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  • जसपाल राणा के निधन पर देश शोकाकुल, पीएम मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जताया गहरा दुख

    जसपाल राणा के निधन पर देश शोकाकुल, पीएम मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जताया गहरा दुख


    नई दिल्ली। भारतीय शूटिंग जगत के दिग्गज खिलाड़ी और कोच जसपाल राणा के निधन से पूरे देश में शोक की लहर है। 49 वर्ष की आयु में उनके निधन की खबर सामने आने के बाद खेल जगत, राजनीतिक नेतृत्व और उनके प्रशंसकों ने गहरा दुख व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) के पदाधिकारियों ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए भारतीय खेलों में उनके योगदान को याद किया।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर शोक संदेश जारी करते हुए कहा कि जसपाल राणा का निधन भारतीय खेल जगत के लिए एक बड़ी क्षति है। प्रधानमंत्री ने लिखा कि राणा ने शूटिंग में अपनी असाधारण उपलब्धियों से देश का गौरव बढ़ाया और एक मार्गदर्शक के रूप में भी नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि जसपाल राणा का समर्पण, अनुशासन और खेलों के प्रति प्रतिबद्धता उन्हें हमेशा सम्मान दिलाती रहेगी। प्रधानमंत्री ने शोक संतप्त परिवार, मित्रों और खेल समुदाय के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी जसपाल राणा के निधन पर गहरा दुख जताया। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन करने वाले इस महान खिलाड़ी का अचानक निधन बेहद दुखद है। राजनाथ सिंह ने कहा कि जसपाल राणा न केवल एक उत्कृष्ट शूटर और कोच थे, बल्कि बेहद सरल, सहज और नेकदिल इंसान भी थे। उन्होंने भारत में शूटिंग को लोकप्रिय बनाने और युवा खिलाड़ियों को इस खेल की ओर आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    रक्षा मंत्री ने अपने संदेश में यह भी कहा कि जसपाल राणा ने विश्व शूटिंग चैंपियनशिप और एशियाई खेलों जैसे बड़े मंचों पर भारत को स्वर्ण पदक दिलाकर देश का मान बढ़ाया। उनके अनुसार, राणा का जाना भारतीय खेल जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है, जिसकी भरपाई आसान नहीं होगी।

    भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) के अध्यक्ष कलिकेश नारायण सिंह देव ने भी उनके निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जसपाल राणा केवल एक चैंपियन खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि एक उत्कृष्ट मेंटोर भी थे। उन्होंने कहा कि भारतीय शूटिंग समुदाय को उनकी कमी हमेशा महसूस होगी और उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।

    जसपाल राणा भारतीय शूटिंग के सबसे सफल खिलाड़ियों में गिने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर के दौरान एशियाई खेलों, कॉमनवेल्थ गेम्स और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत के लिए कई पदक जीते। खिलाड़ी के रूप में सफलता हासिल करने के बाद उन्होंने कोचिंग में भी उल्लेखनीय योगदान दिया और कई युवा निशानेबाजों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता दिलाई।

    दो बार की ओलंपिक पदक विजेता भारतीय शूटर मनु भाकर सहित कई शीर्ष खिलाड़ियों के करियर को संवारने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। वर्तमान में वह भारतीय पिस्टल निशानेबाजों के हाई-परफॉर्मेंस कोच के रूप में कार्यरत थे और भारतीय शूटिंग टीम को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में जुटे हुए थे।

    रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल ही में जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ वर्ल्ड कप से लौटते समय उनकी तबीयत बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनके निधन से भारतीय खेल जगत ने एक ऐसे व्यक्तित्व को खो दिया है, जिसने अपने प्रदर्शन, नेतृत्व और मार्गदर्शन से भारतीय शूटिंग को वैश्विक पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

  • पूर्व भारतीय शूटर और द्रोणाचार्य अवॉर्डी जसपाल राणा का निधन, खेल जगत में शोक की लहर

    पूर्व भारतीय शूटर और द्रोणाचार्य अवॉर्डी जसपाल राणा का निधन, खेल जगत में शोक की लहर


    नई दिल्ली। भारतीय शूटिंग जगत को शुक्रवार को उस समय बड़ा झटका लगा, जब पूर्व अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज और प्रतिष्ठित कोच जसपाल राणा के निधन की खबर सामने आई। 49 वर्ष की उम्र में उनके निधन से खेल जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। जसपाल राणा न केवल भारत के सबसे सफल निशानेबाजों में शामिल थे, बल्कि उन्होंने कोच के रूप में भी भारतीय शूटिंग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

    रिपोर्ट्स के अनुसार, जसपाल राणा हाल ही में जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ वर्ल्ड कप से लौट रहे थे। यात्रा के दौरान उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालांकि चिकित्सकों के प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनके निधन की खबर सामने आते ही खेल जगत, खिलाड़ियों और प्रशंसकों के बीच शोक की भावना फैल गई।

    जसपाल राणा भारतीय शूटिंग के उन चुनिंदा खिलाड़ियों में रहे, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन किया। उन्होंने एशियाई खेलों, कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियाई चैंपियनशिप में कई पदक जीतकर भारतीय निशानेबाजी को नई पहचान दिलाई। अपने करियर के दौरान उन्होंने चार कॉमनवेल्थ खेलों—1994, 1998, 2002 और 2006—में भारत का प्रतिनिधित्व किया और कुल 15 पदक अपने नाम किए। इनमें 9 स्वर्ण, 4 रजत और 2 कांस्य पदक शामिल रहे। इसके अलावा एशियाई खेलों में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश को कई महत्वपूर्ण पदक दिलाए।

    खिलाड़ी के रूप में सफलता हासिल करने के बाद जसपाल राणा ने कोचिंग की जिम्मेदारी संभाली और नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को तैयार करने में जुट गए। भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) ने उन्हें 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा के लिए हाई परफॉर्मेंस कोच नियुक्त किया था। उनकी कोचिंग शैली अनुशासन, तकनीकी दक्षता और कड़े प्रशिक्षण के लिए जानी जाती थी। उनके मार्गदर्शन में कई युवा निशानेबाजों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल की।

    भारतीय स्टार शूटर मनु भाकर की सफलता में भी जसपाल राणा की भूमिका को बेहद अहम माना जाता है। उनकी देखरेख में मनु ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया और भारतीय शूटिंग को नई पहचान दिलाई। बतौर कोच उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने वर्ष 2020 में उन्हें प्रतिष्ठित द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया था।

    हाल के वर्षों में भी जसपाल राणा भारतीय शूटिंग टीम के साथ सक्रिय रूप से जुड़े हुए थे। म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ वर्ल्ड कप में भारतीय पिस्टल टीम ने उनके मार्गदर्शन में दो स्वर्ण और दो रजत पदक जीतकर शानदार प्रदर्शन किया था। यह उपलब्धि उनकी कोचिंग क्षमता और खेल के प्रति समर्पण को दर्शाती है।

    भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) के अध्यक्ष कलिकेश नारायण सिंह देव ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि जसपाल राणा केवल एक महान खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि उत्कृष्ट मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत भी थे। उनका योगदान हमेशा भारतीय खेल इतिहास में याद रखा जाएगा।

    जसपाल राणा का निधन भारतीय शूटिंग समुदाय के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। उन्होंने अपने समर्पण, उपलब्धियों और मार्गदर्शन से भारतीय निशानेबाजी को नई दिशा दी। आने वाली पीढ़ियां उन्हें एक महान खिलाड़ी, सफल कोच और खेल के सच्चे दूत के रूप में हमेशा याद रखेंगी।

  • शाई होप की कप्तानी पारी से वेस्टइंडीज की शानदार जीत, पहले टी20 में श्रीलंका को 7 विकेट से हराया

    शाई होप की कप्तानी पारी से वेस्टइंडीज की शानदार जीत, पहले टी20 में श्रीलंका को 7 विकेट से हराया


    नई दिल्ली।  कप्तान शाई होप की शानदार अर्धशतकीय पारी और गेंदबाजों के दमदार प्रदर्शन की बदौलत वेस्टइंडीज ने पहले टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में श्रीलंका को 7 विकेट से हराकर तीन मैचों की सीरीज का विजयी आगाज किया। किंग्स्टन के ऐतिहासिक सबीना पार्क मैदान पर खेले गए मुकाबले में मेजबान टीम ने 148 रनों का लक्ष्य 19.2 ओवर में केवल तीन विकेट खोकर हासिल कर लिया।

    लक्ष्य का पीछा करने उतरी वेस्टइंडीज की शुरुआत बेहद आक्रामक रही। कप्तान शाई होप और ब्रैंडन किंग ने पहले विकेट के लिए तेजतर्रार साझेदारी करते हुए टीम को मजबूत आधार प्रदान किया। दोनों बल्लेबाजों ने महज 6.2 ओवर में 67 रन जोड़कर श्रीलंकाई गेंदबाजों पर दबाव बना दिया। ब्रैंडन किंग ने 22 गेंदों में 37 रन की विस्फोटक पारी खेली, जिसमें दो चौके और तीन छक्के शामिल रहे।

    किंग के आउट होने के बाद शिमरोन हेटमायर ने भी तेज शुरुआत की और 9 गेंदों में 17 रन बनाए। हालांकि वह अपनी पारी को बड़ी पारी में नहीं बदल सके और वानिंदु हसरंगा का शिकार बन गए। इसके बावजूद वेस्टइंडीज की रन गति पर कोई असर नहीं पड़ा।

    कप्तान शाई होप ने जिम्मेदारी संभालते हुए एक छोर पर डटे रहे और शानदार बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया। उन्होंने 54 गेंदों में नाबाद 65 रन बनाए, जिसमें पांच चौके और दो छक्के शामिल थे। होप ने संयम और आक्रामकता का बेहतरीन संतुलन दिखाते हुए टीम को जीत की मंजिल तक पहुंचाया। रोस्टन चेज ने 16 रन का योगदान दिया, जबकि रोवमैन पॉवेल 10 रन बनाकर नाबाद लौटे।

    श्रीलंका की ओर से गेंदबाजी में वानिंदु हसरंगा सबसे सफल गेंदबाज रहे। उन्होंने दो महत्वपूर्ण विकेट हासिल किए, लेकिन अन्य गेंदबाज वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों पर प्रभावी दबाव बनाने में सफल नहीं हो सके।

    इससे पहले टॉस जीतकर बल्लेबाजी करने उतरी श्रीलंका की टीम निर्धारित 20 ओवर में 9 विकेट खोकर 147 रन ही बना सकी। टीम को पथुम निसांका और कुसल मेंडिस ने अच्छी शुरुआत दिलाई। दोनों ने पहले विकेट के लिए 41 रन जोड़े। निसांका 18 रन बनाकर आउट हुए, जबकि कुसल मेंडिस ने 23 गेंदों में 36 रन की उपयोगी पारी खेली।

    मध्यक्रम में लगातार विकेट गिरने से श्रीलंका की पारी लड़खड़ा गई। लसिथ क्रुस्पुल्ले बिना खाता खोले पवेलियन लौट गए, जबकि पवन रत्नायके केवल चार रन ही बना सके। ऐसे कठिन समय में कामिंदु मेंडिस ने शानदार संघर्ष दिखाया और 39 गेंदों में 51 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली। उन्होंने अपनी पारी में चार चौके और दो छक्के लगाए। दासुन शनाका ने भी 22 रन का योगदान देकर टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाने में मदद की।

    वेस्टइंडीज की गेंदबाजी में जेसन होल्डर और शेमार जोसेफ ने अहम भूमिका निभाई। होल्डर ने चार ओवर में केवल 18 रन देकर तीन विकेट झटके, जबकि जोसेफ ने भी तीन विकेट हासिल कर श्रीलंका के बल्लेबाजी क्रम को झकझोर दिया। रोस्टन चेज ने भी एक विकेट अपने नाम किया।

    इस जीत के साथ वेस्टइंडीज ने तीन मैचों की टी20 श्रृंखला में 1-0 की बढ़त बना ली है। अब टीम की नजर अगले मुकाबले में जीत दर्ज कर सीरीज पर पकड़ मजबूत करने पर होगी, जबकि श्रीलंका वापसी के इरादे से मैदान में उतरेगा।

  • गिल्बर्टो मोरा ने रचा इतिहास, फीफा वर्ल्ड कप में मेक्सिको के सबसे युवा खिलाड़ी बने

    गिल्बर्टो मोरा ने रचा इतिहास, फीफा वर्ल्ड कप में मेक्सिको के सबसे युवा खिलाड़ी बने


    नई दिल्ली। फीफा वर्ल्ड कप 2026 के उद्घाटन मुकाबलों के बीच मेक्सिको को एक नया फुटबॉल सितारा मिल गया है। महज 17 साल की उम्र में गिल्बर्टो मोरा ने मैदान पर कदम रखते ही इतिहास रच दिया। वह फीफा वर्ल्ड कप में मेक्सिको का प्रतिनिधित्व करने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बन गए हैं। इस उपलब्धि ने उन्हें न केवल देश के फुटबॉल इतिहास में विशेष स्थान दिलाया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल जगत का भी ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है।

    मेक्सिको सिटी स्टेडियम में खेले गए मुकाबले के दौरान 65वें मिनट में जब कोच ने मोरा को मैदान पर उतारने का फैसला किया, तब दर्शकों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। स्टेडियम तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। दर्शकों के बीच मौजूद मशहूर बॉक्सिंग स्टार कैनेलो अल्वारेज भी इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने और उन्होंने युवा खिलाड़ी का उत्साहवर्धन किया।

    17 साल और 240 दिन की उम्र में वर्ल्ड कप में उतरकर मोरा ने एक बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम किया। वह फीफा विश्व कप के इतिहास में खेलने वाले छठे सबसे कम उम्र के फुटबॉलर बन गए हैं। उनसे पहले इस सूची में ब्राजील के महान फुटबॉलर पेले, कैमरून के सैमुअल इटो, उत्तरी आयरलैंड के नॉर्मन व्हाइटसाइड, नाइजीरिया के फेमी ओपाबुनमी और कैमरून के सॉलोमन ओलेम्बे जैसे दिग्गज खिलाड़ियों के नाम दर्ज हैं।

    दक्षिणी मेक्सिको के टक्सटला गुटिरेज में जन्मे गिल्बर्टो मोरा का सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है। तिजुआना में पले-बढ़े इस खिलाड़ी ने 16 वर्ष की उम्र पूरी होने से ठीक पहले पेशेवर फुटबॉल में पदार्पण किया था। कम उम्र में ही उन्होंने अपने कौशल, खेल समझ और आत्मविश्वास से कोचों और विशेषज्ञों को प्रभावित कर दिया था।

    मोरा ने 2025 में आयोजित फीफा अंडर-20 विश्व कप में भी शानदार प्रदर्शन किया था। उस प्रतियोगिता में मेक्सिको की टीम क्वार्टर फाइनल तक पहुंची थी और मोरा ने अपनी उम्र से कहीं अधिक परिपक्व खेल का परिचय दिया था। उनकी तकनीकी क्षमता और खेल को नियंत्रित करने की कला ने उन्हें युवा प्रतिभाओं की सूची में सबसे आगे ला खड़ा किया।

    मेक्सिको की सीनियर राष्ट्रीय टीम में उनका पदार्पण 2025 के कॉनकाकाफ गोल्ड कप के दौरान हुआ। मुख्य कोच जेवियर एगुइरे ने उन पर भरोसा जताया और युवा खिलाड़ी ने उस विश्वास को सही साबित किया। सऊदी अरब के खिलाफ क्वार्टर फाइनल मुकाबले में उन्होंने पहली बार सीनियर टीम की जर्सी पहनी और सबसे कम उम्र में राष्ट्रीय टीम का प्रतिनिधित्व करने का रिकॉर्ड भी अपने नाम किया। इसके बाद सेमीफाइनल में उन्होंने राउल जिमेनेज के गोल में अहम भूमिका निभाकर अपनी उपयोगिता साबित की।

    गिल्बर्टो मोरा को उनकी बेहतरीन खेल समझ, दबाव में संयम बनाए रखने की क्षमता और रचनात्मक पासिंग के लिए जाना जाता है। मैदान पर उनकी मौजूदगी विपक्षी टीम के लिए चुनौती बनती है। विशेषज्ञों का मानना है कि वह आने वाले वर्षों में मेक्सिको फुटबॉल की सबसे बड़ी उम्मीदों में से एक साबित हो सकते हैं। फीफा वर्ल्ड कप 2026 में बना यह रिकॉर्ड उनके उज्ज्वल भविष्य की ओर एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • फीफा वर्ल्ड कप 2026 में मेक्सिको की शानदार शुरुआत, साउथ अफ्रीका को 2-0 से रौंदा

    फीफा वर्ल्ड कप 2026 में मेक्सिको की शानदार शुरुआत, साउथ अफ्रीका को 2-0 से रौंदा


    नई दिल्ली। फीफा वर्ल्ड कप 2026 की शुरुआत मेक्सिको के लिए बेहद यादगार रही। घरेलू सरजमीं पर खेले गए टूर्नामेंट के उद्घाटन मुकाबले में मेक्सिको ने शानदार प्रदर्शन करते हुए साउथ अफ्रीका को 2-0 से शिकस्त दी। एज्टेका स्टेडियम में हजारों दर्शकों की मौजूदगी में मेक्सिकन टीम ने शुरुआत से ही मुकाबले पर अपना दबदबा कायम रखा और पूरे मैच में विपक्षी टीम को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया।

    मुकाबले की शुरुआत से ही मेक्सिको ने आक्रामक खेल का प्रदर्शन किया। गेंद पर नियंत्रण रखने के साथ-साथ टीम ने लगातार साउथ अफ्रीका के डिफेंस पर दबाव बनाया। इसी दबाव का परिणाम पहले हाफ में देखने को मिला, जब जूलियन क्विनोनेस ने शानदार गोल कर अपनी टीम को बढ़त दिलाई। यह फीफा वर्ल्ड कप 2026 का पहला गोल भी था, जिससे क्विनोनेस ने इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया। उनके गोल के साथ ही स्टेडियम में मौजूद प्रशंसकों के बीच जबरदस्त उत्साह देखने को मिला।

    क्विनोनेस पूरे मुकाबले में बेहतरीन फॉर्म में नजर आए। उनकी गति, मूवमेंट और आक्रामकता ने साउथ अफ्रीका के रक्षापंक्ति को लगातार परेशान किया। पहले हाफ में उनके पास एक और गोल करने का अवसर भी आया, लेकिन साउथ अफ्रीकी डिफेंडरों ने किसी तरह खतरे को टाल दिया। पहले 45 मिनट के खेल के बाद मेक्सिको 1-0 की बढ़त के साथ हाफ टाइम तक पहुंचा।

    दूसरे हाफ की शुरुआत साउथ अफ्रीका के लिए निराशाजनक रही। मेक्सिको के ब्रायन गुटिरेज को गोल की ओर बढ़ने से रोकने के प्रयास में याया सिथोल ने फाउल किया, जिसके बाद रेफरी ने उन्हें सीधे रेड कार्ड दिखा दिया। इस फैसले के बाद साउथ अफ्रीका को शेष मुकाबला 10 खिलाड़ियों के साथ खेलना पड़ा।

    संख्या बल में बढ़त मिलने के बाद मेक्सिको ने अपना हमला और तेज कर दिया। इसका फायदा टीम को जल्द ही मिला जब अनुभवी स्ट्राइकर राउल जिमेनेज ने शानदार फिनिश के साथ गेंद को जाल में पहुंचाकर स्कोर 2-0 कर दिया। जिमेनेज के इस गोल ने मेक्सिको की जीत लगभग सुनिश्चित कर दी और घरेलू दर्शकों का उत्साह चरम पर पहुंच गया।

    साउथ अफ्रीका की परेशानियां यहीं समाप्त नहीं हुईं। टीम के खिलाड़ी थेम्बा जवाने को हिंसक व्यवहार के कारण रेड कार्ड दिखाया गया, जिसके बाद टीम केवल नौ खिलाड़ियों के साथ मैदान पर रह गई। दो खिलाड़ियों की कमी के कारण साउथ अफ्रीका के लिए मुकाबले में वापसी करना लगभग असंभव हो गया।

    हालांकि मैच के अंतिम चरण में मेक्सिको को भी एक झटका लगा, जब डिफेंडर सीजर मोंटेस को लापरवाह चुनौती के लिए रेड कार्ड दिखाया गया। इसके बावजूद मैच के परिणाम पर कोई असर नहीं पड़ा और मेक्सिको ने 2-0 की प्रभावशाली जीत के साथ टूर्नामेंट में अपने अभियान का शानदार आगाज किया। जूलियन क्विनोनेस और राउल जिमेनेज इस जीत के सबसे बड़े नायक साबित हुए, जिनके दमदार प्रदर्शन ने मेक्सिको को शुरुआती बढ़त दिलाने के साथ जीत की राह भी आसान बनाई।

  • बेलफास्ट हिंसा से भारत के आयरलैंड दौरे पर संकट, वैभव सूर्यवंशी के डेब्यू पर भी मंडराया खतरा

    बेलफास्ट हिंसा से भारत के आयरलैंड दौरे पर संकट, वैभव सूर्यवंशी के डेब्यू पर भी मंडराया खतरा


    नई दिल्ली। भारत और आयरलैंड के बीच इस महीने होने वाली टी20 सीरीज पर अनिश्चितता के बादल छा गए हैं। उत्तरी आयरलैंड की राजधानी बेलफास्ट और आसपास के इलाकों में हाल ही में भड़की हिंसा ने सुरक्षा संबंधी चिंताओं को बढ़ा दिया है, जिसके चलते क्रिकेट आयरलैंड और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। फिलहाल सीरीज को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है, लेकिन मौजूदा हालात ने खिलाड़ियों, अधिकारियों और प्रशंसकों की चिंता बढ़ा दी है।

    भारतीय टीम को अफगानिस्तान के खिलाफ घरेलू श्रृंखला समाप्त करने के बाद आयरलैंड दौरे पर जाना है, जहां उसे दो मैचों की टी20 सीरीज खेलनी है। इसके बाद टीम इंग्लैंड दौरे के लिए रवाना होगी। ऐसे में आयरलैंड दौरा भारतीय टीम के कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि बेलफास्ट में उत्पन्न सुरक्षा संकट ने इस पूरे कार्यक्रम को प्रभावित करने की आशंका पैदा कर दी है।

    उत्तरी आयरलैंड में हालात उस समय बिगड़ गए जब एक चाकूबाजी की घटना के बाद सामाजिक और नस्ली तनाव बढ़ गया। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार घटना के बाद कई क्षेत्रों में हिंसक प्रदर्शन शुरू हो गए। प्रदर्शनकारियों द्वारा वाहनों में आग लगाने, दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचाने तथा सार्वजनिक संपत्तियों को निशाना बनाने की खबरें सामने आईं। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गईं और कई गतिविधियों पर असर पड़ा।

    इसी क्रम में लिस्बर्न में आयोजित होने वाला इंटर-प्रोविंशियल टी20 फेस्टिवल भी रद्द कर दिया गया। क्रिकेट आयरलैंड ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि वह प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि खिलाड़ियों, कोचों, मैच अधिकारियों और दर्शकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। साथ ही यह भी कहा गया कि आयरिश सीनियर कप और नेशनल कप के मैचों को लेकर अगले कुछ दिनों में स्थिति की समीक्षा के बाद फैसला लिया जाएगा।

    क्रिकेट आयरलैंड का कहना है कि वह स्थानीय प्रशासन और संबंधित एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क में है और जैसे-जैसे नई जानकारी सामने आएगी, उसके अनुसार निर्णय लिया जाएगा। इस बयान से साफ है कि बोर्ड फिलहाल कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं है।

    दूसरी ओर, बीसीसीआई भी हालात पर करीबी नजर रखे हुए है। रिपोर्टों के अनुसार भारतीय बोर्ड ने सुरक्षा से जुड़े हर पहलू की समीक्षा शुरू कर दी है। बीसीसीआई के सूत्रों का कहना है कि मैचों के आयोजन स्थल को लेकर अंतिम फैसला क्रिकेट आयरलैंड को करना है। यदि आयरलैंड बोर्ड किसी बदलाव का प्रस्ताव रखता है तो भारतीय बोर्ड उस पर विचार करेगा।

    इस अनिश्चितता का असर भारतीय क्रिकेट के उभरते सितारे वैभव सूर्यवंशी पर भी पड़ सकता है। माना जा रहा है कि आयरलैंड दौरे पर उन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण का मौका मिल सकता था। यदि सीरीज स्थगित होती है, रद्द होती है या कार्यक्रम में बड़ा बदलाव किया जाता है, तो उनके डेब्यू का इंतजार और लंबा हो सकता है।

    हालांकि अभी तक किसी भी बोर्ड ने सीरीज को रद्द करने या स्थानांतरित करने की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। दोनों क्रिकेट बोर्ड स्थिति का मूल्यांकन कर रहे हैं और सुरक्षा एजेंसियों की सलाह का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में क्रिकेट प्रेमियों की नजरें अब आने वाले दिनों पर टिकी हैं, जब इस महत्वपूर्ण टी20 श्रृंखला के भविष्य को लेकर अंतिम फैसला सामने आ सकता है। फिलहाल इतना तय है कि खिलाड़ियों की सुरक्षा सर्वोपरि रहेगी और उसी के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।

  • श्रीलंका दौरे के लिए घोषित हुई जूनियर टीम इंडिया, विकेटकीपर-बल्लेबाज अन्वय द्रविड़ को मिली जगह

    श्रीलंका दौरे के लिए घोषित हुई जूनियर टीम इंडिया, विकेटकीपर-बल्लेबाज अन्वय द्रविड़ को मिली जगह

    नई दिल्ली ।  भारतीय क्रिकेट के इतिहास में ‘द वॉल’ के नाम से मशहूर पूर्व महान कप्तान राहुल द्रविड़ के परिवार से एक और प्रतिभावान खिलाड़ी ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी दस्तक दे दी है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की जूनियर चयन समिति ने अगले महीने से शुरू होने वाले श्रीलंका दौरे के लिए भारत की पुरुष अंडर-19 टीम का आधिकारिक तौर पर एलान कर दिया है। इस घोषित टीम में राहुल द्रविड़ के छोटे बेटे अन्वय द्रविड़ को पहली बार भारतीय अंडर-19 वनडे टीम में शामिल किया गया है। 17 वर्षीय युवा विकेटकीपर-बल्लेबाज को घरेलू क्रिकेट के आयु वर्ग में लगातार बेहतरीन खेल दिखाने का यह सबसे बड़ा पुरस्कार मिला है।

    शरत श्रीधरन की अगुवाई वाली जूनियर राष्ट्रीय चयन समिति ने श्रीलंका के खिलाफ होने वाली तीन वनडे मैचों की सीरीज और दो मल्टी-डे मुकाबलों के लिए दो अलग-अलग टीमों का चयन किया है। आगामी दौरा 4 जुलाई 2026 से श्रीलंका के हंबनटोटा मैदान पर शुरू होने जा रहा है। मध्य प्रदेश क्रिकेट संघ से जुड़े होनहार खिलाड़ी यशवर्धन सिंह चौहान को चयनकर्ताओं ने इस महत्वपूर्ण दौरे के लिए वनडे टीम की कप्तानी सौंपकर उन पर बड़ा भरोसा जताया है, जबकि लक्ष्य रायचंदानी को टीम का उपकप्तान नियुक्त किया गया है। राष्ट्रीय चयनकर्ताओं की नजरें इस दौरे के माध्यम से युवा खिलाड़ियों की क्षमता को परखने पर टिकी हैं।

    अन्वय द्रविड़ को मुख्य रूप से 15 सदस्यीय वनडे टीम में बतौर विकेटकीपर-बल्लेबाज शामिल किया गया है, जहां उनके साथ रजत बघेल दूसरे विकेटकीपर के विकल्प के रूप में मौजूद रहेंगे। अन्वय के बड़े भाई समित द्रविड़ भी कर्नाटक की अंडर-19 टीम की तरफ से घरेलू क्रिकेट खेल चुके हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर जूनियर टीम इंडिया की नीली जर्सी पहनने का मौका पाने वाले अन्वय अपने परिवार के पहले युवा सदस्य बन गए हैं। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी रूप से सक्षम इस युवा खिलाड़ी में अपने पिता की तरह लंबी और धैर्यपूर्ण पारियां खेलने की अद्भुत क्षमता मौजूद है।

    घरेलू स्तर पर अन्वय द्रविड़ के हालिया आंकड़ों पर नजर डालें तो वे लगातार चयनकर्ताओं के रडार पर बने हुए थे। हाल ही में आयोजित हुई वीनू मांकड़ ट्रॉफी में उन्होंने कर्नाटक अंडर-19 टीम की कप्तानी की जिम्मेदारी संभालते हुए टीम को क्वार्टर फाइनल तक पहुंचाने में मुख्य भूमिका अदा की थी। इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट की छह पारियों में शानदार बल्लेबाजी करते हुए उन्होंने 220 रन बनाए थे। टूर्नामेंट के दौरान हिमाचल प्रदेश के खिलाफ एक बेहद दबाव वाले मैच की दूसरी पारी में उन्होंने नाबाद 82 रनों की मैच जिताऊ पारी खेली थी, जिसने राष्ट्रीय चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर मजबूती से आकर्षित किया था। इससे पूर्व वे अंडर-16 विजय मर्चेंट ट्रॉफी में भी शानदार शतक जमा चुके हैं।

    भारतीय क्रिकेट बोर्ड के राष्ट्रीय चयनकर्ता इस आगामी श्रीलंका दौरे को वर्ष 2028 में आयोजित होने वाले अंडर-19 विश्व कप की तैयारियों के शुरुआती रोडमैप के रूप में देख रहे हैं। चूंकि अन्वय द्रविड़ की उम्र वर्तमान में केवल 17 वर्ष है, इसलिए वे दो साल बाद होने वाले अगले आईसीसी अंडर-19 विश्व कप में खेलने के लिए पूरी तरह पात्र रहेंगे। ऐसे में श्रीलंका की चुनौतीपूर्ण पिचों और उपमहाद्वीपीय परिस्थितियों में मिलने वाला यह अंतर्राष्ट्रीय अनुभव उनके क्रिकेट कौशल को और अधिक निखारने में बेहद गेम-चेंजर साबित हो सकता है। भारतीय जूनियर टीम जून के अंतिम सप्ताह में पड़ोसी देश श्रीलंका के लिए उड़ान भरेगी।

    प्रतियोगिता के तय कार्यक्रम के अनुसार, भारत और श्रीलंका के बीच पहला वनडे मैच 4 जुलाई को हंबनटोटा में खेला जाएगा, जिसके बाद दूसरा और तीसरा वनडे क्रमशः 6 और 9 जुलाई को इसी मैदान पर आयोजित होगा। सीमित ओवरों की यह सीरीज समाप्त होने के बाद दोनों देशों के बीच गॉल और कोलंबो के ऐतिहासिक मैदानों पर चार दिवसीय मल्टी-डे मैच खेले जाएंगे। भारतीय क्रिकेट के फैंस के साथ-साथ तमाम विश्लेषकों की निगाहें अब यशवर्धन सिंह चौहान की कप्तानी और विकेट के पीछे तथा आगे अन्वय द्रविड़ के प्रदर्शन पर टिकी रहने वाली हैं।

  • FIFA वर्ल्ड कप 2026 का धमाकेदार आगाज: मेजबान मेक्सिको ने दक्षिण अफ्रीका को 2-0 से हराया

    FIFA वर्ल्ड कप 2026 का धमाकेदार आगाज: मेजबान मेक्सिको ने दक्षिण अफ्रीका को 2-0 से हराया


    नई दिल्ली। फीफा वर्ल्ड कप 2026 का आगाज मेजबान मेक्सिको के लिए किसी सपने से कम नहीं रहा। दुनिया के सबसे बड़े फुटबॉल टूर्नामेंट के उद्घाटन मुकाबले में मेक्सिको ने दक्षिण अफ्रीका को 2-0 से हराकर अपने अभियान की विजयी शुरुआत की। ऐतिहासिक एजटेका स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले को देखने के लिए 80 हजार से अधिक दर्शक मौजूद रहे, जिन्होंने अपनी टीम का पूरे जोश के साथ समर्थन किया।

    मैच की शुरुआत से ही मेक्सिको ने आक्रामक तेवर अपनाए और दक्षिण अफ्रीका की टीम पर लगातार दबाव बनाए रखा। घरेलू दर्शकों के उत्साह से भरी मेक्सिकन टीम ने नौवें मिनट में ही बढ़त हासिल कर ली। सऊदी प्रो लीग में शानदार प्रदर्शन करने वाले जूलियन क्विनोनेस ने मौके का पूरा फायदा उठाते हुए गेंद को गोलपोस्ट में पहुंचाया और मेक्सिको को 1-0 की बढ़त दिला दी। इस गोल के बाद स्टेडियम तालियों और नारों से गूंज उठा।

    पहले हाफ में दक्षिण अफ्रीका ने वापसी की कोशिश जरूर की, लेकिन मेक्सिको की मजबूत रक्षापंक्ति और मिडफील्ड ने उसके सभी प्रयासों को नाकाम कर दिया। मेक्सिको लगातार आक्रमण करता रहा और दूसरे हाफ में भी उसने अपना दबदबा कायम रखा।

    मैच के 66वें मिनट में अनुभवी स्ट्राइकर राउल जिमेनेज ने शानदार हेडर के जरिए दूसरा गोल दागकर मेक्सिको की बढ़त दोगुनी कर दी। यह उनके अंतरराष्ट्रीय करियर का 46वां गोल था। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने मेक्सिको के महान स्ट्राइकर जारेड बॉर्गेटी की बराबरी कर ली। अब वह देश के सर्वकालिक शीर्ष गोलस्कोरर जेवियर “चिचारिटो” हर्नांडेज़ से केवल छह गोल पीछे हैं।

    इस मुकाबले में कोलंबिया में जन्मे 29 वर्षीय जूलियन क्विनोनेस भी आकर्षण का केंद्र रहे। मेक्सिको की राष्ट्रीय टीम के लिए यह उनका पहला विश्व कप मुकाबला था और उन्होंने अपने डेब्यू को गोल के साथ यादगार बना दिया। क्विनोनेस उन छह खिलाड़ियों में शामिल रहे जिन्होंने इस मैच के जरिए विश्व कप मंच पर पहला कदम रखा।

    मैच के दौरान अनुशासनहीनता के भी कई दृश्य देखने को मिले। दक्षिण अफ्रीका के स्पेफेलो सिथोल और थेम्बा ज्वाने को रेड कार्ड दिखाया गया, जिसके कारण टीम को मैच के अंतिम चरण में केवल नौ खिलाड़ियों के साथ खेलना पड़ा। वहीं इंजरी टाइम में मेक्सिको के डिफेंडर सीजर मोंटेस को भी रेड कार्ड मिला। इसके बावजूद दक्षिण अफ्रीका मेक्सिको की बढ़त को कम नहीं कर सकी और मुकाबला 2-0 से हार गई।

    यह जीत मेक्सिको के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2022 के कतर विश्व कप में टीम ग्रुप चरण से आगे नहीं बढ़ पाई थी। ऐसे में घरेलू मैदान पर विश्व कप अभियान की जीत से शुरुआत टीम के आत्मविश्वास को नई मजबूती देगी।

    गौरतलब है कि फीफा वर्ल्ड कप 2026 कई मायनों में ऐतिहासिक है। पहली बार टूर्नामेंट में 48 टीमें हिस्सा ले रही हैं। इसके अलावा मेक्सिको, कनाडा और अमेरिका संयुक्त रूप से इस विश्व कप की मेजबानी कर रहे हैं। फुटबॉल प्रेमियों के लिए यह विश्व कप अब तक का सबसे बड़ा और भव्य आयोजन माना जा रहा है।

    मेक्सिको की जीत ने टूर्नामेंट को रोमांचक शुरुआत दी है और अब दुनिया भर के फुटबॉल प्रशंसकों की नजरें आगामी मुकाबलों पर टिकी हुई हैं।

  • 2029 चैंपियंस लीग फाइनल की मेजबानी की दौड़ में बार्सिलोना, यूईएफए को सौंपी आधिकारिक बोली

    2029 चैंपियंस लीग फाइनल की मेजबानी की दौड़ में बार्सिलोना, यूईएफए को सौंपी आधिकारिक बोली


    नई दिल्ली। यूरोपीय फुटबॉल के सबसे प्रतिष्ठित क्लब टूर्नामेंट यूईएफए चैंपियंस लीग के 2029 फाइनल की मेजबानी को लेकर प्रतिस्पर्धा तेज हो गई है। स्पेन के दिग्गज फुटबॉल क्लब एफसी बार्सिलोना ने आधिकारिक तौर पर यूईएफए को अपनी बोली और विस्तृत जानकारी वाली फाइल सौंप दी है। इसके साथ ही क्लब ने 2029 चैंपियंस लीग फाइनल की मेजबानी हासिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है।

    एफसी बार्सिलोना ने यह प्रस्ताव बार्सिलोना सिटी काउंसिल, कैटेलोनिया सरकार और रॉयल स्पैनिश फुटबॉल फेडरेशन (आरएफईएफ) के सहयोग से तैयार किया है। ये सभी संस्थाएं इस परियोजना में मेजबान और सह-आयोजक की भूमिका निभा रही हैं। क्लब का कहना है कि प्रस्ताव में यूईएफए द्वारा निर्धारित सभी तकनीकी, संस्थागत और अनुबंध संबंधी आवश्यकताओं को पूरा किया गया है।

    क्लब की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि जमा की गई फाइल में आयोजन से जुड़ी सभी आवश्यक गारंटी शामिल हैं। इसमें स्पॉटिफाई कैंप नोउ स्टेडियम और बार्सिलोना शहर की आयोजन क्षमता, सुरक्षा व्यवस्था, परिवहन सुविधाएं, आवास व्यवस्था और बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की मेजबानी के अनुभव को विस्तार से प्रस्तुत किया गया है।

    बार्सिलोना ने अपने प्रस्ताव में विशेष रूप से स्पॉटिफाई कैंप नोउ को केंद्र में रखा है। क्लब का मानना है कि वर्तमान में चल रहे पुनर्निर्माण और आधुनिकीकरण कार्यों के बाद यह स्टेडियम दुनिया के सबसे आधुनिक, तकनीकी रूप से उन्नत और प्रतिष्ठित खेल परिसरों में शामिल हो जाएगा। क्षमता के लिहाज से भी कैंप नोउ यूरोप के सबसे बड़े स्टेडियमों में गिना जाता है और लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल के महत्वपूर्ण मुकाबलों की मेजबानी करता रहा है।

    क्लब ने अपने बयान में कहा है कि कैंप नोउ का इतिहास, उसकी विरासत और आधुनिक सुविधाओं का संयोजन उसे यूईएफए चैंपियंस लीग फाइनल जैसे बड़े आयोजन के लिए आदर्श स्थल बनाता है। बार्सिलोना शहर को भी खेल आयोजनों की सफल मेजबानी के लिए दुनिया भर में पहचान प्राप्त है। ओलंपिक खेलों से लेकर कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक, शहर ने बार-बार अपनी आयोजन क्षमता साबित की है।

    अब बोली प्रक्रिया का अगला चरण यूईएफए के हाथों में है। यूरोपीय फुटबॉल की सर्वोच्च संस्था विभिन्न शहरों और स्टेडियमों से प्राप्त प्रस्तावों का मूल्यांकन करेगी। मूल्यांकन के दौरान बुनियादी ढांचे, सुरक्षा, दर्शक क्षमता, परिवहन नेटवर्क और आयोजन अनुभव जैसे कई मानकों को ध्यान में रखा जाएगा।

    रिपोर्ट्स के अनुसार, 2029 यूईएफए चैंपियंस लीग फाइनल के मेजबान स्थल की घोषणा इस वर्ष की अंतिम तिमाही में की जा सकती है। यदि बार्सिलोना की बोली सफल रहती है, तो यह क्लब और शहर दोनों के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी तथा लाखों फुटबॉल प्रशंसकों को यूरोप के सबसे बड़े क्लब फुटबॉल मुकाबले का रोमांच ऐतिहासिक कैंप नोउ में देखने का अवसर मिलेगा।

  • श्रीलंका दौरे के लिए भारतीय महिला अंडर-19 टीम का ऐलान, भाविका अहिरे को सौंपी गई कप्तानी

    श्रीलंका दौरे के लिए भारतीय महिला अंडर-19 टीम का ऐलान, भाविका अहिरे को सौंपी गई कप्तानी


    नई दिल्ली।भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने श्रीलंका के खिलाफ प्रस्तावित अंडर-19 महिला टी20 और वनडे सीरीज के लिए भारतीय टीमों की घोषणा कर दी है। आगामी सीरीज के लिए युवा विकेटकीपर-बल्लेबाज भाविका अहिरे को दोनों प्रारूपों में टीम की कप्तानी सौंपी गई है। वहीं, महाक नरवासे को उपकप्तान की जिम्मेदारी दी गई है।

    यह सीरीज भारतीय महिला क्रिकेट के उभरते सितारों के लिए अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का महत्वपूर्ण मंच साबित हो सकती है। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय महिला क्रिकेट की जूनियर संरचना ने कई प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को तैयार किया है, जिन्होंने आगे चलकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। ऐसे में श्रीलंका के खिलाफ यह दौरा खिलाड़ियों के विकास और चयनकर्ताओं के मूल्यांकन की दृष्टि से काफी अहम माना जा रहा है।

    चयनकर्ताओं ने टी20 और वनडे दोनों टीमों में कई खिलाड़ियों पर भरोसा कायम रखा है। ईरा जाधव, ईश्वरी अवसरे, पूर्वा सिवाच, कुमारी पालक, काश्वी कंडीकुप्पा, गौरी गोयल, जान्हवी वीरकर और अनादि तागड़े जैसे खिलाड़ियों को दोनों प्रारूपों में मौका मिला है। इससे टीम में संतुलन और निरंतरता बनाए रखने का प्रयास दिखाई देता है।

    बीसीसीआई का मानना है कि इस तरह की अंतरराष्ट्रीय सीरीज युवा खिलाड़ियों को बड़े मंच पर खेलने का अनुभव देती हैं। साथ ही उन्हें दबाव में प्रदर्शन करने और प्रतिस्पर्धी क्रिकेट की चुनौतियों को समझने का अवसर भी मिलता है। आगामी अंडर-19 महिला विश्व कप और भविष्य की सीनियर भारतीय टीम को ध्यान में रखते हुए यह सीरीज चयनकर्ताओं के लिए भी महत्वपूर्ण होगी।

    टी20 टीम में कप्तान भाविका अहिरे के अलावा ईरा जाधव, तनिष्का शर्मा, ईश्वरी अवसरे, अवनी चावड़ा, महतो निधि, पूर्वा सिवाच, कुमारी पालक, महाक नरवासे, काश्वी कंडीकुप्पा, मनियार मैत्री, गौरी गोयल, जान्हवी वीरकर, अनादि तागड़े और के दीक्षा को शामिल किया गया है।

    वहीं वनडे टीम में भाविका अहिरे, ईरा जाधव, दीया यादव, ईश्वरी अवसरे, वी प्रतीक्षा, महतो निधि, पूर्वा सिवाच, कुमारी पालक, महाक नरवासे, काश्वी कंडीकुप्पा, विधि परमार, गौरी गोयल, जान्हवी वीरकर, अनादि तागड़े और के दीक्षा को जगह मिली है।

    टी20 सीरीज के सभी मुकाबले चेन्नई में खेले जाएंगे। पहला टी20 22 जून, दूसरा 24 जून और तीसरा मुकाबला 27 जून को आयोजित होगा। इसके बाद दोनों टीमों के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज पुडुचेरी में खेली जाएगी। वनडे सीरीज का पहला मुकाबला 30 जून, दूसरा 3 जुलाई और तीसरा 6 जुलाई को होगा।

    क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि यह सीरीज भारतीय महिला क्रिकेट के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। युवा खिलाड़ियों के पास अपनी प्रतिभा साबित करने और राष्ट्रीय चयनकर्ताओं का ध्यान आकर्षित करने का सुनहरा अवसर होगा।