्वित किया था। बाद में कोच के रूप में उन्होंने कई युवा खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय मंच तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके निधन से भारतीय खेल जगत ने एक ऐसे मार्गदर्शक को खो दिया है, जिसकी कमी लंबे समय तक महसूस की जाएगी।

  • फीफा वर्ल्ड कप 2026: दक्षिण कोरिया की शानदार शुरुआत, चेकिया को 2-1 से हराकर दर्ज की दमदार जीत

    फीफा वर्ल्ड कप 2026: दक्षिण कोरिया की शानदार शुरुआत, चेकिया को 2-1 से हराकर दर्ज की दमदार जीत


    नई दिल्ली। फीफा वर्ल्ड कप 2026 में दक्षिण कोरिया ने अपने अभियान की शानदार शुरुआत करते हुए चेकिया को 2-1 से हराकर जीत दर्ज की। रोमांच से भरपूर इस मुकाबले में दक्षिण कोरिया ने दूसरे हाफ में एक गोल से पिछड़ने के बावजूद जबरदस्त वापसी की और अंततः मुकाबला अपने नाम कर लिया। इस जीत के साथ कोरियाई टीम ने टूर्नामेंट में अपने इरादे साफ कर दिए हैं।

    मैच की शुरुआत से ही दोनों टीमों ने आक्रामक रुख अपनाया। शुरुआती मिनटों में दक्षिण कोरिया ने गेंद पर बेहतर नियंत्रण रखते हुए चेकिया के डिफेंस पर लगातार दबाव बनाया। मैच के नौवें मिनट में कोरिया को फ्री किक के रूप में शानदार मौका मिला, लेकिन चेकिया के मजबूत रक्षापंक्ति ने उसे नाकाम कर दिया। इसके बाद 11वें मिनट में मिले कॉर्नर का भी दक्षिण कोरिया फायदा नहीं उठा सका।

    पहले हाफ में कोरिया ने कई हमले किए, लेकिन चेकिया का डिफेंस मजबूती से खड़ा रहा। दूसरी ओर चेकिया ने भी कुछ अच्छे मूव बनाए, हालांकि वह भी गोल करने में सफल नहीं हो सकी। दोनों टीमों के बीच कड़ा संघर्ष देखने को मिला और पहले 45 मिनट तक स्कोर 0-0 पर बराबरी पर रहा।

    दूसरे हाफ में चेकिया ने अधिक आक्रामक अंदाज में खेलना शुरू किया। इसका फायदा उसे 59वें मिनट में मिला जब लाडिसलाव क्रेजकी ने शानदार हेडर के जरिए गेंद को जाल में पहुंचाकर अपनी टीम को 1-0 की बढ़त दिला दी। इस गोल के बाद ऐसा लग रहा था कि मुकाबले का रुख चेकिया की ओर झुक सकता है, लेकिन दक्षिण कोरिया ने हार नहीं मानी।

    एक गोल से पीछे होने के बाद कोरियाई खिलाड़ियों ने अपनी गति और आक्रमण को और तेज किया। लगातार प्रयासों का परिणाम 67वें मिनट में मिला, जब हांग इन बियोम ने शानदार गोल दागकर स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया। इस गोल ने दक्षिण कोरिया में नया जोश भर दिया और टीम ने जीत के लिए दबाव बनाए रखा।

    बराबरी का गोल मिलने के बाद दक्षिण कोरिया ने आक्रमण जारी रखा। मैच के 80वें मिनट में ओह हियोन ग्यू ने बेहतरीन फिनिशिंग का प्रदर्शन करते हुए टीम को 2-1 की बढ़त दिला दी। यह गोल मैच का निर्णायक क्षण साबित हुआ। इसके बाद चेकिया ने वापसी की भरपूर कोशिश की और कई हमले किए, लेकिन दक्षिण कोरिया के डिफेंस ने कोई गलती नहीं की।

    अंतिम मिनटों में मुकाबला बेहद रोमांचक रहा, लेकिन दक्षिण कोरिया ने संयम बनाए रखा और चेकिया को बराबरी का मौका नहीं दिया। निर्धारित समय समाप्त होने पर स्कोर 2-1 रहा और दक्षिण कोरिया ने फीफा वर्ल्ड कप 2026 में जीत के साथ अपने सफर की शुरुआत की। यह जीत टीम के आत्मविश्वास को बढ़ाने वाली साबित हो सकती है, जबकि चेकिया को अगले मुकाबलों में वापसी के लिए अधिक मजबूत प्रदर्शन करना होगा।

  • जसपाल राणा का निधन: भारतीय शूटिंग के ‘गोल्डन बॉय’ को नम आंखों से विदाई, खिलाड़ी से कोच तक रहा स्वर्णिम सफर

    जसपाल राणा का निधन: भारतीय शूटिंग के ‘गोल्डन बॉय’ को नम आंखों से विदाई, खिलाड़ी से कोच तक रहा स्वर्णिम सफर


    नई दिल्ली। भारतीय निशानेबाजी जगत ने शुक्रवार को अपने सबसे चमकदार सितारों में से एक को खो दिया। पूर्व एशियाई खेल स्वर्ण पदक विजेता, अंतरराष्ट्रीय स्तर के शूटर और प्रतिष्ठित कोच जसपाल राणा का 49 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन से न केवल भारतीय शूटिंग समुदाय बल्कि पूरे खेल जगत में शोक की लहर है। दशकों तक अपनी उपलब्धियों और समर्पण से भारतीय खेलों को गौरवान्वित करने वाले जसपाल राणा को भारतीय शूटिंग का ‘गोल्डन बॉय’ कहा जाता था।

    28 जून 1976 को उत्तराखंड के उत्तरकाशी में जन्मे जसपाल राणा का खेल जीवन बेहद प्रेरणादायक रहा। सेना पृष्ठभूमि वाले परिवार में जन्मे राणा को बचपन से ही अनुशासन और खेल भावना का माहौल मिला। उनके पिता नारायण राणा ने ही उन्हें शूटिंग की शुरुआती बारीकियां सिखाईं और वही उनके पहले कोच बने। कम उम्र में ही उनकी प्रतिभा सामने आने लगी थी। मात्र 12 वर्ष की उम्र में उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी थी।

    वर्ष 1988 की राष्ट्रीय शूटिंग चैंपियनशिप में रजत पदक जीतकर उन्होंने अपने उज्ज्वल भविष्य की झलक दिखा दी थी। इसके बाद 1994 में इटली में आयोजित जूनियर विश्व शूटिंग चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन कर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन किया। यही वह दौर था जब दुनिया ने भारतीय शूटिंग के इस उभरते सितारे को गंभीरता से लेना शुरू किया।

    जसपाल राणा ने 1996 के अटलांटा ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। हालांकि वह ओलंपिक पदक नहीं जीत सके, लेकिन अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उन्होंने अभूतपूर्व सफलता हासिल की। कॉमनवेल्थ खेलों में उनका प्रदर्शन विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। चार कॉमनवेल्थ खेलों में हिस्सा लेते हुए उन्होंने कुल 15 पदक जीते, जिनमें 9 स्वर्ण पदक शामिल थे। वर्ष 2002 के मैनचेस्टर कॉमनवेल्थ खेलों में उन्होंने अकेले छह पदक जीतकर इतिहास रच दिया था।

    एशियाई खेलों में भी उनका दबदबा देखने को मिला। 2006 के दोहा एशियाई खेलों में उन्होंने तीन स्वर्ण और एक रजत पदक जीतकर भारत का गौरव बढ़ाया। इसी दौरान 25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल स्पर्धा में 590 अंक हासिल कर उन्होंने विश्व रिकॉर्ड की बराबरी की थी, जो उनकी तकनीकी दक्षता और मानसिक मजबूती का प्रमाण था।

    खिलाड़ी के रूप में शानदार करियर के बाद जसपाल राणा ने कोचिंग की जिम्मेदारी संभाली और भारतीय निशानेबाजी को नई दिशा दी। उन्होंने कई युवा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए तैयार किया। उनकी कोचिंग में भारतीय निशानेबाजों ने विश्व स्तर पर सफलता हासिल की। विशेष रूप से मनु भाकर की उपलब्धियों में उनका योगदान बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। उनकी देखरेख में मनु ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन कर भारतीय शूटिंग को नई पहचान दिलाई।

    खेल के प्रति उनके समर्पण और उपलब्धियों को देखते हुए उन्हें अर्जुन पुरस्कार, पद्मश्री और द्रोणाचार्य पुरस्कार जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया। ये सम्मान उनके बहुआयामी योगदान की गवाही देते हैं।

    जसपाल राणा ने ऐसे समय में भारतीय शूटिंग को लोकप्रिय बनाया, जब यह खेल सीमित दायरे में सिमटा हुआ था। उन्होंने न केवल पदक जीते बल्कि एक पूरी पीढ़ी को प्रेरित भी किया। उनके निधन के साथ भारतीय शूटिंग के एक गौरवशाली अध्याय का अंत जरूर हुआ है, लेकिन उनकी उपलब्धियां और योगदान हमेशा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देते रहेंगे।