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  • टीम इंडिया का अगला मिशन श्रीलंका 15 अगस्त से शुरू होगी टेस्ट सीरीज अक्टूबर तक का पूरा कार्यक्रम आया सामने

    टीम इंडिया का अगला मिशन श्रीलंका 15 अगस्त से शुरू होगी टेस्ट सीरीज अक्टूबर तक का पूरा कार्यक्रम आया सामने


    नई दिल्ली । जिम्बाब्वे के खिलाफ टी20 सीरीज में शानदार 3-0 की जीत दर्ज करने के बाद अब भारतीय क्रिकेट टीम की नजर अगले विदेशी दौरे पर है। करीब 15 दिन के ब्रेक के बाद टीम इंडिया श्रीलंका का दौरा करेगी जहां उसे दो मैचों की टेस्ट सीरीज खेलनी है। इस दौरे के साथ भारतीय टीम एक बार फिर लाल गेंद के क्रिकेट में मैदान पर उतरेगी। माना जा रहा है कि इस सीरीज के लिए टीम का ऐलान 28 जुलाई को किया जा सकता है।

    आईपीएल 2026 के बाद भारतीय टीम लगातार विदेशी दौरों पर व्यस्त रही है। सबसे पहले टीम ने आयरलैंड का दौरा किया जहां उसे सीरीज में हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद इंग्लैंड दौरे पर भी भारत वनडे और टी20 दोनों सीरीज जीतने में सफल नहीं रहा। हालांकि जिम्बाब्वे के खिलाफ शानदार प्रदर्शन करते हुए टीम इंडिया ने टी20 सीरीज 3-0 से अपने नाम कर आत्मविश्वास हासिल किया है।

    अब भारतीय टीम का अगला मुकाबला श्रीलंका से होगा। दोनों देशों के बीच दो टेस्ट मैचों की सीरीज खेली जाएगी। पहला टेस्ट 15 अगस्त से गॉल में शुरू होगा जबकि दूसरा टेस्ट 23 अगस्त से कोलंबो के एसएससी मैदान पर खेला जाएगा। श्रीलंका की घरेलू परिस्थितियों में स्पिन गेंदबाजी बड़ी भूमिका निभाती है इसलिए यह दौरा भारतीय टीम के लिए आसान नहीं माना जा रहा।

    श्रीलंका दौरे के बाद भारतीय खिलाड़ियों को लगभग एक महीने का आराम मिलेगा। इसके बाद सितंबर के आखिर में वेस्टइंडीज की टीम भारत दौरे पर आएगी। इस दौरे में तीन वनडे और पांच टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले जाएंगे। घरेलू मैदान पर होने वाली इस सीरीज में भारतीय टीम मजबूत प्रदर्शन के इरादे से उतरेगी।

    अक्टूबर तक टीम इंडिया का शेड्यूल
    15 अगस्त 2026 -पहला टेस्ट, श्रीलंका बनाम भारत, गॉल, सुबह 10 बजे
    23 अगस्त 2026 -दूसरा टेस्ट, श्रीलंका बनाम भारत, कोलंबो (SSC), सुबह 10 बजे

    वेस्टइंडीज का भारत दौर
    27 सितंबर 2026 -पहला वनडे, तिरुवनंतपुरम, दोपहर 2 बजे
    30 सितंबर 2026 -दूसरा वनडे, गुवाहाटी, दोपहर 2 बजे
    3 अक्टूबर 2026 -तीसरा वनडे, न्यू चंडीगढ़, दोपहर 2 बजे

    टी20 सीरी
    6 अक्टूबर 2026 -पहला टी20, लखनऊ, शाम 7 बजे
    9 अक्टूबर 2026  -दूसरा टी20, रांची, शाम 7 बजे
    11 अक्टूबर 2026  -तीसरा टी20, इंदौर, शाम 7 बजे
    14 अक्टूबर 2026 -चौथा टी20, हैदराबाद, शाम 7 बजे
    17 अक्टूबर 2026 -पांचवां टी20, बेंगलुरु, शाम 7 बजे

    भारतीय टीम के सामने अब लगातार चुनौतीपूर्ण मुकाबलों का सिलसिला है। श्रीलंका में टेस्ट सीरीज जीतने के बाद टीम घरेलू मैदान पर वेस्टइंडीज के खिलाफ सीमित ओवरों की सीरीज खेलेगी। ऐसे में आने वाले महीनों में क्रिकेट प्रशंसकों को लगातार रोमांचक मुकाबले देखने को मिलेंगे।

  • 5 साल बाद बांग्लादेश टेस्ट टीम में हिंदू क्रिकेटर की वापसी ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए अनुभवी सौम्य सरकार को मिला मौका

    5 साल बाद बांग्लादेश टेस्ट टीम में हिंदू क्रिकेटर की वापसी ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए अनुभवी सौम्य सरकार को मिला मौका


    नई दिल्ली । ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ होने वाली टेस्ट सीरीज से पहले बांग्लादेश क्रिकेट टीम ने अपनी टीम में बड़ा बदलाव करते हुए अनुभवी ऑलराउंडर सौम्य सरकार की टेस्ट टीम में वापसी कराई है। करीब पांच साल बाद लाल गेंद के क्रिकेट में उनकी वापसी हुई है। टीम प्रबंधन ने ऑस्ट्रेलियाई परिस्थितियों में उनके अनुभव को देखते हुए उन्हें टीम में शामिल किया है। सौम्य सरकार की वापसी ऐसे समय हुई है जब बांग्लादेश की टीम चोटिल खिलाड़ियों की समस्या से जूझ रही है।

    दरअसल तेज गेंदबाज नाहिद राणा और शोरीफुल इस्लाम चोट के कारण ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट सीरीज से बाहर हो गए हैं। दोनों खिलाड़ियों की गैरमौजूदगी से टीम का संतुलन प्रभावित हुआ जिसके बाद चयनकर्ताओं ने अनुभवी खिलाड़ियों पर भरोसा जताया। इसी क्रम में सौम्य सरकार को टेस्ट टीम में जगह दी गई है।

    सौम्य सरकार आखिरी बार बांग्लादेश के लिए वर्ष 2021 में वेस्टइंडीज के खिलाफ मीरपुर टेस्ट में खेलते नजर आए थे। इसके बाद वह लंबे समय तक टेस्ट टीम से बाहर रहे और उन्हें लाल गेंद के क्रिकेट में वापसी का इंतजार करना पड़ा। अब पांच साल बाद उन्हें फिर से टेस्ट टीम में अपनी जगह बनाने का मौका मिला है।

    सौम्य सरकार का सबसे बड़ा प्लस पॉइंट ऑस्ट्रेलियाई परिस्थितियों का अनुभव है। मौजूदा बांग्लादेशी टीम में शामिल खिलाड़ियों में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में सबसे ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले हैं। वह ऑस्ट्रेलिया की धरती पर आठ इंटरनेशनल मैच खेल चुके हैं। टीम प्रबंधन का मानना है कि उछाल और तेज पिचों पर उनका अनुभव युवा खिलाड़ियों के लिए भी उपयोगी साबित होगा।

    बांग्लादेश की टीम इस दौरे पर मजबूत ऑस्ट्रेलियाई टीम को कड़ी चुनौती देने की तैयारी में है। ऐसे में अनुभवी खिलाड़ियों की मौजूदगी टीम के लिए अहम मानी जा रही है। सौम्य सरकार के पास बल्लेबाजी के साथ जरूरत पड़ने पर गेंदबाजी करने की भी क्षमता है जिससे टीम को अतिरिक्त संतुलन मिलेगा।

    अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि लंबे अंतराल के बाद टेस्ट क्रिकेट में लौट रहे सौम्य सरकार अपने अनुभव का कितना फायदा उठा पाते हैं और ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीम के खिलाफ बांग्लादेश के प्रदर्शन में कितनी अहम भूमिका निभाते हैं।
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  • टी20 में नंबर-1 बनी टीम इंडिया, जिम्बाब्वे का किया क्लीन स्वीप, तीसरा मुकाबला 35 रन से जीता

    टी20 में नंबर-1 बनी टीम इंडिया, जिम्बाब्वे का किया क्लीन स्वीप, तीसरा मुकाबला 35 रन से जीता


    हरारे।
    भारतीय क्रिकेट टीम ने तीसरे और अंतिम टी20 मुकाबले में जिम्बाब्वे को 35 रन से हराकर तीन मैचों की श्रृंखला 3-0 से अपने नाम कर ली। हाल ही में आईसीसी टी20 रैंकिंग में दोबारा शीर्ष स्थान हासिल करने वाली टीम इंडिया ने इस जीत के साथ अपने शानदार फॉर्म को भी बरकरार रखा।

    टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत ने निर्धारित 20 ओवर में 192 रन बनाए। जवाब में जिम्बाब्वे की टीम 20 ओवर में 157 रन ही बना सकी और भारत ने मुकाबला 35 रन से जीत लिया।

    भारत की जीत के नायक युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी रहे। उन्होंने 49 गेंदों में 81 रन की शानदार पारी खेली और टीम को मजबूत स्कोर तक पहुंचाया। उनके सलामी जोड़ीदार अभिषेक शर्मा मात्र 02 रन बनाकर आउट हो गए। इसके बाद ईशान किशन ने 29 रन और कप्तान श्रेयस अय्यर ने 27 रन का योगदान दिया। अंतिम ओवरों में रिंकू सिंह ने 14 गेंदों पर 25 रनों की तेज पारी खेलकर टीम का स्कोर 192 तक पहुंचाया।

    लक्ष्य का पीछा करने उतरी जिम्बाब्वे की शुरुआत खराब रही। तेज गेंदबाज मयंक यादव ने पहले मैच की तरह इस बार भी पारी की पहली ही गेंद पर ब्रायन बेनेट को आउट कर भारत को शानदार शुरुआत दिलाई। मयंक ने अपनी तेज और सटीक गेंदबाजी से तीन विकेट झटके और विपक्षी बल्लेबाजों पर लगातार दबाव बनाए रखा।

    डेब्यू कर रहे अशोक शर्मा ने भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपना पहला विकेट हासिल किया। हालांकि, उनके स्पेल के दौरान एक आसान कैच छूट गया था, लेकिन बाद में उन्होंने तदिवानाशे मरुमानी को क्लीन बोल्ड कर अपने करियर का पहला अंतरराष्ट्रीय विकेट दर्ज किया।

    हालांकि भारतीय टीम की फील्डिंग उम्मीद के अनुरूप नहीं रही और खिलाड़ियों ने कई आसान कैच छोड़े, फिर भी गेंदबाजों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए जिम्बाब्वे को लक्ष्य तक नहीं पहुंचने दिया।

    यह सीरीज जीत भारत के लिए इसलिए भी खास रही क्योंकि हाल ही में टीम ने आईसीसी टी20 रैंकिंग में फिर से दुनिया की नंबर-1 टीम का स्थान हासिल किया है। आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज हारने के बाद भारत शीर्ष स्थान से नीचे खिसक गया था, लेकिन जिम्बाब्वे के खिलाफ लगातार तीन जीत के दम पर उसने एक बार फिर शीर्ष स्थान पर कब्जा मजबूत कर लिया।

    इस शानदार जीत के साथ टीम इंडिया ने न केवल श्रृंखला में क्लीन स्वीप किया, बल्कि आगामी अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों के लिए भी अपना आत्मविश्वास और मनोबल मजबूत किया।

  • अदाणी अहमदाबाद मैराथन का 10वां संस्करण 29 नवंबर को, 'रन फॉर सोल्जर्स' थीम के साथ शुरू हुए रजिस्ट्रेशन

    अदाणी अहमदाबाद मैराथन का 10वां संस्करण 29 नवंबर को, 'रन फॉर सोल्जर्स' थीम के साथ शुरू हुए रजिस्ट्रेशन


    नई दिल्ली । अदाणी स्पोर्ट्सलाइन ने कारगिल विजय दिवस के अवसर पर अहमदाबाद मैराथन के 10वें संस्करण की आधिकारिक घोषणा करते हुए इसके लिए पंजीकरण प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह प्रतिष्ठित मैराथन 29 नवंबर 2026 को आयोजित होगी। इस बार भी आयोजन की लोकप्रिय थीम ‘रन फॉर सोल्जर्स’ को बरकरार रखा गया है, जिसके जरिए भारतीय सशस्त्र बलों के साहस, समर्पण और बलिदान को सम्मान दिया जाएगा। आयोजन का उद्देश्य केवल दौड़ तक सीमित नहीं है, बल्कि फिटनेस, सामाजिक सहभागिता और देशभक्ति की भावना को भी मजबूत करना है।

    पिछले दस वर्षों में अदाणी अहमदाबाद मैराथन देश की प्रमुख रोड रनिंग प्रतियोगिताओं में अपनी खास पहचान बना चुकी है। इस आयोजन में अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर के धावकों के साथ-साथ हजारों शौकिया रनर्स, फिटनेस प्रेमी और परिवार भी हिस्सा लेते हैं। समय के साथ यह मैराथन केवल एक खेल आयोजन नहीं रही, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने और समाज को खेलों से जोड़ने वाला एक बड़ा सामुदायिक अभियान बन गई है।

    पिछले संस्करण में 24 हजार से अधिक प्रतिभागियों ने मैराथन में हिस्सा लिया था, जिसने इसकी लोकप्रियता को नई ऊंचाई दी। वर्ष 2022 से यह आयोजन एसोसिएशन ऑफ इंटरनेशनल मैराथन एंड डिस्टेंस रेस की वैश्विक मैराथन सूची में शामिल है। इसके अलावा मैराथन के सभी रूट एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया से प्रमाणित हैं, जिससे इसकी विश्वसनीयता और प्रतिस्पर्धात्मक स्तर और मजबूत हुआ है।

    इस वर्ष भी मैराथन की शुरुआत साबरमती रिवरफ्रंट स्पोर्ट्स पार्क से होगी। प्रतिभागियों को दौड़ के दौरान साबरमती रिवरफ्रंट के खूबसूरत नजारों के साथ अहमदाबाद के कई प्रमुख स्थलों से गुजरने का अवसर मिलेगा। आयोजकों का मानना है कि यह अनुभव खिलाड़ियों और प्रतिभागियों के लिए यादगार साबित होगा।

    मैराथन में धावकों के लिए चार अलग-अलग श्रेणियां रखी गई हैं, ताकि हर आयु वर्ग और फिटनेस स्तर के लोग इसमें भाग ले सकें। इनमें 42.195 किलोमीटर की फुल मैराथन, 21.097 किलोमीटर की हाफ मैराथन, 10 किलोमीटर रन और 5 किलोमीटर रन शामिल हैं। सभी श्रेणियों के लिए ऑनलाइन पंजीकरण शुरू हो चुके हैं।

    अदाणी स्पोर्ट्सलाइन के चीफ बिजनेस ऑफिसर संजय अदेसारा ने कहा कि 10वां संस्करण गुजरात में मजबूत रनिंग संस्कृति विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने बताया कि शुरुआत में इसका उद्देश्य लोगों को दौड़ने और फिट रहने के लिए प्रेरित करना था, लेकिन आज यह राज्य के सबसे बड़े सामुदायिक खेल आयोजनों में शामिल हो चुका है। उन्होंने कहा कि कारगिल विजय दिवस पर पंजीकरण शुरू करना इस आयोजन को और अधिक विशेष बनाता है। ‘रन फॉर सोल्जर्स’ के माध्यम से हर प्रतिभागी भारतीय सैनिकों के अदम्य साहस और बलिदान को सम्मान देने के लिए दौड़ेगा।

    आयोजकों को उम्मीद है कि इस बार भी देशभर से बड़ी संख्या में धावक हिस्सा लेंगे और अहमदाबाद एक बार फिर फिटनेस, खेल भावना और देशभक्ति के रंग में रंगा नजर आएगा।

  • कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय महिला लॉन बॉल्स टीम को पहला झटका, अब इंग्लैंड के खिलाफ करो या मरो की टक्कर

    कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय महिला लॉन बॉल्स टीम को पहला झटका, अब इंग्लैंड के खिलाफ करो या मरो की टक्कर


    नई दिल्ली । कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय महिला लॉन बॉल्स टीम का लगातार जीत का सिलसिला आखिरकार थम गया। महिला पेयर्स स्पर्धा के ग्रुप-बी मुकाबले में भारत की रूपा रानी टिर्की और पिंकी सिंह को नामीबिया की अमांडा स्टीनकम्प और डायना विल्जोएन के खिलाफ बेहद रोमांचक मुकाबले में टाई-ब्रेक के बाद हार का सामना करना पड़ा। हालांकि यह हार भारतीय टीम के अभियान का अंत नहीं है। ग्रुप की स्थिति ऐसी बनी हुई है कि भारत के पास अब भी नॉकआउट चरण में पहुंचने का सुनहरा मौका है।

    भारतीय जोड़ी ने मुकाबले की शुरुआत शानदार अंदाज में की और पहले ही एंड से अपना दबदबा कायम कर लिया। रूपा रानी टिर्की की सटीक गेंदबाजी और पिंकी सिंह की बेहतरीन रणनीति के दम पर भारत ने शुरुआती दो एंड में पांच अंक जुटाकर 5-0 की मजबूत बढ़त बना ली। दोनों खिलाड़ियों के तालमेल ने नामीबिया की टीम पर लगातार दबाव बनाए रखा और ऐसा लग रहा था कि भारत आसानी से पहला सेट अपने नाम कर लेगा।

    लेकिन तीसरे एंड से मुकाबले की तस्वीर बदलने लगी। नामीबिया ने धीरे-धीरे वापसी की और लगातार अंक बटोरते हुए भारतीय बढ़त को कम कर दिया। अमांडा स्टीनकम्प और डायना विल्जोएन ने शानदार खेल दिखाते हुए पहले स्कोर 5-4 किया और फिर पांचवें एंड में तीन अंक हासिल कर पहला सेट 7-5 से जीत लिया। भारतीय टीम शुरुआती बढ़त का फायदा बरकरार नहीं रख सकी और नामीबिया ने मैच में वापसी कर ली।

    पहला सेट गंवाने के बाद भारतीय खिलाड़ियों ने दूसरे सेट में जबरदस्त जवाब दिया। रूपा और पिंकी ने आक्रामक खेल दिखाते हुए शुरुआत से ही मुकाबले पर नियंत्रण बना लिया। भारतीय जोड़ी ने लगातार अंक जुटाकर 7-0 की बढ़त बनाई और नामीबिया को वापसी का कोई मौका नहीं दिया। पिंकी सिंह के शानदार शॉट्स और रूपा की सटीक गेंदों की बदौलत भारत ने दूसरा सेट 10-1 से अपने नाम कर मुकाबले को निर्णायक टाई-ब्रेक तक पहुंचा दिया।

    टाई-ब्रेक में दोनों टीमों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली। हर गेंद के साथ रोमांच बढ़ता गया और मुकाबला अंतिम क्षणों तक बराबरी का बना रहा। भारत को जीत के लिए आखिरी गेंद पर सटीक निशाना लगाने की जरूरत थी, लेकिन पिंकी सिंह की अंतिम कोशिश लक्ष्य से थोड़ा आगे निकल गई। इसका फायदा उठाते हुए नामीबिया ने टाई-ब्रेक 3-0 से जीत लिया और मुकाबला अपने नाम कर लिया।

    हालांकि हार के बावजूद भारतीय टीम के लिए राहत की खबर भी आई। ग्रुप-बी के दूसरे मुकाबले में इंग्लैंड को दक्षिण अफ्रीका के हाथों टाई-ब्रेक में हार का सामना करना पड़ा। इस परिणाम से भारत की नॉकआउट दौर में पहुंचने की उम्मीद बरकरार है। अब भारत और इंग्लैंड के बीच होने वाला अंतिम ग्रुप मुकाबला दोनों टीमों के लिए निर्णायक साबित होगा। इस मुकाबले में जीत दर्ज करने वाली टीम अगले चरण में जगह बनाएगी।

    अब भारतीय महिला लॉन बॉल्स टीम के सामने करो या मरो की चुनौती है। रूपा रानी टिर्की और पिंकी सिंह से उम्मीद होगी कि वे इस हार को पीछे छोड़ते हुए निर्णायक मुकाबले में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करें और भारत को कॉमनवेल्थ गेम्स के नॉकआउट चरण तक पहुंचाएं।

  • कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले नीरज का दमदार संदेश, कहा- विदेशी खिलाड़ियों से अब नहीं घबराते भारतीय

    कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले नीरज का दमदार संदेश, कहा- विदेशी खिलाड़ियों से अब नहीं घबराते भारतीय


    नई दिल्ली । भारत के स्टार जैवलिन थ्रोअर और ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 से पहले भारतीय खिलाड़ियों के बढ़ते आत्मविश्वास को देश के खेलों के लिए सबसे बड़ा बदलाव बताया है। ग्लासगो पहुंचने के बाद मीडिया से बातचीत में नीरज ने कहा कि अब भारतीय खिलाड़ी विदेशी एथलीटों से डरते नहीं हैं, बल्कि पूरी मजबूती और आत्मविश्वास के साथ मुकाबला करते हैं। उनका मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में भारतीय खेलों की तस्वीर बदली है और इसका सबसे बड़ा कारण खिलाड़ियों का मानसिक रूप से मजबूत होना है।

    नीरज ने कहा कि पहले भारतीय खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में विदेशी खिलाड़ियों को खुद से बेहतर मान लेते थे। इससे प्रदर्शन पर भी असर पड़ता था, लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। आज भारतीय एथलीट कड़ी मेहनत, आधुनिक प्रशिक्षण और बेहतर तैयारी के दम पर दुनिया के किसी भी खिलाड़ी को चुनौती देने का माद्दा रखते हैं। यही आत्मविश्वास अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की सफलता की सबसे बड़ी ताकत बन रहा है।

    कॉमनवेल्थ गेम्स में अपनी तैयारियों को लेकर नीरज ने कहा कि ग्लासगो की ठंडी हवाएं और मौसम निश्चित रूप से चुनौतीपूर्ण हैं, लेकिन ये परिस्थितियां सभी खिलाड़ियों के लिए समान हैं। ऐसे में मौसम को बहाना बनाने के बजाय मानसिक रूप से मजबूत रहना ज्यादा जरूरी है। उनका कहना है कि किसी भी कठिन परिस्थिति में यह सोचना चाहिए कि उसमें अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कैसे किया जाए।

    उन्होंने कहा कि किसी भी प्रतियोगिता में उनका लक्ष्य केवल पदक जीतना नहीं होता, बल्कि अपनी तकनीक और रणनीति को पूरी तरह लागू करना होता है। यदि खिलाड़ी मैदान पर अपना शत-प्रतिशत दे देता है तो परिणाम अपने आप बेहतर आते हैं। नीरज ने कहा कि वह हर बार भारत की जर्सी पहनकर मैदान में उतरते हैं तो वह प्रतियोगिता उनके लिए खास बन जाती है और इस बार भी उनका प्रयास देश के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने का रहेगा।

    फिटनेस को लेकर नीरज ने भरोसा जताया कि वह पहले की तुलना में बेहतर स्थिति में हैं। उन्होंने बताया कि विश्व चैंपियनशिप और दोहा प्रतियोगिता के बाद उन्होंने अपनी कमजोरियों पर लगातार काम किया है। अब वह खुद को पहले से ज्यादा फिट और तैयार महसूस कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कॉमनवेल्थ गेम्स के तुरंत बाद एशियन गेम्स होने हैं, इसलिए लगातार फिट रहना और प्रदर्शन में निरंतरता बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है।

    90 मीटर से ज्यादा का थ्रो करने के बाद हर प्रतियोगिता में उसी प्रदर्शन को दोहराने के दबाव के सवाल पर नीरज ने कहा कि उनका ध्यान किसी एक दूरी पर नहीं रहता। उनका लक्ष्य हर बार अपने पिछले प्रदर्शन से बेहतर करना और दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों के बीच अपनी पहचान मजबूत बनाए रखना है। उन्होंने स्वीकार किया कि ग्लासगो में मुकाबला बेहद कठिन होगा क्योंकि यहां ओलंपिक, कॉमनवेल्थ और डायमंड लीग के कई चैंपियन खिलाड़ी मौजूद हैं, लेकिन वह पूरी तैयारी और आत्मविश्वास के साथ मैदान में उतरेंगे।

    नीरज चोपड़ा ने खिलाड़ियों को मिल रहे सरकारी सहयोग की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में प्रशिक्षण, विदेशों में अभ्यास और अन्य सुविधाओं में काफी सुधार हुआ है। इससे भारतीय खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में बड़ी मदद मिली है। उनका मानना है कि यदि यही समर्थन और तैयारी आगे भी जारी रही तो भारतीय खिलाड़ी आने वाले वर्षों में वैश्विक खेल मंच पर और अधिक बड़ी सफलताएं हासिल करेंगे।

  • कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत को दूसरी बड़ी सफलता, ऋषिकांत सिंह ने रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन के साथ जीता सिल्वर मेडल

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत को दूसरी बड़ी सफलता, ऋषिकांत सिंह ने रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन के साथ जीता सिल्वर मेडल


    नई दिल्ली । कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। रविवार को वेटलिफ्टिंग में भारत को एक और बड़ी सफलता मिली जब युवा वेटलिफ्टर ऋषिकांत सिंह चनंबम ने पुरुषों की 60 किलोग्राम स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। ऋषिकांत ने कुल 264 किलोग्राम वजन उठाते हुए पोडियम पर दूसरा स्थान हासिल किया। उनके शानदार प्रदर्शन से भारत की पदक तालिका में दूसरा पदक जुड़ गया और खेल प्रेमियों को एक और जश्न मनाने का मौका मिला।

    प्रतियोगिता के स्नैच राउंड में ऋषिकांत का प्रदर्शन बेहद शानदार रहा। उन्होंने अपने पहले प्रयास में 116 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाया। इसके बाद दूसरे प्रयास में 119 किलोग्राम और तीसरे प्रयास में 121 किलोग्राम वजन उठाकर सभी प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़ दिया। 121 किलोग्राम का सफल प्रयास उनके लिए ऐतिहासिक साबित हुआ क्योंकि इसके साथ उन्होंने स्नैच वर्ग में नया कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। इस प्रदर्शन ने उन्हें गोल्ड मेडल की मजबूत दावेदारी में ला खड़ा किया।

    क्लीन एंड जर्क राउंड में भी ऋषिकांत ने आत्मविश्वास के साथ शुरुआत की और पहले ही प्रयास में 143 किलोग्राम वजन उठाकर अपनी स्थिति मजबूत कर ली। इसके बाद उन्होंने 148 किलोग्राम वजन उठाने का प्रयास किया लेकिन सफलता नहीं मिली। इसी दौरान मलेशिया के मोहम्मद अनिक ने 149 किलोग्राम वजन उठाकर बढ़त हासिल कर ली।

    गोल्ड मेडल जीतने की उम्मीद बनाए रखने के लिए ऋषिकांत ने अंतिम प्रयास में 151 किलोग्राम वजन उठाने की चुनौती स्वीकार की। उन्होंने वजन को कंधों तक सफलतापूर्वक पहुंचा भी दिया लेकिन अंतिम जर्क पूरा नहीं कर सके। इसी के साथ उनका कुल स्कोर 264 किलोग्राम पर रुक गया और उन्हें सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा।

    मलेशिया के मोहम्मद अनिक ने कुल 273 किलोग्राम वजन उठाकर नया कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड बनाया और स्वर्ण पदक अपने नाम किया। वहीं केन्या के जोशुआ अमूंगा मबोया ने 260 किलोग्राम वजन उठाकर कांस्य पदक हासिल किया।

    ऋषिकांत सिंह का यह प्रदर्शन भारत के लिए बेहद अहम रहा। उन्होंने न केवल सिल्वर मेडल जीतकर देश का मान बढ़ाया बल्कि स्नैच में गेम्स रिकॉर्ड बनाकर अपनी प्रतिभा का भी शानदार परिचय दिया। शुरुआती दिनों में ही भारतीय खिलाड़ियों के दमदार प्रदर्शन से कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के पदकों की उम्मीदें और मजबूत हो गई हैं।

    फिलहाल भारत के खाते में एक सिल्वर और एक ब्रॉन्ज मेडल दर्ज हैं और देश पदक तालिका में 10वें स्थान पर है। ऑस्ट्रेलिया शीर्ष स्थान पर बना हुआ है जबकि इंग्लैंड और नाइजीरिया क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। आने वाले मुकाबलों में भारतीय खिलाड़ियों से और पदकों की उम्मीद की जा रही है।

  • शतक छोड़ टीम को चुना, ईशान किशन बोले व्यक्तिगत रिकॉर्ड नहीं भारत की जीत सबसे बड़ी प्राथमिकता

    शतक छोड़ टीम को चुना, ईशान किशन बोले व्यक्तिगत रिकॉर्ड नहीं भारत की जीत सबसे बड़ी प्राथमिकता


    नई दिल्ली । जिम्बाब्वे के खिलाफ दूसरे टी20 मुकाबले में विस्फोटक बल्लेबाजी करने वाले भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज ईशान किशन ने अपनी निस्वार्थ सोच से क्रिकेट प्रेमियों का दिल जीत लिया। 44 गेंदों में 81 रन की शानदार पारी खेलने वाले ईशान शतक से केवल 19 रन दूर रह गए थे लेकिन उन्होंने साफ कहा कि उनके दिमाग में व्यक्तिगत रिकॉर्ड नहीं बल्कि टीम के लिए अधिक से अधिक रन बनाने की सोच थी। उनका मानना है कि किसी भी खिलाड़ी के लिए टीम की जरूरत हमेशा व्यक्तिगत उपलब्धि से बड़ी होती है।

    हरारे में खेले गए मुकाबले में ईशान ने शुरुआत से ही आक्रामक अंदाज अपनाया। उन्होंने अपनी पारी में 9 चौके और 2 छक्के लगाए और भारत को मजबूत स्कोर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। उनकी शानदार बल्लेबाजी की बदौलत टीम इंडिया ने निर्धारित 20 ओवर में 5 विकेट पर 219 रन बनाए। जवाब में जिम्बाब्वे की पूरी टीम 129 रन पर सिमट गई और भारत ने 90 रन की बड़ी जीत दर्ज करते हुए तीन मैचों की टी20 सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त बना ली।

    मैच के बाद ईशान किशन ने कहा कि उनके पास थोड़ा धीमा खेलकर अपना शतक पूरा करने का मौका था लेकिन उन्होंने ऐसा करने के बारे में कभी नहीं सोचा। उनका लक्ष्य हर गेंद पर सकारात्मक क्रिकेट खेलना और टीम के स्कोर को अधिकतम स्तर तक पहुंचाना था। उन्होंने कहा कि टीम की सफलता सबसे बड़ी प्राथमिकता है और अगर तेज बल्लेबाजी करते हुए विकेट भी गंवाना पड़े तो वह टीम के हित में स्वीकार्य है।

    ईशान ने अपनी शानदार पारी का श्रेय तिलक वर्मा को भी दिया जिन्होंने केवल 29 गेंदों में नाबाद 60 रन बनाकर भारत की रन गति को लगातार बनाए रखा। दोनों बल्लेबाजों ने चौथे विकेट के लिए 94 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी की जिसने मुकाबले का रुख पूरी तरह भारत के पक्ष में मोड़ दिया। ईशान ने कहा कि तिलक ने क्रीज पर आते ही बिना समय गंवाए आक्रामक बल्लेबाजी शुरू कर दी जिससे उन्हें भी खुलकर खेलने का आत्मविश्वास मिला।

    उन्होंने यह भी बताया कि हरारे की पिच उतनी आसान नहीं थी जितनी स्कोरबोर्ड देखकर लग रही थी। गेंद कभी उछाल ले रही थी तो कभी नीचे रह रही थी। ऐसे में दोनों बल्लेबाज लगातार एक दूसरे से बातचीत करते रहे और परिस्थितियों के अनुसार अपनी रणनीति बनाते रहे। यही समझदारी बड़ी साझेदारी और विशाल स्कोर की वजह बनी।

    ईशान किशन ने मैच के दौरान स्टेडियम में मौजूद भारतीय प्रशंसकों का भी विशेष आभार जताया। उन्होंने कहा कि जिम्बाब्वे में भी भारतीय टीम को घरेलू मैदान जैसा समर्थन मिला। बड़ी संख्या में पहुंचे दर्शकों ने खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया और यही वजह रही कि पूरी टीम ने मुकाबले का भरपूर आनंद लिया। उन्होंने कहा कि ऐसे समर्थकों के साथ तस्वीरें खिंचवाना और उनसे मिलना हमेशा खास अनुभव होता है।

    ईशान की यह पारी केवल रन बनाने तक सीमित नहीं रही बल्कि इसने यह भी दिखाया कि टीम की सफलता को व्यक्तिगत उपलब्धियों से ऊपर रखने वाला खिलाड़ी ही बड़े मंच पर असली मैच विजेता बनता है।

  • सपना हुआ सच, भारत की पहली जूनियर स्क्वैश वर्ल्ड चैंपियन बनीं अनाहत सिंह, बोलीं यह खिताब मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा पल

    सपना हुआ सच, भारत की पहली जूनियर स्क्वैश वर्ल्ड चैंपियन बनीं अनाहत सिंह, बोलीं यह खिताब मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा पल


    नई दिल्ली । मभारत की युवा स्क्वैश खिलाड़ी अनाहत सिंह ने वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप का खिताब जीतकर इतिहास रच दिया है। इस उपलब्धि के साथ वह यह प्रतिष्ठित खिताब जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गई हैं। कनाडा के ओंटारियो में मिली इस ऐतिहासिक जीत के बाद अनाहत की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। भावुक अंदाज में उन्होंने कहा कि उन्हें अब भी यकीन नहीं हो रहा कि उनका सपना सच हो चुका है और उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है जैसे वह अब भी किसी सपने में हों।

    18 वर्षीय अनाहत सिंह के लिए यह जीत इसलिए भी बेहद खास रही क्योंकि जूनियर वर्ग में यह उनका आखिरी वर्ष था। पिछले चार वर्षों से वह इस प्रतियोगिता में लगातार क्वार्टर फाइनल और सेमीफाइनल तक पहुंचने के बावजूद खिताब से दूर रह जाती थीं। कई बार निराशा हाथ लगने के बाद उन्होंने मजाक में इस टूर्नामेंट को अपने लिए श्राप तक बता दिया था लेकिन इस बार उन्होंने अपनी मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर सारी बाधाएं तोड़ दीं।

    खिताब जीतने के बाद अनाहत ने कहा कि पिछले कई वर्षों से वह इस टूर्नामेंट में आगे बढ़ने के बावजूद अंतिम सफलता हासिल नहीं कर पाई थीं। उन्हें पता था कि जूनियर करियर में यह उनका आखिरी मौका है इसलिए उन्होंने खुद पर किसी तरह का दबाव नहीं बनने दिया। उनका लक्ष्य सिर्फ अपना स्वाभाविक खेल खेलना और फाइनल के हर पल का आनंद लेना था। यही सोच उन्हें विश्व चैंपियन बनाने में सबसे बड़ी ताकत साबित हुई।

    अनाहत ने फाइनल मुकाबले में मिस्र की दूसरी वरीयता प्राप्त खिलाड़ी रुकैया सलेम को सीधे गेमों में 11-3 11-7 और 11-9 से हराकर खिताब अपने नाम किया। पूरे टूर्नामेंट में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए एक भी मौके पर अपने आत्मविश्वास को कमजोर नहीं पड़ने दिया। इससे पहले उन्होंने सेमीफाइनल में भी दमदार जीत दर्ज कर 21 साल बाद वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय बनने का गौरव हासिल किया था।

    स्क्वैश रैकेट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के महासचिव साइरस पोंचा ने अनाहत की इस उपलब्धि को भारतीय स्क्वैश के इतिहास का स्वर्णिम क्षण बताया। उन्होंने कहा कि अनाहत में विश्व स्तर पर लंबे समय तक देश का नाम रोशन करने की क्षमता है। उनके अनुसार भारतीय स्क्वैश के लिए व्यक्तिगत वर्ग में विश्व चैंपियन तैयार करने का सपना अब आखिरकार पूरा हो गया है।

    अनाहत सिंह की यह ऐतिहासिक जीत भारतीय स्क्वैश के लिए नई उम्मीद लेकर आई है। वर्ष 2028 के ओलंपिक में स्क्वैश के शामिल होने से पहले यह उपलब्धि देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। युवा खिलाड़ियों के लिए अनाहत का सफर इस बात का उदाहरण है कि लगातार असफलताओं के बावजूद अगर हौसला और मेहनत कायम रहे तो सपने जरूर सच होते हैं।

  • भारतीय स्क्वैश के लिए ऐतिहासिक दिन अनाहत सिंह ने जीता विश्व जूनियर खिताब टूटा मिस्र का 13 साल का दबदबा

    भारतीय स्क्वैश के लिए ऐतिहासिक दिन अनाहत सिंह ने जीता विश्व जूनियर खिताब टूटा मिस्र का 13 साल का दबदबा


    नई दिल्ली। भारतीय स्क्वैश को विश्व मंच पर एक नई पहचान दिलाते हुए 18 वर्षीय अनाहत सिंह ने ऐसा इतिहास रच दिया है जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा। कनाडा के ओंटारियो में आयोजित वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप के महिला सिंगल्स का खिताब जीतकर अनाहत इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता की चैंपियन बनने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गई हैं। उनकी इस शानदार उपलब्धि पर पूरे देश में खुशी की लहर है और केंद्रीय युवा मामले एवं खेल मंत्री डॉ मनसुख मांडविया ने भी उन्हें विशेष बधाई देते हुए इसे भारतीय खेल इतिहास का गौरवपूर्ण पल बताया है।

    फाइनल मुकाबले में भारत की शीर्ष वरीयता प्राप्त खिलाड़ी और विश्व रैंकिंग में 20वें स्थान पर मौजूद अनाहत सिंह ने मिस्र की दूसरी वरीयता प्राप्त खिलाड़ी रुकैया सलेम को एकतरफा मुकाबले में 11-3 11-7 और 11-9 से हराकर खिताब अपने नाम किया। पूरे मैच के दौरान अनाहत ने शानदार तकनीक आत्मविश्वास और आक्रामक खेल का प्रदर्शन किया। उन्होंने शुरुआत से ही मुकाबले पर अपना नियंत्रण बनाए रखा और प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी को वापसी का कोई बड़ा मौका नहीं दिया।

    इस ऐतिहासिक जीत के बाद केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने सोशल मीडिया पर अनाहत की उपलब्धि की सराहना करते हुए लिखा कि इतिहास रच दिया गया है। उन्होंने कहा कि वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप जीतने वाली पहली भारतीय बनने पर अनाहत सिंह को हार्दिक बधाई। यह केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता नहीं बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का क्षण है और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा भी है।

    अनाहत की इस जीत ने भारतीय स्क्वैश के कई वर्षों के इंतजार को भी समाप्त कर दिया। वर्ष 2005 में जोशना चिनप्पा के बाद पहली बार कोई भारतीय महिला खिलाड़ी इस प्रतियोगिता के फाइनल में पहुंची और अब 21 साल बाद भारत को इस प्रतियोगिता का चैंपियन भी मिला है। इसके साथ ही मिस्र के खिलाड़ियों का 13 वर्षों से चला आ रहा दबदबा भी समाप्त हो गया जो इस उपलब्धि को और भी खास बना देता है।

    स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया और स्क्वैश रैकेट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ने भी अनाहत की इस सफलता को भारतीय स्क्वैश के लिए ऐतिहासिक मोड़ बताया है। अधिकारियों का मानना है कि 2028 ओलंपिक में स्क्वैश को शामिल किए जाने से पहले यह जीत भारतीय खिलाड़ियों के आत्मविश्वास को नई ऊंचाई देगी और देश में इस खेल की लोकप्रियता भी बढ़ाएगी।

    अनाहत सिंह ने फाइनल से पहले सेमीफाइनल में भी शानदार प्रदर्शन किया था। उन्होंने मिस्र की बारब सामेह को चार गेम तक चले मुकाबले में हराकर फाइनल में जगह बनाई थी। इसी जीत के साथ वह 21 वर्षों बाद विश्व जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी भी बनी थीं। इसके बाद फाइनल में भी उन्होंने अपना शानदार फॉर्म बरकरार रखा और विश्व चैंपियन बनने का सपना साकार कर लिया।

    अनाहत की इस उपलब्धि का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि वह वर्ष 2010 में अमेरिका की अमांडा सोभी के बाद वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप जीतने वाली पहली गैर मिस्र खिलाड़ी भी बन गई हैं। उनकी यह सफलता भारतीय खेल जगत के लिए नई उम्मीद और नई प्रेरणा लेकर आई है। अब देश को उम्मीद है कि अनाहत आने वाले वर्षों में सीनियर स्तर पर भी भारत के लिए कई अंतरराष्ट्रीय खिताब जीतकर तिरंगे का मान बढ़ाएंगी।