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  • हार के बाद कप्तान शुभमन गिल का बड़ा खुलासा डेथ ओवरों की खराब गेंदबाजी ने छीनी जीत रोहित की पारी को बताया यादगार

    हार के बाद कप्तान शुभमन गिल का बड़ा खुलासा डेथ ओवरों की खराब गेंदबाजी ने छीनी जीत रोहित की पारी को बताया यादगार


    नई दिल्ली। इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स में खेले गए निर्णायक तीसरे वनडे में 27 रन की हार के साथ भारत ने तीन मैचों की सीरीज 1-2 से गंवा दी। मुकाबला खत्म होने के बाद भारतीय कप्तान शुभमन गिल ने हार के कारणों पर खुलकर बात की और माना कि टीम 45वें ओवर तक मुकाबले में पूरी तरह बनी हुई थी लेकिन आखिरी तीन ओवरों में की गई महंगी गेंदबाजी ने जीत की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। गिल ने यह भी कहा कि शुरुआती ओवरों में अनुशासित गेंदबाजी नहीं होने से इंग्लैंड को बड़ी साझेदारी बनाने का मौका मिल गया जिसका असर पूरे मैच पर पड़ा।

    मैच के बाद गिल ने कहा कि भारतीय टीम की स्थिति 45वें ओवर तक मजबूत थी और खिलाड़ी मुकाबले में वापसी की उम्मीद बनाए हुए थे। हालांकि अंतिम तीन ओवरों में करीब 60 रन खर्च करने से इंग्लैंड विशाल स्कोर तक पहुंच गया। उनके अनुसार यही वह मोड़ था जिसने मैच का रुख पूरी तरह बदल दिया। कप्तान ने माना कि यदि डेथ ओवरों में गेंदबाज बेहतर नियंत्रण रखते तो लक्ष्य काफी हद तक सीमित किया जा सकता था।

    शुभमन गिल ने रन चेज की रणनीति का भी खुलासा किया। उन्होंने बताया कि टीम ने पहले से योजना बनाई थी कि शुरुआती 40 ओवर तक विकेट बचाकर रखे जाएंगे और पावरप्ले के बाद रन गति लगभग छह से साढ़े छह रन प्रति ओवर रखी जाएगी। इसके बाद अंतिम दस ओवरों में तेज बल्लेबाजी करते हुए 100 से 110 रन बनाने का लक्ष्य रखा गया था। गिल का मानना था कि यदि यह योजना पूरी तरह लागू हो जाती तो भारत के पास मुकाबला जीतने का शानदार मौका होता।

    भारतीय कप्तान ने गेंदबाजी विभाग की कमियों पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि पावरप्ले के दौरान गेंदबाजों ने जरूरत से ज्यादा ऑफ स्टंप के बाहर गेंदें फेंकीं जिसका इंग्लैंड के सलामी बल्लेबाजों ने पूरा फायदा उठाया। इससे मेजबान टीम ने शुरुआत से ही दबदबा बना लिया और भारत को लगातार दबाव में रखा। गिल के अनुसार पावरप्ले और डेथ ओवरों की गेंदबाजी दोनों ही विभागों में टीम अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सकी।

    सीरीज हारने के बावजूद शुभमन गिल ने टीम के प्रदर्शन में कई सकारात्मक पहलुओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बल्लेबाजों ने पूरी सीरीज में लगातार रन बनाए और गेंदबाजों ने भी अलग अलग मुकाबलों में विकेट लेकर योगदान दिया। उनके अनुसार यह प्रदर्शन आने वाले महत्वपूर्ण मुकाबलों के लिए टीम का आत्मविश्वास बढ़ाने वाला है और खिलाड़ी अपनी गलतियों से सीख लेकर आगे बेहतर प्रदर्शन करेंगे।

    गिल ने इस दौरान रोहित शर्मा की रिकॉर्डतोड़ बल्लेबाजी की दिल खोलकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि रोहित ने वर्षों से दुनिया के अलग अलग देशों में अपनी बल्लेबाजी का लोहा मनवाया है और लॉर्ड्स में खेली गई 138 रन की पारी भी उसी स्तर की थी। कप्तान ने कहा कि मैच के अंतिम चरण में पिच धीमी हो चुकी थी और ऐसे हालात में इतनी शानदार बल्लेबाजी करना आसान नहीं था। उनके अनुसार रोहित की पारी देखना हर क्रिकेट प्रेमी के लिए किसी खास अनुभव से कम नहीं था।

    गौरतलब है कि इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 50 ओवर में 387 रन का विशाल स्कोर बनाया। बेन डकेट ने 141 रन जबकि जैकब बेथेल ने 91 रन की शानदार पारी खेली। जो रूट ने नाबाद 74 और जोस बटलर ने तेज 41 रन जोड़कर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। जवाब में रोहित शर्मा के 138 रन शुभमन गिल के 77 और विराट कोहली के 74 रन भी भारत को जीत नहीं दिला सके और टीम 360 रन तक ही पहुंच सकी। इस हार के साथ इंग्लैंड ने वनडे सीरीज 2-1 से अपने नाम कर ली।

  • हिटमैन का ऐतिहासिक शतक बेकार इंग्लैंड में तोड़ा अपना ही रिकॉर्ड लेकिन भारत 27 रन से हारा और सीरीज गंवाई

    हिटमैन का ऐतिहासिक शतक बेकार इंग्लैंड में तोड़ा अपना ही रिकॉर्ड लेकिन भारत 27 रन से हारा और सीरीज गंवाई


    नई दिल्ली। भारतीय कप्तान रोहित शर्मा ने इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे वनडे मुकाबले में अपने बल्ले से ऐसा प्रदर्शन किया जिसने एक बार फिर उनकी क्लास और अनुभव की झलक दुनिया को दिखा दी। लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर रोहित ने 138 रन की शानदार शतकीय पारी खेलते हुए न सिर्फ अपनी फॉर्म में दमदार वापसी की बल्कि आठ साल पुराना अपना ही रिकॉर्ड भी तोड़ दिया। हालांकि उनकी यह यादगार पारी भारत को जीत नहीं दिला सकी और टीम को 27 रन से हार का सामना करना पड़ा। इस हार के साथ भारत ने तीन मैचों की वनडे सीरीज 1-2 से गंवा दी जबकि इससे पहले टी20 सीरीज भी इंग्लैंड के नाम रही थी।

    रोहित शर्मा ने अपनी पारी के दौरान शानदार बल्लेबाजी का प्रदर्शन करते हुए 17 चौके और 5 छक्के लगाए। शुरुआत से ही उन्होंने इंग्लैंड के गेंदबाजों पर दबाव बनाए रखा और मैदान के चारों ओर आकर्षक शॉट लगाए। इस पारी के साथ रोहित इंग्लैंड की धरती पर भारत और इंग्लैंड के बीच खेली गई द्विपक्षीय वनडे सीरीज में सबसे बड़ी व्यक्तिगत पारी खेलने वाले बल्लेबाज बन गए। उन्होंने वर्ष 2017 में ट्रेंट ब्रिज में खेली गई अपनी 137 रन की नाबाद पारी का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया और नया इतिहास रच दिया।

    भारतीय पारी की शुरुआत भी शानदार रही। रोहित शर्मा और कप्तान शुभमन गिल ने पहले विकेट के लिए 147 रन की मजबूत साझेदारी कर टीम को बेहतरीन शुरुआत दिलाई। गिल ने 77 रन की शानदार पारी खेली और रोहित का अच्छा साथ निभाया। गिल के आउट होने के बाद विराट कोहली ने भी जिम्मेदारी संभाली और रोहित के साथ दूसरे विकेट के लिए 113 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी की। कोहली ने 60 गेंदों में 74 रन बनाते हुए लक्ष्य का पीछा करने की उम्मीदों को जिंदा रखा।

    पहले दो वनडे मुकाबलों में रोहित शर्मा का बल्ला खामोश रहा था जिसके बाद उनकी फॉर्म को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे। आलोचकों ने उनकी बल्लेबाजी पर सवाल खड़े किए थे लेकिन तीसरे मुकाबले में उन्होंने अपने अनुभव और क्षमता का शानदार प्रदर्शन करते हुए सभी आलोचनाओं का जवाब बल्ले से दिया। उनकी बल्लेबाजी में आत्मविश्वास साफ नजर आया और हर शॉट में पुरानी लय दिखाई दी।

    हालांकि रोहित की शानदार पारी के बावजूद भारतीय टीम लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकी। 388 रन के विशाल लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत निर्धारित 50 ओवर में 7 विकेट पर 360 रन ही बना सका। रोहित गिल और कोहली के अलावा अन्य बल्लेबाज बड़ी साझेदारी नहीं बना सके। ईशान किशन 14 रन बनाकर आउट हो गए जबकि श्रेयस अय्यर बिना खाता खोले पवेलियन लौटे। केएल राहुल केवल 12 रन ही बना सके और अक्षर पटेल भी 2 रन बनाकर सस्ते में आउट हो गए। मध्यक्रम की यही नाकामी भारत की हार की सबसे बड़ी वजह बनी।

    इससे पहले इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 50 ओवर में 3 विकेट के नुकसान पर 387 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। बेन डकेट ने 141 रन की शानदार पारी खेली जबकि जैकब बेथेल ने 91 रन बनाए। अनुभवी बल्लेबाज जो रूट ने नाबाद 74 रन जोड़कर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया और अंत में जोस बटलर ने सिर्फ 13 गेंदों में 41 रन की विस्फोटक पारी खेलकर भारत के सामने बेहद कठिन लक्ष्य खड़ा कर दिया।

    भले ही भारत सीरीज हार गया हो लेकिन रोहित शर्मा की रिकॉर्डतोड़ पारी भारतीय क्रिकेट के लिए सकारात्मक संकेत मानी जाएगी। बड़े मैचों में शानदार प्रदर्शन करने की उनकी क्षमता एक बार फिर साबित हुई है और आने वाले महत्वपूर्ण टूर्नामेंटों से पहले उनका फॉर्म में लौटना टीम इंडिया के लिए राहत की खबर है।

  • खिताबी मुकाबले के बाद हाई वोल्टेज ड्रामा स्पेन अर्जेंटीना के खिलाड़ियों में झड़प मैदान पर मारपीट से मचा हड़कंप

    खिताबी मुकाबले के बाद हाई वोल्टेज ड्रामा स्पेन अर्जेंटीना के खिलाड़ियों में झड़प मैदान पर मारपीट से मचा हड़कंप


    नई दिल्ली। फीफा वर्ल्ड कप 2026 का फाइनल जहां स्पेन की ऐतिहासिक जीत के लिए याद रखा जाएगा वहीं मैच समाप्त होने के बाद मैदान पर हुए विवाद ने भी पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। स्पेन ने अर्जेंटीना को 1-0 से हराकर दूसरी बार विश्व कप का खिताब अपने नाम किया लेकिन अंतिम सीटी बजने के कुछ ही क्षण बाद जश्न का माहौल तनाव में बदल गया। दोनों टीमों के खिलाड़ियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई जो देखते ही देखते धक्का मुक्की और हाथापाई तक पहुंच गई। इस घटना ने विश्व फुटबॉल के सबसे बड़े मंच पर खेल भावना को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए।

    रिपोर्ट के अनुसार मैच समाप्त होने के बाद अर्जेंटीना के मिडफील्डर लिएंड्रो पेरेडेस अपनी टीम की हार के बाद बेहद भावुक और गुस्से में नजर आए। इसी दौरान उनकी स्पेन के खिलाड़ियों से तीखी बहस हुई जो जल्द ही शारीरिक झड़प में बदल गई। बताया गया कि उन्होंने स्पेन के डिफेंडर एरिक गार्सिया का गला पकड़कर धक्का दिया। स्थिति बिगड़ती देख अर्जेंटीना के मुख्य कोच लियोनेल स्कालोनी को मैदान में आकर खिलाड़ियों के बीच बचाव करना पड़ा ताकि मामला और न बढ़े।

    विवाद केवल यहीं तक सीमित नहीं रहा। रिपोर्ट में दावा किया गया कि पेरेडेस ने स्पेन के युवा मिडफील्डर गावी को भी जमीन पर गिरा दिया और उनके चेहरे पर हाथ रखकर धक्का दिया। इसके अलावा यह भी आरोप लगा कि उन्होंने गावी की ओर अपना बूट भी चलाने की कोशिश की। इसी दौरान अर्जेंटीना के डिफेंडर नहुएल मोलिना पर भी स्पेन के खिलाड़ियों के साथ आक्रामक व्यवहार करने का आरोप लगा। कहा गया कि उन्होंने पहले एक स्पेनिश खिलाड़ी के पेट में मुक्का मारा और बाद में स्पेन के कप्तान रोड्री की ओर भी मुक्का चलाने की कोशिश की। हालांकि रोड्री ने संयम बनाए रखा और स्थिति को और बिगड़ने से रोकने का प्रयास किया।

    इस घटना की फुटबॉल जगत में भी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। इंग्लैंड के पूर्व कप्तान एलन शियरर ने प्रसारण के दौरान इस पूरे घटनाक्रम की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि हार का दर्द अपनी जगह है लेकिन मैदान पर हिंसक व्यवहार की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। उनके अनुसार खिलाड़ियों को खेल भावना का सम्मान करना चाहिए और हार को भी गरिमा के साथ स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अंतिम सीटी के बाद अर्जेंटीना के कुछ खिलाड़ियों की प्रतिक्रिया बेहद निराशाजनक रही।

    विवाद यहीं समाप्त नहीं हुआ। रिपोर्टों के अनुसार पुरस्कार वितरण समारोह के दौरान भी अर्जेंटीना के कुछ खिलाड़ियों के व्यवहार पर सवाल उठे। दावा किया गया कि जब स्पेन के खिलाड़ी विश्व कप ट्रॉफी और पदक ग्रहण कर रहे थे तब अर्जेंटीना के कई खिलाड़ी समारोह की ओर पीठ करके खड़े रहे। इंग्लैंड के पूर्व खिलाड़ी स्टुअर्ट पियर्स ने भी इस दृश्य पर आश्चर्य जताते हुए कहा कि विश्व फुटबॉल के सबसे बड़े मंच पर खिलाड़ियों से बेहतर खेल भावना की उम्मीद की जाती है।

    स्पेन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 16 साल बाद विश्व कप का खिताब अपने नाम किया लेकिन फाइनल के बाद हुई यह घटना खेल से अधिक विवादों की वजह बन गई। अब फुटबॉल प्रेमियों की नजर इस बात पर रहेगी कि अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल के जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे घटनाक्रम की समीक्षा कर आगे क्या कदम उठाते हैं। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मौके पर खिलाड़ियों का संयम और खेल भावना ही किसी भी महान टीम की असली पहचान होती है।

  • स्पेन की जीत का देशभर में जश्न अर्जेंटीना की हार पर छलका फैंस का दर्द बोले फाइनल में बेहतर साबित हुई स्पेनिश टीम

    स्पेन की जीत का देशभर में जश्न अर्जेंटीना की हार पर छलका फैंस का दर्द बोले फाइनल में बेहतर साबित हुई स्पेनिश टीम


    नई दिल्ली। फीफा वर्ल्ड कप 2026 के फाइनल में स्पेन की ऐतिहासिक जीत ने दुनिया भर के फुटबॉल प्रेमियों के बीच उत्साह और भावनाओं का अनोखा संगम देखने को मिला। स्पेन ने रोमांचक मुकाबले में अर्जेंटीना को 1-0 से हराकर दूसरी बार विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया। इस जीत के बाद भारत के कई शहरों में स्पेन समर्थकों ने जमकर जश्न मनाया जबकि अर्जेंटीना की हार ने उसके प्रशंसकों को निराश कर दिया। सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक फुटबॉल प्रेमियों की प्रतिक्रियाएं पूरे दिन चर्चा का विषय बनी रहीं।

    स्पेन की ऐतिहासिक जीत के बाद केरल के कोझिकोड जिले के कुट्टियाडी में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। स्पेन के समर्थक सड़कों पर उतर आए और ढोल नगाड़ों के साथ नाचते गाते हुए अपनी खुशी का इजहार किया। जगह जगह आतिशबाजी की गई और समर्थकों ने स्पेन के झंडे लहराते हुए अपनी टीम की शानदार जीत का स्वागत किया। लंबे समय बाद विश्व कप ट्रॉफी जीतने की खुशी ने प्रशंसकों के उत्साह को कई गुना बढ़ा दिया।

    दूसरी ओर अर्जेंटीना के समर्थकों के लिए यह हार बेहद निराशाजनक रही। मुंबई में कई फुटबॉल प्रेमी मैच खत्म होने के बाद मायूस दिखाई दिए। कुछ प्रशंसकों ने माना कि कप्तान लियोनेल मेसी से जिस स्तर के प्रदर्शन की उम्मीद थी वह फाइनल मुकाबले में देखने को नहीं मिला। उनका कहना था कि स्पेन के मजबूत डिफेंस ने मेसी को खुलकर खेलने का अवसर ही नहीं दिया जिसके कारण अर्जेंटीना अपनी आक्रामक रणनीति को प्रभावी ढंग से लागू नहीं कर सका। हालांकि कई प्रशंसकों ने यह भी स्वीकार किया कि पूरी प्रतियोगिता में अर्जेंटीना ने शानदार प्रदर्शन किया और फाइनल तक पहुंचना भी बड़ी उपलब्धि रही।

    मेघालय की राजधानी शिलांग में भी फुटबॉल का जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। राज्य सरकार की ओर से आयोजित विशेष स्क्रीनिंग में बड़ी संख्या में फुटबॉल प्रेमी शामिल हुए और विशाल स्क्रीन पर फाइनल मुकाबले का आनंद लिया। मैच समाप्त होते ही स्पेन समर्थकों ने खुशी का इजहार किया जबकि अर्जेंटीना के प्रशंसकों ने अपनी टीम का उत्साह बढ़ाने के लिए तालियां बजाईं। इस दौरान दोनों टीमों की जर्सी पहने हुए प्रशंसक खेल भावना का शानदार उदाहरण पेश करते नजर आए।

    भारत में बांग्लादेश के उच्चायुक्त मुहम्मद रियाज हमीदुल्लाह ने भी फाइनल मुकाबले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें अर्जेंटीना से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी लेकिन स्पेन ने पूरे मैच में अधिक संतुलित और प्रभावशाली खेल दिखाया। उनके अनुसार स्पेन ने जिस अनुशासन और रणनीति के साथ मुकाबला खेला उसी का परिणाम रहा कि टीम विश्व चैंपियन बनने में सफल रही।

    दिल्ली के फुटबॉल प्रेमियों ने भी स्पेन के प्रदर्शन की खुलकर सराहना की। कई प्रशंसकों का मानना था कि स्पेन ने पूरे मैच में गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा और बेहतर अवसर तैयार किए। वहीं कुछ अर्जेंटीना समर्थकों ने कहा कि उनकी टीम ने फाइनल में जरूरत से ज्यादा रक्षात्मक रणनीति अपनाई और आखिरी दस मिनट में ही आक्रामक खेल दिखाने की कोशिश की जिससे वापसी का मौका नहीं बन सका।

    स्पेन की इस जीत ने एक बार फिर साबित कर दिया कि विश्व फुटबॉल में मजबूत रणनीति अनुशासित डिफेंस और धैर्य सबसे बड़ी ताकत होते हैं। वहीं अर्जेंटीना की हार के बावजूद उसके समर्थकों ने टीम का हौसला बढ़ाते हुए भविष्य में और मजबूत वापसी की उम्मीद जताई। फाइनल के बाद भारत में देखने को मिला यह उत्साह इस बात का प्रमाण है कि फुटबॉल के प्रति भारतीय प्रशंसकों का जुनून लगातार बढ़ रहा है।

  • एम्बाप्पे का गोल्डन रिकॉर्ड दो लगातार विश्व कप में गोल्डन बूट जीतने वाले दुनिया के पहले फुटबॉलर बने फ्रांस के कप्तान

    एम्बाप्पे का गोल्डन रिकॉर्ड दो लगातार विश्व कप में गोल्डन बूट जीतने वाले दुनिया के पहले फुटबॉलर बने फ्रांस के कप्तान


    नई दिल्ली। फीफा वर्ल्ड कप 2026 का समापन स्पेन की ऐतिहासिक खिताबी जीत के साथ हुआ लेकिन व्यक्तिगत उपलब्धियों की बात करें तो सबसे बड़ी चर्चा फ्रांस के कप्तान किलियन एम्बाप्पे के नाम रही। अपनी विस्फोटक फॉर्म और लगातार शानदार प्रदर्शन के दम पर एम्बाप्पे ने इस टूर्नामेंट में गोल्डन बूट अपने नाम किया और इसके साथ ही विश्व फुटबॉल के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया। लगातार दूसरे विश्व कप में गोल्डन बूट जीतने वाले वह दुनिया के पहले खिलाड़ी बन गए हैं। इससे पहले कोई भी फुटबॉलर लगातार दो विश्व कप में सबसे ज्यादा गोल करने का सम्मान हासिल नहीं कर पाया था।

    पूरे टूर्नामेंट में एम्बाप्पे ने अपनी तेज रफ्तार शानदार फिनिशिंग और आक्रामक खेल से विरोधी टीमों के डिफेंस को लगातार परेशान किया। उन्होंने विश्व कप 2026 में कुल 10 गोल दागे और 4 गोल में अपने साथियों की मदद करते हुए असिस्ट भी किए। उनकी यही निरंतरता उन्हें गोल्डन बूट का सबसे बड़ा दावेदार बनाती रही और अंत में उन्होंने इस प्रतिष्ठित पुरस्कार पर कब्जा जमाकर अपनी महानता को फिर साबित कर दिया।

    विश्व कप के दौरान गोल्डन बूट की दौड़ बेहद रोमांचक रही। अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी भी शानदार लय में थे और उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में 8 गोल किए। फाइनल मुकाबले से पहले उम्मीद जताई जा रही थी कि यदि मेसी स्पेन के खिलाफ गोल करते हैं तो वह एम्बाप्पे को कड़ी टक्कर दे सकते हैं। हालांकि स्पेन की मजबूत रक्षापंक्ति ने मेसी को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया और वह फाइनल में गोल करने में सफल नहीं हो सके। इसी के साथ एम्बाप्पे ने गोल्डन बूट की रेस में अपनी बढ़त बरकरार रखी।

    फ्रांस ने भले ही विश्व कप का खिताब नहीं जीता लेकिन तीसरे स्थान के लिए इंग्लैंड के खिलाफ हुए मुकाबले में एम्बाप्पे ने दो शानदार गोल दागकर अपने अभियान का शानदार अंत किया। इन दो गोलों ने उन्हें न केवल मेसी से आगे पहुंचाया बल्कि विश्व कप इतिहास के सबसे सफल गोल स्कोरर का रिकॉर्ड भी उनके नाम कर दिया। अब एम्बाप्पे के नाम फीफा विश्व कप में कुल 22 गोल दर्ज हो चुके हैं जबकि लियोनेल मेसी 21 गोल के साथ दूसरे स्थान पर पहुंच गए हैं। यह उपलब्धि बताती है कि एम्बाप्पे ने बेहद कम उम्र में विश्व फुटबॉल के सबसे बड़े मंच पर कितनी बड़ी छाप छोड़ी है।

    दूसरी ओर विश्व कप का खिताब स्पेन के नाम रहा जिसने फाइनल में अर्जेंटीना को 1-0 से हराकर 16 साल बाद फिर ट्रॉफी पर कब्जा जमाया। दोनों टीमों के बीच निर्धारित समय तक कोई गोल नहीं हुआ और मुकाबला अतिरिक्त समय तक पहुंचा। आखिरकार फेरान टोरेस ने निर्णायक गोल करते हुए स्पेन को दूसरी बार विश्व चैंपियन बना दिया। इस हार के साथ अर्जेंटीना का लगातार दूसरी बार और कुल चौथी बार विश्व कप जीतने का सपना अधूरा रह गया।

    भले ही फ्रांस ट्रॉफी नहीं जीत सका लेकिन किलियन एम्बाप्पे ने अपने प्रदर्शन से यह साबित कर दिया कि वह मौजूदा दौर के सबसे प्रभावशाली फुटबॉलरों में शामिल हैं। लगातार दो विश्व कप में गोल्डन बूट जीतना और विश्व कप इतिहास के सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी बनना उनकी महान उपलब्धियों में शामिल हो गया है। आने वाले वर्षों में भी दुनिया की नजरें इस स्टार स्ट्राइकर के प्रदर्शन पर टिकी रहेंगी।

  • फेरान टोरेस बने स्पेन के महानायक एक्स्ट्रा टाइम के गोल ने अर्जेंटीना से छीना विश्व कप का ताज 16 साल बाद फिर गूंजा स्पेन का परचम

    फेरान टोरेस बने स्पेन के महानायक एक्स्ट्रा टाइम के गोल ने अर्जेंटीना से छीना विश्व कप का ताज 16 साल बाद फिर गूंजा स्पेन का परचम


    नई दिल्ली। फीफा वर्ल्ड कप 2026 का फाइनल फुटबॉल इतिहास के सबसे रोमांचक मुकाबलों में शामिल हो गया जहां स्पेन ने मौजूदा चैंपियन अर्जेंटीना को 1-0 से हराकर दूसरी बार विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया। न्यूयॉर्क न्यू जर्सी स्टेडियम में खेले गए इस हाई वोल्टेज मुकाबले में दोनों टीमों ने जीत के लिए आखिरी सांस तक संघर्ष किया लेकिन आखिरकार एक्स्ट्रा टाइम में सब्स्टीट्यूट खिलाड़ी फेरान टोरेस ने वह गोल दाग दिया जिसने स्पेन को 16 साल बाद फिर दुनिया का सरताज बना दिया। इस जीत के साथ स्पेन ने 2010 की अपनी ऐतिहासिक सफलता को दोहराते हुए विश्व फुटबॉल में एक बार फिर अपनी बादशाहत साबित कर दी।

    फाइनल मुकाबले की शुरुआत से ही स्पेन ने शानदार खेल दिखाया और गेंद पर अपना नियंत्रण बनाए रखा। स्पेनिश खिलाड़ियों ने लगातार आक्रामक फुटबॉल खेलते हुए अर्जेंटीना के गोल पर कई हमले किए लेकिन गोलकीपर एमिलियानो मार्टिनेज बार बार दीवार बनकर सामने आए। उन्होंने कई बेहतरीन बचाव करते हुए अर्जेंटीना को लंबे समय तक मुकाबले में बनाए रखा। दूसरी ओर अर्जेंटीना की टीम अपने स्टार खिलाड़ियों के बावजूद स्पेन के मजबूत डिफेंस को भेदने में सफल नहीं हो सकी। कप्तान लियोनेल मेसी को स्पेनिश डिफेंडरों ने पूरे मुकाबले में खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया जिससे अर्जेंटीना का आक्रमण लगातार दबाव में रहा।

    निर्धारित 90 मिनट तक दोनों टीमों के बीच कोई गोल नहीं हो सका। मुकाबला जितना आगे बढ़ता गया उतना ही रोमांच और तनाव बढ़ता गया। स्टॉपेज टाइम में अर्जेंटीना को बड़ा झटका तब लगा जब मिडफील्डर एंजो फर्नांडीज को दूसरा येलो कार्ड मिलने के बाद मैदान छोड़ना पड़ा। इसके बाद अर्जेंटीना को एक्स्ट्रा टाइम में केवल 10 खिलाड़ियों के साथ खेलना पड़ा जिससे स्पेन को अतिरिक्त बढ़त मिल गई।

    एक्स्ट्रा टाइम के 106वें मिनट में वह पल आया जिसका इंतजार स्पेन के करोड़ों प्रशंसक कर रहे थे। निको विलियम्स के शानदार हेडर से मिली गेंद को फेरान टोरेस ने बेहतरीन तरीके से नियंत्रित किया और बाएं पैर से जोरदार शॉट लगाते हुए गेंद को गोलपोस्ट में पहुंचा दिया। अर्जेंटीना के गोलकीपर मार्टिनेज इस बार भी पूरी कोशिश के बावजूद गेंद को रोक नहीं सके। यही गोल मैच का फैसला साबित हुआ और पूरा स्टेडियम स्पेन के समर्थकों की खुशी से गूंज उठा।

    गोल करने के बाद भी स्पेन ने अपना आक्रमण जारी रखा और एक बार फिर गेंद को जाल में पहुंचाया लेकिन फाउल के कारण गोल को अमान्य घोषित कर दिया गया। इसके बावजूद स्पेनिश खिलाड़ियों ने संयम नहीं खोया और अंतिम सीटी बजने तक अर्जेंटीना को वापसी का कोई मौका नहीं दिया। दूसरी ओर अर्जेंटीना ने आखिरी क्षणों तक बराबरी की कोशिश की लेकिन स्पेन की मजबूत रक्षापंक्ति के सामने उसकी हर रणनीति विफल साबित हुई।

    पूरे टूर्नामेंट में स्पेन का प्रदर्शन शानदार रहा। टीम एक भी मुकाबला नहीं हारी और लगातार संतुलित आक्रमण तथा मजबूत रक्षात्मक खेल के दम पर फाइनल तक पहुंची। फाइनल में भी उसी आत्मविश्वास और अनुशासन का प्रदर्शन करते हुए स्पेन ने विश्व कप ट्रॉफी अपने नाम कर ली। वहीं 2022 की चैंपियन अर्जेंटीना लगातार दूसरी बार खिताब जीतने का सपना पूरा नहीं कर सकी। इस जीत के साथ स्पेन ने दुनिया को यह संदेश दिया कि उसकी नई पीढ़ी विश्व फुटबॉल पर लंबे समय तक राज करने का दम रखती है।

  • फीफा फाइनल का जुनून, केरल में सोमवार को स्कूल-कॉलेज बंद; छात्रों की मांग पर सरकार का बड़ा फैसला

    फीफा फाइनल का जुनून, केरल में सोमवार को स्कूल-कॉलेज बंद; छात्रों की मांग पर सरकार का बड़ा फैसला


    नई दिल्ली । फीफा विश्व कप 2026 के फाइनल मुकाबले से पहले केरल में फुटबॉल का जुनून अपने चरम पर पहुंच गया है। स्पेन और अर्जेंटीना के बीच होने वाले खिताबी मुकाबले को लेकर राज्यभर में ऐसा माहौल है, मानो कोई बड़ा त्योहार मनाया जा रहा हो। फुटबॉल प्रेमियों के इसी उत्साह को देखते हुए केरल सरकार ने सोमवार को सभी सरकारी स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में अवकाश घोषित कर दिया है।

    मुख्यमंत्री वी.डी. सतीसन के निर्देश पर लिया गया यह फैसला छात्रों की लंबे समय से चली आ रही मांग के बाद सामने आया। सोशल मीडिया पर हजारों छात्रों ने देर रात होने वाले फाइनल मुकाबले के कारण अगले दिन छुट्टी देने की अपील की थी। सरकार ने छात्रों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया, ताकि वे बिना किसी चिंता के विश्व कप फाइनल का आनंद ले सकें और अगली सुबह कक्षाओं में उपस्थित होने की परेशानी न झेलें।

    भारतीय समयानुसार स्पेन और अर्जेंटीना के बीच विश्व कप फाइनल सोमवार तड़के 12:30 बजे शुरू होगा। इसी वजह से सरकार ने जनरल एजुकेशन विभाग के अंतर्गत आने वाले सभी स्कूलों और हायर एजुकेशन विभाग के सभी कॉलेजों, विश्वविद्यालयों तथा प्रोफेशनल संस्थानों में अवकाश घोषित किया है।

    उच्च शिक्षा मंत्री रोजी एम. जॉन ने कहा कि यह फैसला छात्रों की सुविधा और खेल के प्रति उनके उत्साह को ध्यान में रखकर लिया गया है। वहीं, सामान्य शिक्षा मंत्री एन. शमसुद्दीन ने सोशल मीडिया पर मजाकिया अंदाज में लिखा, “अब खुश हो, बच्चों?” इस संदेश के साथ उन्होंने छुट्टी की आधिकारिक घोषणा भी की।

    केरल में फुटबॉल की लोकप्रियता किसी परिचय की मोहताज नहीं है। राज्य के शहरों और गांवों में स्पेन और अर्जेंटीना के खिलाड़ियों के विशाल कटआउट लगाए गए हैं। सड़कों और चौराहों पर दोनों टीमों के झंडे, बैनर और सजावटी तोरण द्वार नजर आ रहे हैं। विभिन्न फैन क्लबों ने सार्वजनिक स्क्रीनिंग, एलईडी स्क्रीन, रैलियों और जश्न के विशेष कार्यक्रमों की तैयारियां भी पूरी कर ली हैं। पूरे राज्य में विश्व कप फाइनल को लेकर उत्सव जैसा माहौल बना हुआ है।

    सरकारी घोषणा से पहले एर्नाकुलम सहित कई जिलों के कुछ निजी और सरकारी स्कूल छात्रों तथा अभिभावकों की मांग पर पहले ही छुट्टी घोषित कर चुके थे। राज्य सरकार के फैसले के बाद पूरे केरल में एक समान व्यवस्था लागू हो गई, जिससे किसी प्रकार की असमंजस की स्थिति भी समाप्त हो गई।

    फीफा विश्व कप फाइनल को लेकर केरल में दिख रहा यह उत्साह एक बार फिर साबित करता है कि यहां फुटबॉल सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि लोगों की संस्कृति, भावना और पहचान का अहम हिस्सा है। लाखों फुटबॉल प्रेमी अब देर रात होने वाले इस महामुकाबले का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

  • रोहित-कोहली की ऐतिहासिक साझेदारी, 400 अंतरराष्ट्रीय मैच साथ खेलने वाली पहली भारतीय जोड़ी बनी

    रोहित-कोहली की ऐतिहासिक साझेदारी, 400 अंतरराष्ट्रीय मैच साथ खेलने वाली पहली भारतीय जोड़ी बनी

    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट के दो सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज रोहित शर्मा और विराट कोहली ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम कर ली है। इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स में खेले जा रहे तीसरे और निर्णायक वनडे मुकाबले में मैदान पर उतरते ही दोनों खिलाड़ियों ने एक साथ 400 अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने का रिकॉर्ड बना दिया। इसके साथ ही रोहित और विराट अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में यह मुकाम हासिल करने वाली पहली भारतीय जोड़ी बन गए हैं।

    दोनों दिग्गज पिछले डेढ़ दशक से भारतीय क्रिकेट की रीढ़ रहे हैं। कई यादगार जीत, बड़े टूर्नामेंट और ऐतिहासिक साझेदारियों के गवाह रहे रोहित और विराट की यह उपलब्धि उनकी निरंतरता, फिटनेस और लंबे समय तक टीम में अहम भूमिका निभाने का प्रमाण है।

    हालांकि वैश्विक स्तर पर इस सूची में अभी भी श्रीलंका के दिग्गज खिलाड़ियों का दबदबा कायम है। कुमार संगकारा और महेला जयवर्धने की जोड़ी 550 अंतरराष्ट्रीय मैचों के साथ पहले स्थान पर है। दूसरे स्थान पर महेला जयवर्धने और तिलकरत्ने दिलशान की जोड़ी है, जिसने 426 मुकाबले साथ खेले। तीसरे स्थान पर कुमार संगकारा और तिलकरत्ने दिलशान 418 मैचों के साथ मौजूद हैं, जबकि सनथ जयसूर्या और मुथैया मुरलीधरन की जोड़ी 408 मैचों के साथ चौथे स्थान पर है। दक्षिण अफ्रीका के जैक्स कैलिस और मार्क बाउचर ने 407 मुकाबले साथ खेले हैं। रोहित शर्मा और विराट कोहली 400 मैचों के साथ इस प्रतिष्ठित सूची में छठे स्थान पर पहुंच गए हैं। भारत के ही सचिन तेंदुलकर और राहुल द्रविड़ की जोड़ी 391 मैचों के साथ सातवें स्थान पर है।

    इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बीच भारत और इंग्लैंड के बीच लॉर्ड्स में सीरीज का निर्णायक मुकाबला खेला जा रहा है। इंग्लैंड के कप्तान हैरी ब्रूक ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया। भारतीय टीम को इस मैच में बड़ा झटका तब लगा जब तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह घुटने में सूजन के कारण फिटनेस टेस्ट पास नहीं कर सके और उन्हें अंतिम एकादश से बाहर होना पड़ा। वहीं हैमस्ट्रिंग चोट के कारण वॉशिंगटन सुंदर भी उपलब्ध नहीं रहे।

    भारतीय टीम ने बुमराह और वॉशिंगटन सुंदर की जगह युवा तेज गेंदबाज प्रिंस यादव और अर्शदीप सिंह को मौका दिया, जबकि इंग्लैंड ने अपनी प्लेइंग इलेवन में साकिब महमूद की जगह जोश टंग को शामिल किया।

    रोहित शर्मा और विराट कोहली की 400 मैचों की यह उपलब्धि भारतीय क्रिकेट इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ती है। दोनों खिलाड़ियों ने वर्षों तक अपने शानदार प्रदर्शन, निरंतरता और अनुभव से टीम इंडिया को कई यादगार जीत दिलाई हैं। यह रिकॉर्ड उनकी महान क्रिकेट यात्रा का एक और स्वर्णिम पड़ाव माना जा रहा है।

  • क्रिकेट जगत ने महान ऑलराउंडर सर गैरी सोबर्स को किया नमन, लॉर्ड्स वनडे से पहले रखा गया मौन

    क्रिकेट जगत ने महान ऑलराउंडर सर गैरी सोबर्स को किया नमन, लॉर्ड्स वनडे से पहले रखा गया मौन


    नई दिल्ली । क्रिकेट इतिहास के महानतम ऑलराउंडरों में शुमार सर गारफील्ड गैरी सोबर्स को रविवार को लंदन के ऐतिहासिक लॉर्ड्स क्रिकेट मैदान में भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। भारत और इंग्लैंड के बीच खेले जा रहे तीसरे और निर्णायक वनडे मुकाबले से पहले दोनों टीमों के खिलाड़ियों, मैच अधिकारियों और मैदान पर मौजूद हजारों दर्शकों ने एक मिनट का मौन रखकर महान क्रिकेटर को अंतिम सम्मान दिया। पूरे मुकाबले के दौरान दोनों टीमों के खिलाड़ी काली पट्टी बांधकर मैदान पर उतरे।

    89 वर्ष की आयु में शुक्रवार को सर गैरी सोबर्स के निधन से पूरे क्रिकेट जगत में शोक की लहर है। वेस्टइंडीज क्रिकेट के स्वर्णिम दौर के सबसे बड़े सितारों में शामिल सोबर्स ने अपने खेल से जिस तरह दुनिया को प्रभावित किया, उसकी छाप आज भी क्रिकेट प्रेमियों के दिलों में कायम है। लॉर्ड्स में दी गई यह श्रद्धांजलि उनके इसी असाधारण योगदान का सम्मान थी।

    इंग्लैंड के तेज गेंदबाज जोफ्रा आर्चर ने सोबर्स को याद करते हुए कहा कि वे वेस्टइंडीज क्रिकेट समुदाय के लिए एक महान प्रेरणा थे और अब तक के सबसे बेहतरीन ऑलराउंडरों में गिने जाते हैं। आर्चर ने बताया कि कुछ महीने पहले बारबाडोस में उनकी सोबर्स से मुलाकात हुई थी और उस दौरान भी वे बेहद उत्साही और सकारात्मक नजर आए थे। उनके निधन की खबर ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से गहरा दुख पहुंचाया।

    इंग्लैंड के युवा बल्लेबाज जैकब बेथेल ने भी सर गैरी सोबर्स को श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें एक असाधारण व्यक्तित्व बताया। उन्होंने कहा कि सोबर्स केवल महान क्रिकेटर ही नहीं बल्कि बेहद विनम्र इंसान भी थे। उनके साथ बिताया गया हर पल सीख और प्रेरणा से भरा रहता था। बेथेल ने कहा कि जहां भी सोबर्स मौजूद रहते थे वहां का माहौल अपने आप जीवंत हो जाता था।

    28 जुलाई 1936 को बारबाडोस के ब्रिजटाउन में जन्मे सर गैरी सोबर्स ने 1954 में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया था। बाएं हाथ के बल्लेबाज और बहुमुखी गेंदबाज के रूप में उन्होंने दो दशकों तक वेस्टइंडीज क्रिकेट का नेतृत्व किया। 93 टेस्ट मैचों में उन्होंने 8032 रन बनाए, जिसमें 26 शतक और 30 अर्धशतक शामिल रहे। उनका सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर नाबाद 365 रन रहा, जो लंबे समय तक विश्व रिकॉर्ड भी रहा। गेंदबाजी में उन्होंने 235 टेस्ट विकेट भी अपने नाम किए और अपने हरफनमौला प्रदर्शन से क्रिकेट इतिहास में अमिट पहचान बनाई।

    सर गैरी सोबर्स प्रथम श्रेणी क्रिकेट में एक ओवर में लगातार छह छक्के लगाने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज भी थे। उन्होंने यह ऐतिहासिक उपलब्धि 1968 में हासिल की थी। टेस्ट क्रिकेट में 8000 से अधिक रन और 200 से ज्यादा विकेट लेने वाले चुनिंदा महान ऑलराउंडरों में उनका नाम आज भी सम्मान के साथ लिया जाता है।

    लॉर्ड्स में भारत और इंग्लैंड के खिलाड़ियों द्वारा दी गई श्रद्धांजलि ने यह साबित कर दिया कि सर गैरी सोबर्स केवल वेस्टइंडीज ही नहीं बल्कि पूरी क्रिकेट दुनिया की अमूल्य धरोहर थे। उनका योगदान और विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।

  • कर्नाटक में फीफा वर्ल्ड कप फाइनल का उत्साह, CM डी.के. शिवकुमार भी करेंगे लाइव स्क्रीनिंग में शिरकत

    कर्नाटक में फीफा वर्ल्ड कप फाइनल का उत्साह, CM डी.के. शिवकुमार भी करेंगे लाइव स्क्रीनिंग में शिरकत

     
    नई दिल्ली । फीफा विश्व कप 2026 के फाइनल मुकाबले को लेकर कर्नाटक में फुटबॉल प्रेमियों के बीच जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। राज्य सरकार ने बेंगलुरु में अर्जेंटीना और स्पेन के बीच खेले जाने वाले खिताबी मुकाबले की सार्वजनिक लाइव स्क्रीनिंग को मंजूरी दे दी है। खास बात यह है कि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार भी इस आयोजन में शामिल होकर फुटबॉल प्रेमियों के साथ मैच का रोमांच साझा करेंगे।

    कर्नाटक राज्य फुटबॉल संघ ने बताया कि युवा सशक्तिकरण एवं खेल विभाग के सहयोग से कोरमंगला स्थित एनजीवी इनडोर स्टेडियम में सोमवार तड़के 12:30 बजे से लाइव स्क्रीनिंग का आयोजन किया जाएगा। इसमें बड़ी संख्या में फुटबॉल प्रशंसक, खिलाड़ी, खेल अधिकारी, गणमान्य नागरिक और आम लोग मौजूद रहेंगे।

    मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा कि युवाओं और फुटबॉल प्रेमियों की लगातार मांग को देखते हुए सरकार ने सार्वजनिक स्क्रीनिंग की अनुमति दी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि मैच का आनंद पूरी शालीनता और जिम्मेदारी के साथ लें। किसी भी स्थिति में कानून-व्यवस्था प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरे शहर में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। प्रमुख स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और पुलिस पूरी तरह सतर्क रहेगी। उन्होंने कहा कि जीत और हार खेल का हिस्सा है, इसलिए किसी भी परिणाम के बाद संयम बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।

    सरकार की ओर से बेंगलुरु पुलिस ने भी विशेष व्यवस्था की है। विश्व कप फाइनल को देखते हुए शहर के कई रेस्टोरेंट और फूड आउटलेट्स को देर रात 3:30 बजे तक भोजन सेवा जारी रखने की अनुमति दी गई है, ताकि मैच देखने पहुंचे लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

    इस बार का विश्व कप फाइनल बेहद रोमांचक माना जा रहा है। गत चैंपियन अर्जेंटीना लगातार दूसरी बार फाइनल खेल रही है और अपने चौथे विश्व कप खिताब की तलाश में है। वहीं 2010 की विश्व चैंपियन स्पेन 16 साल बाद फाइनल में पहुंची है और दूसरी बार ट्रॉफी जीतने के इरादे से मैदान में उतरेगी। दुनिया भर के फुटबॉल प्रेमियों की नजर एक बार फिर अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी और स्पेन की युवा टीम के प्रदर्शन पर टिकी रहेगी।

    कर्नाटक सरकार की पहल से यह साफ है कि राज्य में फुटबॉल की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। सार्वजनिक स्क्रीनिंग के जरिए हजारों प्रशंसक एक साथ विश्व फुटबॉल के सबसे बड़े मुकाबले का रोमांच महसूस कर सकेंगे।