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  • सीरीज जीत की जंग शुरू लॉर्ड्स वनडे में इंग्लैंड पहले बल्लेबाजी पर उतरा बुमराह की गैरमौजूदगी बढ़ाएगी भारत की चुनौती

    सीरीज जीत की जंग शुरू लॉर्ड्स वनडे में इंग्लैंड पहले बल्लेबाजी पर उतरा बुमराह की गैरमौजूदगी बढ़ाएगी भारत की चुनौती


    नई दिल्ली । भारत और इंग्लैंड के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज का निर्णायक मुकाबला लंदन के ऐतिहासिक लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड में शुरू हो गया है। सीरीज फिलहाल 1-1 की बराबरी पर है और ऐसे में तीसरा मुकाबला दोनों टीमों के लिए करो या मरो जैसा बन गया है। टॉस जीतकर इंग्लैंड के कप्तान हैरी ब्रूक ने पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया है। उनका मानना है कि पिच बल्लेबाजी के लिए अनुकूल दिखाई दे रही है और पहले बड़ा स्कोर बनाकर टीम दबाव बनाने की कोशिश करेगी।

    टॉस के दौरान हैरी ब्रूक ने बताया कि इंग्लैंड की टीम में एक बदलाव किया गया है। साकिब महमूद की जगह तेज गेंदबाज जोश टंग की टीम में वापसी हुई है। इंग्लैंड की कोशिश होगी कि घरेलू परिस्थितियों का पूरा फायदा उठाकर सीरीज अपने नाम की जाए।

    भारतीय कप्तान शुभमन गिल ने कहा कि यदि टॉस उनके पक्ष में आता तो वह भी पहले गेंदबाजी करना पसंद करते। उन्होंने बताया कि टीम को बड़ा झटका लगा है क्योंकि तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह घुटने की चोट के कारण इस अहम मुकाबले का हिस्सा नहीं हैं। उनकी जगह टीम में अर्शदीप सिंह को मौका दिया गया है जबकि केएल राहुल और प्रिंस यादव भी अंतिम एकादश में शामिल किए गए हैं।

    बुमराह की अनुपस्थिति भारतीय गेंदबाजी आक्रमण के लिए बड़ी चुनौती मानी जा रही है। डेथ ओवरों में उनकी सटीक गेंदबाजी और शुरुआती सफलता दिलाने की क्षमता टीम के लिए बेहद अहम रही है। अब अर्शदीप सिंह प्रसिद्ध कृष्णा और अन्य युवा गेंदबाजों पर इंग्लैंड के मजबूत बल्लेबाजी क्रम को रोकने की जिम्मेदारी होगी।

    भारतीय बल्लेबाजी की बात करें तो अनुभवी रोहित शर्मा और विराट कोहली पर बड़ी जिम्मेदारी होगी। रोहित शर्मा पिछले दोनों मुकाबलों में बड़ी पारी खेलने में सफल नहीं रहे हैं जबकि विराट कोहली से भी निर्णायक मुकाबले में अहम योगदान की उम्मीद रहेगी। कप्तान शुभमन गिल और मध्यक्रम में श्रेयस अय्यर तथा ईशान किशन की भूमिका भी काफी महत्वपूर्ण होगी।

    दूसरी ओर इंग्लैंड की बल्लेबाजी में जो रूट सबसे बड़े खतरे के रूप में मौजूद हैं। उन्होंने पिछले दोनों मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन किया है और दूसरे वनडे में नाबाद 99 रन बनाकर टीम को जीत दिलाई थी। इसके अलावा कप्तान हैरी ब्रूक जोस बटलर और बेन डकेट भी इंग्लैंड की बल्लेबाजी को मजबूती देते हैं।

    अब सभी की नजरें इस निर्णायक मुकाबले पर हैं जहां जीतने वाली टीम सीरीज अपने नाम करेगी। लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर दोनों टीमों के बीच कांटे की टक्कर की उम्मीद की जा रही है।

  • मेसी या यामल किसके सिर सजेगा ताज फीफा वर्ल्ड कप फाइनल से पहले फैंस की भविष्यवाणियों ने बढ़ाया रोमांच

    मेसी या यामल किसके सिर सजेगा ताज फीफा वर्ल्ड कप फाइनल से पहले फैंस की भविष्यवाणियों ने बढ़ाया रोमांच


    नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप 2026 के फाइनल मुकाबले को लेकर दुनिया भर के साथ भारत में भी फुटबॉल प्रेमियों का उत्साह चरम पर पहुंच गया है। स्पेन और अर्जेंटीना के बीच होने वाले खिताबी मुकाबले से पहले प्रशंसक अपनी अपनी पसंदीदा टीम की जीत की भविष्यवाणी कर रहे हैं। किसी को लियोनेल मेसी के अनुभव और जादुई खेल पर भरोसा है तो कोई स्पेन की युवा टीम और मजबूत डिफेंस को ट्रॉफी का सबसे बड़ा दावेदार मान रहा है।

    देश के अलग अलग राज्यों से फुटबॉल प्रेमियों ने फाइनल को लेकर अपनी राय साझा की है। केरल के मलप्पुरम के एक प्रशंसक का मानना है कि स्पेन शानदार प्रदर्शन करते हुए अर्जेंटीना को 2-1 से हराकर विश्व चैंपियन बनेगा। उनका कहना है कि स्पेन की टीम पूरे टूर्नामेंट में संतुलित और आक्रामक फुटबॉल खेलती नजर आई है और फाइनल में भी वही लय बरकरार रहेगी।

    वहीं कई प्रशंसकों को भरोसा है कि अर्जेंटीना लगातार दूसरी बार विश्व कप जीतकर नया इतिहास रचेगा। उनका मानना है कि लियोनेल मेसी बड़े मुकाबलों के खिलाड़ी हैं और फाइनल में एक बार फिर अपने अनुभव और शानदार खेल से टीम को जीत दिला सकते हैं। कुछ फैंस का कहना है कि यदि यह मेसी का आखिरी विश्व कप है तो वह इसे यादगार बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।

    राजस्थान के कोटा के एक युवा प्रशंसक ने स्पेन की युवा ब्रिगेड की तारीफ करते हुए कहा कि टीम का डिफेंस बेहद मजबूत है और युवा स्टार लामिन यामल फाइनल में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। वहीं कुछ अन्य प्रशंसकों का मानना है कि स्पेन की तेज रफ्तार और अनुशासित फुटबॉल अनुभवी अर्जेंटीना पर भारी पड़ सकती है।

    दूसरी ओर गुजरात के राजकोट की फुटबॉल प्रशंसक दिशा ने अर्जेंटीना की जीत की भविष्यवाणी की है। वहीं कुंजल नाम के एक अन्य प्रशंसक ने कहा कि अर्जेंटीना की जीत की संभावना लगभग 60 प्रतिशत है जबकि स्पेन के जीतने के 40 प्रतिशत अवसर हैं। उनका मानना है कि अर्जेंटीना ने पूरे टूर्नामेंट में कठिन परिस्थितियों से उबरकर कई शानदार जीत दर्ज की हैं और टीम का आत्मविश्वास काफी मजबूत है।

    कुछ फुटबॉल प्रेमियों का यह भी कहना है कि स्पेन के युवा खिलाड़ी इस बार बड़ा उलटफेर कर सकते हैं और विश्व फुटबॉल में नए युग की शुरुआत कर सकते हैं। वहीं अर्जेंटीना समर्थकों का विश्वास है कि मेसी की कप्तानी में टीम लगातार दूसरी बार विश्व कप जीतकर इतिहास रचने में सफल रहेगी।

    अब सभी की निगाहें इस महामुकाबले पर टिकी हैं जहां एक ओर स्पेन 16 साल बाद विश्व कप ट्रॉफी जीतने की कोशिश करेगा तो दूसरी ओर अर्जेंटीना लगातार दूसरी बार विश्व चैंपियन बनने के इरादे से मैदान में उतरेगा। आखिरकार ट्रॉफी किसके हाथ लगेगी इसका फैसला मैदान पर दोनों टीमों के प्रदर्शन से होगा।

  • बेंगलुरु में देर रात तक फुटबॉल का जश्न फीफा फाइनल की स्क्रीनिंग को हरी झंडी पुलिस ने बढ़ाई फूड सर्विस की समय सीमा

    बेंगलुरु में देर रात तक फुटबॉल का जश्न फीफा फाइनल की स्क्रीनिंग को हरी झंडी पुलिस ने बढ़ाई फूड सर्विस की समय सीमा


    नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप 2026 के बहुप्रतीक्षित फाइनल मुकाबले से पहले कर्नाटक सरकार ने फुटबॉल प्रशंसकों को बड़ी राहत देते हुए सार्वजनिक स्क्रीनिंग की अनुमति दे दी है। सरकार के इस फैसले के बाद बेंगलुरु सहित राज्य के विभिन्न हिस्सों में फुटबॉल प्रेमी बड़े पर्दे पर स्पेन और अर्जेंटीना के बीच होने वाले खिताबी मुकाबले का आनंद ले सकेंगे। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने स्क्रीनिंग की मंजूरी की घोषणा करते हुए सभी प्रशंसकों से शांति और अनुशासन बनाए रखने की अपील की है।

    मुख्यमंत्री ने मीडिया से बातचीत में कहा कि बड़ी संख्या में युवाओं और खेल प्रेमियों की ओर से उन्हें लगातार संदेश और अनुरोध मिल रहे थे। लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हुए सरकार ने विश्व कप फाइनल की सार्वजनिक स्क्रीनिंग की अनुमति देने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि लोग इस ऐतिहासिक मुकाबले का उत्साहपूर्वक आनंद लें लेकिन कानून व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा का पूरा ध्यान रखें।

    डी.के. शिवकुमार ने कहा कि सभी प्रशंसक जिम्मेदारी के साथ व्यवहार करें और किसी भी स्थिति में शांति भंग न होने दें। उन्होंने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस ने व्यापक इंतजाम किए हैं और संवेदनशील स्थानों पर निगरानी के लिए कैमरे लगाए गए हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि जीत और हार को खेल भावना के साथ स्वीकार करें और किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचें।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि बेंगलुरु और कर्नाटक अपनी शांतिप्रिय संस्कृति के लिए जाने जाते हैं और फुटबॉल प्रेमियों को भी उसी पहचान को कायम रखना चाहिए। उन्होंने सभी युवाओं खेल प्रेमियों और फुटबॉल प्रशंसकों से अपील की कि वे जिम्मेदारी के साथ मैच का आनंद लें और खेल को उत्सव की तरह मनाएं।

    विश्व कप फाइनल को लेकर बेंगलुरु पुलिस ने भी विशेष व्यवस्था की है। पुलिस प्रशासन ने शहर के रेस्तरां और फूड आउटलेट्स को रात देर तक भोजन सेवा जारी रखने की अनुमति दी है ताकि मैच देखने पहुंचे लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। इसके तहत कई प्रतिष्ठानों को सुबह साढ़े तीन बजे तक फूड सर्विस जारी रखने की अनुमति दी गई है।

    फीफा वर्ल्ड कप 2026 का फाइनल मुकाबला स्पेन और मौजूदा चैंपियन अर्जेंटीना के बीच सोमवार तड़के भारतीय समयानुसार रात 12 बजकर 30 मिनट पर खेला जाएगा। स्पेन ने सेमीफाइनल में फ्रांस को हराकर फाइनल में प्रवेश किया है जबकि अर्जेंटीना लगातार दूसरी बार विश्व कप जीतने के लक्ष्य के साथ मैदान में उतरेगी। पूरी दुनिया की नजर अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी और स्पेन की युवा टीम के प्रदर्शन पर टिकी हुई है।

  • सात साल का इंतजार खत्म पीवी सिंधु ने जापान ओपन जीतकर फिर बुलंद किया भारत का परचम

    सात साल का इंतजार खत्म पीवी सिंधु ने जापान ओपन जीतकर फिर बुलंद किया भारत का परचम


    नई दिल्ली । भारतीय बैडमिंटन की स्टार खिलाड़ी और दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधु ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का गौरव बढ़ाया है। सिंधु ने जापान ओपन सुपर 750 बैडमिंटन टूर्नामेंट का खिताब जीतकर इतिहास रच दिया। टोक्यो में खेले गए फाइनल मुकाबले में उन्होंने मेजबान जापान की चार बार की चैंपियन अकाने यामागुची को सीधे गेमों में 21-17 और 21-17 से हराकर ट्रॉफी अपने नाम कर ली। इस जीत के साथ सिंधु जापान ओपन का खिताब जीतने वाली पहली भारतीय शटलर बन गई हैं।

    यह जीत सिंधु के करियर के लिए बेहद खास मानी जा रही है। दिसंबर 2024 में सैयद मोदी इंटरनेशनल जीतने के बाद यह उनका पहला बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर खिताब है। साथ ही सुपर 750 या उससे ऊपर के स्तर का खिताब जीतने का उनका सात वर्षों का लंबा इंतजार भी समाप्त हो गया।

    फाइनल मुकाबले में सिंधु ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया। उन्होंने शुरुआती अंक तेजी से जुटाकर बढ़त बनाई। हालांकि अकाने यामागुची ने शानदार वापसी करते हुए मुकाबले को बराबरी पर ला दिया। दोनों खिलाड़ियों के बीच लंबे और रोमांचक रैलियों का दौर चलता रहा। पहले गेम में एक समय स्कोर 17-17 से बराबर था लेकिन सिंधु ने दबाव में बेहतरीन संयम दिखाते हुए लगातार चार अंक हासिल किए और पहला गेम 21-17 से अपने नाम कर लिया।

    दूसरे गेम में भी भारतीय स्टार ने अपनी लय बरकरार रखी। उन्होंने शुरुआत में ही मजबूत बढ़त बना ली और लगातार आक्रामक स्मैश तथा सटीक शॉट्स से यामागुची पर दबाव बनाए रखा। जापानी खिलाड़ी ने वापसी की कोशिश करते हुए स्कोर 18-17 तक पहुंचाया लेकिन सिंधु ने अनुभव का शानदार परिचय दिया और लगातार तीन अंक जीतकर मुकाबला समाप्त कर दिया। 21-17 से दूसरा गेम जीतते ही सिंधु ने खिताब पर कब्जा जमा लिया।

    पूरे टूर्नामेंट में सिंधु का प्रदर्शन शानदार रहा। प्री क्वार्टर फाइनल में उन्होंने विश्व की पांचवें नंबर की खिलाड़ी हान यू को हराया। इसके बाद क्वार्टर फाइनल और सेमीफाइनल में उनकी प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ियों के चोटिल होकर हटने से उन्हें राहत जरूर मिली लेकिन फाइनल में उन्होंने अपने दमदार खेल से साबित कर दिया कि वह फिर से अपनी सर्वश्रेष्ठ लय में लौट चुकी हैं।

    यह खिताबी जीत भारतीय बैडमिंटन के लिए भी बड़ी उपलब्धि है। लंबे समय बाद सिंधु ने बड़े मंच पर खिताब जीतकर यह संदेश दिया है कि वह आने वाले विश्व स्तरीय टूर्नामेंटों में भी मजबूत दावेदार रहेंगी। उनकी इस सफलता से भारतीय बैडमिंटन को नई ऊर्जा मिली है और युवा खिलाड़ियों के लिए भी यह बड़ी प्रेरणा साबित होगी।

  • बेलिंगहम का ऐतिहासिक कारनामा हैरी केन और गैरी लाइनकर का रिकॉर्ड तोड़कर बनाया नया इतिहास

    बेलिंगहम का ऐतिहासिक कारनामा हैरी केन और गैरी लाइनकर का रिकॉर्ड तोड़कर बनाया नया इतिहास


    नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप 2026 में इंग्लैंड के स्टार मिडफील्डर जूड बेलिंगहम ने अपने शानदार प्रदर्शन से इतिहास रच दिया है। तीसरे स्थान के मुकाबले में फ्रांस के खिलाफ गोल करते ही बेलिंगहम विश्व कप के एक ही संस्करण में इंग्लैंड की ओर से सबसे अधिक गोल करने वाले पहले खिलाड़ी बन गए। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने इंग्लिश फुटबॉल के दो दिग्गज खिलाड़ियों हैरी केन और गैरी लाइनकर का रिकॉर्ड भी पीछे छोड़ दिया।

    फ्रांस के खिलाफ खेले गए रोमांचक मुकाबले में बेलिंगहम ने इंजरी टाइम में इंग्लैंड का छठा गोल दागकर टीम की 6-4 की यादगार जीत पर मुहर लगा दी। यह उनके लिए केवल जीत का गोल नहीं था बल्कि इतिहास रचने वाला सातवां गोल भी साबित हुआ। इसी के साथ उन्होंने विश्व कप के एक संस्करण में इंग्लैंड के लिए सबसे अधिक गोल करने का नया कीर्तिमान अपने नाम कर लिया।

    इससे पहले यह रिकॉर्ड हैरी केन और गैरी लाइनकर के नाम संयुक्त रूप से दर्ज था। हैरी केन ने 2018 और 2026 विश्व कप में छह छह गोल किए थे जबकि गैरी लाइनकर ने 1986 विश्व कप में छह गोल दागे थे। बेलिंगहम ने सात गोल कर दोनों महान खिलाड़ियों को पीछे छोड़ते हुए नया इतिहास रच दिया।

    फ्रांस के खिलाफ मुकाबले में इंग्लैंड ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया। तीसरे मिनट में डेक्लान राइस ने शानदार गोल कर टीम को बढ़त दिलाई। इसके बाद 18वें मिनट में एजरी कोन्सा ने दूसरा गोल किया। पहले हाफ में बुकायो साका ने दो गोल दागकर इंग्लैंड को 4-0 की मजबूत बढ़त दिला दी।

    हालांकि दूसरे हाफ में फ्रांस ने जोरदार वापसी की। कप्तान किलियन एम्बाप्पे ने दो गोल किए जबकि ब्रैडली बारकोला ने भी एक गोल दागकर मुकाबले को रोमांचक बना दिया। स्कोर 4-3 तक पहुंच गया लेकिन 87वें मिनट में साका ने पेनल्टी को गोल में बदलकर इंग्लैंड की बढ़त फिर मजबूत कर दी। इंजरी टाइम में उस्मान डेम्बेले ने फ्रांस के लिए चौथा गोल किया लेकिन अंतिम क्षणों में जूड बेलिंगहम ने गोल कर इंग्लैंड की जीत सुनिश्चित कर दी।

    इंग्लैंड ने यह मुकाबला 6-4 से जीतकर फीफा वर्ल्ड कप 2026 में तीसरा स्थान हासिल किया और ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। वर्ष 1966 में विश्व कप जीतने के बाद यह विश्व कप इतिहास में इंग्लैंड का दूसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन माना जा रहा है। बेलिंगहम की रिकॉर्डतोड़ उपलब्धि ने इस जीत को और भी ऐतिहासिक बना दिया है।

  • फीफा वर्ल्ड कप में इंग्लैंड ने जीता ब्रॉन्ज मेडल 10 गोलों वाले रोमांचक मुकाबले में फ्रांस को 6-4 से हराया

    फीफा वर्ल्ड कप में इंग्लैंड ने जीता ब्रॉन्ज मेडल 10 गोलों वाले रोमांचक मुकाबले में फ्रांस को 6-4 से हराया


    नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप 2026 के तीसरे स्थान के मुकाबले में इंग्लैंड ने शानदार प्रदर्शन करते हुए फ्रांस को 6-4 से हराकर ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम कर लिया। दोनों टीमों के बीच खेला गया यह मुकाबला गोलों की बारिश और रोमांच से भरपूर रहा। पूरे मैच में कुल 10 गोल हुए जो विश्व कप इतिहास में लंबे समय बाद देखने को मिला। वर्ष 1982 के बाद यह पहला अवसर है जब विश्व कप के किसी एक मुकाबले में दोनों टीमों ने मिलकर 10 गोल किए।

    इंग्लैंड ने मैच की शुरुआत बेहद आक्रामक अंदाज में की और शुरुआती मिनटों से ही फ्रांस की रक्षा पंक्ति पर दबाव बनाए रखा। मुकाबले के तीसरे मिनट में डेक्लान राइस ने शानदार लंबी दूरी के शॉट से गोल कर इंग्लैंड को शुरुआती बढ़त दिला दी। इसके बाद 18वें मिनट में एजरी कोन्सा ने कॉर्नर किक पर बेहतरीन हेडर लगाकर स्कोर 2-0 कर दिया।

    पहले हाफ में इंग्लैंड का दबदबा पूरी तरह कायम रहा। बुकायो साका ने शानदार प्रदर्शन करते हुए तीसरा गोल दागा और फिर 43वें मिनट में अपना दूसरा गोल कर टीम की बढ़त 4-0 तक पहुंचा दी। पहले हाफ के अंत तक ऐसा लग रहा था कि मुकाबला पूरी तरह इंग्लैंड के नियंत्रण में है।

    दूसरे हाफ में फ्रांस ने जोरदार वापसी की। कोच द्वारा किए गए बदलावों का असर तुरंत देखने को मिला। 48वें मिनट में कप्तान किलियन एम्बाप्पे ने गोल कर फ्रांस का खाता खोला। इसके बाद 58वें मिनट में ब्रैडली बारकोला ने गोल कर अंतर घटाकर 4-2 कर दिया। कुछ ही देर बाद एम्बाप्पे ने अपना दूसरा गोल दागते हुए स्कोर 4-3 कर दिया और मुकाबले को फिर से रोमांचक बना दिया।

    फ्रांस की वापसी के बीच इंग्लैंड ने धैर्य बनाए रखा। मैच के 87वें मिनट में मिले पेनल्टी अवसर को बुकायो साका ने सफलतापूर्वक गोल में बदलकर अपनी हैट्रिक पूरी की और इंग्लैंड को 5-3 की बढ़त दिला दी। हालांकि इंजरी टाइम में उस्मान डेम्बेले ने गोल कर फ्रांस की उम्मीदें एक बार फिर जगा दीं और स्कोर 5-4 हो गया।

    लेकिन अंतिम क्षणों में जूड बेलिंगहम ने शानदार गोल कर इंग्लैंड की जीत पर मुहर लगा दी। उनके गोल के साथ ही इंग्लैंड ने 6-4 से मुकाबला अपने नाम किया और विश्व कप में तीसरे स्थान के साथ अभियान का शानदार समापन किया।

    यह उपलब्धि इंग्लैंड के लिए बेहद खास मानी जा रही है। वर्ष 1966 में विश्व कप जीतने के बाद यह टूर्नामेंट में टीम का अब तक का दूसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन माना जा रहा है। इस जीत ने इंग्लैंड के युवा खिलाड़ियों के आत्मविश्वास को भी नई ऊंचाई दी है और भविष्य के बड़े टूर्नामेंटों के लिए टीम को मजबूत संदेश दिया है।

  • विश्व कप फाइनल से पहले बदला गोल्डन बूट का गणित, मेसी को खिताब के लिए करना होगा बड़ा कमाल

    विश्व कप फाइनल से पहले बदला गोल्डन बूट का गणित, मेसी को खिताब के लिए करना होगा बड़ा कमाल


    नई दिल्ली ।
    फीफा विश्व कप 2026 अपने अंतिम और सबसे रोमांचक पड़ाव पर पहुंच चुका है। रविवार को अर्जेंटीना और स्पेन के बीच खेले जाने वाले फाइनल मुकाबले से पहले गोल्डन बूट की दौड़ ने फुटबॉल प्रशंसकों की उत्सुकता और बढ़ा दी है। फ्रांस के स्टार स्ट्राइकर किलियन एम्बाप्पे ने तीसरे स्थान के मुकाबले में शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्डन बूट की रेस में बढ़त हासिल कर ली है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या लियोनेल मेसी फाइनल में इतिहास रचते हुए इस प्रतिष्ठित व्यक्तिगत पुरस्कार पर कब्जा जमा पाएंगे।

    तीसरे स्थान के मुकाबले में एम्बाप्पे ने इंग्लैंड के खिलाफ दो गोल दागकर टूर्नामेंट में अपने कुल गोलों की संख्या 10 तक पहुंचा दी। हालांकि फ्रांस को हार का सामना करना पड़ा और टीम का अभियान समाप्त हो गया, लेकिन व्यक्तिगत प्रदर्शन के दम पर एम्बाप्पे गोल्डन बूट की दौड़ में सबसे आगे निकल गए। दूसरी ओर अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी अब तक 8 गोल और 4 असिस्ट के साथ दूसरे स्थान पर हैं। एम्बाप्पे के खाते में भी 4 असिस्ट दर्ज हैं, जिससे फाइनल से पहले उनकी स्थिति और मजबूत हो गई है।

    एम्बाप्पे ने इस विश्व कप में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम की है। उन्होंने विश्व कप इतिहास में सर्वाधिक गोल करने वाले खिलाड़ियों की सूची में नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए अपने कुल विश्व कप गोलों की संख्या 22 तक पहुंचा दी। महज 22 विश्व कप मुकाबलों में यह उपलब्धि हासिल करना उनके शानदार प्रदर्शन का प्रमाण माना जा रहा है। इसके साथ ही वह विश्व कप इतिहास में बिना पेनल्टी के सबसे अधिक गोल करने वाले खिलाड़ियों में भी शीर्ष स्थान पर पहुंच गए हैं। एक ही विश्व कप संस्करण में 10 गोल करने वाले खिलाड़ियों की सूची में भी उन्होंने अपना नाम दर्ज करा लिया है।

    अब अर्जेंटीना और स्पेन के बीच होने वाला फाइनल मुकाबला मेसी के लिए बेहद अहम साबित होने वाला है। मौजूदा आंकड़ों के अनुसार केवल गोलों की बराबरी करना उनके लिए पर्याप्त नहीं होगा। गोल्डन बूट के नियमों में पहले गोल, फिर असिस्ट और उसके बाद मैदान पर बिताए गए कुल मिनटों को देखा जाता है। ऐसे में यदि मेसी फाइनल में केवल दो गोल कर 10 गोल तक पहुंचते हैं और अन्य आंकड़े बराबर रहते हैं, तब भी उन्हें बढ़त मिलना आसान नहीं होगा। इसलिए उन्हें स्पष्ट अंतर के साथ आगे निकलने वाला प्रदर्शन करना होगा।

    गणितीय समीकरणों के अनुसार मेसी को गोल्डन बूट जीतने के लिए फाइनल में असाधारण प्रदर्शन करना होगा। उनके सामने सबसे मजबूत संभावना है कि वह कम से कम तीन गोल दागें या फिर दो गोल के साथ एक या उससे अधिक असिस्ट दर्ज करें, जिससे वह गोल और योगदान दोनों में एम्बाप्पे से आगे निकल सकें। मेसी अपने करियर में कई व्यक्तिगत और टीम सम्मान जीत चुके हैं, लेकिन विश्व कप गोल्डन बूट अब भी उनकी उपलब्धियों की सूची में शामिल नहीं है। ऐसे में स्पेन के खिलाफ होने वाला फाइनल केवल विश्व चैंपियन बनने की लड़ाई नहीं, बल्कि मेसी के लिए अपने करियर की एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करने का भी सुनहरा अवसर होगा।

  • फीफा वर्ल्ड कप 2026: फ्रांस को 6-4 से हराकर इंग्लैंड ने जीता ब्रॉन्ज… बुकायो साका ने लगाई हैट्रिक

    फीफा वर्ल्ड कप 2026: फ्रांस को 6-4 से हराकर इंग्लैंड ने जीता ब्रॉन्ज… बुकायो साका ने लगाई हैट्रिक


    नई दिल्ली
    , फीफा वर्ल्ड कप 2026 (FIFA World Cup 2026) में फैंस को इतिहास का सबसे रोमांचक और हाई-स्कोरिंग मुकाबला (High-scoring match) देखने को मिला. सेमीफाइनल की निराशा को पीछे छोड़ते हुए इंग्लैंड की टीम (England team) ने फ्रांस (France) को एक रोमांच से भरपूर मैच में 6-4 से हराकर वर्ल्ड कप ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया. 1966 में विश्व विजेता बनने के बाद वर्ल्ड कप के इतिहास में इंग्लैंड का यह अब तक का सबसे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है।

    मैच में एक समय इंग्लैंड 4-0 से आगे था, लेकिन दूसरी हाफ में फ्रांस के स्टार फॉरवर्ड किलियन एम्बाप्पे के तूफान ने इंग्लैंड के खेमे में खलबली मचा दी. हालांकि, बुकायो साका की शानदार हैट्रिक और जूड बेलिंगहैम के आखिरी मिनट के जादुई गोल की बदौलत इंग्लैंडने ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम कर लिया।

    मैच की शुरुआत से पहले किसी को भी इतने बड़े स्कोर की उम्मीद नहीं थी. इंग्लैंड ने अपनी शुरुआती प्लेइंग इलेवन में कप्तान हैरी केन और स्टार मिडफील्डर जूड बेलिंगहैम को आराम दिया था, जबकि गोलकीपर जॉर्डन पिकफोर्ड की जगह डीन हेंडरसन को मौका मिला. कप्तान की आर्मबैंड पहने डेक्लान राइस (Declan Rice) ने मैच के शुरू होने के महज ढाई मिनट (2.5 मिनट) के भीतर पहला गोल दागकर फ्रांस को स्तब्ध कर दिया।

    इसके बाद 18वें मिनट में एजरी कोन्सा ने एक शानदार हेडर के जरिए बढ़त को 2-0 कर दिया. इसके बाद शुरू हुआ बुकायो साका का शो, जिन्होंने पहले हाफ के खत्म होने से ठीक पहले दो बैक-टू-बैक गोल दागकर फ्रांस के डिफेंस को पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया और इंग्लैंड को 4-0 की विशाल बढ़त दिला दी।


    दूसरा हाफ: एम्बाप्पे का तूफान

    हाफ-टाइम के बाद मैदान पर पासा पूरी तरह पलट गया. फ्रांसीसी टीम एक नई ऊर्जा के साथ उतरी. दूसरे हाफ के शुरुआती मिनटों में ही किलियन एम्बाप्पे ने इंग्लैंड के डिफेंस को भेदकर फ्रांस का पहला गोल दागा. इसके ठीक बाद 54वें मिनट में ब्रैडली बारकोला ने गेंद को नेट में पहुंचाकर स्कोर 4-2 कर दिया।

    मैच के 66वें मिनट में एम्बाप्पे ने एक और ऐतिहासिक गोल दागा. इस गोल के साथ ही एम्बाप्पे फीफा वर्ल्ड कप के इतिहास में सर्वकालिक सर्वाधिक गोल करने वाले खिलाड़ी बन गए हैं. उन्होंने दिग्गज लियोनेल मेसी को पीछे छोड़ दिया है. इस टूर्नामेंट में यह एम्बाप्पे का 10वां गोल था, जिसके साथ ही वे गोल्डन बूट की रेस में सबसे आगे निकल गए हैं. स्कोर अब 4-3 हो चुका था और फ्रांस बराबरी के बेहद करीब था।


    साका की हैट्रिक और बेलिंगहैम का ‘विनिंग टच’

    जब फ्रांस मैच को पेनल्टी शूटआउट की तरफ ले जाने के लिए लगातार हमले कर रहा था, तभी 87वें मिनट में इंग्लैंड को एक पेनल्टी मिली. दबाव के इस बेहद नाजुक क्षण में बुकायो साका ने गेंद को गोल पोस्ट के दाहिने कोने में डालते हुए अपनी शानदार हैट्रिक पूरी की और इंग्लैंड को 5-3 से आगे कर दिया।

    इंजरी टाइम में फ्रांस के ओस्मान डेम्बेले ने एक बेहतरीन फिनिश के जरिए गोल दागकर स्कोर 5-4 कर दिया और मैच में रोमांच चरम पर पहुंच गया. लेकिन आखिरी मिनटों में मैदान पर उतरे जूड बेलिंगहैम ने एक बेहद खूबसूरत मैदानी गोल दागकर इंग्लैंड की 6-4 से जीत पक्की कर दी।

  • हिटमैन' के एकदिवसीय क्रिकेट से संन्यास की खबरों को बीसीसीआई ने किया खारिज; सचिव देवजीत सैकिया ने भविष्य की योजनाओं पर दी बड़ी प्रतिक्रिया

    हिटमैन' के एकदिवसीय क्रिकेट से संन्यास की खबरों को बीसीसीआई ने किया खारिज; सचिव देवजीत सैकिया ने भविष्य की योजनाओं पर दी बड़ी प्रतिक्रिया

    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम के अनुभवी सलामी बल्लेबाज रोहित शर्मा के एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने की सोशल मीडिया और विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर चल रही अटकलों पर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने पूरी तरह से विराम लगा दिया है। बीसीसीआई के संयुक्त सचिव देवजीत सैकिया ने आधिकारिक तौर पर स्पष्ट किया है कि रविवार को लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर इंग्लैंड के विरुद्ध होने वाला सीरीज का निर्णायक मुकाबला रोहित शर्मा के वनडे करियर का अंतिम मैच कतई नहीं होगा। बोर्ड की इस त्वरित प्रतिक्रिया के बाद स्टार बल्लेबाज के भविष्य को लेकर लगाई जा रही तमाम तरह की मनगढ़ंत कयासबाजियों पर पूरी तरह से रोक लग गई है।

    क्रिकेट जगत में यह प्रशासनिक स्पष्टीकरण उस समय आया जब कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा था कि उनतालीस वर्षीय पूर्व कप्तान इंग्लैंड के खिलाफ अंतिम एकदिवसीय मैच के बाद इस प्रारूप को हमेशा के लिए अलविदा कह सकते हैं। बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी ने इन खबरों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि चयन समिति या बोर्ड के भीतर रोहित शर्मा के अंतिम मैच को लेकर ऐसी कोई भी आधिकारिक चर्चा नहीं हुई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वह भारतीय एकदिवसीय टीम के एक नियमित और अत्यंत महत्वपूर्ण सदस्य हैं और जब तक वह खेल के प्रति प्रतिबद्ध हैं, तब तक देश का प्रतिनिधित्व करते रहेंगे।

    इस प्रकार के विवादों और अफवाहों की शुरुआत मुख्य रूप से तब हुई जब खेल गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई कि राष्ट्रीय चयन समिति और मुख्य कोच गौतम गंभीर वर्ष 2027 में होने वाले आईसीसी पुरुष क्रिकेट विश्व कप की तैयारियों के मद्देनजर टीम में एक बड़े बदलाव की योजना बना रहे हैं। इसके तहत सीमित ओवरों के क्रिकेट में युवा खिलाड़ियों को अधिक अवसर देकर एक दीर्घकालिक ‘ट्रांजिशन फेज’ की शुरुआत करने की बात कही जा रही थी। इसी रणनीतिक बदलाव की खबरों के बीच रोहित शर्मा के संन्यास की खबरों को जोड़कर देखा जाने लगा, जिसे अब बोर्ड ने पूरी तरह से खारिज कर दिया है।

    इसके साथ ही, जारी द्विपक्षीय सीरीज के शुरुआती मुकाबलों में रोहित शर्मा के बल्ले से बड़ी पारियां न निकलने के कारण भी आलोचकों ने उनके स्थान पर सवाल उठाने शुरू कर दिए थे। हालांकि, बीसीसीआई ने संन्यास की खबरों का खंडन करके खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाने का प्रयास किया है, लेकिन रणनीतिक रूप से बोर्ड अधिकारी भी वर्ष 2027 के आगामी विश्व कप में उनकी निश्चित भागीदारी को लेकर कोई भी पक्का आश्वासन देने से बचते नजर आए। इसका अर्थ यह निकाला जा रहा है कि बोर्ड वर्तमान प्रदर्शन के आधार पर ही भविष्य की योजनाओं को आकार देगा।

    वर्तमान में भारत और इंग्लैंड के मध्य खेली जा रही तीन मैचों की एकदिवसीय श्रृंखला बेहद रोमांचक मोड़ पर पहुंच चुकी है, जहां दोनों टीमें बराबरी पर हैं। रविवार को लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड पर होने वाले इस अत्यंत महत्वपूर्ण और खिताबी मुकाबले में रोहित शर्मा भारतीय टीम के लिए पारी की शुरुआत करने मैदान पर उतरेंगे। क्रिकेट प्रशंसकों के लिए यह राहत की बात है कि टीम इंडिया के सबसे आक्रामक बल्लेबाजों में से एक ‘हिटमैन’ बिना किसी मानसिक दबाव के मैदान पर अपनी स्वाभाविक खेल शैली का प्रदर्शन कर सकेंगे, क्योंकि बोर्ड ने उनके भविष्य को लेकर स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है।

  • टी20 वर्ल्ड कप के दौरान डोप टेस्ट में विफल रहे स्पिनर मोहम्मद नवाज; आईसीसी की बड़ी कार्रवाई के बाद रद्द किए गए पिछले कई महीनों के रिकॉर्ड

    टी20 वर्ल्ड कप के दौरान डोप टेस्ट में विफल रहे स्पिनर मोहम्मद नवाज; आईसीसी की बड़ी कार्रवाई के बाद रद्द किए गए पिछले कई महीनों के रिकॉर्ड

    नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट जगत से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां पाकिस्तान राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के अनुभवी स्पिन गेंदबाजी ऑलराउंडर मोहम्मद नवाज पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने एंटी-डोपिंग नियमों के उल्लंघन के मामले में गंभीर अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। डोप परीक्षण के दौरान खिलाड़ी के शरीर में एक प्रतिबंधित पदार्थ के अंश पाए गए थे, जिसके बाद नवाज ने आधिकारिक तौर पर अपनी गलती स्वीकार कर ली है। इस कृत्य के लिए शासी निकाय ने उन पर तीन महीने का निलंबन लागू किया है। हालांकि, खेल नियमों के तहत पुनर्वास कार्यक्रम को सफलतापूर्वक पूरा करने की शर्त पर इस अवधि को कम कर केवल एक महीने किए जाने का विकल्प भी खुला रखा गया है।

    मध्य प्रदेश सहित देश और दुनिया के खेल प्रेमियों के लिए यह घटनाक्रम काफी चौंकाने वाला है। बत्तीस वर्षीय मोहम्मद नवाज का यह डोप परीक्षण इस वर्ष 7 फरवरी को श्रीलंका के कोलंबो में आयोजित आईसीसी मेन्स टी20 वर्ल्ड कप के एक मुकाबले के बाद किया गया था। यह मैच पाकिस्तान और नीदरलैंड्स के बीच खेला गया था, जिसके संपन्न होने के बाद लिए गए जैविक नमूने की जांच रिपोर्ट में कार्बोक्सी-टीएचसी नामक प्रतिबंधित तत्व की पुष्टि हुई थी। आईसीसी की आधिकारिक एंटी-डोपिंग आचार संहिता के अंतर्गत इस विशिष्ट पदार्थ को नशीले या मादक पदार्थों की श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है, जिसके सेवन पर पूरी तरह से प्रतिबंध है।

    वैश्विक क्रिकेट निकाय द्वारा जारी आधिकारिक वक्तव्य के अनुसार, पाकिस्तानी ऑलराउंडर ने अपनी इस प्रशासनिक और नैतिक चूक को बिना किसी प्रतिवाद के स्वीकार कर लिया है। खिलाड़ी ने आईसीसी के समक्ष यह भी प्रमाणित किया कि उक्त प्रतिबंधित पदार्थ का उपयोग प्रतियोगिता की अवधि के बाहर किया गया था और इसका उद्देश्य मैदान पर अपने खेल प्रदर्शन को अनुचित रूप से बेहतर बनाना या कोई अतिरिक्त लाभ प्राप्त करना बिल्कुल नहीं था। इसी तार्किक आधार पर विचार करते हुए आईसीसी ने उन पर अपेक्षाकृत कम समय यानी तीन महीने की अयोग्यता का निर्णय लिया। यह निलंबन 1 मई से प्रभावी माना गया है, क्योंकि इसी तिथि से खिलाड़ी ने स्वैच्छिक रूप से अस्थायी निलंबन स्वीकार कर लिया था।

    शासी निकाय ने यह भी स्पष्ट किया है कि मोहम्मद नवाज ने अपनी निर्धारित सजा को स्वीकार करने के साथ-साथ संस्था द्वारा निर्देशित नशा मुक्ति और पुनर्वास कार्यक्रम में सम्मिलित होने पर पूर्ण सहमति व्यक्त की है। यदि वह आईसीसी के मानकों और चिकित्सा विशेषज्ञों की संतुष्टि के अनुरूप इस संपूर्ण कार्यक्रम को सफलतापूर्वक पूर्ण कर लेते हैं, तो उनके निलंबन की अवधि को तीन महीने से घटाकर केवल एक महीना कर दिया जाएगा। वर्तमान स्थिति के अनुसार, ढाई महीने का समय व्यतीत होने के उपरांत उनके अस्थायी निलंबन को भी हटा लिया गया है, जो पुनर्वास की दिशा में एक प्रगतिशील कदम माना जा रहा है।

    इस पूरे अनुशासनात्मक मामले में खिलाड़ी को सबसे बड़ा झटका उनके व्यक्तिगत रिकॉर्ड्स के मोर्चे पर लगा है। आईसीसी एंटी-डोपिंग कोड के कड़े नियमों के तहत, 7 फरवरी को नीदरलैंड्स के विरुद्ध खेले गए मैच से लेकर 1 मई तक की अवधि के बीच मोहम्मद नवाज द्वारा खेले गए सभी आधिकारिक मुकाबलों के व्यक्तिगत प्रदर्शन और रिकॉर्ड्स को पूरी तरह से रद्द घोषित कर दिया गया है। इसका अर्थ यह है कि इस विशिष्ट समयावधि के दौरान बनाए गए रन या लिए गए विकेटों को अब किसी भी आधिकारिक क्रिकेट सांख्यिकी में मान्यता नहीं दी जाएगी। इस कठोर निर्णय ने एक बार फिर खेल जगत में डोपिंग रोधी नियमों की सर्वोच्चता को सिद्ध किया है।