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  • अजिंक्य रहाणे ने इंटरनेशनल क्रिकेट को कहा अलविदा जानिए उनके करियर की पांच सबसे यादगार उपलब्धियां

    अजिंक्य रहाणे ने इंटरनेशनल क्रिकेट को कहा अलविदा जानिए उनके करियर की पांच सबसे यादगार उपलब्धियां


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाजों में शामिल अजिंक्य रहाणे ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया है। शांत स्वभाव मजबूत तकनीक और मुश्किल परिस्थितियों में शानदार बल्लेबाजी के लिए पहचाने जाने वाले रहाणे ने अपने करियर में कई ऐसी पारियां खेलीं जिन्होंने भारत को ऐतिहासिक जीत दिलाई। टेस्ट क्रिकेट में संकटमोचक की भूमिका निभाने वाले इस बल्लेबाज ने कई बार टीम को मुश्किल हालात से बाहर निकाला और अपनी कप्तानी से भी अलग पहचान बनाई। आइए जानते हैं उनके करियर की पांच सबसे बड़ी उपलब्धियां जिन्होंने उन्हें भारतीय क्रिकेट के सबसे सम्मानित खिलाड़ियों में शामिल किया।

    साल 2014 में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में खेली गई 147 रन की पारी रहाणे के करियर की सबसे यादगार पारियों में गिनी जाती है। उस समय ऑस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाज मिचेल जॉनसन रयान हैरिस जोश हेजलवुड और शेन वॉटसन बेहद खतरनाक लय में थे लेकिन रहाणे ने धैर्य और शानदार तकनीक का परिचय देते हुए 147 रन बनाए। विराट कोहली के साथ उनकी बड़ी साझेदारी ने भारत को हार से बचाया और मुकाबला ड्रॉ कराने में अहम भूमिका निभाई।

    इंग्लैंड के ऐतिहासिक लॉर्ड्स मैदान पर खेला गया उनका शतक भी हमेशा याद रखा जाएगा। जब भारतीय टीम शुरुआती झटकों के बाद मुश्किल में थी तब रहाणे ने संयम के साथ बल्लेबाजी करते हुए 103 रन की शानदार पारी खेली। उनकी इस पारी की बदौलत भारत सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचा और बाद में मुकाबला जीतकर लॉर्ड्स में 28 साल बाद ऐतिहासिक जीत दर्ज की। यह पारी उनके धैर्य और जिम्मेदारी का शानदार उदाहरण बनी।

    बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी 2020-21 में रहाणे की कप्तानी भारतीय क्रिकेट के स्वर्णिम अध्यायों में शामिल है। एडिलेड टेस्ट में 36 रन पर ऑलआउट होने के बाद पूरी दुनिया ने भारतीय टीम को कमजोर माना था। विराट कोहली के स्वदेश लौटने के बाद रहाणे ने कप्तानी संभाली और मेलबर्न टेस्ट में शतक जड़ते हुए टीम को ऐतिहासिक जीत दिलाई। उनकी शांत कप्तानी और आत्मविश्वास ने पूरी टीम का मनोबल बढ़ाया। भारत ने बाद में सीरीज 2-1 से जीतकर इतिहास रच दिया।

    साल 2015 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ रहाणे ने टेस्ट मैच की दोनों पारियों में शतक लगाने का अनोखा रिकॉर्ड बनाया। पहली पारी में उन्होंने 127 रन बनाए जबकि दूसरी पारी में नाबाद 100 रन की शानदार पारी खेली। वह पांचवें या उससे नीचे बल्लेबाजी क्रम पर उतरकर टेस्ट की दोनों पारियों में शतक लगाने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज बने। यह उपलब्धि उनकी निरंतरता और बड़े मैचों में शानदार प्रदर्शन की गवाही देती है।

    रहाणे की कप्तानी का रिकॉर्ड भी बेहद शानदार रहा। उन्होंने भारत के लिए छह टेस्ट मैचों में कप्तानी की जिनमें चार मुकाबलों में जीत मिली जबकि दो मैच ड्रॉ रहे। सबसे खास बात यह रही कि उनकी कप्तानी में भारतीय टीम को एक भी टेस्ट मैच में हार का सामना नहीं करना पड़ा। शांत नेतृत्व और खिलाड़ियों पर भरोसा रखने की उनकी शैली की क्रिकेट जगत में खूब सराहना हुई।

    अजिंक्य रहाणे का अंतरराष्ट्रीय करियर केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहा बल्कि उन्होंने अपने प्रदर्शन से यह साबित किया कि धैर्य अनुशासन और टीम के लिए समर्पण किसी भी खिलाड़ी को महान बना सकता है। भारतीय क्रिकेट में उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए उनकी उपलब्धियां प्रेरणा का स्रोत बनी रहेंगी।

  • कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के सितारों का कमाल, राष्ट्रपति से लेकर रक्षा मंत्री तक ने दी बधाई, कहा- आपने रचा नया इतिहास

    कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के सितारों का कमाल, राष्ट्रपति से लेकर रक्षा मंत्री तक ने दी बधाई, कहा- आपने रचा नया इतिहास


    नई दिल्ली।  कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार देश का गौरव बढ़ा रहा है। सातवें दिन भारत के एथलीटों ने एक बार फिर अपनी प्रतिभा और दमदार प्रदर्शन से दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा। पुरुषों की पैरा 100 मीटर टी47 स्पर्धा में दिलीप महादु गावित ने स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया जबकि मोहम्मद बासिल ने रजत पदक अपने नाम किया। वहीं पुरुषों की लंबी कूद स्पर्धा में मुरली श्रीशंकर ने शानदार प्रदर्शन करते हुए लगातार दूसरे कॉमनवेल्थ गेम्स में रजत पदक जीतकर अपनी निरंतरता साबित की। इन ऐतिहासिक उपलब्धियों पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु सहित देश के कई वरिष्ठ नेताओं ने खिलाड़ियों को बधाई दी और उनके प्रदर्शन को भारतीय खेलों के लिए प्रेरणादायक बताया।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर दिलीप महादु गावित और मोहम्मद बासिल को बधाई देते हुए कहा कि भारतीय पैरा एथलेटिक्स ने कॉमनवेल्थ गेम्स में एक नया और यादगार अध्याय लिखा है। उन्होंने कहा कि दिलीप का स्वर्ण और बासिल का रजत पदक भारतीय पैरा एथलेटिक्स के लिए बड़ी उपलब्धि है। राष्ट्रपति ने दोनों खिलाड़ियों के दृढ़ संकल्प और उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए विश्वास जताया कि वे भविष्य में भी देश का नाम रोशन करते रहेंगे और नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को प्रेरित करेंगे।

    राष्ट्रपति ने मुरली श्रीशंकर की भी जमकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि लगातार दूसरे कॉमनवेल्थ गेम्स में रजत पदक जीतना असाधारण उपलब्धि है। यह उनकी मेहनत निरंतरता और खेल के प्रति समर्पण का प्रमाण है। उन्होंने श्रीशंकर के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि पूरा देश उनकी सफलता पर गर्व महसूस कर रहा है।

    केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने भी तीनों खिलाड़ियों की उपलब्धियों को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि पुरुष पैरा 100 मीटर टी47 स्पर्धा में भारत का वन टू फिनिश भारतीय खेल इतिहास का गर्व का क्षण है। उन्होंने विशेष रूप से दिलीप गावित की सराहना करते हुए कहा कि वे कॉमनवेल्थ गेम्स में एथलेटिक्स का स्वर्ण जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष पैरा एथलीट बन गए हैं। यह उपलब्धि भारतीय पैरा खेलों के लिए मील का पत्थर है। वहीं उन्होंने मुरली श्रीशंकर की 8.09 मीटर की शानदार छलांग की भी प्रशंसा करते हुए इसे भारतीय एथलेटिक्स के लिए गौरवपूर्ण पल बताया।

    केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी मुरली श्रीशंकर को बधाई देते हुए कहा कि लगातार दो कॉमनवेल्थ गेम्स में रजत पदक जीतना उनकी अद्भुत निरंतरता और मानसिक मजबूती का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि गंभीर घुटने की चोट से उबरकर इतनी शानदार वापसी करना हर खिलाड़ी के लिए प्रेरणा का विषय है। उनकी सफलता देशभर के युवा खिलाड़ियों के लिए एक मिसाल है।

    दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी दिलीप महादु गावित और मोहम्मद बासिल को बधाई देते हुए कहा कि दोनों खिलाड़ियों ने भारत को ऐतिहासिक वन टू फिनिश दिलाकर देश का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि दोनों एथलीटों की यह उपलब्धि भारतीय पैरा एथलेटिक्स के स्वर्णिम भविष्य की झलक है और आने वाले वर्षों में उनसे और भी बड़ी सफलताओं की उम्मीद है।

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों के इस शानदार प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया है कि देश के एथलीट अब वैश्विक मंच पर लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं। इन खिलाड़ियों की मेहनत और उपलब्धियां न केवल भारत के लिए गर्व का विषय हैं बल्कि आने वाली पीढ़ियों को बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने की प्रेरणा भी दे रही हैं।

  • CSK के गोल्डन कोच स्टीफन फ्लेमिंग अब इंग्लैंड टेस्ट क्रिकेट की बदलेंगे तस्वीर रिपोर्ट्स में बड़ा दावा

    CSK के गोल्डन कोच स्टीफन फ्लेमिंग अब इंग्लैंड टेस्ट क्रिकेट की बदलेंगे तस्वीर रिपोर्ट्स में बड़ा दावा


    नई दिल्ली। इंग्लैंड क्रिकेट टीम को जल्द ही नया टेस्ट मुख्य कोच मिल सकता है और इस पद के लिए सबसे मजबूत दावेदार के रूप में न्यूजीलैंड के पूर्व कप्तान तथा चेन्नई सुपर किंग्स के सबसे सफल कोच स्टीफन फ्लेमिंग का नाम सामने आया है। कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड ने लंबी चयन प्रक्रिया के बाद फ्लेमिंग को अपनी पहली पसंद माना है। यदि अंतिम औपचारिकताएं पूरी हो जाती हैं तो फ्लेमिंग इंग्लैंड की टेस्ट टीम की कमान संभालेंगे और यह उनके कोचिंग करियर का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय अध्याय होगा।

    स्टीफन फ्लेमिंग का नाम क्रिकेट जगत के सबसे सफल और सम्मानित कोचों में लिया जाता है। उन्होंने इंडियन प्रीमियर लीग में चेन्नई सुपर किंग्स को पांच बार चैंपियन बनाया और टीम को लगातार सफलता दिलाने में अहम भूमिका निभाई। शांत स्वभाव शानदार रणनीति और खिलाड़ियों से बेहतर तालमेल उनकी सबसे बड़ी पहचान रही है। इसी कारण उन्हें आधुनिक क्रिकेट का बेहतरीन मैनेजर और रणनीतिकार माना जाता है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड ने कई उम्मीदवारों का इंटरव्यू लिया लेकिन फ्लेमिंग अनुभव नेतृत्व क्षमता और लंबे समय तक सफल टीम तैयार करने की योग्यता के कारण सबसे आगे निकल गए। उनके सामने टॉम मूडी जोनाथन ट्रॉट और रिचर्ड डॉसन जैसे दावेदार भी थे लेकिन बोर्ड का झुकाव फ्लेमिंग की ओर दिखाई दिया।

    बताया जा रहा है कि इंग्लैंड की टेस्ट टीम में यह बदलाव ब्रेंडन मैकुलम के टेस्ट कोच पद से हटने के बाद किया जा रहा है जबकि सीमित ओवरों की टीम के साथ उनकी भूमिका अलग बनी रह सकती है। ऐसे में इंग्लैंड पहली बार टेस्ट और व्हाइट बॉल क्रिकेट के लिए अलग कोचिंग मॉडल अपनाने की दिशा में आगे बढ़ता दिख रहा है।

    फ्लेमिंग के सामने सबसे बड़ी चुनौती इंग्लैंड की टेस्ट टीम को फिर से मजबूत बनाना होगी। उन्हें नए कप्तान के चयन टीम संयोजन युवा खिलाड़ियों को तैयार करने और आगामी बड़ी टेस्ट सीरीज के लिए मजबूत रणनीति बनानी होगी। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि उनका शांत नेतृत्व और खिलाड़ियों को आत्मविश्वास देने की शैली इंग्लैंड के ड्रेसिंग रूम में सकारात्मक बदलाव ला सकती है।

    हालांकि इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड की ओर से अभी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है लेकिन लगभग सभी प्रमुख रिपोर्ट्स में फ्लेमिंग को इस पद के लिए सबसे मजबूत दावेदार बताया गया है। यदि नियुक्ति तय होती है तो यह केवल इंग्लैंड क्रिकेट ही नहीं बल्कि फ्रेंचाइजी क्रिकेट के इतिहास में भी एक बड़ा बदलाव माना जाएगा क्योंकि IPL के सबसे सफल कोचों में शामिल फ्लेमिंग अब अंतरराष्ट्रीय टेस्ट क्रिकेट में अपनी नई पहचान बनाने की तैयारी करेंगे

  • बिना बयानबाजी के छा गए वीवीएस लक्ष्मण टीम इंडिया में भरोसे और संतुलन की नई संस्कृति से बदली जीत की तस्वीर

    बिना बयानबाजी के छा गए वीवीएस लक्ष्मण टीम इंडिया में भरोसे और संतुलन की नई संस्कृति से बदली जीत की तस्वीर


    नई दिल्ली। जिम्बाब्वे दौरे पर भारतीय क्रिकेट टीम ने सिर्फ सीरीज जीतकर ही नहीं बल्कि अपने बदले हुए अंदाज से भी सभी का ध्यान आकर्षित किया है। इस बदलाव के केंद्र में अंतरिम मुख्य कोच वीवीएस लक्ष्मण रहे जिन्होंने बिना किसी बयानबाजी और विवाद के केवल तीन मैचों में टीम के भीतर नया आत्मविश्वास पैदा कर दिया। खिलाड़ियों पर भरोसा जताने की उनकी शैली और शांत नेतृत्व ने यह साबित किया कि सफल कोचिंग केवल रणनीति तक सीमित नहीं होती बल्कि ड्रेसिंग रूम का माहौल भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है।

    इंग्लैंड और आयरलैंड दौरे के दौरान भारतीय टीम लगातार हार और आलोचनाओं का सामना कर रही थी। टीम चयन से लेकर रणनीति तक कई फैसलों पर सवाल उठे थे। ऐसे समय में जब गौतम गंभीर उपलब्ध नहीं थे तब वीवीएस लक्ष्मण ने अंतरिम कोच की जिम्मेदारी संभाली और खिलाड़ियों के साथ सकारात्मक संवाद स्थापित किया। उन्होंने किसी भी खिलाड़ी पर सार्वजनिक दबाव बनाने के बजाय उनका मनोबल बढ़ाने पर जोर दिया।

    इसका असर मैदान पर भी साफ दिखाई दिया। कप्तान श्रेयस अय्यर और युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी समेत कई खिलाड़ियों ने खुलकर लक्ष्मण के मार्गदर्शन की सराहना की। टीम के भीतर आत्मविश्वास और सहजता का माहौल बना जिससे खिलाड़ी बिना किसी अतिरिक्त दबाव के अपना स्वाभाविक खेल दिखा सके। लंबे समय बाद भारतीय ड्रेसिंग रूम में सकारात्मक ऊर्जा स्पष्ट नजर आई।

    वीवीएस लक्ष्मण की चयन नीति भी चर्चा का विषय बनी। उन्होंने टीम में बदलाव जरूर किए लेकिन केवल प्रयोग करने के लिए नहीं बल्कि खिलाड़ियों की क्षमता और टीम की जरूरत को ध्यान में रखकर फैसले लिए। दूसरे टी20 मुकाबले में यश ठाकुर को मौका दिया गया जबकि सीरीज अपने नाम करने के बाद तीसरे मैच में सूर्यांश शेडगे को प्लेइंग इलेवन में शामिल किया गया। इससे खिलाड़ियों को यह संदेश मिला कि प्रदर्शन और तैयारी के आधार पर सभी को अवसर मिलेगा।

    युवा खिलाड़ियों के साथ लक्ष्मण का जुड़ाव उनकी सबसे बड़ी ताकत माना जाता है। बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में लंबे समय तक काम करने के कारण वह उभरते क्रिकेटरों की मानसिकता और उनकी जरूरतों को अच्छी तरह समझते हैं। शुभमन गिल यशस्वी जायसवाल और वैभव सूर्यवंशी जैसे कई खिलाड़ियों ने उनके मार्गदर्शन में अपने खेल को निखारा है। यही अनुभव अंतरिम कोच के रूप में भी उनके काम आया।

    हालांकि तीन मैचों के आधार पर यह कहना उचित नहीं होगा कि टीम की सभी समस्याएं समाप्त हो गई हैं। जिम्बाब्वे के खिलाफ तीसरे टी20 मुकाबले में भारतीय खिलाड़ियों ने कई आसान कैच छोड़े जिससे फील्डिंग अब भी चिंता का विषय बनी हुई है। बल्लेबाजी और रणनीति में सुधार जरूर दिखाई दिया लेकिन फील्डिंग में निरंतरता लाने की जरूरत बनी हुई है।

    वीवीएस लक्ष्मण इससे पहले भी कई बार अंतरिम मुख्य कोच की भूमिका निभा चुके हैं और हर बार उनके काम की सराहना हुई है। इसके बावजूद उन्होंने स्थायी मुख्य कोच बनने के बजाय सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में युवा खिलाड़ियों को तैयार करने की जिम्मेदारी को प्राथमिकता दी। अब उनके हालिया प्रदर्शन के बाद एक बार फिर यह बहस तेज हो गई है कि क्या भारतीय क्रिकेट को भविष्य में अलग अलग प्रारूपों के लिए अलग मुख्य कोच की व्यवस्था पर विचार करना चाहिए।

    फिलहाल इतना तय है कि जिम्बाब्वे दौरे ने यह साबित कर दिया है कि टीम की सफलता केवल रणनीति या तकनीक पर निर्भर नहीं करती बल्कि खिलाड़ियों के भीतर विश्वास जगाने और उन्हें खुलकर खेलने का माहौल देने वाला नेतृत्व भी उतना ही अहम होता है। वीवीएस लक्ष्मण ने अपने शांत स्वभाव और संतुलित फैसलों से यही संदेश पूरी क्रिकेट दुनिया को दिया है।

  • ग्लासगो में भारत का तिरंगा बुलंद गोल्ड सिल्वर की बरसात दिलीप गावित और श्रीशंकर चमके बॉक्सिंग में भी बढ़ीं पदकों की उम्मीदें

    ग्लासगो में भारत का तिरंगा बुलंद गोल्ड सिल्वर की बरसात दिलीप गावित और श्रीशंकर चमके बॉक्सिंग में भी बढ़ीं पदकों की उम्मीदें

    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। ग्लासगो में आयोजित खेलों के सातवें दिन भारत ने एथलेटिक्स और पैरा एथलेटिक्स में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए देश का गौरव बढ़ाया। पैरा एथलीट दिलीप महादु गावित ने पुरुषों की 100 मीटर टी47 स्पर्धा में शानदार दौड़ लगाते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया। उन्होंने 10.71 सेकंड का समय निकालते हुए नया गेम्स रिकॉर्ड भी बनाया। इस ऐतिहासिक जीत के साथ वह कॉमनवेल्थ गेम्स की पैरा ट्रैक स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष एथलीट बन गए। वहीं उनके साथी मोहम्मद बासिल ने 10.83 सेकंड के साथ सिल्वर जीतकर भारत को शानदार वन टू फिनिश दिलाई।

    भारत की सफलता का सिलसिला यहीं नहीं रुका। स्टार लॉन्ग जंपर मुरली श्रीशंकर ने पुरुषों की लंबी कूद स्पर्धा में 8.09 मीटर की सर्वश्रेष्ठ छलांग लगाकर सिल्वर मेडल अपने नाम किया। यह कॉमनवेल्थ गेम्स में उनका लगातार दूसरा सिल्वर मेडल है। इससे पहले उन्होंने बर्मिंघम 2022 में भी रजत पदक जीता था। फाइनल मुकाबले में जमैका के ताजे गेल ने 8.15 मीटर की छलांग लगाकर गोल्ड हासिल किया जबकि स्कॉटलैंड के स्टीफन मैकेंजी ने ब्रॉन्ज जीता। श्रीशंकर ने पूरे मुकाबले में शानदार निरंतरता दिखाई और अंतिम प्रयास तक पदक की दौड़ में मजबूती से बने रहे।

    एथलेटिक्स के अलावा भारतीय मुक्केबाजों ने भी शानदार प्रदर्शन किया। भारतीय बॉक्सिंग दल के सभी 10 खिलाड़ियों ने अपने अपने मुकाबले जीतकर सेमीफाइनल में जगह बना ली है। कॉमनवेल्थ गेम्स के नियमों के अनुसार सेमीफाइनल में पहुंचने वाला प्रत्येक खिलाड़ी कम से कम कांस्य पदक का दावेदार बन जाता है। इस तरह भारत ने मुक्केबाजी में कम से कम 10 पदक पहले ही सुनिश्चित कर लिए हैं जो बर्मिंघम 2022 के प्रदर्शन से भी बेहतर उपलब्धि मानी जा रही है।

    इन शानदार प्रदर्शनों के बाद भारत की पदक तालिका भी मजबूत हुई है। देश के खाते में अब 15 पदक हो चुके हैं जिनमें 3 स्वर्ण 9 रजत और 3 कांस्य पदक शामिल हैं। एथलेटिक्स और पैरा एथलेटिक्स में खिलाड़ियों की निरंतर सफलता ने भारतीय दल का मनोबल और बढ़ा दिया है।

    दिलीप गावित की ऐतिहासिक जीत और श्रीशंकर की शानदार छलांग ने यह साबित कर दिया कि भारतीय एथलेटिक्स लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। वहीं मुक्केबाजों का दमदार प्रदर्शन आने वाले दिनों में भारत के पदकों की संख्या और बढ़ाने की उम्मीद जगा रहा है। ग्लासगो से लगातार मिल रही इन सफलताओं ने भारतीय खेल प्रेमियों का उत्साह चरम पर पहुंचा दिया है और अब सभी की नजर आगामी फाइनल मुकाबलों पर टिकी हुई है जहां भारत के पास कई और पदक जीतने का सुनहरा अवसर होगा।

  • चौकों छक्कों की बारिश से चमकी स्मृति मंधाना भारत की स्टार बल्लेबाज ने द हंड्रेड में रचा नया इतिहास

    चौकों छक्कों की बारिश से चमकी स्मृति मंधाना भारत की स्टार बल्लेबाज ने द हंड्रेड में रचा नया इतिहास


    नई दिल्ली। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की उप कप्तान स्मृति मंधाना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह दुनिया की सबसे खतरनाक सलामी बल्लेबाजों में क्यों गिनी जाती हैं। द हंड्रेड 2026 टूर्नामेंट में मैनचेस्टर सुपर जायंट्स की ओर से खेलते हुए मंधाना ने ऐसी विस्फोटक पारी खेली जिसने न केवल उनकी टीम को रोमांचक जीत दिलाई बल्कि कई बड़े रिकॉर्ड भी उनके नाम दर्ज करा दिए। उनकी शानदार बल्लेबाजी ने दर्शकों को आखिरी गेंदों तक रोमांचित रखा और विरोधी टीम के गेंदबाजों की रणनीति पूरी तरह ध्वस्त कर दी।

    सनराइजर्स लीड्स ने पहले बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित 100 गेंदों में चार विकेट के नुकसान पर 142 रन बनाए। टीम की ओर से फोएबे लिचफील्ड ने 31 रन एनाबेल सदरलैंड ने 35 रन ब्रायोनी स्मिश ने 26 रन और कप्तान डैनी गिब्सन ने नाबाद 18 रन की उपयोगी पारी खेली। लक्ष्य चुनौतीपूर्ण जरूर था लेकिन मंधाना के इरादे उससे भी बड़े थे।

    143 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी मैनचेस्टर सुपर जायंट्स की शुरुआत अच्छी नहीं रही। कप्तान मेग लैनिंग 24 रन बनाकर आउट हो गईं और इसके बाद लगातार विकेट गिरते रहे। महज 71 रन तक टीम के पांच बल्लेबाज पवेलियन लौट चुके थे। ऋचा घोष पेज शॉल्फिल्ड और मैडी विलियर्स जैसी प्रमुख बल्लेबाज भी बड़ी पारी नहीं खेल सकीं। ऐसे मुश्किल समय में स्मृति मंधाना ने एक छोर संभालकर टीम को जीत की राह पर बनाए रखा।

    मंधाना ने शुरुआत से ही संयम और आक्रामकता का शानदार संतुलन दिखाया। उन्होंने केवल 33 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया और इसके बाद मैच का पूरा रुख बदल दिया। जब आखिरी 25 गेंदों में टीम को 44 रन की जरूरत थी तब मंधाना ने अपने आक्रामक तेवर दिखाते हुए बड़े शॉट खेलने शुरू किए। भारतीय खिलाड़ी दीप्ति शर्मा की गेंद पर लगाया गया लंबा छक्का मुकाबले का टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ। इसके बाद उन्हें एक जीवनदान भी मिला जिसका पूरा फायदा उठाते हुए उन्होंने लगातार दो छक्के जड़कर मैच समाप्त कर दिया।

    स्मृति मंधाना ने 50 गेंदों में नाबाद 88 रन बनाए जिसमें सात चौके और चार शानदार छक्के शामिल रहे। उनकी इस पारी की बदौलत मैनचेस्टर सुपर जायंट्स ने चार गेंद शेष रहते चार विकेट से मुकाबला अपने नाम कर लिया। यह जीत टीम के लिए बेहद महत्वपूर्ण रही और मंधाना की पारी पूरे टूर्नामेंट की सबसे यादगार पारियों में शामिल हो गई।

    इस शानदार प्रदर्शन के साथ स्मृति मंधाना ने कई रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिए। नाबाद 88 रन द हंड्रेड 2026 के मौजूदा सीजन का अब तक का सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर बन गया। इसके साथ ही यह द हंड्रेड के इतिहास में मंधाना का सर्वश्रेष्ठ स्कोर भी है। इससे पहले उनका सर्वोच्च स्कोर 2021 में सदर्न ब्रेव के लिए बनाया गया 78 रन था। इसके अलावा द हंड्रेड में किसी भारतीय बल्लेबाज का यह दूसरा सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर भी बन गया। इस सूची में शीर्ष स्थान पर जेमिमा रोड्रिग्स हैं जिन्होंने नाबाद 92 रन बनाए थे।

    स्मृति मंधाना की यह पारी केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रही बल्कि इसने यह भी दिखाया कि दबाव की परिस्थितियों में वह अकेले दम पर मैच का परिणाम बदलने की क्षमता रखती हैं। उनकी शानदार फॉर्म भारतीय महिला क्रिकेट टीम के लिए भी बेहद सकारात्मक संकेत है क्योंकि आने वाले बड़े टूर्नामेंटों में उनसे ऐसी ही दमदार पारियों की उम्मीद की जाएगी।

  • कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में लंबी कूद में चमके मुरली श्रीशंकर 8.09 मीटर की छलांग लगाकर भारत को दिलाया सिल्वर

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में लंबी कूद में चमके मुरली श्रीशंकर 8.09 मीटर की छलांग लगाकर भारत को दिलाया सिल्वर


    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय एथलेटिक्स का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। भारत के स्टार लॉन्ग जंपर मुरली श्रीशंकर ने पुरुषों की लंबी कूद स्पर्धा में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए देश को सिल्वर मेडल दिलाया। ग्लासगो में आयोजित फाइनल मुकाबले में श्रीशंकर ने 8.09 मीटर की शानदार छलांग लगाकर दूसरा स्थान हासिल किया और एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का गौरव बढ़ाया।

    केरल के पलक्कड़ के रहने वाले 27 वर्षीय श्रीशंकर ने प्रतियोगिता की शुरुआत 8.03 मीटर की छलांग से की। इसके बाद दूसरे प्रयास में उन्होंने 8.09 मीटर की दूरी तय की जो उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन साबित हुआ। इसके बाद कुछ प्रयास फाउल रहे लेकिन उन्होंने आत्मविश्वास बनाए रखा और अंतिम दो प्रयासों में 7.94 मीटर तथा 7.97 मीटर की छलांग लगाकर अपना अभियान समाप्त किया। पूरे मुकाबले के दौरान वह पदक की दौड़ में मजबूती से बने रहे।

    यह उपलब्धि श्रीशंकर के करियर की एक और बड़ी सफलता है। इससे पहले उन्होंने 2022 के बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में भी सिल्वर मेडल जीतकर इतिहास रचा था। वह कॉमनवेल्थ गेम्स में पुरुषों की लंबी कूद में पदक जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बने थे। अब ग्लासगो में भी उन्होंने लगातार दूसरी बार सिल्वर जीतकर अपनी प्रतिभा और निरंतरता को साबित कर दिया है।

    इस मुकाबले में जमैका के विश्व चैंपियन ताजे गेल ने 8.15 मीटर की छलांग लगाकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया जबकि स्कॉटलैंड के स्टीफन मैकेंजी ने 8.08 मीटर की छलांग के साथ ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया। मुकाबला बेहद रोमांचक रहा क्योंकि चार खिलाड़ियों ने आठ मीटर से अधिक दूरी तय की लेकिन श्रीशंकर का प्रदर्शन उन्हें दूसरे स्थान तक पहुंचाने में सफल रहा।

    भारत के लिए इस स्पर्धा में एक और एथलीट लोकेश सत्यनाथन भी उतरे थे। उन्होंने 7.97 मीटर की सर्वश्रेष्ठ छलांग लगाकर पांचवां स्थान हासिल किया। हालांकि वह पदक से चूक गए लेकिन उनका प्रदर्शन भी सराहनीय रहा और भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत छोड़ गया।

    श्रीशंकर के इस सिल्वर मेडल के साथ भारत के कुल पदकों की संख्या और बढ़ गई। एथलेटिक्स और पैरा एथलेटिक्स दोनों में भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन लगातार बेहतर होता जा रहा है। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि भारतीय खिलाड़ी अब विश्व स्तर की प्रतियोगिताओं में हर इवेंट में मजबूत चुनौती पेश कर रहे हैं।

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय दल का आत्मविश्वास लगातार बढ़ रहा है। वेटलिफ्टिंग पैरा एथलेटिक्स और अब लंबी कूद जैसे इवेंट में मिले पदकों ने देश की उम्मीदों को और मजबूत किया है। श्रीशंकर की यह सफलता आने वाले युवा खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा बनेगी और भारतीय एथलेटिक्स को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

  • ग्लासगो में भारत की रफ्तार का जलवा 100 मीटर टी47 में गोल्ड और सिल्वर जीतकर पैरा एथलीट्स ने बढ़ाया देश का मान

    ग्लासगो में भारत की रफ्तार का जलवा 100 मीटर टी47 में गोल्ड और सिल्वर जीतकर पैरा एथलीट्स ने बढ़ाया देश का मान


    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के पैरा एथलीटों ने ऐसा प्रदर्शन किया जिसने पूरे देश को गर्व से भर दिया। ग्लासगो में आयोजित पुरुषों की 100 मीटर टी47 फाइनल स्पर्धा में भारतीय खिलाड़ियों ने गोल्ड और सिल्वर दोनों पदकों पर कब्जा जमाकर इतिहास रच दिया। यह उपलब्धि केवल पदक जीतने तक सीमित नहीं रही बल्कि भारतीय पैरा एथलेटिक्स के बढ़ते स्तर और खिलाड़ियों की मेहनत का भी शानदार प्रमाण बन गई।

    भारत के दिलीप महादु गावित ने 10.71 सेकंड का समय निकालते हुए न केवल स्वर्ण पदक अपने नाम किया बल्कि नया गेम्स रिकॉर्ड भी कायम कर दिया। यह उनके करियर का इस सीजन का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी रहा। वहीं दूसरे भारतीय धावक मोहम्मद बासिल मोर्सिंगनाकथ ने 10.83 सेकंड का समय निकालकर रजत पदक अपने नाम किया और भारत को इस स्पर्धा में वन टू फिनिश दिलाई। इंग्लैंड के केविन सैंटोस 10.85 सेकंड के साथ तीसरे स्थान पर रहे और उन्हें कांस्य पदक मिला।

    दिलीप गावित की यह जीत कई मायनों में ऐतिहासिक बन गई। वह कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में पैरा एथलेटिक्स में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष खिलाड़ी बन गए हैं। इससे पहले महिला शॉट पुट एफ57 वर्ग में शर्मिला ने भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता था। अब दिलीप का नाम भी भारतीय पैरा खेलों के स्वर्णिम इतिहास में दर्ज हो गया है।

    इस शानदार प्रदर्शन के साथ कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का तीसरा स्वर्ण पदक भी आया। इससे पहले मीराबाई चानू और शर्मिला स्वर्ण जीत चुकी थीं। दिलीप और बासिल की सफलता के बाद भारत के कुल पदकों की संख्या बढ़कर 15 हो गई है जिसमें 3 गोल्ड 9 सिल्वर और 3 ब्रॉन्ज पदक शामिल हैं। इससे पदक तालिका में भारत की स्थिति भी और मजबूत हुई है।

    महाराष्ट्र के नासिक के पास स्थित तोरण डोंगरी गांव से आने वाले दिलीप गावित लंबे समय से भारतीय पैरा एथलेटिक्स का बड़ा नाम रहे हैं। उन्होंने एशियन पैरा गेम्स 2022 में 400 मीटर टी47 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर भारत के लिए ऐतिहासिक 100वां पदक दिलाया था। इसके अलावा पेरिस पैरालंपिक 2024 के फाइनल में पहुंचकर भी उन्होंने अपनी प्रतिभा का परिचय दिया था। अब कॉमनवेल्थ गेम्स में गेम्स रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण जीतकर उन्होंने अपने करियर में एक और स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया है।

    वहीं केरल के मलप्पुरम जिले के वेलियानकोड के रहने वाले मोहम्मद बासिल मोर्सिंगनाकथ भी लगातार मेहनत और अनुशासित प्रशिक्षण के दम पर भारतीय पैरा स्प्रिंटिंग में नई पहचान बना रहे हैं। तिरुवनंतपुरम स्थित एलएनसीपीई साई केंद्र में कोच श्रीनिवासन के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लेने वाले बासिल ने इस प्रतियोगिता में रजत पदक जीतकर साबित कर दिया कि भारत के पास विश्व स्तर पर चुनौती देने वाले प्रतिभाशाली खिलाड़ी मौजूद हैं।

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय पैरा खिलाड़ियों का यह प्रदर्शन आने वाले अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों के लिए भी बेहद उत्साहजनक माना जा रहा है। दिलीप और बासिल की सफलता ने यह संदेश दिया है कि भारतीय पैरा एथलीट अब केवल भागीदारी नहीं बल्कि स्वर्णिम इतिहास रचने के इरादे से मैदान में उतर रहे हैं। उनकी उपलब्धि देश के लाखों युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।

  • कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: भारत ने जीते 12 पदक, दो सिल्वर के बाद भी मेडल टैली में नौवें नंबर पर बरकरार

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: भारत ने जीते 12 पदक, दो सिल्वर के बाद भी मेडल टैली में नौवें नंबर पर बरकरार


    नई दिल्ली । कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का शानदार प्रदर्शन जारी है। छठे दिन दो और रजत पदक जीतने के बाद भारत के कुल पदकों की संख्या 12 हो गई है और वह मेडल तालिका में नौवें स्थान पर बना हुआ है। वहीं ऑस्ट्रेलिया 34 स्वर्ण सहित 78 पदकों के साथ शीर्ष पर काबिज है।
    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का शानदार प्रदर्शन जारी है। छठे दिन दो और रजत पदक जीतने के बाद भारत के कुल पदकों की संख्या 12 हो गई है और वह मेडल तालिका में नौवें स्थान पर बना हुआ है। वहीं ऑस्ट्रेलिया 34 स्वर्ण सहित 78 पदकों के साथ शीर्ष पर काबिज है।

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: ऑस्ट्रेलिया का जलवा बरकरार, भारत 12 पदकों के साथ नौवें स्थान पर; मुक्केबाजी में तीन और मेडल पक्के

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। प्रतियोगिता के छठे दिन भारत की झोली में दो और रजत पदक आए, जिससे देश के कुल पदकों की संख्या बढ़कर 12 हो गई। हालांकि इसके बावजूद भारत मेडल तालिका में नौवें स्थान पर बना हुआ है। दूसरी ओर ऑस्ट्रेलिया ने अपने दमदार प्रदर्शन को जारी रखते हुए शीर्ष स्थान पर मजबूत पकड़ बनाए रखी है।

    मेडल तालिका में ऑस्ट्रेलिया सबसे आगे है। उसने अब तक कुल 78 पदक जीते हैं, जिनमें 34 स्वर्ण, 17 रजत और 27 कांस्य पदक शामिल हैं। ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों का दबदबा लगभग हर खेल में देखने को मिल रहा है और फिलहाल उसके आसपास कोई अन्य देश नजर नहीं आ रहा।

    दूसरे स्थान पर कनाडा है, जिसने अब तक 35 पदक अपने नाम किए हैं। कनाडा के खाते में 13 स्वर्ण, 10 रजत और 12 कांस्य पदक हैं। तीसरे स्थान पर इंग्लैंड काबिज है, जिसके खिलाड़ियों ने 43 पदक जीते हैं। इनमें 10 स्वर्ण, 18 रजत और 15 कांस्य पदक शामिल हैं। मेजबान स्कॉटलैंड 7 स्वर्ण सहित 15 पदकों के साथ चौथे स्थान पर है, जबकि नाइजीरिया 6 स्वर्ण और कुल 11 पदकों के साथ पांचवें स्थान पर बना हुआ है।

    भारत ने अब तक 2 स्वर्ण, 7 रजत और 3 कांस्य पदक जीतकर कुल 12 पदक हासिल किए हैं। छठे दिन महिला वेटलिफ्टिंग और एथलेटिक्स में मिले दो रजत पदकों ने भारत की पदक संख्या में इजाफा किया, हालांकि मेडल तालिका में उसकी रैंकिंग में कोई बदलाव नहीं हुआ और वह नौवें स्थान पर कायम है।

    महिला वेटलिफ्टिंग के 69 किलोग्राम वर्ग में हरजिंदर कौर ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 227 किलोग्राम वजन उठाकर रजत पदक अपने नाम किया। उन्होंने स्नैच में 101 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 126 किलोग्राम वजन उठाकर यह उपलब्धि हासिल की।

    एथलेटिक्स में गुलवीर सिंह ने पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में 27 मिनट 49.78 सेकंड का समय निकालते हुए रजत पदक जीता। इसके साथ ही वह इस स्पर्धा में कॉमनवेल्थ गेम्स का पदक जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गए और भारतीय खेल इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया।

    मुक्केबाजी में भी भारत का प्रदर्शन उत्साहजनक रहा। प्रीति, प्रिया और जादुमणि सिंह ने अपने-अपने क्वार्टर फाइनल मुकाबले जीतकर सेमीफाइनल में जगह बना ली है। कॉमनवेल्थ गेम्स के नियमों के अनुसार सेमीफाइनल में पहुंचने वाले सभी मुक्केबाजों का पदक सुनिश्चित हो जाता है। ऐसे में भारत के खाते में कम से कम तीन और कांस्य पदक पक्के हो चुके हैं, जिन्हें बेहतर रंग में बदलने का मौका अब सेमीफाइनल और फाइनल मुकाबलों में मिलेगा।

    भारतीय दल से आने वाले दिनों में वेटलिफ्टिंग, मुक्केबाजी, कुश्ती और एथलेटिक्स जैसी स्पर्धाओं में और पदकों की उम्मीद की जा रही है। यदि खिलाड़ियों का मौजूदा प्रदर्शन जारी रहता है तो भारत मेडल तालिका में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।

  • CWG 2026: 10,000 मीटर में इतिहास रचने वाले गुलवीर सिंह को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की शुभकामनाएं

    CWG 2026: 10,000 मीटर में इतिहास रचने वाले गुलवीर सिंह को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की शुभकामनाएं


    नई दिल्ली । कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। प्रतियोगिता के छठे दिन भारत के स्टार लंबी दूरी के धावक गुलवीर सिंह ने पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में रजत पदक जीतकर इतिहास रच दिया। वह इस स्पर्धा में कॉमनवेल्थ गेम्स का पदक जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गए हैं। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उन्हें हार्दिक बधाई देते हुए देश का गौरव बढ़ाने वाला खिलाड़ी बताया।

    राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी संदेश में कहा गया कि ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पुरुषों की 10,000 मीटर स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीतकर गुलवीर सिंह ने भारत के लिए इतिहास रच दिया है। राष्ट्रपति ने कहा कि पूरे देश को उनकी इस उपलब्धि पर गर्व है और भविष्य में भी वे इसी तरह देश के लिए नई सफलताएं हासिल करें, यही शुभकामना है।

    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी गुलवीर सिंह को बधाई देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश के सपूत और भारतीय सेना के नायब सूबेदार ने अपने शानदार प्रदर्शन से देश और प्रदेश का नाम रोशन किया है। उन्होंने कहा कि गुलवीर की यह उपलब्धि कड़ी मेहनत, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी।

    ग्लासगो के स्कॉट्सटाउन स्टेडियम में आयोजित फाइनल मुकाबले में गुलवीर सिंह ने 10,000 मीटर की दौड़ 27 मिनट 49.78 सेकंड में पूरी कर रजत पदक अपने नाम किया। ऑस्ट्रेलिया के काई रॉबिन्सन ने 27 मिनट 48.93 सेकंड के समय के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि आइल ऑफ मैन के डेविड मुलार्की 27 मिनट 50.28 सेकंड के समय के साथ कांस्य पदक हासिल करने में सफल रहे।

    उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के सिरसा गांव में 1 जून 1998 को जन्मे गुलवीर सिंह भारतीय सेना में नायब सूबेदार के पद पर कार्यरत हैं। उनका एथलेटिक्स सफर गांव की पगडंडियों और खेतों में दौड़ लगाने से शुरू हुआ था, जब वे सेना में भर्ती की तैयारी कर रहे थे। वर्ष 2018 में भारतीय सेना की ग्रेनेडियर्स रेजिमेंट में शामिल होने के बाद उन्होंने लंबी दूरी की दौड़ में लगातार शानदार प्रदर्शन किया और देश के शीर्ष धावकों में अपनी पहचान बनाई।

    गुलवीर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान 2023 एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 5,000 मीटर दौड़ का कांस्य पदक जीतकर बनाई। इसके बाद 2022 एशियाई खेलों में 10,000 मीटर स्पर्धा में भी कांस्य पदक अपने नाम किया। वर्ष 2025 में दक्षिण कोरिया में आयोजित एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने 5,000 मीटर और 10,000 मीटर दोनों स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीतकर एशिया के शीर्ष लंबी दूरी के धावकों में अपनी मजबूत जगह बनाई।

    अब कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में मिला यह ऐतिहासिक रजत पदक गुलवीर सिंह के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हो गया है। उनकी इस सफलता ने न केवल भारतीय एथलेटिक्स को नई पहचान दी है, बल्कि देश के युवा खिलाड़ियों के लिए भी एक नई प्रेरणा प्रस्तुत की है।