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  • कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के लिए पीएम मोदी का भारतीय दल को संदेश, कहा- खिलाड़ियों का जज्बा देश को नई प्रेरणा देगा

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के लिए पीएम मोदी का भारतीय दल को संदेश, कहा- खिलाड़ियों का जज्बा देश को नई प्रेरणा देगा

    नई दिल्ली । कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के शुभारंभ के साथ भारत ने भी अपने अभियान की शुरुआत कर दी है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय दल को शुभकामनाएं देते हुए विश्वास जताया कि देश के खिलाड़ी पूरे जोश, दृढ़ संकल्प और उत्कृष्ट प्रदर्शन के साथ प्रतियोगिता में उतरेंगे। उन्होंने कहा कि भारतीय एथलीट केवल पदक जीतने के लिए ही नहीं, बल्कि अपने अनुशासन, मेहनत और समर्पण से देश के करोड़ों लोगों को प्रेरित करने के लिए भी पहचाने जाते हैं। प्रधानमंत्री का यह संदेश ऐसे समय आया है जब भारतीय खेल जगत की निगाहें ग्लासगो में होने वाले मुकाबलों पर टिकी हैं।

    प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि भारतीय खिलाड़ियों की प्रतिभा और कठिन परिश्रम हमेशा देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस बार भी भारतीय दल खेल भावना का परिचय देते हुए शानदार प्रदर्शन करेगा और अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगे का मान बढ़ाएगा। उनके संदेश को खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों के लिए उत्साहवर्धक माना जा रहा है।

    स्कॉटलैंड के ग्लासगो शहर में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का उद्घाटन रंगारंग समारोह के साथ हुआ। उद्घाटन की औपचारिक घोषणा किंग चार्ल्स तृतीय ने की। वर्ष 2014 के बाद दूसरी बार ग्लासगो इस बहु-खेल प्रतियोगिता की मेजबानी कर रहा है। उद्घाटन समारोह में विभिन्न देशों के खिलाड़ियों ने परेड ऑफ नेशंस में भाग लिया और अपनी सांस्कृतिक पहचान का प्रदर्शन किया।

    भारतीय दल की अगुवाई इस बार ओलंपिक पदक विजेता मीराबाई चानू और मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन ने की। मीराबाई चानू ने हाथों में तिरंगा लेकर भारतीय खिलाड़ियों का नेतृत्व किया, जबकि लवलीना बोरगोहेन ने कॉमनवेल्थ बैटन के साथ समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व किया। दोनों खिलाड़ियों की मौजूदगी ने भारतीय दल का उत्साह और बढ़ा दिया।

    भारत ने इस बार 126 सदस्यीय दल भेजा है, जो पैरा स्पोर्ट्स सहित 13 खेलों में चुनौती पेश करेगा। भारतीय खिलाड़ियों का लक्ष्य कॉमनवेल्थ खेलों में अपने मजबूत प्रदर्शन की परंपरा को आगे बढ़ाना है। प्रतियोगिता के शुरुआती चरण में ही भारत का अभियान शुरू हो चुका है और कुछ खिलाड़ियों ने प्रभावशाली शुरुआत भी की है। मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन पहले ही सेमीफाइनल में पहुंचकर भारत के लिए एक पदक सुनिश्चित कर चुकी हैं, जिससे दल का आत्मविश्वास बढ़ा है।

    भारत की पदक उम्मीदें कई अनुभवी और स्टार खिलाड़ियों पर टिकी हैं। भाला फेंक में नीरज चोपड़ा, वेटलिफ्टिंग में मीराबाई चानू और मुक्केबाजी में लवलीना बोरगोहेन से शानदार प्रदर्शन की अपेक्षा की जा रही है। इनके अलावा कई युवा खिलाड़ी भी पहली बार बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए तैयार हैं। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारतीय खिलाड़ी अपनी क्षमता के अनुरूप प्रदर्शन करते हैं तो इस बार भी पदक तालिका में भारत मजबूत स्थान हासिल कर सकता है।

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 74 देशों और क्षेत्रों के खिलाड़ी 11 दिनों तक विभिन्न खेलों में प्रतिस्पर्धा करेंगे। यह आयोजन न केवल खिलाड़ियों के कौशल की परीक्षा है, बल्कि खेल भावना, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का भी महत्वपूर्ण मंच माना जाता है। भारतीय दल का लक्ष्य बेहतर प्रदर्शन के साथ देश का गौरव बढ़ाना और वैश्विक खेल मंच पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराना रहेगा।

  • 41 की उम्र में भी नहीं थमे लुका मोड्रिक! एसी मिलान के साथ एक साल और बढ़ाया करार

    41 की उम्र में भी नहीं थमे लुका मोड्रिक! एसी मिलान के साथ एक साल और बढ़ाया करार


    नई दिल्ली । विश्व फुटबॉल के महान मिडफील्डरों में शुमार लुका मोड्रिक ने उम्र को एक बार फिर चुनौती देते हुए अपने पेशेवर करियर को एक और साल आगे बढ़ाने का फैसला किया है। क्रोएशिया के अनुभवी स्टार ने इटली के प्रतिष्ठित क्लब एसी मिलान के साथ अपना अनुबंध बढ़ा लिया है। क्लब ने आधिकारिक घोषणा करते हुए बताया कि मोड्रिक अब 30 जून 2027 तक एसी मिलान का हिस्सा बने रहेंगे।

    सितंबर में 41 वर्ष के होने जा रहे मोड्रिक ने पिछले साल 13 वर्षों तक रियल मैड्रिड के लिए ऐतिहासिक सफर तय करने के बाद एसी मिलान का रुख किया था। उनका पहला अनुबंध 30 जून 2026 तक था, जिसे अब एक और वर्ष के लिए बढ़ा दिया गया है।

    एसी मिलान के लिए अपने पहले सीजन में मोड्रिक ने 37 मुकाबलों में हिस्सा लिया और दो गोल भी किए। हालांकि, टीम का प्रदर्शन उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा। क्लब सेरी ए में पांचवें स्थान पर रहा, जबकि कोपा इटालिया में अंतिम-16 चरण से आगे नहीं बढ़ सका। इसके बावजूद क्लब प्रबंधन ने मोड्रिक के अनुभव, नेतृत्व क्षमता और मिडफील्ड में उनके योगदान को देखते हुए उन पर भरोसा कायम रखा।

    फीफा विश्व कप 2026 से पहले मोड्रिक ने संकेत दिए थे कि टूर्नामेंट के बाद वह अपने भविष्य पर फैसला करेंगे। हालांकि, विश्व कप में क्रोएशिया के राउंड ऑफ-32 से बाहर होने के बाद भी उन्होंने संन्यास लेने के बजाय क्लब फुटबॉल जारी रखने का निर्णय लिया। इससे उनके प्रशंसकों में नई ऊर्जा और उत्साह देखने को मिल रहा है।

    एसी मिलान ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि मोड्रिक ने टीम में शामिल होने के बाद अपने अनुभव, अनुशासन, तकनीकी कौशल और नेतृत्व से मिडफील्ड को नई मजबूती दी है। क्लब को भरोसा है कि आगामी सीजन में भी वह टीम के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। नए सीजन में भी मोड्रिक अपनी प्रसिद्ध नंबर-14 जर्सी पहनकर मैदान में उतरेंगे।

    लुका मोड्रिक का करियर आधुनिक फुटबॉल के सबसे प्रेरणादायक सफरों में से एक माना जाता है। वर्ष 2012 में उन्होंने इंग्लिश क्लब टोटेनहम हॉटस्पर से रियल मैड्रिड का दामन थामा था। शुरुआती चुनौतियों के बाद उन्होंने स्पेनिश क्लब के इतिहास में अपनी अलग पहचान बनाई। रियल मैड्रिड के लिए उन्होंने लगभग 600 मैच खेले और करीब 30 बड़े खिताब अपने नाम किए, जिनमें छह यूईएफए चैंपियंस लीग और चार ला लीगा ट्रॉफियां शामिल हैं।

    साल 2018 उनके करियर का सबसे यादगार वर्ष रहा, जब उन्होंने लियोनेल मेसी और क्रिस्टियानो रोनाल्डो के लंबे दबदबे को समाप्त करते हुए प्रतिष्ठित बैलन डी’ओर पुरस्कार अपने नाम किया। उनकी सटीक पासिंग, बेहतरीन विजन, खेल को पढ़ने की क्षमता और मिडफील्ड पर नियंत्रण ने उन्हें दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों की श्रेणी में स्थापित किया।

    अब 41 साल की उम्र में भी लुका मोड्रिक का मैदान पर बने रहने का फैसला इस बात का प्रमाण है कि अनुभव, फिटनेस और समर्पण के दम पर उम्र केवल एक संख्या बनकर रह जाती है। एसी मिलान को उम्मीद है कि उनका यह अनुभवी सितारा आगामी सीजन में टीम को नई सफलताओं की ओर ले जाने में अहम भूमिका निभाएगा।

  • सीरीज जीतने उतरेगा भारत, वैभव सूर्यवंशी पर रहेंगी सबकी निगाहें; दूसरे टी20 में जिम्बाब्वे की वापसी की चुनौती

    सीरीज जीतने उतरेगा भारत, वैभव सूर्यवंशी पर रहेंगी सबकी निगाहें; दूसरे टी20 में जिम्बाब्वे की वापसी की चुनौती


    नई दिल्ली । भारत और जिम्बाब्वे के बीच तीन मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज का दूसरा मुकाबला शनिवार को हरारे स्पोर्ट्स क्लब में खेला जाएगा। पहला मैच जीतकर सीरीज में 1-0 की बढ़त बना चुकी भारतीय टीम इस मुकाबले में जीत दर्ज कर सीरीज अपने नाम करने के इरादे से मैदान में उतरेगी। वहीं मेजबान जिम्बाब्वे की कोशिश वापसी करते हुए सीरीज को निर्णायक मुकाबले तक ले जाने की होगी।

    पहले टी20 में भारतीय टीम ने हर विभाग में शानदार प्रदर्शन किया था। तेज गेंदबाजों ने अनुशासित गेंदबाजी करते हुए जिम्बाब्वे को महज 125 रन पर समेट दिया। युवा तेज गेंदबाज मयंक यादव ने अपनी रफ्तार से बल्लेबाजों को परेशान करते हुए 18 रन देकर दो विकेट झटके। प्रिंस यादव ने भी दो सफलताएं हासिल कीं, जबकि अशोक शर्मा ने भी प्रभावशाली गेंदबाजी कर टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई।

    स्पिन विभाग में रवि बिश्नोई ने अपनी फिरकी का जादू बिखेरा। उनकी सटीक गेंदबाजी के सामने जिम्बाब्वे के बल्लेबाज खुलकर रन नहीं बना सके। भारतीय गेंदबाजों के सामूहिक प्रदर्शन ने मेजबान टीम को बड़ा स्कोर खड़ा करने का मौका नहीं दिया।

    बल्लेबाजी में सबसे ज्यादा चर्चा 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी की रही। युवा बल्लेबाज ने केवल 19 गेंदों में 50 रन की विस्फोटक पारी खेलकर कई रिकॉर्ड अपने नाम किए और मैच का रुख पूरी तरह भारत की ओर मोड़ दिया। ईशान किशन ने भी 35 रन की उपयोगी पारी खेली, जबकि कप्तान श्रेयस अय्यर 28 रन बनाकर नाबाद लौटे और टीम को जीत तक पहुंचाया।

    दूसरी ओर, जिम्बाब्वे की बल्लेबाजी पहले मुकाबले में उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकी। वेस्ली मधेवेरे ने 39 रन और रयान बर्ल ने 26 रन बनाकर कुछ संघर्ष जरूर किया, लेकिन बाकी बल्लेबाज बड़ी साझेदारी नहीं बना सके। गेंदबाजी में ब्लेसिंग मुजारबानी ने दो विकेट लेकर प्रभावित किया, लेकिन अन्य गेंदबाज भारतीय बल्लेबाजों पर दबाव बनाने में नाकाम रहे।

    हरारे स्पोर्ट्स क्लब की पिच पहले मुकाबले में तेज गेंदबाजों के लिए मददगार साबित हुई थी। हालांकि शुरुआती झटकों के बाद बल्लेबाजों ने भी यहां खुलकर रन बनाए। इस मैदान पर अब तक 84 टी20 मुकाबले खेले जा चुके हैं, जिनमें पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम ने 45 और लक्ष्य का पीछा करने वाली टीम ने 37 मैच जीते हैं। पहली पारी का औसत स्कोर 155 रन, जबकि दूसरी पारी का औसत 133 रन रहा है।

    मौसम विभाग के अनुसार दूसरे टी20 के दौरान हरारे में मौसम साफ रहने की संभावना है और बारिश की आशंका बेहद कम है। ऐसे में पूरे 20 ओवर का मुकाबला देखने को मिल सकता है।

    भारतीय टीम की सबसे बड़ी उम्मीद एक बार फिर युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी, कप्तान श्रेयस अय्यर, ईशान किशन और तेज गेंदबाज मयंक यादव पर रहेगी। यदि टीम इंडिया पहले मैच जैसी लय बरकरार रखती है तो उसके पास सीरीज अपने नाम करने का शानदार मौका होगा। वहीं जिम्बाब्वे को मुकाबले में बने रहने के लिए बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों विभागों में बेहतर प्रदर्शन करना होगा।

  • 15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने रचा इतिहास, पहला इंटरनेशनल अर्धशतक मां, परिवार और कोच को किया समर्पित

    15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने रचा इतिहास, पहला इंटरनेशनल अर्धशतक मां, परिवार और कोच को किया समर्पित


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट के उभरते सितारे वैभव सूर्यवंशी ने जिम्बाब्वे के खिलाफ पहले टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में ऐसी धमाकेदार पारी खेली, जिसने क्रिकेट जगत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। महज 15 साल की उम्र में उन्होंने 19 गेंदों में 50 रन ठोककर न सिर्फ टीम इंडिया को शानदार शुरुआत दिलाई, बल्कि कई ऐतिहासिक रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिए। मैच के बाद वैभव ने अपनी इस यादगार पारी को अपनी मां, परिवार, कोच और उन सभी लोगों को समर्पित किया, जिन्होंने उनके कठिन समय में उनका साथ दिया।

    हरारे में खेले गए मुकाबले में वैभव ने शुरुआत से ही आक्रामक अंदाज अपनाया। उन्होंने केवल 18 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया और 19 गेंदों की पारी में 4 चौके तथा 4 छक्के लगाए। इस प्रदर्शन के साथ वह टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे कम उम्र में अर्धशतक लगाने वाले बल्लेबाज बन गए।

    15 साल 118 दिन की उम्र में यह उपलब्धि हासिल कर वैभव ने इंग्लैंड के लुई ब्रूस का रिकॉर्ड तोड़ दिया, जिन्होंने 16 साल 56 दिन की उम्र में टी20 इंटरनेशनल फिफ्टी लगाई थी। इतना ही नहीं, वैभव अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे कम उम्र में अर्धशतक बनाने वाले बल्लेबाज भी बन गए। उन्होंने नेपाल के कुशल मल्ला का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया, जिन्होंने 2020 में 15 साल 340 दिन की उम्र में यह कारनामा किया था।

    बीसीसीआई द्वारा साझा किए गए वीडियो में वैभव ने कहा कि करियर की शुरुआत में ऐसी पारियां आत्मविश्वास को कई गुना बढ़ा देती हैं। उन्होंने बताया कि बल्लेबाजी के दौरान वह पूरी तरह अपनी लय में थे और अपनी स्वाभाविक खेल शैली पर भरोसा करते हुए शॉट्स लगाए। उन्होंने कहा कि यह अर्धशतक उनके परिवार, कोच और उन सभी लोगों के लिए है, जिन्होंने हर परिस्थिति में उनका हौसला बढ़ाया।

    मैच के दौरान अर्धशतक पूरा करने के बाद वैभव ने दोनों हाथों से सिर के ऊपर ‘ए’ का निशान बनाया। इस खास सेलिब्रेशन के बारे में उन्होंने खुलासा किया कि यह उनकी मां आरती को समर्पित था। वहीं, ‘थंब्स अप’ का इशारा उन्होंने भारतीय बल्लेबाज रिंकू सिंह के साथ हुई बातचीत से प्रेरित होकर किया।

    हरारे का मैदान वैभव के लिए लगातार यादगार साबित हो रहा है। इसी वर्ष उन्होंने आईसीसी अंडर-19 विश्व कप के फाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ 80 गेंदों पर 175 रनों की ऐतिहासिक पारी खेली थी। इससे पहले सेमीफाइनल में अफगानिस्तान के खिलाफ 68 रन बनाकर भारत को रिकॉर्ड छठा अंडर-19 विश्व कप खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी।

    हालांकि इंग्लैंड के खिलाफ पिछली टी20 सीरीज में उन्हें तीन मौकों पर बड़ी पारी खेलने का अवसर नहीं मिला, लेकिन जिम्बाब्वे के खिलाफ पहले ही मैच में उन्होंने शानदार वापसी कर अपनी प्रतिभा का परिचय दे दिया। वैभव ने कहा कि हरारे का माहौल उन्हें पसंद है, लेकिन वह इसे हल्के में नहीं लेते। उनका लक्ष्य हर मैच में टीम के लिए बेहतर प्रदर्शन करना और अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देना है।

    15 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में रिकॉर्डतोड़ अर्धशतक लगाकर वैभव सूर्यवंशी ने यह साबित कर दिया है कि भारतीय क्रिकेट को भविष्य का एक और बड़ा सितारा मिल चुका है।

  • जोस बटलर ने रचा इतिहास, टी20 क्रिकेट में क्रिस गेल को छोड़ा पीछे; अब पोलार्ड का रिकॉर्ड निशाने पर

    जोस बटलर ने रचा इतिहास, टी20 क्रिकेट में क्रिस गेल को छोड़ा पीछे; अब पोलार्ड का रिकॉर्ड निशाने पर


    नई दिल्ली। इंग्लैंड के विस्फोटक विकेटकीपर बल्लेबाज जोस बटलर ने टी20 क्रिकेट में एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली है। बटलर अब टी20 क्रिकेट इतिहास में दूसरे सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज बन गए हैं। उन्होंने वेस्टइंडीज के महान बल्लेबाज क्रिस गेल को पीछे छोड़ते हुए यह खास मुकाम हासिल किया। अब उनकी नजर टी20 क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज कीरोन पोलार्ड के रिकॉर्ड पर है।

    बटलर ने यह उपलब्धि द हंड्रेड टूर्नामेंट के दौरान मैनचेस्टर सुपर जायंट्स और लंदन स्पिरिट के बीच खेले गए मुकाबले में हासिल की। इस मैच में उन्होंने 11 गेंदों पर 16 रन की पारी खेली और अपने करियर के कुल टी20 रनों की संख्या 14,572 तक पहुंचा दी। इसके साथ ही उन्होंने क्रिस गेल के 14,562 रनों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।

    टी20 क्रिकेट में जोस बटलर का प्रदर्शन लगातार शानदार रहा है। उन्होंने अब तक इस फॉर्मेट में 9 शतक और 102 अर्धशतक लगाए हैं। उनकी आक्रामक बल्लेबाजी और मैच जिताने की क्षमता ने उन्हें दुनिया के सबसे खतरनाक टी20 बल्लेबाजों में शामिल कर दिया है।

    वहीं, क्रिस गेल ने अपने शानदार करियर में 455 पारियों में 14,562 रन बनाए थे। इस दौरान उनके बल्ले से 22 शतक और 88 अर्धशतक निकले। लंबे समय तक टी20 क्रिकेट पर राज करने वाले गेल का यह रिकॉर्ड अब बटलर के नाम हो गया है।

    टी20 क्रिकेट में सर्वाधिक रन बनाने का रिकॉर्ड फिलहाल वेस्टइंडीज के पूर्व कप्तान कीरोन पोलार्ड के नाम है। पोलार्ड ने 663 पारियों में 14,803 रन बनाए हैं। उनके खाते में 2 शतक और 70 अर्धशतक दर्ज हैं। बटलर अब पोलार्ड से केवल 231 रन दूर हैं और मौजूदा फॉर्म को देखते हुए यह रिकॉर्ड भी जल्द उनके नाम हो सकता है।

    हाल के महीनों में बटलर शानदार लय में नजर आए हैं। टी20 विश्व कप 2026 में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाने के बाद उन्होंने भारत के खिलाफ टी20 सीरीज में दमदार वापसी की। पांचवें मुकाबले में उन्होंने सिर्फ 64 गेंदों पर 131 रनों की विस्फोटक पारी खेली। पूरी सीरीज में उन्होंने 43 की औसत और 182 के स्ट्राइक रेट से 175 रन बनाकर अपनी बेहतरीन फॉर्म का परिचय दिया।

    अगर टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट की बात करें तो जोस बटलर इस समय तीसरे सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज हैं। उन्होंने 160 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 148 के स्ट्राइक रेट से 4,212 रन बनाए हैं। इस दौरान उनके बल्ले से 2 शतक और 28 अर्धशतक निकले हैं।

    टी20 इंटरनेशनल में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड पाकिस्तान के बाबर आजम के नाम है, जिन्होंने 4,596 रन बनाए हैं। दूसरे स्थान पर भारत के पूर्व कप्तान रोहित शर्मा हैं, जिनके नाम 4,231 रन दर्ज हैं। चूंकि रोहित टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले चुके हैं, ऐसे में बटलर के पास जल्द ही उन्हें पीछे छोड़कर दूसरे स्थान पर पहुंचने का सुनहरा अवसर है।

    जोस बटलर की मौजूदा फॉर्म और निरंतरता को देखते हुए क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में वह टी20 क्रिकेट के कई बड़े रिकॉर्ड अपने नाम कर सकते हैं।

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  • टीबी समझकर शुरू कर दी दवा, निकली फेफड़ों की दूसरी बीमारी, डॉक्टरों ने बताई सही जांच की अहमियत

    टीबी समझकर शुरू कर दी दवा, निकली फेफड़ों की दूसरी बीमारी, डॉक्टरों ने बताई सही जांच की अहमियत


    नई दिल्ली । टीबी यानी क्षय रोग आज भी देश के सामने एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इस बीमारी के इलाज में सबसे बड़ी गलती बिना पुष्टि के दवा शुरू कर देना है। केवल एक्स-रे में दिखाई देने वाले धब्बों या सामान्य लक्षणों के आधार पर टीबी का इलाज शुरू करना मरीज के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। इससे न केवल वास्तविक बीमारी का इलाज देर से शुरू होता है बल्कि अनावश्यक दवाओं के दुष्प्रभाव भी झेलने पड़ सकते हैं। लखनऊ के सिविल अस्पताल में ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं जहां मरीजों को टीबी समझकर दवा दी गई लेकिन विस्तृत जांच में बीमारी कुछ और निकली।

    ऐसा ही एक मामला राजधानी के अहिमामऊ निवासी 46 वर्षीय प्रेमचंद का सामने आया। उन्हें लगातार खांसी सांस फूलने और वजन कम होने की शिकायत थी। एक निजी चिकित्सक ने एक्स-रे में फेफड़ों पर धब्बे देखकर टीबी की दवा शुरू कर दी। करीब एक सप्ताह तक दवा लेने के बावजूद उनकी तबीयत में कोई सुधार नहीं हुआ। बाद में सिविल अस्पताल में विस्तृत जांच कराई गई तो पता चला कि उन्हें टीबी नहीं बल्कि फेफड़ों में गांठ यानी लंग नोड्यूल की समस्या है। इसके बाद तुरंत टीबी की दवा बंद कर सही बीमारी का उपचार शुरू किया गया।

    वरिष्ठ क्षय रोग विशेषज्ञ डॉ. आशुतोष दुबे का कहना है कि एक्स-रे में दिखाई देने वाला हर धब्बा टीबी का संकेत नहीं होता। कई बार फेफड़ों का कैंसर ब्रोंकाइटिस अस्थमा या लंग नोड्यूल जैसी बीमारियां भी एक्स-रे में लगभग वैसी ही दिखाई देती हैं। उनके अनुसार लगभग 30 प्रतिशत मामलों में केवल एक्स-रे के आधार पर किया गया आकलन गलत साबित हो सकता है। इसलिए टीबी की पुष्टि के लिए बलगम जांच सीबीनॉट जीन एक्सपर्ट सीटी स्कैन और मरीज की पूरी चिकित्सीय पृष्ठभूमि का मूल्यांकन करना बेहद जरूरी होता है। सभी जांचों के बाद ही उपचार शुरू किया जाना चाहिए।

    विशेषज्ञों के मुताबिक समय पर सही जांच होने से टीबी का इलाज अब पहले की तुलना में अधिक प्रभावी हो गया है। वर्तमान में टीबी से ठीक होने की दर 90 प्रतिशत से अधिक पहुंच चुकी है। इसके बावजूद यदि मरीज बीच में दवा छोड़ देता है तो बीमारी मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट टीबी में बदल सकती है जिसका इलाज अधिक कठिन और लंबा होता है। यदि इसका भी उपचार अधूरा छोड़ दिया जाए तो एक्सटेंसिव ड्रग रेजिस्टेंट टीबी जैसी गंभीर स्थिति विकसित हो सकती है जिसका इलाज करीब दो वर्ष तक चल सकता है।

    डॉ. दुबे बताते हैं कि टीबी का जीवाणु परिस्थितियों के अनुसार खुद को बदलने की क्षमता रखता है। दवाओं से अधिकांश सक्रिय जीवाणु नष्ट हो जाते हैं लेकिन कुछ सुप्त अवस्था में मौजूद जीवाणु शरीर की प्रतिरक्षा क्षमता कमजोर होने पर फिर सक्रिय हो सकते हैं। यही वजह है कि डॉक्टर द्वारा निर्धारित पूरी अवधि तक नियमित रूप से दवा लेना बेहद जरूरी होता है।

    टीबी का संक्रमण मरीज के खांसने या छींकने से हवा में फैलने वाली संक्रमित बूंदों के माध्यम से फैलता है। बंद अंधेरे और नम वातावरण में यह जीवाणु लंबे समय तक सक्रिय रह सकता है। बिना मास्क और पर्याप्त दूरी के लंबे समय तक संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में रहने से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए समय पर जांच उपचार और सावधानी न केवल मरीज बल्कि पूरे समाज की सुरक्षा के लिए आवश्यक है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि धूम्रपान नशीले पदार्थों का सेवन कुपोषण मधुमेह एचआईवी कैंसर एनीमिया और कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों में टीबी का खतरा अधिक रहता है। यदि किसी व्यक्ति को दो सप्ताह से अधिक समय तक लगातार खांसी बुखार वजन कम होना भूख न लगना या बलगम में खून आने जैसी शिकायत हो तो तुरंत सरकारी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र में जाकर टीबी की जांच करानी चाहिए। सरकार टीबी मरीजों को उपचार के दौरान हर महीने पोषण सहायता भी उपलब्ध कराती है ताकि इलाज नियमित रूप से जारी रखा जा सके।

    इसी बीच आधुनिक चिकित्सा तकनीक भी टीबी और फेफड़ों की अन्य बीमारियों की सटीक पहचान में मददगार साबित हो रही है। एंडोब्रोंकियल अल्ट्रासाउंड तकनीक के जरिए बिना किसी बड़ी सर्जरी के फेफड़ों के अंदर की जांच संभव हो गई है जिससे टीबी फेफड़ों के कैंसर और लिम्फ नोड्स से जुड़ी बीमारियों का शुरुआती चरण में ही सही पता लगाया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सही जांच समय पर इलाज और जागरूकता ही टीबी मुक्त भारत की दिशा में सबसे प्रभावी कदम साबित होंगे।

  • ग्लासगो में खेलों का महासंग्राम शुरू, मीराबाई-लवलीना बनीं भारत की शान, कॉमनवेल्थ गेम्स का शानदार शुभारंभ

    ग्लासगो में खेलों का महासंग्राम शुरू, मीराबाई-लवलीना बनीं भारत की शान, कॉमनवेल्थ गेम्स का शानदार शुभारंभ


    नई दिल्ली । स्कॉटलैंड के ऐतिहासिक शहर ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का शानदार आगाज हो गया। रंगों रोशनी संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सजी भव्य उद्घाटन समारोह ने दुनिया भर से पहुंचे खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों का दिल जीत लिया। ओवीओ हाइड्रो एरिना में आयोजित इस समारोह में स्कॉटलैंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक खेल भावना का अद्भुत संगम देखने को मिला। इसी के साथ अगले 11 दिनों तक चलने वाले खेलों के इस महाकुंभ का औपचारिक शुभारंभ हुआ जहां दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी पदकों के लिए अपनी दावेदारी पेश करेंगे।

    कॉमनवेल्थ की परंपरा के अनुरूप ब्रिटेन के सम्राट किंग चार्ल्स तृतीय ने आधिकारिक रूप से खेलों का उद्घाटन किया। वर्ष 2014 के बाद एक बार फिर ग्लासगो को इन प्रतिष्ठित खेलों की मेजबानी का अवसर मिला है। उद्घाटन समारोह में स्कॉटलैंड की संस्कृति लोक परंपराओं और आधुनिक कला का अनूठा प्रदर्शन हुआ। प्रसिद्ध कलाकारों केटी टुनस्टॉल नाथन इवांस और सेंट फीनिक्स की शानदार प्रस्तुतियों ने समारोह को और भी यादगार बना दिया। संगीत नृत्य और रोशनी के शानदार संयोजन ने पूरे माहौल को उत्साह से भर दिया।

    भारत के लिए उद्घाटन समारोह बेहद गर्व का क्षण साबित हुआ जब ओलंपिक पदक विजेता मीराबाई चानू और लवलीना बोरगोहेन ने भारतीय दल का नेतृत्व करते हुए परेड ऑफ नेशंस में तिरंगा थामा। जैसे ही भारतीय दल एरिना में पहुंचा पूरा स्टेडियम तालियों और उत्साह से गूंज उठा। टोक्यो ओलंपिक की रजत पदक विजेता मीराबाई चानू ने राष्ट्रीय ध्वज को गर्व के साथ थामा जबकि टोक्यो ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन ने कॉमनवेल्थ बैटन के साथ भारत की उम्मीदों का प्रतिनिधित्व किया। दोनों खिलाड़ियों की मौजूदगी ने भारतीय दल का उत्साह कई गुना बढ़ा दिया।

    इस बार भारत ने 125 सदस्यीय मजबूत दल ग्लासगो भेजा है जो पैरा खेलों सहित 13 विभिन्न खेलों में अपनी चुनौती पेश करेगा। हालांकि इस संस्करण में प्रतियोगिताओं की संख्या पिछले संस्करणों की तुलना में कम रखी गई है लेकिन भारतीय दल में कई ओलंपिक और विश्व स्तरीय पदक विजेता खिलाड़ियों की मौजूदगी देश की पदक उम्मीदों को मजबूत बनाती है। भारत का लक्ष्य एक बार फिर कॉमनवेल्थ खेलों में अपनी खेल शक्ति का दम दिखाना और पदक तालिका में मजबूत स्थान हासिल करना है।

    दिलचस्प बात यह रही कि उद्घाटन समारोह से पहले ही भारत का अभियान शुरू हो चुका था। भारतीय लॉन बॉल्स टीम सबसे पहले मैदान पर उतरी और उससे बर्मिंघम 2022 जैसे ऐतिहासिक प्रदर्शन को दोहराने की उम्मीद की जा रही है। पिछली बार लॉन बॉल्स में भारत ने ऐतिहासिक सफलता हासिल कर पूरे देश को गौरवान्वित किया था और इस बार भी खिलाड़ियों से वैसी ही उम्मीदें हैं।

    कॉमनवेल्थ गेम्स के 23वें संस्करण में 74 देशों और क्षेत्रों के हजारों खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। प्रतियोगिताएं 10 खेलों में आयोजित की जाएंगी जिनके मुकाबले स्कॉटिश इवेंट कैंपस स्कॉटस्टाउन स्टेडियम टोलक्रॉस इंटरनेशनल स्विमिंग सेंटर और ग्लासगो एरिना जैसे विश्वस्तरीय मैदानों पर खेले जाएंगे। आयोजन का दायरा भले ही पहले की तुलना में थोड़ा छोटा हो लेकिन प्रतियोगिता का स्तर पहले की तरह बेहद रोमांचक और चुनौतीपूर्ण रहने की उम्मीद है।

    भारत की नजरें इस बार कई बड़े सितारों पर टिकी होंगी। ओलंपिक चैंपियन नीरज चोपड़ा एथलेटिक्स में देश की सबसे बड़ी उम्मीद होंगे जबकि मीराबाई चानू वेटलिफ्टिंग में और लवलीना बोरगोहेन बॉक्सिंग में स्वर्ण पदक की मजबूत दावेदार मानी जा रही हैं। इसके अलावा भारतीय मुक्केबाजी दल भी शानदार प्रदर्शन करने की क्षमता रखता है। उद्घाटन समारोह के साथ अब नजरें मैदान पर होने वाली कड़ी प्रतिस्पर्धा पर टिक गई हैं जहां पदकों रिकॉर्ड और नए इतिहास का इंतजार पूरी दुनिया को रहेगा।

  • वैभव की विस्फोटक फिफ्टी और गेंदबाजों का कमाल, भारत ने जिम्बाब्वे को 7 विकेट से हराकर रचा नया रिकॉर्ड

    वैभव की विस्फोटक फिफ्टी और गेंदबाजों का कमाल, भारत ने जिम्बाब्वे को 7 विकेट से हराकर रचा नया रिकॉर्ड


    नई दिल्ली । जिम्बाब्वे के खिलाफ तीन मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज की शुरुआत टीम इंडिया ने बेहद शानदार अंदाज में की। हरारे स्पोर्ट्स क्लब में खेले गए पहले मुकाबले में भारत ने मेजबान टीम को 7 विकेट से करारी शिकस्त देते हुए सीरीज में 1-0 की बढ़त हासिल कर ली। इस जीत की सबसे बड़ी खासियत 15 वर्षीय युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी की विस्फोटक बल्लेबाजी रही जिन्होंने अपनी तूफानी पारी से मैच का रुख पूरी तरह भारत के पक्ष में मोड़ दिया। भारत ने 126 रन के लक्ष्य को सिर्फ 13.2 ओवर में हासिल कर लिया और 40 गेंद शेष रहते मुकाबला समाप्त कर टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 120 से अधिक रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए गेंदों के लिहाज से अपनी चौथी सबसे बड़ी जीत दर्ज की।

    इस मुकाबले में पहले गेंदबाजों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए जिम्बाब्वे की बल्लेबाजी को पूरी तरह दबाव में रखा। टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी मेजबान टीम की शुरुआत बेहद खराब रही और पहली ही गेंद पर ब्रायन बेनेट बिना खाता खोले पवेलियन लौट गए। इसके बाद भी विकेटों का पतन लगातार जारी रहा और 32 रन तक जिम्बाब्वे अपने चार प्रमुख बल्लेबाज गंवा चुका था। भारतीय गेंदबाजों ने नई गेंद से सटीक लाइन और लेंथ के साथ मेजबान बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया।

    मुश्किल परिस्थिति में रेयान बर्ल और वेस्ली मधेवेरे ने पारी को संभालने का प्रयास किया। दोनों ने पांचवें विकेट के लिए महत्वपूर्ण साझेदारी कर टीम को कुछ हद तक संकट से बाहर निकाला। मधेवेरे ने बाद में तादिवानाशे मारुमानी के साथ भी उपयोगी रन जोड़े जिससे जिम्बाब्वे का स्कोर सम्मानजनक स्थिति तक पहुंच सका। मधेवेरे ने 39 रन बनाए जबकि मारुमानी 27 रन बनाकर नाबाद लौटे। रेयान बर्ल ने 26 रन का योगदान दिया और जिम्बाब्वे ने निर्धारित 20 ओवर में 7 विकेट पर 125 रन बनाए।

    भारत की ओर से युवा तेज गेंदबाज मयंक यादव और प्रिंस यादव ने शानदार गेंदबाजी करते हुए दो-दो विकेट अपने नाम किए। शिवम दुबे और रवि बिश्नोई ने भी एक-एक विकेट लेकर जिम्बाब्वे की बल्लेबाजी को कभी खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। अनुशासित गेंदबाजी के दम पर भारतीय टीम ने लक्ष्य को सीमित रखने में अहम भूमिका निभाई।

    126 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत भले ही अभिषेक शर्मा के जल्दी आउट होने से हुई लेकिन इसके बाद वैभव सूर्यवंशी ने अपने आक्रामक तेवर से मैच का रंग बदल दिया। उन्होंने ईशान किशन के साथ तेज साझेदारी करते हुए जिम्बाब्वे के गेंदबाजों पर लगातार दबाव बनाए रखा। वैभव ने सिर्फ 19 गेंदों में 50 रन की विस्फोटक पारी खेली जिसमें चार चौके और चार शानदार छक्के शामिल रहे। इस अर्धशतक के साथ उन्होंने इतिहास रचते हुए 15 साल 118 दिन की उम्र में टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अर्धशतक लगाने वाले दुनिया के सबसे युवा पुरुष बल्लेबाज बनने का गौरव हासिल किया।

    वैभव के आउट होने के बाद ईशान किशन ने 35 रन की उपयोगी पारी खेली जबकि कप्तान श्रेयस अय्यर ने नाबाद 28 रन बनाकर जीत की औपचारिकता पूरी की। अंत में तिलक वर्मा ने भी नाबाद रहकर टीम को आसान जीत तक पहुंचाया। जिम्बाब्वे की ओर से ब्लेसिंग मुजरबानी ने दो विकेट लिए जबकि रिचर्ड नगारवा को एक सफलता मिली।

    यह मुकाबला कप्तान श्रेयस अय्यर के लिए भी खास रहा क्योंकि बतौर कप्तान उन्हें लगातार निराशाओं के बाद पहली टी20 अंतरराष्ट्रीय जीत मिली। इससे पहले आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। अब भारत की नजरें शेष दो मुकाबलों में जीत दर्ज कर सीरीज अपने नाम करने पर होंगी। 25 और 26 जुलाई को इसी मैदान पर खेले जाने वाले अगले दोनों मैचों में भारतीय टीम अपने शानदार प्रदर्शन को बरकरार रखने के इरादे से उतरेगी जबकि जिम्बाब्वे वापसी की कोशिश करेगा।

  • कैरेबियन टीम का ऐलान, पाकिस्तान सीरीज में नए चेहरे पर भरोसा, अनुभवी खिलाड़ियों के साथ उतरेगी वेस्टइंडीज

    कैरेबियन टीम का ऐलान, पाकिस्तान सीरीज में नए चेहरे पर भरोसा, अनुभवी खिलाड़ियों के साथ उतरेगी वेस्टइंडीज


    नई दिल्ली । पाकिस्तान के खिलाफ 25 जुलाई से शुरू होने वाली दो मैचों की टेस्ट सीरीज के लिए वेस्टइंडीज ने अपनी टीम की घोषणा कर दी है। चयनकर्ताओं ने इस बार युवा प्रतिभा और अनुभव के संतुलन पर भरोसा जताया है। सबसे ज्यादा चर्चा बाएं हाथ के स्पिनर जोशुआ बिशप की हो रही है जिन्हें पहली बार कैरेबियाई टेस्ट टीम में शामिल किया गया है। घरेलू क्रिकेट में लगातार बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले बिशप को लंबे समय से राष्ट्रीय टीम में मौका मिलने की उम्मीद थी और आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई है। पाकिस्तान जैसी मजबूत टीम के खिलाफ उन्हें अपनी प्रतिभा साबित करने का सुनहरा अवसर मिलेगा।

    जोशुआ बिशप ने पिछले तीन वेस्टइंडीज चैंपियनशिप सीजन में बारबाडोस प्राइड और वेस्टइंडीज अकादमी के लिए शानदार गेंदबाजी करते हुए कुल 91 विकेट हासिल किए हैं। प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उनका रिकॉर्ड भी प्रभावशाली रहा है जहां उन्होंने केवल 25 मुकाबलों में 116 विकेट अपने नाम किए हैं। इसके अलावा लिस्ट ए क्रिकेट में भी उन्होंने 54 मैचों में 79 विकेट लेकर अपनी उपयोगिता साबित की है। लगातार दमदार प्रदर्शन के दम पर उन्होंने चयनकर्ताओं का भरोसा जीता और अब पहली बार टेस्ट क्रिकेट में अपनी पहचान बनाने के लिए तैयार हैं।

    टीम की कमान एक बार फिर रोस्टन चेज के हाथों में रहेगी। हाल ही में न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज के दौरान दाहिनी तर्जनी उंगली में चोट लगने के कारण वह मैदान से दूर थे लेकिन अब पूरी तरह फिट होकर वापसी कर रहे हैं। उप कप्तान की जिम्मेदारी अनुभवी स्पिनर जोमेल वारिकन को सौंपी गई है। चयन समिति ने उस मजबूत टीम पर भरोसा बरकरार रखा है जिसने हाल ही में श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज 1-0 से अपने नाम की थी। इससे साफ है कि टीम प्रबंधन जीत के संयोजन को ज्यादा छेड़ना नहीं चाहता।

    बल्लेबाज किर्क मैकेंजी की भी लंबे समय बाद टेस्ट टीम में वापसी हुई है। वर्ष 2024 के बाद उन्हें पहली बार राष्ट्रीय टीम में मौका मिला है। वह चोटिल जॉन कैंपबेल की जगह टीम में शामिल किए गए हैं। कैंपबेल न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज के दौरान हैमस्ट्रिंग की चोट का शिकार हो गए थे। मैकेंजी ने घरेलू क्रिकेट में शानदार बल्लेबाजी करते हुए छह पारियों में 323 रन बनाए और 64.6 की औसत से चयनकर्ताओं को प्रभावित किया। उनकी वापसी से बल्लेबाजी क्रम को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    हालांकि तेज गेंदबाज अल्जारी जोसेफ इस बार टीम का हिस्सा नहीं होंगे क्योंकि उन्होंने निजी कारणों से खुद को चयन के लिए उपलब्ध नहीं कराया। उनकी अनुपस्थिति तेज गेंदबाजी आक्रमण के लिए चुनौती जरूर होगी लेकिन शमार जोसेफ केमार रोच और जायडेन सील्स जैसे गेंदबाज इस जिम्मेदारी को संभालने के लिए तैयार हैं।

    दो मैचों की यह टेस्ट सीरीज विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पहला मुकाबला 25 से 29 जुलाई के बीच ब्रायन लारा क्रिकेट अकादमी में खेला जाएगा जबकि दूसरा और अंतिम टेस्ट 2 से 6 अगस्त तक ऐतिहासिक क्वींस पार्क ओवल में आयोजित होगा। मौजूदा विश्व टेस्ट चैंपियनशिप अंकतालिका में वेस्टइंडीज आठवें स्थान पर है जबकि पाकिस्तान नौवें और अंतिम स्थान पर मौजूद है। ऐसे में दोनों टीमें इस सीरीज में जीत दर्ज कर अपनी स्थिति मजबूत करने के इरादे से मैदान में उतरेंगी। युवा खिलाड़ियों की ऊर्जा और अनुभवी खिलाड़ियों के अनुभव के साथ वेस्टइंडीज की टीम पाकिस्तान के खिलाफ कड़ी चुनौती पेश करने के लिए पूरी तरह तैयार नजर आ रही है।

  • वैभव सूर्यवंशी का ऐतिहासिक अर्धशतक, भारत ने जिम्बाब्वे को 7 विकेट से हराया

    वैभव सूर्यवंशी का ऐतिहासिक अर्धशतक, भारत ने जिम्बाब्वे को 7 विकेट से हराया


    हरारे।
    युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी की शानदार अर्धशतकीय पारी की बदौलत भारत ने पहले टी-20 मुकाबले में जिम्बाब्वे को 7 विकेट से हराकर तीन मैचों की श्रृंखला में 1-0 की बढ़त बना ली। हरारे स्पोर्ट्स क्लब में खेले गए मुकाबले में भारत ने 126 रन का लक्ष्य केवल 13.2 ओवर में तीन विकेट खोकर हासिल कर लिया।

    मैच के सबसे बड़े आकर्षण वैभव सूर्यवंशी रहे। उन्होंने 15 वर्ष 118 दिन की उम्र में टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का अर्धशतक लगाकर नया विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। इसके साथ ही वह टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे कम उम्र में अर्धशतक लगाने वाले बल्लेबाज बन गए। उन्होंने जिब्राल्टर के लुई ब्रूस का रिकॉर्ड तोड़ा, जिन्होंने 16 वर्ष 56 दिन की उम्र में यह उपलब्धि हासिल की थी।

    यह जीत श्रेयस अय्यर की कप्तानी में भारतीय टीम की पहली अंतरराष्ट्रीय जीत भी रही। इससे पहले उनकी कप्तानी में भारत को आयरलैंड के खिलाफ 2-0 और इंग्लैंड के खिलाफ 4-0 से हार का सामना करना पड़ा था।

    इससे पहले टॉस जीतकर बल्लेबाजी करते हुए जिम्बाब्वे ने निर्धारित 20 ओवर में 7 विकेट पर 125 रन बनाए। टीम की ओर से वेस्ली मधेवेरे ने सर्वाधिक 39 रन बनाए, जबकि तदिवानाशे मरुमानी ने नाबाद 27 रन की उपयोगी पारी खेली।

    भारतीय गेंदबाजों ने अनुशासित प्रदर्शन किया। मयंक यादव और प्रिंस यादव ने दो-दो विकेट झटके। मयंक यादव ने मैच की पहली ही गेंद पर ब्रायन बेनेट को आउट कर भारत को शानदार शुरुआत दिलाई और बाद में डियोन मायर्स का विकेट भी अपने नाम किया। शिवम दुबे और रवि बिश्नोई को एक-एक सफलता मिली, जबकि मधेवेरे रन आउट हुए।

    आसान लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय बल्लेबाजों ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया। वैभव सूर्यवंशी की रिकॉर्डतोड़ पारी ने टीम की जीत सुनिश्चित करने के साथ भारतीय क्रिकेट को एक नया युवा सितारा भी दे दिया।