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  • एमबाप्पे बनाम यामल की टक्कर विश्व कप सेमीफाइनल में फ्रांस और स्पेन के बीच होगा हाई वोल्टेज मुकाबला

    एमबाप्पे बनाम यामल की टक्कर विश्व कप सेमीफाइनल में फ्रांस और स्पेन के बीच होगा हाई वोल्टेज मुकाबला


    नई दिल्ली । फीफा विश्व कप 2026 अब अपने सबसे रोमांचक दौर में पहुंच चुका है। टूर्नामेंट का पहला सेमीफाइनल मुकाबला मौजूदा यूरोपीय चैंपियन स्पेन और दो बार की विश्व विजेता फ्रांस के बीच खेला जाएगा। टेक्सास के डलास स्टेडियम में होने वाले इस हाई वोल्टेज मुकाबले में दोनों टीमें फाइनल का टिकट हासिल करने के इरादे से मैदान में उतरेंगी। दुनिया भर के फुटबॉल प्रशंसकों की निगाहें इस मुकाबले पर टिकी हैं क्योंकि दोनों टीमों के पास विश्व स्तरीय खिलाड़ी और शानदार फॉर्म मौजूद है।

    फ्रांस लगातार तीसरी बार फीफा विश्व कप के फाइनल में पहुंचने से सिर्फ एक कदम दूर है। कोच डिडियर डेसचैम्प्स की टीम ने पूरे टूर्नामेंट में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। ग्रुप चरण में सेनेगल इराक और नॉर्वे को हराकर फ्रांस ने शानदार शुरुआत की। इसके बाद नॉकआउट चरण में स्वीडन पैराग्वे और मोरक्को जैसी मजबूत टीमों को मात देकर सेमीफाइनल में जगह बनाई। टीम के कप्तान किलियन एमबाप्पे के अलावा ओस्मान डेम्बेले माइकल ओलिस और मार्कस थुरम जैसे खिलाड़ी फ्रांस के आक्रमण को बेहद मजबूत बनाते हैं।

    दूसरी ओर स्पेन ने भी शानदार वापसी करते हुए सेमीफाइनल तक का सफर तय किया है। ग्रुप चरण के पहले मुकाबले में काबो वर्डे के खिलाफ गोलरहित ड्रॉ के बाद टीम ने सऊदी अरब और उरुग्वे को हराकर शीर्ष स्थान हासिल किया। इसके बाद स्पेन ने ऑस्ट्रिया पुर्तगाल और बेल्जियम जैसी मजबूत टीमों को हराकर अंतिम चार में जगह बनाई। युवा स्टार लैमिन यामल पेड्री फैबियन रुइज निको विलियम्स और मिकेल मेरिनो ने टीम की सफलता में अहम भूमिका निभाई है।

    अगर दोनों टीमों के आपसी रिकॉर्ड की बात करें तो अब तक फ्रांस और स्पेन के बीच कुल 38 मुकाबले खेले गए हैं। इनमें स्पेन ने 18 मैच जीते हैं जबकि फ्रांस को 13 मुकाबलों में जीत मिली है। सात मुकाबले ड्रॉ रहे हैं। आंकड़ों के लिहाज से स्पेन का पलड़ा थोड़ा भारी जरूर नजर आता है लेकिन विश्व कप जैसे बड़े मंच पर दोनों टीमें बराबरी की चुनौती पेश करती हैं।

    यह मुकाबला भारतीय समयानुसार बुधवार देर रात 12 बजकर 30 मिनट पर शुरू होगा। भारत में फुटबॉल प्रशंसक इस मैच की लाइव स्ट्रीमिंग जी5 पर देख सकेंगे। वहीं इसका सीधा प्रसारण यूनाइट8 स्पोर्ट्स 1 यूनाइट8 स्पोर्ट्स 1 एचडी यूनाइट8 स्पोर्ट्स 2 और यूनाइट8 स्पोर्ट्स 2 एचडी चैनलों पर किया जाएगा।

    फुटबॉल प्रेमियों के लिए यह मुकाबला किसी फाइनल से कम नहीं माना जा रहा है। एक तरफ किलियन एमबाप्पे की रफ्तार और अनुभव होगा तो दूसरी ओर लैमिन यामल और स्पेन की युवा ब्रिगेड अपनी आक्रामक शैली से चुनौती पेश करेगी। ऐसे में डलास का यह सेमीफाइनल रोमांच चरम पर पहुंचाने वाला मुकाबला साबित हो सकता है और जीतने वाली टीम विश्व कप ट्रॉफी से सिर्फ एक कदम दूर रह जाएगी।

  • विवादों और सदमे के बीच थमीं रॉब डीपरिंक की सांसें: यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद फीफा कप से बाहर हुए रेफरी की मौत से खेल जगत स्तब्ध

    विवादों और सदमे के बीच थमीं रॉब डीपरिंक की सांसें: यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद फीफा कप से बाहर हुए रेफरी की मौत से खेल जगत स्तब्ध

    नई दिल्ली । फुटबॉल जगत अभी दक्षिण अफ्रीका के युवा मिडफील्डर जेडन एडम्स के आकस्मिक निधन के गहरे सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि फीफा विश्व कप 2026 के बीच एक और दुखद खबर ने खेल प्रेमियों को झकझोर कर रख दिया है। विश्व कप के लिए वीडियो असिस्टेंट रेफरी की सूची से बाहर किए गए नीदरलैंड के विख्यात फुटबॉल रेफरी रॉब डीपरिंक का 38 वर्ष की आयु में असामयिक निधन हो गया है। डच रेफरी के इस तरह अचानक दुनिया से चले जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल समुदाय में शोक की लहर दौड़ गई है, हालांकि उनकी मृत्यु के वास्तविक कारणों का खुलासा अभी तक नहीं किया गया है।

    दिवंगत रेफरी रॉब डीपरिंक का करियर शानदार रहा था और वह वर्ष 2017 से नीदरलैंड की शीर्ष घरेलू फुटबॉल लीग ‘एरेडिविजी’ में रेफरी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। हाल ही में संपन्न हुए यूरो कप 2024 में भी उन्होंने वीएआर अधिकारी के तौर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनकी प्रतिभा को देखते हुए ही फीफा ने उन्हें 2026 के महाकुंभ के लिए वीएआर अधिकारियों की मुख्य सूची में शामिल किया था। लेकिन टूर्नामेंट के आगाज से करीब एक महीने पहले लंदन की मेट्रोपॉलिटन पुलिस द्वारा एक नाबालिग के यौन उत्पीड़न के संगीन मामले में की गई उनकी गिरफ्तारी के बाद परिस्थितियां पूरी तरह बदल गईं।

    इस गंभीर आपराधिक मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए फीफा और डच फुटबॉल एसोसिएशन ने कड़ा रुख अपनाया और डीपरिंक को विश्व कप की रेफरी टीम से तत्काल प्रभाव से निष्कासित कर दिया था। हालांकि, बाद में स्थानीय पुलिस और जांच एजेंसियों को उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिले, जिसके चलते इस कानूनी मामले को आधिकारिक तौर पर बंद कर दिया गया था। मामले के बंद होने के बाद डीपरिंक ने अपनी बेगुनाही साबित होने पर राहत की सांस ली थी, लेकिन विश्व कप जैसे प्रतिष्ठित मंच से बाहर किए जाने के फैसले से वह मानसिक रूप से काफी निराश और तनाव में चल रहे थे।

    नीदरलैंड फुटबॉल संघ ने इस दुखद घटनाक्रम पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए एक आधिकारिक शोक संदेश जारी किया है। संघ ने अपने बयान में कहा कि रॉब डीपरिंक के असामयिक निधन की खबर से पूरा खेल जगत स्तब्ध है और देश ने न केवल एक अत्यंत सम्मानित खेल अधिकारी खोया है, बल्कि एक बेहद सहृदय और समर्पित साथी को भी गंवा दिया है। विश्व फुटबॉल की सर्वोच्च शासी निकाय फीफा ने भी डच फुटबॉल संघ और दिवंगत रेफरी के पीड़ित परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं प्रकट की हैं। खेल इतिहास में इस विश्व कप को खिलाड़ियों और अधिकारियों की अप्रत्याशित क्षति के लिए हमेशा याद रखा जाएगा।

  • विराट कोहली की वापसी से बढ़ी ताकत, लेकिन कुलदीप यादव और वॉशिंगटन सुंदर के बीच फंसा प्लेइंग-11 का पेच

    विराट कोहली की वापसी से बढ़ी ताकत, लेकिन कुलदीप यादव और वॉशिंगटन सुंदर के बीच फंसा प्लेइंग-11 का पेच

    नई दिल्ली । टी20 श्रृंखला में 0-4 की एकतरफा और निराशाजनक हार का सामना करने के बाद, भारतीय क्रिकेट टीम अब एक नई शुरुआत के इरादे से मैदान पर उतरने के लिए तैयार है। इंग्लैंड के खिलाफ तीन मैचों की एकदिवसीय श्रृंखला का पहला मुकाबला बर्मिंघम के प्रतिष्ठित एजबेस्टन मैदान पर खेला जाना है। इस मुकाबले में भारतीय टीम प्रबंधन का मुख्य उद्देश्य न केवल एक शानदार जीत दर्ज करना होगा, बल्कि खेल के इस प्रारूप में अपनी बादशाहत को पुनः साबित करना भी होगा। मुख्य कोच गौतम गंभीर और कप्तान शुभमन गिल के लिए यह मुकाबला रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे टी20 श्रृंखला की गलतियों को दोहराने से बचना चाहेंगे।

    इस श्रृंखला के लिए भारतीय टीम में कई सीनियर खिलाड़ियों की वापसी हुई है, जिससे टीम का संतुलन काफी मजबूत नजर आ रहा है। रोहित शर्मा और पूर्व कप्तान विराट कोहली जैसे अनुभवी दिग्गजों की मौजूदगी से बल्लेबाजी क्रम को अत्यधिक स्थिरता मिलेगी। सलामी जोड़ी के रूप में रोहित शर्मा और कप्तान शुभमन गिल पारी की शुरुआत करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। वहीं, पिछले कुछ समय से मध्यक्रम में विकल्प के तौर पर देखे जा रहे यशस्वी जायसवाल इस श्रृंखला का हिस्सा नहीं हैं, जिसके चलते विराट कोहली का अपने पसंदीदा नंबर-3 स्थान पर खेलना पूरी तरह तय माना जा रहा है। कोहली की वापसी के कारण ईशान किशन को इस मैच में अंतिम एकादश से बाहर बैठना पड़ सकता है।

    भारतीय टीम का मध्यक्रम इस प्रारूप में काफी अनुभवी और विश्वसनीय दिखाई दे रहा है। नंबर-4 पर श्रेयस अय्यर और नंबर-5 पर विकेटकीपर बल्लेबाज केएल राहुल की जगह लगभग पक्की मानी जा रही है। हालांकि, मुख्य कोच गौतम गंभीर के रणनीतिक दृष्टिकोण को देखते हुए केएल राहुल के बल्लेबाजी क्रम में परिस्थितियों के अनुसार लचीलापन देखा जा सकता है। बाएं हाथ के हरफनमौला खिलाड़ी अक्षर पटेल को टीम में एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखा जा रहा है, जिन्हें बल्लेबाजी में गहराई प्रदान करने के लिए नंबर-5 या नंबर-6 पर प्रमोट किया जा सकता है। उनकी मौजूदगी से दाएं हाथ के बल्लेबाजों की अधिकता वाले मध्यक्रम को एक अच्छा संतुलन मिलेगा।

    तेज गेंदबाजी विभाग की बात करें तो अनुभवी तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह की लंबे समय बाद एकदिवसीय टीम में वापसी हो रही है। वह वर्ष 2023 के एकदिवसीय विश्व कप फाइनल के बाद पहली बार इस प्रारूप में देश का प्रतिनिधित्व करेंगे। बुमराह के साथ तेज गेंदबाजी आक्रमण की जिम्मेदारी अर्शदीप सिंह और प्रसिद्ध कृष्णा के कंधों पर होगी। इंग्लैंड की सीम और स्विंग के अनुकूल परिस्थितियों में यह तिकड़ी भारतीय टीम के लिए सबसे बड़ा हथियार साबित हो सकती है। हार्दिक पंड्या और नीतीश कुमार रेड्डी की चोट के कारण अनुपलब्धता ने टीम प्रबंधन के लिए ऑलराउंडर के विकल्प को थोड़ा सीमित कर दिया है, जिसके कारण शिवम दुबे को अंतिम एकादश में शामिल किया जाना तय माना जा रहा है।

    टीम प्रबंधन के सामने सबसे बड़ी दुविधा स्पिन विभाग के चयन को लेकर खड़ी हो गई है। कलाई के स्पिनर कुलदीप यादव मध्य ओवरों में विकेट निकालने की अपनी बेजोड़ क्षमता के लिए जाने जाते हैं, लेकिन उनकी कमजोर बल्लेबाजी टीम की निचली क्रम की गहराई को प्रभावित करती है। यदि भारत कुलदीप और शिवम दुबे दोनों को खिलाता है, तो टीम की बल्लेबाजी केवल नंबर-7 तक ही सीमित रह जाएगी। ऐसे में दूसरे विकल्प के रूप में वॉशिंगटन सुंदर का नाम सामने आ रहा है, जो आक्रामक ऑफ-स्पिन गेंदबाजी के साथ-साथ निचले क्रम में बल्लेबाजी को मजबूती प्रदान कर सकते हैं। कोच गौतम गंभीर के पिछले निर्णयों को देखते हुए ऐसा प्रतीत होता है कि वह बल्लेबाजी की गहराई को प्राथमिकता दे सकते हैं, जिससे सुंदर का पलड़ा थोड़ा भारी नजर आता है।

  • रोहित विराट की वापसी से मजबूत हुई टीम इंडिया कल इंग्लैंड के खिलाफ पहले वनडे में जीत का होगा लक्ष्य

    रोहित विराट की वापसी से मजबूत हुई टीम इंडिया कल इंग्लैंड के खिलाफ पहले वनडे में जीत का होगा लक्ष्य


    नई दिल्ली । भारत और इंग्लैंड के बीच तीन मैचों की बहुप्रतीक्षित वनडे सीरीज का आगाज 14 जुलाई से होने जा रहा है। पहला मुकाबला इंग्लैंड के बर्मिंघम स्थित एजबेस्टन क्रिकेट ग्राउंड में खेला जाएगा। टी20 सीरीज में मिली निराशा के बाद भारतीय टीम अब वनडे प्रारूप में दमदार वापसी करने के इरादे से मैदान पर उतरेगी। भारतीय समयानुसार मुकाबला दोपहर साढ़े तीन बजे शुरू होगा जबकि टॉस तीन बजे होगा। दोनों टीमें जीत के साथ सीरीज की शुरुआत करना चाहेंगी इसलिए पहले मुकाबले में कड़ी टक्कर देखने की पूरी उम्मीद है।

    वनडे क्रिकेट में भारत का रिकॉर्ड इंग्लैंड के खिलाफ काफी शानदार रहा है। दोनों टीमों के बीच अब तक 110 एकदिवसीय मुकाबले खेले जा चुके हैं जिनमें भारत ने 61 मैच अपने नाम किए हैं जबकि इंग्लैंड को 44 मुकाबलों में जीत मिली है। दो मैच टाई रहे और तीन मुकाबलों का कोई परिणाम नहीं निकल सका। आंकड़े बताते हैं कि इस प्रारूप में भारतीय टीम का पलड़ा इंग्लैंड पर भारी रहा है और यही रिकॉर्ड खिलाड़ियों का आत्मविश्वास भी बढ़ाएगा।

    भारतीय टीम के लिए सबसे बड़ी राहत कप्तान रोहित शर्मा और स्टार बल्लेबाज विराट कोहली की वापसी है। दोनों अनुभवी खिलाड़ी टीम के बल्लेबाजी क्रम को मजबूती देंगे। कप्तान शुभमन गिल युवा जोश के साथ टीम का नेतृत्व करेंगे जबकि श्रेयस अय्यर केएल राहुल ईशान किशन और अक्षर पटेल मध्यक्रम को संतुलन प्रदान करेंगे। ऑलराउंडर वाशिंगटन सुंदर और शिवम दुबे भी टीम के लिए अहम भूमिका निभा सकते हैं। गेंदबाजी में जसप्रीत बुमराह की अगुवाई में प्रसिद्ध कृष्णा अर्शदीप सिंह कुलदीप यादव और अन्य गेंदबाज विपक्षी बल्लेबाजों को चुनौती देने के लिए तैयार हैं।

    दूसरी ओर इंग्लैंड की कप्तानी हैरी ब्रूक के हाथों में होगी। टीम में जो रूट जोस बटलर बेन डकेट जोफ्रा आर्चर आदिल राशिद और सैम करन जैसे अनुभवी खिलाड़ी मौजूद हैं जो किसी भी समय मैच का रुख बदलने की क्षमता रखते हैं। घरेलू परिस्थितियों का फायदा उठाने के लिए इंग्लैंड पूरी तैयारी के साथ मैदान पर उतरेगा।

    अगर पिच की बात करें तो एजबेस्टन की सतह शुरुआती ओवरों में तेज गेंदबाजों के लिए मददगार मानी जाती है। नई गेंद से स्विंग और अतिरिक्त उछाल मिलने की संभावना रहती है लेकिन समय बीतने के साथ बल्लेबाजी आसान हो जाती है। ऐसे में टॉस जीतने वाली टीम पहले बल्लेबाजी करना पसंद कर सकती है ताकि बड़ा स्कोर बनाकर विपक्ष पर दबाव बनाया जा सके।

    मौसम भी क्रिकेट प्रेमियों के लिए राहत भरी खबर लेकर आया है। मौसम विभाग के अनुसार मैच के दौरान बारिश की संभावना बेहद कम है और पूरे दिन आसमान साफ रहने की उम्मीद है। इससे मुकाबले के बिना किसी रुकावट के पूरे 50 ओवर खेले जाने की संभावना बढ़ गई है।

    क्रिकेट प्रशंसक इस रोमांचक मुकाबले का सीधा प्रसारण सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क पर देख सकेंगे जबकि मोबाइल और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इसकी लाइव स्ट्रीमिंग जियोस्टार ऐप पर उपलब्ध रहेगी। पहले मुकाबले के साथ शुरू होने वाली यह सीरीज दोनों टीमों के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई साबित हो सकती है और क्रिकेट प्रेमियों को हाई वोल्टेज मुकाबलों का रोमांच देखने को मिलेगा।

  • भारतीय महिला टीम की जीत लगभग तय लॉर्ड्स टेस्ट में इंग्लैंड पर शिकंजा सिर्फ चार विकेट की दरकार

    भारतीय महिला टीम की जीत लगभग तय लॉर्ड्स टेस्ट में इंग्लैंड पर शिकंजा सिर्फ चार विकेट की दरकार


    नई दिल्ली । भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर खेले जा रहे टेस्ट मैच में शानदार प्रदर्शन करते हुए जीत की मजबूत नींव रख दी है। बल्लेबाजों के दमदार प्रदर्शन के बाद भारतीय गेंदबाजों ने भी शानदार खेल दिखाया और इंग्लैंड को बैकफुट पर धकेल दिया। तीसरे दिन का खेल समाप्त होने तक मेजबान टीम छह विकेट खोकर केवल 130 रन ही बना सकी है। अब इंग्लैंड को जीत के लिए अभी भी 327 रन चाहिए जबकि उसके सिर्फ चार विकेट शेष हैं। ऐसे में भारतीय टीम ऐतिहासिक जीत से महज चार विकेट दूर खड़ी है।

    मैच की शुरुआत भारत के लिए आसान नहीं रही थी। टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम ने शुरुआती 37 रन तक दो विकेट गंवा दिए थे। इसके बाद स्मृति मंधाना ने शानदार जिम्मेदारी निभाते हुए जेमिमा रोड्रिगेज और कप्तान हरमनप्रीत कौर के साथ महत्वपूर्ण साझेदारियां कीं। मंधाना ने आकर्षक बल्लेबाजी करते हुए 83 रन बनाए जबकि हरमनप्रीत कौर ने 58 और दीप्ति शर्मा ने 57 रन का अहम योगदान दिया। इन पारियों की बदौलत भारत पहली पारी में 285 रन तक पहुंचने में सफल रहा।

    इंग्लैंड की पहली पारी भारतीय गेंदबाजों के सामने ज्यादा देर टिक नहीं सकी। शुरुआती झटकों के बाद कप्तान नैट साइवर ब्रंट और एमी जोन्स ने कुछ संघर्ष जरूर किया लेकिन भारतीय गेंदबाजों ने लगातार दबाव बनाए रखा। युवा तेज गेंदबाज क्रांति गौड़ ने शानदार गेंदबाजी करते हुए पांच विकेट अपने नाम किए और इंग्लैंड की पूरी टीम केवल 170 रन पर सिमट गई। भारत को पहली पारी के आधार पर 115 रन की महत्वपूर्ण बढ़त हासिल हुई जिसने मैच की दिशा बदल दी।

    दूसरी पारी में भारतीय बल्लेबाजों ने इंग्लैंड को वापसी का कोई मौका नहीं दिया। स्मृति मंधाना ने एक बार फिर शानदार बल्लेबाजी करते हुए 70 रन बनाए जबकि शेफाली वर्मा के साथ पहले विकेट के लिए 88 रन की मजबूत साझेदारी की। इसके बाद यास्तिका भाटिया ने करियर की सबसे यादगार पारी खेलते हुए 113 रन बनाए और लॉर्ड्स के मैदान पर टेस्ट शतक लगाने वाली पहली महिला क्रिकेटर बन गईं। ऋचा घोष ने भी तेज अंदाज में नाबाद 50 रन बनाकर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। भारत ने सात विकेट पर 341 रन बनाकर पारी घोषित की और इंग्लैंड के सामने जीत के लिए 457 रन का मुश्किल लक्ष्य रखा।

    इतने बड़े लक्ष्य का पीछा करने उतरी इंग्लैंड की शुरुआत बेहद खराब रही। भारतीय गेंदबाजों ने शुरुआत से ही सटीक लाइन और लेंथ के साथ दबाव बनाया। इंग्लैंड ने केवल दो रन के स्कोर पर पहला विकेट गंवा दिया और देखते ही देखते 59 रन तक पांच बल्लेबाज पवेलियन लौट चुके थे। हालांकि मैडी विलियर्स और एमी जोन्स ने कुछ देर संघर्ष किया लेकिन भारतीय गेंदबाजों ने मैच पर अपनी पकड़ बनाए रखी। तीसरे दिन के अंत तक सायली सातघारे क्रांति गौड़ और स्नेह राणा ने दो दो विकेट लेकर इंग्लैंड की उम्मीदों को लगभग खत्म कर दिया।

    यह मुकाबला इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि लॉर्ड्स के प्रतिष्ठित मैदान पर पहली बार महिला टेस्ट मैच खेला जा रहा है। भारतीय टीम अब इस ऐतिहासिक अवसर को यादगार जीत में बदलने से सिर्फ चार विकेट दूर है। यदि चौथे दिन भारतीय गेंदबाज अपनी लय बरकरार रखते हैं तो टीम इंडिया लॉर्ड्स में सुनहरे इतिहास का नया अध्याय लिख देगी।

  • वनडे में इंग्लैंड पर भारत का दबदबा फिर दोहराने की तैयारी हेड टू हेड रिकॉर्ड दे रहे जीत का भरोसा

    वनडे में इंग्लैंड पर भारत का दबदबा फिर दोहराने की तैयारी हेड टू हेड रिकॉर्ड दे रहे जीत का भरोसा


    नई दिल्ली । भारत और इंग्लैंड के बीच तीन मैचों की बहुप्रतीक्षित वनडे सीरीज का आगाज 14 जुलाई से होने जा रहा है। पहला मुकाबला बर्मिंघम के ऐतिहासिक एजबेस्टन क्रिकेट स्टेडियम में खेला जाएगा जहां भारतीय टीम टी20 सीरीज में मिली निराशाजनक हार का हिसाब बराबर करने के इरादे से मैदान पर उतरेगी। हालांकि हालिया टी20 प्रदर्शन भारत के पक्ष में नहीं रहा लेकिन वनडे क्रिकेट का इतिहास टीम इंडिया के आत्मविश्वास को मजबूत करता है। दोनों टीमों के बीच अब तक खेले गए मुकाबलों के आंकड़े साफ बताते हैं कि इस प्रारूप में भारत का पलड़ा इंग्लैंड पर भारी रहा है।

    भारत और इंग्लैंड के बीच अब तक 110 वनडे मुकाबले खेले जा चुके हैं। इनमें से 61 मैच भारत ने अपने नाम किए हैं जबकि इंग्लैंड केवल 44 मुकाबलों में जीत दर्ज कर सका है। दो मैच टाई रहे और तीन मुकाबलों का कोई परिणाम नहीं निकल सका। यह रिकॉर्ड दिखाता है कि वनडे क्रिकेट में टीम इंडिया ने लगातार इंग्लैंड पर अपना दबदबा बनाए रखा है और यही इतिहास एक बार फिर भारतीय खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाएगा।

    हालांकि इंग्लैंड की धरती पर भारत का रिकॉर्ड अपेक्षाकृत संतुलित रहा है। इंग्लैंड में दोनों टीमों के बीच खेले गए 44 वनडे मुकाबलों में भारत ने 18 मैच जीते हैं जबकि इंग्लैंड ने 23 मुकाबलों में बाजी मारी है। एक मैच टाई रहा और दो मुकाबले बेनतीजा रहे। घरेलू परिस्थितियों का फायदा इंग्लैंड को जरूर मिलता रहा है लेकिन मौजूदा भारतीय टीम के पास अनुभव और संतुलन दोनों मौजूद हैं।

    टी20 सीरीज में भारतीय बल्लेबाजी उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकी थी। शीर्ष क्रम से लेकर मध्यक्रम तक कोई भी बल्लेबाज लगातार प्रभाव नहीं छोड़ पाया। ऐसे में वनडे सीरीज में सभी की नजर रोहित शर्मा और विराट कोहली की वापसी पर होगी। इन दोनों दिग्गजों की मौजूदगी से भारतीय बल्लेबाजी को मजबूती मिलेगी और टीम का अनुभव भी बढ़ेगा। कप्तान शुभमन गिल पर एक बार फिर पारी की मजबूत शुरुआत कराने की जिम्मेदारी होगी जबकि मध्यक्रम में श्रेयस अय्यर केएल राहुल ईशान किशन और अक्षर पटेल अहम भूमिका निभाएंगे।

    ऑलराउंडर विभाग में वॉशिंगटन सुंदर अक्षर पटेल और नीतीश कुमार रेड्डी टीम को संतुलन देंगे। तीनों खिलाड़ी बल्ले और गेंद दोनों से मैच का रुख बदलने की क्षमता रखते हैं। दूसरी ओर गेंदबाजी की अगुवाई तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह करेंगे जिनका अनुभव और सटीक लाइन लेंथ इंग्लैंड के बल्लेबाजों के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकती है। उनके साथ प्रसिद्ध कृष्णा अर्शदीप सिंह प्रिंस यादव और गुरनूर बरार तेज आक्रमण को मजबूती देंगे। चोट के कारण हर्षित इस सीरीज का हिस्सा नहीं हैं।

    स्पिन विभाग में कुलदीप यादव भारतीय टीम के सबसे बड़े हथियार होंगे। उनकी विविधता इंग्लैंड के बल्लेबाजों को परेशान कर सकती है। रवि बिश्नोई को भी टीम में जगह मिली है जबकि चोट के चलते वरुण चक्रवर्ती इस सीरीज में नहीं खेल पाएंगे।

    टी20 की निराशा को पीछे छोड़कर टीम इंडिया अब वनडे में नई शुरुआत करना चाहेगी। शानदार हेड टू हेड रिकॉर्ड मजबूत बल्लेबाजी और अनुभवी गेंदबाजी आक्रमण के दम पर भारतीय टीम के पास इंग्लैंड को उसी की धरती पर हराकर सीरीज जीतने का सुनहरा मौका होगा।

  • इंग्लैंड के खिलाफ विराट के बल्ले से बन सकते हैं इतिहास के नए रिकॉर्ड 15 हजार वनडे रन से सिर्फ 203 रन दूर

    इंग्लैंड के खिलाफ विराट के बल्ले से बन सकते हैं इतिहास के नए रिकॉर्ड 15 हजार वनडे रन से सिर्फ 203 रन दूर


    नई दिल्ली ।  भारत और इंग्लैंड के बीच मंगलवार से शुरू होने वाली तीन मैचों की वनडे सीरीज क्रिकेट प्रेमियों के लिए बेहद खास होने जा रही है। इस सीरीज के साथ टीम इंडिया के स्टार बल्लेबाज विराट कोहली करीब छह महीने बाद एक बार फिर नीली जर्सी में मैदान पर उतरेंगे। उनकी वापसी सिर्फ भारतीय बल्लेबाजी को मजबूती देने तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि इस सीरीज में उनके बल्ले से कई ऐतिहासिक रिकॉर्ड भी टूट सकते हैं। क्रिकेट जगत की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या विराट इंग्लैंड के खिलाफ अपने शानदार रिकॉर्ड को बरकरार रखते हुए इतिहास के नए अध्याय लिख पाएंगे।

    विराट कोहली अब तक भारत के लिए 311 वनडे मुकाबले खेल चुके हैं। इस दौरान उन्होंने 299 पारियों में 58.71 की शानदार औसत से 14797 रन बनाए हैं। अब वह वनडे क्रिकेट में 15000 रन पूरे करने से केवल 203 रन दूर हैं। यदि वह इंग्लैंड के खिलाफ तीन मैचों की इस सीरीज में यह आंकड़ा हासिल कर लेते हैं तो वनडे क्रिकेट में 15000 रन बनाने वाले दुनिया के सिर्फ दूसरे बल्लेबाज बन जाएंगे। इस सूची में फिलहाल केवल महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर का नाम शामिल है।

    इस उपलब्धि से भी बड़ी बात यह है कि विराट के पास सबसे तेज 15000 वनडे रन पूरे करने का विश्व रिकॉर्ड अपने नाम करने का सुनहरा मौका है। सचिन तेंदुलकर ने इस मुकाम तक पहुंचने के लिए 359 पारियां खेली थीं जबकि विराट फिलहाल केवल 299 पारियां खेल चुके हैं। यदि वह इस सीरीज में 203 रन बना लेते हैं तो वह सचिन का रिकॉर्ड तोड़ते हुए सबसे कम पारियों में 15000 रन बनाने वाले बल्लेबाज बन जाएंगे। यह उपलब्धि उनके शानदार करियर में एक और ऐतिहासिक अध्याय जोड़ देगी।

    वनडे क्रिकेट में विराट का रिकॉर्ड पहले से ही बेहद शानदार रहा है। उन्होंने अब तक 54 शतक और 77 अर्धशतक लगाए हैं तथा दुनिया के सबसे सफल एकदिवसीय बल्लेबाजों में गिने जाते हैं। रन बनाने की निरंतरता और बड़े मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन उनकी सबसे बड़ी पहचान रही है।

    इंग्लैंड के खिलाफ भी विराट का प्रदर्शन हमेशा प्रभावशाली रहा है। उन्होंने इंग्लैंड के विरुद्ध 38 वनडे पारियों में लगभग 41 की औसत से 1397 रन बनाए हैं। इस दौरान उनके बल्ले से तीन शतक और 10 अर्धशतक निकले हैं। खास बात यह है कि इंग्लैंड की सरजमीं पर भी उनका रिकॉर्ड बेहद दमदार रहा है। वहां उन्होंने 33 पारियों में 51.88 की औसत से 1349 रन बनाए हैं जिनमें एक शतक और 12 अर्धशतक शामिल हैं। यह आंकड़े बताते हैं कि इंग्लिश परिस्थितियां विराट के खेल के अनुकूल रही हैं और उन्होंने वहां हमेशा जिम्मेदारी के साथ बल्लेबाजी की है।

    भारतीय टीम भी चाहेगी कि विराट अपनी वापसी को यादगार बनाएं और बल्लेबाजी क्रम की अगुवाई करते हुए टीम को सीरीज में मजबूत शुरुआत दिलाएं। युवा खिलाड़ियों से सजी टीम के लिए विराट का अनुभव और बड़े मैचों का दबाव झेलने की क्षमता बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

    भारत और इंग्लैंड के बीच पहला वनडे 14 जुलाई को खेला जाएगा जबकि दूसरा मुकाबला 16 जुलाई और तीसरा एवं अंतिम वनडे 19 जुलाई को होगा। इन तीन मुकाबलों में सिर्फ सीरीज की जीत ही दांव पर नहीं होगी बल्कि करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों की नजर विराट कोहली के बल्ले से बनने वाले उन रिकॉर्ड्स पर भी रहेगी जो उन्हें वनडे क्रिकेट के इतिहास में एक नई ऊंचाई पर पहुंचा सकते हैं।

  • सेमीफाइनल से पहले जो कोल की भविष्यवाणी इंग्लैंड रोकेगा मेसी का जादू और बनाएगा फाइनल का रास्ता

    सेमीफाइनल से पहले जो कोल की भविष्यवाणी इंग्लैंड रोकेगा मेसी का जादू और बनाएगा फाइनल का रास्ता


    नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप 2026 के सेमीफाइनल मुकाबले से पहले इंग्लैंड और अर्जेंटीना के बीच होने वाली टक्कर को लेकर उत्साह चरम पर है। इसी बीच इंग्लैंड के पूर्व स्टार फुटबॉलर जो कोल ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि इंग्लैंड की टीम अर्जेंटीना के कप्तान और दुनिया के महानतम खिलाड़ियों में शामिल लियोनेल मेसी को रोकने में सफल रहेगी। अटलांटा स्टेडियम में होने वाले इस हाईवोल्टेज मुकाबले से पहले उनके बयान ने फुटबॉल जगत में नई बहस छेड़ दी है।

    करीब 21 साल बाद इंग्लैंड और अर्जेंटीना की टीमें फिर विश्व कप के मंच पर आमने सामने होंगी। दोनों देशों के बीच फुटबॉल प्रतिद्वंद्विता दशकों पुरानी है और हर मुकाबला इतिहास और भावनाओं से जुड़ा रहा है। विश्व कप में अब तक दोनों टीमें पांच बार भिड़ चुकी हैं। 1962 1966 1986 1998 और 2002 के मुकाबले फुटबॉल इतिहास के सबसे चर्चित मैचों में गिने जाते हैं। पिछली बार जापान में खेले गए विश्व कप में इंग्लैंड ने डेविड बेकहम की पेनल्टी की बदौलत अर्जेंटीना को हराकर यादगार जीत दर्ज की थी।

    इस बार भी मुकाबला बेहद रोमांचक माना जा रहा है क्योंकि अर्जेंटीना मौजूदा विश्व चैंपियन है। टीम ने 2022 में कतर में विश्व कप जीतकर 36 साल बाद खिताब अपने नाम किया था और अब लगातार दूसरी बार चैंपियन बनने की दौड़ में है। दूसरी ओर इंग्लैंड भी शानदार लय में नजर आ रहा है और लंबे इंतजार के बाद विश्व कप जीतने का सपना पूरा करना चाहता है।

    जो कोल ने एक फुटबॉल पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान कहा कि इंग्लैंड की सबसे बड़ी चुनौती लियोनेल मेसी होंगे लेकिन उन्हें पूरा भरोसा है कि टीम उनके प्रभाव को सीमित करने में सफल रहेगी। उनके अनुसार इंग्लैंड के खिलाड़ी दबाव वाले मुकाबलों में खेलने के आदी हैं और टीम की मजबूत आक्रामक रणनीति अर्जेंटीना के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मेसी को रोकना जरूरी होगा और इंग्लैंड यह काम कर दिखाएगा।

    अर्जेंटीना ने इस विश्व कप में अब तक शानदार प्रदर्शन किया है लेकिन उसे हर चरण में कड़ी चुनौती भी मिली है। क्वार्टर फाइनल में स्विट्जरलैंड के खिलाफ मुकाबला निर्धारित समय तक बराबरी पर रहा जिसके बाद अतिरिक्त समय में जूलियन अल्वारेज और लौटारो मार्टिनेज के गोलों ने टीम को जीत दिलाई। इससे पहले राउंड ऑफ 16 में मिस्र के खिलाफ अर्जेंटीना ने दो गोल से पिछड़ने के बावजूद आखिरी मिनटों में शानदार वापसी करते हुए मुकाबला अपने नाम किया था। वहीं पहली बार विश्व कप खेल रही केप वर्डे ने भी अर्जेंटीना को अतिरिक्त समय तक संघर्ष करने पर मजबूर कर दिया था।

    हालांकि इन कठिन मुकाबलों के बावजूद अर्जेंटीना ने अब तक अपने सभी मैच जीते हैं और फ्रांस के साथ टूर्नामेंट की अपराजित टीम बनी हुई है। दूसरी ओर इंग्लैंड भी मजबूत संतुलित टीम के रूप में सामने आया है और उसके खिलाड़ी बड़े मुकाबलों में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए जाने जाते हैं।

    अब पूरी दुनिया की नजर इस सेमीफाइनल पर टिकी है जहां एक ओर मेसी अपने करियर में एक और विश्व कप खिताब की ओर कदम बढ़ाना चाहेंगे तो दूसरी ओर इंग्लैंड उन्हें रोककर फाइनल का टिकट हासिल करने की कोशिश करेगा। फुटबॉल प्रेमियों को उम्मीद है कि यह मुकाबला विश्व कप इतिहास के सबसे यादगार सेमीफाइनल में शामिल हो सकता है।

  • एक साल की चोट से वापसी और लॉर्ड्स में ऐतिहासिक शतक यास्तिका बोलीं यह मेरे जीवन का सबसे गर्व भरा पल

    एक साल की चोट से वापसी और लॉर्ड्स में ऐतिहासिक शतक यास्तिका बोलीं यह मेरे जीवन का सबसे गर्व भरा पल


    नई दिल्ली । भारतीय महिला क्रिकेट टीम की विकेटकीपर बल्लेबाज यास्तिका भाटिया ने लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर ऐसा का रनामा कर दिखाया जिसे भारतीय क्रिकेट लंबे समय तक याद रखेगा। इंग्लैंड के खिलाफ खेले जा रहे एकमात्र महिला टेस्ट मैच में यास्तिका ने शानदार 113 रन की पारी खेलते हुए न केवल भारत को मजबूत स्थिति में पहुंचाया बल्कि लॉर्ड्स के प्रतिष्ठित ऑनर्स बोर्ड पर अपना नाम दर्ज कराने वाली पहली महिला क्रिकेटर भी बन गईं। यह उपलब्धि इसलिए भी खास रही क्योंकि वह करीब एक साल तक चोट के कारण क्रिकेट से दूर रहने के बाद मैदान पर लौटी थीं।

    यास्तिका की यह पारी केवल एक शतक नहीं बल्कि संघर्ष धैर्य और आत्मविश्वास की मिसाल बनकर सामने आई। लंबे समय तक चोट से जूझने के कारण उन्हें कई बड़े टूर्नामेंट से बाहर रहना पड़ा था। घरेलू वनडे विश्व कप और महिला प्रीमियर लीग जैसे महत्वपूर्ण प्रतियोगिताओं में हिस्सा नहीं ले पाने का दर्द उनके लिए बेहद कठिन था। उन्होंने स्वीकार किया कि उस दौर में कई बार उन्हें लगा कि इतनी बड़ी उपलब्धि शायद अब कभी हासिल नहीं हो पाएगी।

    उन्होंने बताया कि चोट के दौरान पुनर्वास का समय मानसिक और शारीरिक दोनों ही रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण था। लेकिन परिवार टीम प्रबंधन और सहयोगी खिलाड़ियों ने लगातार उनका हौसला बढ़ाया। यही भरोसा उन्हें दोबारा मैदान तक लेकर आया। उन्होंने कहा कि यदि छह महीने पहले कोई उनसे कहता कि उनका नाम लॉर्ड्स के ऑनर्स बोर्ड पर दर्ज होगा तो शायद वह खुद भी इस बात पर विश्वास नहीं करतीं। आज यह सपना सच होने जैसा महसूस हो रहा है।

    यास्तिका ने अपनी ऐतिहासिक पारी के बाद भावुक होते हुए कहा कि यह केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने बताया कि शतक पूरा होने के बाद उन्होंने जश्न मनाने की अलग योजना बनाई थी लेकिन उस पल भावनाएं इतनी प्रबल थीं कि उन्होंने सिर्फ भारतीय तिरंगे को चूमकर अपनी खुशी जाहिर की। उनके लिए यह सबसे बड़ा सम्मान था कि वह भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए इतिहास का हिस्सा बनीं।

    उन्होंने कहा कि जब उन्होंने हेलमेट उतारा तो उनकी आंखों के सामने पिछले एक साल का पूरा संघर्ष घूम गया। परिवार की यादें कठिन दौर की चुनौतियां और मैदान पर वापसी की मेहनत सब कुछ एक साथ याद आने लगा। वह पल इतना भावुक था कि खुद को संभालना भी मुश्किल हो गया। उनके अनुसार यह उनके क्रिकेट जीवन का सबसे खास क्षण है।

    यास्तिका ने स्पष्ट किया कि उनका सपना केवल इस शतक तक सीमित नहीं है। वह भारत के लिए और भी बड़ी उपलब्धियां हासिल करना चाहती हैं। उनका लक्ष्य टीम को विश्व कप जिताना है और देश के लिए लगातार यादगार प्रदर्शन करना है। उन्होंने कहा कि भारतीय जर्सी पहनकर खेलने से बड़ा सम्मान कोई नहीं हो सकता और वह आने वाले वर्षों में टीम की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाना चाहती हैं।

    भारतीय महिला क्रिकेट के लिए भी यह उपलब्धि बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। लॉर्ड्स जैसे ऐतिहासिक मैदान पर टेस्ट शतक लगाकर यास्तिका ने न केवल नया इतिहास रचा बल्कि आने वाली पीढ़ी की महिला क्रिकेटरों के लिए भी नई प्रेरणा तैयार की है। कठिन परिस्थितियों से निकलकर शीर्ष स्तर पर सफलता हासिल करने की उनकी कहानी यह साबित करती है कि मेहनत धैर्य और विश्वास के दम पर हर सपना पूरा किया जा सकता है।

  • आईपीएल में खत्म हुआ एक स्वर्णिम अध्याय 18 साल बाद चेन्नई सुपर किंग्स से अलग हुए स्टीफन फ्लेमिंग

    आईपीएल में खत्म हुआ एक स्वर्णिम अध्याय 18 साल बाद चेन्नई सुपर किंग्स से अलग हुए स्टीफन फ्लेमिंग


    नई दिल्ली । इंडियन प्रीमियर लीग के इतिहास का एक बेहद सफल और यादगार अध्याय अब समाप्त हो गया है। पांच बार की चैंपियन चेन्नई सुपर किंग्स और उसके लंबे समय तक हेड कोच रहे स्टीफन फ्लेमिंग ने 18 वर्षों की ऐतिहासिक साझेदारी को आपसी सहमति से समाप्त करने का फैसला लिया है। इस घोषणा के साथ ही आईपीएल के सबसे लंबे और सबसे सफल कोचिंग कार्यकालों में से एक का अंत हो गया। फ्रेंचाइजी ने आधिकारिक रूप से इसकी जानकारी देते हुए फ्लेमिंग के योगदान को हमेशा याद रखने की बात कही।

    स्टीफन फ्लेमिंग का चेन्नई सुपर किंग्स से रिश्ता आईपीएल के पहले सीजन वर्ष 2008 में शुरू हुआ था। उस समय वह खिलाड़ी के रूप में टीम से जुड़े थे। अगले ही वर्ष उन्होंने हेड कोच की जिम्मेदारी संभाली और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। लगभग दो दशक तक उन्होंने टीम को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया और चेन्नई सुपर किंग्स को आईपीएल की सबसे सफल और सबसे सम्मानित फ्रेंचाइजियों में शामिल कर दिया।

    फ्लेमिंग के नेतृत्व में चेन्नई सुपर किंग्स ने पांच बार आईपीएल ट्रॉफी अपने नाम की। इसके अलावा टीम ने दो बार चैंपियंस लीग टी20 का खिताब भी जीता। उनकी कोचिंग में सीएसके ने रिकॉर्ड 12 बार प्लेऑफ में जगह बनाई और 10 बार फाइनल तक का सफर तय किया। यह निरंतर सफलता उनकी रणनीति मजबूत नेतृत्व और खिलाड़ियों से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कराने की क्षमता का सबसे बड़ा प्रमाण मानी जाती है।

    चेन्नई सुपर किंग्स की मालकिन रूपा गुरुनाथ ने फ्लेमिंग की विदाई पर कहा कि उन्होंने केवल टीम को जीत दिलाने का काम नहीं किया बल्कि फ्रेंचाइजी की पहचान और संस्कृति को भी मजबूत बनाया। उन्होंने कहा कि फ्लेमिंग ने लगभग दो दशकों तक समर्पण जुनून और नेतृत्व के साथ टीम को नई दिशा दी। मैदान पर उनका सफर भले ही समाप्त हो रहा हो लेकिन वह हमेशा सुपर किंग्स परिवार और उसकी विरासत का अभिन्न हिस्सा बने रहेंगे।

    फ्रेंचाइजी के मैनेजिंग डायरेक्टर काशी विश्वनाथन ने भी फ्लेमिंग के योगदान को ऐतिहासिक बताया। उनके अनुसार फ्लेमिंग ने केवल टीम की रणनीति नहीं बनाई बल्कि ऐसा माहौल तैयार किया जिसमें अनुशासन निरंतरता विनम्रता और टीम भावना सबसे बड़ी पहचान बन गई। खिलाड़ियों को समझने और हर खिलाड़ी की क्षमता को निखारने की उनकी कला ने चेन्नई सुपर किंग्स को लगातार सफल बनाया। उनका प्रभाव केवल मैदान तक सीमित नहीं रहा बल्कि टीम की कार्यसंस्कृति का स्थायी हिस्सा बन गया।

    विदाई के अवसर पर स्टीफन फ्लेमिंग भी भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि खेल की दुनिया में 18 वर्ष बहुत लंबा समय होता है और वह केवल आभार की भावना के साथ इस जिम्मेदारी से विदा ले रहे हैं। उनके अनुसार चेन्नई सुपर किंग्स के साथ बिताया गया समय उनके पूरे कोचिंग करियर का सबसे यादगार अनुभव रहा। उन्होंने कहा कि इस दौरान टीम ने शानदार जीत हासिल की कठिन दौर का सामना किया और ऐसी अनगिनत यादें बनाई जो जीवनभर उनके साथ रहेंगी।

    फ्लेमिंग ने यह भी कहा कि चेन्नई सुपर किंग्स हमेशा उनके दिल के बेहद करीब रहेगी और भले ही अब वह टीम के हेड कोच नहीं होंगे लेकिन भविष्य में भी टीम की सफलता के लिए हमेशा शुभकामनाएं देते रहेंगे। उन्होंने फ्रेंचाइजी प्रबंधन खिलाड़ियों सहयोगी स्टाफ और करोड़ों प्रशंसकों का धन्यवाद करते हुए कहा कि इस सफर ने उन्हें एक बेहतर कोच और बेहतर इंसान बनाया।

    स्टीफन फ्लेमिंग और चेन्नई सुपर किंग्स की यह साझेदारी आईपीएल इतिहास में हमेशा एक आदर्श उदाहरण के रूप में याद की जाएगी। लगातार सफलता स्थिर नेतृत्व और मजबूत टीम संस्कृति की जो मिसाल इस जोड़ी ने पेश की है वह आने वाले वर्षों तक फ्रेंचाइजी क्रिकेट के लिए प्रेरणा बनी रहेगी। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि चेन्नई सुपर किंग्स फ्लेमिंग के बाद टीम की कमान किसे सौंपती है और नया दौर किस दिशा में आगे बढ़ता है।