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  • एशियन गेम्स में पदकों का महामुकाबला: एथलेटिक्स से शूटिंग तक इन 5 खेलों से भारत को बड़ी उम्मीदें

    एशियन गेम्स में पदकों का महामुकाबला: एथलेटिक्स से शूटिंग तक इन 5 खेलों से भारत को बड़ी उम्मीदें


    नई दिल्ली। एशियन गेम्स 2026 की शुरुआत 19 सितंबर से जापान के आइची नागोया में होने जा रही है। भारत ने इस बार अपने 503 खिलाड़ियों का दल तैयार किया है जो 35 खेलों में देश का प्रतिनिधित्व करेगा। पिछले एशियन गेम्स में भारत ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था और इस बार भी कई खेलों में भारतीय खिलाड़ियों से पदक जीतने की उम्मीद जताई जा रही है। इनमें एथलेटिक्स निशानेबाजी कुश्ती मुक्केबाजी और क्रिकेट प्रमुख हैं।

    एथलेटिक्स एशियन गेम्स में भारत के लिए लंबे समय से पदक दिलाने वाले प्रमुख खेलों में शामिल रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार भारत ने एशियन गेम्स के 19 संस्करणों में एथलेटिक्स से कुल 283 पदक जीते हैं। इनमें 85 स्वर्ण 102 रजत और 96 कांस्य पदक शामिल हैं। इस बार नीरज चोपड़ा की गैरमौजूदगी के बावजूद भारतीय दल में कई ऐसे खिलाड़ी हैं जिन पर नजर रहेगी। मुरली श्रीशंकर गुलवीर सिंह अविनाश साबले तजिंदरपाल सिंह पारुल चौधरी राजेश रमेश और रोहित यादव से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है।

    निशानेबाजी भी भारत के लिए अहम खेल रहेगा। एशियन गेम्स के इतिहास में भारतीय निशानेबाजों ने अब तक 80 पदक हासिल किए हैं जिनमें 16 स्वर्ण 30 रजत और 34 कांस्य पदक शामिल हैं। पिछले एशियन गेम्स में भारतीय निशानेबाजों ने 22 पदक जीते थे। इस बार मनु भाकर के साथ ईशा सिंह ऐश्वर्य प्रताप सिंह तोमर आशी चौकसे और सुरुचि जैसे खिलाड़ियों पर भी नजर रहेगी।

    कुश्ती में भी भारतीय पहलवान पदक के लिए जोर लगाएंगे। एशियन गेम्स में भारत ने इस खेल में अब तक 65 पदक जीते हैं। इनमें 11 स्वर्ण 15 रजत और 39 कांस्य पदक शामिल हैं। अमन सहरावत अंतिम पंघाल दीपक पूनिया मनीषा और सुजीत कलकल भारतीय चुनौती को मजबूत करने वाले खिलाड़ियों में शामिल हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में कुश्ती को शामिल नहीं किए जाने के बाद भारतीय पहलवानों के लिए एशियन गेम्स एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय मंच होगा।

    मुक्केबाजी में भी भारत की उम्मीदें मजबूत हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय मुक्केबाजों के प्रदर्शन के बाद एशियन गेम्स को लेकर उम्मीदें बढ़ी हैं। महिला वर्ग में साक्षी चौधरी प्रीति पवार और लवलीना बोरगोहेन पर नजर होगी। पुरुष वर्ग में जादुमणि सिंह सचिन सिवाच अंकुश और नरेंद्र बेरवाल भारतीय चुनौती पेश करेंगे।

    इस बार क्रिकेट भी एशियन गेम्स का हिस्सा है और भारत की पुरुष तथा महिला टीमें इसमें हिस्सा लेंगी। पिछले एशियन गेम्स में दोनों भारतीय टीमों ने स्वर्ण पदक जीता था। महिला टीम 18 सितंबर को अपना पहला मैच खेलेगी जबकि पुरुष टीम 28 सितंबर से अभियान शुरू करेगी। ऐसे में एशियन गेम्स 2026 में भारत का प्रदर्शन इन प्रमुख खेलों में खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर खास तौर पर निर्भर रहेगा।

  • पहले टी20 में शानदार प्रदर्शन के बाद वरुण चक्रवर्ती फिर चोटिल, अफगानिस्तान के खिलाफ सीरीज के बाकी मैच नहीं खेलेंगे

    पहले टी20 में शानदार प्रदर्शन के बाद वरुण चक्रवर्ती फिर चोटिल, अफगानिस्तान के खिलाफ सीरीज के बाकी मैच नहीं खेलेंगे

    नई दिल्ली ।अफगानिस्तान के खिलाफ तीन मैचों की टी20 सीरीज में टीम इंडिया को बड़ा झटका लगा है। पहले मुकाबले में शानदार प्रदर्शन करने वाले वरुण चक्रवर्ती चोटिल होने के कारण सीरीज के बाकी दोनों मुकाबलों से बाहर हो गए हैं। दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में खेले गए पहले टी20 मैच में वरुण ने भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई थी।

    पहले मुकाबले में वरुण चक्रवर्ती ने अपने चार ओवर के स्पेल में केवल 16 रन दिए और एक विकेट हासिल किया। भारत ने यह मुकाबला सात विकेट से जीता था। मैच में उनके प्रदर्शन के बाद वह टीम के अहम गेंदबाजों में नजर आए, लेकिन मुकाबला समाप्त होने के बाद उनकी चोट की जानकारी सामने आई। इसके बाद उन्हें पूरी सीरीज से बाहर होना पड़ा।

    वरुण के बाहर होने से कप्तान श्रेयस अय्यर की मुश्किलें बढ़ गई हैं। टीम को अब अफगानिस्तान के खिलाफ बाकी मुकाबलों में उनके विकल्प पर फैसला करना होगा। वरुण का बाहर होना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह लंबे समय के बाद मैदान पर वापसी करने के बाद इस सीरीज में उतरे थे।

    वरुण चक्रवर्ती के लिए 2026 का साल चोटों के लिहाज से चुनौतीपूर्ण रहा है। आईपीएल के दौरान उनके पैर के अंगूठे में फ्रैक्चर हुआ था। इस चोट के कारण वह आयरलैंड दौरे पर टीम का हिस्सा नहीं बन सके थे। इसके बाद उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में वापसी की थी।

    इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज में भी वरुण की फिटनेस ज्यादा समय तक उनका साथ नहीं दे सकी। तीसरे मुकाबले के बाद उन्हें हैमस्ट्रिंग यानी मांसपेशियों में खिंचाव की समस्या हुई और उन्हें दोबारा टीम से बाहर होना पड़ा। इसके बाद फिटनेस हासिल करने के लिए उन्हें लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ा।

    अफगानिस्तान सीरीज के लिए चयन से पहले वरुण ने भारतीय क्रिकेट बोर्ड के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में रिहैब प्रक्रिया पूरी की थी। इसके अलावा घरेलू क्रिकेट में अपनी फिटनेस साबित करने के बाद उन्हें टीम में शामिल किया गया था। ऐसे में वापसी के तुरंत बाद फिर चोटिल होना उनके लिए निराशाजनक स्थिति है।

    दिल्ली में पहले टी20 मैच के बाद वरुण ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी हिस्सा लिया था। उस समय उनकी नई चोट की जानकारी सामने नहीं आई थी। चोटों को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा था कि खिलाड़ियों के लिए चोट लगना आम बात है। उनके मुताबिक, यह बताता है कि खिलाड़ी कितनी मेहनत कर रहे हैं और अपनी सीमाओं से आगे जाकर खेल रहे हैं।

    वरुण ने यह भी कहा था कि जब शरीर जवाब देने लगता है तो खिलाड़ियों को थोड़ा पीछे हटना पड़ता है, ताकि वे और मजबूत होकर वापसी कर सकें। अब एक बार फिर चोट के कारण उन्हें मैदान से बाहर होना पड़ा है।

    19 सितंबर से एशियन गेम्स शुरू होने हैं। ऐसे में टीम मैनेजमेंट की कोशिश होगी कि वरुण चक्रवर्ती जल्द फिट हों और उपलब्ध होने पर टीम का हिस्सा बनें। अफगानिस्तान सीरीज से उनके बाहर होने के बाद उनकी फिटनेस पर आगे भी नजर बनी रहेगी।

  • IND vs AFG : दूसरा T-20 आज…. संजू की जगह वैभव सूर्यवंशी को मिल सकता है मौका

    IND vs AFG : दूसरा T-20 आज…. संजू की जगह वैभव सूर्यवंशी को मिल सकता है मौका


    नई दिल्ली।
    भारत और अफगानिस्तान (India vs Afghanistan) के बीच टी20 सीरीज (T20 Series) का दूसरा मुकाबला 15 सितंबर (मंगलवार) को खेला जाएगा. पहले मैच में टीम इंडिया (Team India) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अफगानिस्तान को 7 विकेट से मात दी और सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली है. अब दूसरे मुकाबले से पहले सबसे ज्यादा चर्चा प्लेइंग-11 को लेकर है।

    पहले टी20 में संजू सैमसन (Sanju Samson) को ओपनिंग का मौका मिला था, लेकिन वह 8 गेंदों पर सिर्फ 10 रन बना सके. ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि क्या टीम मैनेजमेंट युवा वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Suryavanshi) को मौका देने के लिए संजू को बाहर बैठा सकता है।

    वैभव पहले टी20 में प्लेइंग-11 का हिस्सा नहीं थे और संजू को प्राथमिकता दी गई थी. इस फैसले को लेकर पहले ही काफी चर्चा हुई थी. हालांकि, टीम मैनेजमेंट संजू सैमसन को दूसरे टी20 में एक और मौका जरूर देना चाहेगा.


    वैभव को मिलेगा मौका?

    15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने पिछले कुछ समय में अपनी बल्लेबाजी से खूब सुर्खियां बटोरी हैं. ऐसे में दूसरे टी20 में उन्हें मौका देने का फैसला टीम इंडिया के लिए एक बड़ा चयन फैसला होगा. अगर वैभव को शामिल किया जाता है तो वह अभिषेक शर्मा के साथ ओपनिंग करते नजर आ सकते हैं. वहीं विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी ईशान किशन को दी जा सकती है. इससे पहले वैभव को जिम्बाब्वे दौरे पर ‘प्लेयर ऑफ द सीरीज’ का खिताब मिला था. वैभव सूर्यवंशी ने जुलाई 2026 में जिम्बाब्वे दौरे पर तीन पारियों में कुल 151 रन बनाए थे.।


    एक जीत और भारत के नाम सीरीज

    पहले टी20 में भारत ने 157 रनों के लक्ष्य को महज 13.4 ओवर में हासिल कर लिया था. अभिषेक शर्मा ने 32 गेंदों पर 82 रनों की तूफानी पारी खेली, जबकि ईशान किशन ने 42 रन बनाए। दूसरे टी20 में टीम मैनेजमेंट नीतीश कुमार रेड्डी की जगह वॉशिंगटन सुंदर को प्लेइंग-11 में शामिल किया जा सकता है. नीतीश कुमार रेड्डी ने पहले टी20 मुकाबले में 2 ओवर गेंदबाजी करके 30 रन दिए थे. वहीं चोटिल वरुण चक्रवर्ती की जगह रवि बिश्नोई को मौका मिलने की संभावना है।

    अब भारत की नजर दूसरे मैच में जीत दर्ज कर सीरीज अपने नाम करने पर होगी. वहीं क्रिकेट फैन्स की नजर इस बात पर टिकी है कि संजू को एक और मौका मिलेगा या फिर वैभव सूर्यवंशी की टीम इंडिया में वापसी होगी.


    भारत की संभावित प्लेइंग-11:
    अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन (विकेटकीपर), ईशान किशन, श्रेयस अय्यर, तिलक वर्मा, वॉशिंगटन सुंदर, शिवम दुबे, अक्षर पटेल, जसप्रीत बुमराह, अर्शदीप सिंह और रवि बिश्नोई.


    अफगानिस्तान की संभावित प्लेइंग-11:
    इब्राहिम जादरान (कप्तान), रहमानुल्लाह गुरबाज (विकेटकीपर), सेदिकुल्लाह अटल, दरविश रसूली, अजमतुल्लाह उमरजई, गुलबदिन नईब, मोहम्मद नबी, राशिद खान, मुजीब उर रहमान, नूर अहमद, फजलहक फारूकी।

  • मोहसिन नकवी के लिए ACC में दूसरा कार्यकाल आसान नहीं, BCCI समर्थन से दूर तो सदस्य बोर्ड भी नहीं दिखा रहे उत्साह

    मोहसिन नकवी के लिए ACC में दूसरा कार्यकाल आसान नहीं, BCCI समर्थन से दूर तो सदस्य बोर्ड भी नहीं दिखा रहे उत्साह

    नई दिल्ली । पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के प्रमुख मोहसिन नकवी के लिए एशियन क्रिकेट काउंसिल यानी ACC में दूसरा कार्यकाल हासिल करना आसान नहीं माना जा रहा है। ACC चेयरमैन के तौर पर नकवी का मौजूदा कार्यकाल अप्रैल 2027 में समाप्त होगा। नियमों के तहत चेयरमैन के कार्यकाल को बढ़ाने का विकल्प मौजूद है, लेकिन इसके लिए सदस्य बोर्डों का समर्थन जरूरी होगा।

    ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या नकवी को दोबारा ACC चेयरमैन बनाए जाने के लिए पर्याप्त समर्थन मिल पाएगा। मौजूदा परिस्थितियों में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी BCCI की तरफ से उनके समर्थन की संभावना कम मानी जा रही है। इसके अलावा ACC के अन्य सदस्य बोर्डों के बीच भी नकवी को एक और कार्यकाल देने को लेकर खास उत्साह दिखाई नहीं दे रहा है।

    ACC में चेयरमैन का पद दो साल के रोटेशन सिस्टम के तहत चलता है। इसी व्यवस्था के तहत मोहसिन नकवी ने 2025 में ACC की जिम्मेदारी संभाली थी। उनका मौजूदा कार्यकाल अप्रैल 2027 में पूरा होगा। ऐसे में उनके पास अब करीब सात महीने का समय बचा है। इसके बाद ACC को नए चेयरमैन के चयन की प्रक्रिया शुरू करनी होगी।

    हालांकि नियमों में कार्यकाल बढ़ाने का विकल्प मौजूद है। इसके लिए सदस्य देशों के बीच सहमति और समर्थन महत्वपूर्ण होगा। इससे पहले जय शाह का ACC चेयरमैन के तौर पर कार्यकाल बढ़ाया जा चुका है। उन्होंने जनवरी 2021 में बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के तत्कालीन प्रमुख नजमुल हसन से यह जिम्मेदारी संभाली थी। बाद में सदस्य देशों की सहमति से उनका कार्यकाल 2024 तक बढ़ाया गया था। जय शाह का कार्यकाल चार साल तक चला।

    दिसंबर 2024 में जय शाह के ICC चेयरमैन बनने के बाद श्रीलंका के शम्मी सिल्वा ने कुछ समय के लिए ACC की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद 2025 में यह जिम्मेदारी पाकिस्तान के मोहसिन नकवी को मिली। अब अप्रैल 2027 में नकवी का कार्यकाल पूरा होने के बाद ACC के सामने अगले चेयरमैन के चयन का सवाल होगा।

    मोहसिन नकवी का नाम पिछले दो सीनियर एशिया कप के ट्रॉफी विवादों से भी जुड़ा रहा है। 2025 में पाकिस्तान को हराकर भारत ने पुरुष एशिया कप का खिताब जीता था। भारतीय टीम ने नकवी से ट्रॉफी स्वीकार नहीं की थी। इसके बाद खिलाड़ियों ने चैंपियन बैनर के साथ जश्न मनाया और ट्रॉफी के बिना अपनी जीत का जश्न पूरा किया।

    महिला एशिया कप 2026 में भी भारत ने इसी तरह का रुख अपनाया। मैच के बाद भारतीय टीम ने काफी देर तक मैदान पर इंतजार किया। BCCI अधिकारियों के साथ चर्चा के बाद टीम ड्रेसिंग रूम लौट गई। इसके बाद भारतीय टीम की मौजूदगी के बिना पुरस्कार समारोह समाप्त हुआ।

    इन दोनों घटनाओं के बाद ACC चेयरमैन के तौर पर मोहसिन नकवी की भूमिका को लेकर चर्चा हुई। ऐसे माहौल में उनके अगले कार्यकाल के लिए BCCI का समर्थन मिलना मुश्किल माना जा रहा है।

    फिलहाल BCCI की ओर से मोहसिन नकवी के कार्यकाल या संभावित विस्तार को लेकर कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है। अप्रैल 2027 में जब नए ACC चेयरमैन के चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, तब सदस्य देशों का रुख महत्वपूर्ण होगा। मौजूदा समीकरणों में नकवी के लिए दूसरा कार्यकाल हासिल करना आसान नहीं दिख रहा है।

  • ‘ट्रॉफी चोर’ के नारों से घिरे मोहसिन नकवी, भारत की महिला टीम ने भी ट्रॉफी लेने से किया इनकार

    ‘ट्रॉफी चोर’ के नारों से घिरे मोहसिन नकवी, भारत की महिला टीम ने भी ट्रॉफी लेने से किया इनकार

    नई दिल्ली । महिला एशिया कप 2026 का फाइनल फैंस के लिए लाइव सिनेमा साबित हुआ। पिछले साल मेंस एशिया कप में भारतीय टीम ने पाकिस्तान के गृह मंत्री और एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) के चेयरमैन मोहसिन नकवी से ट्रॉफी नहीं ली थी। अब भारत की बेटियों ने भी यही कदम उठाया, तो फैंस ने मैदान में ट्रॉफी चोर के नारे लगाए। जिसके बाद मोहसिन नकवी मैदान छोड़कर भागे और वीडियो वायरल हो गया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो से नकवी की इंटरनेशनल बेइज्जती हुई।

    महिला एशिया कप 2026 में पाकिस्तान की टीम सेमीफाइनल में हारकर बाहर हो गई थी। फाइनल भारत और श्रीलंका के बीच हुआ, जिसमें हरमनप्रीत कौर की कप्तानी वाली टीम इंडिया ने खिताबी जीत दर्ज की। एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) के चेयरमैन पिछले साल की तरह इस बार भी चैंपियन टीम को ट्रॉफी सौंपने पहुंचे थे, लेकिन कौर एंड कंपनी ने उनसे ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया। फैंस मैदान पर नकवी से ‘ट्रॉफी चोर-ट्रॉफी चोर’ के नारे लगाते दिखे, जिसके बाद नकवी मैदान से मुंह छिपाकर भागे।

    क्यों कहा ट्रॉफी चोर?

    पिछले साल सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में भारतीय मेंस टीम ने एशिया कप फाइनल में पाकिस्तान को हराकर खिताबी जीत दर्ज की थी। भारतीय टीम ने नकवी से ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया था, लेकिन नकवी खुद ही ट्रॉफी देने की जिद पर अड़े रहे। चैंपियन टीम इंडिया ट्रॉफी के इंतजार में रही, लेकिन नकवी ट्रॉफी लेकर लौट गए। जिसके चलते फैंस ने मोहसिन नकवी पर ट्रॉफी चोर का ठप्पा लगा दिया। ये दूसरी बार है, जब चैंपियन बनने के बाद भी भारत के पास ट्रॉफी नहीं है।

    भारत का शानदार प्रदर्शन

    भारतीय महिला टीम ने एशिया कप में धमाकेदार प्रदर्शन किया। टीम इंडिया फाइनल तक अजेय रही। टीम ने सभी 5 मुकाबलों में जीत दर्ज की। 2024 में भारतीय टीम को इसी श्रीलंका टीम ने फाइनल में करारी शिकस्त दी थी, लेकिन इस बार उस हार का हिसाब बराबर हो गया है। मेंस टीम ने फाइनल में बिना ट्रॉफी के जश्न मना लिया था, लेकिन महिला टीम जीत के बाद मैदान पर वापस नहीं आईं।

  • छह साल बाद पूरा हुआ अलेक्जेंडर ज्वेरेव का सपना, बेन शेल्टन को हराकर पहली बार जीता US Open खिताब

    छह साल बाद पूरा हुआ अलेक्जेंडर ज्वेरेव का सपना, बेन शेल्टन को हराकर पहली बार जीता US Open खिताब

    नई दिल्ली । जर्मनी के अलेक्जेंडर ज्वेरेव ने यूएस ओपन 2026 में मेन्स सिंगल्स खिताब जीत लिया. 13 सितंबर (रविवार) को न्यूयॉर्क के आर्थर ऐश स्टेडियम में आयोजित खिताबी मुकाबले में ज्वेरेव ने यूएसए के बेन शेल्टन को 6-3, 7-6(2), 5-7, 6-2 से हराया. ज्वेरेव ने यह मुकाबला 3 घंटा और 33 मिनट में जीता. वर्ल्ड नंबर-2 ज्वेरेव का यह पहला यूएस ओपन खिताब है. ओवरऑल ज्वेरेव ने दूसरी बार ग्रैंड स्लैम टाइटल जीता है. इसी साल फ्रेंच ओपन में भी ज्वेरेव ने खिताबी जीत हासिल की थी.

    फाइनल जीतने के बाद 29 वर्षीय अलेक्जेंडर ज्वेरेव कुछ पल तक कोर्ट पर खड़े रहे. बेन शेल्टन की फोरहैंड गलती के साथ जैसे ही मुकाबला खत्म हुआ, उन्हें भी कुछ सेकंड के लिए यकीन नहीं हुआ कि आखिरकार वह मंजिल हासिल कर चुके हैं. आर्थर ऐश स्टेडियम में मौजूद दर्शकों के शोर के बीच उन्होंने दोनों हाथ ऊपर उठाए और लंबे इंतजार के बाद इस ऐतिहासिक जीत का जश्न मनाया.

    अलेक्जेंडर ज्वेरेव के लिए इस जीत की अहमियत इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि छह साल पहले इसी टूर्नामेंट में उनका सपना टूट गया था. 2020 यूएस ओपन फाइनल में उन्होंने डोमिनिक थीम के खिलाफ दो सेट की बढ़त हासिल कर ली थी, लेकिन इसके बाद मुकाबला उनके हाथ से निकल गया था. इस बार भी तीसरे सेट में बेन शेल्टन की वापसी ने पुराने फाइनल की यादें ताजा कर दी थीं. ज्वेरेव शुरुआती दो सेट जीत चुके थे, लेकिन शेल्टन ने तीसरा सेट 7-5 से अपने नाम कर मुकाबले को फिर से रोमांचक बना दिया. हालांकि ज्वेरेव ने चौथे सेट में खुद को संभाला और कोई बड़ा उलटफेर नहीं होने दिया.

    दूसरी ओर आठवीं वरीयता प्राप्त बेन शेल्टन अमेरिकी टेनिस के लिए बड़ा इतिहास रचने की कोशिश में थे. वह 2003 में एंडी रोडिक के बाद ग्रैंड स्लैम सिंगल्स खिताब जीतने वाले पहले अमेरिकी पुरुष खिलाड़ी बनने से सिर्फ एक जीत दूर थे. लेकिन अलेक्जेंडर ज्वेरेव ने उनका सपना पूरा नहीं होने दिया. इस जीत के साथ ज्वेरेव ने शेल्टन के खिलाफ अपना रिकॉर्ड 6-0 कर लिया.

    ज्वेरेव ने फाइनल की शुरुआत बेहद आक्रामक अंदाज में की. उनके गहरी और तेज बेसलाइन शॉट्स ने बेन शेल्टन को लगातार पीछे रखा. 23 वर्षीय अमेरिकी खिलाड़ी ने शुरुआती गेम में कुछ शानदार शॉट जरूर लगाए, लेकिन ज्वेरेव ने दबाव बनाए रखा. शेल्टन के डबल फॉल्ट ने ज्वेरेव को शुरुआती ब्रेक दिलाया और जर्मन खिलाड़ी ने 2-0 की बढ़त बना ली. इसके बाद 5-3 पर ज्वेरेव ने एक और ब्रेक हासिल किया और पहला सेट 6-3 से अपने नाम कर लिया.

    दूसरे सेट में बेन शेल्टन ने वापसी की कोशिश की. उनकी सर्विस बेहतर हुई और लंबे रैलियों में उन्होंने अलेक्जेंडर ज्वेरेव को बराबरी की चुनौती दी. दोनों खिलाड़ियों के बीच कड़ा मुकाबला हुआ और कोई भी आसानी से बढ़त बनाने में सफल नहीं रहा. सेट 5-5 तक पहुंचा और मुकाबला टाईब्रेक में चला गया. यहां ज्वेरेव ने अपना सर्वश्रेष्ठ खेल दिखाया. उन्होंने 5-0 की बढ़त हासिल कर ली और आखिर में टाईब्रेक 7-2 से जीतकर मैच में 2-0 की बढ़त बना ली.

    तीसरे सेट में शेल्टन का जबरदस्त खेल

    दो सेट से पीछे होने के बावजूद बेन शेल्टन ने हार नहीं मानी. उन्होंने तीसरे सेट में आक्रामकता बढ़ाई और अलेक्जेंडर ज्वेरेव की लय को तोड़ने में सफल रहे. 5-5 के स्कोर पर शेल्टन ने ज्वेरेव पर दबाव बनाया. इसके बाद उन्होंने 0-40 की बढ़त हासिल कर तीन सेट पॉइंट हासिल किए. ज्वेरेव ने एक मौका बचाया, लेकिन अगली कोशिश में उनकी फोरहैंड वॉली बाहर चली गई. शेल्टन ने तीसरा सेट 7-5 से जीतकर मुकाबले में वापसी की उम्मीद जगा दी.

    चौथे सेट में ज्वेरेव ने नहीं दोहराई पुरानी गलती

    चौथे सेट में अलेक्जेंडर ज्वेरेव ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया. उन्होंने बेन शेल्टन की सर्विस पर दबाव बनाया और जल्द ही ब्रेक हासिल कर लिया. इसके बाद उन्होंने अपनी सर्विस बचाते हुए 2-0 की बढ़त बना ली. शेल्टन ने संघर्ष जारी रखा, लेकिन ज्वेरेव ने उन्हें मैच में वापस आने का मौका नहीं दिया. 4-2 पर ज्वेरेव ने एक और ब्रेक हासिल किया. शेल्टन की लगातार गलतियों का फायदा उठाते हुए उन्होंने तीन ब्रेक पॉइंट बनाए और बैकहैंड की एक और गलती के बाद बढ़त 5-2 कर ली.

    5-2 पर अलेक्जेंडर ज्वेरेव खिताब के लिए सर्व करने उतरे. शुरुआत में डबल फॉल्ट के कारण थोड़ी परेशानी जरूर आई, लेकिन उन्होंने तुरंत जोरदार ऐस और दमदार फोरहैंड विनर के साथ वापसी की. इसके बाद उन्हें चैम्पियनशिप पॉइंट मिला. शेल्टन का फोरहैंड बाहर चला गया और ज्वेरेव ने 6-2 से चौथा सेट जीतकर यूएस ओपन ट्रॉफी अपने नाम कर ली.

  • विराट कोहली के टैटू सिर्फ डिजाइन नहीं, जिंदगी के अहम पड़ावों की कहानी हैं; परिवार, आस्था और क्रिकेट से जुड़ी खास यादें

    विराट कोहली के टैटू सिर्फ डिजाइन नहीं, जिंदगी के अहम पड़ावों की कहानी हैं; परिवार, आस्था और क्रिकेट से जुड़ी खास यादें

    नई दिल्ली । क्रिकेट के मैदान पर विराट कोहली को याद करते ही सबसे पहले उनके शॉट्स, आक्रामक अंदाज, जोशीले जश्न और खेल के प्रति जुनून की तस्वीर सामने आती है। इसके बाद उनके रिकॉर्ड और रन याद आते हैं, लेकिन कोहली ने सिर्फ बल्लेबाजी से ही एक पूरी पीढ़ी को प्रभावित नहीं किया। उनकी दाढ़ी, हेयरस्टाइल, पहनावा और अंदाज भी युवाओं के बीच चर्चा का हिस्सा रहे हैं। इन सबके बीच उनके शरीर पर बने टैटू उनकी पहचान का एक ऐसा हिस्सा हैं, जो मैदान से बाहर कोहली के व्यक्तित्व की बिल्कुल अलग तस्वीर दिखाते हैं।

    कोहली के दोनों हाथों पर कई टैटू हैं। पहली नजर में ये डिजाइन किसी रॉकस्टार की तरह बहुत ज्यादा शोर मचाने वाले नहीं लगते, लेकिन इनके पीछे की कहानियां काफी व्यक्तिगत हैं। कहीं परिवार है, कहीं आध्यात्मिकता, कहीं अनुशासन और कहीं जिंदगी को देखने का नजरिया। यही वजह है कि कोहली के लिए टैटू महज शरीर पर बना डिजाइन नहीं, बल्कि उनकी जिंदगी की डायरी जैसा है।

    कोहली के टैटू में क्या-क्या छिपा है?

    विराट कोहली के टैटू कलेक्शन को देखें तो इसमें कई अलग-अलग प्रतीक दिखाई देते हैं। इनमें ऑल-सीइंग आई शामिल है, जिसे कोहली ने इस सोच से जोड़ा है कि इंसान जो कुछ करता है, उसे कोई न कोई देख रहा है और उसके कर्मों का हिसाब रखा जा रहा है। जापानी समुराई का टैटू भी उनके शरीर पर है, जिससे कोहली ताकत, वफादारी, आत्म-अनुशासन और नैतिक व्यवहार जैसे मूल्यों को जोड़ते हैं।

    इसके अलावा उनकी वनडे और टेस्ट कैप के नंबर, उनके पिता और मां के नाम, भगवान शिव का टैटू, जिसमें शिव को कैलाश पर्वत पर ध्यान करते हुए दिखाया गया है, और एक मठ की तस्वीर भी उनके टैटू में शामिल हैं। स्कॉर्पियो, ओम और ट्राइबल डिजाइन भी उनके शरीर पर मौजूद हैं। इन सभी टैटू को एक साथ देखें तो कोहली की मैदान वाली आक्रामक छवि के पीछे एक शांत, आध्यात्मिक और आत्मचिंतन करने वाला पक्ष भी नजर आता है।

    बाएं हाथ की स्लीव अभी भी पूरी क्यों नहीं हुई?

    कोहली के टैटू की खास बात यह भी है कि उनका बायां हाथ अभी पूरी तरह ‘पूरा’ नहीं हुआ है। यह अधूरापन जानबूझकर रखा गया है। इसके पीछे एक दिलचस्प सोच है। कोहली की जिंदगी लगातार बदलती रही है। क्रिकेट करियर में नई उपलब्धियां आईं, निजी जिंदगी में बदलाव हुए और सोच भी समय के साथ विकसित हुई। ऐसे में उनका टैटू भी किसी एक दौर की स्थिर तस्वीर नहीं है। वह लगातार आगे बढ़ रही कहानी की तरह है।

    उनके साथ काम करने वाले कलाकारों के मुताबिक, पिछले तीन साल से ज्यादा समय से कोहली के टैटू पर काम चल रहा है और अभी भी यह प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। बाएं हाथ के डिजाइन का बड़ा हिस्सा पूरा हो चुका है, लेकिन दाहिने हिस्से पर अभी काम बाकी है। हाल में उनके टैटू कलेक्शन में एक और डिजाइन जुड़ा, जो पानी की सतह पर एक बूंद गिरने के बाद बनने वाली लहरों जैसा दिखाई देता है। यानी एक छोटी सी चीज का असर लगातार दूर तक फैलता जाता है।

    क्या कोहली खुद तय करते हैं कि शरीर पर क्या बनेगा?

    कोहली के टैटू को खास बनाने वाली एक और बात यह है कि वह डिजाइन तैयार करने की प्रक्रिया में खुद बेहद सक्रिय रहते हैं। उनके साथ काम करने वाले टैटू आर्टिस्ट बताते हैं कि कोहली सिर्फ कलाकार के सामने बैठकर यह इंतजार नहीं करते कि कलाकार उनके लिए कुछ बना दे। वह हर चीज को समझना चाहते हैं। टैटू आर्टिस्ट के मुताबिक, कोहली टैटू डिजाइन की तकनीकी प्रक्रिया को भी समझने की कोशिश करते हैं। वह डिजाइन की प्रक्रिया में शुरुआत से अंत तक सक्रिय रूप से शामिल रहते हैं।

    क्या टैटूज में हैं कोहली की जिंदगी की कहानी?

    एक बाहरी व्यक्ति के तौर पर, ये डिजाइन बहुत बोल्ड नहीं लगते और इनके तत्व शांत दिखाई देते हैं। लेकिन विराट के लिए ये सभी तत्व बोल्ड हैं, क्योंकि ये खुद उनका प्रतिबिंब हैं। उनका टैटू उनके भीतर की भावनाओं और एहसासों की अभिव्यक्ति है। यही उनकी खूबसूरती है। वह जीवन, अपने करियर और हर चीज के बारे में जो मानते हैं, जो महसूस करते हैं और उनकी जो सोच है, उनका डिजाइन उसी को दर्शाता है। कोहली टैटू की सुंदरता से ज्यादा उसके पीछे की कहानी को महत्व देते हैं।

    किसी क्रिकेटर का टैटू बनाना कितना अलग होता है?

    क्या किसी आम व्यक्ति और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर के लिए टैटू बनाने की प्रक्रिया अलग होती है? इसका जवाब है, डिजाइन बनाने की मूल प्रक्रिया लगभग एक जैसी रहती है, लेकिन टैटू का टॉपिक अलग हो सकता है। कोई अपने साथी का नाम चाहता है, कोई किसी उपलब्धि को याद रखना चाहता है, तो किसी के लिए कोई धार्मिक विश्वास महत्वपूर्ण होता है, लेकिन इसके बाद कलाकार गहराई में जाकर उस विचार के पीछे की असली भावना तक पहुंचने की कोशिश करते हैं। यहीं से टैटू सिर्फ शरीर पर बनाया जाने वाला डिजाइन नहीं रह जाता। वह व्यक्ति के अनुभव का हिस्सा बनने लगता है।

    मैच से पहले टैटू? खिलाड़ियों की रिकवरी कैसे होती है?

    पेशेवर क्रिकेटरों के मामले में टैटू बनवाने के साथ एक और सवाल जुड़ा होता है- अगर कुछ दिन बाद मैच हो तो शरीर पर टैटू का असर क्या होगा? टैटू आर्टिस्ट के मुताबिक, कलाकार खिलाड़ियों को अपनी सलाह देते हैं, लेकिन विराट कोहली और हार्दिक पांड्या जैसे खिलाड़ी अपने शरीर और रिकवरी को बहुत अच्छी तरह समझते हैं। ऐसा भी हुआ है कि विराट ने मैच से कुछ दिन पहले टैटू बनवाया और इसके बाद भी मैचों में अच्छा प्रदर्शन किया। हार्दिक के साथ भी कुछ ऐसा ही है। हालांकि, आम व्यक्ति के लिए इसे सीधे अपनाना सही नहीं माना जाना चाहिए। एक पेशेवर खिलाड़ी की ट्रेनिंग, खान-पान, चिकित्सकीय निगरानी और रिकवरी व्यवस्था आम व्यक्ति से अलग हो सकती है।

    विराट ही नहीं, पूरी क्रिकेट पीढ़ी ने भी अपनाया यह अंदाज?

    भारत में टैटू हमेशा से मौजूद रहे हैं, लेकिन लंबे समय तक इसे लेकर कई तरह की धारणाएं थीं। टैटू को विद्रोह, अलग तरह के व्यक्तित्व या सिर्फ फैशन से जोड़कर देखा जाता था। पुरानी पीढ़ी के कई बड़े क्रिकेटरों की सार्वजनिक पहचान में टैटू का हिस्सा बहुत कम दिखाई देता था। सचिन तेंदुलकर और राहुल द्रविड़ जैसे खिलाड़ियों की छवि टैटू के बजाय उनके खेल और सादगी से जुड़ी रही। मौजूदा पीढ़ी में तस्वीर काफी अलग है। विराट कोहली, हार्दिक पांड्या और दूसरे खिलाड़ियों ने टैटू को अपनी व्यक्तिगत पहचान का हिस्सा बनाया है।

    और कौन-कौन से भारतीय क्रिकेटर्स ने बनवाए टैटू?

    टैटू अब सिर्फ विराट कोहली की पहचान नहीं हैं। भारतीय क्रिकेट के कई मौजूदा सितारों ने अपनी जिंदगी की अलग-अलग कहानियों को शरीर पर जगह दी है। हार्दिक पांड्या ने अपने रिश्ते से जुड़ी भावना को टैटू के जरिए याद किया है। तिलक वर्मा ने भगवान शिव के प्रति अपनी आस्था और माता-पिता के प्रति प्रेम को टैटू के जरिए जाहिर किया है। स्मृति मंधाना ने महिला विश्व कप जीत की याद को अपने दाहिने हाथ पर बने टैटू से जोड़ा। वहीं, अर्शदीप सिंह ने भी अपनी गर्लफ्रेंड समरीन कौर के साथ टैटू बनवाकर इस बढ़ती सूची में अपना नाम जोड़ा है। इसके अलावा केएल राहुल और शिखर धवन जैसे क्रिकेटर्स ने भी काफी टैटू बनवाए हैं। यानी भारतीय क्रिकेटरों के लिए टैटू अब केवल फैशन का हिस्सा नहीं रह गया है। यह निजी रिश्तों, उपलब्धियों, आस्था और जिंदगी के महत्वपूर्ण पलों को याद रखने का तरीका भी बनता जा रहा है।

    आखिर खिलाड़ी बार-बार टैटू क्यों बनवाते हैं?

    यही इस पूरी कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा है। अगर टैटू बनवाना सिर्फ फैशन है तो खिलाड़ी बार-बार इसके लिए क्यों लौटते हैं? टैटू को लेकर लोगों की सोच में बदलाव सिर्फ खिलाड़ियों तक सीमित नहीं है। टैटू कलाकारों के पेशे को लेकर नजरिया भी बदला है। टैटू सिर्फ स्टाइल और फैशन के बारे में नहीं हैं। यह भावनाओं का प्रतिबिंब है।

    विराट के लिए टैटू अभी खत्म हुई कहानी नहीं?

    शायद यही वजह है कि विराट कोहली का टैटू कलेक्शन आज भी बढ़ रहा है। उनके लिए यह किसी एक उपलब्धि की याद में बनवाया गया स्थिर चित्र नहीं है। यह उनकी जिंदगी के साथ आगे बढ़ता हुआ एक सफर है। एक माता-पिता की याद हो सकती है। कोई रिश्ता हो सकता है। बचपन की कोई भावना, कोई विश्वास, भगवान के प्रति आस्था, क्रिकेट की कोई उपलब्धि या जिंदगी का कोई बड़ा बदलाव, हर नया अध्याय शरीर पर जगह पा सकता है।

    विराट ने कुछ साल पहले टैटू और अपनी जिंदगी के रिश्ते को बेहद खास तरीके से समझाया था। उन्होंने कहा, ‘मुझे यह समझने के लिए कहीं और देखने की जरूरत नहीं है कि मैं कहां था और अब कहां पहुंच गया हूं। मैं अपने दोनों हाथों को देखकर यह समझ सकता हूं।’ विराट कोहली की क्रिकेट कहानी रन, रिकॉर्ड, शतक और ट्रॉफियों से लिखी गई है, लेकिन उनकी जिंदगी की एक दूसरी डायरी भी है, जिसे हर कोई मैदान के बाहर देख सकता है। वह डायरी उनके दोनों हाथों पर लिखी हुई है।

  • 16 साल का इंतजार हुआ खत्म धीरज बोम्मादेवरा ने शूट ऑफ में जापान को हराकर रचा भारतीय तीरंदाजी का इतिहास

    16 साल का इंतजार हुआ खत्म धीरज बोम्मादेवरा ने शूट ऑफ में जापान को हराकर रचा भारतीय तीरंदाजी का इतिहास


    नई दिल्ली। भारतीय तीरंदाजी के लिए रविवार का दिन ऐतिहासिक बन गया। भारत के स्टार रिकर्व तीरंदाज धीरज बोम्मादेवरा ने विश्व कप फाइनल में स्वर्ण पदक जीतकर ऐसा कारनामा कर दिखाया है जो इससे पहले कोई भारतीय पुरुष रिकर्व तीरंदाज नहीं कर सका था। धीरज ने जापान के नाकानिशी जुन्या को बेहद रोमांचक मुकाबले में शूट ऑफ के जरिए हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। उनकी इस शानदार जीत के साथ भारतीय पुरुष रिकर्व तीरंदाजी में 16 साल से चला आ रहा इंतजार भी खत्म हो गया।

    25 वर्षीय धीरज ने पूरे टूर्नामेंट में जबरदस्त प्रदर्शन किया। विश्व रैंकिंग में 10वें स्थान पर मौजूद सेना के इस जवान ने क्वार्टर फाइनल और सेमीफाइनल में अपनी सटीक निशानेबाजी का दम दिखाया। फाइनल में उनका सामना दुनिया के 20वें नंबर के जापानी तीरंदाज नाकानिशी जुन्या से हुआ। मुकाबला पांच सेट तक चला और दोनों खिलाड़ियों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली। पांच सेट के बाद स्कोर 5-5 से बराबर था। इसके बाद फैसला शूट ऑफ से हुआ जहां धीरज ने 10-9 के अंतर से जीत दर्ज करते हुए स्वर्ण पदक पर कब्जा जमा लिया।

    धीरज की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि विश्व कप फाइनल में भारतीय पुरुष रिकर्व तीरंदाज के लिए इससे पहले स्वर्ण पदक का सपना अधूरा रहा था। भारत की ओर से जयंत तालुकदार ने 2010 में एडिनबर्ग में विश्व कप फाइनल में कांस्य पदक जीता था। इसके बाद लंबे समय तक भारतीय पुरुष रिकर्व तीरंदाज इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में स्वर्ण हासिल नहीं कर सके। अब धीरज ने उस सूखे को खत्म कर इतिहास अपने नाम कर लिया है।

    धीरज की सफलता के पीछे सिर्फ उनकी प्रतिभा नहीं बल्कि परिवार का संघर्ष और त्याग भी छिपा है। करियर के शुरुआती दौर में परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर नहीं थी। साल 2017 में बेहतर प्रशिक्षण के लिए उन्हें महंगे विदेशी उपकरणों की जरूरत थी लेकिन पैसों की कमी बड़ी चुनौती बन गई। हालात यहां तक पहुंच गए कि धीरज की मां रेवती ने बेटे का सपना पूरा करने के लिए अपना मंगलसूत्र तक गिरवी रख दिया। इसी रकम से उनके लिए नया धनुष खरीदा गया।

    एक समय धीरज तीरंदाजी छोड़ने का मन भी बना चुके थे लेकिन परिवार के भरोसे ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी। उनके पिता श्रवण कुमार भी तीरंदाजी से जुड़े रहे और आंध्र प्रदेश के वरिष्ठ तीरंदाजी जजों में शामिल हैं। परिवार के इसी समर्थन और धीरज की मेहनत ने उन्हें आज दुनिया के शीर्ष तीरंदाजों में खड़ा कर दिया है।

    इस साल जून में तुर्किये के अंताल्या में विश्व कप स्टेज तीन में धीरज ने दो स्वर्ण पदक जीतकर अपनी शानदार फॉर्म का संकेत दिया था। अब विश्व कप फाइनल में गोल्ड जीतकर उन्होंने भारतीय तीरंदाजी के इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया है। विश्व कप फाइनल में इससे पहले भारत के लिए डोला बनर्जी ने 2007 में महिला व्यक्तिगत वर्ग में स्वर्ण पदक जीता था। धीरज की जीत ने पुरुष वर्ग में भी भारत का झंडा सबसे ऊंचा कर दिया है।

  • अरुण जेटली स्टेडियम में ऐतिहासिक पल भारत अफगानिस्तान मुकाबले से पहले गूंजा वंदे मातरम

    अरुण जेटली स्टेडियम में ऐतिहासिक पल भारत अफगानिस्तान मुकाबले से पहले गूंजा वंदे मातरम


    नई दिल्ली। भारत और अफगानिस्तान के बीच नई दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में खेले जा रहे पहले टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले से पहले एक ऐतिहासिक पल देखने को मिला। क्रिकेट के मैदान पर पहली बार राष्ट्रीय गान जन गण मन से पहले राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम का वादन किया गया। इस दौरान स्टेडियम में मौजूद खिलाड़ियों के साथ दर्शकों ने भी सम्मान के साथ खड़े होकर राष्ट्रीय गीत को सुना। यह मौका भारतीय क्रिकेट और देश के खेल इतिहास में खास माना जा रहा है।

    मुकाबला शुरू होने से पहले आमतौर पर राष्ट्रीय गान बजाने की परंपरा रही है। हालांकि इस बार कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम से हुई और उसके बाद राष्ट्रीय गान जन गण मन बजाया गया। इस ऐतिहासिक आयोजन ने स्टेडियम के माहौल को देशभक्ति के रंग में रंग दिया। खिलाड़ियों और दर्शकों के बीच भी इस दौरान खास उत्साह नजर आया।

    बताया गया कि यह आयोजन राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ से जुड़े कार्यक्रमों का हिस्सा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से इससे संबंधित दिशा निर्देश जारी किए गए थे। इन्हीं दिशा निर्देशों के तहत अरुण जेटली स्टेडियम में वंदे मातरम के सभी छह छंद प्रस्तुत किए गए। राष्ट्रीय गीत के पूरे संस्करण को प्रस्तुत करने में करीब 3 मिनट 10 सेकेंड का समय निर्धारित किया गया था। इसके बाद राष्ट्रीय गान के लिए करीब 52 सेकेंड का समय रखा गया। इस तरह पूरे कार्यक्रम की अवधि लगभग 4 मिनट 2 सेकेंड रही।

    नए दिशा निर्देशों के अनुसार राष्ट्रीय गीत के वादन के दौरान वहां मौजूद लोगों को सावधान की मुद्रा में खड़े रहने के लिए कहा गया है। राष्ट्रीय गीत के संपूर्ण संस्करण के इस्तेमाल को कुछ औपचारिक सरकारी कार्यक्रमों और विशेष अवसरों के लिए मंजूरी दी गई है। इसी क्रम में भारत और अफगानिस्तान के बीच खेले गए इस अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मुकाबले से पहले भी इसका आयोजन किया गया।

    वंदे मातरम का भारतीय इतिहास में विशेष महत्व है। इसे बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने रचा था। वर्ष 1937 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने इसके शुरुआती दो छंदों को राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार किया था। इसके बाद वर्ष 1950 में संविधान सभा ने वंदे मातरम को राष्ट्रीय गीत के रूप में मान्यता दी।

    क्रिकेट मुकाबले की बात करें तो भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। भारतीय टीम में संजू सैमसन को विकेटकीपर की जिम्मेदारी दी गई जबकि अभिषेक शर्मा और ईशान किशन टीम का हिस्सा रहे। तिलक वर्मा नीतीश कुमार रेड्डी शिवम दुबे अक्षर पटेल अर्शदीप सिंह जसप्रीत बुमराह और वरुण चक्रवर्ती भी प्लेइंग इलेवन में शामिल रहे। हालांकि युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को इस मुकाबले में खेलने का मौका नहीं मिला।

    इस ऐतिहासिक शुरुआत के बाद अब क्रिकेट प्रेमियों की नजर इस बात पर भी रहेगी कि आने वाले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट आयोजनों में वंदे मातरम को लेकर क्या परंपरा आगे बढ़ती है। भारत अफगानिस्तान मुकाबले से पहले हुआ यह आयोजन निश्चित तौर पर क्रिकेट के मैदान पर यादगार पलों में शामिल हो गया है।

  • एक ही दिन तीज और गणेश चतुर्थी महिलाओं के लिए खास रहेगा आज का दिन दोपहर में गणेश स्थापना और रातभर होगा जागरण

    एक ही दिन तीज और गणेश चतुर्थी महिलाओं के लिए खास रहेगा आज का दिन दोपहर में गणेश स्थापना और रातभर होगा जागरण


    नई दिल्ली। भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए महिला एशिया कप का खिताब अपने नाम कर लिया है। रविवार को खेले गए फाइनल मुकाबले में भारतीय टीम ने श्रीलंका को 72 रन से हराकर आठवीं बार एशिया कप की ट्रॉफी पर कब्जा जमाया। टीम की इस शानदार उपलब्धि के बाद देशभर से बधाइयों का सिलसिला शुरू हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी भारतीय महिला क्रिकेट टीम को इस ऐतिहासिक जीत के लिए शुभकामनाएं दीं और खिलाड़ियों के प्रदर्शन की जमकर सराहना की।

    यूएई में खेले गए फाइनल मुकाबले में भारतीय टीम ने पूरे टूर्नामेंट की तरह निर्णायक मुकाबले में भी अपना दबदबा कायम रखा। टीम के खिलाड़ियों ने आत्मविश्वास के साथ खेलते हुए श्रीलंका को 72 रन से मात दी। इस जीत के साथ भारतीय महिला टीम ने आठवीं बार महिला एशिया कप का खिताब जीतकर अपनी मजबूती का परिचय दिया। फाइनल में मिली इस जीत को भारतीय महिला क्रिकेट के लिए एक बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टीम की जीत पर खुशी जताते हुए खिलाड़ियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि पूरे टूर्नामेंट के दौरान भारतीय टीम के खेल में आत्मविश्वास निरंतर शानदार प्रदर्शन और जबरदस्त जज्बा नजर आया। प्रधानमंत्री ने महिला खिलाड़ियों की मेहनत और उनके प्रदर्शन की तारीफ करते हुए इस उपलब्धि को भारतीय क्रिकेट के लिए गर्व का क्षण बताया।

    पीएम मोदी ने कहा कि भारतीय महिला क्रिकेट टीम की यह जीत देशभर के लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बनेगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि टीम की इस सफलता से युवा क्रिकेट के साथ साथ दूसरे खेलों में भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित होंगे। खिलाड़ियों की मेहनत आत्मविश्वास और लगातार बेहतर प्रदर्शन ने एक बार फिर यह दिखाया है कि भारतीय महिला क्रिकेट किस तेजी से नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी भारतीय महिला क्रिकेट टीम को एशिया कप जीतने पर बधाई दी। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर टीम की उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि भारत ने एशियाई क्रिकेट में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अमित शाह ने टीम के पूरे टूर्नामेंट में दबदबा बनाए रखने की तारीफ की और कहा कि भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन ने पूरे देश को रोमांचित किया।

    महिला टीम की इस जीत को इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि खिलाड़ियों ने पूरे टूर्नामेंट में लगातार अच्छा प्रदर्शन किया और फाइनल जैसे अहम मुकाबले में भी दबाव के बीच शानदार खेल दिखाया। श्रीलंका के खिलाफ 72 रन की जीत ने भारतीय टीम की तैयारियों और मजबूत इरादों को सामने रखा।

    आठवीं बार एशिया कप जीतने के बाद भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह एशियाई क्रिकेट में अपनी मजबूत पहचान बनाए हुए है। खिलाड़ियों की इस सफलता ने देश के क्रिकेट प्रशंसकों में भी उत्साह भर दिया है। प्रधानमंत्री और गृह मंत्री समेत देश की कई हस्तियों की ओर से मिल रही बधाइयां इस ऐतिहासिक जीत की अहमियत को और बढ़ा रही हैं।