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  • जिम्बाब्वे कप्तान सिकंदर रजा का भारत को खुला चैलेंज बोले एकतरफा नहीं होगी सीरीज रोमांच तय

    जिम्बाब्वे कप्तान सिकंदर रजा का भारत को खुला चैलेंज बोले एकतरफा नहीं होगी सीरीज रोमांच तय


    नई दिल्ली । भारत और जिम्बाब्वे के बीच 24 जुलाई से शुरू होने वाली तीन मैचों की टी20 सीरीज से पहले मेजबान टीम के कप्तान सिकंदर रजा ने बड़ा बयान देकर मुकाबले का रोमांच और बढ़ा दिया है। रजा ने भारत को सीरीज का प्रबल दावेदार मानने से साफ इनकार करते हुए कहा कि यह मुकाबला पूरी तरह संतुलित रहेगा और दोनों टीमों के पास जीत हासिल करने का समान अवसर होगा। उनका मानना है कि क्रिकेट में नाम से नहीं बल्कि मैदान पर प्रदर्शन से नतीजे तय होते हैं।

    हरारे स्पोर्ट्स क्लब में होने वाली इस टी20 सीरीज का पहला मुकाबला 24 जुलाई को खेला जाएगा जबकि बाकी दो मैच 25 और 26 जुलाई को इसी मैदान पर आयोजित होंगे। भारतीय टीम हालिया सीमित ओवरों की सीरीज में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी है और अब वह नई शुरुआत की तलाश में जिम्बाब्वे पहुंची है। दूसरी ओर मेजबान टीम अपने घरेलू मैदान का पूरा फायदा उठाने की तैयारी में है।

    सिकंदर रजा ने कहा कि भारतीय टीम इस समय बदलाव के दौर से गुजर रही है लेकिन जिम्बाब्वे भी युवा खिलाड़ियों के साथ नई टीम तैयार कर रहा है। ऐसे में किसी एक टीम को पहले से विजेता घोषित करना सही नहीं होगा। उन्होंने भरोसा जताया कि दोनों देशों के खिलाड़ी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करेंगे और दर्शकों को रोमांचक क्रिकेट देखने को मिलेगा।

    रजा ने कहा कि उनकी टीम का आत्मविश्वास हाल के प्रदर्शन से काफी बढ़ा है। जिम्बाब्वे ने इस वर्ष कई मजबूत टीमों के खिलाफ प्रभावशाली खेल दिखाया है और महत्वपूर्ण मुकाबलों में जीत दर्ज कर अपनी क्षमता साबित की है। यही कारण है कि टीम भारतीय चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

    हालांकि भारत का टी20 क्रिकेट में रिकॉर्ड काफी मजबूत रहा है लेकिन हाल के विदेशी दौरों में मिली हार ने टीम पर दबाव बढ़ाया है। ऐसे में कप्तान श्रेयस अय्यर के नेतृत्व में भारतीय खिलाड़ी वापसी की कोशिश करेंगे। वहीं जिम्बाब्वे की नजर घरेलू परिस्थितियों का फायदा उठाकर एक और बड़ी जीत दर्ज करने पर होगी।

    गौरतलब है कि पिछले दौरे पर भारतीय टीम ने शुरुआती हार के बाद शानदार वापसी करते हुए सीरीज अपने नाम की थी लेकिन इस बार मेजबान टीम पहले से अधिक आत्मविश्वास के साथ मैदान में उतरेगी। सिकंदर रजा का मानना है कि इस बार मुकाबला पहले से कहीं ज्यादा कड़ा होगा और परिणाम आखिरी क्षणों तक तय नहीं होगा।

    दोनों टीमों के हालिया प्रदर्शन और युवा खिलाड़ियों की मौजूदगी को देखते हुए क्रिकेट प्रेमियों को एक रोमांचक और प्रतिस्पर्धी टी20 सीरीज की उम्मीद रहेगी जहां हर मुकाबले में कांटे की टक्कर देखने को मिल सकती है।

  • एफआईएच हॉकी वर्ल्ड कप के लिए टीम इंडिया घोषित, हरमनप्रीत कप्तान; पाकिस्तान से 19 अगस्त को महामुकाबला

    एफआईएच हॉकी वर्ल्ड कप के लिए टीम इंडिया घोषित, हरमनप्रीत कप्तान; पाकिस्तान से 19 अगस्त को महामुकाबला


    नई दिल्ली । एफआईएच पुरुष हॉकी विश्व कप 2026 के लिए भारतीय टीम का ऐलान हो गया है। हॉकी इंडिया ने बेल्जियम और नीदरलैंड में 15 से 30 अगस्त तक आयोजित होने वाले इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट के लिए 20 सदस्यीय टीम की घोषणा की है। अनुभवी डिफेंडर हरमनप्रीत सिंह को एक बार फिर टीम की कप्तानी सौंपी गई है। चयनित टीम में अनुभवी खिलाड़ियों और उभरती युवा प्रतिभाओं का संतुलित मिश्रण देखने को मिलता है, जिससे भारतीय हॉकी प्रशंसकों की उम्मीदें और बढ़ गई हैं।

    मुख्य कोच क्रेग फुल्टन ने टीम चयन के बाद भरोसा जताया कि मौजूदा भारतीय टीम के पास इतिहास रचने का सुनहरा अवसर है। उन्होंने कहा कि टीम में शामिल हर खिलाड़ी ने अपनी जगह प्रदर्शन के दम पर बनाई है। उनके अनुसार यह टीम दबाव में बेहतर प्रदर्शन करने, तेज जवाबी हमला करने और अनुशासित खेल दिखाने में सक्षम है। फुल्टन ने स्पष्ट किया कि टीम का पूरा फोकस एक-एक मैच पर रहेगा और खिलाड़ी भविष्य की बजाय वर्तमान मुकाबलों पर ध्यान देंगे।

    भारतीय टीम गोलकीपिंग में मोहित एचएस और सूरज करकेरा पर भरोसा करेगी। रक्षा पंक्ति की जिम्मेदारी कप्तान हरमनप्रीत सिंह के साथ अमित रोहिदास, जरमनप्रीत सिंह, जुगराज सिंह, संजय, सुमित और यशदीप सिवाच जैसे अनुभवी खिलाड़ियों के हाथों में होगी। मिडफील्ड में मनप्रीत सिंह, हार्दिक सिंह और विवेक सागर प्रसाद टीम की रीढ़ होंगे, जबकि युवा खिलाड़ी राजिंदर सिंह, आदित्य अर्जुन लालागे और नीलाकांता शर्मा भी अपनी ऊर्जा और कौशल से टीम को मजबूती देंगे।

    आक्रमण की कमान मनदीप सिंह, दिलप्रीत सिंह, सुखजीत सिंह, अभिषेक और शिलानंद लाकड़ा संभालेंगे। इन खिलाड़ियों से तेज़ और आक्रामक हॉकी की उम्मीद की जा रही है, जो विरोधी टीमों की रक्षा पंक्ति को लगातार चुनौती दे सकते हैं।

    भारत को विश्व कप में पूल-डी में इंग्लैंड, पाकिस्तान और वेल्स जैसी मजबूत टीमों के साथ रखा गया है। भारतीय टीम अपने अभियान की शुरुआत 15 अगस्त को वेल्स के खिलाफ करेगी। इसके बाद 17 अगस्त को इंग्लैंड से भिड़ंत होगी, जबकि 19 अगस्त को चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबला खेला जाएगा। भारत-पाकिस्तान मैच पर दुनियाभर के हॉकी प्रेमियों की विशेष नजर रहेगी और इसे पूल चरण का सबसे बड़ा मुकाबला माना जा रहा है।

    भारतीय हॉकी के लिए यह विश्व कप इसलिए भी खास है क्योंकि टीम पिछले पांच दशकों से विश्व कप पदक का इंतजार कर रही है। भारत ने 1971 में कांस्य, 1973 में रजत और 1975 में कुआलालंपुर में विश्व कप का स्वर्ण पदक जीता था। इसके बाद से भारतीय टीम विश्व कप में कोई पदक नहीं जीत सकी है। ऐसे में हरमनप्रीत सिंह की अगुवाई वाली यह टीम 50 साल के लंबे इंतजार को खत्म कर इतिहास रचने के इरादे से मैदान में उतरेगी।

    मुख्य कोच क्रेग फुल्टन का मानना है कि इस टीम में अनुभव, फिटनेस, अनुशासन और युवा जोश का बेहतरीन तालमेल है। यदि खिलाड़ी अपनी रणनीति के अनुसार प्रदर्शन करते हैं तो भारत एक बार फिर विश्व हॉकी में अपनी खोई हुई चमक हासिल कर सकता है।

  • स्पेन से हार के बाद भी अर्जेंटीना पर बरसा प्यार, एयरपोर्ट पर रेड कार्पेट और हजारों फैन्स का स्वागत

    स्पेन से हार के बाद भी अर्जेंटीना पर बरसा प्यार, एयरपोर्ट पर रेड कार्पेट और हजारों फैन्स का स्वागत


    नई दिल्ली । फीफा विश्व कप 2026 के फाइनल में स्पेन के हाथों 1-0 से हारकर खिताब बचाने में असफल रही अर्जेंटीना की टीम जब स्वदेश पहुंची तो नजारा किसी चैंपियन के स्वागत से कम नहीं था। न्यूयॉर्क के मेटलाइफ स्टेडियम में मिली निराशाजनक हार के बावजूद देशवासियों ने अपनी टीम का पूरे सम्मान और गर्व के साथ स्वागत किया। हालांकि इस मौके पर सबसे बड़ी कमी कप्तान लियोनेल मेसी की रही, जो टीम के साथ अर्जेंटीना नहीं लौटे।

    एजेइजा स्थित मिनिस्ट्रो पिस्टारिनी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर खिलाड़ियों के स्वागत के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे। विमान के उतरते ही रेड कार्पेट बिछाया गया और ग्रेनेडियर रेजिमेंट के सैन्य बैंड ने लोकप्रिय धुन ‘मुचाचोस’ बजाकर खिलाड़ियों का अभिनंदन किया। एयरपोर्ट से लेकर अर्जेंटीना फुटबॉल एसोसिएशन (AFA) मुख्यालय तक हजारों प्रशंसक अपने हाथों में राष्ट्रीय ध्वज, नीले-सफेद रंग के छाते और टीम की जर्सियां लिए खिलाड़ियों की एक झलक पाने के लिए घंटों इंतजार करते रहे।

    टीम के कप्तान लियोनेल मेसी इस स्वागत समारोह का हिस्सा नहीं बने। अर्जेंटीना फुटबॉल एसोसिएशन पहले ही स्पष्ट कर चुका था कि टीम के कुछ खिलाड़ी और अधिकारी दल के साथ यात्रा नहीं करेंगे, जिनमें मेसी भी शामिल थे। माना जा रहा है कि 39 वर्षीय मेसी ने राष्ट्रीय टीम के लिए अपना आखिरी विश्व कप मुकाबला खेल लिया है, हालांकि उनके भविष्य को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

    कोच लियोनेल स्कालोनी के नेतृत्व में लौटे खिलाड़ियों में एमिलियानो मार्टिनेज, निकोलस ओटामेंडी, लिसांड्रो मार्टिनेज, निकोलस टैग्लियाफिको, गोंजालो मोंटिएल, लिएंड्रो परेडेस, एलेक्सिस मैक एलिस्टर, जियोवानी लो सेल्सो, थियागो अल्माडा, निकोलस गोंजालेज और अन्य खिलाड़ी शामिल रहे। सभी खिलाड़ियों का जोरदार तालियों और नारों के बीच स्वागत किया गया।

    एयरपोर्ट से टीम को कड़ी सुरक्षा के बीच खुली छत वाली बस में लियोनेल आंद्रेस मेसी ट्रेनिंग सेंटर ले जाया गया। पूरे रास्ते सड़कों के दोनों ओर बड़ी संख्या में समर्थक मौजूद रहे। कई प्रशंसक झंडे लहराते रहे तो कई ड्रम बजाकर खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाते नजर आए। हार के बावजूद फैन्स ने यह संदेश दिया कि उनके लिए टीम की मेहनत और जज्बा किसी ट्रॉफी से कम नहीं है।

    विश्व कप फाइनल में स्पेन के खिलाफ अर्जेंटीना ने कड़ा मुकाबला किया, लेकिन एकमात्र गोल के अंतर से उसे हार का सामना करना पड़ा। इसके साथ ही लगातार दूसरी बार विश्व चैंपियन बनने का सपना अधूरा रह गया। बावजूद इसके देशवासियों ने खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाने में कोई कमी नहीं छोड़ी।

    अर्जेंटीना फुटबॉल एसोसिएशन के अधिकारियों और ट्रेनिंग सेंटर के कर्मचारियों ने भी खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ का गर्मजोशी से स्वागत किया। टीम की स्वदेश वापसी के साथ विश्व कप अभियान भले समाप्त हो गया हो, लेकिन प्रशंसकों के समर्थन ने यह साफ कर दिया कि अर्जेंटीना में फुटबॉल केवल खेल नहीं, बल्कि लोगों की भावनाओं और गर्व का हिस्सा है।

  • हरारे में होगी कांटे की टक्कर भारत और जिम्बाब्वे टी20 सीरीज पर सिकंदर रजा का बड़ा बयान जीत हार का फैसला करेगा प्रदर्शन

    हरारे में होगी कांटे की टक्कर भारत और जिम्बाब्वे टी20 सीरीज पर सिकंदर रजा का बड़ा बयान जीत हार का फैसला करेगा प्रदर्शन


    नई दिल्ली । भारत और जिम्बाब्वे के बीच 23 जुलाई से शुरू होने वाली तीन मैचों की टी20 सीरीज को लेकर क्रिकेट प्रेमियों में उत्साह बढ़ गया है। हरारे स्पोर्ट्स क्लब में खेले जाने वाले इस मुकाबले से पहले जिम्बाब्वे के कप्तान सिकंदर रजा ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि इस बार सीरीज पूरी तरह संतुलित रहेगी और दोनों टीमों के पास जीत हासिल करने के बराबर अवसर होंगे। रजा का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में किसी भी टीम को कमजोर या मजबूत नहीं कहा जा सकता और मैदान पर बेहतर प्रदर्शन करने वाली टीम ही बाजी मारेगी।

    सिकंदर रजा ने कहा कि जिम्बाब्वे पिछले कुछ समय से लगातार प्रतिस्पर्धी क्रिकेट खेल रहा है और टीम का आत्मविश्वास पहले से कहीं ज्यादा मजबूत है। उन्होंने विश्वास जताया कि घरेलू परिस्थितियों का फायदा उनकी टीम को मिलेगा और दर्शकों को बेहद रोमांचक मुकाबले देखने को मिलेंगे। उनके अनुसार यह सीरीज किसी भी तरह से एकतरफा नहीं होगी क्योंकि दोनों टीमें बदलाव के दौर से गुजर रही हैं और नई रणनीतियों के साथ मैदान पर उतरेंगी।

    भारतीय टीम के लिए भी यह दौरा काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ लगातार टी20 सीरीज गंवाने के बाद टीम इंडिया जीत की राह पर लौटना चाहेगी। कप्तान श्रेयस अय्यर के सामने यह सीरीज खुद को साबित करने का बड़ा अवसर होगी। कप्तानी संभालने के बाद अब तक उन्हें सफलता नहीं मिली है इसलिए जिम्बाब्वे के खिलाफ सीरीज जीतना उनके लिए आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ टीम के मनोबल के लिए भी बेहद जरूरी माना जा रहा है।

    भारत और जिम्बाब्वे के बीच टी20 मुकाबलों का इतिहास देखें तो अब तक दोनों टीमों के बीच कुल दस मैच खेले गए हैं जिनमें भारत ने सात मुकाबलों में जीत दर्ज की है जबकि जिम्बाब्वे तीन बार जीत हासिल करने में सफल रहा है। आंकड़े भले ही भारत के पक्ष में हों लेकिन हाल के वर्षों में जिम्बाब्वे ने अपने प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार किया है और कई बड़ी टीमों को कड़ी चुनौती दी है। यही कारण है कि इस सीरीज को हल्के में नहीं लिया जा रहा।

    हरारे की पिच आमतौर पर बल्लेबाजों और गेंदबाजों दोनों के लिए संतुलित मानी जाती है। शुरुआती ओवरों में तेज गेंदबाजों को मदद मिलती है जबकि बाद में बल्लेबाज खुलकर रन बना सकते हैं। ऐसे में दोनों टीमों की रणनीति और मैदान पर लिए गए फैसले जीत हार में अहम भूमिका निभाएंगे। भारतीय टीम जहां अपनी मजबूत बल्लेबाजी और अनुभवी खिलाड़ियों पर भरोसा करेगी वहीं जिम्बाब्वे घरेलू परिस्थितियों और टीम भावना के दम पर उलटफेर करने की कोशिश करेगा।

    भारत और जिम्बाब्वे के बीच तीन मैचों की टी20 सीरीज के मुकाबले 23 जुलाई 25 जुलाई और 26 जुलाई को हरारे स्पोर्ट्स क्लब में खेले जाएंगे। सभी मैच भारतीय समयानुसार शाम साढ़े चार बजे शुरू होंगे। क्रिकेट प्रशंसकों को उम्मीद है कि यह सीरीज रोमांच संघर्ष और बेहतरीन प्रदर्शन से भरपूर होगी तथा दोनों टीमों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिलेगी।

  • कॉमनवेल्थ गेम्स का मेजबान बनने की दौड़ में कौन कितना आगे जानिए 1930 से 2026 तक का पूरा इतिहास

    कॉमनवेल्थ गेम्स का मेजबान बनने की दौड़ में कौन कितना आगे जानिए 1930 से 2026 तक का पूरा इतिहास


    नई दिल्ली । कॉमनवेल्थ गेम्स दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित बहु खेल आयोजनों में शामिल हैं जिनका इतिहास लगभग एक शताब्दी पुराना है। इन खेलों की शुरुआत वर्ष 1930 में ब्रिटिश एम्पायर गेम्स के नाम से हुई थी। उस समय इसमें केवल ब्रिटिश साम्राज्य से जुड़े देशों ने हिस्सा लिया था लेकिन समय के साथ इसका स्वरूप बदलता गया और आज यह राष्ट्रमंडल देशों का सबसे बड़ा खेल महाकुंभ बन चुका है। इन खेलों का आयोजन हर चार वर्ष में किया जाता है हालांकि द्वितीय विश्व युद्ध के कारण 1942 और 1946 में इनका आयोजन नहीं हो सका था।

    पहले संस्करण का आयोजन कनाडा के हैमिल्टन शहर में हुआ था जहां केवल 11 देशों ने भाग लिया था। इसके बाद प्रतियोगिता का विस्तार लगातार बढ़ता गया और 2022 तक इसमें 72 देशों की भागीदारी दर्ज की गई। 2026 के ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में भी कई देश अपनी चुनौती पेश करेंगे और खेलों का रोमांच नई ऊंचाइयों पर पहुंचेगा।

    मेजबानी के रिकॉर्ड की बात करें तो ऑस्ट्रेलिया इस मामले में सबसे आगे है। ऑस्ट्रेलिया ने अब तक पांच बार कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी की है और इस उपलब्धि के साथ वह सबसे सफल मेजबान देश बना हुआ है। कनाडा चार बार इन खेलों का आयोजन कर दूसरे स्थान पर है जबकि स्कॉटलैंड 2026 में चौथी बार मेजबानी करेगा। इंग्लैंड और न्यूजीलैंड तीन तीन बार इन खेलों की मेजबानी कर चुके हैं।

    भारत ने वर्ष 2010 में नई दिल्ली में कॉमनवेल्थ गेम्स का सफल आयोजन किया था। यह पहला अवसर था जब भारत को इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता की मेजबानी मिली। इस आयोजन ने देश की खेल अधोसंरचना को नई पहचान दी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की आयोजन क्षमता को भी मजबूती से स्थापित किया। मलेशिया जमैका और वेल्स भी एक एक बार इन खेलों की मेजबानी कर चुके हैं।

    अविभाजित भारत ने 1934 और 1938 के संस्करणों में ब्रिटिश शासन के अधीन भाग लिया था जबकि 1947 में स्वतंत्रता के बाद भारत और पाकिस्तान ने अलग अलग देशों के रूप में प्रतियोगिता में हिस्सा लेना शुरू किया। बाद में 1971 में स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद बांग्लादेश भी इस खेल परिवार का हिस्सा बना। ऑस्ट्रेलिया कनाडा इंग्लैंड न्यूजीलैंड स्कॉटलैंड और वेल्स ऐसे देश हैं जिन्होंने अब तक आयोजित प्रत्येक कॉमनवेल्थ गेम्स में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।

    वर्ष 2026 के कॉमनवेल्थ गेम्स का आयोजन 28 जुलाई से 8 अगस्त तक स्कॉटलैंड के ग्लासगो शहर में होगा। यह शहर चौथी बार इन खेलों की मेजबानी करेगा। इस बार भी दुनिया भर के खिलाड़ी पदकों के लिए संघर्ष करेंगे और राष्ट्रमंडल देशों के बीच खेल भावना तथा प्रतिस्पर्धा का शानदार उदाहरण देखने को मिलेगा।

    करीब सौ वर्षों का सफर तय कर चुके कॉमनवेल्थ गेम्स आज केवल खेल प्रतियोगिता नहीं बल्कि राष्ट्रमंडल देशों के बीच सहयोग मित्रता और खेल संस्कृति का सबसे बड़ा मंच बन चुके हैं। हर नया संस्करण इस गौरवशाली इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ता है।

  • रोहित शर्मा को कुछ भी साबित करने की जरूरत नहीं अश्विन बोले विश्व कप खेलना पूरी तरह उनका फैसला

    रोहित शर्मा को कुछ भी साबित करने की जरूरत नहीं अश्विन बोले विश्व कप खेलना पूरी तरह उनका फैसला


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व दिग्गज ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने रोहित शर्मा और विराट कोहली के भविष्य को लेकर चल रही चर्चाओं पर अपनी स्पष्ट राय रखी है। इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स में खेले गए निर्णायक वनडे मुकाबले में रोहित शर्मा की शानदार 138 रन की पारी के बाद अश्विन ने कहा कि दोनों अनुभवी खिलाड़ियों को अपने करियर का फैसला खुद करने का पूरा अधिकार है और जब तक वे भारत के लिए खेलना चाहते हैं तब तक उन्हें टीम से बाहर करने का सवाल ही नहीं उठता।

    अश्विन ने कहा कि रोहित शर्मा और विराट कोहली भारतीय क्रिकेट के ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने वर्षों तक अपने प्रदर्शन से देश का नाम रोशन किया है। उनके रिकॉर्ड और योगदान को देखते हुए अब उन्हें किसी के सामने अपनी क्षमता साबित करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे खिलाड़ियों का मूल्य केवल आंकड़ों से नहीं बल्कि उनके अनुभव और बड़े मुकाबलों में निभाई गई भूमिका से भी तय होता है।

    रोहित शर्मा की बल्लेबाजी की तारीफ करते हुए अश्विन ने कहा कि लॉर्ड्स में उनकी पारी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह आज भी बड़े मैचों के खिलाड़ी हैं। शुरुआती समय में थोड़ा संभलकर खेलने के बाद रोहित पूरी तरह लय में आ गए थे और उनके शॉट्स में वही पुराना आत्मविश्वास दिखाई दे रहा था। अश्विन का मानना है कि यदि परिस्थितियां थोड़ा और साथ देतीं तो रोहित आसानी से 180 रन तक पहुंच सकते थे और भारत को जीत भी दिला सकते थे।

    पूर्व स्पिनर ने कहा कि रोहित अब ऐसे मुकाम पर हैं जहां उन्हें आलोचकों को जवाब देने या अपनी योग्यता सिद्ध करने की जरूरत नहीं है। उनके मुताबिक अब केवल एक सवाल महत्वपूर्ण है कि क्या रोहित खुद अगले वनडे विश्व कप में खेलना चाहते हैं। यदि उनके भीतर देश के लिए खेलने की इच्छा और जुनून है तो उन्हें पूरा अवसर मिलना चाहिए।

    अश्विन ने विराट कोहली का भी समर्थन करते हुए कहा कि दोनों दिग्गज खिलाड़ियों ने भारतीय क्रिकेट को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। उनके अनुभव का फायदा युवा खिलाड़ियों को भी मिलता है और बड़े टूर्नामेंट में उनकी मौजूदगी टीम के लिए आत्मविश्वास बढ़ाने वाली होती है। ऐसे खिलाड़ियों पर जल्दबाजी में फैसला लेना भारतीय टीम के हित में नहीं होगा।

    उन्होंने यह भी कहा कि रोहित शर्मा के लगभग बारह हजार अंतरराष्ट्रीय रन उनके कद और योगदान को खुद साबित करते हैं। दुनिया भर में उनके करोड़ों प्रशंसक हैं और लोग उन्हें बल्लेबाजी करते देखने के लिए मैदान में आते हैं। ऐसे खिलाड़ी केवल आंकड़ों से नहीं बल्कि अपने प्रभाव से भी टीम के लिए महत्वपूर्ण होते हैं।

    रोहित और विराट के भविष्य को लेकर लगातार हो रही चर्चाओं के बीच अश्विन का यह बयान भारतीय क्रिकेट में नई बहस को जन्म दे सकता है। अब सभी की नजर इस बात पर होगी कि टीम प्रबंधन आगामी सीरीज और 2027 वनडे विश्व कप की तैयारियों में इन दोनों वरिष्ठ खिलाड़ियों की भूमिका को किस तरह तय करता है।

  • केएल राहुल के साथ नाइंसाफी पर श्रीकांत का बड़ा हमला बोले बार बार प्रयोग से विश्व कप की तैयारी पर उठे सवाल

    केएल राहुल के साथ नाइंसाफी पर श्रीकांत का बड़ा हमला बोले बार बार प्रयोग से विश्व कप की तैयारी पर उठे सवाल


    नई दिल्ली । इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज में मिली हार के बाद भारतीय क्रिकेट टीम की रणनीति और टीम चयन पर बहस तेज हो गई है। पूर्व भारतीय कप्तान कृष्णमाचारी श्रीकांत ने हेड कोच गौतम गंभीर और टीम मैनेजमेंट के फैसलों पर खुलकर सवाल उठाते हुए जवाबदेही तय करने की मांग की है। उनका कहना है कि मजबूत टीमों के खिलाफ लगातार निराशाजनक प्रदर्शन को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और केवल कमजोर टीमों पर जीत हासिल कर संतुष्ट होना भारतीय क्रिकेट के लिए सही संकेत नहीं है।

    श्रीकांत ने कहा कि भारतीय टीम को आयरलैंड टी20 सीरीज इंग्लैंड टी20 सीरीज और इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज में उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिली। ऐसे में टीम प्रबंधन को अपनी रणनीति की समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि भारत जिम्बाब्वे श्रीलंका या वेस्टइंडीज जैसी टीमों के खिलाफ जीत दर्ज करता है तो उसे बड़ी उपलब्धि नहीं माना जाना चाहिए। असली पैमाना यह होना चाहिए कि टीम ऑस्ट्रेलिया इंग्लैंड और अन्य मजबूत देशों के खिलाफ कैसा प्रदर्शन करती है।

    पूर्व सलामी बल्लेबाज ने 2027 वनडे विश्व कप की तैयारियों पर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि विश्व कप से पहले बहुत कम वनडे मुकाबले बचे हैं इसलिए लगातार प्रयोग करना टीम के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि बार बार प्लेइंग इलेवन बदलने से खिलाड़ियों का आत्मविश्वास प्रभावित होता है और टीम का संतुलन भी बिगड़ता है। चोटिल खिलाड़ियों की बढ़ती संख्या भी टीम के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।

    श्रीकांत ने विशेष रूप से केएल राहुल के बल्लेबाजी क्रम पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि लक्ष्य का पीछा करते समय राहुल जैसे अनुभवी बल्लेबाज को निचले क्रम में भेजना समझ से परे है। उन्होंने कहा कि राहुल कई बार दबाव की परिस्थितियों में भारत को जीत दिला चुके हैं और उन्हें विराट कोहली के साथ शुरुआती चरण में बल्लेबाजी के लिए भेजा जाना चाहिए था। जब रन गति पूरी तरह हाथ से निकल चुकी थी तब उन्हें बल्लेबाजी के लिए भेजना उनके साथ अन्याय जैसा था।

    उन्होंने यह भी कहा कि टीम मैनेजमेंट लगातार खिलाड़ियों की भूमिका बदल रहा है जिससे उनकी लय प्रभावित हो रही है। श्रीकांत के अनुसार राहुल की बॉडी लैंग्वेज भी मैच के दौरान आत्मविश्वास से भरी नजर नहीं आई। उनका मानना है कि यदि राहुल चौथे नंबर पर बल्लेबाजी करते तो वह विराट कोहली के साथ बड़ी साझेदारी बनाकर मैच को अंत तक ले जा सकते थे जैसा उन्होंने 2023 विश्व कप में कई मौकों पर किया था।

    पूर्व कप्तान ने यह भी कहा कि भारतीय टीम को विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट को ध्यान में रखते हुए अब स्थिर संयोजन तैयार करना चाहिए। लगातार बदलाव और प्रयोग की नीति से टीम को दीर्घकालिक नुकसान हो सकता है। उनका मानना है कि टीम प्रबंधन को खिलाड़ियों की स्पष्ट भूमिकाएं तय करनी होंगी ताकि बड़े मुकाबलों में बेहतर प्रदर्शन किया जा सके।

    भारतीय टीम की हालिया हार के बाद श्रीकांत के ये बयान क्रिकेट जगत में नई बहस छेड़ सकते हैं। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि आने वाली सीरीज में टीम मैनेजमेंट अपनी रणनीति में कोई बदलाव करता है या नहीं।

  • विदेशी सरजमीं पर लगातार सीरीज गंवाने के बाद बैकफुट पर भारतीय क्रिकेट टीम: 'ऑल इज वेल' के दावे के बीच बोर्ड और मुख्य कोच के फैसलों पर तीखी बहस

    विदेशी सरजमीं पर लगातार सीरीज गंवाने के बाद बैकफुट पर भारतीय क्रिकेट टीम: 'ऑल इज वेल' के दावे के बीच बोर्ड और मुख्य कोच के फैसलों पर तीखी बहस


    नई दिल्ली।
    विदेशी सरजमीं पर भारतीय क्रिकेट टीम के हालिया निराशाजनक प्रदर्शन ने खेल प्रेमियों और खेल विश्लेषकों को चिंता में डाल दिया है। आयरलैंड के खिलाफ मिली झटकों भरी हार के बाद इंग्लैंड दौरे पर भी टी20 और वनडे सीरीज में भारतीय टीम को पराजय का सामना करना पड़ा है। लगातार मिल रही असफलताओं के बावजूद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई का रवैया बेहद शांत नजर आ रहा है। बोर्ड की ओर से दिए जा रहे ‘ऑल इज वेल’ के बयानों पर अब सवाल उठने लगे हैं कि आखिर टीम प्रबंधन और मुख्य कोच से इस हार का हिसाब कब मांगा जाएगा।

    भारतीय टीम का हालिया विदेशी दौरा कई मोर्चों पर कमजोरियों को उजागर कर चुका है। आयरलैंड जैसी अपेक्षाकृत कमजोर मानी जाने वाली टीम के खिलाफ उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन न कर पाना और फिर इंग्लैंड की मजबूत टीम के सामने पूरी तरह पस्त हो जाना, भारतीय क्रिकेट के गिरते स्तर की ओर इशारा करता है। विशेषकर इंग्लैंड दौरे पर खेली गई टी20 और वनडे सीरीज में न तो भारतीय बल्लेबाजी में गहराई दिखी और न ही गेंदबाजी आक्रमण में वह धार नजर आई, जिसके लिए भारतीय टीम जानी जाती है। महत्वपूर्ण मौकों पर टीम के सीनियर और युवा खिलाड़ियों दोनों ने ही निराश किया है।

    टीम प्रबंधन के फैसलों और रणनीति पर लगातार उंगलियां उठ रही हैं। मुख्य कोच गौतम गंभीर के कार्यकाल में टीम के रणनीतिक बदलावों को लेकर तीखी आलोचना हो रही है। प्लेयिंग इलेवन के चयन में लगातार किए जा रहे प्रयोग, खिलाड़ियों के बल्लेबाजी क्रम में बार-बार बदलाव और फॉर्म में चल रहे खिलाड़ियों को नजरअंदाज करने की नीति टीम के संतुलन को बिगाड़ रही है। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि मैदान पर सही समय पर सही फैसले न ले पाने के कारण टीम को बार-बार हार का मुंह देखना पड़ रहा है।

    इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अधिक ध्यान खींचने वाली बात बीसीसीआई का रुख है। अमूमन किसी बड़े दौरे पर हार के बाद बोर्ड सख्त रुख अपनाता है और समीक्षा बैठकें आयोजित करता है, लेकिन इस बार बोर्ड की ओर से सब कुछ सामान्य दिखाने की कोशिश की जा रही है। बोर्ड के अधिकारियों की यह चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। खेल जगत में यह चर्चा तेज है कि जब तक प्रबंधन और कोचिंग स्टाफ की जवाबदेही तय नहीं की जाएगी, तब तक प्रदर्शन में सुधार की उम्मीद करना बेमानी होगा।

    भारतीय टीम के इस लचर प्रदर्शन से प्रशंसकों में भारी निराशा व्याप्त है। सोशल मीडिया से लेकर खेल के मंचों तक मुख्य कोच की कार्यप्रणाली और कप्तान के फैसलों की कड़ी समीक्षा की मांग की जा रही है। आगामी बड़ी प्रतियोगिताओं और दौरों को देखते हुए यदि समय रहते इन कमियों को दूर नहीं किया गया, तो भारतीय क्रिकेट को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। अब देखना यह होगा कि क्या बीसीसीआई वाकई समीक्षा बैठक बुलाकर कड़े कदम उठाता है या फिर ‘ऑल इज वेल’ के आवरण में इन असफलताओं को ढका जाता रहेगा।

  • स्पेन ने जीता विश्व कप अब इनामी राशि से भी बनाया रिकॉर्ड चैंपियन को मिले 50 मिलियन डॉलर

    स्पेन ने जीता विश्व कप अब इनामी राशि से भी बनाया रिकॉर्ड चैंपियन को मिले 50 मिलियन डॉलर


    नई दिल्ली  । फीफा वर्ल्ड कप 2026 में ऐतिहासिक जीत दर्ज करने के बाद स्पेन सिर्फ ट्रॉफी का ही नहीं बल्कि रिकॉर्ड इनामी राशि का भी हकदार बन गया। फाइनल में अर्जेंटीना को 1-0 से हराकर दूसरी बार विश्व चैंपियन बनने वाली स्पेनिश टीम पर करोड़ों रुपए की बारिश हुई। फीफा ने चैंपियन टीम को 50 मिलियन डॉलर यानी भारतीय मुद्रा में करीब 480 करोड़ रुपए की पुरस्कार राशि प्रदान की। पिछले विश्व कप की तुलना में इस बार विजेता टीम की इनामी राशि में 8 मिलियन डॉलर की बढ़ोतरी की गई थी जिससे इस जीत का महत्व और भी बढ़ गया।

    फाइनल में हारने के बावजूद अर्जेंटीना भी खाली हाथ नहीं लौटा। उपविजेता टीम को 33 मिलियन डॉलर यानी लगभग 318 करोड़ रुपए की इनामी राशि मिली। वहीं तीसरे स्थान पर रहने वाली इंग्लैंड को 29 मिलियन डॉलर यानी करीब 279 करोड़ रुपए और चौथे स्थान पर रही फ्रांस को 27 मिलियन डॉलर यानी लगभग 260 करोड़ रुपए दिए गए। क्वार्टर फाइनल तक पहुंचने वाली प्रत्येक टीम को 19 मिलियन डॉलर जबकि प्री क्वार्टर फाइनल यानी राउंड ऑफ 16 में बाहर होने वाली टीमों को 15 मिलियन डॉलर की पुरस्कार राशि दी गई।

    फाइनल मुकाबला बेहद रोमांचक रहा। निर्धारित 90 मिनट तक दोनों टीमें कोई गोल नहीं कर सकीं और मुकाबला अतिरिक्त समय में पहुंच गया। मैच का फैसला 106वें मिनट में हुआ जब स्पेन के स्टार खिलाड़ी फेरान टोरेस ने शानदार गोल दागकर अपनी टीम को 1-0 की बढ़त दिलाई। यही गोल निर्णायक साबित हुआ और स्पेन ने 16 वर्षों बाद एक बार फिर विश्व कप ट्रॉफी अपने नाम कर ली। इससे पहले स्पेन ने वर्ष 2010 में पहली बार फुटबॉल विश्व कप का खिताब जीता था।

    पूरे टूर्नामेंट में स्पेन का प्रदर्शन संतुलित और अनुशासित रहा। टीम की मजबूत रक्षापंक्ति उसकी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी। स्पेन ने पूरे विश्व कप अभियान में केवल एक गोल खाया जो उसकी शानदार डिफेंसिव रणनीति का प्रमाण है। आक्रमण और रक्षा के बेहतरीन तालमेल ने टीम को लगातार जीत दिलाई और आखिरकार विश्व विजेता बना दिया।

    स्पेन की सफलता में मिडफील्डर रोड्री की भूमिका भी बेहद अहम रही। पूरे टूर्नामेंट में उनके शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें प्रतियोगिता का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया और प्रतिष्ठित गोल्डन बॉल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। रोड्री ने अपनी सूझबूझ शानदार पासिंग और खेल पर नियंत्रण की क्षमता से स्पेन के अभियान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

    विश्व कप 2026 का समापन स्पेन की ऐतिहासिक जीत के साथ हुआ जिसने एक बार फिर साबित कर दिया कि मजबूत टीम वर्क अनुशासित खेल और प्रभावी रणनीति किसी भी बड़े टूर्नामेंट में सफलता की सबसे बड़ी कुंजी होती है।

  • इंग्लैंड दौरे की हार भुलाकर नई चुनौती को तैयार टीम इंडिया, 23 जुलाई से जिम्बाब्वे के खिलाफ टी20 सीरीज अब

    इंग्लैंड दौरे की हार भुलाकर नई चुनौती को तैयार टीम इंडिया, 23 जुलाई से जिम्बाब्वे के खिलाफ टी20 सीरीज अब


    नई दिल्ली। इंग्लैंड दौरे पर टी20 और वनडे दोनों सीरीज गंवाने के बाद भारतीय क्रिकेट टीम के पास ज्यादा आराम का समय नहीं है। टीम अब नई ऊर्जा और नए इरादों के साथ जिम्बाब्वे दौरे के लिए तैयार है जहां 23 जुलाई से तीन मैचों की टी20 सीरीज खेली जाएगी। इस सीरीज को भारतीय टीम के लिए सिर्फ वापसी का मौका ही नहीं बल्कि युवा खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा साबित करने का बड़ा मंच भी माना जा रहा है। क्रिकेट प्रेमियों की सबसे ज्यादा नजर युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी पर रहेगी जिनसे विस्फोटक प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है।

    जिम्बाब्वे दौरे के लिए भारतीय टीम की कमान श्रेयस अय्यर को सौंपी गई है। इंग्लैंड दौरे का हिस्सा रहे खिलाड़ी सीधे वहीं से जिम्बाब्वे रवाना होंगे जबकि बाकी खिलाड़ी और सहयोगी स्टाफ पहले ही टीम के साथ जुड़ चुके हैं। अंतरिम मुख्य कोच वीवीएस लक्ष्मण की देखरेख में टीम इस सीरीज में नई शुरुआत करने के इरादे से मैदान पर उतरेगी।

    भारत और जिम्बाब्वे के बीच तीनों मुकाबले हरारे स्पोर्ट्स क्लब में खेले जाएंगे। पहला मैच 23 जुलाई दूसरा मुकाबला 25 जुलाई और तीसरा तथा अंतिम टी20 26 जुलाई को खेला जाएगा। सभी मैच भारतीय समयानुसार शाम 4 बजकर 30 मिनट पर शुरू होंगे जबकि टॉस आधा घंटा पहले होगा। लगातार तीन मुकाबलों की इस छोटी सीरीज में टीम इंडिया के पास अपनी गलतियों को सुधारने और आत्मविश्वास वापस हासिल करने का शानदार अवसर होगा।

    भारतीय टीम में अनुभवी और युवा खिलाड़ियों का संतुलित मिश्रण देखने को मिलेगा। कप्तान श्रेयस अय्यर के साथ उपकप्तान तिलक वर्मा बल्लेबाजी की जिम्मेदारी संभालेंगे। ईशान किशन और प्रभसिमरन सिंह विकेटकीपर की भूमिका में रहेंगे जबकि अभिषेक शर्मा रिंकू सिंह शिवम दुबे और वैभव सूर्यवंशी जैसे आक्रामक बल्लेबाज टीम की ताकत बढ़ाएंगे। गेंदबाजी विभाग में वरुण चक्रवर्ती मयंक यादव यश ठाकुर प्रिंस यादव अशोक शर्मा और हर्ष दुबे जैसे युवा गेंदबाज विपक्षी बल्लेबाजों को चुनौती देंगे।

    इंग्लैंड दौरे पर भारतीय टीम का प्रदर्शन उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा था। पहले आयरलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में हार मिली फिर इंग्लैंड ने टी20 और वनडे दोनों सीरीज अपने नाम कर ली। ऐसे में जिम्बाब्वे दौरा टीम इंडिया के लिए आत्मविश्वास लौटाने का सुनहरा अवसर माना जा रहा है। खासकर उन खिलाड़ियों के लिए जो आने वाले बड़े टूर्नामेंटों में अपनी जगह मजबूत करना चाहते हैं।

    इस सीरीज का एक बड़ा आकर्षण युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी होंगे जिन्होंने घरेलू और फ्रेंचाइजी क्रिकेट में अपने आक्रामक अंदाज से सभी का ध्यान खींचा है। फैंस को उम्मीद है कि वह जिम्बाब्वे के खिलाफ अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से टीम इंडिया को मजबूत शुरुआत दिलाएंगे और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी छाप छोड़ेंगे।

    भारतीय दर्शकों के लिए इस सीरीज की लाइव स्ट्रीमिंग फैनकोड के प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहेगी। क्रिकेट प्रेमियों को उम्मीद है कि इंग्लैंड दौरे की निराशा पीछे छोड़कर टीम इंडिया जिम्बाब्वे में जीत के साथ नए अभियान की शुरुआत करेगी और युवा सितारे अपने प्रदर्शन से भविष्य के लिए मजबूत दावेदारी पेश करेंगे।